Friday, 02 Oct 2026 | 03:35 AM

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डायरेक्टर राघवेंद्र ने एक्ट्रेस कीर्ति और कृति का हाथ खींचा:सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए; एक्ट्रेस की कमर पर हाथ रख विवाद में आए थे

डायरेक्टर राघवेंद्र ने एक्ट्रेस कीर्ति और कृति का हाथ खींचा:सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए; एक्ट्रेस की कमर पर हाथ रख विवाद में आए थे

तेलुगु सिनेमा के सीनियर डायरेक्टर के. राघवेंद्र राव एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश और कृति शेट्टी का हाथ पकड़कर खींचने के लिए ट्रोल हो रहे हैं। दरअसल हैदराबाद में डायरेक्टर अनिल रविपुडी की नई फिल्म के लॉन्च के दौरान 84 वर्षीय राघवेंद्र राव उद्घाटन शॉट को डायरेक्ट कर रहे थे। इस दौरान वे एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश और कृति शेट्टी का हाथ पकड़कर उन्हें अपनी ओर खींचते हुए नजर आए। सोशल मीडिया पर यह वीडियो आने के बाद यूजर्स ने नाराजगी जताई है और डायरेक्टर के इस व्यवहार की तीखी आलोचना की है। मुहूर्त शॉट की पोजीशन तय करने का वाकया यह घटना गुरुवार को आयोजित फिल्म लॉन्च इवेंट की है। इस फिल्म में वेंकटेश दग्गुबाती, नंदमुरी कल्याणराम, कीर्ति सुरेश और कृति शेट्टी मुख्य भूमिकाओं में हैं। पारंपरिक मुहूर्त समारोह के तहत उद्घाटन शॉट का निर्देशन करने के लिए मशहूर डायरेक्टर राघवेंद्र राव को बुलाया गया था। इवेंट में प्रोड्यूसर अल्लू अरविंद ने फिल्म का पहला क्लैप दिया, जबकि दिल राजू और सुरेश बाबू समेत कई बड़े निर्माता भी वहां मौजूद थे। शॉट शुरू होने से पहले राघवेंद्र राव कलाकारों को स्टेज पर सेट कर रहे थे। हाथ खींचने और पोज देने का तरीका सिखाया वायरल हो रही वीडियो क्लिप में देखा जा सकता है कि राघवेंद्र राव शॉट के लिए कलाकारों की पोजीशन तय कर रहे हैं। वे पहले कीर्ति सुरेश का हाथ पकड़कर उन्हें अपनी तरफ खींचते हैं, फिर अपना इरादा बदलकर कृति शेट्टी को गाइड करने लगते हैं। इसके बाद वे मुख्य अभिनेता वेंकटेश और कल्याणराम के पास जाते हैं। वे दोनों अभिनेताओं को यह निर्देश देते हुए नजर आते हैं कि सीन को सही दिखाने के लिए उन्हें एक्ट्रेसेस की कमर और कंधों पर हाथ किस तरह रखना है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जताई नाराजगी इस वीडियो के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आने के बाद फिल्ममेकर की आलोचना शुरू हो गई। कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि वे बिना वजह एक्ट्रेसेस को छू रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि वे बिना छुए भी पोजीशन बता सकते थे। महिलाओं की मर्जी के बिना उन्हें इस तरह खींचना सही नहीं है। वहीं कुछ यूजर्स ने राघवेंद्र राव का बचाव भी किया। उनका कहना था कि वे केवल उद्घाटन शॉट डायरेक्ट कर रहे थे और सीनियर होने के नाते कलाकारों को उनकी सही जगह समझा रहे थे, इसमें कुछ गलत इरादा नहीं था। पुराना विवाद फिर चर्चा में आया इस घटना के बाद इसी साल जनवरी में हुआ एक पुराना विवाद भी फिर से चर्चा में आ गया है। यूजर्स ने उनके एक पुराने वीडियो का जिक्र किया जिसमें एक्ट्रेस निहारिका कोनिडेला के साथ उनके व्यवहार पर सवाल उठे थे। एक यूजर ने लिखा कि निहारिका वाले वीडियो पर हुई आलोचना के बाद उम्मीद थी कि व्यवहार में बदलाव आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राघवेंद्र राव तेलुगु सिनेमा के बहुत बड़े नाम हैं और उन्होंने अपने करियर में कई बड़ी फिल्में दी हैं, लेकिन इस तरह के वाकयों से वे विवादों में आ जाते हैं।

डायरेक्टर ने एक्ट्रेस कीर्ति और कृति का हाथ खींचा:सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए राघवेंद्र राव; एक्ट्रेस की कमर पर हाथ रख विवाद में आए थे

