पाक राष्ट्रपति जरदारी बोले- हम यहां हिंदुओं को झेलते हैं:जावेद अख्तर भड़के, कहा- खुद भुट्टो से शादी कर सुर्खियों में आए; ट्रोलर्स को भी फटकारा

भारतीय डायलॉग राइटर और गीतकार जावेद अख्तर ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के उस बयान पर भड़क गए, जिसमें उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान में हिंदुओं को झेलते हैं। जावेद अख्तर ने उनकी आलोचना करते हुए उन्हें संवेदनहीन कहा है। जब कुछ लोग जावेद अख्तर के बयान की निंदा करने लगे, तो उन्होंने एक-एक कर सबको फटकार लगाई है। जरदारी बोले- हम हिंदुओं को झेलते हैं, हम मुस्लिम जरदारी ने पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पर बात करते हुए भारत के हिंदुओं से उनकी तुलना की थी। जरदारी ने कहा, “भारतीयों का नजरिया अलग है। उनके दिमाग में अपना एजेंडा है। वे अखंड भारत में विश्वास करते हैं। लेकिन बीच में बहुत कुछ ऐसा है, जिसे वे भूल चुके हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हम मुसलमान हैं और वे नहीं हैं। लेकिन हम ऐसे सोच वाले मुसलमान हैं, जो पाकिस्तान में 3-4 फीसदी हिंदू आबादी को सहन करते हैं। वे उतने ही आजाद और अच्छे हैं, जितने कहीं और थे। वे उनके साथ रहने के बजाय हमारे साथ रहना पसंद करेंगे।” इस बयान पर जावेद अख्तर ने ऑफिशियल सोशल मीडिया से लिखा है, “पाकिस्तान के मिस्टर जरदारी, जो बेनजीर भुट्टो से शादी करने के बाद सुर्खियों में आए थे, कहते हैं कि उनके देश में 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को वे बर्दाश्त करते हैं। मैं समझता हूं, मिस्टर जरदारी, आप हमेशा उन सभी चीजों के प्रति असंवेदनशील रहे हैं, जिनका प्रतिशत 10 प्रतिशत से भी कम है।” जावेद अख्तर ने दबे शब्दों में किया ट्रोल जावेद अख्तर ने अपने बयान में 10 प्रतिशत का जिक्र इसलिए किया, क्योंकि जरदारी को मिस्टर टेन पर्सेंट कहा जाता है। पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के पति रहे जरदारी को 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक की शुरुआत में “मिस्टर टेन परसेंट” उपनाम मिला था। उन पर सरकारी परियोजनाओं और कारोबारी सौदों के सिलसिले में 10 फीसदी कमीशन मांगने के आरोप लगे थे। जरदारी ने इन आरोपों से इनकार किया था। 1990 में तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान द्वारा भुट्टो सरकार को बर्खास्त किए जाने के बाद यह उपनाम और ज्यादा चर्चित हुआ। जावेद अख्तर ने ट्रोलर्स को भी लगाई फटकार एक तरफ जहां जावेद अख्तर के बयान की सराहना हो रही है, वहीं एक पाकिस्तानी यूजर ने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या आपने कभी भारत में अल्पसंख्यकों के लिए अपनी आवाज उठाई है? नहीं। कड़वी सच्चाई यह है कि भारत में जिंदा रहने के लिए हर गैर-हिंदू को हिंदू अभिजात वर्ग की चापलूसी और उन्हें खुश करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उनके खिलाफ तमाम आरोपों के बावजूद जरदारी एक देश के राष्ट्रपति बन गए। फिर भी आप भारत में और हर जगह एक शून्य ही हैं और शून्य ही बने रहेंगे, चाहे आप उनके तलवे कितनी भी चाटते रहें। आप बेहद शर्मनाक और घटिया इंसान हैं। जावेद अख्तर ने अपने अंदाज में इसका भी जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “आपका पहला सवाल मुझे बताता है कि आप मेरे बारे में कितना कम जानते हैं। और आपके आखिरी शब्द बताते हैं कि आपकी ‘क्लास’ क्या है।” जावेद अख्तर ने पहले भी दिए पाक विरोधी बयान नरक और पाकिस्तान में से नरक चुनूंगा: 17 मई 2025 को मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की किताब ‘नरकातला स्वर्ग’ के विमोचन पर जावेद अख्तर ने पाकिस्तान को नरक से बदतर बताते हुए तीखा बयान दिया था। उन्होंने कहा था- ‘अगर पाकिस्तान और नरक में से चुनना हो तो मैं नरक चुनूंगा।’ भारत का विभाजन गलत था, पाकिस्तान हिंदुस्तान से ही निकला: 2023 में लाहौर के फैज फेस्टिवल में जावेद अख्तर ने स्पष्ट कहा कि भारत का विभाजन ऐतिहासिक भूल थी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान हिंदुस्तान का हिस्सा था, जो 1947 में दो देशों में बंट गया। अख्तर ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के लोग मूल रूप से एक ही सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हैं और विभाजन ने अनावश्यक दुश्मनी पैदा की। इस बयान पर पाकिस्तानी दर्शकों ने तालियां बजाईं, लेकिन भारत-पाक मीडिया में विवाद छा गया। पाकिस्तान में सेकुलरिज्म लगभग मर चुका है: भारत-पाक संबंधों पर एक चर्चा में जावेद अख्तर ने पाकिस्तान की सामाजिक स्थिति पर तीखा प्रहार किया। उनका मानना था कि वहां धर्मनिरपेक्षता नाममात्र को रह गई है और कट्टरवाद हावी हो चुका है। पाकिस्तान के कुछ बुद्धिजीवियों ने इसे ओवर-जनरलाइजेशन कहा, लेकिन भारत में ये बयान साहित्यिक सर्कल तक सीमित रहा। जावेद ने उदाहरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत देखकर साफ है कि सेक्युलरिज्म खतरे में है।
मुकेश खन्ना बोले- जन गण मन हटाओ वंदे मारतम लाओ:राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में फर्क भूले, पंजाब सिंध को कहा पंजाब सिंग, 2 और गड़बड़ की

शक्तिमान एक्टर मुकेश खन्ना ने हाल ही में राष्ट्रगान जन गण मन को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि इसकी जगह वंदे मातरम को देनी चाहिए। हालांकि ये बयान देते हुए उनसे बड़ी गड़बड़ हो गई। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाना चाहिए, जबकि ये पहले से ही राष्ट्रगीत है। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रगान जन गण मन हाते हुए भी गड़बड़ कर दी। हाल ही में आईएएनएस को दिए बयान में मुकेश खन्ना ने कहा, ‘मैं तीन साल पहले बोल चुका हूं कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाओ (ये राष्ट्रगीत ही है)। ये जन मन गण (जन गण मन) हमारे देश का नहीं है। ये जो क्वीन एलिजाबेथ थीं, उनके मान में रवींद्रनाथ टेगौर ने एक स्तुति गान लिखा था, उसको हमने मान लिया, भाग्य विधाता, पंजाब सिंग (सिंध)। अरे ये हमारा नहीं है। हमारा है वंदे मातरम, लता जी (मंगेशकर) ने गाया है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘जितनी जल्दी हो, उतनी जल्दी ये जन मण गण (जन गण मन) को हटाओ और वंदे मातरम को लाओ। मोदी जी ने शुरुआत कर दी है। हर स्कूल में ये अनिवार्य हो चुका है कि पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। वो भी 3-4 अंतरे नहीं पूरे 7 अंतरे। मुझे खुशी है कि वंदे मातरम उठ रहा है। मेरा गाना भी बन रहा है, मैं उसे 6 महीने में रिलीज कर दूंगा।’ केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान जन-गण-मन और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को नए निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि नियमों में पहले से तय है कि किन कार्यक्रमों में दोनों को गाना या बजाना जरूरी है। मंत्रालय ने कहा कि एक ही कार्यक्रम में दोनों में से पहले वंदे और फिर जन-गण-मन होगा। जिन राज्यों में राज्य गीत होता है, वहां भी सीक्वेंस का पालन करना होगा। 9 जुलाई को सभी राज्यों और मंत्रालयों को पत्र भेजा गया, जिसकी जानकारी शुक्रवार को सामने आई है। सभी राज्यों से कहा गया है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हमेशा उनके असली शब्दों, सही उच्चारण और तय नियमों के अनुसार ही गाया और बजाया जाए। इसके लिए दोनों की ऑफिशियल कॉपी मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई है। 28 जनवरी को पहली बार आदेश आया इससे पहले 28 जनवरी को भी सरकार ने सभी राज्यों को यही आदेश दिया था। इसमें मुताबिक सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत में राष्ट्रगीत बजाया जाएगा। वंदे मातरम् के समय हर व्यक्ति को खड़ा होना होगा। राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे। इनकी कुल अवधि 3.10 मिनिट है। पहले दो अंतरे गाए जाते थे। सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा। अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों को उस दौरान खड़ा होना जरूरी नहीं होगा। बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं। वंदे मातरम एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।
