Saturday, 03 Oct 2026 | 12:42 AM

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तेलंगाना में SC-ST सामान्य वर्ग से 3 गुना पिछड़े:राज्य की 242 में से 135 बहुत पिछड़ी; 3.55 लाख लोगों पर सर्वे

तेलंगाना में SC-ST सामान्य वर्ग से 3 गुना पिछड़े:राज्य की 242 में से 135 बहुत पिछड़ी; 3.55 लाख लोगों पर सर्वे

तेलंगाना में पिछले साल हुए जातिगत सर्वे की रिपोर्ट में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लोग सामान्य वर्ग से 3 गुना पिछड़े हैं। वहीं, ओबीसी वर्ग 2.7 गुना पिछड़ा है। एससी का पिछड़ापन सूचकांक स्कोर 96, एसटी का 95 और ओबीसी का 86 है। नियम कहता है कि स्कोर जितना ज्यादा होगा, पिछड़ापन उतना ही अधिक होगा। यानी तेलंगाना में इन जाति वर्ग की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक स्थिति बहुत पिछड़ी है। सामान्य वर्ग का स्कोर 31 है, जो बेहतर स्थिति है। राज्य में 242 जातियां हैं। इनमें से 67% आबादी यानी 135 जातियां बहुत पिछड़ी हैं। यह रिपोर्ट पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाले पैनल ने सर्वे के बाद तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी है। सर्वे पिछले साल राज्य के 3.55 करोड़ लोगों के बीच कराया गया था। सर्व की 7 बड़ी बातें सबसे पिछड़ा, सबसे संपन्न समुदाय कौन सा? सबसे पिछड़ा है एससी वर्ग का दक्कल समुदाय (स्कोर 116)। सामान्य वर्ग का कापु समुदाय सबसे संपन्न (12) है। जैन का स्कोर 13 और ब्राह्मण का 22 है। 1 लाख से कम कमाने वाले एससी परिवार का पिछड़ापन स्कोर 49 है, जबकि उतनी ही आय वाले सामान्य परिवार का स्कोर केवल 16 है। —————————- ये खबर भी पढ़ें… भारत ने 17 करोड़ लोगों को गरीबी से निकाला:10 साल में गरीबी दर 14% घटी; वर्ल्ड बैंक ने हालिया रिपोर्ट में बताया वर्ल्ड बैंक ने अपनी ‘पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ’ रिपोर्ट में बताया कि भारत बीते एक दशक में गरीबी को कम करने में सफल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक- भारत ने 2011-12 से 2022-23 के बीच बेहद गरीबी में रह रहे 17.1 करोड़ लोगों को बाहर निकाला। पूरी खबर पढ़ें…

शादी पर बोले विजय वर्मा – ‘उम्मीद पर दुनिया टिकी:मटका किंग की स्टारकास्ट बोली- भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकते, यही हमें जिंदा रखती है

शादी पर बोले विजय वर्मा - ‘उम्मीद पर दुनिया टिकी:मटका किंग की स्टारकास्ट बोली- भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकते, यही हमें जिंदा रखती है

मटका किंग अपनी दमदार कहानी और 60-70 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इस सीरीज में जुए की दुनिया के जरिए पहचान, इज्जत और सत्ता के खेल को दिखाने की कोशिश की गई है। इसी बीच दैनिक भास्कर ने फिल्म के डायरेक्टर नागराज मंजुले और स्टारकास्ट विजय वर्मा, कृतिका कामरा और साईं तम्हंकर से खास बातचीत की। इस दौरान सभी ने न सिर्फ अपने किरदारों के बारे में खुलकर बात की, बल्कि सीरीज की कहानी, उसके दौर और उसके सामाजिक पहलुओं पर भी दिलचस्प बातें साझा कीं। यह सीरीज सिर्फ एक खेल की नहीं, बल्कि उस दौर और उससे जुड़े लोगों की कहानी को सामने लाने का प्रयास है। नागराज मंजुले- आप हमेशा समाज को रॉ और अनफिल्टर्ड तरीके से दिखाते हैं। मटका किंग में आपने क्या एक्सप्लोर किया है? यह कहानी सिर्फ जुए के खेल की नहीं है, बल्कि उस दुनिया की है जो इसके इर्द-गिर्द बनती है। हम जानते हैं कि मटका खेला जाता था, लेकिन जो लोग इसे खेलते थे, उनकी जिंदगी कैसी थी, यह कम लोग जानते हैं। यह खेल कैसे इतना बड़ा और आकर्षक बना हमने उसी समाज, उस दौर और उन लोगों की कहानी बताने की कोशिश की है। 60-70 के दशक को पर्दे पर जीवंत बनाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा और इतनी दमदार स्टारकास्ट के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा? नागराज मंजुले- यह ज्यादा मुश्किल से पहले सोचने का काम होता है। जब आप उस दौर को लिख लेते हैं, तो पूरी टीम उसे साकार करने में जुट जाती है। हमारे पास कॉस्ट्यूम, प्रोडक्शन डिजाइन, म्यूजिक और डीओपी जैसे विभागों में बेहद टैलेंटेड लोग थे, जिन्होंने मिलकर उस समय को जीवंत बनाने की कोशिश की। वहीं स्टारकास्ट के साथ काम करने का अनुभव शानदार रहा, पहली बार इतने बड़े और नामी कलाकारों के साथ काम किया। हर किरदार मजबूत है, ऐसा लगता है जैसे हर खिलाड़ी अपने आप में मैच जिताने वाला है। स्क्रिप्ट में ऐसा क्या खास था और आपके किरदार में ऐसी कौन-सी बात थी, जिसकी वजह से आपने तुरंत इस प्रोजेक्ट के लिए हां कह दी और आप उससे कितना रिलेट कर पाए? विजय वर्मा- सबसे बड़ी वजह थी नागराज मंजुले के साथ काम करने का मौका। मैं उनके काम का हमेशा से फैन रहा हूं, और उनके साथ काम करना अपने आप में खास अनुभव है। स्क्रिप्ट में जो किरदार था, उसमें एक शांत लेकिन गहरी इंटेंसिटी है वह अपने काम को पूरी ईमानदारी से करता है, लेकिन जिस दुनिया का वह हिस्सा है, उसे समाज खुलकर स्वीकार नहीं करता, यही उसका सबसे बड़ा संघर्ष है। जहां तक रिलेट करने की बात है, यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही कभी मैं किरदार के बहुत करीब महसूस करता था, तो कभी उससे दूर। कई बार ऐसा भी हुआ कि हम दोनों कहीं बीच में आकर मिले, और वहीं से उस किरदार को समझने का रास्ता बना। ट्रेलर में आपके किरदार के रिश्तों में एक जटिलता और कई परतें नजर आती हैं, इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगी? कृतिका कामरा- इस कहानी में सभी किरदार और उनके रिश्ते जटिल हैं। मेरा किरदार गुलरुख दुबाश एक अलग दुनिया से आता है, लेकिन उसे इस खेल और विजय के किरदार की दुनिया आकर्षित करती है। उसकी अपनी कमियां और इच्छाएं हैं, जो उसे इस सफर का हिस्सा बनाती हैं। आपके किरदार में कितनी लेयर्स देखने को मिलेंगी? साईं तम्हंकर- बहुत सारी लेयर्स हैं। मेरा किरदार ‘बरखा’ ऐसा है जो अपनी भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकती। अगर वह कुछ महसूस करती है, तो उसे व्यक्त करना जरूरी है। यह उसकी सबसे बड़ी खासियत है। आजकल ओटीटी और सिनेमा में महिला किरदारों को ज्यादा गहराई मिल रही है। इस पर आपकी राय? साईं तम्हंकर- यह बहुत अच्छा बदलाव है। अब महिला किरदार सिर्फ सजावट नहीं हैं, बल्कि कहानी का अहम हिस्सा हैं। हालांकि अभी भी सुधार की गुंजाइश है। ट्रेलर में एक लाइन है ‘जिंदगी उम्मीद पर टिकी है’। आपकी जिंदगी में उम्मीद का क्या मतलब है? नागराज मंजुले- बस चलते रहना चाहिए। उम्मीद यही है कि आगे अच्छा होगा। विजय वर्मा- मुश्किल वक्त में सिर्फ उम्मीद ही साथ देती है। समय हमेशा बदलता है, और यही भरोसा हमें आगे बढ़ाता है। कृतिका कामरा- उम्मीद ही वह भावना है जो हमें जिंदा रखती है। अगर उम्मीद नहीं, तो कुछ भी नहीं। साईं तम्हंकर- उम्मीद जीवन की ड्राइविंग फोर्स है। इसके बिना जीना मुश्किल है। आखिरी सवाल दर्शक जानना चाहते हैं कि विजय वर्मा कब तक सिंगल रहने वाले हैं? विजय वर्मा- दुनिया उम्मीद पर टिकी है… फिलहाल उम्मीद ही पेट्रोल है!