डायरेक्टर ने एक्ट्रेस कीर्ति और कृति का हाथ खींचा:सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए राघवेंद्र राव; एक्ट्रेस की कमर पर हाथ रख विवाद में आए थे

तेलुगु सिनेमा के सीनियर डायरेक्टर के. राघवेंद्र राव एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश और कृति शेट्टी का हाथ पकड़कर खींचने के लिए ट्रोल हो रहे हैं। दरअसल हैदराबाद में डायरेक्टर अनिल रविपुडी की नई फिल्म के लॉन्च के दौरान 84 वर्षीय राघवेंद्र राव उद्घाटन शॉट को डायरेक्ट कर रहे थे। इस दौरान वे एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश और कृति शेट्टी का हाथ पकड़कर उन्हें अपनी ओर खींचते हुए नजर आए। सोशल मीडिया पर यह वीडियो आने के बाद यूजर्स ने नाराजगी जताई है और डायरेक्टर के इस व्यवहार की तीखी आलोचना की है। मुहूर्त शॉट की पोजीशन तय करने का वाकया यह घटना गुरुवार को आयोजित फिल्म लॉन्च इवेंट की है। इस फिल्म में वेंकटेश दग्गुबाती, नंदमुरी कल्याणराम, कीर्ति सुरेश और कृति शेट्टी मुख्य भूमिकाओं में हैं। पारंपरिक मुहूर्त समारोह के तहत उद्घाटन शॉट का निर्देशन करने के लिए मशहूर डायरेक्टर राघवेंद्र राव को बुलाया गया था। इवेंट में प्रोड्यूसर अल्लू अरविंद ने फिल्म का पहला क्लैप दिया, जबकि दिल राजू और सुरेश बाबू समेत कई बड़े निर्माता भी वहां मौजूद थे। शॉट शुरू होने से पहले राघवेंद्र राव कलाकारों को स्टेज पर सेट कर रहे थे। हाथ खींचने और पोज देने का तरीका सिखाया वायरल हो रही वीडियो क्लिप में देखा जा सकता है कि राघवेंद्र राव शॉट के लिए कलाकारों की पोजीशन तय कर रहे हैं। वे पहले कीर्ति सुरेश का हाथ पकड़कर उन्हें अपनी तरफ खींचते हैं, फिर अपना इरादा बदलकर कृति शेट्टी को गाइड करने लगते हैं। इसके बाद वे मुख्य अभिनेता वेंकटेश और कल्याणराम के पास जाते हैं। वे दोनों अभिनेताओं को यह निर्देश देते हुए नजर आते हैं कि सीन को सही दिखाने के लिए उन्हें एक्ट्रेसेस की कमर और कंधों पर हाथ किस तरह रखना है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जताई नाराजगी इस वीडियो के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आने के बाद फिल्ममेकर की आलोचना शुरू हो गई। कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि वे बिना वजह एक्ट्रेसेस को छू रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि वे बिना छुए भी पोजीशन बता सकते थे। महिलाओं की मर्जी के बिना उन्हें इस तरह खींचना सही नहीं है। पुराना विवाद फिर चर्चा में आया इस घटना के बाद इसी साल जनवरी में हुआ एक पुराना विवाद भी फिर से चर्चा में आ गया है। यूजर्स ने उनके एक पुराने वीडियो का जिक्र किया जिसमें एक्ट्रेस निहारिका कोनिडेला के साथ उनके व्यवहार पर सवाल उठे थे। एक यूजर ने लिखा कि निहारिका वाले वीडियो पर हुई आलोचना के बाद उम्मीद थी कि व्यवहार में बदलाव आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राघवेंद्र राव तेलुगु सिनेमा के बहुत बड़े नाम हैं और उन्होंने अपने करियर में कई बड़ी फिल्में दी हैं, लेकिन इस तरह के वाकयों से वे विवादों में आ जाते हैं। तेलेगु सिनेमा के सीनियर डायरेक्टर हैं राघवेंद्र के. राघवेंद्र राव तेलुगु सिनेमा के एक सीनियर फिल्म डायरेक्टर, स्क्रीनराइटर और प्रोड्यूसर हैं, जिन्होंने पांच दशकों से अधिक लंबे करियर में 100 से भी ज्यादा फिल्मों का निर्देशन किया है। उन्होंने एनटी रामा राव, चिरंजीवी और श्रीदेवी जैसे भारतीय सिनेमा के महान कलाकारों के साथ कई यादगार फिल्में दी हैं। इसके अलावा, उन्हें महेश बाबू, वेंकटेश और अल्लू अर्जुन जैसे आज के दौर के बड़े सुपरस्टार्स को फिल्म इंडस्ट्री में लॉन्च करने का श्रेय भी जाता है। उनकी मुख्य फिल्मों में ‘अग्नि पुत्रुडु’ (1987) और ‘आखिरी पोराट्टम’ (1988) शामिल हैं, जिन्हें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) के मुख्यधारा सेक्शन में प्रदर्शित किया जा चुका है।

