अब H-1 B वीजा पर 3 साल रोक की तैयारी:डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के सांसदों ने कड़े प्रावधानों वाला बिल संसद में पेश किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के राज में भारतीयों के लिए ‘अमेरिकन ड्रीम’ दु:स्वप्न बनता जा रहा है। अब ट्रम्प की पार्टी के सांसदों ने एच-1 बी वीजा पर 3 साल तक रोक सहित कई अन्य कड़े प्रावधानों वाला बिल संसद में पेश किया है। 7 रिपब्लिकन सांसदों की ओर से कांग्रेस (संसद) में पेश किए गए इस एच-1 बी दुरुपयोग रोकथाम बिल-2026 का उद्देश्य अमेरिकी लोगों के लिए नौकरी के ज्यादा मौके बनाना है। एरिजोना के रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन ने बिल को संसद में रखा है। बिल पर हस्ताक्षर करने वाले अन्य सांसदों में ब्रैंडन गिल, पॉल गोसर और एंडी ओगल्स शामिल हैं। अमेरिकी हितों से जुड़े इस बिल पर डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सांसदों का भी समर्थन मिलने के आसार हैं। सूत्रों के अनुसार, 100 सांसदों की सीनेट में 60 सांसदों का समर्थन मिलने के बाद साल के अंत तक वोटिंग संभव है। इस बिल से सबसे ज्यादा भारतीय प्रभावित होंगे। क्योंकि, अमेरिका में हर साल जारी होने वाले लगभग 85 हजार एच-1 बी वीजा में से लगभग 63 हजार वीजा भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलते हैं। दूसरे नंबर पर चीन के प्रोफेशनल्स आते हैं। एच1 बी के विरोध में ‘मागा’, इंटरव्यू नहीं हो रहे, फीस भी 100 गुना बढ़ी ट्रम्प के कट्टरपंथी मागा समर्थक (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) एच-1 बी वीजा के विरोधी रहे हैं। उनका मानना है कि विदेशी खासकर भारत से आने वाले प्रोफेशनल्स अमेरिकियों की जॉब को हड़प रहे हैं। ट्रम्प अपने वोटर बेस के चलते इस वीजा को लगातार कठिन बना रहे हैं। वीजा स्टैम्पिंग के लिए भारत आना जरूरी होता है। पर यहां अमेरिकी दूतावासों में रिनुअल इंटरव्यू लगभग नहीं के बराबर ही हो रहे हैं। जनवरी के इंटरव्यू नवंबर-दिसंबर तक रीशेड्यूल हो चुके हैं। कई प्रोफेशनल्स जॉब गंवा चुके हैं। ट्रम्प पिछले साल एच-1 बी वीजा की फीस को लगभग 100 गुना बढ़ाकर 94 लाख रुपए कर चुके हैं। इसके चलते पहले से ही इस वीजा कैटेगरी में अमेरिका में एंट्री कठिन हो चुकी है। नए बिल में कोटा घटाकर 25 हजार, 1.86 करोड़ वेतन जरूरी नए बिल के अनुसार, तीन साल बाद एच-1 बी वीजा फिर शुरू करने पर वर्तमान के 85 हजार प्रोफेशनल्स के कोटा को घटाकर 25 हजार प्रोफेशनल्स प्रति वर्ष किया जाएगा। 1. एच-1 बी उन्हीं को, जिनको अमेरिकी नियोक्ता हर साल न्यूनतम 1 करोड़ 86 लाख रुपए का वेतन देंगे। वर्तमान में वीजा के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारित नहीं। 2. वीजा में वर्तमान में लागू लॉटरी सिस्टम को खत्म किया जाएगा। कंपनियों का हायरिंग विकल्प खत्म होगा। 3. प्रोफेशनल्स पर पत्नी-बच्चों को साथ लाने पर प्रतिबंध। अभी ये पत्नी-बच्चों को ला सकते हैं। अमेरिका में पैदा होने वाले इनके बच्चों को स्वत: नागरिकता मिल जाती है। 4. मास्टर्स करने वाले एच1 बी प्रोफेशनल्स की ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) को समाप्त किया जाएगा। अभी मास्टर्स करने वाले एच-1 बी प्रोफेशनल्स को दो अतिरिक्त साल तक के लिए अमेरिका में ही रहकर ओपीटी प्रोग्राम के तहत जॉब करने की मंजूरी मिलती है। ग्रीन कार्ड पेंडेंसी बढ़ी… अमेरिका में भारतीयों के स्थायी प्रवास के लिए जारी होने वाले ग्रीन कार्ड की पेंडेंसी भी बढ़कर 15 साल तक की हो गई है। एच-1 बी अधिकतम 6 साल के लिए जारी होता है। इसके बाद अमेरिका में रहने के लिए ग्रीन कार्ड जरूरी होता है। टेक कंपनियां सबसे ज्यादा H-1B स्पॉन्सर करती हैं भारत हर साल लाखों इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के ग्रेजुएट तैयार करता है, जो अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा अपने कर्मचारियों को H-1B वीजा स्पॉन्सर करती हैं। कहा जाता है कि भारत अमेरिका को सामान से ज्यादा लोग यानी इंजीनियर, कोडर और छात्र एक्सपोर्ट करता है। अब फीस महंगी होने से भारतीय टैलेंट यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मिडिल ईस्ट के देशों की ओर रुख करेगा। ——————– ये खबर भी पढ़ें… US प्रेसिडेंट ट्रम्प का गोल्ड कार्ड वीजा हुआ फ्लॉप:अब तक सिर्फ 1 व्यक्ति ने ही लिया, 1300 आवेदन बेचे जाने का किया था दावा अमेरिका में अब तक केवल एक व्यक्ति ने ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का बहुचर्चित ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा हासिल किया है। गोल्ड कार्ड वीजा में कोई विदेशी 10 लाख डॉलर (9 करोड़ रुपए से ज्यादा) देकर अमेरिका में रहने और काम करने का अधिकार पा सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
‘ममताजी बंगाल में क्या करती हैं, मोदीजी देश में क्या करते हैं’: राहुल गांधी ने ‘अमीर समर्थक’ राजनीति के लिए पीएम और सीएम पर हमला किया | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:26 अप्रैल, 2026, 00:21 IST राहुल ने एक चुनावी रैली के दौरान कहा कि जहां पीएम मोदी दिल्ली में कॉरपोरेट-अनुकूल एजेंडे को बढ़ावा देते हैं, वहीं ममता ने कोलकाता में इसी तरह के ‘अभिजात वर्ग-केंद्रित’ शासन मॉडल को दोहराया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, शनिवार, 25 अप्रैल, 2026 को हुगली जिले में राज्य विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले पार्टी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष और सेरामपुर निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार शुभंकर सरकार के समर्थन में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान सभा का अभिवादन करते हैं। तस्वीर/पीटीआई जैसे ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए उच्च-स्तरीय अभियान चरम पर पहुंच गया है, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों के खिलाफ तीखा हमला शुरू कर दिया है। शनिवार को हुगली, कोलकाता और दक्षिण 24 परगना में रैलियों की एक श्रृंखला को संबोधित करते हुए, गांधी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के समान वैचारिक विचारधारा के साथ काम करने का आरोप लगाया, उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता गरीबों के कल्याण के बजाय सत्ता के संचय और अमीरों के हितों को प्राथमिकता देते हैं। ‘मिरर इमेज’ आरोप लोकसभा में विपक्ष के नेता ने राज्य और केंद्रीय प्रशासन के बीच समानताएं खींचते समय शब्दों में कोई कमी नहीं की। सेरामपुर में एक विशाल सभा में बोलते हुए, गांधी ने कहा कि बंगाल में टीएमसी द्वारा अपनाई गई रणनीति और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की रणनीति के बीच “कोई अंतर नहीं” है। उन्होंने तर्क दिया कि जहां मोदी दिल्ली में कॉर्पोरेट-अनुकूल एजेंडे को बढ़ावा देते हैं, वहीं बनर्जी ने कोलकाता में एक समान “अभिजात वर्ग-केंद्रित” शासन मॉडल को दोहराया है, जिससे राज्य के हाशिए पर रहने वाले समुदायों को पीछे छोड़ दिया गया है। गांधी ने विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला कि उन्होंने मुख्यमंत्री पर केंद्रीय दबाव की कमी बताई। गांधी ने भीड़ से कहा, “मेरे खिलाफ 36 मामले हैं क्योंकि मैं हर दिन भाजपा से लड़ता हूं; ईडी ने मुझसे 55 घंटे तक पूछताछ की और मेरा घर छीन लिया।” “ममताजी के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ? ऐसा इसलिए है क्योंकि वह बंगाल में जो करती हैं, मोदीजी देश में करते हैं। वह प्रभावी रूप से भाजपा के लिए रास्ता साफ कर रही हैं।” ‘अमीर बनाम गरीब’ गतिशीलता पर ध्यान दें गांधीजी की बयानबाजी का केंद्र आर्थिक असमानता का विषय था। उन्होंने दोनों नेताओं पर बाहरी या कॉर्पोरेट हितों द्वारा “नियंत्रित” होने का आरोप लगाया – आरोप लगाया कि प्रधान मंत्री की नीतियां अंतरराष्ट्रीय दबावों से प्रभावित थीं जबकि टीएमसी ने बंगाल में एक दशक तक “औद्योगिक क्षय” की अध्यक्षता की थी। उन्होंने वादा किया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला विकल्प “लोगों के बजट” पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसमें उनकी पार्टी की पांच गारंटियों पर प्रकाश डाला जाएगा, जिसमें महिलाओं के लिए 2,000 रुपये मासिक भत्ता और जिला अस्पतालों में मुफ्त कैंसर इलाज शामिल है। चरण 2 में रणनीतिक बदलाव इस हमले का समय महत्वपूर्ण है. 23 अप्रैल को पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ 92.72% मतदान के बाद, 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण में 142 सीटें शामिल होंगी, जिनमें कोलकाता और उत्तर और दक्षिण 24 परगना के महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्र शामिल हैं। कांग्रेस को टीएमसी और बीजेपी दोनों के लिए एक विशिष्ट तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करके, गांधी उस राज्य में “मध्यम आधार” को फिर से हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसने एक दशक से तीव्र द्विध्रुवीय प्रतियोगिता देखी है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 26 अप्रैल, 2026, 00:21 IST समाचार चुनाव ‘ममताजी बंगाल में क्या करती हैं, मोदीजी देश में क्या करते हैं’: राहुल गांधी ने ‘अमीर समर्थक’ राजनीति के लिए पीएम और सीएम पर हमला किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)राहुल गांधी(टी)नरेंद्र मोदी(टी)कांग्रेस
ग्वालियर में महिला पुलिसकर्मी को पति ने पीटा:पत्नी ड्यूटी पर जाने के लिए वर्दी पहनकर खड़ी थी; घरेलू विवाद पर की मारपीट

ग्वालियर में घरेलू विवाद के चलते महिला आरक्षक को उसके पति ने बेरहमी से पीट दिया। घटना उस समय हुई, जब वह ड्यूटी पर जाने की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान पति ने विवाद शुरू किया और विरोध करने पर मारपीट कर दी। घटना गोला का मंदिर थाना क्षेत्र स्थित रणधीर कॉलोनी की है। मारपीट के बाद आरोपी पति जान से मारने की धमकी देकर मौके से फरार हो गया। पीड़िता 35 वर्षीय प्रतिमा सिंह पत्नी शैलेन्द्र सिंह, जो पीटीएस तिघरा में पदस्थ हैं। उन्होंने ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। गेहूं पिसाने को कहा तो सिर फोड़ा उधर, गोला का मंदिर थाना क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस के पास रहने वाली 28 वर्षीय सपना कुशवाह, पत्नी मंगल कुशवाह ने शिकायत दर्ज कराई है कि वह सूरज वैश्य के मकान में अपने पति के साथ रहती है। आटा खत्म होने पर उसने पति से गेहूं पिसाकर लाने को कहा, जिस पर वह विवाद करने लगा और गाली-गलौज करने लगा। विरोध करने पर पति आपे से बाहर हो गया और लात-घूंसों से मारपीट की। इसके बाद पास पड़ा पत्थर उठाकर उसके सिर पर मार दिया, जिससे उसका सिर फट गया। घटना के बाद आरोपी पति मौके से फरार हो गया। घायल महिला थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
डिजिटल जनगणना प्रशिक्षण से 159 कर्मचारी अनुपस्थित:प्रशासन ने जारी किए कारण बताओ नोटिस, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई

उज्जैन में देश की पहली डिजिटल जनगणना के प्रशिक्षण कार्यक्रम में लापरवाही सामने आई है। प्रशिक्षण सत्रों से अनुपस्थित रहने वाले 159 कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। प्रशासन के अनुसार, जनगणना कार्य के लिए विभिन्न ज़ोन में लगातार प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इसके बावजूद कई कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहे, जिसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया है और यह कार्रवाई की गई है। शनिवार को आयोजित एक कार्यशाला में अपर आयुक्त संतोष टैगोर की उपस्थिति में 168 कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस सत्र के दौरान डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया, डेटा एंट्री और स्वगणना (Self Enumeration) के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि स्वगणना के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जाए, जिससे यह प्रक्रिया सुचारु और तीव्र गति से संपन्न हो सके। इस कार्यक्रम में उपायुक्त मनोज मौर्य, सहायक आयुक्त प्रफुल्ल गठरे और जिला जनगणना प्रभारी तेजिंदर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में भी अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
पिता बांट रहा था शादी के कार्ड…बेटी घर से लापता:उज्जैन पुलिस ने 36 घंटे में भोपाल से युवती को बरामद किया

उज्जैन के पवासा थाना क्षेत्र में एक युवती के लापता होने का मामला सामने आया। जिस बेटी की शादी के कार्ड पिता बांट रहे थे, वही युवती घर से अचानक चली गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 36 घंटे के भीतर उसे भोपाल से बरामद कर लिया। यह घटना 23 अप्रैल की है। युवती के पिता अपनी बड़ी बेटी की शादी के कार्ड बांटने घर से बाहर गए थे। दोपहर करीब 3 बजे परिजनों को पता चला कि युवती बिना बताए घर से चली गई है। रिश्तेदारों और आसपास तलाश करने के बाद कोई सुराग न मिलने पर पवासा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी गमर सिंह मंडलोई के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और साइबर सेल की सहायता से जांच शुरू की। जांच के दौरान युवती के भोपाल में होने की जानकारी प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम भोपाल पहुंची और 25 अप्रैल को रेलवे स्टेशन से युवती को सकुशल बरामद कर उज्जैन ले आई। पूछताछ में युवती ने बताया कि वह पारिवारिक विवाद के कारण अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी। उल्लेखनीय है कि युवती का विवाह 1 मई को तय था। पुलिस की समय पर की गई कार्रवाई से एक संभावित विवाद टल गया, जिससे परिजनों ने राहत महसूस की। युवती के सुरक्षित मिलने पर परिवार और समाज के सदस्यों ने थाने पहुंचकर पुलिस टीम का सम्मान किया और आभार व्यक्त किया। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उनि गमर सिंह मण्डलोई, उनि नितेश मिठौरा, सउनि संतोष राव, प्र.आर. अब्दुल रहीम, आर. पंकज पाटीदार, आर. बृजेंद्र भारती, म.आर. शिवकन्या, म.आर. रीना और साइबर सेल उज्जैन टीम की अहम भूमिका रही।
दमोह-जबलपुर हाईवे पर पिकअप ने बाइक को मारी टक्कर:चार घायलों में से तीन की हालत गंभीर, बलखंड माता मंदिर के पास हुआ हादसा

दमोह-जबलपुर स्टेट हाईवे पर शनिवार शाम करीब 6 बजे एक सड़क हादसा हो गया। नोहटा थाना क्षेत्र के बलखंड माता मंदिर के पास एक पिकअप वाहन ने दो बाइक सवारों को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में चार लोग घायल हो गए, जिनमें से तीन को गंभीर चोटें आई हैं। टक्कर के बाद पिकअप चालक मौके से फरार हो गया, जिससे हाईवे पर कुछ देर के लिए जाम लग गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने पिकअप वाहन को जब्त कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। घायलों की पहचान भन्नू चक्रवर्ती, कीर्ति चक्रवर्ती और रानी चक्रवर्ती के रूप में हुई है। एक अन्य घायल का भी इलाज जारी है, जिसकी पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। जानकारी के अनुसार, पिकअप दमोह से जबलपुर की ओर जा रही थी। वहीं, जलहरी ग्राम से चार लोग एक बाइक पर सवार होकर नोहटा साप्ताहिक बाजार जा रहे थे। बताया जा रहा है कि वे शादी की खरीदारी के लिए निकले थे। बलखंड माता मंदिर के समीप पिकअप चालक ने बाइक सवारों को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक बाइक पिकअप के पहियों के नीचे आ गई, जबकि दूसरी बाइक उछलकर सड़क किनारे जा गिरी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 और नोहटा पुलिस टीम मौके पर पहुंची। नोहटा थाना प्रभारी ने तत्परता दिखाते हुए अपने वाहन और निजी साधनों से सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और फरार पिकअप चालक की तलाश की जा रही है।
विपक्ष के वीटो का अंत? कैसे AAP के पलायन ने राज्यसभा का गणित बीजेपी और एनडीए के पक्ष में फिर से लिख दिया | व्याख्याकार समाचार

आखरी अपडेट:25 अप्रैल, 2026, 19:31 IST इससे पहले, आप का 10 सदस्यीय गुट उच्च सदन में विधेयकों को रोकने की विपक्ष की रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक था। चड्ढा, पाठक और मित्तल शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय गए और सत्तारूढ़ दल में शामिल हो गए। फ़ाइल छवि/एक्स शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सदस्यों के सामूहिक दलबदल ने अरविंद केजरीवाल की विधायी उपस्थिति को कमजोर करने के अलावा और भी बहुत कुछ किया है; इसने उच्च सदन के शक्ति मानचित्र को मौलिक रूप से फिर से तैयार किया है। राघव चड्ढा और संदीप पाठक के नेतृत्व में, समूह ने अयोग्यता का सामना किए बिना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ विलय के लिए आवश्यक “जादुई” दो-तिहाई सीमा हासिल कर ली। संख्याएँ बताती हैं कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अंततः वह मायावी “संपूर्ण नियंत्रण” हासिल कर लिया है जो वह एक दशक से अधिक समय से चाह रहा था। AAP के पलायन के बाद बीजेपी/एनडीए कहां खड़ी है? शुक्रवार के पलायन से पहले, राज्यसभा में भाजपा की ताकत लगभग 106 सदस्यों की थी, जबकि व्यापक एनडीए लगभग 121 पर बैठी थी। राघव चड्ढा, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी और राजेंद्र गुप्ता को मिलाकर “आप सेवन” के स्पष्ट रूप से शामिल होने से भाजपा की व्यक्तिगत ताकत 113 हो गई है। अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि एनडीए की सामूहिक संख्या बढ़कर 128 हो गई है। 243 सदस्यों की कार्यात्मक शक्ति वाले सदन में, बहुमत का निशान 122 है। 128 सीटों के साथ, एनडीए साधारण बहुमत के निशान से आसानी से दूर हो जाएगा। यह एक ऐतिहासिक बदलाव है; एकल-दलीय कांग्रेस के प्रभुत्व के युग के बाद पहली बार, सत्तारूढ़ गठबंधन को अब विवादास्पद सामान्य कानून पारित करने के लिए “तटस्थ” क्षेत्रीय दलों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। दो-तिहाई बहुमत से कितनी दूर है एनडीए? जबकि साधारण बहुमत दिन-प्रतिदिन के शासन के लिए एक बड़ी जीत है, भारतीय संसदीय शक्ति का “पवित्र ग्रेल” संवैधानिक संशोधनों के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत बना हुआ है। 245 के पूर्ण सदन के लिए, यह “सुपर-बहुमत” 164 वोटों पर है। आप के पलायन से मिले अप्रत्याशित लाभ के बावजूद भी एनडीए इस लक्ष्य से 36 सीटें पीछे रह जाएगी। इस अंतर का मतलब यह है कि हालांकि सरकार अब सामान्य विधेयकों को आसानी से पारित कर सकती है, लेकिन बड़े संरचनात्मक बदलावों – जैसे “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की रूपरेखा या परिसीमन प्रक्रिया का औपचारिक ओवरहाल – के लिए अभी भी भाजपा को गुटनिरपेक्ष दलों के साथ पुल बनाने या भविष्य के द्विवार्षिक चक्रों की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता होगी। यह विधायी परिदृश्य को कैसे बदलता है? इस 128 सीटों के प्रभुत्व का तत्काल प्रभाव विपक्षी भारत गुट के लिए “वीटो की मृत्यु” है। इससे पहले, आप का 10 सदस्यीय गुट उच्च सदन में विधेयकों को रोकने की विपक्ष की रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक था। उस गुट के केवल तीन वफादारों तक सिमट जाने से, किसी विधेयक को चयन समिति में भेजने या करीबी विभाजन मत को ट्रिगर करने की विपक्ष की क्षमता लुप्त हो गई है। नरेंद्र मोदी सरकार के लिए, इस स्पष्ट बहुमत का मतलब उच्च-स्तरीय विधायी प्राथमिकताओं के लिए “हरी झंडी” होगा जो सामान्य कानून के अंतर्गत आती हैं। चाहे वह समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का कार्यान्वयन हो या आयकर अधिनियम 2025 में और सुधार हो, सरकार अब अपने एजेंडे को “बुजुर्गों के घर” के माध्यम से उसी गति से आगे बढ़ा सकती है, जिसका वह लोकसभा में आनंद उठाती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 25 अप्रैल, 2026, 19:31 IST समाचार समझाने वाले विपक्ष के वीटो का अंत? कैसे आप के पलायन ने राज्यसभा के गणित को भाजपा और एनडीए के पक्ष में फिर से बना दिया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राघव चड्ढा समाचार(टी)आप(टी)राघव चड्ढा(टी)बीजेपी(टी)राज्यसभा(टी)आम आदमी पार्टी(टी)अरविंद केजरीवाल(टी)पंजाब(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)संदीप पाठक(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)अशोक मित्तल(टी)राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी(टी)राघव चड्ढा ट्विटर(टी)राघव चड्ढा किस पार्टी में शामिल हुए(टी)राघव चड्ढा समाचार आज(टी)राघव चड्ढा(टी)आप राज्य सभा सदस्य(टी)राघव चड्ढा उम्र(टी)राघव चड्ढा फिल्में(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)हरभजन सिंह(टी)राघव चड्ढा(टी)क्या राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)राघव चड्ढा बीजेपी(टी)राघव चड्ढा समाचार(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में(टी)राघव चड्ढा पार्टी(टी)राघव चड्ढा ताजा खबर(टी)राघव चड्ढा कौन सी पार्टी(टी)राघव चड्ढा की पत्नी(टी)परिणीति चोपड़ा
खरगोन में दूल्हे ने बारात से पहले की स्व गणना:कुकडोल में शादी वाले घर पहुंची टीम, 30 अप्रैल तक चलेगा पहला चरण

भारत सरकार की जनगणना 2027 के पहले चरण में खरगोन जिले में स्व-गणना अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, शनिवार को गोगावा तहसील के कुकडोल गांव में एक अनोखा मामला सामने आया, जहाँ एक दूल्हे ने अपनी बारात निकलने से ठीक पहले स्व-गणना फॉर्म भरा। प्रगणक भुरला सोलंकी शादी वाले घर पहुंचे और दूल्हे रोहित धनगर से संपर्क किया। अपनी व्यस्तता के बावजूद, रोहित ने जनगणना में सक्रिय रूप से भाग लिया और अपना स्व-गणना फॉर्म पूरा किया। टीम ने काम पूरा होने पर दूल्हे को उनके दाम्पत्य जीवन में प्रवेश की बधाई दी। रोहित की बारात रविवार को टोकलाय बड़वाह जाएगी। स्वगणना की दो अलग-अलग तस्वीरें 100 परिवारों की स्व-गणना की सुपरवाइजर बाजूसिंह मंडलोई और रूमसिंह खरते के नेतृत्व में इस क्षेत्र में 100 से अधिक परिवारों की स्व-गणना की गई है। प्रगणक टीम में हेमराज पाटीदार, माधुरी पांचाल, बबलू सोलंकी और अशोक पाटीदार सहित अन्य सदस्य शामिल हैं। प्रगणक टीम मजदूरों और अन्य वंचित समूहों से भी संपर्क कर रही है। गोगावा में एक साधु को भी स्व-गणना के महत्व के बारे में समझाया गया। जनगणना के पहले चरण में यह स्व-गणना अभियान 30 अप्रैल तक जारी रहेगा।
मणिपुर में प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़े:सुरक्षाबलों ने रोकने के लिए आंसू गैस के गोले चलाए, CM के घर की ओर मार्च निकाल रहे थे

मणिपुर में स्थायी शांति की मांग कर रहे हजारों लोगों की शनिवार को पुलिस से झड़प हो गई। ये सभी CM आवास की ओर मार्च करने निकले थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के लगाए बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कई गोले दागे। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और तख्तियां थामे हुए बिष्णुपुर जिले में हाल ही में हुए एक बम धमाके में मारे गए दो बच्चों के लिए न्याय और जातीय संघर्ष से प्रभावित आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के पुनर्वास की मांग की। बाद में प्रदर्शनकारियों के एक समूह को CM वाई. खेमचंद सिंह से मिलने की अनुमति दी गई। उन्होंने इस मामले पर एक ज्ञापन सौंपा। 5 तस्वीरें में देखें घटना: रैलियों को रोका, CM के घर की सुरक्षा बढ़ाई प्रदर्शनकारियों ने, मैतेई संगठन COCOMI (कोऑर्डिनेटिंग कमिटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी) के बैनर तले चार अलग-अलग रैलियां निकालीं, जिन्हें अलग-अलग जगहों पर रोक दिया गया। ये बाबूपाड़ा इलाके में CM के बंगले की ओर बढ़ रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि CM के आवास की ओर जाने वाली चारों दिशाओं में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए और बैरिकेड लगाए गए। इंफाल पूर्वी जिले में खुराई लामलोंग में CM के बंगले से करीब 2 किलोमीटर दूर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। आंदोलन और तेज करेंगे COCOMI के संयोजक वाई. के. धीरेन ने CM से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा कि संगठन, जनता के साथ मिलकर, लोगों की मांगों को मनवाने के लिए आंदोलन को और तेज करेगा। उन्होंने कहा कि 3 मई, 2023 से मणिपुर संकट में कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है; उन्होंने आरोप लगाया कि निर्णायक राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है और परस्पर विरोधी बयानों ने शांति प्रयासों में बाधा डाली है। COCOMI के प्रवक्ता नाहकपम शांता सिंह ने इससे पहले कहा था कि संगठन मणिपुर सरकार से 7 अप्रैल को त्रोंगलाओबी में हुए बम धमाके में दो बच्चों की मौत पर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ की मांग करता है। उन्होंने कहा, “इसके साथ ही, हमने कई अन्य मांगें भी उठाई हैं। यदि सरकार जवाब देने में विफल रहती है, तो हम आंदोलन के अन्य लोकतांत्रिक तरीकों को अपनाने के लिए विवश होंगे। 3 मई, 2023 से मणिपुर में इम्फाल घाटी के मैतेई और आस-पास की पहाड़ियों के कुकी समुदायों के बीच हुई जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। मणिपुर में एक साल राष्ट्रपति शासन रहा, 4 फरवरी को नई सरकार बनी मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। यह 2025 के शुरुआती महीनों तक जारी रही। हिंसा के दौरान कई इलाकों में आगजनी, लूट और हत्याओं की घटनाएं हुईं। हजारों लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी, 2025 को इस्तीफा दे दिया था। दो साल से ज्यादा समय तक जारी हिंसा न रोक पाने के कारण उनपर लगातार राजनीतिक दबाव बन रहा था। बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा था। करीब एक साल बाद 4 फरवरी 2026 को मणिपुर में नई सरकार का गठन हुआ। भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। —————————————- ये खबर भी पढ़ें: मणिपुर के उखरुल में फायरिंग से 3 की मौत:मिलिटेंट्स ने कई घर जलाए, नगा-कुकी समुदाय में तनाव; 7 अप्रैल से अब तक 10 मौतें मणिपुर के उखरुल जिले में शुक्रवार सुबह दो अलग-अलग फायरिंग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई। मुल्लम गांव के पास सुरक्षाबलों ने करीब 11:25 बजे दो शव बरामद किए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों आर्मी प्रिंट कपड़ों में थे। पढ़ें पूरी खबर…
रणवीर सिंह को कांतारा विवाद में कोर्ट से राहत:चार हफ्तों में मंदिर जाकर माफी की शर्त, हाईकोर्ट ने केस निपटाने के संकेत दिए

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह ‘कांतारा मिमिक्री विवाद’ में कर्नाटक हाईकोर्ट से राहत की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। कोर्ट ने केस निपटाने के संकेत दिए हैं, लेकिन एक शर्त रखी है। हाईकोर्ट ने अभिनेता को 4 हफ्ते में चामुंडी हिल मंदिर जाकर माफी मांगने को कहा है। रणवीर सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने के लिए याचिका दाखिल की थी। मामला तब सामने आया था, जब उन्होंने गोवा में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) के दौरान ‘कांतारा’ के एक सीन की मिमिक्री की थी। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने ‘चवुंडा दैवा’ पर टिप्पणी की, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक वकील की शिकायत पर FIR दर्ज हुई थी। इसके बाद रणवीर ने कोर्ट का रुख किया और माफी मांगी। सुनवाई में उनके वकील ने कहा कि रणवीर खेद जता चुके हैं और मंदिर जाकर सम्मान प्रकट करने को तैयार हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता ने दलील दी कि अभिनेता की माफी स्पष्ट और ठोस नहीं है। उन्होंने कहा कि “ड्यू कोर्स” जैसे शब्द अस्पष्ट हैं, इसलिए तय समयसीमा होनी चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा कि आदेश में लिखा जाएगा कि रणवीर को चार हफ्तों में मंदिर जाना होगा। सुनवाई में जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा कि अभिनेता के व्यवहार पर टिप्पणी की जाएगी, ताकि भविष्य में सेलिब्रिटी ऐसी घटनाओं को हल्के में न लें। कोर्ट ने संकेत दिया कि केस निपटाते समय चेतावनी दर्ज की जा सकती है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब रणवीर सिंह ने ‘कांतारा’ में ऋषभ शेट्टी के किरदार की नकल करते हुए उसे ‘घोस्ट’ कहा था। इस पर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई, जिसके बाद मामला कानूनी रूप ले गया। अब सभी की नजरें कोर्ट के अंतिम फैसले पर हैं, जो आने वाले दिनों में विवाद को खत्म कर सकता है।







