Monday, 21 Sep 2026 | 07:54 PM

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भारत पर 100% टैरिफ बिल पर अमेरिकी संसद में वोटिंग:रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर ट्रम्प लगा सकेंगे भारी शुल्क; सीनेट से पास हो चुका

भारत पर 100% टैरिफ बिल पर अमेरिकी संसद में वोटिंग:रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर ट्रम्प लगा सकेंगे भारी शुल्क; सीनेट से पास हो चुका

अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आज उस बिल पर अंतिम वोटिंग होगी, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक एक्सट्रा टैरिफ लग सकता है। इसका असर भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ सकता है। हालांकि, इस वोटिंग का मतलब भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लगना नहीं है। बिल कानून बना तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ऐसा टैरिफ लगाने की कानूनी शक्ति मिल जाएगी। मंगलवार को हाउस ने 214-211 वोट से बिल को अंतिम वोटिंग के लिए आगे बढ़ाया था। इससे पहले अमेरिकी सीनेट अगस्त में इसे 86-11 वोट से पास कर चुकी है। यह बिल कानून बना तो भारत पर असर पहली स्थिति: भारत रूस से तेल खरीदता रहे अमेरिका के 100% टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में दोगुना महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स आदि के ऑर्डर घट जाएंगे। दूसरी स्थिति: भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है, तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। रूस के रक्षा क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगेगा बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। अगर अमेरिकी संसद का निचला सदन इसे मंजूरी दे देता है, तो बिल व्हाइट हाउस जाएगा। यहां राष्ट्रपति ट्रम्प के साइन करते ही यह कानून बन जाएगा। इस बिल में रूस के तेल और रक्षा से जुड़े कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। साथ ही रूस के उन टैंकरों पर भी कार्रवाई हो सकती है जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचते हुए दूसरे देशों तक रूसी तेल पहुंचाते हैं। इन टैंकरों के नेटवर्क को रूस का ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। अमेरिका पहले भी रूस पर ऐसे प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर चुका है। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और दुनिया में तेल की कमी का डर बढ़ गया। इसके बाद अमेरिकी सरकार को रूस के तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए लगी पाबंदियों में छूट देनी पड़ी थी। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा अगर यह कानून बन जाता है तो 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिल जाएगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका से पैसा निकालने लगे दुनिया के बड़े निवेशक: 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, सोना खरीद रहे, चीन में निवेश बढ़ा रहे अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। इसके साथ ब्याज दरें, टैरिफ और दूसरे देशों पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंध भी बढ़ रहे हैं। इससे दुनिया के कुछ निवेशक अब सोच रहे हैं कि अपना पैसा अमेरिका के अलावा कहां लगाया जाए। पूरी खबर पढ़ें…

UAE ने 4 हजार बांग्लादेशियों के वीजा रद्द किए:छुट्टी पर घर लौटे लोग अब नहीं जा पा रहे; बांग्लादेश ने दोबारा जांच की मांग की

UAE ने 4 हजार बांग्लादेशियों के वीजा रद्द किए:छुट्टी पर घर लौटे लोग अब नहीं जा पा रहे; बांग्लादेश ने दोबारा जांच की मांग की

