Monday, 21 Sep 2026 | 07:13 PM

Trending :

EXCLUSIVE

ईरान- सरकार के बुलावे पर लाखों लोग सड़कों पर उतरे:जंग के बाद सबसे बड़ी रैली; 6 लाख ने हथियार ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया

ईरान- सरकार के बुलावे पर लाखों लोग सड़कों पर उतरे:जंग के बाद सबसे बड़ी रैली; 6 लाख ने हथियार ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया

ईरान में शुक्रवार को सरकार के बुलावे पर लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। राजधानी तेहरान में हुई यह रैली युद्ध शुरू होने के बाद सरकार की सबसे बड़ी रैलियों में से एक थी। लोगों ने देश की रक्षा के लिए हथियार उठाने और सैन्य ट्रेनिंग लेने की तैयारी जताई। सरकार ने इस अभियान का नाम ‘जांफदाए ईरान’ रखा है। इसका मतलब है- ईरान के लिए जान तक देने को तैयार लोग। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, 6 लाख से ज्यादा लोग अब तक सैन्य ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख ने दावा किया कि ट्रेनिंग लेने वालों की संख्या 10 लाख से ज्यादा हो सकती है। ईरान में प्रदर्शन से जुड़ीं 4 फोटोज तेहरान में 3 लाख से ज्यादा लोग जुटे सरकारी प्रसारक के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तेहरान की सड़कों पर 3 लाख से ज्यादा लोग मौजूद थे। कई लोग सैन्य वर्दी में थे और हाथों में ईरान के झंडे लिए हुए थे। सरकार की योजना इन लोगों को असॉल्ट राइफल चलाने समेत सीमित सैन्य ट्रेनिंग देने की है। इसके बाद इन्हें देश की सुरक्षा में मदद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इन लोगों को देश की सुरक्षा में मदद करने के लिए तैयार किया जा रहा है। ये रिवोल्यूशनरी गार्ड और बसीज मिलिशिया ईरान की एक सरकार समर्थक अर्धसैनिक संगठन है। इसका इस्तेमाल सरकार विरोधी प्रदर्शनों को रोकने में इस्तेमाल होता रहा है। रैली में अमेरिका-इजराइल की मौत के नारे लगे रैली में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, सैन्य कमांडर और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कुछ लोगों ने अमेरिका और इजराइल के झंडों को पैरों से रौंदा। यहां ‘अमेरिका की मौत’ और ‘इजराइल की मौत’ जैसे नारे भी लगाए गए। रैली में शामिल 24 साल की मरजिएह अफागी अपने छोटे बच्चे और पति के साथ पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बताना चाहती हैं कि ईरान के लोगों को अपने देश को लेकर उनकी धमकियों से डर नहीं लगता। उन्होंने कहा कि इतिहास में कोई भी देश ईरान पर हमला करके यहां लंबे समय तक कब्जा नहीं कर सका। रैली में हथियार और ड्रोन भी दिखाए ईरान ने रैली के दौरान सिर्फ भीड़ ही नहीं दिखाई, बल्कि अपनी सैन्य ताकत का भी प्रदर्शन किया। वहां एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम, मशीनगन और ड्रोन दिखाए गए। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने ऐसे ड्रोन भी प्रदर्शित किए, जिनका इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के खिलाफ किए जाने का दावा किया गया है। होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी का बेहद अहम समुद्री रास्ता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां जहाजों की आवाजाही काफी घट गई है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… सऊदी का यूरोप को अगले महीने तेल देने से इनकार:इराक से ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन तबाह हुई, मरम्मत में 5-6 हफ्ते लगेंगे सऊदी की तेल रिफाइनरी अरामको ने अगले महीने सभी यूरोपीय देशों को कच्चे तेल की सप्लाई रोक दी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कंपनी ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग कंपनियों को इसकी जानकारी दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका में महिला पर बेटे से संबंध बनाने का आरोप:46 साल की मां ने पुलिस पूछताछ में कबूला- 4 साल से ऐसा कर रही थी

अमेरिका के फ्लोरिडा में मां ने बेटे से संबंध बनाए:पुलिस पूछताछ में कबूला- करीब 100 बार ऐसा किया; पति को जानकारी नहीं थी

अमेरिका के फ्लोरिडा में 46 साल की महिला पर अपने 22 वर्षीय बेटे के साथ यौन संबंध बनाने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, महिला ने पूछताछ में संबंध होने की बात कबूली। उसने बताया कि बेटे के 18 साल का होने के बाद यानी करीब 4 साल से ऐसा चल रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, महिला ने बताया कि ऐसा करीब 100 बार हुआ। उसके पति को इसकी जानकारी नहीं थी। मामले में महिला और उसके बेटे पर अनाचार का केस दर्ज किया गया है। घरेलू विवाद के बाद सामने आया मामला मामला फ्लोरिडा के लेकलैंड में एक घरेलू विवाद के बाद सामने आया। क्रिस्टिना क्लेमेन्स ने पुलिस को फोन कर अपने बेटे शेन क्लेमेन्स पर मारपीट करने का आरोप लगाया था। पुलिस के पहुंचने के बाद शेन को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उसने अधिकारियों को बताया कि वह 18 साल की उम्र से अपनी मां के साथ यौन संबंध बना रहा था। जांचकर्ताओं ने उससे दोबारा इस दावे की पुष्टि की। शेरिफ ग्रेडी जुड के मुताबिक, शेन ने अपनी बात दोहराई। पति को दोनों के बीच संबंधों का शक था जांच के दौरान क्रिस्टिना के पति से भी पूछताछ की गई। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि उन्हें कथित संबंध की जानकारी नहीं थी। हालांकि, उन्हें मां-बेटे के एक साथ मास्टर बेडरूम में समय बिताने पर शक होता था। उन्होंने बताया कि दोनों कभी-कभी कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लेते थे। उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि वह और क्रिस्टिना शादीशुदा हैं और साथ रह रहे हैं। बेटा मारपीट के आरोप में हिरासत में शेन पर अपनी मां के साथ घरेलू हिंसा के तहत मारपीट का अतिरिक्त आरोप लगाया गया है। वह फिलहाल हिरासत में है और उसके लिए जमानत तय नहीं की गई है। क्रिस्टिना पर अनाचार के अलावा घरेलू मारपीट और खुले तौर पर व्यभिचार का आरोप भी लगाया गया। उन्हें 4 सितंबर को कुल 6,250 डॉलर के मुचलके पर रिहा कर दिया गया। पुलिस ने मां-बेटे के कथित संबंध को गैरकानूनी बताया है। मामले में लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। ———————— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में सिख ट्रक ड्राइवर को 17 बार चाकू मारा:हमले से कुछ दिन पहले ट्रम्प के मंत्रालय ने मिस्टर सिंह वाला पोस्ट किया था अमेरिका के व्योमिंग में 28 साल के पंजाबी सिख ट्रक ड्राइवर पर 17 बार चाकू से हमला किया गया। उनकी गर्दन, सीने, हाथ और पसलियों पर चोट आई है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

