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अमेरिका ने 100 चीनी कंपनियां को 'मिलिट्री लिस्ट' में डाला:दावा- ये कंपनियां चीनी सेना की मदद कर रहीं, कंपनियों पर प्रतिबंधों का खतरा बढ़ा

अमेरिका ने 100 चीनी कंपनियां को 'मिलिट्री लिस्ट' में डाला:दावा- ये कंपनियां चीनी सेना की मदद कर रहीं, कंपनियों पर प्रतिबंधों का खतरा बढ़ा

अमेरिका ने अलीबाबा ग्रुप, बायडू और BYD जैसी दिग्गज चीनी टेक और ऑटोमोबाइल कंपनियों को ‘चीनी मिलिट्री कंपनियों’ की लिस्ट में शामिल किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अनुसार ये कंपनियां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानी चीनी सेना और वहां की सुरक्षा एजेंसियों की मदद करती हैं। अमेरिका ने नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) के सेक्शन 1260H के तहत अब तक 100 से अधिक चीनी कंपनियों को इस ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। क्या है अमेरिका का सेक्शन 1260H और इसका असर? क्या है यह कानून: अमेरिकी नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) का सेक्शन 1260H अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को उन चीनी कंपनियों की पहचान कर उन्हें लिस्टेड करने की शक्ति देता है, जो अमेरिका में कमर्शियल काम करती हैं, लेकिन बैकएंड पर चीनी सेना को मजबूत बना रही हैं। क्यों किया जाता है लिस्टेड: अमेरिका को आशंका है कि चीन ‘मिलिट्री-सिविल फ्यूज़न’ नीति के तहत नागरिक और व्यावसायिक तकनीकों का इस्तेमाल अपनी सेना को आधुनिक और घातक बनाने में कर रहा है। क्या होता है असर: इस लिस्ट में आने के बाद इन कंपनियों पर कई तरह के अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिकी कंपनियां और निवेशक इनमें निवेश करने से कतराते हैं। इससे इनके ग्लोबल सप्लाई चेन और बिजनेस ऑपरेशंस पर बुरा असर पड़ता है। अलीबाबा, टेनसेंट और शाओमी जैसी बड़ी कंपनियों पर शिकंजा पेंटागन द्वारा जारी की गई इस नई लिस्ट में चीन के लगभग हर बड़े सेक्टर की दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इनमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलीबाबा, सर्च इंजन और एआई सेक्टर की बड़ी कंपनी बायडू, और दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनियों में से एक BYD शामिल है। इनके अलावा इस लिस्ट में बैटरी बनाने वाली कंपनी CATL, गेमिंग और सोशल मीडिया की बड़ी कंपनी टेनसेंट, टेलिकॉम कंपनी हुवावे और ड्रोन बनाने वाली कंपनी DJI को भी शामिल किया गश है। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग डिवाइस बनाने वाली टीपी-लिंक, रोबोटिक्स फर्म यूनिट्री , सर्विलांस कैमरा बनाने वाली हिकविज़), और कोस्को शिपिंग जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस सूची में शामिल हैं। चीन की बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर जैसे चाइना मोबाइल, चाइना टेलीकॉम, और चाइना यूनिकॉम को भी सेना से जुड़े होने के कारण इसमें डाला गया है। पेंटागन ने दिया चीनी सरकारी मंत्रालयों और सेना से संबंधों का हवाला अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इन कंपनियों को लिस्टेड करने के लिए ठोस कानूनी और रणनीतिक कारण बताए हैं। पेंटागन का कहना है कि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीन के सरकारी तंत्र और सैन्य संस्थानों से जुड़ी हुई हैं। आधिकारिक दस्तावेज में खास तौर पर ‘स्टेट-ओन्ड एसेट्स सुपरविज़न एंड एडमिनिस्ट्रेशन कमीशन’ (SASAC) और ‘मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ (MIIT) का ज़िक्र किया गया है। इसके अलावा चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्री फॉर नेशनल डिफेंस (SASTIND) और चीन की मुख्य सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ-साथ पीपुल्स आर्म्ड पुलिस व चीनी खुफिया और कानून प्रवर्तन (लॉ-इन्फोर्समेंट) एजेंसियों के साथ भी इन कंपनियों के संबंध का दावा अमेरिका ने किया है। चीन के ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ प्रोग्राम पर अमेरिका की नजर पेंटागन के नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि ये कंपनियां चीन के रणनीतिक तकनीकी विकास के कई बड़े प्रोग्राम्स में हिस्सा ले रही हैं। इनमें चीन के महत्वाकांक्षी ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ जैसी स्कीम्स शामिल हैं। वाशिंगटन का मानना है कि बीजिंग इन सरकारी स्कीम्स के जरिए उन्नत तकनीकों को विकसित कर रहा है ताकि तकनीक के मामले में अमेरिका को पछाड़ा जा सके और इन तकनीकों का इस्तेमाल रक्षा और सैन्य तैयारियों में किया जा सके। लिस्ट से बाहर निकलने के लिए कंपनियां कर सकती हैं अपील अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस आधिकारिक दस्तावेज में यह भी साफ किया है कि यदि किसी कंपनी को लगता है कि उसे गलत तरीके से इस लिस्ट में डाला गया है, तो वह इस फैसले को चुनौती दे सकती है। पेंटागन ने इसके लिए एक प्रॉपर प्रोसेस और गाइडलाइंस जारी की हैं। लिस्टेड कंपनियां अपनी सफाई में सबूत पेश कर सकती हैं और नाम हटाने के लिए पुनर्विचार की अपील कर सकती हैं।