संयुक्त अरब अमीरात (UAE ) ने 4 हजार से ज्यादा बांग्लादेशियों के वीजा रद्द कर दिए हैं। इनमें कई ऐसे लोग हैं, जो छुट्टी लेकर बांग्लादेश लौटे थे और अब अपनी नौकरी, कारोबार और परिवार के पास UAE वापस नहीं जा पा रहे हैं। इन लोगों को वीजा रद्द करने की कोई साफ वजह नहीं बताई गई है। कई लोगों को ईमेल या मोबाइल मैसेज से इसकी जानकारी मिली। कुछ मामलों में UAE में रहने वाले उनके प्रायोजकों को भी बताया गया। बांग्लादेश सरकार ने मामला राजनयिक स्तर पर UAE के सामने उठाया है और वीजा रद्द करने के मामलों की दोबारा जांच की मांग की है। प्रभावित लोगों ने सरकार को 22 सितंबर तक समाधान निकालने का समय दिया है। 27 साल से UAE में थे, छुट्टी से लौटे तो वीजा रद्द मिला प्रभावित लोगों में अबुल कलाम आजाद भी शामिल हैं। वे पिछले 27 साल से UAE में रह रहे थे। वे 7 अप्रैल को छुट्टी पर बांग्लादेश लौटे थे। करीब साढ़े तीन महीने बाद 24 जुलाई को उन्हें ईमेल मिला, जिसमें बताया गया कि उनका वीजा रद्द कर दिया गया है। ईमेल में इसकी कोई वजह नहीं बताई गई थी। आजाद ने द डेली स्टार को बताया कि उन्हें वीजा रद्द करने का कारण नहीं बताया गया। वे उन करीब 350 प्रभावित बांग्लादेशियों में शामिल थे, जो 7 सितंबर को ढाका के नेशनल प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे। इन लोगों ने सरकार से मामले का समाधान निकालने की मांग की। अन्य प्रभावित लोगों ने भी बताया कि जुलाई से उन्हें ईमेल या मोबाइल मैसेज के जरिए वीजा रद्द होने की जानकारी मिलने लगी। कुछ लोगों के UAE में मौजूद प्रायोजकों को भी इसकी सूचना दी गई। किसी पर केस नहीं, फिर भी वापस नहीं जा पा रहे एक प्रभावित व्यक्ति ने द डेली स्टार को बताया कि UAE में उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला या कानूनी विवाद नहीं है। इसके बावजूद उसका वीजा रद्द कर दिया गया। उसने बताया कि UAE में उसके दो कारोबार हैं और उसकी पत्नी दुबई में रहती हैं। अब वह वापस जाने की अनुमति के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है। उसका कहना है कि अगर वह दुबई नहीं लौट पाया तो उसे भारी आर्थिक नुकसान होगा। यानी इसका असर सिर्फ नौकरी करने वालों पर नहीं पड़ा है। UAE में कारोबार करने वाले और वहां परिवार के साथ रहने वाले लोग भी प्रभावित हैं। UAE में 12 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी बांग्लादेश ने 1976 में UAE में श्रमिक भेजना शुरू किया था। पिछले करीब 50 वर्षों में UAE बांग्लादेशी प्रवासियों के लिए खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख देशों में शामिल हो गया है। फिलहाल UAE में 12 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी रह रहे हैं। इनमें नौकरी करने वालों के साथ कारोबारी और दूसरे क्षेत्रों में काम करने वाले लोग भी शामिल हैं। सरकार को जुलाई में ही 4 हजार वीजा रद्द होने की जानकारी थी बांग्लादेश के प्रवासी कल्याण और विदेश रोजगार राज्य मंत्री नुरुल हक नूर ने 7 सितंबर को फेसबुक पोस्ट में बताया था कि उनके मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को करीब 4 हजार बांग्लादेशियों के वीजा रद्द होने की जानकारी है। उन्होंने कहा था कि प्रभावित लोगों में कई ऐसे हैं, जिनके UAE में कारोबार और दुकानें हैं। सरकार मामले को राजनयिक तरीके से सुलझाने की कोशिश कर रही है। इसके बाद मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से प्रभावित लोगों की संख्या 4,800 तक होने की जानकारी सामने आई। हालांकि, UAE सरकार ने सार्वजनिक रूप से 4,800 का आंकड़ा जारी नहीं किया है। लोगों की 5 मांगें आखिर वीजा क्यों रद्द किए गए? इसकी कोई एक आधिकारिक वजह अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। सेंटर फॉर नॉन-रेजिडेंट बांग्लादेशी के अध्यक्ष एमएस शेखिल चौधरी के मुताबिक, मौजूदा मध्य पूर्व संघर्ष के बीच UAE ने प्रवासियों की जांच और निगरानी बढ़ाई है। उनका कहना है कि वीजा समय पर रिन्यू न कराने, दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं और सोशल मीडिया गतिविधियों जैसी चीजों की ज्यादा बारीकी से जांच की जा रही है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं कहा कि प्रभावित लोगों के वीजा इन्हीं वजहों से रद्द किए गए हैं। उनके मुताबिक, मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति का असर जांच प्रक्रिया पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। ऐसे में बांग्लादेश सरकार को UAE के साथ बातचीत बढ़ाने की जरूरत है। अब आगे क्या होगा? बांग्लादेश सरकार ने UAE के सामने मामला उठाकर वीजा रद्द किए जाने की समीक्षा की मांग की है। वहीं, प्रभावित लोगों ने सरकार को 22 सितंबर तक समाधान निकालने का समय दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि UAE इन वीजा को रद्द करने की वजह क्या बताता है और क्या प्रभावित लोगों को दोबारा UAE जाकर अपनी नौकरी और कारोबार शुरू करने की अनुमति मिलती है। —————————- यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी नेवी शिप अरब सागर में भारतीय युद्धपोत से टकराया: दिल्ली में PAK हाईकमिश्नर तलब पाकिस्तानी नौसेना का एक जहाज अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में भारतीय नौसेना के जहाज से टकराया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

इजराइल को ₹26 हजार करोड़ के हथियार देंगे ट्रम्प:900 किलो के 40 हजार बम शामिल; बाइडेन ने इनकी सप्लाई पर रोक लगाई थी

इजराइल को ₹26 हजार करोड़ के हथियार देंगे ट्रम्प:900 किलो के 40 हजार बम शामिल; बाइडेन ने इनकी सप्लाई पर रोक लगाई थी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन इजराइल को 2.8 अरब डॉलर यानी करीब ₹26 हजार करोड़ के हथियार देने की तैयारी कर रहा है। इस पैकेज में करीब 40 हजार भारी बम शामिल हैं। हर बम का वजन 2000 पाउंड यानी करीब 900 किलोग्राम है। डील अभी फाइनल नहीं हुई है। इनमें 20 हजार Mk84 और 20 हजार BLU-117 बम शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी कांग्रेस को प्रस्तावित डील की अनौपचारिक जानकारी दे दी गई है। 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने इन 2,000 पाउंड के बमों की एक खेप इजराइल भेजने पर रोक लगा दी थी। बाइडेन प्रशासन को डर था कि गाजा जैसे घनी आबादी वाले इलाके में इन बमों के इस्तेमाल से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो सकती है। ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद यह रोक हटा दी गई। खबर अपडेट हो रही है…

ईरान में उड़ान भरते ही विमान का टायर फटा:बोइंग 737 के इंजन में भी खराबी आई; मशहद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग हुई

