वर्ल्ड अपडेट्स:कनाडा में फर्जी लाइसेंस पर 17 साल तक प्लेन उड़ाता रहा पायलट; हजारों यात्रियों की जान खतरे में डालने का आरोप

कनाडा की एयरलाइन एयर कनाडा के पूर्व पायलट ज्योफ्री वॉल पर फर्जी लाइसेंस के सहारे 17 साल तक कमर्शियल फ्लाइट उड़ाने का आरोप लगा है। डिप्टी चीफ निक मिलिनोविच ने कहा कि आरोपी ने हजारों यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डाला। पुलिस के मुताबिक वॉल पर 5 हजार डॉलर से ज्यादा की धोखाधड़ी, पब्लिक मिसचीफ, फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने और नकली प्रमाण चिह्न रखने समेत कई आरोप लगाए गए हैं। 59 वर्षीय वॉल को 1 जून को गिरफ्तार किया गया। ट्रांसपोर्ट कनाडा की जांच में दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने के बाद यह मामला सामने आया। आरोप है कि वॉल ने 1998 में एविएशन करियर शुरू किया था और 2009 में फर्जी क्रेडेंशियल के आधार पर पायलट-इन-कमांड यानी कप्तान का पद हासिल कर लिया। इसके बाद वह वर्षों तक हजारों यात्रियों को लेकर उड़ान भरता रहा। मामला तब खुला, जब पिछले साल पियर्सन एयरपोर्ट पर ट्रांसपोर्ट कनाडा की नियमित ऑपरेशनल जांच के दौरान उसके दस्तावेजों में कमियां मिलीं। इसके बाद ‘प्रोजेक्ट इकारस’ नाम से विस्तृत जांच शुरू की गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए और इतने लंबे समय तक सिस्टम की नजरों से कैसे बचा रहा। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की; 11 बच्चों समेत 13 लोगों की मौत, 14 महिलाएं घायल पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार देर रात अफगानिस्तान के कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में एयर स्ट्राइक की। तालिबान सरकार के मुताबिक हमलों में 11 बच्चों समेत 13 नागरिकों की मौत हुई, जबकि 14 महिलाएं घायल हैं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन करते हुए रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। हमले पूरी तरह नागरिक क्षेत्रों पर किए गए। मुजाहिद ने बताया कि मृतकों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं। उन्होंने हमले के बाद की तस्वीरें भी जारी कीं। तालिबान सरकार के अनुसार पिछले एक साल में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। मार्च में काबुल स्थित एक पुनर्वास केंद्र पर हुए हमले में 269 लोगों की मौत का दावा किया गया था। इस्लामाबाद लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तालिबान सरकार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे संगठनों को समर्थन देती है। हालांकि तालिबान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
दावा-इंग्लैंड के कप्तान स्टोक्स संन्यास ले सकते हैं:लॉर्ड्स टेस्ट की जीत के बाद नाइटक्लब विवाद में नाम आया; दूसरे टेस्ट से बाहर

इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कप्तान बेन स्टोक्स टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास (रिटायरमेंट) का ऐलान भी कर सकते हैं। ब्रिटिश मीडिया आउटलेट टॉकस्पोर्ट की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। यह डेवलपमेंट लॉर्ड्स टेस्ट में न्यूजीलैंड पर इंग्लैंड की 115 रनों की जीत के तुरंत बाद सोमवार तड़के हुए एक नाइटक्लब विवाद के बाद सामने आया है। इस विवाद में कप्तान बेन स्टोक्स के साथ टीम के तेज गेंदबाज गस एटकिंसन भी शामिल थे। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने टीम प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप में दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। बोर्ड की कार्रवाई का इंतजार नहीं करेंगे स्टोक्स, खुद ले सकते हैं फैसला क्रिकेट वेबसाइट ‘द क्रिकेटर’ के सीनियर कॉरेस्पोंडेंट जॉर्ज डोबेल ने टॉकस्पोर्ट से बातचीत में बताया कि स्टोक्स अनुशासन समिति के फैसले का इंतजार करने के बजाय खुद ही पीछे हटने का मन बना रहे हैं। डोबेल ने कहा, ‘मुझे जो भी जानकारियां मिल रही हैं, उससे डर है कि स्टोक्स ECB की कार्रवाई से पहले ही खुद कदम उठाएंगे। बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि मैं सुन रहा हूं कि वे कप्तानी से इस्तीफा दे सकते हैं और संभवतः क्रिकेट से संन्यास भी ले सकते हैं।’ न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट से बाहर रहेंगे दोनों खिलाड़ी विवाद के बाद ECB ने एक बयान जारी कर कहा,’बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन सोमवार तड़के एक नाइटक्लब में मौजूद थे, जहां यह घटना हुई। हम मामले से जुड़ी और जानकारी जुटा रहे हैं। दूसरे टेस्ट के लिए टीम का ऐलान जल्द ही किया जाएगा।’ 17 जून से द ओवल में न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट के लिए इंग्लैंड की टीम की घोषणा में देरी हो रही है। बोर्ड फिलहाल बेन स्टोक्स के फैसले का इंतजार कर रहा है। हालांकि, यह साफ हो चुका है कि स्टोक्स और एटकिंसन दोनों ही न्यूजीलैंड के खिलाफ इस टेस्ट सीरीज के बचे हुए मैचों का हिस्सा नहीं होंगे। लॉर्ड्स टेस्ट की जीत के कुछ ही घंटों बाद हुआ विवाद यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रविवार को ही इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को पहले टेस्ट में 115 रनों से हराया था। मैच के आखिरी दिन गस एटकिंसन ने 30 रन देकर 5 विकेट झटके थे और जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी, वहीं स्टोक्स को भी एक विकेट मिला था। इस शानदार जीत का जश्न मनाने के लिए ही खिलाड़ी रात में बाहर गए थे, जहां रग्बी क्लब के खिलाड़ियों के साथ उनकी बहस हो गई। ‘मिडनाइट कर्फ्यू’ के नियमों का उल्लंघन भारी पड़ा इंग्लैंड के खिलाड़ियों का मैदान से बाहर का व्यवहार पिछले कुछ समय से ECB के लिए सिरदर्द बना हुआ है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज दौरे के दौरान भी खिलाड़ियों के देर रात तक पार्टी करने और शराब से जुड़े अनुशासनात्मक मामलों पर भारी आलोचना हुई थी। इसके बाद ECB ने टीम के लिए ‘मिडनाइट कर्फ्यू’ (आधी रात के बाद बाहर न रहने का नियम) दोबारा लागू किया था। स्टोक्स और एटकिंसन की ओर से इस कड़े प्रोटोकॉल को तोड़ना बोर्ड को नागवार गुजरा है।
दावा-इंग्लैंड के कप्तान स्टोक्स संन्यास ले सकते हैं:लॉर्ड्स टेस्ट की जीत के बाद नाइटक्लब विवाद में नाम आया; दूसरे टेस्ट से बाहर

इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कप्तान बेन स्टोक्स टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास (रिटायरमेंट) का ऐलान भी कर सकते हैं। ब्रिटिश मीडिया आउटलेट टॉकस्पोर्ट की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। यह डेवलपमेंट लॉर्ड्स टेस्ट में न्यूजीलैंड पर इंग्लैंड की 115 रनों की जीत के तुरंत बाद सोमवार तड़के हुए एक नाइटक्लब विवाद के बाद सामने आया है। इस विवाद में कप्तान बेन स्टोक्स के साथ टीम के तेज गेंदबाज गस एटकिंसन भी शामिल थे। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने टीम प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप में दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। बोर्ड की कार्रवाई का इंतजार नहीं करेंगे स्टोक्स, खुद ले सकते हैं फैसला क्रिकेट वेबसाइट ‘द क्रिकेटर’ के सीनियर कॉरेस्पोंडेंट जॉर्ज डोबेल ने टॉकस्पोर्ट से बातचीत में बताया कि स्टोक्स अनुशासन समिति के फैसले का इंतजार करने के बजाय खुद ही पीछे हटने का मन बना रहे हैं। डोबेल ने कहा, ‘मुझे जो भी जानकारियां मिल रही हैं, उससे डर है कि स्टोक्स ECB की कार्रवाई से पहले ही खुद कदम उठाएंगे। बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि मैं सुन रहा हूं कि वे कप्तानी से इस्तीफा दे सकते हैं और संभवतः क्रिकेट से संन्यास भी ले सकते हैं।’ न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट से बाहर रहेंगे दोनों खिलाड़ी विवाद के बाद ECB ने एक बयान जारी कर कहा,’बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन सोमवार तड़के एक नाइटक्लब में मौजूद थे, जहां यह घटना हुई। हम मामले से जुड़ी और जानकारी जुटा रहे हैं। दूसरे टेस्ट के लिए टीम का ऐलान जल्द ही किया जाएगा।’ 