एक्सक्लूसिव: ‘ईसीआई के खिलाफ दायर जनहित याचिका’, चुनाव आयोग ने क्यों भड़के असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित 2029 से पहले बीजेपी पर ऐसे और हमले होंगे। असम चुनाव 2026: असम में गुरुवार (9 अप्रैल, 2026) को होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद भी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ कीमती सामान और सामान लेकर को गरमा गरम है। इस बीच असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनाव आयोग को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य में चुनाव आयोग के खिलाफ चुनाव खत्म हो जाने के बाद एक पी.आई. को कमजोर किया जाएगा। ‘इनसाउट आउट विद मेघा प्रसाद’ सोमवार (13 अप्रैल, 2026) को समीक्षा के दौरान सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मैं चुनाव के बाद एक पी.आई. चुनाव आयोग के खिलाफ लड़ूंगा, जिसमें कई बड़े मुद्दे शामिल होंगे। उन्होंने तर्क दिया कि मेरे और मेरी पत्नी के खिलाफ ये आरोप राज्य में चुनाव से पहले लगाए गए थे, जिसका उद्देश्य चुनाव में सर्वसम्मति को प्रभावित करना था और चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अगर ये सभी दस्तावेज मान्य साबित होते हैं, तो फिर से चुनाव क्यों लड़ेंगे? क्योंकि ऐसे में यदि कोई पार्टी चुनाव हार जाती है तो सुधार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘मैं इसलिए चाहता हूं कि जब कोई राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी चुनाव से प्रभावित हो, ऐसा करती है, तो उनकी पार्टी का नामांकन रद्द कर दिया जाना चाहिए।’ उन्होंने ये भी कहा कि ये मैं अपने पर्सनल लेवल से कहूंगा. लोकतंत्र के भंडार के लिए ये कदम उठाना होगा: हिमंत सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मैं यह बड़ा कदम डेमोक्रेसी की मूर्ति को बनाए रखने के लिए उठाता हूं और ये मैं अपने व्यक्तिगत स्तर से जाऊंगा।’ उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग को लिस्टिंग जारी करनी चाहिए कि अगर किसी पार्टी के चुनाव से प्रभावित होने के लिए डीपफेक का इस्तेमाल किया जाता है और यह साबित होता है तो उस पार्टी का नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘मैं इस मामले को लेकर इतने सारे लीकेज ले रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि 2029 के आम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ऊपर ऐसे कई और हमले हो रहे हैं।’ यह भी पढ़ें: ‘दक्षिण भारत के साथ अन्याय नहीं’, रेवंत रेड्डी की चेतावनी; डिलम निर्माण केंद्र को घेरा
आरटीओ चेक पोस्ट पर कर्मचारियों से मारपीट:अवैध वसूली के आरोप, अधिकारी ने कहा- विवाद सुलझा

सिंगरौली जिले के झुराही स्थित आरटीओ चेक पोस्ट पर कर्मचारियों के साथ मारपीट का एक वीडियो सामने आया है। यह घटना सोमवार दोपहर करीब 3:00 बजे की बताई जा रही है। वीडियो में कुछ लोग आरटीओ विभाग के कर्मचारियों को घेरकर उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज करते दिख रहे हैं। वायरल वीडियो में हमलावर लाठी-डंडों से लैस नजर आ रहे हैं। वे कर्मचारियों को धमकी देते हुए कहते सुने जा रहे हैं कि “अब चालान काट कर दिखाना, गाड़ी चढ़ा देंगे।” इस घटना से चेक पोस्ट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पूरा विवाद आरटीओ कर्मचारियों द्वारा कथित अवैध वसूली को लेकर हुआ। आरोप है कि वाहन चालकों से जबरन पैसे वसूले जा रहे थे, जिससे आक्रोशित होकर कुछ लोग विरोध करने पहुंचे और मामला हिंसक हो गया। घटना का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। इस मामले पर जिला परिवहन अधिकारी विक्रम सिंह राठौर ने दैनिक भास्कर से बात की। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों और कुछ लोगों के बीच आपसी विवाद हुआ था। राठौर ने यह भी कहा कि फिलहाल दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है और स्थिति सामान्य है। फिलहाल इस घटना को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक शिकायत दर्ज होने की जानकारी नहीं मिली है। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की मांग उठ रही है।
48 साल बाद टूटा शिवनाथ सिंह का रिकॉर्ड:सेना के हवलदार सावन बरवाल ने नीदरलैंड में रचा इतिहास, मैराथन में बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड

भारतीय सेना के हवलदार सावन बरवाल ने एथलेटिक्स की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने 12 अप्रैल को नीदरलैंड के रॉटरडैम में आयोजित प्रतिष्ठित ‘एनएन मैराथन’ में फुल मैराथन (42.195 किमी) दौड़कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड (नेशनल रिकॉर्ड) अपने नाम कर लिया है। एडीजी मिलिट्री सर्वे के अंतर्गत देहरादून स्थित 501 एफएसईजी यूनिट में कार्यरत सावन ने यह दूरी महज 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड में पूरी की। भारतीय एथलेटिक्स का सबसे पुराना रिकॉर्ड टूटा सावन के इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास का सबसे लंबे समय तक कायम रहने वाला रिकॉर्ड टूट गया है। इससे पहले फुल मैराथन का नेशनल रिकॉर्ड महान धावक शिवनाथ सिंह के नाम था। उन्होंने 1978 में 2 घंटे 12 मिनट (2:12:00) के समय के साथ यह कीर्तिमान स्थापित किया था। पिछले 48 सालों से यह रिकॉर्ड अजेय था, जिसे अब सावन बरवाल ने पीछे छोड़ दिया है। तेज हवाओं को चीरते हुए पहली ही मैराथन में छा गए सावन सावन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस बेहद प्रतिस्पर्धी दौड़ में एलीट वर्ग में 20वां स्थान हासिल किया है। सबसे खास बात यह है कि यह उनके करियर की पहली फुल मैराथन थी। अंतिम चरण में नीदरलैंड का मौसम बेहद चुनौतीपूर्ण था और तेज हवाएं चल रही थीं, लेकिन सावन ने गजब का धैर्य और दृढ़ता दिखाते हुए अपनी लय नहीं टूटने दी और फिनिश लाइन पार की। मंडी के छोटे से गांव से आर्मी तक का सफर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदर नगर स्थित एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले सावन की यह कामयाबी उनकी कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास का नतीजा है। 2019 में भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद से ही उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी थी। सेना की खेल प्रोत्साहन नीति और सावन की लगन ने आज देश का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि लंबी दूरी की दौड़ में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
आशा भोसले को याद कर संगीत जगत के सितारे भावुक:उदित, अनु, हरिहरन समेत दिग्गजों ने यादें साझा कीं, कहा- उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी

आशा भोसले के निधन के बाद संगीत जगत में शोक की लहर है। कई दिग्गजों ने उनसे जुड़ी यादें साझा कीं। उदित नारायण ने उन्हें भारतीय संगीत का एक युग बताया और उनके साथ गाना जीवन की बड़ी उपलब्धि कहा। अनु मलिक ने बताया कि चोटिल होने के बावजूद उन्होंने उनके पहले गाने की रिकॉर्डिंग में सहयोग दिया। हरिहरन और कैलाश खेर ने उनके विनम्र स्वभाव और ऊर्जा को प्रेरणादायक बताया। अनुप जलोटा, ललित पंडित, डब्बू मलिक, उत्तम सिंह और रमेश सिप्पी ने भी अनुभव साझा किए। सभी ने कहा कि उनकी आवाज, सादगी और विरासत हमेशा अमर रहेगी। उनकी सरलता, मेहनत और नए कलाकारों को आगे बढ़ाने की प्रवृत्ति सामने आई। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उदित नारायण बोले- संगीत जगत के लिए एक युग का अंत है गायक उदित नारायण ने कहा कि आशा जी के निधन की खबर सुनकर उन्हें विश्वास नहीं हुआ। उनके अनुसार वह सिर्फ गायिका नहीं, बल्कि संगीत इतिहास का अहम हिस्सा थीं। उदित नारायण ने बताया कि उनका बचपन नेपाल में बीता, जहां वे रेडियो पर आशा जी को सुनते थे। उन्होंने नहीं सोचा था कि एक दिन वे मुंबई आकर उनके साथ गाएंगे और माइक साझा करेंगे। उन्होंने फिल्म ‘लगान’ का किस्सा याद करते हुए कहा कि ए.आर. रहमान ने उन्हें “राधा कैसे ना जले” के लिए बुलाया था। पहले उन्होंने अपना हिस्सा रिकॉर्ड किया, फिर आशा जी ने उसे यादगार बना दिया। उदित नारायण ने कहा कि आशा जी की सबसे बड़ी खासियत उनकी वर्सेटिलिटी थी। वे हर तरह का गाना, क्लासिकल, रोमांटिक और पॉप आसानी से गा लेती थीं। उन्होंने कहा कि स्टूडियो में आशा जी खुशमिजाज और मजाकिया थीं, लेकिन माइक के सामने आते ही उनकी आवाज में जबरदस्त ताकत और जादू आ जाता था। उदित नारायण ने कहा कि बढ़ती उम्र के बावजूद उनकी आवाज में थकान नहीं आई और वे युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा बनी रहीं। अंत में उन्होंने कहा कि आशा जी का जाना संगीत जगत के लिए एक युग का अंत है, लेकिन उनकी आवाज और विरासत हमेशा दिलों में जिंदा रहेगी। अनु मलिक ने कहा- हाथ में चोट लगी थी, फिर भी मेरे लिए रिकॉर्डिंग पर आईं “मेरी मां चली गई थी 2021 में, और मुझे लगता है फिर से मेरी माँ चली गई… यह बहुत दुखद खबर है,” यह कहते हुए अनु मलिक भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहला गाना रिकॉर्ड किया, तब उनकी उम्र 14 साल थी। उस समय उन्हें गाने के लिए आशा भोसले को स्टूडियो बुलाना था। आशा भोसले उस वक्त व्यस्त थीं और उनके हाथ में चोट थी, प्लास्टर चढ़ा था। इसके बावजूद वे एक बच्चे के पहले गाने के लिए स्टूडियो आईं। अनु मलिक ने कहा कि वह पल कभी नहीं भूल सकते। उस दौर में आर.डी. बर्मन और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे बड़े संगीतकारों के गाने चल रहे थे, फिर भी आशा भोसले ने उन्हें सहयोग दिया और हिम्मत बढ़ाई। उन्होंने कहा कि अगर आज वह अनु मलिक बन पाए हैं, तो उसमें आशा भोसले का बड़ा योगदान और आशीर्वाद है। हरिहरन बोले- आशा जी ने कभी छोटा महसूस नहीं होने दिया गायक हरिहरन ने कहा कि आशा भोसले ने अपने सुरों और गीतों से कई दशकों तक लोगों को खुशी दी है। उनके अनुसार, इतने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन करना आम इंसान के बस की बात नहीं, बल्कि “आशीर्वाद से भरी हुई प्रतिभा” है। हरिहरन ने कहा कि उन्हें आशा जी के साथ काम करने का सौभाग्य मिला और वह उन्हें परिवार का हिस्सा मानते हैं। उनके लिए उनका जाना किसी परिवार के सदस्य जैसा दुख है। उन्होंने कहा कि आशा जी ने हर तरह के संगीत, क्लासिकल, रोमांटिक और अन्य जॉनर्स में अपनी अलग पहचान बनाई। 90 की उम्र के बाद भी उनमें वही ऊर्जा और जोश था, जो युवा कलाकार में होता है। हरिहरन ने बताया कि 1984–85 में उन्होंने आशा जी के लिए एक गजल एल्बम कंपोज किया था। उसमें आठ गजलें थीं, जिनमें छह सोलो उन्होंने गाईं और दो डुएट उन्होंने खुद गाए थे। उन्होंने बताया कि उस समय वे नए कलाकार थे, लेकिन आशा जी ने उन्हें छोटा महसूस नहीं होने दिया। उनका व्यवहार सरल और प्यार से भरा था। उन्होंने हर गाने को ध्यान और मेहनत से सीखा और गाया। हरिहरन ने कहा कि उस अनुभव से उन्हें बड़ा सबक मिला, अगर बड़ा बनना है तो सरल रहना और काम पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यही सीख उन्होंने आज तक संभाल कर रखी है। अंत में उन्होंने आशा जी को सरल, विनम्र और हंसमुख कलाकार बताया, जिनकी मुस्कान हर माहौल को रोशन करती थी। कैलाश खेर बोले- आशा जी हमेशा विनम्र और मिलनसार रहीं “हमारी मुलाकातें कई बार मंच पर हुई हैं- कभी रियलिटी शो में, कभी इवेंट्स में,” यह कहते हुए कैलाश खेर ने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि 2007 में, करियर के शुरुआती दौर में पहली एल्बम 2006 में आई थी। उन्हें आशा भोसले के साथ यूएस और कनाडा का करीब एक महीने का टूर मिला। इस दौरान उन्होंने करीब 10 शहरों में परफॉर्म किया। कैलाश खेर ने कहा कि उस टूर में उन्होंने उन्हें करीब से जाना। इतनी बड़ी सीनियर कलाकार होने के बावजूद उनका व्यवहार सरल और अपनापन भरा था। गाड़ी या फ्लाइट—हर जगह वह कॉर्डियल और सहज रहती थीं। उन्होंने कहा, “इससे मुझे उनके स्वभाव का असली पता चला, बहुत मिलनसार और विनम्र। ऐसा नहीं था कि सीनियर होने का घमंड हो। वह सबके साथ बराबरी और प्यार से बात करती थीं।” कैलाश खेर ने कहा कि लंबे टूर से इंसान की असली प्रकृति सामने आती है, कैसा व्यवहार और कितनी विनम्रता है। आशा भोसले में उन्होंने यही खूबी देखी, सीनियर होकर भी सरल, जमीन से जुड़ी और संवेदनशील व्यक्तित्व। अनूप जलोटा बोले- आशा जी अमर हैं और उन्हें हमेशा याद किया जाएगा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की प्लेबैक सिंगिंग की दूसरी मजबूत स्तंभ चली गई हैं। दो बड़े स्तंभ थे, लता मंगेशकर और आशा भोसले। नई सिंगर्स इन्हीं को आदर्श मानती हैं। उन्होंने अपनी गायकी से एक यूनिवर्सिटी बनाई, जिससे पीढ़ियां सीखती रहेंगी। भजन सम्राट अनूप जलोटा ने कहा कि आशा जी का
किसी महिला का नाम जबरन नहीं पूछ सकेंगे जनगणनाकर्मी:गृह विभाग ने जारी किए निर्देश- पति का नाम न बताए तो भी बाध्य नहीं कर सकेंगे

जनगणना के लिए मकानों की गणना का काउंट डाउन शुरू होने वाला है। इस बीच जनगणना कर्मचारियों के लिए गाइडलाइन जारी कर उनके कार्यक्षेत्र भी राज्य सरकार ने स्पष्ट करना शुरू कर दिया है। जनगणना के लिए स्टेट नोडल एजेंसी बनाए गए गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा अगर परिवार की किसी महिला का नाम बताने से इनकार किया जाता है तो जनगणना कर्मी उसे बाध्य नहीं कर सकेगा। जनगणना प्रगणकों और सुपरवाइजरों के लिए यह भी निर्देश हैं कि किसी महिला को उसके पति या किसी अन्य पुरुष सदस्य का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। गृह विभाग से जारी निर्देशों में कहा है कि कोई भी जनगणना अधिकारी जब अपने स्थानीय क्षेत्र में नियुक्ति के बाद सभी लोगों से ऐसे सभी प्रश्न पूछ सकेगा जो पूछने के लिए उसे केंद्र सरकार ने जनगणना के संबंध में अधिकृत किया है। हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह जनगणना करने आने वाले लोकसेवक के सवालों का जवाब दे। विभाग ने कहा है कि सवालों के जवाब देना हर नागरिक की बाध्यता होगी लेकिन कोई व्यक्ति अपने परिवार की किसी महिला सदस्य का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं होगा। इसी तरह कोई भी महिला अपने पति या मृत पति का या ऐसे किसी व्यक्ति का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं होगी जिसका नाम बताने के लिए वह प्राचीन रूढ़ि द्वारा प्रतिबंधित की गई हो। जनगणना कर्मचारी को प्रवेश से रोक नहीं सकते गृह विभाग ने मंगलवार को जारी नोटिफिकेशन में यह भी कहा है कि किसी घर, अहाते, जलयान या अन्य स्थान पर रहने वाला व्यक्ति जनगणना अधिकारियों को प्रवेश करने से नहीं रोक सकेगा। बशर्ते, वह स्थान परंपरा के चलते प्रतिबंधित न हो। साथ ही जनगणना करने वालों को इससे संबंधित संख्या के अंक दर्ज करने से भी नहीं रोका जा सकेगा। जनगणना आयुक्त के आदेश के आधार पर एमपी के गृह विभाग ने यह भी कहा है कि अगर कोई व्यक्ति सही जानकारी नहीं देता है या जनगणना के काम में बाधा पैदा करता है, अड़चन की स्थिति लाता है तो उसे एक हजार रुपए जुर्माना और तीन साल तक की सजा मिल सकती है। राजस्व, पुलिस, नगर निकाय, पंचायत शिक्षा विभाग का अमला हो रहा तैनात आदेश के अनुसार राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अधिकारियों को जनगणना से जुड़े कार्यों को पूरा करने के लिए अधिकृत किया है। इसमें राजस्व, पुलिस, नगरीय निकाय, पंचायत, शिक्षा सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है, ताकि जनगणना कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके। अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि नियुक्त अधिकारी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में आवश्यक जानकारी एकत्रित करने, दस्तावेजों की जांच करने और जनगणना से संबंधित कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए अधिकृत होंगे। इसके साथ ही वे आवश्यकतानुसार किसी भी व्यक्ति से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और संबंधित अभिलेखों का निरीक्षण भी कर सकेंगे।
पहली बार कर रहे मथुरा-गोवर्धन परिक्रमा? इतनी लंबी पैदल यात्रा कहीं बन न जाए आफत, काम आएंगे ये टिप्स

Last Updated:April 13, 2026, 17:44 IST Govardhan Parikrama : गर्मियों में गोवर्धन परिक्रमा मार्ग की 21 किमी यात्रा आस्था का बड़ा सफर है, लेकिन बिना तैयारी के चलने से पैरों में दर्द, छाले और सूजन हो सकती है. लोकल 18 से फरीदाबाद की डॉ. धीरजा बताती हैं कि परिक्रमा करना आस्था का विषय है, लेकिन शरीर को इसके लिए तैयार करना भी उतना ही जरूरी है. परिक्रमा के दौरान पानी की बोतल जरूर साथ रखें और थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें. मुंह सूखने का इंतजार न करें. लौटने के बाद दिन में 3 से 4 बार 15 मिनट के लिए कोल्ड पैक ठंडी सिकाई करें. फरीदाबाद. गर्मियों का मौसम हो और मथुरा-गोवर्धन की 21 किलोमीटर परिक्रमा…फरीदाबाद और बल्लभगढ़ से हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु इस आस्था के सफर पर निकल पड़ते हैं. कोई नंगे पांव चलता है तो कोई चप्पल पहनकर लेकिन मंजिल एक ही होती है पूरी श्रद्धा के साथ परिक्रमा पूरी करना. हालांकि इतनी लंबी पैदल यात्रा के बाद ज्यादातर लोगों के पैरों में छाले, दर्द और सूजन हो जाता है जिससे घर लौटने के बाद चलना तक मुश्किल हो जाता है. लोकल 18 से फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की डॉ. धीरजा बब्बर (Group Head Physiotherapy) बताती हैं कि परिक्रमा करना आस्था का विषय है, लेकिन शरीर को इसके लिए तैयार करना भी उतना ही जरूरी है. अगर बिना तैयारी के अचानक 21 किलोमीटर चलेंगे तो मांसपेशियों में खिंचाव, दर्द और क्रैम्प्स होना तय है. इसलिए परिक्रमा से पहले पैरों की स्ट्रेचिंग करें और शरीर को एक्टिव रखें. यात्रा के दौरान पानी पीते रहना बेहद जरूरी है क्योंकि डिहाइड्रेशन से मसल्स ज्यादा जल्दी थकती हैं और दर्द बढ़ता है. डॉ. धीरजा बताती हैं कि परिक्रमा से लौटने के बाद पैरों का खास ख्याल रखना चाहिए. हल्की-हल्की स्ट्रेचिंग करें पैरों की मसाज लें और दिन में 3 से 4 बार 15 मिनट के लिए कोल्ड पैक ठंडी सिकाई करें, खासकर काफ और एड़ी वाले हिस्से में. इससे सूजन और दर्द दोनों में राहत मिलती है. ORS, नारियल पानी और ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए ताकि शरीर जल्दी रिकवर कर सके. पैरों में मेहंदी, बीच-बीच में फल डॉ. धीरजा बब्बर के मुताबिक, कई लोग परिक्रमा के बाद पैरों में मेहंदी लगाते हैं क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है और यह एक तरह से कोल्ड पैक जैसा काम करती है. इससे पैरों को ठंडक मिलती है और जलन कम होती है. परिक्रमा के दौरान कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है. जैसे अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें और थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें. मुंह सूखने का इंतजार न करें. बीच-बीच में फल खाते रहें ताकि शरीर को एनर्जी मिलती रहे. अगर बच्चे परिक्रमा कर रहे हैं तो उन्हें समय-समय पर आराम जरूर दें नहीं तो उनके पैरों में जल्दी छाले पड़ सकते हैं. अगर इन आसान टिप्स को अपनाया जाए तो न सिर्फ परिक्रमा आराम से पूरी होगी बल्कि बाद में होने वाला दर्द और परेशानी भी काफी हद तक कम हो जाएगी. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Faridabad,Haryana First Published : April 13, 2026, 17:44 IST
प्रताप नारायण यादव ने दमोह कलेक्टर का पदभार संभाला:बोले- दमोह पिछड़ा है, इसे विकसित बनाने के लिए बहुत काम करना होगा

दमोह के 46वें कलेक्टर के रूप में प्रताप नारायण यादव ने सोमवार को अपना पदभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने अधिकारियों और पत्रकारों से चर्चा करते हुए साफ किया कि उनकी प्राथमिकता दमोह को पिछड़ापन दूर कर एक विकसित जिला बनाने की है। नवागत कलेक्टर ने अधिकारियों के साथ पहली बैठक में ही कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि अधिकारी केवल ऑफिस और फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि फील्ड में जाकर जनता से मिलें और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान करें। उन्होंने जिले की गंदगी और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर भी चिंता जताई और अस्पतालों में सुधार लाने की बात कही। जल संकट पर नाराजगी: डिमांड लेटर नहीं, एक्शन प्लान चाहिए गर्मी के मौसम में पेयजल की समस्या को लेकर कलेक्टर ने पीएचई (PHE) विभाग की क्लास ली। जब अधिकारियों ने बताया कि वे नई मशीनों की डिमांड कर रहे हैं, तो कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सिर्फ डिमांड करने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने उदाहरण दिया कि जैसे मरीज को तुरंत इलाज की जरूरत होती है, वैसे ही प्यासे को तुरंत पानी चाहिए। उन्होंने विभाग से 106 प्रभावित गांवों के लिए तत्काल बोरिंग और मोटर डालने का ठोस प्लान मांगा है। किसानों और बेरोजगारों के लिए खास योजना कलेक्टर ने कहा कि इस समय कृषि मंडियों में किसानों की भीड़ है, इसलिए उनकी उपज की समय पर खरीदी और भुगतान तय किया जाएगा। साथ ही, जिले में बेरोजगारी दूर करना भी उनकी प्राथमिकता सूची में शामिल है। आने वाले दिनों में वे सभी विभागों के साथ मिलकर दमोह के विकास का एक मास्टर प्लान (मैप) तैयार करेंगे, ताकि जिले की तस्वीर बदली जा सके।
‘आपने भाजपा, आरएसएस से जुड़े अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में भाग लिया’: केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कहा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:13 अप्रैल, 2026, 16:29 IST आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सवाल किया कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा यदि उनके मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश एक निश्चित विचारधारा से संबंधित कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं जो उनकी अपनी विचारधारा के विपरीत है। सुनवाई के लिए आने पर आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल सुनवाई से हटने के आवेदन पर बहस कर रहे हैं। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) यह बताते हुए कि दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने भाजपा और आरएसएस से जुड़े अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में भाग लिया था, आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के माध्यम से समझाया कि “एक कार्यात्मक लोकतंत्र में, धारणा मायने रखती है”। केजरीवाल ने कहा कि क्या दिल्ली की आबकारी नीति का मामला राजनीतिक है, उन्होंने सवाल किया कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा यदि मामले की अध्यक्षता करने वाले न्यायाधीश एक निश्चित विचारधारा से संबंधित एक निश्चित कार्यक्रम में शामिल हुए हैं जो उनकी अपनी विचारधारा का विरोध करता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 13 अप्रैल, 2026, 16:29 IST समाचार राजनीति ‘आपने भाजपा, आरएसएस से जुड़े अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में भाग लिया’: केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामला (टी) अरविंद केजरीवाल (टी) दिल्ली उच्च न्यायालय (टी) न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा (टी) अधिवक्ता परिषद (टी) भाजपा आरएसएस लिंक (टी) न्यायिक निष्पक्षता (टी) राजनीतिक मामला
लिवर में जमी गंदगी बिना दवा के हो जाएगी साफ, डॉक्टर शुभम वत्स्य ने बताए 7 आसान तरीके, देखें वीडियो

Natural Liver Detox Tips: लिवर हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर से टॉक्सिक एलीमेंट्स को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करने का काम करता है. खराब खानपान, ज्यादा तला-भुना भोजन, शराब का सेवन और अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण लिवर में धीरे-धीरे गंदगी और फैट जमा होने लगता है, जिससे फैटी लिवर जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गैस्ट्रो के मशहूर डॉक्टर शुभम वत्स्य ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो में बताया है कि कुछ फूड्स लिवर डिटॉक्स करने में चमत्कारी होते हैं. इन मैजिक फूड्स का सेवन करने से नेचुरल तरीके से लिवर डिटॉक्स होता है.
बच्चा रो रहा है बार-बार? हो सकता है वजह डकार न आना, ये टिप्स फॉलो करते ही तुरंत लेगा डकार, नहीं दिखाएगा नखरे

Last Updated:April 13, 2026, 15:35 IST नवजात शिशु की देखभाल में डकार दिलाना एक बेहद अहम हिस्सा है. सही तरीके से डकार दिलाने से बच्चे के पेट में फंसी हवा बाहर निकलती है, जिससे वह ज्यादा आरामदायक महसूस करता है और उसकी सेहत बेहतर रहती है. आइए जानते है कुछ जरूरी टिप्स… अक्सर नई मांओं के लिए यह समझना थोड़ा मुश्किल होता है कि बच्चे को सही तरीके से डकार कैसे दिलाई जाए. इसी वजह से कई बार वे बच्चे के व्यवहार और सेहत में होने वाले बदलावों को ठीक से समझ नहीं पातीं. दरअसल, बच्चे को डकार दिलाना उसकी देखभाल का एक जरूरी हिस्सा है. जब मां को बच्चे की डकार सुनाई देती है, तो उसे एक तरह की तसल्ली मिलती है कि बच्चे ने दूध अच्छे से पिया है और वह आराम में है. लोकल18 से बातचीत में सर्वोदय हॉस्पिटल, सेक्टर-8 के डायरेक्टर और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील सिंगला बताते हैं कि डकार दिलाना क्यों जरूरी है, यह समझना बेहद अहम है. जब बच्चा दूध पीता है, खासकर बोतल से, तो उसके साथ कुछ मात्रा में हवा भी उसके पेट में चली जाती है. यही हवा बाद में परेशानी की वजह बनती है. जब इस हवा को बाहर निकाला जाता है, तो उसे ही डकार कहा जाता है. अगर बच्चे के पेट में यह हवा फंसी रह जाए, तो उसका पेट फूला-फूला लगने लगता है. इससे बच्चे को पेट दर्द हो सकता है, वह बार-बार रोता है, चिड़चिड़ा हो जाता है और कई बार दूध पीने से भी कतराने लगता है. लेकिन यदि समय पर बच्चे को डकार दिला दी जाए, तो वह न सिर्फ आराम महसूस करता है, बल्कि अच्छे से दूध भी पीता है और उसे नींद भी बेहतर आती है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ. सिंगला के अनुसार, कई बार आपने देखा होगा कि बच्चे को दूध पीने के बाद उल्टी हो जाती है. यह भी उसी हवा के बाहर निकलने का एक तरीका होता है, जिसमें दूध के साथ हवा भी बाहर आ जाती है. खासकर बोतल से दूध पीने वाले बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, जबकि मां का दूध पीने वाले बच्चों में यह अपेक्षाकृत कम होती है. बच्चे को डकार दिलाने के कुछ आसान और प्रभावी तरीके भी हैं. आप बच्चे को अपने कंधे से सटा कर उसकी पीठ को हल्के-हल्के थपथपा सकते हैं. इसके अलावा, बच्चे को गोद में सीधा बैठाकर उसकी पीठ पर हल्का दबाव देना भी मददगार होता है. एक और तरीका यह है कि बच्चे को अपनी गोद में पेट के बल लिटाकर उसकी पीठ को धीरे-धीरे सहलाया जाए. इन तरीकों से बच्चे के पेट में फंसी हवा आसानी से बाहर निकल जाती है. डकार का मतलब यही है कि बच्चे के पेट की हवा सहजता से बाहर निकल गई. यह समस्या आमतौर पर 4 से 6 महीने तक के बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, यह समस्या अपने आप कम हो जाती है और 6 महीने के बाद अक्सर खत्म भी हो जाती है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं होती और सामान्य देखभाल से ही यह समस्या संभाली जा सकती है. First Published : April 13, 2026, 15:35 IST







