Tuesday, 20 Oct 2026 | 04:05 PM

Trending :

EXCLUSIVE

परवीन बाबी को सिगरेट पीते देख डायरेक्टर ने फिल्म दी:शाही परिवार से थीं; 3 लिव-इन रिलेशनशिप रहे, अमिताभ बच्चन को मानती थीं हत्यारा

परवीन बाबी को सिगरेट पीते देख डायरेक्टर ने फिल्म दी:शाही परिवार से थीं; 3 लिव-इन रिलेशनशिप रहे, अमिताभ बच्चन को मानती थीं हत्यारा

करीब साढ़े 400 साल पहले पश्तून बाबी वंश मुगल शासक हुमायूं के साथ गुजरात पहुंचा। यह अफगानिस्तान का शाही परिवार था, जो मुगल साम्राज्य का अहम हिस्सा बना और कई रियासतों पर शासन किया। मुगल सत्ता कमजोर होने पर बाबी और मराठा (गायकवाड़ वंश) में जंग हुई, जिसमें मराठाओं ने अधिकांश गुजरात पर कब्जा किया, लेकिन बाबी ने जुनागढ़, राधनपुर और बालासिनोर पर शासन जारी रखा।
मोहम्मद महाबत खान-3, जूनागढ़ की रियासत के आखिरी नवाब रहे। महाबत खान के एक करीबी रिश्तेदार थे वली मोहम्मद खान बाबी। उन्होंने 1940 में जमाल बख्ते बाबी से शादी की। सालों तक उन्हें संतान नहीं हुई। 1947 में ब्रिटिश हुकूमत खत्म होने पर रियासतें खत्म कर सरकारें बनाई जाने लगीं और भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। 15 अगस्त 1947 को आखिरी नवाब महाबत खान ने जूनागढ़ को पाकिस्तान में शामिल करने की घोषणा की, जिस पर लोगों ने आपत्ति जताई। 20 फरवरी 1948 के जनमत में 99% से ज्यादा लोगों ने भारत में शामिल होने का फैसला किया। जब सरकार बनी तो जूनागढ़ के नवाब माहबत के करीबी रिश्तेदार वली मोहम्मद खान की भी रियासत ले ली गई और बदले में उन्हें 100 बीघा जमीन यानी 40 एकड़ (17 लाख 42 हजार वर्ग फुट) दी गई। राजशाही खत्म होने के बावजूद वो शाही जिंदगी जीते थे। शादी के 14 साल बाद उनके घर खुशखबरी आई। पत्नी जमाल बख्ते ने जूनागढ़ की शाही हवेली में 4 अप्रैल 1954 को बेटी को जन्म दिया। नाम दिया गया, परवीन सुल्ताना वली मोहम्मद खानजी बाबी। वही परवीन बाबी जो हिंदी सिनेमा की मशहूर और टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल रहीं। वही परवीन बाबी जो अपने ग्लैमर, वेस्टर्नाइजेशन और समय से आगे चलने वाली सोच के लिए जानी गईं। जब महिलाएं पर्दे पर भी सिगरेट थामने से कतराती थीं, तब परवीन बाबी मिनी स्कर्ट पहनकर सड़कों पर सिगरेट पीते हुए टहला करती थीं। जब डायरेक्टर बी.आर.इशारा ने उन्हें पहली बार देखा, तब उनकी इसी बोल्डनेस के मुरीद हो गए और उन्हें तुरंत फिल्म ऑफर कर दी। आज परवीन बाबी की 72वीं बर्थ एनिवर्सरी है। अगर आज वो होतीं, तो अपना 72वां जन्मदिन मनातीं। उनकी जिंदगी के आखिरी दिन बेहद दर्दनाक थे। अकेलेपन की हद ये थी कि जब उनकी मौत हुई तो 4 दिनों तक बॉडी बंद घर में सड़ती रही। आज परवीन बाबी की बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए उनके समय से आगे चलने और जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक किस्से- 54 कमरों की हवेली में हुई परवरिश, पढ़ाई के लिए शर्त पर घर छोड़ा शाही परिवार में जन्मीं परवीन बाबी का बचपन जूनागढ़ की 54 कमरों की हवेली में बीता। इकलौती संतान को ऐशोआराम मिला और घर में 6 नौकर थे। 6 साल की उम्र में पिता का कैंसर से निधन हुआ, जिसके बाद वह दीवान चौक की दो मंजिला हवेली में रहने लगीं। शुरुआती पढ़ाई गुजराती मीडियम स्कूल से हुई। 14 साल की उम्र में मां ने उन्हें पढ़ाई के लिए अहमदाबाद भेजा, हालांकि परिवार इसके खिलाफ था। शर्त रखी गई कि जल्दी शादी कराई जाएगी, जिस पर मां मान गईं और उनका दाखिला सेंट जेवियर कॉलेज में हुआ। कॉलेज में कोर्स न होने के बावजूद परवीन बाबी ने खुद फर्राटे दार अंग्रेजी बोलना सीखा। आगे उन्होंने इंग्लिश और साइकोलॉजी में बेचलर डिग्री ली और अंग्रेजी में मास्टर डिग्री। शर्त के अनुसार 15 साल की उम्र में परवीन की सगाई कजिन जमील खान से हुई, जो पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स में पायलट थे। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद मां ने सगाई तोड़ दी और परवीन को इसकी जानकारी पोस्टकार्ड से मिली। 17 की उम्र में सिगरेट पीती थीं, मिनी स्कर्ट पहनती थीं; यही देख ऑफर हुई फिल्म 1971 में डायरेक्टर बी.आर. इशारा अहमदाबाद में एक नांव दो किनारे की शूटिंग कर रहे थे। भीड़ के बीच उनकी नजर एक लड़की पर पड़ी, जो मिनी स्कर्ट में सिगरेट पी रही थी। लंबी कद-काठी और छरहरे बदन वाली वह लड़की चारमिना सिगरेट थामे हुए थी। वह लड़की परवीन बाबी थीं, जिनकी उम्र 17 साल थी। बी.आर. इशारा समझ गए कि वह खास हैं और उन्होंने फोटोग्राफर से उनकी तस्वीरें लेने को कहा। फोटोग्राफर ने तस्वीरें लीं और बी.आर. इशारा ने परवीन को बुलाकर पूछा- फिल्मों में काम करोगी। आमतौर पर कोई भी लड़की तुरंत हामी भर देती, लेकिन परवीन ने कहा, अगर स्क्रिप्ट पसंद आई तो। बी.आर.इशारा इस एक जवाब में समझ गए कि लड़की में कॉन्फिडेंट की भरमार है। वैसे तो वो कभी अपनी फिल्मों की हीरोइन से किसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं करवाते थे, लेकिन परवीन बाबी का मॉडर्न लुक देख वो भी सोच में पड़ गए। उन्हें लगा कि कहीं ये मॉडर्न ख्यालों वाली लड़की मन न बदल ले। उन्होंने तुरंत कॉन्ट्रैक्ट बनवाया, जिसमें एक ही बात थी कि जब तक उनकी फिल्म नहीं बनती, परवीन किसी दूसरी फिल्म का हिस्सा नहीं बन सकतीं। शाही परिवार से आने के बावजूद परवीन ने फिल्मों में आने का फैसला कर लिया। बेबाक अंदाज में फिल्म मांगी, लॉन्च के लिए डायरेक्टर ने उधार लिया बी.आर. इशारा कॉन्ट्रैक्ट के बाद दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गए और यह बात लगभग भूल गए। इस दौरान परवीन बाबी सितंबर 1971 में कालिको डोम के फैशन शो में शामिल हुईं, जहां साथ काम करने वालीं मॉडल ममता साहू ने उन्हें अपने डायरेक्टर पिता किशोर साहू को सुझाया। किशोर साहू ने परवीन से एक मुलाकात कर उन्हें फिल्म धुंएं की लकीर के लिए फाइनल कर लिया। तभी उन्हें बी.आर.इशारा के कॉन्ट्रैक्ट का पता चला। किशोर साहू ने तुरंत उन्हें कॉल किया और कहा कि जिस हीरोइन से आपका कॉन्ट्रैक्ट है, मैं उसके साथ फिल्म बनाना चाहता हूं। परवीन बाबी का नाम सुनकर उन्हें फिर वो लड़की याद आई। लेकिन उनकी फिल्म बनने में देरी थी, तो उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर परवीन को वो फिल्म करने की इजाजत दे दी। कुछ महीने बीते। बी.आर.इशारा, मुंबई के राजकमल स्टूडियो में एक फिल्म की मिक्सिंग के सिलसिले में पहुंचे थे। वो सीढ़ियों पर बैठे सिगरेट पी ही रहे थे कि अचानक परवीन उनके ठीक बाजू में आकर बैठ गईं। उन्होंने न हाल पूछा न कोई और बात की, सीधे कहा- आप मेरे साथ फिल्म क्यों नहीं बनाते। बी.आर.इशारा इस सवाल से घिर गए। उनके जहन में भी यही सवाल था कि वो परवीन के साथ फिल्म क्यों नहीं बना रहे। उन्होंने घर लौटते ही अपने फोटोग्राफर को कॉल कर फिल्म बनाने के लिए रकम जुटाने को कहा। फोटोग्राफर ने जैसे-तैसे 2 लाख उधार लिए, जिसकी बदौलत बी.आर.इशारा ने परवीन बाबी के साथ फिल्म चरित्र शुरू की। ये फिल्म पहले बनी और परवीन बाबी की पहली फिल्म रही। इस फिल्म में पहने गए परवीन बाबी के कपड़े उन्होंने खुद खरीदे और चुने। 3 लिव-इन रिलेशनशिप और समय से आगे की सोच परवीन बाबी की शुरुआती 5 फिल्में कुछ खास नहीं रहीं, फिर आया साल 1974। परवीन बाबी को फिल्म दीवार में अमिताभ बच्चन के ऑपोजिट वैश्या अनिता को रोल मिला। फिल्म सुपरहिट रही और परवीन बाबी को हिंदी सिनेमा में खास पहचान मिल गई। आगे उन्होंने अमर अक्बर एंथोनी, काला सोना, काला पत्थर, सुहाग, द बर्निंग ट्रेन, शान, नमक हलाल जैसी कई हिट फिल्में दीं और 70-80 के दशक की हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस बनीं। 1972 में फिल्म सेट पर परवीन बाबी की मुलाकात डैनी डेंग्जोंग्पा से हुई। दोनों जल्द करीब आए और शिवाजी पार्क में लिव-इन में रहने लगे, जो उस दौर में आम नहीं था। किसी कारण वो 3 साल बाद अलग हुए, लेकिन दोस्ती बनी रही। डेनी से ब्रेकअप के बाद परवीन बाबी की जिंदगी में कबीर बेदी आए। वो तब ओपन मैरिज में थे। परवीन के लिए कबीर बेदी पत्नी प्रोतिमा को तलाक देना चाहते थे, लेकिन प्रोतिमा इसके लिए राजी नहीं हुईं। परवीन उनके साथ भी लिव-इन में रहीं। साल 1977 में परवीन बाबी ने भारत छोड़ दिया और कबीर बेदी के साथ जिंदगी बिताने के लिए लंदन शिफ्ट हो गईं। लेकिन महज 3 महीनों में ही वो कबीर को लंदन में छोड़कर भारत लौट आईं। भारत लौटकर वो फिर डेनी से संपर्क में आईं, जिन्हें वो हमेशा से अच्छा दोस्त मानती थीं। उन्होंने डेनी से कहा कि कबीर बेदी ने उनका जबरदस्ती अबॉर्शन करवाया, जिससे वो भागकर आ गईं। भारत लौटकर परवीन बाबी ने फिर 1977 से फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। इस समय उनकी महेश भट्ट से नजदीकियां बढ़ने लगीं। 6 महीने तक रिलेशनशिप में रहने के बाद महेश भट्ट ने परवीन बाबी के लिए पत्नी किरण और बच्चों को छोड़ दिया और उनके साथ लिव इन में रहने लगे। तभी परवीन को अमर अकबर एंथोनी और काला पत्थर जैसी फिल्में मिली थीं। परवीन बाबी और वो लाइलाज बीमारी 1979 की शाम, जब महेश भट्ट घर पहुंचे तो देखा कि परवीन बाबी के घर के बाहर उनकी मां डरी-सहमी खड़ी हैं। महेश को देखते ही उन्होंने कहा- देखो परवीन को क्या हुआ। वो अंदर गए तो परवीन कमरे के कौने में चाकू लिए बैठीं कंपकपा रही थीं। महेश भट्ट ने कुछ कहना चाहा तो परवीन ने चुप करवाते हुए कहा, श्श्श…कुछ मत कहना। इस कमरे की जासूसी हो रही है। यहां डिवाइस लगी है। वो मुझे मारना चाहते हैं। महेश समझ गए कि परवीन को इलाज की जरूरत है। वह उन्हें भारत और विदेश के कई डॉक्टरों के पास ले गए, जहां पता चला कि उन्हें सिजोफ्रेनिया है, जिसमें मरीज को वहम होता है कि कोई उसे मारना चाहता है। शॉक ट्रीटमेंट की सलाह दी गई, लेकिन महेश भट्ट ने मना कर दिया। समय के साथ उनकी हालत बिगड़ने लगी। कभी वह एसी या कार में बम होने की बात कहतीं और चलती कार से उतरने लगतीं, तो कभी कहतीं कि लोग उनका पीछा कर रहे हैं। साल 1979 में महेश भट्ट उन्हें लेकर चकाचौंध से दूर बैंग्लोर शिफ्ट हो गए। डॉक्टर्स लगातार उनसे संपर्क में थे, लेकिन परवीन इलाज नहीं करवाना चाहती थीं। एक रोज उन्होंने महेश भट्ट से साफ कहा कि उन्हें परवीन या डॉक्टर्स में से किसी एक को चुनना होगा। महेश भट्ट उन्हें छोड़कर घर से निकले, तो परवीन बिना कपड़े ही उनके पीछे दौड़ पड़ीं। इस दिन महेश भट्ट ने डॉक्टर्स की सलाह पर परवीन से दूरी बना ली। कुछ दिनों बाद परवीन भी फिर मुंबई लौट आईं और फिल्मों में काम करने लगीं। वो मौके जब परवीन बाबी को पागल समझने लगे लोग 1984 में परवीन बाबी को सिक्योरिटी चेक में अजीब बर्ताव करने और पहचान न बता पाने पर अरेस्ट किया गया था। उन्हें न्यूयॉर्क के पागलखाने में रखा गया, तब इंडियन काउंसिल के हस्तक्षेप के बाद उन्हें छोड़ा गया था। 1988 में फिल्म शान के टाइटल सॉन्ग की शूटिंग के दौरान परवीन बाबी ने हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने शूटिंग रोक दी और कहा कि को-स्टार अमिताभ बच्चन उनके ऊपर झूमर गिराना चाहते हैं और हत्या करना चाहते हैं। वो डरी-सहमी सेट से भाग गईं। 1989 में परवीन बाबी ने फिल्मफेयर मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमिताभ बच्चन एक इंटरनेशनल गैंगस्टर हैं, जो उनकी जान लेना चाहते हैं। उन्होंने ये भी दावा किया कि अमिताभ बच्चन के गुंडों ने उन्हें किडनैप कर आइलैंड में रखा और कान के नीचे की तरफ एक चिप लगा दी, जिससे उन्हें ट्रेस किया जा सके। इस इंटरव्यू के बाद इंडस्ट्री में उनकी बीमारी की खबर फैल गई। वह कहती थीं कि लोग उन्हें बदनाम कर साजिश कर रहे हैं। इस समय भी परवीन बाबी एक्स बॉयफ्रेंड डेनी से मिलती थीं। वो डेनी को अच्छा दोस्त मानती थीं। तब तक डेनी की जिंदगी में किम नाम की महिला आ चुकी थीं। वो गर्लफ्रेंड के साथ लिव-इन में थे। जब परवीन आए दिन उनके घर आने लगीं तो उनकी गर्लफ्रेंड ने चिंता जताई। कई बार ऐसा भी हुआ जब डेनी गर्लफ्रेंड के साथ घर लौटे और परवीन उनके बेडरूम में टीवी देखती मिलीं। डेनी ने जब परवीन को ऐसा करने से रोका, तो जवाब में उन्होंने कहा कि ब्रेकअप के बाद वो दोस्ती जारी रखना चाहती हैं, इसमें कुछ गलत नहीं है। एक दिन डेनी, उनकी गर्लफ्रेंड और परवीन डाइनिंग टेबल पर डिनर कर रहे थे। चांदी का वर्क टेबल पर गिरा और डेनी ने फूंक मारकर उसे हटाना चाहा। फूंकते ही परवीन बेहद डर गईं और चीखने लगीं। तब डेनी को पहली बार एहसास हुआ कि वाकई परवीन की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने महेश भट्ट को कॉल कर इसकी खबर दी थी, तब महेश ने उन्हें पूरी कहानी सुनाई। डेनी भी परवीन की इस बीमारी से लड़ने में मदद कर रहे थे। फिर एक दिन अखबार में अमिताभ बच्चन का एक इंटरव्यू छपा, जिसमें उन्होंने डेनी को अच्छा दोस्त कहा। अमिताभ को पहले ही जान का दुश्मन मानने वालीं परवीन ने जैसे ही खबर पढ़ा, तो उन्हें फिर वहम होने लगे। उस दिन जब डेनी घर पहुंचे, तो परवीन ने चीखना शुरू कर दिया। और ये कहा कि डेनी, अमिताभ बच्चन के लिए उनकी जासूसी करते थे। इसके बाद कई मौकों पर परवीन उन्हें देखते ही चीखना शुरू कर देती थीं, यही वजह रही कि उनकी ये दोस्ती हमेशा के लिए खत्म हो गई। बीमारी के कारण परवीन ने इंडस्ट्री और रिश्तेदारों से दूरी बना ली। 2001 में मां के निधन के बाद वह जुहू के रेज रिवेरा अपार्टमेंट में अकेले रहने लगीं और घर से कम ही निकलती थीं। साल 2002 में उन्होंने कई एफिडेविट फाइल कर कहा कि टाडा केस में उनके पास संजय दत्त के खिलाफ कई सबूत हैं। उन्हें कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा गया, लेकिन हर बार वो ये कहकर इनकार कर देती थीं कि बाहर निकलने पर उनकी जान को खतरा है। साल 2002 में ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अमिताभ बच्चन, रॉबर्ट रेडफोर्ड और कई बॉलीवुड-हॉलीवुड एक्टर के खिलाफ उनकी हत्या की साजिश रचने के आरोप में एक याचिका दायर की थी। वैसे तो परवीन मुस्लिम थीं, लेकिन जिंदगी के आखिरी सालों में वो क्रिश्चियन हो चुकी थीं। 22 जनवरी 2005 को परवीन बाबी का शव उनके फ्लैट में सड़ती हुई हालत में मिला। उनकी मौत 2 दिन पहले ही हो चुकी थी। आखिरी समय में कोई उनकी बॉडी भी क्लेम करने हॉस्पिटल नहीं पहुंचा, ऐसे में महेश भट्ट ने बॉडी क्लेम कर उनका अंतिम संस्कार करवाया। जहां डेनी भी मौजूद रहे। परवीन चाहती थीं कि उनको क्रिश्चियन रीति-रिवाजों से दफ्नाया जाए, लेकिन आखिरी समय में कुछ रिश्तेदारों ने इस्लामिक तरीके से उन्हें दफ्नाया।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
चीन बोला-जापान के पास 5500 परमाणु हथियार जितना प्लूटोनियम:रूस में राजदूत बोले- 44.4 टन निकाला हुआ, 191 टन और स्टोरेज में

August 20, 2026/
2:46 pm

चीन ने जापान की परमाणु क्षमता को लेकर फिर चिंता जताई है। रूस में चीन के राजदूत झांग हानहुई ने...

IPL 2026 CSK vs LSG, RCB vs MI

May 11, 2026/
5:11 am

स्पोर्ट्स डेस्क19 मिनट पहले कॉपी लिंक रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु IPL के मौजूदा सीजन की पॉइंट्स टेबल के टॉप पर आ...

जीएमसी में सीधी भर्ती पर बवाल, डॉक्टरों का सामूहिक बहिष्कार:‘डीन होश में आओ’ के नारे, आदेश वापस नहीं हुआ तो 3 हजार डॉक्टर नहीं करेंगे इलाज

April 3, 2026/
6:12 am

राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में ‘आंतरिक सीधी भर्ती’ को लेकर विवाद अब खुलकर सड़क पर आ गया...

मल्टीग्रेन आटे के फायदे

April 23, 2026/
2:30 pm

23 अप्रैल 2026 को 14:30 IST पर अद्यतन किया गया मल्टीग्रेन आटा: आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी और खराब...

Sonam Wangchuk Returns to Leh

March 22, 2026/
4:11 pm

लेह2 मिनट पहले कॉपी लिंक सोनम वांगचुक 170 दिन बाद लेह पहुंंचे। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक रविवार को...

R Madhavan Birthday Interesting Facts; 3 Idiots

June 1, 2026/
4:30 am

51 मिनट पहलेलेखक: अभय पांडेय कॉपी लिंक ‘रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट’ आर माधवन की डायरेक्टर के तौर पर पहली फिल्म...

Royal Challengers Bengaluru vs Gujarat Titans Live Score, IPL 2026 Today Match Updates, Scorecard & Commentary. (Picture Credit: AFP)

April 24, 2026/
5:12 pm

आखरी अपडेट:24 अप्रैल, 2026, 17:12 IST यदि इतिहास कोई मार्गदर्शक है, तो शिव सेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के...

उत्तराखंड में घर खरीदना चाहते थे नाना पाटेकर:शूटिंग के लिए पहुंचे जोशीमठ, यहीं रहने की थी जिद; गंगा आरती कर लौटे

October 8, 2026/
9:52 am

बॉलीवुड एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से गोवा के डोना पाउला...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

परवीन बाबी को सिगरेट पीते देख डायरेक्टर ने फिल्म दी:शाही परिवार से थीं; 3 लिव-इन रिलेशनशिप रहे, अमिताभ बच्चन को मानती थीं हत्यारा

परवीन बाबी को सिगरेट पीते देख डायरेक्टर ने फिल्म दी:शाही परिवार से थीं; 3 लिव-इन रिलेशनशिप रहे, अमिताभ बच्चन को मानती थीं हत्यारा

करीब साढ़े 400 साल पहले पश्तून बाबी वंश मुगल शासक हुमायूं के साथ गुजरात पहुंचा। यह अफगानिस्तान का शाही परिवार था, जो मुगल साम्राज्य का अहम हिस्सा बना और कई रियासतों पर शासन किया। मुगल सत्ता कमजोर होने पर बाबी और मराठा (गायकवाड़ वंश) में जंग हुई, जिसमें मराठाओं ने अधिकांश गुजरात पर कब्जा किया, लेकिन बाबी ने जुनागढ़, राधनपुर और बालासिनोर पर शासन जारी रखा।
मोहम्मद महाबत खान-3, जूनागढ़ की रियासत के आखिरी नवाब रहे। महाबत खान के एक करीबी रिश्तेदार थे वली मोहम्मद खान बाबी। उन्होंने 1940 में जमाल बख्ते बाबी से शादी की। सालों तक उन्हें संतान नहीं हुई। 1947 में ब्रिटिश हुकूमत खत्म होने पर रियासतें खत्म कर सरकारें बनाई जाने लगीं और भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। 15 अगस्त 1947 को आखिरी नवाब महाबत खान ने जूनागढ़ को पाकिस्तान में शामिल करने की घोषणा की, जिस पर लोगों ने आपत्ति जताई। 20 फरवरी 1948 के जनमत में 99% से ज्यादा लोगों ने भारत में शामिल होने का फैसला किया। जब सरकार बनी तो जूनागढ़ के नवाब माहबत के करीबी रिश्तेदार वली मोहम्मद खान की भी रियासत ले ली गई और बदले में उन्हें 100 बीघा जमीन यानी 40 एकड़ (17 लाख 42 हजार वर्ग फुट) दी गई। राजशाही खत्म होने के बावजूद वो शाही जिंदगी जीते थे। शादी के 14 साल बाद उनके घर खुशखबरी आई। पत्नी जमाल बख्ते ने जूनागढ़ की शाही हवेली में 4 अप्रैल 1954 को बेटी को जन्म दिया। नाम दिया गया, परवीन सुल्ताना वली मोहम्मद खानजी बाबी। वही परवीन बाबी जो हिंदी सिनेमा की मशहूर और टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल रहीं। वही परवीन बाबी जो अपने ग्लैमर, वेस्टर्नाइजेशन और समय से आगे चलने वाली सोच के लिए जानी गईं। जब महिलाएं पर्दे पर भी सिगरेट थामने से कतराती थीं, तब परवीन बाबी मिनी स्कर्ट पहनकर सड़कों पर सिगरेट पीते हुए टहला करती थीं। जब डायरेक्टर बी.आर.इशारा ने उन्हें पहली बार देखा, तब उनकी इसी बोल्डनेस के मुरीद हो गए और उन्हें तुरंत फिल्म ऑफर कर दी। आज परवीन बाबी की 72वीं बर्थ एनिवर्सरी है। अगर आज वो होतीं, तो अपना 72वां जन्मदिन मनातीं। उनकी जिंदगी के आखिरी दिन बेहद दर्दनाक थे। अकेलेपन की हद ये थी कि जब उनकी मौत हुई तो 4 दिनों तक बॉडी बंद घर में सड़ती रही। आज परवीन बाबी की बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए उनके समय से आगे चलने और जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक किस्से- 54 कमरों की हवेली में हुई परवरिश, पढ़ाई के लिए शर्त पर घर छोड़ा शाही परिवार में जन्मीं परवीन बाबी का बचपन जूनागढ़ की 54 कमरों की हवेली में बीता। इकलौती संतान को ऐशोआराम मिला और घर में 6 नौकर थे। 6 साल की उम्र में पिता का कैंसर से निधन हुआ, जिसके बाद वह दीवान चौक की दो मंजिला हवेली में रहने लगीं। शुरुआती पढ़ाई गुजराती मीडियम स्कूल से हुई। 14 साल की उम्र में मां ने उन्हें पढ़ाई के लिए अहमदाबाद भेजा, हालांकि परिवार इसके खिलाफ था। शर्त रखी गई कि जल्दी शादी कराई जाएगी, जिस पर मां मान गईं और उनका दाखिला सेंट जेवियर कॉलेज में हुआ। कॉलेज में कोर्स न होने के बावजूद परवीन बाबी ने खुद फर्राटे दार अंग्रेजी बोलना सीखा। आगे उन्होंने इंग्लिश और साइकोलॉजी में बेचलर डिग्री ली और अंग्रेजी में मास्टर डिग्री। शर्त के अनुसार 15 साल की उम्र में परवीन की सगाई कजिन जमील खान से हुई, जो पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स में पायलट थे। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद मां ने सगाई तोड़ दी और परवीन को इसकी जानकारी पोस्टकार्ड से मिली। 17 की उम्र में सिगरेट पीती थीं, मिनी स्कर्ट पहनती थीं; यही देख ऑफर हुई फिल्म 1971 में डायरेक्टर बी.आर. इशारा अहमदाबाद में एक नांव दो किनारे की शूटिंग कर रहे थे। भीड़ के बीच उनकी नजर एक लड़की पर पड़ी, जो मिनी स्कर्ट में सिगरेट पी रही थी। लंबी कद-काठी और छरहरे बदन वाली वह लड़की चारमिना सिगरेट थामे हुए थी। वह लड़की परवीन बाबी थीं, जिनकी उम्र 17 साल थी। बी.आर. इशारा समझ गए कि वह खास हैं और उन्होंने फोटोग्राफर से उनकी तस्वीरें लेने को कहा। फोटोग्राफर ने तस्वीरें लीं और बी.आर. इशारा ने परवीन को बुलाकर पूछा- फिल्मों में काम करोगी। आमतौर पर कोई भी लड़की तुरंत हामी भर देती, लेकिन परवीन ने कहा, अगर स्क्रिप्ट पसंद आई तो। बी.आर.इशारा इस एक जवाब में समझ गए कि लड़की में कॉन्फिडेंट की भरमार है। वैसे तो वो कभी अपनी फिल्मों की हीरोइन से किसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं करवाते थे, लेकिन परवीन बाबी का मॉडर्न लुक देख वो भी सोच में पड़ गए। उन्हें लगा कि कहीं ये मॉडर्न ख्यालों वाली लड़की मन न बदल ले। उन्होंने तुरंत कॉन्ट्रैक्ट बनवाया, जिसमें एक ही बात थी कि जब तक उनकी फिल्म नहीं बनती, परवीन किसी दूसरी फिल्म का हिस्सा नहीं बन सकतीं। शाही परिवार से आने के बावजूद परवीन ने फिल्मों में आने का फैसला कर लिया। बेबाक अंदाज में फिल्म मांगी, लॉन्च के लिए डायरेक्टर ने उधार लिया बी.आर. इशारा कॉन्ट्रैक्ट के बाद दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गए और यह बात लगभग भूल गए। इस दौरान परवीन बाबी सितंबर 1971 में कालिको डोम के फैशन शो में शामिल हुईं, जहां साथ काम करने वालीं मॉडल ममता साहू ने उन्हें अपने डायरेक्टर पिता किशोर साहू को सुझाया। किशोर साहू ने परवीन से एक मुलाकात कर उन्हें फिल्म धुंएं की लकीर के लिए फाइनल कर लिया। तभी उन्हें बी.आर.इशारा के कॉन्ट्रैक्ट का पता चला। किशोर साहू ने तुरंत उन्हें कॉल किया और कहा कि जिस हीरोइन से आपका कॉन्ट्रैक्ट है, मैं उसके साथ फिल्म बनाना चाहता हूं। परवीन बाबी का नाम सुनकर उन्हें फिर वो लड़की याद आई। लेकिन उनकी फिल्म बनने में देरी थी, तो उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर परवीन को वो फिल्म करने की इजाजत दे दी। कुछ महीने बीते। बी.आर.इशारा, मुंबई के राजकमल स्टूडियो में एक फिल्म की मिक्सिंग के सिलसिले में पहुंचे थे। वो सीढ़ियों पर बैठे सिगरेट पी ही रहे थे कि अचानक परवीन उनके ठीक बाजू में आकर बैठ गईं। उन्होंने न हाल पूछा न कोई और बात की, सीधे कहा- आप मेरे साथ फिल्म क्यों नहीं बनाते। बी.आर.इशारा इस सवाल से घिर गए। उनके जहन में भी यही सवाल था कि वो परवीन के साथ फिल्म क्यों नहीं बना रहे। उन्होंने घर लौटते ही अपने फोटोग्राफर को कॉल कर फिल्म बनाने के लिए रकम जुटाने को कहा। फोटोग्राफर ने जैसे-तैसे 2 लाख उधार लिए, जिसकी बदौलत बी.आर.इशारा ने परवीन बाबी के साथ फिल्म चरित्र शुरू की। ये फिल्म पहले बनी और परवीन बाबी की पहली फिल्म रही। इस फिल्म में पहने गए परवीन बाबी के कपड़े उन्होंने खुद खरीदे और चुने। 3 लिव-इन रिलेशनशिप और समय से आगे की सोच परवीन बाबी की शुरुआती 5 फिल्में कुछ खास नहीं रहीं, फिर आया साल 1974। परवीन बाबी को फिल्म दीवार में अमिताभ बच्चन के ऑपोजिट वैश्या अनिता को रोल मिला। फिल्म सुपरहिट रही और परवीन बाबी को हिंदी सिनेमा में खास पहचान मिल गई। आगे उन्होंने अमर अक्बर एंथोनी, काला सोना, काला पत्थर, सुहाग, द बर्निंग ट्रेन, शान, नमक हलाल जैसी कई हिट फिल्में दीं और 70-80 के दशक की हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस बनीं। 1972 में फिल्म सेट पर परवीन बाबी की मुलाकात डैनी डेंग्जोंग्पा से हुई। दोनों जल्द करीब आए और शिवाजी पार्क में लिव-इन में रहने लगे, जो उस दौर में आम नहीं था। किसी कारण वो 3 साल बाद अलग हुए, लेकिन दोस्ती बनी रही। डेनी से ब्रेकअप के बाद परवीन बाबी की जिंदगी में कबीर बेदी आए। वो तब ओपन मैरिज में थे। परवीन के लिए कबीर बेदी पत्नी प्रोतिमा को तलाक देना चाहते थे, लेकिन प्रोतिमा इसके लिए राजी नहीं हुईं। परवीन उनके साथ भी लिव-इन में रहीं। साल 1977 में परवीन बाबी ने भारत छोड़ दिया और कबीर बेदी के साथ जिंदगी बिताने के लिए लंदन शिफ्ट हो गईं। लेकिन महज 3 महीनों में ही वो कबीर को लंदन में छोड़कर भारत लौट आईं। भारत लौटकर वो फिर डेनी से संपर्क में आईं, जिन्हें वो हमेशा से अच्छा दोस्त मानती थीं। उन्होंने डेनी से कहा कि कबीर बेदी ने उनका जबरदस्ती अबॉर्शन करवाया, जिससे वो भागकर आ गईं। भारत लौटकर परवीन बाबी ने फिर 1977 से फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। इस समय उनकी महेश भट्ट से नजदीकियां बढ़ने लगीं। 6 महीने तक रिलेशनशिप में रहने के बाद महेश भट्ट ने परवीन बाबी के लिए पत्नी किरण और बच्चों को छोड़ दिया और उनके साथ लिव इन में रहने लगे। तभी परवीन को अमर अकबर एंथोनी और काला पत्थर जैसी फिल्में मिली थीं। परवीन बाबी और वो लाइलाज बीमारी 1979 की शाम, जब महेश भट्ट घर पहुंचे तो देखा कि परवीन बाबी के घर के बाहर उनकी मां डरी-सहमी खड़ी हैं। महेश को देखते ही उन्होंने कहा- देखो परवीन को क्या हुआ। वो अंदर गए तो परवीन कमरे के कौने में चाकू लिए बैठीं कंपकपा रही थीं। महेश भट्ट ने कुछ कहना चाहा तो परवीन ने चुप करवाते हुए कहा, श्श्श…कुछ मत कहना। इस कमरे की जासूसी हो रही है। यहां डिवाइस लगी है। वो मुझे मारना चाहते हैं। महेश समझ गए कि परवीन को इलाज की जरूरत है। वह उन्हें भारत और विदेश के कई डॉक्टरों के पास ले गए, जहां पता चला कि उन्हें सिजोफ्रेनिया है, जिसमें मरीज को वहम होता है कि कोई उसे मारना चाहता है। शॉक ट्रीटमेंट की सलाह दी गई, लेकिन महेश भट्ट ने मना कर दिया। समय के साथ उनकी हालत बिगड़ने लगी। कभी वह एसी या कार में बम होने की बात कहतीं और चलती कार से उतरने लगतीं, तो कभी कहतीं कि लोग उनका पीछा कर रहे हैं। साल 1979 में महेश भट्ट उन्हें लेकर चकाचौंध से दूर बैंग्लोर शिफ्ट हो गए। डॉक्टर्स लगातार उनसे संपर्क में थे, लेकिन परवीन इलाज नहीं करवाना चाहती थीं। एक रोज उन्होंने महेश भट्ट से साफ कहा कि उन्हें परवीन या डॉक्टर्स में से किसी एक को चुनना होगा। महेश भट्ट उन्हें छोड़कर घर से निकले, तो परवीन बिना कपड़े ही उनके पीछे दौड़ पड़ीं। इस दिन महेश भट्ट ने डॉक्टर्स की सलाह पर परवीन से दूरी बना ली। कुछ दिनों बाद परवीन भी फिर मुंबई लौट आईं और फिल्मों में काम करने लगीं। वो मौके जब परवीन बाबी को पागल समझने लगे लोग 1984 में परवीन बाबी को सिक्योरिटी चेक में अजीब बर्ताव करने और पहचान न बता पाने पर अरेस्ट किया गया था। उन्हें न्यूयॉर्क के पागलखाने में रखा गया, तब इंडियन काउंसिल के हस्तक्षेप के बाद उन्हें छोड़ा गया था। 1988 में फिल्म शान के टाइटल सॉन्ग की शूटिंग के दौरान परवीन बाबी ने हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने शूटिंग रोक दी और कहा कि को-स्टार अमिताभ बच्चन उनके ऊपर झूमर गिराना चाहते हैं और हत्या करना चाहते हैं। वो डरी-सहमी सेट से भाग गईं। 1989 में परवीन बाबी ने फिल्मफेयर मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमिताभ बच्चन एक इंटरनेशनल गैंगस्टर हैं, जो उनकी जान लेना चाहते हैं। उन्होंने ये भी दावा किया कि अमिताभ बच्चन के गुंडों ने उन्हें किडनैप कर आइलैंड में रखा और कान के नीचे की तरफ एक चिप लगा दी, जिससे उन्हें ट्रेस किया जा सके। इस इंटरव्यू के बाद इंडस्ट्री में उनकी बीमारी की खबर फैल गई। वह कहती थीं कि लोग उन्हें बदनाम कर साजिश कर रहे हैं। इस समय भी परवीन बाबी एक्स बॉयफ्रेंड डेनी से मिलती थीं। वो डेनी को अच्छा दोस्त मानती थीं। तब तक डेनी की जिंदगी में किम नाम की महिला आ चुकी थीं। वो गर्लफ्रेंड के साथ लिव-इन में थे। जब परवीन आए दिन उनके घर आने लगीं तो उनकी गर्लफ्रेंड ने चिंता जताई। कई बार ऐसा भी हुआ जब डेनी गर्लफ्रेंड के साथ घर लौटे और परवीन उनके बेडरूम में टीवी देखती मिलीं। डेनी ने जब परवीन को ऐसा करने से रोका, तो जवाब में उन्होंने कहा कि ब्रेकअप के बाद वो दोस्ती जारी रखना चाहती हैं, इसमें कुछ गलत नहीं है। एक दिन डेनी, उनकी गर्लफ्रेंड और परवीन डाइनिंग टेबल पर डिनर कर रहे थे। चांदी का वर्क टेबल पर गिरा और डेनी ने फूंक मारकर उसे हटाना चाहा। फूंकते ही परवीन बेहद डर गईं और चीखने लगीं। तब डेनी को पहली बार एहसास हुआ कि वाकई परवीन की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने महेश भट्ट को कॉल कर इसकी खबर दी थी, तब महेश ने उन्हें पूरी कहानी सुनाई। डेनी भी परवीन की इस बीमारी से लड़ने में मदद कर रहे थे। फिर एक दिन अखबार में अमिताभ बच्चन का एक इंटरव्यू छपा, जिसमें उन्होंने डेनी को अच्छा दोस्त कहा। अमिताभ को पहले ही जान का दुश्मन मानने वालीं परवीन ने जैसे ही खबर पढ़ा, तो उन्हें फिर वहम होने लगे। उस दिन जब डेनी घर पहुंचे, तो परवीन ने चीखना शुरू कर दिया। और ये कहा कि डेनी, अमिताभ बच्चन के लिए उनकी जासूसी करते थे। इसके बाद कई मौकों पर परवीन उन्हें देखते ही चीखना शुरू कर देती थीं, यही वजह रही कि उनकी ये दोस्ती हमेशा के लिए खत्म हो गई। बीमारी के कारण परवीन ने इंडस्ट्री और रिश्तेदारों से दूरी बना ली। 2001 में मां के निधन के बाद वह जुहू के रेज रिवेरा अपार्टमेंट में अकेले रहने लगीं और घर से कम ही निकलती थीं। साल 2002 में उन्होंने कई एफिडेविट फाइल कर कहा कि टाडा केस में उनके पास संजय दत्त के खिलाफ कई सबूत हैं। उन्हें कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा गया, लेकिन हर बार वो ये कहकर इनकार कर देती थीं कि बाहर निकलने पर उनकी जान को खतरा है। साल 2002 में ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अमिताभ बच्चन, रॉबर्ट रेडफोर्ड और कई बॉलीवुड-हॉलीवुड एक्टर के खिलाफ उनकी हत्या की साजिश रचने के आरोप में एक याचिका दायर की थी। वैसे तो परवीन मुस्लिम थीं, लेकिन जिंदगी के आखिरी सालों में वो क्रिश्चियन हो चुकी थीं। 22 जनवरी 2005 को परवीन बाबी का शव उनके फ्लैट में सड़ती हुई हालत में मिला। उनकी मौत 2 दिन पहले ही हो चुकी थी। आखिरी समय में कोई उनकी बॉडी भी क्लेम करने हॉस्पिटल नहीं पहुंचा, ऐसे में महेश भट्ट ने बॉडी क्लेम कर उनका अंतिम संस्कार करवाया। जहां डेनी भी मौजूद रहे। परवीन चाहती थीं कि उनको क्रिश्चियन रीति-रिवाजों से दफ्नाया जाए, लेकिन आखिरी समय में कुछ रिश्तेदारों ने इस्लामिक तरीके से उन्हें दफ्नाया।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.