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IPL में आज गुजरात Vs हैदराबाद:सीजन में पहली बार सामना होगा; टाइटंस ने सनराइजर्स को 5 बार हराया

IPL में आज गुजरात Vs हैदराबाद:सीजन में पहली बार सामना होगा; टाइटंस ने सनराइजर्स को 5 बार हराया

IPL 2026 का 56वां मैच सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और गुजरात टाइटंस (GT) के बीच खेला जाएगा। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मुकाबला शाम 7 बजे से होगा। दोनों टीमों के 11-11 मैच में 14-14 पॉइंट्स हैं। हैदराबाद बेहतर नेट रनरेट की वजह से दूसरे और गुजरात तीसरे पायदान पर हैं। आज का मैच जीतने वाली टीम पॉइंट्स टेबल के टॉप पर पहुंच जाएगी। दोनों टीमें 7वीं बार आमने-सामने होंगी दोनों टीमों के बीच अब तक 6 मैच खेले गए हैं। गुजरात ने 5 और हैदराबाद ने 1 मैच जीता है। पिछले सीजन दोनों मुकाबले गुजरात ने जीते थे। इस सीजन दोनों टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी। गिल और सुदर्शन की जोड़ी गुजरात की सबसे बड़ी ताकत शुभमन गिल की कप्तानी वाली गुजरात टाइटंस ने धीमी शुरुआत के बाद शानदार लय हासिल की है। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 77 रन की जीत से टीम का मनोबल बढ़ा है। बल्लेबाजी में गिल और साई सुदर्शन टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं। जोस बटलर और वॉशिंगटन सुंदर मिडिल ऑर्डर को मजबूती देते हैं। हालांकि, ऊपरी क्रम के फेल होने पर दबाव फिनिशर्स पर आ जाता है। गिल टीम के टॉप रन स्कोरर हैं। उन्होंने 10 मैचों में 462 रन बनाए हैं। उनका स्ट्राइक रेट 160.41 रहा है। गुजरात की गेंदबाजी में मोहम्मद सिराज और कगिसो रबाडा की रफ्तार के साथ राशिद खान की फिरकी बीच के ओवरों में मैच पलट सकती है। रबाडा 11 मैचों में 18 विकेट ले चुके हैं। SRH ने 8 बार पार किया 200 का आंकड़ा हैदराबाद ने इस सीजन 8 बार 200 रन का आंकड़ा पार किया है, जिसमें मुंबई के खिलाफ 249 रन का स्कोर शामिल है। IPL के टॉप-10 बल्लेबाजों में हैदराबाद के तीन खिलाड़ी शामिल हैं। क्लासन 11 मैचों में 494 रन के साथ पहले, अभिषेक शर्मा दूसरे और ईशान किशन आठवें नंबर पर हैं। कमिंस की वापसी बदला हैदराबाद की बॉलिंग मजबूत SRH की गेंदबाजी की कमान पैट कमिंस के हाथों में है। चोट के कारण शुरुआती मैचों से बाहर रहने के बाद उनकी वापसी से टीम में नई ऊर्जा आई है। उनके आने से बॉलिंग अटैक ज्यादा आक्रामक और सटीक नजर आ रहा है। श्रीलंका के युवा तेज गेंदबाज ईशान मलिंगा इस सीजन की नई खोज साबित हुए हैं। वे 16 विकेट के साथ टॉप-5 विकेट लेने वालों में शामिल हैं और टीम के टॉप विकेट टेकर भी हैं। अहमदाबाद की पिच बैटर्स को मदद करेगी नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के अनुकूल मानी जाती है। नई गेंद से तेज गेंदबाजों को भी मदद मिलती है। यहां लक्ष्य चेज करना आसान रहता है, इसलिए टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी चुन सकती है। यहां IPL के 50 मैच खेले गए हैं। इनमें 24 बार पहले बल्लेबाजी और 25 बार चेज करने वाली टीम जीती है। एक मैच टाई रहा है। वेदर रिपोर्ट अहमदाबाद में मौसम गर्म रहेगा। मैच में तापमान करीब 33°C रहेगा। बारिश की संभावना नहीं है। हवा में करीब 61% नमी रहने की संभावना है, जिसके कारण दूसरी पारी में ओस अहम भूमिका निभा सकती है। दोनों टीमों की प्लेइंग-12 गुजरात टाइटंस: शुभमन गिल (कप्तान), साई सुदर्शन, जोस बटलर (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, निशांत सिंधु, जेसन होल्डर, राशिद खान, अरशद खान, कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, मानव सुथर और राहुल तेवतिया। सनराइजर्स हैदराबाद: ट्रेविस हेड, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेटकीपर), हेनरिक क्लासन, सलील अरोड़ा, आर स्मरण, नीतीश रेड्डी, पैट कमिंस (कप्तान), शिवांग कुमार, साकिब हुसैन, ईशान मलिंगा और हर्ष दुबे।

बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत को ED ने गिरफ्तार किया:नगर निगम में अवैध भर्ती का आरोप; 150 लोगों को नौकरी दिलाई, पैसे-फ्लैट लिए

बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत को ED ने गिरफ्तार किया:नगर निगम में अवैध भर्ती का आरोप; 150 लोगों को नौकरी दिलाई, पैसे-फ्लैट लिए