बाबा सिद्दीकी की मौत से टूट गए थे सलमान:को-स्टार बोले- दर्द में कुर्सी से उठ नहीं पाते थे, धमकियां मिलीं, फिर भी शूटिंग करने आए

बाबा सिद्दीकी की मौत से टूट गए थे सलमान:को-स्टार बोले- दर्द में कुर्सी से उठ नहीं पाते थे, धमकियां मिलीं, फिर भी शूटिंग करने आए

सलमान खान के करीबी दोस्त बाबा सिद्दीकी की 2024 में हत्या कर दी गई। उस समय सलमान फिल्म सिंकदर शूट कर रहे थे। करीबी दोस्त के गुजर जाने के बाद सलमान खान इमोशनली और फिजिकली दर्द में थे, इसके बावजूद वो सिकंदर की शूटिंग कर रहे थे। अब उनके सिकंदर को-स्टर विशाल वशिष्ठ ने बताया है कि सलमान दर्द में थे। तभी उन्हें रिब इंजरी भी हुई, वो कुर्सी से उठ भी नहीं पाते थे, उन्हें धमकियां भी मिल रही थीं, लेकिन इसके बावजूद वो रोज सेट पर पूरी मेहनत करते थे। एक्टर विशाल वशिष्ठ ने पीटीआई शोबिज को दिए इंटरव्यू में सिंकदर की शूटिंग पर बात की। उन्होंने कहा, ‘सिकंदर बहुत मुश्किल समय में पूरी हुई है, खासकर सलमान सर के लिए। ये कोई छिपी हुई बात नहीं है। वह मेंटली और इमोशनली पूरी तरह थक चुके थे, और शारीरिक रूप से भी काफी परेशानियों से गुजर रहा था। हमने यह सब अपनी आंखों से देखा था। यह कोई बनाई हुई कहानी नहीं थी, बल्कि हकीकत थी। वह धीरे-धीरे चलते थे और किसी तरह अपना सीन पूरा करता था। जैसे ही ‘कट’ बोलता, वह वापस जाकर फिजियोथेरेपी करवाने लगते थे।’ आगे उन्होंने कहा, ‘एक चीज जो मैंने सीखी, वो ये कि कितने सालों में उनके बैकग्राउंड में कितना कुछ चल रहा था, लेकिन फिर भी वो यहां हैं, शूटिंग कर रहे हैं। वह दर्द में थे, लेकिन फिर भी काम करते रहे। बाहर उनकी जिंदगी में खतरा पैदा करने वाली परिस्थितियां थीं, लेकिन इसके बावजूद वह शूटिंग पर पहुंचते रहे। यह सब उसके लिए बेहद मुश्किल था।’ सलमान के घर पर हुई फायरिंग, सिक्योरिटी के चलते पहले बाबा सिद्दीकी की हत्या हुई 12 अक्टूबर 2024 को NCP नेता बाबा सिद्दीकी बेटे जीशान के दफ्तर के बाहर निकले थे। तभी उन पर 6 गोलियां चलाई गईं। 2 गोली सिद्दीकी के पेट पर और एक सीने पर लगी। उन्हें तुरंत लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रात 11.27 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली। हत्याकांड में गिरफ्तार हुए एक आरोपी ने खुलासा किया कि बाबा सिद्दीकी से पहले सलमान खान उनकी हिटलिस्ट में थे, लेकिन एक्टर की सिक्योरिटी के चलते पहले बाबा सिद्दीकी की हत्या की गई। इससे ठीक पहले 14 अप्रैल 2024 में सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट में फायरिंग की गई थी।

बाबा सिद्दीकी की मौत से टूट गए थे सलमान:को-स्टार बोले- दर्द में कुर्सी से उठ नहीं पाते थे, धमकियां मिलीं, फिर भी शूटिंग करने आए

बाबा सिद्दीकी की मौत से टूट गए थे सलमान:को-स्टार बोले- दर्द में कुर्सी से उठ नहीं पाते थे, धमकियां मिलीं, फिर भी शूटिंग करने आए

