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बिग बॉस फेस बसीर अली ने कैमरामैन को पीटा:दावा- पार्टी में शराब पीकर एक्ट्रेसेस से कर रहा था बदतमीजी, प्रिंस नरूला, शिव ठाकरे भी थे मौजूद

बिग बॉस फेस बसीर अली ने कैमरामैन को पीटा:दावा- पार्टी में शराब पीकर एक्ट्रेसेस से कर रहा था बदतमीजी, प्रिंस नरूला, शिव ठाकरे भी थे मौजूद

बिग बॉस 17 फेम बसीर अली का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक कैमरामैन को बुरी तरह पीटते हुए नजर आ रहे हैं। अफरा-तफरी के बीच बसीर अली काफी एग्रेसिव दिखे। इस दौरान वहां प्रिंस नरुला और शिव ठाकरे भी मौजूद रहे। सामने आए वीडियो में देखा जा रहा है कि बसीर अली ने कैमरामैन को थप्पड़ मारा और उसे घसीटा, जिसके बाद उस शख्स ने बसीर की तरफ बोतल फेंककर मारी। वहां मौजूद लोग भी दोनों को अलग करवाते नजर आए। कुछ देर बार पुलिस ने पहुंचकर मामला संभाला। दावा किया जा रहा है कि मारपीट का ये वायरल वीडियो प्रिंस नरुला के रेस्टोरेंट की ओपनिंग का है। बसीर के अलावा उस पार्टी में प्रिंस नरुला, शिव ठाकरे, स्प्लिट्सविला कंटेस्टेंट सौंदर्या शेट्टी और कियारा भी थे। जैसे ही सौंदर्या और कियारा पार्टी में पहुंचीं एक कैमरामैन ने उन्हें देखते ही उन पर आपत्तिजनक कमेंट्स किए। जब सौंदर्या ने ये बात बसीर को बताई, तो वो उनकी सिक्योरिटी के लिए हर बार उनके साथ बाहर जा रहे थे। एक दो बार फिर उस कैमरामैन ने बदतमीजी की। बसीर ने इस पर आपत्ति जताई थी। पार्टी खत्म होने के बाद जब बसीर कार की तरफ जाने लगे, तो वो कैमरामैन उन्हें देखकर गालियां देने लगा। ये देख बसीर ने उसे पीटना शुरू कर दिया। वीडियो में साथ देखा जा सकता है कि प्रिंस नरुला और शिव ठाकरे दूर खड़े झगड़ा देख रहे थे।

Bael Fruit Benefits: ना दवा, ना टेंशन! बेल का ये देसी नुस्खा रखेगा आपको हेल्दी, मिलेंगे जबरदस्त फायदे

बेल का फल

Last Updated:May 04, 2026, 15:31 IST गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा और स्वस्थ रखने के लिए बेल का फल एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय माना जाता है. आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है, जो पाचन सुधारने, इम्यूनिटी बढ़ाने और लू से बचाने में मदद करता है. नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं. गोंडा: गर्मी का मौसम आते ही शरीर को ठंडक देने वाले फलों की जरूरत बढ़ जाती है. ऐसे में बेल का फल एक बेहतरीन प्राकृतिक औषधि के रूप में सामने आता है. यह न सिर्फ शरीर को ठंडा रखता है, बल्कि कई बीमारियों से बचाने और उन्हें ठीक करने में भी मदद करता है. आयुर्वेद में बेल को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, जहां इसके फल, पत्ते और जड़ तक का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है. पेट की समस्याओं में बेहद फायदेमंद: बेल का फल पेट के लिए लाभकारी माना जाता है और आयुर्वेद में इसे खास महत्व दिया गया है. कब्ज, गैस, अपच और दस्त जैसी समस्याओं में इसका सेवन राहत देता है. बेल का शरबत पीने से पेट को ठंडक मिलती है और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है. इसमें मौजूद फाइबर आंतों को मजबूत बनाता है और भोजन पचाने में मदद करता है. खासकर डायरिया या लूज मोशन में बेल का गूदा असरदार होता है, जिससे जल्दी आराम मिलता है और शरीर की कमजोरी भी कम होती है. कैसे करें बेल का सेवन: बेल का सबसे आसान तरीका है इसका शरबत बनाकर पीना. इसके अलावा इसके गूदे को सीधे भी खाया जा सकता है. कुछ लोग बेल का मुरब्बा या पाउडर बनाकर भी उपयोग करते हैं. हालांकि, इसका अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा लेने से कब्ज की समस्या हो सकती है. किसी भी बीमारी में इसे औषधि के रूप में लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. Add News18 as Preferred Source on Google लू और गर्मी से बचाव: गर्मी के मौसम में लू लगना एक आम समस्या है, जिससे शरीर में कमजोरी, चक्कर और थकान महसूस होती है. ऐसे में बेल का शरबत एक प्राकृतिक उपाय के रूप में फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है और तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है. बेल में मौजूद पोषक तत्व शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और डिहाइड्रेशन से बचाने में सहायक होते हैं. नियमित सेवन से गर्मी का असर कम हो सकता है और शरीर तरोताजा बना रहता है, जिससे लू लगने का खतरा भी घटता है. इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक: बेल का फल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. नियमित सेवन से शरीर बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार रहता है, खासकर मौसम बदलने के समय जब सर्दी-खांसी और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. यह शरीर को ऊर्जा देता है, कमजोरी दूर करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर स्वस्थ और फिट बनाए रखने में मदद करता है. डायबिटीज में भी फायदेमंद: बेल के पत्ते और फल डायबिटीज के मरीजों के लिए उपयोगी माने जाते हैं. इनमें मौजूद प्राकृतिक गुण ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं. नियमित और सीमित मात्रा में इसका सेवन करने से इंसुलिन की क्रिया बेहतर हो सकती है. खासकर बेल के पत्तों का रस पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है. हालांकि, हर व्यक्ति की सेहत अलग होती है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. दिल को रखता है स्वस्थ: बेल का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा घट सकता है. नियमित सेवन से रक्त संचार बेहतर होता है और धमनियों को स्वस्थ रखने में सहायता मिलती है. इसके साथ ही यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी मदद करता है, जिससे दिल को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में सहयोग मिलता है. त्वचा के लिए भी लाभकारी: बेल का फल त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं, जिससे त्वचा साफ, मुलायम और चमकदार बनती है. नियमित सेवन से पिंपल्स, दाग-धब्बे और अन्य त्वचा समस्याओं में कमी आ सकती है. यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक होता है, जिससे त्वचा पर प्राकृतिक निखार आता है. गर्मियों में इसका सेवन त्वचा को ठंडक देता है और उसे स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है. मुंह के छालों में राहत: अगर मुंह में छाले हो जाते हैं और जलन या दर्द महसूस होता है, तो बेल का सेवन राहत दे सकता है. बेल का गूदा स्वभाव से ठंडा होता है, जो मुंह की जलन को शांत करता है और छालों को जल्दी ठीक होने में मदद करता है. इसके नियमित सेवन से मुंह की अंदरूनी गर्मी कम हो सकती है, जो छालों का एक बड़ा कारण मानी जाती है. गर्मियों में इसका सेवन न सिर्फ छालों में आराम देता है, बल्कि मुंह को ताजा और स्वस्थ बनाए रखने में भी सहायक होता है.

पिता-बेटे के शव ले जाने से फ्लाइट ऑपरेटर का इनकार:जबलपुर एयरपोर्ट पर कहा- बदबू आ रही; अधिकारियों ने मनाया-स्प्रे छिड़का, तब भरी उड़ान

पिता-बेटे के शव ले जाने से फ्लाइट ऑपरेटर का इनकार:जबलपुर एयरपोर्ट पर कहा- बदबू आ रही; अधिकारियों ने मनाया-स्प्रे छिड़का, तब भरी उड़ान

जबलपुर के बरगी क्रूज हादसे में सिस्टम की लापरवाही से 13 जानें चली गईं। प्राथमिक जांच में खराब मौसम के अलर्ट की अनदेखी को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। हद तो ये है कि मृतकों के शव की भी दुर्दशा की जा रही है। हादसे में जान गंवाने वाले आर्डनेंस फैक्ट्री के कर्मचारी कामराज आर और उनके 5 साल के बेटे श्रीतमिल का शव ले जाने से फ्लाइट ऑपरेटर ने मना कर दिया। तर्क दिया कि बॉडी डी-कंपोज हो रही हैं। बदबू आ रही है। ऐसे में वह इन्हें नहीं ले जा सकता है। इसका पता लगते ही प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हुए और ऑपरेटर को समझाकर शव फ्लाइट में रखवाए। इसकी वजह से फ्लाइट ने अपने निर्धारित समय से एक घंटे देरी से उड़ान भरी। पहले जानिए, हादसा कैसे हुआ… मौसम खराब होने के कारण रविवार को नहीं भरी उड़ान जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग का क्रूज डूबा था। इसमें सवार 13 टूरिस्ट की मौत हो गई। उसी दिन 30 अप्रैल को 4 शव, एक मई को 5, दो मई को 2 और तीन मई को दो शव तैरते मिले। मृतकों में 4 बच्चे और 8 महिलाएं शामिल हैं। 28 लोगों को बचा लिया गया था। श्रीतमिल का शव दो मई को मिला था जबकि कामराज की लाश 3 मई की सुबह मिली। रविवार शाम को ही कामराज और श्रीतमिल का शव लेकर खमरिया अस्पताल से एम्बुलेंस डुमना एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई। रांझी पहुंचने पर जानकारी मिली कि त्रिची का मौसम खराब है, विमान लैंड नहीं कर पाएगा। इस पर एम्बुलेंस वापस अस्पताल आ गई और दोनों शव मरचुरी में रखवा दिए गए। ऑपरेटर ने कहा- बदबू आ रही है, बॉडी नहीं ले जा सकता आर्डनेंस फैक्ट्री में कामराज के सहकर्मी सुरेश कन्ना ने दैनिक भास्कर को बताया- सोमवार सुबह 6 बजे तय समय पर एम्बुलेंस से शव लेकर डुमना एयरपोर्ट पहुंच गए थे। साढ़े 7 बजे जेट सर्व एविएशियन कंपनी का चार्टेड प्लेन आया। इसे मध्य प्रदेश सरकार ने हायर किया था। जैसे ही बॉडी उसमें रखी गईं, फ्लाइट ऑपरेटर ने कहा कि शवों से बदबू आ रही है, ऐसे में उनको नहीं ले जाया जा सकता। मामले की जानकारी कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को लगी तो उन्होंने रांझी एसडीएम मोनिका वाघमारे और तहसीलदार आदर्श जैन को एयरपोर्ट भेजा। उन्होंने स्प्रे की व्यवस्था की। दोनों शवों की दोबारा कॉफिन में टेपिंग की गई। इसके बाद करीब 9 बजे फ्लाइट त्रिची के लिए रवाना हो सकी। परिवार के 3 सदस्यों की मौत, केवल बड़ा बेटा ही बचा कामराज मूलत: तमिलनाडु में त्रिची के रहने वाले थे। 2010 में आर्डनेंस फैक्ट्री में उनकी जॉब लगी। परिवार में पत्नी के अलावा दो बच्चे थे। क्रूज हादसे में कामराज का सिर्फ बड़ा बेटी पूवीथरन ही बचा है। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… क्रूज हादसे के को-पायलट का खुलासा-एक इंजन स्लो था जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को क्रूज डूबने से 13 लोगों की जान चली गई। क्रूज के को-पायलट महेश पटेल थे। उनका कहना है कि क्रूज का एक इंजन स्लो था। इसने काम करना बंद कर दिया। फिर क्रूज एक तरफ झुकते हुए पानी में डूब गया। पढ़ें पूरी खबर…

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सुनामी ने ममता बनर्जी को डुबोया: 15 साल में टीएमसी की बड़ी हार के 5 कारण | भारत समाचार

Palakkad reported a voter turnout of 79.22% this assembly elections.

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 15:06 IST भाजपा वर्तमान में 194 सीटों पर आगे चल रही है, जो बहुमत के 148 के आंकड़े से काफी आगे है, जबकि टीएमसी 92 सीटों पर सिमट गई है। पिछले चुनाव के विपरीत, भाजपा ने स्थानीय शासन और भाषाई पहचान पर ध्यान केंद्रित करने के लिए ममता बनर्जी पर सीधे, आक्रामक हमलों की जगह अपनी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया। (पीटीआई फ़ाइल) पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: भाजपा पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के खिलाफ बढ़त के साथ उतरी थी, लेकिन उसने इतिहास रचा और ममता बनर्जी सरकार को उखाड़ फेंका, जिसने पिछले 15 वर्षों से राज्य पर शासन किया था। चुनाव आयोग के नवीनतम रुझानों के अनुसार, भाजपा वर्तमान में 194 सीटों पर आगे चल रही है, जो बहुमत के 148 के आंकड़े से काफी आगे है, जबकि टीएमसी 92 सीटों पर सिमट गई है – जो कि 2021 में 215 सीटों की भारी गिरावट से काफी कम है। 2026 के चुनावों में टीएमसी की हार के पांच प्रमुख कारण यहां दिए गए हैं: 1. वोट शेयर का नुकसान इस चुनाव का सबसे बड़ा आँकड़ा टीएमसी का गिरता वोट शेयर है। 2021 में लगभग 48% के शिखर पर पहुंचने के बाद, पार्टी इस चुनाव में 41% पर फिसल गई है। ऐसे राज्य में जहां चुनावों का फैसला अक्सर बेहद कम अंतर से होता है, वहां यह 7% का उतार-चढ़ाव घातक साबित हुआ। 2021 में टीएमसी ने 16 सीटें जीतीं, जहां जीत का अंतर 2% से कम था। इस बार, भाजपा ने स्क्रिप्ट पलट दी है और ऐसी 28 “फोटो-फिनिश” सीटों में से 25 पर आगे चल रही है। 2. दक्षिणी गढ़ का उल्लंघन एक दशक से अधिक समय तक, दक्षिण बंगाल टीएमसी की अभेद्य ढाल था। जबकि उत्तरी बंगाल पारंपरिक रूप से भाजपा की ओर झुका हुआ था, “प्रेसीडेंसी” और “मेदिनीपुर” क्षेत्र हमेशा ममता के साथ खड़े रहे। 2026 में, भाजपा ने हावड़ा, हुगली और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में गहरी पैठ बनाते हुए, दक्षिणी हृदय क्षेत्र में सफलतापूर्वक सेंध लगाई। इन गढ़ों की हार ने एक प्रतिस्पर्धी दौड़ को पराजय में बदल दिया। 3. 15 साल की सत्ता विरोधी लहर और बेरोजगारी लगातार तीन कार्यकाल के बाद, टीएमसी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। लगातार आरोपों के कारण पार्टी की “गरीब-समर्थक” छवि ख़राब हो गई। भर्ती और स्थानीय शासन में बार-बार होने वाले घोटालों ने मध्यम वर्ग के विश्वास को खत्म कर दिया। राजनीतिक हिंसा और “सिंडिकेट संस्कृति” से जुड़े मुद्दे केंद्रीय अभियान विषय बन गए जिन्हें बेअसर करने के लिए टीएमसी को संघर्ष करना पड़ा। जैसा कि भाजपा ने आरोप लगाया है, पश्चिम बंगाल में उद्योगों की कमी अन्य राज्यों में बड़े पैमाने पर प्रवास के कारणों में से एक है। यह मुद्दा भाजपा के चुनाव अभियान के केंद्र में था, लेकिन इसने उद्योगों और नौकरियों को लाने का भी वादा किया था। अपनी रैलियों में केंद्रीय गृह मंत्री ने वादा किया कि बीजेपी हर साल युवाओं को 1 लाख नौकरियां देगी. अपने घोषणापत्र में, भाजपा ने पश्चिम बंगाल के लिए एक औद्योगिक और रोजगार रणनीति की रूपरेखा तैयार की, जिसमें 25,000 करोड़ रुपये के “सोनारबांग्ला” फंड पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसका उद्देश्य 10 लाख स्थानीय उद्यमियों को ब्याज मुक्त बीज पूंजी प्रदान करना है। पार्टी ने उत्तर बंगाल में चाय एसईजेड, हल्दिया में ग्रीन हाइड्रोजन हब और आसनसोल-दुर्गापुर बेल्ट में ईवी विनिर्माण क्लस्टर स्थापित करके उद्योग को विकेंद्रीकृत करने का वादा किया। 4. तुष्टीकरण टैग चुनाव अत्यधिक ध्रुवीकृत माहौल में लड़ा गया। भाजपा ने सफलतापूर्वक टीएमसी के शासन को “तुष्टिकरण की राजनीति” के रूप में पेश किया, जिसमें मुख्यमंत्री पर दूसरों की कीमत पर एक विशिष्ट वोट बैंक को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया गया। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) – जिसमें लगभग 89 लाख नाम (मतदाताओं का लगभग 11.6%) हटा दिए गए – एक केंद्र बिंदु बन गया। जबकि टीएमसी ने इसे अपने मतदाताओं, विशेष रूप से मुसलमानों को मताधिकार से वंचित करने के लिए एक “साजिश” करार दिया, भाजपा ने “स्वच्छ और पारदर्शी” नागरिकता प्रक्रिया का वादा करते हुए, अपने आधार को मजबूत करने के लिए “एसआईआर विरोधी” कथा का इस्तेमाल किया। 5. बीजेपी की रणनीति में बदलाव पिछले चुनाव के विपरीत, भाजपा ने स्थानीय शासन और भाषाई पहचान पर ध्यान केंद्रित करने के लिए ममता बनर्जी पर सीधे, आक्रामक हमलों की जगह अपनी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया। केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों-जिनमें हिमंत बिस्वा सरमा और योगी आदित्यनाथ शामिल हैं-को न केवल रैलियों के लिए बल्कि बूथ-स्तरीय सूक्ष्म-प्रबंधन के लिए बड़े पैमाने पर तैनात किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इन नेताओं ने अपने भाषणों को व्यक्तिगत हमलों के बजाय केंद्रीय कल्याण लाभों और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित किया, और कथा को “वितरण बनाम व्यवधान” पर केंद्रित रखा। भाजपा की गति का मुकाबला करने के लिए, टीएमसी ने भी अपने INDI गठबंधन सहयोगियों पर भरोसा किया। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव बड़े पैमाने पर रोड शो करते हुए प्रचार अभियान में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। उनकी उपस्थिति गैर-बंगाली और अल्पसंख्यक वोटों को टीएमसी के पक्ष में एकजुट करने का एक लक्षित प्रयास था। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सुनामी ने ममता बनर्जी को डुबोया: 15 साल में टीएमसी की बड़ी हार के 5 कारण अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)बीजेपी की जीत पश्चिम 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केरल चुनाव परिणाम: मुस्लिम बहुल मलप्पुरम में कांग्रेस के ईसाई उम्मीदवार ने रचा इतिहास | भारत समाचार

Palakkad reported a voter turnout of 79.22% this assembly elections.

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 14:35 IST थावनूर चुनाव परिणाम 2026: वीएस जॉय की जीत के पीछे एक प्रमुख कारक इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का मजबूत समर्थन था, जो ईसाई उम्मीदवार के पीछे था केरल चुनाव नतीजे: कुल मिलाकर केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाले एलडीएफ को सत्ता से बेदखल करने की राह पर है। कांग्रेस नेता वीएस जॉय ने केरल के थावनूर निर्वाचन क्षेत्र में इतिहास रच दिया है, वह 1995 में एके एंटनी के बाद मुस्लिम बहुल मलप्पुरम जिले से विधानसभा चुनाव जीतने वाले पहले ईसाई उम्मीदवार बन गए हैं। जॉय की उपलब्धि इस तथ्य से तुलना करने पर सामने आती है कि एंटनी ने उपचुनाव जीता था और वह कांग्रेस का सबसे महत्वपूर्ण ईसाई चेहरा होने के अलावा केरल के मौजूदा मुख्यमंत्री भी थे। केरल के जटिल और अक्सर ध्रुवीकृत सामाजिक ताने-बाने का मतलब है कि किसी निर्वाचन क्षेत्र में प्रमुख समुदाय चुनावी परिणामों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस के मलप्पुरम जिला अध्यक्ष जॉय को प्राकृतिक सामुदायिक आधार प्राप्त नहीं है, क्योंकि मतदाताओं में ईसाई बमुश्किल 1.4% हैं। आधी से अधिक आबादी 54% मुसलमानों की है, जबकि शेष हिंदू हैं। जॉय की जीत के पीछे एक प्रमुख कारक कांग्रेस की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का मजबूत समर्थन था, जो ईसाई उम्मीदवार के पीछे था। मलप्पुरम में आईयूएमएल के साथ जॉय के कामकाजी संबंधों ने उन्हें पार्टी के लिए एक स्वीकार्य विकल्प बना दिया, जिसका केरल में मुसलमानों के बीच एक मजबूत समर्थन आधार है। आईयूएमएल विशेष रूप से मौजूदा विधायक और निर्दलीय उम्मीदवार केटी जलील को हराने के लिए उत्सुक था, जो पार्टी और उसके नेतृत्व दोनों के मुखर आलोचक थे। प्रतियोगिता का प्रतीकात्मक महत्व भी था। 2006 में, जलील ने अब समाप्त हो चुके कुट्टीपुरम निर्वाचन क्षेत्र से आईयूएमएल के दिग्गज पीके कुन्हालीकुट्टी को हराया था, जिससे थावनूर की लड़ाई पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गई थी। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले नीलांबुर में उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने जॉय को नजरअंदाज कर दिया था। इसके बावजूद, उन्होंने पार्टी के उम्मीदवार आर्यदान शौक्कथ के लिए सक्रिय रूप से प्रचार किया और उनकी जीत में योगदान दिया। मतगणना समाप्त होने से पहले ही, जलील ने हार स्वीकार करते हुए फेसबुक पर लिखा, “मैं लोगों के फैसले को स्वीकार करता हूं। वीएस जॉय को बधाई। मैं थावनूर के लोगों के प्रति केवल स्नेह रखता हूं।” कुल मिलाकर केरल में, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाले एलडीएफ को सत्ता से बेदखल करने की राह पर है। दोपहर 2:15 बजे, 140 सीटों वाली केरल विधानसभा में यूडीएफ 100 सीटों पर आगे चल रही थी, जबकि एलडीएफ केवल 36 सीटों पर आगे थी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : केरल, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया केरल चुनाव नतीजे: मुस्लिम बहुल मलप्पुरम में कांग्रेस के ईसाई उम्मीदवार ने रचा इतिहास अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) वीएस जॉय थावनुर की जीत (टी) केरल विधानसभा चुनाव (टी) मलप्पुरम जिले की राजनीति (टी) ईसाई उम्मीदवार केरल (टी) इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (टी) केटी जलील की हार (टी) कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ (टी) पिनाराई विजयन एलडीएफ

Health Alert: क्या आपको भी नहीं लगती भूख? इसे न समझें मामूली थकान, हो सकती है किसी बड़ी बीमारी की दस्तक

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Last Updated:May 04, 2026, 14:21 IST Health News: अगर कई दिन हो गए हैं और आपको खाना खाने का मन नहीं हो रहा है. थोड़ा बहुत खाते ही ज्यादा पेट भर जाता है तो फिर आपको सावधान होने की जरूरत है. ये कोई अच्छी बात नहीं है. भूख न लगना एक बड़ी समस्या हो सकती है. आइए डॉक्टर की जुबानी जानते हैं हेल्थ को सही रखने के टिप्स. Health Alert News: अक्सर लोग भूख न लगने की समस्या को हल्के में ले लेते हैं. व्यस्त दिनचर्या, काम का दबाव या सामान्य थकान मानकर इसे नजर अंदाज कर दिया जाता है. मगर, सच यह है कि लगातार भूख न लगना शरीर के भीतर चल रही किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. यह समस्या केवल खान-पान की आदतों से जुड़ी नहीं होती, बल्कि पाचन तंत्र, मानसिक स्वास्थ्य और लाइफ स्टाइल से भी गहराई से जुड़ी होती है. ये हैं लक्षण डॉक्टर रिद्धि पांडे ने Local 18 को बताया कि अगर आपको लंबे समय तक भूख नहीं लगती या खाने का मन नहीं करता, तो यह आपके डाइजेशन सिस्टम के कमजोर होने का संकेत हो सकता है. कई बार पेट ठीक से साफ नहीं होता, गैस बनती है या मल करने में दिक्कत आती है. ये सभी लक्षण भूख कम होने से जुड़े होते हैं. जब पाचन तंत्र सही से काम नहीं करता, तो शरीर को भोजन की जरूरत का संकेत भी कम मिलने लगता है. आसान उपाय अपनाएं पाए राहत उन्होंने आगे बताया कि मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद भी भूख कम करने के प्रमुख कारण हो सकते हैं. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग मानसिक रूप से इतने व्यस्त और दबाव में रहते हैं कि उनका ध्यान खाने की ओर कम हो जाता है. धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है और शरीर की प्राकृतिक भूख की प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है. अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो कुछ आसान उपाय अपनाकर राहत पा सकते हैं. सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुना पानी पीना बेहद फायदेमंद माना जाता है. सुबह वॉक या एक्सरसाइज करना जरूरी उन्होंने बताया कि इसमें आधा या एक नींबू और थोड़ा शहद मिलाकर पीने से पाचन तंत्र बेहतर होता है. यह शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है और धीरे-धीरे भूख भी बढ़ाने लगता है. इसके अलावा, सुबह हल्की वॉक या एक्सरसाइज करना भी जरूरी है. शारीरिक गतिविधि से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और शरीर को ऊर्जा की जरूरत महसूस होती है, जिससे भूख बढ़ती है. आप सुबह शहद के साथ हल्का जूस भी ले सकते हैं. इससे शरीर को जरूरी पोषण मिलेगा और खाने की इच्छा बढ़ेगी. हर दिन भूख न लगना एक छोटी समस्या नहीं वहीं, उन्होंने बताया कि ध्यान रखने वाली बात यह है कि यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है या इसके साथ वजन कम होना, कमजोरी या अन्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें. समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि किसी गंभीर बीमारी की संभावना को रोका जा सके. बता दें कि भूख न लगना एक छोटी समस्या नहीं है. यह आपके शरीर का संकेत है कि उसे आपकी देखभाल की जरूरत है. About the Author काव्‍या मिश्रा Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chandauli,Chandauli,Uttar Pradesh

बलेन शाह ने काठमांडू को तोड़ दिया। क्या विजय तमिलनाडु में दरार डाल सकते हैं? इनसाइड जेन जेड रिवोल्ट अगेंस्ट द ओल्ड गार्ड | भारत समाचार

Kanjirappally election result LIVE: Rony K Baby of INC leading

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 13:40 IST विजय थलपति की बड़ी जीत: 24 महीने में पार्टी सत्ता में। 234 सीटें. शून्य सहयोगी. तमिलनाडु ने कभी इस तरह की शुरुआत नहीं देखी है। तमिलनाडु चुनाव परिणाम: एक रैपर-इंजीनियर ने काठमांडू में धमाका कर दिया। एक सुपरस्टार तमिलनाडु में धमाल मचा रहा है. जेन जेड अब सत्ता नहीं मांगता – वह इसे लेता है। बालेन शाह ने एक अज्ञात रैपर-इंजीनियर के रूप में नेपाल की राजधानी पर धावा बोल दिया। अब विजय – थलपति, लोगों का नायक – दक्षिण भारत के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक किले को हिला रहा है। तमिलनाडु की जेन जेड ने सिर्फ वोट नहीं दिया। उन्होंने विद्रोह कर दिया. वंशवाद के ख़िलाफ़, हक़दारी के ख़िलाफ़, द्रविड़ एकाधिकार के ख़िलाफ़ जिसने मान लिया कि यह हमेशा के लिए उनका स्वामित्व है। 4 मई को, जैसे ही 234 निर्वाचन क्षेत्रों में गिनती शुरू हुई, शुरुआती रुझानों में टीवीके 70 से अधिक सीटों पर आगे चल रही थी – द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों से आगे। बूढ़ा रक्षक काँप रहा था। द बैलेन ब्लूप्रिंट: जब सितारे प्रतीक बन जाते हैं 2022 में, बालेन शाह ने लगभग अज्ञात स्वतंत्र के रूप में काठमांडू की मेयर का चुनाव जीता, और उन पार्टियों को हराया जिन्होंने दशकों से आपस में सत्ता का व्यापार किया था। कोई राजनीतिक मशीन नहीं. कोई वंशवाद नहीं. कोई विरासत में मिला कैडर नहीं. बस रोष, प्रशंसक, और एक पीढ़ी जो डिजिटल रूप से निपुण हो गई थी और उसे हल्के में लिया जा रहा था। तमिलनाडु 2026 वही कहानी है, जो 57 मिलियन मतदाताओं वाले राज्य में बड़े पैमाने पर और जोर-शोर से लिखी गई है। विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम – टीवीके – की स्थापना सिर्फ दो साल पहले, फरवरी 2024 में हुई थी। इसने दो द्रविड़ मशीनों के खिलाफ, बिना किसी गठबंधन के, सभी 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा, जिन्होंने अपने अधिकांश मतदाताओं के जन्म से पहले से ही तमिलनाडु पर सामूहिक रूप से शासन किया है। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे लापरवाह बताया. विजय ने इसे जरूरी बताया. यह दुस्साहस ही संदेश था। एमजीआर ने इसे पहले किया – लेकिन विजय ने इसे और तेजी से किया पिछली बार जब तमिलनाडु ने संरचनात्मक रूप से ऐसा कुछ देखा था, तो वह एमजी रामचंद्रन थे। एमजीआर सिनेमा से आए थे, उन्होंने राजनीति से परे एक व्यक्तित्व का निर्माण किया, 1972 में द्रमुक की छाया के अंदर से अन्नाद्रमुक की स्थापना की, और 1977 में सत्ता में आए – उसी पार्टी को हराकर, जिससे वह आए थे। वह राजनीतिक वंशावली के संदर्भ में कुछ भी नहीं से आए थे। लेकिन यहां अंतर है: अलग होने से पहले एमजीआर के पास वर्षों तक डीएमके का संगठनात्मक ढांचा था। नई मशीन बनाने से पहले वह मशीन को अंदर से जानता था। विजय के पास ऐसा कुछ भी नहीं था. टीवीके को चौबीस महीनों में बिल्कुल नए सिरे से बनाया गया था। हर एक निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवार उतारे गए। अखाड़े में अकेले प्रवेश किया गया। टीवीके ने जो प्रयास किया, उसके लिए तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में कोई आधुनिक समानता नहीं है – और उस महत्वाकांक्षा का पैमाना स्वयं इस बात का सूचक है कि इस पीढ़ी ने कैलकुलस को कितना बदल दिया है। 21% मतदाता 29 वर्ष से कम आयु के हैं – और वे तैयार होकर आए हैं नतीजे आने से पहले ही आंकड़े कहानी बयां कर देते हैं। इस चक्र में 18 से 29 वर्ष के बीच के 1.22 करोड़ से अधिक मतदाता तमिलनाडु के मतदाताओं का 21.2% हैं। उनमें से लगभग 15 लाख लोग पहली बार मतदान कर रहे थे। वे अनिच्छा से नहीं आये. तमिलनाडु में 23 अप्रैल को 85.1% मतदान दर्ज किया गया – जो राज्य के विधानसभा चुनाव इतिहास में सबसे अधिक है, जो 2021 में दर्ज 72.7% से पूरे बारह प्रतिशत अंक अधिक है। पिछले चुनाव की तुलना में वास्तविक वोटों में 5.5% की वृद्धि हुई। यह उछाल युवाओं की संख्या में बढ़ोतरी के बिना नहीं होता, जो इस राज्य ने पहले कभी नहीं देखा था। चेन्नई के एमजीआर नगर में एक मतदान केंद्र के बाहर, सुगिरथन नाम के एक 19 वर्षीय मतदाता ने स्वीकार किया कि जब पहली बार मशीन ने उसका वोट पंजीकृत नहीं किया तो वह घबरा गया था – लेकिन वापस आकर उसने इसे पूरा किया। मेडिकल इंटर्न वी भुवेन ने मतदान को वास्तविक परिवर्तन की संभावना से जुड़ा एक संतोषजनक नागरिक कार्य बताया। चेन्नई के दूसरे हिस्से में, युवाओं का एक समूह विजय की तरह कपड़े पहनकर वोट देने आया। यह निष्क्रिय भागीदारी नहीं थी. ये एक बयान था. वायरल अभियान: 30 सेकंड की रील के रूप में राजनीति विजय को वह बात समझ में आई जो मूल रूप से द्रविड़ पुराने नेताओं को नहीं थी – कि यह पीढ़ी रैलियों में शामिल नहीं होती है, वे उनका दस्तावेजीकरण करते हैं। उनके अभियान कार्यक्रम फिल्म प्रीमियर की तरह दिखते थे: पंच संवाद, नाटकीय हावभाव, सटीकता से इंजीनियर किए गए क्षण जिन्हें फोन पर फिल्माया गया और रील के रूप में साझा किया गया। भीड़ के बीच उनकी साइकिल यात्रा एक वायरल क्षण बन गई जिसे कोई भी टेलीविजन विज्ञापन बजट निर्मित या खरीद नहीं सकता था। तमिलनाडु में पहली बार राजनीति को सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसने प्रतिष्ठान को उसी तरह प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर किया। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन – पुराने स्कूल के राजनेता, पोडियम और पार्टी कैडरों के साथ सहज – ने अपने अभियान में सावधानीपूर्वक तैयार किए गए प्रासंगिकता के क्षणों को शामिल करना शुरू कर दिया। उसने ऑटो में सवारी की. वह गन्ना पेरने के लिए सड़क किनारे ठेलों पर रुका। उन्होंने पदयात्रा के बीच में कार्यकर्ताओं से शॉल स्वीकार किये। ये स्वतःस्फूर्त इशारे नहीं थे. वे सोशल मीडिया रणनीति थे. जब एक मौजूदा मुख्यमंत्री एक सामग्री निर्माता की तरह प्रचार करना शुरू करता है, तो इसका मतलब है कि चुनौती देने वाले ने पहले ही स्थायी रूप से अपना क्षेत्र बदल लिया है। यहां तक ​​कि एआईएडीएमके के एडप्पादी के पलानीस्वामी ने भी छात्र मतदाताओं को याद दिलाते हुए कहा कि यह वही थे जिन्होंने सीओवीआईडी ​​​​के दौरान ऑल-पास प्रणाली की शुरुआत की थी, खुद को ऐसे व्यक्ति के

‘टाटा, बाय-बाय, दीदी’: अमित शाह ने की ये भविष्यवाणी! बंगाल ने उसे सही साबित कर दिया | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 13:35 IST बंगाल चुनाव परिणाम: अमित शाह ने वादा किया था कि भाजपा सरकार 5 मई को शपथ लेगी। अभी जो आंकड़े हैं, वे इसे दावा कम और पूर्वानुमान अधिक लग रहे हैं। शाह की रैली क्लिप टाइमलाइन पर बाढ़ ला रही है – उपयोगकर्ता उनके भाषण को लाइव सीटों की संख्या के साथ जोड़ रहे हैं क्योंकि बंगाल के मतगणना केंद्रों में भाजपा की बढ़त दिखाई दे रही है। उन्होंने पश्चिम मेदिनीपुर के चांदीपुर में एक रैली मंच से यह बात एक ऐसे व्यक्ति के अंदाज में कही, जिसे इस बात का पूरा यकीन था कि मतपेटियां आखिरकार क्या पुष्टि करेंगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भीड़ की ओर देखा, कोलकाता की ओर अपनी उंगली उठाई और घोषणा की: “टाटा, अलविदा। आपका समय समाप्त हो गया है।” उस समय, कई लोगों ने इसे चुनावी बयानबाजी कहकर खारिज कर दिया। 4 मई, 2026 को – गिनती के दिन – उस क्लिप को एक्स, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर उग्र गति से साझा किया जा रहा है, क्योंकि शाह की भविष्यवाणी वास्तविक समय में सच होती दिख रही है। वीडियो – जो मूल रूप से शाह की चरण 1 चुनाव प्रचार की अंतिम रैली में रिकॉर्ड किया गया था – आज सुबह ऑनलाइन बड़े पैमाने पर लोकप्रियता हासिल कर रहा है, जिसमें बंगाल के 77 मतगणना केंद्रों से आने वाले उपयोगकर्ता लाइव सीटों की संख्या के साथ भाषण को कवर कर रहे हैं। विरोधाभास अद्भुत है. शाह ने वादा किया था कि भाजपा सरकार 5 मई को शपथ लेगी। फिलहाल जो आंकड़े हैं, उससे यह दावा कम और पूर्वानुमान ज्यादा लग रहा है। अमित शाह की सुबह की सटीक भविष्यवाणीHM अमित शाह चुनाव प्रचार के दौरान4 मई को मतगणना चालू होगी, 8 बजे बैलेट बॉक्स ओपनगा, 9 बजे पहला राउंड, 10 बजे दूसरा राउंड और 1 बजे दोस्त…टाटा बाय-बाय @अमितशाह pic.twitter.com/MA9RaRRKQR – अनुज तोमर, पत्रकार (@THAKURANUJTOMAR) 4 मई 2026 नवीनतम बंगाल रुझान क्या कहते हैं? परिणाम नाटकीय हैं. दोपहर 12:30 बजे तक, भाजपा 176 सीटों पर आगे थी, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी 94 सीटों पर आगे थी, सहयोगी बीजीपीएम एक सीट पर आगे थी। 294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 है। भाजपा ने सुबह बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया और अपनी बढ़त बनाए रखी है, जिससे राज्य भर में भाजपा कार्यालयों में जश्न शुरू हो गया है। क्या ममता बनर्जी व्यक्तिगत रूप से संकट में हैं? हाँ – और कैसे। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी वर्तमान में भबनीपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के दिग्गज सुवेंदु अधिकारी से पीछे चल रही हैं, यह सीट उनके राजनीतिक आधार के रूप में है। यदि भबनीपुर गिरता है, तो यह शाम की सबसे प्रतीकात्मक हार होगी – एक मुख्यमंत्री अपनी ही सीट हार गई जबकि उसकी सरकार उसके चारों ओर गिर गई। यह परिणाम किस कारण आया? पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने प्रदर्शन के लिए सत्ता विरोधी लहर को जिम्मेदार ठहराया और इसे हिंदू वोटों के एकीकरण के रूप में वर्णित किया, साथ ही मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में अल्पसंख्यक मतदान पैटर्न में विभाजन की ओर भी इशारा किया। शाह ने दोनों पर जमकर दांव लगाया था. प्रधान मंत्री मोदी और शाह के नेतृत्व में भाजपा के अभियान ने बांग्लादेश से घुसपैठ को लेकर बार-बार बनर्जी पर निशाना साधा और टीएमसी पर बंगाल को लूटने का आरोप लगाया, और मतदाताओं के लिए “सोनार बांग्ला” – स्वर्णिम बंगाल – का वादा किया। शाह ने उस रात चांदीपुर में वास्तव में क्या वादा किया था? “टाटा, बाय-बाय” क्षण से परे, शाह ने उस रैली में एक और स्पष्ट घोषणा की थी: कि भाजपा ने देश को नक्सलवाद से मुक्त कर दिया है और अब इसे घुसपैठियों से मुक्त करेगी – बंगाल की खाड़ी से हिंद महासागर तक। उन्होंने चांदीपुर के लिए एक पान अनुसंधान केंद्र का भी वादा किया। आज बंगाल एक बहुत बड़े वादे पर केंद्रित है। और जैसे-जैसे सीटें भगवा हो रही हैं, अमित शाह का चांदीपुर क्षण वायरल हो रहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘टाटा, बाय-बाय, दीदी’: अमित शाह ने की ये भविष्यवाणी! बंगाल ने उसे सही साबित कर दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

विजय के ‘विजय’ में, केवल एक सर्वेक्षणकर्ता ने तमिलनाडु चुनाव परिणाम को सही बताया | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 13:31 IST तमिलनाडु चुनाव 2026: रुझानों के अनुसार, टीवीके ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 100 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है। विजय की टीवीके का दावा है कि वह अपने दम पर सरकार बनाएगी क्योंकि शुरुआती रुझानों में वह टीएन की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। तमिलनाडु चुनाव 2026: 29 अप्रैल को जारी एग्जिट पोल में बड़े पैमाने पर डीएमके गठबंधन को बढ़त दी गई, जबकि कुछ सर्वेक्षणकर्ताओं ने सरकार बनाने के लिए एआईएडीएमके ब्लॉक का समर्थन किया। लेकिन एक को छोड़कर लगभग हर कोई राज्य में थलपति विजय टीवीके के उभार के पैमाने से चूक गया। यह प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व वाली एक्सिस माई इंडिया थी जिसने भविष्यवाणी की थी कि विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) 98-120 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। उस समय, प्रक्षेपण का व्यापक रूप से मज़ाक उड़ाया गया था – कुछ ने इसका मज़ाक उड़ाया, दूसरों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया, जबकि कुछ ने सावधानी से संभावित “विजय कारक” को स्वीकार किया। लेकिन जैसा कि अब मतगणना के रुझानों से पता चलता है कि टीवीके 234 सदस्यीय विधानसभा में 100 सीटों का आंकड़ा पार कर रहा है, एक्सिस माई इंडिया के साहसिक आह्वान ने अपने आलोचकों को चुप कराते हुए, बुल्सआई पर प्रहार किया है। हालाँकि, प्रदीप गुप्ता के सभी अनुमान उम्मीद के मुताबिक नहीं चले। एक्सिस माई इंडिया ने अनुमान लगाया था कि द्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन 92-110 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रहेगा, जबकि अनुमान लगाया गया था कि अन्नाद्रमुक 35 से नीचे सिमट जाएगी। यह भी पढ़ें | जोखिम भरा दांव, बड़ा भुगतान: विजय ने वह कर दिखाया जो रजनीकांत, कमल हासन, विजयकांत नहीं कर सके इसके विपरीत, वास्तविक रुझान उपविजेता स्थान के लिए बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा की ओर इशारा करते हैं। जैसे-जैसे गिनती जारी है, भारत और एनडीए दोनों खेमे कड़ी प्रतिस्पर्धा में हैं, प्रत्येक 60-65 सीटों के निशान के आसपास मँडरा रहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया विजय के ‘विजय’ में, केवल एक सर्वेक्षणकर्ता ने तमिलनाडु चुनाव के नतीजों को सही बताया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु एग्जिट पोल(टी)डीएमके गठबंधन(टी)एआईएडीएमके ब्लॉक(टी)थलपति विजय टीवीके(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)एक्सिस माई इंडिया पोल(टी)2026 विधानसभा सीटें

खेला शेष तो अलविदा दीदी: सोशल मीडिया पर मीम्स, जिब्स की बाढ़ आ गई क्योंकि रुझानों में बीजेपी ने टीएमसी को पीछे छोड़ दिया | चुनाव समाचार

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आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 13:28 IST कोलकाता में भाजपा कार्यालय के बाहर, समर्थकों के जमा होने से जश्न मनाया गया, हालांकि अंतिम नतीजे का इंतजार है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (फाइल फोटो) जैसे ही मतगणना के शुरुआती रुझानों से पता चला कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) पर मजबूत बढ़त ले रही है, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मीम्स, नारे और तीखे राजनीतिक व्यंग्य गूंजने लगे, जिससे नतीजे पूरी तरह से ऑनलाइन तमाशे में बदल गए। चुनाव आयोग के नवीनतम रुझानों के अनुसार, राज्य भर में गिनती आगे बढ़ने पर भाजपा 188 सीटों पर आगे है, जबकि टीएमसी 92 सीटों पर पीछे है। कोलकाता में भाजपा कार्यालय के बाहर, समर्थकों के जमा होने से जश्न मनाया गया, हालांकि अंतिम नतीजे का इंतजार है। #घड़ी | पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 | कोलकाता: राज्य में भाजपा के बहुमत का आंकड़ा पार करने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में मतगणना केंद्र के बाहर मिठाइयां बांटीं। निर्वाचन क्षेत्र में सीएम ममता बनर्जी भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से आगे चल रही हैं… pic.twitter.com/XE75HGOSxC – एएनआई (@ANI) 4 मई 2026 लेकिन मतगणना केंद्रों से परे, जोरदार प्रतिस्पर्धा ऑनलाइन सामने आ रही थी। यह भी पढ़ें: तमिलनाडु के लिए ‘विजय’, बंगाल में भगवा लहर: चुनाव नतीजे शेयर बाजार के लिए क्या मायने रखते हैं? वाक्यांश “खेला शेष” तेजी से सभी प्लेटफार्मों पर ट्रेंड करने लगा, जिसे अक्सर “बाय बाय दीदी” के साथ जोड़ा जाता है, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का संदर्भ है। उपयोगकर्ताओं ने बदलते रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए संपादित GIFs, मीम्स और वायरल पोस्टों की बाढ़ ला दी। एक यूजर ने लिखा, “अलविदा दीदी, आपको बिल्कुल भी याद नहीं किया जाएगा,” जबकि दूसरे ने पोस्ट किया, “मैम खेला शेष! बेहतर होगा कि अब आप अपना बैग पैक करें और घर वापस लौट जाएं। हम बंगालियों ने अपनी किस्मत का फैसला कर लिया है, अब इसे अपने हाथों में दें!” एक अन्य व्यापक रूप से साझा की गई पोस्ट में लिखा है, “‘खेला होबे’ अब गलत अभिव्यक्ति है। अब सही अभिव्यक्ति ‘खेला होए गेछे’ है!” हास्य-युक्त प्रतिक्रियाओं का मिलान राजनीतिक टिप्पणियों और गरमागरम बहस से किया गया। कुछ उपयोगकर्ताओं ने रुझानों पर अविश्वास व्यक्त किया, जबकि अन्य ने शुरुआती रुझानों में बहुत अधिक पढ़ने के खिलाफ चेतावनी दी। इसी बीच एक यूजर ने लिखा कि अगर बीजेपी जीत गई तो वह राज्य छोड़ देंगे। “आज, अगर बीजेपी जीत गई, तो मैं हमेशा के लिए पश्चिम बंगाल छोड़ दूंगा।” साथ ही, लंबे राजनीतिक तर्क भी सामने आए, जिसमें उपयोगकर्ता वोटिंग पैटर्न, पहचान की राजनीति और वोट एकीकरण के आरोपों पर बहस कर रहे थे। कुछ पोस्टों में दोनों प्रमुख पार्टियों की आलोचना की गई, जबकि अन्य ने व्यापक चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए। एक यूजर ने कहा, “कुछ लोग टीएमसी को उसकी समाजवादी नीतियों के लिए वोट देते हैं, कुछ ऐसा न करने पर नतीजों के डर से, कुछ स्व-घोषित बौद्धिक वर्ग से हैं जिनकी एकमात्र पहचान बीजेपी से नफरत है, और कुछ पुराने मतदाता कम्युनिस्टों के प्रति वफादार रहते हैं, प्रभावी ढंग से वोट विभाजित करते हैं। इसलिए, बीजेपी का बंगाल जीतना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। मुझे उम्मीद है कि ऐसा होगा।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : पश्चिम बंगाल, भारत, भारत समाचार चुनाव खेला शेष तो अलविदा दीदी: सोशल मीडिया पर मीम्स, जिब्स की बाढ़ आ गई क्योंकि रुझानों में बीजेपी ने टीएमसी को पीछे छोड़ दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजे(टी) बीजेपी पश्चिम बंगाल में आगे(टी)टीएमसी पीछे चल रही है नतीजे(टी)खेला शेष मीम्स(टी)बाय बाय दीदी नारा(टी)ममता बनर्जी प्रतिक्रियाएं(टी)पश्चिम बंगाल सोशल मीडिया(टी)चुनाव गिनती के रुझान