कन्नड़ एक्टर किरण राज पर शेर ने नहीं किया हमला:वायरल वीडियो अपकमिंग प्रोजेक्ट की ट्रेनिंग का है

कन्नड़ एक्टर किरण राज ने बताया कि वायरल वीडियो में शेर ने उन पर हमला नहीं किया था। वह घायल भी नहीं हुए हैं। किरण ने बताया कि वायरल वीडियो एक अपकमिंग प्रोजेक्ट के लिए चल रहे नियंत्रित ट्रेनिंग सेशन का है और इस दौरान सभी सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। किरण ने वीडियो मैसेज में कहा कि वीडियो के कैप्शन और बैकग्राउंड म्यूजिक से लोगों में डर और गलत जानकारी फैली। उन्होंने कहा, “मैं साफ करना चाहता हूं कि कैप्शन और बैकग्राउंड म्यूजिक से घबराहट और गलत जानकारी फैल रही है।” किरण ने बताया कि वह प्रोजेक्ट के लिए रॉकी नाम के शेर के साथ ट्रेनिंग ले रहे हैं। इसका मकसद शेर के आसपास सहज होना और उसके साथ काम करने की आदत डालना है। उन्होंने कहा, “फैक्ट यह है कि मैं प्रोजेक्ट के लिए रॉकी के साथ ट्रेनिंग कर रहा हूं। यहां माहौल बहुत सेफ है।” एक्टर के मुताबिक, ट्रेनिंग सेशन सुरक्षित माहौल में और जरूरी सावधानियों के साथ हो रहे हैं। इस दौरान रॉकी के साथ उनका रिश्ता भी बन गया है। किरण ने बताया कि रॉकी के साथ बने इस जुड़ाव से उन्हें शेर के करीब काम करते समय ज्यादा सहज महसूस करने में मदद मिली। पहले दिन रिकॉर्ड हुआ था वीडियो वायरल वीडियो किरण के ट्रेनिंग प्रोग्राम के पहले दिन रिकॉर्ड किया गया था। उस दिन वह रोजर और रॉकी नाम के शेरों के साथ बातचीत करना सीख रहे थे। किरण ने इंस्टाग्राम पर इस अनुभव की जानकारी शेयर की थी। उन्होंने बताया था कि उन्हें शेरों के आसपास व्यवहार करने और उनकी हरकतों व प्रतिक्रियाओं को समझने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। मूल वीडियो में किरण एक शेर के बहुत करीब खड़े दिखाई दे रहे थे। शेर उनकी ओर झपटता हुआ नजर आया, इसलिए सोशल मीडिया पर कई लोगों को लगा कि उन पर हमला हुआ और वह घायल हो गए। कौन हैं किरण राज? किरण राज ज्यादातर कन्नड़ टेलीविजन के साथ-साथ कन्नड़ फिल्मों में भी काम करते हैं। 5 जुलाई 1993 को जन्मे किरण राज ने अपने करियर की शुरुआत एक बैकग्राउंड डांसर के तौर पर की थी। वह 2010 से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। छोटे रोल से शुरुआत करके उन्होंने टेलीविजन पर अपनी जगह बनाई। किरण राज को सबसे ज्यादा लोकप्रियता कन्नड़ टेलीविजन शो ‘कन्नड़ती’ से मिली। 2020 से 2023 तक प्रसारित इस धारावाहिक में उन्होंने हर्ष कुमार का किरदार निभाया। उनकी एक्टिंग और पर्दे पर उनकी मौजूदगी को दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस धारावाहिक ने उन्हें कन्नड़ टेलीविजन के चर्चित कलाकारों में शामिल कर दिया। टेलीविजन के साथ किरण ने फिल्मों में भी लगातार काम किया। उन्होंने ‘मार्च 22’, ‘असतोमा सद्गमय’, ‘जीवनाने नाटका सामी’, ‘बडीज’, ‘भरजरी गंडू’ और ‘मेघा’ जैसी फिल्मों में काम किया। साल 2024 में आई ‘रॉनी: द रूलर’ में उनके प्रदर्शन ने उन्हें कन्नड़ सिनेमा में और ज्यादा चर्चा दिलाई। फिल्म में उन्होंने राघव और रॉनी की भूमिका निभाई। साल 2025 में किरण राज ने ‘कर्ण’ धारावाहिक में मुख्य भूमिका निभानी शुरू की। इस धारावाहिक में वह एक स्त्री रोग विशेषज्ञ का किरदार निभा रहे हैं। धारावाहिक को कन्नड़ टेलीविजन पर अच्छी दर्शक प्रतिक्रिया मिली और शुरुआती दौर में इसकी दर्शक संख्या भी मजबूत रही। वहीं, वह जल्द फिल्म ‘जॉकी 42’ में भी नजर आएंगे। साल 2025 में आयोजित जी कुुटुंब पुरस्कार समारोह में उन्हें ‘कर्ण’ के लिए लोकप्रिय अभिनेता और लोकप्रिय जोड़ी के पुरस्कार मिले। किरण राज सड़क हादसे में घायल हुए थे किरण राज आज से ठीक 2 साल पहले यानी 10 सितंबर 2024 को बेंगलुरु के केंगेरी के पास एक भीषण सड़क हादसे में घायल हो गए थे। यह दुर्घटना उस समय हुई, जब वह एक अनाथालय से लौट रहे थे। हादसे के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कुछ समय के लिए आईसीयू में रखा गया था। जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय कार किरण राज की फिल्म ‘रॉनी: द रूलर’ के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर चला रहे थे और किरण पीछे की सीट पर बैठे थे। रास्ते में अचानक सांप आ जाने पर चालक ने कार को दाईं ओर मोड़ दिया। इससे मर्सिडीज कार असंतुलित होकर डिवाइडर से टकरा गई। घटना में किरण राज को छाती में चोट लगी और कुछ समय के लिए वह बेहोश हो गए थे। अस्पताल में उनकी एमआरआई समेत जरूरी जांच की गई थी। बाद में किरण राज ने सोशल मीडिया पर वीडियो मैसेज जारी कर फैंस को बताया था कि वह ठीक हैं और उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।
कन्नड़ एक्टर किरण राज पर शेर ने नहीं किया हमला:वायरल वीडियो अपकमिंग प्रोजेक्ट की ट्रेनिंग का है

कन्नड़ एक्टर किरण राज ने बताया कि वायरल वीडियो में शेर ने उन पर हमला नहीं किया था। वह घायल भी नहीं हुए हैं। किरण ने बताया कि वायरल वीडियो एक अपकमिंग प्रोजेक्ट के लिए चल रहे नियंत्रित ट्रेनिंग सेशन का है और इस दौरान सभी सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। किरण ने वीडियो मैसेज में कहा कि वीडियो के कैप्शन और बैकग्राउंड म्यूजिक से लोगों में डर और गलत जानकारी फैली। उन्होंने कहा, “मैं साफ करना चाहता हूं कि कैप्शन और बैकग्राउंड म्यूजिक से घबराहट और गलत जानकारी फैल रही है।” किरण ने बताया कि वह प्रोजेक्ट के लिए रॉकी नाम के शेर के साथ ट्रेनिंग ले रहे हैं। इसका मकसद शेर के आसपास सहज होना और उसके साथ काम करने की आदत डालना है। उन्होंने कहा, “फैक्ट यह है कि मैं प्रोजेक्ट के लिए रॉकी के साथ ट्रेनिंग कर रहा हूं। यहां