मीठा खरबूजा: गर्मियों में भूलकर भी न खाएं दूध और खरबूजा, सेहत को हो सकता है नुकसान; जानिए इसके साइड इफेक्ट्स

मीठा खरबूजा: गर्मियों में ठंडक पाने के लिए लोग खरबूजा और दूध खाना पसंद करते हैं। लेकिन इन दोनों का एक साथ मेल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुर्वेद के अनुसार, अलग-अलग नेचर के इन खाद्य पदार्थों का संयोजन पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है। आइए जानते हैं इस संयोजन से क्या-क्या हो सकता है नुकसान। खरबूजा पाउडर और जल्दी पचने वाला फल होता है, जबकि दूध को पचने में सबसे ज्यादा समय लगता है। जब इन दोनों को एक साथ लिया जाता है, तो पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे गैस, अपच और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इस कॉम्बिनेशन को लेने के बाद कई लोगों के शरीर में भारीपन और आलस महसूस होता है। मूल, दोनों खाद्य पदार्थ पदार्थ समूह डी नमूने को धीमी कर देते हैं, जिससे मूल टिकाऊ बनी रह सकती है। आयुर्वेद के अनुसार, अलग-अलग तासीर वाले खाद्य पदार्थ एक साथ खाने से शरीर में टॉक्सिन बन जाते हैं। खरबूजा और दूध का मिश्रण भी इसी तरह आता है, जो लंबे समय तक शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। एलर्जी और पेट से जुड़ी परेशानियाँ कुछ लोगों को इस संयोजन से एलर्जी, एलर्जी-खांसी या त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसके अलावा पेट दर्द और दस्त संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं, खासकर लोगों में पाचन तंत्र खराब हो जाता है। खरबूजा को सही तरीके से खाने का तरीका विशेषज्ञों की सलाह है कि खरबुजे को अकेले ही खाना सबसे अच्छा माना जाता है। अगर आप दूध पिलाना चाहते हैं, तो दोनों के बीच कम से कम 30 से 60 मिनट का अंतर रखना जरूरी है, ताकि सही तरीके से पाचन किया जा सके और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी तरह के खतरे का पता लगाया जा सके।
विधानसभा चुनाव 2026 लाइव: मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी के लिए दी ‘आतंकवादी’ टिप्पणी, अब जानिए क्या कहा

बंगाल में प्रथम चरण की 152वीं पारी को रविवार को प्रचारित किया गया। अब 23 अप्रैल को चरण में 152 क्वार्टर पर वोटिंग होगी। इसी के साथ 23 अप्रैल को एक ही चरण में चमिलनाडु की सभी 234 असेंबली पर वोटिंग होगी। चुनाव आयोग के लिए चुनाव आयोग पूरी तरह से तैयार है। गवर्नर ने मॉल और भयमुक्त विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन नंबर जारी किया पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि ने मंगलवार को घोषणा की कि राज्य में आगामी दो चरण के विधानसभा चुनाव (23 अप्रैल और 29 अप्रैल) को स्वतंत्र, कम्युनिस्ट और भयमुक्त बनाने के लिए 24×7 नागरिक नामांकन शुरू होंगे। गवर्नर कार्यालय की ओर से मंगलवार की शाम को जारी बयान में कहा गया कि पिछले कुछ दिनों में गवर्नर ने आम जनता से कई मुलाकातें कीं, जिसमें लोग चुनाव से पहले और बाद में होने वाली हिंसा को लेकर चिंता व्यक्त करते हैं। बयान में कहा गया है कि कई लोगों ने अपनी पुरानी भावनाएं साझा कीं, जिनमें चुनाव के दौरान हिंसा, परिवार के सदस्यों की हत्या और मतदान से रोके जाने जैसी घटनाएं शामिल थीं। कुछ लोगों ने बताया कि डरने-धमकाने के वोट वोट पर उन्हें शारीरिक हमलों का सामना करना पड़ा। बयान के अनुसार, राज्य प्रशासन और पुलिस ने चुनाव आयोग के तहत सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की हैं, फिर भी लोगों की मदद के लिए स्कॉटलैंड ने 24×7 नामांकन शुरू किया है। इसका पहला उद्देश्य यह है कि हर व्यक्ति बिना किसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के भाग ले सके। सांख्यिकी प्राप्तकर्ताओं ने जल्द ही समाधान खोजने की कोशिश की और लोगों को सही मशीनरी सहायता तक अंतिम सहायता में मदद करने की पेशकश की। सभी साथियों को पूर्ण रूप से बंधन और गोपनीयता के साथ देखा जाएगा। राज्य के सभी कैथोलिकों से अपील की गई है कि वे लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और मतदान अवश्य करें। हर वोट महत्वपूर्ण है. चुनाव आयोग ने पुष्टीसीन अधिकारियों को स्टॉक में उपयोग करने का निर्देश दिया भारत इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग (ईसीआई) ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के अधिकारियों के लिए सभी वोटिंग टिकटों का उपयोग करने के निर्देश जारी किए हैं। आयोग के प्राधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि पेरासीन अधिकारियों से यह जांच और पुष्टि की जानी चाहिए कि बैलेट यूनिट के सभी बटन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं और उनमें कोई विशिष्टता नहीं है। किसी भी बटन को टेप, गोंद या किसी अन्य सामग्री से नहीं मिलाया जाना चाहिए, जिससे मतदान प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो सकती है। आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि बैलेट यूनिट के चॉकलेट बटन पर कोई रंग, शेयर, परफ्यूम या कोई भी केमिकल नहीं लगाया जा सकता है, क्योंकि ऐसी आशंकाओं से सीक्रेसी से समझौता हो सकता है। बंगाल में ‘गजवा-ए-बंगाल’ नहीं होने देंगे- अनुराग ठाकुर पश्चिम बंगाल के हुगली में चुनावी प्रचार के दौरान भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने राज्य की मुख्यमंत्री पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि हम ‘गजवा-ए-बंगाल’ नहीं होने देंगे। बाहर से आए लोग स्थानीय लोगों का अनाज भी खा गए हैं। अनुराग ठाकुर ने कहा कि बंगाल के बबीता से बरातवाद शुरू हुआ. देश के 126 छात्रावासों में छात्रावासों का अनावरण। दस फीसदी आबादी जमा हो गयी. देश में मोदी की सरकार आने के बाद बौद्ध धर्म के खिलाफ कार्रवाई हुई और देश को बौद्ध धर्म से मुक्त कराया गया। अगर हम देश को बौद्धवाद से मुक्त कर सकते हैं तो पश्चिम बंगाल को बांग्लादेशी घुसपैठियों से भी मुक्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी 15 साल से मुख्यमंत्री हैं, लेकिन 5 उपलब्धियां भी मुख्यमंत्री नहीं पा रही हैं। सुबह से शाम तक बस एस तूफान-संचारीआर कर रही थी और अब हर बात पर मछली की बात कर रही है। जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां डॉक्टर-पीने और कपड़े लेकर कोई रोकटोक नहीं है। सभी आज़ादी से रहते हैं। पश्चिम बंगाल में भी अगर हमारी सरकार बनेगी तो सभी को आजादी मिलेगी। ‘चार मई, नैतिकता गई’ के नारे लगाए गए अनुराग ठाकुर ने नारे को जाहिर करते हुए कहा कि अगर ममता बनर्जी नहीं गईं तो रोहिंग्या मुस्लिम भी आएंगे, घुसपैठिए भी आएंगे, आपके मिड डे माइल्स का पैसा भी खाएंगे, कट मनी से पैसा भी खाएंगे और आपका अधिकार और नौकरी भी लेंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हम गजवा-ए-बंगाल नहीं बनेंगे.
