Tuesday, 15 Sep 2026 | 10:44 AM

Trending :

EXCLUSIVE

फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया

फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया

फिल्म ‘आर्य भट्ट का जीरो’ खुद पर भरोसा और सपनों के लिए संघर्ष की कहानी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सोनाली सहगल, हिमांश कोहली और डायरेक्टर कमल चंद्रा ने ऐसे अनुभव साझा किए, जब लोगों ने उन पर भरोसा नहीं किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सोनाली ने बताया कि एक फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह कार में रोते हुए घर गई थीं। हिमांश ने कहा कि ‘यारियां’ के बाद लगातार फिल्में नहीं चलीं तो लगा कि करियर खत्म हो गया। सवाल: फिल्म का संदेश है कि खुद पर भरोसा सबसे जरूरी है। आपकी जिंदगी में ऐसा कब हुआ? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे अंदर हमेशा आत्मविश्वास था, लेकिन मुझसे ज्यादा भरोसा मेरी मम्मी को था। उन्होंने मेरे मिस इंडिया बनने से पहले ही कहा था कि उनकी बेटी मिस इंडिया बनेगी। लोग हंसते थे, लेकिन उनका विश्वास कभी नहीं डगमगाया। आज मुझे लगता है कि परिवार का एक इंसान भी आप पर पूरा भरोसा करे, तो आधी लड़ाई वहीं जीत जाती है। इसलिए सेल्फ बिलीफ के साथ परिवार का भरोसा भी जरूरी है। सवाल: हिमांश, आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ था? जवाब/हिमांश कोहली: बचपन से मुझे फिल्मों का शौक था। जब लोगों से कहता था कि मुझे एक्टर बनना है, तो ज्यादातर लोग सपना छोड़ने की सलाह देते थे। स्कूल में मैंने झूठ बोल दिया कि मैं धारा तेल के विज्ञापन वाला बच्चा हूं। पूरे स्कूल ने भरोसा कर लिया, लेकिन बाद में सच सामने आ गया। इसके बाद मुझे बुलिंग झेलनी पड़ी। सीनियर्स मजाक उड़ाते थे और सजा भी देते थे। तभी मैंने तय किया कि सच में एक्टर बनकर दिखाऊंगा। सवाल: उस घटना ने आपको कितना बदला? जवाब/हिमांश कोहली: उस वक्त बहुत बुरा लगा था, लेकिन आज लगता है कि अगर वह घटना नहीं होती तो शायद मैं इतनी मेहनत नहीं करता। मैंने थिएटर शुरू किया, एक्टिंग सीखी और कई संस्थानों में ट्रेनिंग ली। मेरे माता-पिता ने हर कदम पर साथ दिया। आज पुराने दोस्त कहते हैं, ‘यार, तूने सच में अपना सपना पूरा कर लिया।’ सवाल: परिवार का साथ कितना जरूरी रहा? जवाब/हिमांश कोहली: अगर मेरे माता-पिता साथ नहीं देते तो मैं एक्टिंग की पढ़ाई नहीं कर पाता। उन्होंने सिर्फ पढ़ाई नहीं, मेरे सपने पर भी भरोसा किया। वही भरोसा मुझे यहां तक लेकर आया। सवाल: कमल जी, आपकी कहानी भी कुछ ऐसी ही है? जवाब/कमल चंद्रा: बिल्कुल। मैं इंजीनियर था। अच्छी नौकरी थी, लेकिन एक्टिंग वर्कशॉप के बाद लगा कि मुझे फिल्मों में काम करना है। मैंने चार सरकारी नौकरियां छोड़ दीं। रिश्तेदारों ने मना किया, लेकिन पिता ने कहा, ‘तूने मेरा सपना पूरा कर दिया, अब अपना सपना जी।’ उसी बात ने मुझे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखने दिया। सवाल: हिमांश क्या आप भी अपने माता-पिता का कोई अधूरा सपना भी जी रहे हैं? जवाब/हिमांश कोहली: बिल्कुल। मेरी मां कलाकार बनना चाहती थीं। उन्हें गायन, पेंटिंग और अभिनय का शौक था, लेकिन कम उम्र में शादी होने से उनका सपना अधूरा रह गया। आज फिल्मों में काम करते हुए लगता है कि मैं अपना ही नहीं, मां का सपना भी पूरा कर रहा हूं। उन्होंने एक बार ऋषि कपूर और जितेंद्र से मिलने की इच्छा जताई थी। जब मैं उन्हें दोनों कलाकारों से मिलवा पाया तो लगा कि मेरी मेहनत सफल हो गई। उनके चेहरे की खुशी मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: कमल जी, आपकी जिंदगी का सबसे भावुक पल कौन-सा रहा? जवाब/कमल चंद्रा: मेरी पहली फिल्म के दौरान महेश भट्ट ने मेरे पिता से फोन पर मेरी तारीफ की थी। फोन कटने के बाद पापा की खुशी देखने लायक थी। उन्होंने कहा, “मुझे पता था, मेरा बेटा कुछ अच्छा करेगा।” माता-पिता की आंखों में अपने लिए गर्व देखना सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। सवाल: ‘आर्य भट्ट का जीरो’ की कहानी में ऐसी क्या बात थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब/हिमांश कोहली: मुझे ‘बग्गू’ का किरदार बहुत पसंद आया। वह सिखाता है कि जिंदगी मंजिल से भटका सकती है, लेकिन सपना और मेहनत नहीं छोड़ें तो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है। हालात जैसे भी हों, उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे बड़ी सीख क्या मिली? जवाब/हिमांश कोहली: इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी टीम है। रवि किशन, राजेश शर्मा, गोपाल दत्त, नीरज सूद और बाकी कलाकारों के साथ बातचीत करना एक एक्टिंग स्कूल जैसा था। हर कलाकार अपने संघर्ष और अनुभव साझा करता था। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। सवाल: कमल जी, शूटिंग से जुड़ा कोई दिलचस्प किस्सा? जवाब/कमल चंद्रा: जिस घर में शूटिंग हुई, उसके मालिक बाद में उसे रेनोवेट करने वाले थे। लेकिन फिल्म पूरी होने के बाद उन्होंने फैसला बदल दिया। उन्हें लगा कि यह घर फिल्म की यादों से जुड़ गया है, इसलिए इसे जैसा है, वैसा ही रहने देना चाहिए। यह हमारे लिए बहुत खास पल था। सवाल: फिल्म का सबसे बड़ा संदेश क्या है? जवाब/कमल चंद्रा: हर इंसान जिंदगी में कभी न कभी खुद को ‘जीरो’ महसूस करता है। हमारी फिल्म कहती है कि खुद पर भरोसा और मेहनत बनी रहे, तो वही इंसान एक दिन हीरो बन सकता है। सवाल: सोनाली, आपने ‘आर्य भट्ट का जीरो’ के लिए हां क्यों कहा? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे लिए किसी भी फिल्म में सबसे अहम उसकी कहानी होती है। कमल ने स्क्रिप्ट सुनाई तो उसमें बनावटीपन नहीं, बल्कि सच्चाई दिखी। हर किरदार असली लगा और यही बात सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: रिंकू का किरदार आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/सोनाली सहगल: इस फिल्म से पहले मैं अलग जॉनर की फिल्म कर रही थी। वहां मेरा किरदार और दुनिया अलग थे। ‘रिंकू’ छोटे शहर की साधारण लड़की है, इसलिए उसके हावभाव, बोलने के तरीके और सोच पर अलग तरह से काम करना पड़ा। एक कलाकार के तौर पर यही चुनौती सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: इस फिल्म में सबसे खास बात क्या लगी? जवाब/सोनाली सहगल: मुझे लगा कि इस फिल्म का