Friday, 09 Oct 2026 | 06:30 PM

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पाकिस्तान को हराकर WTC में भारत से आगे बांग्लादेश:टीम इंडिया छठे स्थान पर खिसकी; ऑस्ट्रेलिया 87.5% पॉइंट्स के साथ टॉप पर

पाकिस्तान को हराकर WTC में भारत से आगे बांग्लादेश:टीम इंडिया छठे स्थान पर खिसकी; ऑस्ट्रेलिया 87.5% पॉइंट्स के साथ टॉप पर

ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की पॉइंट टेबल में बांग्लादेश ने भारत को पीछे छोड़कर पांचवां स्थान हासिल कर लिया है। पाकिस्तान पर लगातार दूसरी जीत के बाद बांग्लादेश 58.33 प्रतिशत अंक के साथ छठे से पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, भारत 48.15 प्रतिशत अंक के साथ छठे नंबर पर खिसक गया है। WTC के पहले दो सीजन के फाइनल में पहुंचने वाली भारतीय टीम के लिए यह रैंकिंग चेतावनी मानी जा रही है। एशियाई टीमों में शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम अब सिर्फ पाकिस्तान से ऊपर है। भारत ने इस साल अब तक एक भी टेस्ट मैच नहीं खेला है, जिसका असर ICC की ताजा अंक तालिका में दिख रहा है। भारत ने अपना आखिरी टेस्ट मैच नवंबर 2025 में गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेला था। 22 से 25 नवंबर तक खेले गए इस मैच में साउथ अफ्रीका ने भारत को 408 रनों से हराया था। बांग्लादेश ने पाकिस्तान को हराकर सीरीज जीती बांग्लादेश ने अपने घर में दो टेस्ट मैचों की सीरीज में पाकिस्तान को 2-0 से हराया। मीरपुर में खेले गए पहले टेस्ट में बांग्लादेश ने पाकिस्तान को 104 रनों से हराया था। इसके बाद बुधवार को सिलहट में खत्म हुए दूसरे टेस्ट में भी बांग्लादेश ने 78 रन से जीत दर्ज की। दूसरे टेस्ट में 437 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की टीम दूसरी पारी में 358 रनों पर सिमट गई। इस हार के बाद पाकिस्तान 2025-2027 WTC साइकिल में एक जीत और तीन हार के साथ आठवें स्थान पर बना हुआ है। टीम का पॉइंट्स पर्सेंटेज भी काफी खराब हो गया है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड टॉप-2 पर कायम ताजा रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया 8 टेस्ट में 7 जीत और 87.50 पर्सेंटेज पॉइंट्स के साथ टॉप पर बना हुआ है। न्यूजीलैंड 3 टेस्ट में दो जीत और एक ड्रा के साथ 77.78 पर्सेंटेज पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर है। साउथ अफ्रीका तीसरे और श्रीलंका चौथे नंबर पर मौजूद हैं। भारतीय टीम की रैंकिंग गिरने की वजह खराब प्रदर्शन भारतीय टीम की रैंकिंग गिरने की बड़ी वजह खराब प्रदर्शन रहा है। टीम इंडिया को घर में साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 0-2 से हार मिली थी। वहीं, इंग्लैंड दौरे पर शुभमन गिल की कप्तानी में टीम पांच मैचों की सीरीज 2-2 से ड्रा करा सकी थी, जहां उसे दो मैचों में हार मिली थी। इन हारों से भारत का जीत प्रतिशत काफी नीचे आ गया। 6 जून को अफगानिस्तान से मुकाबला, WTC का हिस्सा नहीं भारतीय टीम को आने वाले दिनों में कई टेस्ट मैच खेलने हैं। भारत 6 जून से अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच खेलेगा। हालांकि, यह मुकाबला मौजूदा WTC साइकिल का हिस्सा नहीं है, इसलिए इसके नतीजों का रैंकिंग पर असर नहीं पड़ेगा। WTC साइकिल के तहत भारत को इस साल के अंत में श्रीलंका और न्यूजीलैंड दौरे पर दो-दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। इसके बाद 2027 में भारतीय टीम घर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेलेगी। फाइनल की रेस में बने रहने के लिए भारत को श्रीलंका और न्यूजीलैंड दौरों पर बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

कामत ने चेताया,उधार लेकर शेयर ट्रेडिंग का ट्रेंड डुबो देगा:मिड, स्मॉल कैप शेयरों में सर्किट लगने पर न निवेशक निकल सकता है, न ब्रोकर