माहौल बहुत सेफ है।” एक्टर के मुताबिक, ट्रेनिंग सेशन सुरक्षित माहौल में और जरूरी सावधानियों के साथ हो रहे हैं। इस दौरान रॉकी के साथ उनका रिश्ता भी बन गया है। किरण ने बताया कि रॉकी के साथ बने इस जुड़ाव से उन्हें शेर के करीब काम करते समय ज्यादा सहज महसूस करने में मदद मिली। पहले दिन रिकॉर्ड हुआ था वीडियो वायरल वीडियो किरण के ट्रेनिंग प्रोग्राम के पहले दिन रिकॉर्ड किया गया था। उस दिन वह रोजर और रॉकी नाम के शेरों के साथ बातचीत करना सीख रहे थे। किरण ने इंस्टाग्राम पर इस अनुभव की जानकारी शेयर की थी। उन्होंने बताया था कि उन्हें शेरों के आसपास व्यवहार करने और उनकी हरकतों व प्रतिक्रियाओं को समझने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। मूल वीडियो में किरण एक शेर के बहुत करीब खड़े दिखाई दे रहे थे। शेर उनकी ओर झपटता हुआ नजर आया, इसलिए सोशल मीडिया पर कई लोगों को लगा कि उन पर हमला हुआ और वह घायल हो गए। कौन हैं किरण राज? किरण राज ज्यादातर कन्नड़ टेलीविजन के साथ-साथ कन्नड़ फिल्मों में भी काम करते हैं। 5 जुलाई 1993 को जन्मे किरण राज ने अपने करियर की शुरुआत एक बैकग्राउंड डांसर के तौर पर की थी। वह 2010 से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। छोटे रोल से शुरुआत करके उन्होंने टेलीविजन पर अपनी जगह बनाई। किरण राज को सबसे ज्यादा लोकप्रियता कन्नड़ टेलीविजन शो ‘कन्नड़ती’ से मिली। 2020 से 2023 तक प्रसारित इस धारावाहिक में उन्होंने हर्ष कुमार का किरदार निभाया। उनकी एक्टिंग और पर्दे पर उनकी मौजूदगी को दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस धारावाहिक ने उन्हें कन्नड़ टेलीविजन के चर्चित कलाकारों में शामिल कर दिया। टेलीविजन के साथ किरण ने फिल्मों में भी लगातार काम किया। उन्होंने ‘मार्च 22’, ‘असतोमा सद्गमय’, ‘जीवनाने नाटका सामी’, ‘बडीज’, ‘भरजरी गंडू’ और ‘मेघा’ जैसी फिल्मों में काम किया। साल 2024 में आई ‘रॉनी: द रूलर’ में उनके प्रदर्शन ने उन्हें कन्नड़ सिनेमा में और ज्यादा चर्चा दिलाई। फिल्म में उन्होंने राघव और रॉनी की भूमिका निभाई। साल 2025 में किरण राज ने ‘कर्ण’ धारावाहिक में मुख्य भूमिका निभानी शुरू की। इस धारावाहिक में वह एक स्त्री रोग विशेषज्ञ का किरदार निभा रहे हैं। धारावाहिक को कन्नड़ टेलीविजन पर अच्छी दर्शक प्रतिक्रिया मिली और शुरुआती दौर में इसकी दर्शक संख्या भी मजबूत रही। वहीं, वह जल्द फिल्म ‘जॉकी 42’ में भी नजर आएंगे। साल 2025 में आयोजित जी कुुटुंब पुरस्कार समारोह में उन्हें ‘कर्ण’ के लिए लोकप्रिय अभिनेता और लोकप्रिय जोड़ी के पुरस्कार मिले। किरण राज सड़क हादसे में घायल हुए थे किरण राज आज से ठीक 2 साल पहले यानी 10 सितंबर 2024 को बेंगलुरु के केंगेरी के पास एक भीषण सड़क हादसे में घायल हो गए थे। यह दुर्घटना उस समय हुई, जब वह एक अनाथालय से लौट रहे थे। हादसे के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कुछ समय के लिए आईसीयू में रखा गया था। जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय कार किरण राज की फिल्म ‘रॉनी: द रूलर’ के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर चला रहे थे और किरण पीछे की सीट पर बैठे थे। रास्ते में अचानक सांप आ जाने पर चालक ने कार को दाईं ओर मोड़ दिया। इससे मर्सिडीज कार असंतुलित होकर डिवाइडर से टकरा गई। घटना में किरण राज को छाती में चोट लगी और कुछ समय के लिए वह बेहोश हो गए थे। अस्पताल में उनकी एमआरआई समेत जरूरी जांच की गई थी। बाद में किरण राज ने सोशल मीडिया पर वीडियो मैसेज जारी कर फैंस को बताया था कि वह ठीक हैं और उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।
भारत ने नेपाल के लिए 8वीं राहत खेप भेजी:35 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंची; बाढ़ में अब तक 1367 शव बरामद

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद भारत ने 35 टन राहत और बचाव सामग्री की 8वीं खेप भेजी। भारतीय वायुसेना का विमान बुधवार को काठमांडू पहुंचा। इसके साथ भारत अब तक 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेज चुका है। खेप में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, दवाएं और रेस्क्यू उपकरण शामिल हैं। भारत ने राहत अभियान 26 अगस्त को शुरू किया था। नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 1367 शव बरामद हुए हैं। 102 शवों की पहचान हो चुकी है। पहचान के लिए DNA सैंपल जुटाए जा रहे हैं और भारत समेत कई देशों के फोरेंसिक विशेषज्ञ मदद कर रहे हैं। नेपाल त्रासदी से जुड़ी तस्वीरें… खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
ऋषि कपूर ने बाल कलाकार को डांटा था:7 साल के पुष्कर जोग रो पड़े थे, फिर नाना पाटेकर ने ऋषि को फटकार लगाई थी

मराठी एक्टर पुष्कर जोग ने हाल ही में बताया कि 1995 की फिल्म ‘हम दोनों’ की शूटिंग के दौरान एक्टर ऋषि कपूर ने उन्हें डांट दिया था। उस समय पुष्कर की उम्र सिर्फ 7 साल थी। वह पहली बार हिंदी फिल्म के सेट पर पहुंचे थे और घटना के बाद रोने लगे थे। पुष्कर ने बताया कि इसके बाद नाना पाटेकर ने उनका बचाव किया। उन्होंने ऋषि कपूर को बच्चे से इस तरह बात करने पर फटकार लगाई थी। पुष्कर ने यह बात हाल ही में ‘गलाटा इंडिया’ को दिए इंटरव्यू में बताई। पहली बार हिंदी फिल्म के सेट पर पहुंचे थे पुष्कर जोग ने कहा, ऋषि कपूर सर ने उस समय मुझे डांटा था। मैं सिर्फ 7 साल का बच्चा था। मुझे कुछ नहीं पता था। मैं पहली बार 100-150 लोगों वाले हिंदी फिल्म के सेट पर गया था।” उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर ने बिना ऑडिशन के उन्हें यह फिल्म दिलाई थी। नाना ने कहा था, “मेरा पुणे का बच्चा है, वो ही यह रोल करेगा।” पुष्कर ने कहा कि सेट पर सभी लोग ऋषि कपूर से डरे रहते थे। उन्होंने बताया, “मैं शूटिंग के लिए पहुंचा। पहले दिन मैंने देखा कि ऋषि कपूर सर बहुत रिजर्व रहते थे और ज्यादा बात नहीं करते थे। उनका एक अलग रुतबा था। सभी उनसे डरते थे। वह बहुत सीधे और सख्त थे। मैं भी डर गया था, क्योंकि वह काफी सख्त और डरावने लगते थे।” रिहर्सल के दौरान सिर पर गिरा दीं फूलों की पंखुड़ियां पुष्कर ने बताया कि यह घटना एक गाने की शूटिंग के दौरान हुई थी। उस गाने में ऋषि कपूर, कोरियोग्राफर फराह खान और एक्ट्रेस पूजा भट्ट काम कर रहे थे। फराह खान ने उन्हें पहले ही अच्छे से काम करने के लिए कहा था, क्योंकि ऐसा नहीं करने पर ऋषि कपूर नाराज हो सकते थे। पुष्कर ने उनसे कहा था कि वह अच्छा काम करेंगे। सीक्वेंस में पुष्कर एक गैरेज में काम करते हैं। ऋषि कपूर और पूजा भट्ट नई कार से वहां पहुंचते हैं। रिहर्सल शॉट के दौरान पुष्कर ने गलती से उन्हें दी गईं सभी फूलों की पंखुड़ियां ऋषि कपूर के सिर पर गिरा दीं। पुष्कर ने कहा, “मुझे नहीं पता कि उन्हें किस बात पर गुस्सा आया, लेकिन कट के बाद उन्होंने मुझ पर गुस्सा किया। मैं वहीं रोने लगा। उन्होंने कहा, ‘तुम लोग इसे सेट पर किसे लेकर आए हो? यह कौन है? इसे यहां लाने से पहले कम से कम कुछ सिखा तो देते।”’ फराह खान ने संभाला, मां भी डर गई थीं पुष्कर के रोने के बाद फराह खान ने उन्हें शांत कराया और वैन में ले गईं। उन्होंने बताया कि उनकी मां भी सेट पर थीं और वह भी डर गई थीं। पुष्कर ने कहा, “उन्हें अक्सर गुस्सा आता था, लेकिन मुझे नहीं पता कि क्यों। मैंने यह बात नाना सर को बताई, क्योंकि मैं उनके करीब था। उन्होंने पूरी बात सुनी और कहा कि वह कुछ करेंगे।” नाना पाटेकर अगले दिन ऋषि कपूर से भिड़े पुष्कर के मुताबिक, अगले दिन नाना पाटेकर की शूटिंग नहीं थी। इसके बावजूद वह ऋषि कपूर को फटकारने के लिए सेट पर आए। पुष्कर ने बताया, “उन्होंने ऋषि कपूर सर को खूब सुनाया और उन्हें उसी अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘आप चाहे जो भी हों, क्या आपको नहीं पता कि बच्चे से कैसे पेश आते हैं? वह 7 साल का बच्चा है। उसे टेक और रिहर्सल के बारे में कैसे पता होगा? आप उस पर क्यों चिल्ला रहे हैं?’” पुष्कर ने कहा कि नाना पाटेकर में ऋषि कपूर के सामने यह बात कहने की हिम्मत और दयालुता थी। उन्होंने आगे कहा, “भगवान उनकी आत्मा को शांति दे, लेकिन मेरे पास उनके साथ जुड़ी यह अप्रिय याद है। हम सभी आज भी उनसे प्यार और सम्मान करते हैं।” ‘हम दोनों’ में ये कलाकार थे 1995 की फिल्म ‘हम दोनों’ में ऋषि कपूर, नाना पाटेकर, पूजा भट्ट, आलोक नाथ और मोहन जोशी ने काम किया था। यह एक्शन-थ्रिलर फिल्म दो सौतेले भाइयों की कहानी थी, जिन्हें अपनी विरासत के लिए साथ आना पड़ता है। इस दौरान उन्हें अपने लालची रिश्तेदारों की ओर से हत्या की कोशिशों का सामना करना पड़ता है। फिल्म का निर्देशन शफी इनामदार ने किया था। इसे रवि मल्होत्रा, टीनू पांडे और शब्बुद्दीन चौधरी ने आर एम फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया था। कौन है पुष्कर जोग? पुष्कर जोग मराठी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता हैं। वह एक्टर होने के साथ-साथ डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और डांसर भी हैं। उन्होंने मराठी फिल्मों के अलावा हिंदी फिल्मों और टीवी शोज में भी काम किया है। पुष्कर ने करीब 4 साल की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट एक्टिंग शुरू की थी। बचपन में उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों में काम किया। आगे चलकर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और डेंटिस्ट्री की डिग्री हासिल की। हालांकि, बाद में उन्होंने एक्टिंग को अपना करियर चुना। साल 2007 में फिल्म ‘जबरदस्त’ से पुष्कर ने बतौर लीड एक्टर मराठी सिनेमा में कदम रखा। फिल्म की सफलता से उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने ‘सत्या’, ‘ती आणि ती’, ‘अदृश्य’, ‘सासूचा स्वयंवर’ और ‘बापमाणूस’ जैसी फिल्मों में काम किया। पुष्कर ने सिर्फ एक्टिंग तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने मराठी फिल्मों और दूसरे प्रोजेक्ट्स में निर्देशन और प्रोडक्शन का काम भी किया। इससे फिल्म इंडस्ट्री में उनकी पहचान एक मल्टी-टैलेंटेड कलाकार के तौर पर बनी। हिंदी सिनेमा में भी पुष्कर ने काम किया। वह संजय दत्त स्टारर फिल्म ‘ईएमआई: लिया है तो चुकाना पड़ेगा’ में नजर आए। इसके अलावा उन्होंने ‘हफ! इट्स टू मच’, ‘डोंट वरी बी हैप्पी’ और ‘गुडबड्डी गड़बड़ी’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। टीवी पर भी पुष्कर ने अपनी अलग पहचान बनाई। साल 2018 में उन्होंने ‘बिग बॉस मराठी’ के पहले सीजन में हिस्सा लिया। वह इस शो के फर्स्ट रनर-अप रहे। पुष्कर ने ‘माझा अराउंड द वर्ल्ड’ नाम का ट्रैवल शो होस्ट और प्रोड्यूस भी किया।
ऋषि कपूर ने बाल कलाकार को डांटा था:7 साल के पुष्कर जोग रो पड़े थे, फिर नाना पाटेकर ने ऋषि को फटकार लगाई थी

मराठी एक्टर पुष्कर जोग ने हाल ही में बताया कि 1995 की फिल्म ‘हम दोनों’ की शूटिंग के दौरान एक्टर ऋषि कपूर ने उन्हें डांट दिया था। उस समय पुष्कर की उम्र सिर्फ 7 साल थी। वह पहली बार हिंदी फिल्म के सेट पर पहुंचे थे और घटना के बाद रोने लगे थे। पुष्कर ने बताया कि इसके बाद नाना पाटेकर ने उनका बचाव किया। उन्होंने ऋषि कपूर को बच्चे से इस तरह बात करने पर फटकार लगाई थी। पुष्कर ने यह बात हाल ही में ‘गलाटा इंडिया’ को दिए इंटरव्यू में बताई। पहली बार हिंदी फिल्म के सेट पर पहुंचे थे पुष्कर जोग ने कहा, ऋषि कपूर सर ने उस समय मुझे डांटा था। मैं सिर्फ 7 साल का बच्चा था। मुझे कुछ नहीं पता था। मैं पहली बार 100-150 लोगों वाले हिंदी फिल्म के सेट पर गया था।” उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर ने बिना ऑडिशन के उन्हें यह फिल्म दिलाई थी। नाना ने कहा था, “मेरा पुणे का बच्चा है, वो ही यह रोल करेगा।” पुष्कर ने कहा कि सेट पर सभी लोग ऋषि कपूर से डरे रहते थे। उन्होंने बताया, “मैं शूटिंग के लिए पहुंचा। पहले दिन मैंने देखा कि ऋषि कपूर सर बहुत रिजर्व रहते थे और ज्यादा बात नहीं करते थे। उनका एक अलग रुतबा था। सभी उनसे डरते थे। वह बहुत सीधे और सख्त थे। मैं भी डर गया था, क्योंकि वह काफी सख्त और डरावने लगते थे।” रिहर्सल के दौरान सिर पर गिरा दीं फूलों की पंखुड़ियां पुष्कर ने बताया कि यह घटना एक गाने की शूटिंग के दौरान हुई थी। उस गाने में ऋषि कपूर, कोरियोग्राफर फराह खान और एक्ट्रेस पूजा भट्ट काम कर रहे थे। फराह खान ने उन्हें पहले ही अच्छे से काम करने के लिए कहा था, क्योंकि ऐसा नहीं करने पर ऋषि कपूर नाराज हो सकते थे। पुष्कर ने उनसे कहा था कि वह अच्छा काम करेंगे। सीक्वेंस में पुष्कर एक गैरेज में काम करते हैं। ऋषि कपूर और पूजा भट्ट नई कार से वहां पहुंचते हैं। रिहर्सल शॉट के दौरान पुष्कर ने गलती से उन्हें दी गईं सभी फूलों की पंखुड़ियां ऋषि कपूर के सिर पर गिरा दीं। पुष्कर ने कहा, “मुझे नहीं पता कि उन्हें किस बात पर गुस्सा आया, लेकिन कट के बाद उन्होंने मुझ पर गुस्सा किया। मैं वहीं रोने लगा। उन्होंने कहा, ‘तुम लोग इसे सेट पर किसे लेकर आए हो? यह कौन है? इसे यहां लाने से पहले कम से कम कुछ सिखा तो देते।”’ फराह खान ने संभाला, मां भी डर गई थीं पुष्कर के रोने के बाद फराह खान ने उन्हें शांत कराया और वैन में ले गईं। उन्होंने बताया कि उनकी मां भी सेट पर थीं और वह भी डर गई थीं। पुष्कर ने कहा, “उन्हें अक्सर गुस्सा आता था, लेकिन मुझे नहीं पता कि क्यों। मैंने यह बात नाना सर को बताई, क्योंकि मैं उनके करीब था। उन्होंने पूरी बात सुनी और कहा कि वह कुछ करेंगे।” नाना पाटेकर अगले दिन ऋषि कपूर से भिड़े पुष्कर के मुताबिक, अगले दिन नाना पाटेकर की शूटिंग नहीं थी। इसके बावजूद वह ऋषि कपूर को फटकारने के लिए सेट पर आए। पुष्कर ने बताया, “उन्होंने ऋषि कपूर सर को खूब सुनाया और उन्हें उसी अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘आप चाहे जो भी हों, क्या आपको नहीं पता कि बच्चे से कैसे पेश आते हैं? वह 7 साल का बच्चा है। उसे टेक और रिहर्सल के बारे में कैसे पता होगा? आप उस पर क्यों चिल्ला रहे हैं?’” पुष्कर ने कहा कि नाना पाटेकर में ऋषि कपूर के सामने यह बात कहने की हिम्मत और दयालुता थी। उन्होंने आगे कहा, “भगवान उनकी आत्मा को शांति दे, लेकिन मेरे पास उनके साथ जुड़ी यह अप्रिय याद है। हम सभी आज भी उनसे प्यार और सम्मान करते हैं।” ‘हम दोनों’ में ये कलाकार थे 1995 की फिल्म ‘हम दोनों’ में ऋषि कपूर, नाना पाटेकर, पूजा भट्ट, आलोक नाथ और मोहन जोशी ने काम किया था। यह एक्शन-थ्रिलर फिल्म दो सौतेले भाइयों की कहानी थी, जिन्हें अपनी विरासत के लिए साथ आना पड़ता है। इस दौरान उन्हें अपने लालची रिश्तेदारों की ओर से हत्या की कोशिशों का सामना करना पड़ता है। फिल्म का निर्देशन शफी इनामदार ने किया था। इसे रवि मल्होत्रा, टीनू पांडे और शब्बुद्दीन चौधरी ने आर एम फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया था। कौन है पुष्कर जोग? पुष्कर जोग मराठी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता हैं। वह एक्टर होने के साथ-साथ डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और डांसर भी हैं। उन्होंने मराठी फिल्मों के अलावा हिंदी फिल्मों और टीवी शोज में भी काम किया है। पुष्कर ने करीब 4 साल की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट एक्टिंग शुरू की थी। बचपन में उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों में काम किया। आगे चलकर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और डेंटिस्ट्री की डिग्री हासिल की। हालांकि, बाद में उन्होंने एक्टिंग को अपना करियर चुना। साल 2007 में फिल्म ‘जबरदस्त’ से पुष्कर ने बतौर लीड एक्टर मराठी सिनेमा में कदम रखा। फिल्म की सफलता से उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने ‘सत्या’, ‘ती आणि ती’, ‘अदृश्य’, ‘सासूचा स्वयंवर’ और ‘बापमाणूस’ जैसी फिल्मों में काम किया। पुष्कर ने सिर्फ एक्टिंग तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने मराठी फिल्मों और दूसरे प्रोजेक्ट्स में निर्देशन और प्रोडक्शन का काम भी किया। इससे फिल्म इंडस्ट्री में उनकी पहचान एक मल्टी-टैलेंटेड कलाकार के तौर पर बनी। हिंदी सिनेमा में भी पुष्कर ने काम किया। वह संजय दत्त स्टारर फिल्म ‘ईएमआई: लिया है तो चुकाना पड़ेगा’ में नजर आए। इसके अलावा उन्होंने ‘हफ! इट्स टू मच’, ‘डोंट वरी बी हैप्पी’ और ‘गुडबड्डी गड़बड़ी’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। टीवी पर भी पुष्कर ने अपनी अलग पहचान बनाई। साल 2018 में उन्होंने ‘बिग बॉस मराठी’ के पहले सीजन में हिस्सा लिया। वह इस शो के फर्स्ट रनर-अप रहे। पुष्कर ने ‘माझा अराउंड द वर्ल्ड’ नाम का ट्रैवल शो होस्ट और प्रोड्यूस भी किया।
शोभिनव सत्या बोले- डायरेक्टर की जिद पर बनी हनुमान अंश:नीम करौली बाबा का रोल निभाने वाले एक्टर ने कहा- टीम छोड़ने लगी थी

मुंबई से यूपी आने के लिए पूरी टीम को ट्रेन से सफर करना था लेकिन टिकट नहीं मिल रहा था। टीम ने भी उम्मीद छोड़ दी थी। टीम मेंबर भी काम छोड़कर जाने लगे थे। लेकिन डायरेक्टर की जिद थी कि फिल्म हर हाल में पूरी करेंगे। ये बातें फिल्म हनुमान अंश में नीम करौली बाबा का किरदार निभाने वाले अभिनेता शोभिनव सत्या ने कही। बुधवार को हनुमान अंश फिल्म की टीम कानपुर में थी। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में टीम ने मीडिया से बातचीत के साथ छात्रों से संवाद भी किया। लोग काम छोड़कर जाने लगे थे अभिनेता शोभिनव सत्या ने कहा- बाबा के आशीर्वाद के बिना इस किरदार को निभाना और एक भी शब्द बोल पाना मुमकिन नहीं था। शोभिनव सत्या ने कहा- बाबा के किरदार को निभाना उनके लिए सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि आस्था और जिम्मेदारी का विषय था। फिल्म में किरदार को जीवंत करने के लिए टीम ने काफी मेहनत की है। केवल डिवोशनल फिल्म नहीं, कई सीन देखने को मिलेंगे फिल्म के निर्देशक, प्रोड्यूसर और लेखक विशाल चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि फिल्म को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। यदि फिल्म दर्शकों को पसंद आती है और अच्छा प्रदर्शन करती है तो इसे अलग-अलग जगहों पर ले जाकर दिखाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हनुमान अंश केवल डिवोशनल फिल्म नहीं है, बल्कि इसमें कई ऐसे सीन हैं जो दर्शकों को अलग अनुभव देंगे। कानपुर के कई कलाकार भी फिल्म का हिस्सा विशाल चतुर्वेदी ने बताया- फिल्म में कानपुर और आसपास के कई कलाकारों ने काम किया है। फिल्म की कहानी नीम करौली बाबा यानी महाराज जी से जुड़ी है। इसमें महाराज जी की कहानी के साथ उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को पर्दे पर दिखाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि फिल्म में महाराज जी का मैजिक और पूरी टीम की मेहनत देखने को मिलेगी। फिल्म का दूसरा पार्ट भी आएगा फिल्म के राइटर ने बताया कि वह पिछले करीब 20 साल से महाराज जी के बारे में पढ़ रहे हैं। पिछले पांच-छह वर्षों में उनके साथ कुछ ऐसे वाकिये हुए, जिनसे उन्हें महाराज जी पर फिल्म बनाने में रुचि पैदा हुई। उन्होंने कहा कि अभी कहानी कानपुर तक नहीं पहुंची है और फिल्म में वर्ष 1943 तक की कहानी को दिखाया गया है। उन्होंने कहा- आगे बनने वाली फिल्मों में महाराज जी से जुड़े दूसरे किस्सों और प्रसंगों को भी दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा। नीम करौली बाबा से जुड़े चर्चित किस्से- ट्रेन से उतरे तो आगे नहीं बढ़ी ट्रेनः कहा जाता है कि वे एक बार ट्रेन में बिना टिकट बैठ गए। उन्हें नीचे उतार दिया गया तो ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। बाद में उन्हें वापस बुलाया गया और ट्रेन चल पड़ी। यह एक भक्तिपरक कथा है, जिसका स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट नहीं है। नीम करोली बाबा से मिलने पहुंचे थे स्टीव जॉब्सः 1974 में 19 साल के स्टीव जॉब्स भारत आए थे। उनका मकसद पर्यटन नहीं बल्कि आध्यात्मिक खोज था। वे अपने दोस्त डैन कोटके के साथ भारत आए और नीम करौली बाबा से मिलने के लिए कैंची धाम पहुंचे। लेकिन यहां उन्हें पता चला कि बाबा का सितंबर 1973 में निधन हो चुका था। जॉब्स फिर भी भारत में करीब सात महीने रहे। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को करीब से समझने की कोशिश की। बाद में उन्होंने इस यात्रा को अपने जीवन पर गहरा असर डालने वाला अनुभव माना। मार्क जुकरबर्ग भी मिलने पहुंचे थेः 2015 में फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग भारत आए और कैंची धाम गए। उन्होंने बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया था कि जब फेसबुक मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत जाकर उस मंदिर/आश्रम को देखने की सलाह दी थी, जहां वे स्वयं कभी गए थे। हॉलीवुड एक्ट्रेस थीं नीम करोली बाबा से प्रेरितः हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स ने भी नीम करौली बाबा से प्रभावित होने की बात कही है। उनके अनुसार, उन्होंने बाबा की एक तस्वीर देखी और उन्हें उनके प्रति एक गहरा आकर्षण महसूस हुआ। अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्पर्ट ने लिखी बुकः अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्पर्ट भारत आए और नीम करौली बाबा के शिष्य बने। बाबा ने उन्हें राम दास नाम दिया। इसके बाद राम दास अमेरिका लौटे और उन्होंने पश्चिमी दुनिया में बाबा की शिक्षाओं और भारतीय आध्यात्मिक विचारों को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी प्रसिद्ध किताब ‘बी हेयर नाऊ’ ने लाखों लोगों को ध्यान, योग और भारतीय आध्यात्मिक विचारों से परिचित कराया। ————————– यह खबर भी पढ़िए- योगी बोले- हम उनमें से नहीं, जो माफिया के सामने गिड़गिड़ाएं, बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो जहन्नुम जाओगे सीएम योगी बुधवार को वाराणसी में थे। यहां उन्होंने पहले की सपा सरकार पर जमकर हमला बोला। कहा- घर से बाहर कैसे निकलें, 9 साल पहले यह सवाल था। कहां तक जाना है, आज यह सवाल है। पहले घर से बाहर निकलने में बेटियां डरती थीं, आज ऐसी कोई चिंता नहीं।हमने कह दिया है कि बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो दो ही जगह होगी- जेल या जहन्नुम। हम उन लोगों में नहीं हैं कि वोटबैंक के लिए किसी माफिया के सामने गिड़गिड़ाएं। पढ़ें पूरी खबर…
नेहा कक्कड़ ने रियलिटी शोज को बताया गैर-स्क्रिप्टेड:सुनिधि चौहान की ‘फेक’ वाली टिप्पणी के बाद बोलीं- अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे लगते हैं

नेहा कक्कड़ ने सिंगिंग रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड और ‘फेक’ होने की बात को खारिज किया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान नेहा कक्कड़ से रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड होने और TRP गिरने को लेकर सवाल पूछा गया। उनसे सुनिधि चौहान जैसे कई जजों के बयानों पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई। इस पर नेहा कक्कड़ ने कहा, “वो इसलिए गिर गई क्योंकि मैंने करना छोड़ दिया! जब तक मैं कर रही थी, टीआरपी हाईएस्ट थी। लेकिन मैं ये कहना चाहूँगी, ‘अंगूर ना मिले तो खट्टे हैं’, लोग ऐसा बोलते हैं। तो वैसा ही है। अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे ही लगते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “ये शो बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं है। लोगों की लाइफ बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं होती। ऑफ कोर्स, हम इंडियंस मोस्टली हम सब हम्बल बैकग्राउंड से ही आते हैं। मैं खुद हम्बल बैकग्राउंड से आई हूँ और अगर मुझे किसी की स्टोरी सुन के इमोशनल फील होता है, मैं इमोशंस फील करती हूँ, तो ऑफ कोर्स ये लाजमी है इमोशंस फील करना।” उन्होंने कहा, “हम सब बहुत ही पता नहीं कौन-कौन से छोटे-छोटे शहरों से आते हैं, और कितनी-कितनी हर्डल्स वो क्रॉस कर कर आते हैं। तो ऑफ कोर्स वो सारे कंटेस्टेंट्स एकदम से कोई नई स्टोरी बना के तो नहीं आ जाएंगे। जो सच है, वही सच है, एंड वही हमें विटनेस करने को मिला।” सुनिधि चौहान ने रियलिटी शोज पर सवाल उठाए थे सिंगर सुनिधि चौहान ने राज शमानी के पॉडकास्ट में सिंगिंग रियलिटी शोज के बदलते फॉर्मेट पर खुलकर बात की थी। सुनिधि ने कहा था कि उन्हें ‘इंडियन आइडल’ के शुरुआती दो साल काफी पसंद थे। उस समय शो में चीजें अच्छी तरह चल रही थीं। उनके मुताबिक, तब रियलिटी शोज का फॉर्मेट आज से काफी अलग था। पहले कंटेस्टेंट्स की असली परफॉर्मेंस और उनका नेचर ज्यादा दिखाया जाता था। उन्होंने कहा कि शुरुआती सीजन में कंटेस्टेंट की कोई लंबी-चौड़ी कहानी नहीं बनाई जाती थी। अगर कोई कंटेस्टेंट खराब गाता था, तो जज उस पर हंसते थे। उसे मजाक में अगले साल फिर आने के लिए कहते थे। सुनिधि के मुताबिक, ये सब शो का हिस्सा जरूर था, लेकिन जो परफॉर्मेंस दर्शकों को सुनाई जाती थी, वह असली होती थी। अब कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं- सुनिधि सुनिधि ने दावा किया कि अब टीवी पर दिखाई जाने वाली कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि मेकर्स नहीं चाहते कि उनके शो में कोई खराब सिंगर दिखाई दे। इसलिए कई बार कंटेस्टेंट की परफॉर्मेंस को इस तरह पेश किया जाता है कि वह टीवी पर बेहतर लगे। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार जज किसी कंटेस्टेंट की जमकर तारीफ करते हैं। वे उसके लिए खड़े होते हैं और कहते हैं कि उन्होंने इससे बेहतर परफॉर्मेंस कभी नहीं सुनी। इसके बावजूद अगले ही एपिसोड में वही कंटेस्टेंट बाहर हो जाता है। सुनिधि के मुताबिक, इससे दर्शक भी हैरान होते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि जिस कंटेस्टेंट के लिए जजों ने इतनी तारीफ की, उसे बाहर क्यों कर दिया गया। सुनिधि ने कहा कि ऐसी चीजें उन्हें परेशान करने लगी थीं। इसलिए उन्होंने धीरे-धीरे रियलिटी शोज का हिस्सा बनना छोड़ दिया। बाद में उन्होंने ‘द वॉइस’ के इंडियन वर्जन में काम किया। उन्होंने बताया कि इस शो के साथ कुछ शर्तें पहले से तय थीं और मेकर्स ने उन्हें मान लिया था। सुनिधि के मुताबिक, उन्हें इस बात की खुशी थी कि ‘द वॉइस’ में जज और दर्शक वही सुनते थे, जो वास्तव में कंटेस्टेंट ने गाया था। उन्होंने कहा कि उन्हें दर्शकों के साथ इस तरह की ‘चीटिंग’ पसंद नहीं है। पॉडकास्ट में सुनिधि से यह भी पूछा गया कि रियलिटी शोज में उन्हें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली चीज क्या लगी। इस पर उन्होंने बताया था कि सबसे ज्यादा परेशानी तब हुई, जब शो में उनसे किसी खास कंटेस्टेंट को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी बातें कहने को कहा गया। सुनिधि ने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकती थीं। उनके मुताबिक, कुछ कंटेस्टेंट्स को आगे बढ़ाने के पीछे सिर्फ उनकी परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि दूसरे फायदे भी देखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि शो जीतने वाले कंटेस्टेंट के साथ बाद में शो या दूसरे प्रोजेक्ट किए जा सकते हैं क्योंकि उसे जीतते हुए देखने वाली ऑडियंस उसके साथ जुड़ी होती है। ऐसे में मेकर्स को लगता है कि वह कंटेस्टेंट आगे भी दर्शक खींच सकता है। सुनिधि ने कहा कि इसी वजह से कई बार रियलिटी शो खत्म होने के बाद मिलने वाले फायदे भी कंटेस्टेंट चुनने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
नेहा कक्कड़ ने रियलिटी शोज को बताया गैर-स्क्रिप्टेड:सुनिधि चौहान की ‘फेक’ वाली टिप्पणी के बाद बोलीं- अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे लगते हैं

