केंद्रीय मंत्री बंदी संजय के बेटे पर POCSO केस:नाबालिग से सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप; अग्रिम जमानत याचिका लगाई, कहा- हनी ट्रैप की कोशिश हुई

भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे साई भागीरथ पर 17 साल की एक लड़की के सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप लगा है। नाबालिग की मां ने 8 मई को तेलंगाना के हैदराबाद में POCSO एक्ट के तहत उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था। भागीरथ ने 12 मई को तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अग्रिम जमानत के साथ-साथ अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि महिला ने बेटी के जरिए उन्हें हनी ट्रैप में फंसाने की कोशिश की। दरअसल, नाबालिग की मां का आरोप है कि भागीरथ उनकी बेटी के साथ रिलेशनशिप में था और उसने उसका यौन उत्पीड़न किया। पुलिस के मुताबिक दोनों पिछले सात-आठ महीनों से संपर्क में थे। हालांकि भागीरथ ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने तेलंगाना के करीमनगर में हनी ट्रैप और उगाही की शिकायत दर्ज कराई है। मंत्री के PRO की ओर से जारी बयान में दावा किया गया कि एक महिला ने अपनी बेटी के जरिए भागीरथ को फंसाने की कोशिश की और बाद में बड़ी रकम मांगकर ब्लैकमेल किया। प्रेस बयान के मुताबिक, महिला ने अपनी बेटी को चारे की तरह इस्तेमाल कर बंदी साई भागीरथ को हनी ट्रैप में फंसाने की कोशिश की। बयान में यह भी दावा किया गया कि महिला अपनी बेटी की उम्र गलत बता रही है। इस मामले को लेकर BRS नेता केटी रामा राव (KTR) ने तेलंगाना पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पीड़िता के साथ अन्याय हो रहा है और BJP की ‘बेटी बचाओ’ मुहिम पर सवाल उठाए। KTR ने मांग की कि केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार या तो इस्तीफा दें या उन्हें पद से हटाया जाए। KTR ने आरोप लगाया कि मंत्री के बेटे के खिलाफ कार्रवाई में देरी हुई और पूछा कि क्या कानून में उन्हें कोई विशेष छूट दी गई है।
जैकलीन फर्नांडिस ने सरकारी गवाह बनने की अर्जी वापस ली:ED ने किया था विरोध; 200 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला

बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस ने मंगलवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से अपनी वह अर्जी वापस ले ली है, जिसमें उन्होंने 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में सरकारी गवाह बनने की मांग की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी इस अर्जी का कड़ा विरोध किया था। जांच एजेंसी का कहना है कि जैकलीन इस मामले में कोई पीड़ित नहीं बल्कि इस अपराध की मुख्य लाभार्थी रही हैं। ईडी ने क्यों किया जैकलीन की अर्जी का विरोध? सोमवार को ईडी ने कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया था। जांच एजेंसी ने कहा कि जैकलीन की भूमिका इस केस में बहुत छोटी नहीं है। उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए जुटाए गए पैसों से फायदा उठाया है। ईडी ने दलील दी कि जैकलीन को सरकारी गवाह बनाना न्याय के साथ खिलवाड़ होगा, क्योंकि उन्होंने गंभीर अपराध किए हैं। एजेंसी ने उनकी अर्जी को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। सुकेश का जानते हुए भी लेती रहीं करोड़ों के गिफ्ट्स ईडी ने अपने जवाब में खुलासा किया कि सुकेश चंद्रशेखर के क्रिमिनल बैकग्राउंड के बारे में पता होने के बावजूद जैकलीन उसके संपर्क में रहीं। सुकेश ने अपराध की कमाई से जैकलीन और उनके परिवार के लिए महंगे गिफ्ट्स और सुख-सुविधाओं का इंतजाम किया था। एजेंसी का कहना है कि दोनों के बीच लगातार बातचीत होती थी और जैकलीन को फायदा पहुंचाया जाता था, जिससे साबित होता है कि वह इस साजिश का हिस्सा थीं। जांच के दौरान सही जानकारी न देने का आरोप एजेंसी ने आरोप लगाया कि जैकलीन ने जांच में सहयोग नहीं किया। उनके बयान अक्सर बदलते रहे और उन्होंने पूरी सच्चाई नहीं बताई। ईडी के मुताबिक, जैकलीन ने शुरुआत में कैश ट्रांजेक्शन, महंगे तोहफों और बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर किए गए फंड्स के बारे में तथ्यों को छिपाया था। उनके बयानों को अधूरा और विरोधाभासी बताया गया है, जिसके लिए बार-बार सबूतों के साथ उनका सामना कराना पड़ा। 200 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला बता दें कि यह पूरा मामला ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है, जिसने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटरों शिविंदर सिंह और मलविंदर सिंह की पत्नियों से 200 करोड़ रुपए ठगे थे। जैकलीन को इस मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी बनाया गया था। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके खिलाफ मामले को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी थी।
जैकलीन फर्नांडिस ने सरकारी गवाह बनने की अर्जी वापस ली:ED ने किया था विरोध; 200 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला

बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस ने मंगलवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से अपनी वह अर्जी वापस ले ली है, जिसमें उन्होंने 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में सरकारी गवाह बनने की मांग की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी इस अर्जी का कड़ा विरोध किया था। जांच एजेंसी का कहना है कि जैकलीन इस मामले में कोई पीड़ित नहीं बल्कि इस अपराध की मुख्य लाभार्थी रही हैं। ईडी ने क्यों किया जैकलीन की अर्जी का विरोध? सोमवार को ईडी ने कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया था। जांच एजेंसी ने कहा कि जैकलीन की भूमिका इस केस में बहुत छोटी नहीं है। उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए जुटाए गए पैसों से फायदा उठाया है। ईडी ने दलील दी कि जैकलीन को सरकारी गवाह बनाना न्याय के साथ खिलवाड़ होगा, क्योंकि उन्होंने गंभीर अपराध किए हैं। एजेंसी ने उनकी अर्जी को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। सुकेश का जानते हुए भी लेती रहीं करोड़ों के गिफ्ट्स ईडी ने अपने जवाब में खुलासा किया कि सुकेश चंद्रशेखर के क्रिमिनल बैकग्राउंड के बारे में पता होने के बावजूद जैकलीन उसके संपर्क में रहीं। सुकेश ने अपराध की कमाई से जैकलीन और उनके परिवार के लिए महंगे गिफ्ट्स और सुख-सुविधाओं का इंतजाम किया था। एजेंसी का कहना है कि दोनों के बीच लगातार बातचीत होती थी और जैकलीन को फायदा पहुंचाया जाता था, जिससे साबित होता है कि वह इस साजिश का हिस्सा थीं। जांच के दौरान सही जानकारी न देने का आरोप एजेंसी ने आरोप लगाया कि जैकलीन ने जांच में सहयोग नहीं किया। उनके बयान अक्सर बदलते रहे और उन्होंने पूरी सच्चाई नहीं बताई। ईडी के मुताबिक, जैकलीन ने शुरुआत में कैश ट्रांजेक्शन, महंगे तोहफों और बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर किए गए फंड्स के बारे में तथ्यों को छिपाया था। उनके बयानों को अधूरा और विरोधाभासी बताया गया है, जिसके लिए बार-बार सबूतों के साथ उनका सामना कराना पड़ा। 200 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला बता दें कि यह पूरा मामला ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है, जिसने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटरों शिविंदर सिंह और मलविंदर सिंह की पत्नियों से 200 करोड़ रुपए ठगे थे। जैकलीन को इस मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी बनाया गया था। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके खिलाफ मामले को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी थी।
डॉक्टर भी मानते हैं! ये पौधे घर की हवा को नेचुरली कर देते हैं साफ, इन्हें लगा कर अपनी छत को बनाएं ग्रीन पावरहाउस!

Last Updated:May 12, 2026, 18:46 IST Air Purifying Plants: शहरों की तेज़ रफ्तार जिंदगी में सबसे बड़ी कमी अगर किसी चीज़ की महसूस होती है, तो वो है साफ हवा. सुबह उठते ही धूल, ट्रैफिक और गर्मी का असर सीधे सांसों तक पहुंचता है. ऐसे में लोग अब सिर्फ एसी या एयर प्यूरीफायर पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि प्राकृतिक विकल्प तलाश रहे हैं. यही वजह है कि छत के बागान यानी रूफटॉप गार्डनिंग तेजी से ट्रेंड में है. ये न सिर्फ घर को खूबसूरत बनाते हैं, बल्कि हवा को साफ करने में भी अहम रोल निभाते हैं, अगर आप भी अपनी छत को एक हेल्दी ग्रीन स्पेस में बदलना चाहते हैं, तो कुछ खास पौधे आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं. छत के बागानों का बढ़ता ट्रेंड आजकल छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटी तक, लोग अपनी छत का इस्तेमाल सिर्फ कपड़े सुखाने के लिए नहीं कर रहे. वहां सब्जियां, फूल और खासतौर पर एयर-प्यूरिफाइंग पौधे लगाए जा रहे हैं. वजह साफ है-बढ़ता प्रदूषण और हेल्थ को लेकर जागरूकता. खास बात ये है कि इन पौधों को लगाने के लिए बहुत ज्यादा स्पेस या एक्सपर्ट स्किल की जरूरत नहीं होती. स्नेक प्लांट: रात में भी ऑक्सीजन स्नेक प्लांट यानी स्नेक प्लांट उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो ज्यादा समय नहीं दे पाते. इसे कम पानी और कम देखभाल की जरूरत होती है. खास बात ये है कि ये रात में भी ऑक्सीजन रिलीज करता है, जिससे आसपास का माहौल ज्यादा फ्रेश रहता है. स्पाइडर प्लांट: तेजी से बढ़ने वाला साथी अगर आप जल्दी रिजल्ट चाहते हैं, तो स्पाइडर प्लांट अच्छा ऑप्शन है. ये तेजी से बढ़ता है और छोटे-छोटे नए पौधे भी देता है. हवा को साफ करने के साथ-साथ ये देखने में भी काफी आकर्षक लगता है. Add News18 as Preferred Source on Google बांस पाम: छत को देगा ग्रीन लुक बांस पाम आपकी छत को एक अलग ही लुक देता है. ये पौधा ऊंचाई में बढ़ता है और आसपास की हवा को फ्रेश बनाए रखने में मदद करता है, अगर आपके पास थोड़ी ज्यादा जगह है, तो ये एक शानदार चॉइस है. पीस लिली: खूबसूरती के साथ सफाई पीस लिली अपने सफेद फूलों और चमकदार पत्तों के लिए जानी जाती है. ये पौधा हवा से टॉक्सिन्स हटाने में मदद करता है. हालांकि इसे सीधे तेज धूप से बचाना जरूरी है, वरना इसके पत्ते खराब हो सकते हैं. एलोवेरा: हेल्थ और एयर के लिए बेस्ट एलोवेरा सिर्फ स्किन के लिए ही नहीं, बल्कि हवा को साफ करने में भी मददगार है. ये कम पानी में भी आसानी से उग जाता है और गर्मी को अच्छी तरह सह लेता है. कई लोग इसे किचन गार्डन का हिस्सा भी बना लेते हैं. मनी प्लांट: आसान और असरदार मनी प्लांट लगभग हर घर में दिख जाता है, लेकिन इसे छत पर लगाना भी उतना ही फायदेमंद है. ये तेजी से बढ़ता है और हवा में मौजूद हानिकारक तत्वों को कम करने में मदद करता है. इसे आप गमले में या हैंगिंग पॉट में भी लगा सकते हैं. कम देखभाल में ज्यादा फायदा छत पर पौधे लगाने का मतलब ये नहीं कि आपको घंटों गार्डनिंग करनी पड़ेगी. कुछ पौधे ऐसे हैं जो कम मेहनत में भी बेहतरीन रिजल्ट देते हैं. अरेका पाम: नमी और ताजगी का कॉम्बो अगर