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नारियल पानी और कोकोनट मिल्क में क्या अंतर है? जानिये इनके फायदे और नुकसान

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नारियल से बने दो लोकप्रिय पेय, नारियल पानी और कोकोनट मिल्क- अक्सर एक‑दूसरे से भ्रमित कर दिए जाते हैं, जबकि दोनों स्वाद, पोषण और उपयोग में बिल्कुल अलग हैं. आइए इनके बीच का साफ अंतर, फायदे और संभावित नुकसान समझते हैं. नारियल पानी (Coconut Water) क्या है?नारियल पानी कच्चे, हरे नारियल के अंदर पाया जाने वाला प्राकृतिक तरल है. यह पारदर्शी होता है और सीधे पीने योग्य होता है. फायदेडिहाइड्रेशन में बेहतरीन: इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूरकम कैलोरी: वजन कंट्रोल के लिए अच्छापाचन में सहायक और लू से बचाव.किडनी स्टोन के जोखिम को कम करने में मदद.वर्कआउट के बाद नेचुरल एनर्जी बूस्टर. नुकसानबहुत अधिक पीने से कुछ लोगों में पेट फूलना.किडनी की समस्या या हाई पोटैशियम वालों को सीमित मात्रा करनी चाहिए. कोकोनट मिल्क (Coconut Milk) क्या है?कोकोनट मिल्क पके नारियल के गूदे को पानी के साथ पीसकर बनाया जाता है. यह गाढ़ा, क्रीमी और सफेद होता है. फायदेहेल्दी फैट्स (MCTs) से भरपूर-ऊर्जा देता है.डेयरी‑फ्री विकल्प; लैक्टोज इन्टॉलरेंस वालों के लिए अच्छा.करी, सूप, डेज़र्ट में स्वाद और क्रीमीनेस बढ़ाता है.स्किन और बालों के लिए पोषक. नुकसानकैलोरी और सैचुरेटेड फैट ज्यादा, वजन बढ़ने का जोखिम.हार्ट पेशेंट्स को मध्यम मात्रा.बाजार के पैक में एडिटिव्स/प्रिज़र्वेटिव्स हो सकते हैं. मुख्य अंतर एक नज़र मेंस्रोत:नारियल पानी—कच्चे नारियल का प्राकृतिक तरलकोकोनट मिल्क—पके नारियल का पिसा हुआ गूदा और पानी कैलोरी:पानी—कम, मिल्क—ज्यादा फैट:पानी—लगभग शून्य, मिल्क—ज्यादा उपयोग:पानी—पेय/हाइड्रेशन, मिल्क—खाना पकाने में कौन‑सा कब बेहतर?गर्मी, डिहाइड्रेशन, वजन नियंत्रण- नारियल पानीरिच स्वाद, ऊर्जा, कुकिंग- कोकोनट मिल्क निष्कर्षनारियल पानी और कोकोनट मिल्क दोनों उपयोगी हैं, लेकिन एक‑दूसरे के विकल्प नहीं. जरूरत, सेहत और मात्रा का संतुलन रखें. रोज़ाना हाइड्रेशन के लिए नारियल पानी चुनें, और कुकिंग,ऊर्जा के लिए कोकोनट मिल्क को समझदारी से इस्तेमाल करें.

धुरंधर को प्रोपेगेंडा बताने वाले पर भड़कीं कांग्रेस प्रवक्ता:यूजर से शमा मोहम्मद बोलीं- फिल्म में मुसलमानों को गलत नहीं दिखाया; पाकिस्तान की नागरिकता ले सकते हो

धुरंधर को प्रोपेगेंडा बताने वाले पर भड़कीं कांग्रेस प्रवक्ता:यूजर से शमा मोहम्मद बोलीं- फिल्म में मुसलमानों को गलत नहीं दिखाया; पाकिस्तान की नागरिकता ले सकते हो

कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर फिल्म धुरंधर की तारीफ करते हुए एक पोस्ट की। साथ ही एक यूजर को जवाब देते हुए कहा कि फिल्म में मुसलमानों को नहीं, बल्कि पाकिस्तानियों को नेगेटिव तरीके से दिखाया गया है। दरअसल, शमा मोहम्मद ने ऑफिशियल X अकाउंट पर लिखा कि उन्होंने हाल ही में फिल्म धुरंधर देखी और उन्हें इसका डायरेक्शन, स्क्रिप्ट और एक्टिंग काफी पसंद आई। उन्होंने एक्टर रणवीर सिंह की एक्टिंग की तारीफ की और डायरेक्टर आदित्य धर की सराहना करते हुए कहा कि फिल्म में पुराने हिंदी गानों को सीन्स से जोड़ने का तरीका शानदार था। यूजर ने फिल्म को बताया प्रोपेगेंडा मूवी शमा की पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने कहा, “तुम यह कैसे पोस्ट कर सकती हो? इस प्रोपेगेंडा फिल्म में मुसलमानों को गलत तरीके से दिखाया गया है। तुम्हें शर्म आनी चाहिए।” इस पर शमा मोहम्मद ने जवाब देते हुए कहा, “इस फिल्म में मुसलमानों को गलत नहीं दिखाया गया, बल्कि पाकिस्तानियों को गलत दिखाया गया है। दोनों को एक जैसा बताना गलत है। तुम्हारे जैसे लोग भारत में मुसलमानों की इमेज खराब करते हैं। अगर तुम्हें भारत से इतनी दिक्कत है, तो तुम पाकिस्तान की नागरिकता ले सकते हो।” धुरंधर ने 1,307 करोड़ रुपए कमाए थे धुरंधर 5 दिसंबर 2025 को ग्लोबली रिलीज हुई थी। फिल्म में रणवीर सिंह के साथ संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर माधवन, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन नजर आए थे। फिल्म आदित्य धर ने डायरेक्ट की थी। सैकनिल्क के अनुसार, धुरंधर ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और दुनियाभर में करीब 1,307 करोड़ रुपए कमाए। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 1,005.85 करोड़ रुपए रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग 840 करोड़ रुपए हुआ। विदेशी बाजारों में भी फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब 299.5 करोड़ रुपए कमाए। अमेरिका और कनाडा में 193.06 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर बाहुबली 2 का रिकॉर्ड भी तोड़ा। दूसरा पार्ट 19 मार्च को रिलीज हुआ था धुरंधर का दूसरा पार्ट ग्लोबली 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुआ था। फिल्म की अब तक की कुल दुनिया भर में कमाई 1,792 करोड़ रुपए हो चुकी है। भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 1,141 करोड़ रुपए और कुल ग्रॉस कलेक्शन 1,365 करोड़ रुपए तक हो गया है। फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अब तक 426 करोड़ रुपए की कमाई की है।

धुरंधर को प्रोपेगेंडा बताने वाले पर भड़कीं कांग्रेस प्रवक्ता:यूजर से शमा मोहम्मद बोलीं- फिल्म में मुसलमानों को गलत नहीं दिखाया; पाकिस्तान की नागरिकता ले सकते हो

धुरंधर को प्रोपेगेंडा बताने वाले पर भड़कीं कांग्रेस प्रवक्ता:यूजर से शमा मोहम्मद बोलीं- फिल्म में मुसलमानों को गलत नहीं दिखाया; पाकिस्तान की नागरिकता ले सकते हो

कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर फिल्म धुरंधर की तारीफ करते हुए एक पोस्ट की। साथ ही एक यूजर को जवाब देते हुए कहा कि फिल्म में मुसलमानों को नहीं, बल्कि पाकिस्तानियों को नेगेटिव तरीके से दिखाया गया है। दरअसल, शमा मोहम्मद ने ऑफिशियल X अकाउंट पर लिखा कि उन्होंने हाल ही में फिल्म धुरंधर देखी और उन्हें इसका डायरेक्शन, स्क्रिप्ट और एक्टिंग काफी पसंद आई। उन्होंने एक्टर रणवीर सिंह की एक्टिंग की तारीफ की और डायरेक्टर आदित्य धर की सराहना करते हुए कहा कि फिल्म में पुराने हिंदी गानों को सीन्स से जोड़ने का तरीका शानदार था। यूजर ने फिल्म को बताया प्रोपेगेंडा मूवी शमा की पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने कहा, “तुम यह कैसे पोस्ट कर सकती हो? इस प्रोपेगेंडा फिल्म में मुसलमानों को गलत तरीके से दिखाया गया है। तुम्हें शर्म आनी चाहिए।” इस पर शमा मोहम्मद ने जवाब देते हुए कहा, “इस फिल्म में मुसलमानों को गलत नहीं दिखाया गया, बल्कि पाकिस्तानियों को गलत दिखाया गया है। दोनों को एक जैसा बताना गलत है। तुम्हारे जैसे लोग भारत में मुसलमानों की इमेज खराब करते हैं। अगर तुम्हें भारत से इतनी दिक्कत है, तो तुम पाकिस्तान की नागरिकता ले सकते हो।” धुरंधर ने 1,307 करोड़ रुपए कमाए थे धुरंधर 5 दिसंबर 2025 को ग्लोबली रिलीज हुई थी। फिल्म में रणवीर सिंह के साथ संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर माधवन, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन नजर आए थे। फिल्म आदित्य धर ने डायरेक्ट की थी। सैकनिल्क के अनुसार, धुरंधर ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और दुनियाभर में करीब 1,307 करोड़ रुपए कमाए। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 1,005.85 करोड़ रुपए रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग 840 करोड़ रुपए हुआ। विदेशी बाजारों में भी फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब 299.5 करोड़ रुपए कमाए। अमेरिका और कनाडा में 193.06 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर बाहुबली 2 का रिकॉर्ड भी तोड़ा। दूसरा पार्ट 19 मार्च को रिलीज हुआ था धुरंधर का दूसरा पार्ट ग्लोबली 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुआ था। फिल्म की अब तक की कुल दुनिया भर में कमाई 1,792 करोड़ रुपए हो चुकी है। भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 1,141 करोड़ रुपए और कुल ग्रॉस कलेक्शन 1,365 करोड़ रुपए तक हो गया है। फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अब तक 426 करोड़ रुपए की कमाई की है।