17 जून से द ओवल में न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट के लिए इंग्लैंड की टीम की घोषणा में देरी हो रही है। बोर्ड फिलहाल बेन स्टोक्स के फैसले का इंतजार कर रहा है। हालांकि, यह साफ हो चुका है कि स्टोक्स और एटकिंसन दोनों ही न्यूजीलैंड के खिलाफ इस टेस्ट सीरीज के बचे हुए मैचों का हिस्सा नहीं होंगे। लॉर्ड्स टेस्ट की जीत के कुछ ही घंटों बाद हुआ विवाद यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रविवार को ही इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को पहले टेस्ट में 115 रनों से हराया था। मैच के आखिरी दिन गस एटकिंसन ने 30 रन देकर 5 विकेट झटके थे और जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी, वहीं स्टोक्स को भी एक विकेट मिला था। इस शानदार जीत का जश्न मनाने के लिए ही खिलाड़ी रात में बाहर गए थे, जहां रग्बी क्लब के खिलाड़ियों के साथ उनकी बहस हो गई। ‘मिडनाइट कर्फ्यू’ के नियमों का उल्लंघन भारी पड़ा इंग्लैंड के खिलाड़ियों का मैदान से बाहर का व्यवहार पिछले कुछ समय से ECB के लिए सिरदर्द बना हुआ है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज दौरे के दौरान भी खिलाड़ियों के देर रात तक पार्टी करने और शराब से जुड़े अनुशासनात्मक मामलों पर भारी आलोचना हुई थी। इसके बाद ECB ने टीम के लिए ‘मिडनाइट कर्फ्यू’ (आधी रात के बाद बाहर न रहने का नियम) दोबारा लागू किया था। स्टोक्स और एटकिंसन की ओर से इस कड़े प्रोटोकॉल को तोड़ना बोर्ड को नागवार गुजरा है।
पहले वनडे में बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को 86 रन हराया:21 साल बाद कंगारू टीम पर मिली दूसरी जीत; नालेद राणा ने झटके 4 विकेट

बांग्लादेश ने मीरपुर में खेले गए पहले वनडे मैच में ऑस्ट्रेलिया को डकवर्थ-लुईस (DLS) नियम के तहत 86 रन से हरा दिया। बांग्लादेश की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे इतिहास में यह केवल दूसरी जीत है। इससे पहले साल 2005 में बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को पहली बार किसी वनडे मैच में मात दी थी। इस मुकाबले में करीब चार साल बाद वनडे क्रिकेट में वापसी कर रहे मोसाद्देक हुसैन ने पहले बल्लेबाजी में नाबाद 86 रनों की पारी खेली और बाद में गेंदबाजी में भी 2 विकेट चटकाए। वहीं, नावेद राणा ने 4 विकेट लिए। ऑस्ट्रेलिया की टीम पिछले हफ्ते पाकिस्तान से वनडे सीरीज 2-1 से हारने के बाद यहां पहुंची है, जहां उसे पहले ही मैच में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। खराब रोशनी और बारिश के कारण रुका मैच टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए बांग्लादेश की टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में 8 विकेट पर 284 रन बनाए थे। जवाब में 285 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम 42.2 ओवरों में 9 विकेट खोकर केवल 191 रन ही बना सकी थी कि तभी मैदान पर तेज बिजली कड़कने और बारिश के कारण खेल को रोकना पड़ा। खेल दोबारा शुरू न होने की स्थिति में डकवर्थ-लुईस नियम के तहत बांग्लादेश को 86 रनों से विजेता घोषित कर दिया गया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से कैमरून ग्रीन 52 रन बनाकर नाबाद रहे। मोसाद्देक हुसैन की शानदार वापसी, शांतो और तंजीद के भी अर्धशतक चार साल बाद टीम में लौटे मोसाद्देक हुसैन बांग्लादेश की जीत के सबसे बड़े हीरो रहे। उन्होंने महज 70 गेंदों में 7 चौकों और 3 छक्कों की मदद से नाबाद 86 रन कूट डाले। हालांकि, इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई फील्डर्स ने उन्हें तीन जीवनदान भी दिए। कूपर कॉनोली, ओलिवर पीक और एडम जम्पा ने उनके कैच छोड़े, जिसका मोसाद्देक ने पूरा फायदा उठाया। उनके अलावा कप्तान नजमुल हुसैन शांतो ने 67 और ओपनर तंजीद हसन ने 54 रनों की महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से नाथन एलिस सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 38 रन देकर 3 विकेट लिए। खिलाड़ियों की कसी फील्डिंग ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और पारी की पहली ही गेंद पर ओपनर मैथ्यू शॉट को तस्कीन अहमद ने बोल्ड कर दिया। खराब फॉर्म से जूझ रहे मार्नस लाबुशेन