ईरान में उड़ान भरते ही विमान का टायर फटा:बोइंग 737 के इंजन में भी खराबी आई; मशहद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग हुई

ईरान की सेपेहरान एयरलाइंस के बोइंग 737 विमान के उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एक टायर फट गया। इसके बाद विमान की इमरजेंसी लैंडिग करानी पड़ी। RT के मुताबिक, विमान के इंजन में भी खराबी आ गई थी। इसके बाद पायलट ने विमान को वापस मशहद एयरपोर्ट लाने का फैसला किया। यह विमान मशहद से केरमानशाह जा रहा था। घटना के दौरान विमान के अंदर बैठे यात्री काफी घबरा गए। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया:मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी, लोगों से सुरक्षित जगह जाने को कहा

हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया:मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी, लोगों से सुरक्षित जगह जाने को कहा

यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद सऊदी अरब ने मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। सऊदी सिविल डिफेंस के मुताबिक, नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म ने यह अलर्ट जारी किया था। इसमें खतरे की वजह नहीं बताई गई। लोगों से कहा गया कि वे भीड़ और खुले इलाकों में जाने से बचें और तुरंत किसी सुरक्षित जगह चले जाएं। कुछ देर बाद सिविल डिफेंस ने बताया कि खतरा टल गया है। हालांकि, लोगों से भीड़ से दूर रहने और किसी घटना की वीडियो या फोटो नहीं बनाने की अपील की गई। मंगलवार सुबह जेद्दा और ताइफ में भी ऐसे ही इमरजेंसी अलर्ट जारी किए गए थे। इन्हें भी कुछ देर बाद हटा लिया गया। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

मन्नत बेचने की बात पर शाहरुख बोले:नई गैलरी से अब और भी चमकूंगा, ‘किंग’ की रिलीज डेट नहीं बदली, 24 दिसंबर को आएगी फिल्म

मन्नत बेचने की बात पर शाहरुख बोले:नई गैलरी से अब और भी चमकूंगा, ‘किंग’ की रिलीज डेट नहीं बदली, 24 दिसंबर को आएगी फिल्म