सलमान खान के करीबी दोस्त बाबा सिद्दीकी की 2024 में हत्या कर दी गई। उस समय सलमान फिल्म सिंकदर शूट कर रहे थे। करीबी दोस्त के गुजर जाने के बाद सलमान खान इमोशनली और फिजिकली दर्द में थे, इसके बावजूद वो सिकंदर की शूटिंग कर रहे थे। अब उनके सिकंदर को-स्टर विशाल वशिष्ठ ने बताया है कि सलमान दर्द में थे। तभी उन्हें रिब इंजरी भी हुई, वो कुर्सी से उठ भी नहीं पाते थे, उन्हें धमकियां भी मिल रही थीं, लेकिन इसके बावजूद वो रोज सेट पर पूरी मेहनत करते थे। एक्टर विशाल वशिष्ठ ने पीटीआई शोबिज को दिए इंटरव्यू में सिंकदर की शूटिंग पर बात की। उन्होंने कहा, ‘सिकंदर बहुत मुश्किल समय में पूरी हुई है, खासकर सलमान सर के लिए। ये कोई छिपी हुई बात नहीं है। वह मेंटली और इमोशनली पूरी तरह थक चुके थे, और शारीरिक रूप से भी काफी परेशानियों से गुजर रहा था। हमने यह सब अपनी आंखों से देखा था। यह कोई बनाई हुई कहानी नहीं थी, बल्कि हकीकत थी। वह धीरे-धीरे चलते थे और किसी तरह अपना सीन पूरा करता था। जैसे ही ‘कट’ बोलता, वह वापस जाकर फिजियोथेरेपी करवाने लगते थे।’ आगे उन्होंने कहा, ‘एक चीज जो मैंने सीखी, वो ये कि कितने सालों में उनके बैकग्राउंड में कितना कुछ चल रहा था, लेकिन फिर भी वो यहां हैं, शूटिंग कर रहे हैं। वह दर्द में थे, लेकिन फिर भी काम करते रहे। बाहर उनकी जिंदगी में खतरा पैदा करने वाली परिस्थितियां थीं, लेकिन इसके बावजूद वह शूटिंग पर पहुंचते रहे। यह सब उसके लिए बेहद मुश्किल था।’ सलमान के घर पर हुई फायरिंग, सिक्योरिटी के चलते पहले बाबा सिद्दीकी की हत्या हुई 12 अक्टूबर 2024 को NCP नेता बाबा सिद्दीकी बेटे जीशान के दफ्तर के बाहर निकले थे। तभी उन पर 6 गोलियां चलाई गईं। 2 गोली सिद्दीकी के पेट पर और एक सीने पर लगी। उन्हें तुरंत लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रात 11.27 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली। हत्याकांड में गिरफ्तार हुए एक आरोपी ने खुलासा किया कि बाबा सिद्दीकी से पहले सलमान खान उनकी हिटलिस्ट में थे, लेकिन एक्टर की सिक्योरिटी के चलते पहले बाबा सिद्दीकी की हत्या की गई। इससे ठीक पहले 14 अप्रैल 2024 में सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट में फायरिंग की गई थी।

ऋषिकेश में गंगा किनारे घाट पर सोए दिखे सुनील ग्रोवर:त्रिवेणी घाट में साधुओं और श्रद्धालुओं के साथ रात गुजारी, लोगों ने सादगी की सराहना की

ऋषिकेश में गंगा किनारे घाट पर सोए दिखे सुनील ग्रोवर:त्रिवेणी घाट में साधुओं और श्रद्धालुओं के साथ रात गुजारी, लोगों ने सादगी की सराहना की

