‘महिलाओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं’: तमिलनाडु चुनाव रैली में अन्नाद्रमुक के पलानीस्वामी ने द्रमुक पर निशाना साधा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:01 अप्रैल, 2026, 07:38 IST तमिलनाडु के शिवकाशी में एक रैली को संबोधित करते हुए पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं है और मारिजुआना खुलेआम बेचा जा रहा है। एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी। (पीटीआई/फ़ाइल) ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने मंगलवार को एक चुनावी रैली के दौरान राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर डीएमके सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि तमिलनाडु में महिलाओं या पुलिस के लिए कोई सुरक्षा नहीं है। 23 अप्रैल को राज्य विधानसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु के शिवकाशी में एक रैली को संबोधित करते हुए, पलानीस्वामी ने आश्वासन दिया कि अगर पार्टी सत्ता में आती है, तो वह तीन महीने के भीतर गांजा तस्करी को खत्म कर देगी। उन्होंने शिवकाशी में आतिशबाजी और माचिस उद्योगों के लिए समर्थन का भी आश्वासन दिया। हिंदुस्तान टाइम्स ने उनके हवाले से कहा, “जब मेरे मुख्यमंत्री रहते हुए आतिशबाजी उद्योग को संकट का सामना करना पड़ा, तो मैंने 20 सांसदों की एक समिति का नेतृत्व करते हुए केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की और मांग की कि आतिशबाजी की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।” “अगर अन्नाद्रमुक सरकार दोबारा बनी तो इन उद्योगों की रक्षा की जाएगी।” पलानीस्वामी ने डीएमके पर निशाना साधा अन्नाद्रमुक सुप्रीमो ने कावेरी-गुंडर नदी जोड़ परियोजना को रोकने के लिए द्रमुक सरकार की भी आलोचना की और कहा कि तमिलनाडु में सरकार बनने के बाद उनकी पार्टी इसे लागू करेगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य मेट्टूर बांध के अधिशेष पानी से नहरों, झीलों और तालाबों को भरना है। उन्होंने द्रमुक पर पिछली अन्नाद्रमुक सरकार के दौरान विरुधुनगर जिले में 400 करोड़ रुपये की लागत से एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना का श्रेय लेने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “इसके लिए 14,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और मैंने व्यक्तिगत रूप से इसकी आधारशिला रखी थी। इससे पहले कि यह पूरा हो पाता, सरकार बदल गई।” उन्होंने यह भी कहा कि द्रमुक सरकार में महिलाओं या बुजुर्गों के लिए कोई सुरक्षा नहीं है। उन्होंने तर्क दिया, “क्या आप चाहते हैं कि ऐसी सरकार बनी रहे? एक ‘कठपुतली सीएम’ जो एक स्थायी डीजीपी भी नियुक्त नहीं कर सकता? एक राज्य तभी समृद्ध होगा जब कानून और व्यवस्था अच्छी होगी। डीएमके का एकमात्र विचार कमीशन, वसूली, भ्रष्टाचार है।” और पढ़ें: तमिलनाडु सीएम फेस 2026: DMK, AIADMK और बीजेपी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा? रैली में पहुंचने पर बच्चों द्वारा प्रदर्शित एक बैनर की ओर इशारा करते हुए, पलानीस्वामी ने कहा, “देखें उस पर क्या लिखा है – केवल अन्नाद्रमुक सरकार महिलाओं के लिए सुरक्षित है। हम डीएमके को और नहीं चाहते।” उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में खुलेआम मारिजुआना बेचा जा रहा है, जिसका बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पलानीस्वामी की टिप्पणी तब आई जब तमिलनाडु 23 अप्रैल, 2026 को विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहा है, जहां वह अन्नाद्रमुक के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। चुनावों में एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला एनडीए डीएमके और कांग्रेस गठबंधन से भिड़ेगा, जिसके नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) जगह : शिवकाशी, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 01 अप्रैल, 2026, 07:38 IST समाचार राजनीति ‘महिलाओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं’: तमिलनाडु की चुनावी रैली में अन्नाद्रमुक के पलानीस्वामी ने द्रमुक पर निशाना साधा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026(टी)एआईएडीएमके चुनाव रैली(टी)एडप्पादी के पलानीस्वामी(टी)डीएमके सरकार की आलोचना(टी)कानून और व्यवस्था तमिलनाडु(टी)महिला सुरक्षा तमिलनाडु
