Sunday, 04 Oct 2026 | 01:04 PM

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छिंदवाड़ा में मंडप में हाई-वोल्टेज ड्रामा:दुल्हन ने दूल्हे की जगह प्रेमी को पहनाई वरमाला, बारात खाली हाथ लौटी

छिंदवाड़ा में मंडप में हाई-वोल्टेज ड्रामा:दुल्हन ने दूल्हे की जगह प्रेमी को पहनाई वरमाला, बारात खाली हाथ लौटी

छिंदवाड़ा जिले के उमरेठ में एक शादी समारोह के दौरान दुल्हन ने भरे मंडप में दूल्हे की जगह अपने प्रेमी के गले में वरमाला डाल दी। घटना 27-28 अप्रैल की दरमियानी रात की बताई जा रही है। मंगलवार को इस मामले की शिकायत उमरेठ थाने में दर्ज कराई गई, जिसके बाद बुधवार को मामला सुर्खियों में आया। जानकारी के मुताबिक, परासिया से बारात उमरेठ थाना क्षेत्र के मुजावर गांव पहुंची थी। शादी की सभी रस्में धूमधाम से चल रही थीं। बारात का स्वागत हुआ, आतिशबाजी हुई और मेहमानों के लिए भोजन की व्यवस्था भी शुरू हो गई थी। इसी बीच वरमाला की रस्म के लिए मंच तैयार किया गया और दूल्हा मंच पर पहुंच गया। जैसे ही दुल्हन को मंच पर लाया गया, उसने अचानक पंडाल में मौजूद एक युवक के गले में वरमाला डाल दी और उससे लिपट गई। यह दृश्य देख मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए। दोनों पक्षों में मारपीट भी हुई घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। दुल्हन के परिजनों ने युवक की पिटाई कर दी और उसे पंडाल से बाहर भगा दिया। इस दौरान दोनों पक्षों में जमकर विवाद और मारपीट की स्थिति बन गई। दूल्हे ने किया शादी से इनकार इस घटनाक्रम के बाद दूल्हे ने शादी करने से साफ इंकार कर दिया। बारात बिना विवाह के ही वापस लौट गई। दूल्हा पक्ष ने उमरेठ थाने पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई है। बताया जा रहा है कि युवती और युवक के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे। परिवार के दबाव में युवती शादी के लिए तैयार हो गई थी, लेकिन शादी के दिन उसने यह कदम उठा लिया। लेन-देन की वस्तुएं लौटाईं घटना के बाद दूल्हा पक्ष द्वारा दिए गए गहने, अंगूठी और मोबाइल भी वापस ले लिए गए। इस पूरे मामले में दूल्हा पक्ष ने आर्थिक नुकसान और सामाजिक मान-सम्मान को ठेस पहुंचने की बात कही है।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

हमीदिया अस्पताल ने लॉन्च किया ऑर्थो रिहैब एप:ऑपरेशन के बाद मरीजों को कराएगा एक्सरसाइज; डिजिटल दौर में गलत हेल्थ टिप्स से बचाना लक्ष्य

हमीदिया अस्पताल ने लॉन्च किया ऑर्थो रिहैब एप:ऑपरेशन के बाद मरीजों को कराएगा एक्सरसाइज; डिजिटल दौर में गलत हेल्थ टिप्स से बचाना लक्ष्य

डिजिटल दौर में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर हेल्थ से जुड़ी ढेरों जानकारी उपलब्ध है, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में कंटेंट भ्रामक या अधूरा होता है। कई मरीज ऑपरेशन या इलाज के बाद इन्हीं गलत टिप्स के आधार पर एक्सरसाइज और उपचार शुरू कर देते हैं, जिससे उनकी स्थिति बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों का फोकस अब मरीजों को गलत इलाज से बचाने पर फोकस कर रहे हैं। इसी दिशा में राजधानी के हमीदिया अस्पताल ने आर्थो रिहैब एप तैयार किया है। ऑर्थोपेडिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष गोहिया ने कहा कि इस एप का उद्देश्य ऑपरेशन के बाद मरीजों को सामान्य और सही जानकारी देना है, ताकि वे घर पर भी एक्सरसाइज और चिकित्सीय सलाहों का सही तरीके से पालन कर सकें। सोशल मीडिया के भरोसे इलाज बन रहा खतरा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी हर किसी के लिए एक जैसी होती है, जबकि हर मरीज की स्थिति अलग होती है। ऐसे में एक ही तरह की एक्सरसाइज सभी पर लागू नहीं होती। कई मामलों में देखा गया है कि मरीज गलत तरीके से एक्सरसाइज करने के कारण और ज्यादा चोटिल हो गए या उनकी रिकवरी में देरी हुई। यही वजह है कि विशेषज्ञ लंबे समय से प्रमाणिक और पर्सनलाइज्ड गाइडेंस की जरूरत महसूस कर रहे थे। डॉक्टरों ने तैयार किया वैज्ञानिक समाधान इस जरूरत को समझते हुए गांधी मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग के सीनियर रेजीडेंट डॉ. सुदीप त्रिपाठी ने ‘आर्थो रिहैब एप’ विकसित किया है। यह एप खासतौर पर उन मरीजों के लिए तैयार किया गया है, जिनका हड्डी से जुड़ा ऑपरेशन हुआ है। इसमें 200 से अधिक सर्जरी से संबंधित जानकारी, एक्सरसाइज और देखभाल के तरीके वीडियो, ऑडियो और टेक्स्ट फॉर्मेट में शामिल किए गए हैं। मरीजों को मिलेंगे यह फायदे – बार-बार अस्पताल आने की जरूरत कम होगी। – रिकवरी प्रक्रिया तेज और सुरक्षित होगी। – वीडियो में जानकारी होने से कम पढ़े-लिखे मरीज भी आसानी से समझ सकेंगे। – डॉक्टर और मरीज के बीच बेहतर समन्वय बनेगा। हर मरीज को मिलेगी जरूरत के अनुसार जानकारी इस एप की सबसे खास बात यह है कि इसमें मरीज खुद से लॉगिन नहीं कर सकता। ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ही मरीज का रजिस्ट्रेशन करते हैं और उसकी सर्जरी के अनुसार जरूरी जानकारी अपलोड करते हैं। इससे मरीज को केवल वही जानकारी मिलती है, जो उसके लिए जरूरी और सुरक्षित है। इससे भ्रम की स्थिति खत्म होती है और इलाज अधिक प्रभावी बनता है। डॉ. त्रिपाठी के अनुसार, सड़क दुर्घटना या अन्य गंभीर मामलों में ऑपरेशन के बाद मरीजों को लंबे समय तक एक्सरसाइज करनी होती है। अस्पताल में दी गई सलाह मरीज घर जाकर भूल जाते हैं और कई बार गलत तरीके अपनाते हैं। इस एप के जरिए उन्हें हर समय सही मार्गदर्शन मिलता रहेगा, जिससे गलत एक्सरसाइज से होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा।

इंदौर के डेली कॉलेज बोर्ड चुनाव: नामांकन प्रक्रिया पूरी:दो श्रेणियों में 11 उम्मीदवारों ने भरा नामांकन, 21 मई को फैसला

इंदौर के डेली कॉलेज बोर्ड चुनाव: नामांकन प्रक्रिया पूरी:दो श्रेणियों में 11 उम्मीदवारों ने भरा नामांकन, 21 मई को फैसला

शहर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। चुनाव कार्यक्रम के तहत बुधवार को नामांकन जमा करने का अंतिम दिन था, जिसमें कुल 11 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की है। कॉलेज से मिली अधिकृत जानकारी के अनुसार, इस बार चुनाव दो विशेष श्रेणियों में कराए जा रहे हैं। इनमें ‘फाउंडर डोनर’ यानी पुराने दानदाता राजघराना श्रेणी से 4 उम्मीदवारों और ‘न्यू डोनर’ श्रेणी से 7 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं। चुनावी कार्यक्रम के अनुसार 2 मई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। इसके बाद 3 मई को उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की जाएगी। इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि चुनाव मैदान में कितने प्रत्याशी शेष रहेंगे। फाउंडर डोनर श्रेणी में दो पदों के लिए चार उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें वर्तमान बोर्ड अध्यक्ष विक्रमसिंह पंवार, सदस्य प्रियव्रत सिंह खिलचीपुर, ठाकुर नरेन्द्रसिंह बिडवाल और ठाकुर अनिरुद्ध सिंह दोत्ररिया शामिल हैं। न्यू डोनर श्रेणी में सात दावेदार न्यू डोनर श्रेणी के एक पद के लिए सात उम्मीदवारों ने दावेदारी पेश की है। इनमें राजेश अग्रवाल, संदीप पारिख, जयेश पटेल, नीरज देसाई, हरपालसिंह भाटिया, गुरमीतसिंह भाटिया और मानवीरसिंह बायस शामिल हैं। 21 मई को मतदान, उसी दिन परिणाम 4 मई से डाक मतपत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी। मुख्य मतदान 21 मई को कराया जाएगा। मतदान समाप्त होते ही मतगणना होगी और उसी दिन चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया पर विवाद भी गहराया बोर्ड गठन की प्रक्रिया विवादों से भी घिरी हुई है। कॉलेज के संविधान में किए गए संशोधनों और चुनाव में देरी को लेकर सदस्यों के बीच असंतोष देखा जा रहा है। विशेष रूप से ‘ओल्ड डेलियन्स’ श्रेणी को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू करने का विरोध हो रहा है। यह मामला अब शासन और प्रशासन तक पहुंच गया है। नाराज सदस्यों ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई है। वहीं विवाद हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। अब देखना होगा कि कानूनी अड़चनों और विरोध के बीच 21 मई को होने वाले मतदान में मतदाता किन चेहरों पर भरोसा जताते हैं।

एमजीएम कॉलेज ने फार्मासिस्ट को किया बर्खास्त:डीन के रीडर से मारपीट के बाद कार्रवाई; अन्य शिकायतों में भी जांच में दोषी पाया गया

एमजीएम कॉलेज ने फार्मासिस्ट को किया बर्खास्त:डीन के रीडर से मारपीट के बाद कार्रवाई; अन्य शिकायतों में भी जांच में दोषी पाया गया

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में डीन के रीडर के साथ मारपीट करने से चर्चाओं में आए फार्मासिस्ट राकेश गोरखे के खिलाफ गंभीर कार्रवाई करते हुए कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कदम उनके विरुद्ध मिली शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया है। कॉलेज प्रबंधन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राकेश गोरखे के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए एक समिति गठित की गई थी। विस्तृत जांच के बाद समिति ने उन्हें आरोपों में दोषी पाया। इसके आधार पर प्रबंधन ने सख्त निर्णय लेते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। मारपीट का मामला बना मुख्य कारण जानकारी के अनुसार, गोरखे ने पिछले साल कॉलेज परिसर में डीन के रीडर भावेश के साथ मारपीट की थी। इस घटना के बाद मामला गंभीर हो गया और उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई। इस घटना को बर्खास्तगी का प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस घटना का हाल ही में वीडियो भी वायरल हुआ था। मारपीट की घटना के बाद किया गया था सस्पेंड मारपीट की घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गोरखे को सस्पेंड कर दिया था। साथ ही उन्हें शासकीय मनोरोग अस्पताल बाणगंगा में अटैच किया गया था। गोरखे के खिलाफ पूर्व में भी कई शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाते हुए यह कार्रवाई की।

पूर्व CM वसुंधरा राजे का फर्जी पत्र वायरल मामला:कांग्रेस IT सेल के कार्यकर्ता हाईकोर्ट में हुए पेश, राजस्थान पुलिस ने भी पेश की अपनी सफाई

पूर्व CM वसुंधरा राजे का फर्जी पत्र वायरल मामला:कांग्रेस IT सेल के कार्यकर्ता हाईकोर्ट में हुए पेश, राजस्थान पुलिस ने भी पेश की अपनी सफाई

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से फर्जी पत्र वायरल करने के मामले में गिरफ्तार कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को बुधवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पेश किया गया। मामले में परिजनों द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तीनों के बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जयपुर के डीआईजी क्राइम और भोपाल डीसीपी क्राइम से जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ में हुई। राजस्थान पुलिस ने निखिल, बिलाल और इनाम नाम के तीनों कार्यकर्ताओं को अदालत के समक्ष पेश किया। गिरफ्तारी तारीख पर पुलिस की सफाई सुनवाई के दौरान राजस्थान पुलिस ने कहा कि कानूनी दस्तावेजों में गिरफ्तारी 22 अप्रैल दर्शाई गई है, क्योंकि तीनों कार्यकर्ता 20 अप्रैल को स्वयं उनके साथ भोपाल से जयपुर गए थे। जांच के बाद 22 अप्रैल को औपचारिक गिरफ्तारी दिखाई गई। पुलिस ने यह भी बताया कि जयपुर कोर्ट से तीनों को जमानत मिल चुकी है और बेल बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। कार्यकर्ताओं ने पुलिस का दावा नकारा जब हाईकोर्ट ने तीनों कार्यकर्ताओं से पूछताछ की तो उन्होंने राजस्थान पुलिस के दावे को गलत बताया। उनका कहना था कि वे अपनी मर्जी से नहीं गए थे, बल्कि उन्हें गिरफ्तार कर जयपुर ले जाया गया था। साथ ही, उन्हें ले जाने से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। दो राज्यों के अफसरों से जवाब तलब अदालत ने जब पुलिस अधिकारियों से इस पर सवाल किया तो बताया गया कि जयपुर पुलिस के डीआईजी क्राइम ब्रांच और भोपाल पुलिस के डीसीपी क्राइम के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद यह कार्रवाई की गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों से शपथपत्र पर पूरे मामले की सच्चाई बताने को कहा है। साथ ही अगली सुनवाई में दोनों अधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। सीजेएम जबलपुर को बयान दर्ज करने के निर्देश हाईकोर्ट ने कांग्रेस आईटी सेल के तीनों कार्यकर्ताओं के बयान दर्ज करने के लिए जबलपुर सीजेएम को निर्देश दिए हैं, ताकि मामले में आगे की कार्रवाई की जा सके। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की गई है।

वजन घटाने के लिए खाना छोड़ रहे हैं? एक्सपर्ट्स ने बताया ये गलती बना सकती है आपको और मोटा

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आजकल बढ़ता वजन बहुत से लोगों की चिंता बना हुआ है. ज्यादा वजन सिर्फ दिखने का मामला नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है. मोटापा बढ़ने से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और जोड़ों में दर्द जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि लोग वजन घटाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं. कोई घंटों जिम में पसीना बहाता है, तो कोई डाइटिंग शुरू कर देता है. वहीं कई लोग जल्दी वजन कम करने के चक्कर में खाना छोड़ने जैसी गलती भी कर बैठते हैं. बहुत से लोगों को लगता है कि अगर वे एक समय का खाना छोड़ देंगे या दिनभर कम खाएंगे, तो वजन तेजी से घट जाएगा. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह सोच पूरी तरह सही नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने भी खाने और वजन घटाने से जुड़े कई भ्रमों पर जानकारी दी है. संगठन का कहना है कि मील स्किप करना यानी खाना छोड़ना वजन कम करने का सही तरीका नहीं है. इससे थोड़े समय के लिए वजन कम लगता जरूर है, लेकिन लंबे समय में यह तरीका नुकसान पहुंचा सकता है. जब कोई व्यक्ति खाना छोड़ता है, तो शरीर को जरूरी ऊर्जा नहीं मिल पाती. इससे शरीर कमजोर महसूस करने लगता है और दिनभर थकान बनी रहती है. कई लोगों को काम में मन नहीं लगता, चिड़चिड़ापन होने लगता है और शरीर सुस्त महसूस करता है. अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो शरीर का संतुलन भी बिगड़ सकता है. इसलिए वजन घटाने के लिए भूखे रहना समझदारी नहीं माना जाता. खाना छोड़ने का एक और बड़ा नुकसान यह है कि बाद में बहुत तेज भूख लगती है. जब लंबे समय तक पेट खाली रहता है, तो अगली बार व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खा लेता है. ऐसे में जितनी कैलोरी बचाने की कोशिश की गई थी, उससे ज्यादा कैलोरी शरीर में चली जाती है. यही वजह है कि कई लोग खाना छोड़ने के बाद भी वजन कम नहीं कर पाते. कुछ मामलों में वजन बढ़ भी सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे गैप के बाद खाना खाने से ब्लड शुगर का स्तर भी प्रभावित हो सकता है. कुछ लोगों को कमजोरी, चक्कर आना, हाथ कांपना या ध्यान लगाने में परेशानी महसूस हो सकती है. खासतौर पर जिन लोगों को पहले से शुगर या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उनके लिए यह आदत और ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है. स्वस्थ तरीके से वजन कम करने के लिए जरूरी है कि नियमित समय पर संतुलित भोजन किया जाए. दिनभर में छोटे-छोटे हिस्सों में हेल्दी खाना लेना बेहतर माना जाता है. इसमें फल, सब्जियां, दालें, प्रोटीन, साबुत अनाज और पर्याप्त पानी शामिल होना चाहिए. इससे शरीर को जरूरी पोषण मिलता है, भूख कंट्रोल रहती है और एनर्जी भी बनी रहती है. इसके साथ ही शारीरिक गतिविधि भी बहुत जरूरी है. रोजाना वॉक करना, योग करना, जिम जाना या हल्की एक्सरसाइज करना वजन घटाने में मदद करता है. सिर्फ डाइट या सिर्फ एक्सरसाइज से नहीं, बल्कि दोनों के सही संतुलन से बेहतर रिजल्ट मिलता है.

उज्जैन गैंगवार: बुंदेला गैंग के 3 आरोपी गिरफ्तार:पुलिस ने निकाला जुलूस, फरार साथियों से सरेंडर की अपील

उज्जैन गैंगवार: बुंदेला गैंग के 3 आरोपी गिरफ्तार:पुलिस ने निकाला जुलूस, फरार साथियों से सरेंडर की अपील

उज्जैन में चल रहे गुर्जर-बुंदेला गैंग विवाद में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। चिमनगंज मंडी पुलिस ने बुंदेला गैंग के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए इन आरोपियों का जुलूस निकाला, जिसमें उन्होंने अपने फरार साथियों से सरेंडर करने की अपील की। चिमनगंज मंडी थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान निखिल पवार (22), राहुल गोहर (20) (दोनों निवासी भैरव नाला वाल्मिकी कॉलोनी) और राहुल सूर्यवंशी (30) (निवासी पटेल नगर गणेश टेकरी) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये तीनों बुंदेला गैंग से जुड़े हैं और हाल ही में हुई आगजनी तथा गैंगवार की घटनाओं में सक्रिय थे। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीनों आरोपियों का इलाके में जुलूस निकाला। इस दौरान आरोपियों ने “अपराध करना पाप है, पुलिस हमारी बाप है” का नारा लगाया। उन्होंने अपने फरार साथियों से नाम लेकर सरेंडर करने की अपील करते हुए कहा कि पुलिस की सख्ती के आगे बचना मुश्किल है। जुलूस के दौरान आरोपियों ने अपने किए पर माफी मांगी और कान पकड़कर भविष्य में अपराध न करने की बात कही। पुलिस ने उन्हें घटनास्थल पर ले जाकर उठक-बैठक भी लगवाई। इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में अपराधियों के प्रति भय कम करना और आम जनता में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाना है। इस पूरे विवाद की शुरुआत 10 अप्रैल को ढांचा भवन क्षेत्र में हुई थी। उस दिन 12वीं के छात्र अतीक माहोरकर को गोली लगने का मामला सामने आया था। इसके अगले ही दिन, 11 अप्रैल को चिमनगंज मंडी क्षेत्र में रौनक गुर्जर के मकान पर पेट्रोल डालकर आगजनी की घटना हुई। इस घटना में लगभग 13 बदमाश शामिल थे। इस मामले में पहले ही 13 आरोपियों को नामजद किया जा चुका है, जिनमें संतोष परमार और कमल उर्फ आकाश की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। बुंदेला गैंग के तीन और आरोपियों के पकड़े जाने के बाद, पुलिस अब फरार अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।

ग्वालियर में छात्रा ने खुद को मारी गोली, मौत:सुसाइड नोट में लिखा- कम नंबर आए हैं, परिवार का नाम रोशन नहीं कर सकी

ग्वालियर में छात्रा ने खुद को मारी गोली, मौत:सुसाइड नोट में लिखा- कम नंबर आए हैं, परिवार का नाम रोशन नहीं कर सकी

ग्वालियर में 11वीं की छात्रा ने पिता की पिस्तौल से खुद को गोली मारकर सुसाइड कर लिया। गोली सीने में लगी। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना बुधवार सुबह गिरराज जी मंदिर, घोसीपुरा बहोड़ापुर की है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को निगरानी में लिया। घटनास्थल से छात्रा के रजिस्टर में चार लाइनें लिखी मिलीं- “मेरे कम मार्क्स आए हैं। मैं परिवार का नाम रोशन नहीं कर सकी, इसलिए यह कदम उठा रही हूं। गुड बाय।” पुलिस ने रजिस्टर को अपने कब्जे में ले लिया है। मौके पर फोरेंसिक एक्सपर्ट और फिंगरप्रिंट टीम को भी बुलाया गया। फिलहाल पुलिस प्राथमिक तौर पर यही मान रही है कि परीक्षा में कम अंक आने के कारण छात्रा ने यह कदम उठाया। शहर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र स्थित घोसीपुरा, गिरराज जी मंदिर के पास रहने वाले श्याम कुमार अहिरवार इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) में जवान हैं। परिवार में उनकी पत्नी दीप्ति अहिरवार, 17 वर्षीय बेटी ट्विंकल और एक बेटा है। ट्विंकल 11वीं की छात्रा थी और दो दिन पहले ही उसका रिजल्ट आया था। छात्रा रात को अपनी मां के साथ सोई थी। बुधवार सुबह करीब 7 बजे अचानक गोली चलने की आवाज से पूरे परिवार की नींद टूट गई। आवाज घर के सामने वाले कमरे से आई थी। परिजन दौड़कर वहां पहुंचे तो दरवाजा अंदर से बंद मिला और बेटी के कराहने की आवाज आ रही थी। खिड़की से देखा तो अंदर ट्विंकल लहूलुहान पड़ी थी। उसके सीने से खून बह रहा था और पास ही पिता की लाइसेंसी पिस्तौल पड़ी थी। खिड़की तोड़कर अंदर पहुंचे, अस्पताल ले गए, मौत इसके बाद परिजनों ने कमरे की खिड़की तोड़ी और भतीजे गौरव उर्फ अंश को अंदर भेजा। अंदर जाकर उसने गेट खोला। कमरे में पास ही ट्विंकल के पिता की लाइसेंसी रिवॉल्वर पड़ी थी और ट्विंकल के सीने से खून बह रहा था, हालांकि उसकी सांस चल रही थी। तत्काल परिजन उसे पास के एक अस्पताल ले गए, जहां से उसे जेएएच के लिए रेफर कर दिया गया। जयारोग्य अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद छात्रा को मृत घोषित कर दिया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद मर्ग कायम कर लिया। एग्जाम में आए थे कम नंबर पुलिस जांच में पता चला है कि छात्रा 11वीं की थी और कुछ दिन पहले ही उसका रिजल्ट आया था, जिसमें उसके नंबर काफी कम आए थे। इसी आधार पर पुलिस का मानना है कि उसने कम नंबर आने के कारण यह कदम उठाया। रजिस्टर में मिला सुसाइड नोट छात्रा के कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है। यह नोट अंग्रेजी में लिखा है, जिसमें छात्रा ने परीक्षा में कम नंबर आने पर परिवार का नाम रोशन न कर पाने की बात लिखी है। फिलहाल पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर लिया है। सीएसपी कृष्णपाल सिंह ने बताया- एक नाबालिग ने पिता की लाइसेंसी पिस्तौल से गोली मारकर आत्महत्या की है। मौके से सुसाइड नोट मिला है, जिसे जब्त कर मामले की जांच की जा रही है।

2026 ने तोड़ा रिकॉर्ड! बंगाल में भारी मतदान क्या दर्शाता है? यह किसका पक्ष लेता है? निगाहें 4 मई पर | चुनाव समाचार

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आखरी अपडेट:29 अप्रैल, 2026, 22:27 IST बंगाल चुनाव 2026: दोनों चरणों में 92.47% के संयुक्त मतदान के साथ – आजादी के बाद से सबसे अधिक – राज्य ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बंगाल चुनाव 2026: मतदान का प्रतिशत बताता है कि यह चुनाव मतदाताओं के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। बंगाल ने अपना लोकतांत्रिक इतिहास फिर से लिखा है। दोनों चरणों में 92.47% के संयुक्त मतदान के साथ – आज़ादी के बाद से सबसे अधिक – राज्य ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लेकिन बूथ पर इस असाधारण उत्साह का वास्तव में क्या मतलब है? 2026 के विधानसभा चुनावों के दोनों चरणों में मतदान 2011 के ऐतिहासिक चुनावों के दौरान निर्धारित 84.72% के पिछले उच्च स्तर को पार कर गया। 23 अप्रैल को आयोजित चरण 1 में 93.19% दर्ज किया गया, जबकि चरण 2 – दक्षिण बंगाल और कोलकाता में 142 सीटों को कवर करते हुए – शाम 7:45 बजे तक लगभग 91.66% पर बंद हुआ। सीधे शब्दों में कहें तो बंगाल में पहले कभी इस तरह वोटिंग नहीं हुई. वास्तव में क्या टूटा था? 2011 के चुनाव बंगाल की राजनीतिक स्मृति में अंकित हैं – यही वह वर्ष था जब ममता बनर्जी ने भूकंपीय “पोरीबोर्टन” (परिवर्तन) लहर में वाम मोर्चे के 34 वर्षों के शासन को समाप्त कर दिया था। उस चुनाव में 84.72% मतदान दर्ज किया गया था, जिसे लंबे समय तक राज्य में मतदाता उत्साह का स्वर्ण मानक माना जाता था। 2026 में, बंगाल ने चरण 2 में मतदान समाप्त होने से पहले ही उस आंकड़े को पार कर लिया था। संख्याएं, संक्षेप में, आपको बताती हैं कि यह चुनाव मतदाताओं के लिए उतना ही परिणामी लगता है। किन जिलों में सबसे ज्यादा मतदान हुआ? चरण 2 में दक्षिण बंगाल के जिलों में उल्लेखनीय भागीदारी देखी गई: • पूर्व बर्धमान — 92.46% • हुगली — 90.34% • नादिया — 90.28% • दक्षिण 24 परगना — ~89.7% • हावड़ा — 89.44% दोनों चरणों को मिलाकर, पश्चिम बंगाल में कुल 6,82,51,008 मतदाता वोट डालने के पात्र थे। शहरी और ग्रामीण दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में भागीदारी का व्यापक स्तर यह संकेत देता है कि यह कोई स्थानीय उछाल नहीं है – यह राज्यव्यापी है। क्या अधिक मतदान से टीएमसी या बीजेपी को मदद मिलती है? यह वह सवाल है जिससे हर विश्लेषक जूझ रहा है। ऐतिहासिक रूप से बंगाल में, उच्च मतदान ने सत्तारूढ़ पार्टी का पक्ष लिया है – टीएमसी ने मजबूत लामबंदी के साथ 2021 में 294 में से 215 सीटें जीत लीं। लेकिन 2026 एक महत्वपूर्ण तरीके से अलग है: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ने लगभग 9 मिलियन मतदाताओं को हटा दिया – लगभग 12% मतदाता – एक गहन रूप से विवादित अभ्यास जिसे टीएमसी ने मताधिकार से वंचित करना कहा और भाजपा ने फर्जी प्रविष्टियों को साफ करने के रूप में बचाव किया। सिकुड़ी हुई मतदाता सूची के साथ, 92% मतदान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है – इसका मतलब है कि लगभग हर शेष पंजीकृत मतदाता उपस्थित हुआ। • यदि हटाए गए नामों पर गुस्सा लोगों को बूथों पर ले जाता है – तो इससे टीएमसी को नुकसान हो सकता है • यदि टीएमसी की कल्याण मशीनरी ने प्रभावी ढंग से अपना आधार जुटाया – तो संख्याएं ममता के पक्ष में हैं • चार एग्जिट पोल ने बीजेपी को बढ़त दी है, जबकि केवल एक – पीपुल्स पल्स – ने टीएमसी की वापसी की भविष्यवाणी की है मतदाता वास्तव में किसके लिए मतदान कर रहे थे? मतदान के नाटक से परे, चुनाव को रोजगार और औद्योगिक विकास संबंधी चिंताओं, भर्ती घोटाले, महिला सुरक्षा, पहचान की राजनीति और 15 साल के टीएमसी शासन के बाद सत्ता विरोधी लहर ने आकार दिया था। भाजपा ने नौकरियों और शासन की विफलताओं को सामने रखा; टीएमसी ने कल्याण वितरण और बंगाली पहचान पर अभियान चलाया। भागीदारी के विशाल पैमाने से पता चलता है कि दोनों खेमों के मतदाताओं को लगा कि बाहर बैठने के लिए दांव बहुत बड़ा है। हमें कब पता चलेगा? परिणाम घोषित किये जायेंगे 4 मईअसम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में परिणामों के साथ। बंगाल का फैसला – अपने रिकॉर्ड मतदान, हाई-वोल्टेज प्रतियोगिता और गहराई से विभाजित एग्ज़िट पोल अनुमानों के साथ – उन सभी में सबसे अधिक बारीकी से देखे जाने का वादा करता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 29 अप्रैल, 2026, 22:27 IST समाचार चुनाव 2026 ने तोड़ा रिकॉर्ड! बंगाल में भारी मतदान क्या दर्शाता है? यह किसका पक्ष लेता है? निगाहें 4 मई पर अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)बीजेपी(टी)टीएमसी(टी)मतदान परिणाम(टी)मतगणना

ट्रेनी एयर होस्टेस ने इशारों से समझाए ट्रैफिक रूल:इंदौर के पलासिया चौराहे पर पुलिस ने चलाया अनूठा जागरूकता अभियान

ट्रेनी एयर होस्टेस ने इशारों से समझाए ट्रैफिक रूल:इंदौर के पलासिया चौराहे पर पुलिस ने चलाया अनूठा जागरूकता अभियान

इंदौर के ट्रैफिक को सुधारने के लिए ट्रैफिक पुलिस लगातार नए-नए प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में बुधवार को ट्रैफिक पुलिस ने पलासिया चौराहे पर एक अनूठा जागरूकता अभियान चलाया। इसमें ट्रेनी एयर होस्टेस पलासिया चौराहे पर पहुंची और इस अभियान का हिस्सा बनीं।अभियान के दौरान ट्रेनी एयर होस्टेस ने फ्लाइट में दिए जाने वाले सुरक्षा निर्देशों की शैली में, इशारों एवं संकेतों के माध्यम से गाड़ी चलाने वालों को ट्रैफिक रूल्स का पालन करने के लिए मोटिवेट किया। कार्यक्रम के दौरान ट्रेनी एयर होस्टेस ने रेड सिग्नल पर रुकने, सीट बेल्ट लगाने, टू व्हीलर चलाने वालो को हेलमेट पहनने और गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने जैसे महत्वपूर्ण रुल्स की जानकारी दी। इस अभिनव पहल ने चौराहे पर उपस्थित गाड़ी चलाने वालों का ध्यान आकर्षित किया।