कामत ने चेताया,उधार लेकर शेयर ट्रेडिंग का ट्रेंड डुबो देगा:मिड, स्मॉल कैप शेयरों में सर्किट लगने पर न निवेशक निकल सकता है, न ब्रोकर

देश के शेयर बाजार में इन दिनों मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी यानी एमटीएफ का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। जीरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामत ने इस रफ्तार को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि एमटीएफ ब्रोकर्स के लिए आसान कमाई का जरिया नजर आता है, लेकिन अगर एक भी बुरा दिन आया और रिस्क मैनेजमेंट चूका, तो सारी कमाई एक ही झटके में खत्म हो सकती है। यही नहीं, इसका असर पूरे फाइनेंशियल सिस्टम पर पड़ सकता है। कामत ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि ब्रोकर्स की एमटीएफ बुक बढ़ रही है, जबकि बाजार न ऊपर जा रहा, न नीचे। यह असंतुलन खतरनाक है। उन्होंने इसकी तुलना दक्षिण कोरिया से करते हुए कहा कि वहां का शेयर बाजार एक साल में करीब 150% चढ़ा है, इसलिए लोग उस तेजी का फायदा उठाने के लिए उधार ले रहे हैं। भारत की स्थिति अलग है। यहां बाजार स्थिर है, पर एमटीएफ बढ़ रही है, जो खतरनाक संकेत है। कामत ने एमटीएफ का सबसे बड़ा जोखिम समझाते हुए कहा कि अगर किसी शेयर में भारी गिरावट आती है और वह मार्जिन से ज्यादा (जैसे 20% से अधिक) टूटता है, तो नुकसान की भरपाई ब्रोकर को करनी पड़ती है। ग्राहक से घाटा वसूलना अक्सर मुश्किल होता है। मामला गंभीर तब हो जाता है जब ग्राहक किसी शेयर को गिरवी रखकर उसी में निवेश बढ़ाता है। मिड और स्मॉल कैप शेयरों में सर्किट लगने पर न निवेशक निकल सकेगा, न ब्रोकर। कामत ने बताया कि पूरी ब्रोकरेज इंडस्ट्री की एमटीएफ बुक का करीब 50% हिस्सा उन शेयरों में है, जो एफएंडओ (वायदा) सेगमेंट में नहीं हैं। यानी जहां हेजिंग का विकल्प नहीं है। कामत ने चेताया कि कुछ ब्रोकर्स की एमटीएफ बुक उसकी नेटवर्थ (कुल संपत्ति) का 500% तक पहुंच सकता है। अगर बाजार में अचानक बड़ी गिरावट आती है, तो ऐसे ब्रोकर्स उन एमटीएफ पोजिशन में फंस सकते हैं, जिनसे बाहर निकलना संभव ही नहीं होगा। कामत ने यह भी कहा कि प्रतिस्पर्धा के दबाव में जल्द कोलैटरल मार्जिन को एमटीएफ खरीदारी के लिए अनुमति देनी पड़ सकती है, जो अब तक प्रतिबंधित है। ऐसा होने पर जोखिम और बढ़ेगा। एमटीएफ क्या है, इससे खतरा किस मामले है? एमटीएफ यानी मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी ऐसी सुविधा है, जिसमें निवेशक ब्रोकर से उधार लेकर शेयर खरीद सकता है। निवेशक कुछ रकम खुद लगाता है, बाकी ब्रोकर देता है। फायदा होने पर निवेशक को ज्यादा मुनाफा मिलता है, लेकिन नुकसान की स्थिति में ब्रोकर को भी घाटा उठाना पड़ सकता है। अगर शेयर में भारी गिरावट आए और सर्किट लग जाए, तो न निवेशक बाहर निकल सकता है और न ब्रोकर। यही वो ‘एक बुरा दिन’ है, जिसकी चेतावनी कामत ने दी है।

कामत ने चेताया,उधार लेकर शेयर ट्रेडिंग का ट्रेंड डुबो देगा:मिड, स्मॉल कैप शेयरों में सर्किट लगने पर न निवेशक निकल सकता है, न ब्रोकर

कामत ने चेताया,उधार लेकर शेयर ट्रेडिंग का ट्रेंड डुबो देगा:मिड, स्मॉल कैप शेयरों में सर्किट लगने पर न निवेशक निकल सकता है, न ब्रोकर

