न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में 12,000 लोगों ने योग किया:इंडियन कॉन्सुलेट में कई देशों के राजनयिक शामिल हुए

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में शनिवार को 12 हजार से ज्यादा लोगों ने योग किया। दुनिया के सबसे व्यस्त चौराहों में गिने जाने वाले इस जगह पर अलग-अलग देशों और समुदायों के लोग योग करने के लिए जुटे। इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह के मुख्य आकर्षण योग गुरु डॉ. एच.आर. नागेंद्र रहे। बेंगलुरु स्थित एस-व्यासा यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ. नागेंद्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग गुरु के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इस साल योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ और लंबी उम्र के लिए योग’ है। आयोजकों के मुताबिक, इस बार 12 हजार से ज्यादा लोगों ने कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। प्रतिभागियों ने कहा कि टाइम्स स्क्वायर जैसी भीड़भाड़ वाली जगह पर योग करना एक अनोखा अनुभव है और इससे लोगों को शांति का एहसास होता है। संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। तब से दुनिया के कई देशों में हर साल बड़े पैमाने पर योग दिवस मनाया जाता है। न्यूयॉर्क में योग गुरु एचआर नागेंद्र का ध्यान सत्र अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर न्यूयॉर्क स्थित इंडियन कॉन्सुलेट में योग गुरु एच आर. नागेंन्द्र के नेतृत्व में विशेष ध्यान सत्र आयोजित किया गया। योग गुरु नागेंद्र ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं, लेकिन योग और विशेष प्राणायाम की मदद से व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है। उन्होंने कहा कि योग एक प्राचीन विज्ञान है, जो केवल शरीर ही नहीं बल्कि मन, प्राण, भक्ति और बुद्धि को भी समझने का रास्ता दिखाता है। कॉन्सुल जनरल बोले- अमेरिका में योग की लोकप्रियता बढ़ रही भारत के कॉन्सुल जनरल बिनय प्रधान ने कहा कि अमेरिका में योग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, जिसका प्रमाण योग केंद्रों और कार्यक्रमों में बढ़ती भागीदारी है। उत्तर अमेरिका राजस्थान एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत के लिए भारत के प्रधानमंत्री का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था और आज यह 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है। प्रेम भंडारी पिछले एक दशक से संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय और अमेरिकी संसद परिसर कैपिटल हिल जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर भी योग कार्यक्रम आयोजित करते रहे हैं। 3 लोगों के साथ योग शुरू हुआ, 12 हजार तक पहुंचा टाइम्स स्क्वायर में योग कार्यक्रम की शुरुआत 21 जून 2003 को सिर्फ तीन लोगों के साथ हुई थी। बाद में यह आयोजन धीरे-धीरे दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक योग आयोजनों में शामिल हो गया। आज यहां पूरे दिन सात मुफ्त योग सत्र आयोजित किए जाते हैं। एक प्रतिभागी ने कहा कि टाइम्स स्क्वायर में योग करना एक जादुई अनुभव है, जहां अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोग एक साथ आकर सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देते हैं। वहीं एक अन्य प्रतिभागी ने कहा कि दुनिया के सबसे व्यस्त स्थानों में से एक पर योग करना यह महसूस कराता है कि भागदौड़ और शोर के बीच भी शांति और स्थिरता हासिल की जा सकती है। यह कार्यक्रम इंडियन कॉन्सुलेट और उत्तर अमेरिका राजस्थान एसोसिएशन (RANA) के सहयोग से हुआ। इसमें विभिन्न देशों के राजनयिकों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, योग संस्थानों, आध्यात्मिक संगठनों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में संयुक्त अरब अमीरात, सर्बिया, नेपाल, रोमानिया और मलेशिया के राजनयिकों समेत कई देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। आयोजकों के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रम योग और ध्यान के जरिए देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने में मदद करते हैं।
तांबे की बोतल की विषाक्तता: तांबे की बोतल में पानी पीने के हैं बहुत फायदे, लेकिन इन 3 चीजों को भूलकर भी ना खाएं सेहत को नुकसान

तांबे की बोतल विषाक्तता: इनवेस्टमेंट के लिए बोतल की बोतल में पानी पीने का चलन काफी बढ़ गया है। आयुर्वेद में प्लास्टिक की बोतलों में पानी की बोतलों का इस्तेमाल माना जाता है, लेकिन जानकारी की कमी के कारण लोग गलत कर रहे हैं। कई लोग टेम्पलेट में का पानी, जीरा पानी या फिर गर्म पानी के नारे रखते हैं। ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। अगर आप भी कॉपर की बोतल का हमेशा इस्तेमाल करते हैं तो ये बातें आपके लिए जानना बेहद जरूरी है। नींबू और जीरे में एसिडिटी होती है। जब भी रसायन की बोतल में डाला जाता है, तो ये कॉपर के साथ प्रतिक्रिया करके विषैले कॉपर साल्ट्स टूट जाते हैं। ये साल्ट्स पानी में घुस जाते हैं और शरीर में नुकसान पहुंचाते हैं। बोतल की बोतल में केवल न्यूनतम तापमान का पानी ही रखना चाहिए। इसमें कोई भी खट्टी या अम्लीय सामग्री नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि इसके पानी में घुलनशील कॉपर लीचिंग काफी बढ़ जाती है। बोतल की बोतल में कभी भी गर्म या खाली पानी नहीं होना चाहिए। गर्म पानी में तांबे की मात्रा बहुत तेजी से बढ़ने लगती है, जिससे पानी में तांबे की मात्रा आरक्षित स्तर तक बढ़ सकती है। इसे कॉपर टॉक्सिसिटी कहा जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। बोतल पर हरे निशान का क्या मतलब होता है यदि आपकी बोतल की बोतल के अंदर हरे रंग का निशान दिखाई दे रहा है, तो यह आयोडीनेशन का संकेत है। ये कॉपरेटिव सोलोमन्स होते हैं। बोतल के अंदर ऐसी परत जमने पर उसे अच्छी तरह से साफ करना बहुत जरूरी है, अन्यथा यह स्वास्थ्य संबंधी समस्या खड़ी हो सकती है।जी मिचलाना, उल्टी आना, पेट में मरोड़ और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों में यह ख़तरा और भी अधिक होता है क्योंकि उनके शरीर की तुलना में बच्चों में अधिक संवेदनशीलता होती है। बोतल की बोतल को सुरक्षित रखने का तरीका (टैग्सटूट्रांसलेट)तांबे की बोतल के साइड इफेक्ट्स(टी)तांबे के बर्तन से पानी पीना(टी)तांबा विषाक्तता के लक्षण(टी)स्वस्थ जीवन शैली युक्तियाँ(टी)आयुर्वेद जल युक्तियाँ(टी)तांबे की बोतल की सफाई(टी)क्या तांबे की बोतल में नींबू पानी सुरक्षित है(टी)तांबे के पानी के लाभ और जोखिम
तांबे की बोतल की विषाक्तता: तांबे की बोतल में पानी पीने के हैं बहुत फायदे, लेकिन इन 3 चीजों को भूलकर भी ना खाएं सेहत को नुकसान

तांबे की बोतल विषाक्तता: इनवेस्टमेंट के लिए बोतल की बोतल में पानी पीने का चलन काफी बढ़ गया है। आयुर्वेद में प्लास्टिक की बोतलों में पानी की बोतलों का इस्तेमाल माना जाता है, लेकिन जानकारी की कमी के कारण लोग गलत कर रहे हैं। कई लोग टेम्पलेट में का पानी, जीरा पानी या फिर गर्म पानी के नारे रखते हैं। ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। अगर आप भी कॉपर की बोतल का हमेशा इस्तेमाल करते हैं तो ये बातें आपके लिए जानना बेहद जरूरी है। नींबू और जीरे में एसिडिटी होती है। जब भी रसायन की बोतल में डाला जाता है, तो ये कॉपर के साथ प्रतिक्रिया करके विषैले कॉपर साल्ट्स टूट जाते हैं। ये साल्ट्स पानी में घुस जाते हैं और शरीर में नुकसान पहुंचाते हैं। बोतल की बोतल में केवल न्यूनतम तापमान का पानी ही रखना चाहिए। इसमें कोई भी खट्टी या अम्लीय सामग्री नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि इसके पानी में घुलनशील कॉपर लीचिंग काफी बढ़ जाती है। बोतल की बोतल में कभी भी गर्म या खाली पानी नहीं होना चाहिए। गर्म पानी में तांबे की मात्रा बहुत तेजी से बढ़ने लगती है, जिससे पानी में तांबे की मात्रा आरक्षित स्तर तक बढ़ सकती है। इसे कॉपर टॉक्सिसिटी कहा जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। बोतल पर हरे निशान का क्या मतलब होता है यदि आपकी बोतल की बोतल के अंदर हरे रंग का निशान दिखाई दे रहा है, तो यह आयोडीनेशन का संकेत है। ये कॉपरेटिव सोलोमन्स होते हैं। बोतल के अंदर ऐसी परत जमने पर उसे अच्छी तरह से साफ करना बहुत जरूरी है, अन्यथा यह स्वास्थ्य संबंधी समस्या खड़ी हो सकती है।जी मिचलाना, उल्टी आना, पेट में मरोड़ और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों में यह ख़तरा और भी अधिक होता है क्योंकि उनके शरीर की तुलना में बच्चों में अधिक संवेदनशीलता होती है। बोतल की बोतल को सुरक्षित रखने का तरीका (टैग्सटूट्रांसलेट)तांबे की बोतल के साइड इफेक्ट्स(टी)तांबे के बर्तन से पानी पीना(टी)तांबा विषाक्तता के लक्षण(टी)स्वस्थ जीवन शैली युक्तियाँ(टी)आयुर्वेद जल युक्तियाँ(टी)तांबे की बोतल की सफाई(टी)क्या तांबे की बोतल में नींबू पानी सुरक्षित है(टी)तांबे के पानी के लाभ और जोखिम
लखनऊ अग्निकांड: यूपी सरकार ने भीषण अग्निकांड के बाद 4 अधिकारियों को निलंबित किया | न्यूज18

लखनऊ अग्निकांड मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, उत्तर प्रदेश सरकार ने घटना के संबंध में चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई तब हुई है जब अधिकारी आग लगने के आसपास की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं और सुरक्षा उपायों, प्रशासन और निगरानी में संभावित खामियों का आकलन कर रहे हैं। अधिकारियों का निलंबन त्रासदी के प्रति सरकार की प्रतिक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि जवाबदेही और अग्नि सुरक्षा नियमों के अनुपालन के बारे में सवाल उठाए जा रहे हैं। जांचकर्ता घटना के पीछे की घटनाओं की जांच कर रहे हैं और क्या लापरवाही या प्रक्रियात्मक विफलताओं ने स्थिति में योगदान दिया है। -newsn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 23 जून, 2026, 17:54 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)प्रशासनिक कार्रवाई(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)करंट अफेयर्स(टी)आपदा प्रबंधन(टी)आपातकालीन(टी)आग लगने की घटना(टी)अग्नि जांच(टी)अग्नि सुरक्षा(टी)सरकारी जवाबदेही(टी)सरकारी कार्रवाई(टी)भारत समाचार(टी)ताजा समाचार(टी)लखनऊ आग(टी)लखनऊ आग मामला(टी)लखनऊ समाचार(टी)लखनऊ अपडेट(टी)लापरवाही जांच(टी)आधिकारिक निलंबन(टी)सार्वजनिक सुरक्षा(टी)निलंबित अधिकारी(टी)यूपी सरकार(टी)यूपी समाचार आज(टी)उत्तर प्रदेश सरकार(टी)उत्तर प्रदेश समाचार
लखनऊ अग्निकांड को लेकर अखिलेश यादव ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर साधा निशाना | यूपी की राजनीति | न्यूज18

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इंपैक्ट फीचर:करियर में AI की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए डब्लूपीयू गोवा ने उच्च शिक्षा में कई विषयों की जानकारी होने की वकालत की

यूनिवर्सिटी नेतृत्व का कहना है कि तकनीक में तेजी से होती उथल-पुथल के इस दौर में, छात्रों के लिए परिस्थितियों के अनुकूल ढलना, जीवन भर सीखते रहना और ट्रांसडिसिप्लिनरी शिक्षा ग्रहण करना बेहद ज़रूरी हो गया है। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य दुनियाभर के उद्योगों को नया आकार दे रहे हैं, विश्वविद्यालयों को छात्रों को सिर्फ उनकी पहली नौकरी के लिए तैयार करने से आगे सोचना होगा। इसके बजाय संस्थानों को छात्रों को इस तरह सक्षम बनाना चाहिए ताकि वे अपने जीवन में करियर के विभिन्न बदलावों और पड़ावों को सफलतापूर्वक संभाल सकें, ऐसा वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (डब्लूपीयू) गोवा में आयोजित ‘ओपन हाउस’ में वक्ताओं ने कहा। इस ओपन हाउस का आयोजन 20 जून को हुआ था। इस कार्यक्रम में भविष्य की उच्च शिक्षा और एक बेहद अप्रत्याशित होती दुनिया में विश्वविद्यालयों से बदलती अपेक्षाओं पर चर्चा के लिए भावी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को एक साथ लाया गया। इस बातचीत के केंद्र में डब्लूपीयू गोवा का ‘ट्रांसडिसिप्लिनरी’ शिक्षा मॉडल था। यह मॉडल किसी एक विषय की गहराई को विभिन्न क्षेत्रों में सोचने, बदलाव के अनुकूल ढलने और वास्तविक दुनिया की जटिल चुनौतियों का समाधान करने की क्षमता के साथ जोड़ने का प्रयास करता है। पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव वाइस चांसलर प्रोफेसर वाल्टर लील ने कहा, “डब्ल्यूपीयू गोवा की स्थापना एक ट्रांसडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण के साथ की जा रही है, जो फैकल्टी और छात्रों को किसी एक विषय की सीमाओं से परे सोचने और जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। यहां पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव, उद्योग से जुड़ाव, वैश्विक दृष्टि और खुद से सीखने पर पर जोर दिया जाता है। इसका मकसद छात्रों को इस तरह तैयार करना है कि वे जीवनभर सीखते रहें, हर परिस्थिति में ढल सकें और नेतृत्व कर सकें। इसके अलावा, यह शिक्षा छात्रों के लिए निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में अच्छे करियर के रास्ते भी खोलती है, ताकि वे अपनी सीख का सही उपयोग कर सकें।” डब्लूपीयू गोवा के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. आशीष भारद्वाज ने कहा, “विश्वविद्यालय अब यह मानकर नहीं चल सकते कि छात्रों को उनकी पहली नौकरी के लिए तैयार कर देना ही काफी है। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या हम छात्रों को उन कई बदलावों, संक्रमणों और अवसरों के लिए तैयार कर रहे हैं जिनका सामना वे अपने पूरे जीवन में करेंगे। भविष्य केवल विशेषज्ञों का नहीं है, बल्कि उन लोगों का है जो निरंतर सीख सकते हैं, विभिन्न क्षेत्रों के विचारों को आपस में जोड़ सकते हैं और ऐसी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं जो पारंपरिक श्रेणियों में फिट नहीं बैठतीं।” नए पेशे उभर रहे हैं इस चर्चा में इस बात पर विचार किया गया कि जैसे-जैसे उद्योग पारंपरिक शैक्षणिक चक्रों की तुलना में अधिक तेजी से विकसित हो रहे हैं, उच्च शिक्षा के बारे में लंबे समय से चली आ रही मान्यताओं को कैसे चुनौती मिल रही है। नए पेशे उभर रहे हैं, स्थापित भूमिकाएं बदल रही हैं, और अब प्रतिस्पर्धा उन व्यक्तियों से बढ़ रही है जो किसी एक विषय के दायरे में काम करने के बजाय कई क्षेत्रों की विशेषज्ञता को जोड़ सकते हैं। चर्चा में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कैसे सीखने, नई परिस्थितियों में ढलने और विभिन्न विषयों के बीच मिलकर काम करने की क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता जितनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है। इस बातचीत में भविष्य के करियर के लिए आवश्यक क्षमताओं के रूप में जिज्ञासा, लचीलेपन और जीवन भर सीखते रहने की प्रवृत्ति के बढ़ते महत्व पर भी विचार किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों को छात्रों को केवल मौजूदा व्यवसायों के लिए प्रशिक्षित करने के बजाय, निरंतर उन अवसरों के लिए तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिनकी भविष्यवाणी अभी नहीं की जा सकती है। डब्लूपीयू गोवा वर्तमान में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसई) में बी.टेक., बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (ऑनर्स), इंटीग्रेटेड प्रोडक्ट डिजाइन में बी.डेस., कम्युनिकेशन डिजाइन में बी.डेस., और साइकोलॉजी (मनोविज्ञान) में बी.एससी. (ऑनर्स) की डिग्री प्रदान करता है। ऐसे समय में जब छात्र और अभिभावक कार्यक्षेत्र के भविष्य को लेकर स्पष्टता की तलाश कर रहे हैं, इस चर्चा ने उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए न केवल रोजगार क्षमता पर ध्यान केंद्रित करने, बल्कि शिक्षार्थियों को उनके पूरे व्यावसायिक जीवन में निरंतर होने वाले बदलावों को सफलतापूर्वक संभालने के लिए तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
ग्लोबल पॉप की पहचान बना ‘एक्सजी’ बैंड:12 की उम्र में घर छोड़ा; भूखे पेट आधी रात तक रियाज कर 7 लड़कियों ने रचा इतिहास

संगीत-नृत्य की दुनिया में दक्षिण कोरियाई बैंड बीटीएस, ब्लैकपिंक के दबदबे और स्ट्रे किड्स, सेवनटीन जैसे ग्रुप की वैश्विक लोकप्रियता के बीच जापान की 7 लड़कियों का बैंड एक्सजी (एक्स्ट्राऑर्डिनरी जीनस) का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। अमेरिका के कोचेला म्यूजिक फेस्टिवल में अपने संगीत-नृत्य का लोहा मनवा चुकी एक्सजी का अगला प्रदर्शन लंदन के वेम्बली स्टेडियम में सितंबर में होगा, जिसकी चर्चा अभी से है। पॉप म्यूजिक की दुनिया में स्टार बनने की एक्सजी का यह सफर धैर्य, बेजोड़ अनुशासन और अदम्य मानसिक मजबूती की अनूठी मिसाल है। 2016 में हजारों लड़कियों के ऑडिशन में 21 का चयन एक्सजी के लिए 2016 में जापान भर के हजारों लड़कियों का ऑडिशन हुआ। इसमें से 21 को ट्रेनिंग के लिए चुना गया। सभी को एक डॉर्मिटरी में साथ रहती थी। सुबह से रात तक संगीत-नृत्य का अभ्यास कराया जाता। कई भाषाओं में बोलने की ट्रेनिंग भी दी जाती। यहां अनुशासन काफी सख्त था। यहां तक कि वे सोशल मीडिया पर फोटो तक साझा नहीं कर सकती थीं। एक बार एक लड़की ने सोशल मीडिया पर तस्वीर अपलोड कर दी, तो उसे कड़ी फटकार लगाई गई। अंत में 7 बैंड के लिए चुनी गईं। अस्तित्व की लड़ाई ग्रुप की सदस्य माया ट्रेनिंग को शारीरिक और मानसिक रूप से ‘खुद के खिलाफ एक लड़ाई’ बताती हैं। जबकि चिसा ने इस ट्रेनिंग को शुद्ध रूप से जीवित बचे रहने का संघर्ष कहा। छह साल की ट्रेनिंग के बीच ही एक्सजी की लड़कियों के बीच आपसी समझ बेहतर हुई। चिसा कहती हैं, अच्छे तरीके से हम एक-दूसरे को बेहतर बनने के लिए पुश करते थे। इससे टीम ज्यादा संगठित होती गईं। हिनाता बताती हैं कि हर सदस्य का अपना स्टाइल है। फिर भी वे एक साथ मूव करती हैं। यादें – खून से सने जूते और लीडर जुरीन का पैनिक अटैक ग्रुप की मुख्य रैपर कोकोना जब 12 साल की थी, तब एक ही स्टेप को दिन में 500 बार करने से उनके पैरों के नाखून टूट गए थे। कई बार तलवों से खून बहने लगता था। जब वे दर्द से चीखती थीं, तो ट्रेनर्स तरस खाने के बजाय कहते थे, ‘दर्द से हार मान रही हो, तो स्टेज का सपना भूल जाओ।’ कोकोना पैरों पर टेप लपेटकर दोबारा नाचने लगती थीं। ग्रुप की जिम्मेदारी संभाल रहीं लीडर जुरीन को एक बार लगातार 18 घंटे की प्रैक्टिस के बाद फ्लोर पर ही गंभीर पैनिक अटैक आया और वे सांस के लिए तड़पने लगी थीं। इसी कठोर श्रम से बीटीएस और ब्लैकपिंक के बीच एक्सजी ने नया इतिहास रचा है।
निरहुआ की एंट्री से बढ़ेंगी मुश्किलें:झोलाछाप डॉक्टर, बदलता गांव और सिस्टम की चुनौतियां… ‘ग्राम चिकित्सालय 2’ को लेकर अमोल-आकांक्षा ने खोले राज

वेब सीरीज ‘ग्राम चिकित्सालय सीजन 2’ इस बार सिर्फ गांव और स्वास्थ्य व्यवस्था की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम, भरोसे और बदलाव को भी दिखाएगी। दैनिक भास्कर से बातचीत में अमोल पराशर, आकांक्षा रंजन कपूर और दिनेश लाल यादव निरहुआ ने अपने किरदारों, गांव की चुनौतियों और सीजन के नए ट्विस्ट पर बात की। अमोल ने बताया कि प्रभात अपने सिद्धांतों और जमीनी सच्चाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा। आकांक्षा ने महिला स्वास्थ्य और बदलाव की जरूरत पर बात की। निरहुआ ने गांव की हकीकत और जागरूकता की अहमियत बताई। सवाल: पहले सीजन की सफलता के बाद सीजन 2 में कितनी जिम्मेदारी बढ़ गई? जवाब/अमोल पराशर: जब कोई सीजन हिट होता है तो सबसे ज्यादा जिम्मेदारी लेखक और निर्देशक पर होती है, क्योंकि उन्हें कहानी को नया भी रखना होता है और पुराने सीजन से जोड़कर आगे बढ़ाना होता है। हमारे लिए चुनौती होती है कि पहले सीजन के किरदार की बॉडी लैंग्वेज, सोच और अंदाज को फिर से पकड़कर बेहतर तरीके से निभाएं। सवाल: गांव के माहौल और अपने किरदार को समझने के लिए आपने क्या तैयारी की? जवाब/आकांक्षा रंजन कपूर: सीजन 1 में ज्यादा तैयारी करनी पड़ी थी, लेकिन सीजन 2 तक किरदार समझ में आ चुका था। डायरेक्टर ने डायलॉग, बोलने का तरीका और किरदार को जमीन से जुड़ा रखने में मदद की। गांव का माहौल मेरे लिए नया नहीं था क्योंकि मेरे पिता हरियाणा से हैं। सवाल: इस बार दर्शकों को क्या नया देखने मिलेगा? जवाब/दिनेश लाल यादव निरहुआ: मैं पहले सीजन का दर्शक था और मुझे वह बहुत पसंद आया था। इस बार मैं कहानी में थोड़ा ट्विस्ट लेकर आया हूं। गांव की समस्याओं के पीछे सिर्फ सामने दिखने वाले लोग नहीं होते, कई बार पर्दे के पीछे बैठे लोग भी चीजें कंट्रोल कर रहे होते हैं। यही इस सीजन का दिलचस्प हिस्सा है। सवाल: प्रभात और गार्गी के रिश्ते में क्या बदलाव दिखेगा? जवाब/अमोल पराशर: अब दोनों सिर्फ हाय-हैलो वाले दोस्त नहीं रहे। वे एक-दूसरे को बेहतर समझते हैं, इसलिए बहस भी करते हैं और मदद भी करते हैं। असली जिंदगी की दोस्ती की तरह इस रिश्ते में भी कई रंग देखने को मिलेंगे। सवाल: अगर असल जिंदगी में गांव में डॉक्टर बनकर जाना पड़े तो क्या करेंगी? जवाब/आकांक्षा रंजन कपूर: मैं महिलाओं की हेल्थ, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा पर काम करना चाहूंगी। मुझे लगता है कि गांवों में इस दिशा में अभी बहुत बदलाव की जरूरत है। सवाल: शो में सिद्धांत और हालात के बीच कितना संघर्ष देखने मिलेगा? जवाब/अमोल पराशर: प्रभात ऐसा इंसान है जो अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करता। पहले सीजन में उसने सीखा कि सिर्फ पढ़ाई और काबिलियत से काम नहीं चलता, लोगों का भरोसा भी जीतना पड़ता है। इस बार वह अपने तरीके बदलने की कोशिश करेगा, लेकिन अपने उसूल नहीं छोड़ेगा। यही उसकी ताकत और मुश्किलें भी पैदा करती है। सवाल: क्या इस बार सिस्टम और डॉक्टर के बीच टकराव भी दिखेगा? जवाब/दिनेश लाल यादव निरहुआ: गांवों में कई बार जहां अच्छे डॉक्टर नहीं पहुंचते, वहां झोलाछाप डॉक्टर लोगों की मदद करते दिखते हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब मदद और गलत तरीके के बीच की सीमा खत्म होने लगती है। इसी टकराव को इस सीजन में दिखाया गया है। सवाल: क्या आपने असल जिंदगी में ऐसे लोगों को देखा है जो अच्छी पढ़ाई के बाद समाज के लिए काम कर रहे हों? जवाब/अमोल पराशर: हां, मैंने ऐसे कई लोगों को देखा है। मेरे साथ पढ़े कुछ लोगों ने बड़ी नौकरी छोड़कर समाज के लिए काम चुना। मेरे एक जूनियर ने किसानों के लिए काम शुरू किया और टेक्नोलॉजी के जरिए उनकी मदद कर रहा है। ऐसे लोग बहुत हैं, लेकिन वे ज्यादा चर्चा में नहीं आते। सवाल: क्या आपको भी ऐसे लोग मिले हैं जो बिना चर्चा के समाज के लिए काम करते हों? जवाब/आकांक्षा रंजन कपूर: मैं जानवरों के लिए काम करने वाले कई लोगों से मिली हूं। बहुत लोग अपनी नौकरी के साथ समाज के लिए भी काम करते हैं। मेरी मां भी एक एनजीओ चलाती हैं, जो रेप और एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद करता है। मुझे लगता है दुनिया में इंसानियत बहुत है, बस उसकी चर्चा कम होती है। सवाल: बचपन में किसी ग्राम चिकित्सक या झोलाछाप डॉक्टर से जुड़ा कोई अनुभव रहा? जवाब/दिनेश लाल यादव निरहुआ: बचपन का एक किस्सा आज भी याद है। एक छोटे बच्चे को इंजेक्शन लगाया जा रहा था और दवा बाहर निकल गई। जब परिवार ने पूछा तो डॉक्टर ने कहा कि ‘जितनी गिरी है, उतना भी फायदा करेगी।’ ऐसे अनुभव बताते हैं कि बिना सही जानकारी के इलाज कितना खतरनाक हो सकता है। सवाल: क्या आज गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव दिखता है? जवाब/आकांक्षा रंजन कपूर: हाल ही में मुझे सरकारी अस्पताल जाने का मौका मिला। मैं थोड़ा डरी हुई थी, लेकिन वहां सफाई, व्यवस्था और डॉक्टरों का व्यवहार देखकर अच्छा लगा। पूरा अनुभव व्यवस्थित था और मेरी सोच भी बदली। दिनेश लाल यादव निरहुआ: आज गांवों में काफी बदलाव आया है। जागरूकता बढ़ रही है और ऐसे शो लोगों तक जरूरी बातें पहुंचाने में मदद करते हैं।
6 यूबीटी सांसदों, बीएमसी और विधायकों के बाद अगला? शिंदे के नेतृत्व वाले सेना कैंप ने दिया बड़ा संकेत | भारत समाचार

आखरी अपडेट:23 जून, 2026, 12:33 IST मुंबई में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह लोकसभा सांसद औपचारिक रूप से शिवसेना में शामिल हो गए। छह यूबीटी सांसदों के दलबदल के बाद, शिंदे सेना की नजर बीएमसी और विधायकों पर है शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के एक दिन बाद, महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने मंगलवार को उद्धव ठाकरे खेमे से और दलबदल का संकेत देते हुए कहा कि और अधिक राजनीतिक “विस्फोट” होने वाले हैं। सामंत ने यह भी संकेत दिया कि शिंदे गुट का अगला फोकस बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और शिवसेना (यूबीटी) विधायक होंगे। पत्रकारों से बात करते हुए, सामंत ने कहा कि नवीनतम राजनीतिक घटनाक्रम केवल शुरुआत है। उन्होंने कहा, “आज दो बार राजनीतिक विस्फोट हो चुका है, लेकिन अभी कई विस्फोट होने बाकी हैं। ये ऐसे विस्फोट नहीं हैं जिनका उद्देश्य किसी को परेशान करना या किसी को बदनाम करना है। जो लोग एकनाथ शिंदे साहब के नेतृत्व को स्वीकार करते हैं, वे उनके नेतृत्व में शिवसेना में आते हैं और उनके नेतृत्व को स्वीकार करते हैं।” उन्होंने आगे सुझाव दिया कि पार्टी अब अपना ध्यान अन्य राजनीतिक लक्ष्यों की ओर लगाएगी। सामंत ने कहा, “अब (अगला मिशन) बीएमसी और विधायक हैं। हम आपको उचित समय पर चरण दर चरण इसके बारे में सूचित करेंगे।” अनुपस्थित यूबीटी विधायकों पर चुप्पी सामंत से तीन शिवसेना (यूबीटी) विधायकों और एक एमएलसी के बारे में भी पूछा गया, जो पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई एक आपातकालीन बैठक में शामिल नहीं हुए थे। उन्होंने सावधानी से जवाब देते हुए कहा, “पहले मैं उन लोगों के नाम देखूंगा जो शामिल हुए और जो शामिल नहीं हुए. उस पर बाद में टिप्पणी करना उचित होगा.” उनकी यह टिप्पणी दलबदल के ताजा दौर के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले संगठन के भीतर संभावित अशांति की बढ़ती अटकलों के बीच आई है। छह सांसद शिंदे खेमे में चले गए सोमवार को मुंबई में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह लोकसभा सांसद औपचारिक रूप से शिवसेना में शामिल हो गए। पाला बदलने वाले सांसद थे संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापुराव पाटिल अष्टिकर। इस कदम से उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा झटका लगा और शिंदे खेमे को और मजबूती मिली। विभाजन ने शिवसेना को नया आकार दिया शिवसेना के भीतर राजनीतिक विभाजन 2022 में शुरू हुआ जब एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया। शिंदे बड़ी संख्या में विधायकों के साथ चले गए, जिससे पार्टी में विभाजन शुरू हो गया। बाद में यह विवाद चुनाव आयोग तक पहुंच गया, जिसने अंततः शिंदे गुट को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता दी। नवीनतम दलबदल से पहले, शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा में नौ सदस्य थे। असंतोष के संकेत पिछले हफ्ते ही सामने आ गए थे जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट द्वारा बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में केवल तीन सांसद ही शामिल हुए थे। बाद में पार्टी ने उन छह सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जो बाद में शिंदे खेमे में शामिल हो गए। लोकसभा में दल-बदल की प्रक्रिया पूरी होने के साथ, सामंत की टिप्पणियों से पता चलता है कि सेना के दोनों गुटों के बीच राजनीतिक लड़ाई जल्द ही बीएमसी और महाराष्ट्र विधानमंडल की ओर स्थानांतरित हो सकती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया 6 यूबीटी सांसदों, बीएमसी और विधायकों के बाद अगला? शिंदे के नेतृत्व वाले सेना कैंप ने दिया बड़ा संकेत अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)शिवसेना(टी)शिवसेना समाचार(टी)शिवसेना सांसद(टी)शिवसेना विधायक(टी)शिवसेना संकट(टी)शिवसेना यूबीटी(टी)शिवसेना समाचार आज(टी)महाराष्ट्र(टी)महाराष्ट्र की राजनीति(टी)शिवसेना दलबदल(टी)एकनाथ शिंदे खेमा(टी)उद्धव ठाकरे गुट(टी)शिवसेना यूबीटी(टी)महाराष्ट्र राजनीति(टी)बीएमसी सत्ता संघर्ष(टी)लोकसभा सांसद स्विच(टी)शिवसेना पार्टी विद्रोह
शादी से पहले आकाशदीप ने रामभद्राचार्य से लिया आशीर्वाद:मेहंदी पर छोटी बहनों के साथ क्रिकेटर ने लगाए ठुमके; कल वाराणसी में शादी

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज आकाश दीप के विवाह समारोह की रस्में शुरू हो चुकी हैं। आज आकाशदीप की हल्दी है। इससे पहले सोमवार (22 जून) को उनकी मेहंदी की रस्म हुई। आकाशदीप की छोटी बहन ने ‘राजा भइया दूल्हा बनकर आ गया’ और ‘चने के खेत में’ समेत कई बॉलीवुड गीतों पर ठुमके लगाए। मेहंदी समारोह में आकाश दीप गॉगल्स लगाए नजर आए। समारोह के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने वीडियो कॉल के माध्यम से आकाश दीप से बातचीत की और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उन्हें सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया। आकाश दीप 24 जून को वाराणसी में रोहतास निवासी अक्षिता राज के साथ विवाह बंधन में बंधेंगे। शादी समारोह के लिए वाराणसी के होटल ताज गंगेज को बुक किया गया है। इस पूरे फंक्शन में सिर्फ परिवार लोग शामिल होंगे। इससे मीडिया को दूर रखा गया है। शादी समारोह में क्रिकेट जगत की कई हस्तियों के शामिल भी हो सकते हैं। मेहंदी फंक्शन से जुड़ी कुछ तस्वीरें देखिए… आकाश दीप के हाथों में अक्षिता के नाम की लगी मेहंदी आकाश दीप के घर पर शादी से पहले हुई मेहंदी सेरेमनी में घर का माहौल पूरी तरह जश्न में बदल गया। परिवार के लोगों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में आकाश दीप की मेहंदी रस्म धूमधाम से पूरी की गई। पारंपरिक गीतों की गूंज, ढोलक की थाप और अपनों की हंसी-खुशी के बीच पूरे परिवार ने इस खास पल को यादगार बनाया है। आकाश दीप की बहन और परिवार के सदस्यों ने मिलकर मेहंदी समारोह की खास तैयारियां की थीं। रस्मों के दौरान परिवार के लोग जमकर डांस किए। इस दौरान स्टेज के पास खूब भीड़ लगी थी। कुछ लोग क्रिकेटर के साथ सेल्फी लेने में व्यस्थ थे तो कुछ लोगों ने आकाश दीप को डांस भी करवाना चाहा। इस दौरान उनके हाथों में दुल्हनिया अक्षिता के नाम की मेहंदी लगाई गई है। बता दें कि 22 जून की रात आकाश दीप के घर पर तिलक समारोह का आयोजन हुआ था। इसमें भोजपुरी सिंगर गुंजन सिंह और काजल राघवानी भी शामिल हुईं। कार्यक्रम में आकाशदीप डांस करते नजर आए। 22 जून को था तिलक 22 जून की रात आकाश दीप के घर तिलक समारोह का आयोजन किया गया था। इस समारोह में भोजपुरी गायक गुंजन सिंह और अभिनेत्री काजल राघवानी भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान आकाश दीप भी परिवार और मेहमानों के साथ डांस करते नजर आए। समारोह में रोहतास के सांसद मनोज कुमार, विधायक मुरारी प्रसाद गौतम समेत कई गणमान्य लोग पहुंचे। तिलक समारोह की कुछ तस्वीरें देखिए… 10 लाख रुपए का बना पंडाल क्रिकेटर के घर को बॉलीवुड थीम पर सजाया गया है। करीब 10 लाख रुपए के पंडाल बनाए गए हैं। हर फंक्शन के लिए घर को करीब 2 से 3 घंटे तक तैयार किया जा रहा है। समारोह में आने वाले मेहमानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वीआईपी (VIP) मेहमानों के लिए अलग पंडाल बनाया गया है। वहीं, स्थानीय लोगों और ग्रामीणों के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। सभी पंडालों में कूलर, सोफा, टेबल और कुर्सियों की व्यवस्था की गई है, ताकि गर्मी के मौसम में मेहमानों को किसी तरह की असुविधा न हो। इसके साथ ही दूल्हे को सजाने के लिए दिल्ली से मेकअप आर्टिस्ट आए हैं। आकाशदीप के घर की कुछ तस्वीरें देखिए… अब जानिए आकाशदीप होने वाली दुल्हनिया कौन है आकाश दीप की होने वाली दुल्हन अक्षिता राज मानिकपुर की रहने वाली हैं। वह इंद्रपुरी थाना क्षेत्र के मानिकपुर निवासी अमित कुमार सिंह (बबलू जी) और रेणु सिंह की बेटी हैं। अक्षिता ने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा से BCA और MCA की पढ़ाई की है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए संस्थान की ओर से उन्हें नौकरी का प्रस्ताव भी मिला था। हालांकि, इसी दौरान शादी की बातचीत आगे बढ़ने के कारण उन्होंने वह नौकरी जॉइन नहीं की। दोनों परिवारों की सहमति से यह रिश्ता तय हुआ है। बताया जा रहा है कि आकाश दीप और अक्षिता राज का विवाह पूरी तरह पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार परिवार के बड़े-बुजुर्गों की मौजूदगी में तय किया गया है।







