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गर्मियों के लिए पुदीना शिकंजी ड्रिंक: लू वाली गर्मी में शरीर को तुरंत ऊर्जावान ऊर्जा-ठंडी पुदीना शिकंजी, 5 मिनट से कम में तैयार करें

गर्मियों में ठंडक देने वाले पेय के लिए पुदीना शिकंजी ड्रिंक, 5 मिनट में पुदीना नींबू शिकंजी रेसिपी

20 मई 2026 को 23:17 IST पर अपडेट किया गया गर्मियों के लिए पुदीना नींबू शिकंजी रेसिपी: गर्मी का मौसम आते ही शरीर को बार-बार ठंडक और एनर्जी की जरूरत महसूस होती है। तेज धूप और लू से बचने के लिए तरह-तरह के कोल्ड ड्रिंक्स लोग छोड़ देते हैं, लेकिन सेहत के लिए बाजार के कोल्ड ड्रिंक्स ज्यादा स्वादिष्ट नहीं होते। ऐसे में घर पर बनी पुदीना शिकंजी स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का बेहतरीन विकल्प है। नींबू और पुदीने से बनी यह शिकांजी शरीर को तुरंत ठंडक पहुंचाती है और गर्मी में ठंडक महसूस कराती है। इसे बनाने में सिर्फ 5 मिनट का समय लगता है। अनुसरण करना : पुदीना शिकंजी बनाने की सामग्री: 2 नींबू, 1 छोटा चम्मच ताजा पुदीना, 3-4 बड़े टुकड़े चीनी या शहद, 1/2 छोटा टुकड़ा काला नमक, 1/2 छोटा टुकड़ा जीरा पाउडर, 2 चम्मच ठंडा पानी, बर्फ के टुकड़े छवि: फ्रीपिक कैसे बनाएं नुस्खा-ठंडी पुदीना शिंजी: सबसे पहले पुदीने की नाव को अच्छे से धो लें। अब वैक्सिन पिलेशियन में लिटिल वॉटर मैकेनिक पीस लें। एक बड़े पोचेल में नींबू का रस निकाल लें। छवि: एआई इसमें चीनी या सुपरमार्केट अच्छी तरह से नासा लें। अब इसमें काला नमक और साथ ही जीरा पाउडर डालें। इससे शिकंजी का स्वाद और भी बढ़ेगा। छवि: एआई अब तैयार करें पुना पेस्ट और ठंडा पानी स्टॉक अच्छी तरह से मिक्स करें। बर्फ के गोले में और ऊपर से शिकन भर दें। नामांकन तो पुदीने की और नामांकन के लिए गार्निश करें। छवि: एआई पुदीना शिक्जी शरीर को ठंडा रखने में मदद करती है। लू और डिलाईशन से बचती है। पाचन क्रिया बेहतर होती है। शरीर को तत्काल ऊर्जा मिलती है। पेट को फर्क और ताजा महसूस करवाती है। छवि: एआई अगर आप भी समरस्लैम में कुछ स्ट्रेंथ और टेस्टी स्ट्राइक चाहते हैं, तो घर पर बनी पुदीना शिकंजी स्ट्रेंथ जरूर बनाएं। इसका ताज़ा स्वाद आपको पूरे दिन ताज़ा महसूस कराएगा। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 20 मई 2026 को 23:17 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)पुदीना शिकांजी रेसिपी(टी)शिकंजी रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन पेय(टी)पुदीना शिकंजी(टी)नींबू ड्रिंक(टी)ग्रीष्मकालीन रेसिपी(टी)पुदीना नींबू(टी)पुदीना नींबू शिकंजी रेसिपी गर्मियों के लिए(टी)पुदीना नींबू शिकंजी

