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उदयनिधि बोले- हम भगवान में आस्था के खिलाफ नहीं:लोग मंदिरों में जाएं; सनातन खत्म का मतलब, भेदभाव वाली सोच का अंत

उदयनिधि बोले- हम भगवान में आस्था के खिलाफ नहीं:लोग मंदिरों में जाएं; सनातन खत्म का मतलब, भेदभाव वाली सोच का अंत

तमिलनाडु के पूर्व डिप्टी CM उदयनिधि स्टालिन ने सनातन खत्म वाले अपने बयान पर 2 दिन बाद सफाई दी। उदयनिधि ने कहा- मेरे बयान को गलत समझा जा रहा है। मैं लोगों के मंदिर जाने के खिलापु नहीं बस वहां जाति के आधार पर जो भेदभाव होता है, उस सोच को खत्म करना होगा। उदयनिधि स्टालिन ने 12 मई को विधानसभा में कहा कि सनातन धर्म को खत्म किया जाना चाहिए। यह लोगों को बांटता है। उन्होंने पहले 2023 में भी सनातन को डेंगू, मलेरिया बताया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी। उदयनिधि ने सोशल मीडिया पर सफाई दी, कहा- मैं आलोचना से डरने वाला नहीं उदयनिधि ने सोशल मीडिया X पर लिखा- तमिलनाडु विधानसभा में जब मैंने कहा था कि ‘लोगों को बांटने वाले सनातन को खत्म होना चाहिए’ तो कुछ लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं। लेकिन मैं ऐसी आलोचनाओं से डरने वाला नहीं हूं। द्रविड़ आंदोलन हमेशा विरोध के बीच ही आगे बढ़ा है। इसलिए मैं सिर्फ एक छोटी-सी बात साफ करना चाहता हूं। जब मैं कहता हूं कि सनातन खत्म होना चाहिए, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कोई मंदिर न जाए। इसका मतलब यह है कि मंदिरों में ही नहीं, बल्कि समाज में भी सभी लोगों को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। मैं उस सोच को खत्म करने की बात कर रहा हूं, जो लोगों को ऊंची और नीची जाति में बांटती है। मैं वही विचार रख रहा हूं, जिनकी बात पेरियार, अंबेडकर, अन्ना और करुणानिधि ने की थी। हम किसी की भगवान में आस्था के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन असमानता और उत्पीड़न का हम कड़ा विरोध करेंगे। तिरुवल्लुवर ने कहा था- सभी जीव जन्म से समान हैं, यही हमारा रास्ता है। 2 सितंबर 2023: उदयनिधि ने सनातन धर्म को डेंगू, मलेरिया बताया था उदयनिधि स्टालिन ने 2 सितंबर 2023 को एक कार्यक्रम में सनातन धर्म के खिलाफ बयान दिया था। उदयनिधि ने कहा- सनातन धर्म मच्छर, डेंगू, फीवर, मलेरिया और कोरोना जैसा है, जिनका केवल विरोध नहीं किया जा सकता, बल्कि उन्हें खत्म करना जरूरी होता है। विवाद बढ़ने पर उदयनिधि ने कहा कि मैं हिंदू धर्म नहीं सनातन प्रथा के खिलाफ हूं। तमिलनाडु में पिछले 100 सालों से सनातन धर्म के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं। हम अगले 200 सालों तक भी इसके खिलाफ बोलना जारी रखेंगे। अतीत में कई मौकों पर अंबेडकर, पेरियार भी इसके बारे में बोलते रहे हैं। सनातन धर्म के कड़े विरोध के कारण ही महिलाएं घर से बाहर निकल सकीं और सती जैसी सामाजिक कुरीतियां समाप्त हुईं। उन्होंने कहा- वास्तव में, DMK की स्थापना ही उन सिद्धांतों पर हुई थी जो ऐसी सामाजिक बुराइयों का विरोध करते हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था- उदयनिधि की बातें नरसंहार जैसी मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि तमिलनाडु के डिप्टी CM उदयनिधि स्टालिन की सनातन के खिलाफ की गईं बातें हेट स्पीच के दायरे में आती हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी स्टालिन के तीन साल पुराने बयान को लेकर की। सनातन को खत्म करने जैसे शब्दों का अर्थ सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि उसे मानने वालों के अस्तित्व पर सवाल उठाने जैसा है, जो हेट स्पीच की श्रेणी में आता है। स्टालिन का यह बयान नरसंहार या संस्कृतिक नरसंहार का संकेत देता है। तमिल शब्द “Sanathana Ozhippu” का मतलब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि पूरी तरह मिटाना है। उदयनिधि को सुप्रीम कोर्ट ने भी फटकारा था सुप्रीम कोर्ट ने 4 मार्च 2025 को उदयनिधि स्टालिन को फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्टालिन ने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया है। स्टालिन कोई आम आदमी नहीं है। उन्हें बयान के नतीजों के बारे में सोचना चाहिए था। —————————————— ये खबर भी पढ़ें… उदयनिधि स्टालिन बोले- संस्कृत मरी हुई भाषा: मोदी को तमिल की चिंता तो हिंदी क्यों थोप रहे तमिलनाडु के डिप्टी CM उदयनिधि स्टालिन ने संस्कृत भाषा को लेकर विवादित बयान दिया है। DMK लीडर ने केंद्र सरकार की आलोचन करते हुए कहा कि तमिल डेवलपमेंट के लिए सिर्फ 150 करोड़ रुपए दिए जाते हैं। जबकि संस्कृत जो एक मरी हुई भाषा है, उसे 2400 करोड़ रुपए मिलते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

बच्चों को भी हो सकता है स्ट्रेस, आपके बच्चे में दिख रहे ये लक्षण तो न करें नजरअंदाज