देश के शेयर बाजार में इन दिनों मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी यानी एमटीएफ का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। जीरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामत ने इस रफ्तार को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि एमटीएफ ब्रोकर्स के लिए आसान कमाई का जरिया नजर आता है, लेकिन अगर एक भी बुरा दिन आया और रिस्क मैनेजमेंट चूका, तो सारी कमाई एक ही झटके में खत्म हो सकती है। यही नहीं, इसका असर पूरे फाइनेंशियल सिस्टम पर पड़ सकता है। कामत ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि ब्रोकर्स की एमटीएफ बुक बढ़ रही है, जबकि बाजार न ऊपर जा रहा, न नीचे। यह असंतुलन खतरनाक है। उन्होंने इसकी तुलना दक्षिण कोरिया से करते हुए कहा कि वहां का शेयर बाजार एक साल में करीब 150% चढ़ा है, इसलिए लोग उस तेजी का फायदा उठाने के लिए उधार ले रहे हैं। भारत की स्थिति अलग है। यहां बाजार स्थिर है, पर एमटीएफ बढ़ रही है, जो खतरनाक संकेत है। कामत ने एमटीएफ का सबसे बड़ा जोखिम समझाते हुए कहा कि अगर किसी शेयर में भारी गिरावट आती है और वह मार्जिन से ज्यादा (जैसे 20% से अधिक) टूटता है, तो नुकसान की भरपाई ब्रोकर को करनी पड़ती है। ग्राहक से घाटा वसूलना अक्सर मुश्किल होता है। मामला गंभीर तब हो जाता है जब ग्राहक किसी शेयर को गिरवी रखकर उसी में निवेश बढ़ाता है। मिड और स्मॉल कैप शेयरों में सर्किट लगने पर न निवेशक निकल सकेगा, न ब्रोकर। कामत ने बताया कि पूरी ब्रोकरेज इंडस्ट्री की एमटीएफ बुक का करीब 50% हिस्सा उन शेयरों में है, जो एफएंडओ (वायदा) सेगमेंट में नहीं हैं। यानी जहां हेजिंग का विकल्प नहीं है। कामत ने चेताया कि कुछ ब्रोकर्स की एमटीएफ बुक उसकी नेटवर्थ (कुल संपत्ति) का 500% तक पहुंच सकता है। अगर बाजार में अचानक बड़ी गिरावट आती है, तो ऐसे ब्रोकर्स उन एमटीएफ पोजिशन में फंस सकते हैं, जिनसे बाहर निकलना संभव ही नहीं होगा। कामत ने यह भी कहा कि प्रतिस्पर्धा के दबाव में जल्द कोलैटरल मार्जिन को एमटीएफ खरीदारी के लिए अनुमति देनी पड़ सकती है, जो अब तक प्रतिबंधित है। ऐसा होने पर जोखिम और बढ़ेगा। एमटीएफ क्या है, इससे खतरा किस मामले है? एमटीएफ यानी मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी ऐसी सुविधा है, जिसमें निवेशक ब्रोकर से उधार लेकर शेयर खरीद सकता है। निवेशक कुछ रकम खुद लगाता है, बाकी ब्रोकर देता है। फायदा होने पर निवेशक को ज्यादा मुनाफा मिलता है, लेकिन नुकसान की स्थिति में ब्रोकर को भी घाटा उठाना पड़ सकता है। अगर शेयर में भारी गिरावट आए और सर्किट लग जाए, तो न निवेशक बाहर निकल सकता है और न ब्रोकर। यही वो ‘एक बुरा दिन’ है, जिसकी चेतावनी कामत ने दी है।

चुकंदर इडली फ्राई रेसिपी: गर्मियों में शरीर को ठंडक और पोषण देती है यह चुकंदर इडली फ्राई, नोट करें आसान रेसिपी

