जुलाई में ₹2.11 लाख करोड़ GST कलेक्शन:ये पिछले साल के मुकाबले 15.4% ज्यादा, जून में ₹1.94 लाख करोड़ रहा था

जुलाई महीने में 2.11 लाख करोड़ रुपए GST कलेक्शन हुआ। ये पिछले साल यानी जुलाई 2025 से 15.4% ज्यादा है। पिछले साल जुलाई 2025 में GST कलेक्शन 1.83 लाख करोड़ रुपए था। अप्रैल-जुलाई के दौरान कलेक्शन का हाल चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई 2026) के दौरान GST कलेक्शन 10.1% बढ़कर 8.4 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 7.6 लाख करोड़ रुपए था। इस दौरान GST कलेक्शन 9.2% बढ़कर 7.21 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल 6.61 लाख करोड़ रुपए था। राज्यों के आंकड़ों में अंतर प्रमुख राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र का जीएसटी राजस्व 13% बढ़कर 32,210 करोड़ रुपए रहा। गुजरात में 19% की वृद्धि के साथ 12,923 करोड़ रुपए, कर्नाटक में 12% की वृद्धि के साथ 13,854 करोड़ रुपए, तेलंगाना में 19% की वृद्धि के साथ 5,819 करोड़ रुपए और उत्तर प्रदेश में 15% की वृद्धि के साथ 9,651 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ। वहीं, कुछ राज्यों में गिरावट भी देखी गई। तमिलनाडु का जीएसटी राजस्व 1%, आंध्र प्रदेश का 5% और मध्य प्रदेश का 10% घटा है। सिक्किम में 59%, हिमाचल प्रदेश में 22% और उत्तराखंड में 18% की गिरावट दर्ज की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े अनंतिम हैं और अंतिम रूप दिए जाने पर इनमें मामूली बदलाव हो सकता है। इकोनॉमी की सेहत दिखाता है GST कलेक्शन जीएसटी कलेक्शन यह बताता है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी तंदुरुस्त है। अगर कलेक्शन ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं, फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ रहा है और लोग ईमानदारी से टैक्स भर रहे हैं। 2017 में लागू हुआ था GST सरकार ने 1 जुलाई 2017 को देशभर में GST लागू किया था। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के 17 करों और 13 उपकरों को हटा दिया गया था। GST को चार हिस्सों में डिवाइड किया गया है:
त्योहारों से पहले टूथपेस्ट से लेकर पेंट तक महंगे होंगे:HUL और एशियन पेंट्स समेत 8 कंपनियां जरूरत के सामानों की कीमतें बढ़ाएंगी

देश की सबसे बड़ी FMCG और कंज्यूमर कंपनियां फेस्टिव सीजन से ठीक पहले और लगातार दूसरी तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। टूथपेस्ट से लेकर टायर और पेंट जैसे सामान महंगे होने वाले हैं। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कमोडिटी लागत बढ़ रही है, जिससे देश में महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहने की आशंका है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) आने वाली तिमाही में डिटर्जेंट और डिशवॉशिंग बार जैसी कैटेगरी में कीमतें बढ़ाएगा। HUL के अलावा डोडला डेयरी और एशियन पेंट्स समेत कम से कम 7 अन्य कंपनियां भी दाम बढ़ाने का प्लान बना चुकी हैं। HUL के CFO बोले- होम केयर सेगमेंट में बढ़ा रहे कीमतें भारत की सबसे बड़ी कंज्यूमर गुड्स कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर निरंजन गुप्ता ने एनालिस्ट्स को बताया कि बाहरी उतार-चढ़ाव के कारण क्रूड ऑयल से जुड़े डेरिवेटिव्स में महंगाई देखने को मिल रही है। इसी वजह से कंपनी होम केयर सेगमेंट में सोच-समझकर कीमतें बढ़ा रही है। हैवेल्स ने 8% और टाटा साल्ट ने 7% तक बढ़ाए दाम ईरान युद्ध की वजह से एनर्जी की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जिससे तुरंत कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव फिर से भड़कने के कारण कंपनियां होम एप्लायंसेज से लेकर किचन के जरूरी सामानों पर दूसरी बार कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं। अगस्त से नवंबर के बीच फेस्टिव सीजन, तिहाई बिक्री इसी दौरान कीमतों में यह ताजा इजाफा आने वाले फेस्टिव सीजन के साथ हो रहा है। देश में त्योहारों का यह सीजन आमतौर पर अगस्त से नवंबर तक चलता है। इस दौरान खासकर दिवाली के समय