रानी पद्मावती का जौहर कायरता नहीं बहादुरी:स्वरा भास्कर के बयान पर भड़के धीरेंद्र शास्त्री, धर्म परिवर्तन पर भी तंज कसा

धीरेंद्र शास्त्री ने स्वरा भास्कर के उस बयान की निंदा की है, जिसमें उन्होंने रानी पद्मावती के जौहर को कायरता कहा था। स्वरा बयान पर सफाई दे चुके हैं, लेकिन विवाद जारी है। अब बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने स्वरा भास्कर के जौहर को ‘कायरता’ कहने वाले बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जौहर कायरता नहीं, बल्कि बहादुरी, भक्ति और पति के प्रति समर्पण है। यह बयान पश्चिम बंगाल के लीलुआ वर्कशॉप ग्राउंड में चल रही ‘हनुमत कथा’ के दूसरे दिन दिया गया। कार्यक्रम में दिए बयान के मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनसे इस मुद्दे पर बिना बात किए रहा नहीं जा रहा था। धीरेंद्र शास्त्री- आप संस्कृति के बारे में क्या जानते हैं? धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, ‘एक तथाकथित महिला ने रानी पद्मावती के बारे में बयान दिया। उस महिला ने जौहर को कायरता कहा। ऐ नाककटु, चंडालन, जौहर कायरता नहीं है, यह बहादुरी, भक्ति और पति के प्रति समर्पण है। आप जौहर की संस्कृति के बारे में क्या जानते हैं?’ आगे उन्होंने कहा, ‘जो लोग आस्था का विरोध करते हैं, वे जौहर को समझ ही नहीं सकते। कुछ लोग तो भईया को सईयां बना देते हैं, वे जौहर के बारे में क्या जानेंगे? अगर मेरी बातों से किसी को बुरा लगे या उनकी भावनाएं आहत हों, तो भी मैं सच ही कहूंगा।’ क्या था स्वरा भास्कर का पूरा बयान, क्यों हुआ विवाद? 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ टॉक में स्वरा ने फिल्म पद्मावत के जौहर सीन का जिक्र करते हुए कहा की इससे रेप सर्वाइवर्स तक गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने आगे कहा ‘क्या हम सर्वाइवर्स को यही बताना चाहते हैं कि वे जीने के लायक नहीं हैं, कि अगर आप सच में इज्जतदार और बहादुर महिला होतीं, तो आपने खुद को मार लिया होता? क्या हम यह कह रहे हैं कि रेप किसी महिला की जिंदगी का अंत है?’ एक सीन में गर्भवती महिला का पेट दिखाया गया है जो जौहर करने जा रही है। स्वरा ने कहा था, “यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया था और मैंने थियेटर में ही ‘छी’ कह दिया था। 5 दिन विचार करने के बाद मैंने डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को ओपन लेटर लिखा था।” स्वरा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन पर ऐतिहासिक बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाया था। विवाद बढ़ने पर स्वरा ने दी सफाई स्वरा के बयान पर विवाद हो गया। कुछ समय बाद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर मेरा एक क्लिप वायरल हो रहा है। मुझसे पूछा गया था कि पद्मावत देखने के बाद मैंने ओपन लेटर क्यों लिखा था। मैं साफ करना चाहती हूं कि मैंने रानी पद्मावती या महल की बाकी महिलाओं को कायर नहीं कहा। अगर गाली देनी है तो सही बात पर दीजिए। मैंने कहा था कि अगर मैं रेप पीड़िता होती, तो क्लाइमेक्स देखकर मुझे लगता कि रेप के बाद जिंदा बचकर मैंने कायरता दिखाई है।” ‘क्या महिला की पवित्रता उसकी जान से ज्यादा कीमती है?’ स्वरा ने कहा कि देश में आज भी रेप एक महामारी जैसा बन चुका है। हाल ही में दिल्ली में चलती बस में हुए गैंगरेप का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हमें ऐसी फिल्में बनानी चाहिए जो संदेश दें कि महिला की पवित्रता उसकी जिंदगी से ज्यादा कीमती है? उन्होंने निर्भया केस का उदाहरण देते हुए कहा कि निर्भया ने आखिरी सांस तक अपनी जिंदगी के लिए लड़ाई लड़ी थी। किसी भी महिला की जीने की इच्छा को कम नहीं आंकना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी से सोशल मीडिया पर हुई बहस स्वरा के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रियंका ने लिखा- ‘अगर विकल्प विजेताओं की गुलाम बनने और उनके हरम में रखी जाने वाली सेक्स स्लेव बनने के बीच हो, तो कई महिलाएं पहला विकल्प चुनेंगी। कुछ महिलाएं दूसरा विकल्प चुन सकती हैं। हालांकि, आप अपनी पसंद के अनुसार इनमें से किसी एक को चुन सकते हैं। आपकी इस पसंद से कोई सहमत हो या असहमत, इस पर बहस की जा सकती है, लेकिन यह एक चॉइस थी।’ इस पर जवाब देते हुए स्वरा ने लिखा, “प्रियंका जी, आप असल बात नहीं समझ रही हैं। बात जौहर करने वाली महिलाओं की पसंद की नहीं, बल्कि इस बात की है कि हम किस चीज को महिमामंडित कर रहे हैं। क्या रेप के बाद किसी सर्वाइवर को जीने का हक नहीं है?” क्या है पद्मावत का जौहर सीन फिल्म में जौहर का सीन क्लाइमैक्स के पास आता है। अलाउद्दीन खिलजी की सेना राजपूतों को हरा देती है और चित्तौड़ के किले में घुस जाती है। दीपिका पादुकोण का किरदार ‘रानी पद्मावती’ किले की महिलाओं के साथ जौहर करती हैं। फिल्म में इसे पकड़े जाने से बचने के लिए खुद को आग के हवाले करने की घटना के तौर पर दिखाया गया है।
ट्रम्प के दामाद ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से मुलाकात की:पुतिन से चर्चा के एक दिन बाद कीव पहुंचे; रूस से युद्ध खत्म कराने पर चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर और दूत स्टीव विटकॉफ ने रविवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से अहम बातचीत की। यह बातचीत रूस के साथ चल रहे युद्ध को खत्म कराने की अमेरिकी कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए हुई। दोनों की यह कीव की पहली यात्रा थी। इससे एक दिन पहले उन्होंने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। बैठक के बाद विटकॉफ ने कहा, हमने बहुत सार्थक और महत्वपूर्ण बातचीत की। यह काफी गंभीर चर्चा थी। हम इससे बहुत उत्साहित हैं और जब तक जरूरत होगी, बातचीत जारी रखेंगे। कुशनर ने कहा कि इस यात्रा से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को काफी कुछ सीखने को मिला है। उम्मीद है कि इससे शांति की कोशिशों को आगे बढ़ाने के नए रास्ते मिलेंगे। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
8 मुस्लिम देशों ने इजराइली मंत्रियों की निंदा की:गाजा को खाली कराने की योजना पर बोले- यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन, शांति प्रयासों को खतरा

8 मुस्लिम बहुल देशों ने रविवार को इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना बनाने की बात कही थी। सऊदी अरब, जॉर्डन, UAE, तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। ये फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि जबरन विस्थापन की मांग को आधिकारिक नीति या व्यवहारिक कदमों में बदलने के गंभीर नतीजे होंगे। उनके मुताबिक, इससे शांति कायम करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को नुकसान पहुंचेगा। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटा:50 हजार फीट ऊपर तक पहुंची राख, 301 उड़ानें प्रभावित, कई यात्री एयरपोर्ट पर फंसे

इंडोनेशिया के माउंट अनाक क्राकाटोआ में रविवार को जोरदार विस्फोट हुआ। ज्वालामुखी से निकली राख करीब 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच गई। इससे जावा और सुमात्रा के कई इलाकों में हवाई यात्रा प्रभावित हुई। जकार्ता के मुख्य सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए उड़ानें रोकनी पड़ीं। एयरपोर्ट ऑपरेटर के मुताबिक, इससे 301 उड़ानें प्रभावित हुईं। इनमें 58 इंटरनेशनल फ्लाइट थीं। कई यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए। राख के कारण रनवे पर उड़ानें रोकनी पड़ीं ज्वालामुखी की राख हवा के साथ उड़कर एयरपोर्ट तक पहुंच गई थी। इसके बाद यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए एयरपोर्ट पर उड़ानें रोकनी पड़ीं। सिंगापुर एयरलाइंस ने रविवार की जकार्ता आने-जाने वाली सभी उड़ानें रद्द कर दीं। एयरएशिया ने भी कई उड़ानें रद्द या री-शेड्यूल कीं। गरुड़ इंडोनेशिया ने यात्रियों से एयरपोर्ट आने से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति और आधिकारिक डिजिटल चैनल चेक करने को कहा। लोगों को सावधान रहने की सलाह ज्वालामुखी की राख आसपास के इलाकों में भी फैल गई। ज्वालामुखी फटने के बाद कई लोगों की आंखों में जलन भी हुई। राख के कारण मछुआरों ने भी समुद्र में जाना और मछली पकड़ना बंद कर दिया। इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी BNPB ने लोगों से सावधान रहने को कहा है। लोगों को मास्क और आंखों पर चश्मा लगाने की सलाह दी गई है। इंडोनेशिया के 5 ज्वालामुखी अलर्ट लेवल-3 पर अनाक क्राकाटोआ में शुक्रवार देर रात से लगातार विस्फोट हो रहे हैं। यह 2 जुलाई से अलर्ट लेवल-3 पर है। इंडोनेशिया में यह दूसरा सबसे ऊंचा अलर्ट स्तर है। इसके अलावा माउंट सेमेरू, माउंट मेरापी, लेवोटोबी लाकी-लाकी और सिनाबुंग भी अलर्ट लेवल-3 पर हैं। रविवार को माउंट सेमेरू में भी विस्फोट हुआ। इससे ज्वालामुखी की चोटी से करीब 1 किलोमीटर ऊपर तक राख का गुबार पहुंच गया। ज्वालामुखी निगरानी एजेंसी PVMBG ने लोगों को इसके क्रेटर से कम से कम 5 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी है। एजेंसी ने गर्म राख और लावा के बहाव को लेकर भी चेतावनी दी है। अभी सुनामी का खतरा नहीं अधिकारियों के मुताबिक, अनाक क्राकाटोआ के विस्फोट से फिलहाल सुनामी का खतरा नहीं है। यह ज्वालामुखी उस जगह के पास बना है, जहां कभी क्राकाटोआ नाम का ज्वालामुखी था। 1883 में क्राकाटोआ में हुए भीषण विस्फोट के बाद सुनामी आई थी। इसमें 36 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। 2018 में अनाक क्राकाटोआ के विस्फोट से भी सुनामी आई थी। इसमें जावा और सुमात्रा द्वीपों पर 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटा:50 हजार फीट ऊपर तक पहुंची राख, 301 उड़ानें प्रभावित, कई यात्री एयरपोर्ट पर फंसे

इंडोनेशिया के माउंट अनाक क्राकाटोआ में रविवार को जोरदार विस्फोट हुआ। ज्वालामुखी से निकली राख करीब 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच गई। इससे जावा और सुमात्रा के कई इलाकों में हवाई यात्रा प्रभावित हुई। जकार्ता के मुख्य सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए उड़ानें रोकनी पड़ीं। एयरपोर्ट ऑपरेटर के मुताबिक, इससे 301 उड़ानें प्रभावित हुईं। इनमें 58 इंटरनेशनल फ्लाइट थीं। कई यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए। राख के कारण रनवे पर उड़ानें रोकनी पड़ीं ज्वालामुखी की राख हवा के साथ उड़कर एयरपोर्ट तक पहुंच गई थी। इसके बाद यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए एयरपोर्ट पर उड़ानें रोकनी पड़ीं। सिंगापुर एयरलाइंस ने रविवार की जकार्ता आने-जाने वाली सभी उड़ानें रद्द कर दीं। एयरएशिया ने भी कई उड़ानें रद्द या री-शेड्यूल कीं। गरुड़ इंडोनेशिया ने यात्रियों से एयरपोर्ट आने से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति और आधिकारिक डिजिटल चैनल चेक करने को कहा। लोगों को सावधान रहने की सलाह ज्वालामुखी की राख आसपास के इलाकों में भी फैल गई। ज्वालामुखी फटने के बाद कई लोगों की आंखों में जलन भी हुई। राख के कारण मछुआरों ने भी समुद्र में जाना और मछली पकड़ना बंद कर दिया। इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी BNPB ने लोगों से सावधान रहने को कहा है। लोगों को मास्क और आंखों पर चश्मा लगाने की सलाह दी गई है। इंडोनेशिया के 5 ज्वालामुखी अलर्ट लेवल-3 पर अनाक क्राकाटोआ में शुक्रवार देर रात से लगातार विस्फोट हो रहे हैं। यह 2 जुलाई से अलर्ट लेवल-3 पर है। इंडोनेशिया में यह दूसरा सबसे ऊंचा अलर्ट स्तर है। इसके अलावा माउंट सेमेरू, माउंट मेरापी, लेवोटोबी लाकी-लाकी और सिनाबुंग भी अलर्ट लेवल-3 पर हैं। रविवार को माउंट सेमेरू में भी विस्फोट हुआ। इससे ज्वालामुखी की चोटी से करीब 1 किलोमीटर ऊपर तक राख का गुबार पहुंच गया। ज्वालामुखी निगरानी एजेंसी PVMBG ने लोगों को इसके क्रेटर से कम से कम 5 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी है। एजेंसी ने गर्म राख और लावा के बहाव को लेकर भी चेतावनी दी है। अभी सुनामी का खतरा नहीं अधिकारियों के मुताबिक, अनाक क्राकाटोआ के विस्फोट से फिलहाल सुनामी का खतरा नहीं है। यह ज्वालामुखी उस जगह के पास बना है, जहां कभी क्राकाटोआ नाम का ज्वालामुखी था। 1883 में क्राकाटोआ में हुए भीषण विस्फोट के बाद सुनामी आई थी। इसमें 36 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। 2018 में अनाक क्राकाटोआ के विस्फोट से भी सुनामी आई थी। इसमें जावा और सुमात्रा द्वीपों पर 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
हनुमान अंश पार्ट-2 में दिखेगा नैनीताल का कैंची धाम:1960 के बाद की कहानी; 2006 में डायरेक्टर ने टेका था माथा, कमाई 107 करोड़ के पार

बाबा नीब करौरी के जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश के पार्ट-2 की तैयारी शुरू हो गई है। फिल्म के डायरेक्टर डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने इसकी घोषणा की है। पार्ट-2 में कैंची धाम की कहानी भी दिखाई जाएगी। बाबा 1960 के दशक की शुरुआत में कैंची पहुंचे थे और 15 जून 1964 को यहां हनुमान मंदिर व आश्रम की स्थापना हुई। जीवन के अंतिम वर्षों में कैंची उनका प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र रहा। डॉ. विशाल चतुर्वेदी 2006 के आसपास अपनी पोस्टिंग के दौरान कई बार कैंची धाम गए थे। यहीं उनका पहली बार नीम करोली बाबा की शिक्षाओं से परिचय हुआ। इस अनुभव का उन पर गहरा असर पड़ा और करीब दो दशकों बाद यही जुड़ाव ‘हनुमान अंश’ की कहानी की प्रेरणा बना। नैनीताल में भवाली के पास शिप्रा नदी के किनारे स्थित कैंची धाम बाबा से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है। नैनीताल में उनसे जुड़े चार प्रमुख धाम बताए जाते हैं- कैंची धाम, काकड़ीघाट, हनुमानगढ़ी और भूमियाधार। 2 करोड़ के बजट में बनी, 107 करोड़ के पार पहुंची कमाई ‘हनुमान अंश’ की सफलता ने फिल्म इंडस्ट्री को भी चौंका दिया। करीब 2 करोड़ रुपए के बजट में बनी यह फिल्म शुरुआत में सीमित स्क्रीन पर रिलीज हुई थी। पहले सप्ताह में इसके शो और स्क्रीन घटकर करीब 25 रह गए थे। इसके बाद दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और वर्ड ऑफ माउथ ने फिल्म की किस्मत बदल दी। चौथे सप्ताह तक फिल्म करीब 1,200 स्क्रीन तक पहुंच गई। अलग-अलग उद्योग स्रोतों में कमाई के आंकड़ों में अंतर है, लेकिन 4 सितंबर तक फिल्म करीब 107 करोड़ रुपए का कारोबार कर चुकी थी। यानी फिल्म ने अपनी लागत से 50 गुना से ज्यादा कमाई की। इस तरह ‘हनुमान अंश’ बेहद कम बजट में बड़ी कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है। फिल्म के अहम चेहरों के बारे में जानिए… डायरेक्टर- विशाल चतुर्वेदी फिल्म हनुमान अंश को 42 साल के विशाल चतुर्वेदी ने बनाया है। फिल्मों में करियर शुरू करने से पहले विशाल एक डॉक्टर थे। ये उनके निर्देशन की दूसरी फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 2013 की फिल्म वॉर्निंग डायरेक्ट की थी। एक्टर- शोभिनव सत्या एक्टर शोभिनव सत्या ने हनुमान अंश में नीम करोली बाबा का किरदार निभाया। उन्होंने FTII, पुणे से पढ़ाई की है। एक्टिंग के साथ वह असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकंड यूनिट डायरेक्टर, स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम कर चुके हैं। उन्होंने ‘महापौर’, ‘CID’, ‘रागिनी एमएमएस’ और ‘हैप्पीली एवर आफ्टर’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया है। एक्टर- चंदन के.आनंद चंदन आनंद ने फिल्म में डॉ. राम नंदन भोसले का अहम रोल निभाया है। इससे पहले वो कई फिल्मों और टीवी शो में साइड रोल कर चुके हैं। वह आलू चाट, पार्च्ड, लव आज कल, गुंजन सक्सेना, फाइटर, होमबाउंड जैसी फिल्मों के अलावा टीवी शो बैरिस्टर बाबू, ये प्यार न होगा कम, मीत जैसे कई शो कर चुके हैं। सिंगर-सुनील लोधी फिल्म ‘हनुमान अंश’ के चर्चित वायरल गाने ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ को सिंगर सुनील लोधी ने गाया है। 25 वर्षीय सुनील नेत्रहीन (दिव्यांग) हैं और वे मध्य प्रदेश के सागर जिले के छोटे से गांव ‘अगरा’ के रहने वाले हैं। वर्षों तक सुनील ने अपने गांव, स्थानीय मेलों और यहां तक कि ट्रेनों में भी भजन व बुंदेली लोकगीत गाए हैं। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो वायरल हुए, जिसके बाद उन्हें फिल्म ‘हनुमान अंश’ में गाने का मौका मिला। स्टीव जॉब्स से विराट कोहली तक बाबा नीम करोली के भक्त स्टीव जॉब्स: 1974 में बाबा से मिलने की चाह लेकर एप्पल कंपनी के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स भारत आए। तब तक बाबा के निधन को एक साल हो चुका था। जॉब्स कुछ दिन कैंची धाम में रहे। फिर वापस लौटकर 1976 में एप्पल की शुरुआत की। मार्क जकरबर्ग: 2015 में फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने भारत यात्रा के दौरान बताया था कि स्टीव जॉब्स ने फेसबुक के शुरुआती दिनों में उन्हें भारत के एक मंदिर जाने की सलाह दी थी। यह नीम करौली बाबा का कैंची धाम ही था। जूलिया रॉबर्ट्स: हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स हिंदू धर्म मानती हैं। उन्होंने 2010 में एक इंटरव्यू में बताया था कि नीम करौली बाबा की एक तस्वीर देखकर उनकी हिंदू धर्म में रुचि जागी थी। अनुष्का शर्मा और विराट कोहली: एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा नीम करौली बाबा को अपना गुरु बता चुकी हैं। 2022 में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा बेटी के साथ कैंची धाम गए थे। मनोज बाजपाई: एक्टर मनोज बाजपाई ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन’ से पहले करीब एक साल तक उनके पास कोई काम नहीं था। इसी समय वे फिल्म डायरेक्टर राम रेड्डी के साथ जुगनुमा फिल्म की रिसर्च के लिए कैंची धाम गए थे। यहां ध्यान करके उन्हें शांति और नई राह मिली। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… बाबा नीब करौरी के थप्पड़ ने बदल दी जिंदगी:हाथ जलने पर कंबल में दबाया, पलभर में गायब हुआ दर्द; बस हादसे में बची पूरी बारात कैंची धाम और बाबा नीब करौरी (आम बोलचाल में बाबा नीम करौली के नाम से भी जाने जाते हैं) से जुड़ी उनके भक्तों के जीवन में ऐसी अनेक घटनाएं दर्ज हैं, जिन्हें वे गुरु कृपा का प्रत्यक्ष अनुभव मानते हैं। ऐसी ही एक कहानी दिल्ली निवासी रवींद्र जोशी उर्फ ‘रब्बू दादा’ की है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन महाराजजी की सेवा में समर्पित कर दिया। (पढ़ें पूरी खबर)
दुनिया के नए नक्शे पर भारत की आपत्ति:कहा- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हमारे नक्शे के मुताबिक दिखें, UN में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का सपोर्ट किया था

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के इक्वल अर्थ मैप को लेकर अपनी स्थति साफ की है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि इस प्रस्ताव का मतलब किसी खास नक्शे को मान्यता देना नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव में देशों की सीमाओं, विवादित इलाकों या जगहों के नाम को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है। यह प्रस्ताव दुनिया का नक्शा इस तरह दिखाने से जुड़ा है, जिसमें हर देश का क्षेत्रफल उसके वास्तविक आकार के अनुपात में नजर आए। भारत ने अपने बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा क्षेत्र आधिकारिक भारतीय नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर उसका रुख स्पष्ट और अटल है। खबर अपडेट हो रही है…
दुनिया के नए नक्शे पर भारत की आपत्ति:कहा- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हमारे नक्शे के मुताबिक दिखें, UN में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का सपोर्ट किया था

भारत ने दुनिया के नए नक्शे को लेकर आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा इलाका भारत के आधिकारिक नक्शे के हिसाब से ही दिखना चाहिए। भारत के इलाके को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना उसे मंजूर नहीं है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के उस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया है, जिसमें दुनिया के नक्शे पर देशों और महाद्वीपों का आकार उनके असली क्षेत्रफल के करीब दिखाने की बात कही गई है। हालांकि, भारत ने साफ किया कि इसका मतलब किसी एक खास नक्शे को मंजूरी देना नहीं है। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को दुनिया के नक्शे को नए तरीके से दिखाने का प्रस्ताव पास किया। इस बदलाव से किसी देश या महाद्वीप का असली क्षेत्रफल नहीं बदलेगा। सिर्फ नक्शे पर उनका आकार पहले से कुछ छोटा या बड़ा नजर आएगा। अभी दुनिया में मर्केटर मैप काफी इस्तेमाल होता है। इसमें नक्शे पर ध्रुवों के पास के इलाके अपने असली आकार से बड़े दिखाई देते हैं। नए तरीके को इक्वल एरिया प्रोजेक्शन कहा गया है। इसमें अफ्रीका पहले से बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। एशिया के कुछ हिस्से भी पहले की तुलना में छोटे दिखाई दे सकते हैं। भारत की आपत्ति क्यों है भारत को UN के इस नए नक्शे के तरीके से आपत्ति नहीं है। भारत ने बराबर क्षेत्रफल दिखाने वाले नक्शे के प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया है। उसकी आपत्ति नक्शे में भारत के क्षेत्र को गलत तरीके से दिखाए जाने की संभावना को लेकर है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि यह प्रस्ताव किसी खास नक्शे, नक्शा बनाने के तरीके या देशों की सीमाओं को मंजूरी नहीं देता। इसलिए भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा संप्रभु क्षेत्र भारत के आधिकारिक नक्शे के मुताबिक ही दिखाया जाना चाहिए। भारत के क्षेत्र का कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत: क्षेत्रफल वही, आकार बड़ा दिख सकता है भारत की वास्तविक जमीन, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या क्षेत्रफल में कोई बदलाव नहीं होगा। यह बदलाव देशों की सीमाएं बदलने वाला नहीं, बल्कि नक्शे पर पृथ्वी को दिखाने का तरीका बदलने वाला है। भारत का नक्शा देखने में भी थोड़ा अलग दिख सकता है, लेकिन भारत के मामले में बदलाव बहुत बड़ा नहीं होगा। नया नक्शा क्षेत्रफल सही अनुपात में दिखाता है। पुराने नक्शे में भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपने आकार से छोटे और ध्रुवों के पास के इलाके बड़े दिखते हैं। भारत भूमध्य रेखा से बहुत दूर नहीं है, इसलिए पुराने नक्शे में भी उसका आकार कुछ हद तक छोटा दिखता है। भारत के लिए इसका मतलब क्षेत्रफल: बिल्कुल वही रहेगा। सीमाएं: नहीं बदलेंगी। भारत की आकृति: थोड़ी बदली हुई/कम खिंची हुई दिखाई दे सकती है। दूसरे देशों की तुलना में आकार: भारत कुछ बड़ा दिखाई दे सकता है, खासकर जब उसकी तुलना यूरोप, रूस, कनाडा जैसे ज्यादा उत्तरी देशों से की जाए। अफ्रीका पर असर: सबसे ज्यादा नजर आएगा, क्योंकि उसका वास्तविक आकार पुराने मर्केटर नक्शे की तुलना में बहुत बड़ा दिखाई देगा। मौजूदा नक्शे में आखिर दिक्कत क्या थी? दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नक्शों में से एक मर्केटर नक्शा है। इसे यूरोपियन मैप मेकर जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। इसका मकसद समुद्र में जहाजों के रास्ते और दिशा को समझना आसान बनाना था। लेकिन पूरी गोल धरती को सपाट नक्शे पर दिखाने की वजह से इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार असल से अलग नजर आने लगता है। जैसे-जैसे कोई इलाका भूमध्य रेखा से दूर जाता है, वह नक्शे पर जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के कई इलाके असल से काफी बड़े नजर आते हैं। ग्रीनलैंड इसका सबसे मशहूर उदाहरण है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका के लगभग बराबर दिखाई देता है। लेकिन असल में दोनों के आकार में बहुत बड़ा अंतर है। ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह लगभग डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के बराबर है। वहीं अफ्रीका का क्षेत्रफल करीब 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। यानी अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। फिर भी मर्केटर नक्शे को देखकर दोनों का आकार लगभग एक जैसा लग सकता है। यही वह फर्क है जिसे अब कम करने की कोशिश हो रही है। अफ्रीकी देश नक्शा बदलने की मांग क्यों कर रहे थे? अफ्रीकी देशों का कहना है कि बात सिर्फ नक्शे पर किसी देश या महाद्वीप के छोटा-बड़ा दिखने की नहीं है। दुनिया का नक्शा यह भी तय करता है कि हम अलग-अलग हिस्सों को किस नजर से देखते हैं। UN के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया था कि मर्केटर नक्शे में अफ्रीका का वास्तविक आकार काफी छोटा नजर आता है। लंबे समय तक ऐसी तस्वीर देखने से लोगों के मन में अफ्रीका के आकार और वैश्विक महत्व को लेकर गलत धारणा बन सकती है। प्रस्ताव में लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि नक्शे में इन क्षेत्रों का छोटा नजर आना उनकी विकास जरूरतों, बुनियादी ढांचे और आर्थिक क्षमता को भी कम करके आंकने की धारणा बना सकता है। अफ्रीकी देश टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा कि नक्शे सिर्फ भूगोल समझने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा और लोगों की सोच को भी प्रभावित करते हैं। यह प्रस्ताव टोगो ने पेश किया था और इसे अफ्रीकी संघ का समर्थन मिला। फ्रांस भी मर्केटर मैप छोड़ने की तैयारी में UN में मतदान से पहले फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने कहा कि उनका देश मर्केटर मैप की जगह ऐसे नक्शों का इस्तेमाल करेगा, जिनमें देशों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही तरीके से दिखाई दे। फ्रांस अब एकर्ट IV प्रोजेक्शन का इस्तेमाल करेगा। एकर्ट IV नक्शा 1906 में जर्मन कार्टोग्राफर मैक्स एकर्ट-ग्राइफेंडॉर्फ ने बनाया था। उन्होंने दुनिया के नक्शे के छह अलग-अलग डिजाइन तैयार किए थे। इनमें चौथा नक्शा यानी एकर्ट IV क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे सटीक माना गया। एकर्ट IV और
ईरान बोला- US एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत पर मिसाइलें दागीं:नुकसान के बाद दोनों जहाज इलाका छोड़कर भागे, ईरानी जहाजों को परेशान कर रहे थे

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और एक युद्धपोत पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। IRGC ने बताया कि दोनों अमेरिकी जहाज ईरानी जहाजों को परेशान कर रहे थे और ईरान की समुद्री नाकाबंदी में शामिल थे। हमले में दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा। इसके बाद वे इलाका छोड़कर चले गए। हालांकि, ईरान ने यह नहीं बताया कि उसने किस एयरक्राफ्ट कैरियर पर हमला किया। अमेरिका ने पिछले महीने पश्चिम एशिया में USS जॉर्ज वॉशिंगटन को तैनात किया है। उसने USS अब्राहम लिंकन की जगह ली है। अमेरिका बोला- ईरानी मिसाइल हमलों से बच निकले जहाज अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इससे पहले कहा था कि 5 सितंबर को एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर पर ईरान ने कई हमले किए। CENTCOM के मुताबिक, दोनों अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरान के ‘बिना उकसावे के हमलों’ को सफलतापूर्वक टाल दिया। हमले में किसी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई। अमेरिका ने ईरानी मिसाइलों से जहाजों को नुकसान पहुंचने या उनके इलाके से भागने की बात नहीं कही है। अमेरिका ने 3 ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया CENTCOM ने बताया कि ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने तीन ईरानी क्रूड ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिका के मुताबिक, M/T Downy को खार्ग द्वीप के पास और M/T Stark 1 को जास्क के पास स्थायी रूप से निष्क्रिय किया गया। तीसरा खाली तेल टैंकर M/T Kylo, जिसे ‘Noxen’ भी कहा जाता है, ओमान की खाड़ी में पूरी तरह नष्ट हो गया। ईरान का जवाबी कार्रवाई में 6 जहाजों पर हमले का दावा ईरानी IRGC नौसेना ने कहा कि अमेरिकी हमले के जवाब में उसने हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे 3 तेल टैंकरों और दूसरे इलाकों में अमेरिका से जुड़े 3 जहाजों को निशाना बनाया। ईरान ने इन जहाजों के रास्ते को ‘अनधिकृत’ बताया और हॉर्मुज के आसपास मौजूद दूसरे जहाजों को भी ऐसे रास्तों से गुजरने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। ईरान ने अमेरिका को और हमलों की चेतावनी दी IRGC ने कहा कि अगर अमेरिका ईरानी जहाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखता है तो उसे ईरान की ओर से और कड़े जवाब का सामना करना पड़ेगा। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव में हॉर्मुज स्ट्रेट सबसे अहम इलाकों में से एक है। यहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल समुद्र के रास्ते दूसरे देशों तक पहुंचता है।
रूस अगले 3 दिन यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा:पुतिन ने ट्रम्प के दामाद के मॉस्को पहुंचने पर दिया आदेश, जंग खत्म करने पर बात होगी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर 72 घंटे तक हमले रोकने का आदेश दिया है। क्रेमलिन ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। पुतिन का यह आदेश ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए मॉस्को पहुंचे हैं। दोनों रुकी हुई शांति वार्ता को फिर शुरू कराने की कोशिश करेंगे। यूक्रेन पहले ही दोनों के दौरे की जानकारी दे चुका है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिकी दूतों के यूक्रेन दौरे के दौरान उनकी सेना हवाई हमले रोक देगी। उन्होंने रूस से भी ऐसा ही करने को कहा था। ईरान जंग की वजह से अमेरिका का यूक्रेन पर फोकस हटा अमेरिका लंबे समय से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश में जुटा है। हालांकि, पिछले छह महीनों में इन कोशिशों की रफ्तार कुछ धीमी हुई है। इसकी एक वजह अमेरिका का ईरान युद्ध पर ज्यादा फोकस करना भी बताई गई है। विटकॉफ और कुशनर इससे पहले जनवरी में मॉस्को पहुंचे थे। तब दोनों ने क्रेमलिन में पुतिन से मुलाकात की थी। अब एक बार फिर दोनों के मॉस्को पहुंचने पर रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने उनका स्वागत किया। रूस ने हाल में कीव पर हमले बढ़ाए रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता अभी किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है। इस बीच, कीव समेत यूक्रेन के कई शहरों पर रूसी हवाई हमले तेज हुए हैं। यूक्रेन भी रूस के अंदर लगातार ड्रोन हमले कर रहा है। शुक्रवार को एक रूसी ड्रोन ने कीव में यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी SBU के मुख्यालय को निशाना बनाया। SBU रूस के अंदर किए जाने वाले यूक्रेन के कई लंबी दूरी के हमलों में भी भूमिका निभाती है। उधर, यूक्रेन रूस के सैन्य ठिकानों के अलावा तेल रिफाइनरियों और ई-कॉमर्स केंद्रों को भी निशाना बना रहा है। यूक्रेन का कहना है कि इन हमलों का मकसद रूस की युद्ध क्षमता और उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना है। शनिवार को जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने रात में कीव और बोरिस्पिल एयरपोर्ट पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि ये हमले उस वक्त हुए, जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के यूक्रेन पहुंचने की तैयारी चल रही थी। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ने रूस के इन हमलों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस का हवाई क्षेत्र अब ड्रोन और मिसाइलों की वजह से खतरनाक हो चुका है। हालांकि, अमेरिकी दूतों की शांति कोशिशों के लिए यूक्रेन की तरफ से कोई खतरा नहीं है। 3 घंटे हमले रोकने का आदेश कितना असरदार होगा? पुतिन का 72 घंटे तक कीव पर हमले रोकने का आदेश अमेरिकी दूतों की मॉस्को और फिर कीव यात्रा के दौरान बातचीत के लिए कुछ समय जरूर दे सकता है। हालांकि, इसे रूस-यूक्रेन के बीच पूरा युद्धविराम नहीं माना जा सकता। यह आदेश सिर्फ कीव पर रूसी हमले रोकने तक सीमित है। दूसरे इलाकों में दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी रह सकती है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इन 72 घंटों में शांति वार्ता को आगे बढ़ाने पर कोई सहमति बन पाएगी, या समय खत्म होते ही रूस फिर हमले शुरू कर देगा। इसलिए अब सबकी नजर विटकॉफ और कुशनर की मॉस्को-कीव यात्रा पर है। अगर दोनों पक्ष किसी अहम मुद्दे पर सहमत होते हैं, तो यह 72 घंटे की रोक आगे की बातचीत का रास्ता खोल सकती है। लेकिन फिलहाल इसे युद्ध खत्म होने की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी।