भी सिर्फ 1 रन बनाकर मुस्तफिजुर रहमान का शिकार बने। पाकिस्तान के खिलाफ पिछली सीरीज में 0, 5 और 19 रन बनाने वाले लाबुशेन का फ्लॉप शो यहां भी जारी रहा। मिडिल ऑर्डर में कूपर कॉनोली (35) ने कप्तान जोश इंग्लिस (19) और एलेक्स कैरी (47) के साथ छोटी साझेदारियां कर पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन वे टीम को संकट से नहीं निकाल सके। नाहिद राणा की 140 किमी/घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी बांग्लादेश के युवा तेज गेंदबाज नाहिद राणा ने अपनी रफ्तार से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को खूब परेशान किया। लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की स्पीड से गेंदबाजी करते हुए राणा ने 41 रन देकर 4 विकेट चटकाए। उन्होंने अपने दूसरे स्पेल में घातक गेंदबाजी करते हुए तीन ओवरों में तीन विकेट निकालकर ऑस्ट्रेलिया की कमर तोड़ दी। मोसाद्देक हुसैन ने भी कसी हुई गेंदबाजी की और अपने 10 ओवर के कोटे में सिर्फ 37 रन देकर 2 जरूरी विकेट निकाले। 15 साल बाद दोनों देशों के बीच बाइलेटरल सीरीज ऑस्ट्रेलिया की टीम पूरे 15 साल बाद बांग्लादेश के दौरे पर कोई बाइलेटरल वनडे सीरीज खेल रही है। सीरीज का पहला मैच जीतकर बांग्लादेश ने 1-0 की बढ़त बना ली है। सीरीज के बाकी बचे दोनों मैच भी मीरपुर के इसी मैदान पर गुरुवार और रविवार को खेले जाएंगे।
अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए:हेलिकॉप्टर गिराने के बदले में अटैक; तेहरान बोला- हर हमले का जवाब देंगे

अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात ईरान पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की है। सेंटकॉम के मुताबिक, यह हमला होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सेना के अपाचे हेलिकॉप्टर को गिराए जाने के जवाब में किया गया। इससे पहले ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर गश्त कर रहे अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर को ईरान ने मार गिराया। हालांकि उन्होंने कहा कि हेलिकॉप्टर में सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें कोई चोट नहीं आई। ट्रम्प ने लिखा था, “अमेरिका को इस हमले का जवाब देना ही होगा।” उधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “ईरानी सेना किसी भी हमले या धमकी को बिना जवाब नहीं छोड़ेंगे।” अराघची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सुरक्षित रहना चाहते हैं तो हमारा क्षेत्र छोड़ दें। फारस की खाड़ी का इतिहास बाहरी ताकतों के बुरे अंजामों से भरा है।” हेलिकॉप्टर हादसे को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अपाचे हेलिकॉप्टर एक ईरानी ड्रोन से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह टक्कर जानबूझकर कराई गई थी या हादसा थी। मामले की जांच जारी है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अब हरियाणवी सिंगर डिंपल चौधरी का आपत्तिजक VIDEO सामने आया:युवक के प्राइवेट पार्ट पर नोट लगाकर अश्लील हरकत की; ट्रोलर्स बोले-खुद वल्गैरिटी को बढ़ावा दिया

उत्तर प्रदेश के हाथरस में स्टेज पर कमर छूने पर थप्पड़ मारने वाली हरियाणवी डांसर का अब खुद अश्लील हरकत करते का वीडियो सामने आया है। यह वीडियो 3 जून को उसी प्रोग्राम का है। वीडियो में डांसर डांस स्टेप करते समय नोट को युवक के प्राइवेट पार्ट पर टच करती दिखाई दे रही है। हालांकि, युवक ने पैंट शर्ट पहनी हुई है, लेकिन डांसर की हरकत पर मुस्कुराता नजर आ रहा है। पास में ही खड़ा दूसरा युवक यह वीडियो बना रहा है और हंसता हुआ दिखाई दे रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद डांसर को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है। कई लोग इस हरकत को अश्लील बताते हुए आरोप लगा रहे हैं कि वह खुद इस तरह की चीजों को बढ़ावा दे रही हैं। उधर, डांसर ने भी ट्रोलर्स के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- कलाकारों को ट्रोल करना कोई नई बात नहीं है। पहले हाथरथ स्टेज शो के दौरान बदसलूकी करने वाले युवक की गिरफ्तारी होने दी जाए, इसके