आपकी छत पर धूप अच्छी आती है, तो अरेका पाम एक शानदार विकल्प है. इसके लंबे, हल्के हरे पत्ते माहौल को ट्रॉपिकल फील देते हैं. ये पौधा हवा में नमी बढ़ाता है, जो गर्म इलाकों में बहुत काम आता है. जिन घरों में सूखी हवा की समस्या होती है, वहां ये खासतौर पर फायदेमंद है. बदलती लाइफस्टाइल में गार्डनिंग का रोल आज के समय में लोग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि हेल्थ के लिए भी गार्डनिंग कर रहे हैं. छत पर लगाए गए ये पौधे मानसिक सुकून भी देते हैं. सुबह की चाय अगर हरियाली के बीच हो, तो दिन की शुरुआत ही अलग फील देती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों ने विजय का समर्थन किया, ईपीएस दबाव में, फ्लोर टेस्ट आगे: तमिलनाडु सरकार के लिए आगे क्या | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 18:41 IST 30 विधायकों वाला एक विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट महत्वपूर्ण शक्ति परीक्षण से ठीक 24 घंटे पहले तमिलनाडु में विजय के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करने के लिए आगे आया। एक विद्रोही खेमे के टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार से हाथ मिलाने के बाद एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी को बड़ा झटका लगा। (पीटीआई/फ़ाइल) तमिलनाडु में एक नया राजनीतिक मोड़ सामने आया है जब 30 एआईएडीएमके विधायकों ने मंगलवार को पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी के खिलाफ विद्रोह कर दिया और विजय के नेतृत्व वाली तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) सरकार के पीछे एकजुट हो गए, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन को नई ताकत मिली। एक अभूतपूर्व कदम में, सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट ने कथित तौर पर तमिलनाडु के प्रोटेम स्पीकर को एक याचिका सौंपी, जिसमें एसपी वेलुमणि को विधायक दल के नेता के रूप में मान्यता देने की मांग की गई। बागी विधायकों ने मुख्यमंत्री विजय के साथ बैठक भी की. यह घटनाक्रम तब हुआ जब विजय के नेतृत्व वाली सरकार बुधवार (13 मई) को फ्लोर टेस्ट में अपना बहुमत साबित करने वाली है। विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतने वाली टीवीके को सरकार बनाने के लिए राजनीतिक गठबंधन बनाने में कई दिन बिताने के बाद 120 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। एआईएडीएमके विधायकों ने क्यों की बगावत? अन्नाद्रमुक के शनमुगम गुट ने पलानीस्वामी पर अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाया है और 23 अप्रैल के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद उनके नेतृत्व पर सवाल उठाया है, जहां उसने 164 सीटों पर चुनाव लड़कर केवल 47 सीटें जीती थीं। महत्वपूर्ण शक्ति परीक्षण से ठीक 24 घंटे पहले विद्रोही खेमे के लगभग 30 विधायकों ने टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार से हाथ मिला लिया और पलानीस्वामी पर द्रमुक के साथ गठबंधन करके “विचारधारा के साथ विश्वासघात” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विजय के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करना “अम्मा (जयललिता) की विरासत को पुनर्जीवित करने” और प्रासंगिकता बहाल करने की दिशा में एक कदम था। यह भी पढ़ें: मेरे दुश्मन का दुश्मन: ‘स्टालिन से पार्टी को बचाने’ के लिए अन्नाद्रमुक के विद्रोही विजय का समर्थन क्यों कर रहे हैं? विद्रोही खेमे के पास दो-तिहाई बहुमत से दो विधायक कम हैं, जो शनमुगम गुट को असली अन्नाद्रमुक के रूप में वैधता का दावा करने की अनुमति देगा। हालाँकि, ईपीएस ने महासचिव का पद बरकरार रखा है और पार्टी के एक छोटे लेकिन वफादार वर्ग से समर्थन बरकरार रखा है। टीवीके-एआईएडीएमके का विलय हो सकता है यदि दो और विधायक विद्रोही खेमे में शामिल होते हैं, तो वे भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची में उल्लिखित दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बच जाएंगे। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे पार्टी पर पलानीस्वामी का नियंत्रण ख़त्म हो सकता है और उनके राजनीतिक भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लग सकता है। यदि विद्रोही खेमा टीवीके सरकार में शामिल होता है, तो यह सत्तारूढ़ गठबंधन को और मजबूत करेगा, जिससे राज्य के कुल 234 में से विधायकों की कुल संख्या 150 से अधिक हो जाएगी। इससे टीवीके कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम) या अन्य छोटे दलों पर कम निर्भर हो जाएगा, खासकर किसी भी असहमति के दौरान। और पढ़ें: ईपीएस के लिए रास्ता ख़त्म? दल-बदल से बचने के लिए अन्नाद्रमुक के विद्रोही गुट के केवल 2 विधायक कम पलानीस्वामी, जो दशकों से अन्नाद्रमुक के एक प्रमुख नेता रहे हैं, 2019, 2021, 2024 और 2026 में उनके नेतृत्व में पार्टी को भारी हार का सामना करने के बाद कठिन भविष्य का सामना करना पड़ रहा है। 2016 में जयललिता की मृत्यु के बाद, उन्होंने वीके शशिकला को सत्ता में मजबूत होने से रोकने के लिए ओ पनीरसेल्वम के साथ गठबंधन किया, बाद में 2022 में ओपीएस को निष्कासित करने से पहले, लेकिन उनकी अपनी शैली थी। राजनीति उन्हें परेशान करने के लिए वापस आ गई है। फ्लोर टेस्ट के दौरान क्या होता है? कई दिनों के राजनीतिक गतिरोध और गहन बातचीत के बाद, टीवीके कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम), वीसीके और आईयूएमएल का समर्थन हासिल करने में कामयाब रही, जिससे गठबंधन की कुल ताकत 120 सीटों तक पहुंच गई, जो बहुमत के 118 के आंकड़े से थोड़ा अधिक है। 30 एआईएडीएमके विद्रोहियों के समर्थन और गठबंधन सहयोगियों के मौजूदा समर्थन के साथ, विजय की सरकार लगभग 150 विधायकों की संयुक्त ताकत के साथ आसानी से फ्लोर टेस्ट पास कर सकती है, बशर्ते कि दो-तिहाई विधायक खेमा बदल लें। फ्लोर टेस्ट तमिलनाडु में एक नई राजनीतिक सुबह की शुरुआत कर सकता है, जिसमें टीवीके द्रविड़ियन एकाधिकार की जगह लेगा और अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में से एक को बड़ा झटका देगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों ने विजय का समर्थन किया, ईपीएस दबाव में, फ्लोर टेस्ट आगे: तमिलनाडु सरकार के लिए आगे क्या? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
