राज्यसभा सीट पर कांग्रेस में कास्ट प्रेशर बढ़ा:दलित और ब्राह्मणों के बाद अब सिंधी समाज ने ठोकी दावेदारी

मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान तेज हो गई है। पार्टी में जातीय समीकरणों को लेकर दबाव(कास्ट प्रेशर) लगातार बढ़ रहा है। जहां पहले दलित और फिर विंध्य के ब्राह्मणों की ओर से दावेदारी पेश की गई थी, वहीं अब इस रेस में सिंधी समाज की भी एंट्री हो गई है। सिंधी प्रतिनिधित्व की मांग उठी रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से राज्यसभा प्रतिनिधि भेजने की मांग उठाई है। ठारवानी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संबोधित पत्र में लिखा है कि वे लंबे समय से कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और उनका परिवार पीढ़ियों से पार्टी की विचारधारा से जुड़ा है। सिंधी समाज देशभर में कांग्रेस के प्रति अपनी आस्था और योगदान के लिए जाना जाता है। आगामी राज्यसभा चयन में सिंधी समाज से एक योग्य और समर्पित प्रतिनिधि के रूप में उनके नाम पर विचार किया जाए। इस पत्र की प्रतिलिपि मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी भेजी गई है। त्रिकोणीय हुआ जातीय समीकरण दलित वर्ग: दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने से इनकार करने के बाद कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दलित वर्ग के नेता को राज्यसभा भेजे जाने की मांग की थी। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा भी इसका समर्थन कर चुके हैं। ब्राह्मण समाज: विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में उमंग सिंघार और जीतू पटवारी से मुलाकात की थी। उनका तर्क है कि विंध्य में ब्राह्मण समाज का बड़ा प्रभाव है, जिसे राज्यसभा के जरिए प्रतिनिधित्व देना जरूरी है। सिंधी समाज: अब दिलीप ठारवानी की दावेदारी ने इस रेस को और दिलचस्प बना दिया है। ठारवानी का मानना है कि यदि उन्हें अवसर मिलता है, तो वे संसद में पार्टी की नीतियों और जनहित के मुद्दों को पूरी निष्ठा से उठाएंगे। प्रदेश भर में सिंधी समाज कांग्रेस से जुडे़गा।
चंडीगढ़ में लेडी डॉक्टर ने पहले दिन ही जॉब छोड़ी:बोली- अस्पताल मालिक तय करती मरीज ICU में कब तक रहेगा, मेरे नाम पर गलत काम होता

चंडीगढ़ के प्राइवेट अस्पताल में महिला डॉक्टर डॉ. प्रभलीन कौर ने नौकरी के पहले ही दिन इस्तीफा दे दिया। डॉक्टर ने कहा कि अस्पताल की ओनर ही तय करती थी कि मरीज को कितने दिन भर्ती रखना है और कितने दिन ICU में रखना है। उन्होंने कहा कि नाम मेरा और गलत काम उनका। इललिए मैंने रिजाइन कर दिया। महिला डॉक्टर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह ये सारी बातें कह रही है। उसी वीडियो को पंजाब ह्यूमन राइट्स कमीशन के मेंबर पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि इस बहादुर डॉक्टर बेटी ने बेधड़क होकर चंडीगढ़ में प्राइवेट अस्पताल माफिया का काला चिट्ठा खोलकर रख दिया है। पंजाब स्टेट एंड चंडीगढ़ ह्यूमन राइट्स कमीशन इस बहादुर बेटी के साहस की सराहना करता है और डटकर इस बेटी के साथ खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि हम ह्यूमन राइट्स की आवाज उठाते हैं। हमारे देश में बड़े-बड़े लोग सोचते हैं कि आवाज को कैसे उठाया जाए, लेकिन इस बेटी ने इसे उठाया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि आप भी अस्पतालों पर नजर रखें। महिला डॉक्टर की वीडियो में अहम बातें… डॉक्टर का वीडियो शेयर कर जतिंदर सिंह ने ये 2 बातें कहीं चंडीगढ़ की रहने वाली डॉक्टर, जीरकपुर में क्लिनिक जानकारी के मुताबिक, डॉ. प्रभलीन कौर चंडीगढ़ में रहती हैं और जीरकपुर के लोहगढ़ एरिया में अपना क्लिनिक भी चलाती हैं। वह एक इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ हैं। उन्होंने 30 मार्च को सोशल मीडिया पर अपना वीडियो अपलोड किया था। हालांकि, उन्होंने उस अस्पताल का नाम उजागर नहीं किया। वहीं, अस्पताल की ओर से भी इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। साथ ही कोई कानूनी कार्रवाई भी नहीं की गई है।
यूपी में आगजनी के 26 मामलों की आतंकी जांच होगी:NIA ने तीन आतंकियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया

एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (ATS) यूपी में हुई आगजनी की करीब 26 घटनाओं की आतंकी एंगल से जांच करेगी। ऐसा पिछले दिनों लखनऊ में पकड़े गए 4 आतंकियों के इनपुट के आधार पर किया जा रहा है। यूपी के अलग-अलग जिलों में गाड़ियों में आग लगने की इन घटनाओं को हादसा बताकर केस बंद कर दिया गया था। अब इनकी गहराई से तफ्तीश की जाएगी। नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) भी मामले में तफ्तीश करेगी। दरअसल, 3 अप्रैल को पकड़े गए आतंकियों ने पूछताछ में बताया था कि वे आगजनी की छोटी-छोटी घटनाओं को अंजाम देकर वीडियो बनाते थे। उन्हें पाकिस्तान में हैंडलर्स को भेज देते थे। इसके बदले उन्हें QR कोड के जरिए पाकिस्तान से पैसे भेजे जाते थे। इनका मकसद देश में डर और सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पूरी कहानी शुरुआत से समझते हैं… यूपी में बड़ी घटना की तैयारी थी, इससे पहले 4 आतंकी धरे गए यूपी ATS ने 2 अप्रैल को लखनऊ से 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि ये आगजनी की छोटी-छोटी घटनाओं को अंजाम देकर उसका वीडियो बनाते थे। फिर उसे पाकिस्तानी हैंडलर अबू बकर को भेजते थे। वीडियो के जरिए वे अपने काम का सबूत देते थे। बदले में अबू बकर उन्हें पैसे भेजता था। जांच एजेंसियों को शक है कि इन लोगों ने पहले छोटे स्तर की आगजनी की घटनाओं को अंजाम देकर अपने हैंडलर्स को ‘ट्रायल’ दिखाया था। चारों आतंकी यूपी में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में थे, लेकिन इससे पहले ही पकड़े गए। आतंकियों की पहचान साकिब उर्फ डेविल, विकास गहलावत उर्फ रौनक, लोकेश उर्फ बाबू, उर्फ पपला पंडित और अरबाब के रूप में हुई थी। साकिब गैंग का सरगना है। इन आतंकियों के मोबाइल से कई अहम सबूत मिले थे, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। फोन में आगजनी के VIDEO, लोकेशन और टाइमिंग पता की जा रही एडीजी कानून व्यवस्था अमिताभ यश बताते हैं- आमतौर पर आग की घटनाओं को हादसा मान कर रिपोर्ट लगा दी जाती है। लेकिन, गाड़ियों में आगजनी के बदले पैसे मिलने की बात सामने आने पर उन मामलों में नए सिरे से जांच की जा रही है। इसके लिए जांच टीम ने 6 महीने में हुए 26 मामलों की पहचान की है। इनमें अलीगढ़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, कानपुर, बरेली और प्रयागराज जिले में हुई घटनाएं शामिल हैं। छानबीन में सामने आया कि लखनऊ में पकड़े गए आतंकियों ने 4 मार्च को एक पिकअप में आग लगाकर उसके वीडियो बनाए थे। आगजनी किरतपुर इलाके में हुई थी। इनके पास मिले 7 मोबाइलों में ऐसे और भी वीडियो हैं। ये वीडियो कब और कहां के हैं, इसकी जांच की जा रही है। जली हुई गाड़ियों की जांच नहीं होती, इसका फायदा उठाया अमिताभ यश कहते हैं- वेस्ट यूपी के बुलंदशहर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, हापुड़ जिलों में पिछले 6 महीने में गाड़ियों, दुकानों और छोटे प्रतिष्ठानों में हुई आगजनी की घटनाओं के रिकॉर्ड देखे जा रहे हैं। जिससे पता लग सके कि आतंकियों का इन घटनाओं से क्या कनेक्शन है? हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ये तफ्तीश ATS के लिए आसान नहीं होगी, क्योंकि घटनाएं पुरानी हो चुकी हैं। जांच एजेंसी को फोरेंसिक सबूत और CCTV फुटेज निकालने में खासी दिक्कत आएगी। ऐसे में आसपास के लोगों से पूछताछ और उनके बयान ही अहम होंगे। संदिग्ध लेन-देन मिलने के बाद शुरू की जांच जांच के दौरान पता चला था कि आगजनी के बदले इन आतंकियों को पैसे दिए जाते थे। गिरफ्तार आतंकियों के बैंकखातों की जांच में कुछ संदिग्ध लेन-देन मिले हैं। अब ट्रांजेक्शन की तारीख को आगजनी की तारीख से मैच किया जा रहा है। जिससे पता किया जा सके कि किस घटना के बाद कौन-सा पैसा आया? केंद्रीय एजेंसियों को भेजी गई जानकारी सूत्रों का कहना है कि तफ्तीश के दौरान यूपी एटीएस को दूसरे राज्यों के कुछ संदिग्ध नंबर मिले हैं। इसके बाद पूरी जानकारी एनआईए से भी साझा की गई है। इसमें महाराष्ट्र के कुछ नंबर अहम बताए जा रहे हैं। इस बारे में एडीजी अमिताभ यश बताते हैं कि इनके पास मिले वीडियो में कुछ अन्य आतंकी हथियार के साथ नजर आ रहे थे। उनकी पहचान आकिब, महजुल, आजाद और उबैद मलिक के रूप में हुई है। इनके खिलाफ सेंट्रल एजेंसी के जरिए बिजनौर में मुकदमा दर्ज हुआ है। ये मामला NIA के साथ भी साझा किया गया। जिसके बाद दक्षिण अफ्रीका में रह रहे महजुल, सऊदी अरब में रह रहे आकिब और आजाद के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। दो तरह से पाकिस्तानी हैंडलर से करते थे संपर्क अमिताभ यश ने बताया- जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ये लोग पाकिस्तान के अबु बकर को 2 तरह से संपर्क करते थे। 1. कॉलिंग के लिए सिंग्नल ऐप का इस्तेमाल करते थे। 2. डॉक्यूमेंट, वीडियो फाइल भेजने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते थे। पकड़े न जाएं, इसलिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल करते थे। यही वजह है कि IP एड्रेस ट्रेस करने पर ज्यादा नंबर अफगानिस्तान की लोकेशन के दिख रहे हैं। लखनऊ रेलवे स्टेशन पर धमाका करने की थी प्लानिंग एटीएस के मुताबिक, गिरोह ने लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास सिग्नल बॉक्स और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई थी। उनका मकसद 2 अप्रैल को बड़ा विस्फोट और बड़ी जनहानि करना था, जिससे दहशत फैल सके। हालांकि, एटीएस को पहले ही इसकी सूचना मिल गई थी। टीम ने समय रहते आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। यूट्यूब की सर्च हिस्ट्री में लिखा मिला- केमिकल बम कैसे बनाते हैं शाकिब और अरबाब के मोबाइल के यूट्यूब की सर्च में मिला है- टाइम बम कैसे बनाया जाता है? कैमिकल बम कैसे बनाया जाता है? सटीक निशाना लगाने की टेक्निक क्या हैं? इन्होंने कई वीडियो देखे भी हैं। कुछ लिंक और वीडियो अबु बकर ने उन्हें भेजे हैं। ये लोग कितना कुछ सीख सके थे, अब ये 5 दिन की रिमांड के बाद ही क्लियर हो सकेगा। ———————— ये खबर भी पढ़ें… सबसे ज्यादा वोटर भाजपा की सीटों पर घटे, योगी की सीट पर 33 हजार, नेता विपक्ष की सीट पर 41 हजार नाम कटे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी
शाह बोले- बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनने देंगे:राहुल आज मुर्शिदाबाद सहित 3 जिलों में जाएंगे; EC ने वोटरों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया

गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के रानीगंज में चुनावी सभा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि CM ममता बनर्जी और हुमायूं कबीर एक ही तरह के नेता हैं। शाह ने कहा- भाजपा सत्ता में आने पर राज्य में बाबरी मस्जिद का निर्मान नहीं होने देगी। बीरभूम में दूसरी सभा के दौरान शाह ने कहा कि बंगाल की जनता हिंसा का जवाब वोट से देगी और 5 मई को राज्य में भाजपा सरकार बनने जा रही है। उन्होंने TMC पर भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा के आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इधर राहुल गांधी मंगलवार को बंगाल पहुंचेंगे। वे मुर्शिदाबाद जिले के समसेरगंज, मालदा जिले के चंचल और उत्तर दिनाजपुर जिले के रायगंज में एक सभा को संबोधित करेंगे। वहीं कानून-व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के लिए चुनाव आयोग ने बंगाल के वोटरों के लिए 24×7 हेल्पलाइन और ईमेल सुविधा शुरू की है। आयोग ने बताया कि टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18003450008 और wbfreeandfairpolls@gmail.com पर ईमेल के जरिए लोग अपनी शिकायतें भेज सकते हैं। यह दोनों सुविधाएं 4 मई तक जारी रहेंगी। चुनाव राज्यों में कल के बड़े अपडेट्स…
शाह बोले- बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनने देंगे:राहुल आज मुर्शिदाबाद सहित 3 जिलों में जाएंगे; EC ने वोटरों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया

गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के रानीगंज में चुनावी सभा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि CM ममता बनर्जी और हुमायूं कबीर एक ही तरह के नेता हैं। शाह ने कहा- भाजपा सत्ता में आने पर राज्य में बाबरी मस्जिद का निर्मान नहीं होने देगी। बीरभूम में दूसरी सभा के दौरान शाह ने कहा कि बंगाल की जनता हिंसा का जवाब वोट से देगी और 5 मई को राज्य में भाजपा सरकार बनने जा रही है। उन्होंने TMC पर भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा के आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इधर राहुल गांधी मंगलवार को बंगाल पहुंचेंगे। वे मुर्शिदाबाद जिले के समसेरगंज, मालदा जिले के चंचल और उत्तर दिनाजपुर जिले के रायगंज में एक सभा को संबोधित करेंगे। वहीं कानून-व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के लिए चुनाव आयोग ने बंगाल के वोटरों के लिए 24×7 हेल्पलाइन और ईमेल सुविधा शुरू की है। आयोग ने बताया कि टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18003450008 और wbfreeandfairpolls@gmail.com पर ईमेल के जरिए लोग अपनी शिकायतें भेज सकते हैं। यह दोनों सुविधाएं 4 मई तक जारी रहेंगी। चुनाव राज्यों में कल के बड़े अपडेट्स…
इंदौर EV अग्निकांड- पुगलिया परिवार को पुलिस ने सौंपा घर:अब रहने लायक नहीं रहा घर; चार्जिंग सॉकेट में शॉर्ट-सर्किट से कार में लगी थी आग

इंदौर के बंगाली चौराहा स्थित ब्रजेश्वरी एनएक्स में हुए भीषण अग्निकांड ने एक परिवार से उनका घर छीन लिया है। कारोबारी मनोज पुगलिया के मकान में लगी आग के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि यह घर रहने लायक नहीं बचा है। पुलिस ने जला हुआ मकान औपचारिक रूप से परिवार को सौंप तो दिया है, लेकिन दीवारों, पिलरों और छतों में आई दरारें इस बात की गवाही दे रही हैं कि यहां दोबारा बसना फिलहाल संभव नहीं। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी इलाकों में तेजी से बढ़ रहे ई-व्हीकल उपयोग और उससे जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े करता है। डीसीपी जोन-2 कुमार प्रतीक के अनुसार 18 मार्च की रात ई-कार चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट से आग भड़की थी। अब तक की जांच में यही कारण सामने आया है, हालांकि अंतिम पुष्टि एफएसएल रिपोर्ट के बाद होगी। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की गई थी। पुलिस ने अब तक 18 लोगों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें प्रत्यक्षदर्शी, पड़ोसी और एनडीआरएफ के जवान शामिल हैं। बिजली विभाग भी अपनी रिपोर्ट सौंप चुका है, जबकि जले हुए कार के हिस्से और चार्जिंग सर्किट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद पूरी तस्वीर साफ होगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रिहायशी इलाकों में ई-व्हीकल चार्जिंग के लिए पर्याप्त सुरक्षा मानक मौजूद हैं? और अगर हैं, तो उनका पालन कितना हो रहा है? यह था पूरा मामला इंदौर के बृजेश्वरी एनेक्स में 18 मार्च 2026 की तड़के सुबह करीब साढ़े तीन बजे कार की बैटरी या चार्जिंग सॉकेट में शॉर्ट सर्किट की वजह से जोरदार धमाका हुआ और कार में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने घर के पास रखे सामान को अपनी चपेट में ले लिया। भीषण आग और जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से कारोबारी मनोज पुगलिया समेत परिवार के कुल 8 सदस्यों की जान चली गई। हालांकि परिवार की ओर से कुछ संशय जताए गए थे, लेकिन पुलिस और फॉरेंसिक टीम की प्राथमिक जांच में यही सामने आया कि इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग के दौरान हुआ शॉर्ट सर्किट ही इस भीषण तबाही की मुख्य वजह था।
‘बीजेपी ने हमें लिखा था कि…’, कांग्रेस पार्टी की मां ने कहा- बंगाल के मैदान में कैसे उतरें

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी डकैती और हत्याकांड आरजी कर अस्पताल की पीड़ित महिला डॉक्टर की मां को बीजेपी ने मैदान में उतारा है। अब ऐसे में महिला सुरक्षा निवेशकों सहित राज्य में महिलाओं के मुद्दे पर अड़े हाथ ले रही है। दो साल पहले हुआ था यह हत्याकांड ने राज्य की राजधानी भूचाल ला दिया था। उत्तर 24 परगना जिले के पानीहाटी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने पीड़ित डॉक्टर की मां को टिकट दिया है। भाजपा को पत्र लिखकर मांग की गई थी टिकटें, स्मृति ईरानी ने नामांकन नामांकन पत्र जारी किया थारत्ना देबनाथ एक आम महिला हैं। उनकी राजनीति से किसी भी तरह का कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन इस बार वो नॉचलिस्ट मैदान में उतर गए हैं. उनकी पिछली बीजेपी ने पूरी ताकत लगा दी है. भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के लिए उनकी नामांकन दाखिल की गई थी। 9 अप्रैल को उन्हें अपना नामांकन पद दिया गया। ईरानी दल बीजेपी महिलाओं के साथ मिलकर काम करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। वहीं, देबनाथ ने बताया कि उन्होंने ही बीजेपी से संपर्क किया था. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने बताया कि चुनाव लड़ना की इच्छा है। हमने बीजेपी को एक पत्र लिखा था. देबनाथ ने कहा कि उनकी 200 प्रतिशत की निश्चितता है कि वो चुनाव जीतेंगे। यह उनकी जीत की नहीं होगी. यह पूरे पानीहाटी क्षेत्र और बंगाल के लोगों की जीत होगी। उन्होंने कहा कि हमारी बेटी तो चली गई, लेकिन अब दूसरी युवा महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी रिकॉर्डिंग पर आ गई है। लोग भी कहते हैं कि बंगाल रत्ना के साथ खड़ा है। यहां, लोकतंत्र के खिलाफ़ जनता है। इस सीट पर बीजेपी का पलड़ा भारी, लोकतांत्रिक के खिलाफ लोगलोगों का यह भी कहना है कि जो महिला बच्चे रात 8 बजे बाहर कुर्सी से रुकती हैं, उन्हें भी रात 8 बजे के बाद अपनी कुर्सी से बाहर जाना चाहिए। इस सीट पर निर्मल घोष घोषाल से हैं। वह यहां 1996 से इस सीट पर जीत हासिल कर रही हैं। सबसे पहले उन्होंने यहां कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उन्होंने इस सीट पर 2001,2011,2016 और 2021 में जीत हासिल की। 2006 में जोड़ दिया गया, तो निर्मल घोष को सी क्वेश्चन के प्रतियोगी ने हरा दिया था। इस बार उनके बेटे तीर्थंकर घोष झील मैदान में हैं। यह तीर्थंकर का पहला चुनाव है। ऐसे में एक अजीबोगरीब राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल सकता है। यह भी पढ़ें: मक्के में फिर हुआ मकबरा नाटक, 30 बजरे ने दिल्ली में डाला मकबरा, मकड़े में मकड़े की मांग
ऑपरेशन के बाद युवक की मौत पर सतना में हंगामा:परिजनों ने शव रखकर जाम किया; 20 करोड़ मुआवजा और डॉक्टरों पर केस की मांग

सतना में कथित तौर पर डॉक्टरों की लापरवाही के कारण सोमवार को एक युवक की रीवा में मौत हो गई। किडनी स्टोन के ऑपरेशन के बाद युवक को रीवा रेफर किया गया था। इस घटना से नाराज परिजनों ने सतना पहुंचकर जमकर हंगामा किया और मुआवजे की मांग की। परिजनों ने पहले कोलगवां थाना के पास शव रखकर हाईवे जाम किया। पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद, उन्होंने पाठक हॉस्पिटल के बाहर शव रखकर धरना प्रदर्शन किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तीन थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। परिजनों की मांग है कि अस्पताल के डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। इसके साथ ही, मृतक के परिवार को 20 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। किडनी के इलाज के लिए भर्ती किया था परिजनों का आरोप है कि युवक को किडनी के इलाज के लिए भर्ती किया गया था। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से उसकी दूसरी किडनी भी क्षतिग्रस्त हो गई, जिसमें धागा बांधकर उसे रीवा रेफर कर दिया गया। रीवा में मरीज की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, पन्ना जिले के देवेंद्रनगर निवासी रवि रजक को किडनी में पथरी की शिकायत थी। परिजन उसे इलाज के लिए सतना के मुख्तियारगंज स्थित स्टार मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। जांच के बाद डॉक्टरों ने एक किडनी में गंभीर समस्या बताते हुए ऑपरेशन की सलाह दी। 4 अप्रैल को पाठक नर्सिंग होम में मरीज का करीब पांच घंटे तक ऑपरेशन चला। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने लापरवाही बरती और दूसरी स्वस्थ किडनी में भी कट लगा दिया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होते देख अस्पताल प्रबंधन ने उसे रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर कर दिया। रीवा पहुंचने पर जांच और इमरजेंसी ऑपरेशन के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिसके बाद मरीज की मौत हो गई। दूसरी किडनी में बंधा था धागा बताया गया कि दूसरी किडनी पर गहरा कट था, जिसे धागे से बांध दिया गया था। इससे खून का रिसाव हुआ और किडनी ने काम करना बंद कर दिया। रीवा के डॉक्टरों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन संक्रमण और आंतरिक क्षति अधिक होने के कारण दूसरी किडनी को भी निकालना पड़ा। इसके बाद मरीज की हालत लगातार बिगड़ती गई और अंतत: उसकी मौत हो गई। पिता ने लगाए डॉक्टरों पर गंभीर आरोप मृतक के पिता गिरधारीलाल रजक ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को मामूली पथरी की समस्या थी, लेकिन पाठक अस्पताल के डॉ पुष्पेंद्र सिंह, डॉ राजीव पाठक और डॉ राजीव सिंह लापरवाही के कारण उसकी जान चली गई। उन्होंने बताया कि पहले सोनोग्राफी में पथरी की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद उन्हें किडनी विशेषज्ञ के पास भेजा गया। डॉक्टरों के कहने पर बेटे को पाठक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया और ऑपरेशन कर दिया गया, लेकिन इलाज के नाम पर गंभीर लापरवाही की गई। सीएसपी से भिडीं महिलाएं घटना के बाद परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। सोमवार देर रात उन्होंने कोलगवां थाना के सामने चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया गया। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाइश देकर मामला शांत कराया। इसके बाद पाठक हॉस्पिटल के पास शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सीएसपी देवेन्द्र सिंह और महिलाओं के बीच झड़प भी देखने को मिली। दरअसल महिलाओं को अस्पताल की ओर नहीं जाने दिया जा रहा था, ऐसे में वह आक्रोशित हो गईं। वायरल वीडियो में गिड़गिड़ाते नजर आए डॉक्टर पाठक हॉस्पिटल में किडनी का ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर पुष्पेन्द्र सिंह का एक वीडियो भी सामने आया। इसमें डॉक्टर पुष्पेन्द्र सिंह और मृतक के परिजनों के बीच बातचीत हो रही है। इस बातचीत में डॉक्टर ने अपनी गलती स्वीकारी। साथ ही इस मामले में तूल न देने की गुजारिश कर रहे हैं। यही नहीं वे अपनी जिम्मेदारी रीवा के अस्पताल पर थोपते हुए दिखाई दे रहे हैं। सीएमएचओ को पहले दे चुके थे शिकायत परिजनों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, पोस्टमार्टम विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से कराया जाए और दोषी डॉक्टरों व अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। बताया जाता है कि डॉक्टरों की लापरवाही के संबंध में परिजनों ने चार दिन पहले सीएमएचओ डॉ मनोज शुक्ला को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। सतना सीएमएचओ डॉ मनोज शुक्ला का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। टीम बनाकर प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि आरोप प्रमाणित पाए गए तो संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जबलपुर स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप:सपा ने कहा- नियमों को दरकिनार कर हुआ भुगतान; FIR दर्ज करने की मांग

जबलपुर के स्वास्थ्य विभाग में 1.75 करोड़ रुपए के कथित घोटाले का मामला सामने आया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव आशीष मिश्रा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। आरोप है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की राशि का भुगतान नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया। इस घोटाले में पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय मिश्रा और जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्य तिवारी पर राशि के गबन का आरोप है। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि भोपाल की सिंह एंटरप्राइजेज नामक एक फर्म को करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया, जबकि यह फर्म केवल 15 दिन पुरानी थी। इसके अतिरिक्त, स्टॉक रजिस्टर में सामग्री की प्राप्ति दर्ज होने के बावजूद, मौके पर कोई भी सामान उपलब्ध नहीं पाया गया। समाजवादी पार्टी ने इस मामले के मीडिया में आने के 11 दिन बाद भी एफआईआर दर्ज न होने पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इसे अधिकारियों की मिलीभगत करार दिया है। समाजवादी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन सौंपते समय एडवोकेट दीपांशु साहू, शैलेंद्र सिंह, सीता कुशवाहा, दीपेंद्र दुबे, राहुल अहिरवार, राम बालक पटेल, कमलेश पटेल, बेनी प्रसाद उड़िया, देवेंद्र यादव, शुभम अहिरवार, राजेंद्र पटेल, अभिषेक शर्मा और अब्दुल कयूम सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
कर्नाटक कांग्रेस के लगभग 30 विधायकों ने दिल्ली में खड़गे से मुलाकात की, कैबिनेट में फेरबदल की मांग की | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:13 अप्रैल, 2026, 21:27 IST विधायकों ने कहा कि उनकी मांग पूरी तरह से फेरबदल पर केंद्रित है, न कि नेतृत्व में किसी बदलाव पर। नई दिल्ली: शुक्रवार, 10 अप्रैल, 2026 को इंदिरा भवन, नई दिल्ली में कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेता राहुल गांधी, बाएं और केसी वेणुगोपाल के साथ। (पीटीआई फोटो/सलमान अली) (पीटीआई04_10_2026_000179बी) कर्नाटक के लगभग 30 कांग्रेस विधायकों ने सोमवार को नई दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की और लंबे समय से लंबित कैबिनेट फेरबदल के लिए दबाव डाला और मंत्री पद की मांग की। विधायकों ने कहा कि उनकी मांग पूरी तरह से फेरबदल पर केंद्रित है, न कि नेतृत्व में किसी बदलाव पर। बैठक के बाद बोलते हुए, वरिष्ठ कांग्रेस विधायक अशोक पट्टन ने कहा कि खड़गे ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी चिंताओं पर पार्टी नेतृत्व के साथ चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा, ”हमारा एकमात्र मुद्दा फेरबदल को लेकर है और हम किसी अन्य विषय पर नहीं जाएंगे… हम किसी के भी मंत्री बनने से खुश हैं।” उन्होंने कहा कि उनके जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी मौका दिया जाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल में एसएन नारायणस्वामी, के शदाक्षरी, एआर कृष्णमूर्ति, पुत्तरंगा शेट्टी और बेलूर गोपाल कृष्ण जैसे कई अनुभवी विधायक शामिल थे। उनमें से कई कई बार के विधायक हैं, जो मानते हैं कि सरकार में अधिक वरिष्ठ नेताओं को शामिल करने के लिए कैबिनेट में बदलाव का समय आ गया है। पैटन ने दोहराया कि समूह की यात्रा एक “एक सूत्री कार्यक्रम” थी जो कर्नाटक कैबिनेट में फेरबदल पर केंद्रित थी। उन्होंने यह भी कहा कि बेंगलुरु लौटने से पहले वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ आगे की चर्चा का इंतजार करेंगे। उन्होंने कहा, “यह केवल एक सूत्रीय कार्यक्रम है। हम आए हैं, 30 सदस्य हैं, हम केवल आए हैं, हम कर्नाटक सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल करने के लिए कह रहे हैं।” पार्टी सूत्रों ने पहले कहा था कि अगर आलाकमान फेरबदल पर सहमत होता है, तो यह मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व में मौजूदा नेतृत्व में स्थिरता का संकेत दे सकता है, जिससे पता चलता है कि वह अपना पूरा कार्यकाल पूरा कर सकते हैं। यह राज्य इकाई के भीतर आंतरिक नेतृत्व की गतिशीलता को भी प्रभावित कर सकता है। कर्नाटक कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित 34 मंत्रियों की स्वीकृत शक्ति है। वर्तमान में, हाल के घटनाक्रमों के बाद दो पद रिक्त हैं, जिनमें एक इस्तीफा और अलग-अलग मुद्दों से जुड़ी एक बर्खास्तगी शामिल है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 13 अप्रैल, 2026, 21:27 IST समाचार राजनीति कर्नाटक कांग्रेस के लगभग 30 विधायकों ने दिल्ली में खड़गे से मुलाकात की, कैबिनेट में फेरबदल की मांग की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक कैबिनेट में फेरबदल(टी)कर्नाटक कांग्रेस विधायकों(टी)मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठक(टी)सिद्धारमैया सरकार(टी)मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधित्व की मांग(टी)कांग्रेस आलाकमान(टी)कैबिनेट में फेरबदल कर्नाटक(टी)वरिष्ठ विधायक कांग्रेस







