Friday, 09 Oct 2026 | 03:57 AM

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इंपैक्ट फीचर:सेज स्टार्टअप स्पार्क 2.0, स्टूडेंट्स के लिए एंटरप्रेन्योरशिप का लॉन्चपैड, जहां आइडियाज बनेंगे स्टार्टअप और सपने बनेंगे सक्सेस स्टोरीज

इंपैक्ट फीचर:सेज स्टार्टअप स्पार्क 2.0, स्टूडेंट्स के लिए एंटरप्रेन्योरशिप का लॉन्चपैड, जहां आइडियाज बनेंगे स्टार्टअप और सपने बनेंगे सक्सेस स्टोरीज

सेज यूनिवर्सिटी इंदौर द्वारा 19 एवं 20 जून 2026 को दो दिवसीय सेज स्टार्टअप स्पार्क 2.0 का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम उन विद्यार्थियों के लिए एक बेहतरीन अवसर लेकर आ रहा है, जो भविष्य में अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं या स्टार्टअप्स के साथ काम करके उद्यमिता की दुनिया को करीब से समझना चाहते हैं। आज के समय में युवा केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने विचारों के दम पर नए अवसर और रोजगार पैदा करने की क्षमता रखते हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए सेज स्टार्टअप स्पार्क 2.0 विद्यार्थियों को देश के सफल उद्यमियों, निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों से सीखने का अवसर देगा। कार्यक्रम के माध्यम से छात्र जान सकेंगे कि एक साधारण आइडिया को सफल स्टार्टअप में कैसे बदला जाता है और व्यवसाय की शुरुआत से लेकर उसके विस्तार तक की यात्रा कैसी होती है। दो दिवसीय इस कार्यक्रम में स्टार्टअप फाउंडर्स, निवेशक, उद्योग जगत के विशेषज्ञ और बिजनेस लीडर्स शामिल होंगे। नए अवसरों की जानकारी मिलेगी कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप पिचिंग, पैनल डिस्कशन, निवेशकों के साथ संवाद, नेटवर्किंग सेशन और विभिन्न इंटरैक्टिव गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को स्टार्टअप इकोसिस्टम को समझने के साथ-साथ इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट्स और करियर के नए अवसरों की जानकारी भी मिलेगी। कार्यक्रम में सुश्री साक्षी बंसल, मैनेजिंग डायरेक्टर – सेज ग्रुप , जतिन आहूजा , फाउंडर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर – बिग बॉय टॉयज़ लिमिटेड, दीपक धनोटिया, फाउंडर एवं मैनेजिंग पार्टनर – शॉप किराना प्राइवेट लिमिटेड सहित कई प्रतिष्ठित उद्यमी और विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। उद्योग जगत के जाने-माने नाम भी शामिल होंगे इसके अलावा नीरज अग्रवाल, निपुन अग्रवाल,मनीष डाबकर, किरण बाबू और जिमिश कपाड़िया जैसे उद्योग जगत के जाने-माने नाम भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे। सेज यूनिवर्सिटी के चांसलर इंजी सजीव अग्रवाल ने कहा कि सेज यूनिवर्सिटी इंदौर का यह आयोजन विद्यार्थियों को नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सुश्री साक्षी बंसल ने मीडिया को बताया की सेज स्टार्टअप स्पार्क 2.0 युवाओं को नए विचारों के साथ आगे बढ़ने और उद्यमिता की दुनिया को समझने का अवसर देगा। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि अपने विचारों को वास्तविक व्यवसाय में बदलने की दिशा में भी आगे बढ़ें।

कंट्री काउंटर्स; दुनिया के सारे देश घूमने का ट्रेंड:भीड़ से ऊबे लोग अनछुए डेस्टिनेशन का रुख कर रहे, एक्सपर्ट- यह प्रतिष्ठा का प्रतीक

कंट्री काउंटर्स; दुनिया के सारे देश घूमने का ट्रेंड:भीड़ से ऊबे लोग अनछुए डेस्टिनेशन का रुख कर रहे, एक्सपर्ट- यह प्रतिष्ठा का प्रतीक