चुकंदर इडली फ्राई रेसिपी

20 मई 2026 को 13:29 IST पर अपडेट किया गया चुकंदर इडली फ्राई रेसिपी: इस मौसम में भीषण गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा, ठंडा और ऊर्जावान बनाए रखना सबसे बड़ा काम है। ऐसे में सुबह के समय या शाम के समय ‘चुकंदर इडली फ्री’ लाइट लगाई जाती है। यह सिर्फ आपके स्वाद को नहीं बदलेगा, बल्कि शरीर की गुणवत्ता का पोषण भी करेगा। अनुसरण करना : सामग्री नोट करें – 2 कप चावल और 1 कप उड़द दाल, चुकंदर, नमक, राई, जीरा और कैरी पत्ता, हीरा प्याज और हरी मिर्च, हल्दी, गर्म मसाला आदि। छवि: सोशल मीडिया चावल और दाल को 6-7 घंटे तक धीमी गति से पीस लें और रात भर फर्मेंट होने दें। चुकंदर को पीसकर उसका पेस्ट बना लें और उसे इडली के गोंद में अच्छी तरह मिला दें। छवि: सोशल मीडिया इडली के सांचों को 15-20 मिनिट तक गरम कीजिये. इडली को ठंडा होने पर इडली को पिज़्ज़ा में काट लें। छवि: सोशल मीडिया एक पैन में तेल गर्म करें और इसमें राई, जीरा, करी पत्ता और हरी मिर्च का अनुपात शामिल है। अब कटे हुए पैवेलियन मैट्रिक्स सोलर होने तक ग्रेड। सभी मूलभूत सम्मिलित। छवि: सोशल मीडिया अंत में कटी हुई पिंक इडली डालें और 2-3 मिनट तक कुरकुरा होने तक फ्री करें। हरा धनिए की सजा। छवि: सोशल मीडिया चुकंदर हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है। इडली का फूल होता है और गर्मियों में पेट को ठंडक मिलती है और ये एनर्जी बूस्टर भी है। छवि: सोशल मीडिया द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 20 मई 2026 13:29 IST

फिलीपींस के एक द्वीप पर ‘एआई' सरकार:कैबिनेट में गांधी और मंडेला जैसे 17 डिजिटल अवतार; 12 हजार लोग ई-नागरिक बनने को तैयार

फिलीपींस के एक द्वीप पर ‘एआई' सरकार:कैबिनेट में गांधी और मंडेला जैसे 17 डिजिटल अवतार; 12 हजार लोग ई-नागरिक बनने को तैयार

कल्पना कीजिए… एक ऐसा देश, जहां फैसले इंसान नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ले। कैबिनेट में महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला, विंस्टन चर्चिल जैसी शख्सियतों के ‘डिजिटल अवतार’ बैठें। वे बहस करें, तर्क दें, वोटिंग करें और सरकार चलाएं। सुनने में ये किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन फिलीपींस के एक छोटे से द्वीप पर इसे सच बनाने की कोशिश शुरू हो चुकी है। यह प्रयोग ब्रिटेन के टेक उद्यमी डैन थॉमसन कर रहे हैं। उन्होंने पलावन द्वीपसमूह में 3.6 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले एक द्वीप को अपनी एआई कंपनी ‘सेंसाय’ के नाम पर माइक्रोनेशन घोषित किया है। माइक्रोनेशन ऐसे स्वघोषित छोटे देश या रियासतें होती हैं, जिन्हें चलाने वाले खुद को स्वतंत्र राष्ट्र बताते हैं, लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिलती। थॉमसन ने यहां सरकार चलाने के लिए 17 एआई बॉट्स की परिषद बनाई है। इन्हें गांधी, चर्चिल, एलेनॉर रूजवेल्ट, मार्कस ऑरेलियस, सन त्जू और मंडेला जैसे नेताओं के व्यक्तित्व, लेखन और विचारों के आधार पर तैयार किया है। दावा है कि ये एआई नेता व्यक्तिगत लालच, लॉबिंग और राजनीतिक स्वार्थ से मुक्त होकर सिर्फ वस्तुनिष्ठ फैसले लेंगे। यहां ई-रेजिडेंट्स प्रस्ताव रख सकेंगे। एआई परिषद उन पर चर्चा करेगी और वोटिंग के जरिए फैसला लेगी। हालांकि, इस प्रयोग को लेकर जितना उत्साह है, उतना डर भी है। खुद थॉमसन मानते हैं कि चीजें गलत दिशा में जा सकती हैं। उन्होंने कहा, अगर एआई हथियार जुटाकर पड़ोसी द्वीपों पर हमला करने लगे, तो बहुत खराब स्थिति होगी। हालांकि, वे इसे बेहद असंभव मानते हैं। इसी वजह से उन्होंने ‘ह्यूमन ओवरराइड असेंबली’ भी बनाई है, ताकि किसी खतरे की स्थिति में इंसानी दखल बना रहे। फिलहाल इस द्वीप पर सिर्फ एक केयरटेकर रहता है, लेकिन भविष्य में यहां 30 विला बनाने की योजना है। यहां रेजिडेंसी प्रोग्राम 2027 में लॉन्च होगा। 12 हजार लोग यहां ई-नागरिक बनने में रुचि दिखा चुके हैं। थॉमसन मानते हैं कि इसकी बड़ी वजह लोगों का सरकारों से घटता भरोसा है। कई आवेदक तकनीक के प्रति उत्सुक हैं, तो कुछ पारंपरिक राजनीति और भ्रष्टाचार से निराश। आलोचक कह रहे, एआई से सरकार चलाने की उम्मीद बेतुकी आलोचक इस मॉडल को खतरनाक और अलोकतांत्रिक मान रहे हैं। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की एआई विशेषज्ञ अलोंद्रा नेल्सन कहती हैं कि एआई रोज नई गड़बड़ियां कर रहा है। उससे सरकार चलाने की उम्मीद बेतुकी है। एक व्यक्ति और उसकी कंपनी द्वारा बनाई गई व्यवस्था लोकतांत्रिक नहीं कही जा सकती। इसके बावजूद थॉमसन का भरोसा कायम है। वे कहते हैं कि भविष्य में दुनिया की सरकारें एआई आधारित सिस्टम अपनाएंगी।