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और TMC नेता सुजीत बोस को नगर निगम भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को अरेस्ट किया। सुजीत अपने बेटे समुद्र बोस के साथ सुबह करीब 10:30 बजे ED ऑफिस पहुंचे थे। उनसे करीब 10 घंटे पूछताछ की गई, फिर रात को गिरफ्तार कर लिया गया। सुजीत बोस पर 2014-2018 के बीच साउथ दमदम नगर निगम में करीब 150 लोगों की अवैध भर्ती कराने का आरोप है। कहा जाता है कि सुजीत ने इसके बदले पैसे और फ्लैट लिए थे। सुजीत उस वक्त दमदम नगर पालिका के उपाध्यक्ष थे। बिधाननगर से तीन बार के विधायक रहे सुजीत बोस हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के शरदवत मुखर्जी से 37,000 से अधिक वोटों के अंतर से हार गए थे। 11 दिन में दो बार पूछताछ, फिर गिरफ्तारी सुजीत बोस को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ED के कई नोटिस मिले। जिनमें से एक 6 अप्रैल को मिला था। इसी दिन नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। उन्होंने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और चुनाव प्रचार में अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए ED के सामने पेश होने से छूट मांगी थी। चुनावों के बाद बोस 1 मई को CGO कॉम्प्लेक्स में ED अधिकारियों के सामने पेश हुए। 11 दिन बाद दोबारा पेशी में सुजीत को अरेस्ट कर लिया गया। कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों पर CBI की तरफ से FIR दर्ज किए जाने के बाद ED ने 2 जनवरी 2024 और अक्टूबर 2025 में सुजीत बोस के ठिकानों पर छापेमारी की। पश्चिम बंगाल में 11 मई को हुए 4 बड़े घटनाक्रम ———————— ये खबर भी पढ़ें… बंगाल में SIR कराने वाले अधिकारी चीफ सेक्रेटरी बने: कांग्रेस बोली- EC और BJP के बीच खुली मिलीभगत पश्चिम बंगाल में SIR कराने वाले चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को सुवेंदु सरकार में बंगाल का नया चीफ सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है। पश्चिम बंगाल कैडर के अधिकारी मनोज अग्रवाल की देखरेख में विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल में वोटर लिस्ट में विशेष गहन संशोधन (SIR) कराया गया था। जिसके तहत मतदाता सूची से लगभग 91 लाख वोटर्स के नाम हटा दिए गए थे। पूरी खबर पढ़ें…

बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत को ED ने गिरफ्तार किया:नगर निगम में अवैध भर्ती का आरोप; 150 लोगों को नौकरी दिलाई, पैसे-फ्लैट लिए

बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत को ED ने गिरफ्तार किया:नगर निगम में अवैध भर्ती का आरोप; 150 लोगों को नौकरी दिलाई, पैसे-फ्लैट लिए

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और TMC नेता सुजीत बोस को नगर निगम भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को अरेस्ट किया। सुजीत अपने बेटे समुद्र बोस के साथ सुबह करीब 10:30 बजे ED ऑफिस पहुंचे थे। उनसे करीब 10 घंटे पूछताछ की गई, फिर रात को गिरफ्तार कर लिया गया। सुजीत बोस पर 2014-2018 के बीच साउथ दमदम नगर निगम में करीब 150 लोगों की अवैध भर्ती कराने का आरोप है। सुजीत ने इसके बदले पैसे और फ्लैट लिए थे। सुजीत उस वक्त दमदम नगर पालिका के उपाध्यक्ष थे। बिधाननगर से तीन बार के विधायक रहे सुजीत बोस हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के शरदवत मुखर्जी से 37,000 से अधिक वोटों के अंतर से हार गए थे। 11 दिन में दो बार पूछताछ, फिर गिरफ्तारी सुजीत बोस को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ED के कई नोटिस मिले। जिनमें से एक 6 अप्रैल को मिला था, जिस दिन नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। उन्होंने पहले कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और चुनाव प्रचार में अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए ED के सामने पेश होने से छूट मांगी थी। चुनावों के बाद बोस 1 मई को CGO कॉम्प्लेक्स में ED अधिकारियों के सामने पेश हुए। 11 दिन बाद दोबारा पेशी में सुजीत को अरेस्ट कर लिया गया। कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देशों पर CBI की तरफ से FIR दर्ज किए जाने के बाद ED ने दो जनवरी 2024 और अक्टूबर 2025 में सुजीत बोस के ठिकानों पर छापेमारी की। क्या है नगर निगम भर्ती घोटाला, कैसे खुलासा हुआ यह मामला 2014 से 2018 के बीच पश्चिम बंगाल की विभिन्न नगर पालिकाओं में भर्ती अनियमितताओं से जुड़ा है। इसका खुलासा तब हुआ जब ED ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच शुरू की। 2023 में शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के दौरान, ED ने TMC के सहयोगी अयान सिल और अन्य लोगों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी ली। जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सबूत बरामद हुए। एजेंसी को जांच में पता चला कि ये घोटाला केवल शिक्षक भर्ती तक ही सीमित नहीं था, बल्कि साउथ दम दम और अन्य नगर निगम सहित कई नगरपालिका नियुक्तियों में अनियमितताओं तक भी फैला हुआ था। यह भर्ती मजदूर, सफाईकर्मी, क्लर्क, चपरासी, एम्बुलेंस अटेंडेंट, सहायक मिस्त्री, पंप ऑपरेटर, हेल्पर, सैनिटरी सहायक और ड्राइवर जैसे पदों के लिए थी। ED ने आगे आरोप लगाया कि विभिन्न नगर निगम से जुड़े ठेके एक ही कंपनी – M/s ABS Infozon Pvt Ltd – को दिए गए थे, जिसमें अयान सिल एक निदेशक थे। जांचकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि सिल ने सरकारी कर्मचारियों, राजनीतिक नेताओं और अन्य निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर साजिश रची और पैसे के बदले अयोग्य उम्मीदवारों की अवैध नियुक्ति में मदद की। —————————-