प्रशांत महासागर का छोटा सा द्वीपीय देश ‘तुवालु’… हवाई व ऑस्ट्रेलिया के बीच बसा यह देश दुनिया के उन गिने-चुने कोनों में से है, जहां साल भर में इक्का-दुक्का टूरिस्ट ही पहुंचते हैं। यहां आलीशान होटल या बड़े पर्यटन स्थल नहीं हैं। राजधानी फुनाफुटी में हवाई पट्टी ही शाम को पिकनिक स्पॉट व फुटबॉल ग्राउंड बन जाती है। पर अमेरिका के टेड निम्स के लिए यह कोई आम जगह नहीं थी। जब उन्होंने तुवालु में कदम रखा, तो यह उनके ट्रैवल का 191वां देश बन गया! यूएन के कुल 193 सदस्य देश हैं और टेड बस दो कदम दूर हैं। दुनिया में इन दिनों ‘कंट्री काउंटर्स’ यानी देश गिनने वाले मुसाफिरों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। इन लोगों का बस एक ही मकसद है- दुनिया के हर देश की धरती पर कदम रखना। यानी घूमना और पर्यटन भी खेल बन गया है। ऐसा खेल, जिसमें कोई मेडल नहीं मिलता, लेकिन लोग पूरी दुनिया को जेब में समेटने की होड़ में लगे हैं। जुनूनी यात्रियों के लिए नोमैडमेनिया और मोस्ट ट्रैवल्ड पीपल जैसी वेबसाइट्स एक तरह का डिजिटल मैदान बन गई हैं। यहां लोग अपनी यात्राओं का हिसाब रखते हैं और लीडरबोर्ड पर दिखाते हैं कि उन्होंने कितने देश देखे हैं। बहस भी होती है-क्या सिर्फ एयरपोर्ट पर फ्लाइट बदलना यानी ट्रांजिट को भी ‘देश घूमना’ माना जाए या नहीं। पहले जहां 100 देशों की यात्रा करने वाले लोग कम थे, अब ऐसे क्लबों में हजारों सदस्य जुड़ चुके हैं। यह ट्रेंड दिखाता है कि ट्रैवल अब प्रतियोगिता बन गया है। हाल में 142वें देश सामोआ की यात्रा करने वाली मलेशिया की कैरोल वोंग कहती हैं ‘बड़े व महंगे होटलों में अकेलापन होता है, असली मजा तो स्थानीय लोगों के साथ रहने में है।’ सोशल मीडिया के दौर में यह स्टेटस सिंबल भी बन चुका है। इस होड़ का अच्छा पहलू यह भी है कि लोग अब पेरिस या लंदन की भीड़भाड़ से ऊबकर अनछुए रास्तों की तलाश कर रहे हैं। सिंगापुर के 34 वर्षीय श्यांग कियान सोंग भी तुवालु इसीलिए आए हैं क्योंकि वे उन जगहों को देखना चाहते हैं जहां आधुनिक पर्यटन की परछाई भी नहीं पड़ी। दिलचस्प यह है कि जलवायु परिवर्तन के कारण तुवालु जैसे देश शायद आने वाले वक्त में डूब जाएं। पर्यटन में शीर्ष 10 देशों की हिस्सेदारी में 20% की कमी – सर्वे स्किफ्ट के सर्वे के अनुसार दिखावे की संस्कृति व पर्यटन स्थलों पर भीड़ के कारण लोग अनछुए देशों का रुख कर रहे हैं। वैश्विक पर्यटन में शीर्ष 10 देशों की हिस्सेदारी 1980 के 60% से घटकर 2024 में 40% रह गई है। नोमैडमेनिया के फाउंडर हैरी मित्सिदिस कहते हैं,‘कंट्री काउंटिंग छुट्टियां मनाने का नहीं, बल्कि यह खुद को चुनौती देने व वैश्विक पहचान बनाने का जरिया बन चुका है। लोग अब सिर्फ ‘घूमने’ नहीं निकलते, बल्कि वे दुनिया को चेकलिस्ट की तरह देखते हैं। यह जुनून इस कदर बढ़ा है कि सालभर में रिकॉर्ड 82 लोगों ने सभी देशों को सफलता के साथ घूमने का दावा किया।

कंट्री काउंटर्स; दुनिया के सारे देश घूमने का ट्रेंड:भीड़ से ऊबे लोग अनछुए डेस्टिनेशन का रुख कर रहे, एक्सपर्ट- यह प्रतिष्ठा का प्रतीक

कंट्री काउंटर्स; दुनिया के सारे देश घूमने का ट्रेंड:भीड़ से ऊबे लोग अनछुए डेस्टिनेशन का रुख कर रहे, एक्सपर्ट- यह प्रतिष्ठा का प्रतीक