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आज के समय में बच्चे भी तनाव का सामना कर रहे हैं. पढ़ाई का दबाव, बढ़ती प्रतियोगिता, परिवार में झगड़े, सोशल मीडिया का असर या आसपास होने वाली नकारात्मक घटनाएं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती हैं. कई बार बच्चे अपने तनाव को खुलकर नहीं बता पाते, इसलिए माता-पिता के लिए उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों को समझना बहुत जरूरी हो जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, हर उम्र के बच्चों में तनाव के संकेत अलग-अलग दिखाई देते हैं. कुछ बच्चे चुप हो जाते हैं, जबकि कुछ गुस्सैल या डरपोक बन सकते हैं. अगर समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो बच्चों की सही मदद की जा सकती है. उम्र के हिसाब से स्ट्रेस के लक्षणयूनिसेफ के मुताबिक, छोटे बच्चों में तनाव के लक्षण अलग होते हैं. 0 से 3 साल तक के बच्चे तनाव होने पर अपने माता-पिता या देखभाल करने वाले लोगों से ज्यादा चिपकने लगते हैं. कुछ बच्चे फिर से अंगूठा चूसना या बिस्तर गीला करना जैसी पुरानी आदतें अपनाने लगते हैं. इसके अलावा बार-बार रोना, चिड़चिड़ापन, डरना, ठीक से न सोना और खाने की आदतों में बदलाव भी तनाव के संकेत हो सकते हैं. 4 से 6 साल की उम्र के बच्चों में तनाव के कारण ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है. वे खेलना कम कर सकते हैं, ज्यादा चुप रहने लगते हैं या बहुत बेचैन दिखाई देते हैं. कुछ बच्चे बार-बार अपने माता-पिता के पास रहना चाहते हैं और अकेले रहने से डरते हैं. 7 से 12 साल के बच्चों में तनाव का असर थोड़ा अलग दिखाई देता है. इस उम्र में बच्चे अकेले रहना पसंद कर सकते हैं. उन्हें छोटी-छोटी बातों की चिंता सताने लगती है. गुस्सा बढ़ना, डर महसूस करना, पढ़ाई में ध्यान न लगना, याददाश्त कमजोर होना और सिरदर्द या पेट दर्द जैसी समस्याएं भी तनाव के कारण हो सकती हैं. 13 से 17 साल के किशोरों में तनाव ज्यादा गंभीर रूप ले सकता है. वे उदासी, शर्मिंदगी या अपराधबोध महसूस कर सकते हैं. कई बार वे परिवार से दूरी बनाने लगते हैं, बात नहीं मानते या जोखिम भरे व्यवहार करने लगते हैं. कुछ मामलों में बच्चे खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी सोच भी रखने लगते हैं, जिसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इन बातों का रखें ध्यानअगर बच्चा पूरी तरह चुप हो जाए, लोगों से दूरी बनाने लगे, लगातार कांपे, बहुत ज्यादा गुस्सा करे या खुद को और दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे, तो तुरंत विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए.बच्चों का तनाव कम करने के लिए माता-पिता का प्यार और साथ बहुत जरूरी होता है. बच्चे से खुलकर बात करें और उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें. कई बार बच्चे अपनी बात शब्दों में नहीं कह पाते, इसलिए उन्हें ड्रॉइंग बनाने या कहानी सुनाने के लिए कह सकते हैं. इसके अलावा बच्चों को गहरी सांस लेने जैसी आसान एक्सरसाइज भी सिखाई जा सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

कान में जमा मैल अपने आप निकल जाएगा बाहर, जानें ईयरवैक्स रिमूव करने के 5 सुरक्षित तरीके

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Last Updated:May 14, 2026, 23:06 IST Earwax Removal Tips: कान में मैला जमा होना एक कॉमन समस्या है, लेकिन इसे घर पर निकालना काफी रिस्की होता है. अगर आप कान में जमा ईयरवैक्स को बाहर निकालना चाहते हैं, तो इसके लिए कुछ सेफ तरीके अपना सकते हैं. गुनगुना पानी, तेल, ईयर ड्रॉप्स और भाप जैसे घरेलू तरीकों से कान का मैल आसानी से साफ किया जा सकता है. कुछ आसान तरीकों से घर पर ईयरवैक्स रिमूव कर सकते हैं. How to Clean Earwax Safely: कान में जमा होने वाला मैल यानी ईयरवैक्स शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा परत होती है, जो धूल, बैक्टीरिया और गंदगी को कान के अंदर जाने से रोकती है. कई बार ईयरवैक्स ज्यादा मात्रा में जमा हो जाता है, जिससे कान बंद होने जैसा महसूस होता है, सुनने में परेशानी आने लगती है या खुजली और दर्द की समस्या हो सकती है. ऐसे में जल्दबाजी में लोग कॉटन बड्स या नुकीली चीजों का इस्तेमाल करने लगते हैं, जो कान को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए ईयरवैक्स हटाने के लिए हमेशा सुरक्षित और सही तरीकों को अपनाना चाहिए. ईयरवैक्स निकालने के सुरक्षित तरीके | Safe Ways To Remove Earwax हेल्थ से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक ईयरवैक्स हटाने का सबसे सुरक्षित तरीका गुनगुने पानी का इस्तेमाल है. नहाते समय हल्का गुनगुना पानी कान के बाहरी हिस्से तक पहुंचने दें. इससे जमा हुआ मैल धीरे-धीरे नरम होने लगता है और अपने आप बाहर निकल सकता है. ध्यान रखें कि बहुत तेज पानी का दबाव कान में न जाए, क्योंकि इससे कान के पर्दे को नुकसान हो सकता है. दूसरा तरीका है बेबी ऑयल या ऑलिव ऑयल की मदद लेना. कान में 2 से 3 बूंद हल्का गुनगुना तेल डालने से वैक्स नरम हो जाता है और आसानी से बाहर आने लगता है. तेल डालने के बाद कुछ मिनट तक सिर को एक तरफ झुकाकर रखें. यह तरीका पुराने और सख्त ईयरवैक्स को निकालने में काफी मददगार माना जाता है. कान का मैल साफ करने का तीसरा तरीका ईयर ड्रॉप्स का इस्तेमाल है. मेडिकल स्टोर पर मिलने वाले ईयरवैक्स रिमूवल ड्रॉप्स कान में जमा मैल को घोलने में मदद करते हैं. डॉक्टर की सलाह से इनका इस्तेमाल करने पर वैक्स आसानी से बाहर निकल सकता है. अगर कान में दर्द, संक्रमण या पहले से कोई समस्या हो, तो बिना सलाह के कोई ड्रॉप इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. चौथा तरीका है गर्म भाप लेना. भाप लेने से कान के अंदर जमा मैल नरम होने लगता है और बाहर निकलने में आसानी होती है. इसके लिए गर्म पानी से निकलने वाली भाप को कुछ मिनट तक लें. यह तरीका कान को साफ करने के साथ-साथ बंद कान की परेशानी में भी राहत दे सकता है. हालांकि यह काम बेहद सावधानी के साथ करें. पांचवां और सबसे सुरक्षित तरीका है डॉक्टर से प्रोफेशनल ईयर क्लीनिंग करवाना. अगर कान में बहुत ज्यादा मैल जमा हो गया हो, सुनने में परेशानी हो रही हो या दर्द महसूस हो रहा हो, तो घर पर बार-बार सफाई करने की बजाय ईएनटी विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए. डॉक्टर विशेष उपकरणों की सहायता से बिना किसी नुकसान के कान का मैल साफ कर देते हैं. इससे कान के पर्दे को चोट पहुंचने या संक्रमण होने का खतरा भी कम रहता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

