Sunday, 14 Jun 2026 | 07:40 AM

Trending :

EXCLUSIVE

हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली सेब इंडस्ट्री पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने से मंडरा रहे संकट का मुद्दा आज विधानसभा में उठेगा। ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी में की गई कटौती का मामला सदन में उठाने जा रहे हैं। यह मामला प्रदेश की 5500 करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी और लगभग 3 लाख बागवान परिवारों की आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। दरअसल, केंद्र सरकार ने अमेरिका और न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन (EU) के लिए 20 प्रतिशत कर दी है। इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से अब विदेशी सेब सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में उपलब्ध होगा। इससे हिमाचल के साथ साथ जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उद्योग पर भी संकट खड़ा हो गया है। हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह होगा प्रभावित कुलदीप राठौर ने बताया कि वाशिंगटन एपल के भारतीय बाजार में आने से हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह प्रभावित होगा। इससे न केवल प्रीमियम सेब के दाम गिरेंगे, बल्कि कोल्ड स्टोर में रखे सेब पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। अभी अमेरिका-न्यूजीलैंड और EU के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई गई गई है। अब इनकी आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने का दबाव डालेंगे। मोदी ने किया था इम्पोर्ट ड्यूटी 100% का वादा राठौर ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 फीसदी करने का भरोसा दिया था। हकीकत में इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बजाय कम की जा रही है। इससे सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि सदन में यह मामला उठाकर केंद्र सरकार से इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के फैसले का विरोध जताएंगे और यह फैसला वापस लेने की मांग की जाएगी। हिमाचल के बागवान सचिवालय का घेराव कर चुके बता दें कि हिमाचल के बागवान इस फैसले के खिलाफ दो महीने पहले सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। बागवानों का आरोप है कि केंद्र सरकार आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग देशों के लिए इसे कम कर रही है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। इस वजह से बागवान ज्यादा चिंतित बागवानों की चिंता की एक बड़ी वजह उत्पादन लागत और उत्पादकता में अंतर भी है। हिमाचल में प्रति हेक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होता है, जबकि अमेरिका, न्यूजीलैंड और चीन जैसे देशों में यह 60 से 70 मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है। वहीं, हिमाचल में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रति किलो सेब उत्पादन की लागत करीब 27 रुपए आती है। ऐसे में बागवानों को लाभ तभी मिल पाता है, जब उनका सेब कम से कम 50 से 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिके। अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का बनाएंगे दबाव विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और EU को दी गई रियायतों के बाद अब अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का दबाव बना सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में विदेशी सेब की हिस्सेदारी बढ़ेगी और स्थानीय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाएगी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Sharjeel Imam Gets 10-Day Interim Bail

March 20, 2026/
4:32 pm

नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक तिहाड़ जेल से निकलकर परिवार की कार में बैठे शरजील इमाम। दिल्ली दंगा (2020)...

RPSC SI Exam Re-Exam Sept 20

May 16, 2026/
8:18 am

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से एसआई भर्ती परीक्षा 2021 का पुनः आयोजन 20 सितम्बर को किया जाएगा।...

वर्ल्ड अपडेट्स:किम जोंग-उन की साउथ कोरिया को चेतावनी, बोले- खतरा हुआ तो ‘पूरी तरह तबाह’ कर देंगे

February 27, 2026/
9:07 am

नॉर्थ कोरिया के शासक किम जोंग-उन ने साउथ कोरिया को कड़ी चेतावनी दी है। किम ने कहा है कि उनके...

बालों की देखभाल के टिप्स: बालों की देखभाल के लिए बालों की देखभाल के टिप्स: बालों की देखभाल के लिए बालों की देखभाल के टिप्स रेशम जैसे हो जायेंगे प्रोजेक्ट; जानिए उपाय

February 24, 2026/
9:06 am

24 फरवरी 2026 को 09:09 IST पर अपडेट किया गया बालों की देखभाल के टिप्स: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी...

सतना में परिवार ने खाया जहर, बेटे की मौत:पति-पत्नी और 3 साल का बेटा गंभीर, झगड़े के बाद खाने में मिलाया जहरीला पदार्थ

March 10, 2026/
2:21 pm

सतना जिले के रामपुर बघेलान थाना क्षेत्र में सोमवार रात पत्नी ने पति से झगड़े के बाद खाने में जहर...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली सेब इंडस्ट्री पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने से मंडरा रहे संकट का मुद्दा आज विधानसभा में उठेगा। ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी में की गई कटौती का मामला सदन में उठाने जा रहे हैं। यह मामला प्रदेश की 5500 करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी और लगभग 3 लाख बागवान परिवारों की आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। दरअसल, केंद्र सरकार ने अमेरिका और न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन (EU) के लिए 20 प्रतिशत कर दी है। इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से अब विदेशी सेब सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में उपलब्ध होगा। इससे हिमाचल के साथ साथ जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उद्योग पर भी संकट खड़ा हो गया है। हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह होगा प्रभावित कुलदीप राठौर ने बताया कि वाशिंगटन एपल के भारतीय बाजार में आने से हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह प्रभावित होगा। इससे न केवल प्रीमियम सेब के दाम गिरेंगे, बल्कि कोल्ड स्टोर में रखे सेब पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। अभी अमेरिका-न्यूजीलैंड और EU के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई गई गई है। अब इनकी आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने का दबाव डालेंगे। मोदी ने किया था इम्पोर्ट ड्यूटी 100% का वादा राठौर ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 फीसदी करने का भरोसा दिया था। हकीकत में इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बजाय कम की जा रही है। इससे सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि सदन में यह मामला उठाकर केंद्र सरकार से इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के फैसले का विरोध जताएंगे और यह फैसला वापस लेने की मांग की जाएगी। हिमाचल के बागवान सचिवालय का घेराव कर चुके बता दें कि हिमाचल के बागवान इस फैसले के खिलाफ दो महीने पहले सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। बागवानों का आरोप है कि केंद्र सरकार आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग देशों के लिए इसे कम कर रही है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। इस वजह से बागवान ज्यादा चिंतित बागवानों की चिंता की एक बड़ी वजह उत्पादन लागत और उत्पादकता में अंतर भी है। हिमाचल में प्रति हेक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होता है, जबकि अमेरिका, न्यूजीलैंड और चीन जैसे देशों में यह 60 से 70 मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है। वहीं, हिमाचल में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रति किलो सेब उत्पादन की लागत करीब 27 रुपए आती है। ऐसे में बागवानों को लाभ तभी मिल पाता है, जब उनका सेब कम से कम 50 से 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिके। अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का बनाएंगे दबाव विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और EU को दी गई रियायतों के बाद अब अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का दबाव बना सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में विदेशी सेब की हिस्सेदारी बढ़ेगी और स्थानीय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाएगी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.