Eye Care: गर्म हवाओं ने बढ़ाई आंखों की जलन! आजमाएं डॉक्टर के बताए 5 आसान उपाय, तुरंत मिलेगी राहत

Last Updated:May 12, 2026, 18:37 IST Eye Infection in Summer: हरियाणा के अंबाला में बढ़ती गर्मी, तेज धूप और धूल भरी हवाओं का असर अब लोगों की आंखों पर भी दिखाई देने लगा है. आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और पानी आने की शिकायतों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में पिछले कुछ दिनों में आंखों के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है. डॉक्टरों के मुताबिक गर्म हवा और धूल के महीन कण आंखों में एलर्जी और संक्रमण पैदा कर रहे हैं. खासकर दोपहिया वाहन चालकों, मजदूरों और बुजुर्गों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है. अंबाला: लगातार बढ़ रही गर्मी और धूल भरी हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. इसका असर अब लोगों की आंखों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है. तेज धूप, गर्म हवाओं और हवा में उड़ रही धूल-मिट्टी की वजह से आंखों में जलन, खुजली, लालिमा, पानी आना और संक्रमण जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. इसका असर अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में भी देखने को मिल रहा है. अस्पताल की नेत्र रोग ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. जानकारी के मुताबिक करीब 10 दिन पहले तक रोजाना लगभग 120 मरीज आंखों के इलाज के लिए पहुंच रहे थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 200 से ज्यादा हो गई है. इनमें 25 से 30 मरीज ऐसे हैं, जो आंखों में संक्रमण, जलन और लगातार पानी आने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. दोपहिया चालक और मजदूर ज्यादा प्रभावितडॉक्टरों का कहना है कि तेज गर्म हवाओं के साथ उड़ने वाले धूल के छोटे कण आंखों में जाकर एलर्जी और संक्रमण पैदा कर रहे हैं. यह समस्या सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन चलाने वाले लोगों, खुले में काम करने वाले मजदूरों और बुजुर्गों में देखने को मिल रही है. अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि मौसम में बदलाव और बढ़ते तापमान का असर शरीर के साथ-साथ आंखों पर भी पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी है कि लोग अपनी आंखों को धूल और तेज धूप से बचाएं. घर से बाहर निकलते समय पहनें चश्मा डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने सलाह दी कि घर से बाहर निकलते समय धूप का चश्मा जरूर पहनना चाहिए. इससे आंखों को गर्म हवा और धूल से काफी हद तक बचाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में गुलाब जल को आंखों के लिए काफी फायदेमंद माना गया है. आंखों में एक-दो बूंद गुलाब जल डालकर कुछ देर आराम करने से जलन में राहत मिल सकती है. इसके अलावा आंवला के पानी का इस्तेमाल भी आंखों के लिए लाभकारी माना जाता है. यह भी पढ़ें: दादी-नानी का अचूक नुस्खा! भीषण गर्मी में अमृत है ये शरबत, कब्ज और लू से दिलाएगा राहत त्रिफला जल से मिल सकती है राहतडॉ. मीनाक्षी शर्मा के अनुसार त्रिफला जल आंखों की थकान, लालिमा, खुजली और जलन कम करने में मददगार हो सकता है. इसके लिए रातभर त्रिफला को पानी में भिगो दें और सुबह उस पानी को अच्छी तरह छानकर आंखों को धोएं. उन्होंने बताया कि आई कप में यह पानी भरकर कुछ देर आंखों को उसमें रखने से भी राहत मिल सकती है. हल्दी वाला दूध और खीरा भी फायदेमंदउन्होंने बताया कि दूध में हल्दी मिलाकर पीने से आंखों की एलर्जी में फायदा मिलता है. वहीं आंखों के आसपास एलोवेरा जेल लगाने और खीरा या ककड़ी के पतले टुकड़े रखने से भी ठंडक मिलती है और जलन कम होती है. उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि अगर आंखों में लगातार लालिमा, ज्यादा जलन या धुंधला दिखाई देने जैसी परेशानी हो रही हो तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच जरूर कराएं. बाहर से आते ही तुरंत ठंडा पानी न डालेंडॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में पीपल, जामुन, आम और बरगद के पत्तों का काढ़ा भी आंखों के लिए लाभकारी माना गया है. हालांकि इसका उपयोग करने से पहले उसे कपड़े से अच्छी तरह छानना जरूरी होता है. उन्होंने यह भी कहा कि बाहर से घर आने के तुरंत बाद आंखों पर ठंडे पानी के छींटे नहीं मारने चाहिए. पहले शरीर का तापमान सामान्य होने दें, उसके बाद ही आंखों को पानी से धोएं. अचानक ठंडा पानी डालने से आंखें लाल होने का खतरा बढ़ सकता है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
अब छत्तीसगढ़ में तरबूज का मौत कनेक्शन ! क्या वाकई जहरीला था यह फल, कहां से आ रहा है यह जहर?

