वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इमोशनल हुईं:सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी की जयंती पर गीत सुनते हुए आंखों में आए आंसू

बेंगलुरु में मंगलवार को महान कर्नाटक गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भावुक हो गईं। कार्यक्रम में गीत सुनते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए। दरअसल, यह कार्यक्रम बेंगलुरु के चौडैया मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया था। सीतारमण कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं। सुब्बुलक्ष्मी की परपोती एस ऐश्वर्या और एस सौंदर्या ने भी समारोह में प्रस्तुति दी थी। ऐश्वर्या और सौंदर्या ने अपनी परदादी की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाया है। कार्यक्रम में उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी की कुछ रचनाएं प्रस्तुत कीं। समारोह में संगीत प्रेमियों ने सुब्बुलक्ष्मी और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान को याद किया। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द बायोपिक फिल्म आएगी एमएस सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै में हुआ था। वह भारत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल थीं। 1998 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द एक बायोपिक फिल्म आएगी। रश्मिका मंदाना फिल्म में उनका किरदार निभाएंगी। फिल्म का आधिकारिक लॉन्च 16 सितंबर 2026 को उनकी 110वीं जयंती पर चेन्नई के द म्यूजिक एकेडमी में किया गया। गौतम तिन्ननुरी फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं, जिन्होंने पहले ‘जर्सी’ और ‘किंगडम’ जैसी फिल्में बनाई हैं। रश्मिका से पहले साई पल्लवी का नाम इस बायोपिक के लिए सामने आया था। रश्मिका पहली बार ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शख्सियत का किरदार निभाएंगी, जिसकी पहचान मुख्य रूप से कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से जुड़ी है। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी थे फैन एस.एस.सुब्बूलक्ष्मी कर्नाटक की महान गायिका थीं, जिनके गाए हुए भजन विष्णु सहास्त्रनामम को यूट्यूब पर 10 करोड़ बार सुना जा चुका है। वहीं भजन गोविंदम को 17 मिलियन और श्री वेंकटेश्वरा सुप्रभातम को 47 मिलियन बार सुना गया है। पद्मश्री से लेकर भारत रत्न तक, ऐसा कोई नामी अवॉर्ड नहीं जो इनके नाम ना हो। आवाज में वो आकर्षण था कि महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू भी इनके प्रशंसकों में से एक रहे। महात्मा गांधी खास फरमाइश पर इनसे रघुपति राघव राजा राम सुनते थे। नीली साड़ी इन पर इतनी जंचती थी कि इनके नाम पर ही उस रंग का नाम एमएस ब्लू रख दिया गया। जानिए कैसे देश की सबसे बड़ी गायिका बनीं एम.एस.सुब्बूलक्ष्मी? एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी उर्फ कुंजम्मा का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै (तमिलनाडु) में हुआ था। उनकी मां शानमुकावादिर अम्माल देवदासी समाज का हिस्सा थीं जो वीणा बजाती थीं और पिता सुब्रमण्यम अय्यर एक सिंगर। मां ने उनकी ट्रेनिंग मशहूर पं. नारायण राव व्यास से करवाई और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने पहली रिकॉर्डिंग की। सुब्बुलक्ष्मी मां की स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान उनका साथ देते हुए भजन गाया करती थीं। उनकी पहली परफॉर्मेंस 1929 में मद्रास म्यूजिक एकेडमी के मंच पर हुई, तब वो महज 13 साल की थीं। द वायर को दिए इंटरव्यू में सुब्बुलक्ष्मी ने बताया था कि एक दिन वो घर के बाहर बैठीं मिट्टी का घर बना ही रही थीं कि कोई उन्हें उठाकर सीधे मां के पास मंच पर ले गया। मां करीब 50-100 लोगों के सामने परफॉर्म कर रही थीं और वो चाहती थीं कि सुब्बुलक्ष्मी भी चंद गाने सुनाएं। उन्होंने मिट्टी से सने हाथ पोछे और गाना शुरू किया, तो म्यूजिक एकेडमी तालियों से गूंज उठी। इसके बाद उन्हें लगातार गाने के मौके दिए जाने लगे। उस जमाने के मशहूर पत्रकार टी. सदाशिवम ने 1936 में हुई एक सुब्बुलक्ष्मी की इस परफॉर्मेंस के बाद तमिल वीकली मैगजीन आनंदा विकातम में फ्रंटपेज आर्टिकल लिखा, जिसके बाद उनके कॉन्सर्ट में भारी भीड़ पहुंचने लगी। काम के सिलसिले में हुई मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और परिवार के खिलाफ जाकर शादी की। सदाशिवम जानते थे कि सुब्बुलक्ष्मी का हुनर सिर्फ मंच तक सीमित रहने के लिए नहीं है। फिल्ममेकर के. सुब्रह्मण्यम से सिफारिश कर सदाशिवम ने सुब्बुलक्ष्मी को फिल्म सेवासदन में लीड रोल दिलवाया। 1938 की ये फिल्म जबरदस्त हिट रही और सुब्बुलक्ष्मी साउथ का बड़ा नाम बनकर उभरीं। सुब्बुलक्ष्मी के गानों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए पति सदाशिवम ने खुद पैसे लगाकर फिल्में बनाने का फैसला किया। सुब्बुलक्ष्मी के सुझाव पर सदाशिवम ने मीराबाई पर पहली फिल्म मीरा (1945) बनाई। फिल्म में सुब्बुलक्ष्मी को ही मीराबाई का लीड रोल दिया गया। मीरा का रोल निभाने के लिए सुब्बुलक्ष्मी खुद उन सभी जगहों पर जाकर रहीं, जहां मीरा ने कृष्ण भक्ति में समय बिताया था। 1944 में फिल्म की शूटिंग न्यूटोन स्टूडियो, मद्रास में शुरू हुई, जिसके बाद टीम ने जयपुर, वृंदावन, चित्तौड़ और द्वारका का चयन किया। फिल्म के कॉन्सेप्ट से प्रभावित होकर उदयपुर के महाराजा ने हाथी-घोड़ों के साथ फिल्म बनाने के लिए अपना पैलेस इस्तेमाल करने की इजाजत से लेकर हर तरह से मदद की। महाराजा के मंत्री की मदद से उन्हें शाही हाथी-घोड़े मिले और साथ ही महल में कहीं भी कभी भी शूटिंग करने की इजाजत भी। शूटिंग के लिए महल की शाही डांसर्स भी दी गईं। फिल्म में नजर आए कई एक्स्ट्रा कलाकार भी शाही लोग थे। 136 मिनट की फिल्म में थे सुब्बुलक्ष्मी के 20 गाने 3 नवंबर 1945 को दिवाली पर फिल्म मीरा रिलीज की गई। 136 मिनट की इस फिल्म में 20 गाने थे, जो सुब्बुलक्ष्मी ने ही गाए थे। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी बड़ी हिट रही कि दो साल बाद कुछ सीन को रीशूट कर 1947 में हिंदी में मीराबाई नाम से फिर रिलीज किया गया था। प्रीमियर में पहुंचे थे माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरू 21 नवंबर 1947 को मीराबाई फिल्म रिलीज हुई, जिससे सुब्बुलक्ष्मी तमिल स्टार से नेशनल स्टार बन गईं। फिल्म में सरोजिनी नायडू ने सुब्बुलक्ष्मी का परिचय करवाते हुए उन्हें नाइटेंगल ऑफ इंडिया (भारत की बुलबुल) नाम दिया था। फिल्म के प्रीमियर में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी पहुंचे थे। इनके अलावा लॉर्ड माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, विजयालक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी जैसी देश की अन्य बड़ी हस्तियां भी थीं। फिल्म देखने के बाद जवाहरलाल नेहरू और माउंटबेटन सुब्बुलक्ष्मी के फैन बन गए थे। फिल्म मीरा तमिल सिनेमा में म्यूजिकल कल्ट साबित हुई। ये फिल्म आज भी भारत की 100 सबसे महान फिल्मों की लिस्ट में शामिल है। मीरा हिट होने के बाद उन्हें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इमोशनल हुईं:सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी की जयंती पर गीत सुनते हुए आंखों में आए आंसू