बाद मैं ट्रोल करने वालों को भी जवाब दूंगी। डांसर के नए वीडियो ने बढ़ाया विवाद… महिला इन्फ्लुएंसर बोलीं- खुद वल्गैरिटी करते हो, रिएक्ट मत करो “मैंने मोस्टली ना बोलना बंद कर रखा था, लेकिन मुझे अब बोलना पड़ रहा है। एक वीडियो है, काफी ज्यादा चर्चा में आ रही है। काफी ज्यादा उस पे फेक रिपोर्टर्स हैं, जो न्यूज बना के डाल रहे हैं। वो है डांसर की, ठीक है? खुल्लम नाम ले रही हूं, क्योंकि मुझे वो चीज नहीं अच्छी लग रही है। जब आपको पता है कि आप वल्गैरिटी करते हो, आप खुद भी गलत हरकतें करते हो, तो आप उस चीज को रिएक्ट मत करो। अगर आपको थप्पड़ मारना था तो ऑन द स्पॉट मारते, रुक के नहीं मारना था। मारूं नहीं मारूं, मारूं नहीं मारूं, वो चीज पहली गलती लगी, ठीक है? दूसरी बात, आपने ही कहीं ना कहीं उन्हें हिंट दिया होगा, किनारा दिया होगा तभी आपके साथ ये बदतमीजी हुई है, वरना नहीं होती। और अगर अब भी आप लोगों को लगता है कि मैं गलत कह रही हूं, तो आप डांसर के दोनों वीडियो देख लो। आप बताना कि उनमें से कौन सा सही है और कौन सा गलत है। ट्रोलर्स को डांसर ने दिया ऐसा जवाब… अब पढ़िए… सुसाइड के ऐलान के बुधवार को क्या होगा ———————- डांसर विवाद से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ‘कमर छूने वाला गिरफ्तार नहीं हुआ तो जान दे दूंगी’:हरियाणवी डांसर बोलीं- 15 जून तक इंतजार करूंगी; जहां इज्जत मिलेगी, वहीं परफॉर्मेंस दूंगी स्टेज पर हरियाणवी डांसर की कमर छूने पर FIR:बोलीं- मेरी बहन मुझसे भी सुंदर, पैसों का लालच होता तो वह भी इसी लाइन में होती
2030 तक खत्म हो जाएगा अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन का सफर:नासा प्रशांत महासागर में गिराएगी मलबा, 9500 करोड़ रुपए का आएगा खर्च

पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर पिछले 25 वर्षों से मानवता की सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला के रूप में काम कर रहा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नासा ने 2028 से शुरू करके 2030 तक इसे सुरक्षित तरीके से धरती पर गिराने की अपनी योजना को सार्वजनिक किया है। इसके लिए नासा ने 1 अरब डॉलर (करीब 9500 करोड़ रुपए) का प्लान तैयार किया है। आईएसएस निर्धारित उम्र पूरी कर चुका है। इसका कार्यकाल कई बार बढ़ चुका है। पिछले कुछ सालों से इसमें लगातार तकनीकी खामियां आ रही हैं। स्टेशन को सुरक्षित बनाए रखने पर अरबों डॉलर खर्च होते हैं। नासा अब अपने संसाधनों को चंद्रमा और मंगल मिशनों पर केंद्रित करना चाहता है। इसलिए आईएसएस को सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से रिटायर करने का फैसला लिया गया है। कैसे होगा अंतरिक्ष स्टेशन का अंत? करीब 4.5 लाख किलोग्राम वजनी आईएसएस को यूं ही पृथ्वी की ओर गिरने नहीं दिया जाएगा। 2028 के आसपास स्टेशन को कक्षा में बनाए रखने की प्रक्रिया धीरे-धीरे बंद कर दी जाएगी। विशेष अंतरिक्ष यान से उसे नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में धकेला जाएगा। वायुमंडल में प्रवेश करते ही स्टेशन का अधिकांश हिस्सा घर्षण से जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि, इसके बाद भी स्पेस के बड़े टुकड़े पृथ्वी पर आबादी वाले क्षेत्रों में गिर सकते हैं। इसलिए नासा ने प्रशांत महासागर के एक दूरस्थ क्षेत्र को चुना है ताकि वायुमंडल में जलने के बाद बचा हुआ मलबा इसी सुनसान समुद्री क्षेत्र में गिरे। NASA के अनुसार, ISS को दक्षिण प्रशांत महासागर के क्षेत्र में क्रैश किया जाएगा। इस जगह का नाम पॉइंट नीमो है। यह जगह वैश्विक स्तर पर खास अंतरिक्ष के पुराने स्पेस स्टेशन, सैटेलाइट और दूसरे कचरे को डिस्पोज करने के लिए चुनी गई है। पॉइंट नीमो के आस पास किसी भी जहाज के जाने पर बैन है। यहां इंसानों के रहने के लिए कोई जगह नहीं है। साल 1971 से लेकर अब तक तकरीबन 300 तरह के अंतरिक्षीय कचरे को यहां गिराया गया है। इसमें अधिकतर अमेरिकी और रूसी कचरा शामिल है। 