थलापति विजय के को-स्टार जय ने कबूला इस्लाम:कहा- मंदिर में अपमान हुआ, मस्जिद में कोई धक्का नहीं देता, नाम बदलकर अजीज करूंगा

थलापति विजय के को-स्टार जय ने कबूला इस्लाम:कहा- मंदिर में अपमान हुआ, मस्जिद में कोई धक्का नहीं देता, नाम बदलकर अजीज करूंगा

थलापति विजय के साथ 2002 की फिल्म भगवती में नजर आ चुके एक्टर जयकांत ने इस्लाम कबूल कर लिया है। इसकी घोषणा करते हुए उन्होंने कहा है कि मंदिर में अपमानित महसूस करने के बाद उन्होंने इस्लाम अपनाया और जल्द ही वो अपना नाम भी बदलने वाले हैं। गलाटा प्लस को दिए इंटरव्यू में जय ने बताया है कि उन्होंने 2011 से इस्लाम फॉलो करना शुरू किया है, लेकिन आज तक नाम नहीं बदला। उन्होंने कहा कि वो सबरीमाला के लिए माला पहनते थे। इसके बाद उन्होंने एक साल तक यीशू की भी माला पहनी और व्रत रखा। उन्होंने सभी देवी-देवताओं का अनुसरण किया, ये सोचकर कि सब ठीक है। लेकिन फिर एक समय ऐसा आया, जब उन्हें मंदिर में अपमानित होना पड़ा। उनके साथ मंदिर में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिनसे वो संतुष्ट नहीं थे। जय ने बातचीत में आगे बताया है कि मंदिर में अपमान होने के बाद वो मस्जिद जाने लगे, जहां उन्होंने देखा कि सभी लाइन से खड़े होकर प्रार्थना कर रहे हैं। एक्टर ने इंटरव्यू में कहा, ‘सभी जानते थे कि मैं एक्टर हूं, लेकिन मस्जिद में किसी ने मुझसे बात नहीं की। बाहर आने के बाद ही उन्होंने मुझसे बात की, वो भी विनम्रता से। वो सभी को समान मानते हैं। उनके लिए ईश्वर ही सर्वोच्च है। चाहे कोई सेलिब्रिटी हो, वो उसे बड़ा नहीं समझते।’ आगे उन्होंने कहा- ‘मस्जिदों में प्रार्थना करते हुए कोई धक्का नहीं देता, या जाने के लिए नहीं कहता। हम जितनी देर चाहें वहां रह सकते हैं। ये योग जैसा अनुभव है। अब मेरा स्वाभाव भी बदल गया है।’ जय का कहना है कि धर्म परिवर्तन से उनके करियर का कोई लेना-देना नहीं है। एक्टर ने बताया है कि वो जल्द ही अपना नाम जयकांत से अजीज जय करने वाले हैं। उनके इस फैसले से परिवार वाले भी खुश हैं, क्योंकि इससे पहले वो किसी धर्म को नहीं मानते थे। कौन हैं जयनाथ, जो बनेंगे अजीज 42 साल के जयनाथ एक तमिल एक्टर हैं। उन्होंने फिल्म भगवती में थलापति विजय के छोटे भाई का रोल निभाया था। इसके बाद वो चेन्नई 600028, सुब्रमण्यपुरम, एंगाएयुम एप्पोथुम, राजा रानी और जरुगंदी जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं।

थलापति विजय के को-स्टार जय ने कबूला इस्लाम:कहा- मंदिर में अपमान हुआ, मस्जिद में कोई धक्का नहीं देता, नाम बदलकर अजीज करूंगा

थलापति विजय के को-स्टार जय ने कबूला इस्लाम:कहा- मंदिर में अपमान हुआ, मस्जिद में कोई धक्का नहीं देता, नाम बदलकर अजीज करूंगा

