40 की उम्र के बाद फिटनेस टिप्स: 40 की उम्र में क्या चाहिए 20 साल वाली फिटनेस? आज ही करें एलेक्जेंड्रा में ये 5 बदलाव, अव्यवस्थित कोसोन दूर

40 के बाद फिट कैसे रहें: 40 की उम्र पार करते ही शरीर में होते हैं कई बदलाव। मेटाबॉलिज्म धीमा लगता है, मॉस मसल कम हो रहा है और ऊर्जा स्तर में थोड़ी गिरावट महसूस हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप फिट नहीं रह सकते। अगर आप 40 साल की उम्र के साथ-साथ 20 साल की उम्र में भी फिटनेस और फिटनेस चाहते हैं, तो आपको किसी चीज की जरूरत नहीं है। बस अपनी लाइफस्टाइल में ये 5 बदलाव करने से आपको कोसोन दूर जाना पड़ेगा: स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को रूटीन में शामिल करें 20 साल की उम्र में आप सिर्फ दौड़कर या वॉक करके फिट रह सकते थे, लेकिन 40 के बाद शरीर की मांस पेशियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। इसे रोकने के लिए सप्ताह में 2 से 3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या रेजिस्टेंस की मांग अवश्य करें। क्या करें: आप फिजिकल डंबल्स उठा सकते हैं, रेजिस्टेंस बैंड का इस्तेमाल कर सकते हैं, या खुद के शरीर के वजन से जुड़ी चीजें जैसे स्क्वाट्स और पुश-अप्स कर सकते हैं। यह आपके जोड़ों को भी मजबूत बनाए रखता है। साबुत अनाज में प्रोटीन मसाले और रिहाइड्रा कार्ब्स कम करें उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर को मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए भरपूर मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है। साथ ही, अब बॉडी एक्स्ट्रा कैलोरी को इतना जल्दी बर्न नहीं कर पाता, इसलिए चीनी और मैदे जैसे फाइबर से दूरी बनाना जरूरी है। क्या वास्तव में: अपने हर भोजन में प्रोटीन शामिल करें जैसे दालें, पनीर, दही, अंडा, लीन मीट, या स्प्राउट्स। स्ट्रेंथ फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और मैस्टिक मीट मीट बिल्कुल कम कर दीजिए। मेटाबोलिज्म के लिए तीव्रता और गहरी नींद लें अक्सर लोग फिटनेस के चक्कर में नींद को परेशान कर देते हैं। 40 की उम्र के बाद रात में 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेना किसी भी वरदान से कम नहीं है। नींद की कमी से तनाव बहुत अधिक बढ़ जाता है, जिससे पेट की चर्बी तेजी से बढ़ जाती है और वजन कम होना मुश्किल हो जाता है। अध्ययन करना जरूरी है उम्र बढ़ने के साथ-साथ कई बार हमें प्यास की परत का निशान कम होने लगता है, जिससे शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) हो जाती है। पानी कम पीने से जोड़ों में दर्द, थकान और सुस्ती जैसे खतरे सामने आते हैं। रिजर्व में कम से कम 3 किलोलीटर पानी जरूर पिएं ताकि टॉक्सिन्स बाजार में बने रहें। सक्रिय सिटिंग अपनाएं और स्थिर बैठे से असबाब अगर आप जिम में एक घंटे रुकते हैं लेकिन बाकी के 9 घंटे ऑफिस की कुर्सी पर लगातार बैठे रहते हैं, तो जिम का फायदा आधा हो जाता है। 40 के बाद “सिडेंटरी लाइफस्टाइल” चैलेंज का सबसे बड़ा कारण बना है। हर एक घंटे में अपनी सीट से उठें, 5 मिनट के लिए सैर करें या हल्की-फुल्की सैर करें। 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार अपना फुल बॉडी चेकअप जैसे ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और विटामिन डी और बी12 जरूर करवाएं। इससे शरीर के अंदर चल रही किसी भी समस्या का समय पर पता चल जाता है। बदलाव हमेशा छोटे-छोटे कदमों से शुरू होते हैं। इनमें से कोई भी दो बदलाव आपके जीवन में करने से आप खुद महसूस करेंगे कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। यह अवश्य पढ़ें: अनुपूरक कैसे चुनें: आप स्वास्थ्य और सौंदर्य प्रसाधन क्या लेते हैं? इन बातों के खास नुस्खे, सेहत को हो सकता है भारी नुकसान! अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)फिटनेस टिप्स(टी)स्वास्थ्य टिप्स(टी)फिटनेस टिप्स(टी)स्वस्थ आहार(टी)40 के बाद फिटनेस टिप्स(टी)स्वस्थ जीवनशैली के लिए फिटनेस टिप्स(टी)स्वस्थ जीवनशैली
बॉडी को फ्रिज बना देगा पहाड़ों का ये नन्हा फल, गर्मी का दुश्मन, डिहाइड्रेशन चुटकियों में छूमंतर