19 देशों के अंतरिक्ष यात्री ISS का दौरा कर चुके ISS में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सभी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां 6 से 8 लोग 6 महीने तक रह सकते हैं। इस पर पृथ्वी से उड़ान भरने वाले बड़े-बड़े अंतरिक्ष यान उतारे जाते हैं। अब तक 19 देशों के 250 से ज्यादा अंतरिक्ष यात्रियों ने ISS का दौरा किया है। आईएसएस की जगह अब प्राइवेट स्पेस स्टेशन नासा के नेतृत्व में कई निजी कंपनियां अपने अंतरिक्ष स्टेशन बना रही हैं। इनमें वोस्ट कंपनी का हेवन-2, एक्सिओम का स्पेस स्टेशन, और ब्लू ओरिजिन का ऑर्बिट रीफ प्रमुख हैं। चीन पहले ही अपना स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में स्थापित कर चुका है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भी 2035 तक खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। ——————– ISS से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में हवा का रिसाव:नासा ने एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस क्राफ्ट में छिपने को कहा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में हवा का रिसाव बढ़ने के बाद नासा ने तुरंत एक्शन लिया और एस्ट्रोनॉट्स को स्पेसक्राफ्ट में छिपने और सुरक्षित निकलने (इवैक्युएशन) के लिए तैयार रहने का आदेश दिया। हालांकि, करीब दो घंटे की मशक्कत और जांच के बाद स्थिति नियंत्रण में देखकर इस आदेश को वापस ले लिया गया। पूरी खबर पढ़ें…
2030 तक खत्म हो जाएगा अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन का सफर:नासा प्रशांत महासागर में गिराएगी मलबा, 9500 करोड़ रुपए का आएगा खर्च

पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर पिछले 25 वर्षों से मानवता की सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला के रूप में काम कर रहा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नासा ने 2028 से शुरू करके 2030 तक इसे सुरक्षित तरीके से धरती पर गिराने की अपनी योजना को सार्वजनिक किया है। इसके लिए नासा ने 1 अरब डॉलर (करीब 9500 करोड़ रुपए) का प्लान तैयार किया है। आईएसएस निर्धारित उम्र पूरी कर चुका है। इसका कार्यकाल कई बार बढ़ चुका है। पिछले कुछ सालों से इसमें लगातार तकनीकी खामियां आ रही हैं। स्टेशन को सुरक्षित बनाए रखने पर अरबों डॉलर खर्च होते हैं। नासा अब अपने संसाधनों को चंद्रमा और मंगल मिशनों पर केंद्रित करना चाहता है। इसलिए आईएसएस को सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से रिटायर करने का फैसला लिया गया है। कैसे होगा अंतरिक्ष स्टेशन का अंत? करीब 4.5 लाख किलोग्राम वजनी आईएसएस को यूं ही पृथ्वी की ओर गिरने नहीं दिया जाएगा। 2028 के आसपास स्टेशन को कक्षा में बनाए रखने की प्रक्रिया धीरे-धीरे बंद कर दी जाएगी। विशेष अंतरिक्ष यान से उसे नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में धकेला जाएगा। वायुमंडल में प्रवेश करते ही स्टेशन का अधिकांश हिस्सा घर्षण से जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि, इसके बाद भी स्पेस के बड़े टुकड़े पृथ्वी पर आबादी वाले क्षेत्रों में गिर सकते हैं। इसलिए नासा ने प्रशांत महासागर के एक दूरस्थ क्षेत्र को चुना है ताकि वायुमंडल में जलने के बाद बचा हुआ मलबा इसी सुनसान समुद्री क्षेत्र में गिरे। NASA के अनुसार, ISS को दक्षिण प्रशांत महासागर के क्षेत्र में क्रैश किया जाएगा। इस जगह का नाम पॉइंट नीमो है। यह जगह वैश्विक स्तर पर खास अंतरिक्ष के पुराने स्पेस स्टेशन, सैटेलाइट और दूसरे कचरे को डिस्पोज करने के लिए चुनी गई है। पॉइंट नीमो के आस पास किसी भी जहाज के जाने पर बैन है। यहां इंसानों के रहने के लिए कोई जगह नहीं है। साल 1971 से लेकर अब तक तकरीबन 300 तरह के अंतरिक्षीय कचरे को यहां गिराया गया है। इसमें अधिकतर अमेरिकी और रूसी कचरा शामिल है। 