अल्लू अर्जुन की पत्नी पीड़ित परिवार से मिलीं:पुष्पा 2 के प्रीमियर में भगदड़ में घायल बच्चे के इलाज और पढ़ाई में मदद का भरोसा दिया

अल्लू अर्जुन की पत्नी पीड़ित परिवार से मिलीं:पुष्पा 2 के प्रीमियर में भगदड़ में घायल बच्चे के इलाज और पढ़ाई में मदद का भरोसा दिया

फिल्म पुष्पा 2 के प्रीमियर के दौरान हुई भगदड़ में घायल हुए बच्चे के परिवार से हाल ही में अल्लू अर्जुन के पिता और पत्नी ने मुलाकात की। अल्लू अरविंद और स्नेहा रेड्डी घायल बच्चे श्रीतेज के घर पहुंचे। अल्लू अरविंद और स्नेहा ने श्रीतेज की हेल्थ को लेकर जानकारी ली, परिवार के साथ समय बिताया और इलाज के दौरान हर संभव मदद जारी रखने का भरोसा दिया। मुलाकात के दौरान अल्लू अरविंद ने श्रीतेज की छोटी बहन की पढ़ाई का खर्च उठाने का भी वादा किया। अल्लू परिवार और पुष्पा 2 से जुड़ा प्रोडक्शन बैनर हादसे के बाद से ही श्रीतेज के इलाज का खर्च उठा रहा है। रिहैबिलिटेशन और लंबे इलाज के दौरान यह सहायता अब भी जारी है। अल्लू अर्जुन और फिल्म की टीम ने 2 करोड़ रुपए की मदद की प्रोड्यूसर दिल राजू ने बताया था कि परिवार की मदद के लिए ₹2 करोड़ जमा किए गए थे। अल्लू अर्जुन ने ₹1 करोड़ दिए, जबकि डायरेक्टर सुकुमार और फिल्म के प्रोड्यूसर्स में से हर एक ने ₹50 लाख दिए थे। भगदड़ में मां की मौत, बेटा घायल 4 दिसंबर 2024 को हैदराबाद के संध्या थिएटर में फिल्म पुष्पा 2 के प्रीमियर के दौरान 9 साल के श्रीतेज गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनकी मां रेवती की मौत हो गई थी। श्रीतेज को गंभीर हालत में अस्पताल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में भर्ती कराया गया था। लंबे समय तक वह बेहोश रहे और बाद में उन्हें सांस लेने में दिक्कत और गंभीर न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें हुईं, जिसके कारण कई हफ्तों तक वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। करीब पांच महीने तक आईसीयू में रहने के बाद अप्रैल 2025 में श्रीतेज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद उन्हें आगे के न्यूरोलॉजिकल इलाज के लिए रामगोपालपेट के एक रिहैबिलिटेशन सेंटर में शिफ्ट किया गया। इससे पहले 2025 में उनके पिता मोगडमपल्ली भास्कर ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में कहा था, ‘श्रीतेज की हेल्थ में अभी बहुत कम सुधार हुआ है। वह हमें पहचानने में भी दिक्कत महसूस करते हैं। ज्यादातर समय वह बिना किसी भाव के देखते रहते हैं। फिलहाल उनकी स्पीच और स्वैलोइंग थेरेपी चल रही है। हमें उनकी रिकवरी की उम्मीद है।’

सुप्रीम कोर्ट बोला- मंत्री शाह को ऐसे कमेंट्स की आदत:कर्नल सोफिया मामले में एमपी सरकार को फटकार, कहा- बहुत हुआ, आदेश का पालन करें

सुप्रीम कोर्ट बोला- मंत्री शाह को ऐसे कमेंट्स की आदत:कर्नल सोफिया मामले में एमपी सरकार को फटकार, कहा- बहुत हुआ, आदेश का पालन करें

सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अभियोजन स्वीकृति देने में हो रही देरी पर राज्य सरकार को फटकार लगाई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कड़े शब्दों में कहा- “Enough is enough (बस बहुत हुआ), अब हमारे आदेश का पालन कीजिए।” कोर्ट ने कहा- यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था सुनवाई के दौरान जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंत्री का बचाव करते हुए कहा कि शायद उनके बयान को गलत समझा गया और वे महिला अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे तो सीजेआई सूर्यकांत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा- यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। एक राजनेता के तौर पर उन्हें अच्छी तरह पता है कि किसी महिला अधिकारी की प्रशंसा कैसे की जाती है। कोर्ट ने SIT की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि मंत्री को इस तरह के कमेंट करने की आदत है। इंदौर के पास रायकुंडा गांव में दिया था विवाद बयान यह विवाद पिछले साल भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ की गई क्रॉस-बॉर्डर सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू हुआ था। कर्नल सोफिया कुरैशी ने इस ऑपरेशन की मीडिया ब्रीफिंग की थी। इसके बाद महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने कहा था, “जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा किया, हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी ही एक बहन को भेजा।” इस बयान को कर्नल कुरैशी के धर्म से जोड़कर देखा गया, जिसकी हर तरफ निंदा हुई। जज ने कहा था- अदालत के आदेश को लागू कराने जरूरत पड़ी तो नर्क भी एक कर दूंगा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। उन्होंने यहां तक कहा था- “अदालत के आदेश को लागू कराने के लिए जरूरत पड़ी तो मैं नर्क भी एक कर दूंगा।” एसआईटी ने सरकार से केस चलाने की परमिशन मांगी, दो हफ्ते से लंबित सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर मंत्री के खिलाफ केस चलाने (अभियोजन) के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी है, जो पिछले दो हफ्तों से लंबित है। मंत्री शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 196 (1) (b) और 197(1)(c) के तहत मामला दर्ज है, जो राष्ट्रीय संप्रभुता को खतरे में डालने और समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाने से संबंधित हैं। अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह परिस्थितियों की समग्रता को देखते हुए जल्द निर्णय ले। कोर्ट ने अब इस मामले की सुनवाई 4 सप्ताह बाद तय की है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री को गिरफ्तारी से सुरक्षा दे रखी है, लेकिन एफआईआर रद्द करने या माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। ……………………………. यह खबर भी पढ़ें MP के मंत्री विजय शाह बोले- जिन्होंने बहनों का सिंदूर उजाड़ा, उन्हीं की बहन को भेजकर ऐसी-तैसी कराई मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह ने भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने कहा- जिन लोगों ने हमारी बेटियों का सिंदूर उजाड़ा था, मोदी जी ने उन्हीं की बहन भेजकर उनकी ऐसी की तैसी करा दी। पढ़ें पूरी खबर

सिर्फ पेट के लिए नहीं, कैंसर से लड़ने में भी कारगर हो सकता है बेल! रिसर्च में बड़ा खुलासा

सिर्फ पेट के लिए नहीं, कैंसर से लड़ने में भी कारगर हो सकता है बेल! रिसर्च में बड़ा खुलासा

Last Updated:May 08, 2026, 13:59 IST पटना के महावीर कैंसर संस्थान के वैज्ञानिकों ने बेल के गूदे को लेकर ऐसा दावा किया है, जिसने मेडिकल जगत का ध्यान खींच लिया है. रिसर्च में पाया गया कि बेल के पल्प में मौजूद कुछ तत्व ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने में मददगार हो सकते हैं. चूहों पर हुए परीक्षण में ट्यूमर सिकुड़ने के पॉजिटिव रिजल्ट भी सामने आए हैं. पटना. देश में स्तन कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. बिहार भी इससे अछूता नहीं है. यह गंभीर बीमारी अब केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुरुषों को भी अपनी चपेट में ले रही है. इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए शोध में जुटे हुए हैं, ताकि सटीक इलाज खोजा जा सके. इसी दिशा में पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक अहम खोज की है. शोध के दौरान गर्मियों में सुपर ड्रिंक माने जाने वाले बेल के गूदे में ऐसे तत्व पाए गए हैं, जो स्तन कैंसर को रोकने में सहायक हो सकते हैं. चूहों पर इसका परीक्षण भी किया गया. इससे पॉजिटिव रिजल्ट सामने आए हैं. इस महत्वपूर्ण शोध में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार की प्रमुख भूमिका रही है. वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उनके शोध में यह सामने आया है कि बेल के पल्प में ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो कैंसररोधी प्रभाव रखते हैं. इस दावे की पुष्टि के लिए टीम ने चूहों पर प्रयोग किया. रिसर्च के दौरान चूहों को एक विशेष केमिकल दिया गया, जिससे करीब छह महीने में उनके स्तन में ट्यूमर विकसित हो गया. Add News18 as Preferred Source on Google इसके बाद चूहों को मिश्रित मात्रा में बेल का पल्प दिया गया. कुछ समय बाद यह देखा गया कि ट्यूमर का आकार धीरे-धीरे सिकुड़ने लगा और कुछ दिनों बाद पूरी तरह समाप्त हो गया. इसके बाद चूहे पूरी तरह स्वस्थ हो गए. इस शोध के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि बेल में ऐसे तत्व मौजूद हो सकते हैं, जो कैंसर के इलाज में सहायक साबित हो सकते हैं. हालांकि, इस पर अभी और विस्तृत शोध और मानव परीक्षण की आवश्यकता है. उन्होंने आगे बताया कि अब उनकी टीम बेल के पल्प में मौजूद मॉलिक्यूल को अलग यानी आइसोलेट कर दोबारा चूहों पर परीक्षण करेगी. अगर इस चरण में भी पॉजिटिव परिणाम मिलते हैं, तो शोध को पेटेंट कराया जाएगा और प्रकाशित किया जाएगा. इसके बाद अगला चरण मानवों पर क्लीनिकल ट्रायल का होगा, ताकि इसके प्रभाव की विस्तृत जांच की जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे शोध में करीब तीन से चार साल का समय लगा है और प्रक्रिया अभी भी जारी है. इस महत्वपूर्ण अध्ययन को इंग्लैंड की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर जर्नल में भी प्रकाशित किया गया है. उन्होंने जानकारी दी कि शोध के अनुसार बेल के गूदे में कई प्रकार के फाइटोकेमिकल यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें कैरोटेनॉइड, फिनोलिक यौगिक, टैनिन, एल्कलॉइड, टरपेनॉइड, कूमरिन, स्टेरॉयड सैपोनिन, इनुलिन, कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स और लिग्निन शामिल हैं. अध्ययन में पाया गया कि ये तत्व कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में सहायक हो सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में कैंसर की दवाएं काफी महंगी हैं. कुछ दवाएं हजारों रुपये की होती हैं, जबकि कई की कीमत लाखों तक पहुंच जाती है. ऐसे में अगर इस शोध से प्रभावी मॉलिक्यूल विकसित हो जाता है, तो ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की लागत कम हो सकती है और मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

टाटा ट्रस्ट्स की अहम बैठक 16 मई तक टली:टाटा संस की लिस्टिंग पर फैसला होना था; बोर्ड में गवर्नेंस और हिस्सेदारी को लेकर मतभेद

टाटा ट्रस्ट्स की अहम बैठक 16 मई तक टली:टाटा संस की लिस्टिंग पर फैसला होना था; बोर्ड में गवर्नेंस और हिस्सेदारी को लेकर मतभेद

टाटा ट्रस्ट्स की आज 8 मई को होने वाली महत्वपूर्ण बोर्ड मीटिंग अब 16 मई को होगी। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक आंतरिक मतभेदों के चलते इस बैठक को टाला गया है। यह दूसरी बार है जब मीटिंग की तारीख बदली गई है। पहले यह मीटिंग 12 मई को होनी थी। बार-बार तारीखें बदलने से ट्रस्ट के भीतर चल रही चर्चाओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। ग्रुप के भविष्य और गवर्नेंस से जुड़े 4 अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी मीटिंग: अब टाटा संस की लिस्टिंग विवाद पर यह QA पढ़े.. 1. टाटा ग्रुप में विवाद की मुख्य वजह क्या है? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद की जड़ ‘टाटा संस’ का IPO है। टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह चाहते हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता आएगी। वहीं, नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को ‘क्लोजली हेल्ड’ यानी निजी कंपनी ही बनाए रखना चाहते हैं। 2. लिस्टिंग को लेकर RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से टाटा संस को एक ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ शैडो बैंक (NBFC) माना जाएगा। नियम यह है कि अगर किसी शैडो बैंक की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस इस दायरे में आती है। 3. क्या टाटा ग्रुप ने पहले भी लिस्टिंग से बचने की कोशिश की है? हां, यह पहली बार नहीं है। 2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ NBFC की श्रेणी में रखा था और तीन साल का समय दिया था। तब ग्रुप ने अपना कर्ज रीस्ट्रक्चर करके और खुद को ‘नॉन-सिस्टमैटिक’ बताकर लिस्टिंग टाल दी थी। लेकिन अब RBI ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं। 5. नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। नोएल टाटा को डर है कि लिस्टिंग होने से ग्रुप की कंपनियों पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो सकता है। वह चाहते हैं कि टाटा संस पर ट्रस्ट की पकड़ पहले जैसी ही मजबूत बनी रहे। फरवरी में ऐसी खबरें भी आई थीं कि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से इस बात की गारंटी मांगी थी कि कंपनी लिस्ट नहीं होगी। 6. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस पर क्या स्टैंड है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने की गारंटी मांगी, तो उन्होंने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि यह रेगुलेटरी मामला है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग भी टल गई थी। 7. क्या RBI टाटा ग्रुप को कोई खास छूट दे सकता है? इसकी संभावना बहुत कम है। RBI ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह टाटा ग्रुप के लिए नियमों में कोई अपवाद नहीं बनाएगा। रेगुलेटर का मानना है कि अगर टाटा को छूट दी गई, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही मांग करेंगी, जिससे बैंकिंग नियम कमजोर पड़ेंगे। नॉलेज पार्ट: क्या होता है नॉमिनी डायरेक्टर? जब कोई संस्था जैसे टाटा ट्रस्ट किसी दूसरी कंपनी जैसे टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी रखती है, तो वह अपने हितों की रक्षा के लिए उस कंपनी के बोर्ड में अपने प्रतिनिधि भेजती है। इन्हें ही ‘नॉमिनी डायरेक्टर’ कहा जाता है। इनका काम यह सुनिश्चित करना होता है कि कंपनी के फैसले मुख्य संस्था की विचारधारा के अनुरूप हों।

तमिल में विजय के साथ खेला जाएगा? अगर डीएमके-एआईएडीएमके साथ आए तो पलटवार करेंगे

तमिल में विजय के साथ खेला जाएगा? अगर डीएमके-एआईएडीएमके साथ आए तो पलटवार करेंगे

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद स्थिति ऐसी है कि कोई भी अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। विक्ट्री की टीवीके 108 मिनिस्ट्री के आकंड़े को अब तक कोई भी कलाकारी नहीं मिल पाई है। इसी बीच डीएमके और एआईएडीएमके के साथ आने की भी सुगबुगाहट तेज है। अगर ऐसा होता है तो तमिलनाडु में पूरा गेम ही पलट जाएगा। गवर्नर-जनरल विश्वनाथ अर्लेकर ने कथित तौर पर कहा कि इस खुलासे के बाद राजनीतिक आक्रोश और गहराई हो गई कि कोई भी पार्टी या गठबंधन जो आवश्यक संख्या में बल साबित कर सके, उसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। DMK-AIADMK के साथ क्या होगा? टीचर्स और एआईएडीएमके के गठबंधन को लेकर स्टॉक स्टॉक जा रहे हैं। डीएमके-अन्नाद्रमुक गठबंधन के अंतिम चरण में एआईएडीएमके बीजेपी के साथ गठबंधन टूट सकता है, क्योंकि लेफ्ट एंटरप्राइजेज के साथ गठबंधन संभव है। बता दें कि आईए आईएमके ने विधानसभा चुनाव बीजेपी के साथ सामूहिक मुकाबला किया था। एआईडीएमके को 47 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी को सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल हुई। छोटे की भूमिका अहम तमिलनाडु के क्रमिक राजनीतिक घटनाक्रम में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी (सीपीआई-एम), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) और विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन समर्थनों से ही यह तय होने की संभावना है कि अभिनेताओं से नेता बने विजय की तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) अगली सरकार बने सोयथ या टीचर्स और एआईए डॉक्युमेंट्री के सदस्य कोई वैकल्पिक वैकल्पिक संभावना में आएंगे। टीवीके को समर्थन देने पर सी सर्वे आज संभावित निर्णय टीचर्स के सहयोगी सी. क्रूज़ ने शुक्रवार (8 मई) को फैसला किया कि वह टीवीके को सरकार बनाने के लिए समर्थन देंगे या नहीं। पार्टी ने आज एक बैठक बुलाई है, जिसमें विजय पार्टी की ओर से अपील पर निर्णय लिया जाएगा। विक्ट्री की पार्टी टीवीके ने राज्य में ‘एक नया अनमोल’ सरकार बनाने का समर्थन मांगा है। बता दें कि विधानमंडल चुनाव में दो सीट पर तानाशाह हैं। एआईएडीएमके महासचिव का बड़ा बयान इसी बीच एआईएडीएमके के जनरल एडप्पाडी के। पलानीस्वामी ने दिया बड़ा बयान. उन्होंने अपने बैच से कहा है कि एआईए दस्तावेज़ ही अंतिम राज्य में अगली सरकार बनाएगी। पलानीस्वामी के दावे के बाद तमिलनाडु में नए राजनीतिक गणक बनने की घटनाएं तेज हो गईं। एआईएके पत्रिका ने पड़ोसी राज्य पुडुचेरी के एक पैलेस रिसॉर्ट में अपने बैच का अवलोकन किया है। पार्टी के दस्तावेज़ों के अनुसार, पलानीस्वामी ने गुरुवार देर रात रिज़ॉर्ट में पार्टी विश्लेषण से मुलाकात की और तमिलनाडु में तेजी से बदलती राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के दौरान कथित तौर पर उन्हें एआईए के प्रमुख दल का नेता चुना गया। बिश्नोई ने अपने नेतृत्व का समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए गए पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही पलानीस्वामी ने कहा है कि तमिल में सरकार एआईए डॉक्यूमेंट्री ही बनाएगी। ये भी पढ़ें- तमिलनाडु: विजय की पार्टी टीवीके के सभी 108 विधायक छोड़ देंगे, अगर डीएमके या एआईएडीएमके ने उठाया ये कदम स्कूल के-मेशिकल स्टूडियो का क्या फॉर्मूला तमिल में सरकार बनाने के लिए 118 यात्रियों को जाना चाहिए। कांग्रेस एलायंस से बाहर होने के बाद टीचर्स एलायंस के कुल नामांकन की संख्या 68 है। इसमें टीचर्स के 59, वीके के 2, सी बिजनेस के 2, सी बिजनेस (एम) के दो, मुस्लिम लीग के दो और टीचर्स के एक लीडर शामिल हैं। वहीं, फ़्रैंचाइज़ी एलायंस ने 53 रेस्तरां बनाए हैं। अकेले एआईडीएमके के खाते में 47, बीजेपी के 4, एएमएमके और बीजेपी ने एक-एक सीट पर कब्जा कर लिया है. दोनों गठबंधन अगर साथ आते हैं तो यह पात्र 121 प्रकट होता है, बीजेपी इससे बाहर भी निकलती है तो यह 120 होता है, जो बहुमत के आंकड़ों से 2 बहुमत है। डीएमके गठबंधनडीएमके – 59वीसीके – 2सीपीआई-2सीपीआई (एम) – 2आईयूएमएल – 2डीएमडीके – 1 कुल – 68 एडीएमके गठबंधन एडीएमके – 47पीएमके-4बीजेपी – 1एएमएमके – 1 कुल – 53 डीएमके + एडीएमके = 121 ‘हमारी पीठ पर छुरा कौन सा था?’ तमिल में विजय की टीवीके के समर्थन को लेकर पीएलआई डीएमके-कांग्रेस!” href=’https://www.abplive.com/news/india/dmk-congress-rift-tr-balu-manickam-tagore-mk-stalin-and-rahul-gandhhi-tamil-nadu-politics-news-3126824′ target=”_self”>‘हमारी पीठ पर छुरा कौन सा था?’ तमिल में विजय की टीवीके के समर्थन को लेकर पीएलआई डीएमके-कांग्रेस!

मणिशंकर अय्यर ने टीवीके का समर्थन करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की, राहुल गांधी से इंडिया ब्लॉक नेता के रूप में पद छोड़ने को कहा | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:08 मई, 2026, 13:00 IST कांग्रेस की हालिया चुनावी असफलताओं पर प्रकाश डालते हुए मणिशंकर अय्यर ने कहा कि अन्य नेता इंडिया ब्लॉक को मजबूत करने की दिशा में अधिक समय और ऊर्जा समर्पित करने में सक्षम हो सकते हैं। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने शुक्रवार को तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की टीवीके को समर्थन देने के फैसले पर सबसे पुरानी पार्टी पर तीखा हमला बोला और राहुल गांधी के इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व पर भी सवाल उठाया। समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए, अनुभवी कांग्रेस नेता ने कहा कि राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन के नेता के रूप में पद छोड़ देना चाहिए और ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, एमके स्टालिन या तेजस्वी यादव जैसे क्षेत्रीय नेताओं को ब्लॉक की कमान संभालने की अनुमति देनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी की हालिया चुनावी असफलताओं पर प्रकाश डालते हुए, अय्यर ने कहा कि ये नेता इंडिया ब्लॉक को मजबूत करने के लिए अधिक समय और ऊर्जा समर्पित करने में सक्षम हो सकते हैं। अय्यर ने कहा, ”हम इतने अक्षम थे कि हमने ममता बनर्जी को दूर रखा और इसके कारण कांग्रेस कमजोर हो गई।” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को नेतृत्व की स्थिति पर बने रहने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अय्यर ने तमिलनाडु में टीवीके के साथ गठबंधन करने के अपनी पार्टी के फैसले को “भयानक” बताया और कहा कि पार्टी में “कम राजनीतिक अवसरवादिता” की बू आ रही है और उन्होंने कहा कि अगर यह कदम द्रविड़ राज्य में “सांप्रदायिक भाजपा” के पिछले दरवाजे से प्रवेश की सुविधा प्रदान करता है तो यह राजनीतिक फुटबॉल के इतिहास में सबसे खराब लक्ष्य साबित होगा। अय्यर ने आगे कहा कि कांग्रेस ने डीएमके के साथ चुनाव लड़ने के तुरंत बाद अपने लंबे समय के सहयोगी को छोड़ दिया। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस ने मुख्य रूप से द्रमुक के साथ गठबंधन के कारण अपनी पांच विधानसभा सीटें जीतीं और पार्टी पर द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के पक्ष में जनादेश की अनदेखी करने का आरोप लगाया। अय्यर ने टीवीके की ओर कांग्रेस के अचानक बदलाव के पीछे की नैतिकता और राजनीतिक बुद्धिमत्ता पर भी सवाल उठाया, खासकर विजय की पार्टी द्वारा कई निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ सीधे चुनाव लड़ने के बाद। अय्यर ने पीटीआई-भाषा से कहा, ”यह महात्मा गांधी की 1925 की कहावत ‘स्वराज को नैतिकता पर आधारित सरकार होनी चाहिए’ का अक्षम्य उल्लंघन है।” हिंदू तमिल में प्रकाशित एक लेख में, अनुभवी कांग्रेस नेता ने पूछा कि तमिलनाडु में कांग्रेस के साझेदार बदलने में क्या चाणक्य की जीत हुई है या महात्मा गांधी की। “कांग्रेस ने पांच सीटें जीतीं, अपने दम पर नहीं, बल्कि पूरी तरह से द्रमुक के साथ अपनी दशकों पुरानी कनिष्ठ साझेदारी के बल पर। वास्तव में, मेरा पूर्व संसदीय क्षेत्र मयिलादुतुरई द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का इतना मजबूत गढ़ साबित हुआ, कि इसके छह विधानसभा क्षेत्रों में से पांच ने विजय के टीवीके के खिलाफ गठबंधन के सदस्यों की एक आकाशगंगा के पक्ष में मतदान किया, जिसमें दो सीटें द्रमुक को और एक-एक गठबंधन सहयोगी डीएमडीके, आईयूएमएल और कांग्रेस को मिलीं,” अय्यर ने अपने तमिल लेख में कहा। उन्होंने बताया कि इस प्रकार, जनादेश स्पष्ट रूप से द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के पक्ष में और नवागंतुक के खिलाफ गया। कांग्रेस के दिग्गज नेता ने चेतावनी दी कि “नए और अनिश्चित साथी” के लिए द्रमुक जैसे भरोसेमंद सहयोगी को छोड़ना लंबे समय में पार्टी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है। कांग्रेस, जो लंबे समय से द्रमुक की सहयोगी रही है, ने इस सप्ताह की शुरुआत में तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए विजय की टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की थी। इस कदम से कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन समाप्त हो गया और राज्य में एक बड़े राजनीतिक पुनर्गठन की शुरुआत हुई। द्रमुक ने कांग्रेस पर पाला बदलकर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया है। 23 अप्रैल के चुनाव के बाद 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के साथ समर्थन दिया है, लेकिन टीवीके अभी भी अपने दम पर सरकार बनाने के लिए आवश्यक 118 सीटों के बहुमत के आंकड़े से पीछे है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया मणिशंकर अय्यर ने टीवीके का समर्थन करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की, राहुल गांधी से इंडिया ब्लॉक नेता के रूप में पद छोड़ने को कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) मणिशंकर अय्यर कांग्रेस की आलोचना(टी)मणिशंकर अय्यर(टी)राहुल गांधी नेतृत्व(टी)इंडिया ब्लॉक पॉलिटिक्स(टी)कांग्रेस डीएमके गठबंधन(टी)विजय टीवीके तमिलनाडु(टी)तमिलनाडु राजनीतिक पुनर्गठन(टी)डीएमके कांग्रेस टूट

कोलकाता की तंग गलियों में हॉकी का मैदान बना उम्मीद:दो भाइयों की एकेडमी, खेल के सहारे गरीब बच्चों की जिंदगी को नई दिशा

कोलकाता की तंग गलियों में हॉकी का मैदान बना उम्मीद:दो भाइयों की एकेडमी, खेल के सहारे गरीब बच्चों की जिंदगी को नई दिशा

कोलकाता की उमस भरी सुबह, घड़ी में सात बज रहे हैं। सियालदह स्टेशन के बाहर रोज की तरह भीड़ भाग रही है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव की वजह से दीवारों से लेकर बिजली के खंभों तक नेताओं के चेहरे रंगे हुए हैं, लेकिन डॉ. सुरेश सरकार रोड से तीसरी गली में मुड़ते ही माहौल अचानक बदल जाता है। यहां सिर्फ हॉकी स्टिक की ‘टक-टक’ सुनाई देती है। छोटे-छोटे कदमों की ताल, बच्चों की दौड़ और एक कोच की सख्त, लेकिन उम्मीद से भरी आवाज। यह है एंटाली हॉकी एकेडमी। कोलकाता के सबसे पुराने हॉकी सेंटर में से एक। बाहर से देखने पर यह जगह किसी छोटे फुटबॉल मैदान से भी छोटी लगती है] लेकिन इस छोटे से मैदान ने न जाने कितने बच्चों के सपनों को जगह दी है। यह एकेडमी इलाके के बच्चों के लिए उम्मीद का ठिकाना है। यहां आने वाले ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से हैं। किसी के पिता रिक्शा चलाते हैं, तो किसी की मां सड़क किनारे खाना बेचती हैं। एंटाली की तंग गलियों में जहां कई बार हालात बच्चों का भविष्य निगल लेते हैं, वहां यह मैदान उन्हें हाथ में हॉकी स्टिक देकर लड़ना सिखाता है। यहां के कई बच्चे आगे चलकर कलकत्ता हॉकी लीग के अलग-अलग डिवीजन क्लबों तक पहुंचे हैं। एकेडमी बच्चों को सिर्फ खेल नहीं सिखाती, बल्कि उन्हें अनुशासन, दोस्ती और संघर्ष का मतलब भी समझाती है। पैसों की कमी हमेशा रहती है। बच्चों को बेसिक उपकरण देना भी मुश्किल हो जाता है। फिर भी यहां आने वाले बच्चों के चेहरे पर शिकायत नहीं दिखती। उनके लिए यह मैदान किसी मंदिर जैसा है। चौथी कक्षा में पढ़ने वाली एंजेला की मां पुतुल मंडल बताती हैं, ‘मेरी बेटी यहां पहले ड्रॉइंग प्रतियोगिता में आई थी। फिर उसने जिद पकड़ ली कि हॉकी सीखनी है।’ इसी तरह जुड़वां बहनें तापुर और तुपुर पांच साल से यहां अभ्यास कर रही हैं। अब वे 11 साल की हो चुकी हैं। उनके पिता सुदीप बैद्य कहते हैं, ‘आजकल बच्चों का खुले मैदान में खेलना बहुत कम हो गया है। यह जगह उनके लिए सुरक्षित ठिकाना बन गई है।’ बच्चों को गलत रास्ते से दूर रखने के लिए शुरू हुई थी एकेडमी एकेडमी के संयुक्त सचिव और कोच सुभीर कुमार पान कहते हैं, ‘हमारे लिए हॉकी सिर्फ खेल नहीं, जिंदगी है। इसी खेल ने हमें नौकरी दी, पहचान दी। अब हम इसे बच्चों को लौटाना चाहते हैं।’ सुभीर और उनके भाई प्रबीर दोनों राज्य स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं। उनके गुरु असीम गांगुली ने इस एकेडमी की शुरुआत इसलिए की थी, ताकि इलाके के बच्चों को गलत रास्तों से दूर रखा जा सके। उस छोटी सी गली में शायद देश का अगला बड़ा खिलाड़ी तैयार हो रहा हो। लेकिन, वहां सबसे बड़ी जीत यह है कि कुछ बच्चे सपने देखना सीख रहे हैं।