हरियाणवी सिंगर दिलेर खरकिया की रेंज रोवर पर फायरिंग:4 बदमाशों ने पोस्ट डालकर ली जिम्मेदारी, लिखा-कॉल का जवाब दो नहीं तो छाती में गोली लगेगी

हरियाणवी सिंगर दिलेर खरकिया की रेंज रोवर पर फायरिंग:4 बदमाशों ने पोस्ट डालकर ली जिम्मेदारी, लिखा-कॉल का जवाब दो नहीं तो छाती में गोली लगेगी

हरियाणवी सिंगर दिलेर खरकिया की रेंज रोवर गाड़ी पर फायरिंग का मामला सामने आया है। यह घटनाक्रम सिंगर के घर के बाहर हुआ। इस हमले में सिंगर बाल-बाल बच गए। घटना के बाद उन्होंने पुलिस को मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई। पता चला कि हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर आया था। उधर, फायरिंग के तुरंत बाद ही सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इस हमले की जिम्मेदारी ली गई है। पोस्ट में लिखा- इस फायरिंग की जिम्मेदारी हिमांशु सोनीपत, हैरी बॉक्सर, हरमन संधू और अनिल पंडित लेते हैं। या तो हमारी कॉल का जवाब दो, नहीं तो तेरी छाती में गोली मारी जाएगी। बता दें कि दिलेर खरकिया सिंगर, एक्टर और मॉडल है। उनके पिता मशहूर रागनी कलाकार राजेंद्र खरकिया है। पिता से प्रेरित होकर ही 9 साल की उम्र में ही दिलेर ने रागनी कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू कर दिया था। 2018 में हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा। लीलो चमन, मोटो, जूती काली, “हाई कोर्ट”, “कबूतरी, आलू मटर उनके हिट सॉन्ग हैं। दिलेर खरकिया-अंजलि राघव के सॉन्ग प्रमोशन इवेंट में हुआ था विवाद हरियाणवी सिंगर दिलेर खरकिया और एक्ट्रेस अंजलि राघव के सॉन्ग ‘प्रोटीन’ प्रमोशन इवेंट में विवाद खड़ा हो चुका है। 11 माह पहले भिवानी के खरक कलां गांव में यह इवेंट हुआ था। इसमें 2 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ईशा राठी और प्रिया खारी आपस में भिड़ गईं। घटना का एक CCTV वीडियो सामने आया था, जिसमें ईशा और प्रिया एक दूसरे से गुस्से में बात करती दिख रही थीं। तभी प्रिया ईशा को थप्पड़ मार देती है। गुस्साई ईशा सैंडल उठाकर लाती है और प्रिया के माथे पर मार देती है। इसके बाद प्रिया के माथे से खून निकलता है और वह बेहोश होकर गिर जाती है। किसी तरह बाकी इन्फ्लुएंसर ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया। जब यह हंगामा हुआ तो खरकिया भी पास में ही थे। हालांकि, उनकी इस झगड़े में कोई भूमिका नहीं रही। हम इस खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं…

ईरान में अमेरिकी हमला युद्ध अपराध हो सकता है:UN रिपोर्ट में गर्ल्स स्कूल पर हमले का जिक्र; पुतिन के बाद अब ट्रम्प की जवाबदेही पर सवाल

ईरान में अमेरिकी हमला युद्ध अपराध हो सकता है:UN रिपोर्ट में गर्ल्स स्कूल पर हमले का जिक्र; पुतिन के बाद अब ट्रम्प की जवाबदेही पर सवाल

ईरान पर फरवरी में हुए अमेरिका हमलों को लेकर UN की जांच रिपोर्ट गुरुवार को सामने आई। UN की स्वतंत्र जांच टीम ने कहा कि उसके पास यह मानने की पर्याप्त वजह है कि मिनाब के गर्ल्स स्कूल और एक स्पोर्ट्स सेंटर पर हमले अमेरिकी सेना ने किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध हो सकते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में भी रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर युद्ध अपराध के आरोप लगे थे। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने 2023 में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। अब UN की रिपोर्ट के बाद ट्रम्प की किसी तरह की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ईरान में अमेरिका के 2 हमलों की UN ने जांच की पहला- मिनाब गर्ल्स स्कूल पर हमले में 120 बच्चों की मौत दूसरा- स्पोर्ट्स सेंटर पर हमले में 22 नागरिक मारे गए खबर लगातार अपडेट हो रही है…

PM मोदी के जन्मदिन पर बॉलीवुड सेलेब्स की बधाई:अक्षय, कंगना और महेश बाबू समेत कई एक्टर्स ने दी शुभकामनाएं