कंज्यूमर स्पेंडिंग यानी आम लोगों की खरीदारी में काफी उछाल आता है। कई कंपनियों के लिए साल भर की कुल बिक्री का एक-तिहाई (33%) हिस्सा इसी सीजन से आता है। मजबूत मांग के कारण कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर आसानी से डाल पाएंगी। जून में 3.21% से ऊपर निकली महंगाई, RBI का FY27 अनुमान 5.1% जून के महीने में खाने-पीने और ईंधन की लागत बढ़ने से कंज्यूमर प्राइस यानी रिटेल महंगाई दर लगभग एक साल में पहली बार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर निकल गई। हालांकि यह आंकड़ा RBI के 2% से 6% के सहनीय दायरे यानी टॉलरेंस बैंड के भीतर ही है। आने वाले महीनों में कंपनियों द्वारा दाम बढ़ाए जाने और कमजोर मानसून के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। RBI का अनुमान है कि मार्च 2027 को खत्म होने वाले वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 5.1% रह सकती है। RBI की MPC मीटिंग 3-5 अगस्त को, ब्याज दरें स्थिर रहने के आसार नोमुरा और एक्सपर्ट्स बोले- लागत बढ़ने से दाम बढ़ाना मजबूरी नोमुरा होल्डिंग्स की एशिया (जापान को छोड़कर) मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा का कहना है कि इनपुट कॉस्ट और कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहे भारी दबाव को देखते हुए ग्राहकों पर बढ़ी कीमतों का बोझ डालना अपरिहार्य (अनिवार्य) है। वहीं, देवयानी इंटरनेशनल (KFC और Pizza Hut चलाने वाली) के चेयरमैन रविकांत जयपुरिया ने कहा कि हालांकि मांग अब तक स्थिर रही है, लेकिन सामान्य से कम मानसून का अनुमान और ‘अल नीनो’ का जोखिम यह याद दिलाता है कि भारत में कंजम्पशन रिकवरी कभी भी सीधी रेखा में नहीं चलती। ग्रामीण और शहरी इलाकों में मांग मजबूत, जून में रिटेल बिक्री 6% बढ़ी कंपनियों के कॉमेंट्स के मुताबिक, अब तक ग्रामीण और शहरी दोनों ही भारत में मांग स्थिर बनी हुई है। क्या होता है ‘अल नीनो’ और ‘इनपुट कॉस्ट’? अल नीनो: यह प्रशांत महासागर में समुद्र के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की एक भौगोलिक घटना है। इसके कारण भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे सूखा पड़ने या कम बारिश होने का खतरा रहता है। बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घटता है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी प्रोडक्ट को तैयार करने या बनाने में लगने वाले कच्चे माल, ईंधन, ट्रांसपोर्टेशन और मजदूरी के कुल खर्च को इनपुट कॉस्ट कहते हैं। जब यह लागत बढ़ती है, तो कंपनियों को अपना प्रॉफिट मार्जिन बचाने के लिए अंतिम प्रोडक्ट के दाम बढ़ाने पड़ते हैं।
फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया

फिल्म ‘आर्य भट्ट का जीरो’ खुद पर भरोसा और सपनों के लिए संघर्ष की कहानी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सोनाली सहगल, हिमांश कोहली और डायरेक्टर कमल चंद्रा ने ऐसे अनुभव साझा किए, जब लोगों ने उन पर भरोसा नहीं किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सोनाली ने बताया कि एक फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह कार में रोते हुए घर गई थीं। हिमांश ने कहा कि ‘यारियां’ के बाद लगातार फिल्में नहीं चलीं तो लगा कि करियर खत्म हो गया। सवाल: फिल्म का संदेश है कि खुद पर भरोसा सबसे जरूरी है। आपकी जिंदगी में ऐसा कब हुआ? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे अंदर हमेशा आत्मविश्वास था, लेकिन मुझसे ज्यादा भरोसा मेरी मम्मी को था। उन्होंने मेरे मिस इंडिया बनने से पहले ही कहा था कि उनकी बेटी मिस इंडिया बनेगी। लोग हंसते थे, लेकिन उनका विश्वास कभी नहीं डगमगाया। आज मुझे लगता है कि परिवार का एक इंसान भी आप पर पूरा भरोसा करे, तो आधी लड़ाई वहीं जीत जाती है। इसलिए सेल्फ बिलीफ के साथ परिवार का भरोसा भी जरूरी है। सवाल: हिमांश, आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ था? जवाब/हिमांश कोहली: बचपन से मुझे फिल्मों का शौक था। जब लोगों से कहता था कि मुझे एक्टर बनना है, तो ज्यादातर लोग सपना छोड़ने की सलाह देते