लाहौर कलंदर्स ने कप्तान शाहीन पर फाइन लगाया:होटल के कमरे में चार लोगों को ले जाने की कोशिश, सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप

पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) 2026 में लाहौर कलंदर्स के कप्तान शाहीन शाह अफरीदी पर टीम ने सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले में फाइन लगाया है। फ्रेंचाइजी ने अफरीदी पर 10 लाख पाकिस्तानी रुपए (लगभग 3600 डॉलर) का फाइन लगाया। फ्रेंचाइजी ने कहा, यह कदम टीम में अनुशासन और जवाबदेही बनाए रखने के लिए उठाया गया है। शाहीन ने बिना अनुमती चार लोगों को टीम होटल के कमरे में ले जाने की कोशिश की थी। पाकिस्तान के पंजाब पुलिस के मुताबिक, अफरीदी और उनके साथी खिलाड़ी सिकंदर रजा ने बिना अनुमति चार लोगों को होटल के कमरे में ले जाने की कोशिश की। रिपोर्ट में कहा गया कि खिलाड़ियों को पहले ही विजिटर्स लाने की इजाजत नहीं दी गई थी, इसके बावजूद वे लोगों को कमरे तक लेकर गए। सिकंदर रजा पर कोई कार्रवाई नहीं इस मामले में सिकंदर रजा पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। रजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस घटना की जिम्मेदारी खुद लेते हुए अफरीदी को बचाने की कोशिश की। फ्रेंचाइजी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी सुरक्षा नियमों का सम्मान करती है और भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। मेहमानों ने कमरे में लगभग तीन घंटे बिताए पंजाब पुलिस के मुताबिक, इन मेहमानों ने खिलाड़ियों के कमरे में लगभग तीन घंटे बिताए, जबकि सुरक्षा नियमों के तहत किसी भी बाहरी व्यक्ति का इस तरह प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। हालांकि, सिकंदर रजा का दावा था कि मेहमान केवल 40 मिनट के लिए रुके थे। पुलिस द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि दोनों खिलाड़ियों ने सुरक्षा अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी की, जो खिलाड़ियों और टीम की सुरक्षा के लिए बनाए गए थे। ———————- PSL से जुड़ी यह खबरें भी पढ़ें… PCB ने गेंदबाज नसीम शाह पर जुर्माना लगाया:मुख्यमंत्री मरियम नवाज पर कमेंट किया था पाकिस्तान के तेज गेंदबाज नसीम शाह पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने 2 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई मरियम नवाज की आलोचना वाले ट्वीट के बाद हुई, जिसे नसीम के अकाउंट से पोस्ट होने के कुछ देर बाद डिलीट कर दिया गया। PCB ने इसे सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का उल्लंघन माना। पूरी खबर… पाकिस्तान लीग में बॉल टैंपरिंग विवाद:फखर जमान पर 1-2 मैच का बैन लग सकता है पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में बॉल टैंपरिंग मामले में फखर जमान पर 1-2 मैच का बैन लग सकता है। रविवार को लाहौर कलंदर्स और कराची किंग्स के मैच में यह विवाद सामने आया। लाहौर कलंदर्स पर बॉल टैंपरिंग का आरोप लगा और टीम पर 5 रन की पेनल्टी लगी। फखर जमान को अब मैच रेफरी रोशन महानामा के सामने सुनवाई में पेश होना होगा, जहां आगे की कार्रवाई तय होगी। पूरी खबर…
कॉमेडियन सुनील पाल की इवेंट में बेइज्जती:गुलदस्ता देने के लिए मंच पर बुलाया, फिर अपमान किया और हाथ से माइक छीना, वीडियो वायरल

मशहूर कॉमेडियन सुनील पाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें उनके साथ बुरा व्यवहार किया गया। वीडियो एक इवेंट का है, जहां उन्हें गुलदस्ता देने के लिए मंच पर बुलाया गया और बाद में बेइज्जती कर उतरने को कहा गया। वायरल वीडियो मुंबई में हुए एक मुशायरे का है, जहां कुछ कवि मंच पर बैठे हैं। एक शख्स सुनील पाल को गुलदस्ता देने के लिए बुलाता है। वह झुककर आभार जताते हैं और माइक पर धन्यवाद कहना चाहते हैं, लेकिन पास खड़ा शख्स उन्हें बार-बार उतरने को कहता है। इस दौरान सुनील पाल संयम रखते हुए बार-बार झुककर