Friday, 02 Oct 2026 | 02:56 AM

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मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा रेसिपी: बेसन नहीं, घर में कम तेल में ऐसे बनाएं हाई प्रोटीन वाला मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा; जानिए विधि

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 कप ढीली मूंग दाल, 6 से 8 काली मिर्च पाउडर, 2 हरी मिर्च, 1 इंच बड़ा मसाला अदरक, 1 छोटा चम्मच अदरक, 1/4 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, हरा धनिया, नमक, 2 से 3 बड़ा मसाला तेल छवि: सोशल मीडिया भरवाँ के लिए: 2 आलू, 1 तरबूज़, 1/2 छोटा मसाला, 1/2 छोटा मसाला, स्वादानुसार नमक, हरा धनियां छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले मूंग दाल को 3 से 4 घंटे तक पानी में डूबो दें। इसके बाद पानी की स्वादिष्ट दाल को हरी मिर्च और अदरक के साथ पीस लें। ध्यान रखें कि बैटर सबसे ज्यादा पतला न हो। छवि: सोशल मीडिया अब बैटर में जीरा, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और हरा धनिया का मिश्रण अच्छी तरह मिला लें। दूसरी तरफ जमे हुए आलू को मैश करें और इसमें प्याज, चाट मसाला, नमक और हरा धनियां मिलाकर तैयार कर लें। छवि: फ्रीपिक आलू की स्टफिंग पर एक बेकार योजना फैली हुई है और दूसरी योजना से बनी हुई है। मित्र तो इसे तिकोना काट सकते हैं। इसके बाद तैयार ब्रेड को मूंग दाल के बैटर में अच्छी तरह से डुबोएं, ताकि सभी तरफ बैटर की परत लग जाए। छवि: एआई एक नॉन-स्टिक तवा या पैन गर्म करें और उस पर थोड़ा सा तेल डालें। अब ब्रेड पकौड़े को दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें। तैयार है आपका परमाणु ऊर्जा संयंत्र और हाई प्रोटीन मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा। छवि: एआई इसे हरी चटनी या टमाटर सॉस के साथ गर्मागर्म सर्व करें। दाल को ज्यादा महीन न पीसें, इससे पकौड़े ज्यादा कुरकुरे। अगर आलू की जगह पनीर की स्टफिंग का इस्तेमाल किया जाएगा तो प्रोटीन की मात्रा और बढ़ जाएगी। छवि: एआई डीप फ्राई करने की बजाय टीवी पर कम तेल बनाने से यह सबसे ज्यादा बनती है। स्वाद बढ़ाने के लिए बैटर में थोड़ा सा गरम मसाला भी मिला सकते हैं. छवि: एआई अगर आप स्वाद के साथ सेहत का भी ध्यान रखना चाहते हैं, तो यह मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा रेसिपी जरूर आजमाएं। यह बच्चा और बड़ा सभी को बेहद पसंद आएगा। छवि: सोशल मीडिया

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

हाल ही में टीजर रिलीज के बाद चर्चा में आई फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ का नया पोस्टर सामने आया है। पोस्टर फिल्म की अनोखी दुनिया और अलग अंदाज की झलक देता है। इसके जरिए मेकर्स ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाने की कोशिश की है। पोस्टर में अभिनेता अन्नू कपूर अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। वह एक बड़े वास्तु-प्रेरित चक्र के ऊपर रखी कमोड सीट पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। फिल्म की तरह पोस्टर का विजुअल भी हटकर और व्यंग्यात्मक है। इसमें भाग्य, दिशा और रोजमर्रा की उलझनों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाया गया है। फिल्म की टैगलाइन ‘करम बड़े या किस्मत?’ कहानी के मूल विचार को सामने लाती है। यह सवाल उठाती है कि इंसान की जिंदगी फैसले और कर्म तय करते हैं या किस्मत उसकी दिशा बदलती है। पोस्टर में मौजूद बाकी किरदार भी कहानी के दिलचस्प मोड़ों की झलक देते हैं। फिल्म में अन्नू कपूर के साथ रुखसार रहमान, बृजेंद्र काला, पवन मल्होत्रा, इश्तियाक खान, जीवेशु अहलूवालिया, राजेंद्र सेठी, सुमित गुलाटी और नितिन अरोड़ा अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण संदीप कपूर और प्रिया कपूर ने प्रोमोडोम मोशन पिक्चर्स के बैनर तले किया है। कहानी संदीप कपूर ने लिखी है, जबकि निर्देशन रविंदर सिवाच ने किया है। पोस्टर को लेकर निर्माता संदीप कपूर ने कहा, “हम चाहते थे कि पोस्टर फिल्म की असली पहचान को सामने लाए। यह मजेदार, थोड़ा अलग और दर्शकों में जिज्ञासा पैदा करने वाला है। फिल्म दिखाती है कि लोग अक्सर अपने सवालों के जवाब बाहर ढूंढ़ते हैं, जबकि जिंदगी उन्हें अपने तरीके से नई सीख देती रहती है।”