अपनी एक्टिंग, कॉमेडी और मिमिक्री से लोगों को हंसाने वाले सुनील ग्रोवर उत्तराखंड स्थित संत नगरी ऋषिकेश में गंगा किनारे घाट पर सोए दिखे। सुनील ग्रोवर ने वीडियो को शेयर कर लिखा है- तारे जमीन पर। सुनील ग्रोवर की नेटवर्थ करोड़ों में है। सुनील ग्रोवर ने ऋषिकेश में घाट पर सोने वालों घुमक्कड़ साधुओं और विरक्त श्रद्धालुओं के साथ रात गुजारी। जिस जगह सुनील ग्रोवर चादर बिछाकर सोते दिखे वो त्रिवेणी घाट का इलाका है। ऋषिकेश को मोक्ष स्थान माना जाता है। कई हिट फिल्मों में निभा चुके हैं भूमिका हाल के दिनों में अमिताभ बच्चन और जावेद अख्तर की मिमिक्री करके सुनील ग्रोवर ने काफी वाहवाही बटोरी थी। एक कार्यक्रम में जब उन्होंने जावेद अख्तर के सामने ही उनकी मिमिक्री की तो मशहूर शायर भी अपनी हंसी नहीं रोक सके। सुनील ग्रोवर अब तक भारत, जवान, गब्बर इज बैक, बागी, गजनी और द लेजेंड ऑफ भगत सिंह जैसी हिट फिल्मों में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। करोड़ों की नेटवर्थ के मालिक गुत्थी से अपनी पहचान बनाने वाले सुनील ग्रोवर अपनी जड़ों से जुड़े हैं। सुनील की पॉपुलैरिटी पिछले 9 साल में बेतहाशा बढ़ी है। यही वजह है कि उनकी नेटवर्थ भी इन्हीं 9 सालों में सबसे ज्यादा बढ़ी है। फिल्म में काम करने के सुनील को 50 से 60 लाख रुपए मिलते हैं जबकि टीवी पर एक एपिसोड की शूटिंग के लिए वह 10 से 15 लाख रुपए चार्ज करते हैं। सुनील ग्रोवर को 2022 में पड़ा था दिल का दौरा सुनील की वाइफ आरती पेशे से इंटीरियर डिजाइनर हैं और दोनों का एक बेटा भी है। साल 2022 में सुनील को दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उनकी चार बायपास सर्जरी हुई थीं। डॉक्टरों ने उन्हें एक महीने का आराम दिया, लेकिन वे केवल 25 दिन में ही काम पर लौट आए थे। अब ग्राफिक्स में समझिए सुनील ग्रोवर के करियर के बारे में…

छह विद्रोही शिवसेना (यूबीटी) सांसद 21 जून को शिंदे गुट में जाने की घोषणा कर सकते हैं | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:19 जून, 2026, 13:19 IST कथित तौर पर सांसद अपने अगले राजनीतिक कदम की घोषणा करने से पहले लोकसभा अध्यक्ष के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह – जो उसकी संसदीय ताकत का दो-तिहाई हिस्सा बनाने के लिए पर्याप्त हैं – कथित तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ विलय की तैयारी कर रहे हैं। शिवसेना यूबीटी संकट: सूत्रों ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह करने वाले छह शिव सेना (यूबीटी) सांसद 21 जून को औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना में शामिल हो सकते हैं, जिससे महाराष्ट्र में विपक्षी गुट और कमजोर हो सकता है। न्यूज18 इंडिया के अनुसार, सूत्रों का हवाला देते हुए, छह सांसदों के शनिवार को दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है और वे शिवसेना (यूबीटी) द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई संभावित अयोग्यता कार्यवाही के घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। कथित तौर पर सांसद अपने अगले राजनीतिक कदम की घोषणा करने से पहले लोकसभा अध्यक्ष के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। देश में चल रहे सियासी ड्रामे में 21 जून को अहम तारीख के तौर पर देखा जा रहा है. 2022 में इसी दिन एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ अपना विद्रोह शुरू किया था, जिससे अविभाजित शिवसेना में विभाजन हो गया और अंततः महाराष्ट्र में एक नई सरकार का गठन हुआ। सूत्रों ने संकेत दिया कि बागी सांसद शनिवार को एक बड़ी राजनीतिक घोषणा कर सकते हैं, जिससे अटकलें तेज हो गई हैं कि वे औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। यह चर्चा उस रिपोर्ट के एक दिन बाद आई है जिसमें कहा गया था कि शुक्रवार को पार्टी के 60वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान छह सांसदों को शिवसेना में शामिल किया जाएगा। हालाँकि, शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे खेमे दोनों ने इस बात से इनकार किया कि कार्यक्रम के दौरान किसी को शामिल करने की योजना बनाई गई थी। छह सांसद – नागेश पाटिल-आष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे – व्हिप जारी होने के बावजूद गुरुवार को नई दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति ने “ऑपरेशन टाइगर” के बारे में अटकलों को हवा दे दी, जो कि शिंदे खेमे द्वारा उद्धव ठाकरे गुट के और अधिक नेताओं को अपने पाले में लाने का एक कथित प्रयास था। बैठक में केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही शामिल हुए, जिससे सेना (यूबीटी) के भीतर गहराते विभाजन का पता चला। बहिष्कार के बाद, शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने घोषणा की कि छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और पार्टी दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग करेगी। राउत ने कहा, “कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हम उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।” औपचारिक बदलाव की संभावना को तब बल मिला जब शिवसेना एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया कि छह सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया है और उनके गुट में शामिल होने के लिए तैयार हैं। यदि यह कदम सफल होता है, तो यह 2022 के विभाजन के बाद से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण झटका होगा, जिसने महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार दिया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शोभित गुप्ता शोभित गुप्ता News18.com में उप-संपादक हैं और भारत और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों को कवर करते हैं। वह भारत के रोजमर्रा के राजनीतिक मामलों और भू-राजनीति में रुचि रखते हैं। उन्होंने बीए पत्रकारिता (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया छह बागी शिवसेना (यूबीटी) सांसद 21 जून को शिंदे गुट में जाने की घोषणा कर सकते हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)शिवसेना यूबीटी संकट(टी)शिवसेना यूबीटी(टी)उद्धव ठाकरे गुट(टी)महाराष्ट्र की राजनीति(टी)पार्टी नेतृत्व विवाद(टी)शिवसेना विभाजन(टी)मुंबई राजनीतिक संकट(टी)भारतीय क्षेत्रीय दल