प्रशांत महासागर का छोटा सा द्वीपीय देश ‘तुवालु’… हवाई व ऑस्ट्रेलिया के बीच बसा यह देश दुनिया के उन गिने-चुने कोनों में से है, जहां साल भर में इक्का-दुक्का टूरिस्ट ही पहुंचते हैं। यहां आलीशान होटल या बड़े पर्यटन स्थल नहीं हैं। राजधानी फुनाफुटी में हवाई पट्टी ही शाम को पिकनिक स्पॉट व फुटबॉल ग्राउंड बन जाती है। पर अमेरिका के टेड निम्स के लिए यह कोई आम जगह नहीं थी। जब उन्होंने तुवालु में कदम रखा, तो यह उनके ट्रैवल का 191वां देश बन गया! यूएन के कुल 193 सदस्य देश हैं और टेड बस दो कदम दूर हैं। दुनिया में इन दिनों ‘कंट्री काउंटर्स’ यानी देश गिनने वाले मुसाफिरों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। इन लोगों का बस एक ही मकसद है- दुनिया के हर देश की धरती पर कदम रखना। यानी घूमना और पर्यटन भी खेल बन गया है। ऐसा खेल, जिसमें कोई मेडल नहीं मिलता, लेकिन लोग पूरी दुनिया को जेब में समेटने की होड़ में लगे हैं। जुनूनी यात्रियों के लिए नोमैडमेनिया और मोस्ट ट्रैवल्ड पीपल जैसी वेबसाइट्स एक तरह का डिजिटल मैदान बन गई हैं। यहां लोग अपनी यात्राओं का हिसाब रखते हैं और लीडरबोर्ड पर दिखाते हैं कि उन्होंने कितने देश देखे हैं। बहस भी होती है-क्या सिर्फ एयरपोर्ट पर फ्लाइट बदलना यानी ट्रांजिट को भी ‘देश घूमना’ माना जाए या नहीं। पहले जहां 100 देशों की यात्रा करने वाले लोग कम थे, अब ऐसे क्लबों में हजारों सदस्य जुड़ चुके हैं। यह ट्रेंड दिखाता है कि ट्रैवल अब प्रतियोगिता बन गया है। हाल में 142वें देश सामोआ की यात्रा करने वाली मलेशिया की कैरोल वोंग कहती हैं ‘बड़े व महंगे होटलों में अकेलापन होता है, असली मजा तो स्थानीय लोगों के साथ रहने में है।’ सोशल मीडिया के दौर में यह स्टेटस सिंबल भी बन चुका है। इस होड़ का अच्छा पहलू यह भी है कि लोग अब पेरिस या लंदन की भीड़भाड़ से ऊबकर अनछुए रास्तों की तलाश कर रहे हैं। सिंगापुर के 34 वर्षीय श्यांग कियान सोंग भी तुवालु इसीलिए आए हैं क्योंकि वे उन जगहों को देखना चाहते हैं जहां आधुनिक पर्यटन की परछाई भी नहीं पड़ी। दिलचस्प यह है कि जलवायु परिवर्तन के कारण तुवालु जैसे देश शायद आने वाले वक्त में डूब जाएं। पर्यटन में शीर्ष 10 देशों की हिस्सेदारी में 20% की कमी – सर्वे स्किफ्ट के सर्वे के अनुसार दिखावे की संस्कृति व पर्यटन स्थलों पर भीड़ के कारण लोग अनछुए देशों का रुख कर रहे हैं। वैश्विक पर्यटन में शीर्ष 10 देशों की हिस्सेदारी 1980 के 60% से घटकर 2024 में 40% रह गई है। नोमैडमेनिया के फाउंडर हैरी मित्सिदिस कहते हैं,‘कंट्री काउंटिंग छुट्टियां मनाने का नहीं, बल्कि यह खुद को चुनौती देने व वैश्विक पहचान बनाने का जरिया बन चुका है। लोग अब सिर्फ ‘घूमने’ नहीं निकलते, बल्कि वे दुनिया को चेकलिस्ट की तरह देखते हैं। यह जुनून इस कदर बढ़ा है कि सालभर में रिकॉर्ड 82 लोगों ने सभी देशों को सफलता के साथ घूमने का दावा किया।

टीम से बाहर होने के बाद सूर्या का पहला रिएक्शन:स्क्वाड को ‘ऑल द बेस्ट’ कहा; सूर्यवंशी के लिए लिखा- आपने यह मौका कमाया

टीम से बाहर होने के बाद सूर्या का पहला रिएक्शन:स्क्वाड को ‘ऑल द बेस्ट’ कहा; सूर्यवंशी के लिए लिखा- आपने यह मौका कमाया

भारतीय टी-20 टीम से बाहर किए जाने के बाद सूर्यकुमार यादव का सोशल मीडिया के जरिए पहला रिएक्शन आया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर स्टोरी शेयर करते हुए टीम इंडिया को आने वाले मैचों के लिए शुभकामनाएं दी। वहीं सीनियर टीम में पहली बार शामिल वैभव सूर्यवंशी के लिए लिखा- ‘आपने यह मौका कमाया है।’ BCCI ने शनिवार को टीम का ऐलान किया, जिसमें श्रेयस अय्यर को नया कप्तान और तिलक वर्मा को उपकप्तान बनाया गया। सेलेक्टर्स ने सूर्यकुमार को कप्तानी से हटाने के साथ टीम में भी जगह नहीं दी। सूर्या ने लिखा- आने वाली चुनौतियों के लिए शुभकामनाएं टीम के ऐलान के कुछ घंटे बाद ही सूर्या ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर भारतीय स्क्वॉड की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा- इस बेहद स्किल्ड ग्रुप को आने वाली चुनौतियों के लिए ऑल द बेस्ट। सूर्यवंशी के लिए कहा- आपका सफर देखने के लिए एक्साइटेड हूं सूर्यकुमार ने दूसरी स्टोरी में 15 साल के सूर्यवंशी के सेलेक्सन पर खुशी जताई। वैभव की तस्वीर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा- ‘आपने यह मौका कमाया है और क्या शानदार तरीके से। आपके सफर के लिए एक्साइटेड हूं।’ सूर्या खराब फॉर्म की वजह से बाहर हुए 35 साल के सूर्या का हालिया फॉर्म खराब रहा है। इस वजह से भी उनकी टीम में जगह नहीं बन पाई हैं। उन्होंने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में 9 पारियों में 136.72 के स्ट्राइक रेट से 242 रन बनाए। इसके अलावा IPL की 13 पारियों में भी 20.76 की खराब औसत से 270 रन ही बना सके थे। वे सिर्फ 2 बार ही 50 रन के आंकड़े तक पहुंच सके। सूर्या ने वर्ल्ड कप जिताया, कप्तानी में 80% मैच जीते वेस्टइंडीज में 2024 टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद रोहित शर्मा ने टी-20 से संन्यास ले लिया था। इसके बाद सूर्यकुमार यादव को भारत की कप्तानी सौंपी गई थी। सूर्या की कप्तानी में भारत ने इसी साल 8 मार्च को टी-20 वर्ल्ड कप जीता था। भारत अपने टाइटल को डिफेंड करने और लगातार दो टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीतने वाला दुनिया का पहला देश भी बना। सूर्या की कप्तानी में भारत ने 52 टी-20 मैच खेले। इसमें 42 जीते, 8 हार और 2 मैच नो रिजल्ट रहा। उनका जीत प्रतिशत 80.76% है। सूर्यकुमार की अगुआई में भारत ने 2026 टी-20 वर्ल्ड कप, 2025 एशिया कप अपने नाम किया था। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी-20 टीम श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उपकप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, वरुण चक्रवर्ती, मोहम्मद सिराज, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह और प्रिंस यादव। एशियन गेम्स के लिए भारतीय टी-20 टीम श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उपकप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा और अर्शदीप सिंह। ——————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… वैभव सूर्यवंशी भारतीय टीम में चुने गए सबसे युवा क्रिकेटर:15 साल, 71 दिन की उम्र में सिलेक्शन हुआ; श्रेयस टी-20 के नए कप्तान वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट टीम में चुने गए अब तक के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। 15 साल, 71 दिन के वैभव को जून-जुलाई में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज के साथ-साथ सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स के लिए चुना गया है। एशियन गेम्स में क्रिकेट के मुकाबले टी-20 फॉर्मेट में ही होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