हर किरदार कुछ न कुछ सिखाता है। कोई उम्मीद देता है, कोई रिश्तों की अहमियत समझाता है और कोई संघर्ष से लड़ना सिखाता है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। सवाल: दर्शक ‘आर्य भट्ट का जीरो’ देखकर क्या महसूस करेंगे? जवाब/हिमांश कोहली: अगर लगे कि जिंदगी योजना के मुताबिक नहीं चल रही, तब भी हार मत मानिए। सपनों पर भरोसा रखिए और मेहनत करते रहिए। देर हो सकती है, लेकिन मंजिल जरूर मिलेगी। कमल चंद्रा: यह फिल्म सिर्फ एक इंसान या एक कुत्ते की कहानी नहीं है। यह उन सभी लोगों की कहानी है, जिन्हें कभी न कभी ‘जीरो’ कहा गया। अगर आप खुद पर भरोसा रखते हैं, तो एक दिन वही लोग आपकी सफलता की मिसाल देंगे। सोनाली सहगल: हम चाहते हैं कि लोग थिएटर से सिर्फ फिल्म देखकर नहीं, बल्कि अपने सपनों पर दोबारा भरोसा करके निकलें। अगर फिल्म देखने के बाद एक भी इंसान हार मानने की बजाय फिर कोशिश करने लगे, तो हमारी मेहनत सफल हो जाएगी। सवाल: क्या कभी ऐसा वक्त आया, जब आपका खुद पर भरोसा डगमगाया? उससे बाहर कैसे निकले? जवाब/सोनाली सहगल: इस इंडस्ट्री में रास्ता आसान नहीं है। मेहनत से कभी डर नहीं लगा, लेकिन शुरुआत में मौके मिलना सबसे मुश्किल होता है। सबसे बड़ा झटका ‘जय मम्मी दी’ का बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलना था। शायद पहली बार कैमरे पर यह बात कह रही हूं। मैंने उस फिल्म के लिए अपना सब कुछ लगा दिया था। वह मेरी पहली सोलो लीड फिल्म थी और उससे बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन कोविड की शुरुआत की वजह से फिल्म थिएटर में वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई। मुझे आज भी याद है, पहले दिन के बॉक्स ऑफिस नंबर देखकर मैं इवेंट से लौटते समय कार में रो रही थी। मेरी नई मैनेजर समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे संभाले। मैं कुछ दिनों के लिए डिप्रेशन में चली गई थी। लेकिन मैं जल्दी संभल जाती हूं। मैंने खुद से कहा कि मुझे अपने काम पर गर्व है। बाद में फिल्म नेटफ्लिक्स पर लोगों ने खूब पसंद की। तब समझ आया कि हर फिल्म अपनी किस्मत लेकर आती है। हौसला टूटता जरूर है, लेकिन उसे दोबारा खड़ा भी आपको ही करना पड़ता है। जीरो लगने के बाद खुद को फिर हीरो भी आपको ही बनाना पड़ता है। सवाल: हिमांश, आपने भी उतार-चढ़ाव देखे हैं। उस दौर को कैसे संभाला? जवाब/हिमांश कोहली: मेरे साथ शुरुआत उलटी हुई। ‘यारियां’ सुपरहिट रही, लेकिन उसके बाद दो-तीन फिल्मों को वैसा रिस्पॉन्स नहीं मिला। उस वक्त समझ नहीं आता था कि आगे क्या करना है। कई लोग कहने लगे थे, ‘अब सब खत्म हो गया… अब यहां कुछ नहीं रखा।’ सच कहूं तो मुझे भी लगने लगा था कि शायद बैग पैक करके घर लौट जाना चाहिए। लेकिन आज समझ आता है कि वह सिर्फ एक दौर था। उस समय जो फिल्में नहीं चलीं, वही आज टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। मैं उनके रिजल्ट देखकर हैरान हो जाता हूं। इसलिए अब लगता है कि हर चीज का अपना समय होता है। अगर मेहनत और भरोसा बना रहे तो मुश्किल दौर भी हमेशा नहीं रहता।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
CSK CEO: Dhoni Full IPL 2026 Season

March 11, 2026/
6:05 pm

स्पोर्ट्स डेस्क38 मिनट पहले कॉपी लिंक धोनी IPL में सबसे ज्यादा 278 मैच खेलने वाले प्लेयर हैं। भारतीय टीम के...

13,396 Cases in 2024; Delhi Tops Metro Cities

May 7, 2026/
6:01 am

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने साल 2024 में देश में हुए क्राइम की...

घर में आग लगी, बुजुर्ग महिला को बचाया:सिंगरौली में पुलिस ने लोगों के साथ मिलकर पाया काबू

April 14, 2026/
6:54 pm

सिंगरौली के सरई नगर परिषद के नौडिया गांव (वार्ड नंबर 12) में भैया लाल जायसवाल के घर में अचानक आग...

केरल चुनाव: वोट से पहले 'कैश फॉर वोट' का खंडन, वीडियो से अनमोल गरमाई; कांग्रेस ने EC पर भी कसा तंज

April 8, 2026/
5:29 pm

केरल विधानसभा चुनाव 2026: केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ससुराल पक्ष चरम पर है। कांग्रेस नेता वी.डी. शेरीशन ने...

माली के रक्षामंत्री सादियो की बम धमाके में मौत:कल घर पर सुसाइड कार से हमला हुआ; जिहादी और विद्रोही संगठन ने मिलकर अंजाम दिया

April 26, 2026/
8:49 pm

माली के रक्षा मंत्री सादियो कामारा की बम धमाके में मौत हो गई। शनिवार को राजधानी बमाको के पास काटी...

सोलर प्लांट में तोड़फोड़, 475 प्लेटें क्षतिग्रस्त:सिक्योरिटी गार्ड की शिकायत पर तीन आरोपियों पर केस दर्ज

March 31, 2026/
11:51 am

शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम देहरीपाल स्थित सोलर प्लांट में तोड़फोड़ का मामला सामने आया है।...

authorimg

March 28, 2026/
3:28 pm

होमताजा खबरDelhi कभी बारिश से बढ़ी ठंड, कभी तपती गर्मी, हर दिन बदलता मौसम…बच्चे हो रहे बीमार! Last Updated:March 28,...

Pakistan Sikh Couple Murder | SGPC Condemns Minority Safety

June 18, 2026/
7:17 am

गुरुद्वारे में घुसकर दंपती पर अंधाधुंथ फायरिंग की गई, जिससे उनकी मौत हो गई। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया

फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया

फिल्म ‘आर्य भट्ट का जीरो’ खुद पर भरोसा और सपनों के लिए संघर्ष की कहानी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सोनाली सहगल, हिमांश कोहली और डायरेक्टर कमल चंद्रा ने ऐसे अनुभव साझा किए, जब लोगों ने उन पर भरोसा नहीं किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सोनाली ने बताया कि एक फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह कार में रोते हुए घर गई थीं। हिमांश ने कहा कि ‘यारियां’ के बाद लगातार फिल्में नहीं चलीं तो लगा कि करियर खत्म हो गया। सवाल: फिल्म का संदेश है कि खुद पर भरोसा सबसे जरूरी है। आपकी जिंदगी में ऐसा कब हुआ? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे अंदर हमेशा आत्मविश्वास था, लेकिन मुझसे ज्यादा भरोसा मेरी मम्मी को था। उन्होंने मेरे मिस इंडिया बनने से पहले ही कहा था कि उनकी बेटी मिस इंडिया बनेगी। लोग हंसते थे, लेकिन उनका विश्वास कभी नहीं डगमगाया। आज मुझे लगता है कि परिवार का एक इंसान भी आप पर पूरा भरोसा करे, तो आधी लड़ाई वहीं जीत जाती है। इसलिए सेल्फ बिलीफ के साथ परिवार का भरोसा भी जरूरी है। सवाल: हिमांश, आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ था? जवाब/हिमांश कोहली: बचपन से मुझे फिल्मों का शौक था। जब लोगों से कहता था कि मुझे एक्टर बनना है, तो ज्यादातर लोग सपना छोड़ने की सलाह देते थे। स्कूल में मैंने झूठ बोल दिया कि मैं धारा तेल के विज्ञापन वाला बच्चा हूं। पूरे स्कूल ने भरोसा कर लिया, लेकिन बाद में सच सामने आ गया। इसके बाद मुझे बुलिंग झेलनी पड़ी। सीनियर्स मजाक उड़ाते थे और सजा भी देते थे। तभी मैंने तय किया कि सच में एक्टर बनकर दिखाऊंगा। सवाल: उस घटना ने आपको कितना बदला? जवाब/हिमांश कोहली: उस वक्त बहुत बुरा लगा था, लेकिन आज लगता है कि अगर वह घटना नहीं होती तो शायद मैं इतनी मेहनत नहीं करता। मैंने थिएटर शुरू किया, एक्टिंग सीखी और कई संस्थानों में ट्रेनिंग ली। मेरे माता-पिता ने हर कदम पर साथ दिया। आज पुराने दोस्त कहते हैं, ‘यार, तूने सच में अपना सपना पूरा कर लिया।’ सवाल: परिवार का साथ कितना जरूरी रहा? जवाब/हिमांश कोहली: अगर मेरे माता-पिता साथ नहीं देते तो मैं एक्टिंग की पढ़ाई नहीं कर पाता। उन्होंने सिर्फ पढ़ाई नहीं, मेरे सपने पर भी भरोसा किया। वही भरोसा मुझे यहां तक लेकर आया। सवाल: कमल जी, आपकी कहानी भी कुछ ऐसी ही है? जवाब/कमल चंद्रा: बिल्कुल। मैं इंजीनियर था। अच्छी नौकरी थी, लेकिन एक्टिंग वर्कशॉप के बाद लगा कि मुझे फिल्मों में काम करना है। मैंने चार सरकारी नौकरियां छोड़ दीं। रिश्तेदारों ने मना किया, लेकिन पिता ने कहा, ‘तूने मेरा सपना पूरा कर दिया, अब अपना सपना जी।’ उसी बात ने मुझे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखने दिया। सवाल: हिमांश क्या आप भी अपने माता-पिता का कोई अधूरा सपना भी जी रहे हैं? जवाब/हिमांश कोहली: बिल्कुल। मेरी मां कलाकार बनना चाहती थीं। उन्हें गायन, पेंटिंग और अभिनय का शौक था, लेकिन कम उम्र में शादी होने से उनका सपना अधूरा रह गया। आज फिल्मों में काम करते हुए लगता है कि मैं अपना ही नहीं, मां का सपना भी पूरा कर रहा हूं। उन्होंने एक बार ऋषि कपूर और जितेंद्र से मिलने की इच्छा जताई थी। जब मैं उन्हें दोनों कलाकारों से मिलवा पाया तो लगा कि मेरी मेहनत सफल हो गई। उनके चेहरे की खुशी मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: कमल जी, आपकी जिंदगी का सबसे भावुक पल कौन-सा रहा? जवाब/कमल चंद्रा: मेरी पहली फिल्म के दौरान महेश भट्ट ने मेरे पिता से फोन पर मेरी तारीफ की थी। फोन कटने के बाद पापा की खुशी देखने लायक थी। उन्होंने कहा, “मुझे पता था, मेरा बेटा कुछ अच्छा करेगा।” माता-पिता की आंखों में अपने लिए गर्व देखना सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। सवाल: ‘आर्य भट्ट का जीरो’ की कहानी में ऐसी क्या बात थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब/हिमांश कोहली: मुझे ‘बग्गू’ का किरदार बहुत पसंद आया। वह सिखाता है कि जिंदगी मंजिल से भटका सकती है, लेकिन सपना और मेहनत नहीं छोड़ें तो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है। हालात जैसे भी हों, उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे बड़ी सीख क्या मिली? जवाब/हिमांश कोहली: इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी टीम है। रवि किशन, राजेश शर्मा, गोपाल दत्त, नीरज सूद और बाकी कलाकारों के साथ बातचीत करना एक एक्टिंग स्कूल जैसा था। हर कलाकार अपने संघर्ष और अनुभव साझा करता था। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। सवाल: कमल जी, शूटिंग से जुड़ा कोई दिलचस्प किस्सा? जवाब/कमल चंद्रा: जिस घर में शूटिंग हुई, उसके मालिक बाद में उसे रेनोवेट करने वाले थे। लेकिन फिल्म पूरी होने के बाद उन्होंने फैसला बदल दिया। उन्हें लगा कि यह घर फिल्म की यादों से जुड़ गया है, इसलिए इसे जैसा है, वैसा ही रहने देना चाहिए। यह हमारे लिए बहुत खास पल था। सवाल: फिल्म का सबसे बड़ा संदेश क्या है? जवाब/कमल चंद्रा: हर इंसान जिंदगी में कभी न कभी खुद को ‘जीरो’ महसूस करता है। हमारी फिल्म कहती है कि खुद पर भरोसा और मेहनत बनी रहे, तो वही इंसान एक दिन हीरो बन सकता है। सवाल: सोनाली, आपने ‘आर्य भट्ट का जीरो’ के लिए हां क्यों कहा? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे लिए किसी भी फिल्म में सबसे अहम उसकी कहानी होती है। कमल ने स्क्रिप्ट सुनाई तो उसमें बनावटीपन नहीं, बल्कि सच्चाई दिखी। हर किरदार असली लगा और यही बात सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: रिंकू का किरदार आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/सोनाली सहगल: इस फिल्म से पहले मैं अलग जॉनर की फिल्म कर रही थी। वहां मेरा किरदार और दुनिया अलग थे। ‘रिंकू’ छोटे शहर की साधारण लड़की है, इसलिए उसके हावभाव, बोलने के तरीके और सोच पर अलग तरह से काम करना पड़ा। एक कलाकार के तौर पर यही चुनौती सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: इस फिल्म में सबसे खास बात क्या लगी? जवाब/सोनाली सहगल: मुझे लगा कि इस फिल्म का हर किरदार कुछ न कुछ सिखाता है। कोई उम्मीद देता है, कोई रिश्तों की अहमियत समझाता है और कोई संघर्ष से लड़ना सिखाता है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। सवाल: दर्शक ‘आर्य भट्ट का जीरो’ देखकर क्या महसूस करेंगे? जवाब/हिमांश कोहली: अगर लगे कि जिंदगी योजना के मुताबिक नहीं चल रही, तब भी हार मत मानिए। सपनों पर भरोसा रखिए और मेहनत करते रहिए। देर हो सकती है, लेकिन मंजिल जरूर मिलेगी। कमल चंद्रा: यह फिल्म सिर्फ एक इंसान या एक कुत्ते की कहानी नहीं है। यह उन सभी लोगों की कहानी है, जिन्हें कभी न कभी ‘जीरो’ कहा गया। अगर आप खुद पर भरोसा रखते हैं, तो एक दिन वही लोग आपकी सफलता की मिसाल देंगे। सोनाली सहगल: हम चाहते हैं कि लोग थिएटर से सिर्फ फिल्म देखकर नहीं, बल्कि अपने सपनों पर दोबारा भरोसा करके निकलें। अगर फिल्म देखने के बाद एक भी इंसान हार मानने की बजाय फिर कोशिश करने लगे, तो हमारी मेहनत सफल हो जाएगी। सवाल: क्या कभी ऐसा वक्त आया, जब आपका खुद पर भरोसा डगमगाया? उससे बाहर कैसे निकले? जवाब/सोनाली सहगल: इस इंडस्ट्री में रास्ता आसान नहीं है। मेहनत से कभी डर नहीं लगा, लेकिन शुरुआत में मौके मिलना सबसे मुश्किल होता है। सबसे बड़ा झटका ‘जय मम्मी दी’ का बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलना था। शायद पहली बार कैमरे पर यह बात कह रही हूं। मैंने उस फिल्म के लिए अपना सब कुछ लगा दिया था। वह मेरी पहली सोलो लीड फिल्म थी और उससे बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन कोविड की शुरुआत की वजह से फिल्म थिएटर में वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई। मुझे आज भी याद है, पहले दिन के बॉक्स ऑफिस नंबर देखकर मैं इवेंट से लौटते समय कार में रो रही थी। मेरी नई मैनेजर समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे संभाले। मैं कुछ दिनों के लिए डिप्रेशन में चली गई थी। लेकिन मैं जल्दी संभल जाती हूं। मैंने खुद से कहा कि मुझे अपने काम पर गर्व है। बाद में फिल्म नेटफ्लिक्स पर लोगों ने खूब पसंद की। तब समझ आया कि हर फिल्म अपनी किस्मत लेकर आती है। हौसला टूटता जरूर है, लेकिन उसे दोबारा खड़ा भी आपको ही करना पड़ता है। जीरो लगने के बाद खुद को फिर हीरो भी आपको ही बनाना पड़ता है। सवाल: हिमांश, आपने भी उतार-चढ़ाव देखे हैं। उस दौर को कैसे संभाला? जवाब/हिमांश कोहली: मेरे साथ शुरुआत उलटी हुई। ‘यारियां’ सुपरहिट रही, लेकिन उसके बाद दो-तीन फिल्मों को वैसा रिस्पॉन्स नहीं मिला। उस वक्त समझ नहीं आता था कि आगे क्या करना है। कई लोग कहने लगे थे, ‘अब सब खत्म हो गया… अब यहां कुछ नहीं रखा।’ सच कहूं तो मुझे भी लगने लगा था कि शायद बैग पैक करके घर लौट जाना चाहिए। लेकिन आज समझ आता है कि वह सिर्फ एक दौर था। उस समय जो फिल्में नहीं चलीं, वही आज टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। मैं उनके रिजल्ट देखकर हैरान हो जाता हूं। इसलिए अब लगता है कि हर चीज का अपना समय होता है। अगर मेहनत और भरोसा बना रहे तो मुश्किल दौर भी हमेशा नहीं रहता।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.