PM मोदी के जन्मदिन पर बॉलीवुड सेलेब्स की बधाई:अक्षय, कंगना और महेश बाबू समेत कई एक्टर्स ने दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार, 17 सितंबर को 76 साल के हो गए। इस मौके पर उन्हें देश की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ अक्षय कुमार, महेश बाबू, कंगना रनौत और अनुपम खेर जैसे कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बधाई संदेश शेयर किए। अक्षय कुमार ने सेवा का संकल्प लेने की बात कही एक्टर अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हिंदी में पोस्ट लिखकर प्रधानमंत्री को बधाई दी। अक्षय ने लिखा कि जन्मदिन मनाने का सबसे खूबसूरत तरीका किसी जरूरतमंद की मदद करना और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना है। उन्होंने इस दिन को सेवा के संकल्प के साथ मनाने की बात कही। इसके साथ ही साउथ एक्टर महेश बाबू ने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ऐसे नेता हैं जो कभी रुकते नहीं हैं और हमेशा भारत को सबसे पहले रखते हैं। कंगना और सुनील लहरी ने शेयर किए बधाई संदेश एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनोट ने पीएम मोदी की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने लिखा कि देश के नेतृत्व में विकसित और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प मजबूत हो रहा है। कंगना ने लोगों से ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाने की अपील की। वहीं टीवी शो ‘रामायण’ में लक्ष्मण का रोल निभाने वाले एक्टर सुनील लहरी ने X पर एक वीडियो मैसेज जारी किया। सुनील ने बताया कि गुजरात में जन्मे बच्चे ने अपनी लगन से देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। फिल्म जगत के अन्य कलाकारों ने जताई खुशी अक्षय, महेश बाबू और कंगना के अलावा बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की कई अन्य हस्तियों ने भी पीएम मोदी को विश किया। एक्टर परेश रावल ने भगवान से प्रधानमंत्री के लंबे और स्वस्थ जीवन की प्रार्थना की। अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर एक लंबा संदेश लिखकर उन्हें शुभकामनाएं दीं। इनके अलावा चिरंजीवी, प्रोसेनजीत चटर्जी और कई अन्य कलाकारों ने भी प्रधानमंत्री के प्रति अपना स्नेह और सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तक का सफर नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के बाद वे साल 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने। उनके 76वें जन्मदिन के अवसर पर बीजेपी ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू किया है। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत देश भर में सामाजिक सेवा से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इमोशनल हुईं:सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी की जयंती पर गीत सुनते हुए आंखों में आए आंसू

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इमोशनल हुईं:सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी की जयंती पर गीत सुनते हुए आंखों में आए आंसू

बेंगलुरु में मंगलवार को महान कर्नाटक गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भावुक हो गईं। कार्यक्रम में गीत सुनते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए। दरअसल, यह कार्यक्रम बेंगलुरु के चौडैया मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया था। सीतारमण कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं। सुब्बुलक्ष्मी की परपोती एस ऐश्वर्या और एस सौंदर्या ने भी समारोह में प्रस्तुति दी थी। ऐश्वर्या और सौंदर्या ने अपनी परदादी की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाया है। कार्यक्रम में उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी की कुछ रचनाएं प्रस्तुत कीं। समारोह में संगीत प्रेमियों ने सुब्बुलक्ष्मी और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान को याद किया। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द बायोपिक फिल्म आएगी एमएस सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै में हुआ था। वह भारत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल थीं। 1998 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द एक बायोपिक फिल्म आएगी। रश्मिका मंदाना फिल्म में उनका किरदार निभाएंगी। फिल्म का आधिकारिक लॉन्च 16 सितंबर 2026 को उनकी 110वीं जयंती पर चेन्नई के द म्यूजिक एकेडमी में किया गया। गौतम तिन्ननुरी फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं, जिन्होंने पहले ‘जर्सी’ और ‘किंगडम’ जैसी फिल्में बनाई हैं। रश्मिका से पहले साई पल्लवी का नाम इस बायोपिक के लिए सामने आया था। रश्मिका पहली बार ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शख्सियत का किरदार निभाएंगी, जिसकी पहचान मुख्य रूप से कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से जुड़ी है। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी थे फैन एस.एस.सुब्बूलक्ष्मी कर्नाटक की महान गायिका थीं, जिनके गाए हुए भजन विष्णु सहास्त्रनामम को यूट्यूब पर 10 करोड़ बार सुना जा चुका है। वहीं भजन गोविंदम को 17 मिलियन और श्री वेंकटेश्वरा सुप्रभातम को 47 मिलियन बार सुना गया है। पद्मश्री से लेकर भारत रत्न तक, ऐसा कोई नामी अवॉर्ड नहीं जो इनके नाम ना हो। आवाज में वो आकर्षण था कि महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू भी इनके प्रशंसकों में से एक रहे। महात्मा गांधी खास फरमाइश पर इनसे रघुपति राघव राजा राम सुनते थे। नीली साड़ी इन पर इतनी जंचती थी कि इनके नाम पर ही उस रंग का नाम एमएस ब्लू रख दिया गया। जानिए कैसे देश की सबसे बड़ी गायिका बनीं एम.एस.सुब्बूलक्ष्मी? एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी उर्फ कुंजम्मा का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै (तमिलनाडु) में हुआ था। उनकी मां शानमुकावादिर अम्माल देवदासी समाज का हिस्सा थीं जो वीणा बजाती थीं और पिता सुब्रमण्यम अय्यर एक सिंगर। मां ने उनकी ट्रेनिंग मशहूर पं. नारायण राव व्यास से करवाई और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने पहली रिकॉर्डिंग की। सुब्बुलक्ष्मी मां की स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान उनका साथ देते हुए भजन गाया करती थीं। उनकी पहली परफॉर्मेंस 1929 में मद्रास म्यूजिक एकेडमी के मंच पर हुई, तब वो महज 13 साल की थीं। द वायर को दिए इंटरव्यू में सुब्बुलक्ष्मी ने बताया था कि एक दिन वो घर के बाहर बैठीं मिट्टी का घर बना ही रही थीं कि कोई उन्हें उठाकर सीधे मां के पास मंच पर ले गया। मां करीब 50-100 लोगों के सामने परफॉर्म कर रही थीं और वो चाहती थीं कि सुब्बुलक्ष्मी भी चंद गाने सुनाएं। उन्होंने मिट्टी से सने हाथ पोछे और गाना शुरू किया, तो म्यूजिक एकेडमी तालियों से गूंज उठी। इसके बाद उन्हें लगातार गाने के मौके दिए जाने लगे। उस जमाने के मशहूर पत्रकार टी. सदाशिवम ने 1936 में हुई एक सुब्बुलक्ष्मी की इस परफॉर्मेंस के बाद तमिल वीकली मैगजीन आनंदा विकातम में फ्रंटपेज आर्टिकल लिखा, जिसके बाद उनके कॉन्सर्ट में भारी भीड़ पहुंचने लगी। काम के सिलसिले में हुई मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और परिवार के खिलाफ जाकर शादी की। सदाशिवम जानते थे कि सुब्बुलक्ष्मी का हुनर सिर्फ मंच तक सीमित रहने के लिए नहीं है। फिल्ममेकर के. सुब्रह्मण्यम से सिफारिश कर सदाशिवम ने सुब्बुलक्ष्मी को फिल्म सेवासदन में लीड रोल दिलवाया। 1938 की ये फिल्म जबरदस्त हिट रही और सुब्बुलक्ष्मी साउथ का बड़ा नाम बनकर उभरीं। सुब्बुलक्ष्मी के गानों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए पति सदाशिवम ने खुद पैसे लगाकर फिल्में बनाने का फैसला किया। सुब्बुलक्ष्मी के सुझाव पर सदाशिवम ने मीराबाई पर पहली फिल्म मीरा (1945) बनाई। फिल्म में सुब्बुलक्ष्मी को ही मीराबाई का लीड रोल दिया गया। मीरा का रोल निभाने के लिए सुब्बुलक्ष्मी खुद उन सभी जगहों पर जाकर रहीं, जहां मीरा ने कृष्ण भक्ति में समय बिताया था। 1944 में फिल्म की शूटिंग न्यूटोन स्टूडियो, मद्रास में शुरू हुई, जिसके बाद टीम ने जयपुर, वृंदावन, चित्तौड़ और द्वारका का चयन किया। फिल्म के कॉन्सेप्ट से प्रभावित होकर उदयपुर के महाराजा ने हाथी-घोड़ों के साथ फिल्म बनाने के लिए अपना पैलेस इस्तेमाल करने की इजाजत से लेकर हर तरह से मदद की। महाराजा के मंत्री की मदद से उन्हें शाही हाथी-घोड़े मिले और साथ ही महल में कहीं भी कभी भी शूटिंग करने की इजाजत भी। शूटिंग के लिए महल की शाही डांसर्स भी दी गईं। फिल्म में नजर आए कई एक्स्ट्रा कलाकार भी शाही लोग थे। 136 मिनट की फिल्म में थे सुब्बुलक्ष्मी के 20 गाने 3 नवंबर 1945 को दिवाली पर फिल्म मीरा रिलीज की गई। 136 मिनट की इस फिल्म में 20 गाने थे, जो सुब्बुलक्ष्मी ने ही गाए थे। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी बड़ी हिट रही कि दो साल बाद कुछ सीन को रीशूट कर 1947 में हिंदी में मीराबाई नाम से फिर रिलीज किया गया था। प्रीमियर में पहुंचे थे माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरू 21 नवंबर 1947 को मीराबाई फिल्म रिलीज हुई, जिससे सुब्बुलक्ष्मी तमिल स्टार से नेशनल स्टार बन गईं। फिल्म में सरोजिनी नायडू ने सुब्बुलक्ष्मी का परिचय करवाते हुए उन्हें नाइटेंगल ऑफ इंडिया (भारत की बुलबुल) नाम दिया था। फिल्म के प्रीमियर में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी पहुंचे थे। इनके अलावा लॉर्ड माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, विजयालक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी जैसी देश की अन्य बड़ी हस्तियां भी थीं। फिल्म देखने के बाद जवाहरलाल नेहरू और माउंटबेटन सुब्बुलक्ष्मी के फैन बन गए थे। फिल्म मीरा तमिल सिनेमा में म्यूजिकल कल्ट साबित हुई। ये फिल्म आज भी भारत की 100 सबसे महान फिल्मों की लिस्ट में शामिल है। मीरा हिट होने के बाद उन्हें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इमोशनल हुईं:सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी की जयंती पर गीत सुनते हुए आंखों में आए आंसू

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इमोशनल हुईं:सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी की जयंती पर गीत सुनते हुए आंखों में आए आंसू

बेंगलुरु में मंगलवार को महान कर्नाटक गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भावुक हो गईं। कार्यक्रम में गीत सुनते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए। दरअसल, यह कार्यक्रम बेंगलुरु के चौडैया मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया था। सीतारमण कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं। सुब्बुलक्ष्मी की परपोती एस ऐश्वर्या और एस सौंदर्या ने भी समारोह में प्रस्तुति दी थी। ऐश्वर्या और सौंदर्या ने अपनी परदादी की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाया है। कार्यक्रम में उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी की कुछ रचनाएं प्रस्तुत कीं। समारोह में संगीत प्रेमियों ने सुब्बुलक्ष्मी और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान को याद किया। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द बायोपिक फिल्म आएगी एमएस सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै में हुआ था। वह भारत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल थीं। 1998 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द एक बायोपिक फिल्म आएगी। रश्मिका मंदाना फिल्म में उनका किरदार निभाएंगी। फिल्म का आधिकारिक लॉन्च 16 सितंबर 2026 को उनकी 110वीं जयंती पर चेन्नई के द म्यूजिक एकेडमी में किया गया। गौतम तिन्ननुरी फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं, जिन्होंने पहले ‘जर्सी’ और ‘किंगडम’ जैसी फिल्में बनाई हैं। रश्मिका से पहले साई पल्लवी का नाम इस बायोपिक के लिए सामने आया था। रश्मिका पहली बार ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शख्सियत का किरदार निभाएंगी, जिसकी पहचान मुख्य रूप से कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से जुड़ी है। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी थे फैन एस.एस.सुब्बूलक्ष्मी कर्नाटक की महान गायिका थीं, जिनके गाए हुए भजन विष्णु सहास्त्रनामम को यूट्यूब पर 10 करोड़ बार सुना जा चुका है। वहीं भजन गोविंदम को 17 मिलियन और श्री वेंकटेश्वरा सुप्रभातम को 47 मिलियन बार सुना गया है। पद्मश्री से लेकर भारत रत्न तक, ऐसा कोई नामी अवॉर्ड नहीं जो इनके नाम ना हो। आवाज में वो आकर्षण था कि महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू भी इनके प्रशंसकों में से एक रहे। महात्मा गांधी खास फरमाइश पर इनसे रघुपति राघव राजा राम सुनते थे। नीली साड़ी इन पर इतनी जंचती थी कि इनके नाम पर ही उस रंग का नाम एमएस ब्लू रख दिया गया। जानिए कैसे देश की सबसे बड़ी गायिका बनीं एम.एस.सुब्बूलक्ष्मी? एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी उर्फ कुंजम्मा का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै (तमिलनाडु) में हुआ था। उनकी मां शानमुकावादिर अम्माल देवदासी समाज का हिस्सा थीं जो वीणा बजाती थीं और पिता सुब्रमण्यम अय्यर एक सिंगर। मां ने उनकी ट्रेनिंग मशहूर पं. नारायण राव व्यास से करवाई और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने पहली रिकॉर्डिंग की। सुब्बुलक्ष्मी मां की स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान उनका साथ देते हुए भजन गाया करती थीं। उनकी पहली परफॉर्मेंस 1929 में मद्रास म्यूजिक एकेडमी के मंच पर हुई, तब वो महज 13 साल की थीं। द वायर को दिए इंटरव्यू में सुब्बुलक्ष्मी ने बताया था कि एक दिन वो घर के बाहर बैठीं मिट्टी का घर बना ही रही थीं कि कोई उन्हें उठाकर सीधे मां के पास मंच पर ले गया। मां करीब 50-100 लोगों के सामने परफॉर्म कर रही थीं और वो चाहती थीं कि सुब्बुलक्ष्मी भी चंद गाने सुनाएं। उन्होंने मिट्टी से सने हाथ पोछे और गाना शुरू किया, तो म्यूजिक एकेडमी तालियों से गूंज उठी। इसके बाद उन्हें लगातार गाने के मौके दिए जाने लगे। उस जमाने के मशहूर पत्रकार टी. सदाशिवम ने 1936 में हुई एक सुब्बुलक्ष्मी की इस परफॉर्मेंस के बाद तमिल वीकली मैगजीन आनंदा विकातम में फ्रंटपेज आर्टिकल लिखा, जिसके बाद उनके कॉन्सर्ट में भारी भीड़ पहुंचने लगी। काम के सिलसिले में हुई मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और परिवार के खिलाफ जाकर शादी की। सदाशिवम जानते थे कि सुब्बुलक्ष्मी का हुनर सिर्फ मंच तक सीमित रहने के लिए नहीं है। फिल्ममेकर के. सुब्रह्मण्यम से सिफारिश कर सदाशिवम ने सुब्बुलक्ष्मी को फिल्म सेवासदन में लीड रोल दिलवाया। 1938 की ये फिल्म जबरदस्त हिट रही और सुब्बुलक्ष्मी साउथ का बड़ा नाम बनकर उभरीं। सुब्बुलक्ष्मी के गानों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए पति सदाशिवम ने खुद पैसे लगाकर फिल्में बनाने का फैसला किया। सुब्बुलक्ष्मी के सुझाव पर सदाशिवम ने मीराबाई पर पहली फिल्म मीरा (1945) बनाई। फिल्म में सुब्बुलक्ष्मी को ही मीराबाई का लीड रोल दिया गया। मीरा का रोल निभाने के लिए सुब्बुलक्ष्मी खुद उन सभी जगहों पर जाकर रहीं, जहां मीरा ने कृष्ण भक्ति में समय बिताया था। 1944 में फिल्म की शूटिंग न्यूटोन स्टूडियो, मद्रास में शुरू हुई, जिसके बाद टीम ने जयपुर, वृंदावन, चित्तौड़ और द्वारका का चयन किया। फिल्म के कॉन्सेप्ट से प्रभावित होकर उदयपुर के महाराजा ने हाथी-घोड़ों के साथ फिल्म बनाने के लिए अपना पैलेस इस्तेमाल करने की इजाजत से लेकर हर तरह से मदद की। महाराजा के मंत्री की मदद से उन्हें शाही हाथी-घोड़े मिले और साथ ही महल में कहीं भी कभी भी शूटिंग करने की इजाजत भी। शूटिंग के लिए महल की शाही डांसर्स भी दी गईं। फिल्म में नजर आए कई एक्स्ट्रा कलाकार भी शाही लोग थे। 136 मिनट की फिल्म में थे सुब्बुलक्ष्मी के 20 गाने 3 नवंबर 1945 को दिवाली पर फिल्म मीरा रिलीज की गई। 136 मिनट की इस फिल्म में 20 गाने थे, जो सुब्बुलक्ष्मी ने ही गाए थे। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी बड़ी हिट रही कि दो साल बाद कुछ सीन को रीशूट कर 1947 में हिंदी में मीराबाई नाम से फिर रिलीज किया गया था। प्रीमियर में पहुंचे थे माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरू 21 नवंबर 1947 को मीराबाई फिल्म रिलीज हुई, जिससे सुब्बुलक्ष्मी तमिल स्टार से नेशनल स्टार बन गईं। फिल्म में सरोजिनी नायडू ने सुब्बुलक्ष्मी का परिचय करवाते हुए उन्हें नाइटेंगल ऑफ इंडिया (भारत की बुलबुल) नाम दिया था। फिल्म के प्रीमियर में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी पहुंचे थे। इनके अलावा लॉर्ड माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, विजयालक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी जैसी देश की अन्य बड़ी हस्तियां भी थीं। फिल्म देखने के बाद जवाहरलाल नेहरू और माउंटबेटन सुब्बुलक्ष्मी के फैन बन गए थे। फिल्म मीरा तमिल सिनेमा में म्यूजिकल कल्ट साबित हुई। ये फिल्म आज भी भारत की 100 सबसे महान फिल्मों की लिस्ट में शामिल है। मीरा हिट होने के बाद उन्हें

मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम संग तस्वीर पर सफाई दी:एक्ट्रेस बोलीं- उन्होंने शारजाह में क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था

मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम संग तस्वीर पर सफाई दी:एक्ट्रेस बोलीं- उन्होंने शारजाह में क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था

एक्ट्रेस मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम के साथ वायरल हुई अपनी तस्वीर पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि दाऊद ने उन्हें शारजाह क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था। मंदाकिनी के मुताबिक, वह एक शो के लिए दुबई गई थीं। इसके बाद क्रिकेट मैच देखने पहुंचीं, जहां यह तस्वीर ली गई थी। उस समय उन्हें नहीं पता था कि तस्वीर विवाद का कारण बनेगी। मंदाकिनी ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि तस्वीर को लेकर हुई अटकलों और खबरों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। इस विवाद से उनके फिल्म करियर को बहुत नुकसान हुआ। एक्ट्रेस ने कहा कि एक कलाकार कई लोगों से मिलता है। कलाकार किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। उन्होंने कहा, “लोग जो लिखना या कहना चाहते हैं, उस पर हमारा नियंत्रण नहीं होता। एक कलाकार को हजारों लोगों से मिलना पड़ता है और सभी उसके लिए बराबर होते हैं।” मंदाकिनी ने कहा, “हमारे साथ बहुत सारे लोग थे। ऐसे में किसे चुनें और किसे न चुनें? हम वहां एक शो के लिए गए थे। नहीं, मुझे दाऊद ने नहीं बुलाया था। मैं दुबई में एक शो के लिए गई थी और फिर मैच देखने पहुंची। उस समय मुझे इसका अंदाजा नहीं था।” विवाद का असर मंदाकिनी ने बताया कि बाद में यह तस्वीर विवाद का विषय बन गई। इसे लेकर बड़े स्तर पर अटकलें लगाई गईं। उन्होंने कहा, “इस विवाद से बहुत नुकसान हुआ। बाद में मुझे पता चला कि इन सभी चीजों को संभालने के लिए एक टीम होनी चाहिए। मैंने हर जगह इन अफवाहों का खंडन किया।” 80 और 90 के दशक में दाऊद दुबई से अपना नेटवर्क चला रहा था। वहां वह अक्सर बॉलीवुड सितारों के लिए आलीशान पार्टियां रखता था। मंदाकिनी के अलावा एक्टर अनिल कपूर की भी शारजाह स्टेडियम से एक पुरानी तस्वीर इंटरनेट पर मौजूद है, जिसमें वे राज कपूर और महबूब के साथ बैठे हैं और उनके पीछे दाऊद इब्राहिम दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस तस्वीर को लेकर अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर सफाई दी थी कि उनके पिता वहां राज कपूर और कृष्णा कपूर के साथ सिर्फ भारतीय क्रिकेट मैच देखने गए थे और उन्हें जानकारी नहीं थी कि उनके पास कौन बैठा है। वहीं, ऋषि कपूर ने खुद स्वीकार किया था कि वे दुबई में दाऊद से 2 बार मिले थे। मंदाकिनी ने बताया ‘राम तेरी गंगा मैली’ के चर्चित सीन का सच मंदाकिनी ने फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से डेब्यू किया था। इसमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई और 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गईं। राज कपूर के निर्देशन में बनी यह फिल्म बड़ी हिट रही। हालांकि, फिल्म के कई सीन बाद में चर्चा और विवाद का विषय बने। मंदाकिनी ने गाने ‘तुझे बुलाएं ये मेरी बहनें’ में सफेद साड़ी में फिल्माए गए झरने वाले सीन और बहस में रहे स्तनपान वाले सीन पर बात की। उन्होंने कहा कि इन दृश्यों का उद्देश्य फिल्म में मासूमियत और पवित्रता को दिखाना था। ANI को दिए इंटरव्यू में मंदाकिनी ने बताया कि जब उन्होंने फिल्म की शूटिंग शुरू की, तब वह सिर्फ 16 साल की थीं और उन्हें पूरी तरह अंदाजा नहीं था कि बाद में इन सीन को किस तरह देखा जाएगा। झरने वाले सीन के बारे में मंदाकिनी ने कहा कि राज कपूर ने उन्हें सीन समझाया था। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य अश्लीलता दिखाना नहीं था, बल्कि फिल्म की कहानी और गंगा के किरदार की पवित्रता को सामने रखना था। एक्ट्रेस ने कहा, “उनका तरीका ऐसा था कि आप उनसे कोई सवाल ही नहीं करते थे। इतना प्यार से, इतना जेंटल, जैसे आपका फैमिली मेंबर आपसे करवा रहा हो। मुझे कहीं से कोई अश्लीलता महसूस नहीं हुई। कोई खराब या घिनौना एहसास नहीं था। पूरी फिल्म यही थी कि गंगा को अपवित्र करना चाहते थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए।” उन्होंने आगे कहा, “वह मेरे सामने थे। थोड़ा सा मुझे लगा तो मैंने साड़ी को डबल कर लिया। उन्होंने कहा डबल कर लो, तो मैंने कर लिया। बस हो गया वो शॉट। यह मेरे लिए बड़ी बात थी, क्योंकि मैं बहुत छोटी जगह से आई थी।” मंदाकिनी ने स्तनपान के सीन पर सफाई दी मंदाकिनी ने फिल्म के चर्चित स्तनपान वाले सीन पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि इसमें वास्तव में स्तनपान नहीं कराया गया था और कैमरे की पोजिशनिंग के जरिए ऐसा सीन बनाया गया था। उन्होंने कहा, “नहीं, वहां कोई स्तनपान नहीं था। उन्होंने इसे बहुत अच्छे तरीके से फिल्माया था। मेरे लिए अब समझाना मुश्किल है, लेकिन अगर मैं बताऊंगी कि इसे कैसे किया गया था, तो आप समझ जाएंगे।” अभिनेत्री ने बताया कि सीन में उनके पास एक बच्चा था, जिसे उन्होंने कसकर पकड़ा हुआ था। उन्होंने कहा, “हां, मेरे पास बच्चा था और मैंने उसे कसकर पकड़ा था, लेकिन वह स्तनपान नहीं था। मैं यही सबको बताना चाहती हूं।” मंदाकिनी के मुताबिक, उन्होंने लो-कट आउटफिट पहना था और बच्चे को शरीर के करीब रखा था। कैमरे के एंगल की वजह से ऐसा लगा कि मां अपने बच्चे को स्तनपान करा रही है। उन्होंने कहा कि सीन का उद्देश्य मां और बच्चे के रिश्ते को दिखाना था, जिसे बाद में अलग तरह से समझा गया। सफलता के बाद झरने वाला सीन दोहराने से मना किया अभिनेत्री ने यह भी बताया कि ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद कुछ फिल्ममेकर्स ने उनसे झरने वाले सीन को दोहराने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उनका कहना था कि किसी फिल्म के सफल होने के लिए सिर्फ एक सीन नहीं, बल्कि अच्छी कहानी जरूरी है। उन्होंने कहा, “हिट होने के लिए बहुत अच्छी कहानी चाहिए, जो ‘राम तेरी गंगा मैली’ में थी। उसमें क्या दिखाया गया है? उसका ट्रीटमेंट क्या है? डायरेक्टर आपको क्या मैसेज देना चाहता है? सब कुछ मायने रखता है।” ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा समेत इंडस्ट्री के कई प्रमुख कलाकारों के साथ काम किया और अपने करियर में कई फिल्मों में नजर आईं।

मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम संग तस्वीर पर सफाई दी:एक्ट्रेस बोलीं- उन्होंने शारजाह में क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था

मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम संग तस्वीर पर सफाई दी:एक्ट्रेस बोलीं- उन्होंने शारजाह में क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था

एक्ट्रेस मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम के साथ वायरल हुई अपनी तस्वीर पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि दाऊद ने उन्हें शारजाह क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था। मंदाकिनी के मुताबिक, वह एक शो के लिए दुबई गई थीं। इसके बाद क्रिकेट मैच देखने पहुंचीं, जहां यह तस्वीर ली गई थी। उस समय उन्हें नहीं पता था कि तस्वीर विवाद का कारण बनेगी। मंदाकिनी ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि तस्वीर को लेकर हुई अटकलों और खबरों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। इस विवाद से उनके फिल्म करियर को बहुत नुकसान हुआ। एक्ट्रेस ने कहा कि एक कलाकार कई लोगों से मिलता है। कलाकार किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। उन्होंने कहा, “लोग जो लिखना या कहना चाहते हैं, उस पर हमारा नियंत्रण नहीं होता। एक कलाकार को हजारों लोगों से मिलना पड़ता है और सभी उसके लिए बराबर होते हैं।” मंदाकिनी ने कहा, “हमारे साथ बहुत सारे लोग थे। ऐसे में किसे चुनें और किसे न चुनें? हम वहां एक शो के लिए गए थे। नहीं, मुझे दाऊद ने नहीं बुलाया था। मैं दुबई में एक शो के लिए गई थी और फिर मैच देखने पहुंची। उस समय मुझे इसका अंदाजा नहीं था।” मंदाकिनी ने बताया कि बाद में यह तस्वीर विवाद का विषय बन गई। इसे लेकर बड़े स्तर पर अटकलें लगाई गईं। उन्होंने कहा, “इस विवाद से बहुत नुकसान हुआ। बाद में मुझे पता चला कि इन सभी चीजों को संभालने के लिए एक टीम होनी चाहिए। मैंने हर जगह इन अफवाहों का खंडन किया।” 80 और 90 के दशक में दाऊद दुबई से अपना नेटवर्क चला रहा था। वहां वह अक्सर बॉलीवुड सितारों के लिए आलीशान पार्टियां रखता था। मंदाकिनी के अलावा एक्टर अनिल कपूर की भी शारजाह स्टेडियम से एक पुरानी तस्वीर इंटरनेट पर मौजूद है, जिसमें वे राज कपूर और महबूब के साथ बैठे हैं और उनके पीछे दाऊद इब्राहिम दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस तस्वीर को लेकर अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर सफाई दी थी कि उनके पिता वहां राज कपूर और कृष्णा कपूर के साथ सिर्फ भारतीय क्रिकेट मैच देखने गए थे और उन्हें जानकारी नहीं थी कि उनके पास कौन बैठा है। वहीं, ऋषि कपूर ने खुद स्वीकार किया था कि वे दुबई में दाऊद से 2 बार मिले थे। मंदाकिनी ने बताया ‘राम तेरी गंगा मैली’ के चर्चित सीन का सच मंदाकिनी ने फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से डेब्यू किया था। इसमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई और 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गईं। राज कपूर के निर्देशन में बनी यह फिल्म बड़ी हिट रही। हालांकि, फिल्म के कई सीन बाद में चर्चा और विवाद का विषय बने। मंदाकिनी ने गाने ‘तुझे बुलाएं ये मेरी बहनें’ में सफेद साड़ी में फिल्माए गए झरने वाले सीन और बहस में रहे स्तनपान वाले सीन पर बात की। उन्होंने कहा कि इन दृश्यों का उद्देश्य फिल्म में मासूमियत और पवित्रता को दिखाना था। ANI को दिए इंटरव्यू में मंदाकिनी ने बताया कि जब उन्होंने फिल्म की शूटिंग शुरू की, तब वह सिर्फ 16 साल की थीं और उन्हें पूरी तरह अंदाजा नहीं था कि बाद में इन सीन को किस तरह देखा जाएगा। झरने वाले सीन के बारे में मंदाकिनी ने कहा कि राज कपूर ने उन्हें सीन समझाया था। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य अश्लीलता दिखाना नहीं था, बल्कि फिल्म की कहानी और गंगा के किरदार की पवित्रता को सामने रखना था। एक्ट्रेस ने कहा, “उनका तरीका ऐसा था कि आप उनसे कोई सवाल ही नहीं करते थे। इतना प्यार से, इतना जेंटल, जैसे आपका फैमिली मेंबर आपसे करवा रहा हो। मुझे कहीं से कोई अश्लीलता महसूस नहीं हुई। कोई खराब या घिनौना एहसास नहीं था। पूरी फिल्म यही थी कि गंगा को अपवित्र करना चाहते थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए।” उन्होंने आगे कहा, “वह मेरे सामने थे। थोड़ा सा मुझे लगा तो मैंने साड़ी को डबल कर लिया। उन्होंने कहा डबल कर लो, तो मैंने कर लिया। बस हो गया वो शॉट। यह मेरे लिए बड़ी बात थी, क्योंकि मैं बहुत छोटी जगह से आई थी।”’ मंदाकिनी ने स्तनपान के सीन पर सफाई दी मंदाकिनी ने फिल्म के चर्चित स्तनपान वाले सीन पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि इसमें वास्तव में स्तनपान नहीं कराया गया था और कैमरे की पोजिशनिंग के जरिए ऐसा सीन बनाया गया था। उन्होंने कहा, “नहीं, वहां कोई स्तनपान नहीं था। उन्होंने इसे बहुत अच्छे तरीके से फिल्माया था। मेरे लिए अब समझाना मुश्किल है, लेकिन अगर मैं बताऊंगी कि इसे कैसे किया गया था, तो आप समझ जाएंगे।” अभिनेत्री ने बताया कि सीन में उनके पास एक बच्चा था, जिसे उन्होंने कसकर पकड़ा हुआ था। उन्होंने कहा, “हां, मेरे पास बच्चा था और मैंने उसे कसकर पकड़ा था, लेकिन वह स्तनपान नहीं था। मैं यही सबको बताना चाहती हूं।” मंदाकिनी के मुताबिक, उन्होंने लो-कट आउटफिट पहना था और बच्चे को शरीर के करीब रखा था। कैमरे के एंगल की वजह से ऐसा लगा कि मां अपने बच्चे को स्तनपान करा रही है। उन्होंने कहा कि सीन का उद्देश्य मां और बच्चे के रिश्ते को दिखाना था, जिसे बाद में अलग तरह से समझा गया। सफलता के बाद झरने वाला सीन दोहराने से मना किया अभिनेत्री ने यह भी बताया कि ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद कुछ फिल्ममेकर्स ने उनसे झरने वाले सीन को दोहराने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उनका कहना था कि किसी फिल्म के सफल होने के लिए सिर्फ एक सीन नहीं, बल्कि अच्छी कहानी जरूरी है। उन्होंने कहा, “हिट होने के लिए बहुत अच्छी कहानी चाहिए, जो ‘राम तेरी गंगा मैली’ में थी। उसमें क्या दिखाया गया है? उसका ट्रीटमेंट क्या है? डायरेक्टर आपको क्या मैसेज देना चाहता है? सब कुछ मायने रखता है।” ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा समेत इंडस्ट्री के कई प्रमुख कलाकारों के साथ काम किया और अपने करियर में कई फिल्मों में नजर आईं।

रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की:अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका

रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की:अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका

अमेरिकी अधिकारियों ने ओमान में हूती नेताओं से मुलाकात की। इसके बदले में ट्रम्प प्रशासन ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब को सैन्य मदद नहीं देने का फैसला किया है। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि 2025 में दोनों पक्षों के बीच हुआ सीजफायर अभी कायम है और वे लाल सागर में अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। हालांकि, सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को वे अपना लक्ष्य मानते हैं। उपराष्ट्रपति वेंस बोले- हम हूतियों के साथ सीधे संपर्क में अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले हफ्ते में ओमान की राजधानी मस्कट के अमेरिकी दूतावास में हूती नेताओं के साथ बैठक की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को पुष्टि की कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे संपर्क में है। अमेरिका ने मार्च 2025 में हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इसके बावजूद हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों ने हूती नेताओं के अलावा हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की है। सऊदी अरब को अकेले लड़ना पड़ सकता है पिछले हफ्ते हूतियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के तट से लगे बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद की उम्मीद की थी। अमेरिका ने हूती गतिविधियों को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है, लेकिन अभी तक सऊदी अरब के समर्थन में सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं की है। इसकी एक वजह यह भी है कि अमेरिका पहले से ईरान के साथ महंगे और संसाधन खपाने वाले संघर्ष में उलझा हुआ है। ईरान हूतियों का समर्थन करता है। यमन में अमेरिका के पूर्व उप राजदूत नबील खौरी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन और हूतियों के बीच एक तरह की ‘मौन समझ’ बनी है। खौरी के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की लाल सागर में आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। उनके अनुसार खतरा मुख्य रूप से सऊदी जहाजों या सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को है। सऊदी ने कहा- मक्का की ओर ड्रोन भेजा गया सऊदी अरब ने मंगलवार को दावा किया कि हूतियों ने पवित्र शहर मक्का की ओर ड्रोन भेजा था। सऊदी रक्षा बलों ने इसे नष्ट करने की बात कही। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्किये अल-मलिकी के मुताबिक, ड्रोन को स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:50 बजे मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास रोका गया। सऊदी अरब ने कहा कि मक्का पर किसी भी तरह का हमला ‘रेड लाइन’ है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और 57 देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने भी इस दावे की निंदा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘घिनौना और जघन्य’ हमला बताया। हूतियों ने सऊदी के आरोप को ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताया हूती नेतृत्व ने सऊदी अरब के दावे को खारिज कर दिया। हूतियों ने इसे ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताते हुए कहा कि इस तरह के दावों से पहले भी लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। हूती उप विदेश मंत्री अब्दुल वहीद अबू रास ने उल्टा सऊदी अरब पर मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। हूतियों ने सऊदी F-15 गिराने का भी दावा किया हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने मारिब के पास सऊदी अरब का F-15 लड़ाकू विमान गिराया है। साथ ही लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको के एक संयंत्र पर हमला करने का दावा किया। हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता ने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। हूती वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा कि F-15 गिराने का दावा पश्चिमी देशों के लिए चेतावनी है कि वे सऊदी ‘प्रचार’ का शिकार न बनें। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांग रहा हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि सऊदी अरब यमन में मुश्किल स्थिति में है। उनके मुताबिक, सऊदी अरब ने युद्ध और नाकेबंदी के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि अब सऊदी अरब पाकिस्तान, तुर्किये, अमेरिका, इजराइल और मिस्र से समर्थन मांग रहा है और मक्का पर हमले के दावे के जरिए मुस्लिम देशों को अपने साथ लामबंद करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-इजराइल समेत अरब देशों के सैन्य प्रमुखों की गुप्त बैठक इस बीच, इजराइली अधिकारियों ने अमेरिका, इजराइल और कई अरब देशों के सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में हुई एक गुप्त बैठक की जानकारी लीक की है। एक्सिओस के पत्रकार बराक रैविड के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पिछले सप्ताह यह बैठक आयोजित की थी। बैठक में इजराइल, सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, छह महीने से ज्यादा समय पहले अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यह इस तरह की पहली बैठक थी। इजराइल, जिसे पहले हूती हमलों का सामना करना पड़ा था, अब सऊदी अरब की ओर से यमन में हस्तक्षेप करने की पेशकश कर रहा है। UN में लाल सागर बंद करने की कोशिश की निंदा मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लाल सागर को बंद करने की किसी भी कोशिश की निंदा की गई। बैठक में रूस के रुख में भी बदलाव के संकेत मिले। रूसी प्रतिनिधि ने पहले जहां यमन में अदन स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को ही एकमात्र वैध सरकार माना था, अब उससे कुछ दूरी बनाते हुए नजर आए। चीन पहुंचा ईरान, होर्मुज पर समर्थन की कोशिश बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर ईरान की योजनाओं पर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। ईरान और अमेरिका की अलग-अलग नाकेबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य अभी बंद है। चीन ने कहा कि वह नहीं चाहता कि क्षेत्रीय तनाव यमन और लाल सागर तक फैले। बीजिंग ने अमेरिका से जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के आधार