आभार जताते हैं, लेकिन शख्स उन पर उतरने का दबाव बनाता रहता है। जैसे ही वह माइक पकड़ते हैं, शख्स उनका हाथ हटाकर कहता है, एक सेकेंड, आप स्टेज से उतरिए। इसके आगे कुछ नहीं, जितना किया है उतना है, आप बैठ जाइए जाकर। इस पर सुनील कहते हैं, ‘शुक्रिया तो कहने दें’। शख्स अपमानित लहजे में कहता है, ‘आप बैठिए जाकर’, और उनका माइक छीनकर जबरदस्ती उतार देता है। वीडियो में सुनील पाल बार-बार शुक्रिया कहने की विनती करते हैं, लेकिन शख्स उन्हें उतरने को कहता रहता है। इस पर कॉमेडियन बिना माइक मंच से शुक्रिया कहते हैं और शख्स से कहते हैं, ‘आपका दिल कितना छोटा है।’ इसके बाद वह मुस्कुराते हुए ऑडिटोरियम से बाहर चले जाते हैं। इस दौरान ऑडियंस भी शख्स से सुनील पाल को बोलने देने की अपील करती रही, लेकिन बात नहीं मानी गई। यह वीडियो 17 जनवरी 2026 का है, जब वह इस्कॉन जुहू के मुशायरे में शामिल थे।
PCB ने गेंदबाज नसीम शाह पर जुर्माना लगाया:मुख्यमंत्री मरियम नवाज पर कमेंट किया था; बोर्ड ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज नसीम शाह पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने 2 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई मरियम नवाज की आलोचना वाले ट्वीट के बाद हुई, जिसे नसीम के अकाउंट से पोस्ट होने के कुछ देर बाद डिलीट कर दिया गया। PCB ने इसे सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का उल्लंघन माना। क्या था पूरा मामला विवाद की शुरुआत PSL के पहले मैच के बाद हुई। PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी ने पहले घोषणा की थी कि ईंधन बचाने और पश्चिमी एशिया संकट के कारण टूर्नामेंट बिना दर्शकों के होगा। लेकिन मैच के दौरान पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज गद्दाफी स्टेडियम पहुंचीं और खिलाड़ियों से मिलीं। नसीम शाह के अकाउंट से PCB के एक पोस्ट को कोट-ट्वीट करते हुए लिखा गया ‘उन्हें लॉर्ड्स की रानी की तरह ट्रीट क्यों किया जा रहा है?’ नसीम ने मीडिया टीम की गलती बताई विवादित ट्वीट के कुछ मिनट बाद ही उसे डिलीट कर दिया गया। इसके बाद नसीम ने एक और पोस्ट कर सफाई दी कि उनका अकाउंट हैक हो गया था। सोमवार को उन्होंने एक नया बयान जारी कर कहा, ‘मेरे अकाउंट से पिछला पोस्ट मेरी मैनेजमेंट टीम ने किया था, वह मेरे विचार नहीं हैं। मैं अपने प्लेटफॉर्म की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं और सोशल मीडिया मैनेजर को हटा दिया है। मैं इस गलती के लिए माफी मांगता हूं।’ PCB ने मैनेजर को किया ब्लैकलिस्ट PCB की तीन सदस्यीय अनुशासन समिति ने इस मामले में सुनवाई की। नसीम ने बिना शर्त माफी मांगी और अपने सोशल मीडिया मैनेजर को बर्खास्त कर दिया। PCB ने न केवल नसीम पर भारी जुर्माना लगाया, बल्कि उनके मैनेजर को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया है। अब वह मैनेजर PCB के दायरे में आने वाले किसी भी अन्य खिलाड़ी के साथ काम नहीं कर पाएगा। पहले भी एक्शन हो चुका है PCB इससे पहले भी खिलाड़ियों के राजनीतिक बयान पर सख्त कार्रवाई कर चुका है। पिछले साल आमेर जमाल पर भी एक नारे को लेकर 10 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया था। लेकिन नसीम शाह पर लगा जुर्माना उससे करीब 16 गुना ज्यादा है। PSL में सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल नसीम शाह इस सीजन PSL ऑक्शन में सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक रहे। उन्हें रावलपिंडी टीम ने करीब 8.65 करोड़ पाकिस्तानी रुपए में खरीदा था। ———————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… वैभव की राजस्थान के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी लगाकर टीम को जीत दिलाई। गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में राजस्थान ने चेन्नई सुपर किंग्स को 8 विकेट से हराया। पूरी खबर…