फैक्ट्री रीसेट से नहीं मिटता डेटा, सर्वे में हुआ खुलासा:69 फीसदी भारतीय फोन बेचने से कतरा रहे; डेटा के गलत इस्तेमाल का डर

फैक्ट्री रीसेट से नहीं मिटता डेटा, सर्वे में हुआ खुलासा:69 फीसदी भारतीय फोन बेचने से कतरा रहे; डेटा के गलत इस्तेमाल का डर

भारत में स्मार्टफोन रीसेल मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन डेटा सुरक्षा की चिंता अब भी सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है। रीकॉमर्स प्लेटफॉर्म कैशिफाई के एक सर्वे के मुताबिक, 69% उपभोक्ता प्राइवेसी को लेकर डर की वजह से अपना पुराना फोन बेचने से बचते हैं। 8,000 लोगों पर हुए इस सर्वे में 74% ने कहा कि फोन बेचने के बाद पर्सनल डेटा के गलत इस्तेमाल की आशंका रहती है, हालांकि 56.6% लोग पहले ही अपना स्मार्टफोन बेच या एक्सचेंज कर चुके हैं, यानी रीसेल अब आम चलन बन गया है। कैशिफाई के सह-संस्थापक नकुल कुमार के मुताबिक, भागीदारी और जागरूकता दोनों बढ़ रही हैं, लेकिन डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी अब भी ज्यादातर उपभोक्ता पर ही टिकी है। उनका कहना है कि हर डिवाइस में सालों की पर्सनल, फाइनेंशियल और पहचान से जुड़ी जानकारी जमा होती है, इसलिए यह जिम्मेदारी संगठित प्लेटफॉर्म और नीतिगत ढांचे को भी उठानी चाहिए। सर्वे बताता है कि अब फोन बेचने का फैसला सिर्फ कीमत पर नहीं टिका। 45.3% लोगों ने डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा को सबसे जरूरी फैक्टर बताया, जबकि सिर्फ 29.5% ने कीमत को तरजीह दी। फोन बेचने से पहले 83.3 फीसदी लोग फैक्ट्री रीसेट करते हैं, लेकिन 41.1 फीसदी मानते हैं कि इससे डेटा हमेशा के लिए नहीं मिटता। 31 फीसदी लोगों ने तो डिलीट किया गया डेटा वापस निकालने में भी कामयाबी पाई। सर्वे में भरोसे से जुड़े आंकड़े भी सामने आए। 68.6% लोगों ने कहा कि सर्टिफाइड सिक्योर डेटा डिलीशन देने वाले प्लेटफॉर्म पर उनका भरोसा बढ़ेगा, जबकि 83.3 फीसदी के लिए डेटा डिलीशन सर्टिफिकेट जरूरी शर्त है। आधे से ज्यादा, यानी 50.8 फीसदी लोग इसके लिए छोटी सी फीस देने को भी तैयार हैं। 15.6% लोगों को तो यह पता ही नहीं था कि सुरक्षित रीसेल के विकल्प मौजूद हैं, जबकि सिर्फ 6.3% ने खरीदारों के दबाव की शिकायत की। फैक्ट्री रीसेट और सिक्योर डिलीशन में फर्क समझना जरूरी कैशिफाई के सीईओ मंदीप मनोचा के मुताबिक, ज्यादातर उपभोक्ता फैक्ट्री रीसेट और सिक्योर डेटा डिलीशन को एक ही समझते हैं, जो गलत है। फैक्ट्री रीसेट सिर्फ फाइलों और ऐप्स का एक्सेस हटाता है, लेकिन डिवाइस के हार्डवेयर में डेटा बना रह सकता है, जिसे स्पेशल रिकवरी टूल्स से वापस निकाला जा सकता है। सिक्योर या सर्टिफाइड डेटा डिलीशन में डेटा को बार-बार ओवरराइट किया जाता है, जिससे उसे वापस पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

स्थापना दिवस पर शिवसेना के बागी यूबीटी सांसदों के शिंदे खेमे में शामिल होने की संभावना नहीं, दलबदल की चर्चा जारी | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:19 जून, 2026, 10:29 IST व्हिप जारी होने के बावजूद गुरुवार को नई दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों के शामिल नहीं होने के बाद अटकलें तेज हो गईं। शिवसेना पहले ही एक बार विनाशकारी विभाजन का अनुभव कर चुकी है, यहां तक ​​कि एक ताजा विद्रोह की अफवाहें भी संगठन के भीतर चिंता पैदा करने के लिए पर्याप्त हैं। शिवसेना यूबीटी संकट: अटकलों के विपरीत, शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की संभावित संभावना के लिए इंतजार करना पड़ सकता है, सूत्रों ने संकेत दिया है कि शुक्रवार को पार्टी के स्थापना दिवस समारोह के दौरान कोई औपचारिक शामिल होने की संभावना नहीं है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिव सेना (यूबीटी) और शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना दोनों शुक्रवार को अविभाजित शिव सेना का 60वां स्थापना दिवस मना रही हैं। व्यापक अटकलें थीं कि मुंबई में एनईएससीओ में शिंदे गुट के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान छह सेना (यूबीटी) सांसद औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होंगे। हालाँकि, सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि प्रेरण शुक्रवार को नहीं होगा, यह दर्शाता है कि इसे टाल दिया गया है। इसके अतिरिक्त, शिवसेना ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसद पार्टी में शामिल होने वाले हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि पार्टी में शुक्रवार को ऐसा कोई शामिल नहीं किया जाएगा। शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व ने भी इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। व्हिप जारी होने के बावजूद गुरुवार को नई दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों के शामिल नहीं होने के बाद अटकलें तेज हो गईं। अनुपस्थित सांसद थे नागेश पाटिल-आष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे। बैठक में केवल सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही शामिल हुए, जिससे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर बढ़ती दरार पर प्रकाश पड़ा। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है और पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। राउत ने संवाददाताओं से कहा, “कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हम उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।” उन्होंने कहा कि पार्टी दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग करेगी और लोकसभा अध्यक्ष से कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्य करने का आग्रह करेगी। ऑपरेशन टाइगर क्या है? संभावित दलबदल की चर्चा तब तेज हो गई जब शिवसेना एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया कि छह सेना (यूबीटी) सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व में विश्वास जताया है और उनके गुट में शामिल होने के लिए तैयार हैं। इस घटनाक्रम ने 2022 में शिवसेना में विभाजन की यादें ताजा कर दी हैं, जब शिंदे विधायकों के एक बड़े समूह के साथ उद्धव ठाकरे से अलग हो गए थे, जिससे पार्टी में विभाजन हो गया था। जबकि शुक्रवार के स्थापना दिवस समारोह से छह सांसदों के भविष्य पर स्पष्टता मिलने की उम्मीद थी, सूत्रों ने अब संकेत दिया है कि यदि कोई औपचारिक प्रेरण होता है, तो उसे फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शोभित गुप्ता शोभित गुप्ता News18.com में उप-संपादक हैं और भारत और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों को कवर करते हैं। वह भारत के रोजमर्रा के राजनीतिक मामलों और भू-राजनीति में रुचि रखते हैं। उन्होंने बीए पत्रकारिता (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया स्थापना दिवस पर बागी शिव सेना यूबीटी सांसदों के शिंदे खेमे में शामिल होने की संभावना नहीं, दलबदल की चर्चा जारी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)शिवसेना यूबीटी सांसदों का दलबदल(टी)शिवसेना स्थापना दिवस(टी)एकनाथ शिंदे गुट(टी)उद्धव ठाकरे गुट(टी)दलबदल विरोधी कानून भारत(टी)ऑपरेशन टाइगर शिव सेना(टी)लोकसभा सांसदों का क्रॉसओवर(टी)महाराष्ट्र राजनीति

तीसरे वनडे के लिए हर्षित राणा भारतीय टीम में शामिल:अफगानिस्तान के खिलाफ आखिरी वनडे मैच चेन्नई में खेला जाएगा, भारत सीरीज 2-0 से आगे

तीसरे वनडे के लिए हर्षित राणा भारतीय टीम में शामिल:अफगानिस्तान के खिलाफ आखिरी वनडे मैच चेन्नई में खेला जाएगा, भारत सीरीज 2-0 से आगे

अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले तीसरे और आखिरी वनडे मैच से ठीक पहले सिलेक्शन कमेटी ने तेज गेंदबाज हर्षित राणा को टीम में शामिल किया है। BCCI ने शुक्रवार को आधिकारिक अपडेट जारी कर इसकी जानकारी दी। हर्षित राणा ने बेंगलुरु स्थित BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में अपनी चोट का रिहैबिलिटेशन पूरा कर लिया है, जिसके बाद वे चेन्नई में भारतीय टीम से जुड़ गए हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का अंतिम मुकाबला 20 जून (शनिवार) को चेन्नई में खेला जाएगा। भारतीय टीम पहले ही शुरुआती दोनों मैच जीतकर सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना चुकी है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में फिटनेस टेस्ट पास कर टीम में वापसी हर्षित राणा पिछले कुछ समय से चोट के कारण टीम से बाहर थे। वे BCCI के डॉक्टरों और फिजियोथेरेपिस्ट की निगरानी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपनी फिटनेस पर काम कर रहे थे। फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें तुरंत मुख्य टीम में शामिल करने का फैसला किया। तेज गेंदबाजी आक्रमण को मिली मजबूती हर्षित राणा के टीम से जुड़ने से भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण और मजबूत हो गया है। अब तक तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी मुख्य रूप से अर्शदीप सिंह और प्रसिद्ध कृष्णा संभाल रहे थे। राणा के आने से कप्तान शुभमन गिल के पास चेन्नई की परिस्थितियों के अनुसार तीन प्रमुख तेज गेंदबाजों का विकल्प उपलब्ध होगा। वहीं, स्पिन विभाग में कुलदीप यादव और वॉशिंगटन सुंदर की जोड़ी पहले से ही टीम की बड़ी ताकत मानी जा रही है। अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए भारतीय टीम शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), यशस्वी जायसवाल, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बराड़, हर्ष दुबे और हर्षित राणा।

तीसरे वनडे के लिए हर्षित राणा भारतीय टीम में शामिल:अफगानिस्तान के खिलाफ आखिरी वनडे मैच चेन्नई में खेला जाएगा, भारत सीरीज 2-0 से आगे

तीसरे वनडे के लिए हर्षित राणा भारतीय टीम में शामिल:अफगानिस्तान के खिलाफ आखिरी वनडे मैच चेन्नई में खेला जाएगा, भारत सीरीज 2-0 से आगे

तेज गेंदबाज हर्षित राणा को अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए टीम इंडिया में शामिल किया गया है। BCCI ने शुक्रवार को बताया कि हर्षित ने BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी में रिहैबिटेशन पूरा कर लिया है। वे चेन्नई में भारतीय टीम से जुड़ गए हैं। जहां 20 जून को वनडे सीरीज का तीसरा और आखिरी वनडे मैच खेला जाएगा। फिलहाल, भारतीय टीम 3 मैचों की सीरीज में 2-0 से आगे है। टीम ने पहले मैच में 7 विकेट और दूसरे मैच में 170 रन की जीत हासिल की थी। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में फिटनेस टेस्ट पास किया राणा पिछले कुछ समय से BCCI के डॉक्टरों और फिजियोथेरेपिस्ट की निगरानी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपनी फिटनेस पर काम कर रहे थे। फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें टीम में शामिल किया। हर्षित के टीम से जुड़ने से भारत के पेस अटैक को मजबूती मिलेगी। क्योंकि, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज जैसे तेज गेंदबाज इस सीरीज में नहीं खेल रहे हैं। अब तक तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी अर्शदीप सिंह और प्रसिद्ध कृष्णा के पास हैं। अब कप्तान शुभमन गिल के पास चेन्नई की परिस्थितियों के अनुसार तीन पेसर्स का विकल्प होगा। टी-20 वर्ल्डकप से पहले चोटिल हुए थे राणा हर्षित राणा टी-20 वर्ल्ड कप से पहले साउथ अफ्रीका के खिलाफ प्रैक्टिस मैच में चोटिल हो गए थे। चोट गंभीर होने के कारण उनकी सर्जरी करानी पड़ी। इसी वजह से वह टी-20 वर्ल्ड कप और IPL नहीं खेल सके। तीसरे वनडे के लिए भारतीय टीम शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), यशस्वी जायसवाल, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बराड़, हर्ष दुबे और हर्षित राणा।