थे। स्कूल में मैंने झूठ बोल दिया कि मैं धारा तेल के विज्ञापन वाला बच्चा हूं। पूरे स्कूल ने भरोसा कर लिया, लेकिन बाद में सच सामने आ गया। इसके बाद मुझे बुलिंग झेलनी पड़ी। सीनियर्स मजाक उड़ाते थे और सजा भी देते थे। तभी मैंने तय किया कि सच में एक्टर बनकर दिखाऊंगा। सवाल: उस घटना ने आपको कितना बदला? जवाब/हिमांश कोहली: उस वक्त बहुत बुरा लगा था, लेकिन आज लगता है कि अगर वह घटना नहीं होती तो शायद मैं इतनी मेहनत नहीं करता। मैंने थिएटर शुरू किया, एक्टिंग सीखी और कई संस्थानों में ट्रेनिंग ली। मेरे माता-पिता ने हर कदम पर साथ दिया। आज पुराने दोस्त कहते हैं, ‘यार, तूने सच में अपना सपना पूरा कर लिया।’ सवाल: परिवार का साथ कितना जरूरी रहा? जवाब/हिमांश कोहली: अगर मेरे माता-पिता साथ नहीं देते तो मैं एक्टिंग की पढ़ाई नहीं कर पाता। उन्होंने सिर्फ पढ़ाई नहीं, मेरे सपने पर भी भरोसा किया। वही भरोसा मुझे यहां तक लेकर आया। सवाल: कमल जी, आपकी कहानी भी कुछ ऐसी ही है? जवाब/कमल चंद्रा: बिल्कुल। मैं इंजीनियर था। अच्छी नौकरी थी, लेकिन एक्टिंग वर्कशॉप के बाद लगा कि मुझे फिल्मों में काम करना है। मैंने चार सरकारी नौकरियां छोड़ दीं। रिश्तेदारों ने मना किया, लेकिन पिता ने कहा, ‘तूने मेरा सपना पूरा कर दिया, अब अपना सपना जी।’ उसी बात ने मुझे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखने दिया। सवाल: हिमांश क्या आप भी अपने माता-पिता का कोई अधूरा सपना भी जी रहे हैं? जवाब/हिमांश कोहली: बिल्कुल। मेरी मां कलाकार बनना चाहती थीं। उन्हें गायन, पेंटिंग और अभिनय का शौक था, लेकिन कम उम्र में शादी होने से उनका सपना अधूरा रह गया। आज फिल्मों में काम करते हुए लगता है कि मैं अपना ही नहीं, मां का सपना भी पूरा कर रहा हूं। उन्होंने एक बार ऋषि कपूर और जितेंद्र से मिलने की इच्छा जताई थी। जब मैं उन्हें दोनों कलाकारों से मिलवा पाया तो लगा कि मेरी मेहनत सफल हो गई। उनके चेहरे की खुशी मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: कमल जी, आपकी जिंदगी का सबसे भावुक पल कौन-सा रहा? जवाब/कमल चंद्रा: मेरी पहली फिल्म के दौरान महेश भट्ट ने मेरे पिता से फोन पर मेरी तारीफ की थी। फोन कटने के बाद पापा की खुशी देखने लायक थी। उन्होंने कहा, “मुझे पता था, मेरा बेटा कुछ अच्छा करेगा।” माता-पिता की आंखों में अपने लिए गर्व देखना सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। सवाल: ‘आर्य भट्ट का जीरो’ की कहानी में ऐसी क्या बात थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब/हिमांश कोहली: मुझे ‘बग्गू’ का किरदार बहुत पसंद आया। वह सिखाता है कि जिंदगी मंजिल से भटका सकती है, लेकिन सपना और मेहनत नहीं छोड़ें तो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है। हालात जैसे भी हों, उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे बड़ी सीख क्या मिली? जवाब/हिमांश कोहली: इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी टीम है। रवि किशन, राजेश शर्मा, गोपाल दत्त, नीरज सूद और बाकी कलाकारों के साथ बातचीत करना एक एक्टिंग स्कूल जैसा था। हर कलाकार अपने संघर्ष और अनुभव साझा करता था। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। सवाल: कमल जी, शूटिंग से जुड़ा कोई दिलचस्प किस्सा? जवाब/कमल चंद्रा: जिस घर में शूटिंग हुई, उसके मालिक बाद में उसे रेनोवेट करने वाले थे। लेकिन फिल्म पूरी होने के बाद उन्होंने फैसला बदल दिया। उन्हें लगा कि यह घर फिल्म की यादों से जुड़ गया है, इसलिए इसे जैसा है, वैसा ही रहने देना चाहिए। यह हमारे लिए बहुत खास पल था। सवाल: फिल्म का सबसे बड़ा संदेश क्या है? जवाब/कमल चंद्रा: हर इंसान जिंदगी में कभी न कभी खुद को ‘जीरो’ महसूस करता है। हमारी फिल्म कहती है कि खुद पर भरोसा और मेहनत बनी रहे, तो वही इंसान एक दिन हीरो बन सकता है। सवाल: सोनाली, आपने ‘आर्य भट्ट का जीरो’ के लिए हां क्यों कहा? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे लिए किसी भी फिल्म में सबसे अहम उसकी कहानी होती है। कमल ने स्क्रिप्ट सुनाई तो उसमें बनावटीपन नहीं, बल्कि सच्चाई दिखी। हर किरदार असली लगा और यही बात सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: रिंकू का किरदार आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/सोनाली सहगल: इस फिल्म से पहले मैं अलग जॉनर की फिल्म कर रही थी। वहां मेरा किरदार और दुनिया अलग थे। ‘रिंकू’ छोटे शहर की साधारण लड़की है, इसलिए उसके हावभाव, बोलने के तरीके और सोच पर अलग तरह से काम करना पड़ा। एक कलाकार के तौर पर यही चुनौती सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: इस फिल्म में सबसे खास बात क्या लगी? जवाब/सोनाली सहगल: मुझे लगा कि इस फिल्म का हर किरदार कुछ न कुछ सिखाता है। कोई उम्मीद देता है, कोई रिश्तों की अहमियत समझाता है और कोई संघर्ष से लड़ना सिखाता है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। सवाल: दर्शक ‘आर्य भट्ट का जीरो’ देखकर क्या महसूस करेंगे? जवाब/हिमांश कोहली: अगर लगे कि
फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया

फिल्म ‘आर्य भट्ट का जीरो’ खुद पर भरोसा और सपनों के लिए संघर्ष की कहानी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सोनाली सहगल, हिमांश कोहली और डायरेक्टर कमल चंद्रा ने ऐसे अनुभव साझा किए, जब लोगों ने उन पर भरोसा नहीं किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सोनाली ने बताया कि एक फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह कार में रोते हुए घर गई थीं। हिमांश ने कहा कि ‘यारियां’ के बाद लगातार फिल्में नहीं चलीं तो लगा कि करियर खत्म हो गया। सवाल: फिल्म का संदेश है कि खुद पर भरोसा सबसे जरूरी है। आपकी जिंदगी में ऐसा कब हुआ? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे अंदर हमेशा आत्मविश्वास था, लेकिन मुझसे ज्यादा भरोसा मेरी मम्मी को था। उन्होंने मेरे मिस इंडिया बनने से पहले ही कहा था कि उनकी बेटी मिस इंडिया बनेगी। लोग हंसते थे, लेकिन उनका विश्वास कभी नहीं डगमगाया। आज मुझे लगता है कि परिवार का एक इंसान भी आप पर पूरा भरोसा करे, तो आधी लड़ाई वहीं जीत जाती है। इसलिए सेल्फ बिलीफ के साथ परिवार का भरोसा भी जरूरी है। सवाल: हिमांश, आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ था? जवाब/हिमांश कोहली: बचपन से मुझे फिल्मों का शौक था। जब लोगों से कहता था कि मुझे एक्टर बनना है, तो ज्यादातर लोग सपना छोड़ने की सलाह देते थे। स्कूल में मैंने झूठ बोल दिया कि मैं धारा तेल के विज्ञापन वाला बच्चा हूं। पूरे स्कूल ने भरोसा कर लिया, लेकिन बाद में सच सामने आ गया। इसके बाद मुझे बुलिंग झेलनी पड़ी। सीनियर्स मजाक उड़ाते थे और सजा भी देते थे। तभी मैंने तय किया कि सच में एक्टर बनकर दिखाऊंगा। सवाल: उस घटना ने आपको कितना बदला? जवाब/हिमांश कोहली: उस वक्त बहुत बुरा लगा था, लेकिन आज लगता है कि अगर वह घटना नहीं होती तो शायद मैं इतनी मेहनत नहीं करता। मैंने थिएटर शुरू किया, एक्टिंग सीखी और कई संस्थानों में ट्रेनिंग ली। मेरे माता-पिता ने हर कदम पर साथ दिया। आज पुराने दोस्त कहते हैं, ‘यार, तूने सच में अपना सपना पूरा कर लिया।’ सवाल: परिवार का साथ कितना जरूरी रहा? जवाब/हिमांश कोहली: अगर मेरे माता-पिता साथ नहीं देते तो मैं एक्टिंग की पढ़ाई नहीं कर पाता। उन्होंने सिर्फ पढ़ाई नहीं, मेरे सपने पर भी भरोसा किया। वही भरोसा मुझे यहां तक लेकर आया। सवाल: कमल जी, आपकी कहानी भी कुछ ऐसी ही है? जवाब/कमल चंद्रा: बिल्कुल। मैं इंजीनियर था। अच्छी नौकरी थी, लेकिन एक्टिंग वर्कशॉप के बाद लगा कि मुझे फिल्मों में काम करना है। मैंने चार सरकारी नौकरियां छोड़ दीं। रिश्तेदारों ने मना किया, लेकिन पिता ने कहा, ‘तूने मेरा सपना पूरा कर दिया, अब अपना सपना जी।’ उसी बात ने मुझे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखने दिया। सवाल: हिमांश क्या आप भी अपने माता-पिता का कोई अधूरा सपना भी जी रहे हैं? जवाब/हिमांश कोहली: बिल्कुल। मेरी मां कलाकार बनना चाहती थीं। उन्हें गायन, पेंटिंग और अभिनय का शौक था, लेकिन कम उम्र में शादी होने से उनका सपना अधूरा रह गया। आज फिल्मों में काम करते हुए लगता है कि मैं अपना ही नहीं, मां का सपना भी पूरा कर रहा हूं। उन्होंने एक बार ऋषि कपूर और जितेंद्र से मिलने की इच्छा जताई थी। जब मैं उन्हें दोनों कलाकारों से मिलवा पाया तो लगा कि मेरी मेहनत सफल हो गई। उनके चेहरे की खुशी मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: कमल जी, आपकी जिंदगी का सबसे भावुक पल कौन-सा रहा? जवाब/कमल चंद्रा: मेरी पहली फिल्म के दौरान महेश भट्ट ने मेरे पिता से फोन पर मेरी तारीफ की थी। फोन कटने के बाद पापा की खुशी देखने लायक थी। उन्होंने कहा, “मुझे पता था, मेरा बेटा कुछ अच्छा करेगा।” माता-पिता की आंखों में अपने लिए गर्व देखना सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। सवाल: ‘आर्य भट्ट का जीरो’ की कहानी में ऐसी क्या बात थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब/हिमांश कोहली: मुझे ‘बग्गू’ का किरदार बहुत पसंद आया। वह सिखाता है कि जिंदगी मंजिल से भटका सकती है, लेकिन सपना और मेहनत नहीं छोड़ें तो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है। हालात जैसे भी हों, उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे बड़ी सीख क्या मिली? जवाब/हिमांश कोहली: इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी टीम है। रवि किशन, राजेश शर्मा, गोपाल दत्त, नीरज सूद और बाकी कलाकारों के साथ बातचीत करना एक एक्टिंग स्कूल जैसा था। हर कलाकार अपने संघर्ष और अनुभव साझा करता था। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। सवाल: कमल जी, शूटिंग से जुड़ा कोई दिलचस्प किस्सा? जवाब/कमल चंद्रा: जिस घर में शूटिंग हुई, उसके मालिक बाद में उसे रेनोवेट करने वाले थे। लेकिन फिल्म पूरी होने के बाद उन्होंने फैसला बदल दिया। उन्हें लगा कि यह घर फिल्म की यादों से जुड़ गया है, इसलिए इसे जैसा है, वैसा ही रहने देना चाहिए। यह हमारे लिए बहुत खास पल था। सवाल: फिल्म का सबसे बड़ा संदेश क्या है? जवाब/कमल चंद्रा: हर इंसान जिंदगी में कभी न कभी खुद को ‘जीरो’ महसूस करता है। हमारी फिल्म कहती है कि खुद पर भरोसा और मेहनत बनी रहे, तो वही इंसान एक दिन हीरो बन सकता है। सवाल: सोनाली, आपने ‘आर्य भट्ट का जीरो’ के लिए हां क्यों कहा? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे लिए किसी भी फिल्म में सबसे अहम उसकी कहानी होती है। कमल ने स्क्रिप्ट सुनाई तो उसमें बनावटीपन नहीं, बल्कि सच्चाई दिखी। हर किरदार असली लगा और यही बात सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: रिंकू का किरदार आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/सोनाली सहगल: इस फिल्म से पहले मैं अलग जॉनर की फिल्म कर रही थी। वहां मेरा किरदार और दुनिया अलग थे। ‘रिंकू’ छोटे शहर की साधारण लड़की है, इसलिए उसके हावभाव, बोलने के तरीके और सोच पर अलग तरह से काम करना पड़ा। एक कलाकार के तौर पर यही चुनौती सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: इस फिल्म में सबसे खास बात क्या लगी? जवाब/सोनाली सहगल: मुझे लगा कि इस फिल्म का हर किरदार कुछ न कुछ सिखाता है। कोई उम्मीद देता है, कोई रिश्तों की अहमियत समझाता है और कोई संघर्ष से लड़ना सिखाता है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। सवाल: दर्शक ‘आर्य भट्ट का जीरो’ देखकर क्या महसूस करेंगे? जवाब/हिमांश कोहली: अगर लगे कि
चांदी आज ₹370 सस्ती, इस हफ्ते ₹4,426 गिरी:सोना ₹524 घटकर ₹1.43 पर आया; जानें अपने शहर के दाम

सोने-चांदी की कीमतों में 31 जुलाई को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 370 रुपए घटकर 2,18,295 रुपए पर आ गई है, जो गुरुवार को 2,18,665 रुपए पर थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 524 रुपए घटकर 1,42,860 लाख रुपए आ गया। इससे पहले 30 जुलाई को यह 1,43,384 लाख पर था। सोना इस हफ्ते 921 रुपए सस्ता हुआ है, जबकि चांदी की कीमत 4,426 रुपए गिरी है। 25 जुलाई को सोना ₹1.44 लाख/10 ग्राम और चांदी ₹2.23 लाख/किलो थी। देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ऑल टाइम हाई से 1.68 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 33,261 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 162 दिन में चांदी 1.68 लाख रुपए सस्ती हो गई है। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल
जोमैटो-ब्लिंकइट के 1 लाख डिलीवरी पार्टनर्स ने फाइल किया ITR:₹18 करोड़ का इनकम टैक्स रिफंड मिला; 905 शहरों में 73% पहली बार टैक्सपेयर बने

जोमैटो और ब्लिंकिट ने इस साल देश के 905 शहरों में अपने एक लाख से ज्यादा डिलीवरी पार्टनर्स को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने में मदद की है। इस पहल से डिलीवरी पार्टनर्स को अब तक 18 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स रिफंड मिल चुका है। गिग वर्कर के लिए रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख में अभी एक महीना बाकी है, जो कि 31 अगस्त 2026 है। 73% डिलीवरी पार्टनर्स ने पहली बार भरा ITR इस साल रिटर्न फाइल करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स में से लगभग 73% ऐसे लोग हैं, जिन्होंने पहली बार ITR फाइल किया है। जोमैटो या ब्लिंकिट के पास इनके पिछले सालों के रिटर्न फाइल करने का कोई रिकॉर्ड नहीं था। यह आंकड़ा दिखाता है कि प्लेटफॉर्म की मदद से अब गिग वर्कर भी औपचारिक वित्तीय प्रणाली (फॉर्मल फाइनेंशियल सिस्टम) से तेजी से जुड़ रहे हैं। ITR से मिलेगा लोन, क्रेडिट कार्ड और रेंटल एग्रीमेंट में फायदा ITR को एक विश्वसनीय वित्तीय दस्तावेज के रूप में मान्यता प्राप्त है। इससे डिलीवरी पार्टनर्स को अपनी वित्तीय साख बनाने में मदद मिलती है। इसका उपयोग वे पर्सनल लोन, FD-बैकड क्रेडिट कार्ड, रेंटल एग्रीमेंट और अन्य सेवाओं के आवेदन के दौरान अपनी वित्तीय हिस्ट्री साबित करने के लिए कर सकते हैं।
जोमैटो-ब्लिंकइट के 1 लाख डिलीवरी पार्टनर्स ने फाइल किया ITR:₹18 करोड़ का इनकम टैक्स रिफंड मिला; 905 शहरों में 73% पहली बार टैक्सपेयर बने

जोमैटो और ब्लिंकिट ने इस साल देश के 905 शहरों में अपने एक लाख से ज्यादा डिलीवरी पार्टनर्स को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने में मदद की है। इस पहल से डिलीवरी पार्टनर्स को अब तक 18 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स रिफंड मिल चुका है। गिग वर्कर के लिए रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख में अभी एक महीना बाकी है, जो कि 31 अगस्त 2026 है। 73% डिलीवरी पार्टनर्स ने पहली बार भरा ITR इस साल रिटर्न फाइल करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स में से लगभग 73% ऐसे लोग हैं, जिन्होंने पहली बार ITR फाइल किया है। जोमैटो या ब्लिंकिट के पास इनके पिछले सालों के रिटर्न फाइल करने का कोई रिकॉर्ड नहीं था। यह आंकड़ा दिखाता है कि प्लेटफॉर्म की मदद से अब गिग वर्कर भी औपचारिक वित्तीय प्रणाली (फॉर्मल फाइनेंशियल सिस्टम) से तेजी से जुड़ रहे हैं। ITR से मिलेगा लोन, क्रेडिट कार्ड और रेंटल एग्रीमेंट में फायदा ITR को एक विश्वसनीय वित्तीय दस्तावेज के रूप में मान्यता प्राप्त है। इससे डिलीवरी पार्टनर्स को अपनी वित्तीय साख बनाने में मदद मिलती है। इसका उपयोग वे पर्सनल लोन, FD-बैकड क्रेडिट कार्ड, रेंटल एग्रीमेंट और अन्य सेवाओं के आवेदन के दौरान अपनी वित्तीय हिस्ट्री साबित करने के लिए कर सकते हैं।
पाकिस्तान में गैंगस्टर उजैर बलोच के भाई पर हमला:ल्यारी में अज्ञात हमलावरों ने घर के बाहर गोली मारी, हालत गंभीर

पाकिस्तान के कराची में जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर उजैर बलोच के भाई जुबैर बलोच पर गुरुवार शाम जानलेवा हमला हुआ। कराची के लियारी इलाके में उनके घर के बाहर बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। हमले में 40 साल जुबैर गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि गोलीबारी की चपेट में आए दो राहगीर भी जख्मी हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुबैर के सीने और पेट में गोलियां लगी हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए। घायलों को तुरंत कराची के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां जुबैर की सर्जरी की गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, घायल राहगीरों में से एक की हालत भी गंभीर है। गैंगवार और पुरानी रंजिश की जांच साउथ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) सैयद असद रजा ने बताया कि पुलिस हमले की हर पहलू से जांच कर रही है। शुरुआती जांच में गैंगवार, पुरानी दुश्मनी और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखा गया है। फिलहाल किसी एक वजह की पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस के अनुसार, जुबैर बलोच 2012 में सात आपराधिक मामलों में गिरफ्तार हुआ था। वह इसी साल जनवरी 2025 में जेल से रिहा होकर बाहर आया था। अधिकारियों का कहना है कि हमले के पीछे उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि भी जांच के दायरे में है। इलाके में गैंगवार फिर से शुरू होने की चर्चा इस घटना के बाद लियारी में एक बार फिर गैंगवार की आशंकाएं तेज हो गई हैं। इलाके के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जुबैर ने हाल ही में एक राजनीतिक पार्टी जॉइन की थी और कुछ महीने पहले इलाके में पार्टी के झंडे भी लगाए थे। उनका दावा है कि कराची ऑपरेशन के दौरान दुबई और ईरान भागे कई गैंगस्टरों के दोबारा लौटने की चर्चाएं हैं, जिससे स्थानीय लोगों में गैंगवार फिर शुरू होने का डर बढ़ गया है। उजैर बलोच पर कई गंभीर मामले दर्ज उजैर बलोच कभी कराची के सबसे ताकतवर गैंग लीडरों में गिना जाता था। उसे लियारी का कुख्यात गैंगस्टर अब्दुल रहमान उर्फ रहमान डकैत का दाहिना हाथ माना जाता था। पुलिस मुठभेड़ में रहमान डकैत के मारे जाने के बाद उजैर ने लियारी के अपराध जगत की कमान संभाल ली और धीरे-धीरे इलाके का सबसे प्रभावशाली गैंगस्टर बन गया। फिलहाल उजैर बलोच पाकिस्तान की जेल में बंद है। इसी साल मार्च में आतंकवाद विरोधी अदालत ने हत्या, पुलिस पर हमले और विस्फोटक रखने समेत सात मामलों में उसकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। उस पर 2012 में कलाकोट थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर हथियारों और विस्फोटकों से हमला करने का भी आरोप है। इससे पहले अप्रैल 2020 में एक सैन्य अदालत ने उसे जासूसी का दोषी ठहराते हुए 12 साल की सजा सुनाई थी। हाल के दिनों में उजैर बलोच का नाम भारतीय स्पाई-थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ की वजह से भी चर्चा में रहा है। फिल्म में उसके किरदार को अभिनेता दानिश पंडोर ने निभाया है।
मार्सिया का सक्सेस मंत्र; ब्लिस से खड़े किए 5 ब्रांड:1000 करोड़ की मालकिन की सलाह, पहले सर्वाइवल जरूरी, बिजनेस की प्लानिंग बाद में

मार्सिया किलगोर (57) का ऑनलाइन-सब्सक्रिप्शन ब्यूटी ब्रांड ‘ब्यूटी पाई’ इंडस्ट्री में गेम-चेंजर माना जाता है। 2016 में ब्यूटी पाई शुरू करने से पहले किलगोर लग्जरी स्पा ब्रांड ब्लिस, मेकअप-स्किनकेयर ब्रांड सोप एंड ग्लोरी और फुटवियर ब्रांड फिटफ्लॉप जैसे 4 बिजनेस खड़े कर चुकी थीं। तंगी के चलते कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। पर्सनल ट्रेनर की नौकरी और शाम को ब्यूटी क्लासेज लेनी शुरू की। यहीं से उनके पांच दशक लंबे आंत्रप्रेन्योर सफर की नींव पड़ी। उन्होंने अपनी सफलता के पांच सूत्र साझा किए हैं… 1. परफेक्ट प्लान की जरूरत नहीं – किलगोर कहती हैं कि शुरू में कोई बिजनेस प्लान नहीं था। हालात ने मजबूर किया तो उन्होंने जो हुनर था उसी से कमाना शुरू किया। आगे रास्ता खुद-ब-खुद बनता गया। उनका मानना है कि सर्वाइवल पहले जरूरी है, प्लानिंग बाद में अपने आप हो जाती है। 2. जिसमें महारत, वही काम शुरू करें – ब्लिस स्पा की लंदन ब्रांच में भीड़ बढ़ने पर जब ट्रेंड किए गए कई स्टाफ डर कर नौकरी छोड़ गए। किलगोर खुद वैक्सिंग और फेशियल करने में सक्षम थीं क्योंकि उन्होंने हर काम खुद सीखा था। उनकी सलाह है कि जिस क्षेत्र की गहरी जानकारी हो, वहीं कारोबार शुरू करें, ताकि मुश्किल वक्त में कोई और आपको निर्भर न बना दे। 