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दतिया में रेत भरने के विवाद में फायरिंग:ट्रैक्टर-लोडर पर लगी गोलियां, आरोपी फरार

दतिया में रेत भरने के विवाद में फायरिंग:ट्रैक्टर-लोडर पर लगी गोलियां, आरोपी फरार

दतिया जिले के गोराघाट थाना क्षेत्र के बडौनकला गांव में रेत भरने को लेकर शुक्रवार रात विवाद हो गया। आरोप है कि कुछ दबंगों ने खुलेआम फायरिंग कर दहशत फैला दी। चिरोली निवासी आनंद दांगी के ट्रैक्टर और पास खड़े लोडर पर गोली चलाई गई। फायरिंग में ट्रैक्टर की ट्रॉली और टायर तथा लोडर के टायर क्षतिग्रस्त हो गए, हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। जानकारी के अनुसार आनंद दांगी अपने ट्रैक्टर (MP 32 ZC 2951) से चालक उदयभान परिहार के साथ रेत भरने बडौनकला पहुंचे थे। वे गोरियन के खेत में ट्रॉली भरने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान रोहित बौहरे, फुन्नू पोरिया, अतर सिंह पाल, भरत पाल, करन गुर्जर और गोलू पटेल वहां पहुंचे और ट्रैक्टर हटाने को कहा। रॉयल्टी कटवाने की बात पर बहस हुई आनंद ने बताया कि वह रॉयल्टी कटवाकर रेत ले जा रहे हैं। इस बात पर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने गाली-गलौज की और हवाई फायरिंग कर दी। गोली ट्रैक्टर के पीछे के टायर और ट्रॉली में लगी, जबकि पास में खड़े लोडर के टायर भी क्षतिग्रस्त हो गए। लोडर को जीतेन्द्र रावत चला रहे थे। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। गोराघाट टीआई रमेश शाक्य ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

‘मुझे धृतराष्ट्र की याद दिलाती है…’: मैथली ठाकुर ने लालू यादव पर ‘महाभारत’ पर तंज कसा, तेजस्वी ने दी प्रतिक्रिया | राजनीति समाचार

Pakistan vs New Zealand Live Cricket Score: PAK vs NZ T20 World Cup 2026 Match Scorecard Latest Updates Today

आखरी अपडेट:22 फरवरी, 2026, 08:01 IST मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए, ठाकुर ने कहा, “जब नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली, तो सुशासन आया,” और कानून और व्यवस्था में सुधार के लिए उनके प्रशासन को श्रेय दिया। मैथिली ठाकुर ने कहा कि 2005 से पहले शाम के बाद बाहर निकलना असुरक्षित माना जाता था. गायिका से नेता बनीं और बिहार भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पर परोक्ष हमला करते हुए उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव के प्रति उनके लगाव की तुलना हस्तिनापुर के अंधे राजा धृतराष्ट्र और राजकुमार दुर्योधन से की। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार विधानसभा में अपने पहले भाषण के दौरान, उन्होंने राज्य में अतीत और वर्तमान शासन की तुलना करने के लिए महाभारत का संदर्भ दिया। राजद और उसके नेताओं का नाम लिए बिना, गायक से राजनेता बने गायक ने बिहार के 2005 से पहले के शासन की तुलना धृतराष्ट्र के शासन से करते हुए कहा कि राजा को अपने राज्य के कल्याण की तुलना में अपने बेटे दुर्योधन की अधिक चिंता थी। उन्होंने लालू प्रसाद और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के स्पष्ट संदर्भ में कहा, “जब भी मैं उस समय के बारे में सोचती हूं, मुझे धृतराष्ट्र का हस्तिनापुर याद आता है। राजा को हस्तिनापुर की चिंता नहीं थी, केवल अपने दुर्योधन की चिंता थी।” पहले के दौर को “जंगल राज” का युग बताते हुए ठाकुर ने दावा किया कि बिहार को शिक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा में असफलताओं का सामना करना पड़ा। लालू-राबड़ी शासन का जिक्र करते हुए ठाकुर ने कहा कि उस दौरान सरकारी शिक्षकों को अपना वेतन पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। उन्होंने दावा किया कि जब स्कूलों में दोपहर का भोजन नहीं दिया जाता था, तो बच्चों को खाली पेट कक्षाओं में भाग लेना पड़ता था। लोग संकट में थे क्योंकि उनकी बेटियां शिक्षा हासिल करने में असमर्थ थीं, फिर भी सत्ता में बैठे लोगों को कोई दया नहीं आई। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले शाम के बाद बाहर निकलना असुरक्षित माना जाता था। “लोग कहते थे, ‘शाम 5 बजे के बाद कार से बाहर मत निकलो, यह खतरनाक है।’ आज एक कलाकार और विधायक के तौर पर मैं सुबह 3 बजे दरभंगा से निकलता हूं और सुरक्षित अपने घर पटना पहुंच जाता हूं. यह बदलाव बेहतर कानून-व्यवस्था को दर्शाता है।” मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए, ठाकुर ने कहा, “जब नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली, तो सुशासन आया,” और कानून और व्यवस्था में सुधार के लिए उनके प्रशासन को श्रेय दिया। उन्होंने स्कूली लड़कियों के लिए राज्य की साइकिल योजना के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला और कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा, “मेरे अपने गांव में, जहां स्कूली शिक्षा के बारे में बमुश्किल कोई चर्चा होती थी, साइकिल कार्यक्रम शुरू होने के बाद लड़कियों ने स्कूल जाना शुरू कर दिया। हालांकि विपक्ष ने शुरुआत में इसका मजाक उड़ाया, लेकिन आज यह देश के लिए एक मॉडल के रूप में खड़ा है।” तेजस्वी की प्रतिक्रिया इस टिप्पणी पर तेजस्वी यादव की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। सीधे तौर पर ठाकुर का नाम लिए बिना, उन्होंने सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना की और उन पर “जननायक” के बारे में “अभद्र टिप्पणी” करने का आरोप लगाया, यह शब्द राजद समर्थक लालू यादव के लिए इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “विधायक बनते ही कुछ लोग सोचते हैं कि उन्हें राजनीति का पूरा ज्ञान हो गया है। विधायिका के ए, बी, सी को समझे बिना, उनमें एक ‘जननायक’ (लोगों के नायक, एक विशेषण राजद कार्यकर्ता अपने सुप्रीमो के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला विशेषण) के बारे में भद्दी टिप्पणी करने का साहस करते हैं।” राजद नेता ने कुछ हफ्ते पहले दरभंगा जिले में एक दलित लड़की के बलात्कार और हत्या पर चुप रहने के लिए भी ठाकुर की आलोचना की, जहां उनका अपना निर्वाचन क्षेत्र आता है। उन्होंने व्यंग्यात्मक ढंग से उन्हें यह भी याद दिलाया कि हालांकि उन्होंने राजद शासन के दौरान “जंगल राज” की बात की थी, लेकिन उनकी मां ने कुछ दिन पहले उनके पैतृक जिले मधुबनी में कीमती सामान चोरी होने की शिकायत की थी, जबकि उनकी अपनी पार्टी राज्य में सत्ता में है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 22 फरवरी, 2026, 08:01 IST समाचार राजनीति ‘मुझे धृतराष्ट्र की याद दिलाती है…’: मैथली ठाकुर ने लालू यादव पर ‘महाभारत’ पर तंज कसा, तेजस्वी ने दी प्रतिक्रिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बिहार की राजनीति(टी)मैथिली ठाकुर(टी)लालू प्रसाद यादव(टी)तेजस्वी यादव(टी)नीतीश कुमार(टी)आरजेडी(टी)बिहार विधानसभा(टी)जंगल राज

पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, कई लोगों की मौत:TTP के सात कैंपों को निशाना बनाया; PAK बोला- आत्मघाती हमलों का बदला लिया

पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, कई लोगों की मौत:TTP के सात कैंपों को निशाना बनाया; PAK बोला- आत्मघाती हमलों का बदला लिया

पाकिस्तान की सेना ने रविवार तड़के अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की। अल-जजीरा के मुताबिक सेना ने दावा किया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट से जुड़े सात कैंपों और ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसमें कई लोगों की मौत की खबर है। सरकार ने इसे हालिया आत्मघाती हमलों के बाद जवाबी अटैक बताया। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई इंटेलिजेंस बेस्ड और चयनात्मक ऑपरेशन था। पाकिस्तान ने कहा कि उसके पास पुख्ता सबूत हैं कि हमले अफगानिस्तान की जमीन से संचालित नेटवर्क ने कराए। एयर स्ट्राइक से कुछ घंटे पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में सुरक्षा काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें दो सैनिक, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी मारे गए। सोमवार को बाजौर में विस्फोटकों से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकरा दी गई। इस हमले में 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत हुई। अधिकारियों ने हमलावर को अफगान नागरिक बताया। इससे पहले इस्लामाबाद में जुमे की नमाज के दौरान शिया मस्जिद (इमामबाड़ा) में आत्मघाती हमला हुआ था। पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक, हमले में 31 लोगों की मौत हो गई है और 169 घायल हुए हैं। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी। अफगानिस्तान की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं अफगानिस्तान की तालिबान सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि अफगान सूत्रों के अनुसार पक्तिका में एक धार्मिक स्कूल पर ड्रोन हमला हुआ और नंगरहार प्रांत में भी कार्रवाई की गई। पाकिस्तान लंबे समय से तालिबान सरकार से मांग करता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से संचालित हो रहा है, जबकि तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तालिबान पर दबाव डालने की मांग की पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह 2020 में दोहा में अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत तालिबान पर दबाव डाले, ताकि अफगान जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ न हो। प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि यह कदम “क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा” के लिए जरूरी है। अक्टूबर में सीमा पर हुई झड़पों में दोनों ओर सैनिकों और नागरिकों की मौत के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। कतर की मध्यस्थता से 19 अक्टूबर को युद्धविराम हुआ था, लेकिन तुर्किये के इस्तांबुल में बाद की वार्ता औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंच सकी।

कुम्हारों को मटके-मूर्तियों के लिए नहीं मिल रही मिट्टी, उनके नाम पर चल रहे 200 अवैध ईंट भट्ठे

कुम्हारों को मटके-मूर्तियों के लिए नहीं मिल रही मिट्टी, उनके नाम पर चल रहे 200 अवैध ईंट भट्ठे