सुबह उठते से ही करें मलासन, रीढ़ की हड्डी से लेकर पाचन तक के लिए फायदेमंद

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Last Updated:May 20, 2026, 23:13 IST Malasana Health Benefits: मलासन सेहतमंद रहने का बहुत सिंपल और आसान तरीका है. इसके अभ्यास से सांसों और शरीर के बीच बेहतर तालमेल बनता है, जिससे मन शांत और स्थिर महसूस करता है. साथ ही इससे नितंब, जांघ, पिंडलियों और कूल्हों की मांसपेशियों भी मजबूत होती है. ख़बरें फटाफट भारतीय योग परंपरा में कई ऐसे योगासन बताए गए हैं, जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण योगासन है मलासन इसे स्क्वाट पोज भी कहा जाता है. नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से शरीर में लचीलापन बढ़ता है और संतुलन बेहतर होता है. साथ ही यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और शरीर के निचले हिस्से को स्वस्थ रखने में मदद करता है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और शरीर की सही मुद्रा बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है. इसके अभ्यास से सांसों और शरीर के बीच बेहतर तालमेल बनता है, जिससे मन शांत और स्थिर महसूस करता है. आयुष मंत्रालय के अनुसार, मलासन एक ऐसी मुद्रा है जिसमें व्यक्ति घुटनों को मोड़कर और कूल्हों को नीचे लाकर बैठता है. इसे करने के लिए सबसे पहले पैरों को कंधों जितनी दूरी पर फैलाना चाहिए. इसके बाद धीरे-धीरे स्क्वाट की स्थिति में नीचे बैठना होता है. इस दौरान शरीर का संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है. सुबह खानी पेट योगाभ्यास के फायदेविशेषज्ञों के अनुसार, सुबह खाली पेट इस आसन का अभ्यास करना सबसे अच्छा माना जाता है. ऐसा करने से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और शरीर पूरे दिन अधिक ऊर्जावान महसूस करता है. मलासन केवल शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह आसन मूलाधार चक्र को सक्रिय करने में मदद करता है. इससे मन में स्थिरता, आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ती है. साथ ही यह ध्यान और एकाग्रता को बेहतर बनाने में भी सहायक हो सकता है. शारीरिक रूप से यह आसन शरीर के कई हिस्सों पर काम करता है. यह नितंब, जांघ, पिंडलियों और कूल्हों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. इसके अलावा कमर, पीठ के निचले हिस्से और टखनों में खिंचाव लाकर जकड़न को कम करता है. लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसन काफी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर की अकड़न दूर होती है. गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह आसन उपयोगी माना जाता है. यह पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है. हालांकि, गर्भावस्था के दौरान किसी भी योगासन को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. इस बात का ध्यान रखेंअगर किसी व्यक्ति को घुटनों, टखनों या कमर के निचले हिस्से में गंभीर दर्द की समस्या है, तो उसे यह आसन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, जिन लोगों की हाल ही में पेट या कूल्हे की सर्जरी हुई हो, उन्हें भी मलासन से बचने की सलाह दी जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

मूंग दाल पकौड़ा रेसिपी: कम तेल में बनेंगी एक्स्ट्रा क्रंची मूंग दाल पकौड़ा, जानिए परफेक्ट बैटर से लेकर फ्राई करने तक का राज

मूंग दाल पकौड़ा

20 मई 2026 को 22:59 IST पर अपडेट किया गया मूंग दाल पकौड़ा रेसिपी: बारिश हो या गर्मी, चाय के साथ गरमा-गरम पकौड़ी का स्वाद हर मौसम में लोगों को पसंद आता है. आलू और पनीर की पकौड़ी के अलावा मूंग दाल की पकौड़ी के स्वाद भी काफी पसंद किये जाते हैं. हालांकि घर पर बेकार समय अक्सर लोग इस बात से परेशान रहते हैं कि पकौड़ी बाजार में क्रिस्पी और कम तेली क्यों नहीं दिखते। ये आसान टिप्स आपके बेहद काम आ सकते हैं। इन ट्रिक्स की मदद से मूंग दाल के पकौड़े के पत्ते बाहर से करारी और अंदर से बिल्कुल आकर्षक दिखते हैं। अनुसरण करना : भीगी हुई मूंग दाल को बिना पानी के पीस लें। इससे बैटर अच्छा बनता है और पकौड़ी लकड़ी कम तेल सोखती हैं। बैटर को अच्छी तरह से फेंटना भी जरूरी है, ताकि वह फ्लफी बन सके। छवि: फ्रीपिक एक कटोरी पानी में बैटर की एक बूंद। अगर बैटर ऊपर तैरने लगे तो समझ लीजिए कि बैटर पूरी तरह से तैयार है और पकाउ लुक बनाने के लिए प्रभावित है। छवि: फ्रीपिक बैटर में छोटे चावल का आटा मिलाने से पकौड़े के स्वाद ज्यादा कुरकुरे होते हैं। इसके अलावा एक इंस्टिट्यूट बिटकॉइन चिप्स और करारा बनाने में भी मदद करता है। छवि: फ्रीपिक अगर आप चाहते हैं कि पकाऊ लकड़ी ज्यादा तेल न सोखें तो बैटर में थोड़ा सा गर्म तेल मिला लें। इससे शिक्षक भी बेहतर बना है। छवि: Pexels पकौड़ियों को पहले तेज गरम तेल में डालें और फिर धीमी आंच पर पकाएं। इसके पकौड़े बाहर से कुरकुरे और अंदर से अच्छे तरह के पकते हैं। छवि: फ्रीपिक इन आसान युक्तियों की मदद से घर पर भी स्वादिष्ट, स्वादिष्ट, करारी और कम तेली मूंग दाल पकौड़ी बनाई जा सकती है। चाय के साथ इनका स्वाद हर मौसम में शानदार लगता है। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 20 मई 2026 को 22:59 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)मूंग दाल पकोड़ा(टी)क्रिस्पी पकोड़ा रेसिपी(टी)टी टाइम स्नैक्स(टी)पकोड़ा कुकिंग टिप्स(टी)क्रंची पकोड़ा रेसिपी(टी)घर का बना पकोड़ा(टी)भारतीय स्नैक्स(टी)क्रिस्पी पकौड़ा(टी)कुकिंग हैक्स(टी)मानसून स्नैक्स

वजन कंट्रोल से लेकर मजबूत हड्डियों तक, गर्मी में मिलेट्स खाने के कई फायदे, सेवन का तरीका जान लें

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Last Updated:May 20, 2026, 22:57 IST Best Millets For Summer: अगर रोजाना के भोजन में श्री अन्न को शामिल किया जाए, तो शरीर को संपूर्ण पोषण मिलता है. इससे गर्मी में होने वाली थकान, कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याओं से बचने में मदद मिल सकती है और शरीर लंबे समय तक स्वस्थ और एक्टिव बना रहता है. ख़बरें फटाफट गर्मियों के मौसम में शरीर को स्वस्थ और ऊर्जा से भरपूर रखने के लिए खानपान का खास ध्यान रखना जरूरी होता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में मिलेट्स यानी श्री अन्न को रोजाना के भोजन में शामिल करना काफी फायदेमंद हो सकता है. बाजरा, रागी, ज्वार और दूसरे मिलेट्स पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और शरीर को ताकत देने के साथ कई बीमारियों से बचाने में भी मदद करते हैं. नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, श्री अन्न को पोषण का पावरहाउस माना जाता है. इनमें फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और जरूरी मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. ये शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ पाचन को बेहतर बनाने और शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देने में मदद करते हैं. मिलेट्स के फायदेहेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि वजन नियंत्रित करने में भी श्री अन्न काफी उपयोगी होता है. इनमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती. इससे ज्यादा खाने की आदत कम होती है और वजन बढ़ने की समस्या पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है. इसके अलावा, बाजरा और रागी जैसे मिलेट्स कैल्शियम और फॉस्फोरस के अच्छे स्रोत माने जाते हैं. ये पोषक तत्व हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए श्री अन्न का सेवन खासतौर पर लाभकारी माना जाता है. कई लोगों के मन में यह धारणा होती है कि गर्मियों में श्री अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए, लेकिन विशेषज्ञ इस बात को गलत मानते हैं. उनका कहना है कि गर्मी में शरीर जल्दी थक जाता है और पोषक तत्वों की कमी हो सकती है. ऐसे में मिलेट्स शरीर को जरूरी ऊर्जा देने और डिहाइड्रेशन से बचाने में सहायक हो सकते हैं. मिलेट्स खाने का सेवनविशेषज्ञ सलाह देते हैं कि श्री अन्न को पकाने से पहले कुछ घंटों तक पानी में भिगो देना चाहिए. ऐसा करने से इसमें मौजूद एंटी-न्यूट्रिएंट्स कम हो जाते हैं और इसे पचाना आसान हो जाता है. आप इसे अलग-अलग तरीकों से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. जैसे दलिया, खिचड़ी, रोटी, इडली, डोसा या ठंडाई के रूप में इसका सेवन किया जा सकता है. गर्मियों में बाजरे की खीर और रागी का सत्तू भी अच्छा विकल्प माना जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

घर पर टोफू बनाने की विधि: घर में ऐसे एक मिनट में सोयाबीन की मदद से टोफू, नहीं बाजार से टूटने की जरूरत; विधि नोट करें