गौतम अडाणी पर अमेरिकी में दर्ज केस हट सकते हैं:ब्लूमबर्ग का दावा- ₹2500 करोड़ के धोखाधड़ी और रिश्वत केस वापस लेने की तैयारी

गौतम अडाणी पर अमेरिकी में दर्ज केस हट सकते हैं:ब्लूमबर्ग का दावा- ₹2500 करोड़ के धोखाधड़ी और रिश्वत केस वापस लेने की तैयारी

भारतीय अरबपति और अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी को अमेरिका से बड़ी राहत मिल सकती है। ब्लूमबर्ग ने दावा किया है कि मुताबिक, अमेरिकी न्याय विभाग उनके खिलाफ चल रहे 265 मिलियन डॉलर (करीब 2,500 करोड़ रुपए) के रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आपराधिक आरोपों को वापस लेने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सप्ताह तक यह कानूनी मामला खत्म किया जा सकता है। अडाणी ग्रुप करीब डेढ़ साल से कानूनी उलझनों का सामना कर रहे हैं। 10 सवाल में समझे पूरा मामला और आगे क्या होगा 1. अमेरिका में गौतम अडाणी पर मुख्य खबर क्या है? जवाब: अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट (DoJ) गौतम अडाणी और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रहे करीब 2,500 करोड़ रुपए के आपराधिक भ्रष्टाचार मामले को वापस लेने जा रहा है। इसी हफ्ते इस आपराधिक केस को आधिकारिक तौर पर ड्रॉप किया जा सकता है। 2. यह पूरा मामला असल में था क्या? जवाब: नवंबर 2024 में न्यूयॉर्क के फेडरल प्रोसीक्यूटर्स ने गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी समेत कई अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट के ठेके हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को करीब 2,500 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की साजिश रची थी। 3. क्या सिर्फ आपराधिक मामला ही खत्म हो रहा है? जवाब: नहीं, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) भी नवंबर 2024 में अडाणी और अन्य के खिलाफ दायर किए गए पैरेलल ‘सिविल फ्रॉड केस’ को सेटलमेंट के जरिए हल करने की दिशा में बढ़ रहा है। 4. इस मामले में और किन लोगों के नाम शामिल थे? जवाब: इसमें गौतम अडाणी के अलावा सागर अडाणी, अडाणी ग्रीन एनर्जी के पूर्व CEO विनीत जैन, और एज़्योर पावर ग्लोबल के पूर्व अधिकारी रंजीत गुप्ता और रूपेश अग्रवाल शामिल थे। साथ ही कनाडाई निवेशक CDPQ से जुड़े सिरिल कैबनेस का नाम भी इसमें था। 5. अडाणी पर फंड जुटाने को लेकर क्या आरोप थे? जवाब: प्रोसीक्यूटर्स का आरोप था कि अडाणी और उनके साथियों ने कथित रिश्वतखोरी की बात छिपाकर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और बैंकों से लोन और बॉन्ड के जरिए 3 अरब डॉलर (करीब ₹29,000 करोड़) से ज्यादा की फंडिंग जुटाई थी। 6. ‘न्यूमेरो उनो’ और ‘द बिग मैन’ जैसे कोड नेम क्या थे? जवाब: अमेरिकी कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में दावा किया गया था कि साजिश रचने वाले लोग आपस में बातचीत के दौरान गौतम अडाणी को ‘न्यूमेरो उनो’ (इतालवी भाषा में नंबर एक) और ‘द बिग मैन’ जैसे गुप्त कोड नामों से बुलाते थे। 7. क्या कभी गौतम अडाणी अमेरिकी पुलिस की हिरासत में आए? जवाब: नहीं, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने गौतम और सागर अडाणी के खिलाफ अरेस्ट वारंट हासिल कर लिए थे, लेकिन वे कभी अमेरिकी हिरासत में नहीं रहे। उस वक्त गौतम अडाणी के भारत में होने की बात कही गई थी। 8. यह मामला बंद होने से अडाणी ग्रुप को क्या फायदा होगा? जवाब: इससे ग्रुप के अंतरराष्ट्रीय कारोबार और विदेशी फंडिंग जुटाने की क्षमता में सुधार होगा। पिछले डेढ़ साल से इन आरोपों के कारण ग्रुप की साख पर जो सवाल उठ रहे थे, वे काफी हद तक खत्म हो जाएंगे। 9. क्या अडाणी ग्रुप ने कभी इन आरोपों को स्वीकार किया था? जवाब: शुरुआत से ही अडाणी ग्रुप ने इन आरोपों को आधारहीन बताया था। ग्रुप का स्टैंड हमेशा से रहा है कि उन्होंने सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों और पारदर्शिता के नियमों का पालन किया है। 10. आगे क्या होने की संभावना है? जवाब: माना जा रहा है कि डूजे (DoJ) द्वारा केस वापस लेने के बाद SEC के साथ सिविल सेटलमेंट भी जल्द पूरा हो जाएगा। इससे अडाणी ग्रुप के लिए अमेरिकी बाजारों में दोबारा सक्रिय होने का रास्ता साफ हो जाएगा। 16 की उम्र में स्कूल छोड़कर खड़ा किया अडाणी साम्राज्य गौतम अडाणी ने 1988 में गुजरात में महज 16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ने के बाद कमोडिटी ट्रेडिंग के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। पिछले कुछ दशकों में उन्होंने अपने ग्रुप का विस्तार पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, माइनिंग, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में किया। आज अडाणी ग्रुप भारत के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर साम्राज्यों में से एक है। अमेरिकी केस खत्म होने की खबर ग्रुप के लिए वैश्विक स्तर पर बड़ी जीत मानी जा रही है। ————- पूरी खबर पढ़ें… देश में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की लॉन्चिंग अटकी: ऑटो कंपनियां बोलीं- पहले फ्यूल मिले, तेल कंपनियों ने कहा- पहले गाड़ियां आएं सरकार देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां तेजी से सड़क पर उतारना चाहती है, लेकिन यह प्लान अब ‘ पहले मुर्गी आई या अंडे’ वाली उलझन में फंस गया है। ऑटोमोबाइल कंपनियां बड़े पैमाने पर तब तक हाई-एथेनॉल ब्लेंड वाली गाड़ियां बनाने को तैयार नहीं हैं, जब तक बाजार में पर्याप्त मात्रा में फ्लैक्स फ्यूल उपलब्ध न हो। वहीं, तेल कंपनियां तब तक E85 और E100 जैसे फ्यूल के स्टोरेज और सप्लाई में निवेश करने से कतरा रही हैं, जब तक सड़कों पर इन्हें चलाने वाली गाड़ियां न आ जाएं। अब सरकार दोनों पक्षों से बात कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…