बेंगलुरु में मंगलवार को महान कर्नाटक गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भावुक हो गईं। कार्यक्रम में गीत सुनते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए। दरअसल, यह कार्यक्रम बेंगलुरु के चौडैया मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया था। सीतारमण कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं। सुब्बुलक्ष्मी की परपोती एस ऐश्वर्या और एस सौंदर्या ने भी समारोह में प्रस्तुति दी थी। ऐश्वर्या और सौंदर्या ने अपनी परदादी की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाया है। कार्यक्रम में उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी की कुछ रचनाएं प्रस्तुत कीं। समारोह में संगीत प्रेमियों ने सुब्बुलक्ष्मी और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान को याद किया। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द बायोपिक फिल्म आएगी एमएस सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै में हुआ था। वह भारत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल थीं। 1998 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द एक बायोपिक फिल्म आएगी। रश्मिका मंदाना फिल्म में उनका किरदार निभाएंगी। फिल्म का आधिकारिक लॉन्च 16 सितंबर 2026 को उनकी 110वीं जयंती पर चेन्नई के द म्यूजिक एकेडमी में किया गया। गौतम तिन्ननुरी फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं, जिन्होंने पहले ‘जर्सी’ और ‘किंगडम’ जैसी फिल्में बनाई हैं। रश्मिका से पहले साई पल्लवी का नाम इस बायोपिक के लिए सामने आया था। रश्मिका पहली बार ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शख्सियत का किरदार निभाएंगी, जिसकी पहचान मुख्य रूप से कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से जुड़ी है। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी थे फैन एस.एस.सुब्बूलक्ष्मी कर्नाटक की महान गायिका थीं, जिनके गाए हुए भजन विष्णु सहास्त्रनामम को यूट्यूब पर 10 करोड़ बार सुना जा चुका है। वहीं भजन गोविंदम को 17 मिलियन और श्री वेंकटेश्वरा सुप्रभातम को 47 मिलियन बार सुना गया है। पद्मश्री से लेकर भारत रत्न तक, ऐसा कोई नामी अवॉर्ड नहीं जो इनके नाम ना हो। आवाज में वो आकर्षण था कि महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू भी इनके प्रशंसकों में से एक रहे। महात्मा गांधी खास फरमाइश पर इनसे रघुपति राघव राजा राम सुनते थे। नीली साड़ी इन पर इतनी जंचती थी कि इनके नाम पर ही उस रंग का नाम एमएस ब्लू रख दिया गया। जानिए कैसे देश की सबसे बड़ी गायिका बनीं एम.एस.सुब्बूलक्ष्मी? एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी उर्फ कुंजम्मा का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै (तमिलनाडु) में हुआ था। उनकी मां शानमुकावादिर अम्माल देवदासी समाज का हिस्सा थीं जो वीणा बजाती थीं और पिता सुब्रमण्यम अय्यर एक सिंगर। मां ने उनकी ट्रेनिंग मशहूर पं. नारायण राव व्यास से करवाई और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने पहली रिकॉर्डिंग की। सुब्बुलक्ष्मी मां की स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान उनका साथ देते हुए भजन गाया करती थीं। उनकी पहली परफॉर्मेंस 1929 में मद्रास म्यूजिक एकेडमी के मंच पर हुई, तब वो महज 13 साल की थीं। द वायर को दिए इंटरव्यू में सुब्बुलक्ष्मी ने बताया था कि एक दिन वो घर के बाहर बैठीं मिट्टी का घर बना ही रही थीं कि कोई उन्हें उठाकर सीधे मां के पास मंच पर ले गया। मां करीब 50-100 लोगों के सामने परफॉर्म कर रही थीं और वो चाहती थीं कि सुब्बुलक्ष्मी भी चंद गाने सुनाएं। उन्होंने मिट्टी से सने हाथ पोछे और गाना शुरू किया, तो म्यूजिक एकेडमी तालियों से गूंज उठी। इसके बाद उन्हें लगातार गाने के मौके दिए जाने लगे। उस जमाने के मशहूर पत्रकार टी. सदाशिवम ने 1936 में हुई एक सुब्बुलक्ष्मी की इस परफॉर्मेंस के बाद तमिल वीकली मैगजीन आनंदा विकातम में फ्रंटपेज आर्टिकल लिखा, जिसके बाद उनके कॉन्सर्ट में भारी भीड़ पहुंचने लगी। काम के सिलसिले में हुई मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और परिवार के खिलाफ जाकर शादी की। सदाशिवम जानते थे कि सुब्बुलक्ष्मी का हुनर सिर्फ मंच तक सीमित रहने के लिए नहीं है। फिल्ममेकर के. सुब्रह्मण्यम से सिफारिश कर सदाशिवम ने सुब्बुलक्ष्मी को फिल्म सेवासदन में लीड रोल दिलवाया। 1938 की ये फिल्म जबरदस्त हिट रही और सुब्बुलक्ष्मी साउथ का बड़ा नाम बनकर उभरीं। सुब्बुलक्ष्मी के गानों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए पति सदाशिवम ने खुद पैसे लगाकर फिल्में बनाने का फैसला किया। सुब्बुलक्ष्मी के सुझाव पर सदाशिवम ने मीराबाई पर पहली फिल्म मीरा (1945) बनाई। फिल्म में सुब्बुलक्ष्मी को ही मीराबाई का लीड रोल दिया गया। मीरा का रोल निभाने के लिए सुब्बुलक्ष्मी खुद उन सभी जगहों पर जाकर रहीं, जहां मीरा ने कृष्ण भक्ति में समय बिताया था। 1944 में फिल्म की शूटिंग न्यूटोन स्टूडियो, मद्रास में शुरू हुई, जिसके बाद टीम ने जयपुर, वृंदावन, चित्तौड़ और द्वारका का चयन किया। फिल्म के कॉन्सेप्ट से प्रभावित होकर उदयपुर के महाराजा ने हाथी-घोड़ों के साथ फिल्म बनाने के लिए अपना पैलेस इस्तेमाल करने की इजाजत से लेकर हर तरह से मदद की। महाराजा के मंत्री की मदद से उन्हें शाही हाथी-घोड़े मिले और साथ ही महल में कहीं भी कभी भी शूटिंग करने की इजाजत भी। शूटिंग के लिए महल की शाही डांसर्स भी दी गईं। फिल्म में नजर आए कई एक्स्ट्रा कलाकार भी शाही लोग थे। 136 मिनट की फिल्म में थे सुब्बुलक्ष्मी के 20 गाने 3 नवंबर 1945 को दिवाली पर फिल्म मीरा रिलीज की गई। 136 मिनट की इस फिल्म में 20 गाने थे, जो सुब्बुलक्ष्मी ने ही गाए थे। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी बड़ी हिट रही कि दो साल बाद कुछ सीन को रीशूट कर 1947 में हिंदी में मीराबाई नाम से फिर रिलीज किया गया था। प्रीमियर में पहुंचे थे माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरू 21 नवंबर 1947 को मीराबाई फिल्म रिलीज हुई, जिससे सुब्बुलक्ष्मी तमिल स्टार से नेशनल स्टार बन गईं। फिल्म में सरोजिनी नायडू ने सुब्बुलक्ष्मी का परिचय करवाते हुए उन्हें नाइटेंगल ऑफ इंडिया (भारत की बुलबुल) नाम दिया था। फिल्म के प्रीमियर में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी पहुंचे थे। इनके अलावा लॉर्ड माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, विजयालक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी जैसी देश की अन्य बड़ी हस्तियां भी थीं। फिल्म देखने के बाद जवाहरलाल नेहरू और माउंटबेटन सुब्बुलक्ष्मी के फैन बन गए थे। फिल्म मीरा तमिल सिनेमा में म्यूजिकल कल्ट साबित हुई। ये फिल्म आज भी भारत की 100 सबसे महान फिल्मों की लिस्ट में शामिल है। मीरा हिट होने के बाद उन्हें
एसआई भर्ती री-एग्जाम-2021 के एडमिट कार्ड अपलोड:2.18 लाख कैंडिडेट्स, 11 जिलों में 666 सेंटर; 20 दिन में मिलेगा रिजल्ट

राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से सब-इंस्पेक्टर/ प्लाटून कमांडर संयुक्त प्रतियोगी री एग्जाम-2021 का आयोजन 20 सितम्बर को होगा। इसके लिए कैंडिडेट्स के एडमिट कार्ड अपलोड कर दिए गए है। इसमें 2.18 लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे, 11 जिलों में 666 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। आयोग प्रशासन का प्रयास है कि इस एग्जाम का रिजल्ट 20 दिन में जारी कर दिया जाए। 11 जिलों में 666 परीक्षा केंद्र प्रदेश के 11 जिलों में कुल 666 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें कुल 2 लाख 18 हजार 131 रजिस्टर्ड अभ्यर्थी शामिल होंगे। इसके लिए अजमेर में 74, अलवर में 48, भरतपुर में 58, बीकानेर में 47, हनुमानगढ़ में 23, जयपुर में सर्वाधिक 187, जोधपुर में 81, कोटा में 58, श्रीगंगानगर में 10, टोंक में 16 और उदयपुर में 64 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा का आयोजन दो पारियों में किया जाएगा। प्रथम पारी में सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक सामान्य हिंदी का पेपर होगा, जबकि द्वितीय पारी में दोपहर 03:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक सामान्य ज्ञान व सामान्य विज्ञान की परीक्षा ली जाएगी। भर्ती में 7 लाख 97 हजार कैंडिडेट ने किया था आवेदन उपनिरीक्षक/प्लाटून कमांडर परीक्षा-2021 का विज्ञापन 3 फरवरी 2021 को जारी किया गया था। इस भर्ती के लिए पहले हुई परीक्षा में 7 लाख 97 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 3 लाख 83 हजार 97 अभ्यर्थी पिछली परीक्षा (13 से 15 सितंबर 2021) में शामिल हुए थे। पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई। जब री-एग्जाम कराने का निर्णय लिया गया, तब 8 मई 2025 को पहले केवल परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को ही मौका दिया गया था। बाद में सभी अभ्यर्थियों को इस परीक्षा में शामिल होने की छूट दे दी गई। लेकिन एग्जाम की सहमति 2.18 लाख कैंडिडेट्स ने दी। केंद्र पर 2 घंटे पहले पहुंचना होगा, 60 मिनट पहले बंद होंगे प्रवेश द्वार परीक्षा में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से 2 घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होना अनिवार्य है। किसी भी परीक्षार्थी को परीक्षा शुरू होने के 60 मिनट पूर्व तक ही केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद प्रवेश द्वार पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे और किसी भी परिस्थिति में परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। बायोमेट्रिक जांच, मेटा ग्लासेस और हाईटेक डिवाइसेज पर पैनी नजर परीक्षा में किसी भी प्रकार की जालसाजी, नकल या डमी अभ्यर्थी को रोकने के लिए थंब इंप्रेशन और फेस रिकॉगनीशन का उपयोग करते हुए सघन बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण लागू किया गया है। प्रवेश के दौरान HHMD और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के माध्यम से अभ्यर्थियों की गहन जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त मेटा ग्लासेस और ब्लूटूथ डिवाइसेज जैसे हाईटेक उपकरणों की रोकथाम के लिए भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम संग तस्वीर पर सफाई दी:एक्ट्रेस बोलीं- उन्होंने शारजाह में क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था

एक्ट्रेस मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम के साथ वायरल हुई अपनी तस्वीर पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि दाऊद ने उन्हें शारजाह क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था। मंदाकिनी के मुताबिक, वह एक शो के लिए दुबई गई थीं। इसके बाद क्रिकेट मैच देखने पहुंचीं, जहां यह तस्वीर ली गई थी। उस समय उन्हें नहीं पता था कि तस्वीर विवाद का कारण बनेगी। मंदाकिनी ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि तस्वीर को लेकर हुई अटकलों और खबरों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। इस विवाद से उनके फिल्म करियर को बहुत नुकसान हुआ। एक्ट्रेस ने कहा कि एक कलाकार कई लोगों से मिलता है। कलाकार किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। उन्होंने कहा, “लोग जो लिखना या कहना चाहते हैं, उस पर हमारा नियंत्रण नहीं होता। एक कलाकार को हजारों लोगों से मिलना पड़ता है और सभी उसके लिए बराबर होते हैं।” मंदाकिनी ने कहा, “हमारे साथ बहुत सारे लोग थे। ऐसे में किसे चुनें और किसे न चुनें? हम वहां एक शो के लिए गए थे। नहीं, मुझे दाऊद ने नहीं बुलाया था। मैं दुबई में एक शो के लिए गई थी और फिर मैच देखने पहुंची। उस समय मुझे इसका अंदाजा नहीं था।” विवाद का असर मंदाकिनी ने बताया कि बाद में यह तस्वीर विवाद का विषय बन गई। इसे लेकर बड़े स्तर पर अटकलें लगाई गईं। उन्होंने कहा, “इस विवाद से बहुत नुकसान हुआ। बाद में मुझे पता चला कि इन सभी चीजों को संभालने के लिए एक टीम होनी चाहिए। मैंने हर जगह इन अफवाहों का खंडन किया।” 