Last Updated:May 20, 2026, 20:57 IST Hisalu benefits : उत्तराखंड के पहाड़ों में गर्मियों में मिलने वाला हिसालू सेहत के लिए वरदान से कम नहीं. मई-जून में झाड़ियों पर लगने वाला ये छोटा पीले रंग का फल स्वाद में खट्टा-मीठा और बेहद रसदार होता है. इसका सेवन शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाता है. हिसालू की मांग हर साल बढ़ रही है, लेकिन इसकी उपलब्धता सीमित रहती है. यह फल बेहद जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसे दूर के बाजारों तक पहुंचाना मुश्किल होता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ गर्मियों में मौसमी और प्राकृतिक फलों के सेवन को बेहद जरूरी मानते हैं. हिसालू जैसे जंगली फल शरीर को पोषण देने के साथ कई बीमारियों से बचाने में भी मदद करते हैं. इसमें मौजूद विटामिन-सी शरीर की इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक है. इसका सेवन शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में भी मदद करता है. पहाड़ों में लोग लंबे समय से इसे पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में खाते आ रहे हैं. प्राकृतिक फलों का सेवन शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी होता है. हिसालू स्वादिष्ट होने के साथ शरीर को ताजगी और ऊर्जा भी देता है. गर्मियों में इसे सेहत का खजाना माना जाता है. उत्तराखंड की लोक संस्कृति में हिसालू का विशेष महत्व है. पहाड़ों के कई लोकगीतों और पारंपरिक कहानियों में इस फल का जिक्र मिलता है. ग्रामीण इलाकों में हिसालू को बचपन और प्रकृति से जुड़ी यादों का प्रतीक माना जाता है. गर्मियों के मौसम में बच्चे जंगलों में जाकर हिसालू तोड़ते हैं, परिवार के साथ इसका आनंद लेते हैं. पहले समय में लोग जंगल से लौटते वक्त हिसालू जरूर लेकर आते थे. यह फल पहाड़ की जीवनशैली और प्राकृतिक खानपान का हिस्सा रहा है. आज भी गांवों में हिसालू का इंतजार गर्मियों के खास मौसम की तरह किया जाता है. लोगों का मानना है कि यह फल केवल स्वाद नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है. हिसालू की मांग हर साल बढ़ रही है, लेकिन इसकी उपलब्धता सीमित रहती है. यह फल बेहद जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसे दूर के बाजारों तक पहुंचाना मुश्किल है. कई स्थानीय लोग इसे छोटे स्तर पर बेचकर अतिरिक्त आय भी कमाते हैं. गर्मियों में सड़क किनारे और स्थानीय बाजारों में हिसालू बेचते ग्रामीण आसानी से दिखाई देते हैं. पर्यटक भी इस पारंपरिक पहाड़ी फल का स्वाद लेना पसंद करते हैं. यदि इसके संरक्षण और पैकेजिंग पर काम किया जाए तो यह पहाड़ के किसानों और ग्रामीणों के लिए आय का अच्छा स्रोत बन सकता है. पहाड़ की पहचान बन चुका हिसालू अब धीरे-धीरे दूसरे क्षेत्रों में भी लोकप्रिय हो रहा है. Add News18 as Preferred Source on Google हिसालू को पहाड़ों में प्राकृतिक ऊर्जा का अच्छा स्रोत माना जाता है. जंगलों और खेतों में काम करने वाले लोग थकान मिटाने के लिए हिसालू खाते हैं. इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा और पोषक तत्व शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करते हैं. गर्मियों में अधिक पसीना आने से शरीर कमजोर महसूस करता है, ऐसे में हिसालू राहत देने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार होते हैं. यह फल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद है. पहाड़ी क्षेत्रों में लोग इसे बिना किसी प्रसंस्करण के सीधे खाते हैं, जिससे इसके प्राकृतिक गुण बरकरार रहते हैं. हिसालू बेहद नाजुक होता है. जंगल से तोड़ने के कुछ घंटों बाद ही यह खराब होने लगता है, इसलिए इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना आसान नहीं होता है. यही वजह है कि यह फल बाजारों में कम दिखाई देता है, ज्यादातर स्थानीय क्षेत्रों तक ही सीमित रहता है. ग्रामीण लोग सुबह के समय ताजा हिसालू तोड़कर सीधे सेवन करते हैं. इसका स्वाद ताजा रहने पर सबसे ज्यादा अच्छा माना जाता है. कई जगहों पर लोग इसका जूस और चटनी भी बनाते हैं. पहाड़ों में बच्चों के लिए हिसालू केवल फल नहीं, बल्कि गर्मियों की खास याद माना जाता है. इस पारंपरिक फल को पहचान मिले और इसके संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाए. भीषण गर्मी के दौरान हिसालू शरीर को ठंडा रखने में काफी मददगार है. पहाड़ों में रहने वाले लोग इसे प्राकृतिक कूलिंग फल के रूप में जानते हैं. यह फल रसदार होने के कारण शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने में सहायक है. जंगल में काम करने वाले लोग गर्मी से राहत पाने के लिए हिसालू खाते हैं. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की थकान कम करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं. खास बात यह है कि यह फल पूरी तरह प्राकृतिक होता है, इसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता है. डॉक्टर भी गर्मियों में मौसमी और प्राकृतिक फलों के सेवन की सलाह देते हैं. बागेश्वर के चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल लोकल 18 से बताते हैं कि हिसालू पोषक तत्वों से भरपूर फल है. इसमें विटामिन-सी, आयरन, फाइबर और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में हिसालू खाने से शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है. गर्मियों में शरीर में पानी की कमी होने लगती है, ऐसे में हिसालू शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा और पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में गर्मियों के मौसम में मिलने वाला हिसालू इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. स्थानीय लोग इसे बचपन की यादों और पहाड़ की पारंपरिक पहचान से जोड़कर देखते हैं. हिसालू को वैज्ञानिक भाषा में रुबस एलिप्टिकस कहा जाता है, जो गुलाब परिवार का पौधा माना जाता है. यह फल प्राकृतिक रूप से पहाड़ों में उगता है, बिना किसी रासायनिक खाद के तैयार होता है. ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे और महिलाएं जंगलों से हिसालू तोड़कर घर लाते हैं. गर्मियों में यह फल शरीर को ठंडक देने और ऊर्जा बनाए रखने में काफी मददगार माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
ईंधन बचाने के लिए पीएम के WFH आह्वान का समर्थन करते हुए रवि किशन ने भाषण में कहा ‘काम से घर’ | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 मई, 2026, 20:09 IST यह टिप्पणी तेजी से सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई, क्लिप को उन उपयोगकर्ताओं द्वारा व्यापक रूप से साझा किया गया जिन्होंने वाक्यांश संबंधी त्रुटि की ओर इशारा किया। बीजेपी सांसद रवि किशन. भाजपा सांसद रवि किशन ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा चिंताओं के बीच ईंधन संरक्षण के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का समर्थन करते हुए “घर से काम” वाक्यांश को मिश्रित करने के बाद ऑनलाइन ध्यान आकर्षित किया है। के साथ एक साक्षात्कार में बोलते हुए पीटीआईअभिनेता से नेता बने अभिनेता ईंधन की खपत को कम करने के लिए लचीली कार्य व्यवस्था पर सरकार के जोर का जिक्र कर रहे थे। हालाँकि, उन्होंने कहा, “घर से काम करने के बजाय काम से घर जाना बहुत महत्वपूर्ण है,” जो कि उनकी जुबान फिसलने जैसा प्रतीत हुआ। यह टिप्पणी तेजी से सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई, क्लिप को उन उपयोगकर्ताओं द्वारा व्यापक रूप से साझा किया गया जिन्होंने वाक्यांश संबंधी त्रुटि की ओर इशारा किया। “घर से काम” वाक्यांश का प्रयोग आमतौर पर दूरस्थ कार्य व्यवस्था के संदर्भ में किया जाता है। यह क्लिप तेजी से वायरल हो गई, उपयोगकर्ताओं की जुबान फिसलने से मीम्स और चुटकुलों की बाढ़ आ गई। टिप्पणी अनुभाग जल्द ही एक कॉमेडी थ्रेड में बदल गया, जिसमें एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “2×3=3×2, उसी तरह उनके अनुसार घर से काम = घर से काम।” एक अन्य ने मजाक में कहा, “हां, हम हर दिन काम से घर आते हैं… घर पहुंचेंगे और रात का खाना खाएंगे।” एक वायरल चुटकी में सरल शब्दों में लिखा था: “फिसलन भरी जीभ।” अन्य लोगों ने अधिक व्यंग्यात्मक लहजे में टिप्पणी की, जैसे “मीडिया – टीआरपी नहीं आ रही। रवि किशन – मैं हूं ना,” और “उनका मतलब परिवार को कार्यस्थल पर स्थानांतरित करना है।” “जो लोग अपने बाथटब में दूध और गुलाब की पंखुड़ियाँ माँगते थे, वे अब जनता को यह सलाह दे रहे हैं!” एक यूजर ने लिखा. पीएम मोदी की अपील यह टिप्पणी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के संदर्भ में की गई थी जिसमें नागरिकों और संस्थानों से सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग और जहां संभव हो घर से काम करने सहित विभिन्न उपायों के माध्यम से ईंधन के उपयोग को कम करने का आग्रह किया गया था। प्रधान मंत्री के सुझाव पश्चिम एशिया में तनाव से जुड़े ऊर्जा बाजारों में वैश्विक व्यवधानों के बीच आए हैं, जिसने दुनिया भर में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ईंधन बचाने के लिए पीएम के WFH आह्वान का समर्थन करते हुए, रवि किशन ने भाषण में ‘काम से घर’ कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)रवि किशन घर से काम करने की पर्ची(टी)रवि किशन गलती(टी)घर से काम(टी)घर से काम टिप्पणी(टी)नरेंद्र मोदी ईंधन अपील(टी)ईंधन संरक्षण भारत(टी)लचीली कार्य व्यवस्था(टी)वायरल साक्षात्कार क्लिप
लू, डिहाइड्रेशन और कमजोरी से बचना है? गर्मियों में जरूर खाएं ये खट्टा फल, शरीर का ‘नेचुरल बॉडीगार्ड’

Last Updated:May 20, 2026, 19:48 IST गर्मियों में मिलने वाला कच्चा आम सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार कच्चा आम लू, डिहाइड्रेशन, पेट की समस्याओं और कमजोरी से बचाने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि आम पना, चटनी और अचार गर्मियों की थाली का अहम हिस्सा बन जाते हैं. ख़बरें फटाफट रामपुर. गर्मी बढ़ते ही बाजारों में कच्चे आम की आमद शुरू हो जाती है. स्वाद में खट्टा लगने वाला यही कच्चा आम गर्मियों में शरीर के लिए किसी प्राकृतिक सुरक्षा कवच से कम नहीं माना जाता. उत्तर भारत में लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि लू, पाचन संबंधी समस्याओं और मौसमी परेशानियों से बचाव के लिए भी अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं. गांव से लेकर शहर तक कच्चे आम से बनने वाला पना, चटनी और अचार गर्मियों की थाली का अहम हिस्सा बन चुका है. पोषक तत्वों से भरपूर है कच्चा आमकच्चे आम में फाइबर, विटामिन C, विटामिन A, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और जिंक जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. यही वजह है कि यह शरीर को ऊर्जा देने, पाचन सुधारने, इम्यूनिटी मजबूत करने और त्वचा व बालों की सेहत बनाए रखने में मददगार माना जाता है. तेज गर्मी में जब शरीर जल्दी थकान महसूस करता है, तब कच्चा आम राहत देने का काम करता है. लू और डिहाइड्रेशन से बचाने में मददगारगर्मी के मौसम में अक्सर लू लगना, डिहाइड्रेशन, गैस, खट्टी डकार और पेट खराब होने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे में कच्चा आम घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. कई घरों में आज भी इसे पारंपरिक तरीके से भोजन का हिस्सा बनाया जाता है ताकि गर्मी के असर से बचाव हो सके. डॉक्टरों का मानना है कि सीमित मात्रा में नियमित सेवन करने से शरीर की सहनशक्ति बनी रहती है. आम पना देता है ठंडककच्चा आम खाने का सबसे लोकप्रिय तरीका ‘आम पना’ माना जाता है. उबले हुए कच्चे आम के गूदे में भुना जीरा, काला नमक, पुदीना और थोड़ी चीनी मिलाकर बनाया गया पना शरीर को ठंडक देता है. ग्रामीण इलाकों में इसे लू से बचाने वाला पारंपरिक पेय माना जाता है. गर्मी से लौटने के बाद एक गिलास आम पना शरीर को तरोताजा करने और पानी की कमी पूरी करने में मदद करता है. चटनी और अचार भी हैं फायदेमंदकच्चे आम की चटनी भी गर्मियों में खूब पसंद की जाती है. इसे हरी मिर्च, धनिया और नमक के साथ पीसकर तैयार किया जाता है. यह भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ पाचन में भी मदद करती है. वहीं कई जगह कच्चे आम का अचार गन्ने के सिरके में तैयार किया जाता है, जिसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. हालांकि डॉक्टर अधिक मात्रा में सेवन से बचने की सलाह देते हैं. डॉक्टर ने दी सावधानी बरतने की सलाहरामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल के अनुसार, कच्चा आम गर्मियों में स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है. इसमें मौजूद फाइबर और विटामिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. उन्होंने बताया कि कच्चे आम का पना लू और हल्के पेट खराब होने की समस्या में राहत दे सकता है. साथ ही यह वजन नियंत्रित करने, त्वचा और बालों को स्वस्थ रखने और इम्यूनिटी मजबूत करने में भी सहायक माना जाता है. हालांकि मधुमेह के मरीजों को सीमित मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए. खासकर इंसुलिन लेने वाले मरीजों को 50 ग्राम से अधिक कच्चा आम न खाने की सलाह दी गई है. About the Author Madhuri Chaudhary पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Rampur,Uttar Pradesh
लौकी बेसन के गट्टे की सब्जी रेसिपी: पनीर भी हो जाएगा फेल, जब घर में बनेगी लौकी-बेसन के गट्टे की सब्जी, बनाना भी है आसान

गट्टे बनाने के लिए: 1 कप बेसन, 1 कप कद्दू की हुई लौकी, 1/2 बड़ी लाल मिर्च पाउडर, 1/2 हल्दी हल्दी, 1/2 चम्मच हल्दी, नमक का स्वाद, 1 मसाला तेल छवि: एआई ग्रेवी के लिए: 2 टमाटर का पेस्ट, 1 टमाटर का पेस्ट, 1 हरी मिर्च, 1/2 धनिया पाउडर, 1/2 धनिया पाउडर, 1/2 हरा धनिया पाउडर, 1/2 टमाटर का पेस्ट, 1/2 लाल मिर्च पाउडर, 2 धनिया पाउडर, 2 धनिया पाउडर, 2 धनिया पाउडर छवि: फ्रीपिक सबसे पहले एक बाउल बेसन, कद्दू की हुई लौकी, नमक, अजमोद, हल्दी और थोड़ा सा तेल के टुकड़े अच्छे तरह से मिक्स कर लें। जरूरत लगे तो थोड़ा पानी नमक सख्त आटा गूंथ लें। छवि: एआई अब इस मिक्स की लॉन्ग-लंबी रोल जैसी लो बिक्री बना लें। एक पॉश्चर में पानी गर्म करें और इन रोल्स को 10 मिनट तक लें। जब ये पकें तो बाहर स्वादिष्ट ठंडा करें और छोटे-छोटे खाने में काट लें। छवि: एआई ग्रेवी बनाने की विधि: ग्रेवी में तेल गर्म करें और इसमें जीरा डालें. इसके बाद प्याज़ और हरी मिर्च के टुकड़े को भून लें। अब टमाटर का पेस्ट डाला और एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट से महानतम पात्र। छवि: एआई जब मूल तेल बाहर लाएँ, तब उसमें दही डेस्टिनेटिव क्रिसमस रहें ताकि दही फटे नहीं। अब जरूरत है पानी और ग्रेवी को 5 मिनट तक के बर्तन बनाने की. छवि: फ्रीपिक इसके बाद गट्टे ग्रेवी में तैयार कर लीजिए और 5-7 मिनिट तक मिनिमम डांस परदे पर रख दीजिए, ताकि गट्टे में ग्रेवी का स्वाद अच्छे से आ जाए. फाइनल में ऊपर से गर्म मसाला और हरा धनिया दाल दे। छवि: फ्रीपिक तैयार है आपकी सब्जी और टेस्टी लोकी-बेसन गट्टे की सब्जी। इसे गर्म रोटी, तंदूरी पराठे या जीरा चावल के साथ सर्व करें। घर वाले स्वाद चखते ही आपकी तारीफ नहीं थकेंगे। छवि: एआई लोकी-बेसन के गट्टे की सब्जी छवि: एआई/फ़्रीपिक
तमिलनाडु में कांग्रेस का 59 साल का इंतजार खत्म हुआ, दो विधायक विजय कैबिनेट में शामिल होने के लिए तैयार | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 मई, 2026, 19:12 IST विधायक राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाले तमिलनाडु मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इस घटनाक्रम को तमिलनाडु में एक प्रमुख राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां कांग्रेस ने पारंपरिक रूप से राज्य मंत्रिमंडल में प्रत्यक्ष भागीदारी के बिना दशकों तक द्रविड़ पार्टियों के कनिष्ठ गठबंधन भागीदार की भूमिका निभाई है। कांग्रेस का 59 साल का इंतजार आखिरकार गुरुवार को खत्म हो जाएगा क्योंकि पार्टी के दो विधायक तमिलनाडु सरकार में शामिल हो जाएंगे। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने घोषणा की कि विधायक राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाले तमिलनाडु मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में शपथ लेंगे। वेणुगोपाल ने इस घटनाक्रम को पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि कांग्रेस 59 वर्षों में पहली बार तमिलनाडु सरकार का हिस्सा बनेगी। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि 59 साल के लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस तमिलनाडु कैबिनेट में शामिल हुई है। वेणुगोपाल ने कहा, “मैं उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं। हमें विश्वास है कि वे तमिलनाडु के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करेंगे, और विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी द्वारा निर्धारित कल्याण और जन-समर्थक शासन के साहसिक दृष्टिकोण को साकार करने के लिए काम करेंगे।” इस घटनाक्रम को तमिलनाडु में एक प्रमुख राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां कांग्रेस ने पारंपरिक रूप से राज्य मंत्रिमंडल में प्रत्यक्ष भागीदारी के बिना दशकों तक द्रविड़ पार्टियों के कनिष्ठ गठबंधन भागीदार की भूमिका निभाई है। हालाँकि, इस बार, कांग्रेस ने द्रविड़ प्रमुखों के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे गठबंधन को तोड़ दिया और राज्य में सरकार बनाने में मदद करने के लिए सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) से हाथ मिला लिया। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में, टीवीके सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन बहुमत के आंकड़े 118 से 10 सीटें कम रह गई। कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) ने बाद में विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दिया, जिससे गठबंधन प्रशासन के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया तमिलनाडु में कांग्रेस का 59 साल का इंतजार खत्म हुआ क्योंकि दो विधायक विजय के मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए तैयार हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कांग्रेस तमिलनाडु सरकार में शामिल हुई(टी)तमिलनाडु कैबिनेट(टी)कांग्रेस के मंत्री तमिलनाडु(टी)राजेश कुमार विधायक(टी)पी. विश्वनाथन मंत्री (टी)सी. जोसेफ विजय टीवीके(टी)गठबंधन सरकार तमिलनाडु(टी)ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव
बार-बार पिंपल को छूने से नहीं रोक पाते? दिमाग खेल रहा खेल, जानें साइकोलॉजिकल वजह

Last Updated:May 20, 2026, 19:03 IST Popping Pimple Feels Good Reason: क्या आपका चेहरा भी मुहांसों के दाग से भर गया है? क्या आप भी खुद को पिंपल फोड़ने से नहीं रोक पाते तो ये लेख आपके लिए है. यहां आप इसके पीछे का कारण जान सकते हैं. ख़बरें फटाफट स्किन एक्सपर्ट अक्सर सलाह देते हैं कि पिंपल्स को फोड़ना नहीं चाहिए और उन्हें बार-बार हाथ भी नहीं लगाना चाहिए. इससे स्किन के डैमेज होने का खतरा होता है. लेकिन कई लोग चाहकर भी खुद को पिंपल फोड़ने से रोक नहीं पाते. कुछ लोगों को ऐसा करने से राहत और सेटिस्फेक्शन महसूस होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी वजह आपका ही दिमाग है. पिंपल या मुहांसे होने का सबसे बड़ा कारण हमारी स्किन टाइप होता है. जिन लोगों की त्वचा ज्यादा ऑयली होती है, उनमें कई बार पिंपल कम दिखाई देते हैं, जबकि ड्राई या मिक्स स्किन वाले लोगों को मुहांसों की समस्या ज्यादा परेशान करती है. जब त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स बंद हो जाती हैं या उनमें बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, तब पिंपल बनने लगते हैं. आमतौर पर ये ज्यादा खतरनाक नहीं होते, लेकिन इन्हें फोड़ने से त्वचा में इंफेक्शन, दर्द और दाग-धब्बों का खतरा बढ़ जाता है. पिंपल फोड़ने में मजा क्यों आता है? कई लोग बार-बार पिंपल्स को छूते हैं या उन्हें फोड़ देते हैं. कुछ लोगों को यह देखकर घिन महसूस होती है, जबकि कुछ लोगों को इससे अजीब तरह का सुकून मिलता है. इसे समझने के लिए ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्राज के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च की थी. यह स्टडी साल 2021 में बिहेवियरल ब्रेन रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुई थी. रिसर्च में करीब 80 लोगों को शामिल किया गया और उनके दिमाग की गतिविधियों को fMRI मशीन की मदद से रिकॉर्ड किया गया. अध्ययन में पता चला कि जिन लोगों को पिंपल फोड़ने वाले वीडियो पसंद आते हैं, वे घिन जैसी भावनाओं को बेहतर तरीके से कंट्रोल कर लेते हैं. ऐसे लोगों का दिमाग इनाम और खुशी से जुड़ी गतिविधियों पर ज्यादा तेजी से प्रतिक्रिया देता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, दिमाग के दो हिस्से इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. पहला हिस्सा “न्यूक्लियस अक्यूम्बेंस” कहलाता है, जो खुशी और इनाम की भावना से जुड़ा होता है. दूसरा हिस्सा “इंसुला” है, जो घिन और असहजता को कंट्रोल करता है. जिन लोगों को पिंपल फोड़ना पसंद होता है, उनमें इन दोनों हिस्सों के बीच अच्छा तालमेल पाया गया. जब कोई व्यक्ति पिंपल फोड़ता है, तो उसके दिमाग में डोपामाइन नाम का “हैप्पी हार्मोन” रिलीज होता है. यही हार्मोन खुशी और राहत का एहसास कराता है. इसी वजह से कुछ लोगों को पिंपल फोड़ने में मजा आता है और वे बार-बार ऐसा करने की इच्छा महसूस करते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
शाही गुलाब लस्सी रेसिपी: लू वाली गर्माहट को माता देवी घर में बनाएं शाही गुलाब लस्सी, भूल जाएंगे बाजार का स्वाद; चखते ही आदर्श!

सामग्री: 2 कप ठंडा दही, 4 बड़े मोयनी गुलाब, 2 बड़े मोयनी चीनी, 1/2 कप ठंडा दूध, 6 बर्फ के टुकड़े, 1 छोटा मावा, 1 छोटा मोयन, 1 छोटा सा कटा हुआ पिस्ता और बादाम, सूखे गुलाब के पंखुड़ी, 1 छोटा मलाई छवि: फ्रीपिक सबसे पहले प्लास्टिक जार में ठंडा दही, दूध, चीनी और गुलाब का मसाला डाला जाता था। अब बर्फ के टुकड़े और गुलाब जल भंडार में। सभी निःसंतान को 1-2 मिनट तक अच्छी तरह से ब्लेंड करें ताकि लस्सी मित्र और झगड़ादार बन जाएं। छवि: एआई अब सर्विंग ग्लास लेन और उसके साथी लिटिल गुलाब की पत्रिका पर काम कर रहे हैं। इससे लस्सी देखने में और भी खूबसूरत लिपस्टिक। तैयार लस्सी को ग्लास में डालकर ऊपर से मलाई या ताजा क्रीम डाल दें। छवि: एआई अंत में कटे हुए पिस्ता, बादाम और सूखे गुलाब की सजावट से सजाएं। पिड्रम तो ऊपर से थोड़ा और गुलाब सिरप डाल सकते हैं। छवि: फ्रीपिक लस्सी को बड़े पैमाने पर आकाशगंगा और मलाईदार बनाना चाहते हैं तो दही को पहले कुछ देर से फ़िरोज़ में रख दें। गुलाब सिरप की मात्रा अपने स्वाद के हिसाब से कम या ज्यादा कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक रॉयल रोज़ लस्सी सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि गर्मी से राहत देने में भी शानदार मंज़िल मिलती है। दही के शरीर को ठंडक मिलती है, जबकि गुलाब के शरीर को ठंडक महसूस होती है। छवि: एआई चीनी जगह शहद का उपयोग भी किया जा सकता है। अन्वेषक-ठंडी लस्सी का असली मजा तुरंत सर्व करने में ही आता है। गर्मियों में यह ड्रिंक बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बहुत पसंद आती है। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)शाही गुलाब लस्सी रेसिपी(टी)गुलाबी लस्सी(टी)गुलाबी लस्सी रेसिपी(टी)गुलाब लस्सी(टी)शाही लस्सी रेसिपी(टी)शाही गुलाब लस्सी रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन रेसिपी(टी)गर्मियों के लिए लस्सी रेसिपी
जामुन खाकर बीज मत फेंकिए! शुगर कंट्रोल से लेकर हार्ट तक के लिए बताया गया रामबाण, जानिए खाने का तरीका

Last Updated:May 20, 2026, 18:19 IST गर्मी के मौसम में बाजारों में जामुन की बहार शुरू हो चुकी है. स्वाद के साथ-साथ जामुन के बीज भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, इसका पाउडर शुगर कंट्रोल करने और इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार हो सकता है. सुल्तानपुर. गर्मी का मौसम चल रहा है. जामुन के पेड़ों में फल आने शुरू हो चुके हैं. जामुन एक ऐसा फल है जिसका स्वाद किसे नहीं पसंद. इसका बीज शुगर कंट्रोल में काम आता है. अगर आप भी शुगर से परेशान हैं तो इस सीजन जामुन के बीज को फेंकने की जगह सुरक्षित रख लें. आइये आयुर्वेद चिकित्सक से जानते हैं इसके बीजों का उपयोग, जो सेहत के लिए रामबाण हो सकता है. सुल्तानपुर के मेडिकल कॉलेज में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. संतोष श्रीवास्तव लोकल 18 से बताते हैं कि जामुन का बीज शुगर को कंट्रोल करने में काफी मददगार है. शरीर का इम्युनिटी सिस्टम मजबूत करता है. जामुन के बीज का पाउडर बनाकर सुबह-शाम गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से शुगर कंट्रोल रहता है. डॉ. संतोष के मुताबिक, जामुन के बीज में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, सोडियम, फॉस्फोरस, विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google कई वैज्ञानिक शोध पाया गया है कि यह हमारे शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है. जामुन के बीज को पहले अच्छे से धुल लेना चाहिए. धुलने के बाद सुखा लें. उसके बाद छिलके को किसी पत्थर से तोड़कर अलग कर देना चाहिए और बीज के मुख्य भाग को अच्छे से पिसाई कर लेनी चाहिए. इस पाउडर को प्रतिदिन गुनगुने पानी से एक चम्मच सुबह खाना चाहिए. इससे डायबिटीज नियंत्रित रहता है. डॉ. संतोष बताते हैं कि जामुन में हाई लेवल पोटैशियम होता है, जो हृदय के लिए काफी लाभदायक है. यह हार्ट बीट को भी नियंत्रित करने में मदद करता है. जामुन हार्ट को स्वस्थ रखने, स्ट्रोक और हार्ट अटैक की संभावना को कम करने में भी मदद करता है. यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में भी काफी असरदार माना जाता है. यह एक आयुर्वेदिक उपाय है, जिसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
पीएम की अपील के बाद घरेलू पर्यटन में वृद्धि:कश्मीर से लक्षद्वीप तक बुकिंग बढ़ीं, विदेश यात्रा की पूछ कम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने की अपील का असर देश के ट्रैवल सेक्टर में दिखाई दे रहा है। कश्मीर, लक्षद्वीप, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, केरल और उत्तर बंगाल जैसे घरेलू पर्यटन स्थलों की मांग तेजी से बढ़ी है, जबकि विदेशी यात्राओं से जुड़ी पूछताछ में गिरावट दर्ज की गई है। इंटरसिटी स्मार्टबस के डेटा के मुताबिक देहरादून, मनाली, गोवा, तिरुपति और उज्जैन जैसे प्रमुख पर्यटन और तीर्थयात्रा मार्गों पर बुकिंग में करीब 30-35% की वृद्धि दर्ज हुई है। स्काईस्कैनर की ‘स्मार्टर समर रिपोर्ट’ के अनुसार 90% यात्री चाहते हैं कि छुट्टियों पर किया गया खर्च छोटे व्यवसायों और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन करे। क्लियरट्रिप, मेकमाईट्रिप और ईजमाई बुकिंग जैसे ट्रैवल प्लेटफॉर्म के अनुसार, इस गर्मी में भारतीय परिवार अब कम अवधि की घरेलू छुट्टियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के अध्यक्ष रवि गोसाईं के मुताबिक इस सीजन में अंतरराष्ट्रीय पूछताछ और बुकिंग में 10%-15% तक गिरावट आई है। पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में घरेलू पर्यटक यात्राएं बढ़कर 413 करोड़ तक पहुंच गईं, जो दर्शाता है कि घरेलू पर्यटन अब भारतीय ट्रैवल इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। लक्षद्वीप में 4 साल में 17 गुना बढ़े पर्यटक पर्यटन मंत्रालय के ताजे डेटा के अनुसार, 2020 में लक्षद्वीप में 3,875 पर्यटक पहुंचे थे। 2024 में यह संख्या रिकॉर्ड 68,328 तक पहुंच गई। 2023 से 24 के बीच पर्यटकों की संख्या 47% बढ़ी। माना जा रहा है कि जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री की यात्रा और फिर सोशल मीडिया प्रचार ने इस उछाल को गति दी। लक्षद्वीप – 2023-24 के बीच 47% बढ़े सैलानी वर्ष – संख्या – वृद्धि 2020 – 3875 – —- 2023 – 46,551- 1,101% 2024 – 68,328 – 47% (स्रोत- पर्यटन मंत्रालय) पहाड़ी इलाके डिमांड में पिछले कुछ हफ्तों में देश के पहाड़ी इलाके बुकिंग के लिहाज से तेजी से बढ़ते गंतव्य बनकर उभरे हैं। लोग घरेलू यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं। – राजेश मागो, सीईओ, मेकमाई ट्रिप








