चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल तय:केंद्र ने अधिकतम 30 दिन स्टॉक रखने का आदेश दिया; 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू रहेंगे नियम

केंद्र सरकार ने देशभर में चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आदेश जारी कर चीनी व्यापारियों के लिए अधिकतम 30 दिन की स्टॉक लिमिट और 4,000 क्विंटल की होल्डिंग सीमा तय कर दी है। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की गजट अधिसूचना के अनुसार, यह नया आदेश 1 अगस्त 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। मानसून में कमी के अनुमान को देखते हुए घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। देश के किसी भी व्यापारी पर 4,000 क्विंटल की सीमा लागू मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह पाबंदी लगाई है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि देश भर में कोई भी चीनी व्यापारी या डीलर किसी भी स्थान पर 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी स्टॉक में नहीं रख सकेगा। स्टॉक रखने की अवधि की गिनती रसीद की तारीख से होगी केंद्र सरकार के निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यापारी द्वारा स्टॉक रखने की अवधि की गणना उस तारीख से शामिल की जाएगी, जिस दिन व्यापारी को चीनी का स्टॉक प्राप्त हुआ है। इसके अलावा व्यापारी प्राप्त स्टॉक को 30 दिनों से अधिक समय तक होल्ड नहीं कर पाएंगे। राज्य सरकारों को टर्नओवर सीमा तय करने के निर्देश मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को अपने स्तर पर स्टॉक होल्डिंग और टर्नओवर की सीमाएं निर्धारित करने को कहा है। हालांकि, राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सीमाएं केंद्र द्वारा तय की गई 4,000 क्विंटल की सीमा या 30 दिन की अवधि से अधिक न हों। व्यापारियों को पोर्टल पर अपडेट करना होगा डेटा सरकार ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने देश के सभी चीनी व्यापारियों और डीलरों से कहा है कि वे निर्दिष्ट पोर्टल पर अपनी चीनी की स्टॉक स्थिति की घोषणा करें और इसे नियमित रूप से अपडेट करते रहें। PDS और सरकारी चीनी स्टॉक को पाबंदी से छूट यह आदेश सरकारी खाते में रखी गई चीनी पर लागू नहीं होगा। इसके अलावा, राज्य सरकारों द्वारा नामित डीलरों या राशन दुकानों (PDS) के जरिए वितरण के लिए अधिकृत अधिकारियों के पास मौजूद चीनी के स्टॉक को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है। कम मानसून के अनुमान के बीच चीनी एक्सपोर्ट पर पहले ही बैन कीमतों पर काबू पाने और घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर पहले ही रोक लगा दी है। सरकार ने मई में ही तत्काल प्रभाव से चीनी निर्यात पर बैन लगाया था, जिसकी समयसीमा 30 सितंबर तक तय की गई है। चालू विपणन वर्ष 2025-26 (सितंबर में समाप्त होने वाले) के लिए सरकार ने लगभग 16 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। इस सीजन में 29.3 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, एथेनॉल डायवर्जन के बाद 2025-26 मार्केटिंग सीजन में कुल चीनी उत्पादन 29.3 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यह पिछले 2024-25 सीजन में दर्ज किए गए 26.12 मिलियन टन उत्पादन से अधिक है। इंडस्ट्री बॉडीज बोलीं- देश में पर्याप्त स्टॉक, सट्टेबाजी न करें हालिया कीमतों में उछाल के बीच 17 जुलाई को चीनी उद्योग निकायों ISMA और NFCSF ने कहा था कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने संस्थागत खरीदारों, थोक और खुदरा व्यापारियों से अपील की थी कि वे कीमतों में बढ़ोतरी के बीच ‘सट्टेबाजी और घबराहट में खरीदारी’ करने से बचें। क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?
चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल तय:केंद्र ने अधिकतम 30 दिन स्टॉक रखने का आदेश दिया; 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू रहेंगे नियम

केंद्र सरकार ने देशभर में चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आदेश जारी कर चीनी व्यापारियों के लिए अधिकतम 30 दिन की स्टॉक लिमिट और 4,000 क्विंटल की होल्डिंग सीमा तय कर दी है। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की गजट अधिसूचना के अनुसार, यह नया आदेश 1 अगस्त 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। मानसून में कमी के अनुमान को देखते हुए घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। देश के किसी भी व्यापारी पर 4,000 क्विंटल की सीमा लागू मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह पाबंदी लगाई है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि देश भर में कोई भी चीनी व्यापारी या डीलर किसी भी स्थान पर 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी स्टॉक में नहीं रख सकेगा। स्टॉक रखने की अवधि की गिनती रसीद की तारीख से होगी केंद्र सरकार के निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यापारी द्वारा स्टॉक रखने की अवधि की गणना उस तारीख से शामिल की जाएगी, जिस दिन व्यापारी को चीनी का स्टॉक प्राप्त हुआ है। इसके अलावा व्यापारी प्राप्त स्टॉक को 30 दिनों से अधिक समय तक होल्ड नहीं कर पाएंगे। राज्य सरकारों को टर्नओवर सीमा तय करने के निर्देश मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को अपने स्तर पर स्टॉक होल्डिंग और टर्नओवर की सीमाएं निर्धारित करने को कहा है। हालांकि, राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सीमाएं केंद्र द्वारा तय की गई 4,000 क्विंटल की सीमा या 30 दिन की अवधि से अधिक न हों। व्यापारियों को पोर्टल पर अपडेट करना होगा डेटा सरकार ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने देश के सभी चीनी व्यापारियों और डीलरों से कहा है कि वे निर्दिष्ट पोर्टल पर अपनी चीनी की स्टॉक स्थिति की घोषणा करें और इसे नियमित रूप से अपडेट करते रहें। PDS और सरकारी चीनी स्टॉक को पाबंदी से छूट यह आदेश सरकारी खाते में रखी गई चीनी पर लागू नहीं होगा। इसके अलावा, राज्य सरकारों द्वारा नामित डीलरों या राशन दुकानों (PDS) के जरिए वितरण के लिए अधिकृत अधिकारियों के पास मौजूद चीनी के स्टॉक को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है। कम मानसून के अनुमान के बीच चीनी एक्सपोर्ट पर पहले ही बैन कीमतों पर काबू पाने और घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर पहले ही रोक लगा दी है। सरकार ने मई में ही तत्काल प्रभाव से चीनी निर्यात पर बैन लगाया था, जिसकी समयसीमा 30 सितंबर तक तय की गई है। चालू विपणन वर्ष 2025-26 (सितंबर में समाप्त होने वाले) के लिए सरकार ने लगभग 16 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। इस सीजन में 29.3 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, एथेनॉल डायवर्जन के बाद 2025-26 मार्केटिंग सीजन में कुल चीनी उत्पादन 29.3 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यह पिछले 2024-25 सीजन में दर्ज किए गए 26.12 मिलियन टन उत्पादन से अधिक है। इंडस्ट्री बॉडीज बोलीं- देश में पर्याप्त स्टॉक, सट्टेबाजी न करें हालिया कीमतों में उछाल के बीच 17 जुलाई को चीनी उद्योग निकायों ISMA और NFCSF ने कहा था कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने संस्थागत खरीदारों, थोक और खुदरा व्यापारियों से अपील की थी कि वे कीमतों में बढ़ोतरी के बीच ‘सट्टेबाजी और घबराहट में खरीदारी’ करने से बचें। क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?
दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम-पेमेंट्स-बैंक को बंद करने का आदेश दिया:आरबीआई ने दी जानकारी, नियमों के उल्लंघन पर रद्द हुआ था बैंकिंग लाइसेंस

दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) को बंद करने का आदेश दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। कोर्ट ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 और कंपनीज एक्ट, 2013 के प्रावधानों के तहत यह फैसला सुनाया है। 8 जुलाई से प्रभावी हुआ आदेश आरबीआई के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2026 के आदेश और 22 जुलाई 2026 के आदेश के साथ यह निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व सीजीएम गिरीकुमार एम नायर को पीपीबीएल का आधिकारिक लिक्विडेटर नियुक्त किया है। नायर 8 जुलाई 2026 से बैंक के बोर्ड की सभी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे। उन्हें बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट और कंपनीज एक्ट के तहत निर्धारित सभी अधिकार दिए गए हैं। नियमों के उल्लंघन पर रद्द हुआ था लाइसेंस आरबीआई ने इस साल अप्रैल में पीपीबीएल का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। केंद्रीय बैंक ने कहा था कि बैंक का कामकाज जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ था। इससे पहले मार्च 2022 में भी बैंक पर नए ग्राहकों को जोड़ने पर रोक लगाई गई थी। उस समय बैंक में गंभीर पर्यवेक्षी चिंताएं देखी गई थीं और उसे आईटी सिस्टम का ऑडिट कराने का निर्देश दिया गया था। पहले भी लगाई गई थीं पाबंदियां पेटीएम पेमेंट्स बैंक विजय शेखर शर्मा की फिनटेक कंपनी पेटीएम की सहयोगी फर्म है। लाइसेंस रद्द करने से पहले 31 जनवरी 2024 और 16 फरवरी 2024 को बैंक पर कई व्यावसायिक प्रतिबंध लगाए गए थे। इसमें ग्राहकों के खातों, प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स और वॉलेट में किसी भी तरह की नई जमा, क्रेडिट या टॉप-अप की सुविधा पर रोक शामिल थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम-पेमेंट्स-बैंक को बंद करने का आदेश दिया:RBI ने जानकारी दी, नियमों के उल्लंघन पर बैंकिंग लाइसेंस रद्द हुआ था

