‘मातृभाषा का अपमान’ बनाम ‘तुष्टिकरण की साजिश’, बंगाल में पीएम मोदी का टीएमसी के पलटवार पर बयान, ‘इश्तेहार’ पर सुझाव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाषा, पहचान और इतिहास को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार में दिए गए बयान के बाद टीएमसी ने तीखा पलटवार किया है। खोज है-‘इश्तेहार’, लेकिन इसके साथ ही अब बंगाल की अस्मिता पर गहरी राजनीतिक लड़ाई खत्म हो गई है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार भूखा विकास या रोजगार नहीं, बल्कि एक शब्द बन गया है- ‘इश्तेहार’। यह शब्द अब सिर्फ घोषणापत्र का पर्याय नहीं है, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है। बीजेपी ने सीधे तौर पर 1905 के बंगाल के इतिहास से लेकर अब तक के कलाकारों में से किसी को भी शामिल करना शुरू कर दिया है. “पीएम मातृभाषा का सम्मान नहीं पता” – कुणाल घोष का हमलाबेलेघाटा सीट से टीएमसी उम्मीदवार उम्मीदवार घोष ने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मातृभाषा में भाषण नहीं देते हैं। अगर वे हिंदी में भाषण नहीं देते हैं, तो उनकी बात का कोई महत्व नहीं है। वह बंगाल का अपमान कर रहे हैं। वह पूरी तरह से बांग्ला भाषा का अपमान कर रहे हैं। यह सही नहीं है। वह पार कर रहे हैं।” पीएम मोदी का आरोप- ”बंगाल की पहचान के लिए तुष्टीकरण के खेल”बिहार की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी के घोषणापत्र पर सवाल उठाते हुए बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा- “इस खेल में बंगाल की महान पहचान बनाई जा रही है। आपने देखा होगा कि टीएमसी ने अभी अपना घोषणापत्र जारी किया है, लेकिन उसे बंगाली भाषा का नाम नहीं दिया गया, बल्कि ‘इश्तेहार’ कहा जा रहा है। जरा सोचिए, कैसे बंगाल की पहचान बदल रही है।” प्रधानमंत्री ने ‘इश्तेहार’ शब्द को इतिहास से खारिज कर दिया और भी गंभीर आरोप लगाया- “1905 में बंगाल में धार्मिक सेनाओं ने ‘रेड इश्तेहार’ जारी किया था, जिसके बाद आदिवासियों का नरसंहार हुआ। टीएमसी हमें वही याद दिलाना चाहती है… ऐसा घिनौना तुष्टिकरण का खेल, बंगाल के सम्मान और संस्कृति को परंपरा की साजिश है।” उन्होंने जनता से अपील की कि अब ”बहुत कुछ चुकाया” जाएगा और बंगाल को अपनी पहचान दिलाने के लिए फैसला लिया जाएगा। ‘इश्तेहार’ पर एंटोनियो-विपक्ष का पलटवारप्रधानमंत्री के इस कथन के बाद नामांकन ने इसे “भ्रामक और गैर-जरूरी” बताया। टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा- “यह पीएम मोदी का पूरी तरह से बेतुका बयान है। ‘इश्तेहार’ सिर्फ ‘मेनिफेस्टो’ का नाम है। एक सामान्य शब्द जो कई समुद्रों में इस्तेमाल होता है। यह राजनीति नहीं है – यह असंतुलन और अज्ञानता का प्रदर्शन है। यह मूर्खतापूर्ण, खतरनाक और अनोखा करने वाला है।” वहीं, कीर्ति आज़ाद ने भी इसी मुद्दे पर घेरा डाला और कहा- “मैं आपको ‘सपना सपना’ पेश करता हूं। पीएम मोदी का एक अशिक्षित और बेतुका बयान है। यह राजनीति नहीं है। यह बेवकूफी और अज्ञानता का प्रदर्शन है। यह मूर्खतापूर्ण, खतरनाक और भ्रामक करने वाला है।” बीजेपी का वार- “शब्द नहीं, संकेत है”बीजेपी नेता सुधाशंशु ने इस अंक में कहा कि ‘इश्तेहार’ का इस्तेमाल अभी तक नहीं किया गया है. उनका कहना है यह शब्द इतिहास की एक भावनात्मक घटना की याद दिलाता है। उन्होंने सवाल किया, “टीएमसी को साफ करना चाहिए कि उसने अपने घोषित पत्र के लिए ‘इश्तेहार’ शब्द क्यों चुना? यह डॉकलेट का मूल शब्द क्या है? यह तो फ़्रज़ी से आया हुआ शब्द है, जिसका इस्तेमाल सबसे ज़्यादा उर्दू में होता है।” बीजेपी ने दावा किया कि 1905 में ढाका के नवाब के दौर में इसी शब्द का इस्तेमाल ऐसे पर्चों के लिए किया गया था, कि अलग मकसद समाज को बाँटना और एक समुदाय के खिलाफ़ तानाशाही बनाना था. 1905 का प्रसंग—इतिहास से वर्तमान तकअगर इतिहास पर नजर डाली जाए तो 1905 से 1907 के बीच का बंगाल का दौरा बेहद उकेरा-सा था। लॉर्ड कर्ज़ेन के बंगाल डिवीजन के बाद ‘स्वदेशी आंदोलन’ और ‘वंदे मातरम’ की लहर तेज़ हो गई थी। इसी समय ‘लाल इश्तेहार’ नाम की एक किताब सामने आई, जिसे इब्राहिम खान ने लिखा था। यह दस्तावेज़ ढाके के नवाब के प्रभाव वाले महासागर में मनाया गया था। इतिहासकारों का कहना है, इस मत का मकसद मुस्लिम समाज को स्वदेशी आंदोलन और विचारधारा के खिलाफ लामबंद करना था। भाजपा अब इसी ऐतिहासिक संदर्भ को आज की राजनीति से जोड़ रही है। भाषा बनाम राजनीति, चुनाव से पहले बढ़िया गर्मीबंगाल विधानसभा चुनाव से पहले यह विवादित शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया। ‘इश्तेहार’ को लेकर घटिया बहस अब भाषा, इतिहास और पहचान की राजनीति बदल गई है। एक तरफ बीजेपी इसे “बंगाली अस्मिता और भाषा के सम्मान” से बढ़ावा दे रही है, तो दूसरी तरफ टीएमसी इसे “बांग्ला अस्मिता और भाषा के सम्मान” से बढ़ावा दे रही है।
एफसीआरए पर पीएम मोदी के बयान से भड़के केसी वेणुगोपाल, कहा- ‘पूरे समुदाय का अपमान’ सरकार पर लगाया साज़िश का आरोप

केरल की रेटिंग में एफसीआरए संशोधन को लेकर घमासन तेजी से हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे पत्र लिखकर कड़े विरोध की निंदा की है। उन्होंने “पूरे समुदाय का अपमान” पर बयान देते हुए कहा कि गहरे असंतोष की नींव है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अप्रैल को केरल में एनडीए की रैली के दौरान यूडीएफ पर एफसीआरए और यूनिफॉर्म सिविल कोड लेकर “झूठ फैलाने” का आरोप लगाया। इसी बयान पर अब कांग्रेस ने पलटवार करते हुए इसे राजनीतिक और शिक्षण सामग्री बनाया है। “घरे दुख और ढांचे के साथ लिख रहा हूं…”केसी वेणुगोपाल ने अपने पत्र में बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने लिखा- “मैं गहरा दुख और बिखराव के साथ लिख रहा हूं। केरल में आपका बयान, जिसमें आपने यूडीएफ पर एफसीआरए को लेकर राजनीतिक लाभ के लिए झूठ फैलाने का आरोप लगाया था, बेहद समस्याग्रस्त और पूरे समुदाय के लिए विचारधारा थी। पवित्र दिन पर ऐसा बयान देना विशेष रूप से अलगाव वाला और टाला जा सकने वाला था।” वेणुगोपाल ने यह भी साफ किया कि एफसीआरए में प्रस्तावित बदलावों के “दूरगामी और खतरनाक परिणाम” हैं, जिनमें किसी भी शर्त को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। सरकार का पक्ष- ”ईमानदार एनजीओ को डरने की जरूरत नहीं”इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा, “ईसाई समुदाय को बिल्कुल भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। प्रस्तावित एफसीआरए बिल अच्छे एनजीओ की मदद के लिए सुझाव देता है और केवल गैर-अवैध तत्वों को सीमित रखता है जो भारत के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। अच्छे अनुयायियों को कोई नुकसान नहीं होगा, विशेष रूप से ईसाई धर्म को। मैं उन्हें पूरा समर्थन देना चाहता हूं कि यह बिल वास्तविक सिद्धांतों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से सरकारी बिल रोका गया है और इस पर आगे चर्चा होगी। खड़गे का हमला- “यह सुधार नहीं, हमला है” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्ज खुंडगे ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा, “यह सुधार नहीं है। यह हमला है, सिर्फ ईसाई अनुयायियों पर नहीं, बल्कि नागरिक समाज, एनजीओ और गरीबों की मदद करने वाली बातों पर भी।” खड़गे ने इसे ”चुनिंदा शकिंग” करार देते हुए कहा कि जैसे वक्फ कानून में बदलाव से मुस्लिम समुदाय में जन्म हुआ, वैसे ही एफसीआरए संशोधन से ईसाई समुदाय में गंभीर चिंता है। प्रभावोत्पादक और संक्षेपण संदेशकेरल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एफसीआरए की समाप्ति राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हो गई है। कांग्रेस इसे गठबंधन की सुरक्षा और अधिकारिता से बड़ा पोर्टफोलियो बना रही है, जबकि भाजपा इसे सहयोगी और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबद्धता बना रही है। इस पूरे विवाद में साफ किया गया है कि एफसीआरए संशोधन अब सिर्फ एक कानूनी या आवेदक नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे-सीधे राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक चर्चा का केंद्र बन गया है।
ईरान की ग्लोबल सप्लाई रोकने की धमकी, कच्चा-तेल $110 पार:भारत के आयात बिल पर ₹16,000 करोड़ का बोझ बढ़ेगा, बढ़ सकती है महंगाई

अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें आज फिर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान को नर्क बनाने धमकी देने के बाद ईरान ने ग्लोबल सप्लाई ठप करने की बात कही है। इससे आज एक बैरल ब्रेंट क्रूड की कीमत $1.71 की बढ़कर $110.74 पर पहुंच गई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह तनाव इसी तरह जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल पहुंच सकती हैं। इसके अलावा, अगर कच्चे तेल की कीमत में $1 की बढ़ोतरी सालभर बनी रहती है, तो भारत का सालाना आयात बिल करीब ₹16,000 करोड़ बढ़ जाएगा। 38 दिन में इंडियन बास्केट 71% महंगा भारत की चिंता: महंगाई और रुपए पर सीधा असर पड़ेगा भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए यह स्थिति चिंताजनक है। ईरान ने होर्मुज रूट को लगभग बंद कर दिया है। दुनिया का करीब 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से न सिर्फ कच्चा तेल, बल्कि एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक की कीमतों में भी भारी तेजी आने लगी है। तेल की कीमतें 10 डॉलर बढ़ने से 0.60% बढ़ेगी महंगाई रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है, ऐसे में वहां के हालात बिगड़ने से भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट, GDP ग्रोथ और रुपए की वैल्यू पर भी दबाव बढ़ेगा। ट्रम्प का अल्टीमेटम- मंगलवार रात 8 बजे तक का समय ट्रम्प ने ईरान को बास्टर्ड कहते हुए होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलने पर बड़ा हमला करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज नहीं खोला तो वो उसे नरक बना देंगे। इसके साथ ही उन्होंने ईरान में पावर प्लांट और पुलों पर हमला करने की बात कही। ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान में मंगलवार को पावर प्लांट डे और ब्रिज डे एक साथ होगा यानी हमला होगा। ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोले दे, नहीं तो नरक जैसे हालात में पहुंच जाएगा। ईरान का पलटवार: पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में जल जाएगा ट्रम्प के बयान के बाद ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले बढ़े तो वह ग्लोबल सप्लाई चेन को ठप कर देगा। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज के अलावा दूसरे समुद्री रास्तों को भी निशाना बना सकता है। ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने कहा कि किसी भी बड़ी कार्रवाई का जवाब सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर असर डालकर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ही नहीं, बल्कि बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्ते भी खतरे में आ सकते हैं। OPEC+ ने लिया उत्पादन बढ़ाने का फैसला बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सऊदी अरब और रूस सहित आठ OPEC+ देशों ने रविवार को एक वर्चुअल मीटिंग की। इसमें फैसला लिया गया कि मई 2026 से तेल उत्पादन में रोजाना 2.06 लाख बैरल की बढ़ोतरी की जाएगी। यह कदम पिछले साल घोषित की गई अतिरिक्त कटौती में बदलाव के तहत उठाया गया है। संगठन का कहना है कि वे बाजार की स्थितियों पर करीबी नजर रख रहे हैं और जरूरत पड़ने पर उत्पादन में और बदलाव किए जा सकते हैं।
धार में कांग्रेस नेता गोपाल पाल पर केस दर्ज:आपत्तिजनक पोस्ट करने पर पुलिस की कार्रवाई; नेता प्रतिपक्ष के करीबी हैं

धार शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर देवी-देवताओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में पुलिस ने कांग्रेस नेता गोपाल पाल पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) और 299 के तहत केस दर्ज किया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के करीबी माने जाने वाले गोपाल पाल के खिलाफ सर्व ब्राह्मण समाज और आरएसएस से जुड़े दिनेश सोनवनिया व फरियादी चेतन शर्मा की शिकायत के आधार पर रविवार को यह कार्रवाई की गई। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक जांच की जा रही है। ब्राह्मण समाज ने सौंपा था ज्ञापन जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले सर्व ब्राह्मण समाज के लोगों ने कोतवाली थाने पहुंचकर थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा था। समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि गोपाल पाल ने सोशल मीडिया पर देवी-देवताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। RSS की आपत्तिजनक फोटो पोस्ट करने का आरोप इसी मामले में दिनेश सोनवनिया ने रविवार को कोतवाली थाने में एक अलग लिखित आवेदन दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गोपाल पाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी एक आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की है। सोनवनिया ने बताया कि वे स्वयं आरएसएस से जुड़े हैं और इस प्रकार की पोस्ट संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाती है। दोनों आवेदनों के आधार पर दर्ज हुआ केस ब्राह्मण समाज और दिनेश सोनवनिया के दोनों आवेदनों व फरियादी चेतन शर्मा की शिकायत को आधार बनाते हुए कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपी गोपाल पाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) और 299 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पोस्ट की जांच जारी है।
फल और सब्जियों पर लगे पेस्टिसाइड को कैसे हटाएं? जानिए 5 आसान क्लीनिंग ट्रिक्स, मिनटों में होगी सफाई

Last Updated:April 06, 2026, 11:02 IST Fruits and Vegetables Cleaning Tips: सब्जियों और फलों पर लगे कीटनाशक सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं. ऐसे में बाजार से खरीदकर लाने के बाद फल-सब्जियों को अच्छी तरह साफ करना जरूरी होता है. नमक का पानी, बेकिंग सोडा, सिरका और साफ पानी से धोने जैसे आसान घरेलू उपायों से इन केमिकल्स को काफी हद तक हटाया जा सकता है. सही सफाई न केवल बीमारियों से बचाती है, बल्कि शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में भी मदद करती है. फल-सब्जियां साफ करने के लिए बेकिंग सोडा और सिरका भी इस्तेमाल कर सकते हैं. Simple Ways to Clean Fruits and Veggies: आजकल खेती में पेस्टिसाइड यानी कीटनाशक का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जा रहा है. ये कीटनाशक फसलों को बीमारियों और कीड़ों से बचाते हैं. हालांकि ये पेस्टिसाइड कई खतरनाक केमिकल्स से बने होते हैं और फसल पर भी लग जाते हैं. इन केमिकल्स के अवशेष अक्सर सब्जियों और फलों की सतह पर रह जाते हैं, जो सीधे हमारे शरीर में पहुंचकर धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकते हैं. लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से हार्मोनल असंतुलन, एलर्जी और कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए सब्जियों को सही तरीके से साफ करना बेहद जरूरी है. फल-सब्जियां साफ करने के 5 तरीके बहते पानी से अच्छी तरह धोएं : फल-सब्जियों को बाजार से लाने के बाद बहते पानी में अच्छे से धोना चाहिए. कई लोग सिर्फ हल्का-सा पानी डालकर काम चला लेते हैं, लेकिन ऐसा करना पर्याप्त नहीं है. फल-सब्जियों को कम से कम 2-3 मिनट तक हाथों से रगड़ते हुए धोना चाहिए, ताकि उनकी सतह पर चिपके पेस्टिसाइड, धूल और बैक्टीरिया हट सकें. पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक या धनिया को एक-एक पत्ती अलग करके धोना ज्यादा असरदार होता है. यह तरीका केमिकल्स हटा देता है. नमक वाले पानी में भिगोएं : नमक का पानी पेस्टिसाइड हटाने में काफी मददगार माना जाता है. एक बड़े बर्तन में पानी लेकर उसमें 1-2 चम्मच नमक मिलाएं और फल-सब्जियों को 10-15 मिनट के लिए उसमें भिगोकर रखें. नमक का घोल फल-सब्जियों की सतह पर मौजूद केमिकल्स को ढीला करता है, जिससे वे आसानी से निकल जाते हैं. खासकर बैंगन, भिंडी और गोभी जैसी सब्जियों के लिए यह तरीका ज्यादा प्रभावी होता है. भिगोने के बाद इन्हें साफ पानी से दोबारा धोना न भूलें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. बेकिंग सोडा करें इस्तेमाल : बेकिंग सोडा एक वैज्ञानिक रूप से प्रभावी तरीका माना जाता है. एक लीटर पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर उसमें फल-सब्जियों को 10-15 मिनट तक रखें. रिसर्च में पाया गया है कि बेकिंग सोडा पेस्टिसाइड के केमिकल स्ट्रक्चर को तोड़ने में मदद करता है, जिससे उनका असर कम हो जाता है. यह तरीका खासतौर पर सेब, टमाटर और शिमला मिर्च जैसी सब्जियों और फलों के लिए उपयोगी है. बाद में इन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है. सिरका से करें सफाई : सिरका एक नेचुरल क्लीनिंग एजेंट है, जो बैक्टीरिया और कुछ हद तक पेस्टिसाइड हटाने में मदद करता है. एक बर्तन में पानी लें और उसमें 1-2 चम्मच सिरका मिलाएं, फिर फल-सब्जियों को 10 मिनट तक इसमें डुबोकर रखें. यह तरीका खासकर उन सब्जियों के लिए अच्छा है जिनकी सतह चिकनी होती है, जैसे टमाटर या खीरा. सिरके का ज्यादा इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे स्वाद और गंध प्रभावित हो सकती है. उपयोग के बाद साफ पानी से धोना जरूरी है. सही तरीके से छीलें और पकाएं : कुछ सब्जियों और फलों का छिलका हटाने से पेस्टिसाइड का बड़ा हिस्सा निकल जाता है, क्योंकि अधिकांश केमिकल्स बाहरी परत पर ही रहते हैं. आलू, गाजर, खीरा और लौकी जैसी चीजों को छीलकर इस्तेमाल करना सुरक्षित विकल्प हो सकता है. इसके अलावा सब्जियों को अच्छी तरह पकाने से भी कुछ हानिकारक तत्व कम हो जाते हैं. ध्यान रखें कि ज्यादा पकाने से पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं, इसलिए मध्यम आंच पर सही समय तक पकाना बेहतर होता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 11:02 IST
जाकिर खान बोले- धुरंधर से सबकी जली:बॉलीवुड पर कसा तंज; कहा- बम ल्यारी में फूटे, पर धुआं बांद्रा से जुहू में उड़ा

19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार रिकॉर्ड ब्रेक कर रही है। इस बीच कॉमेडियन जाकिर खान ने फिल्म की सफलता को लेकर बॉलीवुड पर चुटकी ली है। जाकिर खान ने एक अवॉर्ड शो के दौरान कहा कि इंडस्ट्री के लोग आदित्य धर की इस फिल्म से अंदर ही अंदर जल रहे हैं। जाकिर ने कहा, “कितने ही बधाई पोस्ट आप डाल दें, कितनी ही स्टोरी शेयर कर दें या इंटरव्यू में इसे अपनी पसंदीदा फिल्म बता दें, मगर सच तो ये है कि धुरंधर से सबकी जली तो है।” ल्यारी वाले सीन पर ली चुटकी जाकिर ने फिल्म के एक्शन सीन्स का जिक्र करते हुए बांद्रा और जुहू (जहां बॉलीवुड स्टार्स रहते हैं) पर निशाना साधा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “बम फिल्म में ल्यारी (कराची) में फूटे, पर धुआं बांद्रा से जुहू में उड़ा है।” उनका इशारा उन सेलेब्स की तरफ था जो फिल्म की ब्लॉकबस्टर ओपनिंग के समय चुप थे, लेकिन अब रिकॉर्ड टूटने पर इसकी तारीफ कर रहे हैं। साउथ के सितारों ने पहले की थी तारीफ ‘धुरंधर 2’ में रणवीर सिंह, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, राकेश बेदी और सारा अर्जुन जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म की रिलीज के बाद सबसे पहले महेश बाबू, अल्लू अर्जुन और एसएस राजामौली जैसे साउथ के दिग्गजों ने इसकी सराहना की थी। इसके काफी समय बाद बॉलीवुड से आलिया भट्ट, करण जौहर और विक्की कौशल ने फिल्म के कलाकारों के काम की तारीफ की। मधुर भंडारकर जैसे कई लोगों का मानना है कि फिल्म को बॉलीवुड से उतना सपोर्ट नहीं मिल जितना मिलन चाहिए था। जाकिर ने बताई ब्रेक लेने की असली वजह इसी बीच, जाकिर खान ने अपने लाइव टूर से ब्रेक लेने की खबरों पर भी सफाई दी है। उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर उनकी सेहत को लेकर चल रही खबरें गलत हैं। जाकिर ने कहा, “ब्रेक की असली कहानी ये है कि मेरे पास बहुत सारा लिखने का काम पेंडिंग था, जिसे मैं पिछले छह साल से नहीं कर पाया था। मेरी सेहत बहुत खराब नहीं है। जो कुछ भी आप पढ़ रहे हैं वो अनावश्यक बकवास है।”
अशोकनगर में सिलेंडर न मिलने पर चक्काजाम:डिलीवरी मैसेज आने के बाद भी नहीं मिली गैस; कलेक्ट्रेट पर खाली टंकी रखकर हंगामा

अशोकनगर जिले में सोमवार को गैस सिलेंडर की डिलीवरी का मैसेज आने के बावजूद टंकी नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। दो गैस एजेंसियों के उपभोक्ताओं ने पहले कोलूआ रोड पर चक्का जाम किया और फिर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर गेट पर खाली सिलेंडर रखकर हंगामा किया। देहात थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर समझा-बुझाकर जाम खुलवाया, जिसके बाद लोग अपनी शिकायत दर्ज कराने कलेक्ट्रेट पहुंचे हैं। जय बाबा गैस एजेंसी के बाहर चक्का जाम, पुलिस ने हटाया सुबह के समय कोलूआ रोड स्थित जय बाबा इंडियन गैस एजेंसी के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। उपभोक्ताओं का आरोप था कि उन्हें मोबाइल पर सिलेंडर डिलीवर होने का मैसेज मिल चुका है, लेकिन असल में उन्हें टंकी नहीं मिली। जब उन्होंने एजेंसी से संपर्क किया तो उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। नाराज उपभोक्ताओं ने सड़क पर उतरकर चक्का जाम कर दिया, जिससे यातायात बाधित हो गया। सूचना मिलने पर देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर सड़क से हटाया। इसके बाद कुछ लोग अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। डीसी गैस गोदाम के उपभोक्ताओं ने कलेक्ट्रेट गेट पर रखा खाली सिलेंडर इसी दौरान, गुना रोड स्थित डीसी गैस गोदाम के उपभोक्ता भी सिलेंडर न मिलने से आक्रोशित होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने कार्यालय के गेट पर खाली सिलेंडर रखकर अपना विरोध दर्ज कराया। इन उपभोक्ताओं का भी कहना था कि उन्हें मोबाइल पर सिलेंडर डिलीवर होने का मैसेज आ गया था, लेकिन उन्हें टंकी नहीं मिली। घर तक नहीं पहुंच रही गैस की टंकियां दुर्गा कॉलोनी निवासी प्राण सिंह कुशवाह ने बताया कि उन्होंने लगभग एक महीने पहले डीसी गैस गोदाम पर सिलेंडर बुक कराया था। उन्हें मोबाइल पर टंकी मिलने का मैसेज भी आया, लेकिन उन्हें अब तक सिलेंडर प्राप्त नहीं हुआ है। उनका यह भी कहना था कि अब उनका दोबारा नंबर भी नहीं लग रहा है। वहां मौजूद कुछ अन्य उपभोक्ताओं ने बताया कि जब एजेंसी पर गैस की गाड़ी आती है, तो उनसे कहा जाता है कि रिक्शा के माध्यम से टंकी घर पहुंचा दी जाएगी। हालांकि, कई बार टंकियां उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचतीं और उनका पता नहीं चलता। देखिए जाम की तस्वीरें…
भीषण गर्मी में लू की मार से बचाने में मदद करेगा ये शरबत, जानें इसे घर पर बनाने की आसान विधि – News18 हिंदी

X भीषण गर्मी में लू की मार से बचाने में मदद करेगा ये शरबत, जानें बनाने की विधि Palash Flower Benefits: गर्मी का मौसम शुरू होते ही गांवों-जंगलों में पलाश (टेसू) के फूल खिलने लगते हैं, जो आग की तरह लाल-नारंगी रंग के नजर आते हैं. ग्रामीण इलाकों में इसे टेसू के नाम से जाना जाता है. आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है. खास बात ये कि इन फूलों से बनने वाला शरबत गर्मियों में किसी वरदान से कम नहीं माना जाता. पलाश के फूलों का शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ कई समस्याओं में राहत देता है. लू और गर्मी से बचाव पलाश का शरबत शरीर को अंदर से ठंडा रखता है. तेज धूप में निकलने पर होने वाली थकान, सिरदर्द और बेचैनी को कम करने में मदद करता है. इसे पीने से लू लगने का खतरा भी कम हो जाता है. यह शरबत पाचन तंत्र को मजबूत करता है. गैस, कब्ज, दस्त और पेट की जलन जैसी समस्याओं में राहत देता है. जिन लोगों को पेट में गर्मी की शिकायत रहती है, उनके लिए यह काफी फायदेमंद माना जाता है.
पहलवान बिस्वा शर्मा का बड़ा आरोप- ‘कांग्रेस ने सोशल मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी के आधार पर मेरी पत्नी पर लगाया आरोप’

असम के मुख्यमंत्री हिमंत शर्मा विश्व ने अपने परिवार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने मेरी पत्नी के खिलाफ आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा,” मेरी पत्नी के खिलाफ ग़रीब पति-पत्नी को लेकर कांग्रेस नेता पवन सह-लेखक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मेरी पत्नी के खिलाफ कांग्रेस के आरोप में असमंजस की स्थिति को प्रभावित करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं, इसके लिए कॉलेज की सजा हो सकती है।” असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “…कोई भी 199 अमेरिकी डॉलर कंपनी का रजिस्ट्रेशन करा सकता है। कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उन्होंने रिंकी के नाम से एक और बनाई कंपनी…कांग्रेस ने सोशल मीडिया ग्रुप से प्राप्त पासपोर्ट और शेयरहोल्डिंग की स्थिति का इस्तेमाल किया। गौरव गोगोई ने भी एक सोशल मीडिया ग्रुप की मदद की। पाकिस्तान किस तरह असम चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, यह बहुत महत्वपूर्ण है।” #घड़ी | गुवाहाटी: असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कहते हैं, “…कोई भी 199 अमेरिकी डॉलर का भुगतान करके एक कंपनी पंजीकृत कर सकता है। कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद, उन्होंने रिनिकी के नाम पर एक और कंपनी बनाई…कांग्रेस ने एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया से प्राप्त पासपोर्ट और दस्तावेजों की छवियों का इस्तेमाल किया… https://t.co/S5bBLdtBKn pic.twitter.com/zPQr9lJs0V – एएनआई (@ANI) 6 अप्रैल 2026 क्या है मामला असम में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन अलग-अलग पासपोर्ट कैसे हैं? उन्हें तीन पासपोर्ट रखने की क्या आवश्यकता है? क्या वे कोई अपराधी हैं? कांग्रेस के एक्स हैंडल पर पवन एसोसिएट का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया, ”असम की जनता पूछ रही है।” हिमंता बिस्वा सरमा की पूरी राजनीतिक छवि के खिलाफ अपमान पर आधारित है, लेकिन उनकी पत्नी दो मुस्लिम देशों के पासपोर्ट दर्ज हैं, कैसे? भारत के कानून के खाते से आप द्विपक्षीय नागरिकता नहीं रख सकते हैं, तो क्या रिंकी भू लाइसेंस सरमा भारत का पासपोर्ट भी रखता है? हिमंता बिस्वा सरमा, अमित शाह के दत्तक पुत्र क्या हैं? और किस देश के मठाधीश को ये जानकारी थी कि उनके दत्तक पुत्र की पत्नी के 3 पासपोर्ट हैं? अमित शाह का जवाब- वो एसआईटी सहायक इस मामले की जांच क्या करेगी?” (टैग्सटूट्रांसलेट)असम चुनाव 2026(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा शर्मा(टी)कांग्रेस(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा शर्मा(टी)कांग्रेस
जाह्नवी बोलीं- मैं पूरी तरह से मां पर निर्भर थी:उनके जाने के बाद कई गलत फैसले लिए, कई लोगों ने निजी जिंदगी में दखल दिया

बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी मां और सुपरस्टार श्रीदेवी के निधन और उसके बाद आई मुश्किलों पर बात की है। जाह्नवी ने बताया कि वे अपनी जिंदगी के हर छोटे-बड़े फैसले के लिए मां पर निर्भर थीं। उनके अचानक चले जाने के बाद जाह्नवी को न सिर्फ अकेले फैसले लेना सीखना पड़ा, बल्कि दुनिया के कड़े व्यवहार और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। हर छोटी बात के लिए मां पर थीं निर्भर राज शमानी के पॉडकास्ट में जाह्नवी ने बताया कि श्रीदेवी के रहते उन्होंने कभी खुद से कोई फैसला नहीं लिया था। जाह्नवी ने कहा, “मैं उन पर पूरी तरह निर्भर थी। मैं उनसे हर बात पूछती थी की क्या कपड़े पहनूं? क्या करूं? क्या सही है और क्या गलत? उनके जाने के बाद मुझे अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेना सीखना पड़ा।” जाह्नवी ने यह भी माना कि इस दौरान उन्होंने कई गलत फैसले लिए और उन लोगों को अपनी निजी जिंदगी में दखल देने दिया, जिनका वहां कोई काम नहीं था। दुनिया मेरे दुख को जज कर रही थी जाह्नवी ने उस दौर के तनाव को याद करते हुए बताया कि लोग उनके दुख का पैमाना तय कर रहे थे। एक्ट्रेस के मुताबिक, “दुनिया मुझे तोड़ने की कोशिश कर रही थी। लोग कमेंट करते थे कि देखो वह अब कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रही है, वह उतनी दुखी नहीं है जितनी उसे होना चाहिए। मेरे परिवार पर भी कई तरह के आरोप लगाए गए।” मां के जाने से बदल गए बोनी कपूर अपनी मां के मजाकिया स्वभाव को याद करते हुए जाह्नवी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि श्रीदेवी की जगह दुनिया में कोई नहीं ले सकता। जाह्नवी ने अपने पिता बोनी कपूर के बारे में कहा, उस दिन मैंने सिर्फ परिवार का एक सदस्य नहीं खोया था, बल्कि अपने पिता को भी खो दिया था। जब मां हमारे साथ थीं, तब पापा बिल्कुल अलग इंसान थे। आज वह जैसे हैं मैं उससे खुश हूं, लेकिन वह पहले जैसे नहीं रहे।” जाह्नवी के मुताबिक, उनकी फैमिली की खुशी और पॉजिटिविटी में श्रीदेवी का सबसे बड़ा योगदान था। डेब्यू फिल्म के दौरान हुआ था निधन श्रीदेवी का निधन 24 फरवरी 2018 को यूएई में हुआ था। यह वह समय था जब जाह्नवी अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म ‘धड़क’ की तैयारी कर रही थीं। जाह्नवी की फिल्म तो बॉक्स ऑफिस पर हिट रही, लेकिन उनकी इस सफलता को देखने के लिए उनकी मां उनके साथ नहीं थीं। श्रीदेवी ने करीब तीन दशकों तक हिंदी, तमिल और तेलुगू सिनेमा पर राज किया था।







