इंपैक्ट फीचर:जेईई-एडवांस्ड 2026 में एलन का ऐतिहासिक कीर्तिमान, एलन के क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ऑल इंडिया में टॉपर, टॉप-10 में एलन क्लासरूम से

जेईई-एडवांस्ड 2026 रिजल्ट्स में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा ने लगातार तीसरे वर्ष ऑल इंडिया रैंक-1 देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इन रिजल्ट्स के साथ एलन ने अब तक आईआईटी-जेईई में 7 बार ऑल इंडिया रैंक-1 दिए हैं तथा अपने इतिहास में दूसरी बार ऑल इंडिया रैंक-1, 2 और 3 को दोहराया है। इससे पहले वर्ष 2016 में भी एलन ने यह उपलब्धि हासिल की थी। एलन के विद्यार्थियों ने देश की टॉप-10 रैंक में से 6, टॉप 50 में 24 क्लासरूम स्टूडेंट्स रहे हैं। यह प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि राष्ट्रीय स्तर पर टॉप रैंकर्स तैयार करने में एलन देश का सबसे सफल और लगातार प्रदर्शन करने वाला संस्थान है। देशभर में एलन की सफलता की अगुआई एलन के कोटा क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने की। शुभम ने 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की। श्रेष्ठता के दौर को जारी रखते हुए एलन के ही क्लासरूम स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने 360 में से 329 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-2 तथा जतिन चाहर ने 319 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-3 प्राप्त की। इसके साथ ही ऑल इंडिया गर्ल्स टॉपर आरोही देशपांडे भी एलन कोटा क्लासरूम से है। आरोही ने 280 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-77 प्राप्त की है। इसके साथ ही एलन ऑनलाइन लाइव कोर्स से यशवर्धन ने ऑल इंडिया रैंक-52 प्राप्त कर ऑनलाइन में बेस्ट रिजल्ट दिया है। टाॅप रैंकर्स की सूची में एलन क्लासरूम प्रोग्राम के स्टूडेंट्स अर्नव गौतम (एआईआर-7), कनिष्क जैन (एआईआर-8), दर्श सिक्का (एआईआर-10) हासिल करते हुए देश की टॉप-10 रैंक में सफलता की संख्या 6 तक पहुंचा दी है। टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स टॉप-10 से आगे बढ़ते हुए देश की टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स, टॉप-50 में 24 स्टूडेंट्स शामिल हैं। देश के 7 में से पांच आईआईटी जोन टाॅपर एलन क्लासरुम से हैं। इसमें दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, भुवनेश्वर और रूडकी जोन टाॅपर शामिल हैं। स्टूडेंट्स को बधाई देते हुए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि “एलन उत्कृष्टता में विश्वास रखता है और ये परिणाम स्टूडेंट्स की सफलता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। एलन ने क्वालिटी और क्वांटिटि दोनों ही तरह से असाधारण परिणाम दिए हैं। एलन ने हर ब्रेकेट टाॅप-50, टाॅप-100, ऑफलाइन और ऑनलाइन हर क्षेत्र में बेहतर परिणाम रहे हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद सभी सेंटर्स पर उत्साह का माहौल है, क्योंकि देश के हर कोने से, ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक एलन स्टूडेंट्स ने सफलता प्राप्त की है। पिछले दो वर्षों में आईआईटी में प्रवेश पाने वाला प्रत्येक चैथा स्टूडेंट एलन से रहा है। हमें अपने स्टूडेंट्स, फैकल्टीज और एलन टीम पर गर्व है। उन्होंने आगे कहा कि एलन परिणामों की पारदर्शिता और प्रमाणिकता बनाए रखने के लिए संस्थान पिछले तीन वर्षों से देश की अग्रणी ऑडिट फर्म ई-वाय से अपने स्टूडेंट्स के रिकाॅर्ड का वेलिडेशन करवा रहा है। इस उपलब्धि के साथ एलन ने अब तक सात बार आईआईटी-जेईई में ऑल इंडिया रैंक-1 प्रदान की है। इससे पहले वर्ष 2025 में रजित गुप्ता तथा वर्ष 2024 में वेद लाहोटी ने एलन कोटा के क्लासरूम प्रोग्राम से एआईआर-1 हासिल की थी। उनसे पहले चित्रांग मुर्डिया (2014), अमन बंसल (2016), कार्तिकेय गुप्ता (2019) और मृदुल अग्रवाल (2021) ने भी आईआईटी-जेईई में एआईआर-1 प्राप्त की थी। हर चुनौती मेरे लिए मोटिवेशन होती हैः शुभम कुमार एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने जेईई-एडवांस्ड 2026 में 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की। शुभम ने जेईई मेन में 100 परसेंटाइल स्कोर किया था और ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल की थी। मूलतः गया बिहार के साधारण परिवार से आने वाले शुभम की सफलता लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। पिछले दो वर्षों से एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ने साबित किया है कि सही गाइडेंस, डिसिप्लिन, रेगुलर प्रेक्टिस और काॅन्फिडेंस से बेहतर परिणाम दिए जा सकते हैं। शुभम की इस सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पिता शिवकुमार गया में हार्डवेयर की दुकान संचालित करते हैं, जबकि मां कंचन देवी गृहिणी हैं। शुभम की बड़ी बहन वर्तमान में आईआईटी पटना में कंप्यूटर साइंस से बीटेक कर रही हैं। एलन के साथ घर का शैक्षणिक माहौल और परिवार का निरंतर सहयोग शुभम की सफलता की मजबूत नींव बना। शुभम ने बताया कि मेरी सक्सेस का सबसे बड़ा कारण मेरे टीचर्स और परिवार का त्याग और विश्वास बहुत महत्वपूर्ण रहा। पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, जबकि मां ने हर भावनात्मक एवं मानसिक मजबूती दी। मैंने हमेशा फैकल्टीज की हर बात को गंभीरता से सुना और उन्हीं के बताए हुए तरीके को फॉलो किया। जब भी कोई टॉपिक कठिन लगता था, मैं बार-बार डाउट पूछता था। एलन की फैकल्टीज ने हर कॉन्सेप्ट को बेसिक्स से समझाया, जिससे मेरी नींव बहुत मजबूत हुई। मुझे लगता है कि अगर छात्र अपने टीचर्स पर भरोसा करके डिसिप्लिन के साथ पढ़ाई करें, तो बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। मैं रोजाना 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते था। क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को उसी दिन रिवाइज करना मेरे डेली रूटीन में शामिल था। डेली प्रश्नों की प्रैक्टिस करते थे और कमजोर टाॅपिक्स पर विशेष फोकस करता था। जेईई की तैयारी में कई बार प्रेशर आ जाता है, लेकिन मैंने उसे कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। मैंने हर चुनौती को मोटिवेशन में बदला। मेरा पूरा फोकस सिर्फ अपने लक्ष्य पर था। अब मैं देश के आईआईटी, मुम्बई की सीएस ब्रांच से बीटेक करूंगा। मेरी पढ़ाई के लिए पूरा परिवार कोटा शिफ्ट हो गया: आरोही जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 77 प्राप्त करने के साथ ऑल इंडिया गर्ल टाॅपर रही आरोही देशपांडे सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और नियमित मेहनत को दिया। पुणे निवासी आरोही ने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे चार वर्षों की निरंतर तैयारी और अनुशासित दिनचर्या रही है। उसने कहा कि कभी रैंक के बारे में ज्यादा नहीं सोचा, बल्कि अपना पूरा ध्यान कॉन्सेप्ट्स को मजबूत करने और नियमित अभ्यास पर रखा। आरोही ने 10वीं कक्षा में 96.7 प्रतिशत तथा 12वीं बोर्ड परीक्षा में 97.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इससे पहले जेईई मेन में
अमेरिका का पहला एआई स्कूल:हाईटेक लैब होते हुए भी बच्चों को दिमाग दौड़ाने के लिए प्रोत्साहन, कोशिश यही कि इंसानी खूबियां बची रहें

जॉर्जिया राज्य के हार्मनी एलीमेंट्री स्कूल की लाइब्रेरी में पहली क्लास के बच्चे रंग-बिरंगे प्लास्टिक ब्लॉक्स से घर बनाने में जुटे हैं। टीचर शानाज लखानी प्लास्टिक के खिलौने को दिखाकर पूछती हैं,‘यह हमारा ‘यूजर’ है। हमें इसके लिए मजबूत घर बनाना है, जो भूकंप में भी न गिरे।’ टीचर यहां बच्चों को ‘यूजर एक्सपीरियंस’ और ‘एआई एप्लीकेशंस’ जैसे भारी-भरकम तकनीकी शब्द सिखा रही हैं। वाइटबोर्ड पर डेटा साइंस और प्रोग्रामिंग के रंग-बिरंगे ट्राएंगल्स बने हैं। पर, 7 साल के इन मासूमों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसका एआई से क्या कनेक्शन है, वे तो बस अपनी टीचर की गोद में बैठकर, दोस्तों के साथ मिलकर खिलौनों का घर बनाने का आनंद ले रहे हैं। भविष्य की कल्पनाओं में अक्सर ऐसे स्कूल दिखते हैं जहां रोबोट पढ़ा रहे हों और बच्चे चैटबॉट्स से बातें कर रहे हों। लेकिन, हकीकत में यह स्कूल तकनीक से ज्यादा इंसानी जुड़ाव पर टिका है। असली शिक्षा वही है जहां टीचर्स का व्यक्तिगत मार्गदर्शन, बच्चों का आपसी जुड़ाव और खुद से सोचने की क्षमता अहम रहती है। इस हाई स्कूल को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘नौकरियां बदलने वाली’ रिपोर्ट देखकर डिजाइन किया गया था। पूर्व छात्र मोहम्मद रिजवान व जोसेफ श्राग ने बताया कि ‘एआई स्कूल’ का दावा हकीकत से अलग था। उन्होंने कहा कि हम एआई का उतना इस्तेमाल नहीं करते। रोबोटिक्स जैसी कुछ क्लास छोड़ दें तो बाकी पढ़ाई पारंपरिक तरीके से होती है। भाषा व इतिहास में टीचर्स बच्चों से हाथ से निबंध लिखवाते हैं ताकि वे एआई से मदद न ले सकें। स्कूल के मैकेनिकल इंजीनियरिंग रूम में कार्डबोर्ड से बड़ा स्पिनिंग गेम बना रहे एक छात्र से जब पूछा गया कि क्या उसने इसके लिए किसी एआई टूल या चैटबॉट का इस्तेमाल किया? तो उसका जवाब था, ‘नहीं, मैं सिर्फ अपने दिमाग का इस्तेमाल कर रहा हूं।’ इतिहास की क्लास में जब बच्चे चैटबॉट से सवाल-जवाब करते हैं, तो टीचर केसी होलीक्रॉस उनका मार्गदर्शन करती हैं। पैरेंट लिडिया क्लार्क कहती हैं,‘हमारे बच्चे तकनीक की वजह से नहीं, बल्कि स्कूल के सुरक्षित माहौल और बेहतरीन टीचर्स के मानवीय जुड़ाव की वजह से आगे बढ़ रहे हैं। एआई सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी ‘खान एकेडमी’ के प्रमुख सलमान खान ने स्वीकार किया है कि कई छात्रों के लिए एआई टूल से पढ़ना बेहद निराशाजनक रहा, क्योंकि मशीनें बच्चों की मानसिक उलझन को इंसानों की तरह नहीं समझ सकतीं। ’ स्कूल के अधिकारियों ने भी अंततः माना कि उनके लिए एआई का मतलब सिर्फ कोडिंग सिखाना नहीं, बल्कि उन ‘ड्यूरेबल स्किल्स’ (जैसे- नैतिक सोच, आपसी सहयोग और रचनात्मकता को बचाना है जो मशीनें कभी नहीं सीख सकतीं। आपसी चर्चा, एक्टिविटी को महत्व ताकि मौलिक सोच बनी रहे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने 800 से ज्यादा रिसर्च पेपर्स की स्टडी करके चेतावनी दी है कि एआई टूल तुरंत काम पूरा करने में तो मदद करते हैं, पर लंबे वक्त में बच्चों की खुद सोचने की क्षमता खत्म हो रही है। इसे वैज्ञानिकों ने ‘कॉग्निटिव सरेंडर’ कहा है, जहां इंसान अपने फैसले मशीनों पर छोड़ देता है। हार्मनी स्कूल इस खतरे को भांपते हुए ‘ह्यूमन टच’ पर जोर दे रहा है। यहां एआई सिर्फ टूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जबकि मुख्य फोकस आपसी चर्चा, फिजिकल एक्टिविटी और टीचर्स के मार्गदर्शन पर है ताकि बच्चों की मौलिक सोच बनी रहे।
सीएम फडणवीस की पत्नी ने ई-रिक्शा चलाया, VIDEO:एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर पैसेंजर बनीं, पिंक ई-रिक्शा पहल की शुरुआत हुई

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर रविवार को भामला फाउंडेशन के विमेन-लेड ग्रीन मोबिलिटी प्रोग्राम के तहत पिंक ई-रिक्शा सहायता पहल की शुरुआत की गई। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने ई-रिक्शा चलाया। वहीं, रिक्शा में उनके पीछे बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर बैठी थीं। देखें कार्यक्रम की 2 तस्वीरें- भूमि ने पिंक ई-रिक्शा पहल की तारीफ की मीडिया से बातचीत करते हुए भूमि ने कार्यक्रम को लेकर कहा कि यह सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी पहल नहीं है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और आर्थिक आजादी को भी बढ़ावा देने वाला कदम है। भूमि ने कहा कि जब भामला फाउंडेशन ने उन्हें इस पहल के बारे में बताया, तो उन्होंने तुरंत इसका हिस्सा बनने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत महिला ड्राइवरों को ई-रिक्शा दिए जाएंगे, जिससे उन्हें रोजगार और आर्थिक मजबूती मिलेगी। भूमि ने कहा कि अगर देश की महिलाएं सक्षम होंगी तो देश और तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की बातें तो अक्सर होती हैं, लेकिन भामला फाउंडेशन ने इसे जमीन पर उतारकर दिखाया है। मुंबई में 1000 ई-रिक्शा लॉन्च होंगे भूमि ने उम्मीद जताई कि पिंक ई-रिक्शा की यह पहल पूरे देश में फैलेगी। उन्होंने बताया कि मुंबई में 1000 पिंक ई-रिक्शा लॉन्च किए जा रहे हैं, जबकि महाराष्ट्र में 12 हजार ई-रिक्शा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। भामला फाउंडेशन मुंबई की एक गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) है। इसकी शुरुआत साल 1995 में आसिफ भामला ने की थी। शुरुआत में यह संस्था सामाजिक और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मुद्दों पर काम करती थी। बाद में इसने अपने काम का दायरा बढ़ाया। आज यह संस्था पर्यावरण बचाने, स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने, युवाओं को आगे बढ़ाने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई अभियान चलाती है। वर्कफ्रंट की बात करें तो भूमि पेडनेकर आखिरी बार अमेजन प्राइम की वेब सीरीज ‘दलदल’ में नजर आई थीं। इस सीरीज में उन्होंने डीसीपी रीटा फरेरा का किरदार निभाया था। भूमि पेडनेकर से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… संघर्ष, ट्रॉमा-रिजेक्शन से उठकर स्ट्रॉन्ग एक्ट्रेस बनीं भूमि पेडनेकर:बोलीं- स्कूल में बुलिंग होती थी, तभी सोचा कि एक दिन सबको कुछ बनकर दिखाऊंगी संघर्ष, ट्रॉमा, रिजेक्शन और सामाजिक तानों के बीच खुद को साबित करने वाली अभिनेत्री का नाम है भूमि पेडनेकर। मुंबई की चमकदार फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब शुरुआत आत्म-संदेह, असुरक्षा और निजी आघातों से भरी हो। पूरी खबर यहां पढ़ें…
