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डार्क या लाइट ग्रीन कौन सी सब्जियां हैं सेहत के लिये ज्यादा फायदेमंद? जानिये

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सब्जियों का रंग सिर्फ देखने में सुंदर नहीं होता, बल्कि वह उनके पोषण मूल्य (Nutrition) का भी संकेत देता है. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि डार्क ग्रीन (गहरे हरे रंग की) सब्जियां ज्यादा फायदेमंद होती हैं या लाइट ग्रीन (हल्के हरे रंग की). एक्सपर्ट्स के अनुसार, दोनों ही प्रकार की सब्जियां जरूरी हैं, लेकिन उनके पोषक तत्वों में फर्क होता है. आइए इसे आसान उदाहरणों से समझने की कोशिश करते हैं. डार्क ग्रीन सब्जियां क्या होती हैं?डार्क ग्रीन सब्जियां वे होती हैं जिनका रंग गहरा हरा होता है, क्योंकि उनमें क्लोरोफिल, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा ज्यादा होती है. उदाहरण:पालकमेथीसरसों का सागब्रोकलीहरी पत्तेदार सब्जियां डार्क ग्रीन सब्जियों के फायदेआयरन से भरपूर, खून की कमी में लाभकारी.कैल्शियम और विटामिन K ज्यादा, हड्डियों के लिए अच्छे.मजबूत एंटीऑक्सीडेंट, इम्युनिटी बढ़ाते हैं.दिल की बीमारियों और कैंसर के खतरे को कम करते हैं.डिटॉक्स में मददगार. निष्कर्ष: डार्क ग्रीन सब्जियां “पावरहाउस ऑफ न्यूट्रिशन” मानी जाती हैं. लाइट ग्रीन सब्जियां क्या होती हैं?लाइट ग्रीन सब्जियां हल्के हरे रंग की होती हैं और आमतौर पर पानी और फाइबर से भरपूर होती हैं. उदाहरण:लौकीतोरईटिंडाखीरापत्ता गोभी लाइट ग्रीन सब्जियों के फायदेशरीर को ठंडक देती हैं.पाचन तंत्र सुधारती हैं.वजन घटाने में सहायक.डिहाइड्रेशन से बचाती हैं.पेट हल्का रखती हैं. निष्कर्ष: लाइट ग्रीन सब्जियां शरीर को क्लींज और हाइड्रेट करती हैं. डार्क vs लाइट ग्रीन: मुख्य अंतरपोषण घनत्व:डार्क ग्रीन > लाइट ग्रीन फाइबर और पानी:लाइट ग्रीन ज्यादा आयरन और कैल्शियम:डार्क ग्रीन ज्यादा डाइटिंग / गर्मी में:लाइट ग्रीन बेहतर कौन‑सी ज्यादा फायदेमंद है?सच यह है कि कोई एक ज्यादा और दूसरी कम फायदेमंद नहीं. अगर आप एनीमिया, कमजोरी या इम्युनिटी पर ध्यान दे रहे हैं → डार्क ग्रीन सब्जियां.अगर आप वजन घटाना, पाचन या गर्मी में हल्का खाना चाहते हैं → लाइट ग्रीन सब्जियां. एक्सपर्ट की सलाहसबसे अच्छा तरीका है “रंगीन थाली”, जहां डार्क और लाइट दोनों तरह की सब्जियां शामिल हों. निष्कर्षडार्क ग्रीन सब्जियां पोषण में भारी होती हैं, जबकि लाइट ग्रीन सब्जियां शरीर को हल्का और संतुलित रखती हैं. सेहतमंद रहने के लिए किसी एक को चुनने की बजाय दोनों का संतुलित सेवन करना ही सबसे सही और फायदेमंद तरीका है.

महिलाओं की समस्याओं को ना करें नजरअंदाज, इस खामोश बीमारी का बढ़ रहा खतरा, डॉक्टरों ने जारी की चेतावनी

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होमताजा खबरlifestyle महिलाओं की समस्याओं को ना करें नजरअंदाज, इस खामोश बीमारी का बढ़ रहा खतरा Last Updated:May 05, 2026, 13:55 IST Ambala News: अक्सर ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की बीमारियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे उनमें गंभीर बीमारी बढ़ती जाती है. इसी कारण महिलाओं में एक शांत बीमारी तेजी से फैल रही है, जो लंबे समय तक शरीर में रहने के बाद कैंसर का रूप ले सकता है. शुरुआत में महिला को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती, लेकिन समय बीतने के साथ असामान्य ब्लीडिंग, पीरियड्स के बीच खून आना या मेनोपॉज़ के बाद दोबारा रक्तस्राव जैसे संकेत सामने आने लगते हैं. आइए एक्सपर्ट से इसके बारे में सबकुछ जानते हैं. अंबाला: भारत में गांव हो या शहर, कई जगह पर आज भी महिलाओं की सेहत अक्सर नजरअंदाज हो जाती है. इसी लापरवाही का फायदा उठाकर Cervical Cancer जैसी खामोश बीमारी धीरे-धीरे अपनी जड़ें मजबूत कर लेती है. दरअसल डॉक्टरों के मुताबिक, भारत में यह कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है और चिंता की बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर ही नहीं आते हैं. बता दें कि यह बीमारी ज्यादातर Human Papillomavirus (एचपीवी) नाम के वायरस के कारण होती है, जो लंबे समय तक शरीर में रहने के बाद कैंसर का रूप ले सकता है. शुरुआत में महिला को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती, लेकिन समय बीतने के साथ असामान्य ब्लीडिंग, पीरियड्स के बीच खून आना या मेनोपॉज के बाद दोबारा रक्तस्राव जैसे संकेत सामने आने लगते हैं. महिलाओं की बीमारी को किया जाता है नजरअंदाजवहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की आरएमओ डॉ. अदिति गौतम बताती हैं कि अक्सर महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जो आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकता है. उनका कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण कई मामलों में बीमारी आखिरी स्टेज में जाकर पकड़ में आती है. इसी बीच राहत की खबर यह है कि अब इस सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए देश में ही बनी HPV वैक्सीन उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि यह वैक्सीन 14 साल की बच्चियों के लिए सबसे ज्यादा प्रभावी है, लेकिन 45 साल तक की महिलाएं भी इसे लगवा सकती हैं. उन्होंने कहा कि नागरिक अस्पताल अंबाला में 14 से 15 साल की बच्चियां कोई हैं, तो उन्हें HPV वैक्सीन बिल्कुल नि:शुल्क रूप से लगाई जा रही है और माता-पिता को भी इस वैक्सीन के फायदे के बारे में बताया जा रहा है, ताकि वह ये वैक्सीन अपनी बच्चियों को लगवाएं. सोशल मीडिया पर इस वैक्सीन को लेकर काफी ज्यादा भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार यह वैक्सीन महिलाओं के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद है. इन बीमारियो का हो सकती हैं शिकारउन्होंने बताया कि अगर किसी भी महिलाओं को इस वैक्सीन के बारे में जानकारी लेनी है, तो वह नागरिक अस्पताल में आकर जानकारी ले सकते हैं. इसके साथ ही अभी तक नागरिक अस्पताल में कई बच्चियों ने यह वैक्सीन लगवाई है, जो बिल्कुल स्वस्थ है. उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर होता है, जिसके शुरुआती चरणों में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखते हैं, लेकिन बढ़ने पर अनियमित ब्लीडिंग (दो पीरियड्स के बीच, संभोग के बाद या मेनोपॉज के बाद), असामान्य गंध वाला गाढ़ा या खूनी डिस्चार्ज, पेल्विक दर्द और यौन संबंध के दौरान दर्द जैसी गंभीर परेशानियां शुरू हो सकती हैं. टीकाकरण से होगा फायदाउन्होंने कहा कि यह टीकाकरण अंबाला जिले के नागरिक अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी सभी जगह पर उपलब्ध हैं. वैसे निजी अस्पतालों में यह टीका लगभग 12000 रुपए में लगता है, जो काफी महंगा होता है. सरकारी कार्यक्रम के तहत यह सभी पात्र किशोरियों को निःशुल्क लगाया जा रहा है. अगले तीन महीनों तक चलने वाले इस अभियान में प्रत्येक पात्र किशोरी को टीके की केवल एक ही खुराक दी जाएगी. यह एक टीका जहां सर्वाइकल कैंसर से किशोरियों की रक्षा करेगा, तो वहीं इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है. वहीं मिली जानकारी के अनुसार, टीकाकरण के लिए OTP आधारित सहमति या अभिभावकों की लिखित सहमति अनिवार्य है. टीकाकरण के बाद लाभार्थी की जानकारी ऑनलाइन U-WIN पोर्टल पर दर्ज की जाएगी और पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक लिंक भेजा जाएगा, जिससे डिजिटल प्रमाण पत्र डाउनलोड किया जा सकेगा. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

स्ट्रोक के बाद पूरी तरह ठीक क्‍यों नहीं होता मरीज, क्या होती है गोल्डन विंडो? डॉक्‍टर ने बताई बेहद जरूरी बात