टीम से बाहर होने के बाद सूर्या का पहला रिएक्शन:स्क्वाड को ‘ऑल द बेस्ट’ कहा; सूर्यवंशी के लिए लिखा- आपने यह मौका कमाया

टीम से बाहर होने के बाद सूर्या का पहला रिएक्शन:स्क्वाड को ‘ऑल द बेस्ट’ कहा; सूर्यवंशी के लिए लिखा- आपने यह मौका कमाया

भारतीय टी-20 टीम से बाहर किए जाने के बाद सूर्यकुमार यादव का सोशल मीडिया के जरिए पहला रिएक्शन आया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर स्टोरी शेयर करते हुए टीम इंडिया को आने वाले मैचों के लिए शुभकामनाएं दी। वहीं सीनियर टीम में पहली बार शामिल वैभव सूर्यवंशी के लिए लिखा- ‘आपने यह मौका कमाया है।’ BCCI ने शनिवार को टीम का ऐलान किया, जिसमें श्रेयस अय्यर को नया कप्तान और तिलक वर्मा को उपकप्तान बनाया गया। सेलेक्टर्स ने सूर्यकुमार को कप्तानी से हटाने के साथ टीम में भी जगह नहीं दी। सूर्या ने लिखा- आने वाली चुनौतियों के लिए शुभकामनाएं टीम के ऐलान के कुछ घंटे बाद ही सूर्या ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर भारतीय स्क्वॉड की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा- इस बेहद स्किल्ड ग्रुप को आने वाली चुनौतियों के लिए ऑल द बेस्ट। सूर्यवंशी के लिए कहा- आपका सफर देखने के लिए एक्साइटेड हूं सूर्यकुमार ने दूसरी स्टोरी में 15 साल के सूर्यवंशी के सेलेक्सन पर खुशी जताई। वैभव की तस्वीर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा- ‘आपने यह मौका कमाया है और क्या शानदार तरीके से। आपके सफर के लिए एक्साइटेड हूं।’ सूर्या खराब फॉर्म की वजह से बाहर हुए 35 साल के सूर्या का हालिया फॉर्म खराब रहा है। इस वजह से भी उनकी टीम में जगह नहीं बन पाई हैं। उन्होंने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में 9 पारियों में 136.72 के स्ट्राइक रेट से 242 रन बनाए। इसके अलावा IPL की 13 पारियों में भी 20.76 की खराब औसत से 270 रन ही बना सके थे। वे सिर्फ 2 बार ही 50 रन के आंकड़े तक पहुंच सके। सूर्या ने वर्ल्ड कप जिताया, कप्तानी में 80% मैच जीते वेस्टइंडीज में 2024 टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद रोहित शर्मा ने टी-20 से संन्यास ले लिया था। इसके बाद सूर्यकुमार यादव को भारत की कप्तानी सौंपी गई थी। सूर्या की कप्तानी में भारत ने इसी साल 8 मार्च को टी-20 वर्ल्ड कप जीता था। भारत अपने टाइटल को डिफेंड करने और लगातार दो टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीतने वाला दुनिया का पहला देश भी बना। सूर्या की कप्तानी में भारत ने 52 टी-20 मैच खेले। इसमें 42 जीते, 8 हार और 2 मैच नो रिजल्ट रहा। उनका जीत प्रतिशत 80.76% है। सूर्यकुमार की अगुआई में भारत ने 2026 टी-20 वर्ल्ड कप, 2025 एशिया कप अपने नाम किया था। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी-20 टीम श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उपकप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, वरुण चक्रवर्ती, मोहम्मद सिराज, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह और प्रिंस यादव। एशियन गेम्स के लिए भारतीय टी-20 टीम श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उपकप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा और अर्शदीप सिंह। ——————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… वैभव सूर्यवंशी भारतीय टीम में चुने गए सबसे युवा क्रिकेटर:15 साल, 71 दिन की उम्र में सिलेक्शन हुआ; श्रेयस टी-20 के नए कप्तान वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट टीम में चुने गए अब तक के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। 15 साल, 71 दिन के वैभव को जून-जुलाई में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज के साथ-साथ सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स के लिए चुना गया है। एशियन गेम्स में क्रिकेट के मुकाबले टी-20 फॉर्मेट में ही होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

