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भारतीय गुट संविधान की शपथ लेता है लेकिन बेशर्मी से अराजकता पर दांव लगाता है? | कठिन तथ्य | न्यूज18

भारतीय गुट संविधान की शपथ लेता है लेकिन बेशर्मी से अराजकता पर दांव लगाता है? | कठिन तथ्य | न्यूज18

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छात्रों को लुभाने के लिए कंपनियां बांट रही फ्री गिफ्ट:सोशल मीडिया कंपनियों पर 1400 से अधिक मुकदमों के अंदरूनी दस्तावेजों से खुलासा‎

छात्रों को लुभाने के लिए कंपनियां बांट रही फ्री गिफ्ट:सोशल मीडिया कंपनियों पर 1400 से अधिक मुकदमों के अंदरूनी दस्तावेजों से खुलासा‎

दुनिया की प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियां छात्रों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के लिए लगातार नए तरीके अपना रही हैं। अमेरिका के 1400 स्कूलों के प्रशासनिक निकायों द्वारा मेटा, स्नैपचैट और टिक टॉक के खिलाफ दायर मुकदमों से जुड़े अंदरूनी दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि कंपनियां युवाओं का ध्यान खींचने और उन्हें लंबे समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब सोशल मीडिया के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है। अभिभावकों के आंदोलन, कई चर्चित किताबों और विशेषज्ञों ने अकेलेपन, बुलीइंग, खराब खान-पान की आदतों और यौन शोषण जैसी समस्याओं के लिए टेक प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार ठहराया है। पहले बहस मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव तक सीमित थी, लेकिन अब इसका फोकस कक्षाओं में पढ़ाई पर पड़ रहे असर की ओर भी बढ़ गया है। दस्तावेजों और अभिभावकों, शिक्षकों तथा टेक कंपनियों के पूर्व कर्मचारियों से हुई बातचीत के अनुसार कंपनियों ने बच्चों को स्क्रीन से जोड़े रखने के लिए पैरेंट्स,शिक्षकों और यहां तक कि अपनी ट्रस्ट एंड सेफ्टी टीमों की चिंताओं को भी नजरअंदाज किया। टिक टॉक की सुरक्षा टीम वर्षों से स्कूल समय के दौरान नोटिफिकेशन बंद करने की सिफारिश करती रही, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया। वहीं, स्नैपचैट के रणनीतिक दस्तावेजों में कक्षा के दौरान फोन इस्तेमाल को “अंडर डेस्क टाइम’ कहा गया है। गूगल के प्रबंधकों को जानकारी थी कि यूट्यूब स्कूल के दौरान छात्रों को ऐसे वीडियो सुझाता है, जिनका पढ़ाई से कोई संबंध नहीं होता। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इंटरनेट सुरक्षा और प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए बड़ी टेक कंपनियों की पैरेंट्स-टीचर्स संगठनों से लंबे समय से साझेदारी रही है। 22 हजार स्थानीय चैप्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली नेशनल पीटीए को सोशल मीडिया कंपनियों से हर साल लगभग 2.40 करोड़ से 4.75 करोड़ रुपए तक की आर्थिक सहायता मिलने की जानकारी भी दस्तावेजों में दर्ज है। लगातार नोटिफिकेशन और अलर्ट भेजे जा रहे हैं – स्नैपचैट ने पढ़ाई के दौरान फोन पर अलर्ट भेजकर बच्चों से क्लास रूम की गतिविधियों का ब्योरा शेयर करने के लिए कहा। – मेटा ने स्कूल में इंस्टाग्राम को प्रमोट करने के लिए ‘टीन एम्बेसडर्स’ को धन दिया। – टिकटॉक ने स्कूलों में उसके आयोजन के कवरेज के लिए पत्रकारों को करोड़ों रु. दिए। एप्स की लत लगाने वाली डिजाइन ने मुश्किलें बढ़ाई एक स्कूल के वकील प्रेविन वॉरेन कहते हैं,अंतहीन और विविध मनोरंजन के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इतने लुभावने हैं कि लत पैदा करते हैं। छात्र स्कूल की पढ़ाई की जगह उन पर ध्यान देते हैं। वहीं इन कंपनियों का तर्क है कि एप्स की लत के लिए बच्चे, स्कूल और मोबाइल बनाने वाली कंपनियां जिम्मेदार हैं। 258 करोड़ रुपए हर्जाना देने के लिए भी कंपनियां तैयार अभी हाल में ग्रामीण केंटुकी के एक छोटे जिले ब्रीथिट काउंटी में स्कूलों को बड़ी चार कंपनियां 258 करोड़ रुपए देने के लिए सहमत हो गई हैं। मेटा 86 करोड़ और स्नैपचैट, टिकटॉक 76-76 करोड़ रुपए और गूगल 19 करोड़ रुपए देगी।

दोस्त के अंतिम संस्कार में रो पड़े सलमान खान:सहारा लेकर क्रिमेटोरियम से निकले, हेलन को संभालते दिखे सोहेल खान; पूरा परिवार पहुंचा

दोस्त के अंतिम संस्कार में रो पड़े सलमान खान:सहारा लेकर क्रिमेटोरियम से निकले, हेलन को संभालते दिखे सोहेल खान; पूरा परिवार पहुंचा

एक्टर सलमान खान अपने परिवार के साथ मंगलवार को अपने फैमिली फ्रेंड कुमुद राणे के अंतिम संस्कार में पहुंचे। इस दौरान सलमान के भाई सोहेल, अरबाज और उनकी मां सलमा खान भी मौजूद थीं। परिवार ने कुमुद को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम संस्कार के दौरान सलमान काफी इमोशनल नजर आए। पिछले महीने भी सलमान के दोस्त का निधन हुआ था पिछले महीने सलमान खान ने अपने 42 साल पुराने करीबी दोस्त सुशील कुमार के निधन पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दुख जताया था। सलमान ने बताया था कि सुशील उनके लिए सिर्फ दोस्त नहीं बल्कि एक भाई की तरह थे। सुशील के लिए सलमान ने एक लंबा और इमोशनल नोट लिखा था। सलमान ने अपने और पिता सलीम खान के साथ सुशील की पुरानी तस्वीरें शेयर की हैं। एक्टर ने लिखा कि सुशील पिछले 42 सालों से उनके साथ भाई की तरह थे। वे एक बहुत ही दयालु और मददगार इंसान थे। सलमान के मुताबिक, चाहे आर्थिक तंगी हो, भावनात्मक परेशानी हो या शारीरिक बीमारी, सुशील के चेहरे से मुस्कान कभी कम नहीं होती थी। वे मुश्किल से मुश्किल हालात में भी डांस करते थे और मुस्कुराते रहते थे। ‘की फरक नई पैंदा’ कहते थे सुशील सलमान ने सुशील की पॉजिटिव सोच को याद करते हुए बताया था कि वे हमेशा एक ही बात कहते थे- “की फरक नई पैंदा, सब ठीक होगा” (कोई फर्क नहीं पड़ता, सब ठीक हो जाएगा)। सलमान ने उन्हें एक ऐसा योद्धा बताया जिसने मौत का सामना किसी ‘हैवीवेट चैंपियन’ की तरह किया। एक्टर ने लिखा था, “तुम्हारे लिए मेरी आंखों में आंसू नहीं हैं भाई, बल्कि सिर्फ तुम्हारी यादें और हंसी है। मेरा भाई चेहरे पर मुस्कान लिए दुनिया से गया।” अंतिम विदाई पर भावुक हुए सलमान अपनी पोस्ट में सलमान ने जिंदगी की फिलॉसफी पर भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि हम सभी को एक न एक दिन जाना है, बस कोई पहले जाता है और कोई बाद में। इसलिए जाने से पहले जीवन में कुछ ऐसा कर जाना चाहिए जिससे लोग आपको याद रखें। सलमान ने इमोशनल होते हुए लिखा कि वे सुशील को बहुत मिस करेंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे इस खबर के बाद गुस्सा करना चाहते थे और रोना चाहते थे, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला। ‘मातृभूमि’ फिल्म में नजर आएंगे सलमान वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान इन दिनों अपनी अगली फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ की तैयारी कर रहे हैं। इस फिल्म का निर्माण सलमा खान के बैनर सलमान खान फिल्म्स के तले हो रहा है। फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं और इसमें चित्रांगदा सिंह लीड रोल में नजर आएंगी।

कंगना की लगातार पिछली 5 फिल्में फ्लॉप:'भारत भाग्य विधाता' का रिलीज के दिन 3 फिल्मों से क्लैश; क्या बॉक्स ऑफिस पर टिक पाएगी?

कंगना की लगातार पिछली 5 फिल्में फ्लॉप:'भारत भाग्य विधाता' का रिलीज के दिन 3 फिल्मों से क्लैश; क्या बॉक्स ऑफिस पर टिक पाएगी?

एक्ट्रेस कंगना रनोट की अपकमिंग फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। हालांकि, इस फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करना आसान नहीं होगा। एक तरफ कंगना की पिछली कई फिल्में बुरी तरह फ्लॉप हुई हैं, वहीं, जिस दिन यानी 12 जून को ‘भारत भाग्य विधाता’ रिलीज होगी, उसी दिन 3 अन्य बॉलीवुड फिल्में भी रिलीज होंगी।, जिससे बॉक्स ऑफिस पर क्लैश की स्थिति बन रही है। कंगना की पिछली कई फिल्में फ्लॉप रहीं कंगना की पिछली पांच फिल्मों का प्रदर्शन बॉक्स ऑफिस पर खराब रहा है। पिछली फिल्म ‘इमरजेंसी’ (2025) में कंगना ने इंदिरा गांधी की भूमिका निभाई और खुद डायरेक्शन भी किया। लगभग 60 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने भारत में करीब 23.81 करोड़ रुपए की कमाई की और डिजास्टर साबित हुई। इससे पहले रिलीज हुई फिल्म ‘तेजस’ (2023) का बजट लगभग 70 करोड़ रुपए था। फिल्म ने मात्र 8.05 करोड़ रुपए की कमाई की और डिजास्टर साबित हुई। वह तमिल फिल्म ‘चंद्रमुखी 2’ में नजर आई थीं। 65 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 54:10 करोड़ रुपए कमाए और फ्लॉप रही। वहीं, ‘धाकड़’ (2022) में कंगना एक्शन हीरोइन बनीं। 85 करोड़ रुपए के बजट वाली यह फिल्म सिर्फ 4.01 करोड़ रुपए कमा सकी थी और बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही। ‘थलाइवी’ (2021) तमिल-हिंदी बाइलिंगुअल बायोपिक थी, जिसमें कंगना ने जे. जयललिता का रोल किया। 100 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने करीब 8.50 करोड़ रुपए की कमाई की और फ्लॉप रही। रिलीज के दिन तीन फिल्मों से क्लैश फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून 2026 को रिलीज हो रही है। जून 2026 में कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं। 12 जून को ‘भारत भाग्य विधाता’ के साथ इम्तियाज अली की ‘मैं वापस आऊंगा’, मनोज बाजपेयी स्टारर ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ और विक्रम भट्ट की ‘हॉन्टेड 3D: इकोज ऑफ द पास्ट’ भी रिलीज हो रही हैं। इसके अलावा जून के बाकी दिनों में शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना की ‘कॉकटेल 2’ (19 जून) तथा अक्षय कुमार की ‘वेलकम टू द जंगल’ (26 जून) जैसी बड़ी फिल्में भी रिलीज होने वाली हैं। इसके अलावा 4 जून को रिलीज हुई ‘पेड्डी’ और 5 जून को रिलीज हुई ‘है जवानी है तो इश्क होना है’ भी बॉक्स ऑफिस पर चल रही हैं। ‘भारत भाग्य विधाता’ की बात करें तो यह फिल्म 26/11 मुंबई आतंकी हमलों की वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। PEN स्टूडियोज द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म में कंगना नर्स की भूमिका में हैं।

कंगना की लगातार पिछली 5 फिल्में फ्लॉप:'भारत भाग्य विधाता' का रिलीज के दिन 3 फिल्मों से क्लैश; क्या बॉक्स ऑफिस पर टिक पाएगी?

कंगना की लगातार पिछली 5 फिल्में फ्लॉप:'भारत भाग्य विधाता' का रिलीज के दिन 3 फिल्मों से क्लैश; क्या बॉक्स ऑफिस पर टिक पाएगी?

एक्ट्रेस कंगना रनोट की अपकमिंग फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। हालांकि, इस फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करना आसान नहीं होगा। एक तरफ कंगना की पिछली कई फिल्में बुरी तरह फ्लॉप हुई हैं, वहीं, जिस दिन यानी 12 जून को ‘भारत भाग्य विधाता’ रिलीज होगी, उसी दिन 3 अन्य बॉलीवुड फिल्में भी रिलीज होंगी।, जिससे बॉक्स ऑफिस पर क्लैश की स्थिति बन रही है। कंगना की पिछली कई फिल्में फ्लॉप रहीं कंगना की पिछली पांच फिल्मों का प्रदर्शन बॉक्स ऑफिस पर खराब रहा है। पिछली फिल्म ‘इमरजेंसी’ (2025) में कंगना ने इंदिरा गांधी की भूमिका निभाई और खुद डायरेक्शन भी किया। लगभग 60 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने भारत में करीब 23.81 करोड़ रुपए की कमाई की और डिजास्टर साबित हुई। इससे पहले रिलीज हुई फिल्म ‘तेजस’ (2023) का बजट लगभग 70 करोड़ रुपए था। फिल्म ने मात्र 8.05 करोड़ रुपए की कमाई की और डिजास्टर साबित हुई। वह तमिल फिल्म ‘चंद्रमुखी 2’ में नजर आई थीं। 65 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 54:10 करोड़ रुपए कमाए और फ्लॉप रही। वहीं, ‘धाकड़’ (2022) में कंगना एक्शन हीरोइन बनीं। 85 करोड़ रुपए के बजट वाली यह फिल्म सिर्फ 4.01 करोड़ रुपए कमा सकी थी और बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही। ‘थलाइवी’ (2021) तमिल-हिंदी बाइलिंगुअल बायोपिक थी, जिसमें कंगना ने जे. जयललिता का रोल किया। 100 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने करीब 8.50 करोड़ रुपए की कमाई की और फ्लॉप रही। रिलीज के दिन तीन फिल्मों से क्लैश फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून 2026 को रिलीज हो रही है। जून 2026 में कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं। 12 जून को ‘भारत भाग्य विधाता’ के साथ इम्तियाज अली की ‘मैं वापस आऊंगा’, मनोज बाजपेयी स्टारर ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ और विक्रम भट्ट की ‘हॉन्टेड 3D: इकोज ऑफ द पास्ट’ भी रिलीज हो रही हैं। इसके अलावा जून के बाकी दिनों में शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना की ‘कॉकटेल 2’ (19 जून) तथा अक्षय कुमार की ‘वेलकम टू द जंगल’ (26 जून) जैसी बड़ी फिल्में भी रिलीज होने वाली हैं। इसके अलावा 4 जून को रिलीज हुई ‘पेड्डी’ और 5 जून को रिलीज हुई ‘है जवानी है तो इश्क होना है’ भी बॉक्स ऑफिस पर चल रही हैं। ‘भारत भाग्य विधाता’ की बात करें तो यह फिल्म 26/11 मुंबई आतंकी हमलों की वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। PEN स्टूडियोज द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म में कंगना नर्स की भूमिका में हैं। फिल्म में कंगना के अलावा गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, अमृता नामदेव, ईशा डे, प्रिया बेर्डे और आशा शेलार भी अहम भूमिकाओं में हैं।

‘सही समय पर सही नेता’: एनडीए शासन के 12 साल पर चंद्रबाबू नायडू का पीएम मोदी पर बड़ा हमला | भारत समाचार

Bangladesh Vs Australia Live Score: Follow Latest Updates From The 1st ODI. (AFP Photo)

आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 12:07 IST सीएम चंद्रबाबू नाडु ने कहा, पीएम मोदी के नेतृत्व में, भारत ने अपने सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय आत्म-विश्वास को फिर से खोजा है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू (फोटो: पीटीआई) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और एनडीए सहयोगी एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में नए राष्ट्रीय आत्मविश्वास, मजबूत शासन और आर्थिक परिवर्तन का दौर आया है। द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक राय लेख में, नायडू ने 10 जून, 2026 को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया, जो मोदी के प्रधानमंत्रित्व काल के लगातार 4,399 दिन थे। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि “राष्ट्र प्रथम” के सिद्धांत पर केंद्रित शासन मॉडल में लाखों भारतीयों के भरोसे को दर्शाती है। सार्वजनिक जीवन में लगभग पांच दशक बिताने और कई प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने के बाद, नायडू ने लिखा कि मोदी अलग हैं क्योंकि उन्होंने सभ्यतागत आत्मविश्वास को आधुनिक शासन के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा है। उन्होंने लिखा, “सार्वजनिक जीवन में मेरे लगभग पांच दशकों में, मुझे कई प्रधानमंत्रियों को देखने और उनके साथ बातचीत करने का अवसर मिला है, जिनमें से प्रत्येक ने अलग-अलग चुनौतियों और परिस्थितियों के माध्यम से भारत का नेतृत्व किया। लेकिन पीएम मोदी अलग हैं क्योंकि उन्होंने आधुनिक शासन के साथ सभ्यतागत आत्मविश्वास को जोड़ा है।” ‘भारत ने फिर से पाया अपना आत्मविश्वास’ नायडू ने तर्क दिया कि भारत एक समय दुनिया की सबसे समृद्ध और उन्नत सभ्यताओं में से एक था, लेकिन आजादी के बाद कई दशकों तक अपनी पहचान और वैश्विक भूमिका को लेकर अनिश्चित रहा। उनके मुताबिक, पीएम मोदी के नेतृत्व ने भारत को अपने सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय आत्मविश्वास को फिर से खोजने में मदद की है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के साथ अधिक आत्मविश्वास और रणनीतिक प्रासंगिकता के साथ जुड़ता है, भारत प्रथम के सिद्धांत द्वारा निर्देशित रहते हुए प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ समान रूप से बातचीत करता है। नायडू ने कहा, “पीएम मोदी के नेतृत्व में, भारत ने अपने सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय आत्म-विश्वास को फिर से खोजा है। भारत आज वैश्विक व्यवस्था में कहीं अधिक आत्मविश्वास और रणनीतिक प्रासंगिकता के साथ खड़ा है। पीएम मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत दुनिया के साथ प्रमुख शक्तियों के बीच बराबरी से जुड़े, हमेशा भारत प्रथम के सिद्धांत द्वारा निर्देशित हो।” सीएम नायडू ने भारत की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक विकास के साथ मिश्रित करने की मोदी की क्षमता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने योग, प्राणायाम, ध्यान और आध्यात्मिक परंपराओं को प्रौद्योगिकी, डिजिटल प्रशासन और नवाचार-आधारित विकास के साथ एकीकृत करने की ओर इशारा किया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की वैश्विक मान्यता को भारत के पारंपरिक ज्ञान को विश्वव्यापी स्वीकृति मिलने का उदाहरण बताया गया। पीएम मोदी के तहत डिजिटल परिवर्तन और आर्थिक विकास नायडू ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत एक दशक के भीतर दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों की परिभाषित विशेषता दृढ़ विश्वास और प्रभावी कार्यान्वयन से प्रेरित शासन रही है। उनके अनुसार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, जन धन खाते, आधार एकीकरण, यूपीआई और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ने इतिहास में सबसे बड़े वित्तीय समावेशन अभ्यासों में से एक बनाया है। उन्होंने कहा कि 51 लाख करोड़ रुपये से अधिक सीधे लाभार्थियों को हस्तांतरित किए गए हैं, जिससे रिसाव कम हुआ है और बिचौलियों को खत्म किया गया है। सीएम नायडू ने कहा कि भारत ने सबसे पहले डिजिटल विभाजन को पाटकर आर्थिक विभाजन को पाट दिया है। सामाजिक परिवर्तन और बुनियादी ढाँचे को आगे बढ़ाना आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उस चीज़ की ओर भी इशारा किया जिसे उन्होंने बड़े पैमाने पर सामाजिक परिवर्तन बताया। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है, जबकि आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य देखभाल, पेयजल और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश से जीवन स्तर में सुधार हुआ है। नायडू के अनुसार, इस अवधि के दौरान मार्गदर्शक सिद्धांत “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” रहा है। उन्होंने कहा कि महामारी, आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधान, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता जैसी चुनौतियों के बावजूद, भारत लचीला और सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। सीएम नायडू ने राजमार्गों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, माल ढुलाई गलियारों, रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा, विनिर्माण और उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश की भी प्रशंसा की। उन्होंने इन्हें तत्काल राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से लिए गए निर्णयों के बजाय दीर्घकालिक राष्ट्र-निर्माण उपाय बताया। पीएम मोदी के तहत संघवाद और आंध्र का विकास नायडू ने कहा कि एक और बड़ा बदलाव प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद को मजबूत करना है। उनके अनुसार, अब राज्यों को केवल प्रशासनिक इकाइयों के बजाय राष्ट्रीय विकास के इंजन के रूप में देखा जाने लगा है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश को बुनियादी ढांचे, औद्योगीकरण, अमरावती और उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित परियोजनाओं के माध्यम से इस साझेदारी से लाभ हुआ है। नायडू ने कहा, “संघ और राज्यों के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद ने राज्यों को नवाचार करने, प्रतिस्पर्धा करने और बढ़ने के लिए अधिक स्थान दिया है। राज्यों को केवल प्रशासनिक इकाइयों के बजाय राष्ट्रीय विकास के इंजन के रूप में माना जा रहा है। आंध्र प्रदेश को इस विकासोन्मुख साझेदारी से बहुत फायदा हुआ है।” ‘एक स्वर्णिम युग की शुरुआत’ नायडू ने अपने पुराने विश्वास को दोहराया कि मोदी भारत के लिए सही समय पर सही नेता हैं। उन्होंने लिखा कि इतिहास इस काल को न केवल आर्थिक विकास और राजनीतिक स्थिरता के लिए बल्कि भारत के आत्मविश्वास को बहाल करने के लिए भी याद रखेगा। इसे भारत का निर्णायक क्षण बताते हुए नायडू ने कहा कि देश स्वर्ण युग में प्रवेश कर रहा है और विश्वास जताया कि भारत 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा। “मैंने अक्सर कहा है कि नरेंद्र मोदी भारत के लिए सही समय पर सही नेता थे। 12 वर्षों के बाद, यह विश्वास और मजबूत हुआ है। इतिहास इस अवधि को केवल आर्थिक विकास या राजनीतिक स्थिरता के लिए नहीं, बल्कि किसी गहरी चीज़ के लिए याद रखेगा – भारत के आत्मविश्वास की बहाली। मेरा मानना ​​​​है कि

अमेरिका ने 100 चीनी कंपनियां को 'मिलिट्री लिस्ट' में डाला:दावा- ये कंपनियां चीनी सेना की मदद कर रहीं, कंपनियों पर प्रतिबंधों का खतरा बढ़ा

अमेरिका ने 100 चीनी कंपनियां को 'मिलिट्री लिस्ट' में डाला:दावा- ये कंपनियां चीनी सेना की मदद कर रहीं, कंपनियों पर प्रतिबंधों का खतरा बढ़ा

अमेरिका ने अलीबाबा ग्रुप, बायडू और BYD जैसी दिग्गज चीनी टेक और ऑटोमोबाइल कंपनियों को ‘चीनी मिलिट्री कंपनियों’ की लिस्ट में शामिल किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अनुसार ये कंपनियां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानी चीनी सेना और वहां की सुरक्षा एजेंसियों की मदद करती हैं। अमेरिका ने नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) के सेक्शन 1260H के तहत अब तक 100 से अधिक चीनी कंपनियों को इस ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। क्या है अमेरिका का सेक्शन 1260H और इसका असर? क्या है यह कानून: अमेरिकी नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) का सेक्शन 1260H अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को उन चीनी कंपनियों की पहचान कर उन्हें लिस्टेड करने की शक्ति देता है, जो अमेरिका में कमर्शियल काम करती हैं, लेकिन बैकएंड पर चीनी सेना को मजबूत बना रही हैं। क्यों किया जाता है लिस्टेड: अमेरिका को आशंका है कि चीन ‘मिलिट्री-सिविल फ्यूज़न’ नीति के तहत नागरिक और व्यावसायिक तकनीकों का इस्तेमाल अपनी सेना को आधुनिक और घातक बनाने में कर रहा है। क्या होता है असर: इस लिस्ट में आने के बाद इन कंपनियों पर कई तरह के अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिकी कंपनियां और निवेशक इनमें निवेश करने से कतराते हैं। इससे इनके ग्लोबल सप्लाई चेन और बिजनेस ऑपरेशंस पर बुरा असर पड़ता है। अलीबाबा, टेनसेंट और शाओमी जैसी बड़ी कंपनियों पर शिकंजा पेंटागन द्वारा जारी की गई इस नई लिस्ट में चीन के लगभग हर बड़े सेक्टर की दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इनमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलीबाबा, सर्च इंजन और एआई सेक्टर की बड़ी कंपनी बायडू, और दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनियों में से एक BYD शामिल है। इनके अलावा इस लिस्ट में बैटरी बनाने वाली कंपनी CATL, गेमिंग और सोशल मीडिया की बड़ी कंपनी टेनसेंट, टेलिकॉम कंपनी हुवावे और ड्रोन बनाने वाली कंपनी DJI को भी शामिल किया गश है। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग डिवाइस बनाने वाली टीपी-लिंक, रोबोटिक्स फर्म यूनिट्री , सर्विलांस कैमरा बनाने वाली हिकविज़), और कोस्को शिपिंग जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस सूची में शामिल हैं। चीन की बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर जैसे चाइना मोबाइल, चाइना टेलीकॉम, और चाइना यूनिकॉम को भी सेना से जुड़े होने के कारण इसमें डाला गया है। पेंटागन ने दिया चीनी सरकारी मंत्रालयों और सेना से संबंधों का हवाला अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इन कंपनियों को लिस्टेड करने के लिए ठोस कानूनी और रणनीतिक कारण बताए हैं। पेंटागन का कहना है कि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीन के सरकारी तंत्र और सैन्य संस्थानों से जुड़ी हुई हैं। आधिकारिक दस्तावेज में खास तौर पर ‘स्टेट-ओन्ड एसेट्स सुपरविज़न एंड एडमिनिस्ट्रेशन कमीशन’ (SASAC) और ‘मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ (MIIT) का ज़िक्र किया गया है। इसके अलावा चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्री फॉर नेशनल डिफेंस (SASTIND) और चीन की मुख्य सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ-साथ पीपुल्स आर्म्ड पुलिस व चीनी खुफिया और कानून प्रवर्तन (लॉ-इन्फोर्समेंट) एजेंसियों के साथ भी इन कंपनियों के संबंध का दावा अमेरिका ने किया है। चीन के ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ प्रोग्राम पर अमेरिका की नजर पेंटागन के नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि ये कंपनियां चीन के रणनीतिक तकनीकी विकास के कई बड़े प्रोग्राम्स में हिस्सा ले रही हैं। इनमें चीन के महत्वाकांक्षी ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ जैसी स्कीम्स शामिल हैं। वाशिंगटन का मानना है कि बीजिंग इन सरकारी स्कीम्स के जरिए उन्नत तकनीकों को विकसित कर रहा है ताकि तकनीक के मामले में अमेरिका को पछाड़ा जा सके और इन तकनीकों का इस्तेमाल रक्षा और सैन्य तैयारियों में किया जा सके। लिस्ट से बाहर निकलने के लिए कंपनियां कर सकती हैं अपील अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस आधिकारिक दस्तावेज में यह भी साफ किया है कि यदि किसी कंपनी को लगता है कि उसे गलत तरीके से इस लिस्ट में डाला गया है, तो वह इस फैसले को चुनौती दे सकती है। पेंटागन ने इसके लिए एक प्रॉपर प्रोसेस और गाइडलाइंस जारी की हैं। लिस्टेड कंपनियां अपनी सफाई में सबूत पेश कर सकती हैं और नाम हटाने के लिए पुनर्विचार की अपील कर सकती हैं।

‘बीजेपी उन्हें स्वीकार नहीं करेगी’: ममता गुट ने बागी टीएमसी सांसदों पर ‘गद्दार’ तंज के साथ हमला बोला | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 11:50 IST टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों को “देशद्रोही” बताया, जिनके भाजपा में शामिल होने के फैसले से पता चलता है कि वे सिर्फ सत्ता के भूखे थे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आज़ाद। (एआईटीसी/फेसबुक) संकटग्रस्त तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने मंगलवार को भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने का प्रयास करने वाले असंतुष्ट सांसदों पर तीखा हमला किया और कहा कि उन्होंने “बंगाल के मतदाताओं को धोखा दिया है।” टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी, जिन्हें संसदीय विंग के मुख्य सचेतक के रूप में नियुक्त किया गया था, ने विद्रोही सांसदों को “देशद्रोही” बताया, जिनका भाजपा में शामिल होने का निर्णय स्पष्ट सबूत था कि वे सिर्फ सत्ता के भूखे थे। ये टिप्पणियां तब आईं जब टीएमसी, पहले से ही अपनी करारी चुनावी हार के बाद इस्तीफों, दलबदल और असंतोष के सार्वजनिक प्रदर्शन के साथ गहरे संकट का सामना कर रही थी, उसे एक और झटका लगा जब टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने घोषणा की कि 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए में शामिल होने की मांग की है। ममता गुट ने क्या कहा? कल्याण बनर्जी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “कथित तौर पर पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों के नाम उजागर नहीं किए गए हैं। हम जानना चाहते हैं कि पत्र को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उस पत्र पर हस्ताक्षर किसने किए? हालांकि, यह स्पष्ट है कि ये सांसद भूपेन्द्र यादव के घर गए थे, जिसका मतलब है कि वे भाजपा में शामिल हो गए हैं।” बनर्जी ने बागी सांसदों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने एक समय ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की थी और अब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना नेता चुना है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी किसी भी बागी सांसद को स्वीकार नहीं करेगी. उन्होंने कहा, “उनमें कोई राजनीतिक नैतिकता नहीं है। वे भूपेन्द्र यादव के आवास पर गए और जब सुवेंदु अधिकारी इस मामले पर चर्चा करने आए, तो यह स्पष्ट था कि उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। लोग मूर्ख नहीं हैं; वे सब कुछ देख रहे हैं।” आरजी कर हादसा कल्याण बनर्जी ने आगे भाजपा पर आरजी कर अस्पताल बलात्कार-हत्या की घटना का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया, जहां 2024 में 31 वर्षीय स्नातकोत्तर रेजिडेंट डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी थीं, जबकि भाजपा ने मामले का राजनीतिकरण किया। इस घटना ने पूरे पश्चिम बंगाल में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और टीएमसी के भीतर घर्षण का एक प्रमुख स्रोत बनकर उभरा, कई नेताओं ने स्थिति से निपटने के लिए पार्टी के तरीके पर असंतोष व्यक्त किया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘बीजेपी उन्हें स्वीकार नहीं करेगी’: ममता गुट ने बागी टीएमसी सांसदों पर ‘देशद्रोही’ तंज कसा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तृणमूल कांग्रेस संकट(टी)ममता बनर्जी(टी)टीएमसी ममता गुट(टी)टीएमसी बागी सांसद(टी)टीएमसी विद्रोह(टी)टीएमसी लोकसभा विद्रोह(टी)बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए(टी)लोकसभा राजनीति(टी)बंगाल राजनीति(टी)कल्याण बनर्जी

‘सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं’: टीएमसी की बागी सांसद काकोली ने 40 साल बाद ममता छोड़ने पर खुलकर बात की | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 11:23 IST काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उन्होंने पिछले 40 वर्षों से ममता बनर्जी का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने एनडीए में शामिल होने के फैसले के पीछे कुशासन और अराजकता का हवाला दिया। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार (फाइल इमेज) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार पार्टी के लोकसभा सदस्यों के भीतर विद्रोह का एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं, उन्होंने दावा किया है कि कम से कम 20 असंतुष्ट सांसद अब सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने के लिए बातचीत कर रहे हैं, जो उस पार्टी के लिए एक अभूतपूर्व झटका है, जिसकी कभी पश्चिम बंगाल में लगभग निर्विवाद वफादारी थी। दस्तीदार ने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ काम कर रही थीं, यहां तक ​​कि 2011 में सत्ता संभालने से पहले भी। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था में पार्टी के खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए एनडीए को समर्थन देने के अपने फैसले को उचित ठहराया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारी पार्टी के कुछ नेताओं की इच्छा के अनुसार काम कर रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप 2026 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी की करारी हार हुई। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “बहुत सारी वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं, जो आज साबित हो रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और फिल्म उद्योग जैसे विभिन्न क्षेत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं, कानून और व्यवस्था इष्टतम नहीं थी, और सरकारी अधिकारियों पर कुछ नेतृत्व की सनक और इच्छा के अनुसार काम करने का बहुत अधिक दबाव था, जो राज्य के विकास के लिए अनुकूल कामकाजी माहौल नहीं है।” उन्होंने उन आरोपों पर भी पलटवार किया कि वह हाल की चुनावी हार के कारण पार्टी छोड़ रही हैं, उन्होंने कहा कि उन्होंने ममता बनर्जी को एक “मार्गदर्शक, संरक्षक और एक नेता” के रूप में देखा था और जब वह सत्ता में नहीं थीं तब भी उन्होंने उनका समर्थन किया था। ‘सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं’ काकोली घोष दस्तीदारबारासात से तीन बार के सांसद, ने पहले कई प्रमुख संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं, जिनमें अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और पार्टी के बांग्ला जननी आउटरीच कार्यक्रम से जुड़ी भूमिकाएं शामिल थीं। पार्टी के सभी पदों से उनके इस्तीफे से पार्टी के भीतर व्यापक असंतोष की अटकलें शुरू हो गईं। अपना रुख स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि असंतुष्ट सांसदों ने संसद में अलग बैठने की व्यवस्था के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा था और वे पिछले कुछ वर्षों में अराजकता और कुशासन का हवाला देते हुए पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र और भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के साथ काम करने के इच्छुक थे। कई टीएमसी नेताओं द्वारा एनडीए के साथ गठबंधन करने के लिए असंतुष्ट सांसदों की आलोचना करने पर दस्तीदार ने कहा, “मैं शुरू से ही ममता बनर्जी के साथ रहा हूं। मैंने 2001 में वाम मोर्चा के खिलाफ एक पार्षद के रूप में लड़ाई लड़ी थी। मैं एक राजनीतिक परिवार से आता हूं। मेरा सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैंने बहुत सह लिया (मेरा सिर कट सकता है, लेकिन मैं कभी नहीं झुकूंगा। मैंने काफी सहन किया है)। ऐसे लोगों की बातों का बिल्कुल कोई असर नहीं होता है।” मैं।” #देखें | दिल्ली: लोकसभा सांसद काकोली घोष का कहना है, “मेरा सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं…मैंने बहुत सह लिया…2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद मैं यहां नहीं आई; मैं यहां 40 साल से लड़ रही हूं। और जैसा कि मैंने कहा, ऐसे लोगों की बातें बिल्कुल… pic.twitter.com/KKmfQlpUFl– एएनआई (@ANI) 9 जून, 2026 उन्होंने किसी भी धमकी की रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया, जिसने सांसदों के एनडीए में शामिल होने के फैसले को प्रभावित किया। उन्होंने कहा, “आप खुद देख सकते हैं, मैं यहां अकेली बैठी हूं। धमकी कहां है?… हम सभी 20 सांसद बैठे और हस्ताक्षर किए।” यह पूछे जाने पर कि क्या बनर्जी ने इस्तीफा देने के बाद उनसे संपर्क करने की कोशिश की, टीएमपी सांसद ने दावा किया, “उस तरफ से किसी ने भी पहुंचने की कोशिश नहीं की।” उन्होंने पार्टी द्वारा नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें ”बस किनारे कर दिया गया।” उनकी टिप्पणी पार्टी के भीतर गहराते संकट के बीच आई है, जिसमें चुनावी हार के बाद इस्तीफे, दलबदल और असंतोष के सार्वजनिक प्रदर्शनों की एक श्रृंखला देखी गई है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं’: टीएमसी की बागी सांसद काकोली ने 40 साल बाद ममता छोड़ने पर खुलकर बात की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)काकोली घोष दस्तीदार(टी)काकोली घोष दस्तीदार विद्रोह(टी)तृणमूल कांग्रेस विद्रोह(टी)टीएमसी संकट(टी)टीएमसी बागी सांसद(टी)एनडीए गठबंधन वार्ता(टी)ममता बनर्जी नेतृत्व(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)लोकसभा असंतुष्ट सांसद(टी)टीएमसी चुनावी हार

स्ट्रीट डॉग की मौत पर रो पड़ीं मंजरी फडनिस:एक्ट्रेस ने कुत्ते की पीट-पीटकर हत्या का दावा किया, न्याय की मांग की

स्ट्रीट डॉग की मौत पर रो पड़ीं मंजरी फडनिस:एक्ट्रेस ने कुत्ते की पीट-पीटकर हत्या का दावा किया, न्याय की मांग की

एक्ट्रेस मंजरी फडनिस ने एक स्ट्रीट कुत्ते की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले पर गहरा दुख जताया है। माइकी की देखभाल मंजरी और उनकी सोसायटी के अन्य निवासी पिछले सात सालों से कर रहे थे। मंजरी ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल वीडियो शेयर कर बताया कि माइकी नाम का लंबे बालों वाला स्ट्रीट कुत्ता था, जिसे उसके परिवार ने छोड़ दिया था। वह 2019-20 से सोसायटी में रह रहा था। कुछ समय पहले उसके अचानक लापता होने के बाद निवासी उसकी तलाश में जुट गए थे। उन्होंने बताया कि माइकी को खोजने के लिए पोस्टर लगाए गए, सुरक्षा गार्डों और स्टाफ से पूछताछ की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। मंजरी ने दावा किया- माइकी पर हमला हुआ मंजरी के अनुसार, बाद में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि माइकी पर उस समय हमला किया गया जब वह बिल्डिंग के बेसमेंट क्षेत्र के पास सो रहा था। एक्ट्रेस ने आरोप लगाया कि उसके सिर पर किसी बड़े डंडे या लोहे की रॉड से वार किया गया, जिसके बाद उसे सीढ़ियों के पास घसीटकर और मारा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि घायल कुत्ते को बाद में एक बोरे में डालकर बिल्डिंग के पीछे स्थित खाड़ी क्षेत्र में फेंक दिया गया। मंजरी ने कहा कि फिलहाल उसके शव की तलाश की जा रही है। मंजरी ने माइकी के लिए न्याय मांगा वीडियो में इमोशनल होते हुए मंजरी ने स्ट्रीट एनिमल की सुरक्षा पर सवाल उठाए और इस मामले में न्याय की मांग की। उन्होंने कहा कि माइकी बेहद शांत स्वभाव का कुत्ता था और सोसायटी के लोग उसकी देखभाल करते थे। वे उसे घर ले जाकर नहलाते, ग्रूमिंग करते और उसके बाल सुलझाते थे। कई फिल्मों में भी बना चुकी हैं पहचान मंजरी फडनिस पशु प्रेमी हैं और सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी पोस्ट शेयर करती हैं। करियर की बात करें तो उन्हें इमरान खान और जेनेलिया डिसूजा के साथ फिल्म ‘जाने तू… या जाने ना’ से पहचान मिली। वह ‘ग्रैंड मस्ती’, ‘वार्निंग’, ‘किस किसको प्यार करूं’, ‘होटल मिलन’ समेत हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा के कई प्रोजेक्ट्स में काम कर चुकी हैं।