PCB ने गेंदबाज नसीम शाह पर जुर्माना लगाया:मुख्यमंत्री मरियम नवाज पर कमेंट किया था; बोर्ड ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज नसीम शाह पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने 2 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई मरियम नवाज की आलोचना वाले ट्वीट के बाद हुई, जिसे नसीम के अकाउंट से पोस्ट होने के कुछ देर बाद डिलीट कर दिया गया। PCB ने इसे सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का उल्लंघन माना। क्या था पूरा मामला विवाद की शुरुआत PSL के पहले मैच के बाद हुई। PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी ने पहले घोषणा की थी कि ईंधन बचाने और पश्चिमी एशिया संकट के कारण टूर्नामेंट बिना दर्शकों के होगा। लेकिन मैच के दौरान पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज गद्दाफी स्टेडियम पहुंचीं और खिलाड़ियों से मिलीं। नसीम शाह के अकाउंट से PCB के एक पोस्ट को कोट-ट्वीट करते हुए लिखा गया ‘उन्हें लॉर्ड्स की रानी की तरह ट्रीट क्यों किया जा रहा है?’ नसीम ने मीडिया टीम की गलती बताई विवादित ट्वीट के कुछ मिनट बाद ही उसे डिलीट कर दिया गया। इसके बाद नसीम ने एक और पोस्ट कर सफाई दी कि उनका अकाउंट हैक हो गया था। सोमवार को उन्होंने एक नया बयान जारी कर कहा, ‘मेरे अकाउंट से पिछला पोस्ट मेरी मैनेजमेंट टीम ने किया था, वह मेरे विचार नहीं हैं। मैं अपने प्लेटफॉर्म की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं और सोशल मीडिया मैनेजर को हटा दिया है। मैं इस गलती के लिए माफी मांगता हूं।’ PCB ने मैनेजर को किया ब्लैकलिस्ट PCB की तीन सदस्यीय अनुशासन समिति ने इस मामले में सुनवाई की। नसीम ने बिना शर्त माफी मांगी और अपने सोशल मीडिया मैनेजर को बर्खास्त कर दिया। PCB ने न केवल नसीम पर भारी जुर्माना लगाया, बल्कि उनके मैनेजर को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया है। अब वह मैनेजर PCB के दायरे में आने वाले किसी भी अन्य खिलाड़ी के साथ काम नहीं कर पाएगा। पहले भी एक्शन हो चुका है PCB इससे पहले भी खिलाड़ियों के राजनीतिक बयान पर सख्त कार्रवाई कर चुका है। पिछले साल आमेर जमाल पर भी एक नारे को लेकर 10 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया था। लेकिन नसीम शाह पर लगा जुर्माना उससे करीब 16 गुना ज्यादा है। PSL में सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल नसीम शाह इस सीजन PSL ऑक्शन में सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक रहे। उन्हें रावलपिंडी टीम ने करीब 8.65 करोड़ पाकिस्तानी रुपए में खरीदा था। ———————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… वैभव की राजस्थान के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी लगाकर टीम को जीत दिलाई। गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में राजस्थान ने चेन्नई सुपर किंग्स को 8 विकेट से हराया। पूरी खबर…
CAG रिपोर्ट: कई जवानों को समय पर वेतन-भत्ते नहीं मिले:मिलिट्री अस्पतालों में कमियां मिली, सेना से जुड़े काम के रिकॉर्ड डिजिटल करने की सिफारिश

CAG यानी सरकारी खर्च और कामकाज का ऑडिट करने वाली संस्था की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में कई मिलिट्री अस्पतालों के रखरखाव में कमी की ओर भी इशारा किया गया है। यह भी बताया गया है कि काफी संख्या में सेना के जवानों को उनके वेतन-भत्ते समय पर और सही तरीके से नहीं मिले। रिपोर्ट के मुताबिक सेना के निर्माण कार्यों से जुड़े साइट रिकॉर्ड्स ठीक से नहीं रखे गए। इससे काम की क्वालिटी और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हुआ। ऑडिट ने सिफारिश की है कि रक्षा मंत्रालय साइट रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज करे। ये वही कागज होते हैं जिनमें काम की प्रगति, मटेरियल और टेस्ट रिपोर्ट जैसी जानकारी रिकॉर्ड होती है। रिपोर्ट में तीन