माइक्रोवेव में भूलकर भी गर्म न करें ये 5 चीजें, खाना बन जाएगा खतरनाक! जानें वजह

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Last Updated:May 11, 2026, 23:31 IST आजकल लोग जल्दी में खाना गर्म करने के लिए माइक्रोवेव का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हर चीज को माइक्रोवेव में गर्म करना सुरक्षित नहीं माना जाता. कुछ फूड्स ऐसे होते हैं, जिन्हें माइक्रोवेव में रखने से उनका स्वाद, पोषण और टेक्सचर खराब हो सकता है, वहीं कुछ मामलों में यह सेहत के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है. इसलिए एक्सपर्ट्स कुछ खास चीजों को माइक्रोवेव में गर्म करने से बचने की सलाह देते हैं. ख़बरें फटाफट आजकल लगभग हर घर की रसोई में माइक्रोवेव ओवन मौजूद है. खाना गर्म करने से लेकर जल्दी कुकिंग तक, यह लोगों की जिंदगी आसान बना चुका है. लेकिन कई बार लोग बिना सोचे-समझे हर चीज माइक्रोवेव में गर्म कर लेते हैं, जो सेहत और सुरक्षा दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. कुछ फूड ऐसे होते हैं, जिन्हें माइक्रोवेव में गर्म करने पर उनका स्वाद, पोषण और टेक्सचर खराब हो सकता है, वहीं कुछ मामलों में यह खतरनाक भी साबित हो सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर चीज माइक्रोवेव के लिए बनी नहीं होती, इसलिए कुछ खाद्य पदार्थों को इससे दूर रखना बेहतर माना जाता है. बहुत से लोग ठंडे उबले अंडे को माइक्रोवेव में दोबारा गर्म कर लेते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता. माइक्रोवेव में अंडे के अंदर तेजी से भाप बनती है, जिससे वह अचानक फट सकता है. कई बार यह बाहर निकालने के बाद भी फटने का खतरा पैदा कर सकता है. इसके अलावा अंडे की टेक्सचर और स्वाद भी खराब हो सकता है. अगर अंडा गर्म करना हो, तो उसे काटकर हल्की आंच पर गर्म करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. चावल को बार-बार गर्म करना सही नहींकई लोग बचा हुआ चावल माइक्रोवेव में बार-बार गर्म करके खाते हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स के अनुसार लंबे समय तक बाहर रखा चावल बैक्टीरिया पैदा कर सकता है. माइक्रोवेव हर हिस्से को बराबर गर्म नहीं करता, जिससे कुछ बैक्टीरिया बच सकते हैं. यही वजह है कि चावल को सही तरीके से स्टोर करना और सिर्फ एक बार अच्छी तरह गर्म करके खाना बेहतर माना जाता है. हरी पत्तेदार सब्जियों में बदल सकता है स्वादपालक, मेथी और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियों को माइक्रोवेव में बार-बार गर्म करने से उनके पोषक तत्व प्रभावित हो सकते हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इनमें मौजूद नाइट्रेट्स ज्यादा गर्म होने पर ऐसे तत्वों में बदल सकते हैं, जो शरीर के लिए अच्छे नहीं माने जाते. इसके अलावा इन सब्जियों का स्वाद और टेक्सचर भी बदल सकता है, जिससे खाने का मजा खराब हो जाता है. मिर्च गर्म करते समय रखें सावधानीअगर आपने कभी माइक्रोवेव में हरी या लाल मिर्च गर्म की है, तो आपने उसकी तेज गंध जरूर महसूस की होगी. माइक्रोवेव में मिर्च गर्म करने पर उसमें मौजूद कैप्साइसिन हवा में फैल सकता है, जिससे आंखों और गले में जलन महसूस हो सकती है. कई बार माइक्रोवेव खोलते ही तेज धुआं जैसा असर महसूस होता है. इसलिए मिर्च को माइक्रोवेव में गर्म करने से बचना बेहतर माना जाता है. प्रोसेस्ड मीट हो सकता है नुकसानदायकसॉसेज, सलामी और दूसरे प्रोसेस्ड मीट को माइक्रोवेव में गर्म करने पर उनमें मौजूद प्रिजर्वेटिव्स और फैट्स पर असर पड़ सकता है. कुछ स्टडीज में माना गया है कि ज्यादा तापमान पर प्रोसेस्ड मीट में हानिकारक तत्व बनने का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा माइक्रोवेव में ऐसे फूड का स्वाद और टेक्सचर भी रबड़ जैसा हो सकता है, जिससे खाने का अनुभव खराब हो जाता है. माइक्रोवेव इस्तेमाल करते समय रखें ये बातेंमाइक्रोवेव का इस्तेमाल करते समय सही कंटेनर चुनना भी बेहद जरूरी है. प्लास्टिक के कुछ डिब्बे गर्म होने पर हानिकारक केमिकल छोड़ सकते हैं. इसलिए माइक्रोवेव-सेफ बर्तन ही इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा खाने को ढककर गर्म करना और बीच-बीच में चलाना जरूरी माना जाता है, ताकि खाना बराबर गर्म हो सके. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi

सुबह खाली पेट भूलकर भी न खाएं ये फल, वरना पेट से लेकर शुगर तक हो सकती है गड़बड़

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सुबह का समय शरीर के लिए सबसे अहम माना जाता है. रातभर खाली रहने के बाद हमारा पाचन तंत्र सुबह काफी संवेदनशील स्थिति में होता है, इसलिए इस समय क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसका सीधा असर पूरे दिन की सेहत पर पड़ सकता है. कई लोग दिन की शुरुआत हेल्दी बनाने के लिए खाली पेट फल खाते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर फल सुबह खाली पेट खाना फायदेमंद नहीं होता. कुछ फल पेट में एसिडिटी, गैस, ब्लोटिंग और ब्लड शुगर बढ़ाने जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. यही वजह है कि फलों को सही समय और सही तरीके से खाना बेहद जरूरी माना जाता है. Healthians की रिपोर्ट के अनुसार, संतरा, मौसमी, अनानास और अंगूर जैसे खट्टे फलों में प्राकृतिक एसिड की मात्रा काफी ज्यादा होती है. सुबह खाली पेट इन्हें खाने से पेट की अंदरूनी परत पर असर पड़ सकता है, जिससे एसिडिटी, जलन और गैस जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं. जिन लोगों को पहले से पाचन संबंधी दिक्कतें रहती हैं, उनके लिए यह परेशानी और बढ़ सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार खट्टे फलों को हल्का नाश्ता करने के बाद खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है. इससे शरीर को इनके पोषक तत्व भी मिल जाते हैं और पेट पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता. क्या खाली पेट केला खाना सही है?केला सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में से एक है. लोग इसे इंस्टेंट एनर्जी का अच्छा स्रोत मानते हैं, लेकिन कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुबह खाली पेट केला खाना हर किसी के लिए सही नहीं माना जाता. केले में प्राकृतिक शुगर और मैग्नीशियम होता है, जो कुछ लोगों में ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकता है. इसके अलावा खाली पेट केला खाने से कुछ लोगों को पेट भारी लग सकता है या सुस्ती महसूस हो सकती है. हालांकि अगर इसे ड्राई फ्रूट्स, ओट्स या दूसरे फूड्स के साथ खाया जाए, तो यह शरीर के लिए ज्यादा संतुलित विकल्प बन सकता है. तरबूज और खरबूजा भी सोच-समझकर खाएंगर्मियों में लोग सुबह सबसे पहले तरबूज और खरबूजा खाना पसंद करते हैं, क्योंकि इनमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है. हालांकि बहुत ज्यादा मात्रा में खाली पेट इन्हें खाने से कुछ लोगों को पेट फूलना, जल्दी भूख लगना या पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि जिन लोगों का पाचन कमजोर है, उन्हें इन फलों का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. साथ ही इन्हें दूसरे भारी भोजन के साथ मिक्स करके खाने से भी बचना बेहतर माना जाता है. ज्यादा मीठे फल भी बढ़ा सकते हैं शुगरआम, चीकू और अंगूर जैसे फलों में प्राकृतिक शुगर ज्यादा मात्रा में होती है. सुबह खाली पेट इनका अधिक सेवन ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है. खासतौर पर डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस से जूझ रहे लोगों को ऐसे फलों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार फल हेल्दी जरूर होते हैं, लेकिन उनका सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में करना चाहिए. सुबह खाली पेट क्या खाना माना जाता है बेहतर?सुबह खाली पेट हल्के और आसानी से पचने वाले फल ज्यादा अच्छे माने जाते हैं. पपीता, सेब और भीगे हुए ड्राई फ्रूट्स के साथ फल खाना शरीर के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. इसके अलावा सुबह उठते ही पहले पानी पीना और कुछ देर बाद फल खाना पाचन के लिए अच्छा माना जाता है. शरीर की जरूरत को समझना है जरूरीहर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से काम करता है. कोई फल किसी एक व्यक्ति को फायदा दे सकता है, जबकि वही फल दूसरे को परेशानी दे सकता है. इसलिए शरीर के संकेतों को समझना बेहद जरूरी माना जाता है. अगर किसी फल को खाने के बाद पेट में जलन, गैस या असहजता महसूस हो, तो उसे खाली पेट खाने से बचना चाहिए.

रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस पर टिप्पणी को लेकर पीएम मोदी पर पलटवार किया, बीजेपी को ‘ब्रिटिश जनता पार्टी’ बताया | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 22:34 IST पश्चिम एशिया में तनातनी के बीच तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने भी सर्वदलीय बैठक की मांग की. तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (पीटीआई/फ़ाइल) तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर तीखा हमला बोला और केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी पर विभाजनकारी राजनीति करने और संवैधानिक संस्थानों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी की कांग्रेस को “मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस” बताने वाली टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा को “ब्रिटिश जनता पार्टी” कहते हुए रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि भगवा पार्टी समाज को “बांटने” और समुदायों के बीच “डर” पैदा करने का प्रयास कर रही है। सीएम रेड्डी ने कहा, “हम पीएम मोदी द्वारा दिए गए बयान की कड़ी निंदा करते हैं। मुस्लिम और माओवादी भी इस देश का हिस्सा हैं। एक प्रधानमंत्री के लिए इस तरह से बोलना दुर्भाग्यपूर्ण है। वे (बीजेपी) उन्हें खत्म करना चाहते हैं, लेकिन हमारा तरीका उन्हें मुख्यधारा के समाज में वापस लाना है। तेलंगाना में देश के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में अधिक माओवादी आत्मसमर्पण हुए हैं।” तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार केवल बल पर केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के बजाय माओवादियों को मुख्यधारा में वापस लाने में विश्वास करती है। सीएम रेड्डी ने पीएम मोदी द्वारा घोषित प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया दी पश्चिम एशिया संकट और पीएम मोदी के आत्मनिर्भरता के प्रयास के बीच, सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि “पीएम मोदी लोगों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं, ऐसे सुझाव देना विदेश नीति की पूरी विफलता के अलावा कुछ नहीं है। उन्हें सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और सभी से सुझाव लेने चाहिए। भारत ने भारत-पाकिस्तान युद्ध सहित कई युद्ध देखे हैं, लेकिन देश को कभी भी ऐसे प्रतिबंधों का सामना नहीं करना पड़ा।” उन्होंने आगे तर्क दिया कि संघर्षों में सीधे तौर पर शामिल कई देश स्थिति को अलग-अलग तरीके से संभाल रहे थे। रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया, “अमेरिका और संकट का सामना कर रहे अन्य देश सीधे तौर पर युद्ध में शामिल हैं, लेकिन भारत सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल नहीं है। पीएम मोदी को कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन वह कुछ नहीं कर रहे हैं। वे केवल किसी को संकट में डालना जानते हैं।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना समाचार राजनीति रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस पर टिप्पणी को लेकर पीएम मोदी पर पलटवार किया, बीजेपी को ‘ब्रिटिश जनता पार्टी’ कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)रेवंत रेड्डी की पीएम मोदी की आलोचना(टी)तेलंगाना के मुख्यमंत्री(टी)नरेंद्र मोदी पर हमला(टी)भाजपा विभाजनकारी राजनीति(टी)मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस(टी)ब्रिटिश जनता पार्टी की टिप्पणी(टी)संस्थाओं का दुरुपयोग भारत(टी)पश्चिम एशिया संकट भारत

