कुल्लू में गाड़ी पर गिरीं बड़ी-बड़ी चट्टानें:ड्राइवर ने भागकर बचाई जान, बारिश से लैंडस्लाइड, आज-कल 5 जिलों में तूफान का येलो अलर्ट

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के मणिकर्ण में आज सुबह लैंडस्लाइड हो गया। इसका मलबा और चट्टानें सड़क से गुजर रही गाड़ी पर गिरीं, जिससे गाड़ी चकनाचूर हो गई। गनीमत यह रही कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। लैंडस्लाइड की यह घटना बरशैणी घट्टीगढ़ पॉइंट की है। बताया जा रहा है कि पहाड़ी से पहले थोड़ा मलबा गिरा। इसके बाद ड्राइवर गाड़ी से बाहर भागा। देखते ही देखते बड़ी-बड़ी चट्टानें भी गाड़ी पर गिर गईं। बता दें कि, प्रदेश में अप्रैल में सामान्य से 52 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। इससे कई जगह लैंडस्लाइड की घटनाएं देखने को मिल रही हैं। बीती रात में भी राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश हुई। सलापड़ में सबसे ज्यादा 21.0 मिमी, सलूणी 18.3 मिमी, कुकुमसैरी 14.4, सांगला 7.8, कल्पा 5.2, सराहन 3.0, भरमौर 2.0, सियोबाग 1.8 और जोगेंद्रनगर में 1.0 मिलीमीटर बारिश हुई। आज और कल पांच जिलों में येलो अलर्ट मौसम विभाग (IMD) की माने तो राज्य के कई भागों में शनिवार और रविवार भी बारिश जारी रहने के आसार है। IMD ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में बारिश के साथ तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है। अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हल्का हिमपात हो सकता है, जबकि निचले और मध्यम क्षेत्रों में बारिश के आसार हैं। इस दौरान कुछेक क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तूफान और ओलावृष्टि का भी पूर्वानुमान है। भुंतर का पारा 8.2 डिग्री गिरा प्रदेश के कई हिस्सों में बीते 24 घंटों में भी मौसम खराब रहा, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। कुल्लू के भुंतर का अधिकतम तापमान 8.2 डिग्री गिरने के बाद 22.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मनाली का पारा भी 6.4 डिग्री कम होने के बाद 18.0 डिग्री रह गया है। इसी तरह सुंदरनगर में 4.6 डिग्री की गिरावट के बाद तापमान 28.2 डिग्री और मंडी में 5.3 डिग्री की गिरावट के बाद 27.7 डिग्री दर्ज किया गया। अन्य शहरों में भी तापमान में गिरावट देखी गई है, जिससे ठंड का असर फिर महसूस होने लगा है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस 20 अप्रैल तक रहेगा एक्टिव मौसम विभाग ने 20 अप्रैल को भी अधिक ऊंचाई और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना जताई है। हालांकि, 21 अप्रैल से पूरे प्रदेश में मौसम साफ होने और धूप खिलने की उम्मीद है। वहीं, 23 अप्रैल से एक बार फिर ऊंचे पहाड़ी इलाकों में मौसम बदलने के संकेत मिल रहे हैं।
कैमरन ग्रीन के छक्के पर कार से टकराई गेंद:सुंदर ने कैच, बटलर ने स्टंपिंग छोड़ी, चक्रवर्ती ने सीजन का पहला विकेट लिया; टॉप मोमेंट्स

IPL के 25वें मैच में गुजरात टाइटंस ने कोलकाता नाइट राइडर्स को हरा दिया। नरेंद्र मोदी स्टेडियम में कैमरन ग्रीन के छक्के पर गेंद कार से टकरा गई। वॉशिंगटन सुंदर ने आसान कैच छोड़ा, वहीं जोस बटलर ने स्टंपिंग का मौका गंवा दिया। वरुण चक्रवर्ती ने 19वें सीजन में अपना पहला विकेट लिया। GT vs KKR टॉप मोमेंट्स… 1. DRS में बचे कैमरन ग्रीन पांचवें ओवर में कैमरन ग्रीन DRS लेने के कारण आउट होने से बच गए। ओवर की चौथी बॉल मोहम्मद सिराज ने बाउंसर फेंकी। गेंद विकेटकीपर के पास चली गई, गुजरात ने कॉट बिहाइंड की अपील की और अंपायर ने आउट दे दिया। ग्रीन ने रिव्यू लिया, रिप्ले में नजर आया कि गेंद बैट से नहीं लगी। ग्रीन नॉटआउट रहे और DRS बच गया। 2. ग्रीन का सिक्स कार पर लगा 13वें ओवर में कैमरन ग्रीन ने सिक्स लगाया, जिस पर गेंद स्टेडियम में खड़ी कार पर लग गई। ओवर की तीसरी गेंद अशोक शर्मा ने स्लोअर फेंकी। ग्रीन ने आगे निकलकर मिड-विकेट की ओर सिक्स लगाया। गेंद ‘टाटा सिएरा’ कार पर लगी, जिससे गाड़ी पर निशान बन गया। ‘टाटा’ IPL की टाइटल स्पॉन्सर कंपनी है। कार पर गेंद लगने के बाद कंपनी से चैरिटी के लिए 5 लाख रुपए का डोनेशन दिया जाता है। टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट रखने वाले प्लेयर को फाइनल के बाद अवॉर्ड के रूप में कार भी दी जाती है। 3. सुंदर ने कैच छोड़ा 14वें ओवर में वॉशिंगटन सुंदर ने आसान कैच छोड़ दिया। ओवर की तीसरी बॉल राशिद खान ने गुड लेंथ पर फेंकी। कैमरन ग्रीन ने स्वीप शॉट खेला, लेकिन गेंद स्क्वेयर लेग की ओर हवा में चली गई। सुंदर दौड़ते हुए गेंद के पास पहुंचे, लेकिन कैच नहीं पकड़ सके। जीवनदान के वक्त ग्रीन 62 रन के स्कोर पर थे। इससे पिछली ही गेंद पर विकेटकीपर जोस बटलर से भी मुश्किल कैच छूट गया था। 4. बटलर ने स्टंपिंग मिस की 20वें ओवर में जोस बटलर ने स्टंपिंग का मौका भी गंवा दिया। ओवर की पांचवीं बॉल राशिद खान ने फुलर लेंथ फ्लिपर फेंकी। कैमरन ग्रीन आगे निकलकर बड़ा शॉट खेलने गए, लेकिन मिस कर गए। गेंद विकेटकीपर बटलर की ओर गई, लेकिन वे बॉल नहीं पकड़ पाए। गेंद बाउंड्री के पार चली गई। 3 जीवनदान के बाद ग्रीन 79 रन बनाकर आउट हुए। 5. अनुकूल रॉय के ओवर में 3 छक्के लगे गुजरात की बैटिंग में कोलकाता के अनुकूल रॉय ने पावरप्ले के एक ओवर में 20 रन खर्च कर दिए। लेफ्ट आर्म स्पिनर तीसरे ओवर में बॉलिंग करने आए। दूसरी गेंद पर शुभमन गिल ने इनसाइड आउट शॉट खेला और कवर्स की दिशा में छक्का लगा दिया। साई सुदर्शन ने फिर चौथी और छठी गेंद पर लेग साइड की दिशा में 2 और सिक्स लगा दिए। ओवर में 3 छक्कों के सहारे 20 रन बने। 6. चक्रवर्ती ने सीजन का पहला विकेट लिया 10वें ओवर में कोलकाता के वरुण चक्रवर्ती ने जोस बटलर को कैच कराया। उन्होंने ओवर की पहली गेंद फुलर लेंथ फेंकी, बटलर सिक्स लगाने गए, लेकिन लॉन्ग ऑन पर कैमरन ग्रीन के हाथों कैच हो गए। यह चक्रवर्ती का सीजन में पहला विकेट रहा। इससे पहले चेन्नई, हैदराबाद और मुंबई के खिलाफ उन्हें विकेट नहीं मिला था। वे IPL के ठीक पहले टी-20 वर्ल्ड कप में टॉप विकेट टेकर रहे थे। वरुण ने गुजरात के खिलाफ IPL में पहली बार ही कोई विकेट लिया। इससे पहले 4 पारियों के 13 ओवर में 128 रन देने के बाद भी उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था। हालांकि, वरुण ने बटलर को जरूर 7वीं बार पवेलियन भेजा।
आगर में निर्माणाधीन मकान के टैंक में गिरा गोवंश:विवेकानंद कॉलोनी में लोगों ने बाल्टियों से पानी निकाला; क्रेन से किया रेस्क्यू

आगर मालवा की विवेकानंद कॉलोनी में शुक्रवार शाम करीब 7 बजे एक निर्माणाधीन मकान के खुले पानी के टैंक में एक गोवंश गिर गया। स्थानीय गौ रक्षकों और गौ सेवकों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद गोवंश को सुरक्षित बाहर निकाला। बाल्टियों से पानी निकाला, क्रेन से किया रेस्क्यू घटना की जानकारी मिलते ही गौ सेवक मौके पर पहुंचे और सबसे पहले टैंक में भरे पानी को बाल्टियों से बाहर निकाला। इसके बाद क्रेन बुलाई गई और करीब 2 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गोवंश को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। इस दौरान मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। खुले टैंकों को लेकर प्रशासन और नागरिकों से अपील हादसे के बाद गौ सेवकों ने नगर पालिका प्रशासन और आम जनता से निर्माण कार्यों के दौरान गड्ढे और टैंक खुले न छोड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शहर में कई स्थानों पर निर्माणाधीन टैंक खुले पड़े हैं, जो पशुओं के साथ-साथ राहगीरों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग गौ सेवकों ने बताया कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निर्माणाधीन स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। खुले टैंकों को ढकने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की जन-धन की हानि को टाला जा सके।
तेंदूखेड़ा एसडीएम के रीडर को देवास पुलिस ने पकड़ा:खातेगांव में पदस्थ रहते हुए कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर करने का आरोप

नरसिंहपुर जिले की तेंदूखेड़ा तहसील में पदस्थ एसडीएम के रीडर ओमप्रकाश डेहरिया को देवास पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी पर देवास जिले के खातेगांव में पदस्थापना के दौरान कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर आदेश जारी करने और वित्तीय अनियमितताएं करने का गंभीर आरोप है। जबलपुर से हुई गिरफ्तारी देवास के बैंकनोट प्रेस (बीएनपी) थाना प्रभारी प्रीति कटारे ने बताया कि आरोपी ओमप्रकाश डेहरिया (30) को 13 अप्रैल को उसके जबलपुर स्थित निवास से पकड़ा गया। जांच में सामने आया है कि खातेगांव में पदस्थ रहने के दौरान उसने नजूल शाखा के बाबूओं और दलालों के साथ मिलकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया था। कलेक्टर के जाली हस्ताक्षर कर जारी किए आदेश पुलिस के अनुसार, रीडर ने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर किए और अवैध आदेश पारित किए। इस मामले में पुलिस पहले ही तीन बाबूओं और एक दलाल को गिरफ्तार कर चुकी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, फर्जीवाड़े के नए प्रकरण सामने आ रहे हैं। तेंदूखेड़ा एसडीएम ने की गिरफ्तारी की पुष्टि तेंदूखेड़ा एसडीएम पूजा सोनी ने बताया कि उन्हें रीडर ओमप्रकाश को देवास पुलिस द्वारा ले जाने की सूचना मिली है। हालांकि, उन्होंने रीडर की स्थानीय पदस्थापना के इतिहास के संबंध में अधिक जानकारी होने से इनकार किया है। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।
‘शहीद’ जनादेश: मोदी सरकार ने लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक क्यों पेश किया, जिसकी हार तय थी | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 22:13 IST यह कदम तत्काल कानून के बारे में कम और आगामी राज्य चुनावों और 2029 के आम चुनावों के लिए कहानी तैयार करने के बारे में अधिक था। नीतिगत दृष्टिकोण से, हारे हुए वोट के साथ आगे बढ़ने का निर्णय यह संकेत देता है कि सरकार शेष कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति मॉडल को दरकिनार करने के लिए तैयार है। (फ़ाइल छवि: पीटीआई फ़ाइल) यह जानते हुए भी कि इसमें अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत का अभाव है, नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुक्रवार को संविधान (131वें संशोधन) विधेयक पर भारी मतदान के लिए मजबूर करने के निर्णय को कई विश्लेषकों द्वारा राजनीतिक दृष्टिकोण के एक सुविचारित मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है। जबकि बिल 326-वोट की सीमा से लगभग 50 कम रह गया, यह कदम तत्काल कानून के बारे में कम और आगामी राज्य चुनावों और 2029 के आम चुनावों के लिए कथा तैयार करने के बारे में अधिक था। सरकार ने वोट के लिए दबाव क्यों डाला क्योंकि उसे पता था कि वह हार जाएगी? वोटों के विभाजन को मजबूर करने के पीछे प्राथमिक तर्क एक स्थायी “विधायी रिकॉर्ड” बनाना था। प्रत्येक संसद सदस्य को वोट डालने के लिए बाध्य करके, सरकार ने महिला आरक्षण को क्रियान्वित करने के लिए बनाए गए कानून के एक टुकड़े पर प्रत्येक विपक्षी सदस्य को सफलतापूर्वक “नहीं” वोट देने का टैग दिया है। प्रधानमंत्री के रणनीतिकारों की नजर में सदन में हार सार्वजनिक मंच पर एक शक्तिशाली हथियार है। गृह मंत्री अमित शाह ने परिणाम को कांग्रेस के नेतृत्व वाले गुट द्वारा “ऐतिहासिक विश्वासघात” बताने में कोई समय बर्बाद नहीं किया। वोट के लिए जोर देकर, सरकार ने उन नामों की एक सूची संग्रहीत की है जिनका उपयोग निस्संदेह भविष्य की अभियान रैलियों में यह दावा करने के लिए किया जाएगा कि विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सक्रिय रूप से अवरुद्ध कर दिया है। यह हार भाजपा को एक ताकतवर पार्टी से एक एकजुट विपक्ष द्वारा “सताई गई” पार्टी बनने की अनुमति देती है जो लैंगिक न्याय पर “गणितीय गड़बड़ी” को प्राथमिकता देती है। क्या यह कदम विपक्ष को बेनकाब करने का एक रणनीतिक प्रयास था? महिला कोटा की संभावनाओं से परे, सरकार ने विपक्षी एकता के स्थायित्व का परीक्षण करने के लिए 131वें संशोधन को “वेज इश्यू” के रूप में इस्तेमाल किया। लोकसभा को 816 (या 850 तक) सीटों तक विस्तारित करने के विधेयक के प्रस्ताव का उद्देश्य राज्यों के क्षेत्रीय दलों को आकर्षित करना था, जिन्हें प्रतिनिधित्व में शुद्ध लाभ मिलेगा। सरकार को अनुमान था कि भारतीय गुट के भीतर कुछ सहयोगी दल विस्तारित सदन का समर्थन करने के लिए रैंक तोड़ सकते हैं। जबकि विपक्ष मजबूती से खड़ा रहा – राहुल गांधी के “राष्ट्र-विरोधी कृत्य” बयानबाजी के कारण – सरकार ने सफलतापूर्वक उन्हें 1971 की सीट बेसलाइन का सार्वजनिक रूप से बचाव करने के लिए मजबूर किया। परिसीमन की “जहर की गोली” के बारे में बहस करके, सरकार ने विपक्ष को राष्ट्रीय विस्तार की कीमत पर अपने चुनावी मैदान की रक्षा करने वाले एक समूह के रूप में चित्रित किया है। हार यह सुनिश्चित करती है कि “दिन 17” की कहानी सरकार की संख्या की कमी के बारे में नहीं है, बल्कि विपक्ष की कथित दृष्टि की कमी के बारे में है। इस ‘प्रतीकात्मक हार’ का दीर्घकालिक लक्ष्य क्या है? नीतिगत दृष्टिकोण से, हारे हुए वोट के साथ आगे बढ़ने का निर्णय यह संकेत देता है कि सरकार शेष कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति मॉडल को दरकिनार करने के लिए तैयार है। मतदान से कुछ घंटे पहले 2023 के 106वें संशोधन को अधिसूचित करके, सरकार ने लंबे समय तक संवैधानिक प्रदर्शन के लिए मंच तैयार किया है। मतदाताओं के लिए संदेश स्पष्ट है: “हमारा इरादा है, लेकिन विपक्ष के पास वीटो है।” यह “शहीद” कानून अब प्राथमिक अभियान स्तंभ के रूप में काम करेगा। यह बिल किसी समिति में लटके रहने के बजाय टकराव का केंद्र बिंदु बन गया है। मोदी प्रशासन के लिए, 17 अप्रैल की हार “टकरावपूर्ण सुधार” के एक नए युग की शुरुआत है, जहां देश के 2029 की ओर बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं के प्रतिनिधित्व की रुकी हुई प्रगति के लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 22:13 IST समाचार राजनीति ‘शहीद’ जनादेश: मोदी सरकार ने लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक क्यों पेश किया, जिसे हारना तय था अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
वर्ल्ड हेरिटेज डे: रोशनी से जगमगाया जहाज महल:कल मिलेगा स्मारकों में मुफ्त प्रवेश; यूनेस्को सूची के लिए प्रशासन ने भेजे नए प्रस्ताव

विश्व विरासत दिवस पर शनिवार को मांडू के सभी केंद्रीय संरक्षित स्मारकों में पर्यटकों का प्रवेश निशुल्क रहेगा। भारतीय पुरातत्व विभाग इस दिन पर सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विशेष आयोजन कर रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार रात जहाज महल को विद्युत रोशनी से रोशन किया गया। इंदौर कमिश्नर और धार कलेक्टर ने भेजे प्रस्ताव तत्कालीन इंदौर संभाग आयुक्त दीपक सिंह और तत्कालीन धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मांडू को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए शासन को कई प्रस्ताव भेजे हैं। मांडू वर्तमान में यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल है। प्रशासन अब इसे पूर्ण विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए तकनीकी डोजियर तैयार करने के प्रयासों में जुटा है। मांडू में होंगी विविध गतिविधियां विश्व धरोहर दिवस पर मांडू में हेरिटेज वॉक, चित्रकला, वाद-विवाद और फोटो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों का उद्देश्य मांडू की प्राचीन वास्तुकला, जल प्रबंधन प्रणालियों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति आमजन को जागरूक करना है। एएसआई इस बार ‘विरासत और जलवायु’ विषय पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 61 केंद्रीय और 14 राज्य संरक्षित स्मारक मौजूद ऐतिहासिक नगरी मांडू में बाज बहादुर-रानी रूपमती महल, हिंडोला महल, अशर्फी महल और होशंगशाह के मकबरे सहित कुल 61 केंद्रीय पुरातत्व विभाग के संरक्षित स्मारक हैं। इसके अलावा राज्य पुरातत्व विभाग के भी 14 स्मारक यहां स्थित हैं। मांडू को यूनेस्को की सूची में शामिल करने के लिए वर्ष 1998 से संघर्ष जारी है। प्राचीन जल संरचनाओं के संरक्षण पर विशेष फोकस पुरातत्वविद और एएसआई भोपाल मंडल के अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार कुर्मी ने बताया कि मांडू की प्राचीन जल संरचनाएं विश्व में अद्वितीय हैं। विभाग इन जलस्रोतों और स्मारकों के समूह को आधार बनाकर एक सशक्त प्रस्तुतिकरण तैयार कर रहा है। यूनेस्को में भारत का प्रतिनिधित्व एएसआई द्वारा किया जाता है, जिससे मांडू की दावेदारी अब और मजबूत हुई है।
‘विश्वासघात’ बनाम ‘गेरीमैंडरिंग’: संयुक्त विपक्ष ने सरकार के महिला कोटा को हराया, लोकसभा में परिसीमन पर जोर | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 20:23 IST 131वें संशोधन के बिना, सदन का विस्तार करने और 2026 के बाद की जनगणना से महिलाओं के कोटे को अलग करने की कानूनी व्यवस्था रुकी हुई है यह हार 2029 के आम चुनावों के रोडमैप को अनिश्चितता की स्थिति में छोड़ देती है। (फ़ाइल छवि) शुक्रवार को एक नाटकीय विधायी गतिरोध में, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में गिर गया क्योंकि सरकार अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रही। दिन भर की ज़ोरदार बहस के बावजूद, विधेयक – जिसमें सदन को 50 सीटों तक विस्तारित करने और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की मांग की गई थी – के पक्ष में 27 वोट और विरोध में 211 वोट मिले। अनुच्छेद 36 के तहत, संशोधन को पारित करने के लिए कम से कम 326 वोटों (49 उपस्थित और मतदान को मानते हुए) के विशेष बहुमत की आवश्यकता थी, जिससे ट्रेजरी बेंच में काफी कमी रह गई। हार के बाद सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार ने परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून विधेयक पर आगे नहीं बढ़ने का भी फैसला किया। तीनों कानूनों का उद्देश्य लोकसभा और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था। संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक पारित होने में विफल क्यों हुआ? विधेयक की हार का प्राथमिक कारण विपक्ष का एकीकृत मोर्चा था, जिसने तर्क दिया कि यह कानून महिला सशक्तिकरण के बारे में कम और भारत के चुनावी मानचित्र के “खतरनाक” पुनर्गठन के बारे में अधिक था। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने विधेयक को “घबराहट की प्रतिक्रिया” और “राष्ट्र-विरोधी कृत्य” करार देते हुए इस आरोप की अगुवाई की, जो दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों को उनके सफल जनसंख्या नियंत्रण के लिए दंडित करेगा। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर महिलाओं के कोटा को नए परिसीमन अभ्यास से जोड़कर, विपक्ष ने दावा किया कि सरकार “गणितीय गड़बड़ी” का प्रयास कर रही थी। सदन का गणित सत्तारूढ़ एनडीए के लिए भी उतना ही ख़राब था। 543 की प्रभावी ताकत और उपस्थित और मतदान करने वालों में से दो-तिहाई की आवश्यकता के साथ, सरकार को पर्याप्त क्रॉस-पार्टी समर्थन की आवश्यकता थी जो कभी पूरा नहीं हुआ। जबकि 27 हाँ ने साधारण बहुमत का प्रतिनिधित्व किया, वे संशोधन के लिए संवैधानिक सीमा से लगभग 50 वोट कम रह गए। अनुपस्थित रहने की कुल अनुपस्थिति – 49 सदस्यों ने व्यक्तिगत रूप से मतदान किया – 50-सीट विस्तार योजना की ध्रुवीकरण प्रकृति को रेखांकित किया। सरकार ने इस विधायी झटके पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की है? मतदान के तुरंत बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला किया और उन पर भारत की महिलाओं के खिलाफ “ऐतिहासिक विश्वासघात” का आरोप लगाया। रिजिजू ने जोर देकर कहा कि हालांकि विधेयक आज गिर गया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता अटल है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष ने दशकों से लंबित सुधार को रोकने के लिए परिसीमन की तकनीकीताओं के पीछे छिपकर अपने “महिला विरोधी” पूर्वाग्रह को उजागर किया है। रिजिजू ने सदन के बाहर संवाददाताओं से कहा, ”विपक्ष ने आज भारत की बेटियों की आकांक्षाओं के खिलाफ मतदान किया है।” उन्होंने कसम खाई कि सरकार आरक्षण के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सभी संवैधानिक रास्ते तलाशेगी, यह संकेत देते हुए कि भविष्य के सत्रों में “निष्पादन की कार्यप्रणाली” पर फिर से विचार किया जा सकता है। गृह मंत्री अमित शाह, जिन्होंने पहले सदन से विधेयक को “नैतिक अनिवार्यता” के रूप में पारित करने का आग्रह किया था, ने इसी तरह कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले गुट द्वारा “अदूरदर्शी” नाकेबंदी के बावजूद महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए 2029 का लक्ष्य प्राथमिकता बना हुआ है। महिला आरक्षण और परिसीमन की आगे की राह क्या है? यह हार 2029 के आम चुनावों के रोडमैप को अनिश्चितता की स्थिति में छोड़ देती है। 131वें संशोधन के बिना, सदन का विस्तार करने और 2026 के बाद की जनगणना से महिलाओं के कोटा को अलग करने की कानूनी व्यवस्था रुकी हुई है। 2023 का 106वां संशोधन – मूल महिला कोटा कानून – सिर्फ एक दिन पहले 16 अप्रैल को अधिसूचित किया गया था, लेकिन इसका कार्यान्वयन तकनीकी रूप से परिसीमन अभ्यास से जुड़ा हुआ है जिसे अब पराजित विधेयक सुविधाजनक बनाने के लिए था। राजनीतिक लड़ाई के अब सार्वजनिक क्षेत्र में जाने की उम्मीद है, दोनों पक्ष “17 अप्रैल की हार” को या तो संघवाद की जीत या लैंगिक न्याय की हार के रूप में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 20:22 IST समाचार राजनीति ‘विश्वासघात’ बनाम ‘गेरीमैंडरिंग’: संयुक्त विपक्ष ने सरकार के महिला आरक्षण को हराया, लोकसभा में परिसीमन पर जोर अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
सीहोर से लापता 16 वर्षीय बालिका हरदा में मिली:दसवीं में कम नंबर आने से घर छोड़ा, पुलिस ने सकुशल परिजनों को सौंपा

सीहोर जिले के इछावर थाना पुलिस ने शुक्रवार को 16 वर्षीय एक नाबालिग बालिका को हरदा से खोज निकाला है। बालिका 16 अप्रैल को घर से लापता हो गई थी। पुलिस के अनुसार, 16 अप्रैल को सूचनाकर्ता ने इछावर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी 16 वर्षीय नाबालिग बेटी बिना बताए घर से कहीं चली गई है। इस रिपोर्ट पर थाना इछावर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। अपहृता की तलाश के लिए पुलिस टीम ने मुखबिरों से मिली सूचना और तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग किया। टीम ने ग्राम कांकरखेड़ा से जानकारी जुटाई और हरदा पहुंची। वहां बस स्टैंड और फिर जिला चिकित्सालय हरदा में तलाश की गई, जहां बालिका अस्पताल में बैठी मिली। बालिका को परिजनों के साथ थाने लाकर बयान दर्ज कराए गए। उसने बताया कि दसवीं कक्षा की परीक्षा में उम्मीद से कम अंक आने के कारण वह बिना बताए घर से हरदा आ गई थी। बालिका ने अपने साथ किसी भी प्रकार के अपराध की घटना से इनकार किया है। पुलिस ने गुमशुदा बालिका को सकुशल उसके परिजनों को सौंप दिया है।
‘2029 या कभी नहीं’: अमित शाह ने बताया कि महिला कोटा बिल अभी क्यों लाया गया है | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 18:57 IST गृह मंत्री ने तर्क दिया कि 2026 की समय सीमा परिसीमन पर पिछली रोक की समाप्ति से तय हुई थी मंत्री ने समय को ‘विधायी साहस’ का मामला बताया। (फ़ाइल छवि: पीटीआई) शुक्रवार को लोकसभा में अपने संबोधन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के समय के पीछे की रणनीतिक और संवैधानिक आवश्यकता को स्पष्ट किया। विपक्ष के दावों का जवाब देते हुए कि यह कदम एक “राजनीतिक ढाल” था, शाह ने कहा कि कानून – जो सदन को 850 सीटों तक विस्तारित करने और 33 प्रतिशत महिलाओं के कोटा को लागू करने का प्रयास करता है – एक “गणितीय और नैतिक अनिवार्यता” है जिसमें अब देरी नहीं की जा सकती है यदि 2029 के आम चुनाव निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के साथ आयोजित किए जाने हैं। सरकार ने विधेयक के लिए यह विशेष समय क्यों चुना? गृह मंत्री ने तर्क दिया कि 2026 की समय सीमा परिसीमन पर पिछली रोक की समाप्ति से तय हुई थी। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में भारत के जनसांख्यिकीय परिदृश्य में “मौलिक बदलाव” ने मौजूदा 543 सीटों वाली संरचना को अप्रचलित बना दिया है। शाह ने कहा कि अगले जनगणना चक्र की प्रतीक्षा करने से महिला आरक्षण 2030 के मध्य में चला जाएगा। अब बिल लाकर, सरकार नई जनगणना से कोटा को अलग करने के लिए एक “पुल तंत्र” का उपयोग कर रही है, इसके बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों का लाभ उठाकर यह सुनिश्चित कर रही है कि महिलाओं को 2029 तक पुनर्जीवित संसद में बैठाया जाए। शाह ने आगे इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान पश्चिम एशियाई ऊर्जा संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए एक “मजबूत, विस्तारित और पूरी तरह से प्रतिनिधि” घरेलू विधायिका की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाने का निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी राज्य-विशेष रूप से दक्षिण में जिन्होंने अपनी आबादी को सफलतापूर्वक स्थिर कर लिया है-को सापेक्ष प्रतिनिधित्व में नुकसान नहीं होगा। “यह राजनीतिक लाभ के बारे में नहीं है,” शाह ने सदन को बताया, “यह यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपनी ही छवि से आगे न बढ़ जाए।” यह कानून 2023 महिला कोटा अधिनियम पर कैसे आधारित है? 2023 के जनादेश से “खतरनाक प्रस्थान” के राहुल गांधी के आरोपों को संबोधित करते हुए, शाह ने स्पष्ट किया कि 131 वां संशोधन पहले के सिद्धांत की परिचालन शाखा है। उन्होंने 2023 के 106वें संशोधन को “इरादे का बयान” और 2026 विधेयक को “निष्पादन की यांत्रिकी” के रूप में वर्णित किया। गृह मंत्री ने “जहर की गोली” की कहानी को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि सीटों का विस्तार मौजूदा पुरुष प्रतिनिधियों को विस्थापित किए बिना 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने का एकमात्र तरीका है, जिससे एक अराजक संक्रमण से बचा जा सकता है जो दूसरी पीढ़ी के लिए सुधार को रोक सकता है। मंत्री ने समय को “विधायी साहस” का मामला बताया। उन्होंने विपक्ष को निर्धारित मतदान के दौरान विधेयक का समर्थन करने की चुनौती देते हुए तर्क दिया कि जो लोग आज 850 सीटों वाले मॉडल का विरोध करते हैं, वे प्रभावी रूप से महिला सशक्तिकरण को अनिश्चित काल के लिए विलंबित करने के लिए मतदान कर रहे हैं। शाह के संबोधन ने सरकार के कथन को पुष्ट किया कि भारतीय राजनीति के “नए युग” के लिए एक बड़े, अधिक समावेशी सदन की आवश्यकता है जो 1971 के अतीत के बजाय देश की 2026 की वास्तविकता को दर्शाता हो। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 18:57 IST समाचार राजनीति ‘2029 या कभी नहीं’: अमित शाह ने बताया कि महिला कोटा बिल अब क्यों लाया गया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
‘काला मां काली का रंग है’: डीएमके की कनिमोझी ने पीएम मोदी के ‘काला टीका’ पर पलटवार किया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 18:51 IST पीएम मोदी ने विरोध में काले कपड़े पहनने के लिए डीएमके सदस्यों पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि यह विधेयक पर बहस के दौरान बुरी नजर से बचने के लिए “काला टीका” के रूप में काम करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि। (संसद टीवी पीटीआई के माध्यम से) द्रमुक नेता कनिमोझी ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन के खिलाफ पार्टी के विरोध पर निर्देशित “काला टीका” टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार किया। लोकसभा में बोलते हुए कनिमोझी ने कहा कि वह इस टिप्पणी से आश्चर्यचकित हैं और उन्होंने कहा कि काला देवी काली का रंग है। उन्होंने यह भी कहा कि द्रमुक इस मुद्दे पर अंत तक अपना विरोध जारी रखेगी। गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन पर बहस में हस्तक्षेप करते हुए, पीएम मोदी ने विरोध में काले कपड़े पहनने के लिए डीएमके सदस्यों पर कटाक्ष किया था और कहा था कि यह विधेयक पर बहस के दौरान बुरी नजर से बचने के लिए “काला टीका” के रूप में काम करता है। काले कपड़ों और झंडों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अच्छे काम शुरू करने से पहले काला टीका लगाने की परंपरा है जिसके लिए वह उन्हें धन्यवाद देते हैं. शुक्रवार को बहस में भाग लेते हुए, कनिमोझी, जो काली साड़ी पहने हुए थीं, ने कहा कि वह “आश्चर्यचकित हैं कि जो लोग हिंदुत्व की रक्षा के लिए वहां हैं, उन्हें देवी काली की याद नहीं दिलाई गई, जो काली देवी हैं जो काला पहनती हैं”। उन्होंने यह भी कहा कि काला द्रमुक के बौद्धिक नेता पेरियार का भी रंग है, जिन्होंने उन्हें अंत तक लड़ना सिखाया है। कनिमोझी के अलावा डीएमके के अन्य सांसद भी सदन में काले कपड़े पहने हुए थे। द्रमुक सांसद ने यह भी मांग की कि महिला आरक्षण अधिनियम, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कोटा प्रदान करता है, को समान 543 सीटों के साथ 2029 से लागू किया जाए। उन्होंने मांग की कि परिसीमन प्रक्रिया को महिलाओं के कोटे से अलग किया जाना चाहिए। गुरुवार को, जबकि DMK सदस्यों ने सदन में काले कपड़े पहने थे, पार्टी नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य में काला झंडा फहराया और परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई, इसे “काला कानून” करार दिया, जो तमिल लोगों को अपनी ही भूमि में “शरणार्थी” बनाने का प्रयास करता है। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 18:50 IST समाचार राजनीति ‘काला मां काली का रंग है’: डीएमके की कनिमोझी ने पीएम मोदी के ‘काला टीका’ पर पलटवार किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)मोदी काला टीका टिप्पणी पर कनिमोझी की प्रतिक्रिया(टी)कनिमोझी लोकसभा भाषण(टी)मोदी काला टीका टिप्पणी(टी)डीएमके काला विरोध(टी)महिला आरक्षण विधेयक(टी)परिसीमन और महिला कोटा(टी)डीएमके हिंदुत्व आलोचना(टी)पेरियार काला प्रतीकवाद









