कुवैत में फंसी तमिलनाडु की महिला ने मदद मांगी:वीडियो में कहा- 50 दिन से ठीक से खाना नहीं खाया, 2 महीने की सैलरी नहीं मिली

कुवैत में घरेलू काम करने गई तमिलनाडु की एक महिला ने वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई है। महिला ने आरोप लगाया है कि पिछले करीब दो महीने से उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। उसका दावा है कि उसे 50 दिनों से ठीक से खाना नहीं मिला और पिछले दो महीने की सैलरी भी नहीं दी गई। महिला ने अपनी जान को खतरा बताते हुए प्रशासन से उसे बचाकर भारत वापस लाने की अपील की है। महिला की पहचान अनीता के रूप में हुई है। वह कुछ महीने पहले घरेलू काम के लिए कुवैत गई थी। वीडियो में उसने बताया कि कुवैत पहुंचे उसे करीब 3 महीने हो चुके हैं। उसके मुताबिक, वहां पहुंचने के करीब एक महीने बाद से ही उसके साथ बुरा व्यवहार शुरू हो गया था। पिछले दो महीनों से स्थिति और खराब हो गई। कलेक्टर और SP से मदद की गुहार लगाई अनीता ने कल्लाकुरिची जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से भावुक अपील की है। उसने कहा कि उसे किसी तरह वहां से बचाया जाए और सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। अनीता ने कहा कि वह अब यह सब सहन नहीं कर पा रही है और उसे डर है कि उसकी जान जा सकती है। वीडियो में अधिकारियों से मदद की अपील करते हुए महिला ने कहा कि उसे किसी तरह बचाकर भारत ले जाया जाए। महिला ने आशंका जताई कि उसके साथ ऐसा व्यवहार जारी रहा तो उसकी जान भी जा सकती है। अनीता दो बच्चों की मां है अनीता दो बच्चों की मां है। कुवैत जाने के बाद से परिवार उसकी स्थिति को लेकर चिंतित है। वीडियो सामने आने के बाद उसकी मां अनिला ने भी प्रशासन से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। अनिला का आरोप है कि उनकी बेटी को कुवैत भेजने वाले एजेंट ने परिवार के साथ धोखा किया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के साथ वहां बेहद क्रूर व्यवहार किया जा रहा है और उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। खबर अपडेट की जा रही है…
कुवैत में फंसी तमिलनाडु की महिला ने मदद मांगी:वीडियो में कहा- 50 दिन से ठीक से खाना नहीं खाया, 2 महीने की सैलरी नहीं मिली

कुवैत में घरेलू काम करने गई तमिलनाडु की एक महिला ने वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई है। महिला ने आरोप लगाया है कि पिछले करीब दो महीने से उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। उसका दावा है कि उसे 50 दिनों से ठीक से खाना नहीं मिला और पिछले दो महीने की सैलरी भी नहीं दी गई। महिला ने अपनी जान को खतरा बताते हुए प्रशासन से उसे बचाकर भारत वापस लाने की अपील की है। महिला की पहचान अनीता के रूप में हुई है। वह कुछ महीने पहले घरेलू काम के लिए कुवैत गई थी। वीडियो में उसने बताया कि कुवैत पहुंचे उसे करीब 3 महीने हो चुके हैं। उसके मुताबिक, वहां पहुंचने के करीब एक महीने बाद से ही उसके साथ बुरा व्यवहार शुरू हो गया था। पिछले दो महीनों से स्थिति और खराब हो गई। कलेक्टर और SP से मदद की गुहार लगाई अनीता ने कल्लाकुरिची जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से भावुक अपील की है। उसने कहा कि उसे किसी तरह वहां से बचाया जाए और सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। अनीता ने कहा कि वह अब यह सब सहन नहीं कर पा रही है और उसे डर है कि उसकी जान जा सकती है। वीडियो में अधिकारियों से मदद की अपील करते हुए महिला ने कहा कि उसे किसी तरह बचाकर भारत ले जाया जाए। महिला ने आशंका जताई कि उसके साथ ऐसा व्यवहार जारी रहा तो उसकी जान भी जा सकती है। अनीता दो बच्चों की मां है अनीता दो बच्चों की मां है। कुवैत जाने के बाद से परिवार उसकी स्थिति को लेकर चिंतित है। वीडियो सामने आने के बाद उसकी मां अनिला ने भी प्रशासन से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। अनिला का आरोप है कि उनकी बेटी को कुवैत भेजने वाले एजेंट ने परिवार के साथ धोखा किया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के साथ वहां बेहद क्रूर व्यवहार किया जा रहा है और उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। खबर अपडेट की जा रही है…
मूवी रिव्यू- मिर्जापुरः द फिल्म:मुन्ना का पागलपन, कालीन भैया का ठहराव और गुड्डू का गुस्सा, ‘मिर्जापुर’ में फिर गरजी बंदूकें, लेकिन कहानी हुई लंबी

स्टारकास्ट- अली फजल, पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा, रवि किशन, जीतेंद्र कुमार, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी, अभिषेक बनर्जी, श्रेया पिलगांवकर डायरेक्टर- गुरमीत सिंह ड्यूरेशन- 3 घंटे 17 मिनट रेटिंग- 3.5/ 5 मिर्जापुर की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर है बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर है सही वक्त पर चली गई चाल। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने की कोशिश नहीं की गई है। इसे सिनेमाई विस्तार दिया गया है। लेकिन 3 घंटे 17 मिनट की इस फिल्म में जहां कई सीक्वेंस बड़े पर्दे पर खूब असर करते हैं, वहीं कुछ जगह कहानी को अपनी मंजिल तक पहुंचने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगता है। कैसी है फिल्म की कहानी? ‘मिर्जापुर: द मूवी’ की कहानी फ्रेंचाइजी की उसी दुनिया में लौटती है, जहां सत्ता की कुर्सी खाली होते ही बंदूकें खुद अपनी भाषा बोलने लगती हैं। फिल्म दरअसल मिर्जापुर की कहानी में एक ऐसा अध्याय खोलती है, जो सीरीज की टाइमलाइन के बीच का हिस्सा है। यानी यह कहानी अचानक किसी दूसरी दुनिया में नहीं चली जाती, बल्कि पुराने किरदारों और उनके रिश्तों के बीच एक नया खेल जोड़ती है। कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी के लिए सत्ता सिर्फ गद्दी नहीं, विरासत और दबदबे का सवाल है। दूसरी तरफ गुड्डू पंडित यानी अली फजल की दुनिया बदले और ताकत के इर्द-गिर्द घूमती है। और फिर मुन्ना त्रिपाठी यानी दिव्येंदु की मौजूदगी इस पूरे समीकरण को फिर से खतरनाक बना देती है। मुन्ना की वापसी फिल्म का सबसे बड़ा तुरुप का पत्ता है, लेकिन कहानी सिर्फ पुराने चेहरों की वापसी पर निर्भर नहीं रहती। रवि किशन का बब्बुआ यादव इस सत्ता के खेल में नया रंग भरता है। उसके आते ही कहानी में एक अलग किस्म की आक्रामकता दिखाई देती है। बीना त्रिपाठी यानी रसिका दुग्गल भी अपनी चालें चलती हैं और यही मिर्जापुर की खासियत है। यहां कोई किरदार सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं होता, हर कोई किसी न किसी खेल का खिलाड़ी है। कहानी आगे बढ़ती है तो मिर्जापुर की गलियों से निकलकर राजस्थान के रेगिस्तान तक पहुंचती है। बदला, सत्ता, धोखा और वर्चस्व की यह लड़ाई धीरे-धीरे ऐसे मुकाम पर जाती है, जहां पुरानी दुश्मनी और नए समीकरण आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। कैसी है कहानी और स्क्रीनप्ले में क्या खास है? पुनीत कृष्णा की लिखाई अब भी इस फ्रेंचाइजी की रीढ़ है। मिर्जापुर का संवाद सिर्फ संवाद नहीं होता, वह किरदार की पहचान बन जाता है। फिल्म में भी कई जगह बातचीत इतनी धारदार है कि गोली चलने से पहले ही सीन में तनाव पैदा हो जाता है। खास बात यह है कि यहां हास्य भी उसी अंधेरी दुनिया से निकलता है। हिंसा के बीच अचानक आने वाला देसी हास्य फिल्म को लगातार गंभीर बने रहने से बचाता है। लेकिन यहीं स्क्रीनप्ले थोड़ी परेशानी पैदा करता है। फिल्म के पास किरदार बहुत हैं, पुराने रिश्ते बहुत हैं और नए समीकरण भी बहुत हैं। इन्हें संभालने की कोशिश में दूसरे हिस्से में कहानी कई जगह आगे बढ़ने के बजाय अपने ही बनाए चक्कर में घूमती हुई लगती है। कुछ हिस्सों को छोटा किया जाता तो फिल्म का असर और तेज हो सकता था। कैसी है स्टारकास्ट कि एक्टिंग? दिव्येंदु शर्मा- दिव्येंदु को मुन्ना के रूप में दोबारा देखना सिर्फ प्रशंसकों के लिए पुरानी याद नहीं है, अभिनय के स्तर पर भी यह फिल्म का बड़ा आकर्षण है। मुन्ना की बेपरवाही, सनक और खतरनाक मासूमियत का जो मिश्रण दिव्येंदु ने बनाया है, वह अब भी काम करता है। पंकज त्रिपाठी- कालीन भैया, दिव्येंदु के किरदार मुन्ना से ठीक उलट है। वह कम बोलते हैं और ज्यादा महसूस कराते हैं। उनका अभिनय शोर नहीं करता, लेकिन सीन पर कब्जा कर लेता है। अली फजल- अली का गुड्डू अब पहले से ज्यादा कठोर और सत्ता के खेल को समझने वाला किरदार है। उनके गुस्से में अब सिर्फ बदला नहीं, सत्ता की भूख भी दिखाई देती है। रवि किशन- इनकी एंट्री फिल्म को जरूरी ऊर्जा देती है। बब्बुआ यादव के किरदार में उनका देसी अंदाज और आक्रामकता मिर्जापुर की दुनिया में नया तड़का लगाती है। रसिका दुग्गल, जितेंद्र कुमार, अभिषेक बनर्जी, राजेश तैलंग और बाकी कलाकार भी अपने किरदारों को उसी दुनिया का हिस्सा बनाए रखते हैं। बड़े पर्दे पर मिर्जापुर का असली फायदा मिर्जापुर की बंदूकें ओटीटी पर भी चलती थीं, लेकिन सिनेमाघर में उनका असर अलग है। गोलियों की आवाज, हाथापाई, खून-खराबा और बड़े एक्शन सीक्वेंस फिल्म को थिएटर वाला स्केल देते हैं। खासकर राजस्थान के रेगिस्तान में फिल्म का प्री-क्लाइमैक्स और क्लाइमैक्स हिस्सा शानदार तरीके से फिल्माया गया है। यहां निर्देशक गुरमीत सिंह को अपनी सबसे ज्यादा आजादी मिलती है और कैमरा लोकेशन को सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं रहने देता, बल्कि उसे एक्शन का हिस्सा बना देता है। सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म के स्केल को बढ़ाती है। 3 घंटे 17 मिनट भारी पड़ती है फिल्म की सबसे बड़ी कमी उसकी लंबाई है। पहला हिस्सा कहानी, किरदार और टकराव को तेजी से स्थापित करता है। इंटरवल तक कई जगह फिल्म काफी मनोरंजक रहती है। लेकिन इंटरवल के बाद कुछ हिस्सों में स्क्रीनप्ले जरूरत से ज्यादा समझाता है और रफ्तार गिरती है। यह वही जगह है जहां फिल्म को थोड़ा कसने की जरूरत थी। ताजा प्रतिक्रियाओं में भी ओवर-एक्सप्लेनिंग और पेसिंग को लेकर यही बात सामने आई है। कुछ दृश्य ऐसे लगते हैं जिन्हें कहानी के लिए जरूरी समझा गया है, लेकिन वे फिल्म की गति को उतना आगे नहीं बढ़ाते। यही वजह है कि करीब 15-20 मिनट की कटौती फिल्म को और प्रभावी बना सकती थी। फिर आखिरी हिस्से में फिल्म दोबारा रफ्तार पकड़ती है और एक्शन के साथ कहानी अपना वजन वापस हासिल करती है। कैसा है डायरेक्शन, टेक्निकली कैसी बनी फिल्म? गुरमीत सिंह ने सबसे मुश्किल काम यह किया है कि मिर्जापुर की ओटीटी वाली पहचान को बड़े पर्दे की भाषा में बदला जाए। इस मामले में वह काफी हद तक सफल रहते हैं। फिल्म में मास एलिवेशन है, लेकिन वह पूरी तरह अपनी मूल दुनिया से बाहर नहीं जाती। बैकग्राउंड स्कोर कई एक्शन और एंट्री सीक्वेंस को जरूरी ताकत
कनाडा में पंजाबी मूल का पुलिस अफसर गिरफ्तार:घर से दस्तावेजों से भरे बक्से ले गई पुलिस; धोखाधड़ी-चोरी और विश्वासघात के 9 केस

कनाडा के वैनकूवर पुलिस विभाग (VPD) में करीब 20 साल से सेवा दे रहे पंजाबी मूल के पुलिस अफसर और युवाओं के लिए काम करने वाली संस्था किड्स प्ले यूथ के प्रमुख कुलविंदर सिंह उर्फ काल दोसांझ को लंबी जांच के बाद गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कथित सहयोगी सरबजीत सिंह गिल को भी गिरफ्तार किया है। काल दोसांझ पर धोखाधड़ी, चोरी और विश्वासघात समेत 9 केस दर्ज हैं, जबकि सरबजीत सिंह गिल पर धोखाधड़ी और चोरी से जुड़े 6 मामले दर्ज हैं। इधर, काल दोसांझ की पत्नी और सरी से पार्षद पद की उम्मीदवार सैंडी दोसांझ ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पुलिस घर पहुंची, उस समय उनकी बेटी सो रही थी और उनकी सास घर पर थीं, जबकि काल दोसांझ घर पर नहीं थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनके परिवार को घर से बाहर निकाल दिया। सैंडी ने कार्रवाई का संबंध उनके पार्षद चुनाव लड़ने से होने की आशंका भी जताई और कहा कि उन्होंने या उनके परिवार ने कोई अपराध नहीं किया, वे निर्दोष हैं। सरे स्थित घर पर पुलिस की छापेमारी पुलिस ने सरे में 129 स्ट्रीट और 59 एवेन्यू के पास स्थित काल दोसांझ के घर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों को घर से दस्तावेजों से भरे कई बक्से बाहर ले जाते हुए देखा गया।ब्रिटिश कोलंबिया प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने दोसांझ और सरबजीत सिंह गिल के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि की है। दोसांझ पर 9, साथी पर 6 केस दर्ज पुलिस के अनुसार, काल दोसांझ पर कुल 9 आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। इनमें: वहीं, सरबजीत सिंह गिल पर धोखाधड़ी और चोरी से जुड़े कुल 6 मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों के खिलाफ दर्ज मामलों से जुड़े कथित अपराध 8 दिसंबर 2017 से 25 जुलाई 2025 के बीच हुए। ये मामले वैनकूवर, सरे और ब्रिटिश कोलंबिया के अन्य क्षेत्रों से जुड़े बताए गए हैं। रियल एस्टेट निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप मामले से जुड़ी शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह कथित मामला एक बड़े निवेश घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों से रियल एस्टेट में निवेश करने और उस पर भारी रिटर्न देने का वादा करके बड़ी रकम ली गई थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इन आरोपों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। फगवाड़ा के पास गांव के रहने वाले हैं दोसांझ कुलविंदर सिंह उर्फ काल दोसांझ मूल रूप से पंजाब में फगवाड़ा के पास एक गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने करीब 20 वर्षों तक वैनकूवर पुलिस विभाग में सेवा दी है। पुलिस सेवा के अलावा वे सरे स्थित ‘किड्सप्ले फाउंडेशन’ से भी जुड़े हुए थे। यह संस्था युवाओं को अपराध और नशे से दूर रखने और उन्हें सकारात्मक अवसरों की ओर प्रेरित करने के लिए काम करती है। स्थानीय समुदाय में दोसांझ अपने सामाजिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए भी पहचाने जाते थे। पत्नी सैंडी दोसांझ की बड़ी बातें… ************* ये खबर भी पढ़ें: कांग्रेस MLA ने CM की पत्नी का लीगल नोटिस फाड़ा: खैहरा बोले- जो चाहे कर लो, मैं जवाब नहीं दूंगा; रेप केस में ₹5 करोड़ रिश्वत के आरोपों का मामला पंजाब के CM भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा और अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को लीगल नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने को कहा गया है। नोटिस में कहा गया है कि अगर दोनों ने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। (पढ़ें पूरी खबर)
पीएम मोदी ने मेलोनी को दी बधाई:सबसे लंबे समय तक लगातार इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है। मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व पर भरोसे और विश्वास को दिखाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेलोनी की दोस्ती भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के समृद्ध भविष्य के लिए आगे भी मिलकर काम करने की उम्मीद जताई। मोदी ने मेलोनी के आने वाले वर्षों में सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं। खबर अपडेट हो रही है…
ईरान ने US को चिढ़ाया- ‘हबीबी अंकल सैम, ईरान आओ’:दूतावास ने होर्मुज में माइनस्वीपर गेम का वीडियो पोस्ट किया

ईरान ने अमेरिका को चिढ़ाते हुए एक वीडियो शेयर किया है। सिएरा लियोन में ईरानी दूतावास ने 35 सेकेंड का वीडियो पोस्ट किया। इसके साथ लिखा- “हबीबी (अंकल सैम), ईरान आओ!” वीडियो में होर्मुज स्ट्रेट का 3D नक्शा दिखता है। इस पर ‘माइन्सवीपर’ गेम खेला जा रहा है। इस गेम में खिलाड़ी को छिपी हुई समुद्री माइन्स (बारुदी सुरंगो) से बचना होता है। ईरान ने यह वीडियो ऐसे समय पोस्ट किया है, जब होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइन्स बिछाने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका ने ईरान के रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाया अमेरिका ने रविवार को होर्मुज के एक द्वीप पर ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया था। अमेरिका का कहना था कि ईरान इनका इस्तेमाल समुद्र में माइन्स खदानें डालने के लिए कर सकता है। अमेरिका ने पिछले हफ्ते ही होर्मुज के अंतरराष्ट्रीय जहाज मार्गों से मुद्री माइन्स हटाई थीं। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने दोबारा समुद्री माइन्स बिछाईं तो उन्हें बिछाने वाले जहाज और बोट को नष्ट कर दिया जाएगा। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने जॉर्डन में दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान ने भारी नुकसान का दावा किया। वहीं, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने 8 मिसाइलों को रोक दिया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर फिर हमला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस, रडार, समुद्री ठिकानों, खदानें बिछाने की क्षमता और संचार केंद्रों को निशाना बनाया गया। खबर अपडेट हो रही…
मैं किसी स्टार के पीछे नहीं भागता:निखिल आडवाणी बोले- 25 साल बाद मनोज बाजपेयी संग काम किया तो उन्होंने कहा- अब आए हो

वेब सीरीज ‘द रिवोल्यूशनरीज’ आजादी की लड़ाई के उन युवा क्रांतिकारियों की कहानी है, जिनके बारे में कम चर्चा हुई। यह सीरीज संजीव सान्याल की किताब ‘रेवोल्यूशनरीज: द अदर स्टोरी ऑफ हाउ इंडिया वॉन इट्स फ्रीडम’ पर आधारित है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डायरेक्टर निखिल आडवाणी ने बताया कि ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ के बाद उन्हें लगा कि ऐसी कहानियों में यूथ का नजरिया मिसिंग था। उन्होंने प्रतिभा रांटा की तारीफ करते हुए कहा कि अगर वह शो के लिए मना कर देतीं तो उनका दिल टूट जाता। निखिल ने मनोज बाजपेयी का किस्सा भी सुनाया, जिन्होंने 25 साल बाद साथ काम करने पर पूछा था- ‘अब आए हो?’ प्रतिभा ने किरदार की तैयारी और रोहित सराफ ने एक्शन को चुनौती बताया। सवाल: पहले भी आपने आजादी से जुड़ी कहानियां कही हैं। ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में ऐसा क्या था, जो आपको पहले की कहानियों में मिसिंग लगा? जवाब/निखिल आडवाणी: मुझे लगा कि यूथ मिसिंग था। हमने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, ऊधम सिंह और जलियांवाला बाग के बारे में बहुत पढ़ा है। लेकिन इनसे करीब 10 साल पहले भी एक समानांतर कहानी चल रही थी। रिसर्च करते हुए मुझे लगा कि इन युवाओं की कहानी भी बतानी चाहिए। उस समय के क्रांतिकारियों में एक अलग तरह का जुनून था। उन्होंने तय कर लिया था कि अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना है। कैसे करेंगे, यह बाद की बात थी। यही जुनून मुझे इस कहानी में सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। सवाल: प्रतिभा रांटा में आपको वह प्रतिभा कब नजर आई, जो इस किरदार के लिए जरूरी थी? अगर वह शो करने से मना कर देतीं तो क्या होता? जवाब/निखिल आडवाणी: मेरे लिए किसी एक्टर के पास जाना सिर्फ कास्टिंग नहीं है। मैं किसी कलाकार के पास तब तक नहीं जाना चाहता, जब तक मेरे पास उसके लिए ऐसा कुछ न हो, जिसमें वह पूरी तरह डूब सके। प्रतिभा के मामले में भी ऐसा ही था। मुझे पता था कि वह बहुत अच्छी एक्टर हैं, लेकिन यह समझना भी जरूरी था कि वह किरदार को किस तरह अपने अंदर उतारेंगी। हमने कई सीन्स पर महीनों चर्चा की। एक-एक लाइन पर बात की कि इसका मतलब क्या है और इसे किस तरह करना है। अगर प्रतिभा ने इस शो के लिए मना कर दिया होता, तो मैं सच में मेरा दिल टूट हो जाता। क्योंकि उन्होंने इस किरदार के लिए जो दिया है, वह बहुत खास है। मैं हमेशा मानता हूं कि एक एक्टर के अंदर यह चुनौती होनी चाहिए कि क्या मैं इस सीन को और बेहतर कर सकता हूं? क्या मैं इसे पेपर पर लिखे हुए सीन से आगे ले जा सकता हूं? अगर यह चुनौती नहीं है तो काम बोरिंग हो जाता है। सवाल: आपने कहा कि आप किसी कलाकार को सिर्फ इसलिए नहीं लेते कि वह बड़ा नाम है। मनोज बाजपेयी का 25 साल वाला किस्सा क्या है? जवाब/निखिल आडवाणी: मनोज बाजपेयी मुझसे करीब 25 साल से कहते रहे थे कि मेरे साथ काम करना है। जब मैं आखिरकार उनके पास ‘सत्यमेव जयते’ लेकर गया तो उन्होंने मुझसे कहा- ‘अब आए हो?’ मैं किसी बिजी स्टार के पीछे भागने में विश्वास नहीं करता। मेरे लिए जरूरी है कि मेरे पास उस कलाकार के लिए सही किरदार हो। मैं किसी एक्टर के पास सिर्फ इसलिए नहीं जाता कि वह बड़ा नाम है। मुझे ऐसा किरदार लेकर जाना होता है, जिसमें वह अपने दांत गड़ा सके और पूरी तरह डूब सके। यही बात प्रतिभा के साथ भी थी। मुझे उनके लिए सही किरदार मिला और फिर हमने साथ में उसे खोजा। सवाल: प्रतिभा, निखिल सर ने आपको किरदार किस तरह समझाया? जवाब/प्रतिभा रांटा: जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो उसमें काफी कुछ पहले से मौजूद था, क्योंकि सर और उनकी टीम ने बहुत रिसर्च की थी। लेकिन प्रतिभा के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए दूसरी क्रांतिकारी महिलाओं से भी प्रेरणा ली गई। मैंने भिकाजी कामा और बीबी गुलाब कौर जैसी महिलाओं के बारे में पढ़ा। मुझे फिल्म ‘लिटिल वुमन’ भी बहुत पसंद है और उससे भी मुझे प्रेरणा मिली। सर के साथ लगातार चर्चा होती थी कि प्रतिभा को किस तरह अप्रोच करना है। वह स्क्रीन पर सामान्य लड़की की तरह नहीं दिखती। उसमें आत्मविश्वास और आग है। वह बराबरी का हक मांगती है और अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटती। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन सा सीन आपके लिए सबसे खास रहा? जवाब/प्रतिभा रांटा: बाघा जतिन और प्रतिभा के बीच का एक सीन मेरे लिए बहुत खास है। उसमें प्रतिभा उनसे कहती है कि आपको किसने हक दिया कि आप हमारे बारे में फैसला करें? अगर आप अपने लिए फैसले ले सकते हैं तो हम क्यों नहीं ले सकते? उस सीन में प्रतिभा का नजरिया साफ दिखाई देता है। वह महिलाओं को बराबरी से देखती है और अपने फैसले खुद लेना चाहती है। निखिल आडवाणी: यह सीन सुबह करीब 5 बजे शूट हुआ था। शूटिंग में देरी हो गई थी और वह लोकेशन का आखिरी दिन था, इसलिए हम वापस भी नहीं आ सकते थे। प्रतिभा और मैं उस सीन पर महीनों से बात कर रहे थे। वह उस वक्त काफी परेशान थी, लेकिन सुबह 5 बजे उसने जो परफॉर्म किया, वह शानदार था। यह उनके किरदार का बहुत महत्वपूर्ण सीन है और उन्होंने इसे बेहतरीन तरीके से निभाया। सवाल: रोहित, आपके लिए शो में सबसे चुनौतीपूर्ण क्या रहा? जवाब/रोहित सराफ: मेरे लिए राजबिहारी बोस के साथ वाले सीन्स बहुत खास रहे। मुझे ऐसा किरदार निभाने का मौका मिला, जिसे मैं बहुत मानता हूं। उनके साथ इंटरपर्सनल रिलेशनशिप वाले सीन्स करना मेरे लिए बहुत मजेदार था। लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण एक्शन था। मैंने पहले इतना एक्शन नहीं किया था। इसकी तैयारी की और शूटिंग के दौरान बहुत कुछ सीखा। सवाल: अगर उस दौर का कोई क्रांतिकारी आज आपके सामने आ जाए तो क्या पूछेंगे? जवाब/रोहित सराफ: मैं उनसे पूछूंगा- ‘आप क्या खाकर पैदा हुए थे?’ सच में, क्योंकि उस दौर के लोगों में जिस तरह का जज्बा और जुनून था, उसी की वजह से आज हम यहां हैं। मैं जानना चाहूंगा कि उस तरह सपने देखना कैसा था? सवाल: प्रतिभा के किरदार से आज की लड़कियां क्या सीख
मैं किसी स्टार के पीछे नहीं भागता:निखिल आडवाणी बोले- 25 साल बाद मनोज बाजपेयी संग काम किया तो उन्होंने कहा- अब आए हो

वेब सीरीज ‘द रिवोल्यूशनरीज’ आजादी की लड़ाई के उन युवा क्रांतिकारियों की कहानी है, जिनके बारे में कम चर्चा हुई। यह सीरीज संजीव सान्याल की किताब ‘रेवोल्यूशनरीज: द अदर स्टोरी ऑफ हाउ इंडिया वॉन इट्स फ्रीडम’ पर आधारित है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डायरेक्टर निखिल आडवाणी ने बताया कि ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ के बाद उन्हें लगा कि ऐसी कहानियों में यूथ का नजरिया मिसिंग था। उन्होंने प्रतिभा रांटा की तारीफ करते हुए कहा कि अगर वह शो के लिए मना कर देतीं तो उनका दिल टूट जाता। निखिल ने मनोज बाजपेयी का किस्सा भी सुनाया, जिन्होंने 25 साल बाद साथ काम करने पर पूछा था- ‘अब आए हो?’ प्रतिभा ने किरदार की तैयारी और रोहित सराफ ने एक्शन को चुनौती बताया। सवाल: पहले भी आपने आजादी से जुड़ी कहानियां कही हैं। ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में ऐसा क्या था, जो आपको पहले की कहानियों में मिसिंग लगा? जवाब/निखिल आडवाणी: मुझे लगा कि यूथ मिसिंग था। हमने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, ऊधम सिंह और जलियांवाला बाग के बारे में बहुत पढ़ा है। लेकिन इनसे करीब 10 साल पहले भी एक समानांतर कहानी चल रही थी। रिसर्च करते हुए मुझे लगा कि इन युवाओं की कहानी भी बतानी चाहिए। उस समय के क्रांतिकारियों में एक अलग तरह का जुनून था। उन्होंने तय कर लिया था कि अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना है। कैसे करेंगे, यह बाद की बात थी। यही जुनून मुझे इस कहानी में सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। सवाल: प्रतिभा रांटा में आपको वह प्रतिभा कब नजर आई, जो इस किरदार के लिए जरूरी थी? अगर वह शो करने से मना कर देतीं तो क्या होता? जवाब/निखिल आडवाणी: मेरे लिए किसी एक्टर के पास जाना सिर्फ कास्टिंग नहीं है। मैं किसी कलाकार के पास तब तक नहीं जाना चाहता, जब तक मेरे पास उसके लिए ऐसा कुछ न हो, जिसमें वह पूरी तरह डूब सके। प्रतिभा के मामले में भी ऐसा ही था। मुझे पता था कि वह बहुत अच्छी एक्टर हैं, लेकिन यह समझना भी जरूरी था कि वह किरदार को किस तरह अपने अंदर उतारेंगी। हमने कई सीन्स पर महीनों चर्चा की। एक-एक लाइन पर बात की कि इसका मतलब क्या है और इसे किस तरह करना है। अगर प्रतिभा ने इस शो के लिए मना कर दिया होता, तो मैं सच में मेरा दिल टूट हो जाता। क्योंकि उन्होंने इस किरदार के लिए जो दिया है, वह बहुत खास है। मैं हमेशा मानता हूं कि एक एक्टर के अंदर यह चुनौती होनी चाहिए कि क्या मैं इस सीन को और बेहतर कर सकता हूं? क्या मैं इसे पेपर पर लिखे हुए सीन से आगे ले जा सकता हूं? अगर यह चुनौती नहीं है तो काम बोरिंग हो जाता है। सवाल: आपने कहा कि आप किसी कलाकार को सिर्फ इसलिए नहीं लेते कि वह बड़ा नाम है। मनोज बाजपेयी का 25 साल वाला किस्सा क्या है? जवाब/निखिल आडवाणी: मनोज बाजपेयी मुझसे करीब 25 साल से कहते रहे थे कि मेरे साथ काम करना है। जब मैं आखिरकार उनके पास ‘सत्यमेव जयते’ लेकर गया तो उन्होंने मुझसे कहा- ‘अब आए हो?’ मैं किसी बिजी स्टार के पीछे भागने में विश्वास नहीं करता। मेरे लिए जरूरी है कि मेरे पास उस कलाकार के लिए सही किरदार हो। मैं किसी एक्टर के पास सिर्फ इसलिए नहीं जाता कि वह बड़ा नाम है। मुझे ऐसा किरदार लेकर जाना होता है, जिसमें वह अपने दांत गड़ा सके और पूरी तरह डूब सके। यही बात प्रतिभा के साथ भी थी। मुझे उनके लिए सही किरदार मिला और फिर हमने साथ में उसे खोजा। सवाल: प्रतिभा, निखिल सर ने आपको किरदार किस तरह समझाया? जवाब/प्रतिभा रांटा: जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो उसमें काफी कुछ पहले से मौजूद था, क्योंकि सर और उनकी टीम ने बहुत रिसर्च की थी। लेकिन प्रतिभा के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए दूसरी क्रांतिकारी महिलाओं से भी प्रेरणा ली गई। मैंने भिकाजी कामा और बीबी गुलाब कौर जैसी महिलाओं के बारे में पढ़ा। मुझे फिल्म ‘लिटिल वुमन’ भी बहुत पसंद है और उससे भी मुझे प्रेरणा मिली। सर के साथ लगातार चर्चा होती थी कि प्रतिभा को किस तरह अप्रोच करना है। वह स्क्रीन पर सामान्य लड़की की तरह नहीं दिखती। उसमें आत्मविश्वास और आग है। वह बराबरी का हक मांगती है और अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटती। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन सा सीन आपके लिए सबसे खास रहा? जवाब/प्रतिभा रांटा: बाघा जतिन और प्रतिभा के बीच का एक सीन मेरे लिए बहुत खास है। उसमें प्रतिभा उनसे कहती है कि आपको किसने हक दिया कि आप हमारे बारे में फैसला करें? अगर आप अपने लिए फैसले ले सकते हैं तो हम क्यों नहीं ले सकते? उस सीन में प्रतिभा का नजरिया साफ दिखाई देता है। वह महिलाओं को बराबरी से देखती है और अपने फैसले खुद लेना चाहती है। निखिल आडवाणी: यह सीन सुबह करीब 5 बजे शूट हुआ था। शूटिंग में देरी हो गई थी और वह लोकेशन का आखिरी दिन था, इसलिए हम वापस भी नहीं आ सकते थे। प्रतिभा और मैं उस सीन पर महीनों से बात कर रहे थे। वह उस वक्त काफी परेशान थी, लेकिन सुबह 5 बजे उसने जो परफॉर्म किया, वह शानदार था। यह उनके किरदार का बहुत महत्वपूर्ण सीन है और उन्होंने इसे बेहतरीन तरीके से निभाया। सवाल: रोहित, आपके लिए शो में सबसे चुनौतीपूर्ण क्या रहा? जवाब/रोहित सराफ: मेरे लिए राजबिहारी बोस के साथ वाले सीन्स बहुत खास रहे। मुझे ऐसा किरदार निभाने का मौका मिला, जिसे मैं बहुत मानता हूं। उनके साथ इंटरपर्सनल रिलेशनशिप वाले सीन्स करना मेरे लिए बहुत मजेदार था। लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण एक्शन था। मैंने पहले इतना एक्शन नहीं किया था। इसकी तैयारी की और शूटिंग के दौरान बहुत कुछ सीखा। सवाल: अगर उस दौर का कोई क्रांतिकारी आज आपके सामने आ जाए तो क्या पूछेंगे? जवाब/रोहित सराफ: मैं उनसे पूछूंगा- ‘आप क्या खाकर पैदा हुए थे?’ सच में, क्योंकि उस दौर के लोगों में जिस तरह का जज्बा और जुनून था, उसी की वजह से आज हम यहां हैं। मैं जानना चाहूंगा कि उस तरह सपने देखना कैसा था? सवाल: प्रतिभा के किरदार से आज की लड़कियां क्या सीख
ट्रम्प-सरकार ने अवैध प्रवासियों को खदेड़ने वाले गेम लॉन्च किए:पीछा करके पकड़ेंगे खिलाड़ी; मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस ने ऑनलाइन वीडियो गेम्स की एक वेबसाइट लॉन्च की है, जिसमें खिलाड़ियों को अवैध प्रवासियों को पकड़ने, डिपोर्ट करने और अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाने जैसे ऑप्शन दिए गए हैं। वेबसाइट पर मौजूद एक गेम ‘रियो रन’ क्लासिक आर्केड गेम ‘स्नेक’ पर बेस्ड है। इसमें अमेरिकी बॉर्डर प्रमुख टॉम होमन का डिजिटल किरदार रियो ग्रांडे नदी के पास माइग्रेंट्स का पीछा करता है। वहीं दूसरे गेम ‘बिल्ड द वॉल’ में खिलाड़ियों को ब्लॉक जोड़कर अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने का टास्क दिया गया है। इसमें लिखा है- “आने वाली भीड़ से सीमा की रक्षा करें।” व्हाइट हाउस बोला- उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश व्हाइट हाउस के एक्स अकाउंट ने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ यानी MAGA लोगो से मिलता-जुलता एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें लिखा था- “जीतना बंद नहीं कर सकते। दीवार बनाओ। डिपोर्ट करो। ट्रम्प अकाउंट भरो।” व्हाइट हाउस ने कहा कि इन गेम्स के जरिए प्रशासन राष्ट्रपति की उपलब्धियों और नीतियों को ऐसे तरीके से लोगों तक पहुंचाना चाहता है, जो हर अमेरिकी से जुड़ सके। मानवाधिकार संगठनों ने जताई नाराजगी गेम्स लॉन्च होने के बाद अधिकार संगठनों ने व्हाइट हाउस की आलोचना की। टेक्सास के ईगल पास में फ्रोंटेरा फेडरेशन की सह-निदेशक अमेरिका गार्सिया ग्रेवाल ने कहा कि प्रशासन लंबे समय से लोगों की जिंदगी के साथ खेल रहा था और अब उसने इसे वीडियो गेम का रूप दे दिया है। बॉर्डर पर काम करने वाली संस्था AMIGOS सैन डिएगो कम्युनिटी की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर एड्रियाना जासो ने कहा कि इन आर्केड गेम्स से प्रशासन की गंभीरता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रवासियों को अमानवीय और मजाक का विषय बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि हिरासत केंद्रों में लोगों की मौत हो रही है। उनके मुताबिक, “यह मुद्दे को ऐसे पेश करता है जैसे यह कोई गेम हो, जबकि असल में ऐसा नहीं है।” खबर अपडेट हो रही है…
ट्रम्प-सरकार ने अवैध प्रवासियों को खदेड़ने वाले गेम लॉन्च किए:पीछा करके पकड़ेंगे खिलाड़ी; मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस ने ऑनलाइन वीडियो गेम्स की एक वेबसाइट लॉन्च की है, जिसमें खिलाड़ियों को अवैध प्रवासियों को पकड़ने, डिपोर्ट करने और अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाने जैसे ऑप्शन दिए गए हैं। वेबसाइट पर मौजूद एक गेम ‘रियो रन’ क्लासिक आर्केड गेम ‘स्नेक’ पर बेस्ड है। इसमें अमेरिकी बॉर्डर प्रमुख टॉम होमन का डिजिटल किरदार रियो ग्रांडे नदी के पास माइग्रेंट्स का पीछा करता है। वहीं दूसरे गेम ‘बिल्ड द वॉल’ में खिलाड़ियों को ब्लॉक जोड़कर अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने का टास्क दिया गया है। इसमें लिखा है- “आने वाली भीड़ से सीमा की रक्षा करें।” व्हाइट हाउस बोला- उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश व्हाइट हाउस के एक्स अकाउंट ने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ यानी MAGA लोगो से मिलता-जुलता एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें लिखा था- “जीतना बंद नहीं कर सकते। दीवार बनाओ। डिपोर्ट करो। ट्रम्प अकाउंट भरो।” व्हाइट हाउस ने कहा कि इन गेम्स के जरिए प्रशासन राष्ट्रपति की उपलब्धियों और नीतियों को ऐसे तरीके से लोगों तक पहुंचाना चाहता है, जो हर अमेरिकी से जुड़ सके। मानवाधिकार संगठनों ने जताई नाराजगी गेम्स लॉन्च होने के बाद अधिकार संगठनों ने व्हाइट हाउस की आलोचना की। टेक्सास के ईगल पास में फ्रोंटेरा फेडरेशन की सह-निदेशक अमेरिका गार्सिया ग्रेवाल ने कहा कि प्रशासन लंबे समय से लोगों की जिंदगी के साथ खेल रहा था और अब उसने इसे वीडियो गेम का रूप दे दिया है। बॉर्डर पर काम करने वाली संस्था AMIGOS सैन डिएगो कम्युनिटी की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर एड्रियाना जासो ने कहा कि इन आर्केड गेम्स से प्रशासन की गंभीरता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रवासियों को अमानवीय और मजाक का विषय बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि हिरासत केंद्रों में लोगों की मौत हो रही है। उनके मुताबिक, “यह मुद्दे को ऐसे पेश करता है जैसे यह कोई गेम हो, जबकि असल में ऐसा नहीं है।” खबर अपडेट हो रही है…