शाहरुख खान ने मंगलवार को #AskSRK सेशन में फैंस के कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने 300 करोड़ रुपए की कीमत वाले अपने घर ‘मन्नत’ के रेनोवेशन और नई गैलरी को लेकर अपडेट दिया। एक फैन ने मजाक में मन्नत बेचने की बात कही तो शाहरुख ने कहा कि नई गैलरी बन रही है और अब वह वहीं से फैंस को नजर आएंगे। उन्होंने फिल्म ‘किंग’ की रिलीज डेट भी कन्फर्म की और बताया कि फिल्म 24 दिसंबर को ही सिनेमाघरों में आएगी। फैन ने कहा- मन्नत बेच दीजिए, शाहरुख ने दिया मजेदार जवाब शाहरुख खान सोशल मीडिया के जरिए फैंस से जुड़े रहते हैं। मंगलवार को उन्होंने एक्स पर #AskSRK सेशन किया। एक फैन ने उनकी चर्चित बालकनी को लेकर मजाकिया अंदाज में लिखा कि अगर वह वहां आकर फैंस का अभिवादन नहीं कर रहे हैं तो मन्नत बेच देनी चाहिए। शाहरुख के जन्मदिन और दूसरे खास मौकों पर फैंस उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में जुटते हैं। अभिनेता भी मन्नत की बालकनी से हाथ हिलाकर उनका अभिवादन करते रहे हैं। बोले- नई गैलरी बना रहा हूं, अब और भी चमकूंगा फैन के कमेंट पर शाहरुख ने अपने अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह मन्नत में नई गैलरी बनवा रहे हैं और अब उसी गैलरी से फैंस को नजर आएंगे। शाहरुख ने लिखा, ‘अब नई गैलरी बना रहा हूं ना तो और भी चमकूंगा नई गैलरी पर। साथ ही, उम्मीद है कि मेरे पास पकड़ने के लिए कुछ सहारा भी होगा।’ रेनोवेशन के चलते 60वें जन्मदिन पर बालकनी में नहीं आए थे मन्नत में लंबे समय से रेनोवेशन का काम चल रहा है। इसी वजह से शाहरुख अपने 60वें जन्मदिन पर घर की बालकनी में आकर फैंस का अभिवादन नहीं कर पाए थे। उन्होंने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए फैंस से माफी भी मांगी थी। अभिनेता के मुताबिक, रेनोवेशन के दौरान उनके लिए नई गैलरी तैयार की जा रही है। ‘किंग’ की रिलीज डेट नहीं बदली, 24 दिसंबर को आएगी फिल्म #AskSRK सेशन में शाहरुख ने अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘किंग’ को लेकर फैंस को अपडेट दिया। उन्होंने साफ किया कि फिल्म 24 दिसंबर 2026 को ही रिलीज होगी। इसकी रिलीज डेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। एक फैन ने फिल्म के ट्रेलर और दूसरे अपडेट्स को लेकर सवाल किया तो शाहरुख ने कहा कि फिल्म की रिलीज में करीब 100 दिन बाकी हैं। उन्होंने बताया कि फिल्म से जुड़े सभी जरूरी अपडेट 24 दिसंबर से पहले सामने आएंगे। बोले- सिद्धार्थ आनंद फिल्म को बेहतरीन बनाने में लगे हैं शाहरुख ने फिल्म के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद की तारीफ करते हुए कहा कि टीम फिल्म को बेहतर बनाने के लिए समय ले रही है। उनका कहना था कि वे ऐसा काम करना चाहते हैं जिसे देखकर दर्शकों को खुशी हो और उन्हें ‘किंग’ पर गर्व महसूस हो। उन्होंने कहा कि अभी सिर्फ बातचीत होगी, ट्रेलर बाद में आएगा। यानी फैंस को फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। ‘किंग’ में नजर आएंगे ये कलाकार सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बन रही ‘किंग’ में शाहरुख खान लीड रोल में हैं। फिल्म में सुहाना खान, दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, जयदीप अहलावत, अभय वर्मा, राघव जुयाल और अरशद वारसी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और मार्फ्लिक्स पिक्चर्स कर रहे हैं। ‘किंग’ 24 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक हादसे में भारतीय मूल की महिला और उसके नेपाली-अमेरिकी दोस्त की मौत हो गई। दोनों की उम्र 24 साल थी। वे लोअर मैनहट्टन के एक सबवे स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पर बैठे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रही ट्रेन ने दोनों को कुचल दिया। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में दोनों ट्रेन आने से कुछ सेकंड पहले ट्रैक पर शांति से बैठे दिखाई दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने महिला को हंसते हुए देखा था। वह दोस्त को अपनी तरफ खींच रही थी। ट्रेन ऑपरेटर बोला- इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की थी यह घटना स्प्रिंग स्ट्रीट सबवे स्टेशन की है। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (NYPD) के मुताबिक, न्यू जर्सी के डेटन की रहने वाली मलाइका चित्रे और सेरेविल के रहने वाले नवम कौल रात करीब 3:15 बजे ट्रैक पर थे। इसी दौरान ट्रेन ने दोनों को टक्कर मार दी। इसी दौरान एक राहगीर ने घटना का वीडियो बना ली। ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ट्रेन को समय रहते रोका नहीं जा सका। पुलिस के मुताबिक, दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। न्यूयॉर्क डेली न्यूज के मुताबिक, हादसे के बाद ट्रेन में मौजूद करीब 100 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ट्रैक पर क्यों बैठे, इसकी जांच जारी अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि मलाइका और नवम आधी रात को रेलवे ट्रैक पर क्यों बैठे थे। इस मामले की जांच जारी है। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि कहीं दोनों ने शराब या कोई दूसरी नशे की चीज तो नहीं ली थी। इससे संभव है कि उन्हें खतरे का अंदाजा समय रहते नहीं हुआ हो। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि, जांचकर्ताओं ने आत्महत्या की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। दोनों दोस्त एक ही यूनिवर्सिटी से थे मलाइका चित्रे एक फार्मास्यूटिकल्स कंपनी में ऑपरेशंस स्पेशलिस्ट के तौर पर काम करती थीं। वहीं नवम कौल सॉफ्टवेयर कंपनी ब्लूमबर्ग में फाइनेंशियल डेटा एनालिस्ट थे। दोनों ने न्यू जर्सी की रटगर्स यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी और लगभग एक ही समय में ग्रेजुएशन किया था। नवम के दोस्त बोले- गलत कदम की कोई वजह नहीं थी नवम कौल के दोस्तों और जानने वालों ने उन्हें मिलनसार और खुशमिजाज इंसान बताया। लोगों के मुताबिक, वह अपने समुदाय में काफी पसंद किए जाते थे। नवम के एक दोस्त की मां ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि दोनों एक ही माहौल में बड़े हुए थे। वे एक ही दोस्तों के ग्रुप और साउथ एशियन कम्युनिटी का हिस्सा थे। सभी साथ में घूमते और त्योहार मनाते थे। उनके मुताबिक, नवम की जिंदगी में ऐसा कुछ नहीं था जिससे लगे कि वह कोई गलत या बेवकूफी भरा कदम उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि नवम नेपाली मूल के थे। उनके माता-पिता करीब 30 साल पहले नेपाल से अमेरिका आकर बस गए थे। मलाइका की पड़ोसी बोले- वह बहुत होशियार और समझदार थीं मलाइका के परिवार के घर के पास रहने वाले एक पड़ोसी ने बताया कि वह बहुत होशियार और समझदार छात्रा थीं। पड़ोसी ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि मलाइका की मौत की खबर सुनकर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्हें अब भी समझ नहीं आ रहा कि आखिर दोनों रेलवे ट्रैक पर क्यों थे। NYPD के मुताबिक, दोनों की मौत के मामले में जांच अभी जारी है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… जंगली कुत्ते मादा की तलाश में 4000 km घूमे जाम्बिया के काफ्यू नेशनल पार्क से निकले तीन अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने साथी और नया इलाका तलाशने के लिए करीब 4,126 किमी का सफर तय किया। पूरी खबर पढ़ें…