तस्वीर का विवरण

टोफू बनाने के लिए आवश्यक सामग्री: 2 कप सोयाबीन, 8-10 कप पानी, 2 बड़े नींबू का रस या सिरका, मलमल का कपड़ा छवि: फ्रीपिक घर पर टोफू बनाने की आसान विधि: सबसे पहले सोयाबीन को अच्छी तरह धो लें। अब रातभर या कम से कम 8 घंटे के लिए पानी में सोलाकर रख दें। सोयाबीन फूलेगा और आसानी से पीसी जाएगा। छवि: एआई भीगी हुई सोयाबीन का पानी निकाल लें और प्लास्टिक में सीधे-थोड़े पानी के साथ पीस लें। अब इस पेस्ट को बड़े पैमाने पर रखा जाए और पानी को बड़े पैमाने पर रखा जाए। छवि: फ्रीपिक ज्वालामुखी में आने के बाद गैस का मिश्रण और करीब 10 मिनट तक का समय लें। फिर मलमल के कपड़ों की मदद से इसे अच्छा लें। जो सफ़ेद उत्पाद निकलागा वही सोया दूध है। छवि: फ्रीपिक अब सोया दूध को फिर से प्रभावित करें। इसमें धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे लेबल का रस या सिरका मिलाया जाता है और पसंद किया जाता है। कुछ ही मिनटों में दूध फटना शुरू हो जाएगा और पानी अलग दिखने लगेगा। छवि: एआई अब फटे हुए मिक्स को मल केमल कपड़े में कोरियोग्राफी पानी अलग कर लें। ऊपर से प्रभाव वजन की मांग करता है ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए। इसे 20-30 मिनट तक ऐसे ही रहने दें। छवि: एआई/फ़्रीपिक अब हटाएं और टोफू को कार्टून आकार में काट लें। आपका ताजा और मुलायम टोफू तैयार है। छवि: फ्रीपिक टोफू खाने के फायदे: प्रोटीन से भरपूरता होती है। वजन कम करने में मदद मिलती है। दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। पनीर का दस्तावेज़ विकल्प है। शाकाहारी लोगों के लिए होता है बेहतरीन खाना। छवि: एआई टोफू को अधिक मुलायम होना चाहिए तो वजन कम होना चाहिए। भारी वजन वाले बर्तनों के ऊपर टोफू को अधिक सख्त करना। इसे फ़र्ज़ी में 2-3 दिन तक स्टोर किया जा सकता है। छवि: एआई (टैग अनुवाद करने के लिए)सोयाबीन टोफू रेसिपी(टी)सोयाबीन टोफू रेसिपी(टी)घर पर टोफू बनाना(टी)घर पर टोफू कैसे बनाएं(टी)घर का बना टोफू(टी)सोयाबीन का उपयोग करके टोफू कैसे बनाएं(टी)सोयाबीन टोफू आसान रेसिपी

गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने से क्या होता है? O+ की जगह अगर B+ ब्लड चढ़ा दें तो क्या नुकसान हो सकते हैं, डॉ. से जानें

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Last Updated:May 20, 2026, 22:23 IST Danger Of Wrong Blood Transfusion: अगर किसी मरीज को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान गलत ब्लड टाइप मिल जाए, तो इसके नतीजे बहुत बुरे हो सकते हैं. कई बार इससे ऑर्गन फेलियर से लेकर जान जाने तक का भी खतरा होता है. यहां आप हेल्थ एक्सपर्ट से इसके साइड इफेक्ट्स को समझ सकते हैं. ख़बरें फटाफट राजस्थान के पाली स्थित बांगड़ अस्पताल से एक गंभीर मामला सामने आया है. यहां एक बच्ची को गलत ग्रुप का ब्लड चढ़ा दिया गया. परिजनों का आरोप है कि O+ की जगह B+ ब्लड चढ़ा दिया गया, जिससे बच्ची की हालत बिगड़ गई और अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ. बच्ची को अभी ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. लेकिन गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने से क्या होता है? इसके खतरे को समझने के लिए हमने फरीदाबाद सेक्टर 88स्थित यथार्थ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इंटर्नल मेडिसिन एंड रुमेटोलॉजी के सीनियर डायरेक्टर डॉ.जयंता ठाकुरिया से बात की. एक्सपर्ट ने बताया कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी होता है कि मरीज को सही ब्लड ग्रुप का खून ही चढ़ाया जाए. अगर गलती से गलत ब्लड ग्रुप का खून दे दिया जाए, तो शरीर में गंभीर और कभी-कभी जानलेवा रिएक्शन हो सकते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर का इम्यून सिस्टम गलत ब्लड को बाहरी और नुकसान पहुंचाने वाला मानकर उस पर हमला करने लगता है. O+ की जगह B+ ब्लड चढ़ाने के नुकसानअगर किसी मरीज को O+ ब्लड की जरूरत है लेकिन उसे गलती से B+ ब्लड चढ़ा दिया जाए, तो शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है. O+ ब्लड वाले व्यक्ति के शरीर में मौजूद एंटीबॉडीज B+ ब्लड की लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करती हैं और उन्हें तेजी से नष्ट करने लगती हैं. इस प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में “एक्यूट हेमोलिटिक रिएक्शन” कहा जाता है. यह प्रतिक्रिया अक्सर ब्लड चढ़ाने के कुछ ही मिनटों के अंदर शुरू हो सकती है. मरीज को तेज बुखार, कंपकंपी, सीने या फेफड़ों में दर्द, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, जी मिचलाना और दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं. कुछ मामलों में पेशाब का रंग गहरा हो सकता है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने का संकेत होता है. अगर स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाए, तो किडनी फेल होने या शरीर को शॉक लगने का खतरा भी हो सकता है. आमतौर पर O+ ब्लड ग्रुप वाले लोग दूसरे पॉजिटिव ब्लड ग्रुप से खून ले सकते हैं, लेकिन सही मिलान होना बेहद जरूरी है. यदि O+ मरीज को B+ ब्लड दिया जाता है, तो शरीर में मौजूद Anti-B एंटीबॉडीज तुरंत B+ डोनर ब्लड के खिलाफ प्रतिक्रिया शुरू कर देती हैं. इससे शरीर में गंभीर इम्यून रिएक्शन हो सकता है. नुकसान से बचाव के उपायऐसी गलती होने पर तुरंत ब्लड ट्रांसफ्यूजन रोकना जरूरी होता है. इसके बाद मरीज की हालत पर लगातार नजर रखी जाती है. मरीज को ऑक्सीजन, नसों के जरिए फ्लूड और जरूरत पड़ने पर दूसरी दवाएं दी जाती हैं ताकि शरीर को स्थिर रखा जा सके. डॉक्टर खासतौर पर किडनी को सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं, क्योंकि गलत ब्लड का असर सबसे पहले किडनी पर पड़ सकता है. इन नियमों का पालन करना जरूरीहर बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन करने से पहले, अस्पतालों में सुरक्षा से जुड़े कुछ सख्त नियम अपनाए जाते हैं, जैसे- ब्लड टाइप की जांच करना, मरीज और डोनर के ब्लड टाइप का मिलान करना, और किसी भी तरह की गलती से बचने के लिए डोनर की पहचान की दोबारा जांच करनाय. कोई भी छोटी सी गलती बहुत खतरनाक हो सकती है, और इसी वजह से, खून चढ़ाते समय डॉक्टर और नर्स दोनों ही बहुत ज्यादा सावधानी बरतते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

