अमेरिका के मोंटाना में परिवार के 8 लोगों की हत्या:मृतकों में 4 बच्चे; आरोपी ने सबको गोली मारी, खुद को भी शूट किया

अमेरिका के मोंटाना के बिलिंग्स शहर में रविवार शाम एक परिवार के 8 लोगों की हत्या कर दी गई। घटना उस समय हुई जब परिवार के लोग एक साथ डिनर कर रहे थे। मरने वाले लोग एक ही परिवार की चार पीढ़ियों से थे। इनमें 4 बच्चे भी शामिल हैं। आरोपी ने सबको गोली मारने के बाद घर में आग लगा दी। फिर खुद को भी शूट कर लिया। पुलिस के मुताबिक, उन्हें रविवार शाम करीब 6 बजे घर से गोली चलने की सूचना मिली थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो घर के पीछे से गोलियों की आवाज आ रही थी। घर के बाहर एक व्यक्ति घायल मिला। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, वही इस घटना का संदिग्ध था। 911 कॉल में फायरिंग और बच्चे के बेहोश होने की सूचना पुलिस ने बताया कि घटना के दौरान 911 डिस्पैच सेंटर को गोली चलने और घर के अंदर एक बच्चे के बेहोश होने की सूचना मिली थी। डिस्पैचर ने मौके पर फायर इंजन भेजने की जानकारी दी। बाद में एक और फायर इंजन भेजने की मांग की गई। डिस्पैचर ने पूछा कि क्या बच्चे को गोली लगी है। जवाब में बताया गया कि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। सिर्फ बच्चे के बेहोश होने की जानकारी मिली थी और यह भी स्पष्ट नहीं था कि वह सांस ले रहा था या नहीं। पुलिस पहुंची तो घर आग की लपटों में घिरा था इमरजेंसी टीमें रविवार शाम करीब 6:10 बजे मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने घर के बाहर एक व्यक्ति को देखा। इसी दौरान उन्हें फिर गोलियों की आवाज सुनाई दी। आग तेजी से फैल रही थी, इसलिए दमकलकर्मियों को तुरंत घर के अंदर जाने में मुश्किल हुई। बिलिंग्स के फायर चीफ मैट हॉपेल ने बताया कि आग बहुत तेजी से फैली और घर का बड़ा हिस्सा जल गया। आग बुझाने के लिए इस्तेमाल हुए पानी और जले हुए मलबे के कारण घटनास्थल से सबूत जुटाने में भी जांच टीम को परेशानी हो रही है। पड़ोसी ने सुनी पटाखों जैसी आवाज घर से तीन मकान दूर रहने वाले डेविड हिलर ने बताया कि रविवार शाम 6 बजे के बाद उन्हें पटाखों जैसी आवाज सुनाई दी। बाद में एक पड़ोसी ने फोन कर इलाके में गोलीबारी की जानकारी दी। हिलर ने बाहर निकलकर देखा तो पुलिसकर्मी हथियारों के साथ गाड़ियों की आड़ में खड़े थे और घर से काला धुआं उठ रहा था। हत्या की वजह अभी सामने नहीं आई पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध व्यक्ति मृतकों को जानता था, लेकिन हत्या के पीछे की वजह अभी सामने नहीं आई है। आग कैसे लगी, इसकी भी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कहा है कि जांच पूरी होने तक मामले से जुड़ी कुछ जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जाएंगी।
अमेरिका के मोंटाना में परिवार के 8 लोगों की हत्या:मृतकों में 4 बच्चे; आरोपी ने सबको गोली मारी, खुद को भी शूट किया

अमेरिका के मोंटाना के बिलिंग्स शहर में रविवार शाम एक परिवार के 8 लोगों की हत्या कर दी गई। घटना उस समय हुई जब परिवार के लोग एक साथ डिनर कर रहे थे। आरोपी ने सबको गोली मारने के बाद घर में आग लगा दी। फिर खुद को भी शूट कर लिया। आरोपी के अलावा मरने वाले लोग एक ही परिवार की चार पीढ़ियों से थे। इनमें 4 बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, उन्हें रविवार शाम करीब 6 बजे घर से गोली चलने की सूचना मिली थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो घर के पीछे से गोलियों की आवाज आ रही थी। घर के बाहर एक व्यक्ति घायल मिला। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। वही इस घटना का संदिग्ध माना जा रहा है। पुलिस को बच्चे के बेहोश होने की सूचना मिली थी घटना के दौरान 911 पर पुलिस को घर में गोली चलने और एक बच्चे के बेहोश होने की सूचना मिली थी। इसके बाद मौके पर दमकल की गाड़ियां भेजी गईं। कुछ देर बाद एक और फायर इंजन भेजने को कहा गया। डिस्पैचर ने पूछा कि क्या बच्चे को गोली लगी है। पुलिस ने बताया कि इसकी पुष्टि नहीं हुई थी। सिर्फ इतना पता था कि बच्चा बेहोश है और यह भी साफ नहीं था कि वह सांस ले रहा है या नहीं। पुलिस पहुंची तो फायरिंग की आवाज आ रही थी इमरजेंसी टीमें रविवार शाम करीब 6:10 बजे मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने घर के बाहर एक व्यक्ति को देखा। इसी दौरान घर के अंदर से गोलियों की आवाज भी आ रही थी। आग तेजी से फैल रही थी, इसलिए दमकलकर्मी तुरंत घर के अंदर नहीं जा सके। फायर चीफ मैट हॉपेल ने बताया कि आग तेजी से फैली और घर का बड़ा हिस्सा जल गया। आग बुझाने के लिए डाला गया पानी और जला हुआ मलबा जांच में परेशानी पैदा कर रहा है। इससे पुलिस को मौके से सबूत जुटाने में समय लग रहा है। पड़ोसी ने सुनी पटाखों जैसी आवाज घर से तीन मकान दूर रहने वाले डेविड हिलर ने बताया कि रविवार शाम 6 बजे के बाद उन्हें पटाखों जैसी आवाज सुनाई दी। बाद में एक पड़ोसी ने फोन कर इलाके में गोलीबारी की जानकारी दी। हिलर ने बाहर निकलकर देखा तो पुलिसकर्मी हथियारों के साथ गाड़ियों की आड़ में खड़े थे और घर से काला धुआं उठ रहा था। हत्या की वजह अभी सामने नहीं आई पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध व्यक्ति मृतकों को जानता था, लेकिन हत्या के पीछे की वजह अभी सामने नहीं आई है। आग कैसे लगी, इसकी भी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कहा है कि जांच पूरी होने तक मामले से जुड़ी कुछ जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। अमेरिका में मास शूटिंग की हाल की घटनाएं… 22 अगस्त: ओरेगन के फॉरेस्ट ग्रोव में एक घर में 5 लोगों की हत्या हुई। मृतकों में आरोपी की पार्टनर, उसकी मां और दादी समेत पांच लोग शामिल थे। संदिग्ध बाद में वॉशिंगटन में मृत मिला। 14 अगस्त: मिशिगन के मिसॉकी काउंटी में हुई गोलीबारी में 6 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में संदिग्ध शूटर भी शामिल है। घटना में एक 13 साल की बच्ची भी घायल हुई, जिसे चार गोलियां लगी थीं। 15 अगस्त: वर्जीनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के कैंपस के पास हुई गोलीबारी में 5 लोग घायल हुए। पुलिस ने 19 वर्षीय संदिग्ध को गिरफ्तार किया। ————————- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में भारतीय इंजीनियर ने पत्नी की हत्या की: भारत में रह रही गर्लफ्रेंड को शव की फोटो भेजी; जमानत के लिए ₹47 करोड़ देने होंगे अमेरिका में एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर को पत्नी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का आरोप है कि उसने पत्नी का गला घोंटकर हत्या की। पूरी खबर पढ़ें…
मोहन भागवत न्यूयॉर्क पहुंचे, तीन देशों के दौरे की शुरुआत:अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे; RSS के 100 साल पूरे होने पर कार्यक्रम में शामिल होंगे

RSS प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को न्यूयॉर्क पहुंचे। यह उनके तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव है। वह अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे। यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर हो रहा है। उन्हें विदेशों में मौजूद भारतीय समुदाय के संगठनों ने आमंत्रित किया है। न्यूयॉर्क पहुंचने पर मोहन भागवत का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। दौरे के दौरान वह भारतीय मूल के लोगों और स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। RSS के मुताबिक, संगठन के 100 साल पूरे होने के मौके पर विदेशों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कार्यक्रम मोहन भागवत शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम कर रहा है। कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी और अलग-अलग धर्मों से जुड़े प्रमुख वक्ता शामिल होंगे। 