ट्रम्प ने PAK-सऊदी-तुर्किये के रक्षा समझौते पर खुशी जताई:बोले- तीनों देश मजबूती से अपनी रक्षा कर सकेंगे; एक पर हमला हुआ तो मिलकर जवाब देंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस डील से तीनों देश मिलकर अपनी रक्षा ज्यादा मजबूती से कर सकेंगे। ट्रम्प ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मुझे बहुत खुशी है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने आखिरकार मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। इससे पता चलता है कि मिडिल-ईस्ट एकजुट हो रहा है और देश अब ज्यादा मजबूती से अपनी रक्षा कर सकेंगे।” ट्रम्प ने तीनों देशों के नेताओं को बधाई देते हुए डील को “बड़ा, साहसी और अहम पहला कदम” बताया। एक पर हमला हुआ तो तीनों साथ देंगे इस समझौते पर 7 अगस्त को मक्का में हस्ताक्षर हुए थे। समझौते पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए। इसके मुताबिक, पाकिस्तान, सऊदी अरब या तुर्किये में से किसी एक पर हमला होता है तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यानी किसी एक देश पर हमला होने पर बाकी दोनों देश उसके साथ खड़े होंगे। डील का मकसद तीनों देशों के बीच सैन्य और सुरक्षा सहयोग बढ़ाना है। एर्दोगन बोले- आगे और देश जुड़ सकते हैं एर्दोगन ने कहा है कि आगे दूसरे देश भी इस रक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने खास तौर पर मिस्र के जुड़ने की संभावना बताई है। एर्दोगन ने कहा कि यह समझौता दुनिया को एक अहम संदेश देता है। भारत की भी इस डील पर नजर भारत ने कहा है कि वह इस समझौते के असर की समीक्षा कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत इसे अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के नजरिए से देख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।
ट्रम्प ने PAK-सऊदी-तुर्किये के रक्षा समझौते पर खुशी जताई:बोले- तीनों देश मजबूती से अपनी रक्षा कर सकेंगे; एक पर हमला हुआ तो मिलकर जवाब देंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस डील से तीनों देश मिलकर अपनी रक्षा ज्यादा मजबूती से कर सकेंगे। ट्रम्प ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मुझे बहुत खुशी है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने आखिरकार मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। इससे पता चलता है कि मिडिल-ईस्ट एकजुट हो रहा है और देश अब ज्यादा मजबूती से अपनी रक्षा कर सकेंगे।” ट्रम्प ने तीनों देशों के नेताओं को बधाई देते हुए डील को “बड़ा, साहसी और अहम पहला कदम” बताया। 7 अगस्त को मक्का समझौते पर साइन हुए इस समझौते पर 7 अगस्त को मक्का में हस्ताक्षर हुए थे। समझौते पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए। एर्दोगन ने कहा है कि आगे दूसरे देश भी इस रक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने खास तौर पर मिस्र के जुड़ने की संभावना बताई है। डील का मकसद तीनों देशों के बीच सैन्य और सुरक्षा सहयोग बढ़ाना है। यानी किसी एक देश पर हमला होने पर बाकी दोनों देश उसके साथ खड़े होंगे। एक पर हमला हुआ तो बाकी दो देश साथ देंगे इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब या तुर्किये में से किसी एक देश पर हमला हुआ तो इसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यानी जिस देश पर हमला होगा, उसे बाकी दोनों देशों का साथ मिलेगा। कैसे मदद करेंगे तीनों देश? भारत की भी इस डील पर नजर भारत ने कहा है कि वह इस समझौते के असर की समीक्षा कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत इसे अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के नजरिए से देख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।
लुधियाना के आरव को चाहिए 9 करोड़ का इंजेक्शन:2 साल उम्र, वजन सिर्फ 10Kg, चल नहीं पाता; सोनू सूद ने लोगों से मांगी मदद