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक हादसे में भारतीय मूल की महिला और उसके नेपाली-अमेरिकी दोस्त की मौत हो गई। दोनों की उम्र 24 साल थी। वे लोअर मैनहट्टन के एक सबवे स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पर बैठे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रही ट्रेन ने दोनों को कुचल दिया। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में दोनों ट्रेन आने से कुछ सेकंड पहले ट्रैक पर शांति से बैठे दिखाई दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने महिला को हंसते हुए देखा था। वह दोस्त को अपनी तरफ खींच रही थी। ट्रेन ऑपरेटर बोला- इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की थी यह घटना स्प्रिंग स्ट्रीट सबवे स्टेशन की है। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (NYPD) के मुताबिक, न्यू जर्सी के डेटन की रहने वाली मलाइका चित्रे और सेरेविल के रहने वाले नवम कौल रात करीब 3:15 बजे ट्रैक पर थे। इसी दौरान ट्रेन ने दोनों को टक्कर मार दी। इसी दौरान एक राहगीर ने घटना का वीडियो बना ली। ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ट्रेन को समय रहते रोका नहीं जा सका। पुलिस के मुताबिक, दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। न्यूयॉर्क डेली न्यूज के मुताबिक, हादसे के बाद ट्रेन में मौजूद करीब 100 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ट्रैक पर क्यों बैठे, इसकी जांच जारी अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि मलाइका और नवम आधी रात को रेलवे ट्रैक पर क्यों बैठे थे। इस मामले की जांच जारी है। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि कहीं दोनों ने शराब या कोई दूसरी नशे की चीज तो नहीं ली थी। इससे संभव है कि उन्हें खतरे का अंदाजा समय रहते नहीं हुआ हो। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि, जांचकर्ताओं ने आत्महत्या की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। नवम के दोस्त बोले- गलत कदम की कोई वजह नहीं थी नवम कौल के दोस्तों और जानने वालों ने उन्हें मिलनसार और खुशमिजाज इंसान बताया। लोगों के मुताबिक, वह अपने समुदाय में काफी पसंद किए जाते थे। नवम के एक दोस्त की मां ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि दोनों एक ही माहौल में बड़े हुए थे। वे एक ही दोस्तों के ग्रुप और साउथ एशियन कम्युनिटी का हिस्सा थे। सभी साथ में घूमते और त्योहार मनाते थे। उनके मुताबिक, नवम की जिंदगी में ऐसा कुछ नहीं था जिससे लगे कि वह कोई गलत या बेवकूफी भरा कदम उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि नवम नेपाली मूल के थे। उनके माता-पिता करीब 30 साल पहले नेपाल से अमेरिका आकर बस गए थे। मलाइका की पड़ोसी बोले- वह बहुत होशियार और समझदार थीं मलाइका के परिवार के घर के पास रहने वाले एक पड़ोसी ने बताया कि वह बहुत होशियार और समझदार छात्रा थीं। पड़ोसी ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि मलाइका की मौत की खबर सुनकर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्हें अब भी समझ नहीं आ रहा कि आखिर दोनों रेलवे ट्रैक पर क्यों थे। NYPD के मुताबिक, दोनों की मौत के मामले में जांच अभी जारी है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… जंगली कुत्ते मादा की तलाश में 4000 km घूमे जाम्बिया के काफ्यू नेशनल पार्क से निकले तीन अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने साथी और नया इलाका तलाशने के लिए करीब 4,126 किमी का सफर तय किया। पूरी खबर पढ़ें…

टोयोटा हिलक्स हूती विद्रोहियों की पसंदीदा गाड़ी बनी:इस पर मशीनगन-रॉकेट लगाना आसान, 45 साल से दुनिया भर के आतंकियों की पहचान बना

टोयोटा हिलक्स हूती विद्रोहियों की पसंदीदा गाड़ी बनी:इस पर मशीनगन-रॉकेट लगाना आसान, 45 साल से दुनिया भर के आतंकियों की पहचान बना

यमन के लाल सागर तट पर पिछले हफ्ते हूती लड़ाकों के काफिले में टोयोटा हिलक्स पिकअप बड़ी संख्या में नजर आईं। इन पर मशीनगन और रॉकेट लगे थे। टोयोटा हिलक्स पिछले करीब 45 साल से दुनिया के अलग-अलग संघर्षों में विद्रोहियों और आतंकी संगठनों के बीच इस्तेमाल होती रही है। इसकी कम कीमत, मजबूत बनावट और आसानी से हथियार लगाने की वजह से यह आम गाड़ी युद्ध के मैदान में बेहद काम की साबित हुई है। हूती लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर नियंत्रण हासिल किया। टोयोटा हिलक्स आम नागरिकों की पिकअप से बदलकर विद्रोही युद्ध का प्रतीक बन चुकी है। IS से लेकर हूती लड़ाकों तक, कई सशस्त्र गुट इन्हें मोबाइल हथियार मंच की तरह इस्तेमाल करते हैं। अगर दुनिया भर के विद्रोहियों और गुरिल्लाओं की आम राइफल कलाश्निकोव पैटर्न की असॉल्ट राइफल है, तो उनकी पसंदीदा गाड़ी टोयोटा हिलक्स हो सकती है। यमन के हूती लड़ाकों से लेकर इराक में IS और अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज तक, हिलक्स संघर्ष वाले इलाकों में आम नजर आती है। फोर्ड, शेवरले और निसान जैसी कंपनियों की पिकअप भी इसी तरह इस्तेमाल होती हैं। इन पिकअप पर मशीनगन, ऑटोकैनन, एंटी-टैंक मिसाइल और दूसरे घातक हथियार लगाए जाते हैं। इस वजह से ये गैर-सरकारी सशस्त्र गुटों की पसंद बन गई हैं। आधुनिक देशों की सेनाएं अपने सैनिकों को बचाने वाले अत्याधुनिक बख्तरबंद वाहन बनाने पर लाखों खर्च करती हैं। इसके उलट विद्रोही, आतंकी, गुरिल्ला या लड़ाके साधारण टोयोटा से जंग में पहुंच जाते हैं। इन गाड़ियों पर मशीनगन या रॉकेट लॉन्चर लगाया जाता है। ये वाहन शहरों में चलने वाली आम गाड़ियों जैसे दिखते हैं। हिलक्स की लोकप्रियता की वजह हिलक्स जैसी गाड़ियों का युद्ध में इस्तेमाल नया नहीं है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश स्पेशल फोर्सेज ने उत्तरी अफ्रीका में धुरी राष्ट्रों की पंक्तियों के पीछे हमलों के लिए जीप और हल्के ट्रकों का इस्तेमाल किया था। गैर-सरकारी सशस्त्र गुटों में हिलक्स की लोकप्रियता की जड़ें 1980 के दशक के आखिर तक जाती हैं। उस समय लीबिया-चाड युद्ध अपने अंतिम चरण में था। सहारा के दक्षिण में स्थित देश चाड, मुअम्मर गद्दाफी के लीबिया से एक दशक से युद्ध लड़ रहा था। उसके पूर्व उपनिवेशवादी देश फ्रांस ने चाड को 400 हिलक्स और लैंड क्रूजर पिकअप दीं। इन वाहनों के साथ एंटी-टैंक और एंटी-एयर मिसाइलें भी दी गई थीं। फ्रांसीसी हवाई मदद के साथ इन टोयोटा वाहनों ने चाड को लीबिया के खिलाफ कई बड़ी सैन्य जीत दिलाईं। बाद में इस युद्ध को ‘टोयोटा वॉर’ नाम दिया गया। इस युद्ध ने दिखाया कि सही इस्तेमाल होने पर टोयोटा एक प्रभावी हथियार बन सकती है। इन वाहनों की रफ्तार और तेजी से दिशा बदलने की क्षमता ने उन्हें दुश्मन की गोलीबारी से बचने में मदद की। वे धीमे लीबियाई टैंकों के चारों ओर तेजी से घूमकर अचानक हमला कर सकती थीं। टोयोटा पिकअप सस्ती और टिकाऊ थीं। बुनियादी औजारों वाले लगभग किसी भी मैकेनिक से इनकी मरम्मत कराई जा सकती थी। दुनिया भर में आम नागरिकों के बीच लोकप्रिय होने के कारण इनके स्पेयर पार्ट्स आसानी से मिल जाते थे। हथियारों के विपरीत, टोयोटा हिलक्स या फोर्ड F-150 को विद्रोही गुटों तक पहुंचाने के लिए निर्यात पाबंदियों से नहीं गुजरना पड़ता। 1987 का युद्ध टोयोटा और विद्रोही गुटों की कहानी की शुरुआत भर था। समय के साथ अफगानिस्तान के पहाड़ों, इराक के रेगिस्तान और सोमालिया की सड़कों पर हिलक्स और दूसरी पिकअप आम दिखने लगीं। इन गाड़ियों को एक खास नाम भी मिला—‘टेक्निकल्स’। यह शब्द 1990 के दशक की शुरुआत में सोमालिया में सामने आया। उस समय सहायता एजेंसियां अपने कर्मचारियों और सामान की सुरक्षा के लिए स्थानीय सशस्त्र गुटों को पैसे देती थीं। इसे ‘टेक्निकल असिस्टेंस’ यानी तकनीकी सहायता कहा जाता था। बाद में हथियारों से लैस इन पिकअप के लिए ‘टेक्निकल्स’ नाम चलन में आ गया। विद्रोही गुटों को इतनी टोयोटा कैसे मिलती हैं इराक के कब्जे वाले शहरों में काली हिलक्स के साथ IS लड़ाके नजर आए। हूती लड़ाके भी यमन के लाल सागर तट पर ऐसी पिकअप तेजी से चलाते दिखे। सवाल यह है कि गैर-सरकारी सशस्त्र गुटों को इतनी बड़ी संख्या में ये वाहन मिलते कैसे हैं। 2015 में IS के चरम पर पहुंचने के दौरान अमेरिकी आतंकवाद रोधी अधिकारियों ने टोयोटा से इस बारे में जवाब मांगा था। वे जानना चाहते थे कि आतंकी संगठन इतनी हिलक्स और लैंड क्रूजर कैसे हासिल कर रहा है। टोयोटा ने विद्रोहियों को वाहन बेचने से इनकार किया था। कंपनी ने 2015 में कहा था, “हमारी सख्त नीति है कि हम ऐसे संभावित खरीदारों को वाहन नहीं बेचते, जो उनका इस्तेमाल या उनमें बदलाव अर्धसैनिक या आतंकी गतिविधियों के लिए कर सकते हैं।” टोयोटा के आंकड़ों के मुताबिक, इराक में हिलक्स और लैंड क्रूजर की बिक्री 2011 में 6,000 से बढ़कर 2013 में 18,000 हो गई थी। 2014 में यह बिक्री घटकर 13,000 रह गई। ABC न्यूज ने इन आंकड़ों की रिपोर्ट की थी। यह आंकड़े उस समय के हैं, जब IS ने सीरिया से इराक में बड़ा हमला शुरू किया था। यह हमला राजधानी बगदाद के बाहरी इलाकों तक पहुंच गया था। टोयोटा सीधे आतंकियों को वाहन न भी बेचती हो, फिर भी गैर-सरकारी गुटों के पास इन्हें हासिल करने के अपने तरीके हैं। दुनिया भर में हिलक्स की लोकप्रियता के कारण पुरानी गाड़ियां खुले बाजार में हमेशा उपलब्ध रहती हैं। कंपनी ने 2014 में कहा था, “हम केवल अनुमान लगा सकते हैं कि ये वाहन गुप्त रास्तों से आते हैं और लोगों के बीच खरीदे-बेचे जाते हैं। खासकर पुराने वाहनों का ऐसा अनौपचारिक कारोबार किसी वाहन निर्माता के लिए ट्रैक करना बहुत मुश्किल है।” एक मामले में अमेरिका के एक प्लंबर की फोर्ड पिकअप IS लड़ाकों को बेच दी गई थी। उसके दरवाजे पर प्लंबर का नाम और फोन नंबर लिखा हुआ था। वह फोर्ड सीरिया में IS के लिए इस्तेमाल होती रही। गाड़ी पर वही पहचान संबंधी जानकारी लगी थी। बाद में अमेरिकी न्यूज चैनलों ने इसे दिखाया। गैर-सरकारी सशस्त्र गुट बिचौलियों की मदद भी ले सकते हैं। ये बिचौलिए स्थानीय और विदेशी बाजारों से वाहन खरीदते हैं। इसके बाद कंपनी की नीतियों से

टोयोटा हिलक्स हूती विद्रोहियों की पसंदीदा गाड़ी बनी:इस पर मशीनगन-रॉकेट लगाना आसान, 45 साल से दुनिया भर के आतंकियों की पहचान बनी

टोयोटा हिलक्स हूती विद्रोहियों की पसंदीदा गाड़ी बनी:इस पर मशीनगन-रॉकेट लगाना आसान, 45 साल से दुनिया भर के आतंकियों की पहचान बनी

यमन में हूती विद्रोहियों के काफिले में एक खास तरह की पिकअप गाड़ियां लगातार चर्चा में हैं। हूती लड़ाके मशीनगन और रॉकेट से लेस टोयोटा हिलक्स समेत कई पिकअप गाड़ियों में नजर आए हैं। आम दिखने वाली ये गाड़ियां करीब 45 साल से दुनिया के अलग-अलग संघर्षों में विद्रोहियों और आतंकियों की पसंद बनी हुई हैं। इसकी कम कीमत, मजबूत बनावट और आसानी से हथियार लगाने की वजह से यह आम गाड़ी युद्ध के मैदान में बेहद काम की साबित हुई है। इन पिकअप पर मशीनगन, ऑटोकैनन, एंटी-टैंक मिसाइल और दूसरे घातक हथियार लगाए जाते हैं। ये वाहन शहरों में चलने वाली आम गाड़ियों जैसे दिखते हैं। हिलक्स की लोकप्रियता की वजह हिलक्स जैसी गाड़ियों का युद्ध में इस्तेमाल नया नहीं है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश स्पेशल फोर्सेज ने उत्तरी अफ्रीका में धुरी राष्ट्रों की पंक्तियों के पीछे हमलों के लिए जीप और हल्के ट्रकों का इस्तेमाल किया था। गैर-सरकारी सशस्त्र गुटों में हिलक्स की लोकप्रियता की जड़ें 1980 के दशक के आखिर तक जाती हैं। उस समय लीबिया-चाड युद्ध अपने अंतिम चरण में था। सहारा के दक्षिण में स्थित देश चाड, मुअम्मर गद्दाफी के लीबिया से एक दशक से युद्ध लड़ रहा था। उसके पूर्व उपनिवेशवादी देश फ्रांस ने चाड को 400 हिलक्स और लैंड क्रूजर पिकअप दीं। इन वाहनों के साथ एंटी-टैंक और एंटी-एयर मिसाइलें भी दी गई थीं। फ्रांसीसी हवाई मदद के साथ इन टोयोटा वाहनों ने चाड को लीबिया के खिलाफ कई बड़ी सैन्य जीत दिलाईं। बाद में इस युद्ध को ‘टोयोटा वॉर’ नाम दिया गया। इस युद्ध ने दिखाया कि सही इस्तेमाल होने पर टोयोटा एक प्रभावी हथियार बन सकती है। इन वाहनों की रफ्तार और तेजी से दिशा बदलने की क्षमता ने उन्हें दुश्मन की गोलीबारी से बचने में मदद की। वे धीमे लीबियाई टैंकों के चारों ओर तेजी से घूमकर अचानक हमला कर सकती थीं। टोयोटा पिकअप सस्ती और टिकाऊ थीं। बुनियादी औजारों वाले लगभग किसी भी मैकेनिक से इनकी मरम्मत कराई जा सकती थी। दुनिया भर में आम नागरिकों के बीच लोकप्रिय होने के कारण इनके स्पेयर पार्ट्स आसानी से मिल जाते थे। हथियारों के विपरीत, टोयोटा हिलक्स या फोर्ड F-150 को विद्रोही गुटों तक पहुंचाने के लिए निर्यात पाबंदियों से नहीं गुजरना पड़ता। 1987 का युद्ध टोयोटा और विद्रोही गुटों की कहानी की शुरुआत भर था। समय के साथ अफगानिस्तान के पहाड़ों, इराक के रेगिस्तान और सोमालिया की सड़कों पर हिलक्स और दूसरी पिकअप आम दिखने लगीं। इन गाड़ियों को एक खास नाम भी मिला—‘टेक्निकल्स’। यह शब्द 1990 के दशक की शुरुआत में सोमालिया में सामने आया। उस समय सहायता एजेंसियां अपने कर्मचारियों और सामान की सुरक्षा के लिए स्थानीय सशस्त्र गुटों को पैसे देती थीं। इसे ‘टेक्निकल असिस्टेंस’ यानी तकनीकी सहायता कहा जाता था। बाद में हथियारों से लैस इन पिकअप के लिए ‘टेक्निकल्स’ नाम चलन में आ गया। विद्रोही गुटों को इतनी टोयोटा कैसे मिलती हैं इराक के कब्जे वाले शहरों में काली हिलक्स के साथ IS लड़ाके नजर आए। हूती लड़ाके भी यमन के लाल सागर तट पर ऐसी पिकअप तेजी से चलाते दिखे। सवाल यह है कि गैर-सरकारी सशस्त्र गुटों को इतनी बड़ी संख्या में ये वाहन मिलते कैसे हैं। 2015 में IS के चरम पर पहुंचने के दौरान अमेरिकी आतंकवाद रोधी अधिकारियों ने टोयोटा से इस बारे में जवाब मांगा था। वे जानना चाहते थे कि आतंकी संगठन इतनी हिलक्स और लैंड क्रूजर कैसे हासिल कर रहा है। टोयोटा ने विद्रोहियों को वाहन बेचने से इनकार किया था। कंपनी ने 2015 में कहा था, “हमारी सख्त नीति है कि हम ऐसे संभावित खरीदारों को वाहन नहीं बेचते, जो उनका इस्तेमाल या उनमें बदलाव अर्धसैनिक या आतंकी गतिविधियों के लिए कर सकते हैं।” टोयोटा के आंकड़ों के मुताबिक, इराक में हिलक्स और लैंड क्रूजर की बिक्री 2011 में 6,000 से बढ़कर 2013 में 18,000 हो गई थी। 2014 में यह बिक्री घटकर 13,000 रह गई। ABC न्यूज ने इन आंकड़ों की रिपोर्ट की थी। यह आंकड़े उस समय के हैं, जब IS ने सीरिया से इराक में बड़ा हमला शुरू किया था। यह हमला राजधानी बगदाद के बाहरी इलाकों तक पहुंच गया था। टोयोटा सीधे आतंकियों को वाहन न भी बेचती हो, फिर भी गैर-सरकारी गुटों के पास इन्हें हासिल करने के अपने तरीके हैं। दुनिया भर में हिलक्स की लोकप्रियता के कारण पुरानी गाड़ियां खुले बाजार में हमेशा उपलब्ध रहती हैं। कंपनी ने 2014 में कहा था, “हम केवल अनुमान लगा सकते हैं कि ये वाहन गुप्त रास्तों से आते हैं और लोगों के बीच खरीदे-बेचे जाते हैं। खासकर पुराने वाहनों का ऐसा अनौपचारिक कारोबार किसी वाहन निर्माता के लिए ट्रैक करना बहुत मुश्किल है।” एक मामले में अमेरिका के एक प्लंबर की फोर्ड पिकअप IS लड़ाकों को बेच दी गई थी। उसके दरवाजे पर प्लंबर का नाम और फोन नंबर लिखा हुआ था। वह फोर्ड सीरिया में IS के लिए इस्तेमाल होती रही। गाड़ी पर वही पहचान संबंधी जानकारी लगी थी। बाद में अमेरिकी न्यूज चैनलों ने इसे दिखाया। गैर-सरकारी सशस्त्र गुट बिचौलियों की मदद भी ले सकते हैं। ये बिचौलिए स्थानीय और विदेशी बाजारों से वाहन खरीदते हैं। इसके बाद कंपनी की नीतियों से बचने के लिए गाड़ियां अंतिम इस्तेमाल करने वालों तक पहुंचाई जाती हैं। बड़े संघर्ष शुरू होने से पहले वाहनों की बिक्री में अचानक बढ़ोतरी इसी प्रक्रिया का संकेत हो सकती है। टोयोटा के आंकड़ों में 2013 में इराक में IS के बड़े हमले से पहले बिक्री में भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई थी। यमन के लाल सागर तट पर हिलक्स के बड़े बेड़े के साथ आगे बढ़ रहे हूती लड़ाकों को ये वाहन कैसे मिले, यह सवाल अब भी बना हुआ है। उन्होंने ये गाड़ियां पुरानी खरीदीं, बिचौलियों के जरिए शोरूम से लीं, विदेश से तस्करी कराईं या चुराईं—यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन जिस भी तरीके से ये हासिल की गई हों, साधारण और कम साजोसामान वाली हिलक्स विद्रोही गुटों के बीच अब भी बेहद पसंदीदा वाहन बनी हुई है।