19 देशों के अंतरिक्ष यात्री ISS का दौरा कर चुके ISS में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सभी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां 6 से 8 लोग 6 महीने तक रह सकते हैं। इस पर पृथ्वी से उड़ान भरने वाले बड़े-बड़े अंतरिक्ष यान उतारे जाते हैं। अब तक 19 देशों के 250 से ज्यादा अंतरिक्ष यात्रियों ने ISS का दौरा किया है। आईएसएस की जगह अब प्राइवेट स्पेस स्टेशन नासा के नेतृत्व में कई निजी कंपनियां अपने अंतरिक्ष स्टेशन बना रही हैं। इनमें वोस्ट कंपनी का हेवन-2, एक्सिओम का स्पेस स्टेशन, और ब्लू ओरिजिन का ऑर्बिट रीफ प्रमुख हैं। चीन पहले ही अपना स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में स्थापित कर चुका है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भी 2035 तक खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। ——————– ISS से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में हवा का रिसाव:नासा ने एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस क्राफ्ट में छिपने को कहा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में हवा का रिसाव बढ़ने के बाद नासा ने तुरंत एक्शन लिया और एस्ट्रोनॉट्स को स्पेसक्राफ्ट में छिपने और सुरक्षित निकलने (इवैक्युएशन) के लिए तैयार रहने का आदेश दिया। हालांकि, करीब दो घंटे की मशक्कत और जांच के बाद स्थिति नियंत्रण में देखकर इस आदेश को वापस ले लिया गया। पूरी खबर पढ़ें…
एक-पार्टी के प्रभुत्व से 24/7 डिजिटल विच्छेदन तक: पीएम मोदी ने ‘अलग भारत’ में पीएम नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:10 जून, 2026, 01:58 IST प्रधान मंत्री मोदी के शासन काल को अविश्वसनीय रूप से जटिल, हाइपर-कनेक्टेड राजनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा परिभाषित किया गया है जैसा कि भारत ने नेतृत्व की दीर्घायु में इस ऐतिहासिक परिवर्तन को चिह्नित किया है, मील का पत्थर कार्यालय में बिताए गए दिनों की संख्या से कहीं अधिक दर्शाता है; यह राजनीतिक सर्वसम्मति-निर्माण की प्रकृति में एक गहरे बदलाव को रेखांकित करता है। फ़ाइल छवि/एएफपी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जून को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है, आधिकारिक तौर पर जवाहरलाल नेहरू को पीछे छोड़ते हुए भारत के सबसे लंबे समय तक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित, लगातार सरकार के प्रमुख के रूप में चुने गए हैं। यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया मानदंड स्थापित करते हुए आधुनिक राजनीतिक दीर्घायु के मापदंडों को फिर से परिभाषित करती है। हालाँकि, जबकि दोनों नेता भारतीय मतदाताओं से स्थायी जनादेश हासिल करने में कामयाब रहे, उनके संबंधित कार्यकाल के संरचनात्मक परिदृश्य अधिक विशिष्ट नहीं हो सके। प्रधान मंत्री मोदी के शासन काल को एक अविश्वसनीय रूप से जटिल, हाइपर-कनेक्टेड राजनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा परिभाषित किया गया है, जो कि स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दशक के निर्विवाद एकल-दल प्रभुत्व के साथ बिल्कुल विपरीत है। विभिन्न युगों का संस्थागत ताना-बाना इस मील के पत्थर की भयावहता को समझने के लिए, राजनीतिक विश्लेषक बीसवीं सदी के मध्य और समकालीन युग के बीच विशाल प्रणालीगत अंतर पर प्रकाश डालते हैं। आज़ादी के बाद शुरुआती दशकों के दौरान, सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने उस व्यवस्था के तहत काम किया जिसे समाजशास्त्री ऐतिहासिक रूप से “एकदलीय प्रभुत्व प्रणाली” कहते हैं। जवाहरलाल नेहरू के तहत, केंद्र सरकार भारी संस्थागत अधिकार के साथ काम कर रही थी, और उसे ऐसे विरोध का सामना करना पड़ रहा था, जिसमें बौद्धिक रूप से जीवंत होने के बावजूद, संघीय ढांचे के लिए प्रणालीगत खतरा पैदा करने के लिए संख्यात्मक ताकत, क्षेत्रीय मशीनरी और वित्तीय समर्थन का अभाव था। राजनीतिक केंद्रीकरण उस युग का स्वाभाविक उपोत्पाद था जब गणतंत्र के मूलभूत स्तंभ अभी भी मजबूत हो रहे थे। इसके बिल्कुल विपरीत, प्रधानमंत्री मोदी अभूतपूर्व राजनीतिक विखंडन और गहन जांच के युग में निरंतर कार्यकाल की कमान संभाल रहे हैं। वर्तमान प्रशासन अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परिदृश्य में काम करता है जहां मजबूत क्षेत्रीय गठबंधन, मुखर राज्य सरकारें और संरचित विपक्षी गठबंधन लगातार संघीय नीतियों का विरोध करते हैं। सत्ता अब एक ही बोर्डरूम में केंद्रित