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लाइसेंस रद्द किए जाने के कुछ महीनों बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया है। RBI ने मंगलवार को इस कानूनी फैसले की जानकारी दी। हाईकोर्ट ने SBI के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर गिरिकुमार एम नायर को पेटीएम पेमेंट्स बैंक का ऑफिशियल लिक्विडेटर नियुक्त किया है। नायर 8 जुलाई 2026 से बैंक के बोर्ड की सभी पावर का इस्तेमाल कर रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में क्या कहा गया? RBI ने बयान में बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2026 के आदेश और 22 जुलाई 2026 के आदेश के साथ यह निर्देश जारी किया है। यह कार्रवाई बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 और कंपनीज एक्ट, 2013 के प्रावधानों के तहत की गई है। कोर्ट ने लिक्विडेटर को बैंकिंग और कंपनीज एक्ट के तहत तय सभी अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए कहा है। अप्रैल 2026 में रद्द हुआ था बैंक का लाइसेंस RBI ने लगातार नियमों का पालन न करने की वजह से अप्रैल 2026 में पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। उस समय RBI ने कहा था कि बैंक का कामकाज डिपॉजिटर्स के हितों के खिलाफ चलाया जा रहा। लाइसेंस रद्द करने के साथ ही RBI ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह बैंक को बंद कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करेगा। पेटीएम बैंक पर कब-कब हुई कार्रवाई? विजय शेखर शर्मा की लीडरशिप वाली फिनटेक कंपनी पेटीएम की सहयोगी कंपनी पेटीएम पेमेंट्स बैंक को पिछले कुछ सालों में कई बार कड़े नियमों का सामना करना पड़ा… ये खबर भी पढ़ें… फ्रांस में इन्फोसिस पर 2 करोड़ का जुर्माना: वर्किंग आवर्स का सही रिकॉर्ड न रखने का आरोप, वहां हफ्ते में 35 घंटे काम का नियम फ्रांस के श्रम अधिकारियों ने इन्फोसिस पर 1.75 लाख यूरो यानी करीब 2 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। कंपनी की कर्मचारियों के काम के घंटे रिकॉर्ड करने वाली प्रणाली कानूनी जरूरतों के मुताबिक नहीं पाई गई। यह जुर्माना फ्रांस की रिजनल लेबर अथॉरिटी DRIEETS इले-डी-फ्रांस ने लगाया है। इन्फोसिस ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इस मामले की जानकारी दी है। पूरी खबर पढ़ें…
विजय के बाद शिल्पा शेट्टी के नाम से फर्जी पोस्ट:एक्ट्रेस ने भड़ककर कहा- मेरे नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे; दावा था- आरक्षण पर बयान दिया

एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के नाम से आरक्षण पर फर्जी पोस्ट वायरल हो गई। जानकारी मिलने पर एक्ट्रेस भड़क गईं और उन्होंने साफ किया कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है। शिल्पा शेट्टी ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, आरक्षण को लेकर मेरे नाम से जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं। मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। कुछ लोग जानबूझकर मेरे नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और फर्जी खबर फैला रहे हैं। ऐसी फर्जी न्यूज पर बिल्कुल भरोसा मत कीजिए।” विजय वर्मा ने भी फर्जी पोस्ट वायरल होने पर दी सफाई हाल ही में एक्टर विजय वर्मा के नाम से भी रिजर्वेशन पर एक पोस्ट वायरल हो गई। पोस्ट में विजय के नाम से लिखा गया था, “मेरे पिता ने मारुति 800 खरीदी थी, जब मैं पैदा हुआ था। जब मैं 12वीं कक्षा में पहुंचा, तब उन्होंने होंडा सिटी खरीदी। मैं उसी कार से कॉलेज जाता था, जबकि मेरा सबसे अच्छा दोस्त, जो एक मारवाड़ी परिवार से था, अब भी 12 साल पुरानी हीरो होंडा बाइक चलाता था। हमने एक सरकारी नौकरी की परीक्षा दी। उसने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन उसे सीट नहीं मिली। नतीजे वाले दिन वह रोते हुए घर लौटा, जबकि मैं मुस्कुराते हुए घर गया। मैं उस आरक्षण का हकदार नहीं था, लेकिन मुझे वह मिला। अगर मेरा नहीं, तो कम से कम उसके लिए तो निष्पक्ष मौका उसका अधिकार था।” पोस्ट वायरल होने के बाद विजय ने सफाई देते हुए कहा, “मैंने यह कभी पोस्ट नहीं किया। यह पूरी तरह झूठ है।” रिजर्वेशन पर क्यों वायरल हो रही हैं सेलेब्स की पोस्ट नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन के बाद शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया है। इस मुद्दे पर जीत के बाद कई लोग जनरल कैटेगरी के लोगों को सामान्य अधिकार न मिलने पर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसके लिए भी विरोध करने की बात कही, जिसके बाद से ही रिजर्वेशन का मुद्दा गरम हो गया। इसी बीच सेलेब्स को इससे जोड़ा जा रहा है।
मैंने पिता की मौत प्लान की:राम कपूर का बड़ा खुलासा, शिल्पा शिंदे बोलीं- मैं अनाथ, शेल्टर होम में रहती हूं, घरवालों ने भगा दिया

टेलीविजन एक्टर राम कपूर ने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने अपने पिता की मौत प्लान की थी। वहीं दूसरी तरफ एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे ने खुलासा किया है कि वो परिवार से रिश्ते तोड़ चुकी हैं। उनकी मां और भाई ने उन्हें घर से निकाल दिया था, जिसके बाद अब वो आश्रम में रहकर गुजारा करती हैं। रियलिटी शो लॉकअप में राम कपूर ने एक टास्क में अपना सीक्रेट रिवील करते हुए पिता की मौत प्लान करने का दावा किया और ये भी कहा कि इस बात से नाराज मां और बहन ने आज तक उनसे बात नहीं की। राम कपूर ने शो में कहा, ‘मैंने पिता की उनकी मौत प्लान करने में मदद की। 63 की उम्र में उन्हें कैंसर हुआ। ऑपरेशन पॉसिबल नहीं था। उन्होंने 18 कीमोथैरेपी लीं। इतना अच्छा किया कि वो 73 तक जिए। जब कैंसर वापस आया, तो डॉक्टर ने कहा कि ये बुरा है, हम सब दोबारा करेंगे।’ एक्टर ने आगे कहा, ‘मेरे पिता रिच थे। मैंने उनकी कंपनी जॉइन करने के बजाए एक्टर बनने का फैसला लिया और अलग हो गया। मेरे और पिता के बीच 36 का आंकड़ा था। जब उनका कैंसर वापस आया, वो सिंगापुर में थे, कोविड टाइम था, लॉकडाउन था। उन्होंने गौतमी को कॉल कर बोला मुझे राम से बात करना है। उन्होंने डिसाइड कर लिया था कि उन्हें जीना नहीं है, वो मरना चाहते थे, लेकिन वो ये अकेले नहीं करना चाहते थे। उन्हें लगा उन्हें मेरी जरूरत है। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या तुम मेरी मरने में मदद कर सकते हो।’ भावुक होकर राम कपूर ने आगे कहा, ‘उन्होंने मुझे मना लिया कि मैं मदद नहीं करूंगा तो वो अकेले मरेंगे। उन्होंने मुझसे डील की कि मैं किसी को न बताऊं। उन्होंने मुझसे कहा कि जब वो आईसीयू में हों, तो मैं साथ रहूं। मेरी मां और बहन को नहीं पता था। वो नहीं जानते थे कि उनका इलाज नहीं चल रहा है। मेरे पिता बस मेरा हाथ पकड़ना चाहते थे। वो अकेले रहने से डरे हुए थे। वो मरने से नहीं डर रहे थे, वो बस अकेले नहीं रहना चाहते थे। उन्हें लगता था कि किसी और को पता चला तो उन्हें मरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस दिन मरूं उसी दिन मुझे दफ्ना या जला देना। मैंने उनका हाथ पकड़ा और उनकी मरने में मदद की।ट 5 सालों से मां और बहन ने नहीं की बात- राम कपूर मेरी मां और बहन आज भी मुझसे बात नहीं करते, 5 साल हो चुके हैं। लेकिन मुझे लगता है कि एक बच्चा अपने पिता के लिए इससे ज्यादा अच्छा कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि हर कोई राजा की तरह जीता है, लेकिन वो राजा की तरह रहे। उनकी वजह से मैंने अपनी ताकत देखी और मौत को करीब से देखा। शिल्पा शिंदे बोलीं- मैं अनाथ, शेल्टर होम में रहती हूं शिल्पा शिंदे ने परिवार द्वारा ठुकराए जाने पर कहा, ‘लोग फैमिली-फैमिली बोलते हैं। लोगों के पास फैमिली नहीं होती। मेरे पास फैमिली होने के बाद भी मैं अनाथ हूं। मैं कोई दया नहीं चाहती। मैं पहले भी बोल चुकी हूं कि मैं शेल्टर हाउस में रहती हूं जब भी आती हूं (मुंबई)। करजत मैंने दूसरे घर की तरह लिया था, लेकिन अब वो मेरा फर्स्ट होम है, क्योंकि मैंने मुंबई छोड़ दिया।’ आगे शिल्पा ने बताया, ‘3 साल हो गए, जब मेरी शोल्डर की सर्जरी हुई। मेरे भाई वाइफ से इन्फ्लूएंस हुआ और मेरी मां भाई से इन्फ्लूएंस हुई और मुझे घर से निकाल दिया। आप सोचेंगे कि वह इतने बुरे हैं कि आपको निकाल दिया गया, लेकिन हालात ऐसे क्रिएट किए गए कि उन्हें पता है कि मैं सेल्फ रिस्पेक्ट वाली लड़की हूं। मैं रात 11 बजे घर छोड़कर चली गई, मेरी मां ने मुझे नहीं रोका, क्योंकि वो भाई के इन्फ्लूएंस में आ गई थीं।’ आगे उन्होंने कहा, ‘जब आप लोगों के लिए एवेलेबल हो जाते हैं, तो लोग आपका फायदा उठाते हैं। आप डोरमेट बन जाते हैं, मैं मेरे घर की डोरमेट हूं। मैं बॉम्बे जाती हूं और होटल में रुकती हूं तो लोग कहते हैं आप तो यहीं रहते हो, मैं कहती हूं हां, मेरे घर में बहुत सारे मेहमान आए हैं, इसलिए प्राइवेसी के लिए यहां आती हूं। मैं कभी जिंदगी में बात नहीं करूंगी। मैं अपनी वसीयत में लिख चुकी हूं कि मेरा इन लोगों से कोई रिश्ता नहीं है।’’ शिल्पा शिंदे ने भावुक होकर आगे कहा, ‘किसी ने मुझसे पूछा कि मैं ये शो क्यों कर रही हूं, तो मैं होम नहीं शेल्टर होम बनाना चाहती हूं, इसलिए ये कर रही हूं। मैं मां से मिलना चाहती हूं, वो पूछती हैं कि क्या घर आओगी, लेकिन मैं नहीं जाती। मैं रिश्तों के मामले में बहुत कठोर हूं। मैं इतनी खराब हूं कि मुझे अपने ही घर से बाहर निकाल दिया गया।’ बता दें कि शिल्पा शिंदे और राम कपूर इन दिनों नेटफ्लिक्स के रियलिटी शो लॉकअप 2 में हैं। शो के नियम के अनुसार, हर कंटेस्टेंट जिंदगी के 3 सीक्रेट शो में साथ ले जाता है, जिसे वो खुद को एलिमिनेशन से बचाने में इस्तेमाल करता है। इसी नियम के तहत एक टास्क में शिल्पा और राम को अपने सीक्रेट रिवील करने पड़े हैं। उनसे पहले आकांक्षा चमोला ने सीक्रेट रिवील कर बताया था कि वो बायसेक्शुअल हैं और एक्टर गौरव खन्ना से तलाक ले रही हैं। राम कपूर के पिता ने दी थी अमूल की पंचलाइन राम कपूर के पिता अनिल कपूर को बिली नाम से पहचाना जाता था। वो बड़े बिजनेसमैन थे। वे FCB उल्का में चेयरमैन थे। उन्हें कई यादगार विज्ञापनों के लिए जाना जाता है। लेकिन अमूल की द टेस्ट ऑफ इंडिया पंचलाइन अनिल कपूर ने ही दी थी। अनिल कपूर के सीईओ रहते ही अमूल FCB उल्का की क्लाइंट थी। उनका निधन 12 अप्रैल 2021 में हुआ था।
कंगना ने नई जनरेशन की महिलाओं को कहा- गटर छाप:कहा- नशा, शराब, कई आदमियों से यौन संबंध बनाना इनके लिए आजादी, हाउसवाइफ तक नहीं बन सकतीं

सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने नई पीढ़ी की भारतीय महिलाओं को गटर कहा है। कंगना का कहना है कि ये महिलाएं स्वतंत्र महिलाओं की नकल उतारते हुए नशे करने, शराब पीने और अनगिनत आदमियों से यौन संबंध बनाने को स्वतंत्रता कहती हैं। कंगना ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के स्टोरी सेक्शन से लिखा है, ‘सबसे शर्मनाक बात उन युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है, जो स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को नहीं निभाना चाहतीं। असल में स्वतंत्र महिलाएं विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की पूरी जिम्मेदारी भी उठाती हैं। उन्हें अपने कर्मों की कीमत खुद चुकानी पड़ती है। वे अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर ऐसा नहीं करतीं।’ आगे कंगना ने लिखा, ‘आज तथाकथित वेस्टर्न सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है। मैं इन्हें ‘गटर जेनरेशन’ कहती हूं। इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन इतनी बदसूरत सोच और भ्रष्ट मानसिकता रखती हैं कि अच्छी हाउसवाइफ भी नहीं बन सकतीं।’ ‘इसके बावजूद वे अपनी तथाकथित आजादी का दिखावा करती हैं, नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं और लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी याद दिला दूं, आजाद जीवन कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, ‘गटर छाप’।’ स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर कहा था- कैसी परवरिश हो रही है भाजपा सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने सोमवार को स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर भी विवादित राय दी और नई जनरेशन की परवरिश पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया से लिखा, ‘अपनी पूरी जिंदगी में मैंने कभी इतनी बदसूरती एक साथ नहीं देखी। Gen Z के विरोध-प्रदर्शनों की ये रीलें देखकर घिन आती है। इन लोगों के बोलने का तरीका और जिस भाषा का ये इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा। हर फ्रेम इतना अजीब और परेशान करने वाला है कि देखकर घिन होती है। आखिर इन्हें जन्म कौन दे रहा है और इनकी परवरिश कौन कर रहा है?’ स्टूडेंट प्रोटेस्ट के खिलाफ भी दिए कई बयान कंगना रनोट ने सोशल मीडिया के जरिए स्टूडेंट प्रोटेस्ट का जमकर विरोध किया था। उन्होंने कहा कि किसी को पद से हटाने या रखने के लिए सरकार पर दबाव बनाना गलत है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मुद्दों पर बहस के लिए संसद सही जगह है, न कि आंदोलन। कंगना ने कहा था की ये सब जंतर-मंतर पर हुड़दंग कर रहे हैं, उत्पात मचा रहे हैं। जिस तरह से आंदोलन चल रहा है वो ठीक नहीं है। दरअसल दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) छात्रों की मांगों के समर्थन में कई दिनों से प्रदर्शन कर रही है। इसके बाद जब प्रोटेस्ट खत्म हुआ तो कंगना ने प्रदर्शनकारियों की भाषा की आलोचना की।
कंगना ने नई जनरेशन की महिलाओं को कहा- गटर छाप:कहा- नशा, शराब, कई आदमियों से यौन संबंध बनाना इनके लिए आजादी, हाउसवाइफ तक नहीं बन सकतीं

सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने नई पीढ़ी की भारतीय महिलाओं को गटर कहा है। कंगना का कहना है कि ये महिलाएं स्वतंत्र महिलाओं की नकल उतारते हुए नशे करने, शराब पीने और अनगिनत आदमियों से यौन संबंध बनाने को स्वतंत्रता कहती हैं। कंगना ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के स्टोरी सेक्शन से लिखा है, ‘सबसे शर्मनाक बात उन युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है, जो स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को नहीं निभाना चाहतीं। असल में स्वतंत्र महिलाएं विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की पूरी जिम्मेदारी भी उठाती हैं। उन्हें अपने कर्मों की कीमत खुद चुकानी पड़ती है। वे अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर ऐसा नहीं करतीं।’ आगे कंगना ने लिखा, ‘आज तथाकथित वेस्टर्न सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है। मैं इन्हें ‘गटर जेनरेशन’ कहती हूं। इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन इतनी बदसूरत सोच और भ्रष्ट मानसिकता रखती हैं कि अच्छी हाउसवाइफ भी नहीं बन सकतीं।’ ‘इसके बावजूद वे अपनी तथाकथित आजादी का दिखावा करती हैं, नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं और लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी याद दिला दूं, आजाद जीवन कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, ‘गटर छाप’।’ स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर कहा था- कैसी परवरिश हो रही है भाजपा सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने सोमवार को स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर भी विवादित राय दी और नई जनरेशन की परवरिश पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया से लिखा, ‘अपनी पूरी जिंदगी में मैंने कभी इतनी बदसूरती एक साथ नहीं देखी। Gen Z के विरोध-प्रदर्शनों की ये रीलें देखकर घिन आती है। इन लोगों के बोलने का तरीका और जिस भाषा का ये इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा। हर फ्रेम इतना अजीब और परेशान करने वाला है कि देखकर घिन होती है। आखिर इन्हें जन्म कौन दे रहा है और इनकी परवरिश कौन कर रहा है?’ स्टूडेंट प्रोटेस्ट के खिलाफ भी दिए कई बयान कंगना रनोट ने सोशल मीडिया के जरिए स्टूडेंट प्रोटेस्ट का जमकर विरोध किया था। उन्होंने कहा कि किसी को पद से हटाने या रखने के लिए सरकार पर दबाव बनाना गलत है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मुद्दों पर बहस के लिए संसद सही जगह है, न कि आंदोलन। कंगना ने कहा था की ये सब जंतर-मंतर पर हुड़दंग कर रहे हैं, उत्पात मचा रहे हैं। जिस तरह से आंदोलन चल रहा है वो ठीक नहीं है। दरअसल दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) छात्रों की मांगों के समर्थन में कई दिनों से प्रदर्शन कर रही है। इसके बाद जब प्रोटेस्ट खत्म हुआ तो कंगना ने प्रदर्शनकारियों की भाषा की आलोचना की।
यौन अपराधी एपस्टीन की करोड़ों की संपत्ति किसे मिलेगी:बेलारूस की डेंटिस्ट सबसे बड़ी दावेदार, एपस्टीन ने मरने से पहले आखिरी कॉल उन्हें किया था

दुनिया के सबसे चर्चित यौन अपराधियों में शामिल जेफ्री एपस्टीन की मौत को सात साल हो चुके हैं, लेकिन उसकी अरबों की संपत्ति को लेकर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी जांच एजेंसियों के नए दस्तावेज सामने आने के बाद माना जा रहा है कि बेलारूस की रहने वाली 37 साल की डेंटिस्ट कारिना शुलियाक एपस्टीन की संपत्ति की सबसे बड़ी दावेदार हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, एपस्टीन ने मरने से पहले अपनी वसीयत में उनके लिए करीब 959 करोड़ रुपए तक की संपत्ति और 33 कैरेट की हीरे की अंगूठी छोड़ी थी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, डॉ. शुलियाक एपस्टीन की गर्लफ्रेंड रही हैं। 10 अगस्त 2019 को न्यूयॉर्क की जेल में आत्महत्या करने से पहले एपस्टीन ने आखिरी फोन भी उन्हें ही किया था। दोनों के निजी ईमेल-तस्वीरें जारी हुए डॉ. कारिना शुलियाक 2019 में एपस्टीन की मौत के बाद से लोगों की नजरों से दूर रहकर सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रही थी। लेकिन उनकी यह कोशिश ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। जनवरी के आखिर में अमेरिकी न्याय विभाग ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़े करीब 30 लाख पन्नों के दस्तावेज और ईमेल जारी कर दिए। इन रिकॉर्ड में डॉ. शुलियाक और एपस्टीन के बीच हुए हजारों निजी ईमेल और दोनों की साथ में ली गई कई तस्वीरें भी शामिल थीं। इसके बाद दोनों का करीब 8 साल लंबा रिश्ता सबके सामने आ गया। रिकॉर्ड के मुताबिक, बेलारूस में जन्मीं शुलियाक ने खुद को कभी एपस्टीन की पीड़िता नहीं बताया। वहीं, एफबीआई ने भी उनसे एपस्टीन के मामले में कभी पूछताछ नहीं की। एपस्टीन की सैकड़ों पीड़िताओं की ओर से केस लड़ने वाले वकीलों ने भी उनका बयान कभी दर्ज नहीं कराया। 21 साल की उम्र में एपस्टीन से मिली थी जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, मार्च 2011 के आखिर में डॉ. कारिना शुलियाक की मुलाकात जेफ्री एपस्टीन से हुई थी। तब वह 21 साल की थीं और न्यूयॉर्क आए सिर्फ नौ महीने हुए थे। वह बेलारूस से अस्थायी स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका आई थीं, ताकि वहां डेंटिस्ट की अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। उस समय एपस्टीन फ्लोरिडा में एक नाबालिग लड़की से वेश्यावृत्ति कराने के मामले में अपना अपराध स्वीकार कर चुका था और उस पर दर्जनों नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोप भी थे। द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, साइबेरिया की एक लड़की ने दोनों की मुलाकात कराई थी। उस महिला ने बताया कि उससे समय-समय पर दूसरी युवा महिलाओं को भी एपस्टीन के पास लाने के लिए कहा जाता था। शुरुआती मुलाकातों में एपस्टीन ने महंगे तोहफों और दूसरी सुविधाओं से शुलियाक को प्रभावित करने की कोशिश की। पहली ही मुलाकात के दौरान उसने उनके डेंटिस्ट बनने के सपने को पूरा कराने में मदद करने की पेशकश भी की। डॉ. शुलियाक पर जमकर खर्च करता था एपस्टीन एपस्टीन डॉ. शुलियाक को अपनी सबसे पसंदीदा बता चुका था और अक्सर कहता था कि वह उनसे प्यार करता है। उसने उन्हें अपनी क्रेडिट कार्ड से मनचाही खरीदारी करने की पूरी छूट दे रखी थी। दोनों कई देशों में साथ घूमते थे। एपस्टीन ने कई सालों में उन्हें करीब 10 लाख डॉलर दिए। इतना ही नहीं, उसने बेलारूस में रहने वाले उनके माता-पिता को भी हजारों डॉलर भेजे थे। ईमेल से यह भी पता चलता है कि 2012 में एपस्टीन ने उन्हें कोलंबिया यूनिवर्सिटी के डेंटल स्कूल में दाखिला दिलाने में मदद की थी और तीन साल की पढ़ाई की पूरी फीस भी भरने का फैसला किया था। समय के साथ डॉ. शुलियाक ने जेफ्री एपस्टीन का इतना भरोसा जीत लिया कि वह उसकी संपत्तियों और कर्मचारियों के मैनेजमेंट में भी मदद करने लगीं। एपस्टीन ने ग्रीन कार्ड दिलाने में भी मदद की 2012 में डॉ. कारिना शुलियाक ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए आवेदन किया। तब तक उनका स्टूडेंट वीजा खत्म हो चुका था और वह तय समय से ज्यादा अमेरिका में रह रही थीं। अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, 2013 की शुरुआत में जेफ्री एपस्टीन ने उन्हें अमेरिका में रखने का रास्ता निकाला। उस समय न्यूयॉर्क में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिल चुकी थी। एपस्टीन का मानना था कि अगर कारिना की शादी किसी अमेरिकी महिला से करा दी जाए, तो उन्हें ग्रीन कार्ड और बाद में नागरिकता मिलने का रास्ता आसान हो जाएगा। इसके लिए उसने अपनी एक महिला असिस्टेंट से कारिना की शादी कराई। एक ईमेल में एपस्टीन ने लिखा था कि ग्रीन कार्ड पाने का सबसे तेज तरीका समलैंगिक विवाह है। बाद में अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट सांसदों ने आरोप लगाया कि एपस्टीन ने अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि यह शादी सिर्फ कागजों पर दिखाई गई थी। मई 2018 में डॉ. शुलियाक अमेरिकी नागरिक बन गईं और करीब एक साल बाद उनका तलाक हो गया। मौत से पहले एपस्टीन ने डॉ. शुलियाक के नाम की संपत्ति जुलाई 2019 में जैफ्री एप्सटीन की गिरफ्तारी हो गई। इसके एक महीने बाद उनकी डॉ. शुलियाक से आखिरी बार करीब 20 मिनट फोन पर बातचीत हुई। एपस्टीन ने कहा कि सेक्स ट्रैफिकिंग का मामला उम्मीद से ज्यादा लंबा चलेगा। अगले ही दिन, 10 अगस्त 2019 को एपस्टीन अपनी जेल में मृत मिला। अधिकारियों ने उसकी मौत को आत्महत्या बताया। दस्तावेजों के मुताबिक, मौत से कुछ समय पहले एपस्टीन ने अपनी वसीयत में बदलाव किया था। एक नोट में उसने अपनी उस समय की 60 करोड़ डॉलर की संपत्ति का बड़ा हिस्सा डॉ. शुलियाक के नाम करने की बात लिखी थी। इसमें शादी के इरादे से दी जाने वाली एक बड़ी हीरे की अंगूठी का भी जिक्र था।
यौन अपराधी एपस्टीन की करोड़ों की संपत्ति किसे मिलेगी:बेलारूस की डेंटिस्ट सबसे बड़ी दावेदार, एपस्टीन ने मरने से पहले आखिरी कॉल उन्हें किया था

दुनिया के सबसे कुख्यात यौन अपराधियों में शामिल जेफ्री एपस्टीन की मौत को सात साल हो चुके हैं, लेकिन उसकी अरबों रुपए की संपत्ति को लेकर विवाद अब भी जारी है। अमेरिकी जांच एजेंसियों के नए दस्तावेजों से पता चला है कि बेलारूस की 37 वर्षीय डेंटिस्ट कारिना शुलियाक उसकी संपत्ति की सबसे बड़ी दावेदार हो सकती हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, एपस्टीन ने अपनी वसीयत में कारिना के नाम करीब 959 करोड़ रुपए की संपत्ति और 33 कैरेट की हीरे की अंगूठी छोड़ी थी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कारिना शुलियाक एपस्टीन की गर्लफ्रेंड थीं। 10 अगस्त 2019 को न्यूयॉर्क की जेल में आत्महत्या से पहले एपस्टीन ने आखिरी फोन कॉल भी उन्हें ही किया था। दोनों के प्राइवेट ईमेल और तस्वीरें सार्वजनिक हुईं जेफ्री एपस्टीन की 2019 में मौत के बाद डॉ. कारिना शुलियाक लोगों की नजरों से दूर रहकर सामान्य जिंदगी जी रही थीं। हालांकि, यह ज्यादा समय तक नहीं चल सका। जनवरी के आखिर में अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन से जुड़े करीब 30 लाख पन्नों के दस्तावेज, ईमेल और रिकॉर्ड जारी किए। इनमें डॉ. कारिना शुलियाक और एपस्टीन के बीच हुए हजारों निजी ईमेल और दोनों की साथ में ली गई कई तस्वीरें भी शामिल हैं। इन दस्तावेजों से दोनों के करीब 8 साल पुराने रिश्ते का खुलासा हुआ। रिकॉर्ड के मुताबिक, बेलारूस में जन्मीं कारिना शुलियाक ने कभी खुद को एपस्टीन की पीड़िता नहीं बताया। वहीं, एफबीआई ने भी एपस्टीन मामले में उनसे कभी पूछताछ नहीं की। एपस्टीन की सैकड़ों कथित पीड़िताओं की ओर से केस लड़ने वाले वकीलों ने भी उनका बयान कभी दर्ज नहीं कराया। 21 साल की उम्र में एपस्टीन से मिली थीं कारिना जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, मार्च 2011 के आखिर में डॉ. कारिना शुलियाक की मुलाकात जेफ्री एपस्टीन से हुई थी। तब वह 21 साल की थीं और न्यूयॉर्क आए उन्हें सिर्फ नौ महीने हुए थे। वह बेलारूस से स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका आई थीं, ताकि डेंटिस्ट की पढ़ाई पूरी कर सकें। उस समय एपस्टीन फ्लोरिडा में एक नाबालिग लड़की से वेश्यावृत्ति कराने के मामले में अपना अपराध स्वीकार कर चुका था। उस पर दर्जनों नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोप भी लग चुके थे। एक महिला ने कराई थी मुलाकात द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, दोनों की मुलाकात एक महिला ने कराई थी। उस महिला ने बताया कि उससे समय-समय पर दूसरी युवा महिलाओं को भी एपस्टीन के पास लाने के लिए कहा जाता था। महंगे तोहफों से प्रभावित करने की कोशिश शुरुआती मुलाकातों में एपस्टीन ने कारिना को महंगे तोहफे और दूसरी सुविधाएं देकर प्रभावित करने की कोशिश की। पहली मुलाकात में ही उसने उनके डेंटिस्ट बनने के सपने को पूरा करने में मदद की पेशकश भी की। शुलियाक पर जमकर खर्च करता था एपस्टीन जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, जेफ्री एपस्टीन डॉ. कारिना शुलियाक को अपनी सबसे पसंदीदा बताता था और अक्सर कहता था कि वह उनसे प्यार करता है। उसने उन्हें अपने क्रेडिट कार्ड से मनचाही खरीदारी की पूरी छूट दे रखी थी। दोनों कई देशों की यात्रा भी साथ करते थे। रिकॉर्ड के अनुसार, एपस्टीन ने कई वर्षों में कारिना को करीब 10 लाख डॉलर दिए। उसने बेलारूस में रहने वाले उनके माता-पिता को भी हजारों डॉलर भेजे थे। ईमेल से यह भी पता चलता है कि 2012 में एपस्टीन ने कारिना का कोलंबिया यूनिवर्सिटी के डेंटल स्कूल में दाखिला कराने में मदद की। उसने तीन साल की पढ़ाई की पूरी फीस भरने का भी फैसला किया था। समय के साथ कारिना ने एपस्टीन का इतना भरोसा जीत लिया कि वह उसकी संपत्तियों और कर्मचारियों के प्रबंधन में भी मदद करने लगीं। ग्रीन कार्ड दिलाने के लिए कराई थी समलैंगिक शादी 2012 में डॉ. कारिना शुलियाक ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए आवेदन किया। तब तक उनका स्टूडेंट वीजा खत्म हो चुका था और वह तय समय से ज्यादा अमेरिका में रह रही थीं। अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, 2013 की शुरुआत में जेफ्री एपस्टीन ने उन्हें अमेरिका में रखने का रास्ता निकाला। उस समय न्यूयॉर्क में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिल चुकी थी। एपस्टीन का मानना था कि किसी अमेरिकी महिला से शादी होने पर कारिना के लिए ग्रीन कार्ड और बाद में नागरिकता हासिल करना आसान हो जाएगा। इसी योजना के तहत उसने अपनी एक महिला कर्मचारी से कारिना की शादी कराई। एक ईमेल में एपस्टीन ने लिखा था कि ग्रीन कार्ड पाने का सबसे तेज तरीका समलैंगिक विवाह है। बाद में अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट सांसदों ने आरोप लगाया कि एपस्टीन ने अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम का दुरुपयोग किया। उनका कहना था कि यह शादी सिर्फ कागजों पर थी। मई 2018 में डॉ. कारिना शुलियाक अमेरिकी नागरिक बन गईं और करीब एक साल बाद उनका तलाक हो गया। मौत से पहले वसीयत में कारिना का नाम जोड़ा जुलाई 2019 में जेफ्री एपस्टीन को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के करीब एक महीने बाद उसकी डॉ. कारिना शुलियाक से आखिरी बार करीब 20 मिनट फोन पर बात हुई। इस दौरान उसने कहा था कि सेक्स ट्रैफिकिंग का मामला उसकी उम्मीद से ज्यादा लंबा चलेगा। अगले ही दिन, 10 अगस्त 2019 को एपस्टीन न्यूयॉर्क की जेल में मृत मिला। अधिकारियों ने उसकी मौत को आत्महत्या बताया। दस्तावेजों के मुताबिक, मौत से कुछ समय पहले एपस्टीन ने अपनी वसीयत में बदलाव किया था। एक नोट में उसने अपनी उस समय की 60 करोड़ डॉलर की संपत्ति का बड़ा हिस्सा डॉ. कारिना शुलियाक के नाम करने की बात लिखी थी। इसमें शादी के इरादे से दी जाने वाली एक बड़ी हीरे की अंगूठी का भी जिक्र था।