शादी पर बोले विजय वर्मा – ‘उम्मीद पर दुनिया टिकी:मटका किंग की स्टारकास्ट बोली- भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकते, यही हमें जिंदा रखती है

शादी पर बोले विजय वर्मा - ‘उम्मीद पर दुनिया टिकी:मटका किंग की स्टारकास्ट बोली- भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकते, यही हमें जिंदा रखती है

मटका किंग अपनी दमदार कहानी और 60-70 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इस सीरीज में जुए की दुनिया के जरिए पहचान, इज्जत और सत्ता के खेल को दिखाने की कोशिश की गई है। इसी बीच दैनिक भास्कर ने फिल्म के डायरेक्टर नागराज मंजुले और स्टारकास्ट विजय वर्मा, कृतिका कामरा और साईं तम्हंकर से खास बातचीत की। इस दौरान सभी ने न सिर्फ अपने किरदारों के बारे में खुलकर बात की, बल्कि सीरीज की कहानी, उसके दौर और उसके सामाजिक पहलुओं पर भी दिलचस्प बातें साझा कीं। यह सीरीज सिर्फ एक खेल की नहीं, बल्कि उस दौर और उससे जुड़े लोगों की कहानी को सामने लाने का प्रयास है। नागराज मंजुले- आप हमेशा समाज को रॉ और अनफिल्टर्ड तरीके से दिखाते हैं। मटका किंग में आपने क्या एक्सप्लोर किया है? यह कहानी सिर्फ जुए के खेल की नहीं है, बल्कि उस दुनिया की है जो इसके इर्द-गिर्द बनती है। हम जानते हैं कि मटका खेला जाता था, लेकिन जो लोग इसे खेलते थे, उनकी जिंदगी कैसी थी, यह कम लोग जानते हैं। यह खेल कैसे इतना बड़ा और आकर्षक बना हमने उसी समाज, उस दौर और उन लोगों की कहानी बताने की कोशिश की है। 60-70 के दशक को पर्दे पर जीवंत बनाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा और इतनी दमदार स्टारकास्ट के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा? नागराज मंजुले- यह ज्यादा मुश्किल से पहले सोचने का काम होता है। जब आप उस दौर को लिख लेते हैं, तो पूरी टीम उसे साकार करने में जुट जाती है। हमारे पास कॉस्ट्यूम, प्रोडक्शन डिजाइन, म्यूजिक और डीओपी जैसे विभागों में बेहद टैलेंटेड लोग थे, जिन्होंने मिलकर उस समय को जीवंत बनाने की कोशिश की। वहीं स्टारकास्ट के साथ काम करने का अनुभव शानदार रहा, पहली बार इतने बड़े और नामी कलाकारों के साथ काम किया। हर किरदार मजबूत है, ऐसा लगता है जैसे हर खिलाड़ी अपने आप में मैच जिताने वाला है। स्क्रिप्ट में ऐसा क्या खास था और आपके किरदार में ऐसी कौन-सी बात थी, जिसकी वजह से आपने तुरंत इस प्रोजेक्ट के लिए हां कह दी और आप उससे कितना रिलेट कर पाए? विजय वर्मा- सबसे बड़ी वजह थी नागराज मंजुले के साथ काम करने का मौका। मैं उनके काम का हमेशा से फैन रहा हूं, और उनके साथ काम करना अपने आप में खास अनुभव है। स्क्रिप्ट में जो किरदार था, उसमें एक शांत लेकिन गहरी इंटेंसिटी है वह अपने काम को पूरी ईमानदारी से करता है, लेकिन जिस दुनिया का वह हिस्सा है, उसे समाज खुलकर स्वीकार नहीं करता, यही उसका सबसे बड़ा संघर्ष है। जहां तक रिलेट करने की बात है, यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही कभी मैं किरदार के बहुत करीब महसूस करता था, तो कभी उससे दूर। कई बार ऐसा भी हुआ कि हम दोनों कहीं बीच में आकर मिले, और वहीं से उस किरदार को समझने का रास्ता बना। ट्रेलर में आपके किरदार के रिश्तों में एक जटिलता और कई परतें नजर आती हैं, इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगी? कृतिका कामरा- इस कहानी में सभी किरदार और उनके रिश्ते जटिल हैं। मेरा किरदार गुलरुख दुबाश एक अलग दुनिया से आता है, लेकिन उसे इस खेल और विजय के किरदार की दुनिया आकर्षित करती है। उसकी अपनी कमियां और इच्छाएं हैं, जो उसे इस सफर का हिस्सा बनाती हैं। आपके किरदार में कितनी लेयर्स देखने को मिलेंगी? साईं तम्हंकर- बहुत सारी लेयर्स हैं। मेरा किरदार ‘बरखा’ ऐसा है जो अपनी भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकती। अगर वह कुछ महसूस करती है, तो उसे व्यक्त करना जरूरी है। यह उसकी सबसे बड़ी खासियत है। आजकल ओटीटी और सिनेमा में महिला किरदारों को ज्यादा गहराई मिल रही है। इस पर आपकी राय? साईं तम्हंकर- यह बहुत अच्छा बदलाव है। अब महिला किरदार सिर्फ सजावट नहीं हैं, बल्कि कहानी का अहम हिस्सा हैं। हालांकि अभी भी सुधार की गुंजाइश है। ट्रेलर में एक लाइन है ‘जिंदगी उम्मीद पर टिकी है’। आपकी जिंदगी में उम्मीद का क्या मतलब है? नागराज मंजुले- बस चलते रहना चाहिए। उम्मीद यही है कि आगे अच्छा होगा। विजय वर्मा- मुश्किल वक्त में सिर्फ उम्मीद ही साथ देती है। समय हमेशा बदलता है, और यही भरोसा हमें आगे बढ़ाता है। कृतिका कामरा- उम्मीद ही वह भावना है जो हमें जिंदा रखती है। अगर उम्मीद नहीं, तो कुछ भी नहीं। साईं तम्हंकर- उम्मीद जीवन की ड्राइविंग फोर्स है। इसके बिना जीना मुश्किल है। आखिरी सवाल दर्शक जानना चाहते हैं कि विजय वर्मा कब तक सिंगल रहने वाले हैं? विजय वर्मा- दुनिया उम्मीद पर टिकी है… फिलहाल उम्मीद ही पेट्रोल है!

ट्रम्प बोले- ईरान एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने को तैयार:अब सीजफायर डील दोनों देशों को मंजूर; इजराइल और लेबनान 10 दिन के सीजफायर पर राजी

ट्रम्प बोले- ईरान एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने को तैयार:अब सीजफायर डील दोनों देशों को मंजूर; इजराइल और लेबनान 10 दिन के सीजफायर पर राजी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान अपने एनरिच्ड (संवर्धित) यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है। अमेरिका का मानना है कि इसी का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है। उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से यह भी कहा कि दोनों देश शांति समझौते के काफी करीब हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत बहुत सफल चल रही है और समझौते की संभावना काफी ज्यादा है। ट्रम्प ने कहा कि अगर यह डील हो जाती है, तो तेल की सप्लाई शुरू हो जाएगी, होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा और हालात सामान्य हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समझौता इस्लामाबाद में होता है, तो वे पाकिस्तान की यात्रा भी कर सकते हैं। वहीं, इजराइल और लेबनान 10 दिन के सीजफायर पर राजी हो गए हैं। यह युद्धविराम भारतीय समयानुसार गुरुवार देर रात 2:30 बजे से लागू हो गया है। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की, जिसके बाद यह सहमति बनी। परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब ईरान यूरेनियम एक ऐसा पदार्थ है, जिससे परमाणु ऊर्जा भी बनाई जा सकती है और परमाणु बम भी। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि उसे कितना एनरिच यानि कि शुद्ध किया गया है। प्राकृतिक यूरेनियम में काम का हिस्सा बहुत कम होता है, इसलिए उसे मशीनों (सेंट्रीफ्यूज) के जरिए धीरे-धीरे शुद्ध किया जाता है। इसी प्रक्रिया को ‘यूरेनियम एनरिचमेंट’ कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी IAEA की रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के पास कुल मिलाकर करीब 5 से 6 टन के बीच एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है। इसमें एक अहम हिस्सा 60% तक एनरिच्ड यूरेनियम का है, जो करीब 120 से 130 किलोग्राम के आसपास माना जाता है। यह स्तर हथियार बनाने के लिए जरूरी 90% एनरिचमेंट के काफी करीब होता है। इसलिए अमेरिका और इजराइल, ईरान पर परमाणु कार्यक्रम सीमित करने और एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने का दबाव बनाते रहे हैं। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… इजराइल-लेबनान सीजफायर डील: अमेरिका की पहल पर इजराइल और लेबनान शुक्रवार से 10 दिन के सीजफायर पर राजी हो गए हैं। इसका मकसद स्थायी सुरक्षा और शांति समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाना है। सीजफायर की शर्तें: अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इजराइल को आत्मरक्षा का अधिकार रहेगा, लेकिन वह लेबनान के खिलाफ जमीन, हवा या समुद्र से कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगा। वहीं लेबनान सरकार पर दबाव है कि वह हिजबुल्लाह को इजराइल पर हमले करने से रोके, हालांकि हिजबुल्लाह पर उसका सीधा नियंत्रण नहीं है। ईरान-अमेरिका बातचीत: ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने को लेकर समझौता बहुत करीब है। उनके साथ पाकिस्तान में बातचीत जल्द ही फिर शुरू हो सकती है। अमेरिकी मिलिट्री एक्टिविटी: अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में तैनात सैनिक फिर से हथियारों से लैस हो रहे हैं और अगर ईरान के साथ बातचीत फेल होती है, तो वे दोबारा लड़ाई के लिए तैयार हैं। ट्रम्प को राहत: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकने वाला प्रस्ताव 213-214 वोट से खारिज कर दिया। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

मीटिंग पर मीटिंग, सड़कें फिर भी अधूरी:23 सड़कों के लिए 15 करोड़ मंजूर, वर्क ऑर्डर भी जारी, फिर भी शुरू नहीं हो सका काम

मीटिंग पर मीटिंग, सड़कें फिर भी अधूरी:23 सड़कों के लिए 15 करोड़ मंजूर, वर्क ऑर्डर भी जारी, फिर भी शुरू नहीं हो सका काम

जनप्रतिनिधियों और आईएएस अफसरों की मीटिंग पर मीटिंग। तब भी ग्वालियर की मुख्य और आंतरिक सड़कों को बनाने का शुरू नहीं हो पाया है। 15 करोड़ रुपए की लागत की 23 सड़कों को मंजूरी, वर्क आर्डर होने के बाद भी ठेकेदार काम शुरू नहीं कर रहे हैं। इस कारण गड्ढों के बीच से वाहनों के निकले की जंग जारी है। कहीं सीवर लाइन डालने की बात कर पीएचई अफसरों ने सड़क को रोका है, तो कहीं पर सकरा मार्ग और पहाड़ी के कारण रोलर-पेवर मशीन नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में डामर की सड़क के स्थान पर सीमेंट कांक्रीट की रोड बनाने के लिए मामला अटका हुआ है। निगम ने ऐसी 77 सड़कों की पहचान की है। उनमें से 23 सड़कें ऐसी सामने आई है। जहां पर ठेकेदार काम लेने के बाद भी सड़कें नहीं बना रहे हैं। ये स्थिति डेढ़ साल से बनी हुई है। इन्हीं में 15 सड़कें टेंडर खुलने के बाद सवा महीने तक मेयर इन काउंसिल (एमआईसी)के फैसले के इंतजार में लटकी रही है। हालांकि एमआईसी की स्वीकृति मिल गई है। फिर भी 15 दिन में ठेकेदारों से अनुबंध होगा। ओहदपुर में एमएएल निवास से रजिस्ट्रार आफिस मुख्य रोड को जोड़ने वाली आंतरिक रोड 285 मीटर की आरसीसी बनेगी। इस पर 34 लाख रुपए खर्च होना है। टेंडर खुल चुका है। इसके लिए बनी समिति के फैसले के बाद अनुबंध की तैयारी होगी। फिर ठेकेदार काम शुरू करते हैं या नहीं। ये तस्वीर अनुबंध के बाद मिले वर्क आर्डर के वक्त ठीक से पता चल सकेगी। जनता पर सीधी मार ग्वालियर के आमखाे की मुख्य रोड, इसकी हालात सबसे ज्यादा खराब है। इस रोड पर रोजाना बड़ी संख्या में वाहन निकलते हैं। आए दिन सड़क हादसे होते हैं। इसी रोड पर आयुर्वेद कालेज भी है। फोटो: भास्कर चेतकपुरी राेड: इस सड़क पर जगह-जगह गड्डे होने से गाड़ी का बैलेंस बिगडने से वाहन चालक होते हैं घायल माधव सत्संग सड़क: इस रोड स्कूल और कॉलोनी हैं। लोगों को मजबूरी में खराब रोड से गुजरना पड़ रहा है। MIC की स्वीकृति: अब अनुबंध फिर बनगी सड़कें गुप्तेश्वर कॉलोनी: 480 मीटर की रोड / लागत ₹55 लाख रुपए चंद्रनगर श्मशान रोड-सूरज गार्डन 575 मीटर रोड / लागत ₹43 लाख यादव कॉलोनी-शिवशक्ति नगर: 450 मीटर/ ₹23 लाख मोहर सिंह-किशन मकान रोड: 320 मीटर / ₹24 लाख प्रसाद नगर: 405 मीटर/ ₹26 लाख मां विहार कॉलोनी: 140 मीटर/ ₹11 लाख नूरगंज: 285 मीटर / ₹22 लाख महावीर कॉलोनी: 390 मीटर / ₹29 लाख डोंगरपुर: 230 मीटर / ₹24 लाख बजरंग कॉलोनी: 565 मीटर / ₹57 लाख राम कुई-भैंस मंडी: 850 मीटर / ₹93 लाख नागदेवता मंदिर-ढोलीबुआ पुल 375 मीटर/₹16.77 लाख तारागंज पुल-कमानी पुल: 1000 मीटर / ₹65.44 लाख रामद्वारा गेट-कमानी पुल: 890 मीटर/ ₹78 लाख एमएसए निवास-रजिस्ट्रार ऑफिस रोड: 285 मीटर / ₹34 लाख ऐसी 19 सड़कें, जिनका काम 80 फीसदी करने का दावा निगम ने जिन 77 सड़कों की सूची तैयार की है। उनमें 19 सड़कों पर काम चल रहा है। इनमें 10 से 80 प्रतिशत तक सड़कों को बनाने का दावा निगम का जनकार्य विभाग के अफसर कर रहे हैं। कार्य में देर के कारण अफसरों ने आला अफसरों को गिनाए हैं। इनमें प्रमुख चार कारण बताए हैं। एनओसी के लिए पीएचई विभाग को पत्र भेजा। जवाब नहीं मिला। {सीवर लाइन डालने का काम जब पूरा होगा उसके बाद ही सड़क बन सकेगी। {सड़क सकरी एवं पहाड़ी ढाल होने से रोलर और पेवर मशीन नहीं पहुंच पा रही है। इसलिए सीसी रोड बनेगी। {जहां नाली का काम चल रहा है वहां बाद में रोड बनेगी।

भूत बंगला में अक्षय के प्रैंक से कर्जदार बनीं वामिका-मिथिला:सेट पर गेम्स, बॉन्डिंग और डिसिप्लिन ने दिया यादगार एक्सपीरियंस

भूत बंगला में अक्षय के प्रैंक से कर्जदार बनीं वामिका-मिथिला:सेट पर गेम्स, बॉन्डिंग और डिसिप्लिन ने दिया यादगार एक्सपीरियंस

हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ की स्टार कास्ट में शामिल वामिका गब्बी और मिथिला पालकर ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने शूटिंग अनुभव साझा किए हैं। दोनों ने बताया कि सेट पर जहां एक तरफ प्रोफेशनल डिसिप्लिन था, वहीं दूसरी तरफ मस्ती और हल्के-फुल्के माहौल की कोई कमी नहीं थी। अक्षय कुमार के मजेदार प्रैंक्स और पूरी टीम की बॉन्डिंग ने शूट को यादगार बना दिया। साथ ही, दोनों अभिनेत्रियों ने अपनी जर्नी, शुरुआती संघर्ष और इंडस्ट्री में अपने अनुभवों पर भी खुलकर बात की है। फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट का माहौल कैसा था? वामिका गब्बी- बिल्कुल, बाहर से देखने पर यही लगता है कि सब कुछ मस्ती-मजाक में हुआ होगा। लेकिन असल में सेट पर बहुत सीरियस काम भी चल रहा था। हां, मस्ती बहुत होती थी और वही माहौल हमें और सहज बना देता था। मेरे लिए तो ये एक फैमिली जैसा एक्सपीरियंस बन गया था। आपका किरदार कैसा है? क्या ये एक टिपिकल बहन है या उसमें कोई ट्विस्ट भी देखने को मिलेगा? मिथिला पलकर- मैं ज्यादा कुछ बताना नहीं चाहूंगी, वो तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा। लेकिन हां, ये एक ऐसी बहन है जिसकी कोई भी जिद हो, उसका भाई उसे जरूर पूरा करता है उनके रिश्ते में वही खूबसूरती है। इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करना जैसे अक्षय कुमार, परेश रावल और निर्देशक प्रियदर्शन कैसा अनुभव रहा? वामिका गब्बी- शुरुआत में थोड़ा इंटिमिडेशन था क्योंकि मैंने उन्हें हमेशा स्क्रीन पर देखा है। लेकिन सेट पर उन्होंने माहौल इतना आसान और कम्फर्टेबल बना दिया कि कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं इतने बड़े लोगों के साथ काम कर रही हूं। हर कोई बहुत सपोर्टिव था। इतने टैलेंटेड लोगों के बीच रहना ही अपने आप में एक सीख है। उनकी एनर्जी, उनका काम करने का तरीका सब कुछ बहुत इंस्पायरिंग था। अपने किरदार की तैयारी के दौरान कोई चैलेंज आया? मिथिला पलकर- नहीं, क्योंकि प्रियदर्शन सर ने सब कुछ बहुत आसान बना दिया। उन्होंने मुझे हर चीज में गाइड किया, जैसे हैंड-होल्डिंग करते हुए। मेरा सिर्फ एक ही डर था इतने बड़े कलाकारों के सामने परफॉर्म करना, लेकिन उन्होंने वो भी आसान कर दिया। इतने बड़े स्टार कास्ट के साथ काम करने का अनुभव और आपकी पर्सनल जर्नी यूट्यूब से फिल्मों तक,आप इसे कैसे देखती हैं? मिथिला पलकर- सच कहूं तो विश्वास ही नहीं होता है। इतने लेजेंड्स के साथ काम करना एक सपना जैसा है। शुरुआत में थोड़ा डर था, लेकिन सभी ने बहुत प्यार से अपनाया। जहां तक मेरी जर्नी की बात है, मेरा हमेशा से एक ही गोल था एक अच्छा एक्टर बनना। इंटरनेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है और उसी की वजह से मुझे ये मौका भी मिला। मैं बस अच्छा काम करना चाहती हूं, चाहे वो किसी भी भाषा या प्लेटफॉर्म पर हो। सेट पर अक्षय कुमार के मशहूर प्रैंक्स का अनुभव कैसा रहा? क्या आप भी कभी उनका शिकार बनीं? वामिका गब्बी- एक सीन था जहां मुझे टेबल पर जंप करना था। मैं पूरी तैयारी के साथ शॉट दे रही थी, तभी अक्षय सर ने मुझे हल्का सा पुश कर दिया और मैं पूरी तरह चौंक गई! सब लोग हंसने लगे और मुझे तब समझ आया कि ये एक प्रैंक था। इसके अलावा हम सब सेट पर कार्ड्स, लूडो और अलग-अलग गेम्स खेलते थे। एक लेजर गेम भी खेलते थे, जिसमें ऊपर लगे बॉक्स पर निशाना लगाना होता था। उसमें तो मैं हारते-हारते करीब 12,000 रुपये की ‘कर्जदार’ हो गई थी! मिथिला पलकर- नहीं, मेरे साथ उन्होंने कोई प्रैंक नहीं किया। शायद वो एक प्रोटेक्टिव भाई की तरह थे। लेकिन हम सेट पर बहुत गेम्स खेलते थे जैसे लूडो। उसमें मैंने काफी पैसे हार दिए थे! लेकिन आखिरी दिन अक्षय सर के साथ खेलते-खेलते मैंने सब जीत लिए और मेरा ‘कर्ज’ उतर गया।

भूत बंगला में अक्षय के प्रैंक से कर्जदार बनीं वामिका-मिथिला:सेट पर गेम्स, बॉन्डिंग और डिसिप्लिन ने दिया यादगार एक्सपीरियंस

भूत बंगला में अक्षय के प्रैंक से कर्जदार बनीं वामिका-मिथिला:सेट पर गेम्स, बॉन्डिंग और डिसिप्लिन ने दिया यादगार एक्सपीरियंस

हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ की स्टार कास्ट में शामिल वामिका गब्बी और मिथिला पालकर ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने शूटिंग अनुभव साझा किए हैं। दोनों ने बताया कि सेट पर जहां एक तरफ प्रोफेशनल डिसिप्लिन था, वहीं दूसरी तरफ मस्ती और हल्के-फुल्के माहौल की कोई कमी नहीं थी। अक्षय कुमार के मजेदार प्रैंक्स और पूरी टीम की बॉन्डिंग ने शूट को यादगार बना दिया। साथ ही, दोनों अभिनेत्रियों ने अपनी जर्नी, शुरुआती संघर्ष और इंडस्ट्री में अपने अनुभवों पर भी खुलकर बात की है। फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट का माहौल कैसा था? वामिका गब्बी- बिल्कुल, बाहर से देखने पर यही लगता है कि सब कुछ मस्ती-मजाक में हुआ होगा। लेकिन असल में सेट पर बहुत सीरियस काम भी चल रहा था। हां, मस्ती बहुत होती थी और वही माहौल हमें और सहज बना देता था। मेरे लिए तो ये एक फैमिली जैसा एक्सपीरियंस बन गया था। आपका किरदार कैसा है? क्या ये एक टिपिकल बहन है या उसमें कोई ट्विस्ट भी देखने को मिलेगा? मिथिला पलकर- मैं ज्यादा कुछ बताना नहीं चाहूंगी, वो तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा। लेकिन हां, ये एक ऐसी बहन है जिसकी कोई भी जिद हो, उसका भाई उसे जरूर पूरा करता है उनके रिश्ते में वही खूबसूरती है। इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करना जैसे अक्षय कुमार, परेश रावल और निर्देशक प्रियदर्शन कैसा अनुभव रहा? वामिका गब्बी- शुरुआत में थोड़ा इंटिमिडेशन था क्योंकि मैंने उन्हें हमेशा स्क्रीन पर देखा है। लेकिन सेट पर उन्होंने माहौल इतना आसान और कम्फर्टेबल बना दिया कि कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं इतने बड़े लोगों के साथ काम कर रही हूं। हर कोई बहुत सपोर्टिव था। इतने टैलेंटेड लोगों के बीच रहना ही अपने आप में एक सीख है। उनकी एनर्जी, उनका काम करने का तरीका सब कुछ बहुत इंस्पायरिंग था। अपने किरदार की तैयारी के दौरान कोई चैलेंज आया? मिथिला पलकर- नहीं, क्योंकि प्रियदर्शन सर ने सब कुछ बहुत आसान बना दिया। उन्होंने मुझे हर चीज में गाइड किया, जैसे हैंड-होल्डिंग करते हुए। मेरा सिर्फ एक ही डर था इतने बड़े कलाकारों के सामने परफॉर्म करना, लेकिन उन्होंने वो भी आसान कर दिया। इतने बड़े स्टार कास्ट के साथ काम करने का अनुभव और आपकी पर्सनल जर्नी यूट्यूब से फिल्मों तक,आप इसे कैसे देखती हैं? मिथिला पलकर- सच कहूं तो विश्वास ही नहीं होता है। इतने लेजेंड्स के साथ काम करना एक सपना जैसा है। शुरुआत में थोड़ा डर था, लेकिन सभी ने बहुत प्यार से अपनाया। जहां तक मेरी जर्नी की बात है, मेरा हमेशा से एक ही गोल था एक अच्छा एक्टर बनना। इंटरनेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है और उसी की वजह से मुझे ये मौका भी मिला। मैं बस अच्छा काम करना चाहती हूं, चाहे वो किसी भी भाषा या प्लेटफॉर्म पर हो। सेट पर अक्षय कुमार के मशहूर प्रैंक्स का अनुभव कैसा रहा? क्या आप भी कभी उनका शिकार बनीं? वामिका गब्बी- एक सीन था जहां मुझे टेबल पर जंप करना था। मैं पूरी तैयारी के साथ शॉट दे रही थी, तभी अक्षय सर ने मुझे हल्का सा पुश कर दिया और मैं पूरी तरह चौंक गई! सब लोग हंसने लगे और मुझे तब समझ आया कि ये एक प्रैंक था। इसके अलावा हम सब सेट पर कार्ड्स, लूडो और अलग-अलग गेम्स खेलते थे। एक लेजर गेम भी खेलते थे, जिसमें ऊपर लगे बॉक्स पर निशाना लगाना होता था। उसमें तो मैं हारते-हारते करीब 12,000 रुपये की ‘कर्जदार’ हो गई थी! मिथिला पलकर- नहीं, मेरे साथ उन्होंने कोई प्रैंक नहीं किया। शायद वो एक प्रोटेक्टिव भाई की तरह थे। लेकिन हम सेट पर बहुत गेम्स खेलते थे जैसे लूडो। उसमें मैंने काफी पैसे हार दिए थे! लेकिन आखिरी दिन अक्षय सर के साथ खेलते-खेलते मैंने सब जीत लिए और मेरा ‘कर्ज’ उतर गया।

चंडीगढ़ BJP दफ्तर ब्लास्ट, 9 आरोपी प्रोडक्शन वारंट पर लाए:क्राइम सीन रिक्रिएशन किया, ₹2 लाख में टास्क, सोशल मीडिया के जरिए हुई मुलाकात

चंडीगढ़ BJP दफ्तर ब्लास्ट, 9 आरोपी प्रोडक्शन वारंट पर लाए:क्राइम सीन रिक्रिएशन किया, ₹2 लाख में टास्क, सोशल मीडिया के जरिए हुई मुलाकात

चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब बीजेपी मुख्यालय के बाहर ब्लास्ट के मामले में चंडीगढ़ पुलिस 9 आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई, जिन्हें कोर्ट में पेश कर 2 दिन का पुलिस रिमांड लिया गया। इस दौरान क्राइम सीन रिक्रिएशन करवाया गया और पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी भी की गई। इस दौरान डीएसपी धीरज कुमार और थाना 39 प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव कुमार मौजूद रहे। वारदात को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी गुरतेज और अमनप्रीत बीजेपी ऑफिस के सामने सेक्टर-24 वाली साइड, जहां से उन्होंने बस स्टॉपेज से बस पकड़ी थी, वहां पूरे घटनाक्रम का फिर से क्राइम सीन रिक्रिएशन किया गया। पहले कैसे रेकी की, कहां-कहां गए, कितने दिन रेकी की इन सभी पहलुओं को लेकर आरोपियों से पूछताछ की गई। गौरतलब है कि बुधवार (1 अप्रैल) की शाम को ब्लास्ट किया गया था। इससे मौके पर खड़ी कई कारों के शीशे टूट गए और आसपास की दीवार पर छर्रों के निशान बन गए। घटना के 2 वीडियो वायरल हुए, जिसमें से एक में व्यक्ति ग्रेनेड बम फेंकता दिखा, जबकि दूसरे वीडियो में बाइक पर जाते दो लोग दिखे। वहीं, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी वायरल हुई थी, जिसमें इस हमले की जिम्मेदारी खालिस्तानी संगठन ने ली। चंडीगढ़ पुलिस से पहले SSOC ने पकड़े चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब बीजेपी मुख्यालय के बाहर ब्लास्ट के बाद आरोपियों को पकड़ने के लिए चंडीगढ़ पुलिस की सभी जांच एजेंसियां, पंजाब पुलिस की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) और AGTF समेत अन्य एजेंसियां छापेमारी कर रही थीं। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस से पहले मोहाली की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल यानी SSOC ने मुख्य दो आरोपियों को हरियाणा के रेवाड़ी से गिरफ्तार किया। इनमें रतनगढ़ मोरिंडा के रहने वाले अमनप्रीत सिंह और गुरतेज सिंह शामिल हैं। इन पर आरोप है कि अमनप्रीत सिंह ने बम फेंका था, जबकि गुरतेज सिंह ने इसका वीडियो बनाया था। उनके पास से एक पिस्टल भी बरामद हुई है। हालांकि इससे पहले SSOC पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी, जिनमें बलविंदर लाल उर्फ शम्मी, जसवीर सिंह उर्फ जस्सी, चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी, रूबल चौहान और मनदीप उर्फ अभिजोत शर्मा शामिल हैं। इसके बाद पंजाब DGP गौरव यादव ने कहा था कि इनकी 6 महीने पहले मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। इसमें अटैक का 28 मार्च को गुरतेज को टास्क मिला था, जिसके लिए इन्हें 2 लाख रुपए देने की बात कही गई थी। इस पूरी साजिश के तार पुर्तगाल और जर्मनी में बैठे हैंडलर्स से जुड़े हैं, जिनकी पहचान कर ली गई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की पंजाब में अफरातफरी फैलाने की कोशिश थी। उसके बाद पुलिस ने दो और आरोपी नवदीप और हरजन सिंह को गिरफ्तार किया। इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान से ग्रेनेड और हथियार मंगवाने में मदद की थी। डीजीपी ने ये बड़ी बातें कहीं थी… सोशल मीडिया पर दोनों की मुलाकात हुई: डीजीपी ने बताया कि आरोपियों को हरियाणा एसटीएफ की मदद से गिरफ्तार किया है। यह ऑपरेशन चंडीगढ़ पुलिस के साथ संयुक्त रूप से चलाया गया। दोनों आरोपियों को रेवाड़ी से काबू किया गया। करीब 6 महीने पहले इनकी मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। 28 मार्च को गुरतेज को टास्क मिला था: उन्होंने कहा कि 28 मार्च को गुरतेज को टास्क दिया गया था कि वह बलाचौर से ग्रेनेड और हथियार लेकर आए। इसके बाद वह रूबल और मंदीप शर्मा को साथ लेकर जसबीर जस्सी से मिला, जहां उन्हें दो ग्रेनेड, एक पिस्टल और 10 कारतूस दिए गए। बलजोत सिंह ने गुरतेज को रेकी करने और टारगेट की पहचान की जिम्मेदारी दी थी। वहीं, अमनप्रीत की भर्ती भी गुरतेज ने ही की थी। पूरे ऑपरेशन में विदेश में बैठे हैंडलर का अहम रोल: डीजीपी के मुताबिक, दोनों मुख्य आरोपी रैपिडो में काम करते थे। घटना वाले दिन जब अमनप्रीत ने ग्रेनेड फेंका, तो गुरतेज ने उसकी वीडियो बनाई थी। पूरे ऑपरेशन में विदेश में बैठे हैंडलर का अहम रोल था, जो इनसे वीडियो बनवाकर एक तरह का माहौल (परसेप्शन) तैयार करना चाहता था। उसने इन्हें ऑनलाइन ही निर्देश दिए और यह भी बताया कि ग्रेनेड को कैसे एक्टिव करना है। आरोपियों को 2 लाख रुपए देने की बात हुई: इस काम के लिए आरोपियों को 2 लाख रुपए देने की बात हुई थी, लेकिन यह रकम पूरी नहीं दी गई थी। पूरा ऑपरेशन तकनीकी माध्यमों और दूर बैठे हैंडलर के निर्देशों के आधार पर चलाया गया। पाकिस्तान-ISI से जुड़े मॉड्यूल का खुलासा DGP के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया कि यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा हुआ था। इस नेटवर्क को विदेश में बैठे हैंडलर्स चला रहे थे, जिनकी लोकेशन पुर्तगाल और जर्मनी में बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसमें अलग-अलग स्तर पर कई लोग जुड़े हुए थे और सभी को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों के पास हैंड ग्रेनेड, हथियार और कारतूसों की खेप पहुंचाई गई थी। यह खेप कई लोगों के जरिए आगे बढ़ाई गई और आखिर में हमले को अंजाम देने वालों तक पहुंचाई गई। बताया जा रहा है कि पुर्तगाल में बैठे हैंडलर बलजोत सिंह उर्फ जोत के निर्देश पर पूरे हमले की साजिश रची गई और उसे अंजाम दिया गया। पाकिस्तानी ग्रेनेड के यूज होने का दावा इससे पहले इस मामले में सूत्रों से पता चला था कि हमले में GHD2P हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया था। यह ग्रेनेड पाकिस्तान में बनाया जाता है। विस्फोट के बाद यह करीब 5 से 10 मीटर के दायरे में बेहद घातक साबित हो सकता है। वहीं, इसके टुकड़े 20 से 25 मीटर तक फैल सकते हैं, जिससे आसपास मौजूद लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का खतरा रहता है। हमले के बाद 2 नए वीडियो भी सामने आए थे। हमले से कुछ मिनट पहले वीडियो में BJP ऑफिस के पास स्थित एक अन्य दफ्तर के बाहर 2 संदिग्ध खड़े दिखाई दिए। वहीं, दूसरे वीडियो में हमले के बाद दोनों संदिग्ध सड़क के दूसरी ओर भागते हुए कैद हुए हैं।

भरे मंच पर भाजपा विधायक की कुटाई:मंत्री का छात्रा से लैपटॉप का वादा, कांग्रेस नेता दिला लाए; अपनी ही सरकार से खफा विधायक

भरे मंच पर भाजपा विधायक की कुटाई:मंत्री का छात्रा से लैपटॉप का वादा, कांग्रेस नेता दिला लाए; अपनी ही सरकार से खफा विधायक

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। भाजपा विधायक को मिला ‘तगड़ा आशीर्वाद’ दतिया के सेवड़ा से भाजपा विधायक प्रदीप अग्रवाल को भरे मंच पर अनोखे अंदाज में ‘तगड़ा आशीर्वाद’ मिला। कथावाचक महाराज ने उनकी जमकर कुटाई कर दी। मुक्के मारे, धक्का दिया और पहनाई गई माला उतारकर फेंक दी। इस दौरान विधायक हाथ जोड़कर बैठे रहे। यह वाकया विधायक के विधानसभा क्षेत्र सेवड़ा के बेरछा में चल रही भागवत कथा के दौरान का है, जहां प्रदीप अग्रवाल कथा कर रहे महंत सीताराम महाराज से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। लेकिन उनके साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। बाबा का यह व्यवहार देखकर हर कोई हैरान रह गया। हालांकि उनके अनुयायी इसे ‘विशेष आशीर्वाद’ की शैली बता रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीताराम महाराज अक्सर इसी तरह के तेज और आक्रामक अंदाज में आशीर्वाद देते हैं। उनके भक्तों के बीच यह धारणा है कि बाबा जब तक गुस्से या कठोर व्यवहार के साथ आशीर्वाद नहीं देते, तब तक उसे प्रभावी नहीं माना जाता। इस घटना के बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कोई इसे आस्था और परंपरा से जोड़कर देख रहा है, तो कुछ लोग इसे सार्वजनिक मंच पर अनुचित व्यवहार बता रहे हैं। फिलहाल, विधायक की ओर से इस मामले में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 10वीं की टॉपर को लैपटॉप दिलाने की ‘रेस’ हमारे देश में हर मुद्दे पर राजनीति हो जाती है। भोपाल में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां 10वीं की टॉपर को लेकर सियासत शुरू हो गई। इस मामले में कांग्रेस ने भाजपा के ‘नहले पर दहला’ मारते हुए बाजी मार ली। दरअसल, भोपाल की हिमांशी धाकड़ ने कड़ी मेहनत से 10वीं में 99.4 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश की मेरिट लिस्ट में तीसरा स्थान पाया। हिमांशी की इस उपलब्धि के बाद नेताओं का उसके घर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। सबसे पहले मंत्री विश्वास सारंग पहुंचे। उन्होंने हिमांशी को बधाई दी, मिठाई खिलाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। हिमांशी के पास लैपटॉप नहीं होने पर मंत्री ने उसे लैपटॉप दिलाने का वादा किया और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। इसके बाद कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला भी हिमांशी के घर पहुंचे। उन्होंने भी उसे बधाई दी और मिठाई खिलाई। बातचीत के दौरान जब हिमांशी ने लैपटॉप नहीं होने की बात कही, तो उन्होंने तुरंत उसे कहा कि चलो लैपटॉप लेकर आते हैं। वे हिमांशी को उसी समय अपने साथ बाजार ले गए और वहां से एक लैपटॉप और मोबाइल दिला दिया। अब कांग्रेस, मंत्री सारंग और मनोज शुक्ला के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर तंज कस रही है। पार्टी का कहना है कि भाजपा के पास सिर्फ वादे हैं, जबकि कांग्रेस के पास उन्हें पूरा करने का इरादा। अपनी ही सरकार के तंत्र से खफा विधायक एमपी में भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार में राजगढ़ से सत्ताधारी दल के विधायक अमर सिंह यादव अपनी ही सरकार के सिस्टम से नाराज हो गए हैं। उन्होंने तय किया है कि वे अब किसी भी सरकारी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। दरअसल, हाल ही में राजगढ़ के जिला अस्पताल में मंत्री गौतम टेटवाल ने एक कार्य का लोकार्पण किया था, जिसमें स्थानीय भाजपा विधायक अमर सिंह यादव को आमंत्रित ही नहीं किया गया। इस पर उन्होंने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई और इसकी शिकायत सीएम हाउस से लेकर पार्टी संगठन तक कर दी। विधायक ने चेतावनी दी है कि जब तक इस मामले में उनकी अनदेखी करने वाले संबंधित अधिकारियों को हटाया नहीं जाता, वे किसी भी सरकारी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। इससे पहले भी विधायक इस मुद्दे पर मंत्री गौतम टेटवाल को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना है कि जिला अस्पताल के कार्यक्रम से ठीक पहले वे मंत्री के साथ एक अन्य कार्यक्रम के मंच पर मौजूद थे, लेकिन मंत्री ने उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी और सीधे जिला अस्पताल के लोकार्पण कार्यक्रम में चले गए। अब कुछ लोग इसे पार्टी की गुटबाजी से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि प्रशासन जनप्रतिनिधियों पर हावी होता जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब भाजपा की सरकार में ही उसके जनप्रतिनिधियों को तवज्जो नहीं मिल रही, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी। भाजपा विधायक ने अपने बेटे से पल्ला झाड़ा शिवपुरी के पिछोर में भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी ने अपनी थार कार से पांच लोगों को टक्कर मार दी, जिससे वे घायल हो गए। इस मामले में विधायक पुत्र घायलों की ही गलती बताते नजर आए। उन्होंने कैमरे पर कहा- जब मैं सायरन और हॉर्न दे रहा था, तो गाड़ी क्यों लहरा रहे थे? बाइक पर तीन-तीन लोग बैठकर गाड़ी लहरा रहे थे। इसके बाद सवाल पूछे जाने पर विधायक पुत्र ने धमकाने के अंदाज में कैमरा बंद करा दिया। इस पूरे मामले में रोचक बात यह रही कि विधायक प्रीतम लोधी ने खुद ट्वीट किया। उन्होंने लिखा- विधायक के लिए पुत्र-परिवार बड़ा नहीं होता, जनता सर्वोपरि है। पुलिस प्रशासन से उम्मीद है कि करेरा के पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए। इधर, पुलिस ने विधायक के बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। इनपुट सहयोग – राधावल्लभ मिश्रा (दतिया), मनीष सोनी (राजगढ़), कपिल मिश्रा (शिवपुरी) ये भी पढ़ें – पूर्व मंत्री ने तरबूज काटकर मनाया जन्मदिन: भाजपा विधायक की बेइज्जती, डिप्टी सीएम ने नहीं पहनी माला जन्मदिन पर अक्सर लोगों को आपने केक काटते देखा होगा, लेकिन मंदसौर में पूर्व मंत्री कैलाश चावला ने कुछ अलग किया। उन्होंने केक की जगह तरबूज काटा और उसी से खुद का व अन्य लोगों का मुंह मीठा कराया। तरबूज खाने के बाद नेता जी ‘वाह-वाह’ करते नजर आए। पूरी खबर पढ़ें

महिला आरक्षण-परिसीमन पर शाह आज लोकसभा में जवाब देंगे:प्रियंका का आरोप- असम की तरह देश की सीटों की काट-छांट होगी; शाम 4 बजे वोटिंग

महिला आरक्षण-परिसीमन पर शाह आज लोकसभा में जवाब देंगे:प्रियंका का आरोप- असम की तरह देश की सीटों की काट-छांट होगी; शाम 4 बजे वोटिंग

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन बिलों पर आज लोकसभा में दूसरे दिन चर्चा होगी। अमित शाह इस पर जवाब देंगे। गुरुवार को उन्होंने कहा था कि परिसीमन को लेकर विपक्ष के जितने भी सवाल हैं। वे केजी के बच्चों की तरह उन्हें समझाएंगे। शाम 4 बजे तीनों बिल पर वोटिंग कराई जाएगी। लोकसभा स्पीकर ने बिलों पर चर्चा के लिए 15 घंटे का समय तय किया। गुरुवार को करीब 12 घंटे तक पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अपनी बात रखी। कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी, गौरव गोगोई, वेणुगोपाल ने बिल के विरोध में अपनी बातें कहीं। प्रियंका ने कहा कि असम की तरह देशभर की सीटों की काट-छांट की जाएगी। पीएम ने भी करीब 35 मिनट का भाषण दिया। उन्होंने कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। यह मोदी की गारंटी है और वादा है। विपक्ष इसका क्रेडिट ले सकता है। 16 अप्रैल: संसद के विशेष सत्र का पहला दिन; किसने क्या कहा पीएम मोदी बोले- मैं क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। अगर साथ चलेंगे तो किसी को भी नहीं होगा। फिर अलग पहलू हो जाता है। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं। सबकी फोटो छपवा देंगे। ले लो जी क्रेडिट। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं। प्रियंका बोलीं- महिलाएं बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को पहचान लेती प्रियंका गांधी ने कहा, पीएम के खोखले आश्वासनों के बावजूद संसद में राज्यों की मौजूदगी बदल जाएगी। जिस तरह असम में उन्होंने मनचाही सीटों को काटा, नई सीमाएं बनाएं उसी तरह यह देश में करेंगे। मौजूदा सरकार जनता की आंखों में धूल झोंक रही है। ये ओबीसी वर्ग का हक छीन रहे हैं, ताकि कुछ प्रदेशों की ताकत को कम किया जा सके। शाह जी हंस रहे हैं, पूरी प्लानिंग बना रखी है। चाणक्य आज जिंदा होते तो वो भी चौंक जाते। अखिलेश बोले- हम चाहते हैं कि पहले जनगणना हो अखिलेश ने कहा- ये लोग पिछड़े वर्ग की 33 प्रतिशत महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते हैं। जब परिसीमन की बारी आई तो इन लोगों ने पूरी रणनीति बनाई, कि कैसे क्षेत्र बनाए जाएं कि इसका फायदा इन लोगों को ही मिले। इसलिए हम चहते हैं कि पहले जनगणना हो, जब आंकड़े आ जाएं तभी परिसीमन हो। इसलिए हमारी मांग है कि आधी आबादी में पिछड़ी और मुस्लिम महिलाओं को जोड़कर भी जनगणना हो। कंगना रनोट बोलीं- कुछ अच्छा होता है, तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते हैं बीजेपी सांसद कंगना रनोट ने लोकसभा में कहा कि जब भी कुछ अच्छा होने लगता है तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते है। एक तरफ प्रधानमंत्री जी की नीति है, तो दूसरे तरफ विपक्ष के लोग। मुलायम सिंह यादव जी ने कहा था कि अगर ये बिल आएगा तो सिर्फ शहरी महिलाएं ही सदन में आएगी। ये है विपक्ष की सोच। अब जानिए संसद में किन तीन बिलों पर चर्चा हो रही है परिसीमन में क्या होगा: सरकार कानून बनाकर तय करेगी अभी तक सीटों का आधार 1971 की जनगणना थी, जो 2026 तक के लिए मान्य थी। परिसीमन कब होगा और किस जनगणना (जैसे 2011 या 2027) के आधार पर होगा, यह संविधान की जगह संसद एक साधारण कानून बनाकर तय कर सकेगी। सरकार इसमें बदलाव कर रही है। इसके लिए जनसंख्या (आबादी) की परिभाषा को बदला जाएगा है। इससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है। संविधान में संशोधन कर सरकार परिसीमन आयोग बनाएगी। अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा सीटें) दोबारा तय करेगा। आयोग का निर्णय अंतिम होगा। इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकते। क्या सरकार लोकसभा में बिल पास करा पाएगी संविधान संशोधन पारित कराने के लिए सरकार को बैक-चैनल बातचीत करनी होगी। भारतीय संविधान के ऑर्टिकल 368 के तहत, संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक) और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 (कुल 543 में से) है। 3 सीटें खाली हैं। यदि सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो कम से कम 360 सांसदों (दो तिहाई‌) को इसके पक्ष में वोट देना होगा। वर्तमान में, भाजपा-नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के पास 292 सांसद हैं, जबकि INDIA (विपक्ष) के पास 233 सांसद हैं। 15 सांसद किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं। तीन दशक से पेंडिंग था महिला आरक्षण बिल संसद में महिलाओं के आरक्षण का प्रस्ताव करीब 3 दशक से पेंडिंग है। यह मुद्दा पहली बार 1974 में महिलाओं की स्थिति का आकलन करने वाली समिति ने उठाया था। 2010 में मनमोहन सरकार ने राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण बिल को बहुमत से पारित करा लिया था। तब सपा और राजद ने बिल का विरोध करते हुए तत्कालीन UPA सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दी थी। इसके बाद बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया गया। तभी से महिला आरक्षण बिल पेंडिंग है। 2023 में मोदी सरकार ने महिला आरक्षण बिल को पास कराया। यह कानून बना, अब इसमें संसोधन के जरिए बदलाव किया जा रहा है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… PM ने दोस्त कहा तो अखिलेश ने हाथ जोड़ लिए; संसद के टॉप-8 मोमेंट्स केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधन बिल पेश किए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी स्पीच के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को अपना दोस्त कहा। इस पर अखिलेश ने हंसते हुए हाथ जोड़ लिए। प्रियंका गांधी ने शाह को देखते हुए कहा- अगर चाणक्य जिंदा होते तो आपको देखकर चौंक जाते। शाह मुस्कुराने लगे। पूरी खबर पढ़े…