3. अपने आइडिया को खुद चुनौती दें – किलगोर सुझाव देती हैं कि अगर कोई अपने आइडिया की अहमियत एक वाक्य में नहीं समझा सकता, तो आइडिया अधूरा है। वे ‘ओनरशिप बायस’ से बचने की सलाह देती हैं। यानी सिर्फ इसलिए आइडिया को शानदार मत मानिए क्योंकि वह आपका है। उनके मुताबिक अब एआई किसी भी नए उद्यमी के लिए सस्ता कंसल्टेंट बन गया है, जो आइडिया को चुनौती देकर बेहतर बना सकता है। 4. त्याग के लिए तैयार रहें, दयालु बनें – किलगोर ने तय किया कि वे ऐसी इंसान बनेंगी, जिसके साथ लोग रहना पसंद करें। मेहनत व नम्रता से छोटा सैलून महीनों पहले बुक होने लगा। वे मानती हैं कि बिजनेस के लिए बड़े त्याग जरूरी हैं। हालांकि बच्चों के स्कूल कार्यक्रम व पारिवारिक छुट्टियां नहीं छोड़ीं। 5. डेथबेड टेस्ट अपनाएं – किलगोर बड़े फैसले से पहले खुद से पूछती हैं कि क्या यह प्रोजेक्ट जीवन के आखिरी पल में भी सार्थक लगेगा। इससे पता चलता है कि कौन-सा आइडिया समय देने लायक है। ब्यूटी पाई – अनोखा बिजनेस मॉडल, सालाना आय 1,000 करोड़- किलगोर ने अब तक 5 लाइफस्टाइल ब्रांड खड़े किए। ब्लिस, सोप एंड ग्लोरी, फिटफ्लॉप और ब्यूटी पाई इनमें प्रमुख हैं। ब्यूटी पाई की शुरुआत 2016 में हुई थी और यह पूरी तरह ऑनलाइन-सब्सक्रिप्शन मॉडल पर आधारित है। इसे इंडस्ट्री में अनोखा प्रयोग माना जाता है। ब्यूटी पाई की सालाना आय 1,000 करोड़ रुपए है।
मार्सिया का सक्सेस मंत्र; ब्लिस से खड़े किए 5 ब्रांड:1000 करोड़ की मालकिन की सलाह, पहले सर्वाइवल जरूरी, बिजनेस की प्लानिंग बाद में

मार्सिया किलगोर (57) का ऑनलाइन-सब्सक्रिप्शन ब्यूटी ब्रांड ‘ब्यूटी पाई’ इंडस्ट्री में गेम-चेंजर माना जाता है। 2016 में ब्यूटी पाई शुरू करने से पहले किलगोर लग्जरी स्पा ब्रांड ब्लिस, मेकअप-स्किनकेयर ब्रांड सोप एंड ग्लोरी और फुटवियर ब्रांड फिटफ्लॉप जैसे 4 बिजनेस खड़े कर चुकी थीं। तंगी के चलते कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। पर्सनल ट्रेनर की नौकरी और शाम को ब्यूटी क्लासेज लेनी शुरू की। यहीं से उनके पांच दशक लंबे आंत्रप्रेन्योर सफर की नींव पड़ी। उन्होंने अपनी सफलता के पांच सूत्र साझा किए हैं… 1. परफेक्ट प्लान की जरूरत नहीं – किलगोर कहती हैं कि शुरू में कोई बिजनेस प्लान नहीं था। हालात ने मजबूर किया तो उन्होंने जो हुनर था उसी से कमाना शुरू किया। आगे रास्ता खुद-ब-खुद बनता गया। उनका मानना है कि सर्वाइवल पहले जरूरी है, प्लानिंग बाद में अपने आप हो जाती है। 2. जिसमें महारत, वही काम शुरू करें – ब्लिस स्पा की लंदन ब्रांच में भीड़ बढ़ने पर जब ट्रेंड किए गए कई स्टाफ डर कर नौकरी छोड़ गए। किलगोर खुद वैक्सिंग और फेशियल करने में सक्षम थीं क्योंकि उन्होंने हर काम खुद सीखा था। उनकी सलाह है कि जिस क्षेत्र की गहरी जानकारी हो, वहीं कारोबार शुरू करें, ताकि मुश्किल वक्त में कोई और आपको निर्भर न बना दे। 3. अपने आइडिया को खुद चुनौती दें – किलगोर सुझाव देती हैं कि अगर कोई अपने आइडिया की अहमियत एक वाक्य में नहीं समझा सकता, तो आइडिया अधूरा है। वे ‘ओनरशिप बायस’ से बचने की सलाह देती हैं। यानी सिर्फ इसलिए आइडिया को शानदार मत मानिए क्योंकि वह आपका है। उनके मुताबिक अब एआई किसी भी नए उद्यमी के लिए सस्ता कंसल्टेंट बन गया है, जो आइडिया को चुनौती देकर बेहतर बना सकता है। 4. त्याग के लिए तैयार रहें, दयालु बनें – किलगोर ने तय किया कि वे ऐसी इंसान बनेंगी, जिसके साथ लोग रहना पसंद करें। मेहनत व नम्रता से छोटा सैलून महीनों पहले बुक होने लगा। वे मानती हैं कि बिजनेस के लिए बड़े त्याग जरूरी हैं। हालांकि बच्चों के स्कूल कार्यक्रम व पारिवारिक छुट्टियां नहीं छोड़ीं। 5. डेथबेड टेस्ट अपनाएं – किलगोर बड़े फैसले से पहले खुद से पूछती हैं कि क्या यह प्रोजेक्ट जीवन के आखिरी पल में भी सार्थक लगेगा। इससे पता चलता है कि कौन-सा आइडिया समय देने लायक है। ब्यूटी पाई – अनोखा बिजनेस मॉडल, सालाना आय 1,000 करोड़- किलगोर ने अब तक 5 लाइफस्टाइल ब्रांड खड़े किए। ब्लिस, सोप एंड ग्लोरी, फिटफ्लॉप और ब्यूटी पाई इनमें प्रमुख हैं। ब्यूटी पाई की शुरुआत 2016 में हुई थी और यह पूरी तरह ऑनलाइन-सब्सक्रिप्शन मॉडल पर आधारित है। इसे इंडस्ट्री में अनोखा प्रयोग माना जाता है। ब्यूटी पाई की सालाना आय 1,000 करोड़ रुपए है।