फूल है या चमत्कार? पी लें एक गिलास शरबत, पूरे दिन रहें कूल-कूल, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर में भी फायदेमंद

Last Updated:April 01, 2026, 07:21 IST Palash Flower Benefits: पाचन तंत्र के लिए भी पलाश के फूलों का शरबत बेहद लाभकारी माना जाता है. यह गैस, कब्ज, दस्त और पेट में जलन जैसी दिक्कतों में राहत देता है. जिन लोगों को पेट में ज्यादा गर्मी की शिकायत रहती है, उनके लिए यह प्राकृतिक उपाय काफी लाभकारी साबित हो सकता है. सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में इन दिनों टेसू यानी पलाश के फूलों की बहार छाई है. लाल-नारंगी रंग के ये फूल जहां प्रकृति की खूबसूरती बढ़ाते हैं, वहीं आयुर्वेद में भी बेहद उपयोगी माने जाते हैं. खासकर गर्मियों में इनसे बना शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं में राहत पहुंचाता है. सीधी के आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि पलाश के फूलों का शरबत शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है. तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच यह शरबत लू से बचाव में सहायक होता है. इसके सेवन से थकान, सिरदर्द और बेचैनी जैसी समस्याएं भी कम होती हैं. गर्मी के मौसम में इसे नियमित रूप से पीने से शरीर को तरावट मिलती है और ऊर्जा बनी रहती है. उन्होंने कहा कि पाचन तंत्र के लिए भी पलाश का शरबत बेहद लाभकारी माना जाता है. यह गैस, कब्ज, दस्त और पेट में जलन जैसी समस्याओं में राहत देता है. जिन लोगों को पेट में अधिक गर्मी की शिकायत रहती है, उनके लिए यह प्राकृतिक उपाय काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. इसके अलावा यह शरीर में पित्त दोष को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे हाथ-पैरों में जलन और शरीर की अधिक गर्मी से राहत मिलती है. ब्लड शुगर नियंत्रित करने में सहायकडॉक्टर के अनुसार, पलाश के फूलों में एंटी-फंगल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-डायबिटिक गुण पाए जाते हैं. यह शरबत ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है, बवासीर के लक्षणों में राहत देता है, त्वचा रोगों में लाभकारी है और लिवर को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है. साथ ही यह शरीर के वात और कफ दोष को संतुलित करने में भी सहायक माना जाता है. शरबत बनाने की आसान विधिपलाश का शरबत बनाने की विधि भी बेहद आसान है. सूखे फूलों को रातभर पानी में भिगो दें. वहीं ताजे फूलों को 2-3 घंटे तक भिगोना पर्याप्त होता है. इसके बाद उसी पानी को 5-10 मिनट तक हल्का उबाल लें. फिर इसे छानकर ठंडा कर लें और स्वाद के लिए इसमें मिश्री, नींबू का रस और थोड़ा भुना हुआ जीरा मिलाकर सेवन करें. सीमित मात्रा में करें सेवनहालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अधिक मात्रा में पीने से पेट दर्द या दस्त की समस्या हो सकती है. यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी बीमारी से ग्रसित है या दवा ले रहा है, तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. टेसू के फूलों को छाया में सुखाकर एयरटाइट डिब्बे में स्टोर किया जा सकता है, जिससे इन्हें सालभर तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इन सूखे फूलों का उपयोग प्राकृतिक रंग, काढ़ा या शरबत बनाने में किया जा सकता है. गर्मी के मौसम में यह देसी और असरदार नुस्खा लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : April 01, 2026, 07:21 IST
पश्चिम बंगाल ओपिनियन पोल: बीजेपी को मिल सकती है बढ़त? कितने प्रतिशत लोग ममता बनर्जी को सीएम बनाना चाहते हैं, प्री पोल सर्वे का आकलन वाला

पश्चिम बंगाल समेत 4 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में अगले महीने होने वाले चुनाव के लिए तारीखें जारी की जाएंगी। बंगाल में 2 चरण (23-29 अप्रैल) में चुनाव होंगे। इससे पहले ताजा ओपिनियन पोल सामने आया है, जो ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली वैष्णव कांग्रेस के पक्ष में हैं। सीएनएन-न्यूज18 और वोट वाइब रिलीज प्री पोल सर्वे के मुताबिक पश्चिम बंगाल में ओल्ड कांग्रेस कॉन्स्टेंट की चौथी बार सरकार बन सकती है। इस पोल में सामने आया कि मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी की सहयोगी हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 लोग शामिल हैं, जिनमें बहुमत हासिल करने के लिए 148 से ज्यादा लोग शामिल हैं। चुनाव से पहले हुए सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में इंदौर कांग्रेस 184 से 194 में जीत सकती है, जो बहुमत के आंकड़ों से अधिक है। वोट शेयर के मामले में भी टीएमसी को बढ़त मिली है. सर्वे के मुताबिक 41.9 प्रतिशत लोगों ने पारंपरिक कांग्रेस और 34.9 प्रतिशत लोगों ने बीजेपी का समर्थन किया है. ममता बनर्जी की सहभागिता ओपिनियन पोल के अनुसार भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में 98 से 108 सीटें जीत सकती है, जो बहुमत के आंकड़ों से कम है। इसके मुताबिक टीएमसी की जीत का आधार ममता बनर्जी बनी हुई हैं। सर्वे में 48.8 प्रतिशत लोगों ने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री चुना, 33.4 प्रतिशत लोगों ने बीजेपी के शुभेंदु पदाधिकारी को चुना. राज्य सरकार के काम को लेकर 43.3 प्रतिशत लोगों ने अच्छा या बहुत अच्छा बताया। वहीं सरकार के काम को बेहद खराब दर्शकों का आंकड़ा 20.6 प्रतिशत रहा, 18.3 प्रतिशत ने सरकार के काम को बेहद खराब बताया। 36.5 प्रतिशत लोग ऐसे रह रहे हैं, कि उन्होंने कहा कि वह टीएमसी बैचलर में एक बार फिर वोट देंगे। क्या है जातिगत आंकड़े मुस्लिम समुदाय में ममता बनर्जी की संप्रदायवादी बनी हुई है। 44.2 प्रतिशत लोगों ने सरकार के काम को बहुत अच्छा बताया, जबकि सबसे अधिक आलोचनात्मक जनजातियों और जीवित हिंदू कलाकारों ने। दोनों विचारधाराओं के 26.6 प्रतिशत ने स्थिर सरकार के काम को बहुत खराब बताया। ओपिनियन पोल से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की कमज़ोर पार्टी के बारे में बताया गया है। सर्वे में बीजेपी की अंदरूनी लड़ाई और गुटबाजी की ओर 19.9 फीसदी लोगों ने मुहर लगाई. 12.5 प्रतिशत लोग मानते हैं कि पार्टी में बंगाल की संस्कृति की कमी है और 17.2 प्रतिशत लोग मानते हैं कि बीजेपी में राज्य-शैली के नेता की कमी है। (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल ओपिनियन पोल(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव तारीख 2026(टी)पश्चिम बंगाल ओपिनियन पोल 2026(टी)पश्चिम बंगाल बीजेपी सीएम उम्मीदवार 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 कौन जीतेगा
ईरान पर 24 घंटे में इजराइल के 230 हवाई हमले:अब तक 4800 ईरानी सुरक्षाकर्मियों की मौत; चीन-PAK ने 5 सूत्री सीजफायर प्लान बनाया

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 33वां दिन है। इजराइली सेना ने दावा किया है कि उसने मंगलवार को 24 घंटों में ईरान में 230 से ज्यादा हवाई हमले किए। इजराइल का कहना है कि ये हमले प्लांड ऑपरेशन का हिस्सा हैं, जिसका मकसद ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना है। ईरान का कहना है कि इजराइल और अमेरिका सिर्फ सैन्य ठिकानों पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़ी जगहों पर भी हमला कर रहे हैं। वहीं, तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के कम से कम 4,770 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो चुकी है। इस दौरान करीब 21 हजार लोग घायल भी हुए हैं। दूसरी तरफ चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बीजिंग में बैठक के बाद एक 5 पॉइंट वाली योजना जारी की है। इस योजना का मकसद ईरान जंग रोकना है। चीन-PAK का 5 पॉइंट का सीजफायर प्लान… जंग से मिडिल ईस्ट को ₹18 लाख करोड़ का नुकसान यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) ने कहा है कि मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक यह संघर्ष अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा संकट बन गया है। ईरान जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… ईरान-इजराइल जंग से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
हाथी चले बाजार…हरभजन सिंह के जवाब से बवाल:IPL-2026 में कमेंट्री पर ट्रोल करने वालों को कहा- कुत्ता; हटाने की मांग ट्रेंड

जालंधर के पूर्व क्रिकेटर और ‘टर्बिनेटर’ के नाम से मशहूर हरभजन सिंह उर्फ भज्जी ट्रोलर्स को दिए जवाब पर फंस गए हैं। यह पूरा मामला IPL 2026 से जुड़ा है। इस सीजन में हरभजन सिंह हिंदी कमेंट्री पैनल का हिस्सा हैं, जिसमें उनके साथ वीरेंद्र सहवाग और नवजोत सिंह सिद्धू जैसे दिग्गज शामिल हैं। 28 और 29 मार्च को खेले गए मैचों के दौरान सोशल मीडिया पर दर्शकों ने हरभजन सिंह और हिंदी कमेंट्री टीम को ट्रोल करना शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि हिंदी कमेंट्री का स्तर गिर रहा है। फैंस ने कहा कि कमेंटेटर्स खेल की तकनीकी बातों पर चर्चा करने के बजाय शायरी, मजाक और बेवजह की बातें ज्यादा कर रहे हैं। विवाद तब और बढ़ गया जब एक मीम अकाउंट ने कमेंट्री पैनल की फोटो शेयर कर उन्हें “3 जोकर” कह दिया। कई दर्शकों ने तुलना करते हुए कहा कि इंग्लिश कमेंट्री में इयान बिशप जैसे एक्सपर्ट खेल की गहराई समझाते हैं, जबकि हिंदी पैनल केवल मनोरंजन तक सीमित रह गया है। ट्रोलर्स ने हरभजन सिंह को लेकर सैकड़ों कमेंट किए। इस पर हरभजन सिंह ने भी ट्रोलर्स को जवाब दिया। उन्होंने एक कमेंट में लिखा— हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार। इसके अलावा उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि यह कहावत ट्रोलर्स पर लागू होती है और अगर समझ न आए तो अपनी “पेड सेना” से मदद ले लें, साथ ही ‘गेट लॉस्ट’ भी लिखा। भज्जी अब कमेंट्री बॉक्स में अपनी टिप्पणियों और सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स को दिए गए तीखे जवाबों के कारण बुरी तरह फंस गए हैं। आलम यह है कि सोशल मीडिया पर उन्हें कमेंट्री पैनल से हटाने की मांग ट्रेंड कर रही है। पहले जानिए ट्रोलर्स ने क्या कहा… हरभजन सिंह ने दिया जवाब हरभजन सिंह ने ट्रोलर्स के खिलाफ फ्रंट फुट पर आकर जवाब दिया। 29 मार्च को एक एक्स यूजर @होमलेंडर ने हरभजन को टैग करते हुए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। ट्रोलर ने लिखा कि हरभजन को धोनी ने टीम से लात मारकर निकाला था और अब उन्हें कमेंट्री में भी भौंकना बंद कर देना चाहिए। हरभजन सिंह ने इस ट्रोल को नजरअंदाज करने के बजाय आक्रामक जवाब दिया। उन्होंने लिखा, यह अंग्रेजी की एक अच्छी कहावत है- जो तेरे पर लागू होती है। अगर ना समझे तो अपनी पेड सेना की मदद ले लेना। गेट लॉस्ट नाउ। और हां अपनी असली शकल और आईडी से कर ना ट्वीट। इसके साथ ही उन्होंने एक इमेज शेयर की- जिस पर लिखा- हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार। हरभजन सिंह ने ये पोस्ट की फैंस ने पुराने विवादों को फिर से हवा दी हरभजन सिंह की पोस्ट पर लाखों व्यूज आ गए और लोगों ने हरभजन को उनकी अमर्यादित भाषा के लिए ट्रोल किया। लोगों का कहना था कि एक राज्यसभा सांसद और पद्म श्री सम्मानित खिलाड़ी को एक गुमनाम ट्रोल के स्तर पर गिरकर फट्टू जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। फैंस की नाराजगी यहीं तक सीमित नहीं रही। हरभजन के इस व्यवहार ने उनके पुराने विवादों को फिर से हवा दे दी। ट्रोल्स ने याद दिलाया कि कैसे IPL 2025 में उन्होंने जोफ्रा आर्चर की तुलना काली टैक्सी से करके नस्लीय टिप्पणी की थी। साथ ही आर अश्विन के साथ उनके कथित कंपीटिशन और एमएस धोनी के प्रशंसकों के साथ उनके पुराने मतभेदों को भी दोबारा कुरेदा गया। दर्शकों का एक बड़ा वर्ग यह आरोप लगा रहा है कि हरभजन अपनी कमेंट्री में कुछ खास खिलाड़ियों के प्रति बायस्ड रहते हैं। हरभजन को कमेंट्री से निकालने पर नहीं हुआ फैसला अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हरभजन सिंह को IPL कमेंट्री पैनल से निकाल दिया गया है? आधिकारिक तौर पर ब्रॉडकास्टर स्टार स्पोर्ट्स और जियो सिनेमा ने अभी तक कोई टर्मिनेशन लेटर जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो बीसीसीआई और ब्रॉडकास्टिंग टीम इस पूरे घटनाक्रम से बेहद नाराज है। निकाले जाने की चर्चा के 3 मुख्य कारण
सिद्दू: टूर की याद ताजा कर पिज्जा में देसी घी का सिद्दू, घर पर ऐसे जानें; दिल छूना स्वाद

सिड्डू रेसिपी: हिमाचल के वैज्ञानिक वैज्ञानिकों ने कहा कि आपने भी गर्म मसाले से निकला सिद्दू का स्वाद चखा ही होगा, जिसे एक बार खाने के बाद उसका स्वाद दिल में बस जाता है। वहीं, अगर आपने सिद्दू नहीं खाया है तो भी कोई बात नहीं हम आज ऐसी ही हिमाचली डिश की रेसिपी लेकर आए हैं, जिसे आप घर पर भी बना सकते हैं। वहीं अगर आपने सिद्दू खाया है तो आप अपने हिस्से वाली यादों को घर की रसोई तक ला सकते हैं। इस रेसिपी से आप बिना रुके मनाली गए, घर पर ही बना सकते हैं हिमाचल का फेमस सिद्दू। सिद्दू दिखने में गुजिया जैसा लगता है, लेकिन स्वाद बिल्कुल अलग होता है। ये पूरी तरह से स्टीम में पकता है, इसलिए तेल कम लगता है और स्वास्थ्य के लिए भी ये काफी अच्छा रहता है। मीट के अवशेषों का प्राकृतिक आवरण और अंदर मेवों-मसालों की भरपूर स्टफिंग। यह व्युत्पत्ति ही मुख में हिमाचल की सुगंध भर जाती है। सिद्दू बनाना क्या है? डीजल के आटे का आटा 1 छोटा नमक, चीनी और इंस्टेंट यीस्ट 1 छोटा मसाला तेल गुनगुना पानी तरबूज/खरबूज के बीज, 10-15 बादाम, आधा कप मूंगफली, 2 बड़े पोस्ता दाना (6 घंटे) 1 छोटी पिसी काली मिर्च, 2 छोटी पिसी साबुत धनिया, 1 छोटी पिसी जीरा 2 इंच अदरक, 2-3 हरी मिर्च, आधा प्याज, 10-12 लहसुन की काली, 2 पिसी हुई लाल मिर्च पुदीना पत्ता, धनिया धनिया, सफेद-काला नमक, हल्दी, अनारदाना या आमचूर सबसे पहले आटा गूंथ लें। नमक, चीनी, यिस्ट और तेल नमक नरम आटा तैयार करें। 2 घंटे गर्म जगह पर फर्मेंटिंग हो रही है। स्टफिंग के लिए सारे अकेले मेवे और मिक्सी में बिना पानी डाले पीस लें। फर्मेंट एसोसिएट्स से मोटिवेशनल सामान बेलें, स्टफिंग फिल और गुजिया जैसा बंद कर दिया गया। 5-10 मिनट ढपकर मिनट। स्टीमर की प्लेट ग्रीस द्वारा सिद्दू स्थान, ऊपर छोटा घी फर्नीचर। 15 मिनट पर स्टाप में प्रवेश शुरू। बचे हुए अखरोट, खसखस, लहसुन, अदरक, हरी मिर्च, जीरा, नमक, प्याज, पुदीना, काला नमक, 3 बड़े टुकड़े दही और लेमिनेटेड चिप्स लें। सिद्दू तैयार होते ही गर्म-गर्मी में घी बनाने वाले कारीगरों के साथ सर्व करें। सुबह का नाश्ता या चाय के साथ भी सिद्धू पूरे परिवार को खुश कर देंगे। एक बार टिकट खरीद लिया तो फिर बार-बार बनाने का मन हो गया। (टैग्सटूट्रांसलेट)सिद्दू रेसिपी(टी)हिमाचल स्पेशल डिश(टी)स्टीम्ड सिद्दू(टी)पारंपरिक हिमाचल नाश्ता(टी)घर पर आसान सिद्दू रेसिपी(टी)सिद्दू
नीमच में कांग्रेस का भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन:महंगाई, जनविरोधी नीतियों पर राज्यपाल से की कार्रवाई की मांग

नीमच जिले के मनासा में बुधवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों, बढ़ती महंगाई और स्थानीय प्रशासन की अनदेखी के खिलाफ विशाल धरना प्रदर्शन किया। जनपद पंचायत कार्यालय के बाहर आयोजित इस प्रदर्शन के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना सभा को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने कहा कि वर्तमान समय में किसान, मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवार परेशान हैं। उन्होंने खिमला स्थित ग्रीनको प्लांट की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए वहां हुई संदिग्ध घटनाओं की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की। महंगाई और बिजली बिलों को लेकर नाराजगी बाहेती ने बिजली बिलों में वृद्धि, रसोई गैस की कमी और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों को आम लोगों के लिए बड़ी समस्या बताया। उन्होंने स्थानीय प्रशासन पर अवैध कॉलोनियों को संरक्षण देने और विकास शुल्क में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए। साथ ही, ओलावृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा देने और सहकारी सोसायटियों में ऋण जमा करने की समय सीमा बढ़ाने की मांग भी की गई। अन्य नेताओं ने भी उठाए मुद्दे प्रदर्शन के दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल चौरसिया ने ऊर्जा संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। प्रदेश सचिव सोमिल नाहटा ने प्रदेश में बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता जताई। वहीं, वरिष्ठ नेता मंगेश संघई और ब्लॉक अध्यक्ष श्याम सुरेंद्र सोनी ने किसानों की समस्याओं और नगर की मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रशासन की आलोचना की। रैली निकालकर सौंपा ज्ञापन सभा के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आक्रोश रैली निकाली। नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ता एसडीएम कार्यालय पहुंचे और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, किसान और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
चीन- खाली फ्लैट खरीद परिजनों की अस्थियां रखने पर बैन:कब्रिस्तान महंगा होने पर लोग प्रोपर्टी खरीद रहे थे, उसमें अस्थियां रखते थे

चीन की सरकार एक नया कानून लाने जा रही है, जिसके तहत लोग अपने परिजनों की राख को खाली अपार्टमेंट में नहीं रख पाएंगे। इसे ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ कानून कहा जा रहा है। इसके साथ ही सार्वजनिक कब्रिस्तानों के अलावा कहीं और शव दफनाने या मकबरे बनाने पर भी रोक होगी बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में कब्रिस्तान लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे में ‘गुहुई फांग’ यानी ऐसे फ्लैट्स का चलन बढ़ गया है, जहां लोग अपने परिजनों की अस्थियां रखते हैं। तेजी से शहरीकरण और बुजुर्ग आबादी बढ़ने के कारण शहरों में कब्रिस्तान की जमीन कम होती जा रही है और उनकी कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। प्रॉपर्टी खरीदना, कब्रिस्तान खरीदने से सस्ता चीन में हाल के वर्षों में घरों की कीमतें काफी गिरी हैं और 2021 के मुकाबले 2025 तक करीब 40% तक कम हो गई हैं। लोग इसक फायदा उठा रहे हैं। खाली फ्लैट खरीदकर उसमें राख रखना, महंगे कब्रिस्तान या अंतिम संस्कार के खर्च से सस्ता पड़ता है। इन खाली फ्लैट्स को लोग एक तरह से पूजा स्थल में बदल देते हैं, जहां मोमबत्तियां, लाल रोशनी और अलग-अलग पीढ़ियों की अस्थियां सजा कर रखी जाती हैं। चीनी मीडिया के मुताबिक, ऐसे फ्लैट्स की पहचान अक्सर बंद परदों या पूरी तरह सील की गई खिड़कियों से होती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतिम संस्कार का खर्च जापान के बाद चीन में दुनिया में दूसरा सबसे ज्यादा है। चीन में कब्रिस्तान की जगह आमतौर पर सिर्फ 20 साल की लीज पर मिलती है, जबकि घरों के लिए 70 साल के इस्तेमाल का अधिकार मिलता है। इसी वजह से कई लोग अब कब्रिस्तान की बजाय फ्लैट को ज्यादा बेहतर विकल्प मानने लगे हैं। हालांकि अंतिम संस्कार के लिए फ्लैट खरीदने से शहरों में हाउसिंग व्यवस्था गड़बड़ा रही है। इससे बाजार का संतुलन बिगड़ने का खतरा भी है। सरकार नहीं चाहती कि घरों का इस तरह से इस्तेमाल किया जाए। शव दफनाने की कीमत- 20 से 40 लाख रुपए नया कानून 31 मार्च से लागू हो गया है। यह 6 अप्रैल को होने वाले छिंगमिंग त्योहार से ठीक पहले है। इस त्योहार में लोग अपने पूर्वजों की कब्रों की सफाई करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। राजधानी बीजिंग में एक सामान्य कब्र की कीमत करीब 1.5 लाख युआन (लगभग 20 लाख रुपए) से शुरू होकर 3 लाख युआन (करीब 40 लाख रुपए) तक जाती है। यह बीजिंग के हिसाब से भी काफी महंगा है। वहीं, बीजिंग के चांगपिंग तियानशो कब्रिस्तान में दफनाने की कीमत करीब 10,000 युआन से 2 लाख युआन (1.3 लाख से 26 लाख रुपए) तक है। इसे दफन का इको फ्रेंडली विकल्प माना जाता है। इसमें जमीन कम घेरने वाले तरीके अपनाए जाते हैं। जैसे बिना बड़े कब्रिस्तान प्लॉट के दफन, पेड़ों के पास या सामूहिक जगहों पर दफनाना। इसमें महंगे पत्थर, बड़ी जगह या स्थायी स्मारक नहीं होते, इसलिए यह सस्ता पड़ता है। सोशल मीडिया पर नए कानून को लेकर सवाल सोशल मीडिया पर लोग इस कानून को लेकर सवाल उठा रहे हैं। चीन में सोशल मीडिया वीबो पर इससे जुड़ा हैशटैग 70 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। एक व्यक्ति ने वीबो पर लिखा, “अगर कब्रिस्तान सस्ते होते, तो कोई ऐसा क्यों करता?” एक यूजर ने लिखा, “कौन जाकर चेक करेगा? क्या हर अस्थि कलश में GPS लगाया जाएगा?” वहीं दूसरे ने कहा, “छूट मिलने के बाद भी कब्रिस्तान की जगह बहुत महंगी है।” एक अन्य यूजर ने कहा, “इन नियमों को लागू करने वाले कैसे पता लगाएंगे कि फ्लैट में सिर्फ राख रखी गई है? और ऐसे मामलों से कैसे निपटेंगे?” चीन में तेजी से बढ़ रही बुजुर्ग आबादी चीन में तेजी से बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है, जिसका सीधा असर मौतों की संख्या पर दिख रहा है। 2025 में करीब 1.13 करोड़ लोगों की मौत हुई, जबकि 2015 में यह संख्या करीब 98 लाख थी। यानी 10 साल में मौतों का आंकड़ा काफी बढ़ गया है। वहीं दूसरी तरफ जन्म दर लगातार गिर रही है। 2025 में सिर्फ करीब 79 लाख बच्चों का जन्म हुआ। इसका मतलब है कि देश में मरने वालों की संख्या, जन्म लेने वालों से काफी ज्यादा हो गई है। इससे आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है। इस स्थिति का एक बड़ा असर जमीन पर भी पड़ रहा है। शहरों में कब्रिस्तान के लिए जगह कम होती जा रही है, खासकर शंघाई जैसे बड़े और घनी आबादी वाले शहरों में। जमीन महंगी भी है और सीमित भी। इसी वजह से सरकार और स्थानीय प्रशासन “इकोलॉजिकल बुरियल” यानी पर्यावरण के अनुकूल अंतिम संस्कार के तरीकों को बढ़ावा दे रहे हैं। इसमें ऐसे तरीके शामिल हैं जिनमें कम जमीन लगती है या जमीन की जरूरत ही नहीं पड़ती। जैसे- शंघाई में समुद्र में अस्थि विसर्जन तेजी से बढ़ रहा है। 2025 में पहली बार ऐसे मामलों की संख्या 10 हजार से ज्यादा पहुंच गई। यह दिखाता है कि लोग अब पारंपरिक कब्र की बजाय सस्ते और कम जगह वाले विकल्प अपना रहे हैं।
मोनालिसा के को-एक्टर बोले- डायरेक्टर सनोज मिश्रा को फंसाया गया:कहा- एक्ट्रेस छेड़छाड़ के आरोप झूठे, सेट पर मस्ती करने वाली मोनालिसा पीड़ित कैसे

एक्ट्रेस मोनालिसा भोंसले और फरमान खान की शादी का मामला अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ आपसी बयानों में उलझ गया है। मोनालिसा ने जहां अपने डायरेक्टर सनोज मिश्रा पर छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं उनके को-एक्टर मुकेश पाल ने एक्ट्रेस के दावों को झूठा बताया है। मुकेश का कहना है कि मोनालिसा ने लव जिहाद के एंगल को छुपाने के लिए डायरेक्टर को बदनाम करने की साजिश रची है। मुकेश फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ में मोनालिसा के साथ काम कर चुके हैं। ‘सेट पर मस्ती करने वाली एक्ट्रेस पीड़ित कैसे?’ मुकेश ने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में अपना गुस्सा जाहिर किया। मुकेश ने कहा, “अगर मोनालिसा के साथ कुछ गलत हो रहा था, तो वह सेट पर इतनी खुश कैसे थीं? उन्होंने मेरे साथ रील्स बनाईं, टीम के साथ डांस किया और जमकर पार्टियां कीं। अगर कोई महिला छेड़छाड़ का शिकार होती है, तो उसके चेहरे पर वो दर्द दिखता है, लेकिन मोनालिसा तो पूरी मौज-मस्ती में थीं।” मुकेश ने डायरेक्टर सनोज मिश्रा को पूरी तरह निर्दोष बताया है। फरमान पर लगाया ‘जिहादी’ होने का आरोप मुकेश ने मोनालिसा के पति फरमान खान पर भी तीखे हमले किए। उन्होंने दावा किया कि फरमान पहले एक ‘बाबा’ का भेष बनाकर हिंदू बनकर लोगों से मिलता था। मुकेश ने कहा, “फरमान एक जिहादी है। मोनालिसा उसके साथ मिलकर हम सबको बदनाम कर रही है। जिस इंसान के पास कुछ नहीं था, उसके पास केरल में इतनी बड़ी शादी और पार्टियों के लिए फंडिंग कहां से आ रही है? इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।” मुकेश ने अंदेशा जताया कि इस शादी के पीछे कोई बड़ी साजिश और विदेशी पैसा हो सकता है। उम्र और दस्तावेजों पर उठाए सवाल एक्टर मुकेश ने मोनालिसा की उम्र को लेकर भी चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “साल 2025 में मोनालिसा 16 साल की थीं, फिर एक ही साल में वह 18 की कैसे हो गईं? जब किसी के पीछे कोई ताकत होती है, तो इंसान फर्जी डॉक्यूमेंट्स भी बनवा लेता है।” विवाद की वजह से बंद हुई फिल्म इस पूरे विवाद का सबसे बुरा असर उनकी फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ पर पड़ा है। डायरेक्टर और लीड एक्ट्रेस के बीच चल रही इस कानूनी जंग की वजह से फिल्म का काम पूरी तरह रुक गया है और इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। काम बंद होने से काफी नुकसान की बात कही जा रही है। केरल से शुरू हुआ विवाद यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मोनालिसा ने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर केरल में फरमान खान से शादी कर ली। इसके बाद डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने इसे लव जिहाद बताते हुए शिकायत दर्ज कराई। जवाब में मोनालिसा ने वीडियो जारी कर रोते हुए सनोज मिश्रा पर छेड़छाड़ के आरोप लगाए और सुरक्षा की गुहार लगाई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
नरसिंहपुर में बाइक चोरी की FIR नहीं की:एसपी के पास पहुंचा पीड़ित, बोला- किस्तों पर खरीदी थी; पुलिस पर लापरवाही का आरोप

नरसिंहपुर जिले के बिल्थारी निवासी फूलसिंह जाटव ने मंगलवार को एसपी को बाइक चोरी का आवेदन दिया है। पीड़ित का आरोप है कि उसकी बाइक चोरी होने के बाद भी स्थानीय पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है। घटना 29 मार्च 2026 की है, जब वह खेत पर काम करने गया था। खेत के किनारे लॉक खड़ी बाइक हुई चोरी 42 वर्षीय आवेदक फूलसिंह जाटव ने बताया कि वह अपनी नीले और सिलेटी रंग की टीवीएस स्टार सिटी बाइक (MP49ZD2690) को दूध डेयरी के पास खेत किनारे लॉक करके गेहूं की फसल काटने गया था। शाम करीब 6:30 बजे वापस लौटने पर वाहन मौके से गायब मिला। काफी तलाश करने के बाद भी बाइक का कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस पर रिपोर्ट दर्ज न करने का आरोप पीड़ित ने बताया कि घटना वाले दिन ही उसने तेंदूखेड़ा थाने में लिखित आवेदन देकर चोरी की सूचना दी और एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया। फूलसिंह का आरोप है कि पुलिस द्वारा अब तक अज्ञात चोर के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया है और न ही वाहन की तलाश के लिए कोई ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। किस्तों पर खरीदी थी गाड़ी, अब आर्थिक संकट फूलसिंह ने बताया कि वह मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता है। उसने यह मोटरसाइकिल बड़ी मुश्किल से किस्तों पर खरीदी थी। वाहन चोरी होने से उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। पीड़ित ने एसपी से हस्तक्षेप कर तत्काल एफआईआर दर्ज कराने और चोरी गई बाइक की शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित करने की मांग की है।