80 और 90 के दशक में दाऊद दुबई से अपना नेटवर्क चला रहा था। वहां वह अक्सर बॉलीवुड सितारों के लिए आलीशान पार्टियां रखता था। मंदाकिनी के अलावा एक्टर अनिल कपूर की भी शारजाह स्टेडियम से एक पुरानी तस्वीर इंटरनेट पर मौजूद है, जिसमें वे राज कपूर और महबूब के साथ बैठे हैं और उनके पीछे दाऊद इब्राहिम दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस तस्वीर को लेकर अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर सफाई दी थी कि उनके पिता वहां राज कपूर और कृष्णा कपूर के साथ सिर्फ भारतीय क्रिकेट मैच देखने गए थे और उन्हें जानकारी नहीं थी कि उनके पास कौन बैठा है। वहीं, ऋषि कपूर ने खुद स्वीकार किया था कि वे दुबई में दाऊद से 2 बार मिले थे। मंदाकिनी ने बताया ‘राम तेरी गंगा मैली’ के चर्चित सीन का सच मंदाकिनी ने फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से डेब्यू किया था। इसमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई और 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गईं। राज कपूर के निर्देशन में बनी यह फिल्म बड़ी हिट रही। हालांकि, फिल्म के कई सीन बाद में चर्चा और विवाद का विषय बने। मंदाकिनी ने गाने ‘तुझे बुलाएं ये मेरी बहनें’ में सफेद साड़ी में फिल्माए गए झरने वाले सीन और बहस में रहे स्तनपान वाले सीन पर बात की। उन्होंने कहा कि इन दृश्यों का उद्देश्य फिल्म में मासूमियत और पवित्रता को दिखाना था। ANI को दिए इंटरव्यू में मंदाकिनी ने बताया कि जब उन्होंने फिल्म की शूटिंग शुरू की, तब वह सिर्फ 16 साल की थीं और उन्हें पूरी तरह अंदाजा नहीं था कि बाद में इन सीन को किस तरह देखा जाएगा। झरने वाले सीन के बारे में मंदाकिनी ने कहा कि राज कपूर ने उन्हें सीन समझाया था। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य अश्लीलता दिखाना नहीं था, बल्कि फिल्म की कहानी और गंगा के किरदार की पवित्रता को सामने रखना था। एक्ट्रेस ने कहा, “उनका तरीका ऐसा था कि आप उनसे कोई सवाल ही नहीं करते थे। इतना प्यार से, इतना जेंटल, जैसे आपका फैमिली मेंबर आपसे करवा रहा हो। मुझे कहीं से कोई अश्लीलता महसूस नहीं हुई। कोई खराब या घिनौना एहसास नहीं था। पूरी फिल्म यही थी कि गंगा को अपवित्र करना चाहते थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए।” उन्होंने आगे कहा, “वह मेरे सामने थे। थोड़ा सा मुझे लगा तो मैंने साड़ी को डबल कर लिया। उन्होंने कहा डबल कर लो, तो मैंने कर लिया। बस हो गया वो शॉट। यह मेरे लिए बड़ी बात थी, क्योंकि मैं बहुत छोटी जगह से आई थी।” मंदाकिनी ने स्तनपान के सीन पर सफाई दी मंदाकिनी ने फिल्म के चर्चित स्तनपान वाले सीन पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि इसमें वास्तव में स्तनपान नहीं कराया गया था और कैमरे की पोजिशनिंग के जरिए ऐसा सीन बनाया गया था। उन्होंने कहा, “नहीं, वहां कोई स्तनपान नहीं था। उन्होंने इसे बहुत अच्छे तरीके से फिल्माया था। मेरे लिए अब समझाना मुश्किल है, लेकिन अगर मैं बताऊंगी कि इसे कैसे किया गया था, तो आप समझ जाएंगे।” अभिनेत्री ने बताया कि सीन में उनके पास एक बच्चा था, जिसे उन्होंने कसकर पकड़ा हुआ था। उन्होंने कहा, “हां, मेरे पास बच्चा था और मैंने उसे कसकर पकड़ा था, लेकिन वह स्तनपान नहीं था। मैं यही सबको बताना चाहती हूं।” मंदाकिनी के मुताबिक, उन्होंने लो-कट आउटफिट पहना था और बच्चे को शरीर के करीब रखा था। कैमरे के एंगल की वजह से ऐसा लगा कि मां अपने बच्चे को स्तनपान करा रही है। उन्होंने कहा कि सीन का उद्देश्य मां और बच्चे के रिश्ते को दिखाना था, जिसे बाद में अलग तरह से समझा गया। सफलता के बाद झरने वाला सीन दोहराने से मना किया अभिनेत्री ने यह भी बताया कि ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद कुछ फिल्ममेकर्स ने उनसे झरने वाले सीन को दोहराने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उनका कहना था कि किसी फिल्म के सफल होने के लिए सिर्फ एक सीन नहीं, बल्कि अच्छी कहानी जरूरी है। उन्होंने कहा, “हिट होने के लिए बहुत अच्छी कहानी चाहिए, जो ‘राम तेरी गंगा मैली’ में थी। उसमें क्या दिखाया गया है? उसका ट्रीटमेंट क्या है? डायरेक्टर आपको क्या मैसेज देना चाहता है? सब कुछ मायने रखता है।” ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा समेत इंडस्ट्री के कई प्रमुख कलाकारों के साथ काम किया और अपने करियर में कई फिल्मों में नजर आईं।
मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम संग तस्वीर पर सफाई दी:एक्ट्रेस बोलीं- उन्होंने शारजाह में क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था

एक्ट्रेस मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम के साथ वायरल हुई अपनी तस्वीर पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि दाऊद ने उन्हें शारजाह क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था। मंदाकिनी के मुताबिक, वह एक शो के लिए दुबई गई थीं। इसके बाद क्रिकेट मैच देखने पहुंचीं, जहां यह तस्वीर ली गई थी। उस समय उन्हें नहीं पता था कि तस्वीर विवाद का कारण बनेगी। मंदाकिनी ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि तस्वीर को लेकर हुई अटकलों और खबरों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। इस विवाद से उनके फिल्म करियर को बहुत नुकसान हुआ। एक्ट्रेस ने कहा कि एक कलाकार कई लोगों से मिलता है। कलाकार किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। उन्होंने कहा, “लोग जो लिखना या कहना चाहते हैं, उस पर हमारा नियंत्रण नहीं होता। एक कलाकार को हजारों लोगों से मिलना पड़ता है और सभी उसके लिए बराबर होते हैं।” मंदाकिनी ने कहा, “हमारे साथ बहुत सारे लोग थे। ऐसे में किसे चुनें और किसे न चुनें? हम वहां एक शो के लिए गए थे। नहीं, मुझे दाऊद ने नहीं बुलाया था। मैं दुबई में एक शो के लिए गई थी और फिर मैच देखने पहुंची। उस समय मुझे इसका अंदाजा नहीं था।” मंदाकिनी ने बताया कि बाद में यह तस्वीर विवाद का विषय बन गई। इसे लेकर बड़े स्तर पर अटकलें लगाई गईं। उन्होंने कहा, “इस विवाद से बहुत नुकसान हुआ। बाद में मुझे पता चला कि इन सभी चीजों को संभालने के लिए एक टीम होनी चाहिए। मैंने हर जगह इन अफवाहों का खंडन किया।” 80 और 90 के दशक में दाऊद दुबई से अपना नेटवर्क चला रहा था। वहां वह अक्सर बॉलीवुड सितारों के लिए आलीशान पार्टियां रखता था। मंदाकिनी के अलावा एक्टर अनिल कपूर की भी शारजाह स्टेडियम से एक पुरानी तस्वीर इंटरनेट पर मौजूद है, जिसमें वे राज कपूर और महबूब के साथ बैठे हैं और उनके पीछे दाऊद इब्राहिम दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस तस्वीर को लेकर अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर सफाई दी थी कि उनके पिता वहां राज कपूर और कृष्णा कपूर के साथ सिर्फ भारतीय क्रिकेट मैच देखने गए थे और उन्हें जानकारी नहीं थी कि उनके पास कौन बैठा है। वहीं, ऋषि कपूर ने खुद स्वीकार किया था कि वे दुबई में दाऊद से 2 बार मिले थे। मंदाकिनी ने बताया ‘राम तेरी गंगा मैली’ के चर्चित सीन का सच मंदाकिनी ने फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से डेब्यू किया था। इसमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई और 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गईं। राज कपूर के निर्देशन में बनी यह फिल्म बड़ी हिट रही। हालांकि, फिल्म के कई सीन बाद में चर्चा और विवाद का विषय बने। मंदाकिनी ने गाने ‘तुझे बुलाएं ये मेरी बहनें’ में सफेद साड़ी में फिल्माए गए झरने वाले सीन और बहस में रहे स्तनपान वाले सीन पर बात की। उन्होंने कहा कि इन दृश्यों का उद्देश्य फिल्म में मासूमियत और पवित्रता को दिखाना था। ANI को दिए इंटरव्यू में मंदाकिनी ने बताया कि जब उन्होंने फिल्म की शूटिंग शुरू की, तब वह सिर्फ 16 साल की थीं और उन्हें पूरी तरह अंदाजा नहीं था कि बाद में इन सीन को किस तरह देखा जाएगा। झरने वाले सीन के बारे में मंदाकिनी ने कहा कि राज कपूर ने उन्हें सीन समझाया था। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य अश्लीलता दिखाना नहीं था, बल्कि फिल्म की कहानी और गंगा के किरदार की पवित्रता को सामने रखना था। एक्ट्रेस ने कहा, “उनका तरीका ऐसा था कि आप उनसे कोई सवाल ही नहीं करते थे। इतना प्यार से, इतना जेंटल, जैसे आपका फैमिली मेंबर आपसे करवा रहा हो। मुझे कहीं से कोई अश्लीलता महसूस नहीं हुई। कोई खराब या घिनौना एहसास नहीं था। पूरी फिल्म यही थी कि गंगा को अपवित्र करना चाहते थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए।” उन्होंने आगे कहा, “वह मेरे सामने थे। थोड़ा सा मुझे लगा तो मैंने साड़ी को डबल कर लिया। उन्होंने कहा डबल कर लो, तो मैंने कर लिया। बस हो गया वो शॉट। यह मेरे लिए बड़ी बात थी, क्योंकि मैं बहुत छोटी जगह से आई थी।”’ मंदाकिनी ने स्तनपान के सीन पर सफाई दी मंदाकिनी ने फिल्म के चर्चित स्तनपान वाले सीन पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि इसमें वास्तव में स्तनपान नहीं कराया गया था और कैमरे की पोजिशनिंग के जरिए ऐसा सीन बनाया गया था। उन्होंने कहा, “नहीं, वहां कोई स्तनपान नहीं था। उन्होंने इसे बहुत अच्छे तरीके से फिल्माया था। मेरे लिए अब समझाना मुश्किल है, लेकिन अगर मैं बताऊंगी कि इसे कैसे किया गया था, तो आप समझ जाएंगे।” अभिनेत्री ने बताया कि सीन में उनके पास एक बच्चा था, जिसे उन्होंने कसकर पकड़ा हुआ था। उन्होंने कहा, “हां, मेरे पास बच्चा था और मैंने उसे कसकर पकड़ा था, लेकिन वह स्तनपान नहीं था। मैं यही सबको बताना चाहती हूं।” मंदाकिनी के मुताबिक, उन्होंने लो-कट आउटफिट पहना था और बच्चे को शरीर के करीब रखा था। कैमरे के एंगल की वजह से ऐसा लगा कि मां अपने बच्चे को स्तनपान करा रही है। उन्होंने कहा कि सीन का उद्देश्य मां और बच्चे के रिश्ते को दिखाना था, जिसे बाद में अलग तरह से समझा गया। सफलता के बाद झरने वाला सीन दोहराने से मना किया अभिनेत्री ने यह भी बताया कि ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद कुछ फिल्ममेकर्स ने उनसे झरने वाले सीन को दोहराने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उनका कहना था कि किसी फिल्म के सफल होने के लिए सिर्फ एक सीन नहीं, बल्कि अच्छी कहानी जरूरी है। उन्होंने कहा, “हिट होने के लिए बहुत अच्छी कहानी चाहिए, जो ‘राम तेरी गंगा मैली’ में थी। उसमें क्या दिखाया गया है? उसका ट्रीटमेंट क्या है? डायरेक्टर आपको क्या मैसेज देना चाहता है? सब कुछ मायने रखता है।” ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा समेत इंडस्ट्री के कई प्रमुख कलाकारों के साथ काम किया और अपने करियर में कई फिल्मों में नजर आईं।
रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की:अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका

अमेरिकी अधिकारियों ने ओमान में हूती नेताओं से मुलाकात की। इसके बदले में ट्रम्प प्रशासन ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब को सैन्य मदद नहीं देने का फैसला किया है। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि 2025 में दोनों पक्षों के बीच हुआ सीजफायर अभी कायम है और वे लाल सागर में अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। हालांकि, सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को वे अपना लक्ष्य मानते हैं। उपराष्ट्रपति वेंस बोले- हम हूतियों के साथ सीधे संपर्क में अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले हफ्ते में ओमान की राजधानी मस्कट के अमेरिकी दूतावास में हूती नेताओं के साथ बैठक की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को पुष्टि की कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे संपर्क में है। अमेरिका ने मार्च 2025 में हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इसके बावजूद हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों ने हूती नेताओं के अलावा हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की है। सऊदी अरब को अकेले लड़ना पड़ सकता है पिछले हफ्ते हूतियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के तट से लगे बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद की उम्मीद की थी। अमेरिका ने हूती गतिविधियों को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है, लेकिन अभी तक सऊदी अरब के समर्थन में सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं की है। इसकी एक वजह यह भी है कि अमेरिका पहले से ईरान के साथ महंगे और संसाधन खपाने वाले संघर्ष में उलझा हुआ है। ईरान हूतियों का समर्थन करता है। यमन में अमेरिका के पूर्व उप राजदूत नबील खौरी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन और हूतियों के बीच एक तरह की ‘मौन समझ’ बनी है। खौरी के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की लाल सागर में आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। उनके अनुसार खतरा मुख्य रूप से सऊदी जहाजों या सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को है। सऊदी ने कहा- मक्का की ओर ड्रोन भेजा गया सऊदी अरब ने मंगलवार को दावा किया कि हूतियों ने पवित्र शहर मक्का की ओर ड्रोन भेजा था। सऊदी रक्षा बलों ने इसे नष्ट करने की बात कही। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्किये अल-मलिकी के मुताबिक, ड्रोन को स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:50 बजे मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास रोका गया। सऊदी अरब ने कहा कि मक्का पर किसी भी तरह का हमला ‘रेड लाइन’ है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और 57 देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने भी इस दावे की निंदा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘घिनौना और जघन्य’ हमला बताया। हूतियों ने सऊदी के आरोप को ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताया हूती नेतृत्व ने सऊदी अरब के दावे को खारिज कर दिया। हूतियों ने इसे ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताते हुए कहा कि इस तरह के दावों से पहले भी लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। हूती उप विदेश मंत्री अब्दुल वहीद अबू रास ने उल्टा सऊदी अरब पर मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। हूतियों ने सऊदी F-15 गिराने का भी दावा किया हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने मारिब के पास सऊदी अरब का F-15 लड़ाकू विमान गिराया है। साथ ही लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको के एक संयंत्र पर हमला करने का दावा किया। हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता ने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। हूती वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा कि F-15 गिराने का दावा पश्चिमी देशों के लिए चेतावनी है कि वे सऊदी ‘प्रचार’ का शिकार न बनें। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांग रहा हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि सऊदी अरब यमन में मुश्किल स्थिति में है। उनके मुताबिक, सऊदी अरब ने युद्ध और नाकेबंदी के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि अब सऊदी अरब पाकिस्तान, तुर्किये, अमेरिका, इजराइल और मिस्र से समर्थन मांग रहा है और मक्का पर हमले के दावे के जरिए मुस्लिम देशों को अपने साथ लामबंद करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-इजराइल समेत अरब देशों के सैन्य प्रमुखों की गुप्त बैठक इस बीच, इजराइली अधिकारियों ने अमेरिका, इजराइल और कई अरब देशों के सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में हुई एक गुप्त बैठक की जानकारी लीक की है। एक्सिओस के पत्रकार बराक रैविड के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पिछले सप्ताह यह बैठक आयोजित की थी। बैठक में इजराइल, सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, छह महीने से ज्यादा समय पहले अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यह इस तरह की पहली बैठक थी। इजराइल, जिसे पहले हूती हमलों का सामना करना पड़ा था, अब सऊदी अरब की ओर से यमन में हस्तक्षेप करने की पेशकश कर रहा है। UN में लाल सागर बंद करने की कोशिश की निंदा मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लाल सागर को बंद करने की किसी भी कोशिश की निंदा की गई। बैठक में रूस के रुख में भी बदलाव के संकेत मिले। रूसी प्रतिनिधि ने पहले जहां यमन में अदन स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को ही एकमात्र वैध सरकार माना था, अब उससे कुछ दूरी बनाते हुए नजर आए। चीन पहुंचा ईरान, होर्मुज पर समर्थन की कोशिश बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर ईरान की योजनाओं पर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। ईरान और अमेरिका की अलग-अलग नाकेबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य अभी बंद है। चीन ने कहा कि वह नहीं चाहता कि क्षेत्रीय तनाव यमन और लाल सागर तक फैले। बीजिंग ने अमेरिका से जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के आधार
सिंगापुर सरकार किताब पढ़ने के बदले पैसे देगी:रोजाना कम से कम 15 मिनट पढ़ना होगा; स्मार्ट फोन और रील्स की लत छुड़ाना मकसद

स्मार्टफोन और रील्स की आदत के बीच सिंगापुर सरकार लोगों को किताब पढ़ने के लिए पैसे दे रही है। सरकार ने 5 साल का नेशनल रीडिंग मिशन शुरू किया है। इसके तहत लोगों को रोज कम से कम 15 मिनट पढ़ना होगा। पढ़ने का समय सरकारी वेबसाइट पर दर्ज करने के बदले पॉइंट्स मिलेंगे। इन पॉइंट्स के आधार पर नकद इनाम दिया जाएगा। सरकार का मकसद लोगों में दोबारा किताब पढ़ने की आदत डालना है। लगातार फोन चलाने और छोटे-छोटे वीडियो देखने से लोग लंबे समय तक किसी किताब या लेख पर ध्यान नहीं दे पाते। सरकार इसी आदत को बदलना चाहती है। 15 मिनट पढ़ने पर मिलेंगे 20 कॉइन्स इस योजना में रोज कम से कम 15 मिनट पढ़ने पर 20 वर्चुअल कॉइन्स मिलेंगे। एक दिन में सिर्फ एक बार पढ़ने का समय दर्ज किया जा सकेगा। अगर कोई व्यक्ति 50 दिन तक रोज 15 मिनट पढ़ता है, तो उसके 1,000 कॉइन्स पूरे हो जाएंगे। इसके बदले उसे 1 सिंगापुरी डॉलर यानी करीब 76 रुपए मिलेंगे। इस साल सरकार ने कुल 75 लाख रीडिंग मिनट का लक्ष्य रखा है। लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए करीब 1.14 करोड़ रुपए के इनाम दिए जाएंगे। सरकार ने पढ़ने को गेम जैसा बनाया सिंगापुर के नेशनल लाइब्रेरी बोर्ड (NLB) ने इस योजना में गेम जैसा रिवॉर्ड सिस्टम बनाया है। लोग ‘क्राउडटास्क एसजी’ वेबसाइट पर रोज अपनी पढ़ाई का समय दर्ज कर सकेंगे। जितना तय समय पूरा होगा, उतने कॉइन्स मिलेंगे। कॉइन्स जमा करने पर नकद इनाम मिलेगा। रील्स की जगह किताब पढ़ने की आदत चाहती है सरकार सरकार चाहती है कि लोग फोन पर लगातार रील्स और छोटे वीडियो देखने के बजाय कुछ समय किताब पढ़ने में लगाएं। नेशनल लाइब्रेरी बोर्ड की प्रमुख मेलिसा टैम के मुताबिक, छोटे वीडियो से जानकारी जल्दी मिल जाती है, लेकिन लगातार बहुत सारी जानकारी देखने से दिमाग थक सकता है। वहीं, किताब और लंबे लेख पढ़ने से ध्यान लगाने, सोचने और कल्पना करने की क्षमता बेहतर हो सकती है। इसलिए सरकार ने शुरुआत के लिए रोज सिर्फ 15 मिनट का लक्ष्य रखा है। युवा भी सिर्फ पढ़ाई के लिए पढ़ रहे रिसर्च एनालिस्ट आइजैक निओ के मुताबिक, बच्चों और युवाओं पर पढ़ाई और परीक्षाओं का दबाव रहता है। ऐसे में वे अक्सर सिर्फ परीक्षा के लिए पढ़ते हैं। मन की खुशी के लिए किताब पढ़ने की आदत कम होती जा रही है। निओ ने इसी वजह से 2025 में मॉडर्न मेन्स बुक क्लब शुरू किया था। इसका मकसद युवाओं को दोबारा किताबों से जोड़ना था। क्या पैसे देकर पढ़ने की आदत बन सकती है? इस योजना को लेकर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। मनोवैज्ञानिक चारिसा एनजी के मुताबिक, पैसे का इनाम उन लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिन्हें पहले से थोड़ी रुचि है। लेकिन जिन लोगों को किताब पढ़ने में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं है, उनके लिए सिर्फ पैसे लंबे समय तक पढ़ने की आदत नहीं बना सकते। वहीं, पुस्तक विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआत करवाने के लिए छोटा इनाम भी काम आ सकता है। हो सकता है कि कोई व्यक्ति पहले पैसे के लिए किताब पढ़ना शुरू करे और बाद में उसे पढ़ने में खुद रुचि आने लगे। यानी सिंगापुर की योजना का मकसद सिर्फ 76 रुपए देना नहीं, बल्कि लोगों को रोज 15 मिनट के लिए फोन से दूर करके किताब तक पहुंचाना है।
सिंगापुर सरकार किताब पढ़ने के बदले पैसे देगी:रोजाना कम से कम 15 मिनट पढ़ना होगा; स्मार्ट फोन और रील्स की लत छुड़ाना मकसद

स्मार्टफोन और रील्स की आदत के बीच सिंगापुर सरकार लोगों को किताब पढ़ने के लिए पैसे दे रही है। सरकार ने 5 साल का नेशनल रीडिंग मिशन शुरू किया है। इसके तहत लोगों को रोज कम से कम 15 मिनट पढ़ना होगा। पढ़ने का समय सरकारी वेबसाइट पर दर्ज करने के बदले पॉइंट्स मिलेंगे। इन पॉइंट्स के आधार पर नकद इनाम दिया जाएगा। सरकार का मकसद लोगों में दोबारा किताब पढ़ने की आदत डालना है। लगातार फोन चलाने और छोटे-छोटे वीडियो देखने से लोग लंबे समय तक किसी किताब या लेख पर ध्यान नहीं दे पाते। सरकार इसी आदत को बदलना चाहती है। 15 मिनट पढ़ने पर मिलेंगे 20 कॉइन्स इस योजना में रोज कम से कम 15 मिनट पढ़ने पर 20 वर्चुअल कॉइन्स मिलेंगे। एक दिन में सिर्फ एक बार पढ़ने का समय दर्ज किया जा सकेगा। अगर कोई व्यक्ति 50 दिन तक रोज 15 मिनट पढ़ता है, तो उसके 1,000 कॉइन्स पूरे हो जाएंगे। इसके बदले उसे 1 सिंगापुरी डॉलर यानी करीब 76 रुपए मिलेंगे। इस साल सरकार ने कुल 75 लाख रीडिंग मिनट का लक्ष्य रखा है। लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए करीब 1.14 करोड़ रुपए के इनाम दिए जाएंगे। सरकार ने पढ़ने को गेम जैसा बनाया सिंगापुर के नेशनल लाइब्रेरी बोर्ड (NLB) ने इस योजना में गेम जैसा रिवॉर्ड सिस्टम बनाया है। लोग ‘क्राउडटास्क एसजी’ वेबसाइट पर रोज अपनी पढ़ाई का समय दर्ज कर सकेंगे। जितना तय समय पूरा होगा, उतने कॉइन्स मिलेंगे। कॉइन्स जमा करने पर नकद इनाम मिलेगा। रील्स की जगह किताब पढ़ने की आदत चाहती है सरकार सरकार चाहती है कि लोग फोन पर लगातार रील्स और छोटे वीडियो देखने के बजाय कुछ समय किताब पढ़ने में लगाएं। नेशनल लाइब्रेरी बोर्ड की प्रमुख मेलिसा टैम के मुताबिक, छोटे वीडियो से जानकारी जल्दी मिल जाती है, लेकिन लगातार बहुत सारी जानकारी देखने से दिमाग थक सकता है। वहीं, किताब और लंबे लेख पढ़ने से ध्यान लगाने, सोचने और कल्पना करने की क्षमता बेहतर हो सकती है। इसलिए सरकार ने शुरुआत के लिए रोज सिर्फ 15 मिनट का लक्ष्य रखा है। युवा भी सिर्फ पढ़ाई के लिए पढ़ रहे रिसर्च एनालिस्ट आइजैक निओ के मुताबिक, बच्चों और युवाओं पर पढ़ाई और परीक्षाओं का दबाव रहता है। ऐसे में वे अक्सर सिर्फ परीक्षा के लिए पढ़ते हैं। मन की खुशी के लिए किताब पढ़ने की आदत कम होती जा रही है। निओ ने इसी वजह से 2025 में मॉडर्न मेन्स बुक क्लब शुरू किया था। इसका मकसद युवाओं को दोबारा किताबों से जोड़ना था। क्या पैसे देकर पढ़ने की आदत बन सकती है? इस योजना को लेकर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। मनोवैज्ञानिक चारिसा एनजी के मुताबिक, पैसे का इनाम उन लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिन्हें पहले से थोड़ी रुचि है। लेकिन जिन लोगों को किताब पढ़ने में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं है, उनके लिए सिर्फ पैसे लंबे समय तक पढ़ने की आदत नहीं बना सकते। वहीं, पुस्तक विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआत करवाने के लिए छोटा इनाम भी काम आ सकता है। हो सकता है कि कोई व्यक्ति पहले पैसे के लिए किताब पढ़ना शुरू करे और बाद में उसे पढ़ने में खुद रुचि आने लगे। यानी सिंगापुर की योजना का मकसद सिर्फ 76 रुपए देना नहीं, बल्कि लोगों को रोज 15 मिनट के लिए फोन से दूर करके किताब तक पहुंचाना है।
बादशाह को चैलेंज कर चुकीं हरियाणवी लेडी सिंगर को धमकी:लॉरेंस गैंग का मैसेज-2 दिन में गोली लगेगी; 'आजा तनै बादशाह सुनाऊं रे टरीरी' गा चुकीं

‘आजा बादशाह तनै सुनाऊं रै टटीरी’ सॉन्ग से रैपर बादशाह को चैलेंज करने वाली हरियाणवी सिंगर सुदेश को लॉरेंस गैंग के नाम से धमकी मिली है। उनके वॉट्सएप नंबर पर मैसेज कर लिखा- ”लॉरेस ग्रुप से अंकित बोलू हूं। 2 लाख भेज दे चुपचाप, 2 दिन का टाइम है, फिर गोली लगेगी” सुदेश ने कैथल SP मनप्रीत सिंह को शिकायत देकर सुरक्षा की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। मोबाइल नंबर की लोकेशन चेक की जा रही है। इधर, पाखंडवाद पर कन्ट्रोवर्सी के बीच सुदेश ने करीब 15 दिन पहले ही ‘खीर पाखंड़िया की’ सॉन्ग गाया था। वहीं, 1 मार्च 2026 को रिलीज हुए बादशाह के ‘टटीरी’ सॉन्ग के जवाब में सुदेश ने 9 मार्च को ‘बोली ए टटीरी’ सॉन्ग गाया था। हालांकि बादशाह के सॉन्ग को बैन कर दिया गया था। मैसेज में लिखा- तेरा भी टाइम आ लिया सिंगर सुदेश को धमकी देने वाले व्यक्ति ने खुद को अंकित बताते हुए लिखा- तेरा भी टाइम आ लिया है, चुपचाप 2 लाख रुपए दे दे। फिर यह ना कहना कि ये के हो गया मेरे साथ। जय बलकारी, लॉरेंस ग्रुप। इसके बाद लिखा कि 2 दिन का टाइम है तेरे धोरे, नहीं फिर गोली चलेगी। नंबर ब्लॉक करने से पहले सोच भी लेना। पुलिस धोरे जा या फिर किसी के पास जा। चेक कर लिए, कोई ना, तेरे को टाइम दिया है। अब पढ़िए, पुलिस शिकायत में क्या बताया वॉट्सएप मैसेज भेग मांगे पैसे: शिकायत के अनुसार, सुदेश के मोबाइल पर 10 सितंबर की रात 10:48 बजे से 11:43 बजे तक एक अज्ञात मोबाइल नंबर से लगातार मैसेज आए। आरोप है कि मैसेज भेजने वाले ने 2 लाख रुपए की मांग की। पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। लॉरेंस गैंग का मेंबर बताया: सुदेश ने पुलिस को बताया कि वह धमकी देने वाले व्यक्ति को नहीं जानती। उन्होंने धमकी भरे मैसेज के स्क्रीनशॉट भी शिकायत के साथ पुलिस को उपलब्ध करवाए हैं। वहीं, सुदेश का कहना है कि पूरा परिवार डरा हुआ है। धमकी के कारण रातभर सो भी नहीं पा रहे। एसपी से सुरक्षा मांगी: सिंगर सुदेश ने 11 सितंबर को कैथल एसपी मनप्रीत सिंह को शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। सिंगर को भेजा गया धमकी भरा मैसेज क्या है, बादशाह और सुदेश के टटीरी सॉन्ग बादशाह का बैन हो चुका ‘टटीरी’ सॉन्ग हरियाणवी लोकगीत टटीरी को बादशाह ने नए रैप वर्जन में 1 मार्च को रिलीज किया था। रिलीज होने के बाद से ही उन पर अश्लील शब्दों और दृश्य दिखाने के आरोप लगे थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस सॉन्ग का बॉयकाट शुरू हो गया। विरोध बढ़ने के बाद रैप वर्जन को कई प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, उसी विवाद के बाद कई कलाकारों ने टटीरी गीत को अपने-अपने अंदाज में गाकर रिलीज किया। सुदेश का ऐसी न थी ‘टटीरी’ सॉन्ग क्यूट रोहिल्ला यूट्यूब चैनल पर 9 मार्च को असली टटीरी नाम से सॉन्ग रिलीज हुआ था। इस गीत में सीधे तौर पर बादशाह को संबोधित करते हुए कहा गया है कि वह टटीरी गीत को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। सॉन्ग के लिरिक्स है- ”आज्या तनै बादशाह सुनाऊं रे टरीरी, ऐसी ना थी जैसी तनै बनाई रे टटीरी। गंदा गाकै पेश करया क्यू आई तनै काण ना, गलत बौलै धी बेटी नै, के तेर घर मै भाण ना, गाने मैं गंदगीं मचाई रे भतेरी।” ————– यह खबर भी पढ़ें… हरियाणवी सिंगर ने गाया- ऐसी ना थी,जैसी तनै बनाई ‘टटीरी’:बादशाह का नाम लेकर ‘तेरे घर में बहन-बेटी ना’ लिरिक्स गाए; सिमरन का न्यू सॉन्ग रिलीज हरियाणवी लोक गीत ‘टटीरी’ को अब सिंगरों ने नए वर्जन में गाकर बॉलीवुड रैपर बादशाह को जवाब दिया है। यूट्यूब से हटाए गए बादशाह के टटीरी सॉन्ग में उनके साथ काम करने वाली सिमरन जागलान में भी इसे अब नए ढंग में पेश किया है। (पूरी खबर पढ़ें)
आकृति कक्कड़ बोलीं- गणपति बप्पा घर आते हैं:विसर्जन के बाद पौधों के जरिए जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं

गणेश उत्सव पर सिंगर आकृति कक्कड़ ने दैनिक भास्कर से घर में विराजे गणपति बप्पा, परिवार की आस्था और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी पर बातचीत की। उन्होंने बताया कि शादी के बाद से वह और उनके पति घर में गणपति बप्पा को विराजमान करते आ रहे हैं। इस बार उत्सव की थीम मां की तबीयत ठीक होने पर भगवान का आभार व्यक्त करना है। आकृति घर पर ही बप्पा का विसर्जन करती हैं और उसी मिट्टी में बीज डालकर पौधे उगाती हैं। बातचीत में उन्होंने पसंदीदा संगीत, नए प्रोजेक्ट और गणपति भजन के बारे में भी बताया। शादी के बाद शुरू की गणपति बप्पा को घर लाने की परंपरा मुंबई में गणेश उत्सव के बीच सिंगर आकृति कक्कड़ के घर भी गणपति बप्पा विराजमान हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस बार उनके घर गणपति बप्पा के विराजमान होने का 11वां साल है। शादी के समय उन्होंने और उनके पति ने तय किया था कि वे हर साल घर में गणपति बप्पा को लेकर आएंगे। आकृति ने कहा, “मैं दिल्ली में पली-बढ़ी हूं। वहां जन्माष्टमी और ये सारी चीजें ज्यादा मनाई जाती थीं। गणेश चतुर्थी को इस तरह नहीं मनाते थे। तो मेरे लिए बहुत एक्साइटिंग चीज थी।” उन्होंने बताया कि उनके परिवार के लिए गणेश उत्सव केवल परंपरा नहीं, बल्कि भावनाओं और खुशियों से जुड़ा अवसर है। उनके मुताबिक, भले ही हर चीज शत-प्रतिशत विधि-विधान के अनुसार न होती हो, लेकिन वह सच्ची भावना के साथ बप्पा का स्वागत करती हैं। ‘मेरे लिए गणपति उत्सव का महत्व दिवाली से भी ज्यादा है’ आकृति कक्कड़ ने बताया कि गणपति बप्पा के घर आने से परिवार का माहौल बदल जाता है। उन्होंने कहा, “हमें इतनी खुशी मिलती है, घर का माहौल ही अलग हो जाता है। मेरे लिए इस फेस्टिवल का जो वैल्यू है, जो महत्व है, वो दिवाली से भी ज्यादा है।” उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं दिवाली होती है, हिंदुओं का सबसे बड़ा फेस्टिवल, लेकिन मेरे लिए गणपति बप्पा खुद घर आते हैं।” आकृति के लिए बप्पा का घर आना सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवार के साथ खुशियां साझा करने और आस्था महसूस करने का अवसर है। ट्री गणेशा लाती हैं आकृति, घर पर ही करती हैं विसर्जन आकृति पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ट्री गणेशा की मूर्ति घर लेकर आती हैं। उन्होंने बताया कि मूर्ति का विसर्जन घर पर ही पानी के ड्रम में किया जाता है। मूर्ति की मिट्टी घुलने के बाद उसमें बीज डालकर पौधे उगाए जाते हैं। उन्होंने कहा, “गणपति बप्पा आते हैं, लेकिन जाते नहीं हैं। वो हमारे साथ ही रह जाते हैं और पौधों के थ्रू फिर हमारी जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं।” पर्यावरण के अनुकूल इस पहल पर आकृति ने कहा कि भगवान के नाम पर होने वाले हर काम को समझदारी और जिम्मेदारी से करना चाहिए। उनके मुताबिक, आस्था के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। सात साल से इसी घर में मना रही हैं गणेश उत्सव आकृति ने बताया कि वह पिछले सात साल से अपने मौजूदा घर में गणपति बप्पा को विराजमान कर रही हैं। इससे पहले शादी के बाद वह मलाड में रहती थीं और वहीं से इस परंपरा की शुरुआत हुई थी। उन्होंने बताया कि पहले घर की सजावट परिवार के लोग खुद किया करते थे। उनकी मां काफी क्रिएटिव हैं और सजावट में उनका विशेष योगदान रहता था। तीन दिन के उत्सव के लिए फूलों के अलग-अलग कॉम्बिनेशन और थीम तैयार की जाती थी। मां की तबीयत ठीक होने पर इस बार रखी ‘ग्रैटिट्यूड’ थीम इस बार गणपति उत्सव की थीम के बारे में पूछे जाने पर आकृति ने बताया कि थीम आभार यानी ग्रैटिट्यूड पर आधारित है। उन्होंने बताया कि काफी समय से उनकी मां की तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन गणपति बप्पा के आगमन से ठीक दो दिन पहले उनकी तबीयत पूरी तरह ठीक हो गई। आकृति ने कहा, “सच में विघ्नहर्ता, सुखकर्ता हमारी जिंदगी में आए हैं। तो इस बार उनको तहे दिल से शुक्रिया करने के लिए…” उन्होंने बताया कि इस बार तैयारियों के लिए ज्यादा समय नहीं मिला, लेकिन जब कुछ होना होता है तो वह हो जाता है। उनके मुताबिक, भगवान सब संभाल लेते हैं। बप्पा से मांगी परिवार की अच्छी सेहत और दूसरों की मदद करने की शक्ति गणपति बप्पा से मांगे गए वरदान के बारे में आकृति ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी प्रार्थना परिवार के सभी लोगों की अच्छी सेहत है। वह चाहती हैं कि सभी की हेल्थ बराबर बनी रहे। इसके अलावा, वह खुद को इतना सक्षम बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं कि जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकें। उन्होंने कहा कि जिंदगी में जो चीजें उन्हें खुशी देती हैं और आसपास के लोगों से जोड़कर रखती हैं, उनके लिए भी वह बप्पा का आशीर्वाद चाहती हैं। ‘बिग बैंड थ्योरी’ के सीजन 3 की तैयारी में जुटी हैं आकृति सिंगिंग करियर और आने वाले प्रोजेक्ट्स पर आकृति ने बताया कि इन दिनों वह ‘बिग बैंड थ्योरी’ के सीजन 3 की तैयारियों में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि तैयारी पूरे जोर-शोर से चल रही है और अक्टूबर के अंत में दर्शक इस सीरीज को सुन और देख पाएंगे। आकृति ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में कई अच्छे कोलाबोरेशंस हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि गणपति बप्पा की कृपा से सब कुछ अच्छे से होगा और लोगों को यह प्रोजेक्ट पसंद आएगा। लता मंगेशकर और आशा भोसले के संगीत से मिली प्रेरणा आकृति से पसंदीदा गाना पूछा गया तो उन्होंने कहा कि एक सिंगर के लिए अपने पसंदीदा गाने का चुनाव करना मुश्किल होता है। उन्होंने अपनी संगीत की परवरिश में लता मंगेशकर और आशा भोसले के योगदान को खास बताया। उन्होंने कहा, “मेरी जो म्यूजिकल परवरिश रही है, उसमें लता जी, आशा जी और इन सब का बहुत मेजर रोल रहा है। मुझे लगता है कि गाने तो उन्हीं के बैठते हैं जहन में। हम तो बस वहीं से चीजें सीख-सीखकर खुद के गानों में अप्लाई कर लेते हैं।” दो साल पहले बनाया गणपति भजन आज भी ट्रेंडिंग गणपति बप्पा के लिए भजन सुनाने के अनुरोध पर आकृति ने अपना भजन ‘गणेशा गणेशा’ गाया। उन्होंने बताया कि