प्रमुख हिस्सों की ऑडिट की गई… कई जवानों को समय पर भुगतान नहीं मिला रिपोर्ट के मुताबिक प्रोविजनल फाइनल सेटलमेंट ऑफ अकाउंट्स (PFSA) की समीक्षा तय समय पर नहीं हुई। इसके कारण रिटायरमेंट के समय अधिकारियों, जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (JCOs) और दूसरे रैंक (ORs) के कर्मीयों से एक साथ बड़ी राशि की वसूली करनी पड़ी। आईटी सिस्टम में जरूरी नियम शामिल नहीं होने से कई सेना के जवानों को उनका भुगतान समय पर और सही तरीके से नहीं मिला। PTO में देरी, सिस्टम आपस में ठीक से नहीं जुड़े रिपोर्ट में PTO (प्रिविलेज टिकट ऑर्डर) जारी करने में देरी की बात कही गई है। ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) में डेटा सही से नहीं मिला, इसलिए कई आवेदन रिजेक्ट हो गए। ऑडिट ने कहा है कि अलग-अलग सिस्टम के बीच तालमेल बेहतर किया जाए और रिजेक्ट मामलों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया जाए। मिलिट्री अस्पतालों की इमारतें पुरानी, कई जगह जरूरी सुविधाएं नहीं डिफेंस मंत्रालय के तहत आने वाले मिलिट्री अस्पतालों में कई दिक्कतें मिलीं। कई अस्पतालों की इमारतें पुरानी हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच नहीं हुई। एक मामले में जून 2022 में लैंसडाउन के एक मिलिट्री अस्पताल का हिस्सा गिर गया था। कई जगह HVAC (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) और फायरफाइटिंग सिस्टम भी पूरे नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल स्टोर्स डिपो (AFMSD) मिलिट्री अस्पतालों की जरूरत की दवाएं पूरी नहीं दे पाए। कॉमन ड्रग लिस्ट की दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थीं। दो डिपो में दवाओं को समय पर बदला नहीं गया, जिससे ₹13.52 करोड़ की दवाएं फंसी रहीं। बिना लाइसेंस X-ray मशीनें चल रही थी ऑडिट में पाया गया कि कई जगह बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन नहीं हुआ। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े दस्तावेज भी नहीं रखे गए। कुछ अस्पतालों में बिना लाइसेंस के X-ray मशीनें चलाई जा रही थी। सात कमांड्स की समीक्षा में वेस्टर्न कमांड में सबसे ज्यादा नियमों का उल्लंघन मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय ने कुछ मामलों में सुधार के कदम उठाने शुरू किए हैं, लेकिन कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। ————
सुकन्या में 8.2% और PPF पर 7.1% ब्याज मिलता रहेगा:स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों में बदलाव नहीं, लगातार 9वीं तिमाही ब्याज दर स्थिर

सरकार ने अप्रैल-जून (Q1FY27) तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स जैसे- पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), पोस्ट ऑफिस FD, सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) के ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। यह लगातार 9वीं तिमाही है, जब ब्याज दरें अपरिवर्तित रहेंगी। सरकार ने आखिरी बार दिसंबर 2023 में इंटरेस्ट रेट्स में बढ़ोतरी की थी। पब्लिक प्रोविडेंट फंड पर 7.1% ब्याज दर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर 7.1% और सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2% ब्याज मिलता रहेगा। स्मॉल सेविंग्स स्कीमों पर ब्याज दरें 4% से 8.2% के बीच हैं। सरकार छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों पर फैसला लेने से पहले देश में कैश और महंगाई की स्थिति पर भी नजर रखती है। इनकी समीक्षा हर तीन महीने पर होती है। ब्याज दरों का हर तिमाही में रिव्यू होता है स्मॉल सेविंग्स स्कीम की ब्याज दरों का हर तिमाही में रिव्यू होता है। इनकी ब्याज दरें तय करने का फॉर्मूला श्यामला गोपीनाथ समिति ने दिया था। समिति ने सुझाव दिया था कि इन स्कीम की ब्याज दरें समान मैच्योरिटी वाले सरकारी बॉन्ड के यील्ड से 0.25-1.00% ज्यादा होनी चाहिए। हाउसहोल्ड सेविंग का मेजर सोर्स हैं ये स्कीम स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स भारत में हाउसहोल्ड सेविंग का मेजर सोर्स हैं। इन स्कीम्स में डिपॉजिटर्स को उनके पैसे पर तय ब्याज मिलता है। सभी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स से हुए कलेक्शन को नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड (NSSF) में जमा किया जाता है। क्लासिफिकेशन स्मॉल सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट को तीन भागों में बांटा जा सकता है:
हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली सेब इंडस्ट्री पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने से मंडरा रहे संकट का मुद्दा आज विधानसभा में उठेगा। ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी में की गई कटौती का मामला सदन में उठाने जा रहे हैं। यह मामला प्रदेश की 5500 करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी और लगभग 3 लाख बागवान परिवारों की आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। दरअसल, केंद्र सरकार ने अमेरिका और न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन (EU) के लिए 20 प्रतिशत कर दी है। इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से अब विदेशी सेब सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में उपलब्ध होगा। इससे हिमाचल के साथ साथ जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उद्योग पर भी संकट खड़ा हो गया है। हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह होगा प्रभावित कुलदीप राठौर ने बताया कि वाशिंगटन एपल के भारतीय बाजार में आने से हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह प्रभावित होगा। इससे न केवल प्रीमियम सेब के दाम गिरेंगे, बल्कि कोल्ड स्टोर में रखे सेब पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। अभी अमेरिका-न्यूजीलैंड और EU के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई गई गई है। अब इनकी आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने का दबाव डालेंगे। मोदी ने किया था इम्पोर्ट ड्यूटी 100% का वादा राठौर ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 फीसदी करने का भरोसा दिया था। हकीकत में इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बजाय कम की जा रही है। इससे सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि सदन में यह मामला उठाकर केंद्र सरकार से इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के फैसले का विरोध जताएंगे और यह फैसला वापस लेने की मांग की जाएगी। हिमाचल के बागवान सचिवालय का घेराव कर चुके बता दें कि हिमाचल के बागवान इस फैसले के खिलाफ दो महीने पहले सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। बागवानों का आरोप है कि केंद्र सरकार आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग देशों के लिए इसे कम कर रही है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। इस वजह से बागवान ज्यादा चिंतित बागवानों की चिंता की एक बड़ी वजह उत्पादन लागत और उत्पादकता में अंतर भी है। हिमाचल में प्रति हेक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होता है, जबकि अमेरिका, न्यूजीलैंड और चीन जैसे देशों में यह 60 से 70 मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है। वहीं, हिमाचल में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रति किलो सेब उत्पादन की लागत करीब 27 रुपए आती है। ऐसे में बागवानों को लाभ तभी मिल पाता है, जब उनका सेब कम से कम 50 से 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिके। अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का बनाएंगे दबाव विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और EU को दी गई रियायतों के बाद अब अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का दबाव बना सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में विदेशी सेब की हिस्सेदारी बढ़ेगी और स्थानीय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाएगी।
लखनऊ में एअर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग:36 हजार फीट ऊंचाई पर पायलट को धुआं महसूस हुआ; पैसेंजरों ने मास्क लगाए

लखनऊ में एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। सोमवार शाम फ्लाइट पश्चिम बंगाल के बागडोगरा से दिल्ली जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट यूपी के अंबेडकरनगर के ऊपर थी, तभी पायलट के केबिन में धुआं महसूस हुआ। उस समय विमान 36 हजार फीट की ऊंचाई पर था। पायलट ने धुआं महसूस होते ही लखनऊ एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मेडे कॉल किया। मेडे कॉल के बाद यात्रियों को ऑक्सीजन मास्क उपलब्ध करा दिए गए। लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति लेकर विमान को शाम 5:17 बजे सुरक्षित लैंड कराया। तब से फ्लाइट लखनऊ के टर्मिनल-3 पर खड़ी है। फ्लाइट में 148 यात्री और क्रू मेंबर सवार थे। सभी सुरक्षित हैं। कई यात्रियों को दूसरी फ्लाइट्स से दिल्ली भेज दिया गया, जबकि कुछ को होटल में ठहराया गया है। सिक्योरिटी और टेक्निकल टीमें फ्लाइट में जांच कर रही हैं। शुरुआती जांच में धुएं या आग का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। ‘मेडे कॉल’ के साथ ही ऑक्सीजन मास्क खुल गए सूत्रों के अनुसार, पायलटों को केबिन के एवियोनिक पैनलों (कॉकपिट के इलेक्ट्रिक पैनल) से धुआं निकलने की आशंका हुई। पायलट ने ‘मेडे कॉल’ किया। इसके साथ ही फ्लाइट में लगे ऑक्सीजन मास्क अपने आप खुल गए। केबिन क्रू ने यात्रियों को मास्क इस्तेमाल करने का तरीका बताया, जिसके बाद यात्रियों ने मास्क लगा लिए। यात्री कर रहे कंपनी से शिकायत फ्लाइट में सवार कई यात्री सोशल मीडिया पर कंपनी से शिकायत कर रहे हैं। हेमरॉन माइकल नाम के एक यात्री ने लिखा- मैं बागडोगरा से दिल्ली जा रही फ्लाइट IX-1523 में यात्रा कर रहा था। तकनीकी समस्या के कारण विमान को लखनऊ में उतार दिया गया। पिछले ढाई घंटे से कोई संशोधित टिकट नहीं दिया गया है। मुझे सुबह 6:30 बजे तक दिल्ली पहुंचना था, लेकिन अब 7:23 बज चुके हैं। अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।” मेडे कॉल क्या होता है, जानिए MAYDAY शब्द फ्रेंच शब्द ‘m’aider’ से लिया गया है। इसका मतलब है ‘help me’ यानी ‘मुझे बचाओ’। MAYDAY कॉल आमतौर पर रेडियो के माध्यम से ATC या आसपास के अन्य विमानों को भेजा जाता है। इस सिग्नल का उपयोग तत्काल सहायता प्राप्त करने के लिए किया जाता है, ताकि इमरजेंसी से निपटा जा सके और समय पर मदद मिल सके। अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए…
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: तारीखें, सीटें और प्रत्येक पार्टी के लिए क्या दांव पर है | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 08:16 IST पश्चिम बंगाल 2026 चुनाव एक उच्च जोखिम वाली प्रतियोगिता है जो ममता बनर्जी के प्रभुत्व का परीक्षण करेगी और यह निर्धारित करेगी कि क्या भाजपा अंततः गति को सत्ता में बदल सकती है ‘फाइटर दीदी’ थीम पर आधारित टीएमसी अभियान, ममता बनर्जी को बंगाल की पहचान के रक्षक के रूप में प्रस्तुत करता है। (पीटीआई) पश्चिम बंगाल में 294 सदस्यीय नई विधानसभा का चुनाव करने के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा, जिसकी गिनती 4 मई, 2026 को होगी। लेकिन यह एक नियमित राज्य चुनाव से बहुत दूर है। यह एक उच्च जोखिम वाली प्रतियोगिता है जो बंगाल की राजनीतिक दिशा को फिर से परिभाषित कर सकती है, ममता बनर्जी के प्रभुत्व का परीक्षण कर सकती है, और यह निर्धारित कर सकती है कि क्या भाजपा अंततः गति को सत्ता में बदल सकती है। सरकार गठन के अलावा, 2026 के पश्चिम बंगाल चुनाव भारत की चुनावी प्रक्रियाओं के लिए एक तनाव परीक्षण भी हैं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) – जिसमें लाखों विलोपन शामिल हैं – ने चुनाव आयोग पर ध्यान केंद्रित कर दिया है, जिससे यह चुनाव इस बात पर केंद्रित हो गया है कि कौन वोट देगा और कौन जीतेगा। पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पूर्ण गाइड और कार्यक्रम कुल सीटें: 294 चरण 1 मतदान: 23 अप्रैल 2026 चरण 2 मतदान: 29 अप्रैल 2026 वोटों की गिनती: 4 मई 2026 दो चरण के मतदान से प्रचार की समय-सीमा संकुचित हो जाती है, जिससे पार्टियों को सभी क्षेत्रों में लक्षित, उच्च-तीव्रता वाली रणनीतियों को तैनात करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। बंगाल में क्या दांव पर है: पार्टी-दर-पार्टी विश्लेषण टीएमसी: ममता बनर्जी की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा तृणमूल कांग्रेस के लिए, यह चुनाव सत्ता बरकरार रखने से कहीं अधिक है – यह एक कथा की रक्षा करने के बारे में है। ‘फाइटर दीदी’ थीम पर आधारित पार्टी का अभियान, ममता बनर्जी को बंगाल की पहचान के रक्षक के रूप में प्रस्तुत करता है। जैसा कि एक अभियान पंक्ति से पता चलता है, चुनावों को “बाहरी ताकतों” के खिलाफ लड़ाई के रूप में तैयार किया जा रहा है। टीएमसी की मुख्य पिच: कल्याण+शासन अभिलेख बंगाली गौरव और सांस्कृतिक पहचान मतदाताओं से ममता का व्यक्तिगत जुड़ाव यह क्यों मायने रखती है: एक जीत ने ममता की विरासत को मजबूत किया; प्रभुत्व में गिरावट असुरक्षा का संकेत देती है। बीजेपी: सत्ता के सबसे करीब पहुंच गई है भाजपा अब बंगाल में सीमांत खिलाड़ी नहीं है – यह प्रमुख चुनौती है। इसकी 2026 रणनीति का मिश्रण है: जाति और समुदाय का गणित धार्मिक लामबंदी (राम नवमी, राम राज्य कथा) बूथ स्तर पर लक्ष्यीकरण यह क्यों मायने रखती है: बंगाल में सरकार बनाने के लिए यह बीजेपी का अब तक का सबसे अच्छा मौका है। कांग्रेस: एक उच्च जोखिम वाली एकल वापसी की बोली एक बड़े बदलाव में, कांग्रेस वाम दलों के साथ अपने गठबंधन को तोड़कर अकेले चुनाव लड़ रही है। प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा, ”कई सालों तक हम गठबंधन के जरिए लड़ते रहे… अब हमारे कार्यकर्ताओं को लगता है कि पार्टी को अपने बैनर तले अपना आधार मजबूत करना चाहिए।” पार्टी को उम्मीद है: मालदा, मुर्शिदाबाद, नादिया में पुनर्निर्माण द्विध्रुवीय मुकाबले में मतदाता की थकान को दूर करें युवा नेतृत्व को बढ़ावा दें वास्तविकता की जाँच: कमजोर संगठन और सीमित संसाधन बड़ी बाधा बने हुए हैं। मुख्य युद्धक्षेत्र: भवानीपुर सबसे ज्यादा क्यों मायने रखता है अगर एक सीट इस चुनाव का सार पकड़ती है, तो वह भबनीपुर है। यहां ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी सिर्फ एक निर्वाचन क्षेत्र की लड़ाई नहीं है – यह कथाओं का एक प्रतीकात्मक टकराव है। यह भाजपा की जाति, धर्म और बूथ गणित की सोशल इंजीनियरिंग के खिलाफ टीएमसी की “बंगाल अपनी बेटी चाहता है” की भावनात्मक अपील है। कभी एक किला रहा भबनीपुर अब मतदाताओं के बदलते व्यवहार की अग्निपरीक्षा है। एसआईआर विवाद: चुनाव का एक्स-फैक्टर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने राजनीतिक बातचीत को नाटकीय रूप से बदल दिया है। राज्यभर में करीब 64 लाख नाम हटाए गए कई लाख मतदाता जांच के दायरे में कुछ सीटों पर हार का अंतर जीत के अंतर से अधिक है बीजेपी इसे अवैध अप्रवास से जुड़ा जरूरी सुधार बताती है. टीएमसी इसे लक्षित मताधिकार से वंचित करना कहती है। फिरहाद हकीम ने कहा, ”भाजपा अल्पसंख्यकों के मतदान के अधिकार को छीनना चाहती है।” यह क्यों मायने रखता है: यह चुनाव केवल वोटों के बारे में नहीं है – यह इस बारे में है कि मतदाता के रूप में कौन योग्य है। पहचान बनाम शासन: असली 2026 लड़ाई बंगाल का चुनाव पारंपरिक मुद्दों से आगे बढ़ चुका है। 2021 में, यह एनआरसी-सीएए बहस के बारे में था। अब यह इस बारे में है: मतदाता पहचान और वैधता धार्मिक और सांस्कृतिक लामबंदी स्थायी, जमीनी स्तर का ध्रुवीकरण विश्लेषक मोइदुल इस्लाम ने कहा, “असल में, नौकरशाही की कवायद ने राजनीतिक रंग ले लिया है।” 100 से अधिक सीटें हिंदू एकीकरण और अल्पसंख्यक पुनर्समूहन से प्रभावित हो सकती हैं। बंगाल बैटल 2026 में क्या देखना है पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 एक बहुस्तरीय प्रतियोगिता है: सत्ता की लड़ाई: टीएमसी बनाम बीजेपी अस्तित्व की लड़ाई: कांग्रेस पुनरुद्धार का प्रयास सिस्टम परीक्षण: मतदाता सूची और चुनाव प्रबंधन की विश्वसनीयता कथा युद्ध: पहचान बनाम शासन यह सिर्फ सरकार बनाने का मामला नहीं है. यह इस बारे में है कि आने वाले वर्षों में बंगाल की राजनीति और उसके मतदाताओं को कौन परिभाषित करता है। जगह : पश्चिम बंगाल, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 31, 2026, 08:16 IST समाचार चुनाव पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: तारीखें, सीटें और प्रत्येक पार्टी के लिए क्या दांव पर है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कार्यक्रम(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव चरण 2026(टी)ममता बनर्जी टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)भबानीपुर प्रमुख युद्धक्षेत्र सीट(टी)विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची पश्चिम बंगाल(टी)बंगाल में मतदाता पहचान और वैधता(टी)पश्चिम बंगाल में भाजपा कांग्रेस
जबलपुर के रादुविवि में हंगामे के बीच बजट पारित:कार्यप्रणाली पर असंतोष, 27 अप्रैल को होगी समीक्षा बैठक

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुविवि) की सभा (कोर्ट) की बैठक सोमवार को आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस के बीच संपन्न हुई। इस दौरान विश्वविद्यालय का वार्षिक बजट पारित कर दिया गया, लेकिन प्रशासन की कार्यप्रणाली पर जनप्रतिनिधियों ने गंभीर असंतोष व्यक्त किया। सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के जनप्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और छात्र-सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए। बैठक में भाजपा विधायक अशोक रोहाणी और ओमप्रकाश धुर्वे, कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया और ओंकार सिंह मरकाम सहित जबलपुर के महापौर भी उपस्थित थे। सदस्यों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पिछले वित्तीय वर्ष में आवंटित बजट के समुचित उपयोग न होने पर सवाल उठाए। कुछ राशि के लैप्स होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा, जिसे प्रशासनिक लापरवाही बताया गया। कार्यप्रणाली में सुधार न होने पर होगा विरोध जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध खुलकर विरोध किया जाएगा। उन्होंने विभिन्न विभागों से संबंधित पालन प्रतिवेदन और प्रगति रिपोर्ट 27 अप्रैल को होने वाली विशेष समीक्षा बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस बैठक में सभी लंबित मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। याचिकाओं पर चिंता व्यक्त की कर्मचारियों और अधिकारियों के पेंशन प्रकरणों में देरी, बाहरी भुगतान लंबित रहने और इसके कारण न्यायालय में बढ़ती याचिकाओं पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। सदस्यों ने कहा कि इन मुद्दों से विश्वविद्यालय की साख को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। प्रशासन को इन प्रकरणों पर तत्काल कार्रवाई कर संतोषजनक समाधान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान नवनिर्वाचित कर्मचारी संघ अध्यक्ष संजय यादव भी बैठक में उपस्थित थे। उन्होंने कर्मचारियों की लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए सदस्यों के समक्ष अपनी बात रखी।