अनुपूरक कैसे चुनें: आप स्वास्थ्य और सौंदर्य प्रसाधन क्या लेते हैं? इन बातों के खास नुस्खे, सेहत को हो सकता है भारी नुकसान!

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सप्लीमेंट चुनने का सही तरीका: भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को फिट, एनर्जेटिक और बनाए रखने के लिए डेमोलाइट्स लेना एक आम बात हो गई है। बाजार के रंग-बिरंगे डिब्बों से भरा पड़ा है जो चमकती त्वचा, सघन बाल और प्रचुरता ताकत का दावा करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दोस्तों के लिए इंटरनेट पर विज्ञापन देखने या देखने के बाद जो आप खरीदारी कर रहे हैं, वह आपके शरीर के लिए सही है या नहीं? अगर दांतों का चुनाव सही तरीके से न किया जाए, तो इससे फायदे की जगह स्वास्थ्य को भारी नुकसान हो सकता है। इस विषय में ट्यूटोरियल स्टूडियो खन्ना ठक्कर (सीईओ, Chicnutrix) ने हमें कई टिप्स दिए हैं, जिससे हमें पता चल सकता है कि स्वास्थ्य या सौंदर्य के लिए किस तरह के वास्तुशास्त्र और समय-समय पर किन बातों का खास अभ्यास रखा जाना चाहिए। डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह अत्यंत आवश्यक है हम अक्सर अभिलेखों की देखा-देखी वास्तुशिल्प खाना शुरू कर देते हैं। हर इंसान का शरीर अलग होता है। किसी भी स्वास्थ्य को पहले डॉक्टर से मिलें और ब्लड टेस्ट जैसे विटामिन-डी, बी12, आयरन आदि करवाएं शुरू करें। जब तक शरीर में किसी चीज की असली कमी न हो, उसे बाहर से लेने से कोई फायदा नहीं होता। अपनी जरूरत को पहचानने आपदा का मतलब होता है कमी को पूरा करना। यह आपके अपॉइंटमेंट के लिए विकल्प नहीं है। अगर आप अच्छा और लेवल फूड खा रहे हैं तो शायद आपको किसी मल्टीविटामिन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। कोल या बायोटिन जैसे सौंदर्य प्रसाधन लेने से पहले यह जान लें कि आपके घटक में प्रोटीन और विटामिन की कमी क्या है, जिसे आप पूरा कर सकते हैं। अनगिनत पर लगा लेबल पढ़ना सीखें कोई भी उत्पाद समय-समय पर उसका पिछला लिखित लेबल अवश्य पढ़ें। FSSAI या आवश्यक सॉर्ट अनुवर्ती: भारत में वन्यजीवों पर एफएसएसएआई का निशान होना जरूरी है। इससे पता चलता है कि उत्पाद सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है। छुपी हुई चीनी और केमिकल्स: कई गमीज़ और पाउडर में बहुत अधिक मात्रा में चीनी या कृत्रिम रंग होते हैं, जो स्वास्थ्यवर्धक हो सकते हैं। समाप्ति तिथि: उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट की जांच करना कभी नहीं। असली और नकली की पहचान करें आजकल बाज़ार में और ऑफ़लाइन कई नकली मूर्तियाँ बिक रही हैं। नकली उत्पाद खाने से लीवर और किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। हमेशा ऑथर प्रोटोटाइप, जापानी-मनी शीट या कंपनी की वेबसाइट से ही खरीदारी करें। बहुत भारी के लालच में कोई उत्पाद नहीं, अक्सर नकली उत्पादों पर ही सबसे ज्यादा छूट होती है। ओवरडोज से मुक्ति कई लोगों का मानना ​​है कि अगर दिन में एक गोली की जगह दो खा ली जाए, तो बाल जल्दी लंबे हो जाएंगे या जल्दी झड़ जाएंगे। यह एक बहुत बड़ी मिथ्या है। पानी में नहाने वाले विटामिन जैसे विटामिन-सी तो शरीर से पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाते हैं। लेकिन फ़ाइट होने में ए, डी, ई, के जैसे विटामिन शामिल होते हैं जो शरीर में जमा हो जाते हैं और टॉक्सिसिटी का कारण बन सकते हैं। डॉक्टर ने हमेशा एक ही डोज लेन वेन बताई है। अपनी पुरानी औषधियों का ध्यान रखें अगर आप पहले से ही ब्लड मेटल, शुगर, मोटापा या फिर खून पतला करने की कोई दवा खा रहे हैं, तो कोई भी नया आकलन करने से पहले परहेज करें। कई मूर्तियां आपकी पुरानी दवाओं के साथ मिलकर शेयर कर सकती हैं और उनका असर कम या ज्यादा हो सकता है। स्वास्थ्य और सौंदर्यशास्त्र कोई जादू की पुड़िया नहीं हैं। ये आपके जब लाइफस्टाइल, नींद और वस्तुओं पर असर डालते हैं। किसी भी नशे की लत के झांसे में अपनी सेहत का ख्याल रखें। सही जानकारी लें, डॉक्टर से स्नातक और अपने शरीर की ज़रूरतों के हिसाब से ही जांच करें। यह अवश्य पढ़ें: गर्मियों में त्वचा को होने वाले नुकसान: देर तक एसी में रहने से त्वचा हो रही है खतरनाक, जानें देखभाल के सही टिप्स; चेहरे की चमक