जिले में ईंट भट्ठों का अवैध कारोबार बेलगाम होता जा रहा है। हालात यह हैं कि कुम्हारों और प्रजापति समाज को परंपरागत रूप से मिट्टी के बर्तन और मूर्तियां बनाने के लिए मिट्टी की जरूरत होती है। उन्हें ही पर्याप्त मिट्टी नहीं मिल पा रही है। दूसरी ओर, उनके नाम की आड़ में प्रभावशाली लोग सैकड़ों ईंट भट्ठे चला रहे हैं। अनुमान है कि रायसेन तहसील में ही 200 से ज्यादा ईंट भट्ठे बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं। नदियों, तालाबों और छोटे नालों के आसपास की राजस्व और वन भूमि से बेधड़क मिट्टी की खुदाई की जा रही है। इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। राजस्व और वन विभाग को भी लाखों रुपए की हानि हो रही है। प्रशासनिक अधिकारियों को इस स्थिति की जानकारी है। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। भट्ठा संचालकों के हौसले बुलंद हैं। नियमों के अनुसार ईंट भट्ठा संचालन की अनुमति मुख्यतः एससी-एसटी और प्रजापति समाज के लोगों को दी जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके नाम का उपयोग कर दूसरे समाज के प्रभावशाली लोग कारोबार चला रहे हैं। भोपाल रोड पर नीमखेड़ा के पास केवटी गांव में संचालित एक भट्ठे पर मजदूरों को कर्ज के बदले बंधुआ बनाकर काम कराने का मामला सामने आया है। एक दिन पहले एसडीओपी नीलम चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सरोज अग्निवंशी और नायब तहसीलदार अमृता सुमन ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी। दूसरे दिन भी टीम ने ईंट भट्ठे पर पहुंचकर सबूत जुटाए। तीन परिवारों को बंधक बनाकर काम कराने की बात सामने आई है। प्रशासन ने 20 परिवारों के 84 लोगों का मेडिकल परीक्षण जिला अस्पताल लाकर कराया है। विनीता बाईं और लक्ष्मण ने बताया कि उन्हें बंधक बनाकर काम कराया जा रहा था। ^केवटी गांव में ईंट भट्ठे पर मजदूरों को बंधुआ रूप में रखकर काम कराने के मामले में दूसरे दिन भी जांच की गई है। मौके से डायरी जब्त की गई है। मजदूरों से एग्रीमेंट संबंधी दस्तावेज मांगे गए हैं, ताकि बंधुआ मजदूरी एक्ट के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। -मनीष शर्मा, एसडीएम रायसेन प्रजापति समाज के अध्यक्ष लखन चक्रवर्ती ने बताया कि कुम्हारों को मटके और मूर्तियां बनाने के लिए भी मिट्टी नहीं मिल रही है। पिछले पांच-छह वर्षों से समाज की ओर से कलेक्टर को आवेदन दिए जा रहे हैं। समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि प्रजापति समाज के नाम की आड़ में अवैध भट्ठे संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। श्रम मंत्री के बयान के बाद कार्रवाई प्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने श्रम कानून के 50 वर्ष पूरे होने पर बयान दिया था, “गौरव तब होगा, जब हमारे राज्य में बंधुआ मजदूरी का एक भी मामला नहीं होगा।” महज 10 दिन बाद रायसेन जिले में बंधुआ मजदूरी का मामला सामने आया है। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया है।

NRI महिला बोली- लुटेरे रुकते तो टुकड़े-टुकड़े कर देती:लुधियाना में कार रोककर तलवार उठाई और दौड़ पड़ी; 10 सवाल-जवाब में पूरी कहानी

NRI महिला बोली- लुटेरे रुकते तो टुकड़े-टुकड़े कर देती:लुधियाना में कार रोककर तलवार उठाई और दौड़ पड़ी; 10 सवाल-जवाब में पूरी कहानी

लुधियाना के डेहलों में NRI महिला हरजिंद कौर रात में सड़क पर तलवार लहराकर लुटेरों के पीछे दौड़ पड़ी। तलवार लेकर हरजिंद कौर लुटेरों को ललकारती रही और लुटेरे उसका रौद्र रूप देखकर फरार हो गए। हरजिंद कौर का कहना है कि अगर लुटेरे रूक जाते तो वो उनका गाटा लगा देती यानि टुकड़े-टुकड़े कर देती। गनीमत रही कि वो मौके से भाग गए। हरजिंद कौर का कहना है कि पहले उसने पुलिस को शिकायत नहीं दी। जब लोग इस घटना को स्क्रिप्टेड कहने लगे तो उन्हें लगा कि शिकायत दे देनी चाहिए। फिर उन्होंने पुलिस को इस मामले की शिकायत दी। डेहलों पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी। एनआरआई महिला ने बताया कि दिलेरी उनका खानदानी गुण है। उसके दादा दलीप सिंह पहलवान रहे हैं और उन्होंने उनके लिए घर में जिम भी बनाया था। आज भी उनके गांव राजगढ़ के घर में वो जिम है। अब 10 सवाल-जवाब में पढ़ें पूरी कहानी… हरजिंद कौर से सवाल जवाब में घटना और उसके बारे में जानिए… सवाल: आप कहां रहती हैं और क्या करती हैं? जवाब: मैं ऑस्ट्रेलिया में रहती हूं और वहां पर अपना कारोबार करती हूं। सवाल: लुधियाना में कहां रहती हैं और रात को कार में कहां जा रहे थे? कार में कौन-कौन सवार था? जवाब: मैं राजगढ़ गांव की हूं और ऑस्ट्रेलिया से कुछ दिन पहले यहां आई। रात को मैं अपनी सास व चाची के साथ डेहलों नहर वाली सड़क से जा रही थी। सवाल: आपको कैसे लगा कि वो लूटने का प्रयास कर रहे हैं और हुआ क्या था? जवाब: बाइक सवार काफी समय से हमारा पीछा कर रहा था। जब मैं स्पीड कम कर रही थी तो वो भी कम कर रहा था। उसे कई बार आगे जाने के लिए जगह दी। वो नहीं गया। मेरी चाची ने बताया कि ये लुटेरे हो सकते हैं। उन्होंने अपना मोबाइल ऑन कर दिया। उन्हाेंंने जब कार ओवरटेक की तो एकदम से अंडा कार के शीशे पर मार दिया। पहले मुझे लगा कि ऊपर से कुछ गिरा है। लेकिन जब देखा तो यह अंडा था। वो थोड़ी दूर जाकर रूक गए। सवाल: उसके बाद आपने क्या किया और गाड़ी में तलवार कहां से आई? जवाब: मैंने गाड़ी को ब्रेक लगाई और गाड़ी में पड़ी तलवार उठाई। हम सिख फैमिली से हैं तो गाड़ी में तलवार हमेशा रखते हैं। मैं तलवार लेकर बाहर निकलने लगी तो मेरी चाची ने मुझे रोकने की कोशिश की। उधर मेरी सास डर गई और घबराने लगी। मैं जबरदस्ती बाहर निकली। सवाल: आपको डर नहीं लगा कि वो हमला कर देंगे? जवाब: दो बातें हैं एक बुजदिल बनकर रोज मरते जाओ या फिर दिलेरी दिखाकर या तो लुटेरों से भिड़ जाओ या खुद मर जाओ। मैं बचपन से दिलेर हूं। मेरे दादा पहलवान थे। उन्होंने दिलेरी हमें विरासत में दी है। मैंने मन बना लिया था कि अगर वो रूके तो मैं उनके टुकड़े-टुकड़े कर दूंगी। सवाल : वहां पर उसके बाद क्या हुआ? जवाब: जब मैंने कार को ब्रेक लगाई तो उन्होंने बाइक बैक किया और हमारी तरफ आ रहे थे। उनकी योजना थी कि कार रूक गई अब उन्हें लूट लिया जाए। जब मैं तलवार लेकर बाहर निकली और जोर से चिल्लाई तो वो रूक गए। मैं फिर तलवार लेकर उनके पीछे भागी। इतने में पीछे से एक बाइक व कार आ गई। रोशनी हुई तो वो दोनों भाग गए। सवाल: लोगों ने आपकी मदद की? जवाब: जब मैं तलवार लेकर चिल्ला रही थी तो वहां से निकलने वाले और लोग भी रूक गए। एक बाइक सवार ने बताया कि दीदी वो दो ही नहीं थे बल्कि ज्यादा थे। लोगों ने कहा कि इस रूट पर ऐसा कई बार होता है। सवाल: आप फिर आगे गए या नहीं? जवाब: नहीं फिर हम वहां से वापस आ गए, क्योंकि मेरी सास बहुत घबरा गई थी। सवाल: सोसाइटी को क्या मैसेज देंगे? जवाब: लड़कियों को दिलेर बनाओ। उन्हें दिलेरी के किस्से सुनाओ। उनको महंगा मोबाइल दो या न दो पर उन्हें शस्त्र दो। गतका, जूडो कराटे व आत्मरक्षा के गुर सिखाओ ताकि ऐसी स्थिति में वो खुद की सुरक्षा कर सकें। मैं जब भी गांव आती हूं तो गांव की लड़कियों को सिमरन करवाती हैं और उन्हें दिलेर बनाती हूं। सवाल: आप में दिलेरी कहां से आई? जवाब: मेरे दादा पहलवान थे। मेरे पिताजी मुझे अकसर दिलेरी के किस्से सुनाते थे। मैं स्पोर्ट्स में रही हूं। निडर सीजन-2 की विनर रही, जिसमें एडवेंचर की एक्टिविटी होती थी और दिलेरी दिखाने वाले को जीत हासिल होती थी। मैं जेंडर में विश्वास नहीं करती हूं। मैं दिलेरी में विश्वास करती हूं। पुलिस कमिश्नर महिला को सम्मानित करेंगे थाना डेहलों की एसएचओ इंस्पेक्टर अवनीत कौर ने बताया कि NRI महिला जा रही थी, उसकी गाड़ी पर अंडे मारकर लूटने का प्रयास किया। वीडियो वायरल हुआ तो हमने महिला से संपर्क किया और उसके बाद एफआईआर दर्ज कr। उन्होंने बहुत बहादुरी से लुटेरों को भगाया। हमने 2 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में पुलिस के सीनियर अफसरों को जानकारी दी है। पुलिस कमिश्नर महिला को सम्मानित करेंगे।

एक्ट्रेस लाना क्लार्कसन का मर्डर अब भी मिस्ट्री:लाश कुर्सी पर, दांत जमीन पर बिखरे मिले; हत्यारे म्यूजिक प्रोड्यूसर की जेल में मौत

एक्ट्रेस लाना क्लार्कसन का मर्डर अब भी मिस्ट्री:लाश कुर्सी पर, दांत जमीन पर बिखरे मिले; हत्यारे म्यूजिक प्रोड्यूसर की जेल में मौत

3 फरवरी 2003 की बात है फिल्मी करियर खत्म होने के बाद एक्ट्रेस और मॉडल लाना क्लार्कसन अपने घर चलाने के लिए वेस्ट हॉलीवुड के एक क्लब हाउस ऑफ ब्लूज में पार्ट-टाइम काम करने लगी थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात मशहूर म्यूजिक प्रोड्यूसर फिल स्पेक्टर से हुई। पहली ही मुलाकात में दोनों एक साथ फिल के घर चले गए। फिल स्पेक्टर का घर बहुत बड़ा और सुंदर था। वह म्यूजिक इंडस्ट्री में एक जाना माना नाम था। शायद लाना को उम्मीद थी कि यह मुलाकात उसके करियर को फिर से शुरू करने में मदद कर सकती है। लेकिन तभी, करीब सुबह 5:30 बजे फिल का ड्राइवर कार में बैठा रेडियो सुन रहा था कि अचानक उसे गोली चलने जैसी आवाज सुनाई दी। हैरान होकर जब वह देखने गया तो उसने देखा कि लाना क्लार्कसन की लाश फर्श पर पड़ी थी। तुरंत बाद ड्राइवर ने 911 पर कॉल किया और कहा, मुझे लगता है मेरे बॉस ने किसी को मार दिया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ड्राइवर ने सीधे क्यों फिल को हत्या का दोषी माना। क्या वह झूठ बोल रहा था या इसके पीछे कोई और कहानी थी? आज अनसुनी दास्तानें में पढ़िए एक्ट्रेस और मॉडल लाना क्लार्कसन की मौत की दर्दनाक कहानी… लाना क्लार्कसन का जन्म कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम डोना क्लार्कसन और जेम्स एम. क्लार्कसन था। उनके एक भाई जेसी जे. क्लार्कसन और एक बहन फॉन थीं। उनका बचपन कैलिफोर्निया के सोनोमा काउंटी की पहाड़ियों में बीता। वहां रहते हुए उन्होंने क्लोवरडेल हाई स्कूल और पैसिफिक यूनियन कॉलेज प्रिपरेटरी स्कूल में पढ़ाई की। 1978 में क्रिसमस के दौरान उनका परिवार वापस साउथ कैलिफोर्निया लौटा और लॉस एंजेलिस के सैन फर्नांडो वैली इलाके में बस गया। लॉस एंजेलिस आने के बाद लाना का मन धीरे-धीरे मनोरंजन जगत की ओर बढ़ने लगा। अपनी खूबसूरती और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने एक्टिंग और मॉडलिंग में करियर बनाने का फैसला किया। 1980 के शुरुआती सालों में लाना क्लार्कसन को फिल्मों और टेलीविजन में छोटे-छोटे रोल मिलने लगे। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत निर्देशक एमी हेकरलिंग की कमिंग-ऑफ-एज कॉमेडी Fast Times at Ridgemont High (1982) से की और यह उनकी पहली बोलने वाली फिल्म थी। इसके बाद वह सरफेस (1983) में भी नजर आईं, जहां वह मिशेल फाइफर के पीछे बाबिलॉन क्लब के डांस फ्लोर पर दिखाई दीं। हालांकि, उनके करियर का पहला बड़ा मौका निको मस्टोराकिस की साइंस-फिक्शन थ्रिलर फिल्म Blind Date से मिला, जिसने उन्हें अधिक पहचान दिलाई। लाना क्लार्कसन को एक्ट्रेस के तौर पर सबसे ज्यादा पहचान निर्माता रोजर कॉर्मन की फैंटेसी फिल्म डेल्थस्टाल्कर (1983) से मिली। इसके बाद उन्हें लगातार फिल्मों में काम मिलने लगा। अब लाना सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं थीं। उन्हें कई एड्स और मॉडलिंग के काम भी मिल रहे थे। इंडस्ट्री में उनकी एक अलग पहचान बन चुकी थी और उनका करियर लगातार बढ़ रहा था। लेकिन जैसे-जैसे लाना की उम्र बढ़ने लगी, उनका करियर धीमा पड़ने लगा। कहा जाता है कि 30 साल के बाद कई हीरोइन्स को बड़ी फिल्में कम मिलने लगती हैं, और कुछ ऐसा ही लाना के साथ भी होने लगा। उनके पास बड़े प्रोजेक्ट्स के ऑफर नहीं आए और एक समय ऐसा आया जब उन्हें कोई काम नहीं मिला। इसके बाद जनवरी 2003 में पैसों की जरूरत के चलते लाना ने वेस्ट हॉलीवुड, कैलिफोर्निया के हाउस ऑफ ब्लूज में पार्ट-टाइम होस्टेस की नौकरी शुरू की। यहां वह लोगों का स्वागत करती थीं। हाउस ऑफ ब्लूज वह जगह थी जो दशकों तक संगीत प्रेमियों और सेलिब्रिटीज की पसंदीदा रही, लेकिन 2015 में इसे तोड़ दिया गया। 3 फरवरी 2003 को लाना की पहली मुलाकात म्यूजिक प्रोड्यूसर फिल स्पेक्टर से हुई। करीब 1:45 बजे फिल हाउस ऑफ ब्लूज पहुंचे और सीधे फाउंडेशन रूम यानी क्लब के VIP सेक्शन में गए। वहां लाना होस्टेस के तौर पर खड़ी थीं और लोगों का स्वागत और चेक-इन कर रही थीं। यहीं उनकी पहली मुलाकात हुई। फिल ने महंगी शैंपेन मंगवाई और दोनों की बातचीत शुरू हुई। फिर करीब 2:30 बजे फिल और लाना एक साथ उनकी कार से अल्हाम्ब्रा स्थित फिल के घर चले गए। उस समय लाना फिल्मों में काम नहीं कर रही थीं और हाउस ऑफ ब्लूज में होस्टेस की नौकरी कर रही थीं। लोग उनके काम और करियर को लेकर कई तरह की बातें कर रहे थे, लेकिन असली सच क्या था यह स्पष्ट नहीं था। इतना जरूर है कि उसी रात उनकी फिल स्पेक्टर से मुलाकात हुई और वे उनके साथ उनके घर चली गईं। फिल स्पेक्टर का घर काफी बड़ा और सुंदर था। लगभग 10,000 वर्गफुट का, जिसमें 10 बेडरूम और 11 बाथरूम थे। फिल कोई आम इंसान नहीं थे। उन्हें रॉक एंड रोल हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया था और म्यूजिक इंडस्ट्री में उन्हें एक जीनियस माना जाता था। वह बेहद प्रतिभाशाली और मशहूर म्यूजिक प्रोड्यूसर थे। लेकिन उनका स्वभाव सही नहीं था। लोग कहते थे कि वह जल्दी गुस्सा हो जाते थे। खासकर जब उन्होंने शराब या ड्रग्स ली होती। उनके बारे में कई किस्से मशहूर थे कि वह अचानक बंदूक निकालकर लोगों को डराते थे। उनकी पत्नी रोनी स्पेक्टर ने बताया कि शादी की रात ही उन्होंने धमकी दी थी कि अगर वह उन्हें छोड़ देंगी तो उन्हें नुकसान पहुंचाएंगे। करीब सुबह 5:30 बजे फिल का ड्राइवर कार में बैठा रेडियो सुन रहा था कि अचानक उसे गोली चलने जैसी आवाज सुनाई दी। हैरान होकर जब वह देखने गया, तो उसने देखा कि लाना क्लार्कसन की लाश वहां पड़ी थी। तुरंत बाद ड्राइवर ने पहले फिल की सेक्रेटरी को फोन किया और फिर 911 पर कॉल किया। उसने कहा, मेरा नाम एड्रियाना है। मुझे लगता है कि मेरे बॉस ने किसी को मार दिया है। कुछ ही मिनटों में पुलिस वहां पहुंच गई। ड्राइवर से बात करने के बाद वे धीरे-धीरे मेन्शन की ओर बढ़े। घर जंगल जैसी जगह से घिरा हुआ था, इसलिए पुलिस को अंदाजा नहीं था कि अंदर क्या हालात होंगे। वे बहुत सावधानी से आगे बढ़ रहे थे। तभी दरवाजा खुला और फिल स्पेक्टर बाहर आए। वह उलझी-उलझी बातें कर रहे थे और साफ बोल नहीं पा रहे

जनजातीय संस्कृति के रंग में रंगा इंदौर:जात्रा–2026 में आदिवासी धुन 'अमू काका बाबा' और 'क्यों मारी रे' पर जमकर थिरके इंदौरी

जनजातीय संस्कृति के रंग में रंगा इंदौर:जात्रा–2026 में आदिवासी धुन 'अमू काका बाबा' और 'क्यों मारी रे' पर जमकर थिरके इंदौरी

गांधी हॉल परिसर में चल रहे तीन दिवसीय आदिवासी महोत्सव ‘जात्रा–2026’ ने दूसरे दिन ऐसा रंग जमाया कि पूरा इंदौर जनजातीय सुरों और तालों पर थिरकता नजर आया। शाम 7 से 10 बजे तक आयोजित लाइव म्यूजिकल नाइट में कलाकार आनंदीलाल भावेल और उनकी टीम की प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सव में बदल दिया। झाबुआ और अलीराजपुर की लोक संस्कृति इंदौर में सजीव हो उठी। ‘अमू काका बाबा’, ‘चिलम तमाखू का डब्बा’, ‘क्यों मारी रे, क्यों पीटी रे’ और ‘छोटी-सी उमर में म्हारी शादी कराई दी’ जैसे लोकप्रिय लोकगीतों पर युवाओं से लेकर परिवारों तक ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया। पारंपरिक वेशभूषा, मांदल की थाप और लोक धुनों की गूंज ने शहर और जनजातीय अंचलों के बीच की दूरी को मानो मिटा दिया। संस्कृति के साथ स्वास्थ्य और प्रकृति का संगम 20 से 22 फरवरी तक आयोजित ‘जात्रा-2026’ केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय जीवनदृष्टि का परिचायक बनकर उभरा है, जहां स्वास्थ्य और प्रकृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में धार, झाबुआ और अलीराजपुर की पारंपरिक औषधियां, वनोपज और हस्तशिल्प आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण बने हुए हैं। राजनीतिक व प्रशासनिक सहभागिता से बढ़ी गरिमा आयोजन में विधायक गोलू शुक्ला, भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सावित्री ठाकुर की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। झाबुआ की कलेक्टर नेहा मीना ने भी आयोजन स्थल पर पहुंचकर कलाकारों और स्टॉल संचालकों से संवाद किया और व्यवस्थाओं की सराहना की। विधायक गोलू शुक्ला ने कहा कि होली से पहले शहर में ऐसा सांस्कृतिक उत्सव देखना सुखद है। पूरा झाबुआ-अलीराजपुर मानो इंदौर में बस गया हो। यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। महामंडलेश्वर दे मां पवित्रानंद गिरी राजेंद्र आचार्य ने कहा कि जात्रा सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का जीवंत उदाहरण है। हम सब एक हैं, यह भाव इस आयोजन में स्पष्ट दिखाई देता है। आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति प्रस्तावित है। वनोपज और हस्तशिल्प बने खास पहचान ‘जात्रा–2026’ में बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्र-छात्राएं आयोजन स्थल पर पहुंच रहे हैं। पारंपरिक सजावट और जनजातीय कला से सजे सेल्फी पॉइंट पर दिनभर युवाओं की भीड़ नजर आई। परिसर में गौसेवा का विशेष प्रबंध भी किया गया है, जिसने आयोजन को आध्यात्मिक स्पर्श दिया। शुगर फ्री हनी, पारंपरिक औषधियां और झाबुआ का प्रसिद्ध ‘गुड़ियाघर’ स्टॉल दर्शकों को खूब आकर्षित कर रहा है। हाथ से बने गुड्डे-गुड़िया और पारंपरिक तीर-कमान बच्चों के बीच खास लोकप्रिय रहे।

आधी रात, सुनसान सड़क और 3 लुटेरे; परिवार को बचाने तलवार लेकर सड़क पर निकल गई लुधियाना की सिखनी

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होमवीडियोक्राइम आधी रात, सुनसान सड़क और 3 लुटेरे; परिवार को बचाने तलवार लेकर सड़क पर निकल गई लुधियाना की सिखनी X आधी रात, सुनसान सड़क और 3 लुटेरे; परिवार को बचाने तलवार लेकर सड़क पर निकल गई लुधियाना की सिखनी   लुधियाना में ऑस्ट्रेलिया निवासी NRI हरजिंद कौर ने अदम्य साहस दिखाते हुए बदमाशों के लूट के मंसूबों को नाकाम कर दिया. ब्रिसबेन में एंकरिंग करने वाली हरजिंद अपनी सास और चाची के साथ कार से जा रही थीं. इसी दौरान बदमाशों ने कार के शीशे पर अंडे फेंककर उन्हें रोकने की साजिश रची. खतरे को भांपते हुए हरजिंद ने डरने के बजाय कार में रखी तलवार निकाल ली. उन्होंने रौद्र रूप अपनाकर लुटेरों को खुलेआम ललकारा, जिसे देख हमलावर डरकर भाग खड़े हुए. हरजिंद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम परिवार की सुरक्षा के लिए उठाया. उन्होंने युवतियों को आत्मरक्षा के लिए ‘गतका’ सीखने और शस्त्र साथ रखने की नसीहत दी है ताकि वे सुरक्षित रह सकें.लुधियाना में ऑस्ट्रेलिया निवासी NRI हरजिंद कौर ने अदम्य साहस दिखाते हुए बदमाशों के लूट के मंसूबों को नाकाम कर दिया. ब्रिसबेन में एंकरिंग करने वाली हरजिंद अपनी सास और चाची के साथ कार से जा रही थीं. इसी दौरान बदमाशों ने कार के शीशे पर अंडे फेंककर उन्हें रोकने की साजिश रची. खतरे को भांपते हुए हरजिंद ने डरने के बजाय कार में रखी तलवार निकाल ली. उन्होंने रौद्र रूप अपनाकर लुटेरों को खुलेआम ललकारा, जिसे देख हमलावर डरकर भाग खड़े हुए. हरजिंद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम परिवार की सुरक्षा के लिए उठाया. उन्होंने युवतियों को आत्मरक्षा के लिए ‘गतका’ सीखने और शस्त्र साथ रखने की नसीहत दी है ताकि वे सुरक्षित रह सकें.

High Protein Diet Risks | Women Health Tips | स्वास्थ्य पर हाई प्रोटीन का असर क्या होता है | फिटनेस ट्रेंड का साइड इफेक्ट |

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Last Updated:February 21, 2026, 21:08 IST Protein Side Effects: सोशल मीडिया पर दिखने वाली परफेक्ट बॉडी की चाहत कहीं आपकी सेहत की दुश्मन न बन जाए. दरअसल, महिलाओं में इन दिनों बिना डॉक्टरी सलाह के हाई-प्रोटीन डाइट और सप्लीमेंट लेने का एक ऐसा ट्रेंड बढ़ा है, जिसने चिंता बढ़ा दी है. आखिर वो कौन सी गलती है जो फिटनेस के नाम पर आपके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर भारी पड़ रही है? प्रोटीन की वह कौन सी सीमा है, जिसे पार करते ही शरीर के अंदर समस्याएं शुरू हो जाती है? जो उन महिलाओं के लिए एक चेतावनी है जो इंटरनेट इन्फ्लुएंसर्स की बातों को बिना सोचे-समझे सच मान बैठी हैं. कन्नौज: सोशल मीडिया पर इन दिनों वजन घटाने और फिट दिखने की होड़ मची हुई है, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक गंभीर स्वास्थ्य संकट भी छिपा है. इंटरनेट पर मौजूद फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स की बातों में आकर कई महिलाएं बिना किसी डॉक्टरी सलाह के हाई-प्रोटीन डाइट और महंगे सप्लीमेंट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रही हैं. कन्नौज जिला अस्पताल के विशेषज्ञों ने इस बढ़ते ट्रेंड पर गहरी चिंता जताई है और महिलाओं को आगाह किया है कि बिना विशेषज्ञ की देखरेख के पोषक तत्वों का असंतुलन शरीर को स्थाई नुकसान पहुंचा सकता है. जरूरत से ज्यादा प्रोटीन बन सकता है शरीर पर बोझप्रोटीन मांसपेशियों के निर्माण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक जरूरी तत्व है, लेकिन इसकी अति सेहत के लिए घातक साबित हो सकती है. जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शक्ति बसु के अनुसार, जब महिलाएं शरीर की वास्तविक जरूरत को समझे बिना केवल प्रोटीन पर निर्भर हो जाती हैं, तो इसका सीधा असर उनके पाचन तंत्र पर पड़ता है. आवश्यकता से अधिक प्रोटीन का सेवन मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देता है जिससे गैस, पेट फूलने और कब्ज जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. इसके अलावा, यह स्थिति शरीर के भीतर के महत्वपूर्ण अंगों पर अतिरिक्त दबाव डालती है जिससे लंबे समय में अन्य जटिल बीमारियां जन्म ले सकती हैं. प्रोटीन की मात्रा तय करना बहुत जरूरी हैहर महिला के शरीर की बनावट और उसकी जीवनशैली अलग होती है, इसलिए प्रोटीन की मात्रा भी सबके लिए एक समान नहीं हो सकती. विशेषज्ञों का कहना है कि एक सामान्य महिला को उसके प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 1.75 से 1.80 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है. जो महिलाएं जिम में भारी कसरत करती हैं, उनके लिए यह मात्रा थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन गर्भावस्था या मेनोपॉज जैसी विशेष स्थितियों में यह पूरी तरह डॉक्टर के परामर्श पर निर्भर होना चाहिए. बिना सोचे-समझे किसी भी डाइट चार्ट को फॉलो करना न केवल बेअसर रहता है बल्कि हार्मोनल असंतुलन का कारण भी बन सकता है. पाउडर के बजाय प्राकृतिक स्रोतों पर दें ध्यानडॉ. शक्ति बसु ने महिलाओं को सलाह दी है कि उन्हें बाजाBAर में बिकने वाले डिब्बाबंद प्रोटीन पाउडर के बजाय रसोई में मौजूद प्राकृतिक खाद्य पदार्थों पर भरोसा करना चाहिए. दालें, पनीर, मछली, अंडा, सोयाबीन, दही और नट्स प्रोटीन के सबसे सुरक्षित स्रोत हैं जो शरीर को अन्य जरूरी विटामिन भी प्रदान करते हैं. केवल प्रोटीन बढ़ाने से ही वजन कम नहीं होता है, बल्कि इसके लिए सही मात्रा में पानी पीना, पर्याप्त नींद लेना और नियमित शारीरिक व्यायाम करना भी उतना ही आवश्यक है. सेहत से जुड़े इन खतरों को पहचानना है जरूरीहाई-प्रोटीन डाइट के दौरान शरीर अक्सर कुछ चेतावनी भरे संकेत देता है जिन्हें महिलाएं अक्सर अनदेखा कर देती हैं. यदि डाइट बदलने के बाद आपको लगातार सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन या डिहाइड्रेशन महसूस हो रहा है, तो यह समझ लेना चाहिए कि शरीर इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहा है. विशेषज्ञों ने अपील की है कि महिलाओं को सोशल मीडिया के शॉर्टकट तरीकों के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुभव को प्राथमिकता देनी चाहिए. फिट रहने की चाहत में अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करना किसी भी नजरिए से सही नहीं है और किसी भी बड़े बदलाव से पहले एक्सपर्ट की राय लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें Location : Kannauj,Uttar Pradesh First Published : February 21, 2026, 21:08 IST

नरसिंहपुर हाईवे चौराहे पर मुक्तिधाम नहीं:अंतिम संस्कार के लिए 2 किमी दूर लोलरी जाना पड़ता, लोग बोले- कई बार शिकायत की

नरसिंहपुर हाईवे चौराहे पर मुक्तिधाम नहीं:अंतिम संस्कार के लिए 2 किमी दूर लोलरी जाना पड़ता, लोग बोले- कई बार शिकायत की

नरसिंहपुर जिले में नेशनल हाईवे 44 और 45 को जोड़ने वाले चौराहे के पास रहने वाले लोगों को मुक्तिधाम नहीं होने से समस्या का सामना करना पड़ रहा है। करीब 500 की आबादी वाले इस इलाके में आज तक मुक्तिधाम (श्मशान घाट) की सुविधा नहीं मिल पाई है। मुक्तिधाम न होने की वजह से यहां के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए अपने गांव से लगभग 2 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत लोलरी जाना पड़ता है। दूरी ज्यादा होने के कारण परिजनों को शव यात्रा निकालने में काफी दिक्कत आती है। कई बार तो मजबूरी में शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर ले जाना पड़ता है। स्थानीय निवासी विमलेश पटेल का कहना है कि दुख की घड़ी में इस सुविधा का न होना लोगों की परेशानी और बढ़ा देता है। सरकारी जमीन की कमी बनी बाधा इस समस्या को लेकर जब ग्राम पंचायत लोलरी की सचिव उमा श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने एक बड़ी तकनीकी दिक्कत बताई। उनके अनुसार, राजमार्ग क्षेत्र में सरकार के पास अपनी कोई जमीन खाली नहीं है। वहां जितनी भी जमीन है, वह निजी (प्राइवेट) है और उसकी कीमत बहुत ज्यादा है। पंचायत के पास इतना बजट नहीं है कि वह इतनी महंगी जमीन खरीद सके, यही वजह है कि मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने की प्रशासन से मांग स्थानीय लोग कई बार इस मामले में गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का कोई रास्ता निकाला जाए और क्षेत्र में जल्द से जल्द मुक्तिधाम बनवाया जाए ताकि लोगों को भटकना न पड़े।