लुधियाना का 2 साल का मासूम आरव ठाकुर इन दिनों जिंदगी की सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ रहा है। आरव को दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 है। जन्म के बाद करीब डेढ़ साल तक बिल्कुल सामान्य रहने वाले आरव में अचानक शारीरिक दिक्कतें शुरू हुईं, जिसके बाद जांच में बीमारी की पुष्टि हुई। अब उसकी जिंदगी करीब 9 करोड़ रुपए के महंगे इंजेक्शन पर टिकी है। परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं है, इसलिए मदद की उम्मीद में माता-पिता ने प्रशासन से लेकर आम लोगों तक हर दरवाजा खटखटाया है। इसी बीच बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने आरव के लिए सोशल मीडिया पर भावुक अपील करते हुए देशवासियों से उसकी मदद के लिए आगे आने की गुहार लगाई है। परिवार समराला चौक के पास रहता है। अब विस्तार से जानिए पूरा मामला… सोनू सूद ने वीडियो जारी अपील की एक्टर सोनू सूद ने वीडियो जारी कर कहा- नमस्कार मैं आप सबसे एक अपील करना चाहता हूं कि एक छोटा सा बच्चा जिसका नाम है आरव ठाकुर, और उसे एसएमए 2 (SMA Type 2) की बीमारी है। और हमें सबको पता है कि इसके लिए बहुत सारे फंड्स चाहिए जो एक परिवार अकेला नहीं ले सकता। सो हम सबको मिलकर आरव ठाकुर को बचाना है। उसके लिए 9 करोड़ का जो इंजेक्शन लगता है, हम सबको अपनी तरफ से थोड़ा बहुत योगदान करके उस 9 करोड़ की राशि को इकट्ठा करके उन माता-पिता को उनके एक जो नया जीवन है, उनके बच्चे के रूप में उन्हें देना है। तो चलिए आज ही मिलकर अपनी तरफ से थोड़ा बहुत जो भी आप कर सकते हैं, आज ही कीजिए इग्नोर मत कीजिए। अगर हम मिलकर आरव को एक नया जीवन दे पाएं तो मुझे लगता है कि हमारा जो जीना है वो सफल होगा। और इस वीडियो को स्प्रेड कीजिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़कर हम आरव को और उनके माता-पिता को एक नया जीवनदान दे पाएं। ************* ये खबर भी पढ़ें: चंडीगढ़- मां ने बेटे को बचाने के लिए किडनी दी: मोहाली में ₹7 लाख का ट्रांसप्लांट फेल, अब मां-बेटे दोनों बीमार; 1 बीघा जमीन भी बिकी ‘जिस बेटे को जन्म दिया, उसकी जिंदगी बचाने के लिए मां ने अपनी किडनी भी दे दी। मगर, मोहाली के एक प्राइवेट अस्पताल में कराए ट्रांसप्लांट के बाद किडनी फेल हो गई। अल्ताफ की तबीयत बिगड़ती चली गई तो पिता उसे लेकर चंडीगढ़ PGI पहुंचे। (पढ़ें पूरी खबर)
ट्रम्प ने दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास घटाए:कहा-ईरान को परमाणु हथियार मुक्त करने से इनकार किया, उत्तर कोरिया ने धमकी दी थी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को पेंटागन को दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास कम करने का आदेश दिया। ट्रम्प ने कहा कि दक्षिण कोरिया ने ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की अमेरिकी कोशिश में मदद करने से इनकार कर दिया था। उत्तर कोरिया ने शुक्रवार को अमेरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ कड़े कदम उठाने की धमकी दी थी। उसने सैन्य अभ्यासों को आक्रामक युद्ध की तैयारी बताया और कहा कि इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है। ट्रम्प ने अभ्यास को महंगा और अनुचित बताया ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से इस कोशिश में अमेरिका का साथ देने को कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि ये सैन्य अभ्यास महंगे हैं और उत्तर कोरिया को गलत संदेश देते हैं। दक्षिण कोरिया के 18 हजार सैनिकों वाले 11 दिन के ये सैन्य अभ्यास इसी हफ्ते शुरू होने थे। ट्रम्प ने कहा कि अब इन्हें पूरी तरह रद्द करना संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने युद्ध सचिव पीट हेगसेथ को अभ्यासों में काफी कटौती करने का आदेश दिया है। अभ्यास से क्षेत्रीय शांति में दोनों देशों की भूमिका मजबूत होगी अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सेनाओं को साथ मिलकर अलग-अलग परिस्थितियों में सैन्य अभियान का अभ्यास करना था। इसमें लाइव-फायर, पानी से भरे इलाके को पार करना और सैन्य उपकरण पहुंचाना शामिल था। अमेरिकी सेना ने कहा कि इससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा में दोनों देशों की भूमिका मजबूत होगी। ट्रम्प और किम तीन बार मिल चुके हैं ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरियाई के सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन से तीन बार मिले थे। इन बैठकों में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा हुई थी और दोनों की आखिरी मुलाकात 2019 में हुई थी। अभ्यास घटाने की उनकी घोषणा से एक दिन पहले उन्होंने किम के साथ अपनी एक फोटो पोस्ट की थी। ट्रम्प ने फोटो के साथ लिखा था कि दोनों नेताओं के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं, लेकिन इस फोटो में चेहरा दोस्ताना नहीं दिख रहा है। पहले भी सैन्य अभ्यास रोकने की घोषणा कर चुके हैं ट्रम्प यह पहली बार नहीं है, जब ट्रम्प ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास खत्म करने की कोशिश की है। अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने अचानक घोषणा कर इन युद्ध अभ्यासों को उकसाने वाला बताया था। 2018 में सिंगापुर में किम जोंग-उन से मुलाकात के बाद ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा था, हम युद्ध अभ्यास रोकेंगे, जिससे हमारे बहुत पैसे बचेंगे। यह तब तक रहेगा, जब तक हमें यह नहीं लगता कि भविष्य की बातचीत सही दिशा में नहीं जा रही है।
ट्रम्प ने दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास घटाए:कहा-ईरान को परमाणु हथियार मुक्त करने से इनकार किया, उत्तर कोरिया ने धमकी दी थी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को पेंटागन को दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास कम करने का आदेश दिया। ट्रम्प ने कहा कि दक्षिण कोरिया ने ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की अमेरिकी कोशिश में मदद करने से इनकार कर दिया था। उत्तर कोरिया ने शुक्रवार को अमेरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ कड़े कदम उठाने की धमकी दी थी। उसने सैन्य अभ्यासों को आक्रामक युद्ध की तैयारी बताया और कहा कि इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है। ट्रम्प ने अभ्यास को महंगा और अनुचित बताया ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से इस कोशिश में अमेरिका का साथ देने को कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि ये सैन्य अभ्यास महंगे हैं और उत्तर कोरिया को गलत संदेश देते हैं। दक्षिण कोरिया के 18 हजार सैनिकों वाले 11 दिन के ये सैन्य अभ्यास इसी हफ्ते शुरू होने थे। ट्रम्प ने कहा कि अब इन्हें पूरी तरह रद्द करना संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने युद्ध सचिव पीट हेगसेथ को अभ्यासों में काफी कटौती करने का आदेश दिया है। अभ्यास से क्षेत्रीय शांति में दोनों देशों की भूमिका मजबूत होगी अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सेनाओं को साथ मिलकर अलग-अलग परिस्थितियों में सैन्य अभियान का अभ्यास करना था। इसमें लाइव-फायर, पानी से भरे इलाके को पार करना और सैन्य उपकरण पहुंचाना शामिल था। अमेरिकी सेना ने कहा कि इससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा में दोनों देशों की भूमिका मजबूत होगी। ट्रम्प और किम तीन बार मिल चुके हैं ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरियाई के सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन से तीन बार मिले थे। इन बैठकों में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा हुई थी और दोनों की आखिरी मुलाकात 2019 में हुई थी। अभ्यास घटाने की उनकी घोषणा से एक दिन पहले उन्होंने किम के साथ अपनी एक फोटो पोस्ट की थी। ट्रम्प ने फोटो के साथ लिखा था कि दोनों नेताओं के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं, लेकिन इस फोटो में चेहरा दोस्ताना नहीं दिख रहा है। पहले भी सैन्य अभ्यास रोकने की घोषणा कर चुके हैं ट्रम्प यह पहली बार नहीं है, जब ट्रम्प ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास खत्म करने की कोशिश की है। अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने अचानक घोषणा कर इन युद्ध अभ्यासों को उकसाने वाला बताया था। 2018 में सिंगापुर में किम जोंग-उन से मुलाकात के बाद ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा था, हम युद्ध अभ्यास रोकेंगे, जिससे हमारे बहुत पैसे बचेंगे। यह तब तक रहेगा, जब तक हमें यह नहीं लगता कि भविष्य की बातचीत सही दिशा में नहीं जा रही है।
अमेरिकी सैनिकों को मारने या पकड़ने पर मिलेगा ₹25 लाख:ईरानी सेना का ऐलान; महिला को दोगुना इनाम, मारने वाला हथियार भी खरीदा जाएगा

ईरान की सेना ने किसी अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़ने वाले व्यक्ति को 25 लाख रुपए का इनाम देने का ऐलान किया है। अगर यह काम कोई महिला करती है तो इनाम की रकम दोगुनी कर दी जाएगी। ईरानी सेना के कमांडर-इन-चीफ अमीर हातमी ने कहा कि यह योजना उन लोगों की कई मांगों के बाद बनाई गई है। उन लोगों के लिए जो फाइनेंशियल जिहाद के जरिए देश के युद्ध प्रयासों में आर्थिक रूप से मदद करना चाहते हैं। हातमी ने तेहरान में एक भाषण के दौरान यह बात कही। हातमी ने ट्रम्प पर साधा निशाना हातमी ने कहा कि इस संघर्ष ने अमेरिका के सैन्य दबदबे को कमजोर कर दिया है और कई देशों को अपनी सुरक्षा के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने ईरान की हार के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका का क्षेत्र घोषित करने की बात कही थी। द जेरूसलम पोस्ट के मुताबिक, हातमी ने दावा किया कि अमेरिकी सेना को प्रभावी रूप से पीछे हटने पर मजबूर किया गया है और अब उसे फारस की खाड़ी, ओमान सागर या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में प्रवेश की अनुमति नहीं है। 28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट से तेल ढुलाई प्रभावित रही 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल ढुलाई लगातार प्रभावित रही। समुद्री बारूदी सुरंगों, मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे, अमेरिका और ईरान की नाकेबंदी तथा बढ़ी बीमा लागत के कारण इस रास्ते से हर दिन गुजरने वाला कच्चा तेल 2 करोड़ बैरल से घटकर 37 लाख बैरल रह गया। ———- ये खबर भी पढ़ें… ईरान से समझौते को लेकर खाड़ी देश ट्रम्प से नाराज:बातचीत का नतीजा नहीं निकलने से सहयोगी देशों की बेचैनी बढ़ी ईरान के साथ समझौते की अमेरिकी कोशिशों से उसके कुछ खाड़ी सहयोगी निराश हैं। द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इन देशों को लग रहा है कि लंबे समय से बातचीत चलने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच अब तक कोई पक्का समझौता नहीं हो पाया है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी सैनिकों को मारने या पकड़ने पर मिलेगा ₹25 लाख:ईरानी सेना का ऐलान; महिला को दोगुना इनाम, मारने वाला हथियार भी खरीदा जाएगा

ईरान की सेना ने किसी अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़ने वाले व्यक्ति को 25 लाख रुपए का इनाम देने का ऐलान किया है। अगर यह काम कोई महिला करती है तो इनाम की रकम दोगुनी कर दी जाएगी। ईरानी सेना के कमांडर-इन-चीफ अमीर हातमी ने कहा कि यह योजना उन लोगों की कई मांगों के बाद बनाई गई है। उन लोगों के लिए जो फाइनेंशियल जिहाद के जरिए देश के युद्ध प्रयासों में आर्थिक रूप से मदद करना चाहते हैं। हातमी ने तेहरान में एक भाषण के दौरान यह बात कही। हातमी ने ट्रम्प पर साधा निशाना हातमी ने कहा कि इस संघर्ष ने अमेरिका के सैन्य दबदबे को कमजोर कर दिया है और कई देशों को अपनी सुरक्षा के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने ईरान की हार के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका का क्षेत्र घोषित करने की बात कही थी। द जेरूसलम पोस्ट के मुताबिक, हातमी ने दावा किया कि अमेरिकी सेना को प्रभावी रूप से पीछे हटने पर मजबूर किया गया है और अब उसे फारस की खाड़ी, ओमान सागर या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में प्रवेश की अनुमति नहीं है। 28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट से तेल ढुलाई प्रभावित रही 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल ढुलाई लगातार प्रभावित रही। समुद्री बारूदी सुरंगों, मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे, अमेरिका और ईरान की नाकेबंदी तथा बढ़ी बीमा लागत के कारण इस रास्ते से हर दिन गुजरने वाला कच्चा तेल 2 करोड़ बैरल से घटकर 37 लाख बैरल रह गया। ———- ये खबर भी पढ़ें… ईरान से समझौते को लेकर खाड़ी देश ट्रम्प से नाराज:बातचीत का नतीजा नहीं निकलने से सहयोगी देशों की बेचैनी बढ़ी ईरान के साथ समझौते की अमेरिकी कोशिशों से उसके कुछ खाड़ी सहयोगी निराश हैं। द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इन देशों को लग रहा है कि लंबे समय से बातचीत चलने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच अब तक कोई पक्का समझौता नहीं हो पाया है। पूरी खबर पढ़ें…