‘लापरवाह उपेक्षा…’: युसूफ पठान से ममता के लिए लोकसभा सीट खाली करने को कहने पर सौरव गांगुली | भारत समाचार

Gus Atkinson celebrates taking the wicket of New Zealand's Will O'Rourke (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:06 जून, 2026, 17:11 IST एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सौरव गांगुली ने ममता बनर्जी की ओर से यूसुफ पठान से संपर्क किया और उन्हें अपनी संसदीय सीट से हटने के लिए कहा। पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी टीएमसी सांसद यूसुफ पठान के साथ। (एक्स/यूसुफ पठान) बंगाल में हाल ही में हुए चुनाव में हार के बाद, जहां वह अपनी भबनीपुर सीट मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से हार गईं, खबरें सामने आईं कि ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद यूसुफ पठान से उनकी बहरामपुर सीट खाली करने के लिए कहकर संसद में प्रवेश की मांग कर रही थीं। की एक रिपोर्ट आनंदबाजार पत्रिका दावा किया गया कि पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली ने ममता बनर्जी की ओर से यूसुफ पठान से संपर्क किया था ताकि वह अपना संदेश ले सकें कि पूर्व सीएम को निर्वाचन क्षेत्र से उपचुनाव लड़ने की अनुमति देने के लिए उन्हें बहरामपुर सांसद के रूप में अपने पद से हट जाना चाहिए। यूसुफ पठान, जो एक पूर्व क्रिकेटर भी हैं, 2024 के लोकसभा चुनावों में अपने राजनीतिक पदार्पण पर बहरामपुर में एक विशाल हत्यारे के रूप में उभरे, उन्होंने अनुभवी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया। 50-52% मुस्लिम आबादी के साथ बहरामपुर टीएमसी के लिए सुरक्षित सीट मानी जाती है। ‘दादा’ ने हवा साफ़ की हालाँकि, बाद में गांगुली ने पठान से अपनी सीट खाली करने के लिए कहने से इनकार कर दिया, और उन्हें “सच्चाई की लापरवाही भरी अवहेलना” कहा। उन्होंने कहा, “उपरोक्त आरोप असत्य हैं। मैं मीडिया से अनुरोध करूंगा कि मुद्रित और प्रकाशित तथ्यों की सत्यता की पुष्टि किए बिना अफवाहों और अटकलों का शिकार न बनें। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लेख में उपरोक्त आरोपों की सच्चाई और सत्यता की जांच और सत्यापन के लिए किट को आवश्यक नहीं समझा गया।” भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का कहना है, ”…यह आरोप लगाया गया था कि मैंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से श्री यूसुफ़ पठान से संपर्क किया था और उनका संदेश दिया था कि उन्हें अपने संवैधानिक पद से हट जाना चाहिए/इस्तीफ़ा दे देना चाहिए…” pic.twitter.com/0RkRsRhYfo– एएनआई (@ANI) 6 जून, 2026 उन्होंने कहा, ”यह रिकॉर्ड में रखना जरूरी है कि सुश्री ममता बनर्जी ने मुझसे कभी भी श्री यूसुफ पठान को कोई संदेश देने के लिए अनुरोध/कहा नहीं था, चाहे वह अपनी संसदीय सीट से हट जाएं, जैसा कि आरोप लगाया गया है या अन्यथा या बिल्कुल भी।” उन्होंने कहा कि वह कभी भी किसी भी स्तर पर राजनीतिक मामलों में शामिल नहीं रहे हैं। यह रिपोर्ट तब आई है जब टीएमसी, जिसने 2026 के विधानसभा चुनावों में सिर्फ 80 सीटें जीती थीं, 60 से अधिक विधायकों द्वारा पार्टी तोड़ने और निष्कासित नेता रीतब्रत बनर्जी को राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुने जाने के बाद अपने अस्तित्व के सबसे गंभीर संकट का सामना कर रही है। पार्टी के कई नेताओं ने खुलेआम पार्टी नेतृत्व के प्रति असंतोष व्यक्त किया है और पद छोड़ने की योजना बना रहे हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘लापरवाह उपेक्षा…’: युसूफ पठान से ममता के लिए लोकसभा सीट खाली करने को कहने पर सौरव गांगुली अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ममता बनर्जी संसद में प्रवेश(टी)ममता बनर्जी सीट(टी)सौरव गांगुली का इनकार(टी)यूसुफ पठान बहरामपुर(टी)टीएमसी राजनीतिक संकट(टी)बंगाल चुनाव झटका(टी)सुवेंदु अधिकारी की जीत(टी)ऋतब्रत बनर्जी विरोध

शिल्पा शिंदे पर सीएम फडणवीस से कानूनी कार्रवाई की मांग:प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के झूठे आरोप लगाए; शिल्पा का पोस्ट- 'जो उखाड़ना है उखाड़ लो'

शिल्पा शिंदे पर सीएम फडणवीस से कानूनी कार्रवाई की मांग:प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के झूठे आरोप लगाए; शिल्पा का पोस्ट- 'जो उखाड़ना है उखाड़ लो'

टेलीविजन एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे के एक हालिया खुलासे पर ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने कड़ी आपत्ति जताई है। शिल्पा ने कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के पॉडकास्ट में माना था कि उन्होंने टीवी शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ के प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) के झूठे आरोप लगाए थे। इस बयान के बाद एसोसिएशन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में हस्तक्षेप कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच शिल्पा ने एक वीडियो शेयर कर आलोचकों को जवाब दिया है। झूठे आरोपों से असली पीड़ितों को नुकसान ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर शिल्पा शिंदे के इस कबूलनामे पर गहरी निराशा जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे कदमों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि यौन उत्पीड़न के झूठे आरोपों से किसी भी व्यक्ति के सम्मान, परिवार, बच्चों, करियर और मानसिक स्थिति को कभी न ठीक होने वाला नुकसान पहुंचता है। इससे समाज में उस व्यक्ति की छवि हमेशा के लिए खराब हो जाती है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से दखल की मांग एसोसिएशन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की अपील की है। AICWA के मुताबिक, अगर यह साबित होता है कि किसी ने जानबूझकर झूठे आरोप लगाए हैं, तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। एसोसिएशन ने कहा कि जब कोई जानबूझकर ऐसे झूठे केस करता है, तो इससे उन असली पीड़ितों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगते हैं जो न्याय की उम्मीद में आगे आते हैं। इससे बॉलीवुड और फिल्म इंडस्ट्री में प्रताड़ना झेलने वाले असली लोगों को अपनी बात रखने में मुश्किल होगी। ‘जो उखाड़ना है उखाड़ लो’ सोशल मीडिया पर लगातार हो रही आलोचना के बीच शिल्पा शिंदे ने इंस्टाग्राम पर एक नया वीडियो पोस्ट कर अपना बचाव किया है। उन्होंने अपनी तस्वीरों और वीडियो के साथ एक रील शेयर की, जिस पर लिखा था, “एक महिला बनो, हमेशा यह कहने के लिए तैयार रहो कि जो उखाड़ना है उखाड़ लो।” इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा कि जलने वाले जलते रहें। एक अन्य पोस्ट में शिल्पा ने कहा कि जिंदगी में सब कुछ साफ-साफ बोलने के चक्कर में आधे लोग वैसे ही साफ हो गए हैं। 2016 में मेकर्स पर लगाए थे संगीन आरोप शिल्पा शिंदे ने 2015 में टीवी शो भाभीजी घर पर हैं में अंगूरी भाभी का किरदार निभाया था। एक साल बाद शिल्पा ने मेकर्स और प्रोड्यूसर के खिलाफ कई संगीन आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई और शो छोड़ दिया। शिल्पा शिंदे ने हाल ही में पॉडकास्ट के दौरान कहा था, “यह बात कोई नहीं जानता। मैं अब सच बोलने से नहीं डरती। मैंने अपने प्रोड्यूसर के खिलाफ सेक्सुअल हैरेसमेंट का केस दर्ज कराया था क्योंकि मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। कांट्रैक्ट के विवाद को सुलझाने के लिए मैंने ऐसा किया और बाद में सेटलमेंट करके मैं उस स्थिति से बाहर आ गई।” शिल्पा ने आगे दावा किया कि वे खुद लॉ बैकग्राउंड से आती हैं और पुलिस का कहना था कि अगर एफआईआर दर्ज करानी है, तो गंभीर आरोप लिखने ही होंगे।

शिल्पा शिंदे पर सीएम फडणवीस से कानूनी कार्रवाई की मांग:प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के झूठे आरोप लगाए; शिल्पा का पोस्ट- 'जो उखाड़ना है उखाड़ लो'

शिल्पा शिंदे पर सीएम फडणवीस से कानूनी कार्रवाई की मांग:प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के झूठे आरोप लगाए; शिल्पा का पोस्ट- 'जो उखाड़ना है उखाड़ लो'

टेलीविजन एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे के एक हालिया खुलासे पर ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने कड़ी आपत्ति जताई है। शिल्पा ने कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के पॉडकास्ट में माना था कि उन्होंने टीवी शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ के प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) के झूठे आरोप लगाए थे। इस बयान के बाद एसोसिएशन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में हस्तक्षेप कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच शिल्पा ने एक वीडियो शेयर कर आलोचकों को जवाब दिया है। झूठे आरोपों से असली पीड़ितों को नुकसान ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर शिल्पा शिंदे के इस कबूलनामे पर गहरी निराशा जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे कदमों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि यौन उत्पीड़न के झूठे आरोपों से किसी भी व्यक्ति के सम्मान, परिवार, बच्चों, करियर और मानसिक स्थिति को कभी न ठीक होने वाला नुकसान पहुंचता है। इससे समाज में उस व्यक्ति की छवि हमेशा के लिए खराब हो जाती है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से दखल की मांग एसोसिएशन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की अपील की है। AICWA के मुताबिक, अगर यह साबित होता है कि किसी ने जानबूझकर झूठे आरोप लगाए हैं, तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। एसोसिएशन ने कहा कि जब कोई जानबूझकर ऐसे झूठे केस करता है, तो इससे उन असली पीड़ितों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगते हैं जो न्याय की उम्मीद में आगे आते हैं। इससे बॉलीवुड और फिल्म इंडस्ट्री में प्रताड़ना झेलने वाले असली लोगों को अपनी बात रखने में मुश्किल होगी। ‘जो उखाड़ना है उखाड़ लो’ सोशल मीडिया पर लगातार हो रही आलोचना के बीच शिल्पा शिंदे ने इंस्टाग्राम पर एक नया वीडियो पोस्ट कर अपना बचाव किया है। उन्होंने अपनी तस्वीरों और वीडियो के साथ एक रील शेयर की, जिस पर लिखा था, “एक महिला बनो, हमेशा यह कहने के लिए तैयार रहो कि जो उखाड़ना है उखाड़ लो।” इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा कि जलने वाले जलते रहें। एक अन्य पोस्ट में शिल्पा ने कहा कि जिंदगी में सब कुछ साफ-साफ बोलने के चक्कर में आधे लोग वैसे ही साफ हो गए हैं। 2016 में मेकर्स पर लगाए थे संगीन आरोप शिल्पा शिंदे ने 2015 में टीवी शो भाभीजी घर पर हैं में अंगूरी भाभी का किरदार निभाया था। एक साल बाद शिल्पा ने मेकर्स और प्रोड्यूसर के खिलाफ कई संगीन आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई और शो छोड़ दिया। शिल्पा शिंदे ने हाल ही में पॉडकास्ट के दौरान कहा था, “यह बात कोई नहीं जानता। मैं अब सच बोलने से नहीं डरती। मैंने अपने प्रोड्यूसर के खिलाफ सेक्सुअल हैरेसमेंट का केस दर्ज कराया था क्योंकि मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। कांट्रैक्ट के विवाद को सुलझाने के लिए मैंने ऐसा किया और बाद में सेटलमेंट करके मैं उस स्थिति से बाहर आ गई।” शिल्पा ने आगे दावा किया कि वे खुद लॉ बैकग्राउंड से आती हैं और पुलिस का कहना था कि अगर एफआईआर दर्ज करानी है, तो गंभीर आरोप लिखने ही होंगे।

पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी विशेष: “पश्चिम बंगाल में वंशवाद की राजनीति का कोई स्थान नहीं है”

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चुनाव में हार के बाद टीएमसी की आंतरिक कलह बढ़ गई है, ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि 61 विधायक अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ उनके गुट का समर्थन करते हैं। जालसाजी और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने से पार्टी के भविष्य और ममता बनर्जी की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। n18oc_breaking-newsn18oc_ Indian18oc_politicsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube

दावा- ट्रम्प सरकार की जासूसी करा रहा इजराइल:अमेरिकी रक्षा विभाग में गंभीर खुफिया खतरे का अलर्ट; इजराइल बोला- आरोप झूठे

दावा- ट्रम्प सरकार की जासूसी करा रहा इजराइल:अमेरिकी रक्षा विभाग में गंभीर खुफिया खतरे का अलर्ट; इजराइल बोला- आरोप झूठे

अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं। इस बीच अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के भीतर यह चिंता बढ़ गई है कि इजराइल अमेरिकी अधिकारियों और ट्रम्प सरकार की अंदरूनी जानकारी जुटाने के लिए जासूसी की कोशिश कर रहा है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक दो मौजूदा और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) ने हाल ही में इजराइल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे का स्तर बढ़ाकर ‘क्रिटिकल’ कर दिया है। यह एजेंसी का सबसे गंभीर अलर्ट माना जाता है। अमेरिका और इजराइल जैसे बेहद करीबी सहयोगियों के बीच ऐसा होना बेहद असाधारण माना जाता है। हालांकि इजराइल ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इजराइली दूतावास का कहना है कि वह अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी नहीं करता और उसकी खुफिया एजेंसियां सहयोगियों नहीं, बल्कि दुश्मनों पर नजर रखती हैं। फोन-कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं करते अधिकारी काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे का स्तर बढ़ाने का सबसे ज्यादा असर उन अमेरिकी अधिकारियों पर पड़ सकता है जो इजराइल की यात्रा करते हैं या इजराइली अधिकारियों के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं। हालांकि अमेरिका और इजराइल के बीच खुफिया जानकारी साझा करने का सहयोग फिलहाल जारी रहेगा। एक अमेरिकी अधिकारी ने NBC को बताया कि अमेरिका पहले से ही अपने सीनियर अधिकारियों की इजराइल यात्रा के दौरान खास सावधानी बरतता है। अमेरिकी अधिकारी इस दौरान अपने फोन-लैपटॉप का इस्तेमाल करने से बचते हैं। इसकी जगह वे अस्थायी मोबाइल फोन और अलग कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं। कई बार वे होटल के कमरों या ऐसी जगहों पर संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करने से भी बचते हैं, जहां निगरानी का खतरा हो सकता है।इसकी वजह यह है कि इजराइली खुफिया एजेंसियां जानकारी जुटाने के मामले में काफी आक्रामक मानी जाती हैं। हालांकि अधिकारियों ने यह भी कहा कि ऐसा कोई एक बड़ा घटनाक्रम नहीं था जिसकी वजह से खतरे का स्तर अचानक बढ़ाया गया हो। इसके बजाय कई घटनाओं और आकलनों के आधार पर यह फैसला लिया गया। ट्रम्प ने फोन पर नेतन्याहू को गाली दी थी यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान को लेकर ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। अप्रैल में युद्धविराम के बाद ट्रम्प ईरान के साथ एक बड़े समझौते की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नेतन्याहू का मानना है कि ईरान किसी समझौते का पालन नहीं करेगा। इस बीच लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियानों को लेकर भी अमेरिका और इजराइल के बीच मतभेद की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हाल ही में ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच फोन पर तीखी बातचीत भी हुई थी। बाद में ट्रम्प ने स्वीकार किया कि उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री को अपशब्द कहे थे। इससे यह अटकलें और तेज हो गईं कि दोनों नेताओं के बीच मध्य पूर्व की रणनीति को लेकर गंभीर मतभेद हैं। अमेरिका-इजराइल के रिश्तों में पहले भी कड़वाहट दिखी भले ही अमेरिका और इजराइल बहुत पक्के दोस्त माने जाते हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच खुफिया स्तर पर अविश्वास और जासूसी का पुराना इतिहास रहा है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां पहले भी कई बार इजराइल की जासूसी गतिविधियों को लेकर अलर्ट का स्तर बढ़ा चुकी हैं और दोनों के बीच बड़े विवाद हुए हैं। 1. जोनाथन पोलार्ड केस (1985) जोनाथन पोलार्ड अमेरिका की नौसेना खुफिया एजेंसी में काम करता था। 1985 में उस पर आरोप लगा कि उसने अमेरिका के कई गोपनीय दस्तावेज इजराइल को दिए। पोलार्ड का कहना था कि वह इजराइल की मदद करना चाहता था, लेकिन अमेरिका ने इसे जासूसी माना। जांच के दौरान वह इजराइल के दूतावास में शरण लेने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे गिरफ्तार कर लिया गया। 1987 में अमेरिकी अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। इस मामले से अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में तनाव आ गया। करीब 30 साल जेल में रहने के बाद 2015 में पोलार्ड को पैरोल पर रिहा किया गया। 2020 में वह इजराइल चला गया, जहां उसका स्वागत एक राष्ट्रीय नायक की तरह किया गया। यह मामला आज भी अमेरिका में उन सबसे बड़े जासूसी मामलों में गिना जाता है, जिनमें किसी अमेरिकी नागरिक ने किसी सहयोगी देश के लिए जासूसी की थी। यह पहली बार था जब अमेरिका ने इजराइल को लेकर अपनी काउंटर-इंटेलिजेंस चौकसी को उच्चतम स्तर पर कर दिया था। 2. बेन-अमी कादिश केस (2008) बेन-अमी कादिश अमेरिकी सेना के लिए काम कर चुके एक मैकेनिकल इंजीनियर थे। 2008 में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने 1980 के दशक में अमेरिका के कई गोपनीय दस्तावेज इजराइल को दिए थे। अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, इन दस्तावेजों में मिसाइल रक्षा प्रणाली, लड़ाकू विमानों और परमाणु हथियारों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी शामिल थी। आरोप था कि कादिश ने यह जानकारी एक इजराइली संपर्क को सौंपी थी। कादिश ने बाद में एक आरोप स्वीकार किया और 2009 में उन्हें सजा सुनाई गई। हालांकि उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें जेल नहीं भेजा गया, बल्कि जुर्माना और निगरानी जैसी सजा दी गई। 3. स्टिंगरे जासूसी विवाद (2019) 2019 में अमेरिकी मीडिया में एक रिपोर्ट आई, जिसमें दावा किया गया कि व्हाइट हाउस और वाशिंगटन के कुछ संवेदनशील इलाकों के आसपास संदिग्ध ‘स्टिंगरे’ डिवाइस पाए गए थे। ये नकली मोबाइल टावर की तरह काम करके आसपास के मोबाइल फोनों से जानकारी जुटा रहे थे। जांच एजेंसियों को शक था कि इन उपकरणों के पीछे इजराइल हो सकता है और इनका मकसद राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके करीबी अधिकारियों की गतिविधियों और बातचीत पर नजर रखना था। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने कभी सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा कि इजराइल दोषी साबित हो गया है। दूसरी ओर, इजराइल ने आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि वह अमेरिका में जासूसी नहीं करता।