प्रभाव की सीमा: क्यों केसी वेणुगोपाल की केरल से ‘शानदार वापसी’ ने गांधी परिवार को कमजोर बना दिया है | भारत समाचार

US President Donald Trump shakes hands with China's President Xi Jinping at the Great Hall of the People in Beijing. (Source: AFP)

आखरी अपडेट:14 मई, 2026, 22:35 IST तथ्य यह है कि राहुल गांधी को ‘अपनी इच्छाएं पूरी करनी पड़ीं’ और संभावित विद्रोह की स्थिति में वेणुगोपाल को पद छोड़ने के लिए कहना पड़ा। इस नतीजे से केंद्रीय नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी असुरक्षित नजर आ रहे हैं। यह एक कथित आंतरिक मतभेद को भी उजागर करता है, जिसमें सोनिया गांधी द्वारा समर्थित प्रियंका गांधी वाड्रा कथित तौर पर ‘स्व-प्रदत्त’ संकट से बचने के लिए अधिक लोकप्रिय स्थानीय विकल्प की वकालत कर रही हैं। फ़ाइल चित्र/पीटीआई केरल में नेतृत्व गतिरोध का समाधान केसी वेणुगोपाल के शीर्ष पद से हटने के एक साधारण मामले से कहीं अधिक है; यह एक ऐतिहासिक क्षण है जो कांग्रेस पार्टी की आंतरिक गतिशीलता के भीतर बदलती टेक्टोनिक प्लेटों को उजागर करता है। जबकि “हाईकमान” संस्कृति ने लंबे समय से पार्टी को परिभाषित किया है, मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन की नियुक्ति नई दिल्ली और क्षेत्रीय क्षत्रपों के बीच शक्ति के एक महत्वपूर्ण पुनर्मूल्यांकन का संकेत देती है। हाईकमान की सीमाएँ इसमें कोई संदेह नहीं है कि केसी वेणुगोपाल राहुल गांधी की आंख और कान बने हुए हैं। एआईसीसी महासचिव (संगठन) के रूप में, वेणुगोपाल का टिकट वितरण पर काफी प्रभाव था, जो स्वाभाविक रूप से विधायकों के एक महत्वपूर्ण गुट के समर्थन में तब्दील हो गया। “अपने आदमी” के लिए राहुल गांधी की प्राथमिकता एक खुला रहस्य था, जो अंतिम घोषणा से कुछ क्षण पहले पार्टी मुख्यालय के बाहर लगे दोनों नेताओं के विशाल पोस्टरों से उजागर हुआ। हालाँकि, तथ्य यह है कि राहुल गांधी को “अपनी इच्छा को दबाना पड़ा” और संभावित विद्रोह के कारण वेणुगोपाल को पद छोड़ने के लिए कहना पड़ा। इससे पता चलता है कि गांधी परिवार प्रभाव की उस सीमा पर पहुंच गया है जिसे अब वह पार नहीं कर सकता। भारी जनभावना और खंडित विधायक दल के जोखिम का सामना करते हुए, केंद्रीय नेतृत्व को मानने के लिए मजबूर होना पड़ा। स्वतंत्र मुख्यमंत्री का उदय वीडी सतीसन का उत्थान “शक्तिशाली मुख्यमंत्री” की वापसी का प्रतीक है – एक ऐसा नेता जो पूरी तरह से दिल्ली के अधीन होने की आवश्यकता महसूस नहीं करता है। क्योंकि उनकी कुर्सी का श्रेय जनपथ से नामांकन के बजाय स्थानीय नेताओं और मतदाताओं के साथ उनकी स्थिति को जाता है, सतीसन एक स्वतंत्र जनादेश के साथ कार्यालय में प्रवेश करते हैं। यह उन्हें कर्नाटक में सिद्धारमैया, या पूर्व में अशोक गहलोत और कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे नेताओं के समान श्रेणी में रखता है। हालाँकि ये नेता गांधी परिवार के प्रति वफादारी का पारंपरिक आवरण बनाए रखते हैं, लेकिन उनके पास अपना खुद का दिमाग भी है। सतीसन की जीत केंद्रीय आदेश पर क्षेत्रीय नेतृत्व की ताकत का प्रमाण है। गांधी परिवार की असुरक्षा इस नतीजे से केंद्रीय नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी असुरक्षित नजर आ रहे हैं। यह एक कथित आंतरिक मतभेद को भी उजागर करता है, जिसमें सोनिया गांधी द्वारा समर्थित प्रियंका गांधी वाड्रा कथित तौर पर “स्व-प्रदत्त” संकट से बचने के लिए अधिक लोकप्रिय स्थानीय विकल्प की वकालत कर रही हैं। आलाकमान के लिए, अपने ही पिछवाड़े में “विनम्र पाई खाना” (राहुल गांधी के वायनाड कनेक्शन को देखते हुए) एक स्पष्ट अनुस्मारक है कि जब दांव ऊंचे होते हैं तो क्षेत्रीय शक्ति अक्सर केंद्रीय सत्ता पर हावी हो जाती है। केसी वेणुगोपाल के लिए आगे क्या? कांग्रेस की परंपरा में बलिदान को अक्सर पुरस्कृत किया जाता है, लेकिन इंतजार लंबा हो सकता है। जबकि वेणुगोपाल अपनी “शानदार” वापसी के लिए राहुल गांधी की नजरों में ऊपर उठ गए होंगे, विडंबना यह है कि दिल्ली में उनका कद कम हो सकता है। सत्ता से निकटता के बावजूद, अपने गृह राज्य में शीर्ष पद हासिल करने में उनकी असमर्थता, उनके प्रभाव की सीमा का सुझाव देती है। यदि उन्हें इस बलिदान की “प्रतिपूर्ति” करनी है, तो कांग्रेस की अध्यक्षता ही एकमात्र महत्वपूर्ण कदम होगा। हालाँकि, मल्लिकार्जुन खड़गे मजबूती से अपनी जगह पर हैं और संगठनात्मक चुनाव अक्टूबर तक नहीं होने हैं, वेणुगोपाल के नाम पर आम सहमति की गारंटी नहीं है। फैसला केरल को “वीडी” में एक ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जिसे जमीनी हकीकत और जमीनी स्तर के कैडर का समर्थन प्राप्त है। लेकिन बड़े पैमाने पर कांग्रेस पार्टी के लिए, “केरल के लिए लड़ाई” ने एक मिसाल कायम की है: शक्तिशाली आलाकमान को राजी किया जा सकता है – या मजबूर किया जा सकता है – जब क्षेत्रीय नब्ज आंतरिक सर्कल की फुसफुसाहट से अधिक जोर से धड़कती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया प्रभाव की सीमा: क्यों केसी वेणुगोपाल की केरल से ‘शानदार वापसी’ ने गांधी परिवार को कमजोर बना दिया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल(टी)कांग्रेस(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)राहुल गांधी(टी)वीडी सतीसन

तनाव, नींद और ब्लड प्रेशर में उपयोगी…. लेकिन डॉक्टर की सलाह जरूरी, जानिए इस औषधीय पौधा के फायदे

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Last Updated:May 14, 2026, 21:53 IST भारत में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं जिनका उपयोग आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में सदियों से किया जा रहा है. इन्हीं में सर्पगंधा एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसे तनाव, नींद और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है. हालांकि इसका उपयोग हमेशा विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही करना सुरक्षित माना जाता है. गोंडा: भारत में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं, जिनका उपयोग सदियों से आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में किया जाता रहा है. इन्हीं खास पौधों में एक नाम सर्पगंधा का भी आता है. यह पौधा अपने औषधीय गुणों के कारण लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा में रहा है. आयुर्वेद में इसे कई स्वास्थ्य समस्याओं में उपयोगी माना जाता है. हालांकि किसी भी औषधीय पौधे का उपयोग विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही करना चाहिए. सर्पगंधा का इस्तेमाल करते समय सावधानी भी जरूरी है. इसके जितने फायदे बताए जाते हैं, उतना ही महत्वपूर्ण इसका सही और सुरक्षित उपयोग माना जाता है. कई लोग यह सोचकर किसी भी जड़ी-बूटी का सेवन शुरू कर देते हैं कि प्राकृतिक चीजें पूरी तरह सुरक्षित होती हैं, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता. गलत मात्रा या बिना विशेषज्ञ की सलाह के सेवन करने से दुष्प्रभाव हो सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक मात्रा में सेवन करने पर कुछ लोगों को कमजोरी, चक्कर आना, पेट से जुड़ी परेशानी या अन्य समस्याएं हो सकती हैं. हर व्यक्ति के शरीर की प्रतिक्रिया अलग होती है, इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है. खासकर गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के इसका उपयोग नहीं करना चाहिए. सही जानकारी और मार्गदर्शन के साथ ही इसका उपयोग करना बेहतर माना जाता है. सर्पगंधा एक प्रसिद्ध औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेद में कई वर्षों से किया जा रहा है. इसे विशेष रूप से हाई ब्लड प्रेशर यानी बढ़े हुए रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है. सर्पगंधा की जड़ में कई प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जिन पर समय-समय पर शोध भी किए गए हैं. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह शरीर और मन को शांत करने में भी मदद कर सकता है, जिससे तनाव कम होने में सहायता मिलती है. तनाव भी हाई ब्लड प्रेशर बढ़ने का एक प्रमुख कारण माना जाता है. हालांकि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए इसका असर भी अलग-अलग हो सकता है. बिना सही जानकारी या विशेषज्ञ की सलाह के इसका सेवन करना उचित नहीं माना जाता. किसी भी औषधीय पौधे का उपयोग करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य मालती देवी बताती हैं कि सर्पगंधा एक औषधीय पौधा है, जो मुख्य रूप से भारत और दक्षिण एशिया के कई क्षेत्रों में पाया जाता है. इसकी जड़ को सबसे ज्यादा उपयोगी माना जाता है. सर्पगंधा की जड़ में कई प्रकार के प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकते हैं. यही वजह है कि पुराने समय से इसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता रहा है. यह पौधा देखने में साधारण होता है, लेकिन इसके औषधीय गुण इसे खास बनाते हैं. इसकी पत्तियां हरे रंग की होती हैं और पौधे में छोटे-छोटे फूल भी आते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग इसके बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं. आजकल कई लोग अनिद्रा यानी नींद न आने की समस्या से परेशान हैं. देर रात तक जागना, तनाव, काम का दबाव और बदलती जीवनशैली इसके प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं. पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर और दिमाग दोनों पर असर पड़ता है, जिससे थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. आयुर्वेद में सर्पगंधा को नींद से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी माना गया है. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, यह शरीर और मन को शांत करने में मदद कर सकता है, जिससे बेहतर नींद आने में सहायता मिल सकती है. हालांकि इसका असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है, इसलिए बिना सलाह किसी भी औषधीय पौधे का सेवन नहीं करना चाहिए. उपयोग से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है. पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में सर्पगंधा का उपयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता रहा है. मान्यता है कि इसका इस्तेमाल सिरदर्द और मानसिक तनाव कम करने के लिए भी किया जाता था. पुराने समय में कई वैद्य इसकी जड़ का उपयोग अलग-अलग औषधीय उपचारों में करते थे. माना जाता है कि यह शरीर और मन को शांत करने में मदद कर सकता है, जिससे तनाव से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है. हालांकि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए इसका प्रभाव भी एक जैसा नहीं होता. किसी व्यक्ति को लाभ मिल सकता है, जबकि दूसरे पर इसका असर अलग हो सकता है. इसलिए सिर्फ सुनी-सुनाई बातों के आधार पर इसका सेवन शुरू नहीं करना चाहिए. किसी भी औषधीय पौधे का उपयोग करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और बेचैनी लोगों की आम समस्या बन गई है. काम का दबाव, जिम्मेदारियां और बदलती जीवनशैली मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं. ऐसे में सर्पगंधा को एक ऐसे औषधीय पौधे के रूप में देखा जाता है, जिसे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में मानसिक शांति देने वाला माना गया है. आयुर्वेद में इसका उपयोग मन को शांत रखने और तनाव कम करने के लिए किया जाता रहा है. कुछ लोग इसे नींद से जुड़ी समस्याओं में भी उपयोगी मानते हैं. माना जाता है कि यह शरीर और दिमाग को शांत करने में मदद कर सकता है. हालांकि इसका असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है. इसलिए किसी भी तरह के औषधीय उपयोग से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना जाता है, ताकि सही और सुरक्षित तरीके से इसका उपयोग किया जा सके. वैद्य मालती देवी बताती हैं कि सर्पगंधा एक प्रसिद्ध औषधीय पौधा है, जिसे आयुर्वेद में लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है.

ऑफिस से जाने के बाद रात को जरूर नहाएं, थकान और टेंशन हो जाएगी दूर, चैन की नींद आएगी

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Last Updated:May 14, 2026, 21:52 IST Night Shower Health Benefits: कई लोग शाम को ऑफिस से जब घर पहुंचते हैं, तो वे नहाने के बाद ही डिनर करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो रात में गुनगुने पानी से नहाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इससे तनाव और एंजायटी से राहत मिलती है. इस आदत से आपको अच्छी नींद आती है और स्किन से जुड़ी परेशानियों का खतरा भी कम हो जाता है. रात को नहाने से तनाव कम हो सकता है और दिमाग रिलैक्स होता है. Night Bath Reduce Stress: गर्मी के मौसम में लोग घर से ऑफिस पहुंचने के दौरान पसीने से भीग जाते हैं. जब वापस ऑफिस से घर के लिए लौटते हैं, तब भी कुछ ऐसा ही होता है. ऐसे में कई लोग शाम को घर जाकर नहा लेते हैं, ताकि दिनभर की थकान और पसीने से छुटकारा मिल सके. लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठना, काम का दबाव और ट्रैफिक की परेशानी शरीर और दिमाग दोनों को थका देती है. ऐसे में अगर आप रात को ऑफिस से लौटने के बाद नहाने की आदत डाल लें, तो यह आपकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. रात में नहाने से मानसिक तनाव से काफी हद तक राहत मिलती है. स्लीप फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक रात में गुनगुने पानी से नहाने से शरीर की मसल्स को आराम मिलता है. इससे पूरे दिन की थकान धीरे-धीरे कम होने लगती है और शरीर हल्का महसूस करता है. अगर ऑफिस के काम के कारण सिरदर्द या शरीर में दर्द महसूस हो रहा हो, तो रात का नहाना काफी राहत दे सकता है. यह शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में भी मदद करता है, जिससे तनाव कम होता है. रात को नहाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है. जब शरीर रिलैक्स महसूस करता है, तो दिमाग भी शांत होने लगता है और जल्दी नींद आने में मदद मिलती है. जो लोग अनिद्रा या बेचैनी की समस्या से परेशान रहते हैं, उनके लिए भी रात का स्नान फायदेमंद माना जाता है. गर्मी में दिनभर बाहर रहने के दौरान शरीर पर धूल, पसीना और प्रदूषण जमा हो जाता है. अगर बिना नहाए सीधे बिस्तर पर सोया जाए, तो यह त्वचा और स्वास्थ्य दोनों पर बुरा असर डाल सकता है. रात को नहाने से शरीर पूरी तरह साफ हो जाता है और त्वचा को आराम मिलता है. खासकर गर्मियों के मौसम में यह आदत शरीर को ठंडक पहुंचाने और पसीने की चिपचिपाहट दूर करने में काफी मददगार होती है. अगर आप अपनी बाथ को ज्यादा रिलैक्सिंग बनाना चाहते हैं, तो पानी में थोड़ा सा गुलाब जल या लैवेंडर ऑयल मिला सकते हैं. इसकी हल्की खुशबू दिमाग को शांत करने में मदद करती है और मूड को बेहतर बनाती है. एक्सपर्ट्स की मानें तो नहाने के बाद मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल कम करके सीधे आराम करना शरीर को जल्दी रिलैक्स करने में मदद करता है. रात को नहाने की आदत छोटी जरूर लग सकती है, लेकिन इसके फायदे बड़े हैं. यह न केवल शरीर की सफाई और ताजगी बनाए रखती है, बल्कि मानसिक तनाव कम करने, बेहतर नींद लाने और शरीर को आराम देने में भी मदद करती है. अगर आप भी ऑफिस की थकान और तनाव से परेशान रहते हैं, तो रात में स्नान करने की आदत जरूर अपनाएं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

बेल का शर्बत रेसिपी: पेट की गर्मी का काल है बेल का शर्बत, भीषण गर्मी में शरीर को मिलेगा पिज्जा डिटॉक्स; नोट करें आसान रेसिपी

बेल शरबत रेसिपी

14 मई 2026 को 21:50 IST पर अपडेट किया गया बेल शरबत रेसिपी: तीखा और भीषण गर्मी में बेल का शरबत किसी अमृत से कम नहीं माना जाता है। यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है, बल्कि पाचन तंत्र को क्रियान्वित करके शरीर को नैचुरली डिटॉक्स भी करता है। बेल का शरबत लू और एसिडिटी से तुरंत राहत मिलती है। शरीर की गंदगी को बाहर निकालने के साथ ही थकान मिटाने वाला व्यक्ति ताजगी देता है। अनुसरण करना : सामग्री: 1 पका हुआ बेलठंडा पानी: 3-4 गिलासया चीनी गुड़: स्वादिष्ट स्वादकाला: आधा छोटा छोटाकुल मिलाकर जीरा पाउडर: आधा छोटापुदीना के पत्तेबर्फ छवि: फ्रीपिक सबसे पहले बेल के बाहर के कठोर पार्ट को किसी भारी वस्तु से नुकसान पहुंचाएं। एक ओरिएंटल की मदद से बेल के अंदर का सारा पल्प एक बड़े पोज़ में निकाला गया। छवि: फ्रीपिक पल्प वाले पॉट में 1-2 चम्मच पानी डालें और इसे 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद, हाथों को अच्छे तरह से धोकर पल्प को पानी में अच्छे तरह से मैश करें ताकि बीज और रेशे अलग हो जाएं। छवि: फ्रीपिक जब पल्प पानी में अच्छा लगे तो इसे एक बड़ी छलनी की मदद से अच्छा लें। छलनी में बचे हुए रेशों और पत्थरों को दबाकर सारा रस निकाल लें और बाकी बचे बचे हुए गुडों को फेंक दें। छवि: फ्रीपिक अब चीनी या गुड़ के स्वाद वाले उत्पाद तैयार करें। इसमें काला नमक और साथ में जीरा पाउडर स्टैमिना अच्छी तरह से मिलाया जाता है। आप अपनी पसंद के अनुसार इसमें और ठंडा पानी मिला सकते हैं। छवि: फ्रीपिक गिलास में कुछ बर्फ के टुकड़े डाले, ऊपर से ठंडा-ठांडा बेल का शरबत डाला। आर्थर पुदीने के दुकानदारों से गार्निश करें। दोस्तों, आपका देसी समर ड्रिंक तैयार है। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 14 मई 2026 को 21:50 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)बेल का शरबत रेसिपी(टी)वुड एप्पल जूस के फायदे(टी)ग्रीष्मकालीन डिटॉक्स पेय(टी)पेट की गर्मी का इलाज(टी)घर पर बेल का जूस कैसे बनाएं(टी)प्राकृतिक बॉडी डिटॉक्स(टी)ग्रीष्म ऋतु में ताज़ा पेय(टी)बेल फल के फायदे हिंदी में(टी)घर का बना बेल शरबत(टी)पेट के लिए स्वस्थ ग्रीष्मकालीन पेय

कांस में इग्नोर होने पर आलिया का ट्रोल को जवाब:बोलीं- दुख कैसा प्यारे,आपने तो नोटिस किया; यूजर ने लिखा था- किसी ने भाव नहीं दिया

कांस में इग्नोर होने पर आलिया का ट्रोल को जवाब:बोलीं- दुख कैसा प्यारे,आपने तो नोटिस किया; यूजर ने लिखा था- किसी ने भाव नहीं दिया

बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट हाल ही में कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 के रेड कार्पेट पर नजर आईं। यहां उनके लुक्स की काफी चर्चा हुई, लेकिन साथ ही उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने दावा किया कि इंटरनेशनल पैपराजी ने आलिया को इग्नोर किया। अब आलिया ने खुद एक ट्रोल को बहुत ही शालीनता से जवाब दिया है। बुधवार को आलिया ने इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर की थी। इसमें वे आइवरी सिल्क साड़ी-गाउन में रॉयल लुक में नजर आ रही थीं। इस पोस्ट पर एक यूजर ने तंज कसते हुए कमेंट किया, “कितने दुख की बात है, किसी ने आपको नोटिस ही नहीं किया।” आलिया ने इस कमेंट को नजरअंदाज करने के बजाय जवाब देना बेहतर समझा। उन्होंने लिखा, “दुख कैसा प्यारे? आपने तो मुझे नोटिस किया”। आलिया के समर्थन में टीवी एक्टर अली गोनी और सिंगर राहुल वैध भी आगे आए। अली गोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह देखकर दुख होता है कि जब कोई हमारे देश का नाम ग्लोबल लेवल पर रोशन करने के लिए इतनी मेहनत करता है, तो हमारे अपने ही लोग उसे नीचे खींचने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आगे कहा आलिया ने वहां पहुंचकर वो मुकाम हासिल किया है जिसका सपना कई लोग देखते हैं। हमें मजाक उड़ाने के बजाय उन लोगों का साथ देना चाहिए जो विदेशों में भारत का मान बढ़ा रहे हैं।” वहीं राहुल वैध ने लिखा आलिया को किसी के अटेंशन की जरूरत नहीं है।