नेहा कक्कड़ ने सिंगिंग रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड और ‘फेक’ होने की बात को खारिज किया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान नेहा कक्कड़ से रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड होने और TRP गिरने को लेकर सवाल पूछा गया। उनसे सुनिधि चौहान जैसे कई जजों के बयानों पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई। इस पर नेहा कक्कड़ ने कहा, “वो इसलिए गिर गई क्योंकि मैंने करना छोड़ दिया! जब तक मैं कर रही थी, टीआरपी हाईएस्ट थी। लेकिन मैं ये कहना चाहूँगी, ‘अंगूर ना मिले तो खट्टे हैं’, लोग ऐसा बोलते हैं। तो वैसा ही है। अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे ही लगते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “ये शो बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं है। लोगों की लाइफ बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं होती। ऑफ कोर्स, हम इंडियंस मोस्टली हम सब हम्बल बैकग्राउंड से ही आते हैं। मैं खुद हम्बल बैकग्राउंड से आई हूँ और अगर मुझे किसी की स्टोरी सुन के इमोशनल फील होता है, मैं इमोशंस फील करती हूँ, तो ऑफ कोर्स ये लाजमी है इमोशंस फील करना।” उन्होंने कहा, “हम सब बहुत ही पता नहीं कौन-कौन से छोटे-छोटे शहरों से आते हैं, और कितनी-कितनी हर्डल्स वो क्रॉस कर कर आते हैं। तो ऑफ कोर्स वो सारे कंटेस्टेंट्स एकदम से कोई नई स्टोरी बना के तो नहीं आ जाएंगे। जो सच है, वही सच है, एंड वही हमें विटनेस करने को मिला।” सुनिधि चौहान ने रियलिटी शोज पर सवाल उठाए थे सिंगर सुनिधि चौहान ने राज शमानी के पॉडकास्ट में सिंगिंग रियलिटी शोज के बदलते फॉर्मेट पर खुलकर बात की थी। सुनिधि ने कहा था कि उन्हें ‘इंडियन आइडल’ के शुरुआती दो साल काफी पसंद थे। उस समय शो में चीजें अच्छी तरह चल रही थीं। उनके मुताबिक, तब रियलिटी शोज का फॉर्मेट आज से काफी अलग था। पहले कंटेस्टेंट्स की असली परफॉर्मेंस और उनका नेचर ज्यादा दिखाया जाता था। उन्होंने कहा कि शुरुआती सीजन में कंटेस्टेंट की कोई लंबी-चौड़ी कहानी नहीं बनाई जाती थी। अगर कोई कंटेस्टेंट खराब गाता था, तो जज उस पर हंसते थे। उसे मजाक में अगले साल फिर आने के लिए कहते थे। सुनिधि के मुताबिक, ये सब शो का हिस्सा जरूर था, लेकिन जो परफॉर्मेंस दर्शकों को सुनाई जाती थी, वह असली होती थी। अब कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं- सुनिधि सुनिधि ने दावा किया कि अब टीवी पर दिखाई जाने वाली कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि मेकर्स नहीं चाहते कि उनके शो में कोई खराब सिंगर दिखाई दे। इसलिए कई बार कंटेस्टेंट की परफॉर्मेंस को इस तरह पेश किया जाता है कि वह टीवी पर बेहतर लगे। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार जज किसी कंटेस्टेंट की जमकर तारीफ करते हैं। वे उसके लिए खड़े होते हैं और कहते हैं कि उन्होंने इससे बेहतर परफॉर्मेंस कभी नहीं सुनी। इसके बावजूद अगले ही एपिसोड में वही कंटेस्टेंट बाहर हो जाता है। सुनिधि के मुताबिक, इससे दर्शक भी हैरान होते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि जिस कंटेस्टेंट के लिए जजों ने इतनी तारीफ की, उसे बाहर क्यों कर दिया गया। सुनिधि ने कहा कि ऐसी चीजें उन्हें परेशान करने लगी थीं। इसलिए उन्होंने धीरे-धीरे रियलिटी शोज का हिस्सा बनना छोड़ दिया। बाद में उन्होंने ‘द वॉइस’ के इंडियन वर्जन में काम किया। उन्होंने बताया कि इस शो के साथ कुछ शर्तें पहले से तय थीं और मेकर्स ने उन्हें मान लिया था। सुनिधि के मुताबिक, उन्हें इस बात की खुशी थी कि ‘द वॉइस’ में जज और दर्शक वही सुनते थे, जो वास्तव में कंटेस्टेंट ने गाया था। उन्होंने कहा कि उन्हें दर्शकों के साथ इस तरह की ‘चीटिंग’ पसंद नहीं है। पॉडकास्ट में सुनिधि से यह भी पूछा गया कि रियलिटी शोज में उन्हें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली चीज क्या लगी। इस पर उन्होंने बताया था कि सबसे ज्यादा परेशानी तब हुई, जब शो में उनसे किसी खास कंटेस्टेंट को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी बातें कहने को कहा गया। सुनिधि ने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकती थीं। उनके मुताबिक, कुछ कंटेस्टेंट्स को आगे बढ़ाने के पीछे सिर्फ उनकी परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि दूसरे फायदे भी देखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि शो जीतने वाले कंटेस्टेंट के साथ बाद में शो या दूसरे प्रोजेक्ट किए जा सकते हैं क्योंकि उसे जीतते हुए देखने वाली ऑडियंस उसके साथ जुड़ी होती है। ऐसे में मेकर्स को लगता है कि वह कंटेस्टेंट आगे भी दर्शक खींच सकता है। सुनिधि ने कहा कि इसी वजह से कई बार रियलिटी शो खत्म होने के बाद मिलने वाले फायदे भी कंटेस्टेंट चुनने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
शिवराजकुमार ने हिंदी को कहा राष्ट्रीय भाषा:विवाद होने पर माफी मांगी, कहा- हिंदी उनकी भाषा, हमारे लिए हमारी भाषा कन्नड़ सबसे जरूरी; जानिए पूरा विवाद

कन्नड़ स्टार शिवराजकुमार ने हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषा’ कहने वाले अपने पुराने बयान पर माफी मांगी है। सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद उन्होंने सफाई दी कि वह भारतीय भाषाओं को लेकर उलझ गए थे। शिवराजकुमार ने कहा कि उनका मतलब हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषाओं में से एक’ कहना था, लेकिन उन्होंने गलत शब्द का इस्तेमाल कर दिया। उन्होंने यह बात अपनी आने वाली फिल्म ‘ओरिजिनल मॉन्स्टर’ के प्रमोशन के दौरान कही थी। मीडिया से बातचीत में शिवराजकुमार ने कहा, “मैंने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा कहा। यह भाषाओं में से एक है। हमारे लिए हमारी भाषा यानी कन्नड़ हमेशा महत्वपूर्ण है। पता नहीं, मैं भारतीय भाषाओं में से एक को लेकर उलझ गया था। मैं माफी मांगता हूं, मुझे नहीं पता था।” उन्होंने आगे कहा, “उनकी भाषा हिंदी है और हमारी भाषा कन्नड़ है। उनकी भाषा उनके लिए महत्वपूर्ण है। इसी तरह हमारी भाषा हमारे लिए महत्वपूर्ण है।” कैसे शुरू हुआ विवाद? विवाद शिवराजकुमार के उस पुराने बयान के बाद शुरू हुआ, जब उनसे पैन-इंडिया प्रोजेक्ट के लिए हिंदी डायलॉग बोलने को लेकर सवाल पूछा गया था। तब उन्होंने कहा था, “क्यों? हिंदी मेरी दूसरी भाषा है। मैं हिंदी बोल सकता हूं। आपको क्या लगा? यह आसान भाषा है, राष्ट्रीय भाषा है। हमें यह कैसे नहीं पता होगा? हमें पता है।” उनके इस बयान पर इंटरनेट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आई। सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषा’ कहने पर उनकी आलोचना की। वहीं, कुछ फैन्स ने उनका बचाव भी किया। शिवाराजकुमार का बयान इसलिए भी विवादों में आ गया, क्योंकि लंबे समय से साउथ में भाषा पर विवाद और बहस जारी है। कर्नाटक में बड़ी संख्या में लोग हिंदी और अंग्रेजी के बढ़ते चलन का विरोध कर रहे हैं। वह मानते हैं कि कन्नड़ कर्नाटक की प्राथमिक सार्वजनिक भाषा होनी चाहिए, जबकि हिंदी और अंग्रेजी का बढ़ता इस्तेमाल स्थानीय भाषा के लिए जगह कम कर सकता है। कर्नाटक में ये विवाद तब सबसे बड़ा हुआ, जब लोकल संगठनों ने साइन बोर्ड में कन्नड़ लिखना अनिवार्य कर दिया और हिंदी, अंग्रेजी के साइनबोर्ड तोड़े। संजय दत्त भी मराठी बोलने से इनकार कर विवादों में महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रहे विवाद के बीच बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त ने मराठी में बोलने से इनकार कर दिया। रविवार को मुंबई में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “मैं 6 साल तक येरवडा जेल में रहा, तब भी मराठी भाषा नहीं सीख पाया।” संजय दत्त के बयान पर अब विवाद हो गया है। यह कार्यक्रम ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आयोजित किया था। संजय दत्त मंच पर हिंदी में बोल रहे थे। इस पर मंत्री ने उन्हें मराठी में बोलने के लिए कहा, लेकिन 67 साल के एक्टर ने ऐसा करने से मना कर दिया। इस पर भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर निशाना साधते हुए कहा कि ऑटो ड्राइवरों पर तो मराठी बोलने का दबाव बनाया जाता है। बीजेपी विधायक ने शिवसेना मंत्री पर निशाना साधा संजय दत्त के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। नरेंद्र मेहता ने कहा, “अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।” मराठी न बोलने पर सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।” एक यूजर ने लिखा, “मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।” एक ने कहा, “विडंबना देखिए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।” कुछ लोग मराठी न बोलने पर संजय दत्त को ट्रोल भी कर रहे हैं। एक ने कहा, “आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।”
अमेरिका में EB-5 वीजा आवेदन में भारतीय सबसे आगे:12 हजार से ज्यादा लोगों ने अप्लाई किया, चीन को पीछे छोड़ा

अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। EB-5 वीजा के लिए आवेदन करने वालों में भारतीय चीन से आगे निकल गए हैं। पिछले तीन साल में 12,900 भारतीयों ने EB-5 के लिए आवेदन किया, जबकि चीन से 9,875 आवेदन आए। EB-5 अमेरिका का इन्वेस्टमेंट-बेस्ड इमिग्रेशन प्रोग्राम है। इसके तहत अमेरिका में निवेश करने वाले विदेशी नागरिकों को स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता मिलता है। इसके लिए करीब 7.5 करोड़ रुपए का निवेश करना होता है। ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता है EB-5 EB-5 वीजा अमेरिका में निवेश करने पर ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता खोलता है। H-1B वीजा को लेकर सख्ती बढ़ने के बीच कुछ भारतीयों की दिलचस्पी EB-5 में बढ़ी है। हालांकि, EB-5 मिलने से सीधे अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलती। पहले ग्रीन कार्ड के लिए पात्रता हासिल करनी होती है। अमेरिका में रहने के लिए आवेदक को EB-5 के सभी नियम और इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। प्रोफेसर-स्कॉलर का EB-1 कोटा समय से पहले खत्म अमेरिका में EB-1 वीजा का कोटा इस साल तय समय से पहले ही पूरा हो गया। इस कैटेगरी में हर साल करीब 7 हजार वीजा उपलब्ध होते हैं। इस बार यह कोटा 1 सितंबर को ही खत्म हो गया, जबकि इसकी आखिरी तारीख 30 सितंबर थी। EB-1 में प्रोफेसर, वैज्ञानिक और रिसर्च स्कॉलर जैसे लोग आवेदन कर सकते हैं। ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए 165 आवेदन, 1 को ही जारी ट्रम्प ने 2025 में गोल्ड कार्ड स्कीम लेकर आए थे। इसे उन्होंने EB-5 के विकल्प के तौर पर पेश किया था। इसका मकसद अमीर विदेशी नागरिकों को निवेश के बदले अमेरिका में स्थायी निवास का रास्ता देना था। गोल्ड कार्ड को अब तक ज्यादा सफलता नहीं मिली है। अप्रैल 2026 में वित्त मंत्री लटनिक ने बताया था कि गोल्ड कार्ड में 338 लोगों ने रुचि दिखाई, 165 ने आवेदन फीस भरी और सिर्फ एक व्यक्ति को गोल्ड कार्ड मिला। यही वजह है कि EB-5 में भारतीयों की दिलचस्पी बढ़ी है। ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए अमेरिका में लगभग साढ़े 9 करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होती है। ट्रम्प के गोल्ड कार्ड को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी कानूनी मान्यता पर है। ट्रम्प ने इसे राष्ट्रपति के तौर पर मिली शक्ति का इस्तेमाल करके शुरू किया है। ऐसे में डर है कि जब ट्रम्प सत्ता से बाहर हो जाएंगे तो नए राष्ट्रपति इस गोल्ड कार्ड को खत्म कर सकते हैं। ———————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा: ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…