अमेरिका ने पाकिस्तान की अपील पर सीजफायर बढ़ाया:ट्रम्प बोले- ईरान में एकजुटता नहीं इसलिए वक्त लग रहा, अभी वहां हमले नहीं करेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका, पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम (सीजफायर) को आगे बढ़ा रहा है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान के अंदर इस समय नेतृत्व और सरकार में एकजुटता नहीं है। ऐसे वक्त में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ ने उनसे ईराम पर कुछ समय तक हमले रोकने की अपील की, ताकि ईरान को साझा प्रस्ताव तैयार करने का वक्त मिल सके। ट्रम्प ने कहा कि इस अपील को मानते हुए उन्होंने अमेरिकी सेना को फिलहाल हमला रोकने का आदेश दिया है। हालांकि, सेना को पूरी तरह तैयार रहने को भी कहा गया है और ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए नाकेबंदी (ब्लॉकेड) जारी रहेगी। उन्होंने साफ किया कि सीजफायर तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान अपनी ओर से एक ठोस और एकजुट प्रस्ताव नहीं दे देता और बातचीत पूरी नहीं हो जाती, चाहे उसका नतीजा कुछ भी निकले। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग गुजर जाइए…
अभिषेक ने कोहली की बराबरी की:9वां टी-20 शतक लगाया, राहुल-नीतीश का कैच पकड़कर मैच पलटा, क्लासन के 100 सिक्स पूरे; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL 2026 के 31वें मैच में दिल्ली कैपिटल्स को 47 रन से हरा दिया। राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में अभिषेक शर्मा ने 9वां टी-20 शतक लगाकर विराट कोहली की बराबरी कर ली। मंगलवार को अभिषेक ने फील्डिंग में भी कमाल दिखाया। उन्होंने केएल राहुल और नीतीश राणा के कैच पकड़कर मैच का रुख पलट दिया। हेनरिक क्लासन ने 100 IPL सिक्स पूरे किए। SRH Vs DC मैच के टॉप रिकॉर्ड्स-मोमेंट्स… 1. अभिषेक ने 184 पारी में 9 टी-20 शतक लगाए अभिषेक शर्मा के टी-20 में 9 शतक पूरे हो गए। उन्होंने यह उपलब्धि 184 पारियों में हासिल की, जो भारतीयों में सबसे तेज है। कोहली को यहां तक पहुंचने में 403 पारियां लगी थीं। टी-20 में ओवरऑल सबसे ज्यादा शतक का रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम है, जिन्होंने 22 शतक लगाए हैं। बाबर आजम (12) और डेविड वॉर्नर (10) उनके बाद हैं। 2. अभिषेक ने 5वीं बार एक पारी में 10+ सिक्स लगाए अभिषेक शर्मा ने टी-20 में पांचवीं बार एक पारी में 10 या उससे ज्यादा छक्के लगाए। वे इस मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। उनसे आगे क्रिस गेल हैं, जिन्होंने 18 बार ऐसा किया है। एविन लुईस और श्रेयस अय्यर ने 4-4 बार यह कारनामा किया है। IPL में यह दूसरी बार है जब अभिषेक ने एक पारी में 10 छक्के लगाए और वे गेल के बाद ऐसा कई बार करने वाले दूसरे बल्लेबाज बने। उन्होंने टी-20 क्रिकेट में 350 छक्के भी पूरे कर लिए। 3. अभिषेक ने केएल राहुल को पीछे छोड़ा अभिषेक शर्मा ने IPL में नाबाद 135 रन बनाकर केएल राहुल (132*) को पीछे छोड़ दिया है। वे IPL के हाईएस्ट इंडविजुअल स्कोरर की लिस्ट में दूसरी बार शामिल हो गए। इससे पहले पिछले साल उन्होंने 141 रन की पारी खेली थी। टी-20 में 130+ स्कोर के मामले में अभिषेक 4 बार के साथ टॉप पर पहुंच गए हैं, जबकि आरोन फिंच और क्रिस गेल ने 3-3 बार यह कारनामा किया है। 4. क्लासन IPL में 100 सिक्स लगाने वाले तीसरे सबसे तेज बल्लेबाज हेनरिक क्लासन IPL में 100 छक्के लगाने वाले तीसरे सबसे तेज बल्लेबाज बन गए। उन्होंने यह उपलब्धि 52 पारियों में हासिल की। उनसे आगे क्रिस गेल (37 पारियां) और आंद्रे रसेल (47 पारियां) हैं। गेंदों के हिसाब से क्लासन 1072 गेंदों में इस आंकड़े तक पहुंचे और सातवें स्थान पर हैं। यहां से टॉप-5 मोमेंट्स… 1. अक्षर पटेल का 100वां टी-20 मैच दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल टीम के लिए अपना 100वां टी-20 मैच खेल रहे हैं। वे 2019 से टीम का हिस्सा हैं और उसी साल 5 करोड़ रुपए में खरीदे गए थे। शानदार प्रदर्शन के चलते उन्हें मेगा नीलामी से पहले 16.50 करोड़ रुपए में रिटेन किया गया। 14 मार्च 2025 को उन्हें टीम की कमान सौंपी गई। 2. अभिषेक की हाफ सेंचुरी, रनआउट होने से बचे 9वें ओवर की पहली बॉल पर अभिषेक शर्मा ने हाफ सेंचुरी पूरी की। उन्होंने अक्षर पटेल की गेंद को लेग साइड में खेलकर दो रन लिए। दूसरे रन पर थ्रो विकेटकीपर केएल राहुल के पास आया, लेकिन वे गेंद को साफ तरीके से कलेक्ट नहीं कर सके। रिप्ले में दिखा कि अगर राहुल गेंद पकड़ लेते, तो अभिषेक क्रीज से बाहर थे। 3. नीतीश राणा ने अभिषेक का कैच छोड़ा 13वें ओवर की तीसरी गेंद पर अभिषेक शर्मा को एक और जीवनदान मिला। टी. नटराजन की लो फुलटॉस पर उन्होंने बैकवर्ड पॉइंट के ऊपर से खेलने की कोशिश की। डीप में खड़े नीतीश राणा बाईं ओर दौड़ते हुए पहुंचे, लेकिन दोनों हाथों से कैच पकड़ने के बावजूद गेंद उनके हाथ से निकल गई। 4. अभिषेक का शतक और ईशान किशन रनआउट 14वें ओवर की दूसरी गेंद पर अभिषेक शर्मा ने छक्का लगाकर शतक पूरा किया। नीतीश राणा की शॉर्ट गेंद को उन्होंने डीप मिडविकेट के ऊपर से पुल किया। इसी ओवर की चौथी गेंद पर ईशान किशन रनआउट हो गए। अभिषेक ने गेंद को सामने खेला, लेकिन नॉन-स्ट्राइकर एंड पर खड़े ईशान काफी आगे निकल चुके थे। नीतीश राणा ने गेंद को स्टंप्स पर डिफ्लेक्ट किया और ईशान समय पर क्रीज में नहीं लौट सके। 5. अभिषेक ने राहुल-राणा के कैच लपके अभिषेक शर्मा ने फील्डिंग में कमाल दिखाते हुए लगातार ओवरों में दो कैच पकड़कर मैच का रुख बदल दिया। 10वें ओवर में ईशान मलिंगा की फुल लेंथ गेंद पर नीतीश राणा ने लॉन्ग-ऑन के ऊपर से शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद सही तरीके से बैट पर नहीं आई। लॉन्ग-ऑन से दौड़ते हुए अभिषेक शर्मा ने आगे स्लाइड कर लो कैच पकड़ा। राणा 30 गेंदों में 57 रन बनाकर आउट हुए। इससे पहले 9वें ओवर में साकिब हुसैन की फुलटॉस गेंद पर केएल राहुल ने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन टाइमिंग सही नहीं रही और गेंद डीप बैकवर्ड स्क्वेयर पर खड़े अभिषेक के हाथों में गई। राहुल 23 गेंदों में 37 रन बनाकर आउट हुए। ——————————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… IPL में आज लखनऊ के सामने राजस्थान:वैभव इस सीजन 20 सिक्स लगा चुके; RR ने LSG के खिलाफ 4 मैच जीते IPL 2026 का 32वां मैच लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और राजस्थान रॉयल्स (RR) के बीच खेला जाएगा। मुकाबला शाम 7:30 बजे लखनऊ के इकाना स्टेडियम में होगा। इस मैदान पर दोनों टीमें दूसरी बार आमने-सामने होंगी। 2024 में यह मुकाबला राजस्थान ने जीता था। पूरी खबर
शूटिंग रोकी तो मधुबाला को कटघरे तक ले पहुंचे बी.आर.चोपड़ा:प्रिंस ने भारत को समझने के लिए इनकी फिल्म देखी, जवाहरलाल नेहरू ने लिखी चिट्ठी

22 अप्रैल 1914 आज से ठीक 112 साल पहले अखण्ड भारत के पंजाब में पीडब्ल्यू डी में सरकारी नौकरी करने वाले विलायती राज चोपड़ा के घर बेटे बलदेव का जन्म हुआ। बलदेव राज चोपड़ा, 6 भाई-बहनों के परिवार में दूसरे नंबर पर थे। पढ़ाई में अव्वल रहने वाले बलदेव के लिए पिता ने बचपन से सोच रखा था कि इसे सरकारी अफसर बनाऊंगा। समय बीता और तैयारी शुरू कर दी गई। पाकिस्तान के लाहौर गवर्नमेंट कॉलेज में इंग्लिश में मास्टर डिग्री लेते हुए उनका इंडियन सिविल सर्विस का फॉर्म भरवाया गया। पिता को उम्मीद थी कि बेटा परीक्षा निकाल लेगा, लेकिन परीक्षा की तारीखों से ठीक पहले बलदेव की तबीयत ऐसी बिगड़ी की पूरी तैयारी में पानी फिर गया। परीक्षा दी, परिणाम आए तो वो फेल हो चुके थे। बलदेव खूब रोए। पिता ने समझाया, कुछ दिनों के लिए लंदन चले जाए, 6 महीनें बाद फिर तारीख है, तब पेपर दे देना। रोते हुए बच्चे ने एक ही जवाब दिया- अब कभी सरकारी नौकरी नहीं करूंगा। सरकारी नौकरी का सपना चूर-चूर हो गया, लेकिन किसे पता था कि वही लड़का एक दिन हिंदी सिनेमा में इतिहास रच देगा। वो फेल होने वाला लड़का था बलदेव राज चोपड़ा, जिसे देश बी.आर.चोपड़ा नाम से जानता है। जिसकी फिल्मों की तारीफ तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तक किया करते थे। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दंगों के बीच हिंदी सिनेमा में कदम रखने वाले बी.आर.चोपड़ा ने हमराज, नया दौर, साधना, निकाह, कानून जैसी कई सुपरहिट फिल्में बनाईं। समय से आगे चलने वाली कहानियां और सस्पेंस, किरदारों की कहानियों ने दर्शकों को खूब बांधे रखा और फिर 1988 में उन्होंने टीवी शो महाभारत बनाया, तो भगवान और पौराणिक कथा को घर-घर पहुंचातकर इतिहास ही रच दिया। लोग शो शुरू होने से पहले चप्पल उतारकर, जमीन पर हाथ जोड़े बैठते, तो कुछ टीवी की आरती उतारते। वो शो, जिसके नाम आज भी विश्व रिकॉर्ड है। इस कामयाबी के सफर में बी.आर.चोपड़ा की जिद और स्वाभिमान भी चर्चा में रहा। कभी शूटिंग में खलल पैदा करने वालीं मधुबाला को कठघरे में खड़ा किया, तो कभी गोविंदा जैसे स्टार को ऑफिस से बाहर भगाय दिया। बी.आर. चोपड़ा की आज 112 वीं बर्थ एनिवर्सरी है, इस खास मौके पर पढ़िए, उनके फिल्मों में आने और इतिहास रचने से जुड़े कुछ चुनिंदा किस्से- किस्सा-1, अखबार के लिए लिखते थे, दोस्तों के कहने पर फिल्म बनाई तो हुआ नुकसान कॉलेज के दिनों में बी.आर.चोपड़ा ने कलकत्ता के वैराइटी अखबार के लिए लिखना शुरू कर दिया। उनका पहला आर्टिकल फिल्मों पर था। एक आर्टिकल में फिल्म बनाने वाले कलाकारों को ललकारते हुए उन्होंने लिखा, कुछ अच्छा बनाओ, कहानी डालो, समाज को बताओ की समाज में क्या चल रहा है, क्या दिक्कतें हैं। आर्टिकल कलकत्ता भेजा, लेकिन वो छपा ही नहीं। अगले 3 आर्टिकल भी छपे नहीं। तीसरे हफ्ते उन्हें एक पार्सल मिला, जिसमें वैराइटी अखबार की एक प्रति थी, जिसमें उनके पिछले तीनों आर्टिक्ल थे। इसके साथ एडिटर का एक माफीनामा भी था। लिखने का सिलसिला चल निकला। 1944 में बी.आर.चोपड़ा न्यू स्टार फिल्म प्रोडक्शन कंपनी की सिने हैराल्ड मैगजीन के लिए लिखने लगे। जब आजादी की लड़ाई से तनाव बढ़ने लगा, तो बचने के लिए बी.आर.चोपड़ा जालंधर के पैतृक घर में रहने लगे। वहां 150 लोग और ठहरे हुए थे। एक रोज पिता के कुछ दोस्तों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की फिल्मों में पैसे लगाने का सुझाव दिया। 5 दोस्त और जुड़ गए। सभी ने फिल्म करवट बनाई, जो बुरी तरह फ्लॉप हो गई। बी.आर.चोपड़ा की पूरी कमाई खत्म हो गई। किस्सा-2, नुकसान के बाद फिर अखबार में काम करने की अर्जी दी फिल्म प्रोडक्शन में नुकसान होने के बाद बी.आर.चोपड़ा ने तय किया कि अब वो अखबार में काम करेंगे। तब हिंदुस्तान टाइम्स के एडिटर उनके अंकल दुर्गा दास थे। खत लिखा, तो जवाब मिला, बॉम्बे आ जाओ, लेकिन हारकर मत आना। बी.आर.चोपड़ा सोच में थे कि क्या किया जाए, वो पैरिसियन कैफे में चाय पीने गए। चाय पी ही रहे थे कि आवाज आई- अरे चोपड़ा साहब क्या कर रहे हैं। उन्होंने थकी सी आवाज में कहा- चाय पी रहे हैं। उस शख्स ने फिर कहा- क्या कर रहा है तू। इस पर बी.आर.चोपड़ा ने गुस्से में कहा- कर ही क्या सकता हूं, न पैसा है न ढेला है, न अनुभव है। कहां से करूं कुछ। इस पर उस शख्स ने कहा- एक काम कर, कुछ तो कर। स्टोरी ले ले कम से कम। वो शख्स थे, आई.एस.जौहर। उस दौर के जाने-माने एक्टर और कॉमेडियन। उस स्टोरी पर बी.आर.चोपड़ा ने लाहौर में फिल्म चांदनी चौक बनाना शुरू किया। शूटिंग शुरू हुई ही थी कि बंटवारे में दंगे ऐसे भड़के की शूटिंग बंद करनी पड़ी। वो बॉम्बे जाकर बसे, जहां दोस्तों की सलाह पर उन्होंने दोबारा फिल्ममेकिंग शुरू की। दो नाकामी के बाद 1951 की उनकी बतौर डायरेक्टर फिल्म अफसाना चल निकली। इस फिल्म में अशोक कुमार ने डबल रोल निभाया। कहा जाता है कि डबल रोल का ट्रेंड यही फिल्म लाई थी। ये फिल्म पहले दिलीप कुमार को ऑफर हुई थी, लेकिन उन्होंने ये कहते हुए इनकार कर दिया कि वो जज के रोल में फिट नहीं बैठेंगे। आगे बी.आर.चोपड़ा ने हमराज, कानून जैसी कई हिट फिल्में बनाईं। किस्सा-3, संजीव कुमार ने ठंडे-ठंडे पानी से गाने में वजन घटाने का वादा कर वजन बढ़ाया साल 1978 में बी.आर.चोपड़ा ने फिल्म पति पत्नी और वो बनाई, जिसमें संजीव कुमार लीड रोल में थे। फिल्म का गाना ठंडे-ठंडे पानी में के लिए संजीव कुमार को शर्टलेस होकर बच्चे के साथ बैठकर नहाना था। बिना कपड़ो के बैठने में संजीव कुमार का पेट काफी दिख रहा था। उन्होंने शूटिंग शुरू होने के बाद बी.आर.चोपड़ा से कहा, देखिए, मेरा पेट बहुत निकल गया है, क्यों न हम इस गाने की शूटिंग आखिर में करें। तब तक मैं वजन घटा लूंगा। बी.आर.चोपड़ा उनकी जिद पर मान गए। अगले ही दिन से संजीव कुमार ने डाइटिंग शुरू कर दी। अगले दिन सेट पर उनके लिए खाने में सिर्फ सलाद और सूप आया। उन्होंने खाना खाया और बी.आर.चोपड़ा से कहा- चोपड़ा अब मैं थोड़ी देर सो जाता हूं। थोड़ी देर बाद चोपड़ा साहब का लंच आया। जैसे ही वो खोला गया, तो उसमें फिश करी और
शूटिंग रोकी तो मधुबाला को कटघरे तक ले पहुंचे बी.आर.चोपड़ा:प्रिंस ने भारत को समझने के लिए इनकी फिल्म देखी, जवाहरलाल नेहरू ने लिखी चिट्ठी

22 अप्रैल 1914 आज से ठीक 112 साल पहले अखण्ड भारत के पंजाब में पीडब्ल्यू डी में सरकारी नौकरी करने वाले विलायती राज चोपड़ा के घर बेटे बलदेव का जन्म हुआ। बलदेव राज चोपड़ा, 6 भाई-बहनों के परिवार में दूसरे नंबर पर थे। पढ़ाई में अव्वल रहने वाले बलदेव के लिए पिता ने बचपन से सोच रखा था कि इसे सरकारी अफसर बनाऊंगा। समय बीता और तैयारी शुरू कर दी गई। पाकिस्तान के लाहौर गवर्नमेंट कॉलेज में इंग्लिश में मास्टर डिग्री लेते हुए उनका इंडियन सिविल सर्विस का फॉर्म भरवाया गया। पिता को उम्मीद थी कि बेटा परीक्षा निकाल लेगा, लेकिन परीक्षा की तारीखों से ठीक पहले बलदेव की तबीयत ऐसी बिगड़ी की पूरी तैयारी में पानी फिर गया। परीक्षा दी, परिणाम आए तो वो फेल हो चुके थे। बलदेव खूब रोए। पिता ने समझाया, कुछ दिनों के लिए लंदन चले जाए, 6 महीनें बाद फिर तारीख है, तब पेपर दे देना। रोते हुए बच्चे ने एक ही जवाब दिया- अब कभी सरकारी नौकरी नहीं करूंगा। सरकारी नौकरी का सपना चूर-चूर हो गया, लेकिन किसे पता था कि वही लड़का एक दिन हिंदी सिनेमा में इतिहास रच देगा। वो फेल होने वाला लड़का था बलदेव राज चोपड़ा, जिसे देश बी.आर.चोपड़ा नाम से जानता है। जिसकी फिल्मों की तारीफ तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तक किया करते थे। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दंगों के बीच हिंदी सिनेमा में कदम रखने वाले बी.आर.चोपड़ा ने हमराज, नया दौर, साधना, निकाह, कानून जैसी कई सुपरहिट फिल्में बनाईं। समय से आगे चलने वाली कहानियां और सस्पेंस, किरदारों की कहानियों ने दर्शकों को खूब बांधे रखा और फिर 1988 में उन्होंने टीवी शो महाभारत बनाया, तो भगवान और पौराणिक कथा को घर-घर पहुंचातकर इतिहास ही रच दिया। लोग शो शुरू होने से पहले चप्पल उतारकर, जमीन पर हाथ जोड़े बैठते, तो कुछ टीवी की आरती उतारते। वो शो, जिसके नाम आज भी विश्व रिकॉर्ड है। इस कामयाबी के सफर में बी.आर.चोपड़ा की जिद और स्वाभिमान भी चर्चा में रहा। कभी शूटिंग में खलल पैदा करने वालीं मधुबाला को कठघरे में खड़ा किया, तो कभी गोविंदा जैसे स्टार को ऑफिस से बाहर भगाय दिया। बी.आर. चोपड़ा की आज 112 वीं बर्थ एनिवर्सरी है, इस खास मौके पर पढ़िए, उनके फिल्मों में आने और इतिहास रचने से जुड़े कुछ चुनिंदा किस्से- किस्सा-1, अखबार के लिए लिखते थे, दोस्तों के कहने पर फिल्म बनाई तो हुआ नुकसान कॉलेज के दिनों में बी.आर.चोपड़ा ने कलकत्ता के वैराइटी अखबार के लिए लिखना शुरू कर दिया। उनका पहला आर्टिकल फिल्मों पर था। एक आर्टिकल में फिल्म बनाने वाले कलाकारों को ललकारते हुए उन्होंने लिखा, कुछ अच्छा बनाओ, कहानी डालो, समाज को बताओ की समाज में क्या चल रहा है, क्या दिक्कतें हैं। आर्टिकल कलकत्ता भेजा, लेकिन वो छपा ही नहीं। अगले 3 आर्टिकल भी छपे नहीं। तीसरे हफ्ते उन्हें एक पार्सल मिला, जिसमें वैराइटी अखबार की एक प्रति थी, जिसमें उनके पिछले तीनों आर्टिक्ल थे। इसके साथ एडिटर का एक माफीनामा भी था। लिखने का सिलसिला चल निकला। 1944 में बी.आर.चोपड़ा न्यू स्टार फिल्म प्रोडक्शन कंपनी की सिने हैराल्ड मैगजीन के लिए लिखने लगे। जब आजादी की लड़ाई से तनाव बढ़ने लगा, तो बचने के लिए बी.आर.चोपड़ा जालंधर के पैतृक घर में रहने लगे। वहां 150 लोग और ठहरे हुए थे। एक रोज पिता के कुछ दोस्तों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की फिल्मों में पैसे लगाने का सुझाव दिया। 5 दोस्त और जुड़ गए। सभी ने फिल्म करवट बनाई, जो बुरी तरह फ्लॉप हो गई। बी.आर.चोपड़ा की पूरी कमाई खत्म हो गई। किस्सा-2, नुकसान के बाद फिर अखबार में काम करने की अर्जी दी फिल्म प्रोडक्शन में नुकसान होने के बाद बी.आर.चोपड़ा ने तय किया कि अब वो अखबार में काम करेंगे। तब हिंदुस्तान टाइम्स के एडिटर उनके अंकल दुर्गा दास थे। खत लिखा, तो जवाब मिला, बॉम्बे आ जाओ, लेकिन हारकर मत आना। बी.आर.चोपड़ा सोच में थे कि क्या किया जाए, वो पैरिसियन कैफे में चाय पीने गए। चाय पी ही रहे थे कि आवाज आई- अरे चोपड़ा साहब क्या कर रहे हैं। उन्होंने थकी सी आवाज में कहा- चाय पी रहे हैं। उस शख्स ने फिर कहा- क्या कर रहा है तू। इस पर बी.आर.चोपड़ा ने गुस्से में कहा- कर ही क्या सकता हूं, न पैसा है न ढेला है, न अनुभव है। कहां से करूं कुछ। इस पर उस शख्स ने कहा- एक काम कर, कुछ तो कर। स्टोरी ले ले कम से कम। वो शख्स थे, आई.एस.जौहर। उस दौर के जाने-माने एक्टर और कॉमेडियन। उस स्टोरी पर बी.आर.चोपड़ा ने लाहौर में फिल्म चांदनी चौक बनाना शुरू किया। शूटिंग शुरू हुई ही थी कि बंटवारे में दंगे ऐसे भड़के की शूटिंग बंद करनी पड़ी। वो बॉम्बे जाकर बसे, जहां दोस्तों की सलाह पर उन्होंने दोबारा फिल्ममेकिंग शुरू की। दो नाकामी के बाद 1951 की उनकी बतौर डायरेक्टर फिल्म अफसाना चल निकली। इस फिल्म में अशोक कुमार ने डबल रोल निभाया। कहा जाता है कि डबल रोल का ट्रेंड यही फिल्म लाई थी। ये फिल्म पहले दिलीप कुमार को ऑफर हुई थी, लेकिन उन्होंने ये कहते हुए इनकार कर दिया कि वो जज के रोल में फिट नहीं बैठेंगे। आगे बी.आर.चोपड़ा ने हमराज, कानून जैसी कई हिट फिल्में बनाईं। किस्सा-3, संजीव कुमार ने ठंडे-ठंडे पानी से गाने में वजन घटाने का वादा कर वजन बढ़ाया साल 1978 में बी.आर.चोपड़ा ने फिल्म पति पत्नी और वो बनाई, जिसमें संजीव कुमार लीड रोल में थे। फिल्म का गाना ठंडे-ठंडे पानी में के लिए संजीव कुमार को शर्टलेस होकर बच्चे के साथ बैठकर नहाना था। बिना कपड़ो के बैठने में संजीव कुमार का पेट काफी दिख रहा था। उन्होंने शूटिंग शुरू होने के बाद बी.आर.चोपड़ा से कहा, देखिए, मेरा पेट बहुत निकल गया है, क्यों न हम इस गाने की शूटिंग आखिर में करें। तब तक मैं वजन घटा लूंगा। बी.आर.चोपड़ा उनकी जिद पर मान गए। अगले ही दिन से संजीव कुमार ने डाइटिंग शुरू कर दी। अगले दिन सेट पर उनके लिए खाने में सिर्फ सलाद और सूप आया। उन्होंने खाना खाया और बी.आर.चोपड़ा से कहा- चोपड़ा अब मैं थोड़ी देर सो जाता हूं। थोड़ी देर बाद चोपड़ा साहब का लंच आया। जैसे ही वो खोला गया, तो उसमें फिश करी और
भोपाल की गैस एजेंसी में गड़बड़ी, FIR की तैयारी:खाद्य विभाग ने एडीएम को सौंपी रिपोर्ट; एक एजेंसी रिटायर्ड अफसर की

भोपाल के जेके रोड स्थित फीनिक्स एचपीसीएल और कोटरा सुल्तानाबाद स्थित बीएस एचपी गैस एजेंसियों की जांच पूरी हो गई है। इसके बाद खाद्य विभाग ने जांच रिपोर्ट एडीएम प्रकाश नायक को सौंपी है। दो में से एक एजेंसी खाद्य विभाग के ही रिटायर्ड अफसर और उनके रिश्तेदारों की बताई जा रही है। बता दें कि एजेंसियों में गैस सिलेंडर की सप्लाई की शिकायत मिली थी। इसके बाद फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने टीम से जांच करवाई थी। जांच में सामने आया कि करीब 36 हजार वर्गफीट क्षेत्र में दोनों एजेंसियों के साझा गोदाम बने हैं। स्टॉक जांच में सबसे बड़ी गड़बड़ी फीनिक्स एजेंसी में मिली। यहां 350 घरेलू, 350 कमर्शियल, और 2 हजार 5 किलोग्राम वाले छोटू सिलेंडर गायब थे। बीएस एजेंसी के गोदाम में भी 254 भरे सिलेंडर गायब मिले। यहां कमर्शियल सिलेंडरों के स्टॉक में भी गड़बड़ी सामने आई। जांच में एजेंसियां रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी बीपी शर्मा और उनके रिश्तेदारों की होना सामने आया है। सिलेंडर बुक हुए, लेकिन ग्राहकों तक पहुंचे ही नहीं जांच में सामने आया कि गैस एजेंसियों के संचालकों ने बड़ी संख्या में सिलेंडरों का हेरफेर किया है। जिन्होंने ऑनलाइन गैस सिलेंडर बुक कराए थे, एजेंसियों की ओर से उन उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं पहुंचाए। जब उपभोक्ता एजेंसियों पर पहुंचे तो पता चला कि उनको सिलेंडर की डिलीवरी हो गई है, जबकि उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंचे ही नहीं थे। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सिलेंडर अधिक पैसे लेकर किसी और को दिए गए। एजेंसियों के गोदाउन में स्टॉक के अनुसार भी सिलेंडर नहीं पाए गए। इतना नहीं शहर इन एजेंसियों की अलावा अन्य एजेंसियों व अवैध परिवहन, अवैध रिफिलिंग करने वालों की भी जांच रिपोर्ट एडीएम को दी गई है। 10 से 12 मामलों की जांच रिपोर्ट सौंपी गई है। ऐसे में इन एजेंसियों के संचालकों व अवैध गैस सिलेंडरों का परिवहन व रिफिलिंग करने वालों पर जुर्माना व एफआईआर तक कार्रवाई हो सकती है। एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के अनुमोदन पर एडीएम संबंधित गैस कंपनियों को एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव जल्द भेजा सकता है। 238 रुपए का फर्जी सुरक्षा चार्ज, 10 लाख की वसूली उजागर जेके रोड स्थित मीनाल रेसिडेंसी की मेसर्स फिनिक्स एचपीसीएल गैस एजेंसी में 10 तरह की गड़बड़ियां मिली हैं। जानिए क्या हैं वो 10 प्रकार की गड़बड़ियां, इनके जरिए कैसे उपभोक्ताओं के साथ की गई ठगी— 1- जेके रोड मिनाल स्थित मेसर्स फिनिक्स एचपी गैस एजेंसी में 15 अप्रैल 2026 को 250 से ज्यादा उपभोक्ताओं के ओटीपी के आधार पर ऑनलाइन बिल जनरेट किए गए। लेकिन उपभोक्ताओं को ऑफलाइन बिल 16 अप्रैल का काटकर दिया गया। लोगों को होम डिलीवरी की जगह एजेंसी के पीछे खड़े ट्रकों से सिलेंडर दिए गए। 2- मौके पर पाया गया कि एजेंसी द्वारा 16 अप्रैल 2026 को उपभोक्ताओं से प्रति सिलेंडर 918 रुपए लिए गए, जिसमें होम डिलीवरी शुल्क भी शामिल था। जबकि मौके पर सिलेंडर देने पर 34 रुपए घटाकर नया बिल दिया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं किया गया। इससे अनुमान है कि हर महीने 10 से 12 हजार सिलेंडरों में से 6 हजार सिलेंडरों पर ‘कैश एंड कैरी’ के नाम पर करीब 2 लाख रुपए अवैध वसूली की गई। 3- एजेंसी के पीछे खाली मैदान में सिलेंडर वितरण के दौरान सुरक्षा निरीक्षण (मेंटेटरी इंस्पेक्शन) के नाम पर 238 रुपए लेकर कैश मेमो दिया गया। जबकि यह निरीक्षण उपभोक्ता के घर जाकर किया जाना चाहिए था। एजेंसी ने बिना निरीक्षण के ही राशि ली और बिल जारी करने को इस भुगतान से जोड़ दिया। करीब 25 हजार कनेक्शन में से 5 हजार उपभोक्ताओं से लगभग 10 लाख रुपए वसूले गए। 4- बुकिंग के बाद भी उपभोक्ताओं को घर पर सिलेंडर नहीं पहुंचाया गया, लेकिन मोबाइल पर ‘डिलीवर्ड’ का मैसेज भेज दिया गया। जांच में सामने आया कि ऐसे सिलेंडर डिलीवरी कर्मियों द्वारा अन्य जगहों पर बेच दिए गए। एजेंसी ने सफाई दी कि उपभोक्ता घर पर नहीं मिले, जो सही नहीं पाया गया। 5- 1 अप्रैल से जांच तक करीब 2 हजार ऑनलाइन बुकिंग लंबित मिलीं। उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं दिया गया और उन्हें वेटिंग में रखा गया। 6- 9 अप्रैल को जारी इनवॉइस का लोड 10 अप्रैल को मिला, लेकिन 15 अप्रैल तक नया लोड नहीं आया। एचपीसीएल के विक्रय अधिकारी के अनुसार एजेंसी ने ओटीपी सिस्टम का पालन नहीं किया और बिना ओटीपी के बिक्री दर्ज कर सिलेंडर अन्य जगह बेच दिए। इसी कारण कंपनी ने सप्लाई रोक दी थी। 7- अप्रैल 2026 में डिपो पीलूखेड़ी (जिला राजगढ़) से 11 ट्रकों की जानकारी दी गई। दूरी के हिसाब से 2–2.5 घंटे लगने चाहिए थे, लेकिन ट्रक 24 घंटे बाद पहुंचे। 11 में से 10 बार ऐसा हुआ, जिससे बीच में ट्रक कहां रुके—यह संदिग्ध है। 8- एजेंसी ने 9 डिलीवरी वाहन बताए, लेकिन मौके पर केवल 5 ही सक्रिय मिले। 9- स्टॉक में गड़बड़ी मिली—करीब 2 हजार छोटे सिलेंडर गायब पाए गए, जबकि 40 घरेलू सिलेंडर अतिरिक्त मिले। 10- 17 अप्रैल को नीलबड़ हरिनगर स्थित गोदाम की आकस्मिक जांच में स्टॉक और कैश एंड कैरी रेट का प्रदर्शन नहीं मिला। गोदाम करीब 36 हजार वर्गफुट क्षेत्र में है, जहां दो गोदाम संचालित हैं। दूसरा गोदाम बीएस सर्विसेस गैस एजेंसी (कोटरा सुल्तानाबाद) का है, जो एचपीसीएल की ही सिस्टर कंपनी है। दोनों गोदाम आवासीय क्षेत्र से सटे पाए गए। बीएस सर्विसेस के संचालक सुयश शर्मा पाए गए, जिनकी भी जांच की गई।
ग्वालियर में ई-रिक्शा से सवा दो लाख के गहने चोरी:दिल्ली का व्यवसायी पत्नी के साथ आदित्यपुरम जा रहा था, दो संदेही महिलाओं ने की वारदात

ग्वालियर में ई-रिक्शा में गहने चोरी की एक और वारदात सामने आई है। इस बार दिल्ली के सराफा व्यवसायी निशाना बने। वह पत्नी और बच्चों के साथ गोला का मंदिर से ससुराल आदित्यपुरम जा रहे थे। रास्ते में दो महिलाएं ई-रिक्शा में सवार हुईं और डीडी नगर गेट के पास उतर गईं। कुछ देर बाद व्यापारी की पत्नी ने बैग देखा तो चेन खुली मिली। जांच करने पर गहनों का पाउच गायब था। घटना दो दिन पहले की है। पुलिस ने अब मामला दर्ज कर संदिग्ध महिलाओं की तलाश शुरू कर दी है। मुरैना निवासी 32 वर्षीय भारत सिंह राठौर, पिता रमेश सिंह राठौर, दिल्ली में ज्वेलरी का कारोबार करते हैं। वह बहन के ससुर के निधन पर मुरैना आए थे और कार्यक्रम के बाद पत्नी के साथ आदित्यपुरम स्थित ससुराल जा रहे थे। गोला का मंदिर पर बस से उतरने के बाद उन्होंने ई-रिक्शा (MP 07 ZJ 0250) लिया। कुछ दूरी पर दो महिलाएं भी उसमें बैठ गईं। डीडी नगर गेट के पास उतरने के बाद किराया देकर वे आगे बढ़े। तभी बैग की चेन खुली दिखी। बैग चेक करने पर गहने गायब मिले। उन्होंने तुरंत डायल 112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें थाने ले गई। दो दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर पीड़ित के अनुसार, दो दिन तक थाने के चक्कर लगाने के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस कप्तान से शिकायत की, तब जाकर मामला दर्ज किया गया। यह सामान हुआ चोरी पीड़ित ने बताया कि बैग से एक मंगलसूत्र, तीन सोने की अंगूठियां, कान के सुई-धागा और 18,500 रुपए चोरी हुए हैं। शक है कि वारदात उन्हीं महिलाओं ने की, जो रास्ते में ई-रिक्शा में सवार हुई थीं।
Health Tips: गर्म खाना एल्युमिनियम फॉयल में रखना पड़ सकता है भारी, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

Last Updated:April 21, 2026, 23:20 IST रोटी और खाना पैक करने के लिए एल्युमिनियम फॉयल आसान विकल्प लगता है, लेकिन इसका रोजाना इस्तेमाल सही नहीं माना जाता. खासकर गर्म खाने के साथ यह आदत सेहत पर असर डाल सकती है. ख़बरें फटाफट हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसी आदतें शामिल होती हैं, जिन्हें हम सालों से बिना ज्यादा सोचे अपनाते आ रहे हैं. खासकर रसोई से जुड़ी परंपराएं अक्सर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलती रहती हैं. इन्हीं में से एक आदत है रोटी, पराठा या स्नैक्स को अखबार में लपेटकर रखना. समय बदला तो अखबार की जगह एल्युमिनियम फॉयल ने ले ली, लेकिन क्या ये दोनों तरीके सच में सुरक्षित हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, सुविधा के लिए अपनाई गई ये आदतें सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं. अखबार देखने में आसान विकल्प लगता है, लेकिन इसमें छपी स्याही और प्रिंटिंग केमिकल्स खाने के संपर्क में आ सकते हैं. खासतौर पर गरम, तैलीय या नम खाने की चीजें जब अखबार पर रखी जाती हैं, तो स्याही के कुछ तत्व भोजन में ट्रांसफर हो सकते हैं. यही वजह है कि कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ खाने को सीधे अखबार पर रखने से बचने की सलाह देते हैं. अक्सर बाजार में समोसा, पकौड़े, जलेबी या अन्य स्नैक्स अखबार में लपेटकर दिए जाते हैं. लोग इसे सामान्य मानते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा खाना खाने से अनचाहे रसायनों के शरीर में जाने की संभावना बढ़ सकती है. इसका असर तुरंत महसूस न हो, लेकिन लंबे समय में यह आदत बेहतर नहीं मानी जाती. एल्युमिनियम फॉयल भी हर बार सही विकल्प नहींकई लोग सोचते हैं कि फॉयल अखबार से बेहतर और पूरी तरह सुरक्षित है. हालांकि फॉयल कई मामलों में ज्यादा साफ-सुथरा विकल्प माना जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल भी समझदारी से करना चाहिए. जब बहुत गरम, खट्टा या ज्यादा मसालेदार खाना लंबे समय तक फॉयल में रखा जाता है, तो एल्युमिनियम की थोड़ी मात्रा भोजन में मिल सकती है. यह मात्रा सामान्य तौर पर कम होती है, लेकिन रोजाना और बार-बार ऐसा करना आदत बन जाए तो इससे बचना बेहतर माना जाता है. खासतौर पर गर्म खाने को सीधे फॉयल में पैक करके लंबे समय तक रखने से परहेज करना चाहिए. कौन-कौन सी चीजें ज्यादा रिस्की हैंनींबू वाला खाना, टमाटर आधारित डिश, इमली, सिरके वाली सब्जियां या बहुत मसालेदार व्यंजन फॉयल के साथ ज्यादा प्रतिक्रिया कर सकते हैं. इसी तरह गरमा-गरम पराठे या तैलीय स्नैक्स अखबार में लपेटना भी अच्छा विकल्प नहीं है. अगर आप खाना पैक करना चाहते हैं या गर्म रोटी रखना चाहते हैं, तो स्टील के डिब्बे, कांच के कंटेनर या फूड-ग्रेड डिब्बे अच्छे विकल्प हैं. इसके अलावा साफ सूती कपड़ा, मलमल का कपड़ा या फूड-सेफ पेपर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. रोटी रखने के लिए कपड़े का डिब्बा या इंसुलेटेड कैसरोल भी अच्छा रहता है. इससे रोटी नरम भी रहती है और अनावश्यक केमिकल संपर्क से भी बचाव होता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 21, 2026, 23:20 IST
‘मछली की राजनीति’: बंगाल अभियान के दौरान अनुराग ठाकुर ने खाया ‘माछ भात’; टीएमसी, आप पर निशाना | भारत समाचार

आखरी अपडेट:21 अप्रैल, 2026, 22:38 IST अनुराग ठाकुर और अन्य भाजपा नेताओं को ममता बनर्जी के इस कथन का मुकाबला करने के लिए मछली और चावल खाते देखा गया कि भाजपा बंगाल में मछली खाने पर प्रतिबंध लगाएगी। मछली-चावल खाते बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर और अन्य नेता. (फोटो: एक्स) बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर और पार्टी के अन्य नेताओं ने मंगलवार को मछली और चावल का लुत्फ उठाया (माछ भात) पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के प्रचार के अंतिम दिन, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस दावे का मुकाबला करने के लिए कि भाजपा सत्ता में आने पर मछली पर प्रतिबंध लगाएगी। वीडियो में ठाकुर और अन्य भाजपा नेता खाना खाते दिख रहे हैं शोरशे माछ भात (सरसों की ग्रेवी और चावल में मछली) ने रेखांकित किया कि कैसे यह व्यंजन बंगाली पहचान और राजनीति का केंद्र बन गया है। भाजपा की बंगाल इकाई लोगों को यह समझाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है कि वह मछली खाने के विरोध में नहीं है। अनुराग ठाकुर ने कोलकाता में संवाददाताओं से कहा, “हम मांस, मछली और चावल खा रहे हैं। भाजपा की 16 राज्यों में सरकार है, एनडीए की 20 राज्यों में सरकार है और कहीं भी किसी के भाषण, भोजन या पूजा पर कोई प्रतिबंध नहीं है।” उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी के पास 15 साल में कोई उपलब्धि नहीं है, इसलिए वह भय, भ्रम और अफवाह फैलाने का सहारा ले रही हैं। वे घुसपैठ, भ्रष्टाचार नहीं रोक सके, रोजगार नहीं दे सके। 4 मई आएगी और टीएमसी हटा दी जाएगी।” टीएमसी, आप स्वाइप लें इस बीच, AAP विधायक संजीव झा ने भगवा पोशाक पहनकर मछली खाने पर अनुराग ठाकुर पर कटाक्ष किया, उन्होंने भाजपा पर अन्य राज्यों में मांस और मछली की दुकानें बंद करने और राजनीतिक लाभ के लिए बंगाल में एक अलग रुख अपनाने का आरोप लगाया। “देखो वह मंगलवार को कैसे मछली खा रहा है, भगवा पहने हुए और चंदन का टीका लगाए हुए! ये वही लोग हैं जो दिल्ली और अन्य शहरों में मांस और मछली की दुकानों को बंद करवाते रहते हैं। अब जब बंगाल के चुनाव आ गए हैं, तो प्रधान मंत्री ने जाकर सभी पर मछली खाना थोप दिया है। सत्ता के लिए आप क्या-क्या नहीं करेंगे, सर? यह भाजपा के लोगों का असली चाल, चरित्र और चेहरा है, “उन्होंने एक्स पर कहा। ये हैं हिमाचल बीजेपी के बड़े नेता और केंद्र में मंत्री अनुराग ठाकुर। और देखें किस तरह से भगवा मंदिर, चंदन लगाए मंगलवार के दिन मछली खा रहे हैं! 🐟 🤔ये वही लोग हैं जो दिल्ली और अन्य शहरों में मांस-मछली की रिकॉर्डिंग बंद करते हैं। अब बंगाल का चुनाव क्या आया,… pic.twitter.com/4aUIW2Tpem – संजीव झा (@Sanjeev_aap) 21 अप्रैल 2026 आप के सौरभ भारद्वाज ने ठाकुर पर भगवान हनुमान का अपमान करने का आरोप लगाया। “नेपो किड मंगलवार को माथे पर तिलक लगाकर नॉनवेज खा रहा है? सिर्फ वोटों के लिए, वे हनुमान जी का अपमान करने के लिए तैयार हैं?” टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी ठाकुर का मजाक उड़ाते हुए कहा, “हैलो @ianuragthakur यह देखकर खुशी हुई कि आप बंगाल में मछली का आनंद ले रहे हैं। चिंता न करें- यह फैंटालैंड नहीं है, आप हुगली पर एक नदी क्रूज ले सकते हैं और बिना गिरफ्तार हुए इसे खा भी सकते हैं।” इससे पहले, ममता बनर्जी ने चेतावनी दी थी कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो वह बंगालियों को मछली खाने से प्रतिबंधित कर देगी। पुरुलिया में एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा, “बीजेपी कहती है कि आप मछली, मांस या अंडे नहीं खा सकते; वे किसी भी धर्म में विश्वास नहीं करते; वे दंगों का सहारा लेते हैं; आदिवासियों का शोषण किया जाता है और बीजेपी शासित राज्यों में महिलाओं पर हमला किया जाता है।” मतदाताओं के बीच चिंता को देखते हुए, भाजपा ने अपने नेताओं को मछली का आनंद लेते हुए दिखाकर जवाबी बयान जारी किया। सुवेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार जैसे भाजपा नेताओं को माछ भात खाते हुए देखा गया, यह रेखांकित करता है कि मछली कैसे राजनीतिक फ्लैशप्वाइंट बन गई है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 21 अप्रैल, 2026, 22:38 IST न्यूज़ इंडिया ‘मछली की राजनीति’: बंगाल अभियान के दौरान अनुराग ठाकुर ने खाया ‘माछ भात’; टीएमसी, आप पर निशाना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अनुराग ठाकुर मछली खा रहे हैं(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)बंगाल की राजनीति में मछली(टी)मछली की राजनीति(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी(टी)ममता बनर्जी मछली प्रतिबंध(टी)बंगाली पहचान की राजनीति