WHO के अलर्ट के बाद इबोला को लेकर सरकार अलर्ट, एयरपोर्ट से अस्पताल तक कड़ी निगरानी

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Last Updated:May 20, 2026, 21:48 IST Ebola Cases In India: हालांकि अभी तक भारत में एक भी इबोला का मरीज नहीं मिला है. लेकिन वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेश द्वारा इबोला को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने सावधानी बढ़ा दी है. ख़बरें फटाफट कोविड की महामारी के बाद अब इबोला विश्वभर के लिए चिंता का विषय बन गया है. लेकिन भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐलान किया है कि देश में अभी तक इबोला वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है. हालांकि, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेश द्वारा इबोला को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने सावधानी बढ़ा दी है. सरकार ने पूरे देश में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और जरूरी तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके. इसी विषय को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिव शामिल हुए. बैठक के दौरान इबोला वायरस से बचाव, निगरानी और इलाज की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई. अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि अगर भविष्य में कोई मामला सामने आता है, तो उससे तुरंत और प्रभावी तरीके से निपटा जा सके. सर्तक रहने के निर्देशस्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे हर स्तर पर सतर्क रहें. इसके तहत एयरपोर्ट्स पर आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है. जरूरत पड़ने पर क्वारंटीन की व्यवस्था, मरीजों के इलाज, रेफरल सिस्टम और लैब जांच की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं. अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी तैयार रहने के लिए कहा गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि इस समय मजबूत निगरानी व्यवस्था बनाए रखना बहुत जरूरी है. उन्होंने बताया कि राज्यों को समय पर जानकारी साझा करने और तय अस्पतालों को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा, अन्य मंत्रालयों और विभागों को भी अलर्ट कर दिया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर सभी मिलकर तेजी से कार्रवाई कर सकें. सरकार ने यह भी कहा कि भारत को ऐसी स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने का पहले से अनुभव है. साल 2014 में जब अफ्रीका में इबोला का बड़ा प्रकोप फैला था, तब भी भारत ने कई एहतियाती कदम उठाए थे. उस दौरान एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करके स्थिति को सफलतापूर्वक संभाला गया था. अफवाह से बचने की सलाहकेंद्र सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह या डर पर ध्यान न दें. फिलहाल देश में इबोला का कोई मामला नहीं है और सरकार पूरी तरह सतर्क है. लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल स्वास्थ्य विभाग और सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी और दिशा-निर्देशों का ही पालन करें. सरकार का कहना है कि सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi

स्वस्थ बालों के लिए छाछ: बालों के झड़ने से लेकर डैंड्रफ तक…हर समस्या का सस्ता घरेलू इलाज है छाछ, जान लें इस्तेमाल का सही तरीका

