दिल्ली में डीबी एमिनेंस अवॉर्ड के 7वें सीजन का आयोजन:केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मध्य प्रदेश के 45 दिग्गजों को सम्मानित किया

नई दिल्ली में गुरुवार को डीबी एमिनेंस अवॉर्ड के सातवें सीजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान और दैनिक भास्कर समूह के डिप्टी एमडी पवन अग्रवाल मौजूद रहे। कार्यक्रम में दैनिक भास्कर समूह ने मध्य प्रदेश के उन 45 दिग्गजों को सम्मानित किया, जो अपने कामों से देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। चिराग ने शिक्षा, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, सामाजिक सेवा, अन्य उद्योगों से जुड़े लोगों को डीबी एमिनेंस अवॉर्ड दिया। चिराग ने कहा- मैं भास्कर ग्रुप का समूह का दिल से हृदय से आभार प्रकट करूंगा। ये भी अपनी रूट से जुड़े रहे। भास्कर ग्रुप का उदय उसमें आप सबके शहर इंदौर की एक अहम भूमिका रही। कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें… दैनिक भास्कर समूह हर साल लीडर्स को सम्मानित करता है दैनिक भास्कर समूह हर साल यह अवॉर्ड ऐसे लीडर्स को प्रदान करता है, जो अपने-अपने क्षेत्र में अतुलनीय काम कर रहे हैं। दैनिक भास्कर समूह के डिप्टी एमडी पवन अग्रवाल ने इस मौके पर सम्मानित हुए लोगों से कहा कि उन सभी ने अपने कामों से एक मिसाल कायम किया है। उन्होंने कहा कि दैनिक भास्कर का भी प्रयास होता है कि जैसा आप समाज में बदलाव कर रहे हैं, वैसा हम भी करें। समाज में कुछ ना कुछ नया करते रहें। आपके साथ यही जुगलबंदी है। इंदौर दैनिक भास्कर के लिए काफी खास जगह है। क्योंकि वहां 10 साल पहचान बनाने के बाद ही हिम्मत मिली कि पूरे देश में जाएं। डिप्टी एमडी ने कहा कि इस एंटरप्राइजिंग शहर (इंदौर) से ही हमें हिम्मत मिली। यहीं से हमें समझ आया था कि जब आप कुछ काम करते हैं तो उसकी कोई सीमा नहीं है। अगर आपके पास कल्पना है तो पूरा खुला आसमान है। चिराग पासवान ने अवॉर्ड पाने वाले लोगों को बधाई दी कार्यक्रम में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने अवॉर्ड पाने वाले सभी 45 लोगों को बधाई दी और दैनिक भास्कर का धन्यवाद किया। उन्होंने वहां मौजूद उद्यमियों से फूड प्रोसेसिंग में इनोवेशन और निवेश करने की अपील की। चिराग ने आगे कहा- आज हर कोई विकसित भारत की चर्चा करता है, लेकिन बहुत कम लोग अपने योगदान के बारे में सोचते हैं। हम अक्सर सरकारों और प्रशासन से सवाल करते हैं कि विकसित भारत कैसे बनेगा, लेकिन आप वे लोग हैं जिन्होंने खुद से सवाल किया कि ‘मेरा योगदान क्या होगा?’ यदि देश की 140 करोड़ आबादी ईमानदारी से खुद से यह पूछने लग जाए, तो हम लक्ष्य के बहुत करीब होंगे। इसके अलावा इस कार्यक्रम में दैनिक भास्कर समूह के इंदौर के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमित मंडलोई, इंदौर के यूनिट हेड दीपक किशोर और नेशनल पॉलिटिकल एडिटर धर्मेंद्र सिंह भदौरिया भी मौजूद थे। कार्यक्रम से जुड़े 5 वीडियो…
भाजपा नेता के भाई ने दलित बस्ती पर हमला किया:जान बचाने पहली मंजिल से कूदी महिला; पत्थरबाजी में एक घायल

नीमच जिले के काली कोटड़ी गांव में गुरुवार दोपहर भाजपा नेता उमराव सिंह गुर्जर के भाई गोपाल गुर्जर और उनके करीब 60 साथियों ने दलित बस्ती पर हमला कर दिया। इस दौरान हमलावरों ने घरों में तोड़फोड़ की और महिलाओं से मारपीट की। हमले में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि एक अन्य महिला ने अपनी जान बचाने के लिए घर की पहली मंजिल से छलांग लगा दी। गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे लोडिंग टेंपो और पांच कारों में सवार होकर आए हमलावरों ने मनीष नायक, पुष्कर और अर्जुन नायक के घरों को निशाना बनाया। उन्होंने घरों में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। मनीष नायक की पत्नी पूजा मेघवाल पर पत्थर से हमला किया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। यहां से शुरू हुआ विवाद यह विवाद 24 फरवरी की रात को शुरू हुआ था, जब दीपेश गुर्जर ने अपनी बिना नंबर की थार गाड़ी से मनीष नायक की बाइक को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में मनीष घायल हो गए थे। पीड़ितों का आरोप है कि मेडिकल जांच के बावजूद पुलिस ने प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर उन्हें ही झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी थी। हमसे टकराने का अंजाम बुरा होगा पीड़ितों के अनुसार, गोपाल गुर्जर, सरदार सिंह, दीपेश और उनके साथियों ने जातिगत गालियां देते हुए धमकी दी कि “इस इलाके में हमारा आतंक है और हमसे टकराने का अंजाम बुरा होगा।” घटना के बाद डरे-सहमे पीड़ित परिवार शाम को नीमच पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। दहशत में परिवार ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आरोपी मछली पालन के बड़े ठेकेदार हैं और उनके राजनीतिक रसूख के कारण पुलिस कार्रवाई करने से बच रही है। पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई और उन्हें सुरक्षा नहीं मिली, तो उनके परिवार की जान को खतरा बना रहेगा।
JNU में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर-जूते फेंके:UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहा था छात्रसंघ; यूनिवर्सिटी ने कोर्ट ऑर्डर का उल्लंघन बताया

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी(JNU) में स्टूडेंट यूनियन के प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर पत्थर फेंके, पुलिसवालों को काटा और जूते फेंके। पुलिस ने कहा कि इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन(JNUSU) UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग को लेकर मार्च निकाल रहा था। ये मार्च शिक्षा मंत्रालय तक निकाला जाना था लेकिन पुलिस ने इसे बीच में ही रोक दिया। पुलिस का आरोप है कि मार्च रोकने के बाद कुछ प्रोटेस्टर्स ने उनपर हमला कर दिया। इसके बीच यूनिवर्सिटी का भी बयान आया। JNU ने कहा कि यह मांग माननीय सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन है जिसने रेगुलेशन पर स्टे जारी किया था। JNU के वाइस चांसलर या रजिस्ट्रार के पास रेगुलेशन पर कोई अधिकार नहीं है। पुलिस पर हमले की 3 तस्वीरेंं… JNU ने कहा- हमारी सरकार को जवाबदेही JNU ने सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट में कहा कि JNU एक पब्लिक यूनिवर्सिटी है इसलिए सरकार, पार्लियामेंट और भारतीय टैक्सपेयर्स के प्रति जवाबदेह है। यह बहुत बुरा है कि एक महिला OBC वाइस चांसलर पर झूठे आरोप लगाकर हमला किया जा रहा है, सिर्फ पब्लिक प्रॉपर्टी की हिंसा और तोड़-फोड़ के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए। पहले इस पूरे मामले को समझें UGC के नए कानून का नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।’ इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव रोकने के लिए कई निर्देश दिए गए थे। नए नियमों के तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का निर्देश दिया गया। ये टीमें SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि UGC ने जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि नए नियमों में सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। इनसे उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा। 30 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर रोक लगाई सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान की याचिकाओं पर की, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल 2012 के UGC नियम देशभर में लागू रहेंगे। ———— ये खबर भी पढ़ें… ‘करप्शन इन ज्यूडीशियरी’ वाली NCERT किताब पर SC का बैन:कहा- हार्ड कॉपी वापस लें, डिजिटल कॉपी हटाएं सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर वाली NCERT के 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब बैन कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जो किताबें छप चुकी हैं, उसे जब्त कीजिए और डिजिटल कॉपियों को भी हटाइए। पूरी खबर पढ़ें…
‘पाखंड’: सिद्धारमैया ने उर्दू स्वास्थ्य विज्ञापन विवाद पर बीजेपी की आलोचना की, कहा कि यह ‘मानक सरकारी प्रक्रिया’ है | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:26 फरवरी, 2026, 20:56 IST विवाद ने व्यक्तिगत मोड़ ले लिया क्योंकि कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के घर पर बोली जाने वाली उर्दू पर भाजपा की टिप्पणियों को व्यापक रूप से उनकी पत्नी तब्बू राव के संदर्भ के रूप में देखा गया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस विचार को खारिज कर दिया कि उन्हें भाषाई गौरव में सबक की जरूरत है। (छवि: न्यूज18) कर्नाटक में स्वास्थ्य विभाग के अखबारों में विज्ञापनों को लेकर ताजा भाषा विवाद छिड़ गया है लेकिन इस बार यह कन्नड़ के बारे में नहीं है। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच एक उर्दू अखबार में स्वास्थ्य संबंधी विज्ञापन को लेकर वाकयुद्ध छिड़ गया है। भाजपा द्वारा यह आरोप लगाए जाने के बाद कि राज्य सरकार “तुष्टिकरण की राजनीति” में लगी हुई है, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को भगवा पार्टी पर कड़ा प्रहार किया और उनके “पाखंड” को उजागर करते हुए कहा कि यह “मानक सरकारी प्रक्रिया” है। विवाद ने व्यक्तिगत मोड़ ले लिया क्योंकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव के घर पर बोली जाने वाली भाषा पर भाजपा की टिप्पणियों को व्यापक रूप से उनकी पत्नी तब्बू राव के संदर्भ के रूप में देखा गया। उन्होंने हमले की निंदा करते हुए इसे “आत्म-धोखे की पराकाष्ठा” बताया और कहा कि उनका परिवार घर पर उर्दू भी नहीं बोलता। तब्बू राव ने कहा कि उनके पति के राजनीति में आने के बाद से उनकी व्यक्तिगत पृष्ठभूमि के कारण उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया गया है। “क्या उर्दू में येदियुरप्पा और प्रधान मंत्री मोदी वाले विज्ञापन नहीं हैं? क्या वे तुष्टीकरण में लिप्त हैं?” उन्होंने भाजपा के अचानक “कन्नड़ प्रेम” को शर्मनाक दोहरा मापदंड करार देते हुए पूछा। विवाद क्या है? यह विवाद ‘कुसुमा संजीवनी’ कार्यक्रम के लॉन्च से शुरू हुआ था, जो एक सरकारी पहल है जो हीमोफीलिया रोगियों के लिए मुफ्त एम्बुलेंस सेवाओं के साथ रोगनिरोधी उपचार प्रदान करती है। इस आयोजन को बढ़ावा देने के लिए, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न प्रकाशनों में विज्ञापन जारी किए। उर्दू दैनिक समाचार पत्रों में छपने वाले संस्करण पूरी तरह से उर्दू भाषा में छपे थे, जिसे भाजपा ने तुरंत “विवाद की जड़” के रूप में लिया। सिद्धारमैया ने क्या कहा? सिद्धारमैया ने मंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए विपक्ष के विरोध के तर्क पर सवाल उठाया. “विज्ञापन देते समय क्या हमें उर्दू अखबारों को भी नहीं देना चाहिए?” उन्होंने पूछा, भाजपा ने अपने पिछले कार्यों की अनदेखी करते हुए मौजूदा सरकार की हर बात का विरोध करने की आदत बना ली है। पहले कन्नड़ कवलु समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के बाद, उन्होंने इस विचार को खारिज कर दिया कि उन्हें भाषाई गौरव में सबक की आवश्यकता है, उनके लिए “कन्नड़ सिर्फ एक भाषा नहीं है, यह जीवन है”। बीजेपी ने क्या कहा? सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक तीखे हमले में, कर्नाटक भाजपा ने “कन्नड़ विरोधी, राज्य विरोधी कांग्रेस सरकार” पर राजनीतिक लाभ के लिए स्थानीय भाषा के हितों का बलिदान देने का आरोप लगाया। इसने सवाल किया कि क्या राज्य की प्रशासनिक भाषा बदल गई है, सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से पूछा गया: “क्या कर्नाटक की प्रशासनिक भाषा कन्नड़ या उर्दू है?” भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल विज्ञापन के बजाय उर्दू में एक आधिकारिक निमंत्रण जारी किया था और दिनेश गुंडू राव पर व्यक्तिगत कटाक्ष करते हुए कहा कि वह अपने कार्यालय का उपयोग अपने घर में बोली जाने वाली भाषा को बढ़ावा देने के लिए कर रहे थे। स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा? इस बीच, राव ने तीखा खंडन करते हुए भाजपा पर “बौद्धिक दिवालियापन” और आधिकारिक सरकारी निमंत्रण और एक मानक समाचार पत्र विज्ञापन के बीच अंतर करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह कदम एक “नियमित प्रशासनिक अभ्यास” था, यह समझाते हुए कि विशिष्ट समाचार पत्र की भाषा में विज्ञापन प्रकाशित करना मानक प्रक्रिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जानकारी उसके इच्छित पाठकों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकारी विज्ञापन का लक्ष्य सभी नागरिकों तक सार्वजनिक योजनाओं की जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। उन्होंने पिछले भाजपा प्रशासन द्वारा उर्दू में प्रकाशित पिछले विज्ञापनों की एक श्रृंखला साझा की और विशेष रूप से बीएस येदियुरप्पा और बसवराज बोम्मई जैसे भाजपा मुख्यमंत्रियों का नाम लेते हुए पूछा कि क्या उनके कार्यकाल के दौरान उर्दू विज्ञापनों के उपयोग का मतलब यह है कि वे “राष्ट्र-विरोधी” या “तुष्टिकरण” में लगे हुए थे। (रोहिणी स्वामी के इनपुट्स के साथ) पहले प्रकाशित: 26 फरवरी, 2026, 20:56 IST समाचार राजनीति ‘पाखंड’: सिद्धारमैया ने उर्दू स्वास्थ्य विज्ञापन विवाद पर बीजेपी की आलोचना की, कहा कि यह ‘मानक सरकारी प्रक्रिया’ है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक भाषा विवाद(टी)कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग विज्ञापन(टी)उर्दू अखबार विवाद कर्नाटक(टी)सिद्धारमैया बीजेपी भाषा बहस(टी)कुसुमा संजीविनी कार्यक्रम(टी)दिनेश गुंडू राव उर्दू(टी)बीजेपी कांग्रेस भाषा राजनीति(टी)कन्नड़ भाषा मुद्दा
खाना खाने के बाद तुरंत भागते हैं शौचालय, अमेरिकी डॉक्टर ने बताई वजह, वक्त रहते हो जाएं सावधान

Last Updated:February 26, 2026, 19:06 IST Post-Meal Bowel Movements: खाना खाने के तुरंत बाद शौच जाना अक्सर गैस्ट्रोकॉलिक रिफ्लेक्स के कारण होता है. यह एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है, लेकिन अगर यह बार-बार या दर्द के साथ हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. खाने के बाद तुरंत टॉयलेट भागना गैस्ट्रोकॉलिक रिफ्लेक्स के कारण होता है. Why People Go Toilet After Meals: कई लोग खाना खाने के बाद तुरंत टॉयलेट भागते हैं. कभी न कभी आपके साथ भी ऐसा जरूर हुआ होगा. खाना खाने के बाद पेशाब जाना तो नॉर्मल माना जाता है, लेकिन फ्रेश होने के लिए भागना नॉर्मल नहीं लगता है. यह स्थिति कभी-कभी असहज और चिंताजनक भी लग सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसा होना हमेशा किसी गंभीर समस्या का संकेत नहीं होता है, लेकिन बार-बार ऐसा हो, तो डॉक्टर से मिलकर कंसल्ट जरूर करना चाहिए. अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जोसेफ साल्हाब के मुताबिक खाने के तुरंत बाद शौच की इच्छा होना अक्सर गैस्ट्रोकॉलिक रिफ्लेक्स के कारण होता है. यह शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है, जो तब सक्रिय होती है जब भोजन पेट में पहुंचता है. इस रिफ्लेक्स के तहत कोलन संकुचित होकर पाचन तंत्र में नई जगह बनाने की कोशिश करती है. कुछ लोगों में यह प्रतिक्रिया ज्यादा तीव्र होती है, जिससे खाना खाने के तुरंत बाद मल त्याग की जरूरत महसूस होती है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपने जो खाना अभी खाया, वही तुरंत बाहर निकल गया. दरअसल मल पहले से ही बड़ी आंत में मौजूद होता है. भोजन का पेट में जाना केवल आंतों की गतिविधि को तेज कर देता है. जिन लोगों को इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS), लैक्टोज इनटॉलरेंस या कुछ खाद्य पदार्थों से संवेदनशीलता होती है, उनमें यह रिफ्लेक्स अधिक सक्रिय हो सकता है. View this post on Instagram
शिल्पा ने ‘बास्टियन’ बंद होने की अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी:बोलीं– मेरा नाम सिर्फ क्लिकबेट बनाकर पेश किया जा रहा है

बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी ने आखिरकार अपने फेमस रेस्तरां बास्टियन के बंद होने की अफवाहों और उनके पति राज कुंद्रा को लेकर छाई नकारात्मक पब्लिसिटी पर बयान दिया है। अभिनेत्री ने कहा है कि पिछले कई महीनों से उनके नाम और ब्रांड का जिक्र मीडिया में ऐसे तरीके से हो रहा है जैसे उनका नाम केवल क्लिकबेट बन गया हो। The Indian Express को दिए इंटरव्यू में शिल्पा ने बताया कि जो बातें सोशल मीडिया पर चल रही हैं, उन पर वह आम तौर पर चुप रहती हैं। उनका मानना है कि एक सेलिब्रेटी को कभी शिकायत नहीं करनी चाहिए और कभी स्पष्टीकरण नहीं देना चाहिए। लेकिन इस बार उन्होंने चुप्पी तोड़ी क्योंकि चर्चाओं का असर उनके प्यार से बनाया गया बास्टियन ब्रांड पर पड़ रहा था। उन्होंने साफ कहा कि चाहे खबरें कैसी भी हों, उनकी प्रतिष्ठा और काम की ईमानदारी लोगों को पहचान में आती है और यही वजह है कि ब्रांड आज भी मजबूती से खड़ा है। शिल्पा ने मीडिया में चल रही अफवाहों को नकारते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर सोशल मीडिया पर ब्रांड से जुड़ी बातें साझा कीं, ताकि गलतफहमियों को दूर किया जा सके। बातचीत में बास्टियन के मूल संस्थापक रणजीत बिंद्रा भी मौजूद थे। उन्होंने हंसते हुए कहा कि किसी भी तरह की पब्लिसिटी अच्छी पब्लिसिटी होती है। शिल्पा ने भी माना कि नकारात्मक खबरों में भी कुछ सकारात्मक सीख मिलती है, खासकर जब लोग सकारात्मक सोच के साथ मुद्दों को लेते हैं। शिल्पा ने बास्टियन की शुरुआत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2016 में वह पहली बार ग्राहक के रूप में बास्टियन गई थीं और वहीं से उनकी दोस्ती और पार्टनरशिप की शुरुआत हुई। बाद में यह ब्रांड बढ़ा और आज इसके चार अलग-अलग ब्रांड की आठ आउटलेट्स हैं। शिल्पा ने यह भी कहा कि लोग सही और गलत में फर्क करना जानते हैं, और वो अपने काम के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि बास्टियन अपने ग्राहकों को वही दे रहा है जो उन्हें चाहिए।
आशा कार्यकर्ताओं ने मानदेय न मिलने पर किया प्रदर्शन:पन्ना कलेक्ट्रेट में धरना, मुख्यमंत्री से मांगों पर कार्रवाई की मांग

पन्ना जिले में आशा और आशा पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं ने महीनों से रुके मानदेय और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। गुरुवार, 26 फरवरी को म.प्र. आशा/ऊषा सहयोगी श्रमिक संघ के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी की और धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन के बाद, संघ ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को विस्तार से रखा। ज्ञापन में बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली ये कार्यकर्ता आर्थिक तंगी का सामना कर रही हैं। पूर्व में घोषित 1000 रुपये की वार्षिक वृद्धि और केंद्र सरकार द्वारा जारी 1500 रुपये की राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें महीनों तक मानदेय नहीं मिलता, और जब मिलता है तो वह अधूरा होता है। कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि रक्षाबंधन, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों पर भी उन्हें बकाया भुगतान नहीं मिला। इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद, उन्हें न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभों से वंचित रखा गया है। आशा कार्यकर्ता करुणा गौतम ने कहा कि शासन-प्रशासन मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए उनकी तारीफ तो करता है, लेकिन जब उनके हक के पैसे देने की बात आती है, तो फाइलें दबा ली जाती हैं। उन्होंने अपनी खराब आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर का किराया देना भी मुश्किल हो रहा है। यूनियन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मानदेय का नियमित भुगतान और अन्य अनियमितताओं को दूर नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।
सीधी में भू-अर्जन कर्मचारी 1 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार:लोकायुक्त टीम ने पकड़ा, 27 लाख मुआवजे पर मांगी थे 13 लाख

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में लोकायुक्त पुलिस रीवा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भू-अर्जन शाखा के कर्मचारी भूपेंद्र पांडेय को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गुरुवार के दिन गिरफ्तार किया है। यह दूसरी बार है जब आरोपी को लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप में पकड़ा है, जिससे विभागीय तंत्र में हड़कंप मच गया है। शिकायतकर्ता शिवबहोर तिवारी, जो ग्राम सदना के निवासी हैं, ने लोकायुक्त को शिकायत दी थी। उनकी नौ डिसमिल जमीन हाईवे परियोजना में प्रभावित हुई थी, जिसके लिए उन्हें 27 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि इस मुआवजा राशि को जारी कराने के लिए कर्मचारी भूपेंद्र पांडेय ने उनसे 13 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने पहले भी मजबूरी में 1 लाख रुपये की राशि दी थी। तय योजना के तहत, गुरुवार को वह दूसरी किस्त के रूप में 1 लाख रुपये देने पहुंचे थे, जबकि शेष राशि पांच दिन बाद देने की बात हुई थी। इसी दौरान उन्होंने लोकायुक्त एसपी से शिकायत की, जिसके बाद सत्यापन कर ट्रैप की रणनीति बनाई गई। लोकायुक्त टीम को मिली सूचना का विधिवत सत्यापन किया गया। आरोप सही पाए जाने पर टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया। जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, टीम ने उसे तत्काल रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई। लोकायुक्त थाना प्रभारी एस. आर. मरावी ने बताया कि शिकायत के सत्यापन में तथ्य सही पाए जाने पर गुरुवार को आरोपी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आरोपी भूपेंद्र पांडेय के विरुद्ध पूर्व में भी लोकायुक्त पुलिस द्वारा आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा चुका है।
सिंगरौली के आमो गांव में आधी रात चोर पकड़ाया:ग्रामीणों ने खंभे से बांध; जियावान पुलिस को सौंपा

सिंगरौली जिले के जियावान थाना क्षेत्र के आमो गांव में बुधवार देर रात चोरी की घटना सामने आई। एक घर में घुसे चोर को मकान मालिक ने रंगे हाथों पकड़ लिया। ग्रामीणों ने चोर को खंभे से बांधकर पुलिस को सौंप दिया। यह घटना रात करीब 1 बजे की है। गुरुवार को पुलिस ने मामला दर्ज किया है पीड़ित गृहस्वामी राम रती केवट ने बताया कि रात में उनके घर और किराने की दुकान से कुछ आहट सुनाई दी, जिससे उनकी नींद खुल गई। बाहर निकलने पर उन्होंने देखा कि कुछ लोग दुकान के अंदर घुसे हुए थे। उन्होंने तुरंत शोर मचाया, जिससे गांव के अन्य लोग और उनका बेटा भी मौके पर पहुंच गए। भगदड़ के दौरान राम रती केवट और उनके बेटे ने भागते हुए एक चोर को पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपी ने अपना नाम लवकुश बताया। वह घर की बहू के बैग से एक सोने का लॉकेट और किराने की दुकान से कुछ सामान चुराकर भागने की कोशिश कर रहा था। राम रती केवट के अनुसार, उनकी दुकान में यह चौथी चोरी की घटना है। इससे पहले भी तीन बार चोरी हो चुकी है। ग्रामीणों ने चोर को खंभे से बांधकर जियावान थाना पुलिस को सूचना दी। चोर को पकड़कर थाने लाए जियावान थाना प्रभारी डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि ग्रामीणों से सूचना मिलते ही पुलिस टीम रात में मौके पर पहुंची। ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए चोर को थाने लाया गया है और मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
बैतूल में पुलिया निर्माण से परेशान छात्रों का चक्काजाम:2 महीने से रास्ता बंद, डायवर्शन न होने से हो रही परेशानी, अफसरों ने दी समझाइश

बैतूल शहर के जेएच कॉलेज चौक पर निर्माणाधीन पुलिया को लेकर गुरुवार को छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिया निर्माण के कारण पिछले दो माह से कॉलेज की मुख्य सड़क बंद है, जिससे छात्रों, शिक्षकों और आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी असुविधा के चलते छात्रों ने दोपहर में कॉलेज चौक पर चक्काजाम कर दिया, जिससे लगभग आधे घंटे तक यातायात बाधित रहा। डायवर्शन न होने से परेशानी छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिया निर्माण स्थल पर ठेकेदार और नगर पालिका द्वारा सुरक्षित डायवर्शन रोड की व्यवस्था नहीं की गई है। इस कारण परीक्षा देने और कॉलेज पहुंचने वाले छात्र-छात्राएं रोजाना देरी से पहुंच रहे हैं। उनका यह भी कहना था कि पुलिया निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी है, जिससे असुविधा लगातार बढ़ती जा रही है। मौके पर पहुंचे टीआई को छात्रों ने एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कॉलेज चौक पर निर्माणाधीन पुलिया में अनियमितताएं हो रही हैं। छात्रों के अनुसार, यहां साधारण पाइप पुलिया पर्याप्त होती, लेकिन जानबूझकर बॉक्स पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे करोड़ों रुपये के शासकीय धन के दुरुपयोग की आशंका है। ठेकेदार से छात्रों की कहासुनी ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि सांसद/विधायक निधि से स्थापित बस स्टॉप को बिना किसी वैधानिक आदेश या अनुमति के हटा दिया गया है। छात्रों ने इसे शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में रखा। प्रदर्शन के दौरान पुलिया निर्माण करवा रहे ठेकेदार और छात्र नेताओं के बीच कहासुनी भी हुई, जिसे पुलिस ने बीच-बचाव कर शांत कराया। बाद में मौके पर पहुंची ट्रैफिक पुलिस ने पास से डायवर्शन निकालकर यातायात सुचारू कराया और छात्रों को समझाइश देकर जाम खत्म करवाया। छात्रों ने मांग की है कि पुलिया निर्माण कार्य की तकनीकी और वित्तीय जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही, आवागमन के लिए सुरक्षित डायवर्शन रोड तुरंत बनाई जाए।