Last Updated:May 12, 2026, 18:33 IST Watermelon Tragedy in Chhattisgarh: तरबूज खाने के बाद तबीयत बिगड़ने की घटनाओं ने फलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. एक्सपर्ट्स के अनुसार कीटनाशकों, गंदगी, गलत स्टोरेज और बैक्टीरिया की वजह से फल दूषित हो सकते हैं. फलों को अच्छी तरह धोकर और सावधानी से खरीदना चाहिए, ताकि फूड पॉइजनिंग समेत अन्य समस्याओं से बचा जा सके. तरबूज में आजकल केमिकल्स की मिलावट हो रही है, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ गया है. Why Fruits Become Poisonous in Summer: तरबूज गर्मियों में सबसे ज्यादा खाया जाने वाला फल है. तरबूज में पानी की अच्छी मात्रा होती है और इसे सेहत के लिए बेहद फायदेमंद फ्रूट माना जाता है. हालांकि आजकल तरबूज में खतरनाक केमिकल्स की मिलावट के मामले भी बढ़ गए हैं. पिछले महीने मुंबई में तरबूज खाने के बाद एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत का मामला सामने आया था. हालांकि फॉरेंसिक जांच में पता चला कि तरबूज में चूहे मारने की दवा मिलाई गई थी. अब छत्तीसगढ़ में तरबूज खाने से एक लड़के की मौत हो गई और उसी परिवार के 3 अन्य बच्चे बीमार हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. डॉक्टर्स के मुताबिक बच्चे की मौत की शुरुआती वजह फूड पॉइजनिंग हो सकती है, लेकिन अभी इस मामले की जांच की जा रही है और तरबूज के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं. जानकारी के मुताबिक बच्चों ने जो तरबूज खाया, वह कई घंटे पहले काटकर रखा हुआ था. डॉक्टर्स को अंदेशा है कि इस वजह से तरबूज कंटामिनेटेड हो सकता है और इसी से फूड पॉइजनिंग की नौबत आ सकती है. हालांकि कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फूड पॉइजनिंग की वजह से तुरंत मौत सीवियर मामलों में ही होती है. फिलहाल जांच चल रही है और जांच के बाद ही पता चलेगा कि तरबूज में ऐसा क्या था, जिसकी वजह से एक लड़के की मौत हो गई और 3 बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं. तरबूज को लेकर हुई इन घटनाओं के बाद लोगों में तरबूज को लेकर डर बैठ गया है. अब सवाल है कि तरबूज कब सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है और फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए तरबूज खाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें. इस बारे में क्या है डॉक्टर की राय? लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया कि आमतौर पर तरबूज सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन अगर तरबूज कंटामिनेटेड हो जाए, तो उसे खाने से फूड पॉइजनिंग हो सकती है. इसके अलावा तरबूज में मौजूद हानिकारक केमिकल्स, कीटनाशक, मिलावट या बैक्टीरिया स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. गर्मियों में खुले में कटे हुए फल, गंदे पानी से धोए गए फल या लंबे समय तक खराब तरीके से स्टोर किए गए फल जल्दी कंटामिनेटेड हो सकते हैं. खेती के दौरान कई बार फलों पर अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है. अगर इन केमिकल्स को सही तरीके से साफ न किया जाए, तो इनके अवशेष फल की सतह पर बने रह सकते हैं. कुछ मामलों में फलों को जल्दी पकाने या ज्यादा लाल और आकर्षक दिखाने के लिए भी हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं. हालांकि हर फल में ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है. गर्मी में कटे हुए फल बिल्कुल न खाएं डॉक्टर के मुताबिक तरबूज और दूसरे कटे हुए फलों में बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा भी काफी बढ़ जाता है. अगर फल को काटने वाला चाकू, पानी या रखने की जगह साफ न हो, तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं. गर्म मौसम में यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. दूषित फल खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. खासकर बच्चों में यह परेशानी घातक हो सकती है. सभी लोगों को फल खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए. बहुत ज्यादा चमकदार, असामान्य रूप से बड़े या जरूरत से ज्यादा लाल दिखने वाले फलों को सावधानी से खरीदना चाहिए. खाने से पहले फलों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी माना जाता है. तरबूज और अन्य फलों को साफ करने के लिए नमक या बेकिंग सोडा वाले पानी से फलों को धोना चाहिए, ताकि सतह पर मौजूद गंदगी और कुछ केमिकल्स कम हो सकें. बच्चों को फूड पॉइजनिंग का ज्यादा खतरा एक्सपर्ट ने बताया कि कटे हुए फल लंबे समय तक खुले में नहीं रखने चाहिए. सड़क किनारे खुले में बिक रहे कटे फलों को खाने से बचना बेहतर माना जाता है, क्योंकि उनमें धूल, मक्खियां और बैक्टीरिया आसानी से लग सकते हैं. अगर फल काटने के बाद उसका स्वाद, गंध या रंग असामान्य लगे, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में फूड पॉइजनिंग का खतरा ज्यादा हो सकता है. इसलिए अगर फल खाने के बाद उल्टी, तेज पेट दर्द, चक्कर, बुखार या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. फल सेहत के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं, लेकिन उनकी सफाई और गुणवत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. सही तरीके से खरीदे और साफ किए गए फल आमतौर पर सुरक्षित होते हैं. जागरुकता और सावधानी अपनाकर फलों से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
मेरे दुश्मन का दुश्मन: ‘पार्टी को स्टालिन से बचाने’ के लिए अन्नाद्रमुक के विद्रोही विजय का समर्थन क्यों कर रहे हैं? भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 18:05 IST एआईएडीएमके विद्रोह का तात्कालिक उत्प्रेरक एडप्पादी के पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व में विश्वास का संकट है। विजय का समर्थन करके, विद्रोही एक नए ‘धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय’ मॉडल पर दांव लगा रहे हैं, जिसके बारे में उनका मानना है कि लंबे समय में डीएमके को सत्ता से बाहर रखने का बेहतर मौका है। फ़ाइल छवि 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य को मौलिक रूप से नया आकार दिया गया है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व में तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) की ऐतिहासिक जीत के बाद, एआईएडीएमके के भीतर एक नाटकीय विभाजन ने सत्ता के एक साधारण परिवर्तन से विपक्ष के पूर्ण पुनर्गठन पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। मंगलवार को, वरिष्ठ अन्नाद्रमुक नेता एसपी वेलुमणि और सीवी शनमुगम ने बुधवार को होने वाले महत्वपूर्ण फ्लोर टेस्ट से ठीक 24 घंटे पहले टीवीके सरकार के लिए अपने समर्थन को औपचारिक रूप देने के लिए लगभग 30 विधायकों के एक गुट का नेतृत्व किया। विद्रोही एडप्पादी के पलानीस्वामी के खिलाफ क्यों हो गए हैं? विद्रोह का तात्कालिक उत्प्रेरक एडप्पादी के पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व में विश्वास का संकट है। 234 सदस्यीय सदन में एआईएडीएमके की सीटों की संख्या घटकर 47 रह जाने के बाद, जिससे पार्टी को प्रमुख विपक्ष के रूप में अपना दर्जा खोना पड़ा, वरिष्ठ क्षत्रपों ने पार्टी के चुनावी “अपमान” के लिए ईपीएस को दोषी ठहराया है। हालाँकि, सबसे विस्फोटक आरोप पूर्व कानून मंत्री सी. विजय के लिए अपने समर्थन को “डीएमके-एआईएडीएमके गठजोड़” के खिलाफ एक पूर्वव्यापी हमले के रूप में बताकर, विद्रोही खुद को पार्टी की संस्थापक विरोधी डीएमके विचारधारा के सच्चे संरक्षक के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह ‘द्रमुक विरोधी’ विरोधाभास कैसे काम करता है? विरोधाभास इस तथ्य में निहित है कि DMK से लड़ने के लिए, इन AIADMK नेताओं का मानना है कि उन्हें एक नए प्रतिद्वंद्वी-TVK का समर्थन करना होगा। दशकों से, अन्नाद्रमुक का अस्तित्व द्रमुक के प्राथमिक विकल्प के रूप में उसकी भूमिका पर आधारित रहा है। विद्रोहियों का तर्क है कि ईपीएस के तहत, पार्टी चुनावी रूप से स्थिर हो गई है। विजय का समर्थन करके, वे एक नए “धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय” मॉडल पर दांव लगा रहे हैं, जिसके बारे में उनका मानना है कि लंबे समय में द्रमुक को सत्ता से बाहर रखने का बेहतर मौका है। उनके लिए, विजय जैसे नवागंतुक का समर्थन करना द्रमुक को कमजोर अन्नाद्रमुक द्वारा छोड़े गए राजनीतिक शून्य को पुनः प्राप्त करने से रोकने के लिए एक “परिकलित बलिदान” है। कोंगु-उत्तरी गठजोड़ का क्या महत्व है? विद्रोह का भूगोल विशेष रूप से आधिकारिक अन्नाद्रमुक खेमे के लिए हानिकारक है। एसपी वेलुमणि कोंगु (पश्चिमी) बेल्ट के निर्विवाद ताकतवर नेता हैं, जबकि सीवी शनमुगम उत्तरी जिलों में महत्वपूर्ण प्रभाव रखते हैं। ये दोनों क्षेत्र पारंपरिक रूप से अन्नाद्रमुक की चुनावी ताकत का आधार रहे हैं। संभावित रूप से इन क्षेत्रों से 30 विधायकों को टीवीके खेमे में लाकर, विद्रोहियों ने पार्टी के क्षेत्रीय गढ़ों को प्रभावी ढंग से नष्ट कर दिया है। विद्रोहियों का यह “सुपर-बहुमत” – यदि कुछ और शामिल होते हैं तो दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए 32 की दो-तिहाई आवश्यकता से कहीं अधिक – यह दर्शाता है कि 2017 में जयललिता के विभाजन के बाद से अन्नाद्रमुक अपने सबसे महत्वपूर्ण अस्तित्व संबंधी खतरे का सामना कर रही है। 13 मई को फ्लोर टेस्ट के दौरान क्या होगा? 30 एआईएडीएमके विद्रोहियों के समर्थन और कांग्रेस, वाम और वीसीके के मौजूदा समर्थन के साथ, मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार अब 150 वोटों से अधिक “सुपर-बहुमत” के साथ फ्लोर टेस्ट पास कर सकती है। यह उनके शुरुआती बहुमत 121 से एक बड़ी छलांग होगी। एकमात्र शेष बाधा कानूनी है: मद्रास उच्च न्यायालय ने तिरुपत्तूर में एक वोट से जीत के विवाद के कारण टीवीके के एक विधायक को मतदान करने से रोक दिया है। हालाँकि, अन्नाद्रमुक के विद्रोही गुट के आने से विश्वास मत के नतीजे पर अब कोई संदेह नहीं रहेगा। बुधवार का सत्र एक नए राजनीतिक युग के औपचारिक राज्याभिषेक के रूप में काम करेगा, जहां पारंपरिक द्रविड़ एकाधिकार को अपने पूर्ववर्तियों के खंडहरों पर बने टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया मेरे दुश्मन का दुश्मन: ‘पार्टी को स्टालिन से बचाने’ के लिए अन्नाद्रमुक के विद्रोही विजय का समर्थन क्यों कर रहे हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)टीवीके(टी)विजय(टी)डीएमके(टी)एआईएडीएमके(टी)तमिलनाडु(टी)एमके स्टालिन
बैठकर या खड़े होकर पानी? जानिए शरीर पर इसके असर और कौन सा तरीका है सेहत के लिए सही

Water Drinking Tips: भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर ऐसी छोटी-छोटी आदतें अपना लेते हैं, जिन पर ध्यान ही नहीं जाता. ऑफिस में जल्दी-जल्दी काम करते हुए, सफर के दौरान या घर में ही जल्दबाजी में खड़े होकर पानी पी लेना अब आम बात बन चुकी है. उस वक्त हमें लगता है कि प्यास बुझ गई, बस काम खत्म. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पानी पीने का तरीका भी आपकी सेहत पर असर डाल सकता है? पुराने समय से ही घर के बड़े-बुजुर्ग इस बात पर जोर देते आए हैं कि पानी हमेशा बैठकर और आराम से पीना चाहिए. आज के समय में भले ही ये बातें पुरानी लगें, लेकिन कई लोग अब भी मानते हैं कि इसका सीधा संबंध हमारी हेल्थ से है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि खड़े होकर पानी पीने की आदत आखिर कितना असर डालती है और क्या हमें इसे बदलने की जरूरत है. डाइजेशन पर पड़ सकता है असरखड़े होकर पानी पीने की आदत का सबसे पहला असर आपके पाचन तंत्र पर पड़ता है. माना जाता है कि जब आप खड़े होकर पानी पीते हैं, तो वह तेजी से पेट तक पहुंच जाता है. इस वजह से शरीर उसे सही तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता. क्या हो सकती हैं दिक्कतेंऐसी आदत लंबे समय तक बनी रहे तो गैस, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. कई लोगों ने यह भी महसूस किया है कि जल्दी-जल्दी पानी पीने से खाना ठीक से पच नहीं पाता. वहीं, जब आप बैठकर धीरे-धीरे पानी पीते हैं, तो शरीर उसे बेहतर तरीके से एब्जॉर्ब करता है. जोड़ों में दर्द की शिकायतपुराने अनुभवों के आधार पर यह भी कहा जाता है कि खड़े होकर पानी पीने से जोड़ों पर असर पड़ सकता है. बढ़ती उम्र में बढ़ सकती है परेशानीअगर यह आदत लंबे समय तक जारी रहती है, तो घुटनों में दर्द, जोड़ों में अकड़न और कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. हालांकि, इसके पीछे कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन सावधानी रखना हमेशा बेहतर रहता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. किडनी पर असर की चर्चाहमारी किडनी शरीर से गंदगी बाहर निकालने का अहम काम करती है. क्यों कहा जाता है नुकसानदायकमान्यता है कि खड़े होकर पानी पीने से पानी तेजी से शरीर में पहुंचता है, जिससे किडनी को उसे फिल्टर करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता. इसका असर शरीर की सफाई प्रक्रिया पर पड़ सकता है. हालांकि, इस दावे को लेकर मेडिकल रिसर्च अभी साफ नहीं है. शरीर को नहीं मिलती पूरी हाइड्रेशनकई लोगों का कहना है कि खड़े होकर पानी पीने से शरीर को पूरी तरह हाइड्रेट होने का फायदा नहीं मिलता. बार-बार प्यास लगने की वजहपानी तेजी से नीचे की ओर बह जाता है, जिससे शरीर के सभी हिस्सों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाता. यही वजह है कि कुछ लोगों को बार-बार प्यास लगती रहती है, भले ही उन्होंने पर्याप्त पानी पिया हो. हार्ट और लंग्स पर भी असर?कुछ मान्यताओं के अनुसार, जब पानी तेजी से शरीर में जाता है, तो इससे शरीर के अंदर लिक्विड बैलेंस पर हल्का असर पड़ सकता है. हर किसी में नहीं दिखता असरकुछ लोगों को सीने में भारीपन या हल्की असहजता महसूस हो सकती है, लेकिन यह समस्या हर व्यक्ति में नहीं होती. क्या है सही तरीका?अगर आप अपनी सेहत को लेकर सजग हैं, तो पानी पीने का तरीका बदलना मुश्किल नहीं है. अपनाएं ये आसान आदतेंहमेशा बैठकर और आराम से पानी पीने की कोशिश करें. छोटे-छोटे घूंट में पानी पीना ज्यादा बेहतर माना जाता है. बहुत ठंडा पानी पीने से बचें, क्योंकि इससे पाचन पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीने की बजाय थोड़ा समय देना बेहतर रहता है.
एआईएडीएमके में फिर दरार! क्यों 30 बागी विधायक विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के पीछे रैली कर रहे हैं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 17:54 IST अन्नाद्रमुक का नवीनतम संकट अपमानजनक चुनावी नतीजे के बाद आया है जिसमें पार्टी 167 सीटों पर चुनाव लड़कर केवल 47 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। शनमुगम, जिन्होंने सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दिया है, को अब “असली” अन्नाद्रमुक की स्थिति का दावा करने के लिए लगभग 32 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है – अन्नाद्रमुक की 47 विधायकों की कुल ताकत का दो-तिहाई। (पीटीआई फाइल फोटो) विपक्षी अन्नाद्रमुक एक और बड़ी आंतरिक टूट का सामना कर रही है, जिसमें लगभग 30 विद्रोही विधायक अलग हो गए हैं और विजय के नेतृत्व वाली तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) सरकार को अपना समर्थन दे रहे हैं। यह कदम 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन और महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) द्वारा लिए गए नेतृत्व निर्णयों पर बढ़ते गुस्से के मद्देनजर उठाया गया है। मतदान के बाद के झटके ने खुले विद्रोह को जन्म दिया अन्नाद्रमुक का ताजा संकट एक अपमानजनक चुनावी नतीजे के बाद आया है, जिसमें राज्य भर में बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान के बावजूद, पार्टी 167 सीटों में से केवल 47 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। इस हार ने वरिष्ठ नेताओं एसपी वेलुमणि और सी.वी. के नेतृत्व वाले एक गुट के साथ आंतरिक विभाजन को और बढ़ा दिया है। शनमुगम अब खुलेआम ईपीएस के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। विद्रोही समूह का दावा है कि पार्टी के 47 विधायकों में से 30 उसे समर्थन दे रहे हैं और उसने अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली नवगठित टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। यह भी पढ़ें: अन्नाद्रमुक में ताजा विद्रोह: 1972 में स्थापना के बाद से पार्टी के तीसरे बड़े विभाजन के पीछे क्या है? उनके अनुसार, यह निर्णय 2019, 2021, 2024 और 2026 में ईपीएस के नेतृत्व में लगातार चार चुनावी हार से प्रेरित है। उनका यह भी आरोप है कि ईपीएस ने सरकार बनाने के लिए प्रतिद्वंद्वी डीएमके के साथ बैकचैनल चर्चा का प्रयास किया, उनका कहना है कि यह कदम एआईएडीएमके की लंबे समय से चली आ रही डीएमके विरोधी विचारधारा का उल्लंघन है। विद्रोही विजय की टीवीके का समर्थन क्यों कर रहे हैं? पत्रकारों से बात करते हुए, विद्रोही नेताओं ने तर्क दिया कि बार-बार हार और मतदाताओं के विश्वास में गिरावट के बाद पार्टी को “नई राजनीतिक दिशा” की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विजय के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करना “अम्मा (जयललिता) की विरासत को पुनर्जीवित करने” और प्रासंगिकता बहाल करने की दिशा में एक कदम था। उनसे औपचारिक रूप से टीवीके नेतृत्व से मिलने और महत्वपूर्ण शक्ति परीक्षण से पहले समर्थन पत्र सौंपने की भी उम्मीद है। विद्रोहियों का कहना है कि मौजूदा नेतृत्व संरचना कैडर की भावना और चुनावी वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने में विफल रही है। हालाँकि, ईपीएस ने महासचिव का पद बरकरार रखा है और पार्टी के एक छोटे लेकिन वफादार वर्ग से समर्थन बरकरार रखा है। अन्नाद्रमुक नेतृत्व ने विद्रोह को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है और असंतुष्टों पर अपने निर्वाचन क्षेत्रों में असफल होने के बाद झूठे दावे फैलाने का आरोप लगाया है। पिछले विभाजन हॉन्ट पार्टी में लौट आए मौजूदा उथल-पुथल ने अन्नाद्रमुक के गुटीय विभाजन के अशांत इतिहास की यादें ताजा कर दी हैं। पार्टी पहली बार 1987 में संस्थापक एमजी रामचंद्रन की मृत्यु के बाद टूटी, 1989 में पुनर्मिलन से पहले वीएन जानकी और जे. जयललिता के बीच विभाजित हो गई। 2016 में जयललिता की मृत्यु के बाद दूसरा बड़ा विभाजन सामने आया, जिससे ओ. पन्नीरसेल्वम, वीके शशिकला और ईपीएस के बीच सत्ता संघर्ष शुरू हो गया। हालाँकि ईपीएस ने अंततः 2017 तक नियंत्रण मजबूत कर लिया और बाद में 2022 में ओपीएस को निष्कासित कर दिया, आंतरिक घर्षण बना हुआ है। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तमिलनाडु, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया एआईएडीएमके में फिर दरार! क्यों 30 बागी विधायक विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के पीछे रैली कर रहे हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें








