रेडियो खराबी से ट्रम्प का हेलिकॉप्टर विमान के करीब पहुंचा:एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को एक हफ्ते पहले से दिक्कत की जानकारी थी; फिर भी चूक हुई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हेलिकॉप्टर मरीन वन और एक यात्री विमान के करीब पहुंचने की वजह सामने आई है। जांच के मुताबिक, रेडियो संपर्क में आई खराबी के कारण एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को हेलिकॉप्टर की उड़ान से पहले मिलने वाली जरूरी चेतावनी नहीं मिल पाई। यह घटना 4 अगस्त को हुई थी। ट्रम्प को लेकर मरीन वन व्हाइट हाउस के पास से उड़ान भर रहा था, तभी रीगन नेशनल एयरपोर्ट से एक यात्री विमान को भी टेकऑफ की मंजूरी मिल गई। दोनों विमान कुछ देर के लिए काफी करीब आ गए, लेकिन पायलटों की सतर्कता से टकराव टल गया। जांच में यह भी सामने आया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को इस रेडियो खराबी की जानकारी एक हफ्ते पहले ही हो गई थी। इसके बावजूद घटना वाले दिन राष्ट्रपति की सुरक्षा में चूक हुई। व्हाइट हाउस में निर्माण के कारण रेडियो में खराबी आई जांच में पता चला कि व्हाइट हाउस में चल रहे निर्माण के कारण मरीन वन के उड़ान भरने की जगह बदल दी गई थी। हेलिकॉप्टर अब द एलिप्स से उड़ान भर रहा था। नई जगह और रीगन एयरपोर्ट के पास लगे रेडियो रिसीवर के बीच सीधा संपर्क ठीक नहीं था। इसी वजह से हेलिकॉप्टर की रेडियो कॉल कंट्रोल टावर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही थी। एक हफ्ते पहले मीटिंग में दिक्कत पर चर्चा हुई थी घटना से करीब एक हफ्ते पहले 30 जुलाई को मरीन वन के पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स की बैठक हुई थी। इसमें तीन मिनट पहले दी जाने वाली उड़ान चेतावनी के कंट्रोल टावर तक नहीं पहुंचने की बात सामने आई थी। तब तय किया गया था कि रेडियो संपर्क न होने पर किसी दूसरे विमान या व्यक्ति के जरिए यह सूचना दी जाएगी। 4 अगस्त को पायलटों ने ज्वाइंट बेस एनाकोस्टिया-बोलिंग के जरिए भी कंट्रोल टावर तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि, यह तरीका भी काम नहीं आया। कंट्रोलर्स को मरीन वन के उड़ान भरने की जानकारी नहीं मिली और इसी दौरान यात्री विमान को टेकऑफ की मंजूरी दे दी गई। ट्रम्प का हेलिकॉप्टर और विमान सिर्फ 1.3 किमी दूर थे NTSB के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, दोनों विमानों के बीच सबसे कम दूरी करीब 1.3 किलोमीटर थी। उनकी ऊंचाई में भी महज 250 फीट का अंतर रह गया था। यात्री विमान के टक्कर से बचाने वाले सिस्टम ने चेतावनी दी थी। मरीन वन के पायलटों ने भी विमान को देख लिया और कुछ देर रुक गए, जिससे दोनों अलग हो गए। FAA के नियम के मुताबिक, ऐसे हालात में दो विमानों के बीच कम से कम 2.4 किलोमीटर की दूरी या ऊंचाई में 500 फीट का अंतर होना जरूरी है। अब रेडियो सिस्टम ठीक किया गया घटना के बाद FAA की तकनीकी टीम ने रेडियो सिस्टम की जांच की। रिसीवर को रिहायशी इलाके से हटाकर रीगन एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर के ऊपर लगा दिया गया। इसके बाद किए गए परीक्षणों में रेडियो संपर्क ठीक पाया गया। यह घटना पिछले साल के रीगन एयरपोर्ट हादसे के बाद और गंभीर मानी जा रही है। 29 जनवरी 2025 को एक यात्री विमान और अमेरिकी सेना के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की टक्कर में 67 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद एयरपोर्ट के आसपास हेलिकॉप्टर और विमानों की आवाजाही को लेकर सुरक्षा नियम कड़े किए गए थे। ————————————— यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा:हमला होता तो एयरफोर्स वन पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे विमान तक पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मान लिया है कि उन्होंने पिछले महीने तुर्किये में ईरान के डर से प्लेन बदला था। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से NATO समिट में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। पूरी खबर पढ़ें…
नेपाल में फिर बाढ़ की संभावना, बिहार में आएगी तबाही?:गंगा और गंडक उफन रहीं, अबकी ग्लेशियर टूटा तो नियंत्रण में नहीं रहेंगे हालात

‘हालात काबू में हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।’ नेपाल में तबाही के बाद CM सम्राट चौधरी के इस बयान ने बिहार के 21 जिलों के लोगों को फौरी तौर पर राहत तो दी है। लेकिन साथ ही आगे की चुनौती के लिए भी आगाह कर दिया है। नेपाल में क्या फिर तबाही आने वाली है, अगर आई तो बिहार का क्या होगा, गंगा-गंडक-कोसी में क्या चल रहा, समझेंगे; बूझे की नाही में…। क्या नेपाल में फिर से बाढ़ आने की संभावना है? वैज्ञानिकों ने आगे के खतरे से इनकार नहीं किया है। एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि घाटी की अस्थिर ढलानें और आंशिक रूप से ढहा हुआ ग्लेशियर आने वाले दिनों में मलबे के नए बहाव से दूसरी बाढ़ की स्थिति पैदा कर सकता है। नेपाल के गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने कहा कि ल्हेन्डे नदी अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुई है। ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने कहा कि बादलों के ढके होने के कारण क्षेत्र की उपग्रह से निगरानी करने में भी दिक्कत आई है। वहीं, काठमांडू यूनिवर्सिटी के जलवायु शोधकर्ता और प्रोफेसर रिजन भक्त कायस्थ ने कहा, ‘शुरुआत में चिंता थी कि ऊपर की ओर एक और बड़ी झील बन सकती है, लेकिन अभी तक ऐसी झील के अस्तित्व की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।’ कायस्थ ने कहा, ‘जोखिम अभी भी बना हुआ है। बढ़ता तापमान ग्लेशियरों के पिघलने, बर्फ और चट्टानों के टूटने तथा हिमालय में हिमस्खलन की संभावना को बढ़ाता है। लेकिन हम सटीक रूप से यह नहीं कह सकते कि अगली घटना कहां होगी।’ नेपाल में ग्लेशियर टूटेगा तो बिहार को खतरा क्यों बिहार से करीब 400 फीट की ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित नेपाल की सभी नदियों का पानी घूम फिर कर बिहार ही आता है। इससे नदियों के 3 रूट से ऐसे समझिए… रूट-1ः नेपाल की नारायणी से चंपारण, सारण तबाह रूट-2ः नेपाल की सप्तकोशी से सहरसा-सुपौल का एरिया प्रभावित रूट-3ः UP के रास्ते भी बिहार में आता है नेपाल का पानी मतलब यह कि नेपाल के उत्तर में हादसा हो या पश्चिम में सारा पानी बिहार ही पहुंचेगा। ऐसे में नेपाल की नदियों की हलचल का बिहार पर ज्यादा असर पड़ता है। अब नीचे के मैप से समझिए…नदियों का रूट …दूसरा ग्लेशियर टूटा तो क्या बिहार में बिगड़ेंगे हालात? बिल्कुल। अभी ताजा हालात है कि नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई बाढ़ के बाद बिहार के गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। वाल्मीकिनगर बैराज से हर घंटे औसतन डेढ़ लाख से ज्यादा क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, गंडक में 3 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं, फ्लैश फ्लड आने की भी आशंका है। अब 2 कारणों से समझिए, कैसे बिगड़ सकते हैं हालात… 1. गंगा-गंडक उफान पर, पानी का बढ़ रहा दबाव बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, 27 अगस्त की शाम 4 बजे तक गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक, पटना में गंगा, खगड़िया में बुढ़ी गंडक, सीवान के दरौली में घाघरा, कटिहार के कुरसेला में कोसी नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। नेपाल के पानी के कारण गंडक और गंगा में पानी का फ्लो बढ़ रहा है। खगड़िया में गंगा और बूढ़ी गंडक में पानी के कारण 20 पंचायतों में 50 हजार से ज्यादा घर पानी में डूब गए हैं। अगर नेपाल में दूसरा ग्लेशियर टूटा तो बिहार में हालात खराब हो जाएंगे। क्योंकि अभी ही नदियों में पानी काफी बढ़ गया है। आगे पानी आने पर तबाही ही मचेगी। CM सम्राट चौधरी ने 27 अगस्त को निरीक्षण करने के बाद कहा, ‘खतरा अभी टला नहीं है। भगवान की कृपा रही तो सब ठीक होगा।’ 2. अगले 5 दिन तक बिहार और नेपाल में बारिश का अलर्ट नेपाल और बिहार में अगले 5 दिन तक यानी 2 सितंबर तक बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज यानी 28 अगस्त को बिहार में तेज बारिश का अलर्ट है। वहीं, नेपाल में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हालांकि, 29 अगस्त से 2 सितंबर तक नेपाल और बिहार में रुक-रुक कर धीमी बारिश की चेतावनी दी गई है। अगर मौसम विभाग का अनुमान सही साबित हुआ तो यह बिहार के गंडक, कोसी, गंगा के किनारे रहने वाले लोगों को खासा दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। …लेकिन राहत की 2 बातें पहली- बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, नेपाल की सभी 22 नदियों का जलस्तर 27 अगस्त की शाम 5 बजे तक खतरे के निशान से नीचे हैं। खास बात है कि त्रिशूली यानी नारायणी और भोटेकोशी यानी सप्तकोशी नदी खतरे के निशान से क्रमशः 4 और 3 फीट नीचे बह रही है। मतलब अभी वहां नदियों में ज्यादा पानी नहीं है। अगर थोड़ी बारिश हुई भी तो नदियां उफान नहीं मारेंगी, बशर्ते ग्लेशियर या बादल न फट जाए। दूसरी- जल संसाधन विभाग के मुताबिक, गंडक बैराज का अपस्ट्रीम 353.770 फीट और डाउनस्ट्रीम 350.930 फीट है। जो तय मानक 362 फीट से करीब 8 फीट कम है। इसका मतलब हुआ कि अभी बैराज पर 8 फीट ज्यादा तक पानी स्टोर किया जा सकता है। अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम के पानी के स्तर में मामूली अंतर (2.84 फीट) बता रहा है कि बांध के गेट खुले हुए हैं और बांध पर ज्यादा दबाव नहीं है। मतलब पानी की गति सामान्य व नियंत्रित है।
ट्रम्प ने लेक ओंटारियो का नाम बदलकर लेक अमेरिका किया:यह अमेरिका और कनाडा का बॉर्डर; दोनों देशों की पांच बड़ी झीलों में शामिल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने के आदेश पर हस्ताक्षर किए। यह बदलाव अमेरिका के सरकारी नक्शों और भौगोलिक नामों में लागू होगा। हालांकि, ट्रम्प कनाडा को इस नए नाम का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। ट्रम्प ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। हाल ही में अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% शुल्क लगाने का ऐलान किया था। ट्रम्प ने कनाडा को व्यापार के मामले में ‘सबसे मुश्किल’ देश बताते हुए कहा कि उसके रवैये को स्वीकार नहीं किया जा सकता। नाम बदलने का फैसला ट्रम्प के लिए नया नहीं है। पिछले साल उन्होंने मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘अमेरिका की खाड़ी’ करने का आदेश दिया था। अब लेक ओंटारियो का नाम बदलने का फैसला भी कनाडा के साथ बढ़ते तनाव के बीच आया है। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा के बीच स्थित पांच बड़ी झीलों में से एक है। इसका एक हिस्सा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से और दूसरा हिस्सा कनाडा के ओंटारियो प्रांत से जुड़ा है। झील के एक तरफ न्यूयॉर्क है, जबकि दूसरी तरफ कनाडा का सबसे बड़ा शहर टोरंटो स्थित है। दोनों देशों की सीमा भी इस झील के बीच से गुजरती है। लेक ओंटारियो का नाम यूरोपीय लोगों के अमेरिका पहुंचने से भी पहले से चला आ रहा है। यह नाम ह्यूरॉन समुदाय की भाषा के एक शब्द से निकला है, जिसका अर्थ ‘चमकते पानी की झील’ बताया जाता है। बाद में कनाडा के ओंटारियो प्रांत का नाम भी इसी झील के नाम पर रखा गया। हालांकि, नाम बदलने को लेकर एक अहम बात है। दुनिया की अंतरराष्ट्रीय झीलों और जलक्षेत्रों के नाम तय करने वाली कोई एक वैश्विक संस्था नहीं है। अमेरिका अपने सरकारी दस्तावेजों और नक्शों में इसे ‘लेक अमेरिका’ कह सकता है, लेकिन कनाडा अपनी तरफ से पुराने नाम ‘लेक ओंटारियो’ का इस्तेमाल जारी रख सकता है।
ट्रम्प ने लेक ओंटारियो का नाम बदलकर लेक अमेरिका किया:इसके बीच अमेरिका-कनाडा का बॉर्डर; PM कार्नी बोले- जो नाम पहले था वही रहेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने के आदेश पर साइन किए। आदेश के मुताबिक, 30 दिनों में यह प्रक्रिया पूरी होगी और इसके बाद अमेरिका के सरकारी नक्शों व रिकॉर्ड में नया नाम इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रम्प ने इस फैसले की तुलना मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘अमेरिका की खाड़ी’ करने से की। उन्होंने मजाक में कहा कि अब अमेरिका के पास एक खाड़ी और एक झील है, शायद आगे अटलांटिक या प्रशांत महासागर का नाम बदलने के बारे में भी सोचना पड़े। वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने लेक ओंटारियो का नाम बदलने के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- हम जानते हैं अमेरिका नाम बदल रहा है, लेकिन कनाडाई भी जानते हैं कि हकीकत में इसका नाम लेक ओंटारियो ही है। पहले भी, अब भी और हमेशा। कनाडा इस झील को लेक ओंटारियो ही बुलाएगा। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा के बीच स्थित पांच बड़ी झीलों में से एक है। इसके एक तरफ न्यूयॉर्क और दूसरी तरफ कनाडा का ओंटारियो प्रांत है। दोनों देशों की सीमा भी इसी झील से होकर गुजरती है। ट्रम्प ने कहा था- नाम बदलने पर विचार कर रहा ट्रम्प ने 25 अगस्त को पहली बार लेक ओंटारियो का नाम बदलने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिका का कनाडा के साथ ज्यादा कारोबार होने की उम्मीद नहीं है, इसलिए झील का नाम बदलने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके दो दिन बाद उन्होंने इस फैसले को आधिकारिक बनाने के लिए आदेश पर साइन कर दिए। ट्रम्प ने अपने आदेश में कहा कि लेक ओंटारियो अमेरिका की अर्थव्यवस्था और विरासत का अहम हिस्सा है। यह व्यापार, जहाजरानी, रक्षा, कृषि और ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि ग्रेट लेक्स के संरक्षण पर अमेरिका ने पिछले 10 साल में करीब 4 अरब डॉलर यानी 38 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार को लेकर तनाव नाम बदलने का फैसला अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच आया है। हाल ही में अमेरिका ने कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर यानी लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए के सामान पर 50% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। इसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी सामान पर उतना ही टैरिफ लगाने का ऐलान किया। ट्रम्प ने कहा कि व्यापार के मामले में कनाडा से निपटना सबसे मुश्किल है। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा अमेरिका के साथ ठीक व्यवहार नहीं करता और वह किसी भी हाल में यह स्वीकार नहीं कर सकते। लेक ओंटारियो के नाम पर पड़ा ओंटारियो प्रांत का नाम लेक ओंटारियो का नाम यूरोपीय लोगों के अमेरिका पहुंचने से भी पहले से चला आ रहा है। यह नाम ह्यूरॉन समुदाय की भाषा के एक शब्द से निकला है, जिसका अर्थ ‘चमकते पानी की झील’ बताया जाता है। बाद में कनाडा के ओंटारियो प्रांत का नाम भी इसी झील के नाम पर रखा गया। हालांकि, नाम बदलने को लेकर एक अहम बात है। दुनिया की अंतरराष्ट्रीय झीलों और जलक्षेत्रों के नाम तय करने वाली कोई एक वैश्विक संस्था नहीं है। अमेरिका अपने सरकारी दस्तावेजों और नक्शों में इसे ‘लेक अमेरिका’ कह सकता है, लेकिन कनाडा अपनी तरफ से पुराने नाम ‘लेक ओंटारियो’ का इस्तेमाल जारी रख सकता है। क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? अमेरिकी सरकार अपने आधिकारिक दस्तावेजों, सरकारी नक्शों और रिकॉर्ड में किसी जगह के लिए नया नाम इस्तेमाल करने का फैसला कर सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे देश भी उस नाम को स्वीकार करने के लिए बाध्य होंगे। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा दोनों से जुड़ी है। इसलिए अगर अमेरिकी सरकार अपने दस्तावेजों में इसे ‘लेक अमेरिका’ कहना शुरू भी कर दे, तो कनाडा अपने सरकारी रिकॉर्ड में ‘लेक ओंटारियो’ नाम जारी रख सकता है। दूसरे देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी अमेरिकी नाम को अपने आप अपनाने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यानी नाम बदलने से झील का मालिकाना हक नहीं बदल जाएगा। ‘लेक अमेरिका’ नाम इस्तेमाल करने से झील का कनाडाई हिस्सा अमेरिकी क्षेत्र नहीं बन जाएगा। ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदल चुके हैं ट्रम्प ट्रम्प के लिए किसी जगह का नाम बदलना नया नहीं है। जनवरी 2025 में उन्होंने ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ को अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल के लिए ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। इसके बाद अमेरिकी एजेंसियों ने अपने रिकॉर्ड और नक्शों में नया नाम इस्तेमाल करना शुरू किया, लेकिन मेक्सिको ने इसे स्वीकार नहीं किया। तब मेक्सिको ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का हवाला देते हुए कहा था कि अमेरिका अपने अधिकार क्षेत्र के आधार पर पूरे गल्फ का नाम अकेले नहीं बदल सकता। हालांकि, लेक ओंटारियो और गल्फ ऑफ मेक्सिको की कानूनी स्थिति अलग है। गल्फ समुद्री क्षेत्र है, जबकि लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा के बीच साझा झील है। अमेरिका-कनाडा के बीच विवाद की 5 बड़ी वजहें 1. टैरिफ की नई लड़ाई सबसे बड़ा विवाद टैरिफ को लेकर है। अमेरिका ने कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% तक अतिरिक्त शुल्क लगाया है। इसमें शराब, डेयरी, फर्नीचर, हॉकी उपकरण और कई दूसरे सामान शामिल हैं। बातचीत टूटने के बाद कनाडा ने भी डॉलर-फॉर-डॉलर जवाबी टैरिफ लगाने का फैसला किया है। 2. कनाडा को 51वां राज्य कहना ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका व्यापार के मामले में कनाडा को अरबों डॉलर का फायदा पहुंचाता है। यदि कनाडा अमेरिका का हिस्सा बन जाता है, तो यह व्यापारिक असमानता और टैरिफ से जुड़े विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगे। 3. ट्रूडो को कनाडा का गवर्नर कहना ट्रम्प ने कई बार कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को तंजिया लहजे में ‘गवर्नर’ कहकर संबोधित किया था। कनाडाई नेताओं और जनता ने इसे अपनी संप्रभुता का अपमान माना। 4. सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और फेंटानिल तस्करी अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ती सीमा सुरक्षा चिंताएं भी बड़े विवाद का कारण बनी हैं। ट्रम्प प्रशासन का आरोप रहा है कि कनाडा की उत्तरी सीमा से अवैध प्रवासियों की घुसपैठ और खतरनाक नशीली दवाओं (विशेषकर फेंटानिल) की तस्करी अमेरिका में बढ़ रही है।
कंगना ने फिर साधा रामदेव बाबा पर निशाना:कहा- मेरी जवानी की बात करते हैं, क्या मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटके थे, जानिए क्या है विवाद

कंगना रनोट ने कुछ समय पहले Gen-Z को गटरछाप कहा था। इस पर रामदेव बाबा ने कहा “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता।” कंगना ने इस पर कहा कि बाबा रामदेव मेरी जवानी और बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम न करें। विवाद लगभग खत्म हो चुका था, लेकिन कंगना ने फिर एक बार इस विवाद पर बयान दिया है। कंगना रनोट ने डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा है, ‘बाबा रामदेव मुझसे पहले ही नाराज चल रहे हैं। अभी उनसे पूछा गया कि कंगना ने प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा है, तो उन्होंने कहा, उसका बचपन देखा है क्या था, उसकी जवानी देखी है क्या थी। क्या बाबा रामदेव मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका हुआ था, उसने देखा है क्या था। क्या देखा। मुझे समझ नहीं आ रहा, ऐसा क्या देखा। बताना चाहिए था न कि क्या देखा।’ कंगना रनोट ने इन विवादों पर भी दिया रिएक्शन- कृति सेनन एड विवाद- कंगना रनोट लगातार कृति सेनन के उस रक्षाबंधन एड की आलोचना कर रही हैं, जिसमें उन्होंने रिवीलिंग कपड़े पहने थे। कंगना ने इस विवाद पर कहा है कि क्या इस तरह के कपड़े किसी मुस्लिम फेस्टिवल में पहने दिखाए जा सकते हैं। एक्ट्रेस ने कहा कि एक फेस्टिवल कल्चर रिप्रेसेंट करता है, जिसमें इस तरह के ब्रालेट नहीं पहने जा सकते। भड़काऊ बयान देने पर रिएक्शन- कंगना ने लगातार मुद्दों पर विवादित बयान देने पर भी रिएक्शन दिया है। कंगना ने कहा कि अगर कॉकरोच है, तो उसे चप्पल से ही मारा जाएगा। उसे हाथ से नहीं मारा जाता या उसे किस नहीं किया जा सकता। वहीं अगर तितली हो, तो लोग उसे पकड़ते हैं, तस्वीरें क्लिक करते हैं। उनका कहना है कि जिस तरह के लोग बयान देते हैं, उस पर वो वैसे ही जवाब देती हैं। कंगना बोलीं- मैं बीजेपी की पपेट नहीं- कंगना ने बयानों को पार्टी से जोड़े जाने पर कहा, जब बहुत ज्यादा शोर होता है, तो कहीं न कहीं आपको भी चिल्लाना पड़ता है। मैं कई बार तगड़े बयान दे देती हूं, पर मैं जानबूझकर ऐसा नहीं करना चाहती। तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मैं कोई पपेट थोड़ी ना हूं। बीजेपी आज मेरे साथ है, कल हो या ना हो। दो साल से मैं पार्लियामेंट की मेंबर हूं। 20 साल से मैं कलाकार हूं। मेरा एक वजूद है। मैं अगर खड़ी हो जाऊं तो 20 प्रेस वाले आएंगे और मेरी बात सुनेंगे।’ क्या था कंगना रनोट और रामदेव बाबा का पूरा विवाद? कंगना रनोट ने जेन-जी प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा था। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर कहा था, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के युवा को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” इस पर कंगना ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।”
टेक दिग्गज अब ‘किसान’ बने; अमेरिका में कृषिभूमि की होड़:गेट्स-बेजोस 7 लाख एकड़ जमीन पर आलू-गाजर उगा रहे, जुकरबर्ग पाल रहे मवेशी

दुनिया के सबसे अमीर और टेक दिग्गजों में अब पशु-पालन और खेती का शौक बढ़ रहा है। अमेरिका में खेती की जमीन अब सिर्फ किसान की जरूरत नहीं, अरबपतियों के लिए बड़ा निवेश और शौक बन चुकी है। कोई यहां मवेशी पाल रहा है, तो कोई जमीन खरीदकर भविष्य ज्यादा सुरक्षित कर रहा है। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग हवाई के काउआई द्वीप पर करीब 2,871 करोड़ रु. के 4,000 एकड़ कोउलाउ रेंच पर वाग्यू और एंगस नस्ल के मवेशी पाल रहे हैं। वहीं, रेडिट के सह-संस्थापक एलेक्सिस ओहानियन फ्लोरिडा में अपने फार्म पर केले के बाग और मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। हालांकि, इन दिग्गजों के खेती-बारी का नया शौक अमेरिका में कृषि जमीनों को एक बेहद महंगे ‘एसेट क्लास’ में बदल दिया है। ‘ द लैंड रिपोर्ट’ के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स के पास 2.75 लाख एकड़ कृषि भूमि है, जिससे वे अमेरिका के 44वें सबसे बड़े भूस्वामी बन गए हैं। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस 4.62 लाख एकड़ और वॉलमार्ट घराने से जुड़े स्टेन क्रोनके 27 लाख एकड़ जमीन के मालिक हैं। क्रोनके ने 2025 में न्यू मैक्सिको में 9.38 लाख एकड़ जमीन खरीदी, जिसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी रैंच बिक्री बताया गया। अलग-अलग राज्यों में इन जमीनों पर आलू, गाजर, प्याज, सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी फसलें उगाई जाती हैं। कुछ किसानों को लीज पर भी दी जाती है। पीपुल्स कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में कृषि भूमि 411 लाख करोड़ की परिसंपत्ति बन चुकी है। अमेरिकी कृषि विभाग के मुताबिक, बीते वर्ष खेतों के मूल्य में 4.3% की बढ़ोतरी हुई। नेशनल यंग फार्मर्स कोएलिशन की पॉलिसी निदेशक एरिन फॉस्टर के अनुसार, जमीन की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि पहली बार खेती में उतरने वाले युवा या छोटे किसान प्रतिस्पर्धा से पूरी तरह बाहर हो गए हैं। जमीन में निवेश क्यों? महंगाई के साथ बढ़ती है कीमत महंगाई से सुरक्षित बचाव – सीमित प्राकृतिक संसाधन होने के कारण जमीन की कीमतें हमेशा महंगाई के साथ बढ़ती हैं। एआई और डेटा सेंटर्स की मांग – टेक कंपनियों (एआई हाइपरस्केलर्स) को विशाल डेटा सेंटर बनाने के लिए बड़े भूभाग की जरूरत होती है। लाइफस्टाइल और नॉन-फाइनेंशियल फायदे – कोरोना महामारी के बाद बड़े परिसरों में शिकार, मछली पकड़ने और खुद का ऑर्गेनिक अन्न उगाने का रुझान बढ़ा है।
फिल्ममेकर कुकू कोहली के निधन पर सलमान खान दुखी:पत्नी अरुणा ईरानी के लिए लिखा, मेरा दिल आपके साथ है; कार्डियक अरेस्ट से हुआ था निधन

मशहूर फिल्ममेकर कुकू कोहली के निधन पर बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने गहरा दुख जताया है। सलमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर कर कुकू कोहली की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही उन्होंने कुकू की पत्नी और सीनियर एक्ट्रेस अरुणा ईरानी समेत पूरे परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं। 77 साल के कुकू कोहली का 25 अगस्त को कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया था, जिसके बाद 26 अगस्त को मुंबई के ओशिवारा श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। ‘अरुणा जी, भगवान आपको हिम्मत दे’ सलमान खान ने कुकू कोहली पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भगवान आपकी आत्मा को शांति दे कुकू जी। अरुणा जी, मेरा दिल आपके साथ है। भगवान आपको हिम्मत दे।” सलमान की इस पोस्ट के बाद उनके फैंस और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी कुकू कोहली को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अरुणा ईरानी और परिवार से सलमान का खास रिश्ता सलमान खान का अरुणा ईरानी और कुकू कोहली के परिवार से पुराना और करीबी रिश्ता रहा है। सलमान ने कुकू कोहली की पत्नी अरुणा ईरानी के साथ ‘सपने साजन के’ (1992) और ‘हम तुम्हारे हैं सनम’ (2002) जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया है। कुकू कोहली की बेटी करिश्मा कोहली का भी सलमान खान से प्रोफेशनल कनेक्शन रहा है। करिश्मा कोहली ने सलमान खान की सुपरहिट फिल्मों ‘एक था टाइगर’ और ‘बजरंगी भाईजान’ में डायरेक्टर कबीर खान के साथ बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया था। 25 अगस्त को कार्डियक अरेस्ट से हुआ निधन 77 साल के कुकू कोहली (अवतार कोहली) का निधन 25 अगस्त को कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ था। 26 अगस्त को मुंबई के ओशिवारा श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में विक्की कौशल, कटरीना कैफ, रोहित शेट्टी, राजपाल यादव, जावेद अख्तर और शबाना आजमी भी पहुंचे। अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे सेलेब्स; देखें तस्वीरें राज कपूर के साथ काम करके करियर शुरू किया कुकू कोहली ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत राज कपूर की फिल्म बॉबी में असिस्टेंट के तौर पर काम करके की थी। उन्होंने कई साल उनके साथ रहकर फिल्म बनाने की बारीकियां सीखीं। बाद में वह फिल्म बेताब में सेकेंड यूनिट डायरेक्टर रहे। सनी देओल और अमृता सिंह स्टारर यह फिल्म हिट थी। इसके बाद उन्होंने अर्जुन में भी काम किया। 1991 में कुकू कोहली ने फूल और कांटे से बतौर डायरेक्टर शुरुआत की। फिल्म हिट रही और अजय देवगन को बॉलीवुड में पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने कोहराम और सुहाग जैसी फिल्में बनाईं। सुहाग में अजय देवगन और अक्षय कुमार पहली बार साथ नजर आए थे। 1995 में उनकी फिल्म हकीकत रिलीज हुई। इसमें अजय देवगन और तब्बू थे। फिल्म को फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में सात कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला। कुकू को बेस्ट डायरेक्टर के लिए भी नॉमिनेशन मिला। इसके बाद उन्होंने जुल्मी, अनाड़ी नंबर 1 और ये दिल आशिकाना जैसी फिल्में बनाईं। उनकी आखिरी फिल्म वो तेरा नाम था 2004 में रिलीज हुई थी। कुकू कोहली और अरुणा ईरानी ने गुपचुप शादी की थी कुकू कोहली की दो शादियां हुई थीं। कुकू कोहली की पहली पत्नी का नाम रीता कोहली था। रीता कोहली और कुकू कोहली की दो बेटियां पूजा और करिश्मा थीं। वहीं, कुकू कोहली की दूसरी शादी एक्ट्रेस अरुणा ईरानी से हुई। दोनों की पहली मुलाकात फिल्म कोहराम के सेट पर हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच बिल्कुल नहीं बनती थी। हालांकि, काम के दौरान कुकू कोहली अरुणा का काफी ख्याल रखते थे। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती बढ़ी और यही दोस्ती प्यार में बदल गई। जब अरुणा को कुकू से प्यार हुआ, तब उन्हें पता चला कि कुकू पहले से शादीशुदा हैं। उनकी पहली पत्नी रीता कोहली से दो बेटियां भी थीं। इसके बावजूद अरुणा ने कुकू के साथ रिश्ता आगे बढ़ाया। दोनों ने 1990 में शादी कर ली। हालांकि, उन्होंने कई साल तक अपनी शादी को सार्वजनिक नहीं किया।अरुणा ने बताया था कि वह कुकू की पहली पत्नी और उनके परिवार की परेशानियां नहीं बढ़ाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने अपने रिश्ते को निजी रखा। शादी के बाद अरुणा और कुकू ने बच्चे नहीं करने का फैसला लिया। अरुणा ने कहा था कि उस समय उनकी उम्र और कुकू के पहले से बच्चों को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… लगान-गजनी फेम एक्टर प्रदीप रावत का निधन:74 साल के थे, दोबारा कैंसर हुआ था; महाभारत में अश्वत्थामा बने थे लगान और गजनी समेत कई फिल्मों में नजर आने वाले अभिनेता प्रदीप रावत का 74 साल की उम्र में 4 अगस्त को निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी लगान में उनके साथ काम करने वाले अभिनेता यशपाल शर्मा ने इंस्टाग्राम पर श्रद्धांजलि देते हुए शेयर की थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा के नए सॉन्ग पर कंट्रोवर्सी:ऑफिशियल ट्रैक जारी, बाबाओं-डेरों पर निशाना; यूजर्स ने लिखा-रामपाल, राम रहीम सबको लपेटा

बदमाशी कल्चर वाले गानों के लिए कंट्रोवर्सी में रहे हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने फिर सुर्खियों में हैं। 26 अगस्त को मासूम ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर नए सॉन्ग ‘तत्वदर्शी’ का साढ़े 3 मिनट ऑफिशियल ट्रैक जारी किया। जिसमें पाखंडी बाबाओं और डेरों को निशाने पर लिया है। इस गाने के लिरिक्स हरियाणवी सिंगर-कलाकार हैरी लाठर ने लिखे हैं। हैरी लाठर पहले भी बाबाओं को लेकर गाने गा चुके हैं। उनका ‘सिरसा आले बाबा की चेली’ सॉन्ग पर खूब कंट्रोवर्सी खड़ी हुई थी। लाठर ने इस बार खुद गाने की बजाय दोस्त मासूम शर्मा के लिए लिरिक्स लिखे। दैनिक भास्कर से बातचीत में हैरी लाठर ने स्पष्ट किया कि गाना किसी एक बाबा को टारगेट करके नहीं लिखा गया। सॉन्ग का वीडियो भी आएगा। नए सॉन्ग का ट्रैक रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर कमेंट्स वॉर शुरू हो गई। कुछ सिंगर को ट्रोल कर रहे हैं, तो कुछ पक्ष ले रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- भाई ने रामपाल को भी लपेट दिया, अब मासूम शर्मा की खैर नहीं, रामपाल वाले दिन-रात इसी का नाम लिया करेंगे। दूसरे यूजर ने लिखा- दो-चार रुपए के लिए नाचने वाला मासूम बताएगा कि सही-गलत क्या है। बहादुरगढ़ के यूजर का कमेंट है-मासूम ने रामपाल, राहरहीम, आसाराम, हांसी वाले बाबा, धीरेंद्र शास्त्री से लेकर उस सरकारी शंकराचार्य को लपेट दिया। लिरिक्स के जरिए बड़े बाबाओं पर निशाना हैरी लाठर ने सॉन्ग को लेकर कही ये 2 बड़ी बात महापंचायत में नहीं पहुंचे थे मासूम शर्मा सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट, गानों में गन कल्चर, नशे और स्टेज पर अश्लील डांस के खिलाफ महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर 25 जुलाई महापंचायत हुई थी। इसमें कई हरियाणवी कलाकार, खाप प्रतिनिधि व सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर आए थे और ऐसे कंटेंट पर रोक लगाने का समर्थन किया था। इसमें सिंगर मासूम शर्मा बीमार होने की बात कहकर नहीं पहुंचे थे। हालांकि वीडियो जारी कर मुहिम का समर्थन किया था। इस महापंचायत को कुछ दिन बाद ही मासूम ने हिमाचल प्रदेश में हुए एक कार्यक्रम में अपना बैन सॉन्ग एक खटौला जेल के भीतर गाया था। गन कल्चर को बढ़ावा देने के आरोप में मासूम शर्मा के 19 गाने सरकार ने यू-ट्यूब से हटाए गए थे। सरकार ने कुल 67 गाने हटाए थे, जिनमें सबसे ज्यादा मासूम शर्मा के ही थे। ये खबर भी पढ़ें… सिरसा आला बाबा सॉन्ग पर कॉन्ट्रोवर्सी:हरियाणवी सिंगर हैरी लाठर बोले- किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं; मासूम शर्मा के करीबी हरियाणवी सिंगर हैरी लाठर का नया सॉन्ग सुर्खियों के साथ कॉन्ट्रोवर्सी में भी है। सिरसा आला बाबा टाइटल से जारी सॉन्ग लिरिक्स के कारण चर्चा में है। इसके बोल हैं- “सिरसा आला बाबा सै जो लारा लार चेलियां की।” सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यूजर्स गाने को लेकर अलग-अलग कमेंट कर रहे हैं। पढ़िएं पूरी खबर
नेपाल में तबाही, पानी बिहार क्यों पहुंचेगा:36 फाटक खोले, त्रिशूली-भोटेकोशी का पानी किन जिलों तक पहुंचेगा, समझिए पूरा कनेक्शन

बिहार से करीब 300 किलोमीटर दूर नेपाल में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के पानी ने रसुवा, टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके को तहस-नहस कर दिया है। गांव के गांव बह गए, बाजार तबाह हो गए, पुल टूट गए और सड़कें कट गईं। नेपाल में आई तबाही पर बिहार सरकार अलर्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गृह मंत्री अमित शाह ने बात की है और NDRF की टीम को सीमावर्ती जिलों में तैनात कर दिया है। नेपाल में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों, क्या यहां भी तबाही मचेगी, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1: नेपाल के रसुवा में बाढ़ और तबाही कैसे आई है? जवाबः 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिले में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बहुत तेज पानी आया। पानी तिब्बत की तरफ से आया और कुछ ही समय में घर, सड़क, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बहा ले गया। उस समय रसुवा में ऐसी भारी स्थानीय बारिश की सूचना नहीं थी, इसलिए सामान्य बारिश से आई बाढ़ की संभावना कम मानी जा रही है। कैसे हुआ? कितना नुकसान? नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों के मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। सवाल-2: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों? जवाबः नेपाल में आई तबाही से बिहार के खतरों को समझने के लिए भोट कोशी और त्रिशूली नदियों के तंत्रों को समझना होगा… त्रिशूली नदी के पानी से 5 जिलों को खतरा रसुवा नेपाल का उत्तरी, हिमालयी जिला है और चीन के तिब्बत से लगा है। टिमुरे/रसुवागढ़ी और स्याब्रुबेसी इसी क्षेत्र में हैं। यहां की नदियां ऊंचे हिमालय से निकलकर बहुत तेज ढाल वाले एरिया में नीचे उतरती हैं। इसी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का डिस्चार्ज अचानक बढ़ता है तो पानी तेजी से नीचे आता है। भोटेकोशी से कोसी इलाके में खतरा भोटेकोशी नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली हिमालयी नदी है। यह सिंधुपालचोक क्षेत्र से होकर बहती है। हालांकि, अबकी बार 2008 वाले हालात नहीं सवाल-3: कितना नुकसान हो सकता है, बिहार सरकार क्या कर रही है? जवाबः अभी नुकसान का आकलन करना जल्दीबाजी होगी। गंडक और कोसी बेसिन की नदियों में पानी बढ़ना चालू है। लेकिन गति सामान्य है। CM सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। डिप्टी CM और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि लोग सतर्क रहें, घबराएं नहीं। अगले 24 घंटे अलर्ट रहने की जरूरत है। समस्या पहले से बड़ी है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। गंडक नदी पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बाढ़ राहत के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है। राहत एवं बचाव के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। सरकार अलर्ट, बोली-डरे नहीं सवाल-4ः नेपाल की नदियों से बिहार में क्यों आती है बाढ़? जवाबः नेपाल बिहार से करीब 400 फीट ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित है। नेपाल में भारी बारिश होती है तो पानी ऊपर से नीचे की तरफ नेचुरल ग्रेविटी के कारण आता है। नेपाल में कोई बड़ा डैम नहीं है। जिससे पानी को कंट्रोल किया जा सके। नेपाल हिमालय पर बसा है। इसका करीब 75% हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, महानंदा और अधवारा नदियों का समूह यहां से निकलता है। नेपाल में बारिश होने पर पानी इन्हीं नदियों के रास्ते गंगा नदी तक पहुंचता है। 129 साल से चल रही हाई डैम बनाने की बात उत्तर बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए 1897 से ही भारत और नेपाल की सरकारों के बीच सप्तकोशी नदी पर बांध की बात चल रही है। इसे लेकर आजादी से पहले और बाद में दोनों देशों की सरकारों के बीच कई बार वार्ताएं हुईं। आखिरकार 1991 में दोनों देशों के बीच इसे लेकर एक समझौता भी हुआ। 2004 में इस प्रस्तावित बांध की संभावनाओं को तलाशने के लिए नेपाल के धरान में एक संयुक्त परियोजना कार्यालय भी बना है। मगर 129 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आज तक नेपाल के बराह क्षेत्र से 1.6 किमी उत्तर की दिशा में प्रस्तावित इस बांध के निर्माण को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। 21 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। इसके बाद वित्त मंत्री ने कोसी-मेची परियोजना के पहले चरण की राशि जारी करने और दूसरे चरण की तकनीकी मंजूरी देने का निर्देश जल शक्ति मंत्रालय को दिया है। CM सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कोसी नदी पर उच्च बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जल्द बनेगी। JDU नेता संजय झा ने बताया, ‘नेपाल में हाई डैम का निर्माण एकमात्र समाधान है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) 2028 तक बन जाएगी।’
भारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें:खतरे में 6 प्रदेश, आखिर ग्लेशियल लेक अचानक कैसे फट जाती हैं

26 सुबह करीब 9 बजे। ग्लेशियर से टूटकर गिरे बर्फ और चट्टानों ने भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ ला दी, जिससे नेपाल के रसुवा जिले में तबाही मच गई। गांव, सड़कें और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बह गए। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत, अमेरिका और ब्रिटेन के टूरिस्ट भी शामिल हैं। करीब एक साल पहले, जुलाई 2025 में भी इसी इलाके में तिब्बत की एक ग्लेशियर झील तापमान बढ़ने से फट गई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी। ये एक पैटर्न-सा बनता जा रहा है, जिसकी जद में भारत के भी कई राज्य हैं। 5 गुना बढ़ गईं ग्लेशियर झीलें, खतरे में भारत के 6 प्रदेश IIT रोपड़ और सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक साझा स्टडी की। इसी महीने जारी रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 1990 में सिर्फ 107 ग्लेशियर झीलें थीं। 2024 तक यह संख्या बढ़कर 669 हो गई, यानी 525% की बढ़ोत्तरी। 669 में से 88 झीलों पर नेपाल जैसी ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ का खतरा मंडरा रहा है। 9 झीलों को ‘बेहद ज्यादा खतरनाक’, 18 को ‘ज्यादा खतरनाक’ और 26 को ‘मध्यम खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है। रिसर्चर्स ने दो झीलों पर खास मॉडलिंग की- ब्यास बेसिन की हिमसू झील और सतलुज बेसिन की एक बेनाम झील। अगर ब्यास झील का नेचुरल डैम टूट जाए, तो 1,385 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड की बाढ़ आएगी। यानी हर सेकेंड करीब 14 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे हर सेकेंड ओलंपिक साइज के 6 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं। इसी तरह सतलुज झील से 3,507 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पानी का सैलाब आएगा। यानी हर सेकेंड करीब 35 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे डैम और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत 588 इमारतों को खतरा है। हिमालय का बढ़ता तामपान इस खतरे को और बढ़ा रहा है। जुलाई 2026 में आई IIT खड़गपुर की एक स्टडी बताती है कि ऊंचाई वाले इलाकों का तापमान पिछले 20 सालों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि इससे ग्लेशियर पिघलने और नदियों के बहाव में बड़ा बदलाव आ सकता है। ग्लेशियर झीलें अचानक कैसे फट जाती हैं? पहाड़ों पर ऊंचाई पर मौजूद ग्लेशियर जब पिघलते हैं, तो उनका पानी आसपास के निचले इलाके या किसी चट्टानी दीवार के सहारे इकट्ठा होने लगता है। ये धीरे-धीरे एक झील का रूप ले लेता है, जिसे ‘ग्लेशियल लेक’ कहते हैं। ये झील ग्लेशियर के सामने या उसकी निचली सतह पर भी बन सकती है। इन झीलों को बर्फ, पहाड़ का मलबा या चट्टान की एक नैचुरल दीवार यानी ‘डैम’ रोककर रखती है। जब ये दीवार किसी वजह से अचानक टूट जाती है, तो झील में जमा लाखों-करोड़ों क्यूबिक मीटर पानी बहुत तेज रफ्तार से बेकाबू होकर नीचे की तरफ बहता है। इसी को ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, GLOF या ग्लेशियर की झील फटना कहते हैं। GLOF में पानी के बहाव की रफ्तार आम बारिश से आई बाढ़ के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है, जिससे यह रास्ते में आने वाली हर चीज को बहुत तेजी से काटती-छांटती और बहाती चली जाती है। ग्लेशियर झील 3 वजहों से फट सकती हैं… 1. ग्लोबल वॉर्मिंग से ग्लेशियर का तेजी से पिघलना 2. बर्फ या चट्टान का झील में गिरना भारी बारिश से झील का ओवरफ्लो होना GLOF की तबाही कैसे रोकी जा सकती है? नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDMA और नेशनल GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के मुताबिक, क्या नेपाल की बाढ़ से भारत में फौरन कोई खतरा? इसलिए भोटेकोशी में अधिक पानी आने पर उसका पानी सुनकोशी और फिर कोसी नदी तंत्र में शामिल हो सकता है। इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जिले काफी प्रभावित हो सकते हैं। 2008 में नेपाल के कुसहा में कोसी नदी का तटबंध टूट गया था। इसके बाद कोसी नदी अपने नए/प्राकृतिक रास्ते को छोड़कर सैकड़ों साल पुराने पूर्व की ओर वाले रास्ते पर बहने लगी। इससे अचानक नदी का रुख घनी आबादी और नए इलाकों की तरफ मुड़ गया, जिससे बिहार के 34 लाख से अधिक लोग बिना किसी पूर्व चेतावनी के भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए। हालांकि, इस बार रसुवा में लैंडस्लाइड, भूस्खलन या हिम झील टूटने से अचानक नदी में भारी मात्रा में पानी आ गया है। लेकिन नदी ने अपना रास्ता नहीं बदला है। वह अपने तय रास्ते पर बह रही है। इस कारण एक्सपर्ट तटबंध टूटने की संभावना व्यक्त नहीं कर रहे हैं। ————