सीएम फडणवीस की पत्नी ने ई-रिक्शा चलाया, VIDEO:एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर पैसेंजर बनीं, पिंक ई-रिक्शा पहल की शुरुआत हुई

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर रविवार को भामला फाउंडेशन के विमेन-लेड ग्रीन मोबिलिटी प्रोग्राम के तहत पिंक ई-रिक्शा सहायता पहल की शुरुआत की गई। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने ई-रिक्शा चलाया। वहीं, रिक्शा में उनके पीछे बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर बैठी थीं। देखें कार्यक्रम की 2 तस्वीरें- भूमि ने पिंक ई-रिक्शा पहल की तारीफ की मीडिया से बातचीत करते हुए भूमि ने कार्यक्रम को लेकर कहा कि यह सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी पहल नहीं है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और आर्थिक आजादी को भी बढ़ावा देने वाला कदम है। एक्ट्रेस ने कहा कि जब भामला फाउंडेशन ने उन्हें इस पहल के बारे में बताया, तो उन्होंने तुरंत इसका हिस्सा बनने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि इसके तहत महिला ड्राइवरों को ई-रिक्शा दिए जाएंगे, जिससे उन्हें रोजगार और आर्थिक मजबूती मिलेगी। भूमि ने कहा कि अगर देश की महिलाएं सक्षम होंगी तो देश और तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की बातें तो अक्सर होती हैं, लेकिन भामला फाउंडेशन ने इसे जमीन पर उतारकर दिखाया है। मुंबई में 1000 ई-रिक्शा लॉन्च होंगे भूमि ने उम्मीद जताई कि पिंक ई-रिक्शा की यह पहल पूरे देश में फैलेगी। उन्होंने बताया कि मुंबई में 1000 पिंक ई-रिक्शा लॉन्च किए जा रहे हैं, जबकि महाराष्ट्र में 12 हजार ई-रिक्शा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। भामला फाउंडेशन मुंबई की एक गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) है। इसकी शुरुआत साल 1995 में आसिफ भामला ने की थी। शुरुआत में यह संस्था सामाजिक और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मुद्दों पर काम करती थी। बाद में इसने अपने काम का दायरा बढ़ाया। आज यह संस्था पर्यावरण बचाने, स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने, युवाओं को आगे बढ़ाने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई अभियान चलाती है। वर्कफ्रंट की बात करें तो भूमि पेडनेकर आखिरी बार अमेजन प्राइम की वेब सीरीज ‘दलदल’ में नजर आई थीं। इस सीरीज में उन्होंने डीसीपी रीटा फरेरा का किरदार निभाया था। भूमि पेडनेकर से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… संघर्ष, ट्रॉमा-रिजेक्शन से उठकर स्ट्रॉन्ग एक्ट्रेस बनीं भूमि पेडनेकर:बोलीं- स्कूल में बुलिंग होती थी, तभी सोचा कि एक दिन सबको कुछ बनकर दिखाऊंगी संघर्ष, ट्रॉमा, रिजेक्शन और सामाजिक तानों के बीच खुद को साबित करने वाली अभिनेत्री का नाम है भूमि पेडनेकर। मुंबई की चमकदार फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब शुरुआत आत्म-संदेह, असुरक्षा और निजी आघातों से भरी हो। पूरी खबर यहां पढ़ें…
बीजेपी से बाहर निकलने के बाद, क्या अन्नामलाई तमिलनाडु उपचुनाव में अपनी ताकत का परीक्षण करेंगे? | भारत समाचार

आखरी अपडेट:02 जून, 2026, 14:00 IST यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अन्नामलाई एक जन आंदोलन शुरू करने का इरादा रखते हैं जिसका उद्देश्य युवा मतदाताओं, विशेषकर जेन जेड के साथ सीधा संबंध बनाना है। के अन्नामलाई ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और भाजपा से ‘सौहार्दपूर्ण निकास’ की मांग की है। (एक्स) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से बाहर निकलने के बाद के अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं, अब तमिलनाडु के राजनीतिक हलकों में एक महत्वपूर्ण सवाल पर ध्यान केंद्रित हो रहा है: क्या पूर्व आईपीएस अधिकारी राज्य के उपचुनावों में अपनी ताकत का परीक्षण करेंगे? राज्य में तेजी से बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच इस सवाल ने तूल पकड़ लिया है। वर्तमान में पांच विधानसभा