थलापति विजय के साथ 2002 की फिल्म भगवती में नजर आ चुके एक्टर जयकांत ने इस्लाम कबूल कर लिया है। इसकी घोषणा करते हुए उन्होंने कहा है कि मंदिर में अपमानित महसूस करने के बाद उन्होंने इस्लाम अपनाया और जल्द ही वो अपना नाम भी बदलने वाले हैं। गलाटा प्लस को दिए इंटरव्यू में जय ने बताया है कि उन्होंने 2011 से इस्लाम फॉलो करना शुरू किया है, लेकिन आज तक नाम नहीं बदला। उन्होंने कहा कि वो सबरीमाला के लिए माला पहनते थे। इसके बाद उन्होंने एक साल तक यीशू की भी माला पहनी और व्रत रखा। उन्होंने सभी देवी-देवताओं का अनुसरण किया, ये सोचकर कि सब ठीक है। लेकिन फिर एक समय ऐसा आया, जब उन्हें मंदिर में अपमानित होना पड़ा। उनके साथ मंदिर में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिनसे वो संतुष्ट नहीं थे। जय ने बातचीत में आगे बताया है कि मंदिर में अपमान होने के बाद वो मस्जिद जाने लगे, जहां उन्होंने देखा कि सभी लाइन से खड़े होकर प्रार्थना कर रहे हैं। एक्टर ने इंटरव्यू में कहा, ‘सभी जानते थे कि मैं एक्टर हूं, लेकिन मस्जिद में किसी ने मुझसे बात नहीं की। बाहर आने के बाद ही उन्होंने मुझसे बात की, वो भी विनम्रता से। वो सभी को समान मानते हैं। उनके लिए ईश्वर ही सर्वोच्च है। चाहे कोई सेलिब्रिटी हो, वो उसे बड़ा नहीं समझते।’ आगे उन्होंने कहा- ‘मस्जिदों में प्रार्थना करते हुए कोई धक्का नहीं देता, या जाने के लिए नहीं कहता। हम जितनी देर चाहें वहां रह सकते हैं। ये योग जैसा अनुभव है। अब मेरा स्वाभाव भी बदल गया है।’ जय का कहना है कि धर्म परिवर्तन से उनके करियर का कोई लेना-देना नहीं है। एक्टर ने बताया है कि वो जल्द ही अपना नाम जयकांत से अजीज जय करने वाले हैं। उनके इस फैसले से परिवार वाले भी खुश हैं, क्योंकि इससे पहले वो किसी धर्म को नहीं मानते थे। कौन हैं जयनाथ, जो बनेंगे अजीज 42 साल के जयनाथ एक तमिल एक्टर हैं। उन्होंने फिल्म भगवती में थलापति विजय के छोटे भाई का रोल निभाया था। इसके बाद वो चेन्नई 600028, सुब्रमण्यपुरम, एंगाएयुम एप्पोथुम, राजा रानी और जरुगंदी जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं।

घर पर आसानी से कैसे बनाएं मक्खन: हाथ भी नहीं दुखेगा और मिनट में निकलेगा मटका भर मक्खन, बस दही में मिली ये एक चीज; जानिए आसान उपाय

घर पर आसानी से मक्खन कैसे बनाएं

20 मई 2026 को 12:35 IST पर अपडेट किया गया घर पर आसानी से मक्खन कैसे बनाएं: घर पर बने शुद्ध और दानेदार मक्खन का स्वाद ही कुछ अलग होता है, लेकिन अक्सर महिलाएं मलाई या दही से मक्खन के छिलके और हाथों के दर्द से बचती हैं। अगर आप भी इसी वजह से मार्केट का बटर लाते हैं, तो यह आसान ट्रिक आपके बेहद काम आएगी। अब आपको चौदह मथानी की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आइए जानते हैं। अनुसरण करना : बटरफ्लाई के लिए फर्म में रखा गया रोलर और छोटा दही सबसे अच्छा होता है। कैटापन फ़िट को जल्दी अलग करने में मदद मिलती है, जबकि ठंडा होने की वजह से मक्खन सुधार नहीं होता और आसानी से जमता है। छवि: सोशल मीडिया जब आप दही को मथना शुरू करें तो 5-6 बर्फ के टुकड़े या एक गिलास एकदम ठंडा पानी मिला लें। कूल्ड चॉकलेट के टुकड़े को तत्काल सख्त कर देता है, जिससे वे छाछ से अलग सतह की सतह पर तैरने लगते हैं। छवि: सोशल मीडिया दही को प्रमाणित या मथानी से एक ही दिशा में 2-3 मिनट तक फेंटें जब तक दाने न दिखें। छवि: सोशल मीडिया बर्फ के टुकड़े पर प्रतिबिंबित सतह और 1 मिनट और गणित। मक्खन ऊपर और। छवि: सोशल मीडिया जब मक्खन के गुच्छे बन जाएं, तो उन्हें हाथ से धीरे-धीरे इकट्ठा करके निकाल लें। छवि: सोशल मीडिया पके हुए मक्खन के गोलों को एक चुटकी में ठंडे पानी के साथ 2-3 बार लें। इससे बच गई छाछ निकल जाती है, जिससे मक्खन में खटास नहीं आती और वह कई दिनों तक ताजा बना रहता है। छवि: सोशल मीडिया द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 20 मई 2026 12:34 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)दही से मक्खन कैसे बनाएं(टी)घर पर आसान मक्खन बनाने की विधि(टी)घर पर सफेद मखान कैसे निकालें(टी)दही से मक्खन बनाने की रसोई हैक(टी)मक्खन बनाने की त्वरित तरकीबें(टी)दही से मक्खन कैसे निकले(टी)बिना ब्लेंडर के घर का बना सफेद मक्खन(टी)मक्खन के लिए ग्रीष्मकालीन रसोई के तरीके(टी)दही से मक्खन बनाने की विधि(टी)घर पर सफेद मक्खन कैसे बनाएं

कर्नाटक में जल्द सत्ता परिवर्तन? सिद्धारमैया, शिवकुमार से खड़गे की मुलाकात से हलचल बढ़ी | भारत समाचार

BAN Vs PAK Live Score: Follow latest updates from Day 5 of the contest. (AFP Photo)

आखरी अपडेट:20 मई, 2026, 12:00 IST पार्टी के सूत्रों ने कहा कि सभा के दौरान चर्चा राज्य में राजनीतिक घटनाक्रम और मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी अटकलों पर केंद्रित रही। पिछले साल नवंबर में कांग्रेस सरकार द्वारा अपना आधा कार्यकाल पूरा करने के बाद सत्ता-बंटवारे का मुद्दा तेज हो गया। (फाइल फोटो) कर्नाटक पावर शिफ्ट बज़: समाचार एजेंसी पीटीआई ने पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा बेंगलुरु में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ बंद कमरे में चर्चा करने के बाद कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन की ताजा अटकलें फिर से शुरू हो गईं। सूत्रों के अनुसार, केरल में नई कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के बाद खड़गे, सिद्धारमैया और शिवकुमार ने सोमवार को तिरुवनंतपुरम से बेंगलुरु तक एक साथ यात्रा की। उतरने के तुरंत बाद, नेताओं ने कथित तौर पर अनौपचारिक दोपहर के भोजन के लिए कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर मुलाकात की, जो लगभग 45 मिनट तक चली। खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री केएच मुनियप्पा, मुख्य सचेतक अशोक एम पट्टन, सीएम के कानूनी सलाहकार और विधायक एएस पोन्नन्ना और शांतिनगर विधायक एनए हारिस भी उपस्थित थे। बैठक के बाद शिवकुमार तिरूपति के लिए रवाना हो गए. 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद से सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता-साझाकरण व्यवस्था पर लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच इस बैठक ने नई राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी है। पार्टी के सूत्रों ने कहा कि सभा के दौरान चर्चा राज्य में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी अटकलों पर केंद्रित रही। बैठक का समय राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, सिद्धारमैया सरकार अपने पांच साल के कार्यकाल के आधे पड़ाव के करीब पहुंच रही है, एक ऐसा चरण जिसने बार-बार इस चर्चा को हवा दी है कि क्या कांग्रेस आलाकमान अंततः नेतृत्व समीकरणों पर फिर से विचार कर सकता है या कैबिनेट फेरबदल पर विचार कर सकता है। मधुगिरी के कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने संकेत दिया कि नेतृत्व पर चर्चा अनौपचारिक रूप से हुई होगी। उन्होंने कहा, “खड़गे, राहुल गांधी, सिद्धारमैया और शिवकुमार केरल में थे। चर्चा वहीं क्यों नहीं हुई होगी।” जबकि कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक रूप से आसन्न नेतृत्व परिवर्तन की रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, शिवकुमार के समर्थकों ने हाल के महीनों में “अगला सीएम” अभियान को आगे बढ़ाना जारी रखा है। हालाँकि, शिवकुमार ने कहा है कि वह और सिद्धारमैया दोनों पार्टी आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे। मंगलवार सुबह राजनीतिक गतिविधि तब और तेज हो गई जब सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले नेताओं ने तुमकुरु में कांग्रेस सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली के आवास पर नाश्ते पर बैठक की। सूत्रों ने कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व अंततः बदलाव का फैसला करता है तो गृह मंत्री जी परमेश्वर के सर्वसम्मत उम्मीदवार के रूप में उभरने की संभावना पर भी चर्चा हुई। हालाँकि, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना ​​है कि लंबे समय से लंबित कैबिनेट फेरबदल के लिए आलाकमान पर दबाव बनाते हुए शिवकुमार की महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के लिए सिद्धारमैया खेमे द्वारा परमेश्वर का नाम आगे बढ़ाना एक रणनीतिक कदम भी हो सकता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया कर्नाटक में जल्द सत्ता परिवर्तन? सिद्धारमैया, शिवकुमार से खड़गे की मुलाकात ने चर्चा को हवा दी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

क्या गर्मियों में बढ़ जाती है बवासीर की समस्या? इसे कंट्रोल करने के लिए क्या करें, जानें डॉक्टर की राय

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Last Updated:May 20, 2026, 11:58 IST Hemorrhoids in Hot Weather: गर्मी में बवासीर की समस्या बढ़ जाती है और इसके पीछे कई वजह होती हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो गर्मियों में डिहाइड्रेशन, कब्ज और गलत खानपान के कारण यह परेशानी बढ़ती है. अगर आप गर्मी में पर्याप्त पानी पिएं, फाइबर से भरपूर डाइट लें और हल्की एक्सरसाइज करें, तो इस समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. गर्मी में कब्ज की समस्या बढ़ने से बवासीर ट्रिगर हो सकती है. Summer and Piles Problem: गर्मी का मौसम हमारे शरीर पर गहरा असर डालता है. तेज धूप, गर्म हवा और पसीने से लोगों का बुरा हाल हो जाता है. गर्मियों में पाचन से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं. इन्हीं में से एक समस्या बवासीर है. इसे पाइल्स भी कहा जाता है. यह एक दर्दनाक परेशानी है, जिसकी वजह से कई लोगों को उठने-बैठने में भी काफी दिक्कत होती है. अक्सर लोगों का सवाल होता है कि गर्मियों में बवासीर की समस्या क्यों बढ़ जाती है और इससे राहत के लिए क्या करना चाहिए? नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रो डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा ने News18 को बताया गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाती है. जब व्यक्ति पर्याप्त पानी नहीं पीता, तो कब्ज की समस्या हो सकती है और यही बवासीर को ट्रिगर करने वाला सबसे बड़ा कारण बनता है. गर्मियों में ज्यादा मसालेदार खाना, बाहर का जंक फूड और बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं. जब मल त्याग के दौरान जोर लगाना पड़ता है, तो गुदा क्षेत्र की नसों पर दबाव बढ़ता है, जिससे बवासीर की स्थिति बिगड़ सकती है. डॉक्टर के अनुसार बवासीर का सबसे मुख्य कारण कब्ज है. गर्मियों में पसीना ज्यादा निकलने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे मल सख्त हो सकता है. सख्त मल त्याग के दौरान दर्द और खून आने की समस्या बढ़ जाती है. गर्मियों में बवासीर को कंट्रोल रखने के लिए कम से कम 8 से 10 गिलास पानी रोजाना पीना चाहिए. हरी सब्जियां, फल, सलाद और साबुत अनाज जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना चाहिए. फाइबर मल को नरम करता है और उसे आसानी से बाहर निकलने में मदद करता है. इससे बवासीर के लक्षणों में काफी राहत मिल सकती है. एक्सपर्ट की मानें तो जो लोग लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करते हैं, उनमें बवासीर की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. गर्मियों में यह स्थिति और खराब हो सकती है क्योंकि शरीर में सूजन और असहजता बढ़ जाती है. इसलिए हर 30 से 40 मिनट में थोड़ा चलना-फिरना जरूरी है. हल्की एक्सरसाइज या वॉक करने से ब्लड फ्लो बेहतर होता है और दबाव कम होता है. गर्मी में शराब और कैफीन का अधिक सेवन भी बवासीर की समस्या को बढ़ा सकता है. अगर लक्षण गंभीर हों जैसे लगातार दर्द या ज्यादा ब्लीडिंग, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें