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हिमाचल में प्रवासी बच्ची पीटने वाले फौजी ने मांगी माफी:बोला-आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी, दिमाग ने काम नहीं किया, CWC और पुलिस करेगी पूछताछ

हिमाचल में प्रवासी बच्ची पीटने वाले फौजी ने मांगी माफी:बोला-आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी, दिमाग ने काम नहीं किया, CWC और पुलिस करेगी पूछताछ

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला के बहडाला में 6 साल की प्रवासी बच्ची को बांधकर पीटने देने के मामले में आरोपी पूर्व सैनिक विजय कुमार ने माफी मांगी है। आरोपी मान रहा है कि उसने बच्ची को बांधा था और आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी। वह कहता है कि घटना के वक्त दिमाग ने काम नहीं किया, लेट काम किया। वहीं ऊना पुलिस आरोपी विजय कुमार से पूछताछ कर रही है। बीती कल भी आरोपी को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की गई। आज फिर से थाने बुलाया है। कुछ देर में आरोपी को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के समक्ष भी पेश होना है। CWC भी आरोपी से पूछताछ करेगी, क्योंकि बच्ची नाबालिग है। घर की रैलिंग में बांधकर की थी पिटाई बता दें कि पूर्व सैनिक ने अमरूद चुराने के आरोपों के बाद बच्ची को घर की रैलिंग में बांधकर पीटा था। इससे जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। कैप्टन को देखकर बोली बच्ची – ‘अंकल बचा लो’ वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बच्ची चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन आरोपी ने उसे नहीं छोड़ा। इस बीच मर्चेंट नेवी के कैप्टन रोहित जसवाल को बच्ची के चिल्लाने की आवाज आई, तो वह मौके पर पहुंचे और उन्होंने बच्ची को छुड़वाया। कैप्टन को देख बच्ची कहती है, ‘अंकल बचा लो, अंकल बचा लो’। यह घटना 5 अप्रैल की है। बच्ची पर आरोप है कि उसने रिटायर्ड फौजी के घर के बाहर अमरूद तोड़ा। बच्ची को अमरूद तोड़ते हुए फौजी ने देख लिया। इसके बाद उसने बच्ची के हाथ-पांव सीढ़ियों की रेलिंग से बांध दिए। वहीं एसपी ऊना सचिन हिरेमठ ने बताया कि पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई कर रही है। आरोपी के खिलाफ BNS और JJ एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। बच्ची का ऊना के अस्पताल में मेडिकल करवा दिया गया है।

पोहरी बस स्टैंड के पीछे 7 फीट का मगरमच्छ:वन विभाग ने सफलतापूर्वक किया रेस्क्यू; राहगीर भयभीत होकर दूर से निकले

पोहरी बस स्टैंड के पीछे 7 फीट का मगरमच्छ:वन विभाग ने सफलतापूर्वक किया रेस्क्यू; राहगीर भयभीत होकर दूर से निकले

शिवपुरी शहर के पोहरी बस स्टैंड के पीछे स्थित तालाब के पास सोमवार सुबह करीब 9 बजे एक विशाल मगरमच्छ देखा गया। पुलिया के समीप बैठे इस मगरमच्छ को देखकर स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया और राहगीर भयभीत होकर दूर से निकलने लगे। स्थानीय निवासी मुकेश कुशवाह के अनुसार, मगरमच्छ की लंबाई लगभग 7 फीट थी और उसका पेट फूला हुआ दिख रहा था। आशंका जताई जा रही है कि उसने किसी जानवर, जैसे सूअर या कुत्ते का शिकार किया था, जिसके कारण वह अधिक हिल-डुल नहीं पा रहा था। घटना की सूचना तत्काल वन विभाग को दी गई। जानकारी मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और लगभग 30 मिनट के सावधानीपूर्वक अभियान के बाद मगरमच्छ को पकड़ लिया। इसके उपरांत उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। रेस्क्यू अभियान के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। हालांकि, टीम ने स्थिति को नियंत्रित रखते हुए सफलतापूर्वक मगरमच्छ को पकड़ने का कार्य पूरा किया।

‘लोग उचित जवाब देंगे’: ‘अनपढ़ गुजरात’ वाली टिप्पणी के लिए बीजेपी ने खड़गे की आलोचना की | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:06 अप्रैल, 2026, 11:22 IST विवाद तब खड़ा हुआ जब खड़गे ने इडुक्की में चुनाव प्रचार करते हुए कहा कि केरल के लोग गुजरात के लोगों के विपरीत “शिक्षित और चतुर” हैं। कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन. (पीटीआई/फ़ाइल) भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को एक रैली के दौरान गुजरात के लोगों पर की गई टिप्पणी को लेकर कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे पर निशाना साधा और उन पर राज्य के लोगों का अपमान करने का आरोप लगाया। नबीन ने कहा, “कांग्रेस नेता इस देश के लोगों का अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। हर राज्य ने देश के विकास में योगदान दिया है, और फिर भी कांग्रेस उन्हें कमतर आंकने में लगी हुई है। खड़गे जी, ऐसे बयान देते रहिए- लोग आपको उचित जवाब देंगे।” यह विवाद रविवार को तब खड़ा हुआ जब इडुक्की जिले में केरल विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे खड़गे ने कहा कि केरल के लोग “शिक्षित और चतुर” हैं और उन्हें गुजरात और देश के अन्य हिस्सों के विपरीत गुमराह नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “केरल के लोगों को गुमराह न करें। वे बहुत चतुर हैं, वे शिक्षित हैं। मोदी जी, विजय (मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन), आप दोनों उन लोगों को मूर्ख बना सकते हैं जो गुजरात या अन्य स्थानों पर अशिक्षित हैं, लेकिन आप केरल के लोगों को मूर्ख नहीं बना सकते।” कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी पर देशभर के बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “उत्तर भारत का अपमान करना अब कांग्रेस की पहचान बन गई है। यह कैसी मानसिकता है? जब लोग उन्हें अस्वीकार करते हैं, तो वे लोगों को गाली देने लगते हैं। क्या अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को यह स्वीकार है?” गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने भी एक्स पर एक पोस्ट में खड़गे पर तीखा हमला किया और कहा कि उनकी टिप्पणी गुजरात के छह करोड़ लोगों और देश को महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को देने की राज्य की विरासत का अपमान है। उन्होंने कांग्रेस पर बार-बार गुजरात को निशाना बनाने का आरोप लगाया और पूछा कि क्या पार्टी की आलोचना राज्य के लोगों द्वारा “सत्ता से बाहर कर दिए जाने” के कारण है। सांघवी ने कहा, “यह बयान आपकी हताशा को नहीं दर्शाता है, बल्कि आपके असली कद को उजागर करता है। गांधी और पटेल की इस पवित्र भूमि का अपमान करने वाली कांग्रेस को गुजरात की जागरूक जनता ने हमेशा खारिज किया है और भविष्य में भी खारिज करती रहेगी। गुजरात माफ नहीं करेगा।” पहले प्रकाशित: 06 अप्रैल, 2026, 11:22 IST न्यूज़ इंडिया ‘लोग उचित जवाब देंगे’: बीजेपी ने ‘अनपढ़ गुजरात’ वाले बयान के लिए खड़गे की आलोचना की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)मल्लिकार्जुन खड़गे की गुजरात टिप्पणी(टी)नितिन नबीन बीजेपी की प्रतिक्रिया(टी)कांग्रेस ने गुजरात का अपमान(टी)केरल बनाम गुजरात विवाद(टी)हर्ष संघवी का बयान(टी)शहजाद पूनावाला की आलोचना(टी)गुजरात के मतदाताओं का अपमान(टी)केरल विधानसभा चुनाव

गर्मी में भूख न लगने की समस्या से हैं परेशान? तो आजमाएं यह घरेलू नुस्खे, जमकर खाने लगेंगे खाना – News18 हिंदी