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

हाल ही में टीजर रिलीज के बाद चर्चा में आई फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ का नया पोस्टर सामने आया है। पोस्टर फिल्म की अनोखी दुनिया और अलग अंदाज की झलक देता है। इसके जरिए मेकर्स ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाने की कोशिश की है। पोस्टर में अभिनेता अन्नू कपूर अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। वह एक बड़े वास्तु-प्रेरित चक्र के ऊपर रखी कमोड सीट पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। फिल्म की तरह पोस्टर का विजुअल भी हटकर और व्यंग्यात्मक है। इसमें भाग्य, दिशा और रोजमर्रा की उलझनों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाया गया है। फिल्म की टैगलाइन ‘करम बड़े या किस्मत?’ कहानी के मूल विचार को सामने लाती है। यह सवाल उठाती है कि इंसान की जिंदगी फैसले और कर्म तय करते हैं या किस्मत उसकी दिशा बदलती है। पोस्टर में मौजूद बाकी किरदार भी कहानी के दिलचस्प मोड़ों की झलक देते हैं। फिल्म में अन्नू कपूर के साथ रुखसार रहमान, बृजेंद्र काला, पवन मल्होत्रा, इश्तियाक खान, जीवेशु अहलूवालिया, राजेंद्र सेठी, सुमित गुलाटी और नितिन अरोड़ा अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण संदीप कपूर और प्रिया कपूर ने प्रोमोडोम मोशन पिक्चर्स के बैनर तले किया है। कहानी संदीप कपूर ने लिखी है, जबकि निर्देशन रविंदर सिवाच ने किया है। पोस्टर को लेकर निर्माता संदीप कपूर ने कहा, “हम चाहते थे कि पोस्टर फिल्म की असली पहचान को सामने लाए। यह मजेदार, थोड़ा अलग और दर्शकों में जिज्ञासा पैदा करने वाला है। फिल्म दिखाती है कि लोग अक्सर अपने सवालों के जवाब बाहर ढूंढ़ते हैं, जबकि जिंदगी उन्हें अपने तरीके से नई सीख देती रहती है।”

'भारत भाग्य विधाता’ में आतंक नहीं, नर्सों का साहस दिखाया:मनोज तापड़िया बोले- स्क्रिप्ट सुनते ही कंगना ने हामी भरी; विज्ञापन का सफर छोड़ बनाई फिल्म

'भारत भाग्य विधाता’ में आतंक नहीं, नर्सों का साहस दिखाया:मनोज तापड़िया बोले- स्क्रिप्ट सुनते ही कंगना ने हामी भरी; विज्ञापन का सफर छोड़ बनाई फिल्म

विज्ञापन जगत में 27 साल का लंबा सफर तय करने के बाद निर्देशक मनोज तापड़िया ने फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ से सिनेमाई पर्दे पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह फिल्म 26/11 मुंबई हमले के दौरान कामा अस्पताल में नर्सों और स्टाफ द्वारा दिखाए गए अभूतपूर्व साहस की उस अनकही कहानी को बयां करती है, जो अब तक आम जनता के सामने नहीं आ पाई थी। फिल्म की रिलीज के बाद मनोज तापड़िया ने इसके निर्माण, कंगना रनोट के साथ काम करने और फिल्म की गहरी रिसर्च से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव साझा किए। न्यूज आर्टिकल से मिला आइडिया, पर्दे पर उतारा साहस मनोज तापड़िया खुद को यथार्थवाद (रियलिज्म) का फिल्मकार मानते हैं। उनका कहना है कि इस फिल्म का विचार किसी काल्पनिक कहानी से नहीं, बल्कि एक वास्तविक घटना से आया था। 26/11 हमले के दौरान वे खुद मुंबई में ही थे। हमले के कुछ समय बाद उन्होंने कामा अस्पताल से जुड़ी एक छोटी सी खबर पढ़ी, जिसने उनके दिल को छू लिया। फिल्म में आतंक के खौफ से ज्यादा इंसानी जज्बे को प्राथमिकता दी गई है। मनोज बताते हैं: “मेरा मकसद सिर्फ आतंकवादी हमला या गोलियों की गूंज दिखाना नहीं था, बल्कि मैं उस रात अस्पताल के भीतर मौजूद लोगों का मानसिक तनाव और उनका अनुभव दिखाना चाहता था। अगर सिर्फ हमला दिखाता तो वह एक घटना बनकर रह जाती, लेकिन जब दर्शक किरदारों के दर्द से जुड़ते हैं, तो फिल्म सीधे दिल पर असर करती है।” इस पूरी घटना में मनोज को जिस बात ने सबसे ज्यादा झकझोरा, वह था नर्सों का निहत्था साहस। जिन महिलाओं के पास आत्मरक्षा के लिए एक लाठी तक नहीं थी, उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सैकड़ों मरीजों को सुरक्षित बचाया। वे चाहते तो पिछले दरवाजे से भाग सकते थे, लेकिन वे डटे रहे। यही इस फिल्म की असली आत्मा है, जिसे नर्सों के दृष्टिकोण से पर्दे पर उतारा गया है। बिना स्टार को सोचे लिखी कहानी, कंगना का शार्प स्क्रिप्ट सेंस फिल्मों के लेखन को लेकर मनोज का एक सख्त नियम है वे कभी भी किसी स्टार को ध्यान में रखकर स्क्रिप्ट नहीं लिखते। उनका मानना है कि पहले कहानी और संवाद पूरी तरह तैयार होने चाहिए, उसके बाद ही किरदारों के लिए सही कलाकारों का चयन होना चाहिए। अगर किसी स्टार को सोचकर लिखा जाए और वह मना कर दे, तो पूरी कहानी प्रभावित होती है। ‘भारत भाग्य विधाता’ लिखते समय भी उनके दिमाग में कोई नाम नहीं था। जब स्क्रिप्ट पूरी हुई, तब कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के जरिए यह कहानी कंगना रनोट तक पहुंची। मनोज के मुताबिक, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे इतनी आसानी से कंगना तक पहुंच पाएंगे। लेकिन कंगना का स्क्रिप्ट सेंस बेहद तेज है; उन्होंने कहानी सुनते ही इसके विजन को समझा और तुरंत फिल्म के लिए हामी भर दी। कंगना के आने के बाद फिल्म का स्केल बड़ा हुआ और निर्माता शैलेश सिंह व जयंतीलाल गड़ा भी इस प्रोजेक्ट से जुड़े। सेट पर सभी को सुझाव देने की आजादी थी, जिससे दृश्यों को और बेहतर बनाने में मदद मिली। 5 घंटे के इंटरव्यू और कोर्ट दस्तावेजों पर टिकी प्रामाणिकता एक वास्तविक और संवेदनशील ऐतिहासिक घटना पर फिल्म बनाना बड़ी चुनौती थी, जिसके लिए विस्तृत रिसर्च की गई। दिलचस्प बात यह है कि मनोज ने खुद सीधे तौर पर पीड़ितों से मुलाकात नहीं की। इसके बजाय, उनकी टीम ने पत्रकारिता बैकग्राउंड के लोगों की मदद से वास्तविक किरदारों के इंटरव्यू रिकॉर्ड किए। राइटिंग टीम ने करीब 5 घंटे का वीडियो और ऑडियो मटेरियल महीनों तक बारीकी से देखा। रिसर्च का मकसद सिर्फ सूखे आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि पीड़ितों के हावभाव और उनके मानवीय पक्ष को समझना था।प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए पुलिस रिकॉर्ड, अदालती दस्तावेज और अस्पताल के मूल लेआउट का बारीकी से अध्ययन किया गया। इसी गहरी रिसर्च का नतीजा है कि फिल्म में इस्तेमाल की गई स्थानीय शब्दावली और नर्सों का व्यवहार पूरी तरह वास्तविक नजर आता है। 100 ड्राफ्ट्स की मेहनत और समीक्षकों को जवाब फिल्म की स्क्रिप्टिंग प्रक्रिया बेहद सघन रही। शुरुआती लेखन भले ही दो महीने में पूरा हो गया था, लेकिन मनोज फिल्म की डबिंग खत्म होने तक इसमें बदलाव करते रहे। इसी वजह से फाइनल होने तक स्क्रिप्ट के लगभग 100 ड्राफ्ट तैयार किए गए। तकनीकी रूप से यह फिल्म जितनी सरल दिखती है, इसे शूट करना उतना ही जटिल था। अस्पताल के सीमित स्पेस में लगभग 70 मुख्य और सहायक कलाकारों के साथ समन्वय बिठाना चुनौतीपूर्ण था। बजट और सीमित संसाधनों के कारण पूरी टीम ने महज 35 दिनों के कड़े शेड्यूल में शूटिंग पूरी की। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ समीक्षकों का कहना था कि यह पूरी मुंबई के 26/11 के व्यापक माहौल को नहीं दिखा पाती। इस पर मनोज ने बहुत स्पष्टता से अपना नजरिया रखा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी पूरी मुंबई का हमला दिखाना था ही नहीं; उनका फोकस सिर्फ कामा अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सों की मानसिक स्थिति और उस रात के तनाव को दर्शकों तक हूबहू पहुंचाना था। आगे के विजन पर बात करते हुए मनोज ने कहा कि वे भविष्य में भी ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जो दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ कुछ सोचने पर भी मजबूर करें।

'भारत भाग्य विधाता’ में आतंक नहीं, नर्सों का साहस दिखाया:मनोज तापड़िया बोले- स्क्रिप्ट सुनते ही कंगना ने हामी भरी; विज्ञापन का सफर छोड़ बनाई फिल्म

'भारत भाग्य विधाता’ में आतंक नहीं, नर्सों का साहस दिखाया:मनोज तापड़िया बोले- स्क्रिप्ट सुनते ही कंगना ने हामी भरी; विज्ञापन का सफर छोड़ बनाई फिल्म

विज्ञापन जगत में 27 साल का लंबा सफर तय करने के बाद निर्देशक मनोज तापड़िया ने फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ से सिनेमाई पर्दे पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह फिल्म 26/11 मुंबई हमले के दौरान कामा अस्पताल में नर्सों और स्टाफ द्वारा दिखाए गए अभूतपूर्व साहस की उस अनकही कहानी को बयां करती है, जो अब तक आम जनता के सामने नहीं आ पाई थी। फिल्म की रिलीज के बाद मनोज तापड़िया ने इसके निर्माण, कंगना रनोट के साथ काम करने और फिल्म की गहरी रिसर्च से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव साझा किए। न्यूज आर्टिकल से मिला आइडिया, पर्दे पर उतारा साहस मनोज तापड़िया खुद को यथार्थवाद (रियलिज्म) का फिल्मकार मानते हैं। उनका कहना है कि इस फिल्म का विचार किसी काल्पनिक कहानी से नहीं, बल्कि एक वास्तविक घटना से आया था। 26/11 हमले के दौरान वे खुद मुंबई में ही थे। हमले के कुछ समय बाद उन्होंने कामा अस्पताल से जुड़ी एक छोटी सी खबर पढ़ी, जिसने उनके दिल को छू लिया। फिल्म में आतंक के खौफ से ज्यादा इंसानी जज्बे को प्राथमिकता दी गई है। मनोज बताते हैं: “मेरा मकसद सिर्फ आतंकवादी हमला या गोलियों की गूंज दिखाना नहीं था, बल्कि मैं उस रात अस्पताल के भीतर मौजूद लोगों का मानसिक तनाव और उनका अनुभव दिखाना चाहता था। अगर सिर्फ हमला दिखाता तो वह एक घटना बनकर रह जाती, लेकिन जब दर्शक किरदारों के दर्द से जुड़ते हैं, तो फिल्म सीधे दिल पर असर करती है।” इस पूरी घटना में मनोज को जिस बात ने सबसे ज्यादा झकझोरा, वह था नर्सों का निहत्था साहस। जिन महिलाओं के पास आत्मरक्षा के लिए एक लाठी तक नहीं थी, उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सैकड़ों मरीजों को सुरक्षित बचाया। वे चाहते तो पिछले दरवाजे से भाग सकते थे, लेकिन वे डटे रहे। यही इस फिल्म की असली आत्मा है, जिसे नर्सों के दृष्टिकोण से पर्दे पर उतारा गया है। बिना स्टार को सोचे लिखी कहानी, कंगना का शार्प स्क्रिप्ट सेंस फिल्मों के लेखन को लेकर मनोज का एक सख्त नियम है वे कभी भी किसी स्टार को ध्यान में रखकर स्क्रिप्ट नहीं लिखते। उनका मानना है कि पहले कहानी और संवाद पूरी तरह तैयार होने चाहिए, उसके बाद ही किरदारों के लिए सही कलाकारों का चयन होना चाहिए। अगर किसी स्टार को सोचकर लिखा जाए और वह मना कर दे, तो पूरी कहानी प्रभावित होती है। ‘भारत भाग्य विधाता’ लिखते समय भी उनके दिमाग में कोई नाम नहीं था। जब स्क्रिप्ट पूरी हुई, तब कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के जरिए यह कहानी कंगना रनोट तक पहुंची। मनोज के मुताबिक, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे इतनी आसानी से कंगना तक पहुंच पाएंगे। लेकिन कंगना का स्क्रिप्ट सेंस बेहद तेज है; उन्होंने कहानी सुनते ही इसके विजन को समझा और तुरंत फिल्म के लिए हामी भर दी। कंगना के आने के बाद फिल्म का स्केल बड़ा हुआ और निर्माता शैलेश सिंह व जयंतीलाल गड़ा भी इस प्रोजेक्ट से जुड़े। सेट पर सभी को सुझाव देने की आजादी थी, जिससे दृश्यों को और बेहतर बनाने में मदद मिली। 5 घंटे के इंटरव्यू और कोर्ट दस्तावेजों पर टिकी प्रामाणिकता एक वास्तविक और संवेदनशील ऐतिहासिक घटना पर फिल्म बनाना बड़ी चुनौती थी, जिसके लिए विस्तृत रिसर्च की गई। दिलचस्प बात यह है कि मनोज ने खुद सीधे तौर पर पीड़ितों से मुलाकात नहीं की। इसके बजाय, उनकी टीम ने पत्रकारिता बैकग्राउंड के लोगों की मदद से वास्तविक किरदारों के इंटरव्यू रिकॉर्ड किए। राइटिंग टीम ने करीब 5 घंटे का वीडियो और ऑडियो मटेरियल महीनों तक बारीकी से देखा। रिसर्च का मकसद सिर्फ सूखे आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि पीड़ितों के हावभाव और उनके मानवीय पक्ष को समझना था।प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए पुलिस रिकॉर्ड, अदालती दस्तावेज और अस्पताल के मूल लेआउट का बारीकी से अध्ययन किया गया। इसी गहरी रिसर्च का नतीजा है कि फिल्म में इस्तेमाल की गई स्थानीय शब्दावली और नर्सों का व्यवहार पूरी तरह वास्तविक नजर आता है। 100 ड्राफ्ट्स की मेहनत और समीक्षकों को जवाब फिल्म की स्क्रिप्टिंग प्रक्रिया बेहद सघन रही। शुरुआती लेखन भले ही दो महीने में पूरा हो गया था, लेकिन मनोज फिल्म की डबिंग खत्म होने तक इसमें बदलाव करते रहे। इसी वजह से फाइनल होने तक स्क्रिप्ट के लगभग 100 ड्राफ्ट तैयार किए गए। तकनीकी रूप से यह फिल्म जितनी सरल दिखती है, इसे शूट करना उतना ही जटिल था। अस्पताल के सीमित स्पेस में लगभग 70 मुख्य और सहायक कलाकारों के साथ समन्वय बिठाना चुनौतीपूर्ण था। बजट और सीमित संसाधनों के कारण पूरी टीम ने महज 35 दिनों के कड़े शेड्यूल में शूटिंग पूरी की। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ समीक्षकों का कहना था कि यह पूरी मुंबई के 26/11 के व्यापक माहौल को नहीं दिखा पाती। इस पर मनोज ने बहुत स्पष्टता से अपना नजरिया रखा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी पूरी मुंबई का हमला दिखाना था ही नहीं; उनका फोकस सिर्फ कामा अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सों की मानसिक स्थिति और उस रात के तनाव को दर्शकों तक हूबहू पहुंचाना था। आगे के विजन पर बात करते हुए मनोज ने कहा कि वे भविष्य में भी ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जो दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ कुछ सोचने पर भी मजबूर करें।

ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को 7 रन से हराया:टी-20 सीरीज में 2-0 की बढ़त ली; रैनशॉ की फिफ्टी, प्लेयर ऑफ द मैच भी बने

ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को 7 रन से हराया:टी-20 सीरीज में 2-0 की बढ़त ली; रैनशॉ की फिफ्टी, प्लेयर ऑफ द मैच भी बने

ऑस्ट्रेलिया ने चटगांव में खेले गए दूसरे टी-20 मुकाबले में बांग्लादेश को 7 रन से हरा दिया। इसी के साथ टीम ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। यह बांग्लादेश की धरती पर ऑस्ट्रेलिया की पहली टी-20 सीरीज जीत भी है। 2021 में उसे 4-1 से हार का सामना करना पड़ा था। ऑस्ट्रेलिया की जीत के हीरो मैट रेनशॉ रहे। उन्होंने 89 रन की नाबाद पारी खेली। रैनशॉ ने चौथे विकेट के लिए टिम डेविड (45 रन, 26 गेंद) के साथ 50 गेंदों में 97 रन की साझेदारी की। शुरुआती छह ओवरों में तीन विकेट गंवाने के बाद इस साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया को 196/5 के स्कोर तक पहुंचाया। जवाब में एक बांग्लादेश का स्कोर 13वें ओवर में 130/2 था। अंतिम ओवरों में लगातार डॉट गेंदों और विकेटों ने मैच का रुख बदल दिया। ऑस्ट्रेलिया के लिए आरोन हार्डी ने सबसे ज्यादा 2 विकेट लिए। तंजीद ने बांग्लादेश को तेज शुरुआत दिलाई 198 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश को तंजीद हसन ने तेज शुरुआत दिलाई। उन्होंने पहले ही ओवर से आरोन हार्डी और स्पेंसर जॉनसन पर शॉट लगाए। जॉनसन के दूसरे ओवर में 22 रन बने, जो उनके टी-20 करियर का सबसे महंगा ओवर साबित हुआ। तंजीद का कैच चौथे ओवर में मैट रेनशॉ ने खुद की बॉलिंग में लपका। इसके बाद सौम्य सरकार ने भी तेजी से रन बनाए और पावरप्ले के बाद बांग्लादेश का स्कोर 72/1 पहुंच गया। हालांकि सातवें ओवर में एडम जम्पा ने उन्हें आउट कर ऑस्ट्रेलिया को राहत दिलाई। सैफ-एमोन ने उम्मीद जगाई, लेकिन टीम नहीं जीत सकी सौम्य के आउट होने के बाद परवेज हुसैन एमोन और सैफ हसन ने पारी संभाली। एमोन ने जैम्पा, जोएल डेविस और हार्डी पर लगातार बड़े शॉट लगाए, जबकि सैफ ने भी खुलकर बल्लेबाजी की। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 53 रन जोड़े और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि यह साझेदारी ज्यादा देर नहीं टिक सकी। हार्डी ने एमोन (36 रन, 22 गेंद) को आउट कराया, जबकि सैफ (42 रन) भी जल्द ही जोएल डेविस का शिकार बन गए। इसके बाद शमीम हुसैन भी नाथन एलिस की गेंद पर आउट हो गए। अंतिम ओवरों में जम्पा, एलिस और हार्डी ने कसी हुई गेंदबाजी की और बांग्लादेश को बाउंड्री लगाने का मौका नहीं दिया। नतीजतन मेजबान टीम 20 ओवर में 189/6 तक ही पहुंच सकी। सैफ ने बेहतरीन कैच लपका पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही। जोश इंग्लिस ने पहले ओवर में नसुम अहमद पर चौका और छक्का लगाया, लेकिन अगले ही ओवर में उसी गेंदबाज पर आउट हो गए। इसके बाद नाहिद राणा ने कूपर कोनोली को आउट किया, जहां स्लिप में सैफ हसन ने डाइव लगाकर बेहतरीन कैच पकड़ा। मुस्तफिजुर रहमान ने मिचेल मार्श (20 रन) को भी आउट किया। इस बार भी सैफ ने पीछे भागते हुए बेहतरीन कैच लपका। पावरप्ले के बाद ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 44/3 था और बांग्लादेश मैच पर मजबूत पकड़ बनाए हुए था। रेनशॉ और डेविड ने बदला मैच मुश्किल स्थिति में बल्लेबाजी करने उतरे मैट रेनशॉ और टिम डेविड ने सिर्फ सात गेंदों में लय पकड़ ली। डेविड ने नाहिद राना और अब्दुल गफ्फार सकलैन पर लगातार बड़े शॉट लगाए। दसवें ओवर में उन्होंने सकलैन के खिलाफ 19 रन बटोरे। दूसरी ओर रेनशॉ ने लेग स्पिनर रिशाद हुसैन को निशाना बनाया। 13वें ओवर में उन्होंने लगातार तीन छक्के जड़कर सिर्फ 29 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। 55 रन के स्कोर पर उन्हें जीवनदान भी मिला, जब नाहिद उनका कैच नहीं पकड़ सके। डेविड ने भी छक्का लगाकर ऑस्ट्रेलिया को 200 के करीब पहुंचा दिया, लेकिन सकलैन ने उन्हें डीप पॉइंट पर कैच कराकर पवेलियन भेज दिया। इसके बावजूद रेनशॉ अंत तक डटे रहे। अंतिम ओवर में उन्होंने और जोएल डेविस ने मुस्तफिजुर के खिलाफ छक्के लगाकर टीम को 197/5 तक पहुंचाया, जो अंत में जीत के लिए पर्याप्त साबित हुआ।

ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को 7 रन से हराया:टी-20 सीरीज में 2-0 की बढ़त ली; रैनशॉ की फिफ्टी, प्लेयर ऑफ द मैच भी बने

ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को 7 रन से हराया:टी-20 सीरीज में 2-0 की बढ़त ली; रैनशॉ की फिफ्टी, प्लेयर ऑफ द मैच भी बने

ऑस्ट्रेलिया ने चटगांव में खेले गए दूसरे टी-20 मुकाबले में बांग्लादेश को 7 रन से हरा दिया। इसी के साथ टीम ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। यह बांग्लादेश की धरती पर ऑस्ट्रेलिया की पहली टी-20 सीरीज जीत भी है। 2021 में उसे 4-1 से हार का सामना करना पड़ा था। ऑस्ट्रेलिया की जीत के हीरो मैट रेनशॉ रहे। उन्होंने 89 रन की नाबाद पारी खेली। रैनशॉ ने चौथे विकेट के लिए टिम डेविड (45 रन, 26 गेंद) के साथ 50 गेंदों में 97 रन की साझेदारी की। शुरुआती छह ओवरों में तीन विकेट गंवाने के बाद इस साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया को 196/5 के स्कोर तक पहुंचाया। जवाब में एक बांग्लादेश का स्कोर 13वें ओवर में 130/2 था। अंतिम ओवरों में लगातार डॉट गेंदों और विकेटों ने मैच का रुख बदल दिया। ऑस्ट्रेलिया के लिए आरोन हार्डी ने सबसे ज्यादा 2 विकेट लिए। तंजीद ने बांग्लादेश को तेज शुरुआत दिलाई 198 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश को तंजीद हसन ने तेज शुरुआत दिलाई। उन्होंने पहले ही ओवर से आरोन हार्डी और स्पेंसर जॉनसन पर शॉट लगाए। जॉनसन के दूसरे ओवर में 22 रन बने, जो उनके टी-20 करियर का सबसे महंगा ओवर साबित हुआ। तंजीद का कैच चौथे ओवर में मैट रेनशॉ ने खुद की बॉलिंग में लपका। इसके बाद सौम्य सरकार ने भी तेजी से रन बनाए और पावरप्ले के बाद बांग्लादेश का स्कोर 72/1 पहुंच गया। हालांकि सातवें ओवर में एडम जम्पा ने उन्हें आउट कर ऑस्ट्रेलिया को राहत दिलाई। सैफ-एमोन ने उम्मीद जगाई, लेकिन टीम नहीं जीत सकी सौम्य के आउट होने के बाद परवेज हुसैन एमोन और सैफ हसन ने पारी संभाली। एमोन ने जैम्पा, जोएल डेविस और हार्डी पर लगातार बड़े शॉट लगाए, जबकि सैफ ने भी खुलकर बल्लेबाजी की। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 53 रन जोड़े और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि यह साझेदारी ज्यादा देर नहीं टिक सकी। हार्डी ने एमोन (36 रन, 22 गेंद) को आउट कराया, जबकि सैफ (42 रन) भी जल्द ही जोएल डेविस का शिकार बन गए। इसके बाद शमीम हुसैन भी नाथन एलिस की गेंद पर आउट हो गए। अंतिम ओवरों में जम्पा, एलिस और हार्डी ने कसी हुई गेंदबाजी की और बांग्लादेश को बाउंड्री लगाने का मौका नहीं दिया। नतीजतन मेजबान टीम 20 ओवर में 189/6 तक ही पहुंच सकी। सैफ ने बेहतरीन कैच लपका पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही। जोश इंग्लिस ने पहले ओवर में नसुम अहमद पर चौका और छक्का लगाया, लेकिन अगले ही ओवर में उसी गेंदबाज पर आउट हो गए। इसके बाद नाहिद राणा ने कूपर कोनोली को आउट किया, जहां स्लिप में सैफ हसन ने डाइव लगाकर बेहतरीन कैच पकड़ा। मुस्तफिजुर रहमान ने मिचेल मार्श (20 रन) को भी आउट किया। इस बार भी सैफ ने पीछे भागते हुए बेहतरीन कैच लपका। पावरप्ले के बाद ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 44/3 था और बांग्लादेश मैच पर मजबूत पकड़ बनाए हुए था। रेनशॉ और डेविड ने बदला मैच मुश्किल स्थिति में बल्लेबाजी करने उतरे मैट रेनशॉ और टिम डेविड ने सिर्फ सात गेंदों में लय पकड़ ली। डेविड ने नाहिद राना और अब्दुल गफ्फार सकलैन पर लगातार बड़े शॉट लगाए। दसवें ओवर में उन्होंने सकलैन के खिलाफ 19 रन बटोरे। दूसरी ओर रेनशॉ ने लेग स्पिनर रिशाद हुसैन को निशाना बनाया। 13वें ओवर में उन्होंने लगातार तीन छक्के जड़कर सिर्फ 29 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। 55 रन के स्कोर पर उन्हें जीवनदान भी मिला, जब नाहिद उनका कैच नहीं पकड़ सके। डेविड ने भी छक्का लगाकर ऑस्ट्रेलिया को 200 के करीब पहुंचा दिया, लेकिन सकलैन ने उन्हें डीप पॉइंट पर कैच कराकर पवेलियन भेज दिया। इसके बावजूद रेनशॉ अंत तक डटे रहे। अंतिम ओवर में उन्होंने और जोएल डेविस ने मुस्तफिजुर के खिलाफ छक्के लगाकर टीम को 197/5 तक पहुंचाया, जो अंत में जीत के लिए पर्याप्त साबित हुआ।

युवराज दिल्ली के कोचिंग स्टाफ में शामिल हो सकते हैं:कुलदीप लखनऊ में जा सकते हैं; पंत की दिल्ली में वापसी के संकेत

युवराज दिल्ली के कोचिंग स्टाफ में शामिल हो सकते हैं:कुलदीप लखनऊ में जा सकते हैं; पंत की दिल्ली में वापसी के संकेत

युवराज सिंह IPL 2027 में कोचिंग करते दिख सकते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व भारतीय ऑलराउंडर दिल्ली कैपिटल्स के सपोर्ट स्टाफ का हिस्सा बन सकते हैं। वहीं स्पिनर कुलदीप यादव लखनऊ सुपर जाएंट्स के लिए खेलते नजर आ सकते हैं। दूसरी ओर लखनऊ के लिए दो सीजन खेलने वाले ऋषभ पंत की दिल्ली में वापसी की संभावना भी जताई जा रही है। पंत ने IPL 2026 में खराब प्रदर्शन के बाद लखनऊ की कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था। वे दिल्ली से 2016 से 2024 तक खेल चुके हैं। युवराज पहली बार कोचिंग ग्रुप में दिख सकते हैं अगर युवराज दिल्ली की कोचिंग संभालते हैं तो यह उनका पहला कोचिंग टर्म होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्रेंचाइजी में सौरव गांगुली की भूमिका बढ़ने के साथ युवराज को भी टीम मैनेजमेंट का हिस्सा बनाया जा सकता है। युवा खिलाड़ियों के मेंटर के रूप में बनाई पहचान 44 साल के युवराज कई युवा खिलाड़ियों के साथ काम कर चुके हैं। अभिषेक शर्मा, प्रभसिमरन सिंह, अब्दुल समद, संजू सैमसन, ऋषभ पंत और प्रियांश आर्या के साथ उन्होंने काम किया है। युवराज ने सभी प्लेयर्स की तकनीक पर सलाह दी। इसका नतीजा सभी प्लेयर्स को उनकी परफॉरमेंस में भी देखने को मिला। संजू सैमसन ने टी-20 वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट थे। वहीं अभिषेक शर्मा की तेज बल्लेबाजी का क्रेडिट भी युवराज को दिया जाता है। युवराज 6 IPL टीम से खेले, 2 की कप्तानी की युवराज IPL करियर में कुल 6 टीमों से खेले। किंग्स इलेवन पंजाब (अब पंजाब किंग्स), पुणे वॉरियर्स इंडिया, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB), दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स), सनराइजर्स हैदराबाद और मुंबई इंडियंस के लिए वे मैदान पर उतरे। युवराज ने दो टीमों की कप्तानी भी की। उन्होंने IPL के शुरुआती दो सीजन (2008 और 2009) में किंग्स इलेवन पंजाब की कप्तानी संभाली, जबकि 2011 में पुणे वॉरियर्स इंडिया के कप्तान रहे। कुलदीप नई टीम से खेल सकते हैं इसी बीच IPL 2027 में कुलदीप यादव लखनऊ सुपर जायंट्स का हिस्सा बन सकते हैं। अगर कुलदीप लखनऊ से जुड़ते हैं, तो यह उनके IPL करियर का तीसरा फ्रेंचाइजी बदलाव होगा। कुलदीप 2012 से 2014 तक मुंबई इंडियंस (MI) के स्क्वॉड में थे, लेकिन उन्हें डेब्यू का मौका नहीं मिला। इसके बाद 2014 से 2021 तक कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेले। 2022 के मेगा ऑक्शन से अब तक वे दिल्ली कैपिटल्स (DC) के लिए खेल रहे थे। पंत की दिल्ली वापसी की चर्चा तेज दिल्ली कैपिटल्स के पूर्व कप्तान ऋषभ पंत की टीम में वापसी की संभावना भी बताई जा रही है। पंत ने हाल ही में लखनऊ की कप्तानी छोड़ी है। उन्होंने दो सीजन टीम की कप्तानी की। खराब फॉर्म के चलते लखनऊ IPL 2026 में 10वें और 2025 में 7वें स्थान पर रही। उनकी कप्तानी में लखनऊ 28 मैचों में केवल 10 में जीत ही हासिल कर सकी। लखनऊ ने पंत को 27 करोड़ में खरीदा था लखनऊ सुपर जायंट्स ने पंत को 27 करोड़ रुपए में खरीदा था। वे IPL के सबसे महंगे प्लेयर हैं। 2026 में वे 312 रन ही बना सके थे।

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शिमला रिज पर अमेरिकी टूरिस्ट की अश्लील हरकतें:वायरल वीडियो पर हिरासत में लिया; सार्वजनिक स्थान पर उपद्रव और गाली-गलोच की

शिमला रिज पर अमेरिकी टूरिस्ट की अश्लील हरकतें:वायरल वीडियो पर हिरासत में लिया; सार्वजनिक स्थान पर उपद्रव और गाली-गलोच की

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के रिज पर आज (शुक्रवार) सुबह एक विदेशी टूरिस्ट द्वारा कथित तौर पर अशोभनीय हरकतें और गाली-गलोज करने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिमला पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अमेरिकी नागरिक जोशुआ क्रिश्चियन को हिरासत में लिया। जानकारी के अनुसार, रिज पर सुबह के समय बड़ी संख्या में टूरिस्ट और लोकल लोग मौजूद थे। इस दौरान एक जोशुआ क्रिश्चियन ने वहां लोगों के सामने अभद्र व्यवहार किया और अश्लील इशारे किए। बताया जा रहा है कि टूरिस्ट ने गाली-गलोच भी की। विदेशी पर्यटक की हरकतों को देखकर मौके पर लोग एकत्रित हो गए और किसी व्यक्ति ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया। टूरिस्ट से भरे रिज पर हंगामा रिज, शिमला का प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां दिनभर हजारों की संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचते हैं। ऐसे सार्वजनिक स्थान पर विदेशी पर्यटक द्वारा किए गए इस तरह के व्यवहार को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। पुलिस ने वायरल वीडियो पर लिया संज्ञान सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में विदेशी नागरिक रिज पर लोगों के प्रति अभद्र व्यवहार करता और अशोभनीय इशारे करता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद शिमला पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और संबंधित व्यक्ति की पहचान कर कार्रवाई शुरू की। सार्वजनिक स्थल पर उपद्रव मचाने का आरोप शिमला पुलिस के अनुसार, आरोपी विदेशी नागरिक को हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम की धारा 114 के तहत सार्वजनिक उपद्रव और अशोभनीय व्यवहार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सभी नागरिकों और पर्यटकों से अपील की है कि सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित और जिम्मेदार व्यवहार करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांति व्यवस्था भंग करने या सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित गतिविधियां करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।