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रिपोर्ट- इजराइल ने जानबूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को मारा:20 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत; टारगेटेड किलिंग्स के पुख्ता सबूत मिले

रिपोर्ट- इजराइल ने जानबूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को मारा:20 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत; टारगेटेड किलिंग्स के पुख्ता सबूत मिले

संयुक्त राष्ट्र के जांच आयोग ने इजराइल पर गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अब तक 20 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। 44 हजार से अधिक घायल हुए हैं। इस दौरान कुल मौतों में लगभग 30% बच्चे शामिल रहे। आयोग के अध्यक्ष और भारत के पूर्व हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि जांच में बच्चों को निशाना बनाकर किए गए हमलों के पुख्ता सबूत मिले हैं। इजराइली सेना मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की मौतें हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और स्नाइपर फायरिंग में हुईं। कई मामलों में उनके सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाया गया। आयोग के अध्यक्ष एस. मुरलीधर का पूरा बयान यहां सुनिए… सीजफायर के बाद भी बच्चों की मौत जारी रही अक्टूबर 2025 में इजराइल और हमास के बीच सीजफायर लागू होने के बाद भी फिलिस्तीनी बच्चों की मौत और घायल होने की घटनाएं जारी रहीं। हालांकि आयोग ने यह नहीं बताया कि युद्धविराम के बाद कितने बच्चे मारे गए। UNICEF ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि सीजफायर लागू होने के बाद भी औसतन हर दिन एक फिलिस्तीनी बच्चे की जान गई। UNICEF के प्रवक्ता जेम्स एल्डर के मुताबिक बच्चे अपने घरों, स्कूलों, खेल के मैदानों और यहां तक कि समुद्र किनारे भी मारे गए। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 18 साल से कम उम्र के सभी लोगों को बच्चा माना है। रिपोर्ट के मुताबिक इन बच्चों को ‘आतंकवादी या भविष्य का आतंकवादी’ मानकर निशाना बनाया गया। आयोग के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच करीब 58 हजार बच्चों ने अपने एक या दोनों माता-पिता को खो दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुपोषण के कारण 151 बच्चों की मौत हुई और एक हजार से ज्यादा बच्चों के अंग काटने पड़े। इजराइल ने रिपोर्ट को खारिज किया रिपोर्ट सामने आने के बाद इजराइल ने उसे पूरी तरह खारिज कर दिया। जिनेवा में इजराइल के UN मिशन ने रिपोर्ट को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए कहा कि जांच आयोग शुरू से ही इजराइल के खिलाफ पक्षपाती रहा है। मिशन का कहना है कि आयोग का मकसद तथ्यों की जांच नहीं, बल्कि हर हाल में इजराइल को कटघरे में खड़ा करना है। इजराइली विदेश मंत्रालय ने भी रिपोर्ट पर सवाल उठाए। मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट में हमास के हमलों में मारे गए और अगवा किए गए इजराइली बच्चों का जिक्र नहीं किया गया। इजराइल का आरोप है कि हमास ने युद्ध के दौरान फिलिस्तीनी बच्चों को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन UN रिपोर्ट ने इस मुद्दे को भी नजरअंदाज कर दिया। पांच साल से कम उम्र के 5 हजार बच्चों की मौत गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक युद्ध में 21 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी बच्चों की जान गई। इनमें 5,031 बच्चे ऐसे थे, जिनकी उम्र 5 साल से भी कम थी। मरने वालों में 1,029 बच्चे एक साल से कम उम्र के थे, जबकि करीब 420 नवजात ऐसे थे, जिन्होंने दुनिया में आने के कुछ ही समय बाद जान गंवा दी। आयोग ने बताया कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए डॉक्टरों, वकीलों, शिक्षकों, पत्रकारों और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी जुटाई गई। जांच के दौरान आयोग ने 7 अक्टूबर 2023 के बाद इजराइल को 13 बार सवाल और जानकारी के अनुरोध भेजे, लेकिन किसी भी पत्र का जवाब नहीं मिला। ————————————- ये खबर भी पढ़ें… संयुक्त राष्ट्र में इजराइली राजदूत ने UN अफसर को फटकारा:यौन हिंसा से जुड़ी रिपोर्ट में इजराइल का नाम आने से नाराज थे संयुक्त राष्ट्र (UN) में 19 जून को एक बैठक के दौरान इजराइल के राजदूत डैनी डैनन और UN महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन के बीच तीखी बहस हो गई। यह बैठक जंग के दौरान होने वाली यौन हिंसा को खत्म करने के अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर न्यूयॉर्क में आयोजित की गई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

रिपोर्ट- इजराइल ने जानबूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को मारा:20 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत; टारगेटेड किलिंग्स के पुख्ता सबूत मिले

रिपोर्ट- इजराइल ने जानबूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को मारा:20 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत; टारगेटेड किलिंग्स के पुख्ता सबूत मिले

संयुक्त राष्ट्र के जांच आयोग ने इजराइल पर गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अब तक 20 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों की टारगेटिंग किलिंग्स के पुख्ता सबूत मिले हैं। इजराइली सेना मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद से 20 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी बच्चे मारे गए हैं और 44 हजार से अधिक घायल हुए हैं। इस दौरान कुल मौतों में लगभग 30% बच्चे शामिल रहे आयोग के अध्यक्ष और भारत के पूर्व हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि जांच में बच्चों को निशाना बनाकर किए गए हमलों के पुख्ता सबूत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की मौतें हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और स्नाइपर फायरिंग में हुईं। कई मामलों में उनके सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाया गया। आयोग के अध्यक्ष एस. मुरलीधर का पूरा बयान यहां सुनिए… सीजफायर के बाद भी बच्चों की मौत जारी रही अक्टूबर 2025 में इजराइल और हमास के बीच सीजफायर लागू होने के बाद भी फिलिस्तीनी बच्चों की मौत और घायल होने की घटनाएं जारी रहीं। आयोग ने यह नहीं बताया कि युद्धविराम के बाद कितने बच्चे मारे गए। UNICEF ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि सीजफायर लागू होने के बाद भी औसतन हर दिन एक फिलिस्तीनी बच्चे की जान गई। UNICEF के प्रवक्ता जेम्स एल्डर के मुताबिक बच्चे अपने घरों, स्कूलों, खेल के मैदानों और यहां तक कि समुद्र किनारे भी मारे गए। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 18 साल से कम उम्र के सभी लोगों को बच्चा माना है। रिपोर्ट के मुताबिक इन बच्चों को ‘आतंकवादी या भविष्य का आतंकवादी’ मानकर निशाना बनाया गया। आयोग के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच करीब 58 हजार बच्चों ने अपने एक या दोनों माता-पिता को खो दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुपोषण के कारण 151 बच्चों की मौत हुई और एक हजार से ज्यादा बच्चों के अंग काटने पड़े। इजराइल ने रिपोर्ट को खारिज किया रिपोर्ट सामने आने के बाद इजराइल ने उसे पूरी तरह खारिज कर दिया। जिनेवा में इजराइल के UN मिशन ने रिपोर्ट को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए कहा कि जांच आयोग शुरू से ही इजराइल के खिलाफ पक्षपाती रहा है। मिशन का कहना है कि आयोग का मकसद तथ्यों की जांच नहीं, बल्कि हर हाल में इजराइल को कटघरे में खड़ा करना है। इजराइली विदेश मंत्रालय ने भी रिपोर्ट पर सवाल उठाए। मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट में हमास के हमलों में मारे गए और अगवा किए गए इजराइली बच्चों का जिक्र नहीं किया गया। इजराइल का आरोप है कि हमास ने युद्ध के दौरान फिलिस्तीनी बच्चों को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन UN रिपोर्ट ने इस मुद्दे को भी नजरअंदाज कर दिया। पांच साल से कम उम्र के 5 हजार बच्चों की मौत गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक युद्ध में 21 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी बच्चों की जान गई। इनमें 5,031 बच्चे ऐसे थे, जिनकी उम्र 5 साल से भी कम थी। मरने वालों में 1,029 बच्चे एक साल से कम उम्र के थे, जबकि करीब 420 नवजात ऐसे थे, जिन्होंने दुनिया में आने के कुछ ही समय बाद जान गंवा दी। आयोग ने बताया कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए डॉक्टरों, वकीलों, शिक्षकों, पत्रकारों और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी जुटाई गई। जांच के दौरान आयोग ने 7 अक्टूबर 2023 के बाद इजराइल को 13 बार सवाल और जानकारी के अनुरोध भेजे, लेकिन किसी भी पत्र का जवाब नहीं मिला।

स्टारबक्स को ‘टैंक डे’ शब्द का इस्तेमाल पड़ा भारी:एआई की भूल से ताज़ा हुए जख्म; स्टारबक्स ने स्टोर बंद कर स्टाफ को दी ट्रेनिंग

स्टारबक्स को ‘टैंक डे’ शब्द का इस्तेमाल पड़ा भारी:एआई की भूल से ताज़ा हुए जख्म; स्टारबक्स ने स्टोर बंद कर स्टाफ को दी ट्रेनिंग

दक्षिण कोरिया में कॉर्पोरेट कंपनियों को अपने कर्मचारियों को देश की संस्कृति और इतिहास की समझ सिखाना पड़ रहा है। कारण- अपनी संस्कृति और इतिहास को लेकर लोगों की जागरूकता। कॉफी आउटलेट चेन स्टारबक्स को पिछले महीने मार्केटिंग अभियान में ‘टैंक डे’ शब्द का इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। लोगों के ​विरोध की वजह से कंपनी को द. कोरिया में अपने 2,000 स्टोर्स को सोमवार को दोपहर बाद बंद कर 24 हजार शेफ समेत अन्य कर्मचारियों को संस्कृति, इतिहास की क्लास कराना पड़ी। द. कोरिया में स्टारबक्स के सभी स्टोर्स एक साथ बंद होने का यह पहला मामला भी है। क्या है ‘टैंक डे’ विवाद पिछले महीने स्टारबक्स कोरिया ने टंबलर (कॉफी मग का खास प्रकार) की नई सीरीज लॉन्च की। उसका नाम रखा- ‘टैंक डे’। इसकी शुरुआत पिछले महीने हुई, जो 1980 में 18 मई को द. कोरिया के ग्वांगजू में सैन्य तानाशाही के खिलाफ लोकतंत्र समर्थकों के प्रदर्शन हो रहे थे। तब क्रूर सैन्य शासन ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए सड़कों पर ‘टैंक’ उतार दिए थे। इस नरसंहार में सैकड़ों लोग मारे गए थे। तब से कोरियाई लोगों के लिए ‘टैंक’ शब्द सामूहिक हत्या की स्मृति के गहरे दर्द से जुड़ा है। ऐसे में ‘टैंक डे’ शब्द का विज्ञापन में इस्तेमाल लोगों को पीड़ितों का क्रूर उपहास और गहरा अपमान लगा। विरोध की आग पूरे देश में फैल गई, तो स्टारबक्स कोरिया की पैरेंट कंपनी ‘शिनसेगाए ग्रुप’ ने डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू की। विज्ञापन हटाया, माफी मांगी और कंपनी के सीईओ ​को पद से हटा दिया। कंपनी ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि विज्ञापन अभियान के लिए नाम और स्लोगन तय करने के लिए कर्मचारियों ने एआई का इस्तेमाल किया और इस शब्द के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भों की पड़ताल नहीं की। पहले भी विवाद – समाज को समझने में असफलता द. कोरिया में स्टारबक्स के प्रीपेड ग्राहकों के 2,100 करोड़ रु. जमा थे। विज्ञापन विवाद के बाद अधिकांश ने पैसे वापस मांगे। पहले हफ्ते में कार्ड से भुगतान वाले 26% ग्राहक कम हुए। पूरे महीने में यह नुकसान 10% रहा। कोरिया में करीब तीन साल पहले स्पोर्ट्स ब्रांड नाइकी तब विवादों में आ गई थी, जब विज्ञापन में गलत नक्शा दिखाने का आरोप गला था। नाइकी ने विज्ञापन वापस लेने के साथ ही माफी मांगी। कुछ माह पहले बीएचसी चिकन ने विज्ञापन में ‘ग्वांगजू’ शब्द का गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया था। स्पष्ट है कि समाज काे न समझने का खमियाजा भुगतना पड़ता है।

हरियाणवी डांसर पर हमला:बाइक सवार युवकों ने गाड़ी पर डंडे बरसाए, रोते हुए बोलीं- बेशर्मी की हद होती है

हरियाणवी डांसर पर हमला:बाइक सवार युवकों ने गाड़ी पर डंडे बरसाए, रोते हुए बोलीं- बेशर्मी की हद होती है

हरियाणवी डांसर डिंपल चौधरी पर उत्तर प्रदेश के नोएडा में हमला हुआ। उनका दावा है कि दो युवकों ने डंडा मारकर गाड़ी का फ्रंट शीशा तोड़ दिया। पहले भी उन्हें फोन पर धमकियां मिल चुकी हैं। डांसर का कहना है कि वह इस मामले में नोएडा पुलिस को शिकायत देंगी। डिंपल चौधरी का एक रोते हुए वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह कह रही हैं, “बेशर्मी की भी एक हद होती है। मैं मेरी बहन के घर जा रही थी। मेरी गाड़ी का ये हाल कर दिया।” मैनेजर बोले- बहन के घर जा रही थीं डिंपल चौधरी के मैनेजर ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा- डिंपल सोमवार को अपनी बहन के घर सिकंदराबाद जा रही थीं। रास्ता सुनसान था। रास्ते में अचानक उनकी गाड़ी के सामने बिना नंबर प्लेट की एक बाइक पर सवार होकर दो युवक आ गए। बाइक पर पीछे बैठे युवक ने डंडे से उनकी गाड़ी के फ्रंट शीशे पर हमला कर दिया, जिससे शीशा टूट गया। मैनेजर ने आगे कहा कि इस हमले के बाद से डिंपल चौधरी की तबीयत काफी खराब है। इस मामले में नोएडा पुलिस को शिकायत दी जाएगा। हम इस घटना को लेकर कानूनी गाड़ी्रवाई कराएंगे। 18 जून को कॉल कर धमकी दी थी 18 जून को भी डिंपल चौधरी को एक धमकी भरा फोन आया था। उन्होंने बताया था कि कॉल करने वाले ने खुद को चंबल का डॉन बताया था। धमकी देने वाले ने कहा था, “घर से उठाऊंगा। घर से एके-47 निकलेगी।” उन्होंने इस कॉल से जुड़ी 2 ऑडियो-वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की थीं। पहली रिकॉर्डिंग कॉलर: मैडम, मैंने आपकी रील देखी थी। डांसर: रील तो पूरी दुनिया देखती है, इसका मतलब यह थोड़ी ना है कि मुझे कॉल करेगा। कॉलर: मुझे आपसे प्यार हो गया है। डांसर: मैं बहुत एक गंदी गालियां दे दूंगी। आप बदतमीजी करते हो। ऐसे शब्द क्यों यूज करते हो, जिससे मैं गाली या गलत बोलने के लिए मजबूर हो जाऊं। तुझे बुढ़ापे में प्यार हो गया है क्या? मेरा नंबर कहां से मिला। कॉलर: AK- 47 तेरे घर से निकाल दूंगा। डांसर: दोबारा से बोलना क्या बोल रहे थे? कॉलर – रिकॉर्डिंग करनी है तो कर ले, कोई दिक्कत ना है, ठीक है। डांसर: क्या मतलब है AK- 47 घर से निकल जाएगी। दूसरी रिकॉर्डिंग डांसर: आप मुझे क्यों परेशान कर रहे हो? कॉलर: तेरे को घर से जबरदस्ती उठा लाऊंगा। डांसर: ऐसे कैसे घर से जबरदस्ती उठा सकते हो। कॉलर: मैं तोप हूं और चंबल का डाकू हूं? डांसर: आप चंबल के हो तो मुझे जबरदस्ती कैसे उठा सकते हो? कॉलर: उठाने के बाद बता दूंगा कैसे उठा सकता हूं… गाली देते हुए- रिकॉर्डिंग की तो ***दूं हूं मैं। डांसर: मैंने तो आपको कहा नहीं। ना ही मैं आपकी रिकॉर्डिंग कर रही हूं। आईफोन में कोई रिकॉर्डिंग भी नहीं होती। कॉलर: आईफोन मेरे पास भी है, यह सोच रहे हो कि तुम्हारे पास ही आईफोन है। डांसर: मैंने आपको कभी नहीं देखा, ना ही कभी मैं आपसे मिली और फिर मेरे से आपको कैसे प्यार हो गया। कॉलर: आप रिकॉर्डिंग करके पुलिस वालों को सुनाना चाहते हो क्या? बता देना यह चंबल का डॉन है। डांसर: मैं अपने भाई की कसम खाकर कह रही हूं मैंने कोई रिकॉर्डिंग नहीं की है?

‘ट्विन फ्लावर’ लड़ाई: ममता, रीताब्रत गुटों ने तृणमूल के नाम, पार्टी चिह्न को लेकर चुनाव आयोग का रुख किया | भारत समाचार

People cross a road under umbrellas during heavy rainfall, in Mumbai, Tuesday, June 23, 2026. The city received rain showers as monsoon activity continued across parts of Maharashtra. (PTI)

आखरी अपडेट:24 जून, 2026, 10:28 IST ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने के एक दिन बाद, नेता प्रतिपक्ष रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी विधायकों ने आधिकारिक टीएमसी के रूप में मान्यता की मांग करते हुए चुनाव आयोग का रुख किया। ममता बनाम रीताब्रता: टीएमसी सिंबल की लड़ाई चुनाव आयोग तक पहुंची ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुटों द्वारा प्रतिस्पर्धी राष्ट्रीय कार्य समिति की सूची के साथ भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) से संपर्क करने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर नियंत्रण की लड़ाई तेज हो गई। इस कदम ने औपचारिक रूप से पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण पर विवाद शुरू कर दिया है, दोनों खेमे ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रहे हैं। विद्रोही आधिकारिक टीएमसी के रूप में मान्यता चाहते हैं ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने और नई राष्ट्रीय कार्य समिति नियुक्त करने के एक दिन बाद, बागी विधायकों ने आधिकारिक अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता के लिए चुनाव अधिकारियों से संपर्क किया। सोमवार को कोलकाता के न्यू टाउन स्थित एक होटल में विद्रोही गुट ने विशेष सत्र आयोजित किया. पार्टी के 80 में से 65 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए समूह ने ध्वनि मत से ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने का फैसला किया. विधायकों ने हावड़ा सेंट्रल के विधायक अरूप रॉय को नया पार्टी प्रमुख चुना। रॉय 2011 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे। विद्रोहियों ने तर्क दिया कि पार्टी संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत एक संवैधानिक संकट उत्पन्न हो गया है क्योंकि फरवरी 2022 में गठित राष्ट्रीय कार्य समिति का तीन साल का कार्यकाल समाप्त हो गया है। मंगलवार शाम को, बागी विधायकों ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय का दौरा किया और एक पत्र सौंपकर आधिकारिक पार्टी के रूप में मान्यता और “जोरा घास फूल” या जुड़वां-फूल चुनाव चिन्ह पर अधिकार मांगा। ममता खेमे ने सौंपी प्रतिद्वंद्वी सूची जवाब में, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को एक अलग सूची सौंपी, जिसमें कहा गया कि उनका गुट वैध तृणमूल कांग्रेस बना हुआ है। सूची में अध्यक्ष के रूप में ममता बनर्जी, राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा नेता के रूप में अभिषेक बनर्जी, संयुक्त सचिव के रूप में डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन, कोषाध्यक्ष के रूप में सुभाशीष चक्रवर्ती और विधानसभा में नेता के रूप में सोवोंडेब चटर्जी शामिल हैं। ताजा चुनौती बनर्जी के लिए कठिन समय में आई है, जो पहले से ही एनडीए से जुड़े लोकसभा सांसदों के एक अलग समूह और तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से निपट रहे हैं। विद्रोहियों ने यह भी संकेत दिया है कि वे पार्टी चिन्ह और संगठन की संपत्ति पर नियंत्रण चाह सकते हैं। प्रतीक और वित्त पर लड़ाई विवाद संगठनात्मक नियंत्रण से परे बढ़ गया है। विद्रोहियों के अनुसार, उन्हें राज्य भर में पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायकों और कई निर्वाचित पार्षदों का समर्थन प्राप्त है। एक वरिष्ठ बागी विधायक ने कहा, “हम असली तृणमूल कांग्रेस हैं। हमारे पास हमारी पसंद के अनुसार विपक्ष का नेता है, विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक की पसंद है। जाहिर है, चुनाव चिह्न पर हमारा दावा है।” गुट ने पार्टी के वित्त के ऑडिट की भी मांग की है। विद्रोहियों की शिकायत के बाद कथित तौर पर टीएमसी के 440 करोड़ रुपये वाले बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। हालाँकि, ममता बनर्जी के समर्थक चुनाव चिन्ह और पार्टी फंड तक पहुंच दोनों को बरकरार रखने को लेकर आश्वस्त हैं। कृष्णानगर की सांसद महुआ मोइत्रा ने चुनाव चिन्ह पर विद्रोहियों के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा, “आप घोड़े के आगे गाड़ी कैसे रख सकते हैं? उनके पास चुनाव चिन्ह नहीं है। उन्हें पहले कोशिश करने दें और प्रतीक हासिल करने दें और फिर राष्ट्रीय कार्य समिति या अपनी इच्छानुसार कोई अन्य समिति बनाएं।” उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पार्टी संविधान के तहत, ममता बनर्जी जीवन भर अध्यक्ष बनी रहेंगी। बैंक खातों को फ्रीज करने पर मोइत्रा ने प्रक्रिया पर सवाल उठाया और कहा कि उचित अदालत की अनुमति नहीं ली गई थी। निष्कासन और कानूनी चुनौतियाँ टीएमसी ने कई बागी नेताओं को निष्कासित कर दिया है, जिनमें अरूप रॉय, विधायक जावेद खान, फिरहाद हकीम, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और सबीना यसमिन के साथ-साथ पूर्व मंत्री अरूप विश्वास और स्नेहाशीष चक्रवर्ती भी शामिल हैं। कार्रवाई के बावजूद विद्रोही अपनी संख्या बल को लेकर आश्वस्त हैं. इस बीच, वफादारों ने संकेत दिया है कि वे चुनाव आयोग के समक्ष विद्रोहियों को चुनौती देंगे और यदि आवश्यक हुआ तो अदालतों का रुख करेंगे। रीताब्रत को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ चट्टोपाध्याय ने पहले ही कलकत्ता उच्च न्यायालय में मामला दायर कर दिया है। महाराष्ट्र से सबक सामने आ रहा यह विवाद महाराष्ट्र में पहले हुई राजनीतिक लड़ाइयों को दर्शाता है, जिसमें शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल थी। दोनों मामलों में, प्रतिद्वंद्वी गुटों ने पार्टी नियंत्रण, वैधता और चुनाव चिह्नों को लेकर चुनाव आयोग, विधानसभा अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लड़ाई लड़ी। चुनाव आयोग और स्पीकर ने एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के नेतृत्व वाले गुटों के पक्ष में फैसला सुनाते समय विधायी ताकत पर बहुत अधिक भरोसा किया। हालाँकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक अध्यक्ष अयोग्यता की कार्यवाही पर निर्णय लेते समय केवल संख्या बल पर भरोसा नहीं कर सकता है और कहा कि एक राजनीतिक दल और एक विधायक दल अलग-अलग संस्थाएँ हैं। शिवसेना और राकांपा के मामलों में महीनों तक कानूनी लड़ाई जारी रहने और कुछ मामलों में तो विधायकों के कार्यकाल से भी आगे बढ़ने के कारण विभाजित तृणमूल कांग्रेस के लिए आगे की राह लंबी और जटिल होती दिख रही है। चुनाव कानून मुख्य रूप से पार्टी के प्रतीकों से संबंधित है, जबकि संपत्ति पर विवादों को आम तौर पर सिविल अदालतों के माध्यम से हल किया जाना चाहिए, एक ऐसी प्रक्रिया जिसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती देने में वर्षों लग सकते हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शुद्धान्त पात्र आठ साल के अनुभव

अक्षय कुमार ने भोजपुरी से की हॉलीवुड की तुलना:कहा- ये उनकी समझ से परे, परेश रावल ने हेरा-फेरी 3 विवाद खत्म होने पर दिया हिंट

अक्षय कुमार ने भोजपुरी से की हॉलीवुड की तुलना:कहा- ये उनकी समझ से परे, परेश रावल ने हेरा-फेरी 3 विवाद खत्म होने पर दिया हिंट

बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार अक्षय इन दिनों अपकमिंग फिल्म वेलकम टू द जंगल के चलते सुर्खियों में हैं। मंगलवार को फिल्म का सॉन्ग रिलीज इवेंट रखा गया था, जिसमें अक्षय ने भोजपुरी की तुलना हॉलीवुड से की और इसे हॉलीवुड से बेहतर बताया है। अक्षय ने कहा है, ‘भोजपुरी, हॉलीवुड से बेहतर है। ये लाइन मैंने ही दी है। क्योंकि वो लोग ये गाना सुन ही नहीं सकते। उन्हें कुछ समझ ही नहीं आएगा। उन्होंने कभी गाने ही नहीं देखे। हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारे इतने कल्चर हैं। हमारे इतने कल्चर में गाने बनते हैं।’ इस दौरान अक्षय कुमार ने फिल्म की बड़ी स्टारकास्ट पर भी रिएक्शन दिया है। उन्होंने कहा, ‘एक फिल्म आई थी 3 इडियट्स, बहुत बड़ी हिट थी। ये 32 इडियट्स हैं तो कुछ भी हो सकता है।’ सॉन्ग लॉन्च इवेंट में अक्षय कुमार से पूछा गया था कि उनके लिए फेम जरूरी है या पैसा। इस पर उन्होंने मजेदार जवाब देते हुए कहा, ‘देखिए अगर कोई इंसान कहे कि उसे पैसा पसंद नहीं है, तो या तो वो कोई संत होगा या कोई ऐसा होगा, जिसके पास बहुत पैसा होगा, जिससे वो कह रहा है कि पैसे अच्छे नहीं लगते। मैंने बहुत सारे केस देखे हैं अपने दोस्तों में भी कि कितने लोगों ने पैसे कमाए और फिर उनके हाथ से पैसे चले गए। लेकिन फिर मेहनत कर पैसे ले आए, कई लोगों ने बिजनेस गंवाया और कैसे भी करके बिजनेस वापस ले आए। लेकिन मैंने ये नहीं देखा कि किसी ने हेल्थ गंवाई और सेहत वापस लाई। तो मैं कहूंगा कि पैसे से बड़ी सेहत है।’ परेश रावल ने दिया हेरा-फेरी विवाद खत्म होने पर हिंट इवेंट के दौरान परेश रावल ने भी फिल्म हेरा फेरी से जुड़ा विवाद खत्म होने पर हिंट दिया है। एक रिपोर्टर के सवाल पर परेश रावल ने कहा है, ‘जब तक जिंदा हैं हेरा-फेरी चलती रहती है। जब तक जिंदा हैं तब तक हेरा फेरी है।’ परेश रावल का ये बयान तब आया है, जब बीते साल उन्होंने फिल्म हेरा फेरी 3 छोड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद अक्षय की टीम की तरफ से उन्हें लीगल नोटिस भी भेजा गया था। लंबे विवाद के बाद परेश रावल दोबारा फिल्म से जुड़ गए हैं। इवेंट के दौरान जब परेश रावल ने हेरा फेरी पर बयान दिया, तो अक्षय कुमार मुस्कुराते हुए उनका रिएक्शन देख रहे थे। सॉन्ग लॉन्च इवेंट में स्टारकास्ट रही मौजूद मंगलवार को हुए सॉन्ग लॉन्च इवेंट में फिल्म के डायरेक्टर अहमद खान और अक्षय कुमार, परेश रावल, सुनील शेट्टी, राजपाल यादव समेत पूरी स्टारकास्ट शामिल हुई। फिल्म वेलकम टू द जंगल के बारे में-

अक्षय कुमार ने भोजपुरी से की हॉलीवुड की तुलना:कहा- ये उनकी समझ से परे, परेश रावल ने हेरा-फेरी 3 विवाद खत्म होने पर दिया हिंट

अक्षय कुमार ने भोजपुरी से की हॉलीवुड की तुलना:कहा- ये उनकी समझ से परे, परेश रावल ने हेरा-फेरी 3 विवाद खत्म होने पर दिया हिंट

बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार अक्षय इन दिनों अपकमिंग फिल्म वेलकम टू द जंगल के चलते सुर्खियों में हैं। मंगलवार को फिल्म का सॉन्ग रिलीज इवेंट रखा गया था, जिसमें अक्षय ने भोजपुरी की तुलना हॉलीवुड से की और इसे हॉलीवुड से बेहतर बताया है। अक्षय ने कहा है, ‘भोजपुरी, हॉलीवुड से बेहतर है। ये लाइन मैंने ही दी है। क्योंकि वो लोग ये गाना सुन ही नहीं सकते। उन्हें कुछ समझ ही नहीं आएगा। उन्होंने कभी गाने ही नहीं देखे। हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारे इतने कल्चर हैं। हमारे इतने कल्चर में गाने बनते हैं।’ इस दौरान अक्षय कुमार ने फिल्म की बड़ी स्टारकास्ट पर भी रिएक्शन दिया है। उन्होंने कहा, ‘एक फिल्म आई थी 3 इडियट्स, बहुत बड़ी हिट थी। ये 32 इडियट्स हैं तो कुछ भी हो सकता है।’ सॉन्ग लॉन्च इवेंट में अक्षय कुमार से पूछा गया था कि उनके लिए फेम जरूरी है या पैसा। इस पर उन्होंने मजेदार जवाब देते हुए कहा, ‘देखिए अगर कोई इंसान कहे कि उसे पैसा पसंद नहीं है, तो या तो वो कोई संत होगा या कोई ऐसा होगा, जिसके पास बहुत पैसा होगा, जिससे वो कह रहा है कि पैसे अच्छे नहीं लगते। मैंने बहुत सारे केस देखे हैं अपने दोस्तों में भी कि कितने लोगों ने पैसे कमाए और फिर उनके हाथ से पैसे चले गए। लेकिन फिर मेहनत कर पैसे ले आए, कई लोगों ने बिजनेस गंवाया और कैसे भी करके बिजनेस वापस ले आए। लेकिन मैंने ये नहीं देखा कि किसी ने हेल्थ गंवाई और सेहत वापस लाई। तो मैं कहूंगा कि पैसे से बड़ी सेहत है।’ परेश रावल ने दिया हेरा-फेरी विवाद खत्म होने पर हिंट इवेंट के दौरान परेश रावल ने भी फिल्म हेरा फेरी से जुड़ा विवाद खत्म होने पर हिंट दिया है। एक रिपोर्टर के सवाल पर परेश रावल ने कहा है, ‘जब तक जिंदा हैं हेरा-फेरी चलती रहती है। जब तक जिंदा हैं तब तक हेरा फेरी है।’ परेश रावल का ये बयान तब आया है, जब बीते साल उन्होंने फिल्म हेरा फेरी 3 छोड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद अक्षय की टीम की तरफ से उन्हें लीगल नोटिस भी भेजा गया था। लंबे विवाद के बाद परेश रावल दोबारा फिल्म से जुड़ गए हैं। इवेंट के दौरान जब परेश रावल ने हेरा फेरी पर बयान दिया, तो अक्षय कुमार मुस्कुराते हुए उनका रिएक्शन देख रहे थे। सॉन्ग लॉन्च इवेंट में स्टारकास्ट रही मौजूद मंगलवार को हुए सॉन्ग लॉन्च इवेंट में फिल्म के डायरेक्टर अहमद खान और अक्षय कुमार, परेश रावल, सुनील शेट्टी, राजपाल यादव समेत पूरी स्टारकास्ट शामिल हुई। फिल्म वेलकम टू द जंगल के बारे में-

अक्षय कुमार बोले- हिट-फ्लॉप बाद की बात:ढाई साल साथ काम कर बना खास रिश्ता; सुनील शेट्टी बोले- ऐसी स्टारकास्ट फिर शायद न मिले

अक्षय कुमार बोले- हिट-फ्लॉप बाद की बात:ढाई साल साथ काम कर बना खास रिश्ता; सुनील शेट्टी बोले- ऐसी स्टारकास्ट फिर शायद न मिले

फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ सिर्फ मल्टीस्टारर फिल्म नहीं, बल्कि कलाकारों के लिए यादों और रिश्तों का सफर भी रही। दैनिक भास्कर से बातचीत में अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी ने फिल्म से जुड़े किस्से साझा किए। अक्षय ने बताया कि बड़े स्टारकास्ट के साथ काम करना पिकनिक जैसा अनुभव था, जहां शूटिंग के साथ मस्ती भी हुई। सुनील शेट्टी ने कहा कि इतने कलाकारों के साथ फिल्म बनाना आसान नहीं था, लेकिन टीम ने इसे खास बनाया। दोनों ने माना कि फिल्म खत्म होने के बाद एक-दूसरे का साथ याद आएगा। सवाल: फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ से जुड़ने की सबसे बड़ी वजह क्या थी? क्या फ्रेंचाइजी, स्टारकास्ट या कुछ और? जवाब/अक्षय कुमार: सबसे बड़ी वजह यह थी कि फिल्म की कहानी नीरज वोरा ने लिखी थी। हमारे उनके साथ पुराने रिश्ते रहे हैं और हमने उनकी कई स्क्रिप्ट्स पर काम किया है। मैंने उनके साथ करीब आठ-नौ फिल्में की हैं और अन्ना (सुनील शेट्टी) ने भी कई फिल्में की हैं। दूसरी वजह यह थी कि कहानी हम सबको पसंद आई। यह फिरोज नाडियाडवाला की फिल्म थी और मैं करीब 11–12 साल बाद उनके साथ काम कर रहा था। इसके अलावा इतने कलाकारों का एक साथ फिल्म में काम करना आजकल कम देखने को मिलता है। इसलिए हम सब उत्साहित थे। सवाल: इतने सालों का रिश्ता और साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/सुनील शेट्टी: करीब 16 साल बाद मेरी इस तरह वापसी हुई है और हमारा ट्रैक रिकॉर्ड पहले भी अच्छा रहा है। हमने कोशिश की कि एक अच्छी एंटरटेनिंग फिल्म बनाई जाए और प्रोड्यूसर-डायरेक्टर का साथ दिया जाए। एक सेट पर 30–35 कलाकार हों तो काम आसान नहीं होता। कई बार सबसे मुश्किल काम हंसी रोकना होता था, खासकर जब अर्शद मस्ती शुरू कर देते थे। सवाल: सेट पर माहौल कैसा रहता था? जवाब/अक्षय कुमार: सेट का माहौल मजेदार था। बहुत बड़ा सेट था और अंदर वीआईपी टेंट भी बना हुआ था। वैन से आने-जाने के लिए बग्गियां थीं। कई बार बाहर एक्शन सीन चलता था और अंदर हम लोग मस्ती कर रहे होते थे। जो मजा सेट पर था, वही फिल्म में दिखेगा। सवाल: सेट पर सबसे ज्यादा शरारती कौन था? जवाब/अक्षय कुमार (हंसते हुए): अन्ना बाहर से शांत लगते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर सोचते रहते हैं कि किसके साथ मजाक किया जाए। अगर आपने चप्पल बाहर छोड़ दी तो हो सकता है वापस न मिले। कभी सोचेंगे कि कौन सा तार खींचें या कौन सी शरारत करें। प्लानिंग उनकी होती है और काम हमसे करवाते हैं। सवाल: अक्षय सर की ऑन-द-स्पॉट कॉमेडी और इम्प्रोवाइजेशन सेट पर बाकी लोगों को कितना सरप्राइज करती थी? जवाब/सुनील शेट्टी: अक्षय के साथ काम करते हुए कभी पता नहीं चलता कि अगला पल क्या होने वाला है। ये अचानक कुछ भी कर देता है- कभी डायलॉग बदल देगा, कभी नया मजाक जोड़ देगा, कभी शरारत कर देगा। अगर सेट पर सब ठीक रखना है तो अक्षय से 10–15 फीट की दूरी बनाकर रखो। फोन, घड़ी या सामान पास मत रखो, क्योंकि ये कभी भी कुछ कर सकता है। लेकिन यही उसकी खासियत है। उसकी वही एनर्जी और अचानक आने वाली कॉमिक टाइमिंग फिल्म को मजेदार बना देती है। सवाल: इतने सालों बाद भी एनर्जी और उत्साह कैसे बना रहता है? जवाब/सुनील शेट्टी: हमारी कोशिश रहती है कि दर्शकों के लिए काम करें। हर कलाकार की अपनी अलग ऊर्जा होती है। अक्षय जब सीन करता है तो कभी खाली नहीं बैठता, कुछ नया करता रहता है। अरशद वारसी भी अपनी तरफ से नई चीजें जोड़ देता है। कई बार हम लोग अपनी लाइनें भूल जाते थे। जब सबकी ऊर्जा एक साथ आती है, तभी अच्छा काम बनता है। सवाल: फिल्म खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा क्या याद रहेगा? जवाब/अक्षय कुमार: सबके साथ काम करना सबसे ज्यादा याद रहेगा। हमारी योजना है कि फिल्म पूरी होने के बाद पूरा स्टारकास्ट साथ बैठकर फिल्म देखे। फिल्म हिट होगी या फ्लॉप, यह बाद की बात है। लेकिन ढाई साल साथ काम करने के बाद बना रिश्ता सबसे खास रहेगा। शायद आगे दोबारा इतने बड़े ग्रुप के साथ काम करने का मौका मिले या न मिले। सवाल: व्यक्तिगत तौर पर सबसे ज्यादा क्या मिस करेंगे? जवाब/अक्षय कुमार: इतने मजेदार लोगों के साथ समय बिताना। हर किसी की अपनी अलग क्वालिटी थी। मुझे कभी लगा ही नहीं कि मैं काम पर जा रहा हूं। ऐसा लगता था जैसे दोस्तों के साथ समय बिता रहा हूं। अहमद का स्वभाव भी अच्छा है। इस पूरे अनुभव को मैं जरूर मिस करूंगा।

अक्षय कुमार बोले- हिट-फ्लॉप बाद की बात:ढाई साल साथ काम कर बना खास रिश्ता; सुनील शेट्टी बोले- ऐसी स्टारकास्ट फिर शायद न मिले

अक्षय कुमार बोले- हिट-फ्लॉप बाद की बात:ढाई साल साथ काम कर बना खास रिश्ता; सुनील शेट्टी बोले- ऐसी स्टारकास्ट फिर शायद न मिले

फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ सिर्फ मल्टीस्टारर फिल्म नहीं, बल्कि कलाकारों के लिए यादों और रिश्तों का सफर भी रही। दैनिक भास्कर से बातचीत में अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी ने फिल्म से जुड़े किस्से साझा किए। अक्षय ने बताया कि बड़े स्टारकास्ट के साथ काम करना पिकनिक जैसा अनुभव था, जहां शूटिंग के साथ मस्ती भी हुई। सुनील शेट्टी ने कहा कि इतने कलाकारों के साथ फिल्म बनाना आसान नहीं था, लेकिन टीम ने इसे खास बनाया। दोनों ने माना कि फिल्म खत्म होने के बाद एक-दूसरे का साथ याद आएगा। सवाल: फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ से जुड़ने की सबसे बड़ी वजह क्या थी? क्या फ्रेंचाइजी, स्टारकास्ट या कुछ और? जवाब/अक्षय कुमार: सबसे बड़ी वजह यह थी कि फिल्म की कहानी नीरज वोरा ने लिखी थी। हमारे उनके साथ पुराने रिश्ते रहे हैं और हमने उनकी कई स्क्रिप्ट्स पर काम किया है। मैंने उनके साथ करीब आठ-नौ फिल्में की हैं और अन्ना (सुनील शेट्टी) ने भी कई फिल्में की हैं। दूसरी वजह यह थी कि कहानी हम सबको पसंद आई। यह फिरोज नाडियाडवाला की फिल्म थी और मैं करीब 11–12 साल बाद उनके साथ काम कर रहा था। इसके अलावा इतने कलाकारों का एक साथ फिल्म में काम करना आजकल कम देखने को मिलता है। इसलिए हम सब उत्साहित थे। सवाल: इतने सालों का रिश्ता और साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/सुनील शेट्टी: करीब 16 साल बाद मेरी इस तरह वापसी हुई है और हमारा ट्रैक रिकॉर्ड पहले भी अच्छा रहा है। हमने कोशिश की कि एक अच्छी एंटरटेनिंग फिल्म बनाई जाए और प्रोड्यूसर-डायरेक्टर का साथ दिया जाए। एक सेट पर 30–35 कलाकार हों तो काम आसान नहीं होता। कई बार सबसे मुश्किल काम हंसी रोकना होता था, खासकर जब अर्शद मस्ती शुरू कर देते थे। सवाल: सेट पर माहौल कैसा रहता था? जवाब/अक्षय कुमार: सेट का माहौल मजेदार था। बहुत बड़ा सेट था और अंदर वीआईपी टेंट भी बना हुआ था। वैन से आने-जाने के लिए बग्गियां थीं। कई बार बाहर एक्शन सीन चलता था और अंदर हम लोग मस्ती कर रहे होते थे। जो मजा सेट पर था, वही फिल्म में दिखेगा। सवाल: सेट पर सबसे ज्यादा शरारती कौन था? जवाब/अक्षय कुमार (हंसते हुए): अन्ना बाहर से शांत लगते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर सोचते रहते हैं कि किसके साथ मजाक किया जाए। अगर आपने चप्पल बाहर छोड़ दी तो हो सकता है वापस न मिले। कभी सोचेंगे कि कौन सा तार खींचें या कौन सी शरारत करें। प्लानिंग उनकी होती है और काम हमसे करवाते हैं। सवाल: अक्षय सर की ऑन-द-स्पॉट कॉमेडी और इम्प्रोवाइजेशन सेट पर बाकी लोगों को कितना सरप्राइज करती थी? जवाब/सुनील शेट्टी: अक्षय के साथ काम करते हुए कभी पता नहीं चलता कि अगला पल क्या होने वाला है। ये अचानक कुछ भी कर देता है- कभी डायलॉग बदल देगा, कभी नया मजाक जोड़ देगा, कभी शरारत कर देगा। अगर सेट पर सब ठीक रखना है तो अक्षय से 10–15 फीट की दूरी बनाकर रखो। फोन, घड़ी या सामान पास मत रखो, क्योंकि ये कभी भी कुछ कर सकता है। लेकिन यही उसकी खासियत है। उसकी वही एनर्जी और अचानक आने वाली कॉमिक टाइमिंग फिल्म को मजेदार बना देती है। सवाल: इतने सालों बाद भी एनर्जी और उत्साह कैसे बना रहता है? जवाब/सुनील शेट्टी: हमारी कोशिश रहती है कि दर्शकों के लिए काम करें। हर कलाकार की अपनी अलग ऊर्जा होती है। अक्षय जब सीन करता है तो कभी खाली नहीं बैठता, कुछ नया करता रहता है। अरशद वारसी भी अपनी तरफ से नई चीजें जोड़ देता है। कई बार हम लोग अपनी लाइनें भूल जाते थे। जब सबकी ऊर्जा एक साथ आती है, तभी अच्छा काम बनता है। सवाल: फिल्म खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा क्या याद रहेगा? जवाब/अक्षय कुमार: सबके साथ काम करना सबसे ज्यादा याद रहेगा। हमारी योजना है कि फिल्म पूरी होने के बाद पूरा स्टारकास्ट साथ बैठकर फिल्म देखे। फिल्म हिट होगी या फ्लॉप, यह बाद की बात है। लेकिन ढाई साल साथ काम करने के बाद बना रिश्ता सबसे खास रहेगा। शायद आगे दोबारा इतने बड़े ग्रुप के साथ काम करने का मौका मिले या न मिले। सवाल: व्यक्तिगत तौर पर सबसे ज्यादा क्या मिस करेंगे? जवाब/अक्षय कुमार: इतने मजेदार लोगों के साथ समय बिताना। हर किसी की अपनी अलग क्वालिटी थी। मुझे कभी लगा ही नहीं कि मैं काम पर जा रहा हूं। ऐसा लगता था जैसे दोस्तों के साथ समय बिता रहा हूं। अहमद का स्वभाव भी अच्छा है। इस पूरे अनुभव को मैं जरूर मिस करूंगा।

न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में हजारों लोगों ने योग किया:इंडियन कॉन्सुलेट में कई देशों के राजनयिक शामिल हुए

न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में हजारों लोगों ने योग किया:इंडियन कॉन्सुलेट में कई देशों के राजनयिक शामिल हुए

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के टाइम्स स्क्वायर में हजारों लोगों ने योग किया। दुनिया के सबसे व्यस्त चौराहों में गिने जाने वाले इस स्थान पर अलग-अलग देशों और समुदायों के लोग योग करने के लिए जुटे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग गुरु माने जाने वाले एचआर नागेंद्र भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इस साल योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ और लंबी उम्र के लिए योग’ है। आयोजकों के मुताबिक, इस बार 12 हजार से ज्यादा लोगों ने कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। प्रतिभागियों ने कहा कि टाइम्स स्क्वायर जैसी भीड़भाड़ वाली जगह पर योग करना एक अनोखा अनुभव है और इससे लोगों को शांति का एहसास होता है। संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। तब से दुनिया के कई देशों में हर साल बड़े पैमाने पर योग दिवस मनाया जाता है। न्यूयॉर्क में योग गुरु एचआर नागेंद्र का ध्यान सत्र अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर न्यूयॉर्क स्थित इंडियन कॉन्सुलेट में योग गुरु एच आर. नागेंन्द्र के नेतृत्व में विशेष ध्यान सत्र आयोजित किया गया। योग गुरु नागेंद्र ने ध्यान कराया और बताया कि ध्यान मन की शांति, मानसिक स्पष्टता और बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि योग शरीर, मन और श्वास के बीच संतुलन स्थापित करता है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। कॉन्सुल जनरल बोले- अमेरिका में योग की लोकप्रियता बढ़ रही भारत के कॉन्सुल जनरल बिनय प्रधान ने कहा कि अमेरिका में योग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, जिसका प्रमाण योग केंद्रों और कार्यक्रमों में बढ़ती भागीदारी है। उत्तर अमेरिका राजस्थान एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत के लिए भारत के प्रधानमंत्री का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था और आज यह 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है। यह कार्यक्रम इंडियन कॉन्सुलेट और उत्तर अमेरिका राजस्थान एसोसिएशन (RANA) के सहयोग से हुआ। इसमें विभिन्न देशों के राजनयिकों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, योग संस्थानों, आध्यात्मिक संगठनों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में संयुक्त अरब अमीरात, सर्बिया, नेपाल, रोमानिया और मलेशिया के राजनयिकों समेत कई देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। आयोजकों के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रम योग और ध्यान के जरिए देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने में मदद करते हैं।