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X गर्मी में भूख न लगने की समस्या से हैं परेशान? तो आजमाएं यह घरेलू नुस्खे   Health Tips: मौसम में अचानक बदलाव का असर दिनचर्या और सेहत पर साफ दिख रहा है. गर्मी बढ़ते ही भूख कम हो रही है और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं. सर्दियों में जहां लोग भरपेट भोजन करते हैं, वहीं गर्मियों में खाने की इच्छा घट जाती है. ऐसे में नींबू शरबत का सेवन शरीर को ठंडक देने, पाचन सुधारने और भूख बढ़ाने में कारगर माना जा रहा है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि यह नुस्खा पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ है और दादी-नानी के समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. अगर इस उपाय को रोजाना अपनाया जाए, तो न सिर्फ पाचन बेहतर होता है बल्कि भूख भी खुलकर लगती है. इसके लिए केवल नींबू, काली मिर्च और नमक की जरूरत होती है. यह नुस्खा बेहद सरल है. एक नींबू को बीच से काट लें और उसमें काली मिर्च पाउडर और थोड़ा सा नमक डाल दें. इसके बाद इसे हल्की आंच पर थोड़ा गर्म करें ताकि इसका रस हल्का गुनगुना हो जाए. फिर इसे धीरे-धीरे चूसकर सेवन करें. यह उपाय गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर करने में काफी असरदार है.

dry eyes explainer news: भूल जाओ आई ड्रॉप, अब मां के दूध से बनी गोली करेगी सूखी आंखों का इलाज, एम्‍स ने दी मंजूरी, बाजार में कब तक आएगी? जान लीजिए

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Dry Eye Treatment: जितना ज्यादा फोन, टीवी और डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल बढ़ रहा है आंखों की समस्याएं भी उतनी ही बढ़ रही हैं. खासतौर पर ड्राई आई की समस्या बड़ों से लेकर बच्चों तक के लिए मुसीबत बन गई है. आंखों में जलन, खुजली, धुंधलापन और नमी की कमी को दूर करने के लिए अक्सर आई ड्रॉप्स का ही इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अब ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के आरपी सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक साइंसेज ने एक ऐसी गोली पर क्‍ल‍िन‍िकल ट्रायल क‍िया है जो न केवल आंखों को उनकी नमी लौटाएगी बल्कि ड्राई आइज की समस्या का स्थाई समाधान भी होगी. आरपी सेंटर नई दिल्ली ने यह टेबलेट मां के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन से तैयार की है और क्लीनिकल ट्रायल्स में इसके शानदार नतीजे मिले हैं. लैक्टोफेरिन नाम की यह टेबलेट ड्राई आंखों के इलाज में रामबाण बन सकती है. डॉक्टरों की मानें तो यह दवा जल्द ही बाजार में आ सकती है. डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल या लेसिक लेजर सर्जरी के चलते मरीजों को अक्सर आंखों में जलन, चुभन और सूखापन यानी ड्राई आई सिंड्रोम (शुष्क नेत्र या सूखी आंख) की दिक्कत होती है. खासतौर पर स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल के चलते आज की तारीख में यह आंखों की सबसे कॉमन बीमारी बन चुकी है. नवोदय टाइम्स में छपी खबर में एम्स के आरपी सेंटर की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नम्रता शर्मा और बायोफिजिक्स विभाग की डॉ. सुजाता शर्मा ने बताया कि डिजिटल युग में बढ़ते स्क्रीन टाइम ने ड्राई आई सिंड्रोम को तेजी से बढ़ाया है. लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की मैबोमियन ग्लैंड प्रभावित होती है, जिससे आंसू बनने और उनकी गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है. नतीजतन आंखों में किरकिरी, धुंधलापन और लगातार थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं, मानो आंखें अपनी ही नमी के लिए तरस रही हों. 400 आंखों पर हुआ ट्रायलडॉ. नम्रता शर्मा ने बताया कि ड्राई आई सिंड्रोम के इलाज के लिए एम्स ने ‘लैक्टोफेरिन’ दवा पर क्लीनिकल ट्रायल करने का फैसला किया. ट्रायल में ड्राई आई सिंड्रोम से पीड़ित 200 मरीजों (400 आंखों) को शामिल किया गया और उन्हें तीन महीने तक दिन में दो बार 250 एमजी लैक्टोफेरिन दिया गया. इसके बाद अगले छह महीने तक उनकी चिकित्सकीय निगरानी की गई और नतीजे शानदार रहे. इस दौरान लैक्टोफेरिन लेने वाले मरीजों की आंखों की नमी में सुधार हुआ, आंसुओं की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बेहतर हुईं और सूखापन भी काफी हद तक कम हो गया. समस्या की जड़ पर वार करती है दवाइस ट्रायल की खास बात यह है कि ‘लैक्टोफेरिन’ दवा केवल लक्षणों को दबाने के बजाय समस्या की जड़ पर काम करती है और आंखों के पूरे सिस्टम को संतुलित करती है. डॉ. सुजाता शर्मा के अनुसार, लैक्टोफेरिन कोई कृत्रिम रसायन नहीं, बल्कि शरीर में पाया जाने वाला प्राकृतिक प्रोटीन है, जो खासतौर पर मां के दूध में मौजूद होता है और इम्युनिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. यही वजह है कि इसे आंखों के लिए एक प्रभावी नेचुरल हीलिंग विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. इस दवा को जापान में तैयार करवाया गया है और आरपी सेंटर ने इसको क्‍ल‍िन‍िकली परखा है, ज‍िसमें यह सफल रही है. कैसे डेवलप होती है ड्राई आई की समस्या? . मोबाइल या लैपटॉप पर लंबे समय तक देखने से आंखों का ब्लिंक रेट यानी पलक झपकने की दर कम हो जाती है. ऐसे में पलकों के किनारों पर स्थित सूक्ष्म तेल ग्रंथियां -मीबोमियन ग्लैंड पर्याप्त या सही गुणवत्ता का तेल नहीं बना पातीं और वे ब्लॉक हो जाती हैं. . यह तेल आंसुओं की बाहरी तैलीय परत बनाता है और आंसुओं को जल्दी सूखने से भी बचाता है। मीबम नामक तेल का उत्पादन न होने पर आंखों में सूखापन, जलन और ड्राई आई की समस्या बढ़ जाती है. . ड्राई आईज होने पर मरीज को आंखों में जलन, चुभन, दर्द, खुजली और थकान जैसी परेशानी होती है. अभी तक कैसे होता था इलाज?डॉ शर्मा ने कहा, अब तक ड्राई आई का इलाज मुख्य रूप से आई ड्रॉप्स और कृत्रिम आंसुओं तक सीमित रहा है, जो केवल अस्थायी राहत देते हैं और समस्या दोबारा लौट आती है. ऐसे में ‘लैक्टोफेरिन’ एक नई उम्मीद के रूप में सामने आया है, जो लंबे समय तक स्थायी राहत दे सकता है. डिजिटल युग में बढ़ती आंखों की समस्याओं के बीच यह खोज बेहतर और टिकाऊ इलाज की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है. ड्राई आई क्या होती है?ड्राई आई में आखें सूखी हो जाती हैं और उनकी नमी कम हो जाती है. ड्राई आई का इलाज क्या है?अभी तक कृत्रिम आंसू वाली आई ड्रॉप्स से ड्राई आई का इलाज होता है. लैक्टोफेरिन कैसी दवा है?आरपी सेंटर द्वारा बनाई जार ही लैक्टोफेरिन एक गोली या टैबलेट होगी जो मरीज को खानी होगी. इसे ड्राई आई सिंड्रोम की स्थाई दवा बताया जा रहा है. क्या यह मां के दूध से बनी है?यह दवा मां के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन लैक्‍टोफेर‍िन से बनी है. बाजार में कब तक आएगी जल्‍दी ही इसके बाजार में आने की संभावना है.

अशोकनगर में सिलेंडर न मिलने पर चक्काजाम:डिलीवरी मैसेज आने के बाद भी नहीं मिली गैस; कलेक्ट्रेट पर खाली टंकी रखकर हंगामा

अशोकनगर में सिलेंडर न मिलने पर चक्काजाम:डिलीवरी मैसेज आने के बाद भी नहीं मिली गैस; कलेक्ट्रेट पर खाली टंकी रखकर हंगामा

अशोकनगर जिले में सोमवार को गैस सिलेंडर की डिलीवरी का मैसेज आने के बावजूद टंकी नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। दो गैस एजेंसियों के उपभोक्ताओं ने पहले कोलूआ रोड पर चक्का जाम किया और फिर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर गेट पर खाली सिलेंडर रखकर हंगामा किया। देहात थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर समझा-बुझाकर जाम खुलवाया, जिसके बाद लोग अपनी शिकायत दर्ज कराने कलेक्ट्रेट पहुंचे हैं। जय बाबा गैस एजेंसी के बाहर चक्का जाम, पुलिस ने हटाया सुबह के समय कोलूआ रोड स्थित जय बाबा इंडियन गैस एजेंसी के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। उपभोक्ताओं का आरोप था कि उन्हें मोबाइल पर सिलेंडर डिलीवर होने का मैसेज मिल चुका है, लेकिन असल में उन्हें टंकी नहीं मिली। जब उन्होंने एजेंसी से संपर्क किया तो उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। नाराज उपभोक्ताओं ने सड़क पर उतरकर चक्का जाम कर दिया, जिससे यातायात बाधित हो गया। सूचना मिलने पर देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर सड़क से हटाया। इसके बाद कुछ लोग अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। डीसी गैस गोदाम के उपभोक्ताओं ने कलेक्ट्रेट गेट पर रखा खाली सिलेंडर इसी दौरान, गुना रोड स्थित डीसी गैस गोदाम के उपभोक्ता भी सिलेंडर न मिलने से आक्रोशित होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने कार्यालय के गेट पर खाली सिलेंडर रखकर अपना विरोध दर्ज कराया। इन उपभोक्ताओं का भी कहना था कि उन्हें मोबाइल पर सिलेंडर डिलीवर होने का मैसेज आ गया था, लेकिन उन्हें टंकी नहीं मिली। घर तक नहीं पहुंच रही गैस की टंकियां दुर्गा कॉलोनी निवासी प्राण सिंह कुशवाह ने बताया कि उन्होंने लगभग एक महीने पहले डीसी गैस गोदाम पर सिलेंडर बुक कराया था। उन्हें मोबाइल पर टंकी मिलने का मैसेज भी आया, लेकिन उन्हें अब तक सिलेंडर प्राप्त नहीं हुआ है। उनका यह भी कहना था कि अब उनका दोबारा नंबर भी नहीं लग रहा है। वहां मौजूद कुछ अन्य उपभोक्ताओं ने बताया कि जब एजेंसी पर गैस की गाड़ी आती है, तो उनसे कहा जाता है कि रिक्शा के माध्यम से टंकी घर पहुंचा दी जाएगी। हालांकि, कई बार टंकियां उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचतीं और उनका पता नहीं चलता। देखिए जाम की तस्वीरें…

पहलवान बिस्वा शर्मा का बड़ा आरोप- ‘कांग्रेस ने सोशल मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी के आधार पर मेरी पत्नी पर लगाया आरोप’

पहलवान बिस्वा शर्मा का बड़ा आरोप- 'कांग्रेस ने सोशल मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी के आधार पर मेरी पत्नी पर लगाया आरोप'

असम के मुख्यमंत्री हिमंत शर्मा विश्व ने अपने परिवार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने मेरी पत्नी के खिलाफ आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा,” मेरी पत्नी के खिलाफ ग़रीब पति-पत्नी को लेकर कांग्रेस नेता पवन सह-लेखक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मेरी पत्नी के खिलाफ कांग्रेस के आरोप में असमंजस की स्थिति को प्रभावित करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं, इसके लिए कॉलेज की सजा हो सकती है।” असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “…कोई भी 199 अमेरिकी डॉलर कंपनी का रजिस्ट्रेशन करा सकता है। कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उन्होंने रिंकी के नाम से एक और बनाई कंपनी…कांग्रेस ने सोशल मीडिया ग्रुप से प्राप्त पासपोर्ट और शेयरहोल्डिंग की स्थिति का इस्तेमाल किया। गौरव गोगोई ने भी एक सोशल मीडिया ग्रुप की मदद की। पाकिस्तान किस तरह असम चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, यह बहुत महत्वपूर्ण है।” #घड़ी | गुवाहाटी: असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कहते हैं, “…कोई भी 199 अमेरिकी डॉलर का भुगतान करके एक कंपनी पंजीकृत कर सकता है। कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद, उन्होंने रिनिकी के नाम पर एक और कंपनी बनाई…कांग्रेस ने एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया से प्राप्त पासपोर्ट और दस्तावेजों की छवियों का इस्तेमाल किया… https://t.co/S5bBLdtBKn pic.twitter.com/zPQr9lJs0V – एएनआई (@ANI) 6 अप्रैल 2026 क्या है मामला असम में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन अलग-अलग पासपोर्ट कैसे हैं? उन्हें तीन पासपोर्ट रखने की क्या आवश्यकता है? क्या वे कोई अपराधी हैं? कांग्रेस के एक्स हैंडल पर पवन एसोसिएट का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया, ”असम की जनता पूछ रही है।” हिमंता बिस्वा सरमा की पूरी राजनीतिक छवि के खिलाफ अपमान पर आधारित है, लेकिन उनकी पत्नी दो मुस्लिम देशों के पासपोर्ट दर्ज हैं, कैसे? भारत के कानून के खाते से आप द्विपक्षीय नागरिकता नहीं रख सकते हैं, तो क्या रिंकी भू लाइसेंस सरमा भारत का पासपोर्ट भी रखता है? हिमंता बिस्वा सरमा, अमित शाह के दत्तक पुत्र क्या हैं? और किस देश के मठाधीश को ये जानकारी थी कि उनके दत्तक पुत्र की पत्नी के 3 पासपोर्ट हैं? अमित शाह का जवाब- वो एसआईटी सहायक इस मामले की जांच क्या करेगी?” (टैग्सटूट्रांसलेट)असम चुनाव 2026(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा शर्मा(टी)कांग्रेस(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा शर्मा(टी)कांग्रेस

जाह्नवी बोलीं- मैं पूरी तरह से मां पर निर्भर थी:उनके जाने के बाद कई गलत फैसले लिए, कई लोगों ने निजी जिंदगी में दखल दिया

जाह्नवी बोलीं- मैं पूरी तरह से मां पर निर्भर थी:उनके जाने के बाद कई गलत फैसले लिए, कई लोगों ने निजी जिंदगी में दखल दिया

बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी मां और सुपरस्टार श्रीदेवी के निधन और उसके बाद आई मुश्किलों पर बात की है। जाह्नवी ने बताया कि वे अपनी जिंदगी के हर छोटे-बड़े फैसले के लिए मां पर निर्भर थीं। उनके अचानक चले जाने के बाद जाह्नवी को न सिर्फ अकेले फैसले लेना सीखना पड़ा, बल्कि दुनिया के कड़े व्यवहार और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। हर छोटी बात के लिए मां पर थीं निर्भर राज शमानी के पॉडकास्ट में जाह्नवी ने बताया कि श्रीदेवी के रहते उन्होंने कभी खुद से कोई फैसला नहीं लिया था। जाह्नवी ने कहा, “मैं उन पर पूरी तरह निर्भर थी। मैं उनसे हर बात पूछती थी की क्या कपड़े पहनूं? क्या करूं? क्या सही है और क्या गलत? उनके जाने के बाद मुझे अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेना सीखना पड़ा।” जाह्नवी ने यह भी माना कि इस दौरान उन्होंने कई गलत फैसले लिए और उन लोगों को अपनी निजी जिंदगी में दखल देने दिया, जिनका वहां कोई काम नहीं था। दुनिया मेरे दुख को जज कर रही थी जाह्नवी ने उस दौर के तनाव को याद करते हुए बताया कि लोग उनके दुख का पैमाना तय कर रहे थे। एक्ट्रेस के मुताबिक, “दुनिया मुझे तोड़ने की कोशिश कर रही थी। लोग कमेंट करते थे कि देखो वह अब कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रही है, वह उतनी दुखी नहीं है जितनी उसे होना चाहिए। मेरे परिवार पर भी कई तरह के आरोप लगाए गए।” मां के जाने से बदल गए बोनी कपूर अपनी मां के मजाकिया स्वभाव को याद करते हुए जाह्नवी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि श्रीदेवी की जगह दुनिया में कोई नहीं ले सकता। जाह्नवी ने अपने पिता बोनी कपूर के बारे में कहा, उस दिन मैंने सिर्फ परिवार का एक सदस्य नहीं खोया था, बल्कि अपने पिता को भी खो दिया था। जब मां हमारे साथ थीं, तब पापा बिल्कुल अलग इंसान थे। आज वह जैसे हैं मैं उससे खुश हूं, लेकिन वह पहले जैसे नहीं रहे।” जाह्नवी के मुताबिक, उनकी फैमिली की खुशी और पॉजिटिविटी में श्रीदेवी का सबसे बड़ा योगदान था। डेब्यू फिल्म के दौरान हुआ था निधन श्रीदेवी का निधन 24 फरवरी 2018 को यूएई में हुआ था। यह वह समय था जब जाह्नवी अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म ‘धड़क’ की तैयारी कर रही थीं। जाह्नवी की फिल्म तो बॉक्स ऑफिस पर हिट रही, लेकिन उनकी इस सफलता को देखने के लिए उनकी मां उनके साथ नहीं थीं। श्रीदेवी ने करीब तीन दशकों तक हिंदी, तमिल और तेलुगू सिनेमा पर राज किया था।

जाह्नवी बोलीं- मैं पूरी तरह से मां पर निर्भर थी:उनके जाने के बाद कई गलत फैसले लिए, कई लोगों ने निजी जिंदगी में दखल दिया

जाह्नवी बोलीं- मैं पूरी तरह से मां पर निर्भर थी:उनके जाने के बाद कई गलत फैसले लिए, कई लोगों ने निजी जिंदगी में दखल दिया

बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी मां और सुपरस्टार श्रीदेवी के निधन और उसके बाद आई मुश्किलों पर बात की है। जाह्नवी ने बताया कि वे अपनी जिंदगी के हर छोटे-बड़े फैसले के लिए मां पर निर्भर थीं। उनके अचानक चले जाने के बाद जाह्नवी को न सिर्फ अकेले फैसले लेना सीखना पड़ा, बल्कि दुनिया के कड़े व्यवहार और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। हर छोटी बात के लिए मां पर थीं निर्भर राज शमानी के पॉडकास्ट में जाह्नवी ने बताया कि श्रीदेवी के रहते उन्होंने कभी खुद से कोई फैसला नहीं लिया था। जाह्नवी ने कहा, “मैं उन पर पूरी तरह निर्भर थी। मैं उनसे हर बात पूछती थी की क्या कपड़े पहनूं? क्या करूं? क्या सही है और क्या गलत? उनके जाने के बाद मुझे अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेना सीखना पड़ा।” जाह्नवी ने यह भी माना कि इस दौरान उन्होंने कई गलत फैसले लिए और उन लोगों को अपनी निजी जिंदगी में दखल देने दिया, जिनका वहां कोई काम नहीं था। दुनिया मेरे दुख को जज कर रही थी जाह्नवी ने उस दौर के तनाव को याद करते हुए बताया कि लोग उनके दुख का पैमाना तय कर रहे थे। एक्ट्रेस के मुताबिक, “दुनिया मुझे तोड़ने की कोशिश कर रही थी। लोग कमेंट करते थे कि देखो वह अब कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रही है, वह उतनी दुखी नहीं है जितनी उसे होना चाहिए। मेरे परिवार पर भी कई तरह के आरोप लगाए गए।” मां के जाने से बदल गए बोनी कपूर अपनी मां के मजाकिया स्वभाव को याद करते हुए जाह्नवी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि श्रीदेवी की जगह दुनिया में कोई नहीं ले सकता। जाह्नवी ने अपने पिता बोनी कपूर के बारे में कहा, उस दिन मैंने सिर्फ परिवार का एक सदस्य नहीं खोया था, बल्कि अपने पिता को भी खो दिया था। जब मां हमारे साथ थीं, तब पापा बिल्कुल अलग इंसान थे। आज वह जैसे हैं मैं उससे खुश हूं, लेकिन वह पहले जैसे नहीं रहे।” जाह्नवी के मुताबिक, उनकी फैमिली की खुशी और पॉजिटिविटी में श्रीदेवी का सबसे बड़ा योगदान था। डेब्यू फिल्म के दौरान हुआ था निधन श्रीदेवी का निधन 24 फरवरी 2018 को यूएई में हुआ था। यह वह समय था जब जाह्नवी अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म ‘धड़क’ की तैयारी कर रही थीं। जाह्नवी की फिल्म तो बॉक्स ऑफिस पर हिट रही, लेकिन उनकी इस सफलता को देखने के लिए उनकी मां उनके साथ नहीं थीं। श्रीदेवी ने करीब तीन दशकों तक हिंदी, तमिल और तेलुगू सिनेमा पर राज किया था।

‘अपना ब्लाउज फाड़ो…’: केरल कांग्रेस नेता ने पार्टीजनों से चुनावी प्रतिद्वंद्वियों को फंसाने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करने को कहा | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:06 अप्रैल, 2026, 09:35 IST इडुक्की कांग्रेस नेता सीपी मैथ्यू ने कथित तौर पर सुझाव दिया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ टकराव की स्थिति में महिला नेता अपने कपड़े फाड़ सकती हैं और शिकायत दर्ज करा सकती हैं। केरल कांग्रेस नेता सीपी मैथ्यू ने भी कथित तौर पर मामलों को कानूनी रूप से अधिक गंभीर बनाने के लिए एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए एससी/एसटी महिलाओं को शामिल करने की बात कही। (न्यूज़18 मलयालम) चुनावी राज्य केरल में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है जब एक वीडियो सामने आया जिसमें इडुक्की जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के अध्यक्ष सीपी मैथ्यू कथित तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं से राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करने के लिए कह रहे हैं। यह टिप्पणी कथित तौर पर यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के उम्मीदवार रॉय के पॉलोस के लिए वज़हथॉप में एक चुनाव अभियान कार्यक्रम के दौरान की गई थी। भाषण में, मैथ्यू ने कथित तौर पर सुझाव दिया कि महिला नेता टकराव की स्थिति में अपने कपड़े फाड़ सकती हैं और शिकायत दर्ज करा सकती हैं, उनका दावा है कि इस तरह की रणनीति से प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ मामले मजबूत होंगे। उन्होंने कथित तौर पर एससी/एसटी समुदायों की महिलाओं को शामिल करके अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों का उपयोग करने के बारे में भी बात की, जिससे संकेत मिलता है कि यह कानूनी रूप से मामलों को और अधिक गंभीर बना सकता है। सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित टिप्पणियों ने राजनीतिक विरोधियों और नागरिक समाज की ओर से तीखी आलोचना शुरू कर दी है। जब यह टिप्पणी की गई तो केरल कांग्रेस के उपाध्यक्ष जैसन जोसेफ सहित वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अब तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) ने बयानों की कड़ी निंदा की, पार्टी नेताओं ने विपक्षी कांग्रेस पर चुनाव अवधि के दौरान हिंसा भड़काने और कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने विरोधियों को फंसाने और चुनावी नतीजे को प्रभावित करने की सोची-समझी रणनीति का आरोप लगाया। यह पहली बार नहीं है जब मैथ्यू गर्म पानी में उतरा है। वह हाल ही में एक घटना को लेकर सुर्खियों में थे, जिसमें उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एक पार्टी कार्यकर्ता के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी। केरल में, कांग्रेस विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का हिस्सा है, जो सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ वाम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के खिलाफ चुनाव लड़ रही है। राज्य में 9 अप्रैल को मतदान होगा और वोटों की गिनती 4 मई को होगी। जगह : इडुक्की, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 06 अप्रैल, 2026, 09:35 IST न्यूज़ इंडिया ‘अपना ब्लाउज फाड़ो…’: केरल कांग्रेस नेता ने पार्टीजनों से चुनावी प्रतिद्वंद्वियों को फंसाने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करने को कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल राजनीतिक विवाद(टी)सीपी मैथ्यू वीडियो(टी)इडुक्की कांग्रेस प्रमुख(टी)झूठी शिकायतों का आरोप(टी)राजनीति में महिलाओं का इस्तेमाल(टी)एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग(टी)यूडीएफ बनाम एलडीएफ केरल(टी)केरल चुनाव 2026