नहीं है; इसके बजाय, इसमें गहराई से स्थापित क्षेत्रीय हितों के विविध स्पेक्ट्रम पर बातचीत की जाती है, जिसमें विधायी, वित्तीय और संघीय मामलों पर केंद्र को चुनौती देने की संस्थागत क्षमता होती है। डिजिटल पुनर्जागरण और सार्वजनिक जांच दलगत राजनीति से परे, संचार परिदृश्य में आमूल-चूल परिवर्तन आया है, जिसने मौलिक रूप से बदल दिया है कि एक आधुनिक प्रधान मंत्री एक विस्तारित अवधि में जनता का विश्वास कैसे बनाए रखता है। नेहरू युग की विशेषता नवजात, बड़े पैमाने पर राज्य-सहयोगी या पारंपरिक प्रिंट मीडिया थी, जो कम साक्षरता दर वाले समाज में काम कर रहा था, जहां जन संचार धीमा और अत्यधिक औपचारिक था। शासन काफी हद तक त्वरित, प्रतिक्रियाशील सार्वजनिक प्रतिक्रिया से अछूता था, जिससे नीतियों को सार्वजनिक चकाचौंध से दूर एक व्यापक अवधि की अनुमति मिल गई। आज, लोकतांत्रिक विमर्श एक अतिसक्रिय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में सामने आता है। स्मार्टफोन प्रौद्योगिकी, सर्वव्यापी हाई-स्पीड इंटरनेट और स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारिता प्लेटफार्मों के प्रसार का मतलब है कि संघीय निर्णयों की घोषणा के कुछ ही सेकंड के भीतर विच्छेदन, आलोचना और विरोध किया जाता है। एक्टिविस्ट नेटवर्क, नागरिक समाज समूह और विविध मीडिया गुट शक्तिशाली ऑनलाइन आर्किटेक्चर पर नियंत्रण रखते हैं जो रातों-रात कथा परिवर्तन को आकार देने में सक्षम हैं। लोकतांत्रिक बहुमत को बनाए रखना और इस अथक, 24-घंटे की स्पॉटलाइट के तहत प्रशासनिक गति बनाए रखना सार्वजनिक प्रबंधन में एक पूरी तरह से अद्वितीय परिचालन विजय का प्रतिनिधित्व करता है। लोकतांत्रिक दीर्घायु का एक नया प्रतिमान जैसा कि भारत ने नेतृत्व की दीर्घायु में इस ऐतिहासिक परिवर्तन को चिह्नित किया है, मील का पत्थर कार्यालय में बिताए गए दिनों की संख्या से कहीं अधिक दर्शाता है; यह राजनीतिक सर्वसम्मति-निर्माण की प्रकृति में एक गहरे बदलाव को रेखांकित करता है। आधुनिक युग में निरंतरता हासिल करने के लिए एक ऐसे मतदाता वर्ग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है जो अत्यधिक आकांक्षी, डिजिटल रूप से सशक्त और अलग-अलग क्षेत्रीय रेखाओं के साथ खंडित हो। स्वतंत्र भारत के संस्थापक प्रधान मंत्री के निरंतर शासन रिकॉर्ड को पार करके, वर्तमान नेतृत्व ने एक तरल, अत्यधिक प्रतिस्पर्धी राजनीतिक वास्तविकता को अनुकूलित करने की असाधारण क्षमता का प्रदर्शन किया है, एक मिसाल कायम की है जो आने वाले दशकों के लिए देश की लोकतांत्रिक वास्तुकला को आकार देगी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया एक-दलीय प्रभुत्व से 24/7 डिजिटल विच्छेदन तक: पीएम मोदी ने ‘अलग भारत’ में पीएम नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री उज्ज्वल बिस्वास ‘तिरपाल हेराफेरी’ मामले में गिरफ्तार | न्यूज18

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री उज्जल बिस्वास को तिरपाल हेराफेरी मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिससे राजनीतिक उथल-पुथल मच गई और अदालत परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। गिरफ्तारी के कारण अराजक दृश्य पैदा हो गए, अंडे फेंके जाने की खबरें आईं और तनाव बढ़ने पर समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प हुई। इस मामले ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक टकराव तेज कर दिया है, विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ दल के समर्थकों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। अधिकारी मामले से जुड़ी सरकारी खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच कर रहे हैं, जबकि राजनीतिक टकराव बढ़ता ही जा रहा है। -newsn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 09 जून, 2026, 23:21 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)आरोप(टी)गिरफ्तारी(टी)वर्तमान घटनाएं(टी)पूर्व मंत्री(टी)सरकार(टी)कानून प्रवर्तन(टी)समाचार(टी)राजनीति(टी)पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति









