बिहार-हरियाणा में आंधी-बारिश से 21 की मौत:राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर चक्रवात बना; ओडिशा के अगले 6 दिन बारिश की चेतावनी

राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर चक्रवात बनने से देश के बड़े हिस्से में मौसम बदल चुका है। दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश से लेकर तमिलनाडु तक बादलों का लंबा ट्रफ बना हुआ है, जिससे उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं। जबकि, पिछले 24 घंटों में बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में तेज हवाएं और भारी बारिश दर्ज की गई है। बिहार में बिजली गिरने और मौसम जनित हादसों में 6 जिलों में 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। अगले 48 से 72 घंटे राज्य के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। वहीं, हरियाणा में रविवार-सोमवार की रात 30 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चली आंधी में 15 हजार से ज्यादा पेड़ टूट गए। फतेहाबाद के टोहाना में पेड़ गिरने से हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के कर्मचारी आदेश कुमार (29) की मौत हो गई। राजस्थान पर चक्रवात का नया दौर सक्रिय है, जिससे 24 घंटों के दौरान हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और मध्य प्रदेश में 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और ओलावृष्टि की संभावना है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भी 48 घंटों तक बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है। दक्षिण भारत में छत्तीसगढ़ से कर्नाटक और तमिलनाडु तक 5 दिनों तक रुक-रुक कर वर्षा और बिजली गिरने के आसार हैं। ओडिशा में अगले छह दिनों के दौरान तेज आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है।
हिमाचल के 10 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट:धर्मशाला में 30.6MM बारिश, कल्पा का तापमान 2.6॰C तक लुढ़का; चार जगह 4॰C से नीचे गिरा पारा

हिमाचल की राजधानी शिमला समेत राज्य के ज्यादातर भागों में सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग (IMD) ने आज किन्नौर और लाहौल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में आंधी-तूफान के साथ आसमानी बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। कल भी चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिला में यलो अलर्ट जारी किया गया है। 7 से 9 मई तक वेस्टर्न डिस्टरबेंस थोड़ा कमजोर जरूर पड़ेगा, लेकिन इस दौरान अधिक ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले कुछेक क्षेत्रों में हल्की बारिश जारी रहने के आसार हैं। 10 मई और 11 मई को पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होगी। वहीं, बीते 24 घंटे के दौरान भी अधिकांश भागों में बारिश और शिमला जिला के कई क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि हुई। धर्मशाला में सबसे ज्यादा 30.6 मिमी, कांगड़ा 29.4 मिमी, चौपाल 18.0, शिलारू 15.8, सराहन 15.5, पालमपुर 15.4, रोहड़ू 14.0, मंडी 13.4, जोगेंद्रनगर 9.0, कल्पा 7.2 और बरठी में 5.2 मिमी बारिश हुई। बारिश-ओलावृष्टि के बाद तापमान में भारी गिरावट बारिश-ओलावृष्टि के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषकर किन्नौर और लाहौल स्पीति के कई क्षेत्रों में रात का पारा जमाव बिंदू के आसपास पहुंच गया है। किन्नौर के कल्पा का पारा 2.6 डिग्री, लाहौल स्पीति के ताबो का 2.7, कुकुमसैरी 2.9 और केलांग का 4.4 डिग्री सेल्सियस रह गया है। नाहन का न्यूनतम तापमान सामान्य से 8.1 डिग्री नीचे गिरा राज्य के अन्य शहरों का रात का पारा भी सामान्य से नीचे गिरा है। नाहन के तापमान में सामान्य की तुलना में सबसे ज्यादा 8.1 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई और यहां का रात का पारा 14.6 डिग्री तक लुढ़क गया है। शिमला का पारा सामान्य से 3.0 डिग्री नीचे गिरने के बाद 11.0 डिग्री रह गया है। भुंतर का अधिकतम तापमान नॉर्मल से 9.6 डिग्री नीचे लुढ़का इसी तरह, अधिकतम तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। भुंतर का अधिकतम तापमान सामान्य से 9.6 डिग्री नीचे गिरने के बाद 20.3 डिग्री, मंडी का 6.6 डिग्री गिरने के बाद 26.2 डिग्री, नाहन का 6.5 डिग्री लुढ़कने के बाद 26.8 डिग्री, ऊना का 6.4 डिग्री कम होने के बाद 31.0 डिग्री और शिमला का पारा सामान्य से 4.9 डिग्री नीचे गिरने के बाद 18.8 डिग्री सेल्सियस रह गया है।
भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘बंगाली अस्मिता’ नैरेटिव के मुकाबले पीएम नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ के वादे को चुना। कमल की आंधी में तृणमूल बिल्कुल तिनकों की तरह ही उड़ गई। भाजपा लंबे समय से संगठन के स्तर पर तैयारी में जुटी थी। पोलिंग एजेंट चुनने के लिए भी मौखिक और लिखित परीक्षाएं तक ली गई थीं। पिछले छह महीने से पार्टी का ध्यान दो लक्ष्यों के साथ जमीनी नेटवर्क पर रहा। पहला, ग्रामीण इलाकों में डर के माहौल का मुकाबला और सुनिश्चित करना कि वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। ग्राउंड पर तमाम प्रयासों का नतीजा ये रहा कि भाजपा अपने साथ नए वोटर्स को जोड़ने में सफल रही। पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था, जो इस बार 40.80% रह गया। वहीं, भाजपा 38.4% से बढ़कर 45.85% वोट पर पहुंच गई। इसके पीछे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ा कारण है। हालांकि, सिर्फ ध्रुवीकरण ही इकलौती वजह नहीं है। रोजगार की कमी, पलायन, औद्योगिक ठहराव, पंचायत स्तर की दादागिरी और स्थानीय टीएमसी कैडर से नाराजगी निर्णायक रही। पश्चिमी औद्योगिक पट्टी आसनसोल, दुर्गापुर और बैरकपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने बंद मिलों, नौकरी, लॉजिस्टिक्स हब और सिंडिकेट राज के खिलाफ अभियान चलाया। हर क्षेत्र में अलग रणनीति, कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं रोजगार मुद्दा बंगाल का राजनीतिक भूगोल बदल गया। 2021 में भाजपा उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बेल्ट में सिमटी थी। इस बार टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में भी भगवा रंग में रंग गए। भाजपा ने हर क्षेत्र की अलग रणनीति बनाई। टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में एंटी इंकंबेंसी, ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी का मुद्दा उठाया। प्रेसीडेंसी में सीटें 14 से 27 तक पहुंच गईं। उत्तर बंगाल में चाय-बागान मजदूर और राजबंशी समुदाय साधा। जंगलमहल में आवास-पानी, राष्ट्रपति के अपमान जैसे मुद्दों से टीएमसी को पीछे धकेला। टीएमसी अल्पसंख्यक बेल्ट में टूटी करीब 115 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें से 69 पर टीएमसी जीती। करीब 39 सीटें भाजपा के खाते में गईं। मुस्लिम-सेक्युलर वोट टीएमसी के पक्ष में एकजुट माने जाते रहे हैं। पर, इस बार स्थिति अलग दिखी। मालदा की 12 में से 6 और उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 4 भाजपा के खाते में गई। इससे टीएमसी की ‘अभेद्य अल्पसंख्यक बेल्ट’ का भरोसा कमजोर हुआ। मुर्शिदाबाद जैसे कोर मुस्लिम जिलों में टीएमसी का दबदबा अभी बचा है। यहां की 22 सीटों में से टीएमसी 9 और भाजपा 8 सीटें जीती। भाजपा की असली बढ़त चार बड़े इलाकों से आई। जंगलमहल-आदिवासी बेल्ट में 40 में से करीब 36 सीटें निकालकर टीएमसी की 2021 वाली वापसी को पलट दिया। उत्तर 24 परगना में भाजपा 33 में से 18 सीटों पर पहुंची। हुगली में भाजपा ने 18 में से 16 सीटें जीत टीएमसी के दक्षिण बंगाल किले को भी झटका दिया है। नदिया में भाजपा 17 में से 14 सीटों पर विजयी रही। यहां मतुआ-नामशूद्र और सीमावर्ती हिंदू वोट निर्णायक रहे। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने टीएमसी के शंकर मालाकार को 1,04,265 वोटों से हराया। राज्य में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। लोकल नेताओं को तवज्जो, पुराने लोगों को पद देकर मैदान में उतारा भाजपा ने बंगाल में सिर्फ दिल्ली मॉडल नहीं चलाया। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी। वाजपेयी-आडवाणी के दौर से जुड़े रहे शमिक भट्टाचार्य प्रदेशाध्यक्ष बनाए। सुवेंदु ग्रामीण बंगाल में चेहरा रहे। वहीं, भट्टाचार्य ने कोलकाता और उपनगरीय बंगाल के ‘भद्रलोक’ को जोड़ा। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष को सक्रिय किया। राहुल सिन्हा राज्यसभा सांसद बनाए। पीएम मोदी ने एक रैली में घोष से लेकर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय तक बंगाल के वरिष्ठ नेताओं को मंच पर बुला अभिनंदन किया। ईडी 7 मामलों की जांच कर रही है, इन पर कार्रवाई तेज हो सकती है भ्रष्टाचार संबंधी मामले नई सरकार की प्राथमिकता हो सकते हैं। शिक्षक भर्ती, नगरपालिका भर्ती, राशन घोटाला, कोयला तस्करी, मवेशी तस्करी और संदेशखाली सहित कम से कम सात मामलों की जांच ईडी कर रही है। इन पर कार्रवाई में तेजी आ सकती है। पुरानी फाइलों की पड़ताल भी शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के समक्ष सातवां वेतन आयोग लागू करना, तीन हजार रुपए मासिक नकद सहायता और डीए देने जैसे वादों पर अमल की चुनौती भी रहेगी। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं:1957 में केरलम में नंबूदरीपाद ने सत्ता दिलवाई; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें…
भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘बंगाली अस्मिता’ नैरेटिव के मुकाबले पीएम नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ के वादे को चुना। कमल की आंधी में तृणमूल बिल्कुल तिनकों की तरह ही उड़ गई। भाजपा लंबे समय से संगठन के स्तर पर तैयारी में जुटी थी। पोलिंग एजेंट चुनने के लिए भी मौखिक और लिखित परीक्षाएं तक ली गई थीं। पिछले छह महीने से पार्टी का ध्यान दो लक्ष्यों के साथ जमीनी नेटवर्क पर रहा। पहला, ग्रामीण इलाकों में डर के माहौल का मुकाबला और सुनिश्चित करना कि वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। ग्राउंड पर तमाम प्रयासों का नतीजा ये रहा कि भाजपा अपने साथ नए वोटर्स को जोड़ने में सफल रही। पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था, जो इस बार 40.80% रह गया। वहीं, भाजपा 38.4% से बढ़कर 45.85% वोट पर पहुंच गई। इसके पीछे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ा कारण है। हालांकि, सिर्फ ध्रुवीकरण ही इकलौती वजह नहीं है। रोजगार की कमी, पलायन, औद्योगिक ठहराव, पंचायत स्तर की दादागिरी और स्थानीय टीएमसी कैडर से नाराजगी निर्णायक रही। पश्चिमी औद्योगिक पट्टी आसनसोल, दुर्गापुर और बैरकपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने बंद मिलों, नौकरी, लॉजिस्टिक्स हब और सिंडिकेट राज के खिलाफ अभियान चलाया। हर क्षेत्र में अलग रणनीति, कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं रोजगार मुद्दा बंगाल का राजनीतिक भूगोल बदल गया। 2021 में भाजपा उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बेल्ट में सिमटी थी। इस बार टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में भी भगवा रंग में रंग गए। भाजपा ने हर क्षेत्र की अलग रणनीति बनाई। टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में एंटी इंकंबेंसी, ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी का मुद्दा उठाया। प्रेसीडेंसी में सीटें 14 से 27 तक पहुंच गईं। उत्तर बंगाल में चाय-बागान मजदूर और राजबंशी समुदाय साधा। जंगलमहल में आवास-पानी, राष्ट्रपति के अपमान जैसे मुद्दों से टीएमसी को पीछे धकेला। टीएमसी अल्पसंख्यक बेल्ट में टूटी करीब 115 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें से 69 पर टीएमसी जीती। करीब 39 सीटें भाजपा के खाते में गईं। मुस्लिम-सेक्युलर वोट टीएमसी के पक्ष में एकजुट माने जाते रहे हैं। पर, इस बार स्थिति अलग दिखी। मालदा की 12 में से 6 और उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 4 भाजपा के खाते में गई। इससे टीएमसी की ‘अभेद्य अल्पसंख्यक बेल्ट’ का भरोसा कमजोर हुआ। मुर्शिदाबाद जैसे कोर मुस्लिम जिलों में टीएमसी का दबदबा अभी बचा है। यहां की 22 सीटों में से टीएमसी 9 और भाजपा 8 सीटें जीती। भाजपा की असली बढ़त चार बड़े इलाकों से आई। जंगलमहल-आदिवासी बेल्ट में 40 में से करीब 36 सीटें निकालकर टीएमसी की 2021 वाली वापसी को पलट दिया। उत्तर 24 परगना में भाजपा 33 में से 18 सीटों पर पहुंची। हुगली में भाजपा ने 18 में से 16 सीटें जीत टीएमसी के दक्षिण बंगाल किले को भी झटका दिया है। नदिया में भाजपा 17 में से 14 सीटों पर विजयी रही। यहां मतुआ-नामशूद्र और सीमावर्ती हिंदू वोट निर्णायक रहे। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने टीएमसी के शंकर मालाकार को 1,04,265 वोटों से हराया। राज्य में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। लोकल नेताओं को तवज्जो, पुराने लोगों को पद देकर मैदान में उतारा भाजपा ने बंगाल में सिर्फ दिल्ली मॉडल नहीं चलाया। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी। वाजपेयी-आडवाणी के दौर से जुड़े रहे शमिक भट्टाचार्य प्रदेशाध्यक्ष बनाए। सुवेंदु ग्रामीण बंगाल में चेहरा रहे। वहीं, भट्टाचार्य ने कोलकाता और उपनगरीय बंगाल के ‘भद्रलोक’ को जोड़ा। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष को सक्रिय किया। राहुल सिन्हा राज्यसभा सांसद बनाए। पीएम मोदी ने एक रैली में घोष से लेकर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय तक बंगाल के वरिष्ठ नेताओं को मंच पर बुला अभिनंदन किया। ईडी 7 मामलों की जांच कर रही है, इन पर कार्रवाई तेज हो सकती है भ्रष्टाचार संबंधी मामले नई सरकार की प्राथमिकता हो सकते हैं। शिक्षक भर्ती, नगरपालिका भर्ती, राशन घोटाला, कोयला तस्करी, मवेशी तस्करी और संदेशखाली सहित कम से कम सात मामलों की जांच ईडी कर रही है। इन पर कार्रवाई में तेजी आ सकती है। पुरानी फाइलों की पड़ताल भी शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के समक्ष सातवां वेतन आयोग लागू करना, तीन हजार रुपए मासिक नकद सहायता और डीए देने जैसे वादों पर अमल की चुनौती भी रहेगी। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं:1957 में केरलम में नंबूदरीपाद ने सत्ता दिलवाई; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें…
क्या आप भी ऐसे खाते हैं केला? ये 2 आम गलतियां आपकी सेहत पर डाल सकती हैं बुरा असर!

Last Updated:May 04, 2026, 23:10 IST केला एक ऐसा फल है जिसे लगभग हर घर में रोज खाया जाता है और इसे सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे खाने का तरीका और समय भी उतना ही जरूरी है जितना इसका सेवन करना. छोटी-छोटी गलतियां इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू को कम कर सकती हैं और कभी-कभी नुकसान भी पहुंचा सकती हैं. ख़बरें फटाफट खाली पेट केला खाना गलत. केले में पोटैशियम, मैग्नीशियम, फाइबर और प्राकृतिक शुगर जैसे कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को तुरंत एनर्जी देने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. लेकिन सबसे बड़ी गलती जो लोग अक्सर करते हैं, वह है केले की सही अवस्था यानी उसकी पकने की स्थिति को नजरअंदाज करना. बहुत ज्यादा कच्चा या बहुत ज्यादा पका हुआ केला दोनों ही शरीर पर अलग-अलग असर डालते हैं. कच्चे केले में ‘रेसिस्टेंट स्टार्च’ की मात्रा ज्यादा होती है, जो कुछ लोगों के लिए पचाना मुश्किल हो सकता है और इससे पेट फूलना, गैस या भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. वहीं, बहुत ज्यादा पके हुए केले में शुगर की मात्रा काफी बढ़ जाती है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है और बाद में अचानक गिर भी सकता है, जिससे कमजोरी या थकान महसूस हो सकती है. इसलिए सबसे सही समय केला खाने का तब होता है जब उसका छिलका पीला हो और उस पर हल्के-फुल्के भूरे धब्बे नजर आएं. दूसरी आम गलती है खाली पेट केला खाना. बहुत से लोग सुबह उठते ही सबसे पहले केला खा लेते हैं, यह सोचकर कि यह दिन की हेल्दी शुरुआत है. लेकिन ऐसा करना हर किसी के लिए सही नहीं होता. केले में मौजूद पोटैशियम और मैग्नीशियम जब खाली पेट शरीर में जाते हैं, तो कभी-कभी ब्लड में मिनरल्स का अस्थायी असंतुलन पैदा कर सकते हैं. इससे आपको सुस्ती, हल्की बेचैनी या पेट में असहजता महसूस हो सकती है. खासकर जिन लोगों का पाचन तंत्र संवेदनशील होता है, उन्हें यह समस्या ज्यादा हो सकती है. केले को सही तरीके से खाने का सबसे अच्छा तरीका है इसे किसी और फूड के साथ मिलाकर खाना. जब आप केले को प्रोटीन या हेल्दी फैट के साथ खाते हैं, तो इसका शुगर धीरे-धीरे शरीर में रिलीज होता है और एनर्जी लंबे समय तक बनी रहती है. उदाहरण के लिए, आप केले के साथ मूंगफली का मक्खन, ड्राई फ्रूट्स या दही ले सकते हैं. इससे न सिर्फ इसका स्वाद बढ़ता है, बल्कि पाचन भी बेहतर होता है और ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता. इसके अलावा, संतुलन बनाकर खाना भी बहुत जरूरी है. किसी भी हेल्दी चीज का ज्यादा सेवन नुकसान पहुंचा सकता है. दिन में एक या दो केले खाना पर्याप्त होता है, जिससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें और कोई साइड इफेक्ट भी न हो. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
बंगाल बीजेपी का शपथ ग्रहण 9 मई को? पीएम मोदी के ‘पोचिशे बोइशाख’ वादे पर चर्चा शुरू | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 21:06 IST एक नई सरकार. टैगोर का जन्मदिन. यदि भाजपा 9 मई को शपथ लेती है, तो यह तारीख अकेले किसी भी भाषण से अधिक जोर से बोलेगी। रबींद्रनाथ टैगोर की जयंती पारंपरिक रूप से बंगाली महीने बोइशाख के 25वें दिन मनाई जाती है, जिसे पोचिशे बोइशाख के नाम से जाना जाता है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में एक ऐसे फैसले में जीत हासिल की है जिसने भारत को स्तब्ध कर दिया है। टीएमसी की घटती संख्या के खिलाफ 190 से अधिक सीटों पर बढ़त के साथ, भगवा पार्टी राज्य की पहली दक्षिणपंथी केंद्र सरकार बनाने के लिए तैयार है – जो वाम और टीएमसी शासन के 49 वर्षों के अटूट शासन को समाप्त कर देगी। अब, एक सवाल बंगाल के राजनीतिक हलकों में घूम रहा है: शपथ ग्रहण कब होगा, और क्या यह बंगाल की सबसे पवित्र सांस्कृतिक तिथियों में से एक पर होगा? अटकलें उस टिप्पणी से शुरू हुईं जो मोदी ने 27 अप्रैल को चुनाव प्रचार के आखिरी दिन बैरकपुर में अपनी अंतिम रैली में की थी। उन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच घोषणा की, “इस चुनाव में यह मेरी आखिरी रैली है। मैं इस विश्वास के साथ वापस जा रहा हूं कि मैं 4 मई के नतीजों के बाद भाजपा के शपथ ग्रहण समारोह में निश्चित रूप से शामिल होऊंगा। और इससे मेरा उत्साह बढ़ता है।” भीड़ को पता था कि इसका क्या मतलब है। मोदी ऐसे वादे नहीं करते जिन्हें पूरा नहीं करते। पोचिशे बोइशाख क्या है – और यह क्यों मायने रखता है? रबींद्रनाथ टैगोर की जयंती पारंपरिक रूप से बंगाली महीने बोइशाख के 25वें दिन मनाई जाती है, जिसे इस नाम से जाना जाता है। पोचिशे बोइशाख. 2026 में, यह 9 मई को पड़ता है। बंगाल के लिए, यह सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है – यह एक भावना है। टैगोर का जन्म इसी दिन हुआ था, उन्होंने अपने जीवनकाल में हमेशा अपना जन्मदिन पोचिशे बोइशाख को मनाया था, और यहां तक कि 1941 में अपनी मृत्यु से कुछ हफ्ते पहले इस अवसर के लिए एक विशेष गीत – “हे नूतन, देखा दिक अरबर” भी बनाया था। इस दिन शपथ ग्रहण करना असाधारण महत्व का एक सांस्कृतिक बयान होगा – एक नई सरकार उस व्यक्ति के जन्मदिन पर शपथ लेगी जिसने भारत का राष्ट्रगान लिखा था। मोदी ने वास्तव में तारीख के बारे में क्या कहा? शपथ ग्रहण की तारीख के रूप में विशेष रूप से पोचिशे बोइशाख या 9 मई का उल्लेख करने वाले किसी भी प्रत्यक्ष मोदी उद्धरण की पुष्टि नहीं की गई है। रिकॉर्ड में जो कुछ है वह बैरकपुर में शामिल होने का उनका वादा है – और प्रमुख समारोहों के लिए प्रतीकात्मक रूप से भरी तारीखों को चुनने की भाजपा की अच्छी तरह से स्थापित परंपरा है। दोनों को जोड़ने की चर्चा बड़े पैमाने पर बंगाली राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया से सामने आई है, जहां 9 मई की तारीख पर बढ़ते उत्साह के साथ चर्चा हो रही है। बीजेपी सूत्रों ने अभी आधिकारिक तौर पर किसी तारीख की पुष्टि नहीं की है. लेकिन क्या 9 मई संवैधानिक रूप से यथार्थवादी है? समयसीमा तंग है – लेकिन असंभव नहीं। किसी भी शपथ ग्रहण से पहले, ममता बनर्जी को पहले राज्यपाल को अपना इस्तीफा देना होगा, जो फिर सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में भाजपा को आमंत्रित करेंगे। भाजपा को भी औपचारिक रूप से अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार की पहचान करनी चाहिए और उसे सूचित करना चाहिए – एक ऐसा नाम जिसे पार्टी ने जानबूझकर पूरे अभियान के दौरान गुप्त रखा है। हाल की भाजपा जीतों में, शपथ ग्रहण समारोहों में छह से नौ दिनों के भीतर परिणाम आए हैं। 4 मई को परिणाम घोषित होने के बाद, 9 मई को इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में केवल पांच दिन बचे हैं। यदि ममता तुरंत इस्तीफा दे देती हैं और भाजपा अपने मुख्यमंत्री के चयन पर तेजी से आगे बढ़ती है, तो तारीख संभव है। किसी भी मोर्चे पर कोई भी देरी, और समारोह 10 मई या उससे आगे खिसक जाएगा। 9 मई मास्टरस्ट्रोक क्यों होगा? एक ऐसी पार्टी के लिए जिसने पूरा अभियान बंगालियों को यह आश्वासन देने में बिताया कि वह उनकी संस्कृति, उनकी भाषा और उनकी आत्मा को समझती है – शपथ ग्रहण के लिए टैगोर की जयंती को चुनना अंतिम, निश्चित विराम चिह्न होगा। अमित शाह ने एक ऐसे मुख्यमंत्री का वादा किया था जो बंगाली मूल का और बंगाली भाषी होगा। मोदी बंगाली प्रचार गान के लिए धोती पहनकर बीजेपी मुख्यालय पहुंचे थे। पोचिशे बोइशाख का शपथ ग्रहण इस चक्र को पूरा करेगा – बंगाल को यह बताएगा कि भाजपा सिर्फ राज्य पर शासन नहीं करना चाहती, वह उसका हिस्सा बनना चाहती है। आगे क्या आता है? भाजपा ऐतिहासिक बहुमत की ओर मजबूती से अग्रसर है और आने वाले दिनों में सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, जिसके बाद एक मुख्यमंत्री की घोषणा की जाएगी – जिसकी पहचान भाजपा ने जानबूझकर गुप्त रखी है। चाहे शपथ 9 मई को हो या किसी अन्य तारीख को, एक बात निश्चित है: जैसा कि मोदी ने भाजपा मुख्यालय के मंच से कहा, “पश्चिम बंगाल में सूरज उग आया है, जिसका कई पीढ़ियों ने बेसब्री से इंतजार किया है।” समारोह जब भी आएगा ऐतिहासिक होगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया बंगाल बीजेपी का शपथ ग्रहण 9 मई को? पीएम मोदी का ‘पोचिशे बोइशाख’ वादा चर्चा में है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
स्वपन दासगुप्ता ने पश्चिम बंगाल जनादेश पर विचार किया, इसे विकास के लिए वोट बताया | न्यूज18

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पश्चिम बंगाल में बीजेपी के बाद नरेंद्र मोदी ने घुसपैठियों पर कड़ी कार्रवाई का संकल्प लिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 20:02 IST नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल की पवित्र भूमि पर आज एक नया सूर्योदय हुआ है। नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल की पवित्र भूमि पर आज एक नया सूर्योदय हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के खिलाफ भाजपा की प्रचंड जीत के बाद घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की कसम खाई। नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल की पवित्र भूमि पर आज एक नया सूर्योदय हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत योजना को मंजूरी दी जाएगी. “भले ही 4 मई की शाम ढल रही हो, लेकिन आज बंगाल की पवित्र भूमि पर एक नया सूर्योदय हुआ है, एक ऐसी सुबह जिसका पीढ़ियों को इंतजार था। भाजपा द्वारा जीती गई सीटों की संख्या केवल एक चुनावी आंकड़ा नहीं है; यह अटूट विश्वास की शानदार अभिव्यक्ति है जिसने भय, तुष्टिकरण और हिंसा की राजनीति को उखाड़ फेंका है। आज से, बंगाल के भविष्य के लिए एक नई यात्रा शुरू हो रही है, जहां विकास, दृढ़ विश्वास और नई उम्मीदें कदम दर कदम एक साथ आगे बढ़ेंगी।” ईसीआई परिणाम लाइव, चुनाव 2026 विजेताओं की सूची अपडेट प्रधानमंत्री ने बंगाल में हिंसा के मुद्दे पर भी बात की और कहा कि बदले की नहीं बल्कि बदलाव की बात होनी चाहिए. उन्होंने कहा, “..आज, जब भाजपा जीत गई है, तो ध्यान बदलाव पर होना चाहिए, न कि बदले पर। ध्यान भविष्य पर होना चाहिए, डर पर नहीं। मैं सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं: आइए हिंसा के इस अंतहीन चक्र को हमेशा के लिए खत्म करें।” प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बंगाल में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण का आश्वासन दिया, युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसरों का वादा किया और इस बात पर जोर दिया कि प्रवासन पर अंकुश लगाया जाएगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया पश्चिम बंगाल में ‘कमल’ खिलते ही पीएम मोदी ने घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकल्प लिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल घुसपैठिए(टी)नरेंद्र मोदी(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)बीजेपी की भारी जीत(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)टीएमसी हार(टी)घुसपैठ विरोधी नीति(टी)भारतीय प्रधान मंत्री
केरल चुनाव विजेताओं की सूची 2026: निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार एलडीएफ, यूडीएफ विजेता उम्मीदवारों के नाम, वोट; पूरी सूची यहां देखें | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 19:19 IST केरल चुनाव परिणाम 2026 विजेताओं की सूची: शुरुआती दौर के अनुसार, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ 140 में से लगभग 100 सीटों पर आगे था। केरल चुनाव विजेताओं की सूची 2026: कांग्रेस नेता वीडी सतीसन और सीएम पिनाराई विजयन। (फोटो एक्स के माध्यम से) केरल चुनाव परिणाम 2026 विजेताओं की सूची: घटनाओं के एक निर्णायक मोड़ में, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) 2026 के केरल विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण जीत हासिल करने के बाद केरल में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। मतगणना प्रक्रिया लगभग समाप्त होने के साथ, यूडीएफ 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में लगभग 100 सीटें जीतकर विजयी हुआ है। यह मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के एक दशक लंबे शासन के अंत का प्रतीक है, जो कार्यालय में लगातार तीसरी बार अभूतपूर्व कार्यकाल की मांग कर रहा था। यूडीएफ गठबंधन, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), केरल कांग्रेस (केसी), और रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (आरएमपीओआई) जैसे प्रमुख साझेदार शामिल हैं, ने राज्य भर के प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में जीत का दावा किया है। नवीनतम रुझानों के अनुसार, कांग्रेस ने 63 सीटें हासिल कीं, आईयूएमएल ने 22 सीटें जीतीं, केरल कांग्रेस ने 7 सीटें हासिल कीं और आरएमपीओआई ने 1 सीट हासिल की। यह परिणाम सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ के लिए एक झटका है, जो 2016 से केरल में सत्ता में था। केरल में हार के साथ, वामपंथी दल लगभग पांच दशकों में पहली बार एक भी राज्य सरकार के बिना रहेंगे। यहां विजेताओं की सूची दी गई है: कांग्रेस (आईएनसी) सुल्तानबाथेरी: आईसी बालाकृष्णन – 78,936 वोट कलपेट्टा: सलाहकार. टी सिद्दीकी- 97,379 वोट बलुसेरी: वीटी सूरज – 94,804 वोट इलाथुर: सलाहकार. विद्या बालकृष्णन- 77,662 वोट नीलांबुर: आर्यदान शौकत – 113,586 वोट थावनुर: सलाहकार। वीएस जॉय – 79,661 वोट त्रिथला: वीटी बलराम – 76,427 वोट कोंगड: तुलसी शिक्षक – 62,734 वोट पलक्कड़: रमेश पिशारोडी – 62,199 वोट चित्तूर: सलाहकार. सुमेश अच्युतन- 65,325 वोट त्रिशूर: राजन. जे. पल्लन – 60,290 वोट कोडुंगल्लूर: सलाहकार। ओजे जनेश- 65,162 वोट पेरुंबवूर: मनोज मूथेदान – 75,088 वोट वाइपेन: टोनी चामनी – 66,112 वोट एर्नाकुलम: टीजे विनोद – 61,296 वोट थ्रीक्काकारा: उमा थॉमस – 83,375 वोट मुवत्तुपुझा: डॉ. मैथ्यू कुझालनदान – 89,914 वोट उडुम्बनचोला: सलाहकार। सेनापति वेणु – 64,916 वोट इडुक्की: रॉय के पॉलोज़ – 70,562 वोट पीरुमाडे: सलाहकार. सिरिएक थॉमस – 69,672 वोट वैकोम: के बिनिमोन – 52,944 वोट एट्टुमानूर: नट्टकोम सुरेश – 64,077 वोट पुथुप्पल्ली: सलाहकार. चांडी ओमन – 84,031 वोट हरिपद: रमेश चेन्निथला – 68,184 वोट करुनागप्पल्ली: सीआर महेश – 82,593 वोट कोल्लम: सलाहकार. बिंदु कृष्णा- 63,416 वोट वामनपुरम: मुहम्मद सुधीरशा एस – 73,590 वोट नेय्यत्तिनकारा: एन. शक्तन – 58,760 वोट माकपा कल्लियासेरी: एम. विजिन – 81,428 वोट शोरनूर: पी. मम्मीकुट्टी – 70,583 वोट ओट्टापलम: सलाहकार. के. प्रेमकुमार – 75,362 वोट मालमपुझा: ए प्रभाकरण- 68,629 वोट तरूर: सुमोद – 60,557 वोट नेम्मारा: के प्रेमन – 66,521 वोट अलाथुर: टीएम सासी – 61,564 वोट चेलक्कारा: यूआर प्रदीप – 76,073 वोट वडक्कनचेरी: जेवियर चित्तिलापिल्ली – 70,725 वोट आईयूएमएल कासरगोड: कल्लात्रा माहिन – 76,396 वोट तिरुवंबदी: सीके कासिम – 77,140 वोट केरल कांग्रेस इरिंजलाकुडा: सलाहकार। थॉमस उन्नियादान – 66,282 वोट चंगनास्सेरी: विनू जॉब कुझिमनिल – 55,991 वोट भाकपा नटिका: गीतागोपी – 58,979 वोट कैपमंगलम: केके वलसराज – 65,448 वोट पुनालुर: सी. अजयप्रसाद – 71,944 वोट आरएसपी चावारा: शिबू बेबी जॉन – 74,308 वोट एराविपुरम: सलाहकार। विष्णु मोहन- 64,383 वोट आरएमपीओआई वडकारा: केके रेमा- 70,117 वोट चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : केरल, भारत, भारत समाचार चुनाव केरल चुनाव विजेताओं की सूची 2026: निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार एलडीएफ, यूडीएफ विजेता उम्मीदवारों के नाम, वोट; पूरी सूची यहां देखें अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल चुनाव विजेता(टी)केरल चुनाव विजेताओं की सूची(टी)केरल चुनाव परिणाम 2026 विजेता(टी)केरल चुनाव परिणाम 2026 विजेताओं की सूची(टी)एलडीएफ विजेताओं की सूची केरल(टी)यूडीएफ विजेताओं की सूची केरल(टी)एलडीएफ पार्टी विजेताओं की सूची(टी)केरल चुनाव विजेताओं की सूची(टी)यूडीएफ पार्टी विजेताओं की सूची
टीवीके के विजय की नजर जादुई 118 पर है – लेकिन अगर कोई भी बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर पाता तो क्या होगा?

मंच की स्थापना: तमिलनाडु की 234 सीटों वाली विधानसभा ने 23 अप्रैल को ऐतिहासिक एकल चरण के मतदान के बाद 4 मई, 2026 को अपना फैसला सुनाया, जिसमें 85.1% मतदान हुआ – जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है। 62 केंद्रों पर हुई मतगणना में सत्तारूढ़ द्रमुक, अन्नाद्रमुक और अभिनेता-राजनेता विजय के नेतृत्व में पहली बार के प्रतियोगी तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) के बीच त्रिकोणीय लड़ाई हुई। भूकंप शुरू: मध्य सुबह तक, यह स्पष्ट था कि यह कोई सामान्य चुनाव नहीं था। टीवीके ने 107 निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़त हासिल की और दोनों द्रविड़ दिग्गजों द्रमुक और अन्नाद्रमुक से आगे निकल गई। अधिकांश चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों ने द्रमुक की सत्ता में वापसी की भविष्यवाणी की थी – केवल एक्सिस माई इंडिया ने टीवीके सरकार का अनुमान लगाया था। बोर्ड पर अंकित अंक बिल्कुल अलग कहानी बयां कर रहे थे। स्टालिन का किला ढह गया: दिन का सबसे आश्चर्यजनक क्षण कोलाथुर से आया – मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की 15 साल की सुरक्षित सीट, जिसे उन्होंने 2011 से लगातार तीन बार जीता था। टीवीके के वीएस बाबू ने सात राउंड की गिनती के बाद स्टालिन को 7,700 से अधिक वोटों से आगे कर दिया, जो तमिलनाडु के 2026 के फैसले की परिभाषित छवि बन गई: मौजूदा मुख्यमंत्री अपने ही पिछवाड़े में हार गए। ईपीएस ने किले पर कब्जा किया, टीवीके नामांकन अवरुद्ध: जहां स्टालिन लड़खड़ा गए, वहीं एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने अपने घरेलू मैदान पर दबदबा बनाए रखा। एडप्पादी निर्वाचन क्षेत्र में 12 राउंड की गिनती के बाद ईपीएस 50,000 से अधिक वोटों से आगे है, जो सभी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों की सीटों के बीच सबसे बड़ा अंतर है। एक मोड़ में, टीवीके के आधिकारिक उम्मीदवार का नामांकन एडप्पाडी में खारिज कर दिया गया था; पार्टी ने के. प्रेम कुमार को समर्थन दिया, जिन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। विजय दो मोर्चों पर जीते: एक दुर्लभ राजनीतिक जुआ में, टीवीके प्रमुख विजय ने एक साथ दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा – और दोनों में जीत हासिल की। पेरम्बूर में, उन्होंने डीएमके के आरडी शंकर को लगभग 19,000 वोटों से हराया, जबकि तिरुचिरापल्ली पूर्व में, उन्होंने डीएमके के इनिगो इरुदयाराज को 6,000 से अधिक वोटों से हराया। दोहरे निर्वाचन क्षेत्र का दांव निर्णायक रूप से सफल रहा और विजय को न केवल पहली बार विजेता घोषित किया गया, बल्कि तमिलनाडु के राजनीतिक भूकंप का निर्विवाद चेहरा भी घोषित किया गया। 118 की दौड़: 234 सदस्यीय विधानसभा में साधारण बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता के साथ, टीवीके की बढ़त की संख्या दोपहर 3 बजे तक 106 के आसपास थी – स्पष्ट रूप से करीब लेकिन अभी तक लाइन पर नहीं। कुछ निकटतम मुकाबलों में, टीवीके उम्मीदवार कुंभकोणम, शोलावंदन और विक्रवंडी जैसी सीटों पर 100-102 वोटों के बेहद कम अंतर से पीछे चल रहे थे, जिससे दोपहर तक अंतिम तस्वीर सस्पेंस में थी। यदि कोई 118 तक नहीं पहुंचता है: दोपहर के मध्य तक परिणाम अभी भी अनिश्चित होने के साथ, संवैधानिक प्रावधान तेजी से फोकस में आ गए। यदि कोई भी पार्टी या गठबंधन 118 सीटें हासिल नहीं करता है, तो राज्यपाल को सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित करना होगा – जिसे 15 दिनों के भीतर, या राज्यपाल द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर सदन के पटल पर अपना बहुमत साबित करना होगा। ऐसा करने में विफलता पर अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लग सकता है और अंततः नए चुनाव हो सकते हैं। तमिलनाडु के लिए एक नया अध्याय: 1967 के बाद से, तमिलनाडु में सत्ता बड़े पैमाने पर द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच बदलती रही है। टीवीके की एक मजबूत सफलता उस द्विआधारी को तोड़ देगी और विजय को राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में एक विघटनकारी नई ताकत के रूप में स्थापित करेगी, जो 1967 की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार और एमजीआर की ऐतिहासिक 1977 की शुरुआत जैसे महत्वपूर्ण क्षणों की प्रतिध्वनि होगी। जब टीवीके कार्यकर्ताओं ने चेन्नई की सड़कों पर जश्न मनाया, तो एक बात निश्चित थी – तमिलनाडु की राजनीति फिर कभी वैसी नहीं दिखेगी।