बांग्लादेश बोला- पूर्व पीएम शेख हसीना को वापस भेजो:बातचीत के लिए सही माहौल जरूरी, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा टली

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित दिल्ली यात्रा फिलहाल टलती नजर आ रही है। दोनों देशों के बीच कई हफ्तों से यात्रा की तारीख को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन रविवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा हालात में यात्रा के लिए सही माहौल नहीं है। ढाका में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ए.के. शाहिदुल करीम ने कहा कि भारत शेख हसीना बांग्लादेश वापस भेजा जाए। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 21 अगस्त को पहली बार भारत दौरे पर आने वाले थे। हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बिगड़ा माहौल ढाका में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता करीम ने 5 अगस्त को नई दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस का खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हसीना ने भारत की जमीन से राजनीतिक बयान दिए, जिससे यात्रा के लिए बना माहौल खराब हुआ। बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहरा चुकी है। करीम ने कहा कि बांग्लादेश पहले भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर चुका है। ढाका चाहता है कि तारिक की यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच सही व्यवस्था बनाया जाए। ढाका ने भारत के सामने रखीं 2 मांगें बांग्लादेश ने भारत के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। करीम ने कहा कि अब ढाका भारत के जवाब का इंतजार कर रहा है। हालांकि, विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में यह साफ नहीं हुआ कि यात्रा की तारीख पर बातचीत किस स्तर पर अटकी है। भारत ने तारि दिल्ली आने का न्योता दिया भारत की ओर से तारिक रहमान को दिल्ली आने का न्योता पहले ही दिया जा चुका है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जब तारिक के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में ढाका पहुंचे थे, तब उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से यह निमंत्रण दिया था। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने हाल ही में कहा था कि बिम्सटेक के मौजूदा अध्यक्ष होने के नाते तारिक को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने का भी न्योता मिला है। इससे पहले दोनों देशों के बीच अगस्त के तीसरे हफ्ते में तारिक की दो दिन की दिल्ली यात्रा को लेकर बातचीत की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, तब भी तारीख पर अंतिम फैसला नहीं हुआ था। हाई कमिश्नर से मुलाकात के बाद यात्रा की उम्मीद बढ़ी थी इसी तनाव के बीच भारत के बांग्लादेश में हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। ढाका में पद संभालने के बाद यह तारिक के साथ उनकी पहली औपचारिक मुलाकात थी। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री प्रेस विंग के मुताबिक, दोनों के बीच कई अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत हुई। इस दौरान ढाका ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की उम्मीद भी जताई। मुलाकात के बाद त्रिवेदी ने बातचीत को ‘बहुत अच्छी’ बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश आगे की ओर देख रहे हैं और द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर सकारात्मक सोच है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन लोगों के हित में अच्छे रिश्ते बनाए रखना दोनों की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके कुछ ही घंटों बाद त्रिवेदी नई दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद तारिक की दिल्ली यात्रा को लेकर उम्मीदें बढ़ी थीं। लेकिन कुछ ही दिनों में ढाका का रुख फिर सख्त नजर आने लगा है।








