‘2029 या कभी नहीं’: अमित शाह ने बताया कि महिला कोटा बिल अभी क्यों लाया गया है | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 18:57 IST गृह मंत्री ने तर्क दिया कि 2026 की समय सीमा परिसीमन पर पिछली रोक की समाप्ति से तय हुई थी मंत्री ने समय को ‘विधायी साहस’ का मामला बताया। (फ़ाइल छवि: पीटीआई) शुक्रवार को लोकसभा में अपने संबोधन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के समय के पीछे की रणनीतिक और संवैधानिक आवश्यकता को स्पष्ट किया। विपक्ष के दावों का जवाब देते हुए कि यह कदम एक “राजनीतिक ढाल” था, शाह ने कहा कि कानून – जो सदन को 850 सीटों तक विस्तारित करने और 33 प्रतिशत महिलाओं के कोटा को लागू करने का प्रयास करता है – एक “गणितीय और नैतिक अनिवार्यता” है जिसमें अब देरी नहीं की जा सकती है यदि 2029 के आम चुनाव निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के साथ आयोजित किए जाने हैं। सरकार ने विधेयक के लिए यह विशेष समय क्यों चुना? गृह मंत्री ने तर्क दिया कि 2026 की समय सीमा परिसीमन पर पिछली रोक की समाप्ति से तय हुई थी। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में भारत के जनसांख्यिकीय परिदृश्य में “मौलिक बदलाव” ने मौजूदा 543 सीटों वाली संरचना को अप्रचलित बना दिया है। शाह ने कहा कि अगले जनगणना चक्र की प्रतीक्षा करने से महिला आरक्षण 2030 के मध्य में चला जाएगा। अब बिल लाकर, सरकार नई जनगणना से कोटा को अलग करने के लिए एक “पुल तंत्र” का उपयोग कर रही है, इसके बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों का लाभ उठाकर यह सुनिश्चित कर रही है कि महिलाओं को 2029 तक पुनर्जीवित संसद में बैठाया जाए। शाह ने आगे इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान पश्चिम एशियाई ऊर्जा संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए एक “मजबूत, विस्तारित और पूरी तरह से प्रतिनिधि” घरेलू विधायिका की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाने का निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी राज्य-विशेष रूप से दक्षिण में जिन्होंने अपनी आबादी को सफलतापूर्वक स्थिर कर लिया है-को सापेक्ष प्रतिनिधित्व में नुकसान नहीं होगा। “यह राजनीतिक लाभ के बारे में नहीं है,” शाह ने सदन को बताया, “यह यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपनी ही छवि से आगे न बढ़ जाए।” यह कानून 2023 महिला कोटा अधिनियम पर कैसे आधारित है? 2023 के जनादेश से “खतरनाक प्रस्थान” के राहुल गांधी के आरोपों को संबोधित करते हुए, शाह ने स्पष्ट किया कि 131 वां संशोधन पहले के सिद्धांत की परिचालन शाखा है। उन्होंने 2023 के 106वें संशोधन को “इरादे का बयान” और 2026 विधेयक को “निष्पादन की यांत्रिकी” के रूप में वर्णित किया। गृह मंत्री ने “जहर की गोली” की कहानी को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि सीटों का विस्तार मौजूदा पुरुष प्रतिनिधियों को विस्थापित किए बिना 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने का एकमात्र तरीका है, जिससे एक अराजक संक्रमण से बचा जा सकता है जो दूसरी पीढ़ी के लिए सुधार को रोक सकता है। मंत्री ने समय को “विधायी साहस” का मामला बताया। उन्होंने विपक्ष को निर्धारित मतदान के दौरान विधेयक का समर्थन करने की चुनौती देते हुए तर्क दिया कि जो लोग आज 850 सीटों वाले मॉडल का विरोध करते हैं, वे प्रभावी रूप से महिला सशक्तिकरण को अनिश्चित काल के लिए विलंबित करने के लिए मतदान कर रहे हैं। शाह के संबोधन ने सरकार के कथन को पुष्ट किया कि भारतीय राजनीति के “नए युग” के लिए एक बड़े, अधिक समावेशी सदन की आवश्यकता है जो 1971 के अतीत के बजाय देश की 2026 की वास्तविकता को दर्शाता हो। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 18:57 IST समाचार राजनीति ‘2029 या कभी नहीं’: अमित शाह ने बताया कि महिला कोटा बिल अब क्यों लाया गया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
‘काला मां काली का रंग है’: डीएमके की कनिमोझी ने पीएम मोदी के ‘काला टीका’ पर पलटवार किया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 18:51 IST पीएम मोदी ने विरोध में काले कपड़े पहनने के लिए डीएमके सदस्यों पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि यह विधेयक पर बहस के दौरान बुरी नजर से बचने के लिए “काला टीका” के रूप में काम करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि। (संसद टीवी पीटीआई के माध्यम से) द्रमुक नेता कनिमोझी ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन के खिलाफ पार्टी के विरोध पर निर्देशित “काला टीका” टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार किया। लोकसभा में बोलते हुए कनिमोझी ने कहा कि वह इस टिप्पणी से आश्चर्यचकित हैं और उन्होंने कहा कि काला देवी काली का रंग है। उन्होंने यह भी कहा कि द्रमुक इस मुद्दे पर अंत तक अपना विरोध जारी रखेगी। गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन पर बहस में हस्तक्षेप करते हुए, पीएम मोदी ने विरोध में काले कपड़े पहनने के लिए डीएमके सदस्यों पर कटाक्ष किया था और कहा था कि यह विधेयक पर बहस के दौरान बुरी नजर से बचने के लिए “काला टीका” के रूप में काम करता है। काले कपड़ों और झंडों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अच्छे काम शुरू करने से पहले काला टीका लगाने की परंपरा है जिसके लिए वह उन्हें धन्यवाद देते हैं. शुक्रवार को बहस में भाग लेते हुए, कनिमोझी, जो काली साड़ी पहने हुए थीं, ने कहा कि वह “आश्चर्यचकित हैं कि जो लोग हिंदुत्व की रक्षा के लिए वहां हैं, उन्हें देवी काली की याद नहीं दिलाई गई, जो काली देवी हैं जो काला पहनती हैं”। उन्होंने यह भी कहा कि काला द्रमुक के बौद्धिक नेता पेरियार का भी रंग है, जिन्होंने उन्हें अंत तक लड़ना सिखाया है। कनिमोझी के अलावा डीएमके के अन्य सांसद भी सदन में काले कपड़े पहने हुए थे। द्रमुक सांसद ने यह भी मांग की कि महिला आरक्षण अधिनियम, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कोटा प्रदान करता है, को समान 543 सीटों के साथ 2029 से लागू किया जाए। उन्होंने मांग की कि परिसीमन प्रक्रिया को महिलाओं के कोटे से अलग किया जाना चाहिए। गुरुवार को, जबकि DMK सदस्यों ने सदन में काले कपड़े पहने थे, पार्टी नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य में काला झंडा फहराया और परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई, इसे “काला कानून” करार दिया, जो तमिल लोगों को अपनी ही भूमि में “शरणार्थी” बनाने का प्रयास करता है। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 18:50 IST समाचार राजनीति ‘काला मां काली का रंग है’: डीएमके की कनिमोझी ने पीएम मोदी के ‘काला टीका’ पर पलटवार किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)मोदी काला टीका टिप्पणी पर कनिमोझी की प्रतिक्रिया(टी)कनिमोझी लोकसभा भाषण(टी)मोदी काला टीका टिप्पणी(टी)डीएमके काला विरोध(टी)महिला आरक्षण विधेयक(टी)परिसीमन और महिला कोटा(टी)डीएमके हिंदुत्व आलोचना(टी)पेरियार काला प्रतीकवाद
नरसिंहपुर में 11 पेटी देशी शराब के साथ कार जब्त:अवैध परिवहन करते एक आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा

नरसिंहपुर जिले के ठेमी थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक इंडिगो कार से 11 पेटी देशी शराब जब्त की है। यह कार्रवाई शुक्रवार को कंधरापुर तिराहे पर की गई। सीट और डिक्की से मिली शराब पुलिस को सूचना मिली थी कि एक सफेद इंडिगो कार में अवैध शराब ले जाई जा रही है। इसके बाद टीम ने घेराबंदी कर वाहन को रोका। तलाशी लेने पर कार की पिछली सीट से 3 पेटी और डिक्की से 8 पेटी शराब बरामद हुई। वाहन चालक शराब के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सका। इसके बाद पुलिस ने उसे मौके पर ही हिरासत में ले लिया। आबकारी एक्ट में केस दर्ज, कार भी जब्त गिरफ्तार आरोपी की पहचान धर्मेन्द्र साहू (30), निवासी ग्राम रीछा के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से करीब 80 हजार रुपये की शराब और 3.20 लाख रुपए की इंडिगो कार भी जब्त की है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
राहुल गांधी ‘दोहरी नागरिकता विवाद’ में इलाहाबाद HC ने FIR का आदेश दिया: क्या कोई भारतीय सांसद विदेशी पासपोर्ट रख सकता है? | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 18:13 IST कांग्रेस ने ऐतिहासिक रूप से इन दावों को पुनर्चक्रित ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ के रूप में खारिज कर दिया है राहुल गांधी के मामले में, दांव असाधारण रूप से ऊंचे हैं; एक महत्वपूर्ण विशेष संसद सत्र के दौरान विपक्ष के नेता के रूप में, दोहरी नागरिकता का पता चलने से न केवल उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनावी प्रतियोगिताओं से भी रोका जा सकता है। फ़ाइल चित्र/पीटीआई भारत में राजनीतिक परिदृश्य को शुक्रवार को झटका लगा जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लोकसभा के विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत का आदेश उनकी कथित दोहरी नागरिकता को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद से संबंधित है – एक ऐसा आरोप, जो यदि प्रमाणित होता है, तो संसद में सेवा करने की उनकी योग्यता पर गहरा प्रभाव डालता है। निर्देश प्रभावी रूप से लखनऊ में एक विशेष एमपी/एमएलए अदालत के पिछले जनवरी के फैसले को रद्द कर देता है, जिसने याचिका को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए खारिज कर दिया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश में प्राथमिक आरोप क्या हैं? यह आदेश कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर आधारित है, जो यूनाइटेड किंगडम से “गोपनीय ईमेल” और कॉर्पोरेट दस्तावेज़ रखने का दावा करता है। याचिकाकर्ता के अनुसार, गांधी ने 2003 और 2009 के बीच अब भंग हो चुकी ब्रिटेन स्थित फर्म, मेसर्स बैकॉप्स लिमिटेड के वार्षिक रिटर्न में स्वेच्छा से अपनी राष्ट्रीयता “ब्रिटिश” घोषित की थी। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की अध्यक्षता में उच्च न्यायालय ने कहा कि इन आरोपों की प्रकृति के कारण आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम के तहत गहन जांच की आवश्यकता है। अदालत ने गांधी के वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली के कोतवाली पुलिस स्टेशन को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार को या तो अपनी राज्य एजेंसियों के माध्यम से जांच कराने या मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की छूट दी गई है। याचिकाकर्ता ने फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “मील का पत्थर” बताया है, जबकि कांग्रेस ने अभी तक औपचारिक खंडन जारी नहीं किया है, हालांकि उसने ऐतिहासिक रूप से इन दावों को पुनर्चक्रित “राजनीतिक प्रतिशोध” के रूप में खारिज कर दिया है। क्या कोई भारतीय सांसद कानूनी रूप से ब्रिटिश नागरिकता धारण कर सकता है? भारत के संविधान के वर्तमान कानूनी ढांचे के तहत, उत्तर निश्चित रूप से नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 9 स्पष्ट रूप से दोहरी नागरिकता पर रोक लगाता है। इसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो “स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त करता है” स्वचालित रूप से भारत का नागरिक बनना बंद कर देता है। चूँकि अनुच्छेद 84 के तहत लोकसभा या राज्यसभा का चुनाव लड़ने के लिए भारतीय नागरिकता एक अनिवार्य शर्त है, इसलिए किसी भी व्यक्ति के पास विदेशी पासपोर्ट होने की पुष्टि होने पर उसे तुरंत उसकी सीट से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। इस संवैधानिक कठोरता को 1955 के नागरिकता अधिनियम और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 द्वारा और अधिक मजबूत किया गया है। यदि एक जांच से पुष्टि होती है कि एक सांसद के पास विदेशी राष्ट्रीयता है, तो भारत के राष्ट्रपति, चुनाव आयोग की सलाह पर कार्य करते हुए, उनकी सीट को रिक्त घोषित करने की शक्ति रखते हैं। राहुल गांधी के मामले में, दांव असाधारण रूप से ऊंचे हैं; एक महत्वपूर्ण विशेष संसद सत्र के दौरान विपक्ष के नेता के रूप में, दोहरी नागरिकता का पता चलने से न केवल उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनावी प्रतियोगिताओं से भी रोका जा सकता है। यह कानूनी घटनाक्रम वर्तमान संसद सत्र को कैसे प्रभावित करता है? उच्च न्यायालय के आदेश का समय राजनीतिक रूप से विस्फोटक है, जो संविधान (131वें संशोधन) विधेयक पर अंतिम बहस के साथ बिल्कुल मेल खाता है। जैसा कि सदन बड़े पैमाने पर 850 सीटों के विस्तार और महिला आरक्षण कोटा पर मतदान करने की तैयारी कर रहा है, एफआईआर सरकार की गांधी की आक्रामक “जहर की गोली” आलोचना के लिए एक शक्तिशाली प्रति-कथा के रूप में कार्य करती है। यह कदम संभावित रूप से कांग्रेस नेतृत्व को अपने नेता की पहचान पर रक्षात्मक कानूनी लड़ाई के लिए “गणितीय गैरमांडरिंग” पर आक्रामक होने के लिए मजबूर करता है। गृह मंत्रालय (एमएचए) ने पहले ही इस मामले पर 2019 के नोटिस से संबंधित गोपनीय रिकॉर्ड का अध्ययन कर लिया है, जांच तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है। क्या जांच को सीबीआई के अधिग्रहण के लिए आगे बढ़ना चाहिए, इसमें संभवतः अंतरराष्ट्रीय सहयोग और दो दशक पहले की राष्ट्रीयता घोषणाओं को सत्यापित करने के लिए यूके कंपनी हाउस के रिकॉर्ड का अवलोकन शामिल होगा। अभी के लिए, “नागरिकता बम” ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि जब सरकार भारत के चुनावी मानचित्र को फिर से बनाती है, तो उसके मुख्य आलोचक की व्यक्तिगत स्थिति कानूनी माइक्रोस्कोप के तहत बनी रहती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 18:12 IST समाचार राजनीति राहुल गांधी ‘दोहरी नागरिकता विवाद’ में इलाहाबाद HC ने FIR का आदेश दिया: क्या कोई भारतीय सांसद विदेशी पासपोर्ट रख सकता है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
हिमाचल के जोड़ीदार भाईयों के घर हुई बेटी, कौन हैं असली पापा? कैसे चलेगा पता? बहस पर डॉक्टर ने दिया जवाब

Jodidara sirmauri bhai: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई गांव में दो भाईयों की एक ही महिला से हुई शादी एक बार फिर चर्चा में है. जुलाई 2025 में शादी के बाद जोड़ीदार भाई कपिल और प्रदीप की पत्नी सुनीता ने शादी के 10 महीने बाद एक प्यारी नन्ही परी को जन्म दिया है. सोशल मीडिया पर काफी वायरल जोड़ीदार भाईयों को लगातार बधाईयां मिल रही हैं. हालांकि कुछ लोग सिरमौरी जोड़ीदार भाइयों से यह भी पूछ रहे हैं कि परंपरा के अनुसार दो भाईयों की एक पत्नी से शादी तो ठीक है लेकिन बच्ची का असली पिता कौन है और उसके बर्थ सर्टिफिकेट पर किस पिता का नाम दर्ज होगा? सोशल मीडिया पर लोगों का यह सवाल इसलिए भी जायज है क्योंकि इस बच्ची के सामाजिक रूप से दो पिता हैं लेकिन जैविक रूप से तो कोई एक ही पिता होगा, ऐसे में जन्म प्रमाणपत्र से लेकर अन्य दस्तावेजों पर किस पिता नाम लिखा जाएगा? और यह कैसे पता चलेगा कि वास्तव में वही उसके जैविक पिता हैं? इस बारे में News18hindi ने एम्स नई दिल्ली की पूर्व एचओडी और फॉर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में गायनेकोलॉजी एंड ऑब्स्टेट्रिक्स में डायरेक्टर डॉ. सुनीता मित्तल से बात की तो उन्होंने इस बारे में कई बातें बताईं. डॉ. सुनीता ने कहा कि उस बच्चे के पिता नाम क्या होगा, यह तो उस गांव की प्रथा के अनुसार जो नियम होगा, वहीं से तय होगा. अभी तक इस प्रथा के अनुसार पैदा होने वाले बच्चों के पिता का नाम कैसे तय किया जाता रहा है, यह उस पर निर्भर करेगा. हो सकता है कि वहां ऐसा हो कि घर के बड़े बेटे का नाम ही पिता के रूप में दस्तावेजों में दर्ज होगा, या कुछ और भी क्राइटेरिया हो सकता है. क्या कहती है मेडिकल साइंस डॉ. सुनीता कहती हैं, ‘हालांकि अगर मेडिकली बात करें तो बच्चे के जैविक पिता का पता डीएनए से ही चल सकता है. हालांकि डीएनए जांच भी तब होती है माता-पिता या बच्चे बड़े हो जाएं और उनकी ओर से मांग हो. अगर वे जैविक पिता का पता लगाने के बाद उस बच्चे का पिता कौन होगा, ये तय करेंगे तो उन्हें डीएनए जांच ही करानी होगी, हालांकि पुरानी प्रथा के संदर्भ में लगता नहीं है कि ऐसा कुछ होता होगा.’ यहां सबसे बड़ी बात है कि उस बच्ची के पिता भी सगे भाई हैं और एक ही पिता के बेटे हैं. ऐसे में उनका भी डीएनए बहुत अलग नहीं होगा, लेकिन फिर भी जांच में तो उनमें भी अंतर का पता लगाया जा सकता है. ‘डीएनए जांच के तहत मानव शरीर में 46 क्रोमोजोम होते हैं, जिनमें एक-एक क्रोमोजोर में कम से कम 1000 डीएनए होते हैं, ऐसे में अगर बच्ची और पिताओं की जांच होती है तो आराम से उनमें संबंध मिल सकता है. हालांकि इस केस में ऐसी जरूरत दिखाई नहीं दे रही.’ कुछ मामलों में ब्लड ग्रुप से भी बच्चे और पिता के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन वह पूरी तरह सटीक नहीं होता. आमतौर पर बच्चों का ब्लड ग्रुप माता-पिता से मिलता है, लेकिन वह माता-पिता के भाई-बहनों से भी मैच कर सकता है. क्या पैदा होते ही बच्ची का हो सकता है डीएनए टेस्ट नहीं नवजात बच्चों का डीएनए टेस्ट अवॉइड किया जाता है, क्योंकि 15 दिन या तीन हफ्ते से पहले तक बच्चे के डीएनए का रिजल्ट पूरी तरह ठीक न आने की कुछ संभावना होती है. हालांकि बच्चे के 3 महीने का होते ही यह जांच हो सकती है. क्या है यह प्रथा बता दें कि कपिल नेगी और प्रदीप नेगी हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई गांव के रहने वाले है. दोनों किसान परिवार से हैं. प्रदीप हिमाचल में ही सरकारी नौकरी में हैं तो कपिल विदेश (बहरीन) में नौकरी कर रहे हैं. कपिल शादी के बाद से बहरीन में ही हैं. दोंनों भाइयों की एक ही महिला से शादी काफी सुर्खियों में आई थी. इन दोनों ने कुनहाट गांव की रहने वाली सुनीता चौहान से शादी की थी. दोनों भाइयों ने हाटी समुदाय की बहुपति (पॉलीएंड्री) परंपरा के तहत शादी की. इस परंपरा के तहत एक ही युवती एक परिवार के दो या उससे अधिक भाइयों को साझा रूप से पति मानती है. बहुपति और बहु-पत्नी प्रथा के पीछे तर्क दिया जाता हैं कि यह परंपरा संपत्ति के विभाजन को रोकने, संयुक्त परिवार को बनाए रखने और भाईयों के बीच आपसी प्रेम और विश्वास को बढ़ाने के लिए अपनाई जाती है.
युवक का सेप्टिक टैंक में 9 टुकड़ों में मिला शव:6 दिन से लापता था, स्थानीय निवासियों ने बड़े भाई पर मर्डर का जताया शव

मंडला के अंजनिया चौकी क्षेत्र में शुक्रवार को एक युवक का शव घर के सेप्टिक टैंक से 9 टुकड़ों में बरामद किया गया है। मृतक की पहचान करियागांव निवासी आशीष साहू के रूप में हुई है। वह 6 दिन पहले यानी 11 अप्रैल से लापता था। खोजबीन के बाद परिजनों ने 15 अप्रैल को अंजनिया चौकी में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सेप्टिक टैंक से बदबू आने पर हुआ खुलासा जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को मृतक के पिता मुन्ना लाल साहू ने पुलिस को सूचना दी कि घर के सेप्टिक टैंक से तेज बदबू आ रही है। पुलिस मौके पर पहुंची और टैंक की जांच की, तो अंदर कपड़े में लिपटे शव के टुकड़े मिले। बाद में मुन्ना लाल ने शव की पहचान अपने बेटे आशीष के रूप में की। घटना की सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी शिवकुमार वर्मा भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का मुआयना किया। एफएसएल टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए अंजनिया भेजा गया है। मृतक के बड़े भाई पर हत्या का शक इस मामले में मृतक के बड़े भाई घनश्याम साहू पर शक जताया जा रहा है। पिता और स्थानीय लोगों ने भी उसी पर संदेह व्यक्त किया है। फिलहाल पुलिस घनश्याम से गहन पूछताछ कर रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों भाई अलग-अलग काम करते थे। आशीष ने कुछ समय पहले ट्रैक्टर खरीदा था और उसी से रोजगार चला रहा था, जबकि घनश्याम मंडला की एक फैक्ट्री में काम करता है। दोनों की मां भी 2019 से लापता बताई जा रही है। पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और हत्या के पीछे के कारणों का पता लगाने में जुटी है।
TCS नासिक केस- मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट मांगी:फरार आरोपी निदा ने खुद को प्रेग्नेंट बताया, कोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी

नासिक के TCS ऑफिस में धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के DGP समेत कई विभागों से रिपोर्ट मांगी है। इस बीच फरार आरोपी नीदा खान ने अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी दी है। उन्होंने बताया कि वह गर्भवती है। वहीं, निदा के पिता ने कहा कि उनकी बेटी के खिलाफ साजिस हुई है। इस मामले में अब तक 8 लोगों के खिलाफ 9 FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार कर किया है। सीएम फडणवीस ने कहा कि सरकार इसमें शामिल मॉड्यूल का पर्दाफाश करेंगे। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। परिवार का आरोप- निदा के खिलाफ साजिश हुई निदा के परिवार ने सभी आरोपों को गलत और राजनीतिक साजिश बताया है। परिवार का कहना है कि यह मामला जानबूझकर बनाया गया है। पिता ने कहा कि यह मामला नासिक के बाबा अशोक खरात से जुड़े विवाद को दबाने के लिए खड़ा किया गया है। नीदा ने शिकायत करने वाली महिला से कभी बात तक नहीं की और न ही किसी को धर्म परिवर्तन के लिए कहा। उनका परिवार सभी धर्मों का सम्मान करता है। परिवार ने बताया कि निदा इस समय गर्भवती है और भिवंडी स्थित अपने ससुराल में रह रही हैं। नीदा खान सस्पेंड, कंपनी ने गंभीर मामला बताया मीडियो रिपोर्ट के मुताबिक, TCS ने 9 अप्रैल को नीदा को सस्पेंड कर दिया था। सस्पेंड में कहा गया कि उनके खिलाफ गंभीर मामला सामने आया है। कंपनी ने उनका सिस्टम एक्सेस बंद कर दिया है। सभी कंपनी एसेट्स लौटाने के निर्देश दिए हैं। लेटर पर नासिक-पुणे-गोवा क्षेत्र के HR हेड शेखर कांबले के हस्ताक्षर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नीदा खान ने दिसंबर 2021 में कंपनी जॉइन की थी। वह प्रोसेस एसोसिएट के पद पर काम कर रही थीं। SIT जांच कर रही, 7 आरोपी गिरफ्तार पुलिस के मुताबिक, इस मामले में 9 शिकायतों की जांच हो रही है। इनमें 8 महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उनके सीनियर ने उनके साथ मानसिक और यौन उत्पीड़न किया। ये घटनाएं फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच की बताई गई हैं। पुलिस ने इस मामले में सात कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें छह पुरुष और एक महिला HR शामिल हैं। सभी आरोपियों को कंपनी ने निलंबित कर दिया है। जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) बनाई गई है, जो शिकायतों की जांच कर रही है। शादी का झांसा, जबरन संबंध और धार्मिक दबाव के आरोप शिकायतों में कहा गया कि एक आरोपी ने शादी का झांसा देकर कर्मचारी के साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए। इसके अलावा आपत्तिजनक तरीके से छूने और निजी जीवन को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करने के आरोप भी हैं। पुलिस के मुताबिक, एक मामले में एक कर्मचारी को नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। साथ ही उसके धर्म का अपमान करने का भी आरोप है। शिकायत यह भी कहा गया है कि ऑफिस के अंदर और बाहर छेड़छाड़ की गई, आपत्तिजनक टिप्पणियां और इशारे किए गए। एक मामले में महिला को ऑफिस में ही जबरन पकड़ने की कोशिश का आरोप है। कुछ पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीएम ने कहा- पूरे मॉड्यूल का पर्दाफाश करेंगे महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के कहा कि सरकार इस पूरे मामले में शामिल मॉड्यूल का पर्दाफाश करेगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है और एक संगठित मॉड्यूल के तहत किया गया है। हम इस मॉड्यूल को तोड़ेंगे। इसके लिए केंद्रीय एजेंसियों की मदद भी ली जा रही है।
विदिशा प्रशासन ने रुकवाए दो बाल विवाह:14 और 17 साल की बच्चियों की शादी टली, दबाव के बीच टीम की सख्ती से बचा भविष्य

विदिशा जिले के ग्यारसपुर क्षेत्र के ग्राम मोहनपुर में दो नाबालिग बालिकाओं का बाल विवाह रुकवाया गया। प्रशासन और एक सामाजिक संगठन की टीम ने शुक्रवार को सूचना मिलने पर कार्रवाई की। सूचना मिलते ही सोशल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। टीम ने बालिकाओं के दस्तावेजों की जांच की, जिसमें पता चला कि एक बालिका की उम्र 14 वर्ष और दूसरी की 17 वर्ष थी। दोनों ही कानूनी विवाह आयु से कम थीं। शुरुआत में परिजनों ने परंपरा का हवाला देते हुए शादी कराने पर जोर दिया। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और रिश्तेदारों ने टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भी दबाव बनाने का प्रयास किया गया। समझाइश पर मान गए परिजन हालांकि, टीम अपने कर्तव्य पर अडिग रही। टीम ने परिजनों को स्पष्ट रूप से समझाया कि 18 वर्ष से कम उम्र में बालिका का विवाह कराना कानूनन अपराध है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। लगातार समझाइश, धैर्य और सख्ती के बाद आखिरकार परिजन बाल विवाह टालने पर सहमत हुए। मौके पर पंचनामा तैयार किया गया और परिजनों से लिखित आश्वासन लिया गया कि बच्चियों की शादी बालिग होने के बाद ही की जाएगी। इस कार्रवाई में जिला प्रभारी दीपा शर्मा, लाडो अभियान प्रभारी मुकेश ताम्रकार, मोनू सेन, सुपरवाइजर प्रतिज्ञा चौरसिया और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सराहनीय भूमिका रही। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की कि परंपरा के नाम पर कानून और बच्चों के भविष्य से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रशासन की इस सजगता ने दो बच्चियों का भविष्य सुरक्षित किया है।
‘विधायी हाथ की सफाई’, ‘महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं’: राहुल गांधी ने लोकसभा में क्या कहा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 16:20 IST विपक्ष के नेता ने दावा किया कि सरकार ने विवादास्पद परिसीमन प्रक्रिया को विफल करने के लिए महिला सशक्तीकरण के वादे को ‘राजनीतिक ढाल’ के रूप में इस्तेमाल किया है। गांधी ने तर्क दिया कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिबद्ध है, तो वह मौजूदा 543 सीटों के ढांचे के भीतर कोटा को तुरंत लागू करेगी। फ़ाइल चित्र/पीटीआई भारत के चुनावी मानचित्र पर विधायी लड़ाई को तेज करते हुए, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद की विशेष बैठक के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पर तीखा हमला किया। गांधी ने आरोप लगाया कि नया कानून 2023 के 106वें संशोधन अधिनियम से एक “खतरनाक प्रस्थान” है, उन्होंने दावा किया कि सरकार ने विवादास्पद परिसीमन अभ्यास को विफल करने के लिए महिला सशक्तीकरण के वादे को “राजनीतिक ढाल” के रूप में इस्तेमाल किया है। भरी लोकसभा में बोलते हुए, उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा विधेयक का “महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है” और इसके बजाय यह सीटों के असंवैधानिक विस्तार के माध्यम से राजनीतिक शक्ति को मजबूत करने का एक कदम है। राहुल गांधी यह दावा क्यों करते हैं कि 2026 का विधेयक 2023 के कानून से अलग है? विपक्ष के तर्क का सार नई जनगणना से महिलाओं के कोटे को अलग करने में निहित है। गांधी ने बताया कि 2023 अधिनियम, जिसका उन्होंने और कांग्रेस पार्टी ने समर्थन किया था, विशेष रूप से 33 प्रतिशत आरक्षण के कार्यान्वयन को “अधिनियम के शुरू होने के बाद आयोजित पहली जनगणना” से जोड़ता है। 131वां संशोधन पेश करके, सरकार ने इस आवश्यकता को हटा दिया है, जिससे 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन आगे बढ़ने की अनुमति मिल गई है। राहुल गांधी ने इसे “विधायी हाथ की सफाई” करार दिया, यह तर्क देते हुए कि सरकार अनिवार्य रूप से लैंगिक न्याय की आड़ में 2029 के चुनावों के लिए निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से तैयार करने के लिए 15 साल पुराने डेटा का उपयोग कर रही है। इसके अलावा, गांधी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2026 का विधेयक सदन को 850 सीटों तक व्यापक विस्तार प्रदान करता है, एक प्रावधान जो मूल 2023 जनादेश का हिस्सा नहीं था। उन्होंने दलील दी कि परिसीमन विधेयक में महिला कोटा का विलय कर सरकार ने विपक्ष के लिए ”जहर की गोली” बना दी है। विपक्ष के नेता ने सुझाव दिया कि 2023 अधिनियम महिलाओं के सम्मान के बारे में था, जबकि 2026 का संशोधन “गणितीय गैरमांडरिंग” के बारे में है, जिसका उद्देश्य दक्षिणी और पूर्वी राज्यों की कीमत पर हिंदी हार्टलैंड को लाभ पहुंचाना है। विपक्ष आरक्षण और परिसीमन के बीच संबंध को कैसे देखता है? राहुल गांधी और व्यापक भारतीय गुट के लिए, इन दोनों मुद्दों को जोड़ना “संघवाद पर हमला” है। गांधी ने तर्क दिया कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिबद्ध है, तो वह मौजूदा 543 सीटों के ढांचे के भीतर कोटा को तुरंत लागू करेगी। उन्होंने सवाल किया कि 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर सीट-बंटवारे के लिए इंतजार क्यों करना चाहिए, जो सफल जनसंख्या स्थिरीकरण रिकॉर्ड वाले राज्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। गांधी ने आरोप लगाया कि दोनों को जोड़कर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जो भी सांसद “त्रुटिपूर्ण” परिसीमन मानचित्र के खिलाफ वोट करेगा, उसे गलत तरीके से “महिला विरोधी” करार दिया जाएगा। कांग्रेस नेता ने जाति-आधारित जनगणना की अपनी मांग भी तेज कर दी और कहा कि ओबीसी उप-कोटा के बिना आरक्षण की कोई भी बात खोखली है। उन्होंने दावा किया कि 2026 का कानून जानबूझकर इस मुद्दे को टालता है, “शक्ति संरचना को मजबूत करता है जो हाशिये पर पड़े लोगों को बाहर करता है।” अपने संबोधन के कुछ हिस्सों के दौरान ट्रेजरी बेंच की हंसी ने गांधी को यह दोहराने के लिए प्रेरित किया कि बिल की “चालाकी” – उनकी सहयोगी प्रियंका गांधी के पहले “चाणक्य” तंज का संदर्भ – अंततः मतदाताओं द्वारा देखा जाएगा। गांधी के ‘पिछले दरवाजे’ के आरोपों पर सरकार का प्रतिवाद क्या है? गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में ट्रेजरी बेंच ने कहा है कि 131वां संशोधन तीस साल के गतिरोध को तोड़ने का एकमात्र व्यावहारिक तरीका है। सरकार का तर्क है कि 850 सीटों तक विस्तार एक “गणितीय आवश्यकता” है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत जनादेश को पूरा करते हुए कोई भी राज्य अपनी वर्तमान स्थिति न खोए। सरकार के दृष्टिकोण से, 2023 अधिनियम सिद्धांत प्रदान करता है, जबकि 2026 विधेयक यांत्रिकी प्रदान करता है। वे गांधी की “मध्ययुगीन” बयानबाजी को एक ऐतिहासिक सुधार को रोकने के प्रयास के रूप में खारिज करते हैं जिसे कांग्रेस सत्ता में अपने दशक के दौरान पूरा करने में विफल रही। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 16:20 IST समाचार राजनीति ‘विधायी हाथ की सफाई’, ‘महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं’: राहुल गांधी ने लोकसभा में क्या कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महिला आरक्षण(टी)संसद(टी)नारी शक्ति(टी)लोकसभा(टी)परिसीमन(टी)अमित शाह(टी)राहुल गांधी(टी)नरेंद्र मोदी
‘साइलेंट किलर’ बन रहा डेस्क जॉब, डॉक्टर ने बताया दिल पर भारी पड़ सकता है कॉर्पोरेट स्ट्रेस, बिना देरी ऐसे करें बचाव

Last Updated:April 17, 2026, 16:04 IST Work Stress And Heart Health: काम हमेशा रहेगा, डेडलाइन्स भी आती-जाती रहेंगी. लेकिन सेहत इतनी आसानी से वापस नहीं आती. यदि आप डेस्क जॉब करते हैं, तो वेक-अप कॉल का इंतजार न करें. वर्क स्ट्रेस आपके दिल पर भारी न पड़े इसके लिए डॉक्टर के सुझाव को आप यहां जान सकते हैं. ख़बरें फटाफट आजकल हम में से ज्यादातर लोगों का दिन एक ही तरह से गुजरता है, डेस्क पर बैठकर काम करना, ईमेल, कॉल्स और डेडलाइन्स के बीच समय बिताना. यह सब सामान्य लगता है क्योंकि हमारे आसपास हर कोई ऐसा ही कर रहा होता है. लेकिन जो बात अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, वह यह है कि यह दिनचर्या धीरे-धीरे हमारे दिल पर असर डालती है. ऐसे में डॉ. संजय ढल, सीनियर डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग बताते हैं कि समस्या सिर्फ तनाव या सिर्फ लंबे समय तक बैठना नहीं है, बल्कि इन दोनों का मेल है. अगर डेस्क जॉब की बात करें, तो लंबे समय तक बैठना अब लगभग हर कॉर्पोरेट नौकरी का हिस्सा बन चुका है. एक बार काम शुरू किया और पता ही नहीं चलता कि 8–10 घंटे कब निकल गए. इस दौरान शरीर की मूवमेंट बहुत कम हो जाती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है और कैलोरी बर्न भी कम होती है. धीरे-धीरे यह वजन बढ़ने, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है. काम से स्ट्रेस और फिर हार्ट प्रॉब्लमडॉक्टर बताते हैं कि काम का दबाव हमेशा दिखने वाला नहीं होता. कई बार यह सिर्फ लगातार टारगेट्स, मैसेज का जवाब देना या हर समय ‘ऑन’ रहने की भावना होती है. यहां तक कि जब आप काम नहीं कर रहे होते, तब भी दिमाग काम करता रहता है. यह लगातार तनाव शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ाता है, जो लंबे समय में दिल की सेहत पर असर डालता है और ब्लड प्रेशर व हार्ट रेट को बढ़ा देता है. स्ट्रेस से लाइफस्टाइल में बदलावतनाव हमारी आदतों को भी बदल देता है. हम समय पर खाना नहीं खाते या जो भी जल्दी मिल जाए वही खा लेते हैं. चाय और कॉफी की मात्रा बढ़ जाती है. नींद पूरी नहीं हो पाती, और शारीरिक गतिविधि लगभग खत्म हो जाती है. ये सभी चीजें धीरे-धीरे जुड़ती जाती हैं और यही इसे खतरनाक बनाती हैं. संकेतों को न करें नजरअंदाजबार-बार थकान महसूस होना, सिरदर्द, हल्का सीने में दर्द या थोड़ी सी गतिविधि में सांस फूलना जैसे शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है. लेकिन अक्सर लोग इन्हें “सिर्फ काम का तनाव” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि ये शरीर के चेतावनी संकेत हो सकते हैं. बचाव मुमकिन है!डॉक्टर ने कहा कि अच्छी बात यह है कि इस स्थिति को काफी हद तक रोका जा सकता है. इसके लिए बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है. छोटे-छोटे कदम भी काफी असरदार होते हैं. जैसे हर घंटे कुछ मिनट के लिए उठकर चलना, कॉल्स के दौरान खड़े होकर बात करना या दिन में 20–30 मिनट कोई भी शारीरिक गतिविधि करना जैसे वॉक या एक्सरसाइज दिल के लिए बहुत फायदेमंद है. तनाव को कम करने के लिए लंबी मेडिटेशन जरूरी नहीं है. दिन में छोटे-छोटे ब्रेक लेना, स्क्रीन से दूर रहना या कुछ मिनट गहरी सांस लेना भी काफी मदद करता है. इन बातों का भी रखें ध्यानखान-पान में भी संतुलन जरूरी है. जंक फूड कम करें और हेल्दी खाना बढ़ाएं. साथ ही, पानी पीते रहें और ज्यादा कैफीन लेने से बचें. रेगुलर हेल्थ चेक-अप कराएं. समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना समस्याओं को शुरुआती दौर में पकड़ने में मदद करता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 17, 2026, 16:04 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.