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भीषण गर्मी में अक्सर हीट स्ट्रोक के मामले देखने को मिलते हैं, इसके अलावा ब्रेन स्ट्रोक के केसेज भी आए दिन सामने आ रहे हैं. हालांकि भारत में स्ट्रोक के इलाज में पिछले कुछ साल में जबर्दस्त सुधार हुआ है. बेहतर इमरजेंसी केयर, तेज डायग्नोसिस और बेहतरीन मेडिकल सुविधाओं की वजह से अब पहले से कहीं अधिक मरीज स्ट्रोक से बच रहे हैं लेकिन इसके बावजूद एक ऐसी दिक्कत सामने आ रही है जो काफी गंभीर है. डॉक्टरों की मानें तो स्ट्रोक के इलाज के बाद मरीज जिंदा तो बच जाते हैं, लेकिन वे पूरी तरह ठीक नहीं हो पाते और उन्हें लंबे समय तक विकलांगता के साथ जीवन जीना पड़ता है. सबसे बड़ा सवाल है कि क्या स्ट्रोक दो-चार दिन में ठीक हो जाता है? स्ट्रोक के बाद कौन सी बड़ी दिक्कतें मरीजों में देखने को मिलती हैं? स्ट्रोक में गोल्डन विंडो क्या होती है? आइए इन सभी सवालों पर एचसीएएच के को फाउंडर डॉक्टर गौरव ठुकराल से जानते हैं. डॉक्टर ठुकराल कहते हैं, ‘आज भारत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हम सिर्फ इलाज कर रहे हैं, या सच में मरीजों को ठीक भी कर पा रहे हैं. अस्पतालों में स्ट्रोक का इलाज हो रहा है, जानें भी बच रही हैं लेकिन क्या रिकवरी उतनी ही मजबूत हो रही है? यही वह अंतर है जो भारत को अब समझना और भरना होगा.’ वे कहते हैं, ‘हमें स्ट्रोक के इलाज को सिर्फ जान बचाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए. सबसे जरूरी है कि स्ट्रोक के बाद रिकवरी कितनी जल्दी, कितनी संरचित और कितनी प्रभावी तरीके से शुरू होती है?’ डॉक्टर ठुकराल आगे कहते हैं कि स्ट्रोक के इलाज के बावजूद कुछ ऐसी बीमारियां हैं जो शरीर में बहुत तेजी से बढ़ती हैं. यही वजह है कि स्ट्रोक आने के बाद मरीज 2-4 दिन में सही नहीं होता बल्कि उसे पूरी तरह रिकवर होने में पूरे 3 महीने लग सकते हैं. वे बताते हैं कि स्ट्रोक के बाद मरीजों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और बैठकर रहने वाली जीवनशैली की समस्याएं सबसे ज्यादा होती हैं जो उनकी क्ववालिटी लाइफ को पूरी तरह खराब कर देती हैं. स्ट्रोक के बाद के हफ्ते बेहद अहम डॉक्टर ठुकराल कहते हैं कि स्ट्रोक के बाद शुरुआती कुछ हफ्ते बेहद अहम होते हैं.इस दौरान दिमाग न्यूरोप्लास्टिसिटी की अवस्था में होता है, जहां वह खुद को फिर से व्यवस्थित करने और नई क्षमताएं विकसित करने में सक्षम होता है. अगर इस समय सही और लगातार रिहेबिलिटेट किया जाए, तो मरीज दोबारा चलना, बोलना और अपनी स्वतंत्रता वापस पा सकता है.’ गोल्डन विंडो का केयरटेकर भी रखें ध्यान मरीज की रिकवरी का यह समय सीमित होता है. आमतौर पर यह अवधि कुछ हफ्तों से लेकर तीन महीने तक की होती है. अगर इस ‘गोल्डन विंडो’ को खो दिया जाए, तो रिकवरी की गति और प्रभाव दोनों ही काफी कम हो जाते हैं. जो सुधार कुछ हफ्तों में संभव था, वह महीनों में भी अधूरा रह सकता है या कभी पूरी तरह वापस नहीं आता.वे कहते हैं कि आज भारत में स्ट्रोक का इलाज मजबूत हो चुका है, लेकिन रिकवरी अभी भी कमजोर कड़ी बनी हुई है. देश को अब एक ऐसे हेल्थकेयर मॉडल की जरूरत है जहां रिकवरी को उतनी ही प्राथमिकता दी जाए जितनी इलाज को दी जाती है. रिकवरी कोई हल्की या कभी-कभार होने वाली प्रक्रिया नहीं है. यह एक गहन, अनुशासित और समयबद्ध उपचार है, जिसमें रोजाना कई बार थेरेपी की जरूरत होती है और यह कई हफ्तों तक लगातार चलती है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरुआती चरण में गहन और बार-बार होने वाली थेरेपी को ही बेहतर परिणामों की कुंजी माना जाता है. इसका ध्यान स्ट्रोक के पेशेंट के साथ रहने वाले अटेंडेंट और केयरटेकर को भी रखना चाहिए. क्या कहते हैं आंकड़े आंकड़े बताते हैं कि भारत में 6.3 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी प्रकार की विकलांगता के साथ जीवन जी रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस बोझ का बड़ा हिस्सा समय पर और सही पुनर्वास के जरिए कम किया जा सकता है. इसके बावजूद, देश में पुनर्वास सेवाओं का ढांचा बेहद सीमित है. पूरे देश में लगभग 1,251 स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन सेंटर ही मौजूद हैं, जो आबादी के अनुपात में बेहद कम हैं. इसका सीधा असर यह होता है कि लाखों मरीज समय पर और सही और पूरे उपचार से वंचित रह जाते हैं. इस वजह से हो रहा नुकसान डॉ. ठुकराल आगे कहते हैं कि समस्या सिर्फ सुविधाओं की नहीं है, बल्कि सोच और सिस्टम दोनों की है. अस्पतालों में डिस्चार्ज के समय मरीजों को स्पष्ट रिकवरी रोडमैप नहीं दिया जाता. न ही यह बताया जाता है कि शुरुआती 6 से 8 हफ्तों में गहन और निरंतर थेरेपी कितनी जरूरी है. परिणामस्वरूप, परिवार अक्सर इसे वैकल्पिक मानकर टाल देते हैं. आर्थिक पहलू इस चुनौती को और जटिल बना देता है. पुनर्वास सेवाएं अभी भी बीमा कवरेज के दायरे में पूरी तरह शामिल नहीं हैं. ऐसे में परिवार इसे एक अतिरिक्त खर्च के रूप में देखते हैं, जबकि वास्तव में यह एक दीर्घकालिक निवेश है. जब मरीज पूरी तरह रिकवर नहीं कर पाता, तो इसका असर सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता. उसकी काम करने की क्षमता प्रभावित होती है, परिवार पर देखभाल का दबाव बढ़ता है और धीरे-धीरे यह एक सामाजिक और आर्थिक बोझ में बदल जाता है. कोविड-19 महामारी ने इन खामियों को और उजागर किया. इलाज में आई रुकावटों और सेवाओं की कमी ने कई मरीजों की रिकवरी को प्रभावित किया और विकलांगता का बोझ बढ़ा दिया. तेजी से रिकवरी है जरूरी डॉक्टर कहते हैं कि तेजी से रिकवरी कोई विकल्प नहीं है, बल्कि जरूरत है. अगर हमें देश में विकलांगता का बोझ कम करना है, तो पुनर्वास को इलाज की निरंतर और अनिवार्य कड़ी के रूप में देखना होगा.

मिलिए कपिल साहू से: तमिलनाडु में विजय की भूस्खलन जीत के सूत्रधार | भारत समाचार

Nepal vs Oman Live Cricket Score: Follow latest updates from ICC Cricket World Cup League Two. (Picture Credit: X/CricketNep)

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 13:06 IST कपिल साहू ने एक स्वतंत्र कंसल्टेंसी शुरू करने के लिए 12 सहयोगियों के साथ I-PAC छोड़ दिया। कपिल साहू ने प्रशांत किशोर की इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) में अपनी विशेषज्ञता को निखारा तमिलनाडु चुनाव 2026: तमिलनाडु में विजय की तमिलिगा वेट्री कज़घम (टीवीके) के ऐतिहासिक जनादेश ने राजनीतिक पंडितों और लोगों को चौंका दिया है। अपने पहले चुनाव में टीवीके की 108 सीटों की उपलब्धि ने राज्य के साथ-साथ देश भर में विजय के प्रशंसकों के बीच उन्माद पैदा कर दिया है। विजय ने अब राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए समय मांगा है। कथित तौर पर उन्होंने विधानसभा सदन में बहुमत साबित करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। हालाँकि इस जीत का श्रेय काफी हद तक विजय की आभा को दिया जाता है, टीवीके के वास्तुकारों में से एक कपिल साहू थे। इससे पहले, प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करने से पहले विजय को रणनीति बनाने में मदद की थी। कौन हैं कपिल साहू? 2026 की सफलता से पहले, कपिल साहू ने प्रशांत किशोर की इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के साथ काम किया, जहां उन्होंने राजनीतिक अभियान, डेटा विश्लेषण, कथा निर्माण और रणनीतिक परामर्श का नेतृत्व किया। अंततः साहू ने एक स्वतंत्र कंसल्टेंसी शुरू करने के लिए 12 सहयोगियों के साथ I-PAC छोड़ दिया, और अपने साथ आम आदमी पार्टी (AAP) और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF) जैसी पार्टियों के साथ काम करने का ट्रैक रिकॉर्ड भी लेकर आए। हालाँकि, साहू की निर्णायक उपलब्धि टीवीके की चमत्कारी शुरुआत के साथ आई। उनके रणनीतिक लचीलेपन की अंतिम परीक्षा तब हुई जब अभियान हाई-प्रोफाइल संकटों की एक श्रृंखला से प्रभावित हुआ, जिसमें दुखद करूर भगदड़ जिसमें 41 लोगों की जान चली गई, और विजय के तलाक और कथित विवाहेतर संबंधों को लेकर मीडिया में हंगामा शामिल था। इन संभावित पटरी से उतरने के बावजूद, साहू के संकट प्रबंधन और कथा नियंत्रण ने यह सुनिश्चित किया कि टीवीके अभियान केंद्रित और अक्षुण्ण रहे, अंततः पार्टी को अपनी ऐतिहासिक सीटों की संख्या तक ले जाने में मदद मिली। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया मिलिए कपिल साहू से: तमिलनाडु में विजय की भूस्खलन जीत के सूत्रधार अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)विजय टीवीके की जीत(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके 108 सीटें(टी)कपिल साहू रणनीतिकार(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)विजय तलाक विवाद(टी)करूर भगदड़ की घटना

ममता के दो ‘एम’ फैक्टर का दर्जा, मुस्लिमों और महिलाओं ने दिया दादी का किला, बंगाल में खेला कमल!

ममता के दो 'एम' फैक्टर का दर्जा, मुस्लिमों और महिलाओं ने दिया दादी का किला, बंगाल में खेला कमल!

बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार प्रोटोटाइप अनुपात पूरी तरह से नजर आया। लंबे समय से ओलंपिक कांग्रेस (टीएमसी) की ताकत माने जाने वाली महिला और मुस्लिम वोटर एआई ‘दो एम फैक्टर’ इस बार के ड्राअल डॉक्युमेंट्स, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर देखने को मिला। महिला कारक पर बीजेपी का फोकसमहिला नटखट बिल के जाने को तोड़ दिया भाजपा गिर ने किया जोरदार प्रचार। यही नहीं, महिलाओं को केंद्र में रखने वाली पार्टी ने कई बड़े लॉन्च भी किए। इसका असर चुनाव में साफ दिख रहा है. आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई रेप और मार्केट जैसी घटना ने भी महिलाओं के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए, जिससे निवेशकों की पकड़ मजबूत होती नजर आई। मुस्लिम बटाएव की स्थिति मेंअब दूसरे ‘एम’ यानी मुस्लिम फैक्टर की बात करें तो इस बार यह कम्यूनिटी पहले की तरह एकजुट नहीं दिखती। ममता बनर्जी की राजनीति में मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन इस बार यह आंकड़ा टूटता नजर आया। इनसाइडर के अंदर भी चर्चा है कि एसआईआर, वक्फ और मुस्लिम लिस्ट से मुस्लिम अमीरों को बाहर कर दिया जाए, जैसे कि मुस्लिम पर ममता बनर्जी प्रभावी तरीके से कम्यूनिटी का पक्ष नहीं रख पातीं। इसी वजह से मुस्लिम वोटर पहले की तरह के साथ एकजुट नहीं रहे। हिंदू वोटरों का कट्टरपंथ बीजेपी की ओरदूसरी ओर, हिंदू वोटरों के पहले गुट भाजपा के पक्ष में अधिकांश लामबंद दिखाई देते हैं, जिसका प्रभावशाली साक्षात् दृश्य है। मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिले में भाजपा को 8 वें स्थान पर जीत मिली, जो कि मजबूत गढ़ माना जा रहा है। कई अनुपातों में परिवर्तनमालदा में भाजपा ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और पश्चिम बर्धमान जैसे सजावटी में भी मुस्लिम समुदाय का बंटवारा देखने को मिला। बहस का मानना ​​है कि ये दो बड़े फैक्टर (महिला और मुस्लिम) के खिलाफ चले गए। ये भी पढ़ें- बंगाल में ममता बनर्जी का किला कैसे टूटा, महिला वोट बैंक में सेंध से हिंदू उपदेश के ध्रुवीकरण तक सत्य गंवाने के 5 बड़े कारक प्रमुख चतुर्थांश पर भाजपा की जीतमुस्लिम बहुल बहरामपुर सीट से भाजपा के उम्मीदवार सुब्रत मैत्रा ने जीत हासिल की। इसके अलावा खारग्राम, कांडी, नाबाग्राम, जंगीपुर, मुर्शिदाबाद, बेलडांगा और बुरवन में भी भाजपा ने जीत दर्ज की। मालदा की इंग्लिश मार्केट सीट से बीजेपी के अमलान भादुड़ी ने 93,784 सीट से बड़ी जीत हासिल की, जबकि हबीबपुर सीट से जोयेल मुर्मू विजयी रहे। केंद्रीय नेतृत्व का सक्रिय प्रभावबीजेपी की जीत में केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका भी अहम रही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के कई देशों को लुभाया। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करीब 10 दिन से राज्य में डेट कर रहे हैं. चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव और बिप्लब देब समेत कई नेताओं ने लगातार पार्टी को मजबूत किया. भाजपा की रणनीति सिर्फ विधानसभा स्तर तक ही नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक बेहद सक्रिय रही, जिसका फायदा चुनावी नतीजों में साफ तौर पर दिख रहा है।

3 सदस्य, 3 पार्टियाँ, 3 जीत: तमिलनाडु, पुडुचेरी में लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन के परिवार की बड़ी जीत | भारत समाचार

Nepal vs Oman Live Cricket Score: Follow latest updates from ICC Cricket World Cup League Two. (Picture Credit: X/CricketNep)

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 12:38 IST मार्टिन परिवार, जो अपने बड़े लॉटरी व्यवसाय के लिए प्रसिद्ध मार्टिन ग्रुप चलाता है, हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दाता रहा है। इन तीन सदस्यों में सबसे ताकतवर आधव अर्जुन रेड्डी हैं, जो विजय के सबसे भरोसेमंद लेफ्टिनेंटों में से एक हैं। विधानसभा चुनाव 2026: भारत के लॉटरी किंग के नाम से मशहूर व्यवसायी सैंटियागो मार्टिन के परिवार के तीन सदस्यों ने तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव जीता है, जो विभिन्न दलों में जीत के साथ एक दुर्लभ राजनीतिक क्षण है। मार्टिन की पत्नी, दामाद और बेटे, लीमा रोज़ मार्टिन, आधव अर्जुन और जोस चार्ल्स मार्टिन ने क्रमशः तीन अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़ा और अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। लीमा ने एआईएडीएमके के टिकट पर तमिलनाडु के लालगुडी निर्वाचन क्षेत्र से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 2,500 से अधिक मतों से हराया। परिणाम महत्वपूर्ण है क्योंकि लालगुडी, जिसे लंबे समय तक द्रमुक का गढ़ माना जाता था, दो दशकों से अधिक समय के बाद अन्नाद्रमुक में स्थानांतरित हो गया। मार्टिन के दामाद और अभिनेता विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) के वरिष्ठ नेता आधव अर्जुन ने 17,000 से अधिक वोटों से जीतकर विकीवक्कम निर्वाचन क्षेत्र से निर्णायक जीत हासिल की। उनकी जीत नवगठित टीवीके के बढ़ते राजनीतिक पदचिह्न को जोड़ती है। पुडुचेरी में सैंटियागो मार्टिन के बेटे जोस चार्ल्स मार्टिन ने कामराज नगर सीट 10,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीती। उन्होंने अपनी ही पार्टी लाचिया जननायक काची (एलजेके) के टिकट पर चुनाव लड़ा, जिसने चुनावी शुरुआत की और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ गठबंधन किया। विधानसभा चुनाव परिणाम 2026 अभिनेता से नेता बने विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) ने पहली बार दमदार प्रदर्शन किया है और 108 सीटों के साथ स्पष्ट रूप से सबसे आगे बनकर उभरी है। द्रमुक 59 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है, उसके बाद अन्नाद्रमुक 47 सीटों पर है, जबकि कांग्रेस सिर्फ 5 सीटों पर सिमट गई है। यह फैसला राज्य में एक तीव्र राजनीतिक मंथन का प्रतीक है, जिसमें टीवीके ने अपने पहले चुनावी प्रदर्शन में खुद को प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित किया है। इस बीच, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने पुडुचेरी में सत्ता बरकरार रखी। 30 सदस्यीय पुडुचेरी विधानसभा में एनआर कांग्रेस ने 12 सीटें और भाजपा ने चार सीटें जीतीं। मार्टिन परिवार के बारे में सब कुछ मार्टिन परिवार, जो अपने बड़े लॉटरी व्यवसाय के लिए प्रसिद्ध मार्टिन ग्रुप चलाता है, हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दाता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, समूह ने चुनावी बांड के माध्यम से विभिन्न राजनीतिक दलों को लगभग 1,300 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। जबकि समूह को अतीत में प्रवर्तन एजेंसियों की जांच का भी सामना करना पड़ा है, पार्टी लाइनों से परे परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ चुनावी सफलता तमिलनाडु और पुडुचेरी के राजनीतिक परिदृश्य में इसकी बढ़ती उपस्थिति को उजागर करती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया 3 सदस्य, 3 पार्टियां, 3 जीत: तमिलनाडु, पुडुचेरी में लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन के परिवार की बड़ी जीत अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सैंटियागो मार्टिन परिवार चुनाव जीतता है(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु चुनाव परिणाम(टी)पुडुचेरी विधानसभा चुनाव(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम टीवीके(टी)एआईएडीएमके बनाम डीएमके(टी)भारत के लॉटरी किंग(टी)राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एनडीए

क्या है हंता वायरस जिसने ली 3 लोगों की जान? जानें इस घातक वायरस के लक्षण और बचाव से जुड़ी जानकारी

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Hantavirus Outbreak Symptoms Causes : दुनिया अभी महामारियों के दौर से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि एक और वायरस ‘हंता वायरस’ (Hantavirus) ने दस्तक दे दी है. हाल ही में अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर इस वायरस के कारण 3 लोगों की मौत की खबर ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को अलर्ट कर दिया है. यह वायरस चूहों से फैलता है और इसकी मृत्यु दर काफी अधिक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया ‘डिजीज आउटब्रेक न्यूज’ और विशेषज्ञों के अनुसार, अर्जेंटीना से दक्षिण अफ्रीका जा रहे क्रूज जहाज ‘MV Hondius’ पर यह संक्रमण फैला, जिसमें 3 यात्रियों की जान चली गई. तो चलिए जानते हैं कि यह वायरस क्‍या है, कितना खतरनाक है और बचाव का क्‍या तरीका है.  हंता वायरस असल में क्या है?जवाब: हंता वायरस विषाणुओं का एक परिवार है जो मुख्य रूप से चूहों (Rodents) के जरिए फैलता है. यह कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इसकी घातकता इसे डरावना बनाती है. यह इंसान के फेफड़ों (HPS) या किडनी (HFRS) पर सीधा हमला करता है. फेफड़ों में संक्रमण होने पर सांस लेना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे मरीज की मौत हो सकती है. यह चूहों से इंसानों तक कैसे पहुँचता है?जवाब: यह वायरस हवा के जरिए फैलता है, जिसे ‘एरोसोल’ (Aerosolization) प्रक्रिया कहते हैं. जब संक्रमित चूहों का मल, मूत्र या लार सूख जाती है और धूल के कणों में मिल जाती है, तो वह हवा में तैरने लगती है. जब कोई व्यक्ति उस हवा में सांस लेता है, तो वायरस सीधे उसके फेफड़ों में चला जाता है. इसके अलावा, संक्रमित सतह को छूने और फिर मुँह या नाक पर हाथ लगाने से भी यह फैल सकता है. क्या यह कोरोना की तरह एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है?जवाब: राहत की बात यह है कि हंता वायरस आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता. यह केवल चूहों के सीधे संपर्क या उनके दूषित वातावरण में रहने से होता है. हालांकि, दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले ‘एंडिस’ (Andes) स्ट्रेन में इंसान से इंसान में फैलने के कुछ दुर्लभ मामले देखे गए हैं, लेकिन फिलहाल के मामले चूहों से ही संबंधित हैं. हंता वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?जवाब: इसके लक्षण शुरू में एक सामान्य फ्लू (Flu) की तरह दिखते हैं, जो भ्रम पैदा कर सकते हैं: -तेज बुखार और कंपकंपी (Chills).-हाथों-पैरों और पीठ की मांसपेशियों में तेज दर्द.-सिरदर्द, चक्कर आना और थकान.-पेट में दर्द, उल्टी या दस्त (डायरिया). सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. संक्रमण गंभीर होने पर क्या होता है?जवाब: संक्रमण के 4 से 10 दिनों के बाद ‘हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम’ (HPS) के लक्षण दिखते हैं: -फेफड़ों में पानी भर जाना.-सांस लेने में भारी तकलीफ (ऐसा महसूस होना जैसे छाती पर कोई बैठा हो).-खांसी और लो ब्लड प्रेशर.-किडनी का काम बंद करना (HFRS की स्थिति में). इसका मृत्यु दर (Death Rate) कितना है?जवाब: हंता वायरस को बहुत घातक माना जाता है. CDC (Centers for Disease Control) के अनुसार, हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) में मृत्यु दर 38% से 40% के बीच है. यानी, अगर  10 लोग इससे गंभीर रूप से बीमार होते हैं, तो उनमें से 4 की जान जाने का खतरा रहता है. क्या इसका कोई इलाज या वैक्सीन है?जवाब: फिलहाल हंता वायरस का कोई विशेष इलाज, दवा (Specific drug) या टीका (Vaccine) उपलब्ध नहीं है. इलाज पूरी तरह से ‘सपोर्टिव केयर’ पर निर्भर करता है. मरीज को अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट, वेंटिलेटर या ‘ECMO’ मशीन पर रखा जाता है ताकि उसके फेफड़ों को काम करने में मदद मिल सके. जितनी जल्दी मेडिकल हेल्प मिलेगी, बचने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी. चूहों से खुद को कैसे बचाएं?जवाब: बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है. घर की दीवारों या दरवाजों के छेदों को बंद करें ताकि चूहे अंदर न आ सकें. रसोई और खाने के सामान को हमेशा ढककर या एयरटाइट डिब्बों में रखें. अगर आप किसी पुराने कमरे या कबाड़खाने की सफाई कर रहे हैं, तो N95 मास्क और दस्ताने जरूर पहनें. चूहों के मल पर झाड़ू लगाने की जगह, उस पर ब्लीच या कीटाणुनाशक का छिड़काव करें ताकि धूल न उड़े. मास्क और सैनिटाइज़र कितने प्रभावी हैं?जवाब: हंता वायरस की बाहरी परत (Lipid envelope) बहुत कमजोर होती है. इसे साबुन, डिटर्जेंट या अल्कोहल वाले सैनिटाइज़र से आसानी से खत्म किया जा सकता है. मास्क पहनने से हवा में मौजूद संक्रमित धूल के कण फेफड़ों तक नहीं पहुँच पाते. डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?जवाब: अगर  आप किसी ऐसी जगह गए हैं जहाँ चूहे थे और उसके कुछ दिनों बाद आपको बुखार, शरीर में दर्द और सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो बिना देरी किए डॉक्टर के पास जाएं और उन्हें चूहों के संपर्क वाली बात जरूर बताएं. क्या पालतू जानवरों से भी हंता वायरस फैलने का खतरा हैजवाब: राहत की बात यह है कि कुत्ते, बिल्ली या गाय-भैंस जैसे पालतू जानवर हंता वायरस से संक्रमित होकर इसे इंसानों में नहीं फैलाते. यह वायरस केवल विशिष्ट प्रजाति के जंगली चूहों (जैसे डियर माइस या राइस रैट) में ही पाया जाता है. हालांकि, बिल्लियाँ या कुत्ते शिकार के दौरान संक्रमित चूहों को घर के अंदर ला सकते हैं, जिससे घर के सदस्यों के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अपने पालतू जानवरों की स्वच्छता का भी ध्यान रखें. क्या हंता वायरस ‘फूड पॉइजनिंग’ जैसा हो सकता है?जवाब: हंता वायरस के शुरुआती लक्षण जैसे पेट दर्द, उल्टी और दस्त अक्सर लोगों को ‘फूड पॉइजनिंग’ का भ्रम देते हैं. लेकिन अंतर यह है कि फूड पॉइजनिंग आमतौर पर कुछ घंटों या 1-2 दिन में ठीक हो जाती है, जबकि हंता वायरस के मामले में पेट की समस्याओं के साथ-साथ तेज बुखार बना रहता है और कुछ दिनों बाद सांस लेने में गंभीर तकलीफ शुरू हो जाती है. अगर पेट खराब होने के साथ सांस फूलने लगे, तो इसे साधारण फूड पॉइजनिंग समझने की गलती न करें. याद रखें कि हंता वायरस बेशक एक खतरनाक बीमारी है, लेकिन यह कोरोना की तरह पूरी दुनिया में एक साथ नहीं फैलती. यह उन्हीं इलाकों में खतरा पैदा करती

कचरा मैनेजमेंट में कलेक्टरों को सीधी कार्रवाई की पावर:भोपाल केस में SC की सख्ती, ऑन स्पॉट लगेगा जुर्माना; सभी राज्यों से मांगा रोडमैप

कचरा मैनेजमेंट में कलेक्टरों को सीधी कार्रवाई की पावर:भोपाल केस में SC की सख्ती, ऑन स्पॉट लगेगा जुर्माना; सभी राज्यों से मांगा रोडमैप

सुप्रीम कोर्ट में भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लग रही आग की सुनवाई ने देशभर की वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को कोर्ट ने संकेत दिए कि कचरा प्रबंधन के लिए एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत कलेक्टरों को सीधे अधिकार देने और मोबाइल कोर्ट चलाने का प्लान तैयार किया जाएगा, ताकि मौके पर ही कार्रवाई और जुर्माना हो सके। कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा है कि 22 मई को होने वाली अगली सुनवाई तक कलेक्टरों को पावर देने का रोडमैप, कचरा छंटाई और प्रोसेसिंग की योजना और पेनाल्टी व मोबाइल कोर्ट की व्यवस्था पर ठोस रिपोर्ट पेश करें। दरअसल, भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लगने वाली आग को लेकर पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने मार्च 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। इस पर 31 जुलाई 2023 को भोपाल नगर निगम पर 1 करोड़ 80 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। जुर्माने के खिलाफ निगम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां 16 मई 2025 से सुनवाई चल रही है। इस केस में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव समेत 6 वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है। सुनवाई में देशभर के चीफ सेक्रेटरी को बुलाया डॉ. सुभाष सी. पांडे ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा गया कि ये केस भोपाल या इंदौर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की समस्या है। इस सुनवाई में देश के विभिन्न मुख्य सचिवों को बुलाया गया था। कोर्ट ने साफ कहा है कि नियमों का पालन सही ढंग से नहीं हो रहा है। ऐसे में स्वच्छ भारत अभियान पूरी तरह से लागू नहीं हो सकेगा। कुछ सीएस ने अपनी समस्याएं भी बताईं। कर्नाटक, एमपी, बिहार समेत अन्य मुख्य सचिवों से बात भी की। उन्होंने कहा कि नया प्लान बना रहे हैं। सभी चीफ सेक्रेटरी ने भरी हामी डॉ. पांडे ने बताया, कोर्ट ने कहा कि 1 साल के लिए एनवायरमेंट प्रोटेक्शन 1986 की धारा 5 का अधिकार कलेक्टर को दे रहे हैं। यानी, सभी अधिकारों को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और निगम से लेकर कलेक्टरों को पॉवर देंगे। सभी चीफ सेक्रेटरी ने भी हामी भरी है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था डॉ. पांडे ने बताया, सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि 1 अप्रैल से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 लागू हो जाएंगे। नए नियम देश में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या की पहचान करने और उसे हल करने के तरीके में पूरी तरह से शामिल हैं। इस नियम के मकसद को पूरा करने के लिए ऐसे निर्देश जारी करना सही समझते हैं, जो न सिर्फ भोपाल नगर निगम पर बल्कि पूरे देश पर लागू हों। इसका कारण यह है कि लोकल बॉडीज द्वारा SWM रूल्स, 2016 के हिसाब से पालन की स्थिति कुछ हद तक या तो पालन कर रही हैं या नहीं। सालाना रिपोर्ट में स्थिति ठीक नहीं कोर्ट ने कहा था कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की वेस्ट मैनेजमेंट पर सालाना रिपोर्ट 2021-2022 बताती है कि देश में घरेलू, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और सहायक कामों से हर दिन करीब 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (TPD) पैदा होता है। भोपाल और इंदौर जैसे कई शहरों में कलेक्शन एफिशिएंसी में सुधार हुआ है, लेकिन प्रोसेसिंग की दर अभी भी एक बड़ी रुकावट बनी हुई है। जो कचरा बिना प्रोसेस किया जाता है, वह अक्सर बिना साइंटिफिक लैंडफिल या पुराने डंपसाइट में चला जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आज की पीढ़ी मौजूदा लागू करने की कमियों के बने रहने तक और ज्यादा कानूनी सुधारों का इंतजार नहीं कर सकती। पुराने कचरे के जमा होने, ग्राउंडवाटर और हवा के कंटैमिनेशन के लिए 1 अप्रैल से लागू मौजूदा आदेशों का तुरंत पालन करने की जरूरत है। जिम्मेदार प्रतिनिधि, समय की जरूरतों के हिसाब से जवाब देने वाले प्रतिनिधि भी होते हैं। नियम आसान हैं और इन्हें लोकल बॉडीज के एडमिनिस्ट्रेशन के साथ कॉरपोरेटर, काउंसलर/मेयर और उनके चेयरपर्सन और वार्ड सदस्यों को थोड़ी भागीदारी से सीखने और लागू करने की जरूरत है। भोपाल के केस के बारे में ये कहा पिछली सुनवाई के आखिरी में भोपाल निगम से जुड़े केस को लेकर कहा था कि आदमपुर छावनी डंप साइट के मामले में पुराने कचरे के लिए कुछ और पेपरवर्क पूरा करने की जरूरत है। टेंडर को फाइनल करने में कुछ और समय लगेगा, इसलिए वह इस मामले में टेंडर को फाइनल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगती हैं। उन्हें यह समय दिया जाता है। भोपाल की ग्राउंड रियलिटी तीन दिन पहले भी लग चुकी हैं आग तीन दिन पहले भी आदमपुर खंती में आग लग चुकी है। खंती में डंप लिगेसी वेस्ट के निपटारे का काम शुरू करने के लिए एक दिन पहले ही पूजा की गई थी। आग लिगेसी वेस्ट के साथ नए ड्राय वेस्ट में भी लगी थी। इस नए ड्राय वेस्ट का उपयोग एनटीपीसी के प्लांट में टोरिफाइड चारकोल बनाने में होना था। आग के कारण एक बार फिर इलाके में धुआं फैल गया और ग्रामीण दिन भर परेशान होते रहे। साइट पर 6.5 से 7.5 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट जमा खंती में डंप लिगेसी वेस्ट के निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद निगम ने 26 मार्च को सौराष्ट्र एन्वायरो प्राइवेट लिमिटेड को वर्क ऑर्डर जारी किया। साइट पर 6.5 से 7.5 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट जमा है। कंपनी को इसके लिए 55 करोड़ का भुगतान किया जाएगा।

बंगाल के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को होगा | भारत समाचार

Nepal vs Oman Live Cricket Score: Follow latest updates from ICC Cricket World Cup League Two. (Picture Credit: X/CricketNep)

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 11:52 IST न्यूज18 विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को होगा चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया बंगाल के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को होगा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

ममता बनर्जी की हार पर विवेक अग्निहोत्री हुए खुश:कहा- बंगाल में हमारे साथ मारपीट करवाई, हमले करवाए, अब लोग निडर सिर ऊंचा कर चलेंगे

ममता बनर्जी की हार पर विवेक अग्निहोत्री हुए खुश:कहा- बंगाल में हमारे साथ मारपीट करवाई, हमले करवाए, अब लोग निडर सिर ऊंचा कर चलेंगे

4 मई को पश्चिम बंगाल के चुनाव के नतीजे घोषित हुए, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारी मतों से हार गईं। चुनाव का नतीजा आने के बाद अब द कश्मीर फाइल्स और द बंगाल फाइल्स बना चुके विवेक रंजन अग्निहोत्री ने ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए उनकी हार पर खुशी जाहिर की है। उनका दावा है कि ममता बनर्जी ने उन्हें बंगाल से बैन किया था, जिसके चलते उन्हें बंगाल जाने की अनुमति नहीं दी गई और वो अवॉर्ड लेने तक नहीं जा सके। विवेक का कहना है कि बंगाल की जनता इसके बाद निडर होकर जिएगी। विवेक रंजन अग्निहोत्री ने द बंगाल फाइल्स की रिलीज रोके जाने से जुड़ा एक पुराना वीडियो जारी कर लिखा है, ‘दोबारा कभी नहीं। जो लोग नहीं जानते, उनके लिए, ममता बनर्जी ने मुझे बंगाल में रोक दिया था, जब द कश्मीर फाइल्स रिलीज हुई थी। इस फिल्म को सिनेमाघरों से हटा दिया गया था और उन्होंने कहा था कि मुझे बंगाल में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’ आगे विवेक ने लिखा, ‘पिछले साल, उन्होंने द बंगाल फाइल्स को भी पश्चिम बंगाल में पूरी तरह बैन कर दिया। हमारे ट्रेलर लॉन्च को रोक दिया गया। हम पर हमले हुए और मारपीट भी हुई। मेरे खिलाफ कई FIR दर्ज की गईं। मुझे बंगाल में पूरी तरह से बैन कर दिया गया था। मैं तो अपना अवॉर्ड लेने के लिए गवर्नर के पास भी नहीं जा सका। लेकिन हमने हार नहीं मानी। चुनाव के दौरान हमने कोशिश की कि द बंगाल फाइल्स ज्यादा से ज्यादा लोगों तक (छुपकर) पहुंच सके।’ आखिर में विवेक रंजन अग्निहोत्री ने लिखा, ‘मुझे खुशी है कि हमने हार नहीं मानी और अपने तरीके से लड़ाई जारी रखी। और आखिर में यह बड़ी जीत मिली। बंगाल के महान लोगों को बधाई। अब आप बिना डर के, सिर ऊंचा करके चल सकते हैं।’ बता दें कि विवेक रंजन अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी फिल्म द बंगाल फाइल्स को बंगाल में बैन करने की मांग उठी थी। तब विवेक रंजन अग्निहोत्री ने फिल्म का ट्रेलर लॉन्च इवेंट कोलकाता में आयोजित किया। इवेंट के बीच ही कुछ लोगों ने वहां तोड़फोड़ कर ट्रेलर दिखाए जाने से रोक दिया। तब भी विवेक ने ममता बनर्जी पर इवेंट रुकवाने के आरोप लगाए थे।