स्वस्थ बालों के लिए छाछ

20 मई 2026 को 21:32 IST पर अपडेट किया गया स्वस्थ बालों के लिए छाछ: आजकल बाल झड़ना, डैंड्रफ, रुखापन और मुलायम बालों जैसे दिखने वाले बाल बेहद आम हो गए हैं। इन घरेलू प्रोटोटाइप से प्राप्त करने के लिए लोग महंगे हेयर प्रोडक्ट्स का उपयोग करते हैं, लेकिन कई उपाय भी बेहद प्रभावशाली साबित हो सकते हैं। जवानी में से एक है छाछ। दही से बनी छाछ न केवल स्वास्थ्य के लिए जादुई मंत्र है, बल्कि यह बालों को मजबूत, मुलायम और मजबूत बनाने में भी मदद कर सकती है। आइये जानते हैं बालों पर छाछ के फायदे और इसे इस्तेमाल करने के सही तरीकों के बारे में अनुसरण करना : छाछ में लैक्टिक एसिड, प्रोटीन पाया जाता है, जो बालों को पोषण देने में मदद करते हैं। यह मृत रेशम कैनवास स्कैल्प को परत-दर-परत बनाए रखा जाता है। इससे बाल बालों से मजबूत होते हैं और उनकी चमक भी चमकती है। छवि: एआई वाइट हाथों से सादी छाछ दूरी और करीब 15 से 20 मिनट तक छोड़ें। इसके बाद गुनगुने या ठंडे पानी से बाल धो लें। बाद में माइल्ड शैंपू भी कर सकते हैं। यह हेयरस्टाइल बालों को मुलायम और फ़्रेशिएचर बनाती है। छवि: एआई डैंड्रफ या ऑयली स्कैल्प की समस्या है तो डैंड्रफ में छोटे नींबू का रस मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। कटोरी छाछ में नींबू का रस और स्कैल्प की रेसिपी बनाएं। 20 मिनट बाद माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें। छवि: फ्रीपिक छाछ का इस्तेमाल हेयर वॉश के तौर पर भी किया जाता है। कॉटन की मदद से छाछ को बालों की जड़ों में लगाएं। 30 से 45 मिनट बाद पानी से बाल धो लें। बेहतर परिणाम के लिए इसे सप्ताह में 2 से 3 बार उपयोग करें। छवि: फ्रीपिक बालों को पोषण देने के लिए बालों का हेयर मास्क भी काफी खतरनाक होता है। इसके लिए एक कटोरी छाछ में 3 मिंट ऑलिव ऑयल, एक अंडा और एक केला पेस्ट तैयार करें। छवि: अनप्लैश अब इस मास्क को बालों में लगाएं और करीब 20 मिनट बाद धो लें। इसका उपयोग सप्ताह में एक बार किया जाता है। आपको आपकी ही नज़र आएगी। छवि: फ्रीपिक आपकी त्वचा बहुत सेंसिटिव है या किसी तरह की एलर्जी की समस्या है तो बाल पर छाछ से पहले पैच टेस्ट जरूर करा लें। साथ ही छाछ का उपयोग एक या दो बार ही करें और दैनिक उपयोग करने से रोकें। छवि: अनप्लैश द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 20 मई 2026 को 21:32 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)बालों के लिए छाछ(टी)बालों के लिए छाछ(टी)स्वस्थ बाल युक्तियाँ(टी)बाल विकास उपाय(टी)रूसी घरेलू उपचार(टी)प्राकृतिक बालों की देखभाल(टी)बालों के झड़ने का समाधान(टी)घर का बना हेयर मास्क(टी)छाछ के फायदे(टी)रेशमी बाल टिप्स

40 की उम्र के बाद फिटनेस टिप्स: 40 की उम्र में क्या चाहिए 20 साल वाली फिटनेस? आज ही करें एलेक्जेंड्रा में ये 5 बदलाव, अव्यवस्थित कोसोन दूर

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40 के बाद फिट कैसे रहें: 40 की उम्र पार करते ही शरीर में होते हैं कई बदलाव। मेटाबॉलिज्म धीमा लगता है, मॉस मसल कम हो रहा है और ऊर्जा स्तर में थोड़ी गिरावट महसूस हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप फिट नहीं रह सकते। अगर आप 40 साल की उम्र के साथ-साथ 20 साल की उम्र में भी फिटनेस और फिटनेस चाहते हैं, तो आपको किसी चीज की जरूरत नहीं है। बस अपनी लाइफस्टाइल में ये 5 बदलाव करने से आपको कोसोन दूर जाना पड़ेगा: स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को रूटीन में शामिल करें 20 साल की उम्र में आप सिर्फ दौड़कर या वॉक करके फिट रह सकते थे, लेकिन 40 के बाद शरीर की मांस पेशियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। इसे रोकने के लिए सप्ताह में 2 से 3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या रेजिस्टेंस की मांग अवश्य करें। क्या करें: आप फिजिकल डंबल्स उठा सकते हैं, रेजिस्टेंस बैंड का इस्तेमाल कर सकते हैं, या खुद के शरीर के वजन से जुड़ी चीजें जैसे स्क्वाट्स और पुश-अप्स कर सकते हैं। यह आपके जोड़ों को भी मजबूत बनाए रखता है। साबुत अनाज में प्रोटीन मसाले और रिहाइड्रा कार्ब्स कम करें उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर को मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए भरपूर मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है। साथ ही, अब बॉडी एक्स्ट्रा कैलोरी को इतना जल्दी बर्न नहीं कर पाता, इसलिए चीनी और मैदे जैसे फाइबर से दूरी बनाना जरूरी है। क्या वास्तव में: अपने हर भोजन में प्रोटीन शामिल करें जैसे दालें, पनीर, दही, अंडा, लीन मीट, या स्प्राउट्स। स्ट्रेंथ फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और मैस्टिक मीट मीट बिल्कुल कम कर दीजिए। मेटाबोलिज्म के लिए तीव्रता और गहरी नींद लें अक्सर लोग फिटनेस के चक्कर में नींद को परेशान कर देते हैं। 40 की उम्र के बाद रात में 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेना किसी भी वरदान से कम नहीं है। नींद की कमी से तनाव बहुत अधिक बढ़ जाता है, जिससे पेट की चर्बी तेजी से बढ़ जाती है और वजन कम होना मुश्किल हो जाता है। अध्ययन करना जरूरी है उम्र बढ़ने के साथ-साथ कई बार हमें प्यास की परत का निशान कम होने लगता है, जिससे शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) हो जाती है। पानी कम पीने से जोड़ों में दर्द, थकान और सुस्ती जैसे खतरे सामने आते हैं। रिजर्व में कम से कम 3 किलोलीटर पानी जरूर पिएं ताकि टॉक्सिन्स बाजार में बने रहें। सक्रिय सिटिंग अपनाएं और स्थिर बैठे से असबाब अगर आप जिम में एक घंटे रुकते हैं लेकिन बाकी के 9 घंटे ऑफिस की कुर्सी पर लगातार बैठे रहते हैं, तो जिम का फायदा आधा हो जाता है। 40 के बाद “सिडेंटरी लाइफस्टाइल” चैलेंज का सबसे बड़ा कारण बना है। हर एक घंटे में अपनी सीट से उठें, 5 मिनट के लिए सैर करें या हल्की-फुल्की सैर करें। 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार अपना फुल बॉडी चेकअप जैसे ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और विटामिन डी और बी12 जरूर करवाएं। इससे शरीर के अंदर चल रही किसी भी समस्या का समय पर पता चल जाता है। बदलाव हमेशा छोटे-छोटे कदमों से शुरू होते हैं। इनमें से कोई भी दो बदलाव आपके जीवन में करने से आप खुद महसूस करेंगे कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। यह अवश्य पढ़ें: अनुपूरक कैसे चुनें: आप स्वास्थ्य और सौंदर्य प्रसाधन क्या लेते हैं? इन बातों के खास नुस्खे, सेहत को हो सकता है भारी नुकसान! अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)फिटनेस टिप्स(टी)स्वास्थ्य टिप्स(टी)फिटनेस टिप्स(टी)स्वस्थ आहार(टी)40 के बाद फिटनेस टिप्स(टी)स्वस्थ जीवनशैली के लिए फिटनेस टिप्स(टी)स्वस्थ जीवनशैली

बॉडी को फ्रिज बना देगा पहाड़ों का ये नन्हा फल, गर्मी का दुश्मन, डिहाइड्रेशन चुटकियों में छूमंतर