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अमेरिका ने अलीबाबा ग्रुप, बायडू और BYD जैसी दिग्गज चीनी टेक और ऑटोमोबाइल कंपनियों को ‘चीनी मिलिट्री कंपनियों’ की लिस्ट में शामिल किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अनुसार ये कंपनियां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानी चीनी सेना और वहां की सुरक्षा एजेंसियों की मदद करती हैं। अमेरिका ने नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) के सेक्शन 1260H के तहत अब तक 100 से अधिक चीनी कंपनियों को इस ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। क्या है अमेरिका का सेक्शन 1260H और इसका असर? क्या है यह कानून: अमेरिकी नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) का सेक्शन 1260H अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को उन चीनी कंपनियों की पहचान कर उन्हें लिस्टेड करने की शक्ति देता है, जो अमेरिका में कमर्शियल काम करती हैं, लेकिन बैकएंड पर चीनी सेना को मजबूत बना रही हैं। क्यों किया जाता है लिस्टेड: अमेरिका को आशंका है कि चीन ‘मिलिट्री-सिविल फ्यूज़न’ नीति के तहत नागरिक और व्यावसायिक तकनीकों का इस्तेमाल अपनी सेना को आधुनिक और घातक बनाने में कर रहा है। क्या होता है असर: इस लिस्ट में आने के बाद इन कंपनियों पर कई तरह के अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिकी कंपनियां और निवेशक इनमें निवेश करने से कतराते हैं। इससे इनके ग्लोबल सप्लाई चेन और बिजनेस ऑपरेशंस पर बुरा असर पड़ता है। अलीबाबा, टेनसेंट और शाओमी जैसी बड़ी कंपनियों पर शिकंजा पेंटागन द्वारा जारी की गई इस नई लिस्ट में चीन के लगभग हर बड़े सेक्टर की दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इनमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलीबाबा, सर्च इंजन और एआई सेक्टर की बड़ी कंपनी बायडू, और दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनियों में से एक BYD शामिल है। इनके अलावा इस लिस्ट में बैटरी बनाने वाली कंपनी CATL, गेमिंग और सोशल मीडिया की बड़ी कंपनी टेनसेंट, टेलिकॉम कंपनी हुवावे और ड्रोन बनाने वाली कंपनी DJI को भी शामिल किया गश है। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग डिवाइस बनाने वाली टीपी-लिंक, रोबोटिक्स फर्म यूनिट्री , सर्विलांस कैमरा बनाने वाली हिकविज़), और कोस्को शिपिंग जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस सूची में शामिल हैं। चीन की बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर जैसे चाइना मोबाइल, चाइना टेलीकॉम, और चाइना यूनिकॉम को भी सेना से जुड़े होने के कारण इसमें डाला गया है। पेंटागन ने दिया चीनी सरकारी मंत्रालयों और सेना से संबंधों का हवाला अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इन कंपनियों को लिस्टेड करने के लिए ठोस कानूनी और रणनीतिक कारण बताए हैं। पेंटागन का कहना है कि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीन के सरकारी तंत्र और सैन्य संस्थानों से जुड़ी हुई हैं। आधिकारिक दस्तावेज में खास तौर पर ‘स्टेट-ओन्ड एसेट्स सुपरविज़न एंड एडमिनिस्ट्रेशन कमीशन’ (SASAC) और ‘मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ (MIIT) का ज़िक्र किया गया है। इसके अलावा चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्री फॉर नेशनल डिफेंस (SASTIND) और चीन की मुख्य सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ-साथ पीपुल्स आर्म्ड पुलिस व चीनी खुफिया और कानून प्रवर्तन (लॉ-इन्फोर्समेंट) एजेंसियों के साथ भी इन कंपनियों के संबंध का दावा अमेरिका ने किया है। चीन के ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ प्रोग्राम पर अमेरिका की नजर पेंटागन के नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि ये कंपनियां चीन के रणनीतिक तकनीकी विकास के कई बड़े प्रोग्राम्स में हिस्सा ले रही हैं। इनमें चीन के महत्वाकांक्षी ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ जैसी स्कीम्स शामिल हैं। वाशिंगटन का मानना है कि बीजिंग इन सरकारी स्कीम्स के जरिए उन्नत तकनीकों को विकसित कर रहा है ताकि तकनीक के मामले में अमेरिका को पछाड़ा जा सके और इन तकनीकों का इस्तेमाल रक्षा और सैन्य तैयारियों में किया जा सके। लिस्ट से बाहर निकलने के लिए कंपनियां कर सकती हैं अपील अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस आधिकारिक दस्तावेज में यह भी साफ किया है कि यदि किसी कंपनी को लगता है कि उसे गलत तरीके से इस लिस्ट में डाला गया है, तो वह इस फैसले को चुनौती दे सकती है। पेंटागन ने इसके लिए एक प्रॉपर प्रोसेस और गाइडलाइंस जारी की हैं। लिस्टेड कंपनियां अपनी सफाई में सबूत पेश कर सकती हैं और नाम हटाने के लिए पुनर्विचार की अपील कर सकती हैं।

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