हर्षिता गौर ने ‘मिर्जापुर’ पहले ठुकराया था:एक्सेल ऑफिस इस उम्मीद में पहुंचीं कि फरहान अख्तर की नजर पड़ेगी और हीरोइन बना देंगे

‘मिर्जापुर’ में डिंपी पंडित का किरदार निभाकर घर-घर पहचान बनाने वालीं हर्षिता गौर अब ‘मिर्जापुर: द मूवी’ में नजर आएंगी। दिलचस्प बात यह है कि जिस सीरीज ने उन्हें पहचान दी, उसे उन्होंने शुरुआत में करने से मना कर दिया था। उस वक्त ओटीटी का दौर नया था और हर्षिता टीवी पर मुख्य किरदार निभा चुकी थीं। उन्हें लगा था कि किसी की बहन का किरदार क्यों निभाएं। एक्सेल के ऑफिस पहुंचते वक्त उन्हें उम्मीद थी कि शायद फरहान अख्तर या रितेश सिधवानी की नजर उन पर पड़ जाए और उन्हें किसी फिल्म में हीरोइन बनने का मौका मिल जाए। लेकिन डिंपी के एक सीन ने उनकी सोच बदल दी। आज वे मानती हैं कि अगर उस वक्त ‘मिर्जापुर’ को मना कर देतीं तो यह उनके करियर की सबसे बड़ी गलती होती। करीब 8 साल बाद उसी दुनिया की फिल्म में लौटना उनके लिए घर वापसी जैसा है। सवाल: जिस ‘मिर्जापुर’ ने आपको इतनी बड़ी पहचान दी, आपने शुरुआत में इस सीरीज के लिए मना कर दिया था, ऐसा क्यों? जवाब: हां, बिल्कुल। मैंने शुरुआत में ‘मिर्जापुर’ के लिए मना कर दिया था। उस समय ओटीटी का कॉन्सेप्ट हमारे लिए इतना साफ नहीं था। मैं ‘साड्डा हक’ में मुख्य किरदार कर चुकी थी, इसलिए मुझे लगा कि अब किसी की बहन का किरदार क्यों निभाऊं। मुझे फिल्मों की तरफ जाना है। सवाल: फिर आप ‘मिर्जापुर’ के लिए कैसे तैयार हुईं? जवाब: दोबारा जब टीम ने मुझे बुलाया तो मैंने स्क्रिप्ट और किरदार को थोड़ा समझा। मुझे एक सीन सुनाया गया, जिसमें मुन्ना मुझे उठाकर ले जाता है और बाद में डिंपी गन उठाकर कहती है कि गाड़ी रोक, वरना ठोक देंगे। वह सीन सुनकर मुझे लगा कि यह सिर्फ किसी की बहन का किरदार नहीं है। इसमें अपनी एक कहानी और ताकत है। तब मुझे लगा कि इसे करना चाहिए। हालांकि, एक्सेल के ऑफिस जाते समय मेरे मन में एक अलग उम्मीद थी। सवाल: आपने बताया कि एक्सेल के ऑफिस जाते समय आपके मन में एक अलग उम्मीद थी। वह क्या थी? जवाब: जब मुझे एक्सेल के ऑफिस बुलाया गया तो मैं इस सोच के साथ गई थी कि शायद वहां रितेश सिधवानी या फरहान अख्तर मिल जाएं और उनकी नजर मुझ पर पड़ जाए। मन में यह भी था कि शायद वे मुझे किसी फिल्म में हीरोइन के तौर पर साइन कर लें। मैं फिल्मों में काम करना चाहती थी, इसलिए ऐसी उम्मीद थी। मैंने पहले बहुत सुना था कि फलां डायरेक्टर की नजर एक लड़की पर पड़ी और उन्होंने अपनी फिल्म में हीरोइन बना दिया। सवाल: फिर एक्सेल ऑफिस में क्या हुआ? जवाब: रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर तो नहीं मिले, लेकिन वहां की एनर्जी बहुत अच्छी लगी। मैं डायरेक्टर गुरमीत सिंह, करण अंशुमान और राइटर पुनीत कृष्णा से मिली। सबसे अच्छी बात यह थी कि उन्होंने मुझे किरदार बेचने की कोशिश नहीं की। उन्होंने यह नहीं कहा कि आपका किरदार सबसे बड़ा होगा या आपको बहुत ग्लैमरस तरीके से दिखाया जाएगा। उन्होंने जैसा किरदार था, वैसा ही बताया। मुझे यह ईमानदारी अच्छी लगी। किरदार और कहानी समझने के बाद मुझे लगा कि यह करना चाहिए। सवाल: क्या कभी सोचा कि अगर उस समय ‘मिर्जापुर’ को मना कर देतीं तो क्या होता? जवाब: पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि अगर मैंने उस समय मना कर दिया होता तो यह मेरे करियर की सबसे बड़ी बेवकूफी होती। आज ‘मिर्जापुर’ मेरे करियर का बहुत बड़ा हिस्सा है। इसी वजह से अब बड़े परदे पर आने का मौका मिला है। सवाल: ‘मिर्जापुर’ ने आपको एक्टिंग को लेकर क्या सिखाया? जवाब: ‘मिर्जापुर’ ने मुझे समझाया कि सिर्फ हीरो या हीरोइन होना जरूरी नहीं, किरदार भी बहुत मायने रखता है। ओटीटी ने हमें समझाया कि कहानी में हर किरदार की अपनी जगह हो सकती है। ‘मिर्जापुर’ में महिलाओं के किरदार भी मजबूत हैं। हर महिला अपने तरीके से कहानी में कुछ लेकर आती है। सवाल: डिंपी के किरदार में आपको सबसे ज्यादा क्या पसंद आया? जवाब: मुझे डिंपी का सफर बहुत अच्छा लगा। शुरुआत में वह शांत और मासूम लड़की है, लेकिन कहानी के साथ उसकी जिंदगी बदलती जाती है। वह बहुत कुछ खोती है और फिर उसके अंदर एक अलग तरह की ताकत आती है। मुझे लगा कि इस किरदार से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। सवाल: करीब 8 साल से ‘मिर्जापुर’ का हिस्सा हैं। इस परिवार से आपका रिश्ता कैसा है? जवाब: मैं इसे हमेशा ‘मिर्जापुर फैमिली’ कहती हूं। यह सिर्फ कहने के लिए नहीं है, सच में लगता है कि हम एक परिवार हैं। जब ‘मिर्जापुर’ के लिए शूट करते हैं तो लगता है कि घर वापस आ गए हैं। इस बार फिल्म के लिए इतने सारे लोग दोबारा इकट्ठा हुए तो बिल्कुल रीयूनियन जैसा महसूस हुआ। जैसे स्कूल या कॉलेज के दोस्त कई साल बाद मिलते हैं और वही पुरानी बॉन्डिंग वापस आ जाती है। सवाल: इतने साल बाद पुराने कलाकारों से मिलना कैसा रहा? जवाब: बहुत अच्छा लगा। साथ काम करते-करते ‘मिर्जापुर’ हमारे लिए बहुत खास बन गया है। हम सबने इसके साथ बहुत कुछ देखा है। दोबारा साथ आए तो लगा कि सभी के अंदर का बच्चा वापस आ गया था। अली, दिवेंदु, श्रिया, जीतू और बाकी सभी लोग बहुत उत्साहित थे। नए लोग भी ऐसे जुड़े कि लगा ही नहीं कि वे नए हैं। सवाल: पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिवेंदु शर्मा में इतने सालों बाद क्या बदलाव देखती हैं? जवाब: एक एक्टर अपने अनुभव के साथ बेहतर होता जाता है। इन सभी ने ‘मिर्जापुर’ के बाद बहुत बड़ा काम किया है, लेकिन निजी तौर पर मुझे उनमें कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। उनसे मिलते हैं तो वही पुरानी मासूमियत नजर आती है। मुझे सेट पर बहुत प्यार मिलता है, क्योंकि मैं सबसे छोटी हूं। सभी ने मुझे बहुत प्यार से रखा है। सवाल: पंकज त्रिपाठी के साथ आपका रिश्ता कैसा है? जवाब: मैंने उनका काम पहले देखा था और मुझे वे बहुत अच्छे एक्टर लगते थे। लेकिन मुझे नहीं पता था कि उनके अंदर एक बच्चा भी है। उनके पास बहुत सारे किस्से हैं और वे बहुत सेल्फ-अश्योर्ड इंसान हैं। आज भी जब वे मुझे देखते हैं तो कहते हैं, ‘बहुत दुबली
‘दिमागी नक्सल’ पर BJP की मीम वॉर:मुन्ना भैया, रॉकी भाई से लेकर KGF तक के सीन इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को बीजेपी ने सोशल मीडिया कैंपेन का हिस्सा बना दिया है। पार्टी की अलग-अलग राज्य इकाइयां फिल्मों और वेब सीरीज के चर्चित सीन से ‘दिमागी नक्सल’ पर मीम बना रही हैं। इनमें मिर्जापुर के मुन्ना भैया और कलीन भैया से लेकर KGF और सिंघम के सीन शामिल हैं। हालांकि, कैंपेन का सोशल मीडिया पर विरोध भी हो रहा है। बीजेपी की सोशल मीडिया टीम ने शुरू की मीम वॉर 26 अगस्त को बीजेपी छत्तीसगढ़ ने ‘अवेंजर्स असेंबल’ पोस्ट कर दूसरे राज्यों की पार्टी इकाइयों को भी अभियान से जुड़ने का संदेश दिया था। इसके बाद बीजेपी के कई राज्य स्तरीय सोशल मीडिया अकाउंट्स ने एक के बाद एक मीम पोस्ट किए। इन पोस्ट में फिल्मों और वेब सीरीज के लोकप्रिय किरदारों और सीन को राजनीतिक संदेश से जोड़ा गया। BJP इन मीम्स के जरिए युवाओं, खासकर Gen Z तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रही है। मुन्ना भैया के सीन से लेकर ‘सिंघम’ तक सबसे ज्यादा चर्चा मिर्जापुर के मुन्ना भैया वाले मीम की हुई। इसमें मुन्ना भैया एक छात्र को थप्पड़ मारते नजर आते हैं और बीजेपी ने छात्र को ‘दिमागी नक्सल’ के तौर पर दिखाया। बीजेपी छत्तीसगढ़ ने संदेश दिया कि ‘दिमागी नक्सल’ बनने के बजाय देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए। इसके बाद बीजेपी ने सिंघम के एक सीन का इस्तेमाल किया। इसमें अभिनेता अजय देवगन के किरदार को एक गुंडे की पिटाई करते दिखाया गया और इसे ‘छत्तीसगढ़ स्टाइल’ में दिमागी नक्सल के इलाज से जोड़ा गया। दिल्ली बीजेपी ने मिर्जापुर के कलीन भैया वाले सीन से कैंपेन को आगे बढ़ाया। वहीं, गोवा BJP ने तारक मेहता का उल्टा चश्मा के एक सीन को राजनीतिक मीम में बदल दिया। KGF के मीम पर सबसे ज्यादा विवाद बीजेपी कर्नाटक के शेयर किए KGF के एक सीन पर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सवाल उठे। इसमें रॉकी और उसके साथी पहाड़ी से विरोधियों पर गोलियां चलाते नजर आते हैं। बीजेपी ने इस सीन को एडिट कर अलग-अलग राज्य इकाइयों को हमलावरों और ‘दिमागी नक्सल’ को उनके विरोधियों के तौर पर पेश किया। पोस्ट में लिखा गया कि ‘दिमागी नक्सल’ के खिलाफ पूरी ताकत से अभियान जारी रहेगा। इस पोस्ट के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बीजेपी पर हिंसक राजनीतिक भाषा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि Gen Z या युवाओं को ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा रहा है तो फिल्मों के हिंसक सीन के जरिए जवाब देना क्या सही है। विपक्ष और सोशल मीडिया यूजर्स ने भी उठाए सवाल कैंपेन को लेकर विपक्ष और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बीजेपी की आलोचना की। एक यूजर ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का जवाब विचारों से दिया जाना चाहिए, गोलियों या हिंसा के संकेतों से नहीं। पूर्व बीजेपी विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने भी अभियान पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने देश में हिंसक राजनीतिक बयानबाजी को सामान्य बनाने में भूमिका निभाई है। हर राज्य इकाई दूसरी की पोस्ट को आगे बढ़ा रही पिछले कुछ दिनों में बीजेपी के सोशल मीडिया कैंपेन में एक पैटर्न देखने को मिला है। एक राज्य इकाई ‘दिमागी नक्सल’ पर मीम पोस्ट करती है, दूसरी उसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देती है और तीसरी नया मीम जोड़ देती है। BJP IT सेल से जुड़े एक सदस्य के मुताबिक, इसका मकसद अलग-अलग राज्यों के सोशल मीडिया नेटवर्क को एक साथ सक्रिय करना है। इससे एक राज्य की पोस्ट दूसरे राज्यों के यूजर्स तक भी पहुंच सकती है और पार्टी का राजनीतिक नैरेटिव ज्यादा लोगों तक ले जाया जा सकता है। Instagram पर भी अभियान बढ़ाने की तैयारी BJP का यह कैंपेन X तक सीमित नहीं रहने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी की सोशल मीडिया टीम का अगला फोकस Instagram है, जहां Gen Z की बड़ी मौजूदगी है। पार्टी की रणनीति लोकप्रिय फिल्मों और पॉप कल्चर के वायरल सीन को राजनीतिक संदेश से जोड़कर ज्यादा युवाओं तक पहुंच बनाने की है। बीजेपी के एक नेता ने इस अभियान को अभी सिर्फ ‘ट्रेलर’ बताया है।
‘दिमागी नक्सल’ पर BJP की मीम वॉर:मुन्ना भैया, रॉकी भाई से लेकर KGF तक के सीन इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को बीजेपी ने सोशल मीडिया कैंपेन का हिस्सा बना दिया है। पार्टी की अलग-अलग राज्य इकाइयां फिल्मों और वेब सीरीज के चर्चित सीन से ‘दिमागी नक्सल’ पर मीम बना रही हैं। इनमें मिर्जापुर के मुन्ना भैया और कलीन भैया से लेकर KGF और सिंघम के सीन शामिल हैं। हालांकि, कैंपेन का सोशल मीडिया पर विरोध भी हो रहा है। बीजेपी की सोशल मीडिया टीम ने शुरू की मीम वॉर 26 अगस्त को बीजेपी छत्तीसगढ़ ने ‘अवेंजर्स असेंबल’ पोस्ट कर दूसरे राज्यों की पार्टी इकाइयों को भी अभियान से जुड़ने का संदेश दिया था। इसके बाद बीजेपी के कई राज्य स्तरीय सोशल मीडिया अकाउंट्स ने एक के बाद एक मीम पोस्ट किए। इन पोस्ट में फिल्मों और वेब सीरीज के लोकप्रिय किरदारों और सीन को राजनीतिक संदेश से जोड़ा गया। BJP इन मीम्स के जरिए युवाओं, खासकर Gen Z तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रही है। मुन्ना भैया के सीन से लेकर ‘सिंघम’ तक सबसे ज्यादा चर्चा मिर्जापुर के मुन्ना भैया वाले मीम की हुई। इसमें मुन्ना भैया एक छात्र को थप्पड़ मारते नजर आते हैं और बीजेपी ने छात्र को ‘दिमागी नक्सल’ के तौर पर दिखाया। बीजेपी छत्तीसगढ़ ने संदेश दिया कि ‘दिमागी नक्सल’ बनने के बजाय देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए। इसके बाद बीजेपी ने सिंघम के एक सीन का इस्तेमाल किया। इसमें अभिनेता अजय देवगन के किरदार को एक गुंडे की पिटाई करते दिखाया गया और इसे ‘छत्तीसगढ़ स्टाइल’ में दिमागी नक्सल के इलाज से जोड़ा गया। दिल्ली बीजेपी ने मिर्जापुर के कलीन भैया वाले सीन से कैंपेन को आगे बढ़ाया। वहीं, गोवा BJP ने तारक मेहता का उल्टा चश्मा के एक सीन को राजनीतिक मीम में बदल दिया। KGF के मीम पर सबसे ज्यादा विवाद बीजेपी कर्नाटक के शेयर किए KGF के एक सीन पर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सवाल उठे। इसमें रॉकी और उसके साथी पहाड़ी से विरोधियों पर गोलियां चलाते नजर आते हैं। बीजेपी ने इस सीन को एडिट कर अलग-अलग राज्य इकाइयों को हमलावरों और ‘दिमागी नक्सल’ को उनके विरोधियों के तौर पर पेश किया। पोस्ट में लिखा गया कि ‘दिमागी नक्सल’ के खिलाफ पूरी ताकत से अभियान जारी रहेगा। इस पोस्ट के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बीजेपी पर हिंसक राजनीतिक भाषा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि Gen Z या युवाओं को ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा रहा है तो फिल्मों के हिंसक सीन के जरिए जवाब देना क्या सही है। विपक्ष और सोशल मीडिया यूजर्स ने भी उठाए सवाल कैंपेन को लेकर विपक्ष और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बीजेपी की आलोचना की। एक यूजर ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का जवाब विचारों से दिया जाना चाहिए, गोलियों या हिंसा के संकेतों से नहीं। पूर्व बीजेपी विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने भी अभियान पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने देश में हिंसक राजनीतिक बयानबाजी को सामान्य बनाने में भूमिका निभाई है। हर राज्य इकाई दूसरी की पोस्ट को आगे बढ़ा रही पिछले कुछ दिनों में बीजेपी के सोशल मीडिया कैंपेन में एक पैटर्न देखने को मिला है। एक राज्य इकाई ‘दिमागी नक्सल’ पर मीम पोस्ट करती है, दूसरी उसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देती है और तीसरी नया मीम जोड़ देती है। BJP IT सेल से जुड़े एक सदस्य के मुताबिक, इसका मकसद अलग-अलग राज्यों के सोशल मीडिया नेटवर्क को एक साथ सक्रिय करना है। इससे एक राज्य की पोस्ट दूसरे राज्यों के यूजर्स तक भी पहुंच सकती है और पार्टी का राजनीतिक नैरेटिव ज्यादा लोगों तक ले जाया जा सकता है। Instagram पर भी अभियान बढ़ाने की तैयारी BJP का यह कैंपेन X तक सीमित नहीं रहने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी की सोशल मीडिया टीम का अगला फोकस Instagram है, जहां Gen Z की बड़ी मौजूदगी है। पार्टी की रणनीति लोकप्रिय फिल्मों और पॉप कल्चर के वायरल सीन को राजनीतिक संदेश से जोड़कर ज्यादा युवाओं तक पहुंच बनाने की है। बीजेपी के एक नेता ने इस अभियान को अभी सिर्फ ‘ट्रेलर’ बताया है।
नेपाल बाढ़ में बैंक का लॉकर बहा, ₹57 लाख लूटे:सेफ तोड़कर कैश निकालने के आरोप में 29 हिरासत में

नेपाल में भीषण बाढ़ के दौरान भोटेकोशी इलाके से एक बैंक का लॉकर बहकर कई किलोमीटर दूर पहुंच गया। बाद में धादिंग में मिले इस लॉकर को तोड़कर उसमें रखी नकदी निकालने के आरोप में पुलिस ने 29 लोगों को हिरासत में लिया है। धादिंग पुलिस के मुताबिक, सेफ 10 सितंबर को रसुवा के भोटेकोशी इलाके में आई बाढ़ में बह गया था। यह बाद में धादिंग के गलछी ग्रामीण नगरपालिका-4 में बेलखुखोला के पास त्रिशूली नदी किनारे मिला। लॉकर तोड़कर निकाली कैश पुलिस को 12 सितंबर को सूचना मिली कि कुछ स्थानीय लोगों ने सेफ तोड़कर उसके अंदर रखी रकम निकाल ली है। इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शुरुआती तलाशी में पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों के पास से 92,68,505 नेपाली रुपए यानी करीब 57 लाख रुपए बरामद किए। हिरासत में लिए गए लोगों की उम्र 19 से 49 साल के बीच है। इनमें ज्यादातर गलछी-4 के मस्तार के रहने वाले हैं। कुछ लोग गलछी-6 के आदमघाट और सिद्धलेक-7 के आदमतार के रहने वाले हैं। कुछ मूल रूप से चितवन और परसा के हैं और फिलहाल धादिंग में रह रहे हैं। पुलिस खंगाल रही कैश का स्रोत पुलिस अब बरामद रकम के स्रोत का पता लगा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि लॉकर तोड़ने और कैश निकालने की घटना में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। महिला के शव से बालियां चुराने वाले 2 गिरफ्तार इसी दौरान नेपाल में बाढ़ से जुड़ी एक और चोरी का मामला सामने आया। नारायणी नदी में बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए एक महिला के शव से सोने की बालियां निकालने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की। वीडियो में दो लोग बाढ़ में बहकर आए महिला के शव से कथित तौर पर सोने की बालियां निकालते दिखाई दे रहे हैं। बाढ़ में 626 मौतें, 2,426 लापता नेपाल की आपदा प्राधिकरण के शनिवार के अपडेट के मुताबिक, बाढ़ में 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,426 लोग लापता हैं। शुक्रवार रात तक लापता लोगों की संख्या 1,924 थी। वहीं, 517 विदेशी नागरिकों का भी अब तक पता नहीं चल पाया है। बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान जारी है। खबर अपडेट हो रही है…
नेपाल बाढ़ में बैंक का लॉकर बहा, ₹57 लाख लूटे:सेफ तोड़कर कैश निकालने के आरोप में 29 हिरासत में

नेपाल में भीषण बाढ़ के दौरान भोटेकोशी इलाके से एक बैंक का लॉकर बहकर कई किलोमीटर दूर पहुंच गया। बाद में धादिंग में मिले इस लॉकर को तोड़कर उसमें रखी नकदी निकालने के आरोप में पुलिस ने 29 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक लॉकर बाढ़ में बहने के बाद बेलखुखोला के पास मिला था। पुलिस को सूचना मिली थी कि स्थानीय लोगों ने लॉकर तोड़कर उसके अंदर रखा कैश निकाल लिया है। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। शुरुआती तलाशी में पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों के पास से 92.68 लाख नेपाली रुपए यानी करीब 57 लाख रुपए बरामद किए। कैश निकालने के आरोपी 19 से 49 साल के बीच पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए ज्यादातर लोग गलछी-4 के मस्तार के रहने वाले हैं। कुछ गलछी-6 के आदमघाट और सिद्धलेक-7 के आदमतार के रहने वाले हैं। वहीं कुछ लोग मूल रूप से चितवन और परसा के हैं और फिलहाल धादिंग में रह रहे हैं। सभी की उम्र 19 से 49 साल के बीच है। पुलिस अब बरामद रकम के स्रोत की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मामले में और लोग शामिल हैं या नहीं। महिला के शव से बालियां चुराने वाले 2 गिरफ्तार इसी दौरान नेपाल में बाढ़ से जुड़ी एक और चोरी का मामला सामने आया। नारायणी नदी में बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए एक महिला के शव से सोने की बालियां निकालने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की। वीडियो में दो लोग बाढ़ में बहकर आए महिला के शव से कथित तौर पर सोने की बालियां निकालते दिखाई दे रहे हैं। नेपाल की बाढ़ में में 626 मौतें, 2426 लापता नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ में 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,426 लोग लापता हैं। शुक्रवार रात तक 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी थी। वहीं, 517 विदेशी नागरिक अब भी लापता हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान जारी है। खबर अपडेट हो रही है…
पंजाब के 3 लोग नेपाल की बाढ़ में लापता:इनमें जीजा-साले भी शामिल; परिवार से आखिरी बार वीडियो कॉल पर बात हुई थी

नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ में तरनतारन जिले के तीन लोग लापता हो गए हैं। इनमें गांव रत्तोके के रहने वाले शमशेर सिंह संधू और उनके दो रिश्तेदार शामिल हैं। शमशेर सिंह संधू नेपाल में एंड्रिट्ज कंपनी के त्रिशूल अपर पावर हाउस प्रोजेक्ट में क्रेन ऑपरेटर के तौर पर काम करते हैं। उनके साथ ही उनका साला भुपिंदर सिंह और एक अन्य साले का बेटा रशपाल सिंह नेपाल में रह रहे थे। परिवार के अनुसार, नेपाल में आई बाढ़ के दौरान तीनों का संपर्क अचानक से टूट गया। परिवार के सदस्य गुरजंट सिंह के मुताबिक, शमशेर सिंह से 25 अगस्त को वॉट्सऐप कॉल के जरिए आखिरी बार बातचीत हुई थी। इसके बाद उनसे किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो पाया। लगातार फोन और संपर्क की कोशिश के बावजूद कोई जानकारी नहीं मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। पंचायत ने डीसी से लगाई मदद की गुहार मामले को लेकर गांव की पंचायत भी सक्रिय हो गई है। गांव की सरपंच शोभा कुमारी ने पंचायत की ओर से तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर मदद की मांग की है। पंचायत ने प्रशासन से अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया जाए। पंचायत की मांग है कि नेपाल में चल रहे बचाव और राहत कार्यों के जरिए लापता लोगों की स्थिति का पता लगाया जाए और अगर वे किसी सुरक्षित स्थान पर हैं, तो उनके परिवार तक जल्द से जल्द जानकारी पहुंचाई जाए। मैप में देखिए कहां टूटा ग्लेशियर नेपाल में आई बाढ़ के बारे में जानिए… नेपाल और तिब्बत में इस आपदा से अब तक 633 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं। इनमें 320 भारतीय भी शामिल हैं। वहीं, करीब 400 भारतीय अभी तिब्बत में फंसे हुए हैं। अब घटना के तीन दिन बाद ग्लेशियर टूटने का वीडियो सामने आया है। टूर गाइड के एक ग्रुप ने तिब्बत में एक ऊंची जगह से इसे कैमरे में रिकॉर्ड किया। वीडियो में नेपाल की सीमा के पास बर्फ से ढके पहाड़ और ग्लेशियर दिखाई दे रहे हैं। अचानक ग्लेशियर की बर्फ और चट्टानों का करीब 800 मीटर लंबा हिस्सा टूटकर नीचे घाटी में गिरता नजर आता है। हिमस्खलन के बाद धूल और मलबा पूरे इलाके में फैल जाता है। वीडियो में नीचे की ओर बहता पानी और मलबा भी दिखाई दे रहा है। ग्रुप जब नीचे उतरा तो रास्ते बंद मिले। इसके बाद उन्हें पता चला कि ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद इलाके में आई बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। तीन पॉइंट में जानिए नेपाल के हालात ************ ये खबर भी पढ़ें: पगड़ी पहने पंजाबी युवकों को होटल में नहीं मिली एंट्री: ऑस्ट्रिया में करवाया था बुक, बोले- पैसे भी रिफंड नहीं किए; प्रबंधन ने बताया ड्रेस कोड पंजाब के सिख युवकों को ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग शहर में स्थित कूल मामा होटल ने एंट्री नहीं दी। मोहाली में ट्रेडिंग फर्म चलाने वाले सिख युवक जसप्रीत ने दावा किया कि होटल मैनेजमेंट ने कहा कि पगड़ी वाले यहां नहीं रह सकते। उन्होंने 27 अगस्त को होटल की ऑनलाइन बुकिंग कराई थी।(पढ़ें पूरी खबर)
एक्टर चंद्रचूड़ की हवेली कब्जाई, चाची समेत 7 पर FIR:भाई बोले- फर्जी वसीयत बनवाकर प्रॉपर्टी हड़पी, अब पुलिस डील करेगी

अलीगढ़ में एक्टर चंद्रचूड़ सिंह की हवेली कब्जाने में उनकी चाची समेत 7 लोगों पर केस दर्ज हुआ है। चंद्रचूड़ के भाई अभिमन्यु सिंह ने इस मामले में रोरावर थाने में FIR दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने करोड़ों की जमीन और पुरानी हवेली के फर्जी वसीयत तैयार कराने के बाद प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लिया। अभिमन्यु सिंह ने पुलिस को बताया- हमारी जमीनें जलालपुर के आसपास कई गांवों में हैं। पुश्तैनी हवेली भी है, जिस पर चाची गायत्री देवी सिंह ने लोगों के साथ मिलकर कब्जा कर लिया है। इस मामले में सिविल कोर्ट में मुकदमा पहसे से था, जिस पर अब क्रिमिनल एक्शन लिया है। अब आगे पुलिस ही डील करेगी। जलालपुर एस्टेट परिवार से आते हैं अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह चंद्रचूड़ सिंह ‘माचिस, जोश, क्या कहना’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं। उनका परिवार अलीगढ़ के पुराने जमींदार परिवारों में गिना जाता है। उनके पिता कैप्टन बलदेव सिंह भारतीय सेना में अधिकारी रहे। वह 1985 में सदर विधानसभा सीट से विधायक बने थे। परिवार की जमीनें जलालपुर और आसपास के कई गांवों में फैली हैं। जमीनों पर छोटे-बड़े विवाद पहले भी होते रहे, लेकिन यह पहली बार मामला खुलकर सामने आया है। चाचा के निधन के बाद बढ़ा विवाद चंद्रचूड़ के चाचा गंगा सिंह लंबे समय से स्वीडन में रहते थे। भाई की मौत के बाद गंगा सिंह जलालपुर हवेली में आकर रहने लगे। अक्टूबर-2025 में गंगा सिंह का निधन हो गया। उसके बाद से ही पुश्तैनी संपत्ति, हवेली और ट्रस्ट से जुड़ी जमीनों पर कब्जे और दावेदारी को लेकर परिवार में तनातनी बढ़ गई। अब पढ़िए चंद्रचूड़ के भाई अभिमन्यु ने बताया… दादा की मौत से एक दिन पहले बनी फर्जी वसीयत हमारे दादाजी अलीगढ़ के बहुत बड़े जमींदार थे। साल- 1997 में उनका निधन हुआ था। उनके निधन से ठीक एक दिन पहले एक फर्जी वसीयत तैयार कर ली गई थी। इस बड़े षड्यंत्र में परिवार के कुछ सदस्यों के साथ बाहरी लोग भी शामिल हैं। इस फर्जी वसीयत के जरिए सारी की सारी बेशकीमती जमीनें एक ही परिवार और दो लोगों के नाम ट्रांसफर कर दी गईं। तहसील कर्मियों से मिलीभगत वसीयत का कोई प्रोबेट भी नहीं कराया गया था। चाचा गंगा सिंह की पत्नी और बेटे ने फर्जी तरीके से हवेली और जमीन पर कब्जा किया। उन लोगों ने बेहद शातिर तरीके से तहसील कार्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से राजस्व दस्तावेजों में हेर-फेर की। नाम बदलकर सालों तक इन जमीनों को अवैध रूप से बेचा है। हम मुंबई में थे, हमारे पीछे खेल होता रहा मेरा परिवार लंबे समय से मुंबई में रह रहा था। अलीगढ़ से दूर रहने के कारण इस बात की भनक तक नहीं लगी कि पैतृक संपत्तियों को कब्जा कर बेचा जा रहा है। अब धोखाधड़ी की जानकारी पर लीगल टीम को काम पर लगा दिया है। पैतृक संपत्ति में 1870 में बनी ऐतिहासिक हवेली द जलालपुर एस्टेट भी शामिल है। यह एक हेरिटेज प्रॉपर्टी है। सभी दस्तावेज निकाले गए हैं और उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई है। कोर्ट में पहुंचा था मामला, अब क्रिमिनल एक्शन होगा चंद्रचूड़ के भाई अभिमन्यु ने बताया- अलीगढ़ की अदालत में सिविल सूट दर्ज किया था। दो महीने से लगातार सबूत जुटा रहा था। अब इस मामले में क्रिमिनल केस दर्ज कराया है। इस जमीनी विवाद और धोखाधड़ी में न सिर्फ परिवार के लोग शामिल हैं, बल्कि कुछ स्थानीय राजनेता भी गलत तरीके से इसमें घुसने की कोशिश कर रहे हैं। इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। जलालपुर चौकी में बयान दर्ज कराए चंद्रचूड़ सिंह अपने भाई के साथ शनिवार को थाना रोरावर की जलालपुर चौकी पहुंचे। यहां पुलिस के सामने बयान दर्ज कराया। अभिनेता ने अपनी पैतृक संपत्ति को फर्जी वसीयत के जरिए हड़पने की कोशिश का आरोप लगाया है। मुकदमे में चाची, कजिन भाई, बहन, एक विदेशी नागरिक, दो गवाह और वकील समेत सात लोगों को नामजद किया है। चंद्रचूड़ सिंह ने बताया- संपत्ति को लेकर चाचा के परिवार से लंबे समय से विवाद चल रहा है। बेशकीमती पैतृक संपत्ति पर अधिकार जताने के लिए फर्जी वसीयत तैयार कराई गई और उसके आधार पर संपत्ति हड़पने की कोशिश की गई है। हमने सभी सबूत पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। ………………………… यह खबर भी पढ़ें सिंगर अंकित की पत्नी फूट-फूटकर रोईं, बोलीं- आत्मदाह कर लूंगी: पति के हत्यारों का एनकाउंटर हो, अब परिवार को कौन संभालेगा? शहर के बीचों-बीच चार बदमाशों ने खुलेआम मेरे पति की गोली मारकर हत्या कर दी। बदमाशों के चेहरे खुले थे। वो बेखौफ होकर आए, वारदात को अंजाम दिया और फिर आसानी से फरार हो गए। यह खबर भी पढ़ें
इमरान हाशमी को हुआ स्वाइन फ्लू:H1N1 टेस्ट आया पॉजिटिव; डॉक्टरों ने दी आराम की सलाह, देखिए एक्सक्लूसिव मेडिकल रिपोर्ट

बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी स्वाइन फ्लू (H1N1) की चपेट में आ गए हैं। उनकी पिछले कुछ दिनों से तबीयत खराब थी। हाल ही में H1N1 का टेस्ट करवाने के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इमरान हाशमी पिछले कुछ दिनों से लगातार ट्रेवल कर रहे थे। वह रांची भी गए थे। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। तबीयत ठीक नहीं होने पर उन्होंने H1N1 का टेस्ट कराया, जिसकी रिपोर्ट कल पॉजिटिव आई। डॉक्टरों ने इमरान हाशमी को आराम करने और जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है। दैनिक भास्कर को एक्टर इमरान हाशमी की एक्सक्लूसिव मेडिकल रिपोर्ट मिली है, जिसके टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव हैं। तबीयत बिगड़ने पर बैंग्लोर शो कैंसिल किया आवारापन 2 की सक्सेस के बीच इमरान हाशमी बेंगलुरू के एक शो का हिस्सा बनने वाले थे, हालांकि स्वाइन फ्लू होने के बाद अब उन्होंने ये शो कैंसिल कर दिया है। इमरान हाशमी ने आधिकारिक सोशल मीडिया से इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, हैलो बेंगलुरु, मैं सच में बहुत बीमार हूं और दुर्भाग्य से बेंगलुरु के शो में नहीं आ पाऊंगा। लेकिन पिक्चर खत्म नहीं हुई है, बस पोस्टपोन हुई है। मैं आप सभी से 12 सितंबर, शनिवार को सनबर्न यूनियन में मिलूंगा। आपके टिकट नई तारीख के लिए मान्य रहेंगे। आप सभी से मिलने का इंतजार नहीं कर सकता।” इमरान हाशमी की फिल्म ने किया 220 करोड़ का कलेक्शन इमरान हाशमी की मोस्ट अवेटेड फिल्म आवारापन 2, 14 अगस्त को रिलीज हुई है। इस फिल्म ने अब तक 220 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। नितिन कक्कड़ के निर्देशन में बनी ये फिल्म, इमरान हाशमी की 2009 में आई फिल्म आवारापन का सीक्वल है। फिल्म में इमरान हाशमी के साथ दिशा पाटनी और शबाना आजमी भी अहम किरदारों में हैं।
कंगना रनोट-बाबा रामदेव की सुलह की इनसाइड स्टोरी:तोहफे-मिठाई लेकर घर पहुंचे प्रवक्ता, कॉल पर हुई बातचीत; बयानबाजी से बचने पर सहमति जताई

योगगुरु बाबा रामदेव और बीजेपी सांसद-एक्ट्रेस कंगना रनौत के बीच पिछले दिनों से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है। रक्षाबंधन के मौके पर दोनों के बीच पैचअप की पूरी कवायद दिल्ली के 14 जनपथ स्थित कंगना रनौत के आवास पर हुई। बाबा रामदेव की ओर से उनके प्रवक्ता एस.के. तिजारावाला गिफ्ट लेकर कंगना के घर पहुंचे। दोनों ने बात कर सहमति जताई है कि वह सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी नहीं करेंगे। कंगना ने सुलह के बाद अब बाबा रामदेव को राखी भी भिजवाई है। कंगना से मुलाकात के बाद बाबा रामदेव और कंगना की फोन पर भी बात कराई गई। कंगना के करीबी और उनके राजनीतिक सलाहकार मयंक मधुर के मुताबिक, इस बातचीत के साथ दोनों के बीच चल रही नाराजगी और सार्वजनिक बयानबाजी को खत्म करने पर सहमति बन गई है। मयंक के अनुसार, मुलाकात के बाद सुलह की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और बाबा रामदेव तथा कंगना रनौत की फोन पर बातचीत कराई गई। दोनों के बीच पिछले कुछ दिनों में जो भी मतभेद पैदा हुए थे, उन पर बात हुई। इस पूरे घटनाक्रम में कंगना के सलाहकार मयंक मधुर की पहल भी अहम रही। दोनों पक्षों के बीच बातचीत की जमीन तैयार करने और विवाद को खत्म करने की दिशा में पहल करने के बाद रक्षाबंधन के मौके पर यह मुलाकात संभव हो सकी। 14 जनपथ पर हुई यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि बाबा रामदेव और कंगना रनौत के बीच विवाद पिछले दिनों सार्वजनिक तौर पर काफी चर्चा में रहा था। दोनों की टिप्पणियों और उसके बाद हुई बयानबाजी ने मामले को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सोशल मीडिया पर भी दोनों के समर्थकों के बीच इसे लेकर बहस होती रही। ऐसे में अब रक्षाबंधन के मौके पर विवाद खत्म करने की पहल को एक प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। कंगना ने कहा- भूल चूक माफ, ईश्वर लंबी आयु दे बाबा रामदेव की ओर से उपहार और मिठाई मिलने के बाद कंगना रनोट ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, ‘त्योहार का दिन होता है सब भूल-चूक माफ करने के लिए। मेरे भाई बाबा रामदेव जी ने बहुत अच्छी बात कही कि विवाद नहीं, संवाद होना चाहिए। आज रक्षाबंधन के दिन मैं उनकी मिठाई और बड़े भाई का प्रेम, दोनों स्वीकार करती हूं। बहुत धन्यवाद। ईश्वर आपको लंबी आयु दे।’ कंगना रनोट ने बाबा रामदेव को भेजी राखी सुलह होने के बाद कंगना रनोट ने बाबा रामदेव को राखी भेजी। उन्होंने अपनी कार्यकर्ता से वह राखी बंधवाई है। क्या था कंगना रनोट और रामदेव बाबा का पूरा विवाद? कंगना रनोट ने जेन-जी प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा था। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर कहा था, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के युवा को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” इस पर कंगना ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” विवाद लगभग खत्म हो चुका था, लेकिन कंगना ने डीडी न्यूज के इंटरव्यू में फिर बाबा रामदेव पर बयान दिया। उन्होंने कहा है, ‘बाबा रामदेव मुझसे पहले ही नाराज चल रहे हैं। अभी उनसे पूछा गया कि कंगना ने प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा है, तो उन्होंने कहा, उसका बचपन देखा है क्या था, उसकी जवानी देखी है क्या थी। क्या बाबा रामदेव मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका हुआ था, उसने देखा है क्या था। क्या देखा। मुझे समझ नहीं आ रहा, ऐसा क्या देखा। बताना चाहिए था न कि क्या देखा।’
कंगना रनोट-बाबा रामदेव की सुलह की इनसाइड स्टोरी:तोहफे-मिठाई लेकर घर पहुंचे प्रवक्ता, कॉल पर हुई बातचीत; बयानबाजी से बचने पर सहमति जताई

योगगुरु बाबा रामदेव और बीजेपी सांसद-एक्ट्रेस कंगना रनौत के बीच पिछले दिनों से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है। रक्षाबंधन के मौके पर दोनों के बीच पैचअप की पूरी कवायद दिल्ली के 14 जनपथ स्थित कंगना रनौत के आवास पर हुई। बाबा रामदेव की ओर से उनके प्रवक्ता एस.के. तिजारावाला गिफ्ट लेकर कंगना के घर पहुंचे। दोनों ने बात कर सहमति जताई है कि वह सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी नहीं करेंगे। कंगना ने सुलह के बाद अब बाबा रामदेव को राखी भी भिजवाई है। कंगना से मुलाकात के बाद बाबा रामदेव और कंगना की फोन पर भी बात कराई गई। कंगना के करीबी और उनके राजनीतिक सलाहकार मयंक मधुर के मुताबिक, इस बातचीत के साथ दोनों के बीच चल रही नाराजगी और सार्वजनिक बयानबाजी को खत्म करने पर सहमति बन गई है। मयंक के अनुसार, मुलाकात के बाद सुलह की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और बाबा रामदेव तथा कंगना रनौत की फोन पर बातचीत कराई गई। दोनों के बीच पिछले कुछ दिनों में जो भी मतभेद पैदा हुए थे, उन पर बात हुई। इस पूरे घटनाक्रम में कंगना के सलाहकार मयंक मधुर की पहल भी अहम रही। दोनों पक्षों के बीच बातचीत की जमीन तैयार करने और विवाद को खत्म करने की दिशा में पहल करने के बाद रक्षाबंधन के मौके पर यह मुलाकात संभव हो सकी। 14 जनपथ पर हुई यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि बाबा रामदेव और कंगना रनौत के बीच विवाद पिछले दिनों सार्वजनिक तौर पर काफी चर्चा में रहा था। दोनों की टिप्पणियों और उसके बाद हुई बयानबाजी ने मामले को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सोशल मीडिया पर भी दोनों के समर्थकों के बीच इसे लेकर बहस होती रही। ऐसे में अब रक्षाबंधन के मौके पर विवाद खत्म करने की पहल को एक प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। कंगना ने कहा- भूल चूक माफ, ईश्वर लंबी आयु दे बाबा रामदेव की ओर से उपहार और मिठाई मिलने के बाद कंगना रनोट ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, ‘त्योहार का दिन होता है सब भूल-चूक माफ करने के लिए। मेरे भाई बाबा रामदेव जी ने बहुत अच्छी बात कही कि विवाद नहीं, संवाद होना चाहिए। आज रक्षाबंधन के दिन मैं उनकी मिठाई और बड़े भाई का प्रेम, दोनों स्वीकार करती हूं। बहुत धन्यवाद। ईश्वर आपको लंबी आयु दे।’ कंगना रनोट ने बाबा रामदेव को भेजी राखी सुलह होने के बाद कंगना रनोट ने बाबा रामदेव को राखी भेजी। उन्होंने अपनी कार्यकर्ता से वह राखी बंधवाई है। क्या था कंगना रनोट और रामदेव बाबा का पूरा विवाद? कंगना रनोट ने जेन-जी प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा था। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर कहा था, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के युवा को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” इस पर कंगना ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” विवाद लगभग खत्म हो चुका था, लेकिन कंगना ने डीडी न्यूज के इंटरव्यू में फिर बाबा रामदेव पर बयान दिया। उन्होंने कहा है, ‘बाबा रामदेव मुझसे पहले ही नाराज चल रहे हैं। अभी उनसे पूछा गया कि कंगना ने प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा है, तो उन्होंने कहा, उसका बचपन देखा है क्या था, उसकी जवानी देखी है क्या थी। क्या बाबा रामदेव मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका हुआ था, उसने देखा है क्या था। क्या देखा। मुझे समझ नहीं आ रहा, ऐसा क्या देखा। बताना चाहिए था न कि क्या देखा।’