सीटें खाली हैं, जिससे आने वाले महीनों में उपचुनाव की संभावना बन रही है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद पेरम्बूर को बरकरार रखने का विकल्प चुनने के बाद त्रिची पूर्व सीट खाली कर दी, जिसमें उनके टीवीके ने राज्य में जीत हासिल की। इसके अलावा, चार एआईएडीएमके विधायकों ने विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) में शामिल होने से पहले पिछले महीने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि रिक्तियों की संख्या और बढ़ सकती है. कहा जा रहा है कि कुछ और विधायक अपनी सीटों से इस्तीफा देने और पाला बदलने पर विचार कर रहे हैं, जिससे संभावित रूप से भविष्य में किसी भी उपचुनाव की कवायद का दायरा बढ़ जाएगा। यह भी पढ़ें | बाहर निकलने की अफवाहें, नई पार्टी की चर्चा और एक दिल्ली यात्रा: अन्नामलाई की कहानी कैसे सामने आई यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अन्नामलाई खुद को उस स्थिति के लिए तैयार कर रहे हैं जिसे उनके करीबी सूत्र एक बड़े राजनीतिक प्रोजेक्ट के रूप में वर्णित करते हैं। उनकी योजनाओं से परिचित लोगों का कहना है कि पूर्व भाजपा नेता इस साल के अंत में एक जन आंदोलन शुरू करने का इरादा रखते हैं, जिसका उद्देश्य युवा मतदाताओं, विशेष रूप से जेन जेड के साथ सीधा जुड़ाव बनाना है। यह आंदोलन एक राजनीतिक पार्टी के अग्रदूत के रूप में काम करने की उम्मीद है जिसे अन्नामलाई आने वाले महीनों में बनाने की योजना बना रहे हैं। हालांकि कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, अन्नामलाई ने खुद बार-बार संकेत दिया है कि एक बड़ी राजनीतिक पहल पर काम चल रहा है। अपने भविष्य पर तीव्र अटकलों के बीच हाल ही में पत्रकारों से बात करते हुए, उन्होंने समर्थकों से “दो दिन इंतजार करने” के लिए कहा, एक ऐसी टिप्पणी जिसने एक नए राजनीतिक अध्याय की उम्मीदों को और बढ़ा दिया। समय महत्वपूर्ण है. हाल के महीनों में अन्नामलाई के राजनीतिक संदेश ने तेजी से सुझाव दिया है कि वह भाजपा और पारंपरिक द्रविड़ प्रतिष्ठान दोनों से परे एक अवसर देखते हैं। उन्होंने बार-बार तर्क दिया है कि तमिलनाडु का दशकों पुराना द्रविड़ राजनीतिक मॉडल ख़त्म हो रहा है और मतदाता, विशेषकर युवा पीढ़ी, एक नए विकल्प की तलाश कर रहे हैं। अन्नामलाई के करीबी सूत्रों ने सोमवार को सीएनएन-न्यूज18 को बताया था कि तमिलनाडु के पूर्व भाजपा प्रमुख का मानना है कि विजय के एक प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में उभरने के बाद राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में बुनियादी बदलाव आया है। चर्चाओं से अवगत एक सूत्र ने कहा, “आज विजय से लड़ने के लिए कोई नेता नहीं है। द्रविड़ युग खत्म हो गया है। केवल भाषा के मुद्दों पर केंद्रित राजनीति अब काम नहीं करेगी। राज्य की राजनीति बदल गई है।” राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह प्रशंसा पहली बार मतदाताओं के बीच विजय की बढ़ती अपील के प्रति अन्नामलाई की मान्यता को दर्शा सकती है। लेकिन इससे एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है: क्या अन्नामलाई खुद को विजय की पूरक शक्ति या अंतिम विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं? उनके सामने चुनौती बड़ी है. दक्षिण में भाजपा के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक के रूप में उभरने और तमिलनाडु में पार्टी की दृश्यता में उल्लेखनीय रूप से विस्तार करने के बावजूद, अन्नामलाई ने कोई चुनाव नहीं जीता है। फिर भी उनके समर्थकों का तर्क है कि केवल चुनावी जीत ही उनकी निरंतर प्रासंगिकता को स्पष्ट नहीं करती है। एक हाई-प्रोफाइल पुलिस करियर के बाद राजनीति में प्रवेश करने के बाद से, उन्होंने एक मजबूत सोशल मीडिया फॉलोइंग बनाई है, एक सत्ता-विरोधी प्रचारक के रूप में प्रतिष्ठा बनाई है और राज्य की सबसे पहचानने योग्य राजनीतिक हस्तियों में से एक बन गए हैं। यदि ऐसा होता है तो उपचुनाव प्रतियोगिता महज़ एक स्थानीय चुनाव से कहीं अधिक बन सकती है। यह अन्नामलाई को यह परखने का मौका दे सकता है कि क्या उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता भाजपा के ढांचे के बाहर वोटों में तब्दील हो सकती है और क्या द्रविड़ प्रमुखों और विजय की तेजी से बढ़ती टीवीके के बीच एक राजनीतिक ताकत के लिए जगह है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पूर्णिमा मुरली सीएनएन-न्यूज18 की वरिष्ठ विशेष संवाददाता पूर्णिमा मुरली ने तमिलनाडु में नागरिक और राजनीतिक मुद्दों पर एक दशक से अधिक समय तक रिपोर्टिंग की है। वह पिछले कुछ वर्षों से चैनल के लिए चेन्नई ब्यूरो का नेतृत्व कर रही हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया बीजेपी से बाहर निकलने के बाद, क्या अन्नामलाई तमिलनाडु उपचुनाव में अपनी ताकत का परीक्षण करेंगे? 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कंगना रनोट की पहली फिल्म देख पैरेंट्स हुए नाराज:गैंगस्टर को लेकर कहा था- समाज क्या सोचेगा, उनकी बेटी कैसी फिल्में कर रही है

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनोट ने अपनी डेब्यू फिल्म गैंगस्टर को लेकर बताया कि यह फिल्म देखने के बाद उनके माता-पिता खुश नहीं थे और फिल्म के कुछ सीन्स को लेकर चिंतित थे। अपनी आगामी फिल्म भारत भाग्य विधाता के प्रमोशन के दौरान एक्ट्रेस ने बताया, “गैंगस्टर देखने के बाद मेरे पिताजी ने कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दी। फिर मैंने माताजी से पूछा, मम्मी, आपको मेरी फिल्म कैसी लगी? तो उन्होंने कहा, नहीं, हमारे समाज में… तुम अभी बहुत छोटी थीं, अंडरएज भी थीं। तुमसे इस तरह के सीन करवा लिए गए।” एक्ट्रेस ने कहा, “मैंने कहा, पूरी फिल्म में आपको वही सीन दिखे? सच कहूं तो मेरा दिल टूट गया था। मुझे बहुत बुरा लगा कि उन्होंने उस फिल्म को इस तरह देखा क्योंकि वे लोग सोच रहे थे कि समाज क्या सोचेगा, कि उनकी बेटी कैसी फिल्में कर रही है।” कंगना ने कहा कि उसी समय उन्होंने फैसला कर लिया था कि वह अपनी फिल्मों को लेकर माता-पिता से किसी खास प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं करेंगी, क्योंकि उनका परिवार फिल्मी दुनिया से नहीं जुड़ा था। ‘क्वीन’ के लिए मिला था अमिताभ बच्चन का पत्र एक्ट्रेस ने बताया कि जब मुझे फिल्म ‘क्वीन’ के लिए अमिताभ बच्चन जी का एक खूबसूरत पत्र मिला, जिसमें उन्होंने मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ की थी, तब मैंने सोचा कि जिस तरह अमिताभ बच्चन मेरे काम को समझ सकते हैं, मेरे पिताजी वैसा नहीं समझ सकते और इसके लिए मैं उनसे नाराज भी नहीं हो सकती, क्योंकि वह कलाकार नहीं हैं। उनका अपना अलग काम है। नेशनल अवॉर्ड मिलने पर परिवार खुश हुआ कंगना ने यह भी बताया कि समय के साथ उनके माता-पिता की सोच बदली। जब उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला तो उनका परिवार बेहद खुश हुआ। उन्हें लगा कि उनकी बेटी को देश के राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिला है। इसके बाद जब कंगना को पद्मश्री पुरस्कार मिला तो यह उनके परिवार के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उनके मुताबिक, तब उनके माता-पिता को एहसास हुआ कि फिल्मों में काम करते हुए भी सम्मान, पहचान और बड़े नागरिक सम्मान हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद उनके परिवार ने उनके काम को एक अलग नजरिए से देखना शुरू किया। ‘भारत भाग्य विधाता’ में आएंगी नजर कंगना रनोट की अपकमिंग फिल्म भारत भाग्य विधाता वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म संकट की स्थिति में एक सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा दिखाई गई हिम्मत और मानवता की कहानी पर आधारित है। डायरेक्टर मनोज तापड़िया की इस फिल्म में गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, अमृता नामदेव, ईशा डे, प्रिया बेर्डे और आशा शेलार भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
कंगना रनोट की पहली फिल्म देख पैरेंट्स हुए नाराज:गैंगस्टर को लेकर कहा था- समाज क्या सोचेगा, उनकी बेटी कैसी फिल्में कर रही है

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनोट ने अपनी डेब्यू फिल्म गैंगस्टर को लेकर बताया कि यह फिल्म देखने के बाद उनके माता-पिता खुश नहीं थे और फिल्म के कुछ सीन्स को लेकर चिंतित थे। अपनी आगामी फिल्म भारत भाग्य विधाता के प्रमोशन के दौरान एक्ट्रेस ने बताया, “गैंगस्टर देखने के बाद मेरे पिताजी ने कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दी। फिर मैंने माताजी से पूछा, मम्मी, आपको मेरी फिल्म कैसी लगी? तो उन्होंने कहा, नहीं, हमारे समाज में… तुम अभी बहुत छोटी थीं, अंडरएज भी थीं। तुमसे इस तरह के सीन करवा लिए गए।” एक्ट्रेस ने कहा, “मैंने कहा, पूरी फिल्म में आपको वही सीन दिखे? सच कहूं तो मेरा दिल टूट गया था। मुझे बहुत बुरा लगा कि उन्होंने उस फिल्म को इस तरह देखा क्योंकि वे लोग सोच रहे थे कि समाज क्या सोचेगा, कि उनकी बेटी कैसी फिल्में कर रही है।” कंगना ने कहा कि उसी समय उन्होंने फैसला कर लिया था कि वह अपनी फिल्मों को लेकर माता-पिता से किसी खास प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं करेंगी, क्योंकि उनका परिवार फिल्मी दुनिया से नहीं जुड़ा था। ‘क्वीन’ के लिए मिला था अमिताभ बच्चन का पत्र एक्ट्रेस ने बताया कि जब मुझे फिल्म ‘क्वीन’ के लिए अमिताभ बच्चन जी का एक खूबसूरत पत्र मिला, जिसमें उन्होंने मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ की थी, तब मैंने सोचा कि जिस तरह अमिताभ बच्चन मेरे काम को समझ सकते हैं, मेरे पिताजी वैसा नहीं समझ सकते और इसके लिए मैं उनसे नाराज भी नहीं हो सकती, क्योंकि वह कलाकार नहीं हैं। उनका अपना अलग काम है। नेशनल अवॉर्ड मिलने पर परिवार खुश हुआ कंगना ने यह भी बताया कि समय के साथ उनके माता-पिता की सोच बदली। जब उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला तो उनका परिवार बेहद खुश हुआ। उन्हें लगा कि उनकी बेटी को देश के राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिला है। इसके बाद जब कंगना को पद्मश्री पुरस्कार मिला तो यह उनके परिवार के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उनके मुताबिक, तब उनके माता-पिता को एहसास हुआ कि फिल्मों में काम करते हुए भी सम्मान, पहचान और बड़े नागरिक सम्मान हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद उनके परिवार ने उनके काम को एक अलग नजरिए से देखना शुरू किया। ‘भारत भाग्य विधाता’ में आएंगी नजर कंगना रनोट की अपकमिंग फिल्म भारत भाग्य विधाता वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म संकट की स्थिति में एक सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा दिखाई गई हिम्मत और मानवता की कहानी पर आधारित है। डायरेक्टर मनोज तापड़िया की इस फिल्म में गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, अमृता नामदेव, ईशा डे, प्रिया बेर्डे और आशा शेलार भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
रसोई के तौलिये की सफ़ाई के टिप्स: चिपचिपी, चिकने और सस्ते होंगे छूमंतर, 5 जादुई ट्रिक्स से चमकते हुए उठेंगे आपका रसोई का तौलिया

2 जून 2026 को 13:38 IST पर अपडेट किया गया किचन टॉवल क्लीनिंग टिप्स: रसोई के तौलिये से लेकर बर्तनों तक कोनने की चमक वाले किचन टॉवल बहुत जल्दी गंदे, चिपचिपे और कबाड़दार हो जाते हैं। सामान्य समुद्र तट से धुलाई पर भी उपयोग करना आसान नहीं है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो यहां दिए गए 5 आसान और घरेलू छोटे हैक्स की मदद से आप अपनी रसोई के कपड़ों को एक मिनट में नया जैसा चमका सकते हैं। आइये आपको बताते हैं किचन के कपड़ों को साफ करने के कुछ टिप्स। अनुसरण करना : किचन के बर्तनों को एक घंटे के लिए हटा दें ताकि उन्हें नारियल के गर्म पानी में एक अवशेष के रूप में उपयोग किया जा सके। इसके बाद पतले हाथों से राँघकर धो लें, तेल और घी के दाग तुरंत साफ हो जायेंगे छवि: फ्रीपिक अगर प्लास्टिक से बनी प्लास्टिक की बोतलें नहीं बनाई जा रही हैं तो आधा कप सफेद सिरका का इस्तेमाल करें। कच्चे माल के साथ माइक्रोवेव वॉश से बने कपड़े की दुर्गंध गायब हो जाती है, उन पर जमा बिकाऊ भी पूरी तरह से खत्म हो जाते हैं। छवि: फ्रीपिक जिद्दी पीले दागों को साफ करने के लिए जिद्दी पीले दागों वाली जगह पर लगाएं। कुछ देर बाद ब्रूस से राँघकर धो लें, कपड़े के रेशों में फ़ाफ़ मेल बिना मेहनत के आसानी से छूट जाएगा। छवि: फ्रीपिक पीलापन दूर करने के लिए नींबू का रस बेहतरीन काम करता है। गुनगुने पानी में दो नींबू का रस और थोड़ा सा नमक के घोल का टुकड़ा हटा दें। यह सिलिकॉन कपड़ों की तरह काम करता है और कपड़ों को ताजगी देता है। छवि: फ्रीपिक किचन के कपडे को अंदर या छाव में न सुखाएं। हमेशा धूप धूप में ही रखें। धूप की सील बिजनेस बिजनेसमैन की तरह काम करता है, जो फ्लैट्स की बिकी हुई दुकान, बिक्री और कंपनी की महक को जड़ से खत्म कर दिया जाता है। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 2 जून 2026 13:38 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट) किचन टॉवल क्लीनिंग टिप्स (टी) किचन क्लॉथ्स को कैसे साफ करें (टी) किचन टॉवल से ग्रीस हटाएं (टी) किचन क्लीनिंग हैक्स इन हिंदी (टी) किचन टॉवल से बदबू हटाएं (टी) बेकिंग सोडा क्लीनिंग हैक्स (टी) घरेलू रखरखाव टिप्स
अन्नामलाई ने बीजेपी प्रमुख नितिन नबीन को सौंपा इस्तीफा, शाम 4 बजे अमित शाह से करेंगे मुलाकात | भारत समाचार

आखरी अपडेट:02 जून, 2026, 13:25 IST अन्नामलाई ने अपना इस्तीफा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को सौंप दिया, और उनके चेन्नई रवाना होने से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की उम्मीद है। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई की फाइल फोटो। (छवि: पीटीआई) तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रमुख के अन्नामलाई ने मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात के दौरान पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया। शाम 4 बजे उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की उम्मीद है. ऐसी तीव्र अटकलें थीं कि अन्नामलाई, जो नैनार नागेंद्रन द्वारा तमिलनाडु भाजपा प्रमुख के रूप में प्रतिस्थापित किए जाने के बाद से कम प्रोफ़ाइल में हैं, पार्टी से अलग होना चाहते हैं, रिपोर्टों से पता चलता है कि उन्हें अब भाजपा में कोई भविष्य नहीं दिख रहा है। यह एक विकासशील कहानी है। अधिक विवरण जोड़े जाने हैं. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया अन्नामलाई ने बीजेपी चीफ नितिन नबीन को सौंपा इस्तीफा, शाम 4 बजे अमित शाह से करेंगे मुलाकात अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
मुंबई की लाइफलाइन रहे डिब्बावालों का वजूद संकट में:हार्वर्ड ने कभी लॉजिस्टिक्स का मास्टरक्लास बताया था, प्रिंस चार्ल्स खुद देखने आए थे

जब मुंबई पूरी तरह जागी भी नहीं होती, सफेद टोपी और कुर्ते में कुछ लोग साइकिलों पर ऊंचे-ऊंचे टिफिन के ढेर लेकर रेलवे स्टेशनों पर पहुंच जाते हैं। ट्रेन में चढ़ते हैं, शहर पार करते हैं और फिर पैदल या साइकिल से घर का बना गरम खाना दफ्तरों तक पहुंचाते हैं। ये हैं मुंबई के डिब्बावाले- एक ऐसी व्यवस्था, जिसे हार्वर्ड बिजनेस स्कूल ने कम लागत के लॉजिस्टिक्स का मास्टरक्लास बताया और जिसे देखने 2003 में तत्कालीन प्रिंस चार्ल्स खुद मुंबई आए थे। लेकिन आज यही डिब्बावाले वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं। डिब्बावाला व्यवस्था की शुरुआत 19वीं सदी के आखिर में हुई, जब ब्रिटिश राज के दौरान बॉम्बे (अब मुंबई) तेजी से फैल रहा था। दफ्तर जाने वाले लोगों को घर का खाना चाहिए था। बीबीसी वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, 1890 में महादेव बाचचे ने 100 कामगारों के साथ इसे व्यवस्थित रूप दिया। धीरे-धीरे यह व्यवस्था इतनी सटीक हो गई कि बिना किसी एप या जीपीएस के रोज हजारों टिफिन सही पते पर पहुंचने लगे। अपने चरम पर 4,500 डिब्बावाले रोज 50,000 से ज्यादा टिफिन पहुंचाते थे। फिर कोरोना आया और सब बदल गया। दफ्तर बंद हुए, वर्क फ्रॉम होम शुरू हुआ और टिफिन की जरूरत अचानक खत्म हो गई। रिपोर्ट में मुंबई टिफिन बॉक्स सप्लायर्स एसोसिएशन के सचिव किरण गवंडे के हवाले से कहा गया है, ‘लॉकडाउन के बाद से कई लोग हफ्ते में सिर्फ 2-3 दिन दफ्तर जाते हैं। इसका डिब्बावालों पर बड़ा असर हुआ। 2018 में जो संख्या 4,500 थी, वह अब 1,500 रह गई है।’ जो बचे हैं, उनकी हालत भी अच्छी नहीं हैं। बालू शिंदे 20 साल तक डिब्बावाला रहे। रोज 15-20 टिफिन पहुंचाते थे। हर माह 20,000 रुपए कमाते थे। 2020 के अंत तक सिर्फ दो ग्राहक बचे। अब वे ऑटो चलाते हैं। जो टिके हैं, वे दो-दो काम कर रहे हैं। एसोसिएशन अब शिफ्ट आधारित काम की योजना बना रही है। लेकिन अध्यक्ष रामदास कार्वांडे कहते हैं, ‘अभी तो चल रहा है, लेकिन आगे क्या होगा, कह नहीं सकते।’ हर सुबह मुंबई की ट्रेनों में स्टील के टिफिन लिए ये लोग अब भी दिखते हैं। ये एक ऐसी परंपरा को जिंदा रखते हुए जो कभी इस शहर की रफ्तार की पहचान थी, पर अब उसी रफ्तार से पीछे छूटती जा रही है। स्विगी-जोमैटो, क्लाउड किचन और महंगाई ने बढ़ाई डिब्बावालों की चुनौती डिब्बावाला सिर्फ 2,000 रुपए प्रति माह में घर का खाना पहुंचाता था। अब स्विगी और जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी एप स्क्रीन के एक टच पर बिरयानी से बर्गर तक उपलब्ध करा रहे हैं। इस बीच उभरते क्लाउड किचन ने मुकाबला कड़ा कर दिया है। नतीजतन कभी एकछत्र राज करने वाला डिब्बावाला सिस्टम सिमट रहा है। 35 साल से डिब्बावाले रहे बाबन कदम कहते हैं, ‘आज की महंगाई में नई पीढ़ी इस काम में नहीं आएगी। सब बेहतर नौकरी या कारोबार चाहते हैं।’






