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सेहत का विज्ञान- गर्मियों के लिए समर हेल्थ गाइड:हीट, डिहाइड्रेशन से बचना है तो बदलें खानपान, जानें सही डाइट, न करें 4 गलतियां

सेहत का विज्ञान- गर्मियों के लिए समर हेल्थ गाइड:हीट, डिहाइड्रेशन से बचना है तो बदलें खानपान, जानें सही डाइट, न करें 4 गलतियां

गर्मियों में सिर्फ कम खाना ही नहीं, बल्कि सही और समझदारी से खाना ज्यादा जरूरी होता है। तेज गर्मी में शरीर पसीने के जरिए पानी के साथ-साथ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम और पोटेशियम भी खो देता है। इससे डिहाइड्रेशन, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। साथ ही भूख कम लगना और पाचन धीमा होना भी आम समस्या है। ‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ की डाइटरी गाइडलाइंस के अनुसार, इस मौसम में पानी से भरपूर, हल्का और आसानी से पचने वाला खाना शरीर को बेहतर सपोर्ट करता है। गर्मियों ये खाएं, हाइड्रेशन और पाचन सही रहेगा इन्हें कैसे और कब खाना सबसे फायदेमंद? सुबह: पानी, तरबूज, खरबूजा या नींबू पानी। मिड-मॉर्निंग: छाछ या नारियल पानी। गोंद कतीरा: भिगोकर ½–1 चम्मच, दिन में (सुबह या दोपहर)। दोपहर: हल्का खाना- दाल, दही, मौसमी सब्जी और सलाद। शाम: फल, नट्स या भुने चने और छाछ। रात: जल्दी और हल्का खाएं। सूप या दाल-चावल के साथ लौकी/तोरी या दही-चावल। ऐसी 4 गलतियां, जो गर्मियों में नहीं करनी चाहिए गर्मियों में अक्सर हम प्यास बुझाने या पेट भरने के चक्कर में ऐसी गलतियां करते हैं, जो शरीर को ठंडा रखने की बजाय बीमारी और डिहाइड्रेशन का कारण बन जाती हैं। 1. ज्यादा कैफीन से डिहाइड्रेशन मायो क्लिनिक के अनुसार, 2–3 कप तक कैफीन आमतौर पर सुरक्षित होती है, लेकिन ज्यादा मात्रा लेने पर डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है। कैफीन पेशाब के जरिए शरीर से पानी और सोडियम बाहर निकालती है। इसलिए गर्मियों में ज्यादा कैफीन लेने से शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है। 2. बहुत ठंडा पानी पीने से पाचन धीमा बहुत ठंडा पानी पीने से शरीर में थोड़े समय के लिए ब्लड सर्कुलेशन बदल सकता है। नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स यूके के अनुसार, ठंड से ब्लड वेसल्स सिकुड़ती हैं और पाचन थोड़ा धीमा हो सकता है। 4-5°C का पानी पीने पर शरीर उसे सामान्य तापमान तक लाने में ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है। कुछ मामलों में ठंडा पानी माइग्रेन, ब्लोटिंग या रिफ्लक्स बढ़ सकता है। 3. ज्यादा शुगर और कोल्ड ड्रिंक्स से सुस्ती गर्मियों में ज्यादा शुगर वाले ड्रिंक्स या मीठा खाना प्यास और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ाता है। शुगर तुरंत एनर्जी देती है, लेकिन थोड़ी देर बाद थकान और सुस्ती महसूस होने लगती है। ज्यादा शुगर से शरीर का इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगड़ सकता है, वजन बढ़ सकता है और हीट एग्जॉशन का खतरा भी बढ़ जाता है। 4. रात को भारी खाना न खाएं गर्मियों में रात को भारी और मसालेदार खाना पाचन पर ज्यादा दबाव डालता है और शरीर का तापमान बढ़ा सकता है। ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन अमेरिका’ की स्टडी के अनुसार, मसालेदार खाना नींद को प्रभावित कर सकता है। इसलिए रात में हल्का और कम मसाले वाला खाना बेहतर रहता है, ताकि पाचन सही रहे और नींद भी अच्छी आए। रेणु रखेजा जानी-मानी न्यूट्रिशनिस्ट एवं हेल्थ कोच हैं। @consciouslivingtips

परवीन बाबी को सिगरेट पीते देख डायरेक्टर ने फिल्म दी:शाही परिवार से थीं; 3 लिव-इन रिलेशनशिप रहे, अमिताभ बच्चन को मानती थीं हत्यारा

परवीन बाबी को सिगरेट पीते देख डायरेक्टर ने फिल्म दी:शाही परिवार से थीं; 3 लिव-इन रिलेशनशिप रहे, अमिताभ बच्चन को मानती थीं हत्यारा

करीब साढ़े 400 साल पहले पश्तून बाबी वंश मुगल शासक हुमायूं के साथ गुजरात पहुंचा। यह अफगानिस्तान का शाही परिवार था, जो मुगल साम्राज्य का अहम हिस्सा बना और कई रियासतों पर शासन किया। मुगल सत्ता कमजोर होने पर बाबी और मराठा (गायकवाड़ वंश) में जंग हुई, जिसमें मराठाओं ने अधिकांश गुजरात पर कब्जा किया, लेकिन बाबी ने जुनागढ़, राधनपुर और बालासिनोर पर शासन जारी रखा। मोहम्मद महाबत खान-3, जूनागढ़ की रियासत के आखिरी नवाब रहे। महाबत खान के एक करीबी रिश्तेदार थे वली मोहम्मद खान बाबी। उन्होंने 1940 में जमाल बख्ते बाबी से शादी की। सालों तक उन्हें संतान नहीं हुई। 1947 में ब्रिटिश हुकूमत खत्म होने पर रियासतें खत्म कर सरकारें बनाई जाने लगीं और भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। 15 अगस्त 1947 को आखिरी नवाब महाबत खान ने जूनागढ़ को पाकिस्तान में शामिल करने की घोषणा की, जिस पर लोगों ने आपत्ति जताई। 20 फरवरी 1948 के जनमत में 99% से ज्यादा लोगों ने भारत में शामिल होने का फैसला किया। जब सरकार बनी तो जूनागढ़ के नवाब माहबत के करीबी रिश्तेदार वली मोहम्मद खान की भी रियासत ले ली गई और बदले में उन्हें 100 बीघा जमीन यानी 40 एकड़ (17 लाख 42 हजार वर्ग फुट) दी गई। राजशाही खत्म होने के बावजूद वो शाही जिंदगी जीते थे। शादी के 14 साल बाद उनके घर खुशखबरी आई। पत्नी जमाल बख्ते ने जूनागढ़ की शाही हवेली में 4 अप्रैल 1954 को बेटी को जन्म दिया। नाम दिया गया, परवीन सुल्ताना वली मोहम्मद खानजी बाबी। वही परवीन बाबी जो हिंदी सिनेमा की मशहूर और टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल रहीं। वही परवीन बाबी जो अपने ग्लैमर, वेस्टर्नाइजेशन और समय से आगे चलने वाली सोच के लिए जानी गईं। जब महिलाएं पर्दे पर भी सिगरेट थामने से कतराती थीं, तब परवीन बाबी मिनी स्कर्ट पहनकर सड़कों पर सिगरेट पीते हुए टहला करती थीं। जब डायरेक्टर बी.आर.इशारा ने उन्हें पहली बार देखा, तब उनकी इसी बोल्डनेस के मुरीद हो गए और उन्हें तुरंत फिल्म ऑफर कर दी। आज परवीन बाबी की 72वीं बर्थ एनिवर्सरी है। अगर आज वो होतीं, तो अपना 72वां जन्मदिन मनातीं। उनकी जिंदगी के आखिरी दिन बेहद दर्दनाक थे। अकेलेपन की हद ये थी कि जब उनकी मौत हुई तो 4 दिनों तक बॉडी बंद घर में सड़ती रही। आज परवीन बाबी की बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए उनके समय से आगे चलने और जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक किस्से- 54 कमरों की हवेली में हुई परवरिश, पढ़ाई के लिए शर्त पर घर छोड़ा शाही परिवार में जन्मीं परवीन बाबी का बचपन जूनागढ़ की 54 कमरों की हवेली में बीता। इकलौती संतान को ऐशोआराम मिला और घर में 6 नौकर थे। 6 साल की उम्र में पिता का कैंसर से निधन हुआ, जिसके बाद वह दीवान चौक की दो मंजिला हवेली में रहने लगीं। शुरुआती पढ़ाई गुजराती मीडियम स्कूल से हुई। 14 साल की उम्र में मां ने उन्हें पढ़ाई के लिए अहमदाबाद भेजा, हालांकि परिवार इसके खिलाफ था। शर्त रखी गई कि जल्दी शादी कराई जाएगी, जिस पर मां मान गईं और उनका दाखिला सेंट जेवियर कॉलेज में हुआ। कॉलेज में कोर्स न होने के बावजूद परवीन बाबी ने खुद फर्राटे दार अंग्रेजी बोलना सीखा। आगे उन्होंने इंग्लिश और साइकोलॉजी में बेचलर डिग्री ली और अंग्रेजी में मास्टर डिग्री। शर्त के अनुसार 15 साल की उम्र में परवीन की सगाई कजिन जमील खान से हुई, जो पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स में पायलट थे। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद मां ने सगाई तोड़ दी और परवीन को इसकी जानकारी पोस्टकार्ड से मिली। 17 की उम्र में सिगरेट पीती थीं, मिनी स्कर्ट पहनती थीं; यही देख ऑफर हुई फिल्म 1971 में डायरेक्टर बी.आर. इशारा अहमदाबाद में एक नांव दो किनारे की शूटिंग कर रहे थे। भीड़ के बीच उनकी नजर एक लड़की पर पड़ी, जो मिनी स्कर्ट में सिगरेट पी रही थी। लंबी कद-काठी और छरहरे बदन वाली वह लड़की चारमिना सिगरेट थामे हुए थी। वह लड़की परवीन बाबी थीं, जिनकी उम्र 17 साल थी। बी.आर. इशारा समझ गए कि वह खास हैं और उन्होंने फोटोग्राफर से उनकी तस्वीरें लेने को कहा। फोटोग्राफर ने तस्वीरें लीं और बी.आर. इशारा ने परवीन को बुलाकर पूछा- फिल्मों में काम करोगी। आमतौर पर कोई भी लड़की तुरंत हामी भर देती, लेकिन परवीन ने कहा, अगर स्क्रिप्ट पसंद आई तो। बी.आर.इशारा इस एक जवाब में समझ गए कि लड़की में कॉन्फिडेंट की भरमार है। वैसे तो वो कभी अपनी फिल्मों की हीरोइन से किसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं करवाते थे, लेकिन परवीन बाबी का मॉडर्न लुक देख वो भी सोच में पड़ गए। उन्हें लगा कि कहीं ये मॉडर्न ख्यालों वाली लड़की मन न बदल ले। उन्होंने तुरंत कॉन्ट्रैक्ट बनवाया, जिसमें एक ही बात थी कि जब तक उनकी फिल्म नहीं बनती, परवीन किसी दूसरी फिल्म का हिस्सा नहीं बन सकतीं। शाही परिवार से आने के बावजूद परवीन ने फिल्मों में आने का फैसला कर लिया। बेबाक अंदाज में फिल्म मांगी, लॉन्च के लिए डायरेक्टर ने उधार लिया बी.आर. इशारा कॉन्ट्रैक्ट के बाद दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गए और यह बात लगभग भूल गए। इस दौरान परवीन बाबी सितंबर 1971 में कालिको डोम के फैशन शो में शामिल हुईं, जहां साथ काम करने वालीं मॉडल ममता साहू ने उन्हें अपने डायरेक्टर पिता किशोर साहू को सुझाया। किशोर साहू ने परवीन से एक मुलाकात कर उन्हें फिल्म धुंएं की लकीर के लिए फाइनल कर लिया। तभी उन्हें बी.आर.इशारा के कॉन्ट्रैक्ट का पता चला। किशोर साहू ने तुरंत उन्हें कॉल किया और कहा कि जिस हीरोइन से आपका कॉन्ट्रैक्ट है, मैं उसके साथ फिल्म बनाना चाहता हूं। परवीन बाबी का नाम सुनकर उन्हें फिर वो लड़की याद आई। लेकिन उनकी फिल्म बनने में देरी थी, तो उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर परवीन को वो फिल्म करने की इजाजत दे दी। कुछ महीने बीते। बी.आर.इशारा, मुंबई के राजकमल स्टूडियो में एक फिल्म की मिक्सिंग के सिलसिले में पहुंचे थे। वो सीढ़ियों पर बैठे सिगरेट पी ही रहे थे कि अचानक परवीन उनके ठीक बाजू में आकर बैठ गईं। उन्होंने न हाल पूछा न कोई और बात की, सीधे कहा- आप मेरे साथ फिल्म क्यों नहीं बनाते। बी.आर.इशारा इस सवाल से घिर गए। उनके जहन

परवीन बाबी को सिगरेट पीते देख डायरेक्टर ने फिल्म दी:शाही परिवार से थीं; 3 लिव-इन रिलेशनशिप रहे, अमिताभ बच्चन को मानती थीं हत्यारा

परवीन बाबी को सिगरेट पीते देख डायरेक्टर ने फिल्म दी:शाही परिवार से थीं; 3 लिव-इन रिलेशनशिप रहे, अमिताभ बच्चन को मानती थीं हत्यारा

करीब साढ़े 400 साल पहले पश्तून बाबी वंश मुगल शासक हुमायूं के साथ गुजरात पहुंचा। यह अफगानिस्तान का शाही परिवार था, जो मुगल साम्राज्य का अहम हिस्सा बना और कई रियासतों पर शासन किया। मुगल सत्ता कमजोर होने पर बाबी और मराठा (गायकवाड़ वंश) में जंग हुई, जिसमें मराठाओं ने अधिकांश गुजरात पर कब्जा किया, लेकिन बाबी ने जुनागढ़, राधनपुर और बालासिनोर पर शासन जारी रखा। मोहम्मद महाबत खान-3, जूनागढ़ की रियासत के आखिरी नवाब रहे। महाबत खान के एक करीबी रिश्तेदार थे वली मोहम्मद खान बाबी। उन्होंने 1940 में जमाल बख्ते बाबी से शादी की। सालों तक उन्हें संतान नहीं हुई। 1947 में ब्रिटिश हुकूमत खत्म होने पर रियासतें खत्म कर सरकारें बनाई जाने लगीं और भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। 15 अगस्त 1947 को आखिरी नवाब महाबत खान ने जूनागढ़ को पाकिस्तान में शामिल करने की घोषणा की, जिस पर लोगों ने आपत्ति जताई। 20 फरवरी 1948 के जनमत में 99% से ज्यादा लोगों ने भारत में शामिल होने का फैसला किया। जब सरकार बनी तो जूनागढ़ के नवाब माहबत के करीबी रिश्तेदार वली मोहम्मद खान की भी रियासत ले ली गई और बदले में उन्हें 100 बीघा जमीन यानी 40 एकड़ (17 लाख 42 हजार वर्ग फुट) दी गई। राजशाही खत्म होने के बावजूद वो शाही जिंदगी जीते थे। शादी के 14 साल बाद उनके घर खुशखबरी आई। पत्नी जमाल बख्ते ने जूनागढ़ की शाही हवेली में 4 अप्रैल 1954 को बेटी को जन्म दिया। नाम दिया गया, परवीन सुल्ताना वली मोहम्मद खानजी बाबी। वही परवीन बाबी जो हिंदी सिनेमा की मशहूर और टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल रहीं। वही परवीन बाबी जो अपने ग्लैमर, वेस्टर्नाइजेशन और समय से आगे चलने वाली सोच के लिए जानी गईं। जब महिलाएं पर्दे पर भी सिगरेट थामने से कतराती थीं, तब परवीन बाबी मिनी स्कर्ट पहनकर सड़कों पर सिगरेट पीते हुए टहला करती थीं। जब डायरेक्टर बी.आर.इशारा ने उन्हें पहली बार देखा, तब उनकी इसी बोल्डनेस के मुरीद हो गए और उन्हें तुरंत फिल्म ऑफर कर दी। आज परवीन बाबी की 72वीं बर्थ एनिवर्सरी है। अगर आज वो होतीं, तो अपना 72वां जन्मदिन मनातीं। उनकी जिंदगी के आखिरी दिन बेहद दर्दनाक थे। अकेलेपन की हद ये थी कि जब उनकी मौत हुई तो 4 दिनों तक बॉडी बंद घर में सड़ती रही। आज परवीन बाबी की बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए उनके समय से आगे चलने और जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक किस्से- 54 कमरों की हवेली में हुई परवरिश, पढ़ाई के लिए शर्त पर घर छोड़ा शाही परिवार में जन्मीं परवीन बाबी का बचपन जूनागढ़ की 54 कमरों की हवेली में बीता। इकलौती संतान को ऐशोआराम मिला और घर में 6 नौकर थे। 6 साल की उम्र में पिता का कैंसर से निधन हुआ, जिसके बाद वह दीवान चौक की दो मंजिला हवेली में रहने लगीं। शुरुआती पढ़ाई गुजराती मीडियम स्कूल से हुई। 14 साल की उम्र में मां ने उन्हें पढ़ाई के लिए अहमदाबाद भेजा, हालांकि परिवार इसके खिलाफ था। शर्त रखी गई कि जल्दी शादी कराई जाएगी, जिस पर मां मान गईं और उनका दाखिला सेंट जेवियर कॉलेज में हुआ। कॉलेज में कोर्स न होने के बावजूद परवीन बाबी ने खुद फर्राटे दार अंग्रेजी बोलना सीखा। आगे उन्होंने इंग्लिश और साइकोलॉजी में बेचलर डिग्री ली और अंग्रेजी में मास्टर डिग्री। शर्त के अनुसार 15 साल की उम्र में परवीन की सगाई कजिन जमील खान से हुई, जो पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स में पायलट थे। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद मां ने सगाई तोड़ दी और परवीन को इसकी जानकारी पोस्टकार्ड से मिली। 17 की उम्र में सिगरेट पीती थीं, मिनी स्कर्ट पहनती थीं; यही देख ऑफर हुई फिल्म 1971 में डायरेक्टर बी.आर. इशारा अहमदाबाद में एक नांव दो किनारे की शूटिंग कर रहे थे। भीड़ के बीच उनकी नजर एक लड़की पर पड़ी, जो मिनी स्कर्ट में सिगरेट पी रही थी। लंबी कद-काठी और छरहरे बदन वाली वह लड़की चारमिना सिगरेट थामे हुए थी। वह लड़की परवीन बाबी थीं, जिनकी उम्र 17 साल थी। बी.आर. इशारा समझ गए कि वह खास हैं और उन्होंने फोटोग्राफर से उनकी तस्वीरें लेने को कहा। फोटोग्राफर ने तस्वीरें लीं और बी.आर. इशारा ने परवीन को बुलाकर पूछा- फिल्मों में काम करोगी। आमतौर पर कोई भी लड़की तुरंत हामी भर देती, लेकिन परवीन ने कहा, अगर स्क्रिप्ट पसंद आई तो। बी.आर.इशारा इस एक जवाब में समझ गए कि लड़की में कॉन्फिडेंट की भरमार है। वैसे तो वो कभी अपनी फिल्मों की हीरोइन से किसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं करवाते थे, लेकिन परवीन बाबी का मॉडर्न लुक देख वो भी सोच में पड़ गए। उन्हें लगा कि कहीं ये मॉडर्न ख्यालों वाली लड़की मन न बदल ले। उन्होंने तुरंत कॉन्ट्रैक्ट बनवाया, जिसमें एक ही बात थी कि जब तक उनकी फिल्म नहीं बनती, परवीन किसी दूसरी फिल्म का हिस्सा नहीं बन सकतीं। शाही परिवार से आने के बावजूद परवीन ने फिल्मों में आने का फैसला कर लिया। बेबाक अंदाज में फिल्म मांगी, लॉन्च के लिए डायरेक्टर ने उधार लिया बी.आर. इशारा कॉन्ट्रैक्ट के बाद दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गए और यह बात लगभग भूल गए। इस दौरान परवीन बाबी सितंबर 1971 में कालिको डोम के फैशन शो में शामिल हुईं, जहां साथ काम करने वालीं मॉडल ममता साहू ने उन्हें अपने डायरेक्टर पिता किशोर साहू को सुझाया। किशोर साहू ने परवीन से एक मुलाकात कर उन्हें फिल्म धुंएं की लकीर के लिए फाइनल कर लिया। तभी उन्हें बी.आर.इशारा के कॉन्ट्रैक्ट का पता चला। किशोर साहू ने तुरंत उन्हें कॉल किया और कहा कि जिस हीरोइन से आपका कॉन्ट्रैक्ट है, मैं उसके साथ फिल्म बनाना चाहता हूं। परवीन बाबी का नाम सुनकर उन्हें फिर वो लड़की याद आई। लेकिन उनकी फिल्म बनने में देरी थी, तो उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर परवीन को वो फिल्म करने की इजाजत दे दी। कुछ महीने बीते। बी.आर.इशारा, मुंबई के राजकमल स्टूडियो में एक फिल्म की मिक्सिंग के सिलसिले में पहुंचे थे। वो सीढ़ियों पर बैठे सिगरेट पी ही रहे थे कि अचानक परवीन उनके ठीक बाजू में आकर बैठ गईं। उन्होंने न हाल पूछा न कोई और बात की, सीधे कहा- आप मेरे साथ फिल्म क्यों नहीं बनाते। बी.आर.इशारा इस सवाल से घिर गए। उनके जहन

ग्वालियर में पति ने पत्नी में मारे चाकू:नशे की हालत में घर पहुंचा और करने लगा विवाद, बच्चियों ने शोर मचाकर मां को बचाया

ग्वालियर में पति ने पत्नी में मारे चाकू:नशे की हालत में घर पहुंचा और करने लगा विवाद, बच्चियों ने शोर मचाकर मां को बचाया

ग्वालियर के उपनगर मुरार में मामूली कहासुनी के बाद एक सनकी पति ने अपनी पत्नी पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। घटना के समय मौजूद बेटियों के शोर मचाने पर परिजन और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिससे महिला की जान बच गई। आरोपी वारदात के बाद फरार हो गया, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। यह घटना शुक्रवार को पीतल कारखाने के पीछे सिंहपुर रोड इलाके में हुई। घायल महिला सुनीता बाथम अपने परिवार के साथ रहती है और सिलाई का काम कर परिवार का पालन-पोषण करती है। उसका पति कल्लू बाथम नशे का आदी बताया जा रहा है और अक्सर विवाद करता रहता था। शुक्रवार को वह नशे की हालत में घर पहुंचा और पत्नी से विवाद करने लगा। विवाद बढ़ने पर उसने चाकू उठाकर सुनीता पर कई वार कर दिए। इस दौरान उनकी बेटियां भी मौके पर मौजूद थीं, जिन्होंने शोर मचाया। शोर सुनकर परिजन और पड़ोसी मौके पर पहुंचे। हमले में सुनीता को पेट और हाथ में चोट आई है। घायल महिला को तुरंत पड़ोसियों ने मुरार स्थित माधवराव सिंधिया जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसे वार्ड नंबर-6 में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुका था। पुलिस ने जानकारी जुटाकर उसे पकड़ लिया और मुरार थाना पुलिस के हवाले कर दिया। घटना सुबह की बताई जा रही है, लेकिन घायल की हालत को देखते हुए पुलिस ने रात में जिला अस्पताल पहुंचकर उसके बयान दर्ज किए और देहाती नालसी के आधार पर एफआईआर दर्ज की। मुरार थाना पुलिस के अनुसार आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में घरेलू विवाद को ही हमले की वजह माना जा रहा है।

भोपाल में हनुमान जयंती जुलूस पर विवाद गहराया:आपत्तिजनक नारेबाजी के आरोप; कुरैशी समाज ने सख्त कार्रवाई की मांग की

भोपाल में हनुमान जयंती जुलूस पर विवाद गहराया:आपत्तिजनक नारेबाजी के आरोप; कुरैशी समाज ने सख्त कार्रवाई की मांग की

भोपाल में हनुमान जयंती के जुलूस को लेकर विवाद अब और गहरा गया है। ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश (एमपी) की ओर से थाना तलैया पुलिस को दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट तौर पर ‘भानु हिंदू’ नामक व्यक्ति पर आरोप लगाया गया है कि उसने जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। संगठन के प्रदेश महासचिव मोहम्मद रफीक कुरैशी ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 को इस्लामपुरा-बुधवारा क्षेत्र से निकले धार्मिक जुलूस के दौरान यह घटना हुई। आरोप है कि जैसे ही जुलूस मुस्लिम बाहुल्य इलाके में पहुंचा, भानु ने समुदाय विशेष को निशाना बनाते हुए नारेबाजी की और अपमानजनक टिप्पणियां कीं, जिससे कुछ समय के लिए इलाके में तनाव का माहौल बन गया। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो के जरिए नफरत फैलाने और दो समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जो शहर की गंगा-जमुनी तहजीब के लिए खतरा है। संगठन ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि आरोपी भानु के खिलाफ तत्काल प्रकरण दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, वायरल वीडियो की जांच कर उन्हें हटाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।

कांग्रेस बोली- किसान कल्याण नहीं किसान शोषण वर्ष मना रहे:खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा- पश्चिम एशिया में युद्ध के हालातों के बाद भी 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी करेंगे

कांग्रेस बोली- किसान कल्याण नहीं किसान शोषण वर्ष मना रहे:खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा- पश्चिम एशिया में युद्ध के हालातों के बाद भी 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी करेंगे

बारदानों की कमी को लेकर कांग्रेस के हमले के बीच खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए इस वर्ष 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। उधर, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा है कि मोहन सरकार किसान शोषण वर्ष मना रही है और किसानों को सुविधा नहीं दे रही है। खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत ने कहा कि किसानों को इस वर्ष 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ ही 40 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है। उन्होंने बताया है कि इस वर्ष किसानों का पंजीकृत रकबा 41.58 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल से 6.65 लाख हेक्टेयर अधिक है। मंत्री राजपूत ने कहा कि किसानों को उपार्जन केंद्रों पर इंतजार न करना पड़े, इसके लिए उपार्जन प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल 2026 से तथा शेष संभागों में 15 अप्रैल 2026 से समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था। इस वर्ष वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य तय किया है। मंत्री राजपूत ने कहा कि पश्चिम एशिया में पिछले एक माह से युद्ध की स्थिति के कारण पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका थी, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की नियमित आपूर्ति की जा रही है, जिससे आमजन को किसी प्रकार की समस्या न हो। 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन मंत्री राजपूत ने कहा कि एलपीजी गैस की उपलब्धता बनाए रखने और औद्योगिक उपयोग में पेट्रोलियम पदार्थों की सीमाओं के कारण बारदानों की उपलब्धता में आई संभावित कठिनाइयों का भी समाधान कर लिया है। भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन किया है। साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए HDP/PP बैग और एक बार उपयोग होने वाले जूट बारदाने के उपयोग की अनुमति भी दी गई है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार लगातार बारदाना उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा कर राज्य सरकार को सहयोग प्रदान कर रही है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए आवश्यक बारदानों की व्यवस्था उपार्जन प्रारंभ होने से पूर्व पूरी कर ली जाएगी। मंत्री राजपूत ने बताया कि जिन जिलों में भंडारण क्षमता सीमित है, वहां संयुक्त भागीदारी योजना के तहत गोदाम की क्षमता के 120 प्रतिशत तक भंडारण की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। साथ ही केंद्र सरकार के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत मार्च-अप्रैल तथा मई-जून 2026 का खाद्यान्न एक साथ वितरित किया जाएगा, जिससे लगभग 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक अतिरिक्त भंडारण क्षमता उपलब्ध हो सकेगी। “किसान कल्याण वर्ष नहीं, किसान शोषण वर्ष”- पटवारी दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में “किसान कल्याण वर्ष” के नाम पर “किसान शोषण वर्ष” मनाया जा रहा है। प्रदेशभर में किसानों को खाद के लिए लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ा, जहां महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की हुई, लाठियां चलीं और कई बुजुर्गों की जान तक चली गई, जबकि सरकार लगातार खाद की कमी से इनकार करती रही। पटवारी ने कहा कि सरकार युद्ध का हवाला देकर गेहूं खरीदी में देरी कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि वर्ष 2026 में 10 करोड़ बारदाने की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार ने मात्र 2 करोड़ 60 लाख बारदाने का ही आवेदन किया। लगभग 7.5 करोड़ बारदाने की कमी सरकार की घोर लापरवाही को दर्शाती है। पटवारी ने कहा कि बारदाना (जूट बैग) की कमी को लेकर सरकार युद्ध का हवाला देकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि सच्चाई कुछ और है। उन्होंने कहा, यह कमी किसी युद्ध या बाहरी कारण से नहीं, बल्कि सरकार की अकर्मण्यता और लापरवाही का परिणाम है, जिसका खामियाजा प्रदेश के किसान भुगत रहे हैं। कांग्रेस करेगी मंडियों में प्रदर्शन पीसीसी चीफ पटवारी ने कहा कि गेहूं खरीदी की तारीखें लगातार आगे बढ़ाई जा रही हैं। पहले 16 मार्च, फिर 1 अप्रैल और अब 10 अप्रैल, और आगे भी बढ़ने की संभावना है। इस कुप्रबंधन के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचनी पड़ी,लगभग 50 प्रतिशत किसान डिफाल्टर हो गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी किसानों के समर्थन में प्रदेशभर की मंडियों में प्रदर्शन करेगी। भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ता एक दिन के उपवास पर बैठेंगे और कृषि मंत्री के निवास के बाहर धरना देकर किसानों की आवाज बुलंद करेंगे।

कांग्रेस बोली- किसान कल्याण नहीं किसान शोषण वर्ष मना रहे:खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा- पश्चिम एशिया में युद्ध के हालातों के बाद भी 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी करेंगे

कांग्रेस बोली- किसान कल्याण नहीं किसान शोषण वर्ष मना रहे:खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा- पश्चिम एशिया में युद्ध के हालातों के बाद भी 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी करेंगे

बारदानों की कमी को लेकर कांग्रेस के हमले के बीच खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए इस वर्ष 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। उधर, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा है कि मोहन सरकार किसान शोषण वर्ष मना रही है और किसानों को सुविधा नहीं दे रही है। खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत ने कहा कि किसानों को इस वर्ष 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ ही 40 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है। उन्होंने बताया है कि इस वर्ष किसानों का पंजीकृत रकबा 41.58 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल से 6.65 लाख हेक्टेयर अधिक है। मंत्री राजपूत ने कहा कि किसानों को उपार्जन केंद्रों पर इंतजार न करना पड़े, इसके लिए उपार्जन प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल 2026 से तथा शेष संभागों में 15 अप्रैल 2026 से समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था। इस वर्ष वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य तय किया है। मंत्री राजपूत ने कहा कि पश्चिम एशिया में पिछले एक माह से युद्ध की स्थिति के कारण पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका थी, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की नियमित आपूर्ति की जा रही है, जिससे आमजन को किसी प्रकार की समस्या न हो। 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन मंत्री राजपूत ने कहा कि एलपीजी गैस की उपलब्धता बनाए रखने और औद्योगिक उपयोग में पेट्रोलियम पदार्थों की सीमाओं के कारण बारदानों की उपलब्धता में आई संभावित कठिनाइयों का भी समाधान कर लिया है। भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन किया है। साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए HDP/PP बैग और एक बार उपयोग होने वाले जूट बारदाने के उपयोग की अनुमति भी दी गई है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार लगातार बारदाना उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा कर राज्य सरकार को सहयोग प्रदान कर रही है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए आवश्यक बारदानों की व्यवस्था उपार्जन प्रारंभ होने से पूर्व पूरी कर ली जाएगी। मंत्री राजपूत ने बताया कि जिन जिलों में भंडारण क्षमता सीमित है, वहां संयुक्त भागीदारी योजना के तहत गोदाम की क्षमता के 120 प्रतिशत तक भंडारण की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। साथ ही केंद्र सरकार के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत मार्च-अप्रैल तथा मई-जून 2026 का खाद्यान्न एक साथ वितरित किया जाएगा, जिससे लगभग 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक अतिरिक्त भंडारण क्षमता उपलब्ध हो सकेगी। “किसान कल्याण वर्ष नहीं, किसान शोषण वर्ष”- पटवारी दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में “किसान कल्याण वर्ष” के नाम पर “किसान शोषण वर्ष” मनाया जा रहा है। प्रदेशभर में किसानों को खाद के लिए लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ा, जहां महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की हुई, लाठियां चलीं और कई बुजुर्गों की जान तक चली गई, जबकि सरकार लगातार खाद की कमी से इनकार करती रही। पटवारी ने कहा कि सरकार युद्ध का हवाला देकर गेहूं खरीदी में देरी कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि वर्ष 2026 में 10 करोड़ बारदाने की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार ने मात्र 2 करोड़ 60 लाख बारदाने का ही आवेदन किया। लगभग 7.5 करोड़ बारदाने की कमी सरकार की घोर लापरवाही को दर्शाती है। पटवारी ने कहा कि बारदाना (जूट बैग) की कमी को लेकर सरकार युद्ध का हवाला देकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि सच्चाई कुछ और है। उन्होंने कहा, यह कमी किसी युद्ध या बाहरी कारण से नहीं, बल्कि सरकार की अकर्मण्यता और लापरवाही का परिणाम है, जिसका खामियाजा प्रदेश के किसान भुगत रहे हैं। कांग्रेस करेगी मंडियों में प्रदर्शन पीसीसी चीफ पटवारी ने कहा कि गेहूं खरीदी की तारीखें लगातार आगे बढ़ाई जा रही हैं। पहले 16 मार्च, फिर 1 अप्रैल और अब 10 अप्रैल, और आगे भी बढ़ने की संभावना है। इस कुप्रबंधन के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचनी पड़ी,लगभग 50 प्रतिशत किसान डिफाल्टर हो गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी किसानों के समर्थन में प्रदेशभर की मंडियों में प्रदर्शन करेगी। भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ता एक दिन के उपवास पर बैठेंगे और कृषि मंत्री के निवास के बाहर धरना देकर किसानों की आवाज बुलंद करेंगे।

जबलपुर आंदोलन की तैयारी में जुटी युवा कांग्रेस:सीधी पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष ने महंगाई-बेरोजगारी पर सरकार को घेरा; कार्यकर्ताओं ने निकाली रैली

जबलपुर आंदोलन की तैयारी में जुटी युवा कांग्रेस:सीधी पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष ने महंगाई-बेरोजगारी पर सरकार को घेरा; कार्यकर्ताओं ने निकाली रैली

सीधी में शुक्रवार शाम करीब 7 बजे मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया पहुंचे। उनके आने पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। घनघोरिया 16 अप्रैल को जबलपुर में आयोजित होने वाले प्रदेश स्तरीय बड़े आंदोलन की तैयारियों को लेकर विभिन्न जिलों के प्रवास पर हैं। जमोड़ी बाईपास पर युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने उनके नेतृत्व में एक रैली निकाली, जिसके बाद जिला कांग्रेस कार्यालय में बैठक संपन्न हुई। 16 अप्रैल को बड़ा आंदोलन बैठक को संबोधित करते हुए यश घनघोरिया ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार देने में पूरी तरह विफल रही है और शिक्षा नीति में सुधार के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। घनघोरिया ने घोषणा की कि इन जनविरोधी नीतियों और बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ 16 अप्रैल को जबलपुर में युवा कांग्रेस एक विशाल आंदोलन करेगी। 10 दिनों से प्रदेश का दौरा कर रहे यश घनघोरिया ने बताया कि वे पिछले 10 दिनों से लगातार प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान वे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद कर उन्हें जबलपुर आंदोलन के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज दबाने वाली सरकार को जगाने के लिए यह आंदोलन मील का पत्थर साबित होगा। सीधी में कार्यकर्ताओं ने दिखाई एकजुटता इस दौरान युवक कांग्रेस जिला अध्यक्ष करुण सिंह, विधानसभा अध्यक्ष विकास सिंह परिहार और एनएसयूआई प्रदेश सचिव विक्रांत सिंह परिहार मुख्य रूप से मौजूद रहे। जमोड़ी बाईपास से लेकर जिला कार्यालय तक हुए शक्ति प्रदर्शन में सैकड़ों युवा कार्यकर्ता शामिल हुए। स्थानीय नेताओं ने भरोसा दिलाया कि सीधी जिले से बड़ी संख्या में युवा जबलपुर पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाएंगे।

श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला, 18 पटवारियों पर चलेगा मुकदमा:कलेक्टर ने दी अभियोजन स्वीकृति; राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी और धोखाधड़ी की थी

श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला, 18 पटवारियों पर चलेगा मुकदमा:कलेक्टर ने दी अभियोजन स्वीकृति; राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी और धोखाधड़ी की थी

श्योपुर जिले में हुए बहुचर्चित बाढ़ राहत घोटाले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने इस मामले में संलिप्त 18 पटवारियों के खिलाफ अभियोजन (मुकदमा चलाने) की औपचारिक स्वीकृति दे दी है। इस मंजूरी के बाद अब इन राजस्व कर्मचारियों के विरुद्ध न्यायालय में कानूनी कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया है। पुलिस ने जांच में पाया था कि राहत राशि के वितरण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और फर्जीवाड़ा किया गया है। थाना बड़ौदा में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का केस यह पूरा प्रकरण थाना बड़ौदा में अपराध क्रमांक 439/23 के तहत दर्ज है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी), 409 (अमानत में ख्यानत) और 120-बी (साजिश) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच में राजस्व रिकॉर्ड में फर्जी प्रविष्टियां करने और अपात्रों को लाभ पहुंचाने के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद अभियोजन की मांग की गई थी। इन 18 पटवारियों पर होगी अदालती कार्रवाई प्रशासन द्वारा जिन पटवारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई है, उनमें मेवाराम गौरछिया, हेमन्त मित्तल, राजकुमार शर्मा, महेन्द्र सिंह जाटव, सुमित देशलेहरा, योगेश जिंदल, विनोद भूषण, अखिलेश जैन, भोलाराम गुप्ता, हुकुमचंद बिसारिया, राजवीर जाटव, बृजराज मीणा, रामनरेश जाटव, रामदयाल जागा, सोनेराम धाकड़, नीतेश मीणा, संजय रावत और शंकरलाल मर्सकोले शामिल हैं। इस घोटाले में पटवारियों के अलावा अन्य कर्मचारियों सहित कुल 110 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जल्द दाखिल होगा आरोप पत्र, गिरफ्तारी की संभावना अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद अब पुलिस संबंधित पटवारियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान (आरोप पत्र) पेश करेगी। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आपराधिक मामले के साथ-साथ इन कर्मचारियों पर विभागीय जांच और निलंबन जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। जिले के राजस्व विभाग में इसे अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, जिससे विभाग के अन्य संदिग्ध मामलों की परतें भी खुलने की संभावना है।

डिंडौरी में शिकारियों पर वन विभाग का शिकंजा, सर्चिंग अभियान:डॉग स्क्वाड ने चार गांवों में ली तलाशी, तार बरामद

डिंडौरी में शिकारियों पर वन विभाग का शिकंजा, सर्चिंग अभियान:डॉग स्क्वाड ने चार गांवों में ली तलाशी, तार बरामद

डिंडौरी जिले में वन्यजीवों के अवैध शिकार पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को डिंडौरी वन परिक्षेत्र के चार गांवों में शहडोल से बुलाए गए डॉग स्क्वाड की मदद से एक व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शिकारियों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना था। यह तलाशी अभियान सारस ताल, कुई, रामगुडा और त्यागपुर गांवों के संदिग्ध ठिकानों पर केंद्रित रहा। सर्चिंग के दौरान वन अमले को लगभग दो किलोग्राम जीआई तार और लकड़ी के खूंटे बरामद हुए। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन सामग्रियों का उपयोग आमतौर पर जंगली जानवरों के शिकार में किया जाता है। विभाग कुछ संदिग्ध शिकारियों की तलाश भी कर रहा है। वन विभाग की यह कार्रवाई हाल ही में हुई एक गिरफ्तारी के बाद और अधिक सक्रिय हो गई है। दो दिन पहले कुई मॉल गांव से आरोपी दरबार सिंह मरकाम को गिरफ्तार किया गया था। उसके घर से जंगली सुअर का कटा हुआ सिर और शिकार में इस्तेमाल की गई सामग्री जब्त की गई थी, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। रेंजर अतुल सिंह बघेल ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रहेंगे। इस पूरी कार्रवाई में परिक्षेत्र सहायक ईश्वर सिंह परस्ते, वनरक्षक सुनील कोरी, संजय मार्को, मान सिंह, उदय सिंह, अनीता धुर्वे, गीता और आलोक यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।