25 अगस्त से शुरू हुआ तीन देशों का दौरा RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया था कि मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर रहेंगे। यह दौरा विदेशों में मौजूद स्थानीय संगठनों और संस्थाओं के निमंत्रण पर हो रहा है। दौरे का समय RSS के शताब्दी वर्ष से भी जुड़ा है। RSS पर USCIRF की टिप्पणी से विवाद भागवत के दौरे से पहले RSS को लेकर अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की टिप्पणियों पर भारत ने आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने USCIRF को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया था। उन्होंने कहा था कि आयोग भारत को लेकर बार-बार गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है। USCIRF ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताते हुए RSS समेत कुछ संगठनों और लोगों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। भारत ने आयोग की रिपोर्ट को ‘पक्षपातपूर्ण और चुनिंदा तथ्यों पर आधारित’ बताते हुए खारिज कर दिया था।
इमरान के बेटे का दावा-पाकिस्तान तानाशाही की ओर बढ़ रहा:पिता के साथ जेल में बुरे बर्ताव का आरोप लगाया, कहा- सेना का इसमें बड़ा रोल

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे सुलैमान ईसा खान ने दावा किया है कि पाकिस्तान तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने अपने पिता के लंबे समय से जेल में होने को इसका उदाहरण बताया। न्यूज एजेंसी ANI के साथ वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुलैमान ने कहा कि पिछले कई साल से उनके पिता के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और इसमें सेना की बड़ी भूमिका है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चर्चा की गई। सुलैमान के साथ उनके भाई कासिम खान, अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों तथा मीडिया के सलाहकार सैयद बुखारी भी शामिल हुए। वकील का आरोप- जनरल मुनीर मनमाना शासन चला रहे इमरान खान के अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर ने पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने देश के सैन्य नेतृत्व को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और सेना प्रमुख असीम मुनीर पर ‘ऑथॉरिटेरियनिज्म’ यानी दमनकारी शासन का आरोप लगाया। जेनसर ने कहा, इमरान खान और उनकी पत्नी के खिलाफ जिस तरह कार्रवाई हो रही है, वह किसी लोकतांत्रिक सरकार के तरीके जैसी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इमरान खान के खिलाफ सैकड़ों मामले मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर दर्ज किए गए हैं। यह मामला अब सिर्फ उनकी जेल तक सीमित नहीं है। जेनसर के मुताबिक, उनकी गिरफ्तारी उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है, जो पाकिस्तान में सत्ता को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं। जेनसर ने आगे कहा, उन्हें जेल में रखकर शासन पाकिस्तान के लोगों को साफ संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उन्हें सत्ता के खिलाफ खड़ा होने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जेनसर ने कहा, “कल्पना कीजिए कि अगर हम इमरान खान के साथ ऐसा कर सकते हैं, जिन्हें पूरी दुनिया जानती है, तो उस व्यक्ति के साथ क्या किया जा सकता है, जिसे दुनिया नहीं जानती?” इमरान खान के इलाज को लेकर भी विवाद इमरान खान की सेहत और जेल में उनके इलाज को लेकर भी विवाद बना हुआ है। 18 अगस्त को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि इमरान खान को इलाज के लिए 48 घंटे के भीतर अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि इमरान खान की जांच एक स्वतंत्र मेडिकल पैनल करे। इसमें हृदय रोग विशेषज्ञ, आंखों के डॉक्टर, सामान्य चिकित्सक और उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान को शामिल किया जाना था। हालांकि, 20 अगस्त को अधिकारियों ने इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने के बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) पहुंचाया। वहां कई घंटों तक उनकी मेडिकल जांच की गई। इसके बाद उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित कर वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। इमरान खान की टीम का आरोप है कि जेल से शिफा अस्पताल की दिशा में एक ‘डमी काफिला’ भेजा गया, ताकि ऐसा लगे कि इमरान खान को वहां ले जाया जा रहा है। टीम ने यह भी दावा किया कि उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान शिफा अस्पताल में उनका इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें इमरान खान की जांच करने का मौका नहीं दिया गया। खबर अपडेट हो रही है…
डायरेक्टर कुकू कोहली का 77 साल की उम्र में निधन:हार्ट अटैक आया था, फिल्म फूल और कांटे से अजय देवगन को लॉन्च किया था

वेटरन फिल्ममेकर कुकू कोहली का 77 साल की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में आखिरी सांस ली। कुकू कोहली को हार्ट अटैक आया था। फिल्ममेकर अशोक पंडित ने इसकी पुष्टि की। कुकू कोहली ने अजय देवगन को फिल्म फूल और कांटे से फिल्म इंडस्ट्री में लॉन्च किया था। यह फिल्म सुपरहिट रही और अजय देवगन को पहचान मिली। इसके बाद कुकू कोहली ने कोहराम, सुहाग, हकीकत और जुल्मी जैसी फिल्में बनाईं। (खबर अपडेट की जा रही है)
ट्रम्प कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदल सकते हैं:कहा- ‘लेक ओंटारियो’ का नाम ‘लेक अमेरिका’ करने की सोच रहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदलने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ रखने पर विचार कर रहे हैं। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका और कनाडा ने एक-दूसरे पर 50% टैरिफ लगा दिया है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, लेक ओंटारिया का नाम बदलने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है और न ही औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने किसी जगह का नाम बदलने की बात कही हो। जनवरी 2025 में उन्होंने अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कहने का आदेश दिया था। हालांकि, उस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली थी। क्यों अहम है लेक ओंटारियो? लेक ओंटारियो उत्तरी अमेरिका की पांच बड़ी झीलों (ग्रेट लेक्स) में से एक है। इसका उत्तरी किनारा कनाडा के ओंटारियो प्रांत और दक्षिणी किनारा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से जुड़ा है। यह झील दोनों देशों के लिए पीने के पानी, सामान की आवाजाही, मछली पालन और पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। सेंट लॉरेंस नदी के जरिए यह अटलांटिक महासागर से जुड़ती है, इसलिए यहां से सामान की आवाजाही भी होती है। झील की देखभाल और सुरक्षा के लिए अमेरिका और कनाडा मिलकर काम करते हैं और कई समझौते कर चुके हैं। क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अपने सरकारी रिकॉर्ड, नक्शों और दस्तावेजों में किसी स्थान का नाम बदल सकता है। लेकिन यदि वह स्थान किसी दूसरे देश के साथ साझा है, तो नया नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं हो जाता। यानी अमेरिका अपने आधिकारिक दस्तावेजों में लेक ओंटारियो को कोई नया नाम दे सकता है, लेकिन कनाडा या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यही स्थिति पहले ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ मामले में भी देखने को मिली थी। जनवरी 2025 में ट्रम्प ने अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। अमेरिका ने इसे अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में लागू कर दिया, लेकिन मैक्सिको और दूसरे देशों ने पुराने नाम का इस्तेमाल जारी रखा। खबर अपडेट हो रही है…
ट्रम्प कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदल सकते हैं:कहा- ‘लेक ओंटारियो’ का नाम ‘लेक अमेरिका’ करने की सोच रहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदलने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ रखने पर विचार कर रहे हैं। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका और कनाडा ने एक-दूसरे पर 50% टैरिफ लगा दिया है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, लेक ओंटारिया का नाम बदलने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है और न ही औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने किसी जगह का नाम बदलने की बात कही हो। जनवरी 2025 में उन्होंने अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कहने का आदेश दिया था। हालांकि, उस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली थी। क्यों अहम है लेक ओंटारियो? लेक ओंटारियो उत्तरी अमेरिका की पांच बड़ी झीलों (ग्रेट लेक्स) में से एक है। इसका उत्तरी किनारा कनाडा के ओंटारियो प्रांत और दक्षिणी किनारा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से जुड़ा है। यह झील दोनों देशों के लिए पीने के पानी, सामान की आवाजाही, मछली पालन और पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। सेंट लॉरेंस नदी के जरिए यह अटलांटिक महासागर से जुड़ती है, इसलिए यहां से सामान की आवाजाही भी होती है। झील की देखभाल और सुरक्षा के लिए अमेरिका और कनाडा मिलकर काम करते हैं और कई समझौते कर चुके हैं। लेक ओंटारियो को उसका नाम कैसे मिला? ‘ओंटारियो’ नाम मूलनिवासी ह्यूरॉन लोगों की भाषा से आया माना जाता है। इसका अर्थ ‘सुंदर झील’ है। बाद में यूरोपीय लोगों ने भी इस नाम का इस्तेमाल शुरू किया और यही नाम प्रचलित हो गया। इसी से कनाडा के ओंटारियो राज्य का नाम भी पड़ा। यूरोपीय मानचित्रों में यह नाम 17वीं सदी से दिखाई देने लगा था। यानी ‘ओंटारियो’ नाम नया नहीं है, बल्कि सदियों पुराना है। एक दिलचस्प बात यह भी है कि लेक ओंटारियो ग्रेट लेक्स में सबसे छोटी झील है, लेकिन इसका आर्थिक महत्व बहुत बड़ा है। क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अपने सरकारी रिकॉर्ड, नक्शों और दस्तावेजों में किसी स्थान का नाम बदल सकता है। लेकिन यदि वह स्थान किसी दूसरे देश के साथ साझा है, तो नया नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं हो जाता। यानी अमेरिका अपने आधिकारिक दस्तावेजों में लेक ओंटारियो को कोई नया नाम दे सकता है, लेकिन कनाडा या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यही स्थिति पहले ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ मामले में भी देखने को मिली थी। जनवरी 2025 में ट्रम्प ने अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। अमेरिका ने इसे अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में लागू कर दिया, लेकिन मैक्सिको और दूसरे देशों ने पुराने नाम का इस्तेमाल जारी रखा।
अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी टूरिज्म में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा:ब्रिटेन के 30 परिवारों ने यूरोपीय डोनर चुने, बच्चों का डीएनए तुर्किये व अन्य देशों से मिला

ब्रिटेन से मेडिकल टूरिज्म के तहत उत्तरी साइप्रस में आईवीएफ कराने वाले ब्रिटेन के 30 परिवारों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई। आरोप है कि आईवीएफ क्लिनिक ने उनकी पसंद के स्पर्म-एग डोनर इस्तेमाल करने का दावा किया था, लेकिन 11 बच्चों के डीएनए टेस्ट से पता चला कि ये उन स्पर्म-एग डोनर के नहीं हैं, जिसे उनके माता-पिता ने चुना था। आईवीएफ से पैदा इन बच्चों का डीएनए तुर्किये और अरब देशों के लोगों के डीएनए से मिल रहा है, जबकि उनके माता-पिता ने फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे पश्चिम यूरोपीय देशों के पूरी तरह से स्क्रीन किए गए और स्वस्थ डोनर्स को चुना था। बीबीसी की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय घोटाले के लगभग आधे मामले अकेले ‘डोगस आईवीएफ सेंटर’ से सामने आए हैं। दुनिया के सबसे बड़े स्पर्म बैंक ‘क्रायोस इंटरनेशनल’ ने स्पष्ट किया है कि उसने 2016 में ही डोगस क्लिनिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और वहां कभी स्पर्म की सप्लाई ही नहीं की। इसके बावजूद क्लिनिक सालों तक क्रायोस के साथ अपने आधिकारिक जुड़ाव का झूठा विज्ञापन देकर संतान चाहने वाले जोड़ों को ठगता रहा। निजी डेटा की अनदेखी – माता-पिता ने डोनर की मेडिकल हिस्ट्री, रूप-रंग, शिक्षा और शौक के आधार पर चयन किया था, ताकि बच्चा 18 साल की उम्र में अपने जैविक मूल को जान सके। फर्जी डोनर के इस्तेमाल से बच्चों के मूलभूत मानवाधिकारों का हनन हुआ है। ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसाइटी के अनुसाार, 30 से अधिक बच्चों के मामलों में ऐसा होना एक संगठित आपराधिक नेटवर्क, गंभीर लापरवाही और संस्थागत धोखाधड़ी है। उत्तरी साइप्रस तुर्किये के कब्जे में है और कानून लचर हैं। वैश्विक फर्टिलिटी रिपोर्ट्स और मेडिकल टूरिज्म डेटा के अनुसार, सस्ता होने से हर साल 5-8 हजार विदेशी जोड़े आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए नार्दन साइप्रस आते हैं और पिछले 10 वर्षों में 50,000 से 70,000 विदेशी नागरिकों ने नॉर्दन साइप्रस के क्लिनिकों में आईवीएफ ट्रीटमेंट कराया है। इनमें बड़ी संख्या ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के लोगों की है। रैचेल का दावा – 13 साल बाद डीएनए टेस्ट से शक पक्का हुआ रिपोर्ट में रैचेल नाम की एक मां का केस बताया गया है। रैचेल ने 2012 में डोगस में करीब 4.43 लाख रु. में आईवीएफ कराया। रैचेल ने क्रायोस वेबसाइट से डेनमार्क के एक डोनर को चुना था। प्रोफाइल में लिखा था कि 18 साल बाद बच्चा चाहे तो डोनर की पहचान जान सकता है। रैचेल का कहना है कि क्लिनिक ने बार-बार मेडिकल रिपोर्ट भेजने से इनकार किया, जिससे शक बढ़ा। अब डीएनए टेस्ट से यह सामने आया कि जोना उनका बायोलॉजिकल बेटा है, लेकिन चुना गया डोनर उसका पिता नहीं है। रैचेल ने कहा कि दुख यह है कि जोना भविष्य में अपने डोनर से संपर्क का मौका खो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी टूरिज्म में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा:ब्रिटेन के 30 परिवारों ने यूरोपीय डोनर चुने, बच्चों का डीएनए तुर्किये व अन्य देशों से मिला

ब्रिटेन से मेडिकल टूरिज्म के तहत उत्तरी साइप्रस में आईवीएफ कराने वाले ब्रिटेन के 30 परिवारों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई। आरोप है कि आईवीएफ क्लिनिक ने उनकी पसंद के स्पर्म-एग डोनर इस्तेमाल करने का दावा किया था, लेकिन 11 बच्चों के डीएनए टेस्ट से पता चला कि ये उन स्पर्म-एग डोनर के नहीं हैं, जिसे उनके माता-पिता ने चुना था। आईवीएफ से पैदा इन बच्चों का डीएनए तुर्किये और अरब देशों के लोगों के डीएनए से मिल रहा है, जबकि उनके माता-पिता ने फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे पश्चिम यूरोपीय देशों के पूरी तरह से स्क्रीन किए गए और स्वस्थ डोनर्स को चुना था। बीबीसी की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय घोटाले के लगभग आधे मामले अकेले ‘डोगस आईवीएफ सेंटर’ से सामने आए हैं। दुनिया के सबसे बड़े स्पर्म बैंक ‘क्रायोस इंटरनेशनल’ ने स्पष्ट किया है कि उसने 2016 में ही डोगस क्लिनिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और वहां कभी स्पर्म की सप्लाई ही नहीं की। इसके बावजूद क्लिनिक सालों तक क्रायोस के साथ अपने आधिकारिक जुड़ाव का झूठा विज्ञापन देकर संतान चाहने वाले जोड़ों को ठगता रहा। निजी डेटा की अनदेखी – माता-पिता ने डोनर की मेडिकल हिस्ट्री, रूप-रंग, शिक्षा और शौक के आधार पर चयन किया था, ताकि बच्चा 18 साल की उम्र में अपने जैविक मूल को जान सके। फर्जी डोनर के इस्तेमाल से बच्चों के मूलभूत मानवाधिकारों का हनन हुआ है। ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसाइटी के अनुसाार, 30 से अधिक बच्चों के मामलों में ऐसा होना एक संगठित आपराधिक नेटवर्क, गंभीर लापरवाही और संस्थागत धोखाधड़ी है। उत्तरी साइप्रस तुर्किये के कब्जे में है और कानून लचर हैं। वैश्विक फर्टिलिटी रिपोर्ट्स और मेडिकल टूरिज्म डेटा के अनुसार, सस्ता होने से हर साल 5-8 हजार विदेशी जोड़े आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए नार्दन साइप्रस आते हैं और पिछले 10 वर्षों में 50,000 से 70,000 विदेशी नागरिकों ने नॉर्दन साइप्रस के क्लिनिकों में आईवीएफ ट्रीटमेंट कराया है। इनमें बड़ी संख्या ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के लोगों की है। रैचेल का दावा – 13 साल बाद डीएनए टेस्ट से शक पक्का हुआ रिपोर्ट में रैचेल नाम की एक मां का केस बताया गया है। रैचेल ने 2012 में डोगस में करीब 4.43 लाख रु. में आईवीएफ कराया। रैचेल ने क्रायोस वेबसाइट से डेनमार्क के एक डोनर को चुना था। प्रोफाइल में लिखा था कि 18 साल बाद बच्चा चाहे तो डोनर की पहचान जान सकता है। रैचेल का कहना है कि क्लिनिक ने बार-बार मेडिकल रिपोर्ट भेजने से इनकार किया, जिससे शक बढ़ा। अब डीएनए टेस्ट से यह सामने आया कि जोना उनका बायोलॉजिकल बेटा है, लेकिन चुना गया डोनर उसका पिता नहीं है। रैचेल ने कहा कि दुख यह है कि जोना भविष्य में अपने डोनर से संपर्क का मौका खो सकता है।
‘आप एक्टिंग छोड़ो, एयरफोर्स जॉइन करो’:अभय वर्मा को मिला यह कॉम्प्लीमेंट, बोले- इससे बड़ा सम्मान मेरे लिए शायद कुछ हो ही नहीं सकता

अभिनेता अभय वर्मा इन दिनों ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में भारतीय वायुसेना के अधिकारी आरएस धालीवाल का किरदार निभाकर चर्चा में हैं। इस भूमिका ने उन्हें अभिनेता के तौर पर चुनौती दी और देश के अनसंग हीरोज को करीब से समझने का मौका दिया। अभय बताते हैं कि एयरफोर्स स्टेशन में जवानों से मुलाकात, मिग-21 में बैठने और पूर्व एयर चीफ मार्शल धनोआ से मिलने के अनुभव उनके लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक रहे। धालीवाल के परिवार से मुलाकात को वह अपने करियर का खास सम्मान मानते हैं। उन्होंने युद्ध, परिवार, वर्दी और देश के लिए बलिदान पर भी बात की। सवाल: ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में काम करने का आपकी जिंदगी पर कितना असर पड़ा? जवाब: मेरे लिए एक्टिंग का एक ही फंडा है कि मैं हर दिन एक बेहतर इंसान बनूं। पिछले किरदार से जितनी खूबियां सीखूं, उन्हें अगले प्रोजेक्ट में इस्तेमाल करूं और एक बेहतर एक्टर बनूं। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में हमारे देश के हीरोज को निभाने का मौका मिला। इसके साथ बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी महसूस हुई। आज हम अपने परिवार के साथ चैन से सोते हैं, देश पर गर्व करते हैं और हमारे युवा सेना में जाने का सपना देखते हैं, तो इसमें इन अनसंग हीरोज का बहुत बड़ा योगदान है। एक्टर के तौर पर ऐसा किरदार मिलना मेरे लिए किसी एथलीट के ओलंपिक के लिए चुने जाने जैसा है। सवाल: आपका जन्म 27 जुलाई 1998 को हुआ और कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई 1999 को था। जब आपने कारगिल और ऑपरेशन सफेद सागर को करीब से समझा तो क्या महसूस हुआ? जवाब: जब कारगिल युद्ध हुआ, तब मैं सिर्फ एक साल का था। उस समय मुझे कुछ पता नहीं था, लेकिन ‘कारगिल’ शब्द बहुत मशहूर हो गया था। बाद में किताबों के जरिए इसके बारे में जाना। ‘ऑपरेशन विजय’ के बारे में तो हम बहुत सुनते आए हैं, लेकिन ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की कहानी हमारे सामने नहीं आई थी। जब पहली बार डायरेक्टर ने इसके बारे में बताया तो मैंने उनसे पूछा- ‘सर, ये सच में हुआ था?’ सवाल बचकाना था, लेकिन कहानी इतनी अविश्वसनीय थी कि मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि ऐसा हुआ भी था और हमें पता भी नहीं। सबसे खास बात यह थी कि मैं पहले से अपने हीरो के बारे में सोचकर नहीं आया था। किरदार निभाते-निभाते आरएस धालीवाल मेरे हीरो बन गए। उनकी बहादुरी, जज्बा और साहस ने मुझे बहुत प्रभावित किया। सवाल: एयरफोर्स के लोगों से मिलने पर आपको अपने किरदार की अहमियत कैसे महसूस हुई? जवाब: जब मैं एयरफोर्स स्टेशन में लोगों से मिला और बताया कि मैं आरएस धालीवाल का किरदार निभा रहा हूं, तो उनकी आंखों में अलग चमक आ गई। उनकी छाती गर्व से चौड़ी हो गई। एक व्यक्ति ने दोबारा मेरा हाथ मिलाकर कहा, ‘आप धाली को प्ले कर रहे हैं?’ हाल ही में रात में पुलिस अल्कोहल चेक कर रही थी। मैंने शीशा नीचे किया तो हवलदार ने मुझे दो बार देखा और पूछा कि आपने धाली का किरदार निभाया है ना? उन्होंने जाते-जाते दोबारा हाथ मिलाया। हमारे हीरोज के लिए लोगों के मन में जो सम्मान है, उसे महसूस करना मेरे लिए खास था। सवाल: आरएस धालीवाल बहुत कम बोलने वाले, आत्मविश्वासी और निडर अधिकारी थे। उन्हें निभाने की तैयारी कैसे की? जवाब: सबसे पहले तो मुझे डर लग रहा था, क्योंकि वह बहुत कम बोलते थे और मैं बहुत बोलता हूं। यही मेरी पहली चुनौती थी। हालांकि असली तैयारी हमारे डायरेक्टर और राइटर ने कराई। मुझे लगता है कि हर इंसान जो वर्दी पहनता है, वह भगवान का भेजा हुआ इंसान है। वह हमें बचाने के लिए वर्दी पहनता है, बिना कुछ मांगे अपना काम करता है। यह गुण मैंने अपनी मां और इन हीरोज में देखा है। वे कुछ कर जाते हैं, लेकिन उसके बारे में बताते नहीं हैं। मेडल नहीं मांगते। बस अपना काम करते हैं। हमारे शो में भी एक लाइन है कि वर्दी ऐसी चीज नहीं है जिसे कोई राह चलता आदमी खरीदकर पहन ले। जिसे इसे पहनने का मौका मिलता है, वह आम इंसान से ऊपर होता है। मैं आखिरी दिन तक खुद को तैयार करता रहा, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसे लोगों जैसा पूरी तरह बनना संभव नहीं है। हम सिर्फ उनके जैसा बनने की कोशिश कर सकते हैं। सवाल: इस प्रोजेक्ट का ऑडिशन कैसे हुआ? जवाब: मैंने पहले ऑडिशन दिया था। वह ऑडिशन मुकेश छाबड़ा सर के ऑफिस में हुआ था। वह हर प्रोजेक्ट में कोशिश करते हैं कि मैं ऑडिशन दूं। मुझे यह बात अच्छी लगती है कि इंडस्ट्री में कुछ काम करने के बाद भी ऑडिशन देने में मुझे कोई दिक्कत नहीं होती। ऑडिशन पसंद आने के बाद जब मैं डायरेक्टर से मिला तो उन्होंने मुझे ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के बारे में विस्तार से बताया। मैं हैरान था कि ऐसा कुछ हमारे इतिहास में हुआ है और हमें इसके बारे में ज्यादा पता नहीं है। मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी यह थी कि मुझे वर्दी पहनने और एक ऐसे इंसान को निभाने का मौका मिलेगा, जो आने वाली पीढ़ी के लिए उदाहरण है। सवाल: आपको दर्शकों से सबसे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या मिला? जवाब: एक व्यक्ति ने मुझे डीएम किया और लिखा- ‘आप एक्टिंग छोड़ो, एयरफोर्स जॉइन कर लो।’ इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट मेरे लिए कुछ नहीं हो सकता। इसके अलावा एयर चीफ एपी सिंह जी मुझसे मिले और उन्होंने कहा, ‘यार, तू लग रहा है। तुमने कमाल का काम किया है।’ यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। एयरफोर्स के सबसे बड़े अधिकारी जब आपके काम की तारीफ करें और आशीर्वाद दें तो उससे बड़ा सम्मान क्या हो सकता है। सवाल: धालीवाल की बेटी से मुलाकात कैसी रही? जवाब: स्क्रीनिंग के दौरान उनकी बेटी से मुलाकात हुई। वह दो मिनट की भावुक मुलाकात थी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि मुझसे क्या कहें और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उनसे क्या कहूं। ऐसा लग रहा था कि वह मेरी आंखों में अपने पिता की झलक देख रही हैं और मैं उनकी आंखों में धालीवाल साहब का एक हिस्सा देख रहा था। हम दोनों के पास शब्द कम पड़ गए थे। बस यही इच्छा थी कि जहां भी धालीवाल







