Saturday, 10 Oct 2026 | 02:30 PM

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मीनाक्षी शेषाद्री बोलीं- शास्त्रीय नृत्य गांव तक ले जाऊंगी:30 साल बाद खरगोन में दूसरी पारी का ऐलान; कहा- भविष्य को लेकर बहुत उत्सुक

मीनाक्षी शेषाद्री बोलीं- शास्त्रीय नृत्य गांव तक ले जाऊंगी:30 साल बाद खरगोन में दूसरी पारी का ऐलान; कहा- भविष्य को लेकर बहुत उत्सुक

फिल्म अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री शनिवार शाम 5:30 बजे खरगोन पहुंची। वे नवग्रह मेले के समापन पर शास्त्रीय शास्त्री नृत्य प्रस्तुति में शामिल हो रही हैं। खरगोन पहुंचने पर 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री मीनाक्षी ने कहा कि वह बॉलीवुड में 30 साल के ब्रेक के बाद अपनी दूसरी पारी के लिए तैयार हैं। भरतनाट्यम थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन इस विशेष तरीके से किया जाए तो गांव तक के लोग आसानी से समझ सकते हैं। वे लेवल 1 व लेवल 2 सिटी से लेकर हिंदुस्तान के गांव तक शास्त्रीय संगीत को पहुंचाना चाहती है। खरगोन से इसकी शुरुआत कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं एक ऐसे परिवार में जन्मी जहां संगीत, नृत्य, अभिनय, शास्त्रीय ज्ञान व संस्कृत प्रचलित रहा। उसे वजह से मैं चलने से पहले नृत्य करना सीख लिया। मेरी मां ही मेरी गुरु थी भरतनाट्यम शैली में। शादी कर USA चली गईं थी पूर्व मिस इंडिया मीनाक्षी ने बताया दिल्ली में जब स्कूल की 12वीं कक्षा में थी तब मजाक में ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग ले लिया था आश्चर्य की बात थी कि मिस इंडिया भी चुन ली गई। उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। फौरन कई फिल्म भी ऑफर हो गई। मेरे पापा अंग्रेजी में समझाते थे सक्सेस इस एपीसी। ए मतलब एबिलिटी यानी योग्यता। बी यानी ब्रेक। यानी अपॉर्चुनिटी का सही दरवाजे से दस्तक देना। सी मतलब करेज यानी आत्म शक्ति, आत्मविश्वास व बड़ी शक्ति में विश्वास। मेरे सफर में यह तीन बातें सम्मिलित थी। 80-90 के दशक में 80 से 90 फिल्में की थी जिसमें हिंदी भाषा के अलावा तमिल तेलुगू की फिल्में भी शामिल हैं। उसके बाद शादी कर USA चली गई। 30 साल के गैप के बाद मैं भविष्य को लेकर उत्सुक हूं। दामिनी एक फिल्म है और मैंने उसमें दामिनी का पात्र किया। फिल्म में जो बताया गया आज भी हिंदुस्तान में वह हावी है। इसका दमन जरूरी है। महिलाओं को साहस दिखाने की आवश्यकता है और यह भारत है जहां शक्ति रूप से संसार रचा गया। शक्ति रूप से ही ठीक किया जा सकता है। मुझे अश्लीलता पसंद नहीं है। मैं वैसे ही पत्र निभाउं जो परिवार के साथ देख सकूं। शॉर्टकट से सक्सेस पर उन्होंने कहा, आज घोर कलयुग है। लक्ष्मी को शॉर्टकट से पा सकते हैं लेकिन सत्य की राह ही सही लक्ष्मी है। परिवर्तन का दौर है। सोशल मीडिया की वजह से बड़े भी फिल्में भी नहीं चल रही है।

एनेस्थेसिया ओवरडोज से 17 साल के लड़के की हुई मौत:दो डॉक्टरों पर गैरइरादतन हत्या के आरोप तय; सबूतों के आधार पर चलेगा ट्रायल

एनेस्थेसिया ओवरडोज से 17 साल के लड़के की हुई मौत:दो डॉक्टरों पर गैरइरादतन हत्या के आरोप तय; सबूतों के आधार पर चलेगा ट्रायल

इंदौर में सर्जरी के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही से 17 साल के किशोर अमित सेन की मौत के मामले में कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है। जिला कोर्ट ने दो डॉक्टरों डॉ. कुश बंडी और डॉ. खुशबू चौहान के खिलाफ भादंवि की धारा 304 (भाग-2)/34 के तहत आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने दोनों आरोपियों द्वारा आरोपों से मुक्त करने के लिए दायर आवेदन पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, खारिज कर दिए। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से ट्रायल के लिए समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 मार्च तय की है। अब दोनों आरोपियों के खिलाफ नियमित ट्रायल चलेगा। यह है मामला पुलिस जांच के अनुसार, एनेस्थेसिया की ओवरडोज दिए जाने और अन्य चिकित्सकीय लापरवाहियों के कारण अमित सेन की मौत हो गई। दरअसल सड़क हादसे में घायल अमित को 29 मई 2023 को लसूडिया थाना क्षेत्र से राजश्री नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। उसके बाएं पैर की सर्जरी होनी थी, इसी दौरान बेहोशी के इंजेक्शन के बाद उसकी हालत बिगड़ी और मृत्यु हो गई। मामले में पहले अस्पताल संचालक डॉ. देवेंद्र भार्गव, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कुश बंडी और एनेस्थेटिस्ट डॉ. खुशबू चौहान के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया था। हालांकि 24 फरवरी 2024 को डॉ. भार्गव के निधन के बाद उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी गई। शेष दो डॉक्टरों के खिलाफ चालान पहले ही पेश हो चुका है और अब ट्रायल आगे बढ़ेगा। जांच में सामने आई गंभीर खामियां घटना के बाद तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर नर्सिंग होम की जांच कराई गई थी, जिसमें कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं। इसके बाद नर्सिंग होम को सील भी किया गया। मृतक अमित अपने पिता रिंकू सेन का इकलौता पुत्र था।

झाबुआ में कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ:मंत्री निर्मला भूरिया ने जैविक खेती पर जोर दिया

झाबुआ में कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ:मंत्री निर्मला भूरिया ने जैविक खेती पर जोर दिया

झाबुआ के कृषि विज्ञान केंद्र प्रक्षेत्र में शनिवार को दो दिवसीय जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ हुआ। इसका उद्देश्य कृषक कल्याण वर्ष के संकल्प को साकार करना है। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया मुख्य अतिथि थीं, जबकि कलेक्टर नेहा मीना ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मेले का फोकस कृषि, उद्यानिकी तकनीक विस्तारण और तिलहन मिशन पर है, जिसका लक्ष्य किसानों को आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और उन्नत विपणन प्रणालियों से जोड़ना है। अपने संबोधन में मंत्री निर्मला भूरिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 को किसान कल्याण के लिए समर्पित किया गया है। मंत्री ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य और भूमि पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति आगाह किया। उन्होंने कृषि सखियों और उपस्थित जनसमूह से मिश्रित खेती व जैविक पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। कलेक्टर नेहा मीना ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता केवल मेले का आयोजन नहीं, बल्कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के किसान तक पहुंचाना है। उन्होंने जिले की जैविक खेती के क्षेत्र में उपलब्धियों का जिक्र किया। मीना ने वैज्ञानिकों से अपील की कि वे किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में तकनीकी प्रशिक्षण दें, ताकि ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम के दौरान ग्राम खेड़ी के विमल भाभोर को बायो रिसोर्स सेंटर के लिए सहायता प्रदान की गई। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और फसल बीमा योजना के तहत कई हितग्राहियों को ड्रिप सिस्टम और बीमा पॉलिसी वितरित की गईं। उद्यानिकी और पशुपालन विभाग द्वारा भी ट्रैक्टर, सब्जी खेती और बकरी पालन के लिए लाखों रुपए की सहायता राशि के चेक प्रदान किए गए। मेले में लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों ने सूक्ष्म सिंचाई, नरवाई प्रबंधन और आधुनिक कृषि यंत्रों की बारीकियों को समझा। कार्यक्रम के समापन पर मंत्री भूरिया ने उपस्थित जनसमूह को नशामुक्ति की शपथ दिलाई। उन्होंने एक प्रश्नोत्तरी के माध्यम से कृषि सखी गंगा मेडा को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। मेले की अन्य तस्वीरें…

सूर्या बोले– अभिषेक के फॉर्म की चिंता न करें:उनकी चिंता करें, जिसके खिलाफ उनका बल्ला चलेगा; वर्ल्डकप के तीनों मैच में 0 पर आउट हुए

सूर्या बोले– अभिषेक के फॉर्म की चिंता न करें:उनकी चिंता करें, जिसके खिलाफ उनका बल्ला चलेगा; वर्ल्डकप के तीनों मैच में 0 पर आउट हुए

टी-20 वर्ल्ड कप के तीन मैचों में बिना खाता खोले आउट हुए टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा के सपोर्ट में कप्तान सूर्यकुमार यादव का बयान आया है। शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सूर्या बोले, अभिषेक शर्मा का फॉर्म चिंता का विषय नहीं है। मुझे चिंता उन लोगों की है, जो अभिषेक की चिंता कर रहे हैं। मुझे फिक्र उन टीमों की है, जिनके खिलाफ अभिषेक का बल्ला चलेगा। उसने पिछले साल टीम के लिए सब कुछ किया था, अब हमारी बारी है कि हम उसका साथ दें। भारत का मुकाबला रविवार को सुपर-8 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ अहमदाबाद में खेला जाएगा। अब तक खाता भी नहीं खेल सके टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा का मौजूदा फॉर्म चिंता का विषय बना हुआ है। वे लगातार तीन मैचों में शून्य पर आउट हुए हैं। इस वर्ल्ड कप में उन्होंने अब तक तीन मुकाबले खेले हैं, लेकिन उनका खाता भी नहीं खुल पाया है। प्लेइंग-11 में बदलाव पर हंस पड़े जब प्लेइंग इलेवन में बदलाव और संजू सैमसन को शामिल करने पर सवाल पूछा गया तो सूर्यकुमार हंस पड़े। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि क्या अभी अभिषेक को हटा दूं? या तिलक को? पिच और परिस्थितियों पर भरोसा पिच को लेकर सूर्यकुमार ने कहा कि टीम हर तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार है। उन्होंने माना कि विकेट ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं थे, लेकिन टीम ने हालात के मुताबिक खुद को ढालने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा, बल्लेबाजी में परिस्थिति का सम्मान करना जरूरी है। हमारे पास पर्याप्त कौशल है। कभी-कभी स्थिति के अनुसार खेलना पड़ता है। हमारे पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो मैच का रुख बदल सकते हैं। ——————————- क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें ———————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की कमजोरी ऑफ-स्पिन:13 टीमों में भारत का स्कोरिंग रेट सबसे खराब टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में टीम इंडिया का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन एक बड़ी कमजोरी भी सामने आई है। भारतीय टॉप ऑर्डर के पहले आठ बल्लेबाजों में से छह बाएं हाथ के हैं। टीमें इसी का फायदा उठाते हुए भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ लगातार ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…

सूर्या बोले– अभिषेक के फॉर्म की चिंता न करें:उनकी चिंता करें, जिनके खिलाफ उनका बल्ला चलेगा; वर्ल्डकप के तीनों मैच में 0 पर आउट हुए

सूर्या बोले– अभिषेक के फॉर्म की चिंता न करें:उनकी चिंता करें, जिनके खिलाफ उनका बल्ला चलेगा; वर्ल्डकप के तीनों मैच में 0 पर आउट हुए

टी-20 वर्ल्ड कप के तीन मैचों में बिना खाता खोले आउट हुए टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा के सपोर्ट में कप्तान सूर्यकुमार यादव का बयान आया है। शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सूर्या बोले, अभिषेक शर्मा का फॉर्म चिंता का विषय नहीं है। मुझे चिंता उन लोगों की है, जो अभिषेक की चिंता कर रहे हैं। मुझे फिक्र उन टीमों की है, जिनके खिलाफ अभिषेक का बल्ला चलेगा। उसने पिछले साल टीम के लिए सब कुछ किया था, अब हमारी बारी है कि हम उसका साथ दें। भारत का मुकाबला रविवार को सुपर-8 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ अहमदाबाद में खेला जाएगा। प्लेइंग-11 में बदलाव पर हंस पड़े सूर्या जब प्लेइंग इलेवन में बदलाव और संजू सैमसन को शामिल करने पर सवाल पूछा गया तो सूर्यकुमार हंस पड़े। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि क्या अभी अभिषेक को हटा दूं? या तिलक को? कप्तान बोले-पिच और परिस्थितियों पर भरोसा पिच को लेकर सूर्यकुमार ने कहा कि टीम हर तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार है। उन्होंने माना कि विकेट ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं थे, लेकिन टीम ने हालात के मुताबिक खुद को ढालने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा, बल्लेबाजी में परिस्थिति का सम्मान करना जरूरी है। हमारे पास पर्याप्त कौशल है। कभी-कभी स्थिति के अनुसार खेलना पड़ता है। हमारे पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो मैच का रुख बदल सकते हैं। नामीबिया के खिलाफ नहीं खेले थे अभिषेक अभिषेक टूर्नामेंट के दूसरे मुकाबले में नामीबिया के खिलाफ पेट में इन्फेक्शन के कारण नहीं खेल सके थे। उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दो दिनों के लिए दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती भी कराया गया था। हालांकि इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और वे फिर से टीम से जुड़ गए। ——————————- क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें ———————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की कमजोरी ऑफ-स्पिन:13 टीमों में भारत का स्कोरिंग रेट सबसे खराब टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में टीम इंडिया का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन एक बड़ी कमजोरी भी सामने आई है। भारतीय टॉप ऑर्डर के पहले आठ बल्लेबाजों में से छह बाएं हाथ के हैं। टीमें इसी का फायदा उठाते हुए भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ लगातार ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…

स्विट्जरलैंड 1 करोड़ की आबादी के बाद रोक देगा एंट्री:भीड़ से थका ‘धरती का स्वर्ग‘, 14 जून को होगा जनमत संग्रह, प्रयोग पर पूरी दुनिया की नजर

स्विट्जरलैंड 1 करोड़ की आबादी के बाद रोक देगा एंट्री:भीड़ से थका ‘धरती का स्वर्ग‘, 14 जून को होगा जनमत संग्रह, प्रयोग पर पूरी दुनिया की नजर

यूरोप का समृद्ध और अनुशासित देश अब एक असाधारण फैसले की दहलीज पर खड़ा है। 14 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में जनमत संग्रह होगा, जिसमें तय किया जाएगा कि 2050 तक देश की कुल स्थायी आबादी अधिकतम 1 करोड़ पर सीमित की जाए या नहीं। यह प्रस्ताव दक्षिणपंथी दल स्विस पीपुल्स पार्टी ने आगे बढ़ाया है। स्विट्जरलैंड की वर्तमान आबादी लगभग 91 लाख है। पिछले बीस वर्षों में वृद्धि का बड़ा कारण बाहरी कामगारों का आगमन रहा है। कुल जनसंख्या का पच्चीस प्रतिशत हिस्सा विदेशी मूल का है। इसी तेज वृद्धि ने आवास संकट को गहरा किया है। ज्यूरिख और जिनेवा जैसे शहरों में खाली मकानों की दर एक प्रतिशत से भी कम बताई जाती है। किराये बढ़े हैं। अस्पतालों में प्रतीक्षा समय लंबा हुआ है, सड़कों, रेल मार्गों पर भीड़ बढ़ी है। प्रस्तावित प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि 1 करोड़ की सीमा जन्म दर से नहीं, बल्कि आव्रजन पर नियंत्रण के जरिये लागू की जाएगी। ​जिसके अनुसार यदि आबादी 95 लाख से ऊपर जाती है, तो सरकार को वीसा, कामगार कोटा, शरण नियम और पारिवारिक पुनर्मिलन जैसे प्रावधानों को सख्त करना होगा। यदि जनसंख्या 1 करोड़ पार जाती है, तो आव्रजन को और सीमित कर आबादी को वापस सीमा के भीतर लाने के उपाय करने होंगे। समर्थक इसे अव्यवस्था की रफ्तार थामने का तरीका बताते हैं। वहीं ज्यूरिख विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री यान आइगनबर्गर मानते हैं कि उत्पादकता वृद्धि का महत्वपूर्ण हिस्सा कुशल विदेशी श्रमिकों से आता है। कठोर सीमा से श्रम बाजार में कमी और कर राजस्व पर दबाव पड़ सकता है। स्विस नियोक्ता संघ के अध्यक्ष वैलेंटिन वोग्ट पहले संकेत दे चुके हैं कि स्वास्थ्य, निर्माण और सेवा क्षेत्र पहले से श्रमिक कमी झेल रहे हैं। आबादी सीमा से यह संकट गहरा सकता है। अब फैसला स्विस मतदाताओं के हाथ में है, लेकिन इसकी गूंज वैश्विक बहस में दूर तक सुनाई देगी। कुल आबादी पर संवैधानिक सीमा का उदाहरण नहीं इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 2013 के बाद अवैध समुद्री प्रवेश रोका। हंगरी ने 2015 के बाद सीमा बाड़ और कड़े शरण नियम लागू किए। जापान ने लंबे समय तक सीमित आव्रजन रखा, लेकिन वृद्ध होती आबादी और श्रमिक कमी के कारण नियमों में ढील देनी पड़ी। स्विट्जरलैंड का प्रस्ताव इसलिए अलग है क्योंकि यह कुल आबादी की ऊपरी सीमा तय करने की कोशिश है। सवाल सीधा है कि भविष्य की समृद्धि खुली व्यवस्था से आएगी या नियंत्रित विस्तार से।

2 साल से प्रेग्नेंट बता रहे लोग:सरगुन मेहता ने अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी, रवि दुबे संग बेबी प्लानिंग खबरों को बताया झूठ

2 साल से प्रेग्नेंट बता रहे लोग:सरगुन मेहता ने अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी, रवि दुबे संग बेबी प्लानिंग खबरों को बताया झूठ

टीवी एक्ट्रेस सरगुन मेहता और उनके पति अभिनेता रवि दुबे के बारे में हाल ही में चल रही प्रेग्नेंसी अफवाहों ने मीडिया और सोशल मीडिया पर तूल पकड़ लिया था। कई न्यूज पोर्टल्स पर दावा किया कि यह कपल अपनी शादी के 12 साल बाद अपने पहले बच्चे का स्वागत करने वाला है। हालांकि, अब खुद सरगुन ने इसपर सख्त प्रतिक्रिया दी है और इन सभी अफवाहों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। शनिवार को सोशल मीडिया पर एक लंबा नोट साझा करते हुए सरगुन ने लिखा कि यह बिना चीजों की खबरें बहुत पहले से वायरल हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “लोगों को कैसे पता कि हम दोनों (मैं और रवि) के बारे में हमसे पहले ही प्रेग्नेंसी का पता चल गया है? कृपया इसे बंद करें।” सरगुन ने अपने नोट में यह भी मजाकिया लहजे में लिखा कि अगर मीडिया की बात मानी जाए तो वे पिछले दो साल से प्रेग्नेंट हैं- “इतनी लंबी प्रेग्नेंसी? जो कि सच से कोसों दूर है।’’ उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी में अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि कभी-कभी उनकी कैफे या सलून की फोटो को देखकर भी लोग यह मान लेते हैं कि वे प्रेग्नेंट हैं। सरगुन ने सवाल उठाया, “क्या वे मेरे डाक्टर्स को जानते हैं? या सिर्फ कुछ तस्वीरें देखकर अनाप-शनाप बातें बना रहे हैं?” उन्होंने लोगों से विनती की कि वे ऐसी अफवाहें फैलाने से पहले किसी विश्वसनीय स्रोत से पुष्टि करें। इससे पहले भी सरगुन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि शादी का मतलब हमेशा बच्चों की उम्मीद नहीं होती। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की जिंदगी की प्राथमिकताएं अलग होती हैं। कुछ लोग जल्दी माता-पिता बनते हैं, कुछ बाद मे, यह व्यक्ति के निर्णय पर निर्भर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की अफवाहें शादी की पवित्रता को छोटा कर देती हैं, जबकि हर रिश्ते की अपनी एक अलग यात्रा होती है। बता दें कि सरगुन मेहता और रवि दुबे ने टीवी शो ‘12/24 करोल बाग’ की शूटिंग के दौरान एक-दूसरे को डेट किया और 7 दिसंबर 2013 को शादी रचाई। रवि दुबे जल्द ही फिल्म ‘रामायण’ में लक्ष्मण के रोल में दिखाई देंगे, जबकि सरगुन ने हाल ही में पंजाबी फिल्म ‘सौंकन सौंकने 2’ में काम किया है।

अमेजन अब सबसे बड़ी कंपनी:10 साल में पहली बार पिछड़ी वॉलमार्ट, आय के पैमाने पर टेक सपोर्टेड कंपनी आगे निकली

अमेजन अब सबसे बड़ी कंपनी:10 साल में पहली बार पिछड़ी वॉलमार्ट, आय के पैमाने पर टेक सपोर्टेड कंपनी आगे निकली

रिटेल की दुनिया में एक नया युग शुरू हो चुका है। दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने वार्षिक राजस्व के मामले में वॉलमार्ट को पछाड़कर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी का खिताब अपने नाम कर लिया है। यह उपलब्धि न केवल अमेजन के विशाल विस्तार को दर्शाती है, बल्कि बाजार में तकनीक और क्लाउड कंप्यूटिंग के बढ़ते वर्चस्व का भी प्रमाण है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वॉलमार्ट ने 31 जनवरी को समाप्त हुए पिछले 12 महीनों के लिए 713.2 अरब डॉलर की बिक्री दर्ज की। इसके मुकाबले, अमेजन ने वर्ष 2025 के लिए 717 अरब डॉलर का राजस्व रिपोर्ट किया है। बेजोस द्वारा 1994 में एक गैरेज से शुरू हुआ यह सफर अब 717 अरब डॉलर की वार्षिक बिक्री तक पहुंच गया है, जो ई-कॉमर्स और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती ताकत का प्रमाण है। अमेजन वेब सर्विसेज की बदौलत आय वृद्धि 10 गुना विशेषज्ञों का मानना है कि अमेजन की यह बढ़त शुद्ध रिटेल के बजाय तकनीक की वजह से है। -क्लाउड का दबदबा: अमेजन का क्लाउड कंप्यूटिंग व्यवसाय, ‘अमेजन वेब सर्विसेज’ (एडब्ल्यूएस), इस कामयाबी का मुख्य आधार है। -डेटा का महत्व: यदि एडब्ल्यूएस के राजस्व को हटा दिया जाए, तो अमेजन की बिक्री 588 अरब डॉलर रह जाती। यानी एआई के युग में डेटा सेंटर्स के दम पर अमेजन ने यह मुकाम हासिल किया है। -विकास की रफ्तार: पिछले एक दशक में अमेजन का राजस्व वॉलमार्ट की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ा है। दोनों दिग्गज एक-दूसरे के क्षेत्र में सेंध लगा रहे दोनों कंपनियां एक-दूसरे के मुख्य क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश में हैं – वॉलमार्ट की ई-कॉमर्स में सफलता- अमेजन द्वारा ‘होल फूड्स’ खरीदने के बावजूद, वॉलमार्ट ऑनलाइन बिजनेस विकसित करने में आगे रही। – अमेजन की डिजिटल पहुंच- अमेजन के एप और वेबसाइट पर हर माह 2.7 अरब लोग आते हैं। वॉलमार्ट सबसे बड़ा फिजिकल रिटेलर है। एक्सपर्ट व्यू- यह अमेजन की एक खोखली जीत है सांता क्लारा यूनिवर्सिटी के रिटेल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के निदेशक कीर्ति कल्याणम का कहना है, ‘यह एक खोखली जीत है। अमेजन ने वॉलमार्ट को रिटेल के खेल में नहीं हराया, बल्कि एक ऐसे नए बिजनेस (क्लाउड) के जरिए पीछे छोड़ा है, जिसमें वॉलमार्ट मौजूद ही नहीं है।’ जेफ बेजोस दुनिया के चौथे सबसे अमीर शख्स, संपत्ति 228 अरब डॉलर ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस फिलहाल दुनिया के चौथे सबसे अमीर व्यक्ति हैं। उनकी कुल संपत्ति 228 अरब डॉलर आंकी गई है, जो मुख्य रूप से अमेजन में उनके शेयरों से जुड़ी है। मार्केट वैल्यू में एनवीडिया टॉप पर, अमेजन से दोगुनी, वॉलमार्ट से 4 गुनी राजस्व के मामले में भले ही अमेजन नंबर-1 हो, लेकिन निवेशकों की नजर में एनवीडिया दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। 4.5 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ एनवीडिया की वैल्यू अमेजन से दोगुनी और वॉलमार्ट से चार गुना है।

देवास में चलती ट्रेन में चढ़ते समय बुजुर्ग की मौत:पैर फिसलने से ट्रैक पर गिरे; जूते-चप्पल की खरीदी करने इंदौर जा रहे थे

देवास में चलती ट्रेन में चढ़ते समय बुजुर्ग की मौत:पैर फिसलने से ट्रैक पर गिरे; जूते-चप्पल की खरीदी करने इंदौर जा रहे थे

देवास रेलवे स्टेशन पर शनिवार को चलती ट्रेन में चढ़ने के प्रयास में एक 60 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। संतुलन बिगड़ने और पैर फिसलने के कारण वे ट्रेन की चपेट में आ गए। मृतक की पहचान देवास निवासी यूसुफ कमरी के रूप में हुई है। सूचना मिलते ही जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाकर मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, यूसुफ कमरी ऊना से इंदौर जा रही हिमाचल एक्सप्रेस में सवार होने का प्रयास कर रहे थे। ट्रेन स्टेशन से चल चुकी थी और इसी दौरान डिब्बे में चढ़ते समय उनका पैर फिसल गया। संतुलन बिगड़ने से वे ट्रेन की चपेट में आ गए। यह हादसा इतना गंभीर था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जूते-चप्पल की खरीदारी के लिए जा रहे थे इंदौर मृतक यूसुफ कमरी देवास में ही रहते थे और पेशे से जूते-चप्पल का व्यवसाय करते थे। शनिवार को वे अपने इसी व्यापार के सिलसिले में खरीदारी करने के लिए ट्रेन से इंदौर जा रहे थे। घटना के बाद स्टेशन पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। प्रारंभिक जांच में भी यही बात सामने आई है कि चलती ट्रेन में चढ़ने के प्रयास के दौरान संतुलन बिगड़ने से यह हादसा हुआ। पड़ोसी ने कहा- सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे हादसे की दुखद खबर लगते ही मृतक के परिचित और समाज के लोग स्टेशन पहुंच गए। मृतक के पड़ोसी सादिक अली ने बताया, “यूसुफ शूज़ का व्यापार करते थे। समाज को सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे हैं।” पुलिस अब इस पूरे मामले की वैधानिक जांच कर रही है।

हरदा की मंडियों में डॉलर चना औंधे भाव:10 हजार की उम्मीद पर 4-6 हजार ही दाम मिले, किसान उपज वापस लेकर लौटे

हरदा की मंडियों में डॉलर चना औंधे भाव:10 हजार की उम्मीद पर 4-6 हजार ही दाम मिले, किसान उपज वापस लेकर लौटे

हरदा जिले की मंडियों में गेहूं और चने की आवक शुरू हो गई है, लेकिन किसानों को उपज के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। इससे किसानों में निराशा है और कई किसान अपनी उपज बिना बेचे ही वापस लौट रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने डॉलर चना अच्छी कीमतों की उम्मीद में बोया था, लेकिन सरकारी नीतियों के कारण उन्हें बहुत कम दाम मिल रहे हैं। यदि यही स्थिति रही तो अगले साल से किसान डॉलर चना नहीं लगाएंगे। किसानों के अनुसार, जिस डॉलर चने का दाम 10,000 रुपए प्रति क्विंटल मिलना चाहिए था, उसके भाव मात्र 6,000 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहे हैं। जिले में किसानों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं; पहले ओलावृष्टि और अब उपज के कम दाम ने उनकी लागत निकालना भी मुश्किल कर दिया है। किसान उपज वापस लेकर लौट रहे मंडियों में डॉलर चना 4,000 से 5,500 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि खुदरा बाजार में यह 100 रुपए प्रति किलो (10,000 रुपए प्रति क्विंटल) बिक रहा है। दाम कम मिलने के कारण किसान अपनी उपज वापस ले जा रहे हैं। ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शेंकि खनूजा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात की मांग कम होने के कारण बाजार में मंदी का रुख है। वहीं, मंडी प्रशासन भी किसानों को उचित दाम दिलाने में विफल रहा है।