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Last Updated:May 20, 2026, 20:57 IST Hisalu benefits : उत्तराखंड के पहाड़ों में गर्मियों में मिलने वाला हिसालू सेहत के लिए वरदान से कम नहीं. मई-जून में झाड़ियों पर लगने वाला ये छोटा पीले रंग का फल स्वाद में खट्टा-मीठा और बेहद रसदार होता है. इसका सेवन शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाता है. हिसालू की मांग हर साल बढ़ रही है, लेकिन इसकी उपलब्धता सीमित रहती है. यह फल बेहद जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसे दूर के बाजारों तक पहुंचाना मुश्किल होता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ गर्मियों में मौसमी और प्राकृतिक फलों के सेवन को बेहद जरूरी मानते हैं. हिसालू जैसे जंगली फल शरीर को पोषण देने के साथ कई बीमारियों से बचाने में भी मदद करते हैं. इसमें मौजूद विटामिन-सी शरीर की इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक है. इसका सेवन शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में भी मदद करता है. पहाड़ों में लोग लंबे समय से इसे पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में खाते आ रहे हैं. प्राकृतिक फलों का सेवन शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी होता है. हिसालू स्वादिष्ट होने के साथ शरीर को ताजगी और ऊर्जा भी देता है. गर्मियों में इसे सेहत का खजाना माना जाता है. उत्तराखंड की लोक संस्कृति में हिसालू का विशेष महत्व है. पहाड़ों के कई लोकगीतों और पारंपरिक कहानियों में इस फल का जिक्र मिलता है. ग्रामीण इलाकों में हिसालू को बचपन और प्रकृति से जुड़ी यादों का प्रतीक माना जाता है. गर्मियों के मौसम में बच्चे जंगलों में जाकर हिसालू तोड़ते हैं, परिवार के साथ इसका आनंद लेते हैं. पहले समय में लोग जंगल से लौटते वक्त हिसालू जरूर लेकर आते थे. यह फल पहाड़ की जीवनशैली और प्राकृतिक खानपान का हिस्सा रहा है. आज भी गांवों में हिसालू का इंतजार गर्मियों के खास मौसम की तरह किया जाता है. लोगों का मानना है कि यह फल केवल स्वाद नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है. हिसालू की मांग हर साल बढ़ रही है, लेकिन इसकी उपलब्धता सीमित रहती है. यह फल बेहद जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसे दूर के बाजारों तक पहुंचाना मुश्किल है. कई स्थानीय लोग इसे छोटे स्तर पर बेचकर अतिरिक्त आय भी कमाते हैं. गर्मियों में सड़क किनारे और स्थानीय बाजारों में हिसालू बेचते ग्रामीण आसानी से दिखाई देते हैं. पर्यटक भी इस पारंपरिक पहाड़ी फल का स्वाद लेना पसंद करते हैं. यदि इसके संरक्षण और पैकेजिंग पर काम किया जाए तो यह पहाड़ के किसानों और ग्रामीणों के लिए आय का अच्छा स्रोत बन सकता है. पहाड़ की पहचान बन चुका हिसालू अब धीरे-धीरे दूसरे क्षेत्रों में भी लोकप्रिय हो रहा है. Add News18 as Preferred Source on Google हिसालू को पहाड़ों में प्राकृतिक ऊर्जा का अच्छा स्रोत माना जाता है. जंगलों और खेतों में काम करने वाले लोग थकान मिटाने के लिए हिसालू खाते हैं. इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा और पोषक तत्व शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करते हैं. गर्मियों में अधिक पसीना आने से शरीर कमजोर महसूस करता है, ऐसे में हिसालू राहत देने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार होते हैं. यह फल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद है. पहाड़ी क्षेत्रों में लोग इसे बिना किसी प्रसंस्करण के सीधे खाते हैं, जिससे इसके प्राकृतिक गुण बरकरार रहते हैं. हिसालू बेहद नाजुक होता है. जंगल से तोड़ने के कुछ घंटों बाद ही यह खराब होने लगता है, इसलिए इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना आसान नहीं होता है. यही वजह है कि यह फल बाजारों में कम दिखाई देता है, ज्यादातर स्थानीय क्षेत्रों तक ही सीमित रहता है. ग्रामीण लोग सुबह के समय ताजा हिसालू तोड़कर सीधे सेवन करते हैं. इसका स्वाद ताजा रहने पर सबसे ज्यादा अच्छा माना जाता है. कई जगहों पर लोग इसका जूस और चटनी भी बनाते हैं. पहाड़ों में बच्चों के लिए हिसालू केवल फल नहीं, बल्कि गर्मियों की खास याद माना जाता है. इस पारंपरिक फल को पहचान मिले और इसके संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाए. भीषण गर्मी के दौरान हिसालू शरीर को ठंडा रखने में काफी मददगार है. पहाड़ों में रहने वाले लोग इसे प्राकृतिक कूलिंग फल के रूप में जानते हैं. यह फल रसदार होने के कारण शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने में सहायक है. जंगल में काम करने वाले लोग गर्मी से राहत पाने के लिए हिसालू खाते हैं. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की थकान कम करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं. खास बात यह है कि यह फल पूरी तरह प्राकृतिक होता है, इसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता है. डॉक्टर भी गर्मियों में मौसमी और प्राकृतिक फलों के सेवन की सलाह देते हैं. बागेश्वर के चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल लोकल 18 से बताते हैं कि हिसालू पोषक तत्वों से भरपूर फल है. इसमें विटामिन-सी, आयरन, फाइबर और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में हिसालू खाने से शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है. गर्मियों में शरीर में पानी की कमी होने लगती है, ऐसे में हिसालू शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा और पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में गर्मियों के मौसम में मिलने वाला हिसालू इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. स्थानीय लोग इसे बचपन की यादों और पहाड़ की पारंपरिक पहचान से जोड़कर देखते हैं. हिसालू को वैज्ञानिक भाषा में रुबस एलिप्टिकस कहा जाता है, जो गुलाब परिवार का पौधा माना जाता है. यह फल प्राकृतिक रूप से पहाड़ों में उगता है, बिना किसी रासायनिक खाद के तैयार होता है. ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे और महिलाएं जंगलों से हिसालू तोड़कर घर लाते हैं. गर्मियों में यह फल शरीर को ठंडक देने और ऊर्जा बनाए रखने में काफी मददगार माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।