विपक्ष के नेता से मुख्यमंत्री तक: सुवेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक पुनर्गठन के संकेत दिए, ‘भय-मुक्त’ शासन का आश्वासन दिया | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 21:17 IST अधिकारी ने कहा कि वह “अवांछित टिप्पणियां” करने से बचेंगे और इस बात पर जोर दिया कि सिस्टम में हर कोई कानून और प्रक्रिया के ढांचे के भीतर स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए स्वतंत्र होगा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी हावड़ा के नबन्ना सभाघर में पार्टी विधायकों और मंत्रियों के साथ बैठक के दौरान। (पीटीआई फोटो) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली कैबिनेट बैठक में, सुवेंदु अधिकारी ने खुद को शासन, संस्थागत कामकाज और नौकरशाही विश्वास-निर्माण पर केंद्रित प्रशासक के रूप में स्थापित किया। उन्होंने मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिया, जिसे कई उपस्थित लोगों ने राज्य प्रशासन के लिए “कप्तान की भूमिका” के रूप में वर्णित किया। सोमवार को बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए, अधिकारी ने कहा कि वह अब “सभी दलों और सभी लोगों के मुख्यमंत्री” हैं और उसी के अनुसार काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह “अवांछित टिप्पणियां” करने से बचेंगे और इस बात पर जोर दिया कि सिस्टम में हर कोई कानून और प्रक्रिया के ढांचे के भीतर स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए स्वतंत्र होगा। अपने पांच सदस्यीय मंत्रिमंडल के साथ खड़े होकर उन्होंने कहा कि नई सरकार बीआर अंबेडकर और संविधान के आदर्शों का पालन करते हुए “सुशासन, सुरक्षा और डबल इंजन शासन” के सिद्धांतों पर काम करेगी। यह भी पढ़ें: मुफ्त बस यात्रा, महिलाओं के लिए 3 हजार रुपये की सहायता और 1 जून से बंगाल में आयुष्मान भारत की शुरुआत कैबिनेट ने 6 प्रमुख फैसलों को मंजूरी दी कैबिनेट ने अपनी पहली बैठक में छह बड़े फैसले लिए. इनमें बिना बाड़ वाले सीमा क्षेत्रों में बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपने की प्रक्रिया शुरू करना, पश्चिम बंगाल में कई लंबित केंद्रीय कल्याण योजनाओं को लागू करना, केंद्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए नौकरशाहों को तैनात करना, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत नियम तैयार करना और मृत भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों के लिए सहायता उपायों को मंजूरी देना शामिल है। मुख्यमंत्री ने मतदाताओं, चुनाव आयोग, विपक्षी दलों और उम्मीदवारों को “भयमुक्त और बिना किसी मौत के हिंसा मुक्त चुनाव” के लिए धन्यवाद दिया। 321 भाजपा कार्यकर्ताओं को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिनके “बलिदान” ने पार्टी को सत्ता में लाने में योगदान दिया। सरकार ने कहा कि ऐसे सभी मामलों में न्याय का प्रयास किया जाएगा और प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान की जाएगी। कैबिनेट ने जनसांख्यिकीय और सीमा सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए बीएसएफ को भूमि हस्तांतरित करने की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी। अधिकारियों ने कहा कि स्थानांतरण प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी और 45 दिनों के भीतर पूरी हो जाएगी। कई केंद्रीय योजनाएं शुरू की गईं पश्चिम बंगाल को भी सोमवार से कई केंद्रीय योजनाओं के तहत लाया गया, जिनमें आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और उज्ज्वला योजना शामिल हैं। सीएम ने दावा किया कि 8.65 लाख विश्वकर्मा आवेदन और उज्ज्वला के तहत लगभग एक करोड़ महिलाओं से जुड़े आवेदन पिछले प्रशासन द्वारा केंद्र को नहीं भेजे गए थे। अधिकारी ने यह भी घोषणा की कि अब बीएनएस के तहत नियम बनाए जाएंगे, उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ऐसा करने में विफल रही थी। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में भर्ती आवेदकों के लिए ऊपरी आयु सीमा में पांच साल की छूट शामिल है, सरकार का दावा है कि 2015 के बाद से राज्य में कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई है। जून 2025 में रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय द्वारा जारी जनगणना-संबंधित परिपत्र पर काम भी तुरंत शुरू होगा। कैबिनेट विभागों को इस प्रकार वितरित किया गया: दिलीप घोष – पंचायत और पशु संसाधन विकास अशोक कीर्तनिया – खाद्य विभाग खुदीराम टुडू – पिछड़ा वर्ग कल्याण अग्निमित्र पॉल – महिला एवं बाल कल्याण, शहरी विकास निसिथ प्रमाणिक – उत्तर बंगाल विकास, खेल और युवा कल्याण ‘बिना डरे काम करें’: अधिकारी ने नौकरशाहों से कहा अधिकारी ने विभागीय सचिवों के साथ एक अलग बैठक भी की, जहां मुख्य सचिव के रूप में मनोज अग्रवाल की नियुक्ति की औपचारिक सूचना दी गई। बातचीत के दौरान, उन्होंने नौकरशाहों को आश्वासन दिया कि उन्हें “बिना किसी डर के” कानून के अनुसार काम करना चाहिए। ‘ उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पदानुक्रम बनाए रखा जाएगा और शासन आदेश की उचित श्रृंखला के माध्यम से सख्ती से काम करेगा। उन्होंने कहा कि लाइव टीवी पर अधिकारियों को अपमानित करना गलत है, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर मुद्दे पर एक स्थापित प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। यह भी पढ़ें: कौन हैं मनोज अग्रवाल? बंगाल चुनाव की निगरानी करने वाले आईएएस अधिकारी, एसआईआर को मुख्य सचिव नियुक्त किया गया बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक, अधिकारी ने अधिकारियों को पूर्व मुख्यमंत्री के आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित विधायकों को अपने संदेश में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लंबित कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया. लंबित परियोजनाओं की समीक्षा के लिए जिला मजिस्ट्रेट इस सप्ताह के अंत में विधायकों के साथ बैठक करेंगे, जिसमें स्थानीय निकाय भी भाग लेंगे। उन्होंने दोहराया कि केवल वैध कोयला खनन की अनुमति दी जाएगी और चेतावनी दी कि अवैध कोयला और रेत खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, सरकार का इरादा खनन कार्यों को वैध बनाने का है ताकि मजदूरों को औपचारिक प्रणाली के माध्यम से मजदूरी मिल सके जबकि राजस्व राज्य के खजाने तक पहुंचे। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि कट मनी, सिंडिकेट संचालन और जबरन वसूली के प्रति “शून्य सहिष्णुता” होगी। विधायकों को सलाह दी गई कि वे ऐसी टिप्पणी न करें जिससे जनता की भावना आहत हो और असंसदीय भाषा से बचने की हिदायत दी गई। पुलिस प्रशासन को एक अलग संदेश में, नए नेतृत्व ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री के आंदोलन के दौरान सार्वजनिक असुविधा को कम करने और हूटर के अनावश्यक उपयोग से बचने का निर्देश दिया। सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ गैर-जमानती मामलों सहित सख्त कार्रवाई का आदेश दिया गया, जबकि आत्मरक्षा में काम करने वालों को जमानती आरोपों का सामना करना पड़ा। पुलिस को यह भी निर्देश दिया गया कि विशेष अवसरों को छोड़कर सड़कों पर प्रार्थना की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन

मणिपुर चुनाव 2027: चुनाव से पहले की तैयारी! राज्यपाल के अमित शाह से मुलाकात, नागा संतों ने पीएम मोदी से की मुलाकात

मणिपुर चुनाव 2027: चुनाव से पहले की तैयारी! राज्यपाल के अमित शाह से मुलाकात, नागा संतों ने पीएम मोदी से की मुलाकात

मणिपुर विधानसभा चुनाव 2027: 2027 विधान सभा चुनाव में पहले राजनीतिक और सुरक्षा हालात पर फिर से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। राज्य में जारी जातीय तनाव, गरीबों की बरामदगी और नागा-कुकी विवाद के बीच राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में राज्य की सुरक्षा स्थिति और सरकार द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों पर चर्चा हुई। तीन नागा सोसियोटी ने मोदी से की हस्तक्षेप की मांग इसी बीच नागा सिविल सोसायटी के तीन विद्वानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर “व्यक्तिगत और आपदाग्रस्त हस्तक्षेप” की मांग की है। आरोपियों ने आरोप लगाया कि कुकी टिप्पणियाँ द्वारा पहाड़ी आचल में नागालैंड के खिलाफ लगातार हिंसा और क्षेत्रीय घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) को सक्रिय करने के तहत यूक्रेनी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया पर नियंत्रण की अपील की। मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की.@HMOIndia | @अमितशाह | @AmitShahOffice | @भल्लाअजय26 | #अमितशाह | #अजयभल्ला | #मणिपुर | #यूएनआई pic.twitter.com/qxPrnaKfC – यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (@uni Indianews) 11 मई 2026 नागा विद्वानों ने भारत सरकार और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम के साथ मिलकर एनएससीएन (आईएम) के साथ मिलकर भारत-नागा शांति प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि चॉकलेट और समग्री समाधान ही राज्य में स्थायी शांति ला सकते हैं। यह भी पढ़ेंमनोज अग्रवाल बने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, समाजवादी पार्टी के पर्यवेक्षक चुनाव में हुए सुरक्षा कमांडो ने नक्सली में सर्च ऑपरेशन तेज किया दूसरी ओर सुरक्षा बलों ने रॉकेट्स में कॉन्स्टैंट स्टालिन अभियान को तेज कर दिया है। पुलिस के अनुसार इंफाल वेस्ट जिले में दो अलग-अलग अभियानों के दौरान कम से कम 20 हथियार और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया। लैंगोल हिल रेंज से 16 हथियार, जिसमें दस पिस्तौल, एक इंसास राइफल और .303 राइफल शामिल हैं, बरामद किए गए। वहीं सेकमाई थाना क्षेत्र के इंगेल हिल से दो हथियार, दो हाथ ग्रेनेड और अन्य हथियार जब्त किए गए। मॉक में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समूह के बीच जारी जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग मारे गए हैं। यह भी पढ़ें: दिलीप घोष को ग्रामीण विकास, अग्निमित्रा को महिला कल्याण… शुभेंदु गर्भ में जानें किसे कौन सा मंत्रालय

अन्नाद्रमुक में एक और विभाजन? विधायक दल के नेता के लिए अधिकांश विधायकों ने वेलुमणि का समर्थन किया, 17 ने ईपीएस का समर्थन किया | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 20:21 IST अन्नाद्रमुक को एक और विभाजन का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सीवी शनमुगम खेमा एसपी वेलुमणि और विजय की टीवीके को समर्थन दे रहा है, जबकि 17 विधायकों ने दलबदल विरोधी कानून का मुद्दा उठाते हुए एडप्पादी के पलानीस्वामी का समर्थन किया है। सीवी शनमुगम और एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK), पहले से ही तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अपनी करारी हार से जूझ रही है, अब एक और विभाजन की ओर बढ़ती दिख रही है। सीवी शनमुगम खेमे के लगभग 30 एआईएडीएमके विधायकों ने कथित तौर पर प्रोटेम स्पीकर को एक याचिका सौंपी है, जिसमें एसपी वेलुमणि को विधायक दल के नेता के रूप में मान्यता देने की मांग की गई है, जबकि 17 विधायकों ने एक अलग पत्र के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी का समर्थन किया है। समझा जाता है कि शनमुगम खेमा विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) सरकार को समर्थन देने के पक्ष में है। यदि शनमुगम अन्नाद्रमुक के दो-तिहाई विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब हो जाते हैं, तो उनका गुट “असली” अन्नाद्रमुक के रूप में वैधता का दावा कर सकता है। वैकल्पिक रूप से, यदि समूह टीवीके के साथ विलय का निर्णय लेता है, तो विधायक दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत अपनी विधानसभा सदस्यता बरकरार रखने में सक्षम हो सकते हैं। सोमवार को 17वीं तमिलनाडु विधानसभा के शपथ ग्रहण समारोह में नवनिर्वाचित अन्नाद्रमुक विधायकों के दो अलग-अलग समूहों में पहुंचने के बाद पार्टी के भीतर बढ़ती दरार की अटकलें तेज हो गईं। पूर्व राज्य मंत्रियों, केपी मुनुसामी और थलवई एन सुंदरम सहित मनोनीत विधायकों का एक समूह, आधिकारिक तौर पर विधायक के रूप में शपथ लेने के लिए पार्टी महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी के साथ विधानसभा में आया। इसके तुरंत बाद पूर्व राज्य मंत्री एसपी वेलुमणि और पूर्व मंत्री डॉ. सी विजयबास्कर के नेतृत्व में एक और समूह पहुंचा। पूर्व मंत्री सीवी षणमुगम समय पर नहीं पहुंच सके। 23 अप्रैल के विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद, केवल 47 सीटें जीतने में कामयाब होने के बाद, एआईएडीएमके के भीतर बदलाव की मांग को लेकर हंगामा मच गया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया अन्नाद्रमुक में एक और विभाजन? विधायक दल के नेता के लिए अधिकांश विधायकों ने वेलुमणि का समर्थन किया, 17 ने ईपीएस का समर्थन किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)एआईएडीएमके विभाजन(टी)एआईएडीएमके संकट(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)सीवी शनमुगम(टी)एसपी वेलुमणि(टी)एडप्पादी के पलानीस्वामी(टी)विजय टीवीके पार्टी(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम

‘तृणमूल पूरी तरह से नष्ट’: बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी नेताओं ने I-PAC पर की फायरिंग | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 19:58 IST निलंबित टीएमसी नेता रिजु दत्ता ने भी I-PAC पर पार्टी को प्रभावी ढंग से चलाने और आंतरिक निर्णयों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। वरिष्ठ टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि I-PAC ने पार्टी की आंतरिक संरचना और चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया है। (फाइल फोटो) 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के हाथों करारी हार का सामना करने के बाद, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर आंतरिक दोष तेजी से फोकस में आ गए हैं, नेताओं का एक वर्ग पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए खुलेआम राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC को दोषी ठहरा रहा है। वरिष्ठ टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने संगठन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि I-PAC ने पार्टी की आंतरिक संरचना और चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया है। बनर्जी ने कोलकाता स्थित एक समाचार आउटलेट से कहा, “आई-पीएसी ने तृणमूल कांग्रेस संगठन को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। उन्होंने संभावित उम्मीदवारों के बीच झगड़े भड़काए। उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र में कई लोगों से कहा कि आपकी प्रतिक्रिया सबसे अच्छी है, आपको ही टिकट मिलेगा। जिन लोगों को टिकट नहीं मिला, उन्होंने गुस्से में आकर भाजपा की मदद की।” उन्होंने कंसल्टेंसी फर्म पर अत्यधिक निर्भरता के लिए साथी पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी की भी आलोचना की। उनके अनुसार, इस तरह की निर्भरता “पार्टी के भीतर स्वीकार नहीं की गई” और इससे आंतरिक असंतोष पैदा हुआ। आलोचना को बढ़ाते हुए, निलंबित टीएमसी नेता रिजु दत्ता ने भी I-PAC पर पार्टी को प्रभावी ढंग से चलाने और आंतरिक निर्णयों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने “सदस्यों को धमकाया” और पार्टी के साथ उसके जुड़ाव से वित्तीय लाभ उठाया, जबकि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से उन्होंने “तोड़फोड़” की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया। #घड़ी | कोलकाता, पश्चिम बंगाल: निलंबित टीएमसी नेता रिजु दत्ता का कहना है, “…दीदी (ममता बनर्जी) और अभिषेक बनर्जी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि कैसे एक बाहरी संगठन (आई-पीएसी) पूरी पार्टी पर कब्जा करने में कामयाब रहा… जब टीएमसी नेताओं के घरों पर ईडी की छापेमारी हुई, तो दीदी… pic.twitter.com/FeHjEP1bwc– एएनआई (@ANI) 11 मई 2026 उन्होंने कहा, ”दीदी (ममता बनर्जी) और अभिषेक बनर्जी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि कैसे एक बाहरी संगठन (आई-पीएसी) पूरी पार्टी पर कब्जा करने में कामयाब रहा,” उन्होंने दावा किया कि संगठन ने पार्टी ढांचे पर ”कब्जा” कर लिया है। राजगंज के पूर्व विधायक खगेश्वर रॉय और अलीपुरद्वार के पूर्व विधायक सौरव चक्रवर्ती सहित अन्य नेताओं ने भी इसी तरह की चिंताएं जताई हैं, जिसमें उम्मीदवारों के चयन में I-PAC द्वारा हस्तक्षेप करने और जमीनी स्तर की संगठनात्मक ताकत को कमजोर करने का आरोप लगाया गया है। यह विवाद टीएमसी के लिए एक महत्वपूर्ण चुनावी झटके की पृष्ठभूमि में आया है। 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर प्रचंड जीत हासिल की, जबकि टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई। I-PAC के साथ टीएमसी का जुड़ाव 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू हुआ, जब फर्म ने अभियान रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे पार्टी को एक मजबूत जनादेश हासिल करने में मदद मिली। इसने 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन में भी योगदान दिया। हालाँकि, हालिया हार के बाद इसकी भूमिका तेजी से जांच के दायरे में आ गई है। I-PAC, एक राजनीतिक परामर्शदाता कंपनी है जो पूरे भारत में हाई-प्रोफ़ाइल चुनाव अभियानों के प्रबंधन के लिए जानी जाती है, जिसने वर्षों से कई प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ काम किया है। इसके संस्थापकों में से एक, चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर, भाजपा और कांग्रेस सहित कई अभियानों से जुड़े रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद औपचारिक रूप से संगठन से बाहर निकल गए, और अपनी राजनीतिक यात्रा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए राजनीतिक परामर्श से दूर हो गए। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : पश्चिम बंगाल, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ‘तृणमूल पूरी तरह नष्ट हो गई’: बